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छोटे बच्चों के कान में तेल डालना कितना सही? एक्सपर्ट्स ने किया साफ

बच्चों की देखभाल में माता-पिता हर चीज़ को लेकर बेहद सतर्क रहते हैं। नहाने से लेकर खाना खिलाने तक, हर काम में सावधानी बरतनी पड़ती है। इसी तरह बच्चे के कानों की सफाई भी एक ऐसा विषय है जिसमें कई लोग पारंपरिक तरीकों का उपयोग करते हैं। पुराने समय से घरों में बच्चों के कान और नाक में सरसों का तेल डालने की परंपरा चली आ रही है। कई परिवार आज भी यह मानकर ऐसा करते हैं कि इससे कान की गंदगी (earwax) ढीली होकर आसानी से बाहर निकल जाएगी। लेकिन आधुनिक चिकित्सा क्या कहती है? क्या यह तरीका वास्तव में सही और सुरक्षित है? आइए इसे विस्तार से समझते हैं। क्या बच्चों के कान में तेल डालना सही है? विशेषज्ञों के अनुसार, कान में तेल डालने की प्रक्रिया को कर्ण पूर्ण कहा जाता है। यह कभी-कभी earwax को नरम करने में मदद कर सकती है और कुछ लोगों में कान के सूखापन को भी कम कर सकती है। हालांकि, यह आवश्यक नहीं कि यह तरीका हर बच्चे या हर उम्र में सुरक्षित हो। खासकर छोटे बच्चों के कान बहुत नाज़ुक और संवेदनशील होते हैं। अगर उनके कान में बिना डॉक्टर की सलाह के तेल डाला जाए, तो इससे कान में जलन, संक्रमण या अन्य समस्याएँ हो सकती हैं। कई बार तेल कान के अंदर जाकर फंस जाता है, जिससे आगे चलकर गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं। इसी कारण डॉक्टरों का मानना है कि बच्चों के कानों में तेल डालने से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। 1 साल से छोटे बच्चे को न दें ये 6 Foods, हो सकते हैं खतरनाक! 6 महीने से छोटे बच्चों में तेल बिल्कुल नहीं डालना चाहिए छह महीने से कम उम्र के बच्चों के कान बेहद नाज़ुक होते हैं। इस उम्र में कान का पर्दा (eardrum) और अंदरूनी संरचना पूरी तरह विकसित नहीं होती। ऐसे में तेल डालने से न सिर्फ जलन और इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है, बल्कि गाढ़ा तेल भीतर जाकर चिपक सकता है, जिससे सुनने में समस्या भी हो सकती है। कई बार तेल से कान नम हो जाता है और बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं, जिससे गंभीर संक्रमण की संभावना और बढ़ जाती है। इसलिए छह महीने से छोटे बच्चों में तेल डालना पूरी तरह से असुरक्षित माना जाता है। अगर खुजली या पीप हो  तो तेल नहीं डालना चाहिए अगर बच्चे के कान में पहले से कोई समस्या है, जैसे कान दर्द, खुजली, पानी या पीप आना, तो तेल डालना बिल्कुल नहीं चाहिए। ऐसा करने से कान का संक्रमण और ज्यादा बढ़ सकता है। तेल बैक्टीरिया या फंगस को पनपने का मौका देता है, जिससे बीमारी गंभीर हो सकती है। कभी-कभी कान के पर्दे में हल्का छेद होना सामान्य है, और यदि ऐसे में तेल डाला जाए तो यह सीधे कान के अंदर जाकर नुकसान पहुँचा सकता है। इसलिए यदि बच्चे के कान में पहले से कोई लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, न कि तेल डालकर इलाज करने की कोशिश। यदि डॉक्टर अनुमति दें, तो अगर डॉक्टर किसी खास वजह से बच्चे के कान में तेल डालने की अनुमति देते हैं, तो यह काम बहुत सावधानी से करना चाहिए। सबसे पहले इस्तेमाल किया जाने वाला तेल हल्का गुनगुना होना चाहिए। बहुत ज्यादा गर्म तेल कान को जला सकता है, जबकि ठंडा तेल असहजता और दर्द पैदा कर सकता है। तेल 1–2 बूँद से ज्यादा नहीं डालना चाहिए। तेल डालने के बाद बच्चे को कुछ मिनट के लिए करवट लिटाएँ ताकि तेल सही तरह अंदर पहुंचे। बाल हटाने के महंगे तरीके छोड़ें, बच्चों के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय कान की सफाई करते समय केवल बाहर की सतह को ही साफ करना चाहिए। इसके लिए कॉटन बॉल का हल्का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन कॉटन बड्स या स्टिक को कभी भी कान के अंदर तक नहीं डालना चाहिए। इससे earwax और ज्यादा अंदर धकेली जा सकती है, जिससे blockage या संक्रमण हो सकता है। छोटे बच्चों के कानों की गहरी सफाई हमेशा डॉक्टर से करवाना बेहतर माना जाता है। पारंपरिक तौर पर बच्चों के कान में तेल डालना सुरक्षित माना जाता था, लेकिन आधुनिक मेडिकल साइंस के अनुसार यह तरीका हमेशा सुरक्षित नहीं होता, खासकर छोटे बच्चों के लिए। बिना डॉक्टर की सलाह के कान में तेल डालना कई समस्याओं को जन्म दे सकता है, जैसे संक्रमण, जलन, blockage और eardrum को नुकसान। इसलिए बच्चों के कानों की सफाई खुद से करने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना सबसे सुरक्षित और समझदारी भरा कदम है।

झारखंड के रामगढ़ में हाथियों का हमला, महिला की दर्दनाक मौत

रामगढ़ झारखंड के रामगढ़ जिले के जगेश्वर ओपी क्षेत्र अंतर्गत खरकंडा गांव में रविवार देर रात हाथियों के एक बड़े झुंड ने भारी उत्पात मचा दिया। करीब आधी रात को अचानक गांव में घुसे इस झुंड ने न केवल कई घरों को तहस-नहस किया, बल्कि 45 वर्षीय सांझो देवी की कुचलकर हत्या भी कर दी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत और आक्रोश व्याप्त है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बोकारो सीमा से लगे इस गांव में देर रात हाथियों के झुंड के प्रवेश की भनक लगते ही ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। अपनी सुरक्षा के लिए अधिकांश ग्रामीण घरों की छतों पर चढ़कर छिप गए, लेकिन सांझो देवी समय पर सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंच सकीं और हाथियों के हमले का शिकार हो गईं। हाथियों ने कई कच्चे और पक्के मकानों को तोड़ दिया तथा घरों में रखे धान सहित अन्य खाद्यान्न भी खा लिए। ग्रामीणों का कहना है कि झुंड करीब दो घंटे तक गांव में डेरा जमाए रहा, जिसके चलते भारी नुकसान हुआ। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम देर रात गांव पहुंची, लेकिन तब तक हाथी काफी तबाही मचा चुके थे। विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए सुबह तक झुंड को गांव से बाहर खदेड़ने की कोशिशें जारी रखीं। अधिकारियों के अनुसार झुंड अभी भी गांव के आसपास ही मौजूद है, जिससे सभी को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। सोमवार सुबह घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने लालपनिया रोड को जाम कर दिया। प्रदर्शनकारी मृतका के परिजनों को उचित मुआवजा, परिवार के लिए स्थायी सहायता और क्षतिग्रस्त घरों की भरपाई की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन पर समय पर कार्रवाई न करने और गांव में हाथियों की बढ़ती आवाजाही पर रोक नहीं लगाने का आरोप भी लगाया है। फिलहाल प्रशासन और वन विभाग स्थिति को नियंत्रित करने और ग्रामीणों को राहत देने के प्रयास में जुटे हुए हैं।  

दिव्यांगजन कल्याण एवं पुनर्वास नीति 2025: ड्राफ्ट को सशक्त बनाने हेतु 18 नवंबर को कार्यशाला

  ’राष्ट्रीय स्तर के प्रसिद्ध विशेषज्ञ का होगा विमर्श’ रायपुर, छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग और यूनिसेफ के विशेष सहयोग से रायपुर स्थित एक नीजि होटल में ’’छत्तीसगढ़ राज्य दिव्यांगजन कल्याण एवं पुनर्वास नीति 2025’’ के ड्राफ्ट को और सशक्त बनाने महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन करेगा। यह कार्यशाला महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न होगी। कार्यशाला का उद्देश्य है कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत प्रदेश के दिव्यांगजनों के लिए एक व्यापक और समावेशी नीति को अंतिम रूप देना है। दिव्यागजन अधिकार अधिनियम, 2016 एक ऐतिहासिक कानून है जो दिव्यांगता को दया के बजाय ’अधिकार’ के विषय के रूप में स्थापित करता है। अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा ’’छत्तीसगढ़ राज्य दिव्यांगजन कल्याण एवं पुनर्वास नीति 2025’’ का एक व्यापक ड्राफ्ट तैयार किया गया है। ड्राफ्ट को और अधिक सशक्त एवं समावेशी बनाने के लिए यह कार्यशाला यूनिसेफ के विशेष सहयोग से आयोजित की जा रही है। यह कार्यशाला ’’हमारे बिना, हमारे बारे में कुछ भी नहीं’’ के मार्गदर्शी सिद्धांत पर आधारित होगी। इसका मुख्य उद्देश्य नीति को अंतिम रूप देने से पहले प्रमुख हितधारकों, विभिन्न संबंधित विभागों और राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों से अमूल्य सुझाव एवं व्यावहारिक फीडबैंक प्राप्त करना है। इस महत्वपूर्ण विमर्श को तकनीकी और विशेषज्ञ राय प्रदान करने के लिए देश के जाने-माने विशेषज्ञ शामिल होंगे। इनमें श्री राजीव रतूड़ी (राजीव रतूड़ी बनाम भारत संघ के ऐतिहासिक मामले में मुख्य याचिकाकर्ता एवं डिसेबिलिटी राइट्स प्रमोशन इंटरनेशनल के एशिया पेसिफिक क्षेत्रीय अधिकारी), श्री समीर घोष (समावेश सलाहकार, विश्व बैंक), श्री अखिल पॉल (मुख्य संरक्षक, सेंस इंटरनेशनल इंडिया) और यूनिसेफ की विशेषज्ञ सुश्री अलका मल्होत्रा प्रमुख हैं। नीति-निर्माण में ’’समग्र शासन दृष्टिकोण’’ सुनिश्चित करने के लिए कार्यशाला में राज्य शासन के विभिन्न प्रमुख विभागों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। कार्यशाला में गृह (पुलिस), पंचायत एवं ग्रामीण विकास, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति कल्याण, जनसंपर्क एवं पर्यटन, सामान्य प्रशासन, लोक निर्माण विभाग, स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, वित्त, वाणिज्य एवं उद्योग, परिवहन, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, उच्च शिक्षा, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, महिला एवं बाल विकास, नगरीय प्रशासन एवं विकास, श्रम, खेल एवं युवा कल्याण और ग्रामोद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। कार्यशाला में मुख्य अपेक्षित परिणाम ड्राफ्ट नीति के हर अध्याय जैसे- शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सुलभता और सामाजिक सुरक्षा पर विशेषज्ञों और इन सभी विभागों से ठोस इनपुट प्राप्त करना है। कार्यशाला में प्राप्त सुझावों को समाहित कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अंतिम नीति न केवल व्यापक, समावेशी और सुदृढ़ बने, बल्कि प्रदेश में दिव्यांगजनों के जीवन में वास्तविक व सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

विश्वास सारंग बोले- कांग्रेस की गलती ने पार्टी को ले डूबा, दिग्विजय और राहुल पर कटाक्ष

