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सामान्य मौसम में भी भोपाल-Delhi रेल यात्री परेशान, ज्यादातर ट्रेनें चल रहीं देरी से

भोपाल रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से दिल्ली जाने व आने वाली ट्रेनों की समयबद्धता लगातार बिगड़ती जा रही है। हालत यह है कि जिन ट्रेनों को कभी स्पेशल ट्रेन की श्रेणी में रखा गया था, वे अब सामान्य मौसम में भी देर से पहुंच रही हैं। कई ट्रेनों की औसत देरी एक से डेढ़ घंटे तक दर्ज की जा रही है, जिससे यात्री खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। साथ ही रेलवे पर उनका भरोसा भी खत्म हो रहा है। वहीं, इन सबके बीच, वंदे भारत एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय पर पहुंच रही है। इससे कुछ यात्री खुश भी हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब वंदे भारत जैसी ज्यादा किराये वाली ट्रेन समय पर आ रही है तो अन्य ट्रेनों को लेट क्यों किया जा रहा है। अभी तो सामान्य मौसम है, तब यह हाल है, सर्दियों में कोहरे के दौरान देरी का अंतर और बढ़ेगा। ऐसे में रानी कमलापति से दिल्ली मार्ग पर यात्रा करने वाले यात्रियों को पहले से ही अपने कार्यक्रमों की योजना बनानी पड़ेगी।   वहीं, रेलवे के बहानों की लिस्ट लंबी है, उनके अनुसार, ट्रेनों के देर से आने की प्रमुख वजहों में ट्रैक पर बढ़ता ट्रैफिक, मेंटेनेंस कार्यों के कारण ब्लाक लेना, और कुछ रूटों पर पुराने सिग्नलिंग सिस्टम का उपयोग शामिल है। इसके अलावा, समयपालन की निगरानी में कमी और संचालन के समन्वय में ढिलाई भी स्थिति को और बिगाड़ रही है। सुधार की जरूरत रेल विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बाकी ट्रेनों में भी वंदे भारत जैसी तकनीकी दक्षता और मानिटरिंग व्यवस्था लागू की जाए, तो समयपालन में बड़ा सुधार लाया जा सकता है। रेलवे को अब ट्रैक और सिग्नलिंग सिस्टम के आधुनिकीकरण के साथ-साथ ऑपरेशनल जवाबदेही को प्राथमिकता देने की जरूरत है।   ट्रेनों के लेट होने की वजह तीसरी रेलवे लाइन के निर्माण या मेंटेनेंस कार्य के चलते। सिग्नलिंग या ट्रैक खराबी होना। यात्रियों द्वारा अनावश्यक चेन पुलिंग करना। प्लेटफार्म की कमी और भीड़भाड़ होना। इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी संसाधनों की कमी। ऐसे हो सकता है सुधार भोपाल-दिल्ली रूट पर तीसरी रेल लाइन का कार्य जल्द पूरा किया जाए। सिग्नल सिस्टम को आधुनिक और स्वचालित बनाया जाए। चेन पुलिंग की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई हो। प्लेटफार्म की संख्या और क्षमता बढ़ाई जाए। रियल-टाइम मानिटरिंग और बेहतर ट्रैफिक समन्वय किया जाए। आउटर पर ट्रेनों के अनावश्यक ठहराव को कम किया जाए।  

