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मऊगंज जिला चिकित्सालय में उप मुख्यमंत्री का दौरा, व्यवस्थाओं की समीक्षा

उप मुख्यमंत्री ने जिला चिकित्सालय मऊगंज का किया निरीक्षण मऊगंज उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने जिला चिकित्सालय मऊगंज का निरीक्षण किया। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के प्रयासों को प्राथमिकता दें। सभी डॉक्टर पूरी संवेदनशीलता के साथ रोगियों का उपचार करें। निर्माणाधीन दो सौ बिस्तर अस्पताल भवन का निर्माण कार्य तेजी से पूरा कराएं जिससे आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखें। सभी डॉक्टर नियमित रूप से ओपीडी में रोगियों का उपचार करें। रोगी अपना कष्ट मिटाने के लिए अस्पताल आता है। उनका सेवाभाव से उपचार करें। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, सिविल अस्पताल तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में उपचार सेवाएं बेहतर होंगी तो मेडिकल कालेज संजय गांधी हास्पिटल पर रोगियों की संख्या घटेगी। निरीक्षण के समय कलेक्टर संजय कुमार जैन, पुलिस अधीक्षक दिलीप सोनी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव शुक्ला तथा अधिकारी उपस्थित रहे।  

उमर का धमाके से पहले का वीडियो सामने आया, फर्राटेदार अंग्रेज़ी में आत्मघाती हमले को सही ठहराया

नई दिल्ली  दिल्ली ब्लास्ट को अंजाम देने वाले आतंकी मोहम्मद उमर नबी का एक नया वीडियो सामने आया है. इस वीडियो में उमर नबी अंग्रेजी में तकरीर दे रहा है और इस वीडियो में वो सुसाइड बॉम्बिंग को सही ठहरा रहा है. इस वीडियो में आतंकी उमर नबी अकेले है और कैमरे के सामने बैठ कर वीडियो बना रहा है.  इस वीडियो में आतंकी उमर कहता है कि सुसाइड बॉम्बिंग को ठीक से समझा नहीं गया है.  वीडियो में अपने टी शर्ट में लैपल लगाया हुआ उमर कहता है, "लोग जो सबसे बड़ी गलती करते हैं, वह यह समझने में नाकाम रहना है कि बम विस्फोट या आत्मघाती बम विस्फोट का विचार असल में क्या है. इसके खिलाफ कई विरोधाभास और अनगिनत तर्क हैं." वह आगे कहता है, "आत्मघाती हमलों की मुख्य समस्या यह है कि जब कोई व्यक्ति यह मान लेता है कि उसकी मृत्यु एक निश्चित समय और स्थान पर होगी, तो वह एक खतरनाक मानसिक स्थिति में चला जाता है. वह यह मानने लगता है कि मृत्यु ही उसकी एकमात्र मंज़िल है." आगे वह कहता है कि, 'लेकिन सच्चाई यह है कि ऐसी सोच, या ऐसी परिस्थितिया,  किसी भी लोकतांत्रिक या इंसानी व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं हो सकतीं, क्योंकि वे जीवन, समाज और कानून के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन करती हैं.' ये वीडियो यही तक है. इसलिए सुसाइड बॉम्बिंग पर उसके आगे के विचार सामने नहीं आ पाए हैं. लेकिन इस वीडियो में आतंकी उमर काफी इत्मीनान सा मालूम होता है और वह सिर हिला-हिलाकर बात कर रहा है.  ये वीडियो आतंकियों का मनोविज्ञान पढ़ने वाले वैज्ञानिकों के लिए बड़े काम की चीज हो सकती है. बता दें कि लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए धमाके में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है. ये धमाका तब हुआ जब कार में बैठे एक शख्स ने मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के बाहर खुद को उड़ा लिया था.  जांच एजेंसियों ने आतंकी उमर की मां का डीएनए सैंपल लेकर पुष्टि की है कि कार चलाने वाला शख्स आतंकी उमर ही था. और इस धमाके में उसके चिथड़े उड़ गए हैं. इस केस की जांच अभी जारी ही है. पुलिस ने इस मामले में दिल्ली हरियाणा जम्मू-कश्मीर से कई लोगों को गिरफ्तार किया है.  इस केस का लिंक फरीदाबाद में बरामद हुए 2900 किलो विस्फोटक से जुड़ा है.  डॉ उमर कौन हैं? आतंकी डॉ उमर मूल रूप से पुलवामा के कोइल गांव का रहने वाले था. भारत विरोधी गतिविधियों में उसकी काफी दिलचस्पी थी.  पुलिस सूत्रों का कहना है कि हाल के महीनों में उमर का व्यवहार बदल गया था. 30 अक्टूबर से उन्होंने फरीदाबाद में स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय की ड्यूटी छोड़ दी थी और फरीदाबाद और दिल्ली का चक्कर लगाने लगता था. वो अक्सर रामलीला मैदान और सुनहरी मस्जिद के पास की मस्जिदों में रुकता था.  पुलिस के अनुसार वह 9 नवंबर को फरीदाबाद में छापेमारी के बाद लापता हो गया था, जिसके बाद एक गोदाम से लगभग 2,900 किलोग्राम विस्फोटक बरामद हुआ था और उसके कुछ साथियों की गिरफ्तारी हुई थी. 

प्रदेश में उद्योग धंधों से रोजगार पाने वालों का भी हो सम्मेलन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

अधिकाधिक औद्योगिक निर्माण इकाइयों का करायें सामूहिक भूमिपूजन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में उद्योग धंधों से रोजगार पाने वालों का भी हो सम्मेलन बायो-टेक्नालॉजी सेक्टर में है बड़ा स्कोप, इस दिशा में आगे बढ़ें 8.57 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों पर धरातल पर काम है जारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट–2025 के संदर्भ में लिए निर्णयों एवं विभागवार मिले निवेश प्रस्तावों की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश की पुण्यधरा में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट–2025 में सरकार को 30.77 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इन सभी निवेश प्रस्तावों के क्रियान्वयन के लिए निवेशकों से सतत संवाद करें, उनके प्रश्नों का समाधान करें, जिससे वे जल्द से जल्द अपने निवेश प्रस्ताव को जमीन पर अमलीजामा पहनाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दिसम्बर में वर्तमान सरकार के दो वर्ष पूरे हो रहे हैं। इसलिए नवम्बर माह अंत तक अधिक से अधिक औद्योगिक निर्माण इकाइयों का सामूहिक भूमिपूजन कराएं। उन्होंने कहा कि दो से ढ़ाई लाख करोड़ रुपए के कामों के एक साथ भूमिपूजन से प्रदेश का औद्योगिक परिदृश्य तेजी से बदलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मंत्रालय में निवेश संबंधी बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में फरवरी 2025 में भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में प्राप्त निवेश प्रस्तावों के संबंध में राज्य सरकार द्वारा लिये गए निर्णयों एवं विभागवार मिले निवेश प्रस्तावों के क्रियान्वयन की अद्यतन प्रगति की गहनता से विस्तारपूर्वक समीक्षा की। बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने समिट के दौरान प्राप्त निवेश प्रस्तावों, एमओयू के क्रियान्वयन और वर्तमान स्थिति की जानकारी दी। बैठक में अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव मनु वास्तव, अपर मुख्य सचिव संजय दुबे, अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला, प्रमुख सचिव संदीप यादव, प्रमुख सचिव मनीष सिंह सहित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट–2025 में प्राप्त उत्साहजनक निवेश प्रस्तावों से मध्यप्रदेश में उद्योग और अधोसंरचना विकास को नई दिशा मिलेगी और हमारा राज्य तेज गति से प्रगति के पथ पर आगे बढ़ेगा। मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि निवेश से जुड़े सभी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की समय-सीमा निर्धारित कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार निवेशकों को सुरक्षित, पारदर्शी और उद्योगों के अनुकूल वातावरण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ें और आर्थिक विकास को गति मिले। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि जिन निवेश प्रस्तावों पर काम प्रारंभ हो चुका है, उनकी नियमित रूप से मॉनिटरिंग की जाए। मुख्यमंत्री ने निवेश प्राप्त करने वाले सभी विभागों को आपसी समन्वय से काम करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश पर्यटन (एमपीटी) अब एक ब्रांड बन चुका है। इसका लाभ प्रदेश में उद्योग -धंधों और पर्यटन के विकास पर भी लिया जाए। उन्होंने कहा कि सम्पर्ण पर्यटन क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देने की दिशा में आगे बढ़ें, इससे पर्यटन क्षेत्र में कोई बड़ा निवेश आने पर सरकार निवेशक को उद्योग विभाग द्वारा दी जा रही सब्सिडी प्रोत्साहन योजना का भी लाभ दे सकेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी अधिकारियों को निदेर्शित किया कि उद्योग एवं रोजगार वर्ष के समापन पर सरकार की निवेश प्रोत्साहन योजनाओं के कारण प्रदेश में ही रोजगार और स्वरोजगार प्राप्त करने वाले लोगों का राज्यस्तरीय एवं संभागस्तरीय सम्मेलन आयोजित करें। उन्होनें बताया कि सरकार की रोजगार प्रोत्साहन नीतियों से प्रदेश के 7.85 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 के समापन से पहले सरकार के कामों का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाए। लोगों की सफलता की कहानियां समाज के सामने भी आनी चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बायो-टेक्नालाजी सेक्टर में बहुत स्कोप है। इस दिशा में आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी दिनों में हैदराबाद में आयोजित होने वाले निवेशक संवाद सम्मेलन में बायो-टेक्नालाजी सेक्टर की कम्पनियों और निवेशकों को भी आमंत्रित किया जाए। मध्यप्रदेश में निवेश के लिए उनसे आग्रह किया जाएगा। प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट–2025 में सरकार को मिले 30.77 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों में से वर्तमान में 8.57 लाख करोड़ रुपए से अधिक के प्रस्तावों पर धरातल पर काम जारी है। उद्योग विभाग को कुल 12.70 लाख करोड़ रुपए के 889 निवेश प्रस्ताव मिले थे। इनमें से 397 निवेश प्रस्तावों पर भूमि आवंटित कर लेटर आफ इंट्रेस्ट भी जारी कर दिया गया है। इसके अलावा 5.13 लाख करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाले 190 निवेश प्रस्ताव ऐसे हैं, जिनमें निवेशकों ने साइट विजिट भी पूरा कर लिया है। विभाग द्वारा 302 निवेशकों से लगातार चर्चा की जा रही है। उन्होंने बताया कि 2.48 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों पर विभाग द्वारा भूमि आवंटन एवं निवेश आवेदनों की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। इस बड़े निवेश से प्रदेश में 2.85 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा कि औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग करीब 2 लाख करोड़ रुपए की औद्योगिक इकाइयों का सामूहिक भूमिभूजन कराने में सहभागिता करेगा। उन्होंने बताया कि ग्वालियर में टेलिकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की स्थापना के लिए केंद्र सरकार से चर्चा की जा रही है। इसके अलावा यहां प्रमुख निवेशकों को आकर्षित करने के लिए आईसीईए के साथ भी लगातार समन्वय किया जा रहा है। बैठक में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग, खनिज, नगरीय विकास एवं आवास, ऊर्जा, लोक निर्माण, पर्यटन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा, उच्च शिक्षा, विमानन और सहकारिता विभाग सहित अन्य विभागों को प्राप्त निवेश प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई।    

राज्यपाल पटेल बोले—उत्तराखण्ड और झारखण्ड को प्रकृति ने दिए हैं अनोखे वरदान

उत्तराखण्ड और झारखण्ड को प्रकृति का विशेष उपहार : राज्यपाल  पटेल राजभवन में मनाया गया दोनों राज्यों का स्थापना दिवस राज्यों की लोक संस्कृति पर केन्द्रित प्रस्तुतियों ने बटोरी तालियां भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि उत्तराखण्ड और झारखण्ड को प्रकृति का विशेष उपहार मिला है। यहां पर समृद्ध वन्य जीव और प्राकृतिक संपदा भरपूर मात्रा में है। राज्यपाल  पटेल सोमवार को एक भारत-श्रेष्ठ भारत संकल्पना के तहत उत्तराखण्ड और झारखण्ड राज्य स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल  पटेल ने दोनों राज्यों के स्थापना दिवस की सभी को बधाई दी। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए कलाकारों की सराहना की। इस अवसर पर उत्तराखण्ड के राज्यपाल ले.ज. गुरमीत सिंह और झारखण्ड के राज्यपाल  संतोष गंगवार के शुभकामना संदेश और दोनों राज्यों की लघु फिल्म का प्रसारण किया गया। राजभवन के सांदीपनि सभागार में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि जहां एक ओर उत्तराखण्ड प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। उसी प्रकार झारखण्ड भी समृद्ध खनिज सम्पदा और लोक संस्कृति के लिए विश्व विख्यात है। महान जनजातीय नायक और क्रांतिसूर्य भगवान बिरसा मुंडा की कर्म भूमि झारखण्ड, हम सभी के लिए प्रेरक है। उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस दोनों राज्यों के गठन की ऐतिहासिक यात्रा का प्रतीक है। भारत की विविधता, संघीय संरचना और एकता की उस शक्ति का भी स्मरण है, जिसने हमारे देश को दुनिया में विशेष पहचान दी है। यह सांस्कृतिक समारोह नहीं, बल्कि भारत की सामूहिक विकास यात्रा में हमारी सक्रिय भागीदारी का प्रमाण है। हम सभी यहाँ अतिथि बनकर नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण के समर्पित सहभागी के रूप में उपस्थित हैं।  राज्यपाल  पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत के सभी राज्यों के स्थापना दिवस को राजभवन में मनाए जाने की पहल अनुकरणीय है। ऐसे आयोजन विविधता में एकता की संवैधानिक भावना को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में गुजरात के केवडिया स्थित स्टेच्यू ऑफ यूनिटी में 01 से 15 नवंबर तक विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और धरोहर को करीब से जानने का अभूतपूर्व और दर्शनीय आयोजन था। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के दूरदर्शी प्रयासों ने राष्ट्रीय विकास को जन-भागीदारी, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और सामूहिक उत्तरदायित्व के साथ जोड़कर नए युग की शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता केवल सीमाओं के विस्तार से नहीं, बल्कि विचारों, संस्कृतियों और समाज के हर वर्ग के सम्मान से सुदृढ़ होती है। इसी भावना का साकार रूप आज का यह संयुक्त समारोह है। ‘एक भारत—श्रेष्ठ भारत’ अभियान इस राष्ट्रीय भावना की उन्नत अभिव्यक्ति है। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि यह आयोजन उत्तर और दक्षिण, पूर्व और पश्चिम के बीच केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक सेतु स्थापित करता है। राज्यपाल  पटेल का उत्तराखण्ड कुमायूं समाज भोपाल के अध्यक्ष  सुरेश कर्नाटक, गढ़वाली समाज ट्रस्ट भोपाल के अध्यक्ष विजय सिंह नेगी और बिहार सांस्कृतिक परिषद भोपाल के अध्यक्ष  राजेश कुमार सिंह ने स्मृति चिन्ह, पुष्प और अंग वस्त्र भेंट कर स्वागत और अभिनंदन किया गया। समारोह में उत्तराखण्ड के कलाकारों ने कुमायूं लोक नृत्यों और महादेव स्तुति की प्रस्तुति दी। झारखण्ड के कलाकारों ने मगही गीत और विभिन्न लोक नृत्यों की सामूहिक प्रस्तुति दी। आकर्षक प्रस्तुतियों का दर्शकों ने जोरदार तालियां बजाकर अभिवादन किया। मध्यप्रदेश राज्य पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम का संचालन सु सृष्टि वास्तव और आभार गढ़वाली समाज भोपाल के अध्यक्ष विजय सिंह नेगी ने व्यक्त किया। इस अवसर पर राजभवन के अधिकारी-कर्मचारी और उत्तराखण्ड एवं झारखण्ड राज्यों के मध्यप्रदेश में निवासरत नागरिक उपस्थित रहें।       

यूके में बड़ा बदलाव: परमानेंट रेज़िडेंस के नियम हुए सख्त, 20 साल का इंतज़ार अनिवार्य

 ब्रिटेन सरकार ने देश में शरणार्थियों के लिए सबसे बड़े स्तर पर नीति बदलाव की घोषणा की है। इसके तहत अब शरणार्थियों की स्थिति स्थायी नहीं बल्कि अस्थायी होगी और स्थायी बसावट  के लिए इंतजार का समय पांच साल से बढ़ाकर 20 साल कर दिया जाएगा। यह कदम आधुनिक समय में देश की शरणार्थी नीतियों में सबसे व्यापक सुधार माना जा रहा है। सरकार का मकसद और प्रेरणा लेबर पार्टी की सरकार ने यह कदम अवैध छोटे नावों से फ्रांस से आने वाले प्रवासियों पर कड़े नियंत्रण के लिए उठाया है। इसका उद्देश्य मुख्य रूप से लोकप्रियता बढ़ाने वाले Reform UK पार्टी के प्रभाव को सीमित करना है, जिसने पिछले समय में प्रवास नीति को राष्ट्रीय एजेंडे का केंद्र बना दिया था। सरकार ने कहा कि इस नीति में डेनमार्क मॉडल से प्रेरणा ली गई है, जो यूरोप में सबसे सख्त प्रवास नीतियों वाला देश माना जाता है। वहां बढ़ती एंटी-इमिग्रेंट भावना के चलते कई देशों ने अपने नियमों को और कड़ा कर दिया है, हालांकि इस कदम की मानवाधिकार समूहों द्वारा आलोचना भी की गई है।     अब शरणार्थियों को मिलने वाला कर-आधारित समर्थन जैसे आवास और साप्ताहिक भत्ते केवल उन्हीं को मिलेगा जो काम कर रहे हैं या स्थानीय समुदायों और अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं।     जिन शरणार्थियों के पास काम करने की क्षमता है लेकिन वे काम नहीं करना चाहते, या जो कानून तोड़ते हैं, उन्हें अब ये समर्थन नहीं मिलेगा। शरणार्थी की सुरक्षा की स्थिति नियमित समीक्षा के तहत अस्थायी होगी और यदि मूल देश को सुरक्षित माना गया, तो यह रद्द भी की जा सकती है।     वर्तमान में यूरोप के अन्य देशों की तुलना में ब्रिटेन की प्रणाली काफी उदार मानी जाती है, जहां पांच साल बाद शरणार्थी स्वतः स्थायी निवास प्राप्त कर लेते हैं। अब इसे बदल दिया जाएगा। समीक्षा और स्थायी बसावट का नया समय होम सेक्रेटरी शबाना महमूद ने कहा कि अब शरणार्थियों की स्थिति हर दो साल छह महीने में समीक्षा की जाएगी। स्थायी बसावट की प्रक्रिया को लंबा कर 20 साल कर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सोमवार को इस नीति के और विवरण साझा किए जाएंगे, जिसमें यूरोपीय मानवाधिकार संधि के अनुच्छेद 5 से संबंधित अपडेट भी शामिल होंगे। सरकार का संदेश शबाना महमूद ने कहा, “हमारा उद्देश्य उन लोगों को प्राथमिकता देना है जो हमारे समाज और अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं। अब शरणार्थियों के लिए हमारा दृष्टिकोण समान अवसर, लेकिन जिम्मेदारी के साथ होगा।”

झारखंड में बढ़ी सर्दी: 11 जिलों में शीतलहर की चेतावनी, तापमान में गिरावट

रांची हिमालयी राज्यों में जारी बफर्बारी का सीधा असर अब झारखंड के मौसम पर दिखने लगा है। इस बार दिसंबर में महसूस होने वाली कड़ाके की ठंड नवंबर की शुरुआत से ही दस्तक दे चुकी है। कई जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है। मैक्लुस्कीगंज में बीते रविवार को पारा गिरकर 6 डिग्री तक पहुंच गया, जो इस सीजन का सबसे न्यूनतम तापमान है। राजधानी रांची और आसपास के इलाकों में भी सुबह-शाम ठिठुरन काफी बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में घना कोहरा छाया है, जिससे आवागमन में परेशानी हो रही है। मौसम विभाग ने राज्य के 11 जिलों-गढ़वा, पलामू, चतरा, हजारीबाग, रामगढ़, रांची, खूंटी, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा और लातेहार के लिए शीतलहर की चेतावनी जारी की है। इन जिलों में अगले 24 घंटों तक यलो अलर्ट प्रभावी रहेगा। घने कोहरे और तेज ठंडी हवा का सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों और सुबह-शाम बाहर रहने वाले लोगों पर पड़ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि अचानक तापमान गिरने से सर्दी, खांसी, सांस की दिक्कत और ब्रेन स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैं। सदर अस्पताल में ब्रेन स्ट्रोक मरीजों की संख्या 30 प्रतिशत बढ़ गई है। रिम्स में रोज छह से सात मरीज पहुंच रहे हैं। मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार, 18 नवंबर से न्यूनतम तापमान में तीन डिग्री तक बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे हल्की राहत मिलने की संभावना है। उन्होंने बताया कि हिमालय में जारी बफर्बारी आगे भी झारखंड के मौसम को प्रभावित करेगी। अगले 3-4 दिनों तक हल्की राहत के बाद तापमान फिर से गिर सकता है। लोगों को ठंड से बचाव के आवश्यक उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।  

3 दिसंबर को रायपुर में IND vs SA मैच: जानिए टिकट कहाँ और कैसे खरीदें, क्या हैं ऑफर्स

रायपुर छत्तीसगढ़ क्रिकेट प्रेमियों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। नवा रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में 3 दिसंबर को भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच वनडे सीरीज का दूसरा मुकाबला आयोजित किया जाएगा। दर्शकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस बहुप्रतीक्षित मैच की टिकटें कब और कहां उपलब्ध होंगी। आइए, आपको इस बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं। कब से शुरू होगी टिकट की बिक्री ? मुकाबले को लेकर सबसे बड़ी उत्सुकता टिकट बिक्री की है। टिकटों की ऑनलाइन बिक्री 22 नवंबर से शुरू होगी, जिसका आधिकारिक माध्यम वेबसाइट www.ticketgini.in होगा। ऑनलाइन टिकट खरीदना पहली प्राथमिकता होगी क्योंकि भीड़ अधिक होने की संभावना है। फिजिकल टिकट 24 नवंबर से जो लोग ऑफलाइन टिकट लेना पसंद करते हैं, उनके लिए भी अच्छी खबर है। 24 नवंबर से रायपुर के इंडोर स्टेडियम में फिजिकल टिकट उपलब्ध होंगे। दर्शक अपनी सुविधा के अनुसार दोनों तरीकों में से किसी का चयन कर सकेंगे। टिकट प्राइस लिस्ट (स्टैंड–वाइस) इस बार टिकट की कीमतें कैटेगरी के आधार पर तय की गई हैं। स्टूडेंट्स के लिए बड़ी राहत यह है कि पिछली बार 1000 रुपए की टिकट अब 800 रुपए में उपलब्ध होगी। किसी भी छात्र को अपनी वैध स्टूडेंट ID दिखाकर सिर्फ एक टिकट खरीदने की अनुमति दी जाएगी। आम दर्शकों के लिए स्टैंड टिकट     1500 रुपए     2500 रुपए     3000 रुपए     3500 रुपए प्रिमियम कैटेगरी     सिल्वर: 6000 रुपए     गोल्ड: 8000 रुपए     प्लैटिनम: 10,000 रुपए     कॉरपोरेट बॉक्स: 20,000 रुपए विश्व दिव्यांग दिवस पर खास पहल 3 दिसंबर को विश्व दिव्यांग दिवस भी मनाया जाता है, और इसी अवसर पर छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ ने एक सराहनीय निर्णय लिया है। संघ दिव्यांग बच्चों को मैच मुफ्त में दिखाएगा और उनके आने-जाने के लिए बस की सुविधा भी प्रदान करेगा। यह कदम सामाजिक संवेदनशीलता और खेल को सभी वर्गों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। स्टेडियम में मैच की तैयारियां तेज स्टेडियम प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर भी CSCS सक्रिय है। खेल विभाग, पुलिस, नगर निगम और अन्य आवश्यक विभागों को मेजबानी की जानकारी भेज दी गई है और उनकी सहायता मांगी गई है। स्टेडियम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खरा उतारने के लिए सभी व्यवस्थाएं तय समय पर पूरी की जा रही हैं।     50–60 लाख रुपये का मेंटेनेंस बजट     15 दिनों में सभी काम पूरे करने का लक्ष्य     फ्लड लाइट पूरी तरह जनरेटर पर चलेंगी     सुरक्षा, ट्रैफिक, पार्किंग और एंट्री गेट मैनेजमेंट के लिए पुलिस, नगर निगम व अन्य विभागों को सूचना भेज दी गई है क्यों खास है यह मुकाबला?     स्टेडियम पहली बार CSCS की पूर्ण जिम्मेदारी में एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय मैच आयोजित कर रहा     हाल ही में स्टेडियम को 30 साल की लीज पर संघ को सौंपा गया     यहां टेस्ट क्रिकेट की संभावनाएं भी इसी फैसले से मजबूत हुई हैं     फैंस को लंबे समय बाद इस प्रतिष्ठित मैदान पर टीम इंडिया को लाइव देखने का मौका मिलेगा भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका वनडे और टी-20 सीरीज का शेड्यूल भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच इस समय दो मैचों की टेस्ट सीरीज जारी है। टेस्ट मुकाबलों के खत्म होते ही सीमित ओवरों की श्रृंखला शुरू होगी। वनडे सीरीज का पहला मुकाबला 30 नवंबर 2025 को रांची में खेला जाएगा। इसके बाद दूसरा वनडे 3 दिसंबर 2025 को रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में होगा। तीसरा और अंतिम वनडे 6 दिसंबर 2025 को विशाखापट्टनम (वाइजैक) में आयोजित किया जाएगा। सभी वनडे मुकाबले 3 दिसंबर की दोपहर 1:30 बजे से शुरू होंगे। हालांकि टॉस दोपहर 1:00 होगा। टी-20 सीरीज का शेड्यूल वनडे के बाद दोनों टीमों के बीच टी-20 सीरीज शुरू होगी। पहला टी-20 मुकाबला 9 दिसंबर 2025 को कटक में खेला जाएगा। दूसरा टी-20 11 दिसंबर को मुल्लांपुर में, जबकि तीसरा टी-20 14 दिसंबर को धर्मशाला में होगा। चौथा टी-20 17 दिसंबर को लखनऊ में निर्धारित है और श्रृंखला का पांचवां तथा अंतिम टी-20 मुकाबला 19 दिसंबर 2025 को अहमदाबाद में खेला जाएगा।

यमुना सिटी में 7 सेक्टरों के किनारे विकसित होगा नया रिवरफ्रंट: जानें YEIDA की पूरी मास्टर प्लानिंग

नई दिल्ली यमुना सिटी में सात सेक्टरों के पास यमुना नदी के किनारे कई किलोमीटर लंबा रिवर फ्रंट विकसित किया जाएगा। इस परियोजना को शहर को सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए विशेष परियोजना के रूप में शामिल किया गया है और इसका विकास तेजी से आगे बढ़ रहा है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में यह रिवर फ्रंट यमुना नदी के आसपास बसे सेक्टर-26बी, 27, 26, 25, 24, 24ए, 23डी और अन्य क्षेत्रों में विकसित किया जाएगा। इन सेक्टरों के आसपास इस परियोजना के तहत सुंदर और व्यवस्थित नदी किनारे का निर्माण किया जाएगा। रिवर फ्रंट परियोजना के तहत नदी और आसपास के सेक्टरों के बीच एक लंबा व चौड़ा रास्ता विकसित किया जाएगा। इस मार्ग पर घास के टीले, शेड, फूलों की क्यारियां, रंग-बिरंगी रोशनी वाले फव्वारे, जॉगिंग और साइकिल ट्रैक, आकर्षक लैंडस्केपिंग, साथ ही खानपान कियोस्क, नदी देखने और बैठने के व्यू पॉइंट बनाए जाएंगे। यह सुविधाएं न केवल नदी तट से सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी, बल्कि जल गुणवत्ता में सुधार में भी मदद करेंगी। परियोजना में तटबंध का निर्माण किया जाएगा, जो मानसून के दौरान बाढ़ से क्षेत्र की सुरक्षा करेगा। साथ ही, क्षेत्र की उन्नत जल निकासी प्रणाली और रियल-टाइम मॉनिटरिंग बाढ़ से सुरक्षा को और प्रभावी बनाएगी। तालाबों-नहरों के आसपास 30 मीटर में ग्रीन बेल्ट होगा फेज-1 में कुल 10 प्रमुख झीले, नहरें और 135 तालाब शामिल हैं। ये तालाब और नहरें भूजल पुनर्भरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। वर्तमान में 38 तालाबों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। मास्टर प्लान के अनुसार, इन तालाबों और नहरों को हरित संरक्षण क्षेत्र के रूप में रखा गया है और इसके आसपास खुले हरित क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। नहरों के दोनों किनारों पर 30 मीटर और प्राकृतिक जलधाराओं के दोनों किनारों पर 15 मीटर की ग्रीन बेल्ट बनाई जाएगी। शैलेंद्र भाटिया, ओएसडी यीडा, ने कहा कि नोएडा एयरपोर्ट और अंतरराष्ट्रीय फिल्म सिटी को ध्यान में रखते हुए, फेज-1 में 15 प्रतिशत हरित क्षेत्र निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि यह पहल शहर को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने और यहां आने वाले लोगों को अलग और आकर्षक अनुभव प्रदान करने में मदद करेगी। पर्यटकों को बोटिंग की सुविधा मिलेगी नए आगरा शहर में 823.7 हेक्टेयर क्षेत्र में ग्रीन रिवर बफर जोन विकसित किया जाएगा। इस क्षेत्र में रंग-बिरंगे फूल, दुर्लभ पेड़-पौधे और जलस्रोत तैयार किए जाएंगे। पर्यटकों के लिए यहां बोटिंग, वॉकवे और फूड स्टॉल जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके अलावा, वेलनैस टूरिज्म एक्टिविटी भी आयोजित की जाएगी, जिसमें योग और आयुर्वेदिक मसाज जैसी गतिविधियों के माध्यम से लोग अपने शरीर और मन को स्वस्थ कर सकेंगे। धनौरी वेटलैंड पर्यटन स्थल बनेगा धनौरी वेटलैंड क्षेत्र, जो लगभग 100 एकड़ में फैला है, का उत्तर-पूर्वी भाग दलदली और जलभराव वाला है, जिसका कुल क्षेत्रफल 46.35 हेक्टेयर है। इस क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों के विदेशी जलीय जीव और सारस पाए जाते हैं। फिलहाल पर्यटकों के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं है। इस वेटलैंड के संरक्षण के लिए 112.89 हेक्टेयर का प्रभाव क्षेत्र (जोन ऑफ इन्फ्लुएंस) चिन्हित किया गया है, जिसके चारों ओर 100 मीटर का हरित बफर जोन तैयार होगा। इस जोन में हरे-भरे घास के टीले, वॉकवे, रंग-बिरंगे फव्वारे आदि बनाए जाएंगे, ताकि लोग प्राकृतिक वातावरण का आनंद ले सकें। साथ ही, इस क्षेत्र के पास 10 हेक्टेयर में पशु बचाव और पुनर्वास केंद्र विकसित किया जा रहा है, जो काले हिरण और अन्य वन्य जीवों का आश्रय बनेगा।

सीएम योगी आज आ सकते हैं अयोध्या : प्रशासन व पुलिस अधिकारियों के साथ करेंगे समीक्षा बैठक

अयोध्या प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 25 नवंबर को होने वाले राम मंदिर के ध्वजारोहण और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन की तैयारियों का जायजा लेने के लिए आज अयोध्या आ सकते हैं। सीएम योगी के दोपहर एक बजे के बाद यहां पहुंचने की संभावना है। सीएम योगी अयोध्या पहुंच कर प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे। यह बैठक रामजन्मभूमि परिसर में होगी। बैठक में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ जनप्रतिनिधि शामिल रहेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री की ओर से राम मंदिर परिसर में ध्वजारोहण समारोह से जुड़े कार्यक्रम स्थलों का भी निरीक्षण किया जाएगा। उनकी ओर से पीएम और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत की मौजूदगी में होने वाले कार्यक्रम की रूपरेखा को लेकर निर्देश दिए जाएंगे। अब राम मंदिर में मोबाइल नहीं ले जा सकेंगे मेहमान  राम मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त करते हुए ट्रस्ट व प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया है। ध्वजारोहण समारोह में आने वाले किसी भी मेहमान को मोबाइल फोन लेकर मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। शुरुआत में मेहमानों को मोबाइल साथ ले जाने की अनुमति दी गई थी, लेकिन दिल्ली में हुए विस्फोट के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ाने की सिफारिश की। इसके बाद ट्रस्ट और प्रशासन ने संयुक्त समीक्षा के बाद मोबाइल पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। 25 नवंबर को राम मंदिर में ध्वजारोहण समारोह आयोजित है। समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी, संघ प्रमुख मोहन भागवत, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल समेत आठ हजार मेहमान शामिल होंगे। मेहमानों को भेजे गए आमंत्रण पत्र में बताया गया था कि 25 नवंबर को सभी को सुबह आठ से 10 बजे के भीतर मंदिर में प्रवेश करना होगा। वे अपने साथ मोबाइल रख सकते हैं, लेकिन अब इस निर्णय को बदल दिया गया है। मेहमानों को खाली हाथ समारोह के लिए आना होगा। परिसर में उनके भोजन, जलपान की व्यवस्था ट्रस्ट की ओर से की जाएगी। समारोह को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। राम जन्मभूमि परिसर में अतिरिक्त मेटल डिटेक्टर, डॉग स्क्वॉड और सर्विलांस बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार बड़े आयोजन, बढ़ती भीड़ और राष्ट्रव्यापी सतर्कता को देखते हुए यह कदम आवश्यक था। मंदिर के आसपास 24×7 निगरानी के लिए नए कैमरे, हाईटेक कंट्रोल रूम और अतिरिक्त सुरक्षा कर्मी तैनात किए जा रहे हैं। प्रशासन ने सभी आगंतुकों से अनुरोध किया है कि वे मोबाइल साथ न लाकर सहयोग करें, ताकि मंदिर परिसर में सुरक्षा, अनुशासन और व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

टीवी स्क्रीन को साफ करते समय ना करें यह छोटी−छोटी गलतियां

टीवी के सामने बैठकर हम सभी अपने फेवरिट सीरियल व मूवी आदि देखते हैं, लेकिन जरा सोचिए कि आप टीवी खोले और आपको स्क्रीन गंदी नजर आए या फिर स्क्रीन के उपर उंगलियों के निशान हों तो यकीनन आपको स्क्रीन पर उतनी क्लीयरिटी नजर नहीं आएगी और फिर अपना फेवरिट सीरियल देखने का भी वह मजा नहीं आएगा, जो वास्तव में आना चाहिए। तो चलिए आज हम आपको टीवी स्क्रीन को साफ करने का आसान तरीका बता रहे हैं−   एलईडी व एलसीडी टीवी एलईडी व एलसीडी टीवी काफी डेलिकेट होते हैं और उन्हें सामान्य तौर पर गीला करके क्लीन करना उचित नहीं माना जाता। इसके लिए सबसे पहले आप उसकी डस्ट साफ करें और इसके लिए माइक्रोफाइबर युक्त सूखे कपड़े का इस्तेमाल करें। इसके बाद अगर आपको स्क्रीन पर किसी तरह के निशान या धब्बे नजर आ रहे हैं तो उसके लिए आप वाइप्स का सहारा ले सकते हैं। आजकल इलेक्टानिक सामान के लिए वाइप्स अलग से मिलते हैं, आप उसका इस्तेमाल करें। इसके अलावा टीवी के बटन व पिछले हिस्से को क्लीन करने के लिए माइक्रोफाइबर कपड़े का इस्तेमाल करना अच्छा रहेगा। आप प्लाज्मा स्क्रीन को भी एलईडी टीवी की तरह ही आसानी से क्लीन कर सकते हैं। ट्यूब टेलीविजन इस तरह से टीवी पुराने समय में काफी चलन में थे, लेकिन आज भी लोग इनका इस्तेमाल करते हैं। अगर आपके पास ट्यूब टेलीविजन है तो आप इसे बेहद आसानी से साफ कर सकते हैं। यह बिल्कुल उसी तरह साफ किया जाता है, जिस तरह आप अपने घर का शीशा क्लीन करते हैं। इसके लिए आप माइक्रोफाइबर क्लीनिंग क्लॉथ को हल्का गीला करके उससे टीवी स्क्रीन को साफ करें या फिर आप विंडो क्लीनिंग स्प्रे की मदद से भी भी ट्यूब टीवी को क्लीन कर सकते हैं।   छोटी−छोटी बातें अगर आप चाहते हैं कि आपका टीवी हमेशा चमकता रहे तो आप सप्ताह में कम से कम एक बार टीवी स्क्रीन को माइक्रोफाइबर कपड़े की मदद से साफ करें। कभी भी टीवी स्क्रीन पर सीधे कुछ भी स्प्रे न करें, भले ही वह ट्यूब टीवी क्यों न हो। जरूरत से ज्यादा स्प्रे आपके टीवी के कैबिनेट को नुकसान पहुंचा सकते हैं, यहां तक कि टीवी सेट को डैमेज कर सकते हैं। अपनी टीवी स्क्रीन पर ऐसे प्रॉडक्ट का इस्तेमाल न करें, जिसमें अमोनिया, एल्कोहॉल व एसीटोन का इस्तेमाल किया गया हो।