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उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की पहल से दुल्लापुर–नेवारीगुड़ा–कान्हाभैरा मार्ग निर्माण को मंजूरी—ग्रामीण विकास को मिलेगी नई रफ्तार

रायपुर, जिला पंचायत कवर्धा क्षेत्र क्रमांक 10 के लिए विकास का नया अध्याय जुड़ गया है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के निरंतर प्रयासों से क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित सड़क—दुल्लापुर, नेवारीगुड़ा, कान्हाभैरा से कंझेटा तक—के निर्माण हेतु 7 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्राप्त हुई है। यह निर्णय क्षेत्रवासियों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करते हुए विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। क्षेत्रवासियों ने इस जनहितकारी निर्णय के लिए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सड़क के अभाव में लंबे समय से आवागमन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और व्यापारिक गतिविधियों में काफी दिक्कतें आती थीं। सड़क निर्माण प्रारंभ होने से इन समस्याओं का समाधान होगा और आर्थिक-सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी। जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 10 के सदस्य कैलाश चंद्रवंशी ने बताया कि उपमुख्यमंत्री  शर्मा क्षेत्र के समग्र विकास के लिए लगातार सक्रिय हैं। उनके मार्गदर्शन में क्षेत्र की अधोसंरचना को मजबूत बनाने के लिए कई अहम परियोजनाएँ स्वीकृत हो रही हैं। उन्होंने कहा कि दुल्लापुर–नेवारीगुड़ा–कान्हाभैरा मार्ग इस पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा है। सड़क का निर्माण दुल्लापुर के नहर पार से नेवारीगुड़ा तक गांव के बाहरी हिस्से से होकर किया जाएगा, जो दुल्लापुर और नेवारीगुड़ा के लिए बायपास मार्ग के रूप में भी कार्य करेगा। यह योजना क्षेत्र की गतिशीलता और सुविधा को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि सड़क निर्माण कार्य प्रारंभ करने की तैयारी तेजी से जारी है। इसके पूर्ण होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा बेहतर होगी तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों ने कहा कि यह स्वीकृति उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की संवेदनशीलता, दूरदर्शिता और जनसेवा के प्रति समर्पण को दर्शाती है।

खैरागढ़ महोत्सव के समापन समारोह में शामिल हुए राज्यपाल रमेन डेका

रायपुर, कला और संस्कृति की प्रतिष्ठित धरती खैरागढ़ शुक्रवार की रात को रंग–रस–संगीत की रंगीन छटा से निखर उठी। बहुप्रतीक्षित खैरागढ़ महोत्सव के समापन समारोह में राज्यपाल रमेन डेका मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। राज्यपाल ने इस अवसर पर कहा कि खैरागढ़ की सांस्कृतिक धरोहर न केवल छत्तीसगढ़ की पहचान है, बल्कि यह भारत की विविध कला-पद्धतियों का जीवंत केंद्र भी है। उन्होंने बताया कि यहां की संस्कृति रामायण काल से भी प्राचीन है। उन्होंने कहा कि संस्कृति के संरक्षण में ग्रामीणों की भूमिका अहम होती है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी में कला के प्रति प्रेम और संरक्षण की प्रेरणा जगाते हैं तथा कलाकारों को अपने हुनर के प्रदर्शन का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करते हैं।           समारोह में विशिष्ट अतिथि रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि खैरागढ़ भारत की कला-राजधानी के रूप में उभर रहा है और यह महोत्सव आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त करेगा। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने कहा कि खैरागढ़ महोत्सव विद्यार्थियों की साधना, सृजनशीलता और कला-अनुसंधान का सशक्त मंच है तथा विश्वविद्यालय भविष्य में राष्ट्रीय कला केंद्र के रूप में स्थापित होगा। समारोह में नृत्य संकाय के विद्यार्थियों ने कथक, भरतनाट्यम व ओडिसी नृत्य की सधी हुई प्रस्तुतिया दी। कोलकाता से आए मशहूर सरोदवादक उस्ताद सिराज अली खान और लंदन के तबला वादक पंडित संजू सहाय की जुगलबंदी ने संगीतमय वातावरण रचा। पंडित संजू सहाय के द्वारा तबला वादन की प्रस्तुति दी गई। पुणे की प्रख्यात कथक नृत्यांगना विदुषी शमा भाटे एवं उनके समूह ने रामायण के विभिन्न प्रसंगों पर कथक नृत्य की प्रस्तुतियां दी । राजनांदगांव की लोकगायिका श्रीमती कविता वासनिक एवं उनके दल ने लोकसंगीत अनुराग धारा की प्रस्तुति दी।