चिराग पासवान का पलटवार — बोले, हमारी सरकार अपराधियों की नहीं करती रक्षा

पटना, जन सुराज पार्टी के कार्यकर्ता दुलारचंद यादव की हत्या के मामले मं  मोकामा विधानसभा क्षेत्र से जदयू उम्मीदवार अनंत सिंह की गिरफ्तारी पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि विपक्ष इस मामले को बेवजह मुद्दा बना रहा है। अगर हमारी सरकार अपराधियों को संरक्षण दे रही होती, तो कल रात हुई कार्रवाई नहीं होती। मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि हमारी सरकार इस मामले में बिल्कुल स्पष्ट है। जैसा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हमेशा कहते हैं, हम न किसी को बचाते हैं और न ही किसी को फंसाते हैं। ऐसे में न्याय प्रक्रिया का हिस्सा है। जो घटना घटी, वह दुखद है। अगर एक भी घटना घटती है, तो यह चिंता का विषय हमारे और हमारी सरकार के लिए है। दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच चल रही है और दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने पीएम मोदी के दौरे को लेकर कहा कि प्रधानमंत्री जब भी आते हैं, इससे हमारे गठबंधन को फायदा होता है। उनके दौरे लोगों का उत्साह बढ़ाते हैं और हम पर उनका विश्वास मजबूत करते हैं। वहीं, इस घटना पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि जब विपक्ष सत्ता में था, तो किसी भी घटना के आरोपी का ठिकाना मुख्यमंत्री आवास हुआ करता था। नीतीश कुमार के सुशासन में, भले ही आरोप लगे हों और जांच चल रही हो, जदयू के प्रत्याशी होने के बाद भी उनकी गिरफ्तारी हो गई है। अनंत सिंह की गिरफ्तारी पर तेजस्वी यादव का बयान भी चर्चाओं में रहा है, जिस पर पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि तेजस्वी अच्छी तरह जानते हैं कि अपराधियों को कौन संरक्षण देता है। 1990 से 2005 तक जंगल राज के दौरान अपराधी मुख्यमंत्री आवास में शरण लेते थे। भ्रष्टाचार, लूट और अपहरण का बोलबाला था और अपराधियों का स्वागत और उन्हें मंत्रियों द्वारा पनाह दी जाती थी। अपराधियों को संरक्षण देना, वंशवादी राजनीति को बढ़ावा देना, लोकतंत्र का मज़ाक उड़ाना और गरीबों का शोषण करना-यही उन्होंने किया और अब भी कर रहे हैं। वहीं, भाजपा सांसद धर्मशीला गुप्ता ने अनंत सिंह की गिरफ्तारी पर कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है और जल्द ही सच सामने आएगा, लेकिन विपक्ष बौखला गया है। बिहार में एनडीए की सरकार बनने जा रही है, इसी को लेकर विपक्ष में बौखलाहट है। इसके साथ ही उन्होंने तेजस्वी यादव और लालू यादव पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता जंगलराज को नहीं भूली है।  

PF निकासी नियमों में बड़ा बदलाव, अब बिना झंझट पूरी राशि निकालना हुआ आसान!

नई दिल्ली  कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने नियमों में बड़ा बदलाव कर दिया है। नए नियमों में अब कर्मचारी अपने भविष्य निधि (EPF) खाते से 100 प्रतिशत तक राशि निकाल सकते हैं। यह सुविधा कुछ शर्तों के जरिए पूरी होगी, जिससे सेवानिवृत्ति निधि पूरी तरह समाप्त न हो। 100% निकासी की सुविधा नए नियमों के अनुसार, कर्मचारी अब अपने ईपीएफ खाते से पूरी राशि (कर्मचारी और नियोक्ता का अंशदान) निकाल सकते हैं। यह निकासी केवल विशेष परिस्थितियों (बीमारी, शिक्षा, विवाह या आवास निर्माण जैसी जरूरतें) में ही संभव होगी। ईपीएफओ ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा आकस्मिक जरूरतों को पूरा करने के लिए दी है।   25% राशि खाते में रखना जरूरी फाइनेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सदस्यों को अपने कुल ईपीएफ बैलेंस का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा खाते में बनाए रखना होगा। इस राशि पर ब्याज (अभी 8.25%) और चक्रवृद्धि ब्याज मिलता रहेगा। इससे सदस्य अपनी भविष्य की सेवानिवृत्ति निधि को सुरक्षित रख सकेंगे और समय के साथ उस पर अतिरिक्त लाभ भी प्राप्त करेंगे। शिक्षा और विवाह के लिए निकासी के नियम बदले पहले सदस्य शिक्षा के लिए तीन बार और विवाह के लिए तीन बार तक निधि निकाल सकते थे। अब यह सीमा बढ़ा दी गई है। नए प्रावधानों के तहत सदस्य शिक्षा के लिए 10 बार और विवाह के लिए 5 बार तक राशि निकाल सकते हैं। यह सुविधा परिवारों को बिना कर्ज लिए बड़े खर्चों को संभालने में मदद करेगी। बेरोजगारी और विशेष परिस्थितियों में राहत अब बेरोजगारी की स्थिति में सदस्य अपने खाते से 75 प्रतिशत राशि निकाल सकते हैं, जबकि शेष 25 प्रतिशत राशि अंतिम निपटान के समय मिलती है। पहले सदस्यों को प्राकृतिक आपदा या लॉकडाउन जैसे कारणों का प्रमाण देना पड़ता था, जिससे आवेदन अस्वीकार हो जाते थे। नए नियमों के बाद प्रक्रिया अधिक आसान और पारदर्शी हो गई है।  

मजाक में जान पर खेल! MP की 108 एंबुलेंस सेवा को मिले 5 लाख से ज्यादा फर्जी कॉल

भोपाल भोपाल सहित पूरे मध्य प्रदेश में 108 एबुंलेंस सेवा फर्जी फोन कॉल्स से परेशान है। पिछले छह महीनों में करीब 5.72 लाख कॉल ऐसे आए जो सिर्फ मजाक, टाइमपास या शरारत के लिए किए गए थे। इससे न सिर्फ कॉल सेंटर का स्टाफ उलझा रहा, बल्कि एंबुलेंस के 1500 घंटे भी बर्बाद हो गए। कुछ लोग गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप का दुख एंबुलेंस कॉल सेंटर को सुनाते हैं, तो कुछ सिर्फ मजे के लिए बार-बार फोन करते हैं। सेवा संचालित करने वाली एजेंसी जय अंबे हेल्थकेयर के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने बताया कि अब ऐसे कालर्स के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज की जाएगी, क्योंकि इनकी हरकतें कई बार गंभीर मरीजों की मदद में देरी कर देती हैं।   एंबुलेंस बुलाकर गायब हो जाते हैं कोलार रोड का एक मामला इसका ताजा उदाहरण है। एक व्यक्ति ने कॉल कर कहा कि हालत खराब है। 15 मिनट में एंबुलेंस उसके घर पहुंची, लेकिन वहां कोई नहीं मिला। जब टीम ने काल किया तो उसने कहा कि अब जरूरत नहीं है। ऐसे झूठे कॉल हर दिन आते हैं और एंबुलेंस का कीमती समय खराब होता है। कॉलर्स की पहचान के लिए स्टडी शुरू कॉल सेंटर के मुताबिक कई नंबर ऐसे हैं, जो 150 से 200 बार फर्जी काल करते हैं। इनमें बच्चे, नशेड़ी युवक शामिल हैं। ये काल सेंटर में बैठी महिला स्टाफ को परेशान करते हैं। कंपनी अब ऐसे नंबर ट्रैक कर रही है, ताकि आगे सीधे कानूनी कार्रवाई की जा सके। इसके लिए एक विशेष स्टडी शुरू की गई है। कैसे प्रभावित हो रही है सेवा झूठे फोन कॉल के कारण काल सेंटर की लाइनें कुछ सेकंड के लिए ब्लाक हो जाती हैं। इसी दौरान किसी असली मरीज की कॉल मिस हो जाती है। कई बार एंबुलेंस को 50 से 60 किलोमीटर तक बेकार दौड़ना पड़ता है। तरुण सिंह परिहार के मुताबिक एक फर्जी कॉल किसी जरूरतमंद की जान पर भारी पड़ सकता है। जब तक एंबुलेंस वापस लौटती हैं, तब तक किसी और को तुरंत मदद की जरूरत पड़ जाती है।  

लाइव में बोले CM मान — पंजाब यूनिवर्सिटी को लेकर सरकार का ऐतिहासिक फैसला

चंडीगढ़ पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट भंग करने के केंद्र सरकार के फैसले पर मुख्यमंत्री भगवंत मान सोशल मीडिया पर लाइव हुए और इस दौरान उन्होंने बड़ा बयान दिया है। मुख्यमंत्री मान ने कहा है कि वह पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट भंग करने और उसमें पंजाब की भागीदारी समाप्त करने के भाजपा के फैसले की कड़ी निंदा करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह पंजाब के साथ किसी भी कीमत पर धक्केशाही बर्दाश्त नहीं करेंगे। पंजाब विश्वविद्यालय उनकी विरासत है और इसे बचाने के लिए उनसे जो भी बन पड़ा वह करेंगे। उन्हें हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट भी जाना पड़ा, वह वहां भी जाएंगे, वह कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले रहे हैं और वह यह धक्केशाही नहीं होने देंगे। भाजपा का यह फैसला पूरी तरह से असंवैधानिक है। केंद्र सरकार विधानसभा में पारित किसी अधिनियम को किसी भी अधिसूचना के जरिए रद्द नहीं कर सकती। इस फैसले से भाजपा ने अपना पंजाब विरोधी चेहरा दिखा दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब दिवस के दिन भाजपा ने पंजाबियों को तोहफा दिया है। उनके दिलों में पंजाब के प्रति नफरत है। उन्होंने कहा कि पंजाब विश्वविद्यालय पंजाब की धरोहर है और वह इसे नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि वह इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएंगे और बड़े वकील नियुक्त करके पंजाब के पक्ष में खड़े होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा की ऐसी नापाक हरकतें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।   

RSS बैन मांग पर बोले बाबा रामदेव – खड़गे जी, लोकतंत्र में हारने वालों की यही हताशा दिखती है

नई दिल्ली  कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर बैन लगाने की मांग वाले बयान पर योग गुरु बाबा रामदेव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जिनके विचार भारत और भारतीयता से मेल नहीं खाते वही इस तरह के एजेंडा चलाते हैं। उन्हें लड़ाई करनी है तो अमित शाह और मोदी जी से करें, उन्हें तो वो हरा नहीं पाते हैं फिर आरएसएस पर अभद्र टिप्पणियां करते हैं। बाबा रामदेव ने दिल्ली में  इंटरव्यू में कहा, ''आरएसएस कोई पॉलिटिकल पार्टी नहीं है। पॉलिटिकल विंग बीजेपी है। लड़ाई करनी है तो अमित शाह और मोदी जी से करो। उनको हरा नहीं पाते हैं फिर आरएसएस पर अभद्र टिप्पणियां करते रहते हैं। आरएसएस को मैं पिछले दो-तीन दशकों से बहुत करीब से देख रहा हूं, उसमें बहुत अच्छे और तपस्वी लोग हैं। उन्होंने आगे कहा कि जिनके विचार भारत और भारतीयता से मेल नहीं खाते फिर वो इस तरह के एजेंडा चलाते हैं।'' आरएसएस के बारे में पूछे जाने पर बाबा रामदेव ने कहा, "आरएसएस, आर्य समाज की तरह ही एक राष्ट्रवादी संगठन है और इसके अंदर डॉ. हेडगेवार से लेकर सदाशिवराव गोलवलकर जैसे कई महान लोगों ने तपस्या की है। आज भी लाखों संघ कार्यकर्ता देश के लिए काम करते हैं। जब देश विरोधी ताकतें, सनातन विरोधी ताकतें, आरएसएस या किसी भी हिंदुत्ववादी ताकत का विरोध करती हैं तो इसके पीछे उनका कोई छिपा हुआ एजेंडा और स्वार्थी मकसद होता है। मेरा व्यक्तिगत विचार है कि आरएसएस पर बैन लगना चाहिए: खड़गे गौरतलब है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर शनिवार को कहा कि आरएसएस पर फिर से प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए क्योंकि देश में कानून व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के लिए यही संगठन जिम्मेदार है। उन्होंने यह भी कहा कि यह उनका व्यक्तिगत विचार है। खड़गे ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक बयान से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए संवाददाताओं से कहा, ‘‘मेरा व्यक्तिगत विचार है और खुलकर बोलूंगा कि आरएसएस पर बैन लगना चाहिए। सरदार वल्लभ भाई पटेल ने जो चीजें आरएसएस को लेकर हमारे सामने रखी हैं, अगर उसकी मर्यादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शाह गृह मंत्री अमित शाह रखते हैं तो यह बैन होना चाहिए।’’ कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया, ‘‘आज देश में जो गड़बड़ियां हो रही हैं और कानून-व्यवस्था की समस्यां पैदा हो रही हैं, ये सब भाजपा और आरएसएस की वजह से हैं।’’ बता दें कि, कुछ दिन पहले ही खड़गे के बेटे और कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियंक खड़गे ने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया से आग्रह किया था कि वह सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को आरएसएस और ऐसे अन्य संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों व गतिविधियों में भाग लेने से सख्ती से रोकें। वहीं, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को सरदार पटेल की जयंती पर संवाददाताओं से कहा कि भाजपा को याद रखना चाहिए कि उसके मूल संगठन आरएसएस पर सरदार पटेल ने बैन लगाया था। आज जरूरत है कि इस देश में कोई सरदार पटेल बने और इस विचारधारा पर फिर से बैन लगे।   

जनसुराज ने तारापुर में झोंकी पूरी ताकत — डॉ. संतोष सिंह देंगे सम्राट चौधरी को चुनौती

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव में जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भाजपा नेता और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ अपनी रणनीति को तेज करते हुए तरापुर सीट से 48 वर्षीय चिकित्सक डॉ. संतोष कुमार सिंह को मैदान में उतारा है। प्रशांत किशोर ने चौधरी की उम्र और शिक्षा को लेकर लगातार सवाल उठाए हैं। उन्होंने तरापुर में एक डॉक्टर को उम्मीदवार बनाकर चुनाव को दिलचस्प बना दिया है।   मुंगेर जिले के पहाड़पुर गांव के निवासी डॉ. संतोष सिंह पिछले 12 वर्षों से चिकित्सक के रूप में कार्यरत हैं। वे तरापुर में बीते पांच सालों से अपना 10-बेड का निजी नर्सिंग होम चला रहे हैं। 2011 में एमबीबीएस और उसके बाद दो एमडी डिग्रियां पूरी करने वाले सिंह के मरीजों में कभी तरापुर की पूर्व विधायक स्व. पार्वती देवी और छह बार के विधायक शकुनी चौधरी (सम्राट चौधरी के पिता) भी शामिल रहे हैं। हालांकि अब वे जनसुराज से जुड़ने के बाद चौधरी परिवार से दूरी बना चुके हैं। तरापुर के फजलिगंज स्थित उनके नर्सिंग होम के बाहर सुबह से ही मरीजों की लंबी कतार लगी रहती है। सुबह 10 बजे से मरीजों को देखने के बीच वे चुनावी चर्चा भी करते हैं। डॉ. सिंह ने बात करते हुए कहा कि आसपास के 200 से अधिक गांवों से लोग इलाज के लिए आते हैं। उनकी परामर्श शुल्क 400 रुपये है, लेकिन गरीब मरीजों से वे शुल्क नहीं लेते। सुबह 10.30 बजे उनकी पत्नी खुश्बू सिंह भी क्लिनिक पहुंचती हैं। वे चुनाव प्रचार में अपने पति की मदद कर रही हैं। खुश्बू कहती हैं, “शुरुआत में मैं उनके चुनाव लड़ने के फैसले के खिलाफ थी, लेकिन अब लोगों का सम्मान देखकर गर्व महसूस होता है।” जनसुराज के तरापुर विधानसभा प्रभारी शुभम शुक्ला दिनभर की रणनीति पर चर्चा करते हैं। शुभम बताते हैं कि पार्टी का ढांचा दो हिस्सों में बंटा है। राजनीतिक इकाई और पेशेवर इकाई। वे बताते हैं, “हमारे पंचायत स्तर पर लोकल पॉलिटिकल रिप्रेजेंटेटिव हैं, जो विधानसभा प्रभारी को रिपोर्ट करते हैं। एआई जिला प्रभारी को रिपोर्ट करता है और यह सिलसिला राज्य प्रभारी तक जाता है, जो स्वयं प्रशांत किशोर हैं।” जनसुराज के कार्यकर्ता लोगों में ‘परिवार लाभ कार्ड (PLC)’ बांट रहे हैं। यह पार्टी का डेटा इकट्ठा करने और वादे साझा करने का तरीका है। कार्ड में कई घोषणाएं दर्ज हैं। जैसे कि हर परिवार को 20,000 मासिक सहायता राशि, 2,000 का मासिक पेंशन, महिलाओं को 5 लाख का ऋण और 15 वर्ष तक के बच्चों को निशुल्क शिक्षा। डॉक्टर संतोष सिंह कहते हैं, “मैं 2023 में भाजपा की जिला मेडिकल टीम से जुड़ा था, लेकिन वरिष्ठ नेताओं की उदासीनता से निराश हुआ। 2024 में प्रशांत किशोर से मिला और तभी उन्होंने इशारा किया था कि मुझे तरापुर से उतारेंगे।” अब तक वे 25 पंचायतों का दौरा कर चुके हैं। उनका कहना है, “मैं केवल यही कहता हूं कि जाति और धर्म से ऊपर उठकर प्रशांत किशोर की सोच को एक मौका दें।” दोपहर 1 बजे वे मुस्लिम बहुल गोरहो गांव पहुंचते हैं। यहां करीब 2,000 मतदाता हैं, लेकिन अभी तक कोई दूसरा उम्मीदवार प्रचार के लिए नहीं आया। सहयोगी अकील अख्तर बताते हैं, “भाजपा को यहां वोट नहीं दिखते और आरजेडी इसे अपनी जेब का इलाका मानती है।” इसके बाद वे अमैया गांव पहुंचते हैं, जहां ओबीसी यादव, कोइरी और कुर्मी समुदाय रहते हैं। बारिश के बीच वे घर-घर जाकर लोगों से समस्याएं पूछते हैं। एक नशे में व्यक्ति से हुई झड़प पर वे हंसते हुए कहते हैं, “यही है बिहार में शराबबंदी की हकीकत।” उन्होंने कहा, “यह सम्राट चौधरी से लड़ाई नहीं, बल्कि प्रशांत किशोर के नए बिहार के विचार का बीज बोने की कोशिश है।” वे आगे कहते हैं, “मैंने आरामदायक जीवन छोड़ा है ताकि राजनीति को करीब से समझ सकूं। राजनीति का मतलब त्वरित लाभ नहीं, बल्कि दीर्घकालिक निवेश होना चाहिए।”  

TMC का गंभीर आरोप – ‘SIR के डर’ से गई जान, चुनाव आयोग को बताया जिम्मेदार

कोलकाता  पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने मतदाता सूची के SIR को लेकर निर्वाचन आयोग और भाजपा के खिलाफ हमला तेज कर दिया है। टीएमसी ने दावा किया कि राज्य के पूर्वी बर्धमान जिले के एक और व्यक्ति की मौत इस डर से हुई कि 2002 की मतदाता सूची में उसका नाम नहीं है, ऐसे में उसे गैर-नागरिक घोषित कर दिया जाएगा। तृणमूल कांग्रेस ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि मरने वाला व्यक्ति जिले के जमालपुर इलाके का रहने वाला था। उसकी पहचान विमल संतरा के तौर पर हुई है जो एक श्रमिक था।'   टीएमसी ने विमल संतरा की मौत की परिस्थितियों का विवरण दिए बिना या किसी पुलिस पुष्टि का हवाला दिए बिना कहा, ‘भाजपा की डर और नफरत की राजनीति के कारण एक और अनमोल जान चली गई।’ इससे पहले, पार्टी ने बंगाल में तीन लोगों के आत्महत्या कर लेने के बाद भाजपा) पर निशाना साधा था। इन लोगों ने कथित तौर पर आत्महत्या इसलिए की थी कि उन्हें डर था कि एसआईआर के बाद उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे। निर्वाचन आयोग SIR के दूसरे चरण का आयोजन पश्चिम बंगाल समेत 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में करेगा, जहां अगले वर्ष चुनाव होने हैं। एसआईआर की प्रक्रिया 4 नवंबर से शुरू होकर 4 दिसंबर तक चलेगी। मतदाता सूची का मसौदा 9 दिसंबर को जारी किया जाएगा और अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी को प्रकाशित होगी। मंगलवार को कोलकाता में विशाल मार्च मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मतदाता सूची के SIR के विरोध में मंगलवार को कोलकाता में विशाल मार्च का नेतृत्व करेंगी। TMC चीफ बनर्जी के साथ रैली में उनके भतीजे व पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी शामिल होंगे। यह मार्च मैदान में बीआर आंबेडकर की प्रतिमा के पास से शुरू होकर जोरासांको में रवींद्रनाथ टैगोर के निवास के पास समाप्त होगा। कार्यक्रम की घोषणा करते हुए टीएमसी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'एसआईआर वास्तव में खामोशी से की जाने वाली धांधली है। हम यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे कि सभी पात्र मतदाता इस प्रक्रिया में शामिल हों और पीछे न छूटें। अपने लोगों के लिए हम अपना सब कुछ झोंक देंगे!'  

तेजस्वी यादव का बड़ा बयान — सरकार बनी तो एक नहीं, कई डिप्टी सीएम; मुस्लिम और दलित नेताओं को मिलेगा सम्मान

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए मतदान में अब महज कुछ दिन बचे हैं। इस बीच, राजद नेता तेजस्वी यादव ने महागठबंधन को सत्ता में लाने पर कई उपमुख्यमंत्री बनाने का संकेत दिया है, जिनमें मुस्लिम और दलित भी शामिल होंगे। महागठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरे ने कहा कि विभिन्न वर्गों की चिंताओं का समाधान किया जाएगा। उन्होंने अशोक गहलोत की टिप्पणी और मुकेश साहनी के संदर्भ में कहा कि मुस्लिम और दलित उपमुख्यमंत्री जरूर होंगे। इससे पहले, हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में भी तेजस्वी ने गहलोत के बहु-उपमुख्यमंत्री वाले बयान का जिक्र किया था।   तेजस्वी यादव ने भाजपा पर तंज कसा कि विपक्ष की ओर से उपमुख्यमंत्री पद के लिए नामों की घोषणा पर विवाद खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'बीजेपी को ईबीसी समुदाय के प्रतिनिधि को उपमुख्यमंत्री बनाने पर आपत्ति है। उनकी आईटी सेल हमें उन समुदायों के प्रतिनिधि न बनाने पर ट्रोल कर रही है, जिन्हें वे घुसपैठिए कहते हैं।' हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं कहा कि उनके नेतृत्व में बिहार में मुस्लिम उपमुख्यमंत्री होगा या नहीं। तेजस्वी ने कहा, 'हम इस संभावना से इनकार नहीं कर रहे। इंतजार कीजिए और देखिए। यह किसी भी समुदाय से हो सकता है।' बिहार बुलाए गए अशोक गहलोत कांग्रेस के सीनियर नेता अशोक गहलोत को पिछले महीने बिहार में इंडिया गठबंधन की सीट-बंटवारे की उलझनों को सुलझाने के लिए लाया गया था। बाद में उन्होंने कहा कि गठबंधन सहयोगियों के बीच कुछ सीटों पर मैत्रीपूर्ण मुकाबला को मतभेद नहीं माना जाना चाहिए। बिहार में 243 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव का मंच तैयार है। मतदान दो चरणों में 6 और 11 नवंबर को होगा। मतगणना और नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी गठबंधन ने अपने घोषणापत्र जारी कर दिए हैं।  

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पतंजलि विवि के दीक्षांत समारोह में बांटी 1424 डिग्रियां, किया आह्वान ‘ज्ञान को कर्म से जोड़ें’

देहरादून उत्तराखण्ड राज्य निर्माण की रजत जयंती के उपलक्ष्य में प्रदेशभर में रजतोत्सव समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। उत्तराखंड में प्रदेशभर में 01 नवंबर को इगास पर्व से 11 नवम्बर 2025 तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी का स्मरण कर उन्हें नमन किया और कहा कि उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान ही हमें नया राज्य प्राप्त हुआ। यह हम सबके लिए गर्व का विषय है कि उत्तराखण्ड 25 वर्षों की उल्लेखनीय यात्रा पूर्ण कर विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक विकसित और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प देशवासियों के सामने रखा है। वर्ष 2050 उत्तराखण्ड राज्य स्थापना का स्वर्ण जयंती वर्ष होगा। आने वाले इन 25 वर्षों के लिए राज्य सरकार एक नया रोडमैप बनाकर आगे बढ़ेगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने देश की सीमाओं पर बलिदान देने वाले जवानों और राज्य आंदोलन के बलिदानियों को भी नमन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के रजतोत्सव समारोह के अंतर्गत 03 और 04 नवम्बर को देहरादून में विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित किया जा रहा है, जिसमें 03 नवम्बर को महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु विशेष सत्र को संबोधित करेंगी, जो राज्य के लिए गौरव का विषय है। इस विशेष सत्र में राज्य को आगे ले जाने की दिशा में विचार-विमर्श होगा तथा बीते 25 वर्षों के अनुभवों पर चर्चा की जाएगी। 09 नवम्बर को राज्य स्थापना दिवस पर मुख्य समारोह में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। रजतोत्सव समारोह का केंद्रबिंदु संस्कृति, पर्यटन, युवाशक्ति, प्रवासी उत्तराखण्डी तथा राज्य आंदोलनकारी रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि जनभागीदारी का उत्सव है। प्रत्येक नागरिक और जनपद को इस उत्सव से जोड़ने का उन्होंने आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि रजत जयंती वर्ष केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन और संकल्प का अवसर है। इसी क्रम में अगले 25 वर्षों के लिए खाका भी प्रस्तुत किया जाएगा, जिसका लक्ष्य समृद्ध, आत्मनिर्भर और सशक्त उत्तराखण्ड का निर्माण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते वर्षों में राज्य सरकार द्वारा अनेक उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है जिसने समान नागरिक संहिता लागू की है। साथ ही भूमि कानून, धर्मांतरण विरोधी, नकल विरोधी और दंगारोधी कानून लागू कर सुशासन की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। राज्य आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत और महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है, जबकि सहकारी समितियों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों में 26 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में 3.56 लाख करोड़ रुपये के एमओयू साइन हुए और एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की ग्राउंडिंग हो चुकी है। राज्य का बजट पहली बार एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रस्तुत किया गया है। स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि राज्य में 58 लाख आयुष्मान कार्ड वितरित किए गए हैं, मातृ मृत्यु अनुपात में उल्लेखनीय कमी आई है, लखपति दीदी योजना से 1 लाख 65 हजार से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं और वृद्धावस्था पेंशन को बढ़ाकर 1500 रुपये किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार 26 गुना बढ़ा है और प्रति व्यक्ति आय में 17 गुना वृद्धि हुई है। धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के पुनरोद्धार के लिए केदारनाथ पुनर्निर्माण और बद्रीनाथ धाम के मास्टर प्लान और मानसखण्ड मंदिर माला मिशन के तहत कार्य प्रगति पर हैं। दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड रोड और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन जैसी परियोजनाएं राज्य के विकास को नई दिशा देंगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार पलायन रोकथाम और सीमांत क्षेत्रों के विकास के लिए वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम, स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप और मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना जैसी पहलें संचालित कर रही है।