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Industrial Boost: अब कृषि भूमि पर भी खोल पाएंगे उद्योग, सरकार ने किया बड़ा बदलाव

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने कृषि ज़ोन में उद्योगों की राह में सबसे बड़ी रुकावट माने जाने वाले सड़क मानकों को नरम कर दिया है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की ओर से जारी नई पॉलिसी ने ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक विकास का दरवाज़ा पहले से कहीं ज्यादा खोल दिया है। अब निवेशकों को चौड़ी सड़क ढूंढने के झंझट में नहीं फंसना पड़ेगा और छोटे गांवों तक औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार होने का रास्ता साफ़ हो गया है। वहीं, हरियाणा सरकार ने राज्य के सभी डेवलपमेंट प्लानों में लागू मिक्सड लैंड यूज (एमएलयू) के नियमों में भी बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने 19 मार्च, 2021 की नीति के सब-क्लॉज 3बी को बदलते हुए नए मानक लागू किए हैं। पहले कृषि ज़ोन में उद्योगों के लिए न्यूनतम 33 फीट चौड़ी सड़क अनिवार्य थी, जिसके कारण कई प्रोजेक्ट काग़ज़ों में ही अटक जाते थे। लेकिन नई व्यवस्था के तहत 20 फीट चौड़ी मौजूदा गांव लिंक रोड, या 33 फीट राजस्व/स्व-निर्मित पंचायत रास्ता को भी उद्योग लगाने के लिए वैध अप्रोच माना जाएगा। यह बदलाव उन ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बड़ा अवसर है, जहां चौड़ी सड़कें उपलब्ध नहीं थीं। हाईवे कनेक्टिविटी वाले उद्योगों को भी बड़ा फायदा नई पॉलिसी में उन निवेशकों को भी राहत मिली है जिनकी साइटें नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे या शेड्यूल रोड से सीधी जुड़ी हैं। ऐसे मामलों में अब एक्सेस परमिशन मिलते ही सीएलयू की मंजूरी मिल सकेगी। इससे हाईवे किनारे औद्योगिक बेल्ट्स को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सभी विभागों को भेजे नये आदेश नए आदेश की प्रति उद्योग विभाग, अर्बन लोकल बॉडीज़ और इंडस्ट्रीज़ एंड कॉमर्स विभाग को भेज दी गई है, ताकि इसे जमीनी स्तर पर तुरंत लागू कराया जा सके। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ की भावना के अनुरूप है, जहां उद्योगों पर अनावश्यक शर्तें कम कर निवेश का माहौल तैयार किया जा रहा है। आगामी वर्षों में ग्रामीण हरियाणा में रोजगार, ढांचागत विकास और छोटी औद्योगिक इकाइयों की संख्या में तेजी आने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। हरियाणा में मिक्सड लैंड यूज के नियम बदले हरियाणा सरकार ने राज्य के सभी डेवलपमेंट प्लानों में लागू मिक्सड लैंड यूज (एमएलयू) के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब मिक्सड लैंड यूज में कौन-सी गतिविधि बिल्कुल भी नहीं चलेगी। इसके लिए एक 12 बिंदुओं की प्रतिबंधित सूची जारी की गई है। नए नियम के बाद जिन गतिविधियों का नाम इस सूची में नहीं है, वे सभी मिक्सड लैंड यूज जोन में अनुमति योग्य मानी जाएंगी। यह आदेश टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की तरफ से जारी किया गया है। आदेश गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, सोनीपत और हिसार मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटीज सहित सभी संबंधित विभागों को भेजा गया है। पहले मिक्सड लैंड यूज को लेकर अक्सर यह उलझन रहती थी कि कौन-सा व्यवसाय या उपयोग इस ज़ोन में आते हैं और कौन-सा नहीं।   कई बार आवेदन महीनों तक अटके रहते थे। अब सरकार ने इस समस्या को खत्म करते हुए साफ निर्देश दिए हैं कि प्रतिबंधित सूची में जो गतिविधियां हैं, वे नहीं चलेंगी। बाकी सब नियमों के अनुसार मान्य रहेंगी। इससे विभागों के बीच होने वाली अस्पष्टता खत्म होगी और डेवलपर्स व व्यवसायियों को मंजूरी लेने में आसानी होगी। इन 12 गतिविधियों पर पूरी तरह रोक सरकार ने जिन उपयोगों को मिक्सड लैंड यूज जोन में पूरी तरह प्रतिबंधित किया है, उनमें हैवी इंडस्ट्रीज़, कचरा डंपिंग और लैंडफिल साइट्स, केमिकल और पेट्रोकेमिकल प्लांट्स, न्यूक्लियर पावर से जुड़ी इंस्टॉलेशन, स्लॉटर हाउस और टैनरी, डेयरियां, पोल्ट्री और पिगरी यूनिट्स, ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, माइनिंग व क्वारिंग गतिविधियां, कब्रिस्तान, श्मशान भूमि, फार्महाउस तथा प्रदूषणकारी या हानिकारक गतिविधियां पर पाबंदी लगाई है। फार्म हाउस को इस जोन में पहली बार बैन किया गया है। साथ ही, उन सभी गतिविधियों पर रोक रहेगी, जिसे सरकार आगे सार्वजनिक हित में प्रतिबंधित घोषित करे। सभी मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटीज को निर्देश टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की ओर से प्रदेश की पांचों मेट्रोपोलिटन डेवलेपमेंट अथॉरिटीज को इस संदर्भ में निर्देश जारी किए हैं। इनमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, सोनीपत व हिसार अथॉरिटी शामिल हैं। अथॉरिटीज को इन नियमों को तुरंत प्रभाव से लागू करने के लिए कहा गया है। इन सभी प्राधिकरणों को अपने-अपने डेवलपमेंट प्लानों में नई सूची के अनुसार संशोधन करने होंगे। आवेदन की प्रक्रिया होगी आसान नया नियम लागू होने के बाद मिक्सड लैंड यूज से जुड़े आवेदन पहले की तुलना में जल्दी निपटेंगे। जिन गतिविधियों पर प्रतिबंध नहीं है, उनके लिए विभाग को अलग से व्याख्या देने या स्पष्टीकरण मांगने की जरूरत नहीं रहेगी। इससे निवेशकों को स्पष्टता मिलेगी, डेवलपमेंट की गति बढ़ेगी और अनियमित उपयोग पर रोक लगेगी। सरकार का मानना है कि इससे योजनाबद्ध शहरी विकास को मजबूती मिलेगी और शहरों में असंगत या प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को जड़ से रोका जा सकेगा।