सुकमा पुनर्वास केंद्र पहुंचे उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, खुद बैठकर युवाओं के बनवाये आधारभूत दस्तावेज

रायपुर, छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने आज शाम सुकमा में बनाये गए पुनर्वास केन्द्र में आकस्मिक निरीक्षण किया। जहां उन्होंने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटे युवाओं के साथ चौपाल लगाकर उनसे बात की। इस दौरान पुनर्वासित युवाओं ने अपनी बातों को उपमुख्यमंत्री के सामने रखा। जहां उपमुख्यमंत्री खुद भी युवाओं के जमीन पर साथ बैठे और उनसे आत्मीय चर्चा की। उपमुख्यमंत्री की सरलता ने सभी को आनंदित कर दिया। सभी ने अपने मन की बातें बिना संकोच के उनके समक्ष रखी। इस दौरान उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने युवाओं से संवाद करते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी ली। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र में आधारभूत व्यवस्थाओं के संबंध में युवाओं से सीधे जानकारी भी ली और अधिकारियों को उनके खाने और अन्य आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने युवाओं से शिक्षा और खेती एवं उनके परिवार सदस्यों से मुलाकात के संबंध में भी जानकारी ली। जहां पर उन्होंने अधिकारियों और पुनर्वासित युवाओं से कहा कि आपके परिजन यदि पुनर्वास केन्द्र में आकर मुलाकात करना चाहते हैं और यदि बाजार वाले दिन आकर जब भी मिलना चाहें तो उनसे मुलाकात कर सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि यदि किसी पुनर्वासित युवा के परिवार जेल में निरूद्ध हैं और युवा उनसे मिलना चाहें तो उसकी भी व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने युवाओं में से यदि कोई विवाह की इच्छा भी रखते हैं तो उनके लिए भी सामूहिक विवाह की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। इस दौरान पुनर्वासित युवाओं ने अपने मूलभूत दस्तावेज पूर्ण ना होने की जानकारी दी। जिसपर उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने तुरंत जिला प्रशासन के अधिकारियों को दस्तावेज निर्माण करवाने के निर्देश दिए। जिसमें उन्होंने स्वयं अधिकारियों के साथ बैठकर दस्तावेज निर्माण प्रक्रिया का निरीक्षण किया और जहां भी दिक्कतें आईं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर उनका निराकरण भी किया। जहां आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड आदि बनवाने के लिए आवेदन कराए गए। उन्होंने युवाओं को विधानसभा सत्र के दौरान रायपुर भ्रमण कराकर उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रिया की जानकारी देने और उन्हें कार्यप्रणाली से अवगत कराने एवं इनके लिए पुनर्वास केंद्र में ही विशेष स्वास्थ्य शिविर लगवाने के लिए भी अधिकारियों को निर्देशित किया। उल्लेखनीय है कि सुकमा के पुनर्वास केंद्र में प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में पुनर्वासित युवाओं को राज मिस्त्री, कृषि उद्यमी, सिलाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही पुनर्वास नीति के अनुसार उन्हें दीर्घकालिक रोजगार दिलाने हेतु सहायता भी दी जा रही है। इस अवसर पर एडीजी श्री विवेकानंद सिन्हा, पुलिस महानिरीक्षक श्री सुन्दरराज पी, कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव, एसपी श्री किरण चव्हाण, अपर कलेक्टर गजेंद्र सिंह ठाकुर एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

दतिया जिले के किसानों को मिलेगी अब और अधिक गुणवत्तापूर्ण बिजली :ऊर्जा मंत्री तोमर

एम.पी. ट्रांसको ने 132 के व्ही सबस्टेशन भांडेर में ऊजीकृत किया 50 एम.व्ही.ए क्षमता का अतिरिक्त पावर ट्रांसफार्मर भोपाल  ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के निर्देश पर दतिया जिले की पारेषण व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण करते हुए मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) ने 132 के.व्ही. सबस्टेशन भांडेर में 50 एम.व्ही.ए. क्षमता का एक अतिरिक्त पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापित कर इसे ऊर्जीकृत किया है। ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने बताया है कि इससे सबस्टेशन मे जहां एक अतिरिक्त पॉवर ट्रांसफार्मर की उपलब्धता हो गई है, वहीं दतिया जिले मे भांडेर क्षेत्र के कृषि विद्युत उपभोक्ताओं को रबी सीजन में सिंचाई के लिये निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली प्राप्त हो सकेगी। इस ट्रांसफार्मर के सफलतापूर्वक उर्जीकृत होने से सबस्टेशन की क्षमता 63 एम.व्ही.ए. से बढ़कर अब 113 एम.व्ही.ए. की हो गयी है। दतिया जिले की पारेषण क्षमता मे हुई वृद्धि एम.पी. ट्रांसको के अधीक्षण अभियंता श्री राजीव तोतला ने बताया कि इससे पिछौर, डबरा, सीतापुर, डगराई, भांडेर, राजघाट, दतिया क्षेत्र के घरेलू एवं कृषि विद्युत उपभोक्ताओं सहित इस सबस्टेशन से निकलने वाले 33 के.व्ही. इंडस्ट्रियल फीडर को भी फायदा मिलेगा। दतिया जिले मे एम.पी. ट्रांसको 132 के.व्ही. सबस्टेशन भांडेर सहित अपने कुल 05 एक्स्ट्रा हाईटेंशन सबस्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण करती है। इसमें 220 के.व्ही. सबस्टेशन दतिया एवं 132 के.व्ही. के दतिया, सेंधवा तथा इंदरगढ सबस्टेशन शामिल है, जिनकी कुल ट्रांसफारमेशन क्षमता 796 एम.व्ही.ए. से बढकर 846 एम.व्ही.ए. की हो गई है।  

बिहार BJP में हलचल: दिलीप जायसवाल के मंत्री बनते ही नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर अटकलें तेज

 पटना  बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल के मंत्री बनने के बाद से ही सोशल मीडिया पर अगले यानी नए प्रदेश के नाम पर अटकलें शुरू हो गई हैं। एक आदमी, एक पद पर आम तौर पर अमल करने वाली भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव लगभग तीन साल से टल रहा है। 2024 के जनवरी में मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल पूरा हो रहा था, लेकिन लोकसभा चुनाव के लिए उन्हें मिला कार्यकाल विस्तार ऐन-केन-प्रकारेण बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में भाजपा बिहार में आनन-फानन में या जल्दबाजी में नया प्रदेश अध्यक्ष बनाएगी, इसकी संभावना ना के बराबर हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के बाद बदलाव हो सकता है।   फिर भी भाजपा के बारे में सोशल मीडिया पर लिखने वाले दावे और समीकरण के साथ नए नामों की चर्चा कर रहे हैं। चल रहे नाम में एक नाम तो पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्रा के बेटे नीतीश मिश्रा का है, जिनको इस बार मंत्री नहीं बनाया गया है। नीतीश कैबिनेट के 26 मंत्रियों में मंगल पांडेय ब्राह्मण से इकलौते मंत्री हैं। नीतीश की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से पहली बार मंत्री बने नीतीश मिश्रा 2015 में भाजपा में शामिल हुए थे। पिछली सरकार में वो उद्योग मंत्री रहे थे, जो विभाग अब दिलीप जायसवाल को दिया गया है। ब्राह्मण जाति से नीतीश मिश्रा का नाम चर्चा में, मंत्री नहीं बने हैं इस बार अपने पिता जगन्नाथ मिश्रा की सीट झंझारपुर से पांचवीं बार जीते नीतीश मिश्रा की चिंता करने वाले कह रहे हैं कि पार्टी ने उनके बारे में कुछ बड़ा सोचा है, इसलिए अभी मंत्रिमंडल से ड्रॉप कर दिया गया है। मिथिला की 37 सीटों में 31 सीटें एनडीए के पास आई हैं। दरभंगा-मधुबनी की 20 में 19 सीटों पर महागठबंधन को हार मिला है। महागठबंधन ने जो 6 सीटें जीती है, उसमें समस्तीपुर की 3 और बेगूसराय की 2 सीटें शामिल हैं। दलित जाति से चल रहा जनक राम का नाम, बसपा से भाजपा में आए थे पूर्व मंत्री नीतीश की पिछली कैबिनेट से इस मंत्रिमंडल तक नहीं पहुंच पाए बीजेपी के मंत्रियों में जनक राम भी शामिल हैं। कैबिनेट में इस बार 5 दलित मंत्री हैं, जिनमें बीजेपी से सिर्फ लखेंद्र रौशन का नाम है। बाकी 4 दलित मंत्रियों में जेडीयू के अशोक चौधरी व सुनील कुमार, लोजपा के संजय पासवान और हम के संतोष सुमन मांझी हैं। पीएम नरेंद्र मोदी से प्रभावित होकर 2013 में बसपा से भाजपा में आए जनक राम 2014 में गोपालगंज से भाजपा सांसद बने थे। 2019 में सीट जेडीयू को गई तो बाद में उनको एमएलसी बनाया गया और फिर वो नीतीश सरकार में दो बार मंत्री बने। चर्चा करने वाले कह रहे हैं कि उनको इसलिए ड्रॉप किया गया है, क्योंकि बीजेपी अगला अध्यक्ष दलित जाति से बना सकती है। ओबीसी से संजीव चौरसिया का नाम, जनसंघ से जुड़े पिता गंगा प्रसाद राज्यपाल भी रहे भाजपा के अगले प्रदेश अध्यक्ष के लिए पटना जिले की दीघा सीट से लगातार तीसरी बार विधायक बने संजीव चौरसिया का नाम भी लिया जा रहा है। संजीव चौरसिया का परिवार संघ से जुड़ा रहा है और उनके पिता जनसंघ के जमाने से भाजपा के साथ हैं। उनका कारोबारी परिवार पार्टी के संघर्ष के दिनों का साथी है। संजीव के पिता गंगा प्रसाद 1980 में भाजपा के गठन के बाद बिहार में पार्टी के कोष प्रमुख बना गए थे। गंगा प्रसाद को 1994 में पार्टी ने एमएलसी बनाया और अगले तीन टर्म तक वो विधान पार्षद रहे। बाद में गंगा प्रसाद को मेघालय और सिक्किम का राज्यपाल भी बनाया गया। संजीव चौरसिया 2015 से लगातार दीघा से जीत रहे हैं। संघ और पार्टी में काम के नाम पर उनके मंत्री बनने की चर्चा थी, लेकिन अब जब उनका नंबर सरकार में नहीं आया है तो यह चर्चा है कि उनका नंबर संगठन में लगने वाला है। भूमिहार जाति से विवेक ठाकुर का भी नाम, पिता सीपी ठाकुर भाजपा में कई पदों पर रहे बिहार बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए भूमिहार जाति से नवादा के लोकसभा सांसद विवेक ठाकुर का नाम भी चल रहा है। विवेक के पिता सीपी ठाकुर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्र में मंत्री रहे हैं। नीतीश की मौजूदा कैबिनेट में कुल दो भूमिहार मंत्री बनाए गए हैं। बीजेपी से विजय कुमार सिन्हा और जेडीयू से विजय कुमार चौधरी। एनडीए के 202 विधायकों में भूमिहार जाति के 22 एमएलए जीते हैं। ऐसे में 3-4 भूमिहार मंत्री बनने की अटकलें थीं। 32 विधायकों वाले राजपूत जाति को 4 मंत्री पद मिला है। विवेक ठाकुर का नाम लेने वाले बता रहे हैं कि पार्टी नया अध्यक्ष भूमिहार जाति से बना सकती है, क्योंकि ब्रह्मर्षि समाज को समर्थन और विधायक के हिसाब से नीतीश मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी नहीं मिल पाई है।  

टीम इंडिया ODI स्क्वॉड की 5 बड़ी बातें: स्टार तिकड़ी की वापसी, दिग्गजों की मौजूदगी

नई दिल्ली  भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आगामी तीन मैचों की वनडे सीरीज के लिए टीम की घोषणा कर दी है। अफ्रीका सीरीज के लिए कुछ खिलाड़ियों को आराम दिया गया है, जबकि कई पुराने खिलाड़ियों की वापसी हुई है। नियमित कप्तान शुभमन गिल के कोलकाता में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट के दौरान गर्दन में चोट लगने के कारण सीरीज से बाहर होने के बाद राहुल को टीम की बागडोर सौंपी गई। यहां जानिए भारतीय वनडे स्क्वॉड से जुड़ी 5 सबसे बड़ी बातें। वनडे में भारत के पहली पसंद के विकेटकीपर-बल्लेबाज केएल राहुल को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आने वाली वनडे सीरीज के लिए कप्तान बनाया गया है। नियमित कप्तान शुभमन गिल और उप-कप्तान श्रेयस अय्यर चोटों के कारण सिलेक्शन के लिए उपलब्ध नहीं थे। राहुल इस सीरीज में विशेषज्ञ बल्लेबाज और विकेटकीपर की दोहरी भूमिका निभाएंगे। रोहित और कोहली स्क्वॉड में बरकरार भारतीय टीम के अनुभवी बल्लेबाज विराट कोहली और रोहित शर्मा को आगामी दक्षिण अफ्रीका सीरीज के लिए टीम में चुना गया है। हाल ही में कई रिपोर्ट में दावा किया गया था कि कोहली-रोहित वनडे में ज्यादा समय तक खेल नहीं पाएंगे। हालांकि चयनकर्ताओं का ये कदम भी दर्शाता है कि चयनकर्ता 2027 वनडे विश्व कप की रणनीतिक तैयारियों के तहत इन दिग्गजों को भी टीम संयोजन में बनाए रखना चाहते हैं। अनुभवी रोहित शर्मा और विराट कोहली बैटिंग डिपार्टमेंट में मुख्य भूमिका निभाएंगे। ऋषभ पंत की वापसी विकेटकीपर ऋषभ पंत की वनडे टीम में वापसी हुई है। पंत के टीम में शामिल होने के बावजूद ध्रुव जुरेल अपनी जगह बनाए रखेंगे। पंत ने अपनी आखिरी वनडे पारी अगस्त 2024 में खेली थी, जिसके बाद वह चोटों से जूझ रहे थे। इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के दौरान पैर की चोट के बाद से वह लगभग 15 महीने तक वनडे टीम से बाहर रहे। इस सीरीज में उनके प्रदर्शन पर सभी की निगाहें होंगी कि वह कितनी जल्दी अपनी पुरानी लय और फिटनेस हासिल कर पाते हैं। उनके ऋतुराज गायकवाड़ और नितीश कुमार रेड्डी को मौका शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर दोनों के उपलब्ध नहीं होने की वजह से सिलेक्टर्स ने 15 मेंबर वाली टीम में तिलक वर्मा और ऋतुराज गायकवाड़ को चुना है। गायकवाड़ हाल के दिनों में घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बना रहे हैं। इस खिलाड़ी ने हाल में राजकोट में दक्षिण अफ्रीका ए के खिलाफ अनौपचारिक वनडे सीरीज में भारत ए की ओर से प्रभावशाली प्रदर्शन कर चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। तीन मैचों में गायकवाड़ ने 117, नाबाद 68 और 25 रनों की पारिया खेलीं। उन्हें इसलिए शामिल किया गया है क्योंकि गिल और उप कप्तान श्रेयस अय्यर दोनों ही चोट से उबर रहे हैं। गायकवाड़ अब तक छह वनडे खेल चुके हैं और उनका आखिरी वनडे 2023 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ था हार्दिक पांड्या के उपलब्ध नहीं होने की वजह से नीतीश रेड्डी अपनी जगह बनाए रखेंगे। बुमराह-सिराज करेंगे आराम मुख्य तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को 2023 विश्व कप फाइनल (अहमदाबाद) के बाद अब भी वनडे में वापसी के लिए इंतजार करना होगा। वह इस समय दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज खेल रहे हैं। उन्हें कार्यभार प्रबंधन के तहत आराम दिया गया है। बुमराह हालांकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय में खेले थे। वह उस राष्ट्रीय टीम का भी हिस्सा थे जो दुबई में एशिया कप और वेस्टइंडीज के खिलाफ दो मैच की घरेलू टेस्ट सीरीज में खेली थी। सिराज को भी कोलकाता और गुवाहाटी में दो टेस्ट खेलने के बाद आराम दिया गया है। वनडे सीरीज में भारत के पास केवल तीन फ्रंटलाइन पेसर – अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा और प्रसिद्ध कृष्णा होंगे, क्योंकि दो मैचों की टेस्ट सीरीज के बाद सिराज और जसप्रीत बुमराह पर विचार नहीं किया गया है। भारत की वनडे टीम: रोहित शर्मा, यशस्वी जायसवाल, विराट कोहली, तिलक वर्मा, केएल राहुल (कप्तान, विकेटकीपर), ऋषभ पंत (विकेटकीपर), वॉशिंगटन सुंदर, रविंद्र जडेजा, कुलदीप यादव, नीतीश कुमार रेड्डी, हर्षित राणा, रुतुराज गायकवाड़, प्रसिद्ध कृष्णा, अर्शदीप सिंह, ध्रुव जुरेल।  

गणना पत्रक भरने के लिए आवश्यक नहीं किसी भी प्रकार का ओटीपी

सीईओ श्री संजीव कुमार झा ने किया मतदाताओं को सतर्क भोपाल  एसआईआर-2026 के दौरान गणना पत्रक भरने के लिए बीएलओ या किसी भी अन्य अधिकारी द्वारा किसी भी माध्यम से ओटीपी मांगे जाने की आवश्यकता नहीं है। मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री संजीव कुमार झा ने मतदाताओं को सतर्क करते हुए बताया है कि वर्ष 2003 की मतदाता सूची में स्वयं, माता-पिता या दादा-दादी संबंधी जानकारी प्राप्त करने के लिए मतदाता अपने क्षेत्र के बीएलओ अथवा नजदीकी हेल्पडेस्क से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा जानकारी ऑनलाइन voters.eci.gov.in या ceoelection.mp.gov.in पर भी प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने नागरिकों से अनुरोध किया है कि एसआईआर पत्रक भरते समय सुरक्षा उपायों का पालन करें। आधिकारिक सरकारी वेबसाइट पर ही एसआईआर भरें। ये हैं सुरक्षा उपाय ओटीपी या व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ साझा न करें। एसआईआर की प्रक्रिया में निर्वाचन विभाग या किसी अधिकारी द्वारा फोन/मैसेज पर ओटीपी, आधार नंबर, मोबाइल नंबर आदि मांगना प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है। यदि कोई इस तरह की जानकारी माँगता है तो वह 'साइबर फ्रॉड कॉल' हो सकता है। एसआईआर भरते समय इन बातों का रखें ध्यान एसआईआर प्रक्रिया पूरी तरह निःशुल्क है। किसी भी प्रकार की फीस, प्रोसेसिंग चार्ज या भुगतान करने के लिए कहे जाने पर ध्यान दें-ऐसे संदेश/कॉल धोखाधड़ी हो सकते हैं। व्हॉट्सऐप या सोशल मीडिया पर मिले लिंक न खोलें। 'आपका वोटर कार्ड रद्द हो जाएगा', 'तुरंत एसआईआर भरें' जैसे संदेश फर्जी हो सकते हैं। एसआईआर के लिये साइबर कैफे का उपयोग करते समय सतर्क रहें। ऑटो-सेव बंद रखें, कार्य समाप्त होने पर ब्राउजर इतिहास/कैश साफ़ करें और अनिवार्य रूप से लॉगआउट करें। किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल: www.cybercrime.gov.in अथवा हेल्पलाइन: 1930 पर करें।  

ऑनलाइन आतंक का नेटवर्क बेनकाब: टेरर मॉड्यूल के मास्टरमाइंड की पहचान उजागर

नई दिल्ली  दिल्ली में लाल किला के पास हुए विस्फोट की जांच में सामने आए व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल में शामिल डॉक्टरों का कट्टरपंथ की ओर झुकाव साल 2019 से ही हो गया था। इसमें सोशल मीडिया प्लेटफार्मों का योगदान रहा। जांच से यह भी पता चला है कि व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल के मुख्य संचालक उकासा, फैजान और हाशमी हैं। ये तीनों भारत के बाहर से अपनी गतिविधियां चला रहे थे। जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी नेटवर्क से जुड़े मामलों में अक्सर इनके नाम सामने आते हैं। जांच से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि अब तक की जांच से सीमा पार आतंकवाद की रणनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिले हैं। ये भारत के लिए काफी चिंताजनक हैं। इस बदली रणनीति के तहत पाकिस्तान और दुनिया के अन्य हिस्सों में बैठे आतंकी आका डिजिटल प्लेटफार्मों का सहारा लेकर उच्च शिक्षित पेशेवरों को आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार कर रहे हैं। सीमा पार बैठ ऐसे चुने मोहरे जांच से जुड़े सूत्रों ने बताया कि टेरर मॉड्यूल के सदस्यों को शुरू में सीमा पार के आतंकी आकाओं ने फेसबुक और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर एक्टिव पाया। सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर डॉ. मुजम्मिल गनई, डॉ. अदील राठेर, डॉ. मुजफ्फर राठेर और डॉ. उमर उन नबी की गतिविधियों को देखकर ही उनका सलेक्शन सीमा पार के आतंकियों ने डिजिटल माध्यमों के जरिए किया। आईईडी बनाने के लिए यूट्यूब का इस्तेमाल अधिकारियों ने बताया कि ऐसे भारत विरोधी लोगों को तुरंत ‘टेलीग्राम’ पर एक निजी ग्रुप में जोड़ा गया। यहीं से उन्हें बरगलाना शुरू किया गया। जांच में यह भी पाया गया है कि आतंकी मॉड्यूल के सदस्यों ने हमलों को अंजाम देने के लिए संवर्धित विस्फोटक उपकरण (आईईडी) बनाने का तरीका सीखने के लिए यूट्यूब का भी खूब इस्तेमाल किया। सीमा पार के 3 आतंकी आकाओं के नाम पूछताछ से मिले निष्कर्षों और डिजिटल फुटप्रिंट की छानबीन से पता चला कि व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल के मुख्य संचालक उकासा, फैजान और हाशमी नाम के आतंकी हैं। ये तीनों भारत के बाहर से बैठकर अपनी गतिविधियां चला रहे है। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी नेटवर्क से जुड़ी जानकारियों में अक्सर इन्हीं आतंकी आकाओं के नाम सामने आते हैं।  

बॉर्डर बदल सकता है! राजनाथ सिंह के संकेत पर शुरू हुई नई राजनीतिक बहस

नई दिल्ली  सिंध क्षेत्र आज भारत का हिस्सा नहीं है। लेकिन हो सकता है कि सीमाएं बदल जाएं और यह क्षेत्र फिर से भारत का हिस्सा बन जाए। यह बातें रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने एक कार्यक्रम के दौरान कहीं। बता दें कि सिंधु नदी के करीब स्थित सिंध प्रांत 1947 में बंटवारे के बाद पाकिस्तान में चला गया था। इस दौरान वहां रहने वाले सिंधी लोग भारत में बस गए थे। रक्षामंत्री ने कहा कि सिंधी हिंदुओं, खासतौर पर लालकृष्ण आडवाणी की पीढ़ी के लोगों ने आज तक भारत से सिंध के अलगाव को स्वीकार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि आडवाणी जी ने इस बात का जिक्र अपनी किताब में भी किया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि केवल सिंध में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में हिंदू सिंधु नदी को पवित्र मानते हैं। सिंध के बहुत से मुसलमान भी मानते हैं कि सिंधु नदी का पानी मक्का के आब-ए-जमजम से कम पवित्र नहीं है। उन्होंने कहा कि यह बातें आडवाणी जी की किताब में हैं। राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि आज भले ही सिंध भारत का हिस्सा नहीं है, लेकिन सभ्यतात्मक रूप से सिंध हमेशा भारत का हिस्सा रहेगा। जहां तक जमीन का सवाल है, सीमाएं बदल सकती हैं। कौन जाने, कल सिंध फिर से भारत में शामिल हो जाए। रक्षामंत्री ने कहा कि हमारे सिंध के लोग, जो सिंधु नदी को पवित्र मानते हैं, हमेशा हमारे अपने रहेंगे। चाहे वे कहीं भी रहें, वे हमेशा हमारे होंगे। इससे पहले 22 सितंबर को मोरक्को में भारतीय समुदाय के साथ बातचीत के दौरान सिंह ने कहा था कि उन्हें विश्वास है कि भारत बिना किसी आक्रामक कदम उठाए पीओके वापस पा सकता है, क्योंकि पीओके के लोग कब्जा करने वालों से स्वतंत्रता की मांग कर रहे हैं। सिंह ने कहा था कि पीओके अपने आप हमारा होगा। पीओके में मांगें शुरू हो गई हैं, आपने नारेबाजी तो सुनी ही होगी।

सुकमा जिले के लखापाल-दुलेड़ में दो दिवसीय मेगा स्वास्थ्य शिविर सम्पन्न

295 ग्रामीणों का निःशुल्क इलाज, 164 आयुष्मान कार्ड बने रायपुर, छत्तीसगढ़ सरकार की नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत सुकमा जिले के दूरस्थ और संवेदनशील वनांचलों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की प्रतिबद्धता फिर से सफल साबित हुई। कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव के निर्देशन में और सीएमएचओ डॉ. आरके सिंह के मार्गदर्शन में लखापाल एवं दुलेड़ (मुकराजकोंडा पारा) में 21-22 नवंबर को दो दिवसीय विशाल स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। यह क्षेत्र सुकमा मुख्यालय से लगभग 110 किमी दूर घने जंगलों में स्थित है, जहां स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सामान्यतः चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। स्वास्थ्य शिविर में लखापाल में 133 तथा दुलेड़ में 162, कुल 295 ग्रामीणों की चिकित्सकीय जांच हुई। मरीजों को मौके पर ही निःशुल्क दवाइयां वितरित की गईं और आर्थिक सुरक्षा के लिए 164 नए आयुष्मान कार्ड भी बनाए गए, जिनसे वे भविष्य में निःशुल्क उपचार सुविधा प्राप्त कर सकेंगे। शिविर के दौरान स्वास्थ्य जागरूकता पर विशेष जोर दिया गया। ग्रामीणों को मच्छरदानी का उपयोग, स्वच्छता बनाए रखना, बासी भोजन से बचना और पानी के जमाव को रोकने जैसे महत्वपूर्ण उपाय बताए गए, जिससे वे अनेक बीमारियों से बचाव कर सकें। इस स्वास्थ्य शिविर को पहली बार विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने संबोधित किया। जिला चिकित्सालय सुकमा, वीवाई हॉस्पिटल रायपुर एवं स्थानीय स्वास्थ्य अमला की संयुक्त टीम ने अत्यंत कठिन परिस्थिति में भी ग्रामीणों का निःशुल्क उपचार किया। टीम में विशेषