samacharsecretary.com

दिलजीत दोसांझ पर खालिस्तानी संगठन का निशाना, वजह बना अमिताभ बच्चन के पैर छूना

मुंबई  खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू के संगठन, सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) ने पंजाबी गायक-अभिनेता दिलजीत दोसांझ द्वारा बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के पैर छूने के विरोध में 1 नवंबर को ऑस्ट्रेलिया में उनके कॉन्सर्ट को बंद करने की धमकी दी है। समूह का आरोप है कि यह कृत्य 1984 के सिख विरोधी दंगा पीड़ितों की "स्मृति का अनादर" करता है। पन्नू ने एक बयान में कहा-  "अमिताभ बच्चन, जिनके शब्दों ने 1984 के नरसंहार को हवा दी, के पैर छूकर दिलजीत दोसांझ ने 1984 के सिख नरसंहार के हर पीड़ित, हर विधवा और हर अनाथ का अपमान किया है।" उन्होंने आगे कहा- "यह अज्ञानता नहीं, विश्वासघात है। जिन सिखों को ज़िंदा जला दिया गया, जिन महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ, जिन बच्चों को क़त्ल किया गया, उनकी राख अभी ठंडी भी नहीं हुई है। कोई भी विवेकशील सिख 1 नवंबर, स्मृति दिवस पर कोई भी प्रदर्शन या उत्सव नहीं मना सकता।" सप्ताहांत में 'कौन बनेगा करोड़पति 17' में अपनी उपस्थिति के दौरान, सेट पर पहुंचते ही दोसांझ ने दिग्गज अभिनेता के पैर छुए। बच्चन, जिन्होंने गायक-अभिनेता का परिचय "पंजाब दे पुत्तर (पंजाब का बेटा)" कहकर कराया, ने उन्हें गले लगाकर दर्शकों की तालियां बटोरीं। यह क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है और यूजर्स दोसांझ की इस हरकत की जमकर तारीफ कर रहे हैं। दोसांझ के कॉन्सर्ट को बंद करने की धमकी के अलावा, प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन ने जत्थेदार अकाल तख्त साहिब, ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज को पत्र लिखकर उनसे आग्रह किया है कि वे अभिनेता-गायक को तलब करें और 2010 के तख्त के उस आदेश के मद्देनजर अपने कृत्य पर सफाई दें, जिसमें नवंबर 1984 को "सिख नरसंहार माह" के रूप में मान्यता दी गई थी। एसएफजे ने सभी "सिख संस्थाओं, कलाकारों और दर्शकों से उन दंगों के प्रचार या लीपापोती से जुड़े किसी भी कार्यक्रम या सहयोग का बहिष्कार करने" का आह्वान किया है, जो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या के बाद हुए थे। इस बीच, दोसांझ जो इस समय अपने ऑरा टूर के लिए ऑस्ट्रेलिया में हैं, ने सिडनी में एक स्टेडियम शो के सभी टिकट बेचने वाले पहले भारतीय कलाकार बनकर इतिहास रच दिया। शो के सभी टिकट बिक गए, कुछ टिकट तो 800 डॉलर प्रति टिकट तक बिक गए और 30,000 प्रशंसक उपस्थित हुए।  

