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रेलवे की बड़ी पहल: दुर्ग से बंद पड़ी ट्रेनों को फिर शुरू करने पर मंथन

रायपुर रेलवे एक बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है. उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक दुर्ग से चलने वाली इंटरसिटी एक्सप्रेस को पिछले दिनों बंद कर दिया गया था, अब उसे फिर से चलाने की तैयारी है. ये ट्रेन कोई और नहीं बल्कि दुर्ग-जगलपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस है. विशाल विशाखापट्टनम डिवीजन को दो हिस्से में कर नया रायगढ़ डिवीजन तैयार कर लिया गया है. इस प्रक्रिया के बाद रायगड़ा डिवीजन अपनी आय बढ़ाने नई योजनाओं पर विचार कर रही है. इसके 5 वर्षों से बंद दुर्ग-जगदलपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस को नई समय सारणी के साथ जगदलपुर के बजाय किरंदुल से चलाने पर विचार किया जा रहा है. तर्क दिया जा रहा है कि जगदलपुर से किरंदुल के  मध्य रेल दोहरीकरण का कार्य इस वर्ष पूर्ण हो जाएगा. रेलवे के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि विशाखापट्टनम से अलग बनाया गया रायगढ़ डिवीजन अपनी आय बढ़ाने हर संभव विचार कर रही है. उसका पूरा ध्यान बस्तर की तरफ है. सूत्रों ने बताया कि हालांकि रायगढ़ डिवीजन का सारा कार्य फिलहाल विशाखापट्टनम से हो रहा है किंतु नया डिवीजन बनाए जाने के बाद इस डिवीजन का अपना रिकॉर्ड अलग होगा इसलिए रायगढ़ डिवीजन का पूरा ध्यान बस्तर की तरफ है. पूरा ध्यान बस्तर की ओर बचेली किरंदुल लौह अयस्क परियोजनाएं अब रायगड़ा डिविजन अंतर्गत आ गई है और यह परियोजनाएं ही इस डिवीजन की आय का मुख्य स्रोत है. रेल सुविधाओं को तरस रहे बस्तरवासियों को यह डिविजन शांत रखना चाहती है. लौह अयस्क की दुलाई से आशातीश राजस्व प्राप्त करने के अलावा रेलवे बस्तर वालों की सुविधाओं का भी ख्याल रखना चाहती है. चूंकि बैलाडीला प्रक्षेत्र से अब दो निजी कंपनियां भी लौह अयस्क उत्खनन करने जा रही है. दोहरीकरण पूर्ण होने का इंतजार सूत्रों ने बताया कि अपनी आय बढ़ाने के उद्देश्य से ही नया डिवीजन 5 साल से बंद जगदलपुर-दुर्ग इंटरसिटी एक्सप्रेस को फिर से चालू करने गंभीर से विचार कर रही है. यह तर्क दिया जा रहा है कि बचेली, किरंदुल, भांसी, दंतेवाड़ा गीदम क्षेत्र के लोगों को ट्रेन में यात्रा करने के लिए जगदलपुर स्टेशन आना पड़ता है. दुर्ग एक्सप्रेस को किरंदुल से शुरू करने पर इस एक्सप्रेस को पर्याप्त पैसेंजर मिलेंगे. इस तर्क के साथ ही दुर्ग एक्सप्रेस को नई समय सारणी के साथ किरंदुल से शुरू करने व्यापक चर्चा चल रही है. बताया गया कि कामलूर से बचेली के मध्य करीब 40 किमी रेल दोहरीकरण कार्य 2025 के अंत तक पूर्ण कर लिया जाएगा. इसके पूर्ण होते ही दुर्ग एक्सप्रेस को चलाने गंभीरता की चर्चा हो रही है.

गौतम गंभीर बने कोच, और डूबने लगी टीम इंडिया की टेस्ट बादशाहत?

नई दिल्ली  गौतम गंभीर के कार्यकाल में भारतीय टीम का टेस्ट में तेजी से पतन हो रहा है। यकीन न हो तो आंकड़ों पर गौर फरमा लीजिए। गंभीर के कोच बनने से पहले टीम इंडिया टेस्ट मैचों में अपने घर में लगभग अजेय थी। दौरा करने वाली टीमें सीरीज जीतना तो छोड़िए, एक मैच तक जीतने के लिए तरस जाया करती थीं। फिर आया गौतम गंभीर युग और अब टीम मजबूत प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ घर में ही जीत के लिए तरस गई है। गौतम गंभीर के मुख्य कोच बनने से पहले टीम इंडिया 10 सालों में घर में जितने टेस्ट मैच हारी थी, उससे ज्यादा तो उनके कार्यकाल के शुरुआती 16 महीनों में ही हार गई है। गंभीर युग से पहले भारतीय टीम जनवरी 2013 से दिसंबर 2023 तक एक दशक में घर में सिर्फ 3 टेस्ट मैच हारी थी। गंभीर के आने के बाद अब तक 6 होम टेस्ट में ही 4 मैच हार चुकी है। गौतम गंभीर को जुलाई 2024 में भारतीय टीम के मुख्य कोच की जिम्मेदारी सौंपी गई। उनके कार्यकाल में टी20 और वनडे में तो टीम इंडिया का ट्रैक रिकॉर्ड शानदार है लेकिन टेस्ट में तो बहुत ही बुरा हाल है। उन्हें विरासत में एक ऐसी टीम मिली थी जिसे घर में हराना मजबूत से मजबूत टीमों के लिए टेढ़ी खीर हुआ करती थी। गंभीर के दौर में टीम इंडिया का टेस्ट में प्रदर्शन गौतम गंभीर के कोच बनने के बाद भारतीय टीम ने अब तक 18 टेस्ट में 7 में जीत हासिल की है और 9 में उसे हार का सामना करना पड़ा। इस दौरान घर में टीम इंडिया ने 8 मैच खेले हैं, जिनमें 4 में उसे जीत मिली है और 4 में हार। घर में पिछले 6 टेस्ट में 4 में हार गौतम गंभीर के मुख्य कोच बनने के बाद भारतीय टीम घर में खेले गए पिछले 6 मैचों में 4 में हार चुकी है। जिन दो मैचों में जीती है वो वेस्टइंडीज के खिलाफ जीती है। न्यूजीलैंड के खिलाफ बेंगलुरु टेस्ट में भारत चौथे दिन 8 विकेट से हार गया। उसके बाद पुणे टेस्ट में भी न्यूजीलैंड ने तीसरे दिन ही 113 रन से हराया। मुंबई टेस्ट में भी उसने भारतीय टीम को तीसरे दिन ही 25 रन से शिकस्त दी। अब दक्षिण अफ्रीका ने कोलकाता टेस्ट में तीसरे ही दिन भारत को 30 रन से हरा दिया है। किसी भी मजबूत टीम से नहीं जीत पाए सीरीज गौतम गंभीर के अब तक के कार्यकाल में भारतीय टीम किसी भी मजबूत टीम के खिलाफ टेस्ट सीरीज नहीं जीत सकी है। दक्षिण अफ्रीका के साथ 2 मैच की होम सीरीज में भी टीम इंडिया 1-0 से पीछे है। घर में सिर्फ बांग्लादेश और वेस्टइंडीज से जीते गंभीर के कार्यकाल में भारत ने जिन दो टेस्ट सीरीज में जीत हासिल की है, वो दोनों ही टीमें घर से बाहर काफी कमजोर मानी जाती हैं। भारत ने पिछले साल बांग्लादेश को अपनी धरती पर 2-0 से हराया था। उसके अलावा इसी साल वेस्टइंडीज को अपने घर में 2-0 से हराया। वेस्टइंडीज कभी सबसे मजबूत टीमों में शुमार होती थी लेकिन अब तो वह अपने अतीत की छाया तक नहीं है। न्यूजीलैंड ने घर में आकर धो दिया गौतम गंभीर के कार्यकाल में भारत पिछेल साल अपनी ही सरजमीं पर न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में बुरी तरह हारा। 3 मैच की सीरीज में टीम इंडिया एक भी मैच जीतना तो दूर, ड्रॉ तक नहीं करा पाई और 3-0 से शर्मनाक पराजय झेलनी पड़ी। उसके बाद भारत को ऑस्ट्रेलिया दौरे पर 1-3 से हार का सामना करना पड़ा। इस साल इंग्लैंड दौरे पर भारत 5 टेस्ट मैच की सीरीज में शानदार प्रदर्शन किया। सीरीज 2-2 से बराबर रही।  

एसआईटी ने सिवनी हवाला कांड की परतें खोलनी शुरू की, डीएसपी तक फैली जांच

सिवनी सिवनी के बहुचर्चित 2.96 करोड़ रुपए हवाला कांड में एसआईटी की जांच हर दिन नए खुलासे कर रही है। जांच में अब साफ हो गया है कि इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत हवाला से जुड़े खिलौना व्यापारी पंजू गिरी गोस्वामी ने की। वही पहला व्यक्ति था, जिसने हवाला रकम के मूवमेंट की गोपनीय जानकारी क्राइम ब्रांच के प्रधान आरक्षक प्रमोद सोनी को दी। सोनी ने यह जानकारी आगे बढ़ाई और सूचना की यह चेन बढ़ते-बढ़ते हॉकफोर्स प्रभारी डीएसपी पंकज मिश्रा से होते हुए तत्कालीन एसडीओपी पूजा पांडे तक पहुंच गई। सूचना की इस सुनियोजित कड़ी ने बाद में पूरे लूट कांड का रास्ता तैयार किया। एसआईटी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक हवाला रकम की यह सूचना योजना बनाकर आगे पास की गई और इसी आधार पर आगे की कार्रवाई की प्लानिंग बनी। जमानत याचिका लगाई इस बीच गिरफ्तार डीएसपी पूजा पांडे ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की है। माना जा रहा है कि जस्टिस देवनारायण मिश्रा की बेंच इस सप्ताह उनकी अर्जी पर सुनवाई कर सकती है। मामला हाई-प्रोफाइल होने के कारण अदालत के अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हैं। साली के चक्कर में जीजा भी गिरफ्तार जांच के दौरान एसआईटी ने एक और चौंकाने वाली कार्रवाई करते हुए मंगलवार को पूजा पांडे के जीजा, जबलपुर निवासी मेडिकल स्टोर संचालक वीरेंद्र दीक्षित को गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया कि पूजा पांडे अपनी गतिविधियों की जानकारी जीजा को देती थीं और लूट की रकम को ठिकाने लगाने की प्लानिंग में वह भी शामिल था। ये था मामला जांच में 8–9 अक्टूबर की रात का पूरा घटनाक्रम भी स्पष्ट हुआ है। महाराष्ट्र के व्यापारी सोहनलाल परमार के दो ड्राइवर सतना से 2.96 करोड़ रुपए लेकर जालना जा रहे थे। बंडोल थाना पुलिस ने रात में उनकी कार रोककर ड्राइवरों को जंगल में ले जाकर पूछताछ की और पूरी रकम कब्जे में ले ली। बाद में 1.25 करोड़ रुपए उन्हें लौटाकर छोड़ दिया गया। ड्राइवरों ने महाराष्ट्र पहुंचकर अपने मालिक को घटनाक्रम की जानकारी दी, जिसके बाद व्यापारी सिवनी आया लेकिन उसे बिना एफआईआर के थाने में बैठाकर धमकाकर वापस भेज दिया गया। बाद में कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज की गई। जैसे-जैसे मामला तूल पकड़ता गया, खुलासे होते चले गए। शुरू में एसडीओपी पूजा पांडे ने लूट के आरोपों से साफ इंकार किया लेकिन डीआईजी की जांच में गंभीर गड़बड़ियां सामने आते ही बड़ी कार्रवाई की गई। आईजी ने 9 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया और डीजीपी ने पूजा पांडे को निलंबित करते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए। एसआईटी अब इस बात की जांच कर रही है कि हवाला रकम की असल बंदरबांट कैसे हुई, किसने कितना हिस्सा लिया और पुलिस नेटवर्क में इसकी जड़ें कहां तक फैली हुई हैं। मामले में और भी गिरफ्तारी होने की संभावना जताई जा रही है। 

TET अनिवार्यता विवाद: हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को भेजा नोटिस, मांगा जवाब

रायपुर/बिलासपुर छत्तीसगढ़ के हजारों शिक्षकों में इन दिनों पदोन्नति को लेकर भारी अनिश्चितता का माहौल है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी टीईटी को पदोन्नति की अनिवार्य योग्यता में शामिल न किए जाने के कारण स्थिति उलझती जा रही है. शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि नियमों की अस्पष्टता उनके भविष्य पर सीधा असर डाल रही है, इसी वजह से मामला अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि, स्कूल शिक्षा सेवा भर्ती एवं पदोन्नति नियम 2019 में टीईटी को अनिवार्य बनाने का संशोधन किया जाना था, लेकिन सरकार की चुप्पी ने परेशानी बढ़ा दी. शिक्षकों ने कोर्ट में कहा कि सुप्रीम कोर्ट का 1 सितंबर 2025 का आदेश बिल्कुल स्पष्ट है सेवा में रहना चाहते हैं तो नियमों के हिसाब से अवसर मिलेगा, लेकिन पदोन्नति सिर्फ उन्हीं को मिलेगी जो टीईटी पास करेंगे. याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि, कई राज्यों ने इस आदेश पर तुरंत कार्रवाई की, नियम अपडेट किए और आवश्यकता पड़ने पर पुनर्विचार याचिका भी दायर की. वहीं छत्तीसगढ़ में इस पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. इसी अनिश्चितता के बीच हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर स्पष्ट रूप से स्थिति बताने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने पूछा है कि-टीईटी को पदोन्नति में अनिवार्य बनाने पर राज्य सरकार की राय क्या है?

क्राइम पर करारा प्रहार: हरियाणा पुलिस ने 24 घंटे में 98 बदमाश दबोचे, 81 हिस्ट्री शीट खोलीं

चंडीगढ़  हरियाणा पुलिस के ऑपरेशन ट्रैकडाउन के तहत 17 नवंबर का दिन हरियाणा की पुलिसिंग हिस्ट्री में ‘रिकॉर्ड-ब्रेकर डे’ के तौर पर दर्ज हो गया है। एक ही दिन में 75 केस दर्ज, 98 कुख्यात अपराधियों की गिरफ्तारी और 256 अन्य अपराधियों को जेल भेजकर पुलिस ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। मात्र 24 घंटों में 81 हिस्ट्री शीट खोली गईं। यह आंकड़ा पिछले 12 दिनों में खोली गई कुल हिस्ट्री शीट (179) को अचानक 260 तक पहुंचा देता है। ऑपरेशन ट्रैकडाउन के तहत पुलिस हर संदिग्ध और पुराने अपराधियों की प्रोफाइलिंग करके भविष्य के अपराधों की रोकथाम पर फोकस कर रही है। जितनी हिस्ट्री शीटें खुलीं, उतने ही गैंगों की ‘वर्किंग स्टाइल’ जैसी अंदरूनी जानकारियां बाहर आईं, जिन्हें आगे गैंग-फ़्री हरियाणा मॉडल में शामिल किया जाने वाला है। झज्जर जिले ने किया लीड 17 नवंबर का ‘टॉप परफॉर्मर’ झज्जर जिला रहा, जिसने 18 मामलों में 21 कुख्यात अपराधियों को पकड़कर बाकी जिलों के लिए मानक तय कर दिया। इसके बाद करनाल (9 गिरफ्तारियां), कैथल (8) और रोहतक (8) ने भी अच्छी परफॉरमेंस दर्ज की। हिस्ट्री शीट खोलने में सोनीपत सबसे आगे रहा, जिसने 26 हिस्ट्री शीटें खोलकर स्पष्ट संदेश दिया कि अब अपराधियों की पुरानी लोकेशन और चालबाज़ियों को रिकॉर्ड में कैद किया जाएगा। अपराध का ब्रेकडाउन: कौन सबसे ज्यादा फंसा एक दिन में दर्ज हुए कुल 75 मामलों में सबसे अधिक केस आर्म्स एक्ट के रहे। 27 केस और 33 गिरफ्तारियां हुईं। इसके अलावा हत्या का प्रयास के 16 केस में 23, उगाही के 10 केस में 10 और लूट के 6 केस में 10 गिरफ्तारियां हुईं। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि पुलिस सीधे उन अपराधियों को निशाना बना रही है, जो कानून-व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बनते हैं। करनाल: अवैध कब्ज़ा गैंग पर सबसे बड़ी चोट ट्रैकडाउन की अगली बड़ी कड़ी करनाल से सामने आई, जहां जमीन कब्ज़ा करने वाले नेटवर्क को पुलिस ने निशाना बनाया। 18 नवंबर को रमेश और विशाल वालिया को गिरफ़्तार किया गया। ये दो आरोपी 16 नवंबर को यमुना विहार कॉलोनी में प्लॉटों पर कब्ज़ा करने की कोशिश में थे। तफ्तीश में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी रमेश पर पहले से 6 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें 384 आईपीसी (जबरन वसूली), आर्म्स एक्ट, 307 (हत्या का प्रयास) जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। दोनों को रिमांड पर लेकर पुलिस अब उनके गैंग की ‘जमीन कब्ज़ा रैकेट’ की पूरी संरचना खंगाल रही है। बबली गैंग पर हुई बड़ी कार्रवाई ट्रैकडाउन के अंतर्गत करनाल पुलिस ने पुरानी रंजिश के मामले में चार और वांछित आरोपियों – बबली, जसराम, प्रदीप और सागर को हिरासत में लिया। ये सभी 26 अप्रैल को मीरा घाटी पार्क में शिकायतकर्ता पर हमला करके फरार हो गए थे। पूछताछ में पता चला कि गैंग लीडर बबली भी 6 मामलों में वांछित है। इनमें 2015 का आर्म्स एक्ट, 2019 का उगाही का मामला भी शामिल है। पुलिस पहले ही इस केस में पांच गिरफ्तारियां कर चुकी थी। अब इन चार की गिरफ्तारी के बाद पूरा गैंग लगभग ध्वस्त माना जा रहा है।   700 बड़े अपराधी सलाखों के पीछे डीजीपी ओपी सिंह ने बताया कि ऑपरेशन ट्रैकडाउन के तहत अब तक कुल 768 कुख्यात अपराधी गिरफ्तार किए गए हैं। इनके अलावा 2980 अन्य अपराधी धर दबोचे गए। पुलिस का कहना है कि ट्रैकडाउन सिर्फ बड़ी मछलियां नहीं पकड़ रहा, बल्कि स्थानीय स्तर पर छोटे लेकिन खतरनाक अपराधियों को भी खत्म कर रहा है, जो भविष्य में बड़े अपराधों की जड़ बनते हैं। अब ‘क्राइम-फ्री ज़ोन मैपिंग’ शुरू सूत्रों के मुताबिक, पुलिस अब हजारों गिरफ्तारियों और हिस्ट्री शीट डेटा को जोड़कर ‘क्राइम-फ्री ज़ोन मैपिंग’ तैयार कर रही है। एक ऐसा डिजिटल सिस्टम जो अपराधियों की मूवमेंट, उनके पुराने ठिकानों और गैंग पैटर्न को हाई-रिस्क ज़ोन से लिंक करेगा। इससे हर जिले की पुलिस को ‘प्री-क्राइम अलर्ट’ मिल सकेगा। यानी ट्रैकडाउन अब सिर्फ एक ऑपरेशन नहीं, एक टेक-इनेबल्ड क्राइम इरैडिकेशन मॉडल बन रहा है।

‘शहादत’ बयान पर बवाल: आतंकी उमर नबी को असदुद्दीन ओवैसी की दो-टूक

नई दिल्ली  दिल्ली में बम धमाका करके अपने साथ 15 लोगों की जिंदगी छीनने वाला आतंकी उमर नबी बम बांधकर इस तरह किए जाने वाले फिदायीन हमलों को मजहब का सबसे अच्छा काम मनता था। उमर के फोन से निकले एक वीडियो में वह इसे इस्लाम में जायज ठहराने की कोशिश करता दिखा। अब एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने आतंकी के कुतर्कों का जवाब देते हुए कहा कि यह इस्लाम में हराम है। उन्होंने कहा कि यह आतंकवाद के अलावा कुछ नहीं है।   दिल्ली में लाल किले के पास कार में धमाका करके मासूम लोगों की जान लेने वाले आतंकी का मोबाइल फोन कश्मीर से बरामद किया गया है। घटना से कुछ दिन पहले वह अपने घर गया था और अपने भाई को एक फोन यह कहकर दे आया था कि यदि उसके बारे में कोई जानकारी आए तो इसे पानी में फेंक देना। अब पुलिस ने उसके भाई को हिरासत में लेकर फोन बरामद किया तो उसमें यह वीडियो सामने आया। वीडियो में उमर नबी फिदायीन हमले को जायज ठहराते हुए कहता है कि इसे गलत समझा जा रहा है और इसके खिलाफ कई तर्क दिए जा रहे हैं, लेकिन सुसाइड बॉम्बिंग शहादत का अभियान है जिसे इस्लाम में भी इसी रूप में बताया गया है। ओवैसी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एक्स पर लिखा कि दिल्ली ब्लास्ट के आरोपी उमर नबी का एक बिना तारीख वाला वीडियो आया है जिसमें वह सुसाइड बॉम्बिंग को 'शहादत' और 'गलत समझा गया' बताते हुए उचित ठहरा रहा है। ओवैसी ने कहा, 'सुसाइड इस्लाम में हराम है और निर्दोष लोगों की हत्या बहुत बड़ा पाप है। इस तरह की हरकत कानून के भी खिलाफ है। इसे किसी भी तरह से 'गलत नहीं समझा गया' है। यह आतंकवाद के अलावा कुछ नहीं है।' गृहमंत्री अमित शाह से सवाल एआईएमआईएम नेता ने गृहमंत्री अमित शाह की ओर से किए गए दावे का जिक्र करते हुए पूछा कि इस समूह का पता नहीं लगा पाने के लिए जिम्मेदार कौन है। उन्होंने कहा, 'ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव के दौरान अमित शाह ने संसद को भरोसा दिया कि पिछले छह महीने में कोई भी स्थानीय कश्मीरी आतंकवादी समूहों में शामिल नहीं हुआ। तब यह समूह कहां से आया? इस समूह का पता नहीं लगा पाए जाने के लिए कौन जिम्मेदार है?'

श्री सत्य साईं बाबा के जन्म शताब्दी समारोह में पहुंचे तेंदुलकर, सुनाया विश्व कप 2011 से जुड़ा किस्सा

पुट्टपर्थी दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर बुधवार को आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी में श्री सत्य साईं बाबा के जन्म शताब्दी समारोह में पहुंचे, जहां उन्होंने श्री सत्य साईं बाबा से जुड़ी अपनी यादों को साझा किया। तेंदुलकर ने बताया कि बाबा अक्सर उनके मन की बात को जान लेते थे, जो उनके लिए अविश्वसनीय होता था। इस दौरान तेंदुलकर ने विश्व कप 2011 से जुड़ा एक किस्सा भी साझा किया। सचिन तेंदुलकर ने समारोह में कहा, इस जगह ने हम लाखों लोगों को बहुत सुकून, उद्देश्य और दिशा दी है। जब मैं यहां खड़ा होता हूं, तो मुझे याद आता है कि बाबा ने हमारे जीवन में कितने योगदान दिए और हमें बेहतर इंसान बनाया। सचिन तेंदुलकर ने बताया कि बचपन में उनका हेयरस्टाइल श्री सत्य साईं बाबा की तरह ही था। उन्होंने कहा, “मुझे याद है, मैं सिर्फ 5 साल का था और मैं जहां भी जाता था, मेरे स्कूल और मेरे आस-पास के लोग मुझे “वो जो छोटा बच्चा है ना, जिसके बाल सत्य साईं बाबा जैसे हैं” कहकर बुलाते थे। ऐसा सिर्फ इसलिए था, क्योंकि मैंने 5 साल की उम्र तक बाल नहीं कटवाए थे। मेरे बाल भी वैसे ही लंबे थे। मैं उस समय समाज के लिए बाबा के योगदान को समझने में बहुत छोटा था। मैं उनसे पहली बार 90 के दशक के मध्य में व्हाइटफील्ड में मिला था और तब से मुझे उनसे कई बार मिलने का सौभाग्य मिला है।” उन्होंने कहा, “बाबा में यह क्षमता थी कि चाहे आप कहीं भी हों वे आपके मन में, आपके साथ रह सकते थे। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि मेरे मन में कई सवाल चल रहे थे। बिना पूछे ही, बाबा ने उन सवालों के जवाब दे दिए। यह मेरे लिए एक अविश्वसनीय अनुभव था। क्योंकि मैं सोच रहा था, उन्हें कैसे पता चला कि मेरे मन में क्या चल रहा था? उन्होंने पहले ही जवाब दे दिया था, मुझे आशीर्वाद दिया था, मुझे दिशा दी थी।” सचिन तेंदुलकर ने बताया कि साल विश्व कप 2011 से पहले श्री सत्य साईं बाबा ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद की थी। उन्होंने कहा, “2011 से पहले मैं कई विश्व कप खेल चुका था। मुझे पता था कि यह मेरा आखिरी विश्व कप हो सकता है। हम बेंगलुरु में एक कैंप में थे। इसी बीच मुझे एक फोन कॉल आया और बताया गया कि बाबा ने मेरे लिए एक किताब भेजी है। यह सुनकर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गई। मैं जानता था कि यह विश्व कप हमारे लिए बेहद खास होगा। इस किताब ने मुझे आत्मविश्वास और आत्मबल दिया।”  

मतदाता सूची 2003: MP ऑनलाइन, CSC और लोक सेवा केंद्र देंगे सहयोग

ग्वालियर भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के तहत निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR ) का कार्य मध्य प्रदेश में जारी है, इसमें एक बड़ी समस्या 2003 की मतदाता सूची में अपने नाम का पता लगाना है लोगों की शिकायतें हैं कि चुनाव आयोग की वेबसाईट खुलती नहीं है, कई बार फाइल डाउन लोड नहीं होती, ग्वालियर जिला प्रशासन ने इसका हल खोज निकाला है। ग्वालियर जिले में मतदाताओं के सहयोग के लिये जिला प्रशासन की पहल पर वर्ष 2003 की मतदाता सूची में अपना या अपने परिजन का नाम पता लगाने में लोक सेवा केन्द्र, सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) एवं एमपी ऑनलाइन सेंटर भी मतदाताओं की मदद करेंगे। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकार की पहल पर इन सेंटरों के संचालक एसआईआर कार्य में सहयोग देने के लिये आगे आए हैं। MP Online, CSC संचालक नाम पता करने में करेंगे मदद  अपर जिला दण्डाधिकारी सी बी प्रसाद ने बीते रोज एमपी ऑनलाइन के संभागीय प्रबंधक व सीएससी प्रबंधकों एवं एमपी ऑनलाइन सेंटर के प्रतिनिधियों की बैठक ली थी। जिसमें एमपी ऑनलाइन सेंटर व सीएससी सेंटर के संचालकों ने वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नाम पता करवाने में मदद करने का भरोसा दिलाया है। जनमित्र केन्द्रों में मतदाता सहायता केन्द्र बता दें जिले में एसआईआर (निर्वाचक नामावली का विशेष गहन पुनरीक्षण) के संबंध में ग्वालियर शहर के सभी जनमित्र केन्द्रों में मतदाता सहायता केन्द्र बनाए गए हैं। मतदाता अपना ईएफ (एन्यूमरेशन फॉर्म) भरने में इन केन्द्रों की सहायता ले सकते हैं। साथ ही यहीं से वर्ष 2003 की मतदाता सूची में अपने नाम की स्थिति जान सकते हैं। जनमित्र केन्द्रों के अलावा अब एमपी ऑनलाइन सेंटर, लोक सेवा केन्द्र व सीएससी सेंटर पर भी मतदाताओं को यह सुविधा उपलब्ध होगी। BLO ने घर घर जाकर उपलब्ध कराये हैं फॉर्म  एसआईआर के तहत बीएलओ द्वारा अपने क्षेत्र के मतदाताओं को ईएफ (एन्यूमरेशन फॉर्म) उपलब्ध कराए गए हैं। यह फॉर्म मतदाता द्वारा भरे जाने हैं। साथ ही ईएफ में वर्ष 2003 की स्थिति की तुलनात्मक जानकारी की प्रविष्टि भी की जानी है। SIR से संबंधित शिकायतों के निराकरण के लिये नोडल अधिकारी जिले में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के तहत किए जा रहे एसआईआर (मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण) कार्य से संबंधित शिकायतों के निराकरण के लिये विशेष व्यवस्था की गई है। सहायक संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग राहुल पाठक को शिकायतों का निराकरण कराकर निर्वाचन आयोग को प्रतिवेदन भेजने के लिये नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही उनके अधीन चार शासकीय कर्मचारियों को नियुक्त किया गया है।

272 हस्तियों का राहुल गांधी को ओपन लेटर—जज, नौकरशाह और राजदूतों ने क्या लिखा जानें

नई दिल्ली  भारत के पूर्व जजों और पूर्व नौकरशाहों ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर निशाना साधा है। 200 से ज्यादा सदस्यों वाले इस समूह ने कांग्रेस सांसद की तरफ से भारत निर्वाचन आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों पर नाराजगी जाहिर की है। पत्र में कहा गया है कि राजनीतिक हताशा को छिपाने के लिए संस्थाओं को निशाना बनाया जा रहा है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर काम करने के आरोप लगाए थे।   पत्र में कहा गया है, 'हम समाज के वरिष्ठ नागरिक हैं और इस बात पर चिंता जाहिर करते हैं कि भारत का लोकतंत्र पर हमला किया जा रहा है। ये हमला बल से नहीं, बल्कि इसकी संस्थाओं पर जहरीली बयानबाजी के जरिए किया जा रहा है। कुछ राजनेता कोई वास्तविक नीति विकल्प पेश किए बगैर अपनी नाटकीय राजनीतिक रणनीति में उकसावे और निराधार आरोपों का सहारा ले रहे हैं।' 272 लोगों ने इस पत्र पर दस्तखत किए हैं, जिनमें 16 रिटायर्ड जज, 123 पूर्व नौकरशाह, 133 रिटायर्ड सैन्य अधिकारी और 14 पूर्व राजदूत शामिल हैं। इस पत्र में कहा गया है, 'भारतीय सशस्त्र बलों के साहस और उपलब्धियों पर सवाल उठाकर छवि खराब करने, न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाने, संसद और इसके पदाधिकारियों पर सवाल उठाने के बाद अब प्रतिष्ठा और ईमानदारी पर षड्यंत्रकारी हमले झेलने की बारी भारत के निर्वाचन आयोग की है।' पत्र में राहुल गांधी को लेकर कहा गया है कि उन्होंने लगातार चुनाव आयोग पर हमला किया है और कहा है कि उनके पास आयोग के वोट चोरी में शामिल होने के सबूत हैं। समूह ने लिखा, 'आरोपों के बाद भी उनकी तरफ से कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है…।' इसमें कहा गया है, 'कांग्रेस और अन्य दलों के कई वरिष्ठ नेताओं ने, वामपंथी एनजीओ, ध्यान आकर्षित कराने वाले कुछ लोगों ने SIR के खिलाफ इस बयानबाजी में साथ दिया है।' आगे लिखा है, 'यह तक घोषणा कर दी गई है कि आयोग बेशर्मी के साथ भाजपा की बी टीम के तौर पर काम क रहा है। ऐसी बयानबाजी भावनात्मक रूप से ताकतवर हो सकती है, लेकिन जांच में यह नहीं टिकेगी, क्योंकि चुनाव आयोग ने सार्वजनिक रूप से SIR का तरीका साझा किया है, इसकी निगरानी अदालत के बताए तरीकों से की गई है, अपात्र नामों हटाया गया है और नए पात्रों मतदाताओं को शामिल किया गया है। इससे पता चलता है कि ये आरोप संस्थागत संकट की आड़ में राजनीतिक हताशा छिपाने के लिए हैं।' पत्र में कहा गया है कि कांग्रेस नेता जैसा बर्ताव कर रहे हैं, उसे बार-बार चुनावी असफलता और हताशा से पैदा हुआ गुस्सा कहा जा सकता है। इसमें कहा गया है, 'जब राजनेता आम नागरिकों की महत्वाकांक्षाओं से दूर हो जाते हैं, तो वो अपनी विश्वसनीयता दोबारा बनाने के बजाए संस्थाओं पर भड़ास निकालते हैं। विश्लेषण की जगह नौटंकी ले लेती है। जनसेवा की जगह तमाशा होने लगता है। विडंबना यह है कि जिन कुछ राज्यों में विपक्ष की अगुवाई वाले दल सरकार बना लेते हैं, वहां चुनाव आयोग की आलोचना खत्म हो जाती है। जब कुछ राज्यों में उनके पक्ष में नहीं आता, तो आयोग विलेन हो जाता है।'  

बहुत बड़ी कार्रवाई, हेलमेट न पहनने पर पुलिस आरक्षक को SP ने सस्पेंड किया

बालाघाट  मध्य प्रदेश के बालाघाट से एक बड़ी खबर सामने आई है। हेलमेट न पहनने पर पुलिस आरक्षक पर बहुत सख्त एक्शन लिया गया है। हेलमेट न लगाने पर कॉन्स्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया है। इस कार्रवाई से हड़कंप है। आरक्षक ईश्वरदयाल कोल्हे का बिना हेलमेट पहने वीडियो हुआ था वायरल दरअसल आरक्षक ईश्वरदयाल कोल्हे का बिना हेलमेट के सरकारी दो पहिया वाहन चलाते  हुए वीडियो वायरल हुआ था। एसपी आदित्य मिश्रा ने इसे बड़ी लापरवाही मानते हुए ये कठोर एक्शन लिया है। बालाघाट में पुलिस के आरक्षक के खिलाफ हेलमेट न लगाने के कारण ये बड़ी कार्रवाई हुई है। एसपी आदित्य मिश्रा का बड़ा एक्शन आरक्षक का वर्दी में बिना हेलमेट के बाइक चलाने का वीडियो वायरल होने के बाद बालाघाट एसपी ने आरक्षक को सस्पेंड कर दिया है।आरक्षक ईश्वरदयाल कोल्हे वर्दी में बिना हेलमेट पहने शासकीय दो पहिया वाहन चलाते हुए कैमरे में कैद हो गए थे। आरक्षक के कृत्य से पुलिस की छवि धूमिल हुई-SP इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर पुलिस पर कानून को लेकर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे थे। जिस पर कार्रवाई करते हुए आरक्षक को निलंबित करने का आदेश जारी किया गया है। आदेश में कहा गया है कि आरक्षक के इस कृत्य से पुलिस की छवि धूमिल हुई है, इसलिए आरक्षक ईश्वरदयाल कोल्हे  को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। आपको बता दें कि  मध्यप्रदेश में इन दिनों हेलमेट न लगाने पर पुलिस अभियान चला रही है, लगातार ऐसे लोगों पर चालानी कार्रवाई की जा रही है जो नियमों को तोड़ रहे हैं। लिहाजा आरक्षक को  सस्पेंड करके बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। SP आदित्य मिश्रा फुल एक्शन में हैं, और नियमों का उल्लंघन करने वालों को सबक सिखा रहे है। इससे पहले हेलमेट चैकिंग अभियान के दौरान आदित्य मिश्रा ने पूर्व विधायक उमाशंकर मुंजारे की बाइक को रोका था और पूर्व विधायक का 2300 रुपये का चालान काटा था। एसपी आदित्य मिश्रा सिंघम मूड में हैं और कानून को तोड़ने वालों को सीधा संदेश दे रहे हैं।