पंजाब के किसानों का दिल्ली मार्च शुरू, शंभू बॉर्डर बंद—हरियाणा में ट्रैफिक रूट बदलें

अंबाला  पंजाब के कुछ संगठनों ने आज दिल्ली कूच की घोषणा की है। इसके मद्देनजर हरियाणा पुलिस ने दिल्ली रूट के लिए ट्रैफिक एडवाइजरी जारी है। यह एडवाइजरी सुबह 5 बजे से प्रभावी हो गई है। पुलिस ने यात्रियों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने और निर्देशों का पालन करने की अपील की है। दिल्ली से अंबाला तक यातायात सामान्य एडवाइजरी में स्पष्ट किया गया है कि दिल्ली से अंबाला तक आने-जाने वाले मार्ग पर किसी प्रकार का व्यवधान नहीं रहेगा। इस रूट पर यात्रियों को यात्रा में किसी बड़ी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा।   शंभू बॉर्डर रहेगा बंद अंबाला से पटियाला की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी जारी करते हुए पुलिस ने बताया कि शंभू बॉर्डर पूर्णतः बंद रहेगा। इस कारण पटियाला दिशा में यातायात पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। इन वैकल्पिक मार्गों से यात्रा करें शाहाबाद → साहा → पंचकूला → चंडीगढ़ मार्ग अंबाला → ललड़ू → जीरकपुर → राजपुरा मार्ग पुलिस सहायता 24×7 उपलब्ध किसी भी आपात स्थिति या ट्रैफिक संबंधी समस्या में यात्री 112 पर कॉल कर सकते हैं। पुलिस ने कहा है कि उनकी टीमें लगातार तैनात हैं और हर स्थिति में सहायता के लिए तैयार हैं।

सोने में गिरावट, चांदी में उछाल: आज का गोल्ड-चांदी भाव (14 नवंबर)

इंदौर  अगर आपके घर में शादी या कोई खास फंक्शन है और आप सोना या चांदी खरीदने के लिए बाजार जाने का सोच रहे है तो पहले ताजा भाव जान लीजिए। आज 14 नवंबर को सोने के दाम में 770 रूपए प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई है वही चांदी की कीमतों में 100 रूपए प्रति किलो का उछाल आया है।आज शुक्रवार को 22 कैरेट सोने के दाम (Gold Rate Today) 1, 17,350 , 24 कैरेट का भाव 1,28,000 और 18 ग्राम सोने का रेट 96,040 रुपए पर ट्रेंड कर रहे है। वहीं 1 किलो चांदी का रेट (Silver Rate Today) 1, 73, 100 रुपए चल रहा है। आईए जानते है आपके शहर का 18, 22 और 24 कैरेट सोने का भाव…… शुक्रवार का 18 कैरेट सोने का ताजा भाव     दिल्ली व जयपुर सराफा बाजार में आज 10 ग्राम सोने की कीमत (Gold Rate Today) 96,040/- रुपये।     कोलकाता और मुंबई सराफा बाजार में 95,890/- रुपये।     इंदौर और भोपाल में सोने का भाव 96,890 चल रहा है।     चेन्नई सराफा बाजार में कीमत 98, 750/- रुपये पर ट्रेड कर रही है। शुक्रवार का 22 कैरेट सोने का ताजा भाव     भोपाल और इंदौर में आज 10 ग्राम सोने की कीमत (Gold Rate Today) 1,17,300/- रुपये ।     जयपुर, लखनऊ, दिल्ली सराफा बाजार में आज 10 ग्राम सोने की कीमत (Gold price Today) 1,17, 350/- रुपये ।     हैदराबाद, केरल, कोलकाता, मुंबई सराफा बाजार में 1 17,200/- रुपये ट्रेंड कर रहा है। शुक्रवार का 24 कैरेट सोने का ताजा भाव     भोपाल और इंदौर में आज 10 ग्राम सोने की कीमत 1,27,900 रुपये     दिल्ली जयपुर लखनऊ और चंडीगढ़ सराफा बाजार में आज 10 ग्राम सोने की कीमत 1, 28, 000/- रुपये।     हैदराबाद, केरल, बैंगलुरू और मुंबई सराफा बाजार में 1,27, 850/- रुपये ।     चेन्नई सराफा बाजार में कीमत 1,29, 160 /- रुपये पर ट्रेंड कर रहा है। पढ़िए शुक्रवार का आपके शहर का चांदी का लेटेस्ट रेट     जयपुर कोलकाता अहमदाबाद लखनऊ मुंबई दिल्ली सराफा बाजार में 01 किलोग्राम चांदी की कीमत (Silver Rate Today) 1,73,100 /- रुपये     चेन्नई, मदुरै , विजयवाड़ा, विशाखापटनम, हैदराबाद और केरल सराफा बाजार में कीमत 1,82,100/- रुपये।     भोपाल और इंदौर में 1 किलो चांदी की कीमत 1,73,100/ रुपए ट्रेंड कर रही है। कैसे चेक करें प्योरिटी? सोना खरा है या नहीं?     ISO (Indian Standard Organization) द्वारा सोने की शुद्धता पहचानने के लिए हॉल मार्क दिए जाते हैं।24 कैरेट गोल्ड 99.9 प्रतिशत शुद्ध होता है और 22 कैरेट लगभग 91 प्रतिशत शुद्धता होती है।24     कैरेट सोने में 1.0 शुद्धता (24/24 = 1.00) होनी चाहिए।     22 कैरेट गोल्ड में 9% अन्य धातु जैसे तांबा, चांदी, जिंक मिलाकर जेवर तैयार किए जाते हैं।22 कैरेट सोने में 0.916 शुद्धता (22/24 = 0.916) होनी चाहिए।     24 कैरेट सोने के आभूषण पर 999, 23 कैरेट पर 958, 22 कैरेट पर 916, 21 कैरेट पर 875 और 18 कैरेट पर 750 लिखा होता है।     24 कैरेट में कोई मिलावट नहीं होती, इसके सिक्के मिलते है, लेकिन 24 कैरेट सोने के आभूषण नहीं बनाए जा सकते, इसलिए ज्यादातर दुकानदार 18, 20 और 22 कैरेट सोना बेचते हैं और इसी के आभूषण बनाते है। चांदी पर हॉलमार्किंग का नियम     सोने के बाद अब 1 सितंबर 2025 से चांदी की ज्यूलरी पर हॉलमार्किंग का नियम लागू कर दिया है। हालांकि चांदी के लिए हॉलमार्किंग अनिवार्य नहीं है। आप बिना हॉलमार्क वाली चांदी भी खरीद सकते हैं।     हॉलमार्किंग के नियमों के तहत, चांदी पर 6 अंकों का यूनिक HUID कोड होगा। इससे तुरंत पता चल जाएगा कि गहना किस शुद्धता का है और वह असली है या नहीं।     भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने चांदी की शुद्धता के लिए 6 नए स्टैंडर्ड 800, 835, 900, 925, 970 और     990 तय किए हैं। 925 या 9250 अंक का मतलब है कि चांदी 92.5% शुद्ध है।

जेल से मैदान तक अनंत सिंह का दबदबा, मोकामा में 28 हजार वोटों की ऐतिहासिक जीत

मोकामा  बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों में मोकामा सीट से एक बार फिर अनंत सिंह ने मैदान मार लिया है. उन्होंने महागठबंधन की प्रत्याशी और सूरजभान की पत्नी वीणा देवी को 28206 वोटों से चुनाव हरा दिया है. अनंत सिंह को कुल 91406 वो मिले जबकि वीणा देवी को 63210 वोटों से संतोष करना पड़ा और वो दूसरे नंबर पर रहीं. मोकामा में 26 राउंड की गिनती खत्म, अनंत सिंह ने 28206 वोटों की बनाई निर्णायक बढ़त, वीणा देवी को मिले 63210 वोट  22वें राउंड की गिनती के बाद मोकामा से अनंत सिंह 22988 वोटों से आगे, अब तक मिले कुल 82787 वोट, सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को अब तक मिले 59799 वोट – मोकामा से अनंत सिंह 19287 वोटों से निकले आगे, 18वें राउंड की गिनती के बाद अब तक मिले 68132 वोट, वीणा देवी को 48845 वोट – मोकामा से अनंत सिंह ने 14480 वोटों से बनाई बढ़त, अब तक मिले 45386 वोट, वीणा देवी को अब तक 30906 वोट – मोकामा से अनंत सिंह ने बनाई 9665 वोटों की बढ़त, वीणा देवी पिछड़ीं, अनंत सिंह को अब तक मिले 32552 वोट – अनंत सिंह के पटना आवास पर जश्न, शुरू हो गई दावत, ढोल नगाड़ों पर नाच रहे समर्थक – अनंत सिंह ने मोकामा से बनाई बड़ी लीड, अब तक 15034 वोट आए, वीणा देवी के खिलाफ 2031 वोटों की बनाई बढ़त – अनंतमय होता दिख रहा मोकामा, 4524 से ज्यादा वोटों से निकले आगे – जेल में बंद अनंत सिंह की मोकामा में लगातार बढ़त जारी – मोकामा सीट पर राजेश कुमार रत्नाकर पिछड़े – मोकामा में शुरुआती रुझानों में अनंत सिंह निकले आगे – मोकामा में वोटों की गिनती शुरू, गिने जा रहे हैं पोस्टल बैलेट्स इस सीट का नतीजा न सिर्फ मोकामा बल्कि पूरे पटना ज़िले की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है. फिलहाल सबकी नज़रें इसी मुकाबले पर है जहां बाहुबल, प्रभाव और जनसमर्थन तीनों की सीधी टक्कर दिख रही है. एक ओर हैं बाहुबली नेता अनंत सिंह हैं जो अपने क्षेत्र में मजबूत जनाधार और दबदबे के लिए जाने जाते हैं, वहीं उनके सामने हैं पूर्व सांसद और बाहुबली सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी, जिन्हें महागठबंधन का समर्थन प्राप्त है. मोकामा की इस सीट पर परंपरागत रूप से बाहुबल और प्रभावशाली व्यक्तित्व राजनीति पर हावी रहे हैं, और इस बार भी मुकाबला उसी अंदाज़ में तेज़ हो चुका है. अनंत सिंह जेल में है लेकिन दोनों उम्मीदवारों ने अपने-अपने गढ़ में पूरी ताक़त झोंक दी है . दोनों ही प्रत्याशी भूमिहार समाज से आते हैं.

H-1B वीजाधारकों की मुश्किल बढ़ी: अमेरिकी विधेयक स्वदेश वापसी और नागरिकता का रास्ता भी प्रभावित करेगा

वॉशिंगटन एक अमेरिकी सांसद एच-1बी वीजा कार्यक्रम को "पूरी तरह से समाप्त" करने और इसके द्वारा प्रदान की जाने वाली नागरिकता के रास्ते को छीनने के लिए एक विधेयक पेश करेंगे. इससे व्यक्तियों को अपने वीजा की अवधि समाप्त होने पर "स्वदेश लौटने" के लिए मजबूर होना पड़ेगा. जॉर्जिया की कांग्रेस सदस्य मार्जोरी टेलर ग्रीन ने एक्स पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा, "मेरे प्यारे अमेरिकी साथियों, मैं एच-1बी वीजा कार्यक्रम को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए एक विधेयक पेश कर रही हूं, जो धोखाधड़ी और दुरुपयोग से भरा हुआ है और दशकों से अमेरिकी कामगारों को विस्थापित कर रहा है." उन्होंने कहा कि उनके विधेयक में केवल एक छूट होगी, जो अमेरिकियों को जीवन रक्षक देखभाल प्रदान करने वाले डॉक्टरों और नर्सों जैसे चिकित्सा पेशेवरों को जारी किए जाने वाले वीजा पर प्रति वर्ष 10,000 की सीमा की ही अनुमति देगा. हालांकि, ग्रीन ने कहा कि यह 10,000 प्रतिवर्ष की सीमा भी 10 वर्षों में "चरणबद्ध तरीके से समाप्त" कर दी जाएगी, ताकि "हमें अमेरिकी डॉक्टरों और चिकित्सकों की अपनी पाइपलाइन बनाने का समय मिल सके." ग्रीन ने आगे कहा कि उनका विधेयक "नागरिकता का रास्ता भी छीन लेगा, जिससे वीजाधारकों को अपने वीजा की अवधि समाप्त होने पर स्वदेश लौटने के लिए मजबूर होना पड़ेगा." उन्होंने आगे कहा कि उनके विधेयक का उद्देश्य एच-1बी वीजा के "मूल उद्देश्य" को बहाल करना है, जो "इसे अस्थायी बनाना" था. उन्होंने कहा, "ये वीजा किसी विशेष व्यावसायिक जरूरत को पूरा करने के लिए थे. लोगों को हमेशा के लिए यहां आकर रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. हम उनकी विशेषज्ञता के लिए उनका धन्यवाद करते हैं, लेकिन हम उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना भी करते हैं, ताकि वे अपने देश लौट सकें." "अब यह एच-1बी वीजा कार्यक्रम और नौकरी और कार्यबल के सभी अन्य क्षेत्रों को पूरी तरह से समाप्त कर देगा. यह अमेरिका पहले है. अब समय आ गया है कि विदेशियों के बजाय अमेरिकी नागरिकों को प्राथमिकता दी जाए, और यह बहुत लंबे समय से एक दुरुपयोग रहा है. अमेरिकी एक भविष्य के हकदार हैं, उन्हें एक मौका मिलना चाहिए. और मेरा मानना ​​है कि अमेरिकी दुनिया के सबसे प्रतिभाशाली लोग हैं, सबसे रचनात्मक हैं, और मैं चाहती हूं कि वे अपना अमेरिकी सपना पूरा करें." देश में अमेरिकी डॉक्टरों और चिकित्सा पेशेवरों की एक नई पीढ़ी तैयार करने के लिए, ग्रीन ने कहा कि उनका विधेयक मेडिकेयर-वित्त पोषित रेजीडेंसी कार्यक्रमों में गैर-नागरिक मेडिकल छात्रों को अपने कार्यक्रमों में प्रवेश देने से रोकेगा. उन्होंने बताया कि पिछले साल ही, अमेरिका में 9000 से ज़्यादा डॉक्टर ऐसे थे, जिन्होंने मेडिकल स्कूल से स्नातक किया, लेकिन उन्हें रेजीडेंसी प्लेसमेंट नहीं मिला. उन्होंने बताया कि इस बीच, अकेले 2023 में 5000 से अधिक विदेशी मूल के डॉक्टरों को रेजिडेंसी स्थान प्राप्त हुआ. उन्होंने कहा, "यह पूरी तरह से अनुचित है, और यह अमेरिका का मामला है. मेरा विधेयक हमारे देश में डॉक्टरों और नर्सों की कमी को कम करने में मदद करेगा, जिसका हम सामना कर रहे हैं. साथ ही यह हमें अपने रेजिडेंसी कार्यक्रमों को अमेरिकी डॉक्टरों से भरने का समय देकर विदेशी कर्मचारियों पर हमारी निर्भरता को कम करने में भी मदद करेगा." कांग्रेस द्वारा निर्धारित सीमा 65,000 नियमित H-1B वीजा और अमेरिकी उन्नत डिग्री धारकों के लिए 20,000 वीजा प्रति वर्ष जारी किए जाते हैं. अमेरिकी व्यवसाय विशिष्ट व्यवसायों में विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए H-1B कार्यक्रम का उपयोग करते हैं. ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा कार्यक्रम के दुरुपयोग को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की है. इसका उपयोग कंपनियां, विशेष रूप से प्रौद्योगिकी कंपनियां, अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए करती हैं. भारतीय पेशेवर, जिनमें प्रौद्योगिकी कर्मचारी और चिकित्सक शामिल हैं. H-1B वीजाधारकों के सबसे बड़े समूह में शामिल हैं. कंपनियां अपने H-1B कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास के लिए आवेदन कर सकती हैं, जो ग्रीन कार्ड प्राप्त करने के 5 साल बाद अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं. इस साल सितंबर में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी गैर-आप्रवासी वीजा कार्यक्रम में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक कदम के रूप में, 'कुछ गैर-आप्रवासी श्रमिकों के प्रवेश पर प्रतिबंध' शीर्षक से एक घोषणा जारी की. इस घोषणा के तहत, 21 सितंबर, 2025 के बाद दायर की जाने वाली कुछ एच-1बी आवेदनों के साथ पात्रता की शर्त के रूप में 1,00,000 अमेरिकी डॉलर का अतिरिक्त भुगतान करना होगा.

जानिए क्यों बिहार में तेजस्वी यादव की हुई दुर्गति: 5 अहम वजहें

पटना     बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों करीब करीब आ चुके हैं. बिहार की जनता ने तेजस्वी यादव और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को बड़ा झटका दिया है. 14 नवंबर को सुबह 10.45 पर जो रुझान दिख रहा है उसमे महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस-वाम) 54 सीटों पर सिमटता दिख रहा, जबकि एनडीए (बीजेपी-जेडीयू) 185 सीटों पर मजबूत दिख रही है. ताजा रुझानों में तेजस्‍वी खुद अपनी सीट पर पीछे चल रहे हैं. जाहिर है कि बिहार की जनता ने महागठबंधन और तेजस्वी यादव को हराया नहीं है बल्कि एक तरह से नकार दिया है. आखिर जो पार्टी और जो नेता चुनाव के दिन तक बराबरी का टक्कर देने का दावा कर रहा था वो इस तरह कैसे धराशाई हो गया. आइये देखते हैं इसके पीछे क्या कारण रहे? 52 यादव उम्मीदवारों को टिकट देना गलत साबित हुआ इस हार की एक प्रमुख वजह आरजेडी द्वारा 52 यादव उम्मीदवारों को टिकट देना साबित हुआ. यह फैसला न केवल जातिवादी छवि को मजबूत कर गया, बल्कि गैर-यादव वोट बैंक को दूर भगा दिया. बिहार की राजनीति जाति पर टिकी है, जहां यादव (14% आबादी) आरजेडी का कोर वोट बैंक है, लेकिन 52 टिकट यादवों को देने से पब्लिक को यादव राज की गंध आने लगी . जिसके चलते अगड़े और अति पिछड़े महागठबंधन से दूर हो गए. आरजेडी ने कुल 144 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, जिनमें 52 यादव थे जो कुल प्रत्याशियों का लगभग 36% था.  यह संख्या 2020 के 40 से बढ़ी, जो तेजस्वी की 'यादव एकीकरण' रणनीति का हिस्सा थी. महागठबंधन में सीट शेयरिंग के तहत आरजेडी को 143 सीटें मिलीं थीं. हो सकता है कि आरजेडी को यादव सीटों पर अच्छी सफलता मिल जाए पर ओवरऑल यह नुकसान कर गया.  बीजेपी ने प्रचार में 'आरजेडी का यादव राज' का नैरेटिव चलाया, जो शहरी और मध्यम वर्ग में गूंजा. तेजस्वी ने यदि 30-35 यादव टिकटों तक सीमित रखा होता तो कुर्मी-कोइरी वोटों का हिस्सा 10-15% बढ़ सकता था.जैसा अखिलेश यादव ने 2024 के लोकसभा चुनावों में किया था. उन्होंने केवल 5 यादव प्रत्याशियो को मैदान में उतारा. बाकी पिछड़ी जातियों और सवर्णों को वोट देकर उन्हें अपना बना लिया. सहयोगी पार्टियों को भाव न देना तेजस्वी यादव की रणनीति में सबसे बड़ी चूक अपने सहयोगियों कांग्रेस, वाम दलों और छोटी पार्टियों के साथ 'बराबर भाव' न रखना साबित हुआ. सीट शेयरिंग विवादों ने गठबंधन को कमजोर किया, और तेजस्वी के 'आरजेडी सेंट्रिक' अप्रोच ने विपक्ष को बांट दिया. यह न केवल वोट ट्रांसफर फेल कर गया, बल्कि एनडीए को 'एकजुट' दिखाने का मौका दिया.  कांग्रेस ने 'गारंटी' मेनिफेस्टो पर जोर दिया, लेकिन तेजस्वी ने 'नौकरी देंगे' को प्राथमिकता दी, जो सहयोगियों को चुभा. इतना ही नहीं तेजस्वी ने महागठबंधन के घोषणापत्र का नाम भी तेजस्वी प्रण रखकर सबको पीछे कर दिया. तेजस्वी ने प्रचार में सहयोगियों को बैकसीट पर रखा. रैलियों में राहुल गांधी की तस्वीरें कम, तेजस्वी की ज्यादा दिखीं.  तेजस्वी का अपने वादों का ब्लू प्रिंट नहीं दे पाना तेजस्वी की सबसे बड़ी चूक यह रही कि वो वादे तो बहुत कर दिए पर उसका ठोस ब्लूप्रिंट नहीं दे पाए. हर घर को एक सरकारी नौकरी, पेंशन, महिला सशक्तिकरण और शराबबंदी की समीक्षा जैसे वादे तो किए, लेकिन फंडिंग, कार्यान्वयन योजना या समयबद्ध ब्लूप्रिंट के अभाव ने वोटरों में अविश्वास पैदा किया. हर घर को सरकारी नौकरी पर वो खुद जवाब नहीं दे सके. हर रोज कहते रहे कि बस अगले 2 दिन में ब्लू प्रिंट आ जाएगा. पर चुनाव बीत जाने के बाद भी वो दिन नहीं आया. महागठबंधन का मुस्लिमपरस्त छवि बन जाना महागठबंधन की 'मुस्लिमपरस्त' छवि तेजस्वी यादव की हार का बड़ा कारण बनी. मुस्लिम बहुल सीटों पर तो आरजेडी या महागठबंधन के अन्य सहयोगियों की जीत संभव होगी पर पूरे प्रदेश में इसका नुकसान हुआ. खुद यादव जाति के वोट कई जगहों पर आरजेडी को नहीं मिले. सत्ता मिलने पर बिहार में वक्फ बिल नहीं लागू करने वादा जिस तरह तेजस्वी ने किया वह बहुत से यादव बंधुओं को भी पसंद नहीं आया. बीजेपी ने लालू यादव के संसद में वक्फ बिल के अत्याचार के खिलाफ दिए भाषण को खूब वायरल कराया जिसका फायदा उसे मिला. अपने पिता लालू प्रसाद को लेकर कन्फ्यूज रहे तेजस्वी   तेजस्वी ने लालू की विरासत को अपनाया, लेकिन पोस्टर्स में उनकी तस्वीर को छोटा कर 'नई पीढ़ी' को क्या दिखाने की कोशिश की यह समझ में नहीं आया. यह दोहरी नीति उल्टी पड़ गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोपालगंज रैली में कहा, तेजस्वी लालू के पाप छिपा रहे हैं.  तेजस्वी ने लालू के सामाजिक न्याय एजेंडे को अपनाया, लेकिन 'जंगल राज' छवि से डरकर दूरी बनाई. पोस्टर्स में लालू को कोने में ठूंसना उनका अपमान ज्यादा था.  

कांग्रेस से दोस्ती का ‘रिटर्न गिफ्ट’? तेजस्वी यादव को भी मिला वही तगड़ा नुकसान

पटना  ईंट बांधकर तैरना जितना कठिन है, उतना ही मुश्किल किसी दल के लिए कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ना हो चुका है। यह बात 2017 में यूपी में अखिलेश यादव की करारी हार ने साबित की थी और वही स्थिति अब बिहार में हई है। यहां आरजेडी से लड़कर 62 सीटें कांग्रेस ने ली थीं और जब चुनाव नतीजे आए तो अब तक 6 सीटों पर ही कांग्रेस की बढ़त है। इस तरह उसका स्ट्राइक रेट 10 फीसदी से भी कम है। 2017 में यूपी चुनाव में 100 सीटों पर कांग्रेस ने चुनाव लड़ा था और 7 पर ही जीती थी। इस नतीजे को लेकर माना गया था कि कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ना सपा को भारी पड़ा।   फिर उन्होंने 2017 में अपनी रणनीति में बदलाव किया और सपा अलग होकर चुनाव लड़ी थी। लेकिन तेजस्वी यादव ने कोई सबक नहीं लिया और 2017 वाली अखिलेश यादव की गलती बिहार में दोहरा दी। नतीजा सामने है। दरअसल 2014 के बाद से ही लगातार ऐसा देखा जा रहा है कि जब भी कांग्रेस सामने होती है तो भाजपा का प्रदर्शन शानदार होता है। इसके अलावा क्षेत्रीय दलों के मुकाबले भी कांग्रेस नहीं टिक पाती है। ऐसे में कांग्रेस को ज्यादा सीटें देना आरजेडी के लिए घातक साबित हुआ है। इसके अलावा समन्वय स्थापित ना हो पाने का नुकसान भी सीधे तौर पर आरजेडी को हुआ है। कांग्रेस को भाकपा-माले ने दिखाया आईना, शानदार स्ट्राइक रेट दिलचस्प बात यह है कि महज 20 सीटों पर लड़ने वाले वामपंथी दल भाकपा-माले की 7 सीटों पर बढ़त है। ऐसे में कांग्रेस ने अपनी हार से महागठबंधन की भी हार की पटकथा लिख दी है। वहीं एनडीए की बात करें तो अमित शाह लगातार पटना में कैंप करते रहे। तीन दिन तो वह निकले ही नहीं और लगातार सहयोगी दलों के साथ मिलकर मंथन करते रहे। इसका सीधा फायदा एनडीए को मिला है, जबकि महागठबंधन को करारा झटका लगा। यही नहीं प्रचार में भी एनडीए आगे रहा। खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने कैंपेन को लीड किया और अमित शाह ने भी 36 रैलियां कीं तो वहीं राजनाथ सिंह भी 20 रैलियों में नजर आए। भाजपा के लिए योगी समेत प्रचार में उतरे थे कई सीएम यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ हों या फिर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भाजपा ने पूरी फौज ही प्रचार में उतारे रखी। इसके अलावा जेडीयू, लोजपा जैसे दलों के नेता भी कंधे से कंधा मिलाकर प्रचार करते रहे। इसके उलट महागठबंधन में ना तो सहमति बनी और ना ही प्रचार में समन्वय नजर आया।  

वीरेंद्र तोमर को पांच दिन की रिमांड के बाद कोर्ट में पेश किया जाएगा, पुलिस ने जेल भेजने की अर्जी तैयार की

रायपुर पांच महीने की फरारी के बाद ग्वालियर में गिरफ्तार हिस्ट्रीशीटर वीरेन्द्र सिंह तोमर से पुलिस की पूछताछ पूरी हो गई है. पुलिस शुक्रवार को आरोपी को कोर्ट में पेश करगी और न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने का आग्रह किया जाएगा. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दर्ज दो केस आर्म्स एक्ट और सूदखोरी, ब्लैकमेल और वसूली केस में पूछताछ की है. घर के लॉकर में मिले हथियार को आरोपी ने अपने सुरक्षा गार्ड का बताया है जबकि क्षत्रिय करणी सेना से जुड़े लोगों द्वारा फरारी के दौरान मदद करने की जानकारी उसने दी है. दूसरी तरफ हिस्ट्रीशीटर रोहित तोमर समेत अन्य सहयोगियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज कर दी गई है. पीड़ित अब भी डरे हुए हैं इसलिए नहीं कराया आमना-सामना पुलिस ने पूछताछ के दौरान रिपोर्टकर्ता पीड़ितों और आरोपी का आमना-सामना नहीं कराया. बल्कि जब्त एग्रीमेंट, चेक और प्रॉपर्टी के एक-एक दस्तावेजों को लेकर आरोपी से पूछताछ की. पुलिस ने दिए गए कर्ज की राशि, तय ब्याज और वसूली गई राशि से संबंधित दस्तावेजों की भी जानकारी ली है. ताकि उन्हें कोर्ट में पेश किया जा सके. पुलिस का दावा है कि पीड़ित लोग हिस्ट्रीशीटर वीरेन्द्र सिंह तोमर और रोहित सिंह तोमर की फरारी के दौरान भी भयभीत रहे हैं. अभी रोहित सिंह तोमर फरार है. उसके खिलाफ चार मामले दर्ज हैं. रोहित तोमर और केस में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज की गई है. पुलिस वालों के घर घुसकर आंदोलन की चेतावनी क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है, जिसमें हिस्ट्रीशीटर वीरेन्द्र सिंह तोमर का जुलूस निकालने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई को गलत बताया गया है. राष्ट्रीय अध्यक्ष ने छत्तीसगढ़ आकर रायपुर में आंदोलन करने की चेतावनी दी है. साथ ही कहा है कि जिन पुलिस अधिकारियों ने गलत किया, उनके घर में घुसकर आंदोलन किया जाएगा.

लुधियाना में धमाका, बुरी तरह झुलसे लोग, मची अफरा-तफरी

लुधियाना(खुराना) लुधियाना के औद्योगिक क्षेत्र नीची मंगली में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक गैस सिलेंडर की पाइप लीक होने से अचानक भीषण आग भड़क उठी। हादसा इतना तेज था कि वहां मौजूद तीन लोग आग की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गए। घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच जारी है। मौके पर फायर ब्रिगेड और पुलिस टीम पहुंच चुकी है और हालात को नियंत्रण में करने के प्रयास किए जा रहे हैं। 

Honor का नया स्मार्टफोन हुआ तैयार: मिलेगा 200MP कैमरा और विशाल 8000mAh बैटरी

नई दिल्ली Honor अपनी नई 500 सीरीज को लेकर काफी समय से चर्चा में है. इस सीरीज के दो स्मार्टफोन Honor 500 और Honor 500 Pro जल्द ही बाजार में आने वाले हैं. लॉन्च से पहले ही Honor 500 Pro की कई अहम जानकारियां सामने आ गई हैं, जिनसे साफ पता चलता है कि यह फोन अपने दमदार कैमरा, बेजोड़ बैटरी और हाई-परफॉर्मेंस चिपसेट के साथ मार्केट में काफी हलचल मचाने वाला है. एक मशहूर चाइनीज टिप्सटर Digital Chat Station ने इस फोन के लगभग सभी मुख्य फीचर्स सोशल मीडिया पर शेयर किए हैं. उनके अनुसार, फोन में एक मजबूत R-angle मेटल फ्रेम दिया जाएगा, जो इसे प्रीमियम फील देगा. डिस्प्ले Honor 500 Pro में 6.55-इंच का फ्लैट OLED डिस्प्ले मिलने की उम्मीद है.     रिज़ॉल्यूशन: 1,264 × 2,736 पिक्सल     रिफ्रेश रेट: 120Hz     ये स्क्रीन गेमिंग और स्क्रॉलिंग दोनों को काफी स्मूद बनाएगी. परफॉर्मेंस और पावर: Snapdragon 8 Elite के साथ जबरदस्त स्पीड फोन में Honor कंपनी Qualcomm Snapdragon 8 Elite चिपसेट दे सकती है, जो फ्लैगशिप लेवल परफॉर्मेंस देता है. इसके साथ:     16GB तक RAM     1TB तक स्टोरेज जैसे ऑप्शन मिलेंगे. यानी भारी गेम, बड़े फाइल्स और मल्टीटास्किंग सब कुछ बिना किसी लैग के चलेगा. Tipster ने ये भी बताया है कि इसमें बेहतर एनर्जी मैनेजमेंट के लिए C1, RF और E2 चिप्स का इस्तेमाल किया जाएगा. कैमरा: 200MP का सुपर प्राइमरी सेंसर Honor 500 Pro का सबसे बड़ा हाइलाइट इसका कैमरा है. फोन में: 200MP का मुख्य कैमरा सेंसर मिलने वाला है, जिससे हाई-डेफिनिशन फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग का अनुभव काफी शानदार होगा. हालांकि टिपस्टर का कहना है कि प्रोटोटाइप के मुकाबले कैमरा परफॉर्मेंस थोड़ा कम रह सकता है, क्योंकि इसमें स्टैकिंग तकनीक का अभाव है. लेकिन फिर भी 200MP सेंसर अपने आप में एक बड़ी ताकत है. बताया जा रहा है कि कैमरा डिज़ाइन (डेको) को Apple की तरह कोल्ड-कार्विंग प्रोसेस से बनाया जाएगा, जिससे इसका लुक प्रीमियम और आकर्षक होगा. सिक्योरिटी और बैटरी: दोनों ही टॉप-क्लास फोन में 3D अल्ट्रासोनिक फिंगरप्रिंट सेंसर दिया जा सकता है, जो सामान्य सेंसर की तुलना में तेज़ और ज्यादा सटीक होता है. अब बात करते हैं बैटरी की, जो इस फोन को बाकी सभी से अलग करती है:     8000mAh की बड़ी बैटरी (सिलिकन टेक्नोलॉजी के साथ)     80W फास्ट वायर्ड चार्जिंग     50W वायरलेस चार्जिंग इतनी बड़ी बैटरी के साथ फोन दिनभर की हेवी यूज़ में भी आराम से चल सकता है. और फास्ट चार्जिंग के साथ बैकअप की टेंशन भी नहीं. Honor 500 Pro बनेगा नया पावरफुल फोन? स्पेसिफिकेशन देखकर साफ है कि Honor 500 Pro एक प्रीमियम फीचर वाली, पावरफुल परफॉर्मेंस देने वाली डिवाइस होगी.     बड़ा डिस्प्ले     200MP कैमरा     8000mAh बैटरी     Snapdragon 8 Elite इन सभी को एक फोन में मिलना इसे अपने सेगमेंट में बड़ा गेम-चेंजर बना सकता है.