माहू के प्रकोप से बालोद जिले के खेत बर्बाद, किसान चिंतित

बालोद बालोद जिले के गुण्डरदेही विधानसभा क्षेत्र के किसान इन दिनों एक विकट आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। ग्राम परसाडीह में लगभग एक हजार एकड़ में बोई गई धान की फसल में से करीब 500 एकड़ फसल माहू नामक बीमारी के प्रकोप से पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। छोटे-बड़े सभी किसान इस अनपेक्षित आपदा से हताश हैं और अपनी तबाह हुई फसलों को देखकर फूट-फूट कर रो रहे हैं। किसानों की आंखों से आंसू ग्राम परसाडीह के किसान गोपाल साहू ने अपनी कर्ज और बर्बाद हुई फसल की व्यथा सुनाते हुए कहा कि वह छोटे किसान हैं और कर्ज लेकर खेती करते हैं। इस बार माहू बीमारी ने उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी कमाई का एकमात्र जरिया ही तबाह हो गया है। अपनी बर्बाद फसल के कारण वे सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं। एक अन्य किसान, सामंत साहू, जिन्होंने 25 एकड़ में खेती की थी, बताया कि उनकी केवल 10 एकड़ फसल ही सुरक्षित बची है, जबकि 15 एकड़ पूरी तरह से नष्ट हो गई है। उन्होंने अपनी फसलों पर लगभग ₹1,00,000 की दवाइयों का छिड़काव भी किया, लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ। माहू के प्रकोप से खेत अब पूरी तरह बंजर हो गए हैं और किसानों की उम्मीदें टूट चुकी हैं। इस विपदा से प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन के पास मुआवजे की मांग को लेकर आवेदन जमा किए हैं। किसानों की सरकार से काफी उम्मीदें हैं।

पंजाब में रियल एस्टेट को मिली रफ्तार, सरकार ने दी ‘स्टिल्ट-प्लस-4’ बिल्डिंग्स को हरी झंडी

चंडीगढ़  पंजाब सरकार ने शहरी क्षेत्रों में बनने वाले सभी नये आवासीय क्षेत्रों में स्टिल्ट-प्लस-4 मंजिलें बनाने की नीति को मंजूरी दे दी है। इस कदम से सरकार के लिए राज्य में अपार्टमेंट एक्ट लागू करने का रास्ता साफ हो जाएगा, जिससे लोग घरों में अलग-अलग फ्लोर खरीद सकेंगे। कैबिनेट द्वारा पंजाब एकीकृत भवन नियम, 2025 को मंजूरी दिए जाने के बाद, अब न्यूनतम 250 वर्ग गज के प्लॉट का मालिक स्टिल्ट-प्लस-चार मंजिलें बना सकता है। यह योजना केवल उन्हीं जगहों पर लागू होगी, जहां प्लॉट न्यूनतम 40 फीट चौड़ी सड़कों के किनारे स्थित हों। शुरुआत में सरकार ने इस योजना को सभी शहरी क्षेत्रों में लागू करने की योजना बनाई थी। हालांकि, हितधारकों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के बाद, मौजूदा नागरिक बुनियादी ढांचे पर अत्यधिक बोझ से बचने के लिए इस प्रावधान को शहर क्षेत्रों में नवनिर्मित लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों और सेक्टरों तक सीमित रखने का निर्णय लिया गया। इस फैसले से मोहाली, लुधियाना, जालंधर और अमृतसर जैसे शहरों में रियल एस्टेट को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। आवास मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने ट्रिब्यून को बताया कि पुराने और मौजूदा शहरी क्षेत्रों में, मालिक स्टिल्ट-प्लस-तीन मंजिलें बना सकते हैं, जबकि इमारत की अधिकतम ऊंचाई अब 11 मीटर के बजाय 13 मीटर तक की जा सकेगी। पड़ोसी राज्य हरियाणा द्वारा अपनाए गए नियमों के समान, नये नियमों के तहत नयी कॉलोनियों में स्टिल्ट-प्लस-चार मंजिल योजना के लिए ऊंचाई 15 मीटर से बढ़ाकर 21 मीटर कर दी गई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य प्रमुख शहरों में आवास के दबाव को कम करना है।   एफएआर भी बढ़ाया सरकार ने आवासीय प्लॉटों के लिए ग्राउंड कवरेज में वृद्धि की भी अनुमति दी है, साथ ही फ्लोर एरिया रेशो (एफएआर) में 10 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि की अनुमति दी है। उदाहरण के लिए, 500 वर्ग गज के प्लॉट का मालिक अब 55 प्रतिशत की सीमा की तुलना में 65 प्रतिशत तक जमीन को कवर कर सकता है। हालांकि, यह शुल्क के आधार पर होगा। एफएआर में प्रत्येक 0.25 प्रतिशत की वृद्धि के लिए, कलेक्टर दर के 5 प्रतिशत के बराबर अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करना होगा, जिसकी अधिकतम सीमा कलेक्टर दर के 25 प्रतिशत तक होगी।

सियासी हत्या का मामला: कटनी में BJP नेता की हत्या और आरोपियों का एनकाउंटर

कटनी   कटनी जिले के कैमोर में हिंदू संगठन और बीजेपी से जुड़े नेता नीलेश 'नीलू' रजक की गोली मारकर हत्या के बाद उपजा तनाव अब पुलिस की कड़ी कार्रवाई से शांत होता दिख रहा है. हत्या के दोनों आरोपी पुलिस एनकाउंटर में घायल हो गए हैं.एडिशनल एसपी संतोष डहरिया ने बताया कि हत्या के दोनों आरोपी अकरम खान और प्रिंस जोसफ को अलसुबह जिले के कजरवारा से पकड़ा गया. गिरफ्तारी के दौरान आरोपियों ने पुलिस पर फायर किया. पुलिस की जवाबी फायरिंग में 4 गोलियां चलीं और दोनों आरोपी घायल हो गए. दोनों घायलों को तत्काल इलाज के लिए जबलपुर रेफर कर दिया गया है.  'लव जिहाद' और छेड़छाड़ का विरोध बनी हत्या की वजह इस सनसनीखेज हत्याकांड के पीछे छेड़छाड़ और 'लव जिहाद' का विरोध मुख्य कारण बताया जा रहा है. एक महीने पहले कैमोर के DAV स्कूल में लड़की छेड़ने से मना करने पर अकरम और नीलेश में विवाद हुआ था. परिवार के अनुसार, तब कैमोर पुलिस ने उल्टा नीलेश पर मामला दर्ज कर दिया था और TI के सामने अकरम खान ने नीलेश को गोली मारने की धमकी दी थी. बिहार से लौटे संजय पाठक हत्या की जानकारी मिलने के बाद क्षेत्रीय विधायक संजय पाठक (जो बिहार चुनाव प्रचार में थे) विशेष विमान से विजयराघवगढ़ हॉस्पिटल पहुंचे. पाठक ने जिला कलेक्टर और एसपी से मांग की थी कि अपराधियों की गिरफ्तारी, अवैध गतिविधियों पर अंकुश और संरक्षण देने वालों पर कार्यवाही होने तक मृतक का पोस्टमार्टम और दाह संस्कार नहीं किया जाएगा.  संजय पाठक ने एक समुदाय विशेष के लिए कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा, "हम इस्लामिक राष्ट्र बनने नहीं देंगे." स्थानीय लोगों के आक्रोश और विधायक की मांग के बाद देर शाम पुलिस अधीक्षक ने कैमोर टीआई अरविंद चौबे और प्रधान आरक्षक प्रेम शंकर पटेल को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है. खबर लिखे जाने तक विजयराघवगढ़ हॉस्पिटल में सैकड़ों लोग जमा थे और कटनी-विजयराघवगढ़ मार्ग पर चक्का जाम जारी था. हालात को देखते हुए आईजी और डीआईजी भी मौके पर नजर बनाए हुए थे.

केके रेलमार्ग पर बाधा: पत्थर गिरने से रुकीं यात्री ट्रेनें, यात्रियों को भारी दिक्कतें

 जगदलपुर चक्रवात 'मोंथा' के प्रभाव के चलते भारी बारिश ने छत्तीसगढ़ के रेल यातायात को बुरी तरह प्रभावित किया है। मंगलवार शाम को केके रेल लाइन पर एक बड़ा पत्थर गिर जाने से यात्री ट्रेनों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। घटना की सूचना मिलते ही रेलवे कर्मचारियों की टीम हरकत में आई और पत्थर हटाने का कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया गया। जानकारी के मुताबिक, बारिश के कारण चिमड़ीपल्ली और बोर्रागुहालू स्टेशनों के बीच रेलवे ट्रैक पर एक विशाल पत्थर आ गिरा। रेलवे प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मजदूरों की एक टीम को मौके पर भेजा, जिन्होंने रात भर अथक प्रयास कर पत्थर को हटाने का कार्य पूरा किया। हालांकि, देर रात तक हुई मूसलाधार बारिश के कारण रेलवे ट्रैक पर मिट्टी भी जमा हो गई थी, जिसे हटाने का कार्य भी जारी रहा। इस कारण, केके रेल लाइन पर बुधवार को भी यात्री ट्रेनों का सामान्य आवागमन प्रभावित रहने की संभावना है।

साइबर सुरक्षा पर जोर: सीएम मोहन यादव ने रैली और मैराथन को किया उद्घाटन

भोपाल  मुख्यमंत्री ने साइबर जागरूकता रैली में भाग लिया. उन्होंने मैराथन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. डीजीपी कैलाश मकवाना समेत अन्य पुलिस अधिकारी भी इस कार्यक्रम में मौजूद थे. मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल पेमेंट में भारत ने दुनियाभर में अपनी पहचान बनाई है, लेकिन हमें साइबर अपराधों को भी रोकना है. डिजिटल लेन-देन को छोड़ने का विकल्प नहीं है, इसलिए प्रधानमंत्री के आह्वान पर अक्टूबर माह में साइबर जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया. मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि मां नर्मदा नदी में मगरमच्छ छोड़े जाएंगे. कल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस कार्य को अंजाम देंगे. मुख्यमंत्री ने बताया कि मां नर्मदा का वाहन मगरमच्छ है, और इससे पहले उन्होंने चंबल नदी में घड़ियाल छोड़े हैं. नर्मदा नदी में मगरमच्छों की संख्या बढ़ाने के लिए ये कदम उठाया जा रहा है. मध्य प्रदेश में सभी जीवों के संरक्षण का अभियान चल रहा है. बिहार दौरे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि एनडीए को बिहार में प्रचंड बहुमत मिलेगा. भाजपा के पक्ष में सभी मिलकर बिहार में प्रचार कर रहे हैं, जिससे एक बार फिर एनडीए की सरकार बनेगी. बिहार का मध्य प्रदेश से 2200 साल पुराना रिश्ता है. एनडीए की सरकार बनने के बाद बिहार ने चहुमुंखी प्रगति की है. इस दौरान प्रदेशभर में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यशालाएँ, व्याख्यान, स्कूल-कॉलेजों में सत्र और सोशल मीडिया अभियान चलाए गए। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अक्टूबर माह को “राष्ट्रीय साइबर जागरूकता माह” के रूप में मनाया जा रहा है। इस दौरान प्रदेशभर में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यशालाएँ, व्याख्यान, स्कूल-कॉलेजों में सत्र और सोशल मीडिया अभियान चलाए गए। इस अभियान के समापन पर भोपाल में “साइबर जागरूकता रन– 2025” का आयोजन किया जा रहा है। यह रन कल सुबह 8:00 बजे प्लेटिनम प्लाज़ा, अटल पथ से शुरू होगी और एपेक्स बैंक तिराहा होते हुए टी.टी. नगर स्टेडियम पर समाप्त होगी। सुरक्षित रहें – सतर्क रहें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस कार्यक्रम का फ्लैग ऑफ करेंगे। रन में पुलिस अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी, स्वयंसेवी संस्थाएँ और आम नागरिक शामिल होंगे। प्रतिभागियों के लिए ड्रेस कोड सफेद टी-शर्ट और लोअर निर्धारित है। रन के दौरान “सुरक्षित रहें – सतर्क रहें – साइबर अपराध से बचें” जैसे संदेशों वाले बैनर और पोस्टर प्रदर्शित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य नागरिकों को फिशिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी और डेटा चोरी जैसे साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूक करना है। साइबर-सुरक्षित समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा मध्यप्रदेश पुलिस का मानना है कि साइबर अपराध से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता है। यह आयोजन नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करेगा और साइबर-सुरक्षित समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुंबई की राजनीति गरमाई: BMC चुनाव से पहले शरद पवार ने फडणवीस सरकार को चुनौती दी

मुंबई   महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आने वाला है. दरअसल, स्थानीय निकाय और बीएमसी चुनाव से पहले राज्य की देवेंद्र फडणवीस ने सीधे तौर पर दिग्गज वयोवृद्ध नेता शरद पवार से सीधे टकरा गई है. दरअसल, राज्य सरकार ने शरद पवार की अध्यक्षता वाले वीएसआई के फंड की ऑडिट का आदेश दिया है. वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट (वीएसआई) पुणे में स्थित है. विपक्षी दल ने इसे बीजेपी की राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई करार दिया है. कैबिनेट ने 30 सितंबर को इस फैसले को मंजूरी दी थी. शुगर कमिश्नर संजय कोल्टे ने कहा कि कैबिनेट मीटिंग के मिनट्स मिलने के बाद हम कमेटी गठित करने की प्रक्रिया में हैं, जो वीएसआई के रिकॉर्ड और फंड उपयोग की जांच करेगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्थान के खिलाफ कोई शिकायत नहीं है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वीएसआई में जांच शुरू होने की बात से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि शुगर कमिश्नर ने केवल संस्थान द्वारा कुचले गए गन्ने के प्रति टन एक रुपये के उपयोग की जानकारी मांगी है. कोई जांच शुरू नहीं हुई. अगर वीएसआई के खिलाफ कोई गंभीर शिकायत मिलती है, तो हम जांच कर सकते हैं. फिलहाल किसी की कोई शिकायत नहीं है. चीनी उद्योग के लिए अनुसंधान का काम करती है संस्था 1975 में सहकारी कारखानों के गन्ना उत्पादकों द्वारा स्थापित वीएसआई चीनी उद्योग के लिए अनुसंधान एवं विकास संस्थान है. यह सहकारी मिलों से कुचले गए गन्ने के प्रति टन एक रुपये प्राप्त करता है, जिससे अपनी गतिविधियां चलाता है. शरद पवार के अलावा उनके भतीजे एवं उपमुख्यमंत्री अजित पवार, पूर्व मंत्री दिलीप पाटील, जयंत पाटील और कांग्रेस नेता बालासाहेब थोरात इसके ट्रस्टी हैं. एन51सीपी-एसपी नेताओं ने इसे विपक्षी गढ़ों को निशाना बनाने का हिस्सा बताया. पार्टी के राज्य महासचिव रोहित पवार ने कहा कि मुख्यमंत्री का जांच का फैसला सामान्य प्रक्रिया नहीं है. ठाणे के बाद अब बारामती को निशाना बनाया जा रहा है. जब विपक्ष भ्रष्टाचार के सबूत देता है, तो सरकार चुप रहती है, लेकिन वीएसआई जैसी प्रतिष्ठित संस्था को टारगेट किया जा रहा है. यह बीजेपी की राजनीति के निम्न स्तर को दर्शाता है. पुणे जिले का बारामती पवार परिवार का राजनीतिक गढ़ है, जबकि ठाणे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना का घरेलू मैदान है. एनसीपी-एसपी का आरोप है कि सत्ता में आने के बाद बीजेपी और उसके सहयोगी विपक्षी नेताओं की संस्थाओं को कमजोर करने की रणनीति अपनाते हैं. वीएसआई चीनी उद्योग में तकनीकी नवाचार, प्रशिक्षण और अनुसंधान के लिए जाना जाता है. सहकारी मिलों से प्राप्त फंड का उपयोग वैज्ञानिक अध्ययन, किसान जागरूकता और उद्योग उन्नयन में होता है. संस्थान के ट्रस्टी बोर्ड में सभी प्रमुख दलों के नेता शामिल हैं, जो इसे गैर-राजनीतिक स्वरूप देते हैं. फिर भी, फंड ऑडिट का फैसला राजनीतिक रंग ले चुका है. जांच पारदर्शी होगी शुगर कमिश्नर कोल्टे ने बताया कि कमेटी का गठन जल्द पूरा होगा और जांच पारदर्शी होगी. लेकिन विपक्ष का मानना है कि यह कदम शरद पवार की साख को ठेस पहुंचाने का प्रयास है. रोहित पवार ने कहा कि वीएसआई ने दशकों से चीनी उद्योग को मजबूत किया है. अगर सरकार को पारदर्शिता चाहिए, तो सभी सहकारी संस्थाओं की जांच होनी चाहिए, न कि चुनिंदा. महाराष्ट्र में सहकारिता क्षेत्र लंबे समय से राजनीतिक प्रभाव का केंद्र रहा है. पवार परिवार का चीनी सहकारिता पर मजबूत पकड़ है और बारामती में कई मिलें उनके समर्थकों के नियंत्रण में हैं. ऑडिट का फैसला ऐसे समय आया है जब राज्य में सत्ता गठबंधन और विपक्ष के बीच तनाव चरम पर है. फडणवीस ने स्पष्ट किया कि अभी केवल जानकारी मांगी गई है, लेकिन विपक्ष इसे जांच की शुरुआत मान रहा है. आने वाले दिनों में कमेटी की रिपोर्ट इस विवाद को और गहरा सकती है या शांत कर सकती है. फिलहाल, वीएसआई का मामला महाराष्ट्र की राजनीति में नया तूफान बनता दिख रहा है.  

इतिहास रचा! राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बनीं पहली भारतीय राष्ट्रपति जिन्होंने उड़ाया राफेल लड़ाकू विमान

अंबाला  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राफेल फाइटर जेट की सवारी की है। उन्होंने अंबाला के एयरफोर्स बेस से उड़ान भरी। इसकी तस्वीरें भी सामने आई हैं। अहम बात यह है कि अंबाला एयरबेस से ही भारत के फाइटर जेट्स ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उड़ान भरी थी और पाकिस्तान एवं पीओके में घुसकर मार की थी। पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारत की ओर से ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया गया था और पाकिस्तान ने भी इसका जवाब देने की कोशिश की थी। इस दौरान अंबाला एयरबेस का भारत की ओर से इस्तेमाल किया गया था। राफेल विमान में चढ़ने से पहले राष्ट्रपति ने ‘जी-सूट’ पहना था। हाथ में हेलमेट लिए और धूप का चश्मा लगाए मुर्मू ने पायलट के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। पूर्वाह्न 11:27 बजे विमान के उड़ान भरने से पहले राष्ट्रपति ने विमान के अंदर से हाथ हिलाकर अभिवादन किया। आज सुबह वायुसेना स्टेशन पहुंचने पर राष्ट्रपति को औपचारिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ भी दिया गया। इससे पहले सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर मुर्मू ने 8 अप्रैल, 2023 को असम के तेजपुर वायुसेना स्टेशन में सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान में उड़ान भरी थी और वह ऐसा करने वाली तीसरी राष्ट्रपति बनी थीं। अंबाला में ही भारतीय वायुसेना का हिस्सा बने थे राफेल जेट फ्रांसीसी एयरोस्पेस कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित राफेल लड़ाकू विमान को सितंबर 2020 में अंबाला वायुसेना स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। पहले पांच राफेल विमानों को 17वें स्क्वाड्रन 'गोल्डन एरोज' में शामिल किया गया था। ये विमान 27 जुलाई, 2020 को फ्रांस से यहां पहुंचे थे। राफेल 2020 में अंबाला वायु सेना स्टेशन पर भारतीय वायु सेना के बेड़े में शामिल हुए। ये 17 स्क्वाड्रन 'गोल्डन एरो' का हिस्सा हैं। बता दें कि भारत ने 4 दिन चले ऑपरेशन में पाकिस्तान के कई आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था। पाकिस्तान के डीजीएमओ की मांग पर जंग को रोका गया था। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावा करते हैं कि उनके दखल के बाद ही भारत और पाकिस्तान संघर्ष रोकने को राजी हुए थे।

लगातार बारिश से चित्तौड़गढ़ में बाढ़ जैसे हालात, घोसुण्डा बांध के दरवाजे खोले गए

चित्तौड़गढ़ चित्तौड़गढ़ जिले में रविवार देर रात से शुरू हुई बरसात का दौर मंगलवार दोपहर तक लगातार जारी रहा। लगातार हो रही बारिश ने मावठ का अहसास करा दिया है। चित्तौड़गढ़ मुख्यालय समेत आसपास के इलाकों में हुई जोरदार बारिश से खेतों में पानी भर गया, वहीं तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। पिछले 48 घंटे से सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए हैं। लगातार हो रही बारिश से जलाशयों में पानी की भारी आवक हुई है। घोसुण्डा बांध के दो गेट खोल दिए गए हैं, जिससे बेड़च नदी में तेज बहाव हो गया है। वहीं गंभीरी नदी में भी पानी की आवक बढ़ गई है। जिला प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह समाप्त हुए पिछले 24 घंटों में गंगरार में सर्वाधिक 114 मिमी वर्षा दर्ज की गई। बड़ीसादड़ी में 105 मिमी, डूंगला में 88 मिमी, वागन बांध पर 100 मिमी, गंभीरी बांध पर 92 मिमी, बस्सी बांध पर 89 मिमी, चित्तौड़गढ़ में 68 मिमी, कपासन में 58 मिमी और भूपालसागर में 61 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। इस बरसात से जिले के कई तालाबों में पानी की आवक तेज हो गई है। खास बात यह है कि मानसून में सूखे पड़े तालाब अब छलकने लगे हैं। ठंडी हवाओं ने बढ़ाई सर्दी मावठ की बरसात से मौसम में ठंडक घुल गई है और तापमान में करीब 10 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई। लोग छातों और रेनकोट में नजर आए, जबकि कई जगह लोग अलाव जलाकर ठंड से राहत लेते दिखे। मौसम विभाग ने 30 अक्टूबर तक येलो अलर्ट जारी किया है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग ने तेज हवाएं चलने, बिजली कड़कने और मेघ गर्जना की संभावना भी जताई है। किसानों को दोहरा नुकसान, अफीम की फसल पर खतरा लगातार दो दिन से हो रही बेमौसम बरसात ने खेती-किसानी पर प्रतिकूल असर डाला है। मवेशियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं जिले की प्रमुख नगदी फसल अफीम पर भी इसका विपरीत असर देखा जा रहा है। किसानों का कहना है कि कई किसानों ने दिवाली के आसपास बुवाई कर दी थी, जो अब बारिश से खराब हो गई है। अब बुवाई के लिए कम से कम पखवाड़ेभर का इंतजार करना पड़ेगा, जिससे किसानों को भारी नुकसान होगा। खेतों में पानी भर जाने से अफीम की फसल देरी से तैयार होगी। कृषि उप निदेशक शंकरलाल जाट ने बताया कि इस बरसात का किसानों पर अच्छा और बुरा दोनों असर पड़ेगा। जिन क्षेत्रों में गेहूं, चना और सरसों की बुवाई हो चुकी है, वहां सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ेगी, लेकिन जहां बुवाई बाकी है, वहां किसानों को कुछ दिन इंतजार करना होगा। बेगूं क्षेत्र में फसलों को नुकसान, औसत से अधिक बारिश बेगूं क्षेत्र में बेमौसम बरसात ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। खरीफ और रबी दोनों फसलों पर असर पड़ा है। खरीफ की फसलें खलिहान में पड़ी होने से भीगकर खराब हो गईं, जबकि रबी की बुवाई शुरू नहीं हो पाई है। मवेशियों के लिए चारे का संकट भी गहराया है। अब तक बेगूं क्षेत्र में 1091 मिमी वर्षा हो चुकी है, जो औसत से 300 मिमी अधिक है। कपासन में छलका गुलाब सागर, खुश हुए ग्रामीण कपासन क्षेत्र में मानसून के दौरान कम वर्षा से तालाब खाली पड़े थे, जिसके चलते ग्रामीणों ने आंदोलन तक किया था। लेकिन इस मावठ की बारिश से अब गुलाब सागर तालाब छलक गया है, जिससे क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर है। राजेश्वर तालाब में भी पानी की भारी आवक हुई है और दोवनी पुलिया पर पानी बहने लगा है। बरसात से क्षेत्र में उत्साह का माहौल है।  

राजनीतिक हंगामा: असम में कांग्रेस नेता द्वारा गाए गए बांग्लादेशी राष्ट्रगान पर मची सियासी उठापटक

श्रीभूमि असम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बिधु भूषण दास पर एक कार्यक्रम के दौरान बांग्लादेश के राष्ट्रगान ‘अमार सोनार बांग्ला, आमी तोमाय भालोबाशी’ गाने का आरोप लगा है। इससे असम के बराक घाटी क्षेत्र में राजनीतिक विवाद भड़क गया। यह घटना सोमवार को कांग्रेस सेवा दल की बैठक के दौरान श्रीभूमि जिले के इंदिरा भवन में हुई। दास भंगा (श्रीभूमि) के निवासी हैं और सेवा दल की जिला इकाई के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। उन्होंने कथित तौर पर अपने संबोधन की शुरुआत रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित इस गीत से की। यह वही गीत है जो बाद में बांग्लादेश का राष्ट्रगान बना। टैगोर ने इसे 1905 में बंगाल के पहले विभाजन के दौरान लिखा था। घटना के सामने आने के बाद मंगलवार को राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। राज्य के मंत्री व भाजपा नेता कृष्णेंदु पॉल ने कहा, “मुझे रिपोर्ट मिली है कि कांग्रेस के एक नेता ने बांग्लादेश का राष्ट्रगान गाया। कांग्रेस में कुछ भी संभव है- उन्हें यह भी नहीं पता कि कब और क्या गाना चाहिए। मैं वीडियो देखकर पुलिस से जांच की मांग करूंगा और उचित कार्रवाई करने का अनुरोध करूंगा।” दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस विवाद को “राजनीतिक रूप से प्रेरित” करार दिया है। कांग्रेस का बचाव रिपोर्ट के मुताबिक, करीमगंज (श्रीभूमि) जिला कांग्रेस समिति के मीडिया विभाग के अध्यक्ष शहादत अहमद चौधरी (स्वपन) ने दास का बचाव करते हुए कहा, “बिधु भूषण दास ने बांग्लादेश का राष्ट्रगान नहीं, बल्कि रवींद्र संगीत प्रस्तुत किया था। ‘अमार सोनार बांग्ला’ एक रचना है जिसे नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर ने लिखा था। दास ने भाषण शुरू करने से पहले कहा था कि वे एक रवींद्र संगीत से शुरुआत करेंगे। वे एक सम्मानित नेता हैं, जो हर स्वतंत्रता दिवस पर इंदिरा भवन में भारतीय तिरंगा फहराते हैं। उन्हें बांग्लादेश का राष्ट्रगान गाने का आरोप लगाना पूरी तरह बेबुनियाद है।” राजनीतिक हलचल क्यों? बराक घाटी क्षेत्र में बंगाली भाषी आबादी का बड़ा हिस्सा रहता है। यह क्षेत्र अक्सर भाषा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में इस विवाद ने चुनावी माहौल में नए राजनीतिक समीकरणों को हवा दे दी है। कांग्रेस ने फिलहाल इसे विपक्ष द्वारा रचा गया “मामूली मुद्दे को बड़ा बनाने का प्रयास” बताया है, जबकि भाजपा इस पर पुलिस जांच की मांग पर अड़ी है। राज्य पुलिस को अब तक इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली है, लेकिन अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वीडियो की जांच की जा सकती है यदि कोई शिकायत दर्ज होती है।