भोपाल  मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस पर बड़ा हमला किया है, उन्होंने कहा कि बिहार की जनता के फैसले को कांग्रेस नेताओं को स्वीकार करना चाहिए और आत्मचिंतन करना चाहिए, जनमत को स्वीकार करना हर राजनीतिक दल का कर्तव्य है। उन्होंने राहुल गांधी और दिग्विजय सिंह पर भी निशाना साधा। मध्य प्रदेश के पचमढ़ी में पिछले दिनों आयोजित  किये गए प्रशिक्षण शिविर के बाद अब कांग्रेस संगठन में कसावट लाने का प्रयास कर रही है, कांग्रेस परफोर्मिंग और नॉन परफोर्मिंग नेताओं पर फोकस करने वाली है, भाजपा ने कांग्रेस के एक्शन पर ताना मारा है, कैबिनट मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस नेताओं को अपने अंदाज में नसीहत दी है। मीडिया से बात करते हुए विश्वास सारंग ने कहा नॉन परफोर्मिंग नेताओं की लिस्ट यदि कांग्रेस बनाने लगेगी तो उसके बहुत से नेताओं के नाम निकलेंगे इसलिए मुझे लगता है कि छोटे कार्यकर्ताओं पर चाबुक चलाने से अच्छा है कि कांग्रेस बड़े नेताओं पर अनुशासन लागू करे, राहुल गांधी स्वयं अनुशासित और संयमित हों, वे अपनी आचार संहिता का ध्यान रखें, राजनीति के सिद्धांतों का पालन करें। BJP की नक़ल करने के लिए अक्ल भी चाहिए  सारंग ने कहावो कांग्रेस जो देश को समाप्त करने की कोशिश करती है वो कांग्रेस जो जाति और धर्म की आड़ लेकर इस देश में वैमनस्य फैलाती है उस कांग्रेस के नेताओं को स्वयं अपने गिरेबां में झांकना चाहिए और अपने आचरण के  बारे में विचार करना चाहिए, उन्होंने कहा भाजपा की नक़ल कांग्रेस कर रही है तो उसमें उसे अक्ल भी लगानी चाहिए। कार्यकर्ताओं की जगह नेताओं का प्रशिक्षण जरूरी  राहुल गांधी के पचमढ़ी टूर पर तंज कसते हुए सारंग ने कहा, राहुल गांधी राहुल कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देने आये थे जबकि उस समय बिहार में चुनाव चल रहे थे वे अपना भाषण खत्म कर जंगल घूमने चले गए, उनमें गंभीरता की कमी है, इसलिए कांग्रेस की स्थिति बद से बदतर है, मुझे लगता है कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण से पहले कांग्रेस के नेताओं को  प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। दिग्विजय सिंह और राहुल गांधी पर साधा निशाना  विश्वास सारंग ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की बुराई करते करते दिग्विजय सिंह, राहुल गांधी और अन्य नेता चुनाव आयोग पर पहुंच जाते हैं और चुनाव आयोग से हटकर जनता को गाली देने लगते हैं, जनमत का इस तरह से मखौल उउड़ाना ही कांग्रेस को गर्त में जाने का बड़ा कारण है, लोकतंत्र में जनता जो फैसला देती है उसको शिरोधार्य करना, स्वीकार करना हर राजनीतिक दल का कर्तव्य है, जनता ने यदि एनडीए को प्रचंड बहुमत से जिताया है तो कांग्रेस नेताओं को जनता के फैसले को सिर झुकाकर स्वीकार करना चाहिए। अपने घर आंगन को संवारने की कोशिश करे कांग्रेस   सारंग ने कहा नाच ना आंगन टेढ़ा, खिसियानी बिल्ली खम्बा नोचे वाली कहावतों को चरितार्थ कर कांग्रेस नेता फिर गलती कर रहे हैं बिहार की जनता ने अपने स्वविवेक से एनडीए को चुना है। विश्वास सारंग ने कहा जिस पार्टी का नेता नहीं, नीति नहीं, नीयत नहीं उसका यही हाल होगा, इसलिए दूसरों को गाली देने की जगह अपने घर आंगन को संवारने की कोशिश करेंगे तो उसका सही परिणाम निकल पायेगा।

शिवराज सिंह ने बताया सच, कहा- असली सफलता मन की शांति और पार्टी के प्रति निष्ठा में है

भोपाल  मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद के बदलाव को अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी परीक्षा बताया. वे किरार समाज के दीपावली मिलन समारोह में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि चुनाव में भाजपा को बंपर बहुमत मिला था. सभी को लगा था कि अब सब कुछ अपने आप हो जाएगा और मैं ही फिर मुख्यमंत्री बनूंगा. लेकिन पार्टी ने मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया. शिवराज ने बताया कि उस वक्त उनके दिल में कई तरह के विचार आ सकते थे. गुस्सा भी आ सकता था. वे सोच सकते थे कि मैंने इतनी मेहनत की, रात-दिन जनता के बीच रहा, लोगों ने मुझे वोट दिया, फिर भी मुझे क्यों हटाया जा रहा है? लेकिन उन्होंने खुद को संभाला. दिल ने कहा – शिवराज, ये तेरी परीक्षा की घड़ी है. माथे पर शिकन मत आने देना. आज तू कसौटी पर है. उन्होंने कहा कि जब मोहन यादव का नाम तय हुआ, तो उनके चेहरे पर कोई बल नहीं पड़ा. नाराजगी नहीं दिखी. उल्टा, उन्होंने खुद विधायक दल की बैठक में मोहन यादव का नाम प्रस्तावित किया. बोले – यही असली परीक्षा होती है. जब मन में कोई कड़वाहट न हो, तब समझो इंसान पास हुआ. शिवराज ने बताया कि यह सब 2023 के चुनाव के बाद की परिस्थितियां थीं. पार्टी ने नया फैसला लिया और उन्होंने इसे सहर्ष स्वीकार किया. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें दिल्ली बुलाया और केंद्र में कृषि मंत्री बनाया. अब वे देश की सेवा कर रहे हैं. उन्होंने लोगों को संदेश दिया कि जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते हैं. पद आते-जाते रहते हैं. असली बात है मन की शांति और पार्टी के प्रति निष्ठा. अगर मन में गुस्सा या शिकायत आए, तो उसे आने मत दो. जो फैसला ऊपर से हो, उसे माथे पर लगाओ. शिवराज ने किरार समाज के लोगों से कहा कि मैंने यही सीख जीवन में अपनाई. मेहनत करो, लेकिन नतीजे की चिंता मत करो. जो मिले, उसे खुशी से स्वीकार करो. मोहन यादव अब मुख्यमंत्री हैं, मैं उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहा हूं. कोई मनमुटाव नहीं, कोई शिकायत नहीं. यह वक्तव्य सुनकर सभा में मौजूद लोग तालियां बजाने लगे. शिवराज की सादगी और त्याग की भावना की सभी ने सराहना की. उन्होंने कहा कि राजनीति में ऐसे उदाहरण कम होते हैं, जब कोई नेता इतनी बड़ी जिम्मेदारी छोड़कर भी खुश रहे और नए नेता का स्वागत करे. शिवराज ने अंत में कहा – मैं हमेशा जनता की सेवा में लगा रहूंगा. चाहे भोपाल में रहूं या दिल्ली में. मेरा मकसद सिर्फ सेवा है, पद नहीं. यह बात उन्होंने किरार समाज के दीपावली मिलन में कही, जो लोगों के दिलों को छू गई.

आजम खान और बेटे पर पैन कार्ड केस में सजा का खतरा, कोर्ट ने दोनों को दोषी माना

लखनऊ रामपुर से एक बड़ी खबर सामने आई है. पैन कार्ड मामले में सपा नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को अदालत ने दोषी करार दिया है. अब्दुल्ला आजम खान पर आरोप था कि उन्होंने चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु पूरी न होने के बावजूद विधायक बनने के लिए कूटरचना की.  क्या हैं आरोप? आरोपों के मुताबिक उन्होंने अपनी उम्र अधिक दिखाने के लिए दूसरा पैन कार्ड बनवाया, जिसके पीछे आजम खान पर भी साजिश रचने का आरोप लगा. अदालत ने सभी पहलुओं की सुनवाई के बाद दोनों- आजम खान और अब्दुल्ला आजम खान- को इस मामले में दोषी ठहराया है.  SC ने खारिज कर दी थी FIR रद्द करने की याचिका इससे पहले 6 दिसंबर को अब्दुल्ला आजम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा था. अदालत ने पासपोर्ट बनवाने के लिए फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और दो पैन कार्ड रखने के आरोप में दर्ज एफआईआर रद्द करने की उनकी याचिका खारिज कर दी थी. बेंच ने कहा कि एफआईआर रद्द करने के लिए कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है और न ही कानूनी प्रक्रिया में दखल देने की कोई वजह दिखाई देती है. आरोप है कि अब्दुल्ला आजम ने पासपोर्ट के लिए गलत जन्मतिथि और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया. मुश्किल में आजम खान इसी मामले में राहत पाने के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था. अब अदालत ने अब्दुल्ला आजम के साथ उनके पिता आजम खान को भी दोषी ठहराया है, जो हाल ही में जेल से बाहर आए हैं.  

बॉलीवुड सिंगर शिल्पा राव की आवाज़ पर झूमा मैदान, कल्पना सोरेन ने भी दिए सुरों का साथ

रांची बॉलीवुड की मशहूर प्लेबैक सिंगर शिल्पा राव ने मोरहाबादी मैदान में लाइव शो किया। उनके लाइव शो में गांडेय विधायक कल्पना सोरेन भी मौजूद रहीं। इस दौरान कल्पना सोरेन ने भी शिल्पा राव के साथ सुर मिलाए। बता दें कि बॉलीवुड की मशहूर प्लेबैक सिंगर शिल्पा राव झारखंड की रहने वाली है। कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों ने उनकी उपस्थिति का स्वागत जोरदार तालियों और उत्साह के साथ किया। स्टेज पर आते ही शिल्पा राव ने रांची वासियों का अभिवादन किया और कहा कि झारखंड की धरती पर आकर वह हमेशा खुद को विशेष ऊर्जा से भरा महसूस करती हैं। इस दौरान शिल्पा ने कई सुपरहिट गाने गाए। उनकी प्रस्तुति में जोश उस समय चरम पर पहुंच गया जब उन्होंने मंच पर विधायक कल्पना सोरेन को आमंत्रित किया। शिल्पा राव के गीतों की लय और माहौल ऐसा था कि कल्पना सोरेन खुद को रोक नहीं सकीं। उन्होंने मंच पर जाकर बॉलीवुड गीतों पर शिल्पा राव का साथ दिया। कल्पना सोरेन ने भी शिल्पा के साथ सुर मिलाए। यह दृश्य दर्शकों के लिए यादगार बन गया। समारोह में केवल आधुनिक संगीत ही नहीं, बल्कि झारखंडी लोकसंगीत और लोक नृत्य की छटा भी बिखरी। दर्शकों ने कहा कि यह क्षण स्थापना दिवस समारोह के सबसे यादगार पलों में शामिल हो गया। एक और बॉलीवुड की जानी-मानी आवाज मंच पर थी, वहीं दूसरी ओर राज्य की लोकप्रिय जनप्रतिनिधि जनता के बीच खड़ी होकर कला और संस्कृति के उत्सव को और खास बना रही थीं।  

क्रिकेट अपडेट: राजस्थान रॉयल्स के कोचिंग स्टाफ में बड़े बदलाव, राठौड़ को प्रमोशन

जयपुर  इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के लिए मिनी नीलामी 16 दिसंबर को अबूधाबी में होनी है. ऑक्शन से पहले सभी 10 फ्रेंचाइजी टीमों ने खिलाड़ियों की रिटेंशन लिस्ट जारी कर दी है. राजस्थान रॉयल्स (RR) ने तो बड़ा फैसला लिया और कप्तान संजू सैमसन को ट्रेड कर दिया. इसके लिए रॉयल्स की चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) से ट्रेड डील हुई. सैमसन के बदले में सीएसके से रवींद्र जडेजा और सैम करन राजस्थान रॉयल्स के स्क्वॉड में शामिल कर लिए गए हैं. राजस्थान रॉयल्स ने सोमवार (17 नवंबर) को एक और बड़ी घोषणा की है. श्रीलंकाई दिग्गज कुमार संगकारा को आईपीएल के अगले सीजन के लिए इस टीम का हेड कोच नियुक्त किया गया है. यह फैसला राहुल द्रविड़ के पद छोड़ने के बाद लिया गया. द्रविड़ ने अगस्त 2025 में राजस्थान रॉयल्स से अलग होने का फैसला किया था. संगकारा 2021 से राजस्थान रॉयल्स के डायरेक्टर ऑफ क्रिकेट हैं. वो 2021-2024 तक इस टीम के हेड कोच भी रह चुके हैं. संगकारा की कोचिंग में टीम आईपीएल 2022 में फाइनल तक पहुंची थी और 2024 के सीजन के दौरान प्लेऑफ में पहुंचने में कामयाब रही थी. राजस्थान रॉयल्स ने कुमार संगकारा के फिर से हेड कोच बनने की पुष्टि कर दी है. बता दें कि राहुल द्रविड़ मल्टी-ईयर कॉन्ट्रैक्ट के साथ राजस्थान रॉयल्स टीम के साथ जुड़े थे. द्रविड़ की कोचिंग में राजस्थान रॉयल्स ने बेहद खराब प्रदर्शन करते हुए 14 में से केवल 4 मैच जीते और यह टीम अंकतलिका में नौवें स्थान पर रही. राजस्थान रॉयल्स के लीड ऑनर मनोज बडाले कहा, 'टीम को इस समय जो जरूरत है, उसके हिसाब से कुमार संगकारा का स्क्वॉड से जुड़ाव, उनकी नेतृत्व क्षमता और रॉयल्स की संस्कृति को समझने की उनकी गहरी पकड़ टीम को निरंतरता और स्थिरता देगी. कुमार पर हमारा हमेशा पूरा भरोसा रहा है. उनकी स्पष्टता, शांत स्वभाव और क्रिकेटिंग समझ टीम को अगले फेज में ले जाने में अहम भूमिका निभाएगी.' कोचिंग स्टाफ में और कौन-कौन? राजस्थान रॉयल्स के कोचिंग स्टाफ में और भी बदलाव देखने को मिले हैं. विक्रम राठौड़ का प्रमोशन हुआ है और वो मुख्य असिस्टेंट कोच बने हैं. न्यूजीलैंड के दिग्गज गेंदबाज शेन बॉन्ड बॉलिंग कोच की भूमिका निभाते रहेंगे. उधर ट्रेवर पेनी असिस्टेंट कोच की भूमिका में वापस आए हैं. जबकि सिद्धार्थ लाहिड़ी  परफॉर्मेंस कोच का रोल निभाएंगे. रास्थान रॉयल्स में रवींद्र जडेजा की एंट्री के बाद कप्तानी की होड़ काफी रोमांचक हो गई है. उनकी मौजूदगी टीम की लीडरशिप इक्वेशन को पूरी तरह बदल सकती है. मिनी ऑक्शन से पहले राजस्थान रॉयल्स ने कई खिलाड़ियों को रिलीज भी किया है. रिलीज होने वाले विदेशी खिलाड़ियों में फजलहक फारूकी, वानिंदु हसारंगा और महीश तीक्ष्णा शामिल हैं. वहीं आकाश मधवाल, अशोक शर्मा, कुणाल सिंह राठौड़ और कुमार कार्तिकेय को भी टीम से बाहर कर दिया गया है. राजस्थान रॉयल्स का मौजूदा स्क्वॉड: यशस्वी जायसवाल, रियान पराग, ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), वैभव सूर्यवंशी, शुभम दुबे, युद्धवीर सिंह, संदीप शर्मा, तुषार देशपांडे, शिमरॉन हेटमायर, जोफ्रा आर्चर, लुआन-ड्रे प्रीटोरियस, क्वेना मफाका, नांद्रे बर्गर, रवींद्र जडेजा (चेन्नई से ट्रेड), सैम करन (चेन्नई से ट्रेड), डोनोवन फरेरा (दिल्ली से ट्रेड).

समितियों पर बड़ी कार्रवाई: धान खरीदी रोकने पर 250 दुकानों की मान्यता रद्द, 12 पर मामला दर्ज

रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह ने रायपुर जिले की राशन दुकानों का आवंटन निरस्त करने का बड़ा फैसला लिया है. रविवार को छुट्टी का दिन होने के बावजूद धान खरीदी में सहयोग नहीं करने वाली सहकारी समितियों द्वारा संचालित 250 राशन दुकानों का आवंटन निरस्त किया गया है. अब इन दुकानों के संचालन का जिम्मा ग्राम पंचायतों को सौंप दिया गया है. पंचायतों से कहा गया है कि वे अपने लोगों की मदद से राशन दुकानों का संचालन करें.   जानकारी के मुताबिक, कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह को लगातार इस बात की शिकायत मिल रही थी कि सहकारी समितियां धान खरीदी करने में बिना वजह व्यवधान पैदा कर रही हैं. किसानों को धान बेचने से भी रोक रहे थे. इतना ही नहीं मंडियों में पहुंचने वाले किसानों को कई तरह की बातें बताकर वापस किया जा रहा था. लगातार इस तरह की शिकायत मिलने के बाद ही कलेक्टर ने आदेश जारी किया कि अब रायपुर जिले में जिन 250 राशन दुकानों का संचालन सहकारी समितियां कर रही थी, उनका संचालन अब ग्राम पंचायत वाले करेंगे. 12 कंप्यूटर ऑपरेटरों पर एफआईआर राज्य में हड़ताल पर गए सहकारी समितियों के कर्मचारियों पर सरकार ने एस्मा लागू कर दिया है. सभी कर्मचारियों को हड़ताल खत्म कर धान खरीदी के लिए मंडियों में लौटने के निर्देश दिए गए हैं. ड्यूटी में कर्मचारियों को वापस नहीं लौटने पर सरकार ने एक्शन लेना शुरू किया. रायपुर के पुरानी बस्ती, खरोरा, धरसींवा और तिल्दा-नेवरा थानों में दर्जनभर कर्मचारियों पर छत्तीसगढ़ अति आवश्यक सेवा संधारण व विच्छिन्नता निवारण अधिनियम 1979 के तहत केस दर्ज किया गया है. जानकारी के मुताबिक पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र में राजू दास, ओमप्रकाश माहले, विजय गुप्ता, सुवेश, आनंद सहित अन्य पर केस दर्ज किया गया है. धरसींवा में बृज मोहन देवांगन, तिल्दा में रामकुमार वर्मा और पोषण लाल धुरंधर, जबकि खरोरा में कौशल वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है. सभी कर्मचारी मंडियों में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं. हड़ताली समिति प्रबंधकों को लगा बड़ा झटका कलेक्टर के इस फैसले के बाद हड़ताल करने वाले सहकारी समिति प्रबंधकों को बड़ा झटका लगा है. समिति प्रबंधकों ने भी आरोप लगाया है कि हड़ताल तोड़ने के लिए ये फैसला लिया गया है. इस फैसले के बाद भी अभी तक हड़ताल खत्म करने की कोई सूचना जारी नहीं की गई है. ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से दुकानों का संचालन सहकारी समितियां ही कर रही थी.

तेलुगु सिनेमा डेब्यू: राशा थडानी ने पोस्ट शेयर कर दी बड़ी खुशखबरी

मुंबई फेमस एक्ट्रेस रवीना टंडन की बेटी और एक्ट्रेस राशा थडानी अपनी पहली फिल्म के बाद से ही काफी चर्चा में रहती हैं. उन्होंने फिल्म ‘आजाद’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था. वहीं, अब वो जल्द ही तेलुगु फिल्म में नजर आने वाली हैं. इसकी जानकारी खुद एक्ट्रेस ने अपने इंस्टाग्राम पर दिया है. बता दें कि राशा थडानी ने इंस्टाग्राम पर अपनी एक फोटो शेयर किया है. फोटो में वो बाइक के साथ पोज देती नजर आ रही हैं. इस पोस्ट के साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा, ‘नई शुरुआत, अनंत आभार. मैं तेलुगु सिनेमा में कदम रख रही हूं. अजय भूपति सर, इस अवसर के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद. इस सफर को शुरू करने के लिए बहुत उत्साहित हूं.’ राशा की तेलुगु फिल्म एक्ट्रेस राशा थडानी की अपकमिंग तेलुगु फिल्म का नाम रिविल नहीं किया गया है. फोटो में उनके बोल्ड और हॉट लुक को देखकर लग रहा है कि कुछ धमाकेदार होने वाला है. इस फिल्म का निर्देशन अजय भूपति कर रहे हैं. इससे पहले उन्होंने फिल्म ‘आरएक्स 100’, ‘महा समुद्रम’ और ‘मंगलावरम्’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया है. राशा थडानी का वर्कफ्रंट वर्कफ्रंट की बात करें, तो राशा थडानी ने अपने करियर की शुरुआत फिल्म ‘आजाद’ से की थी. अभिषेक कपूर द्वारा निर्देशित ये एक पीरियड एक्शन-ड्रामा फिल्म है. इसमें अजय देवगन, अमन देवगन और डायना पेंटी ने भी अहम भूमिका निभाई है. यह फिल्म 17 जनवरी 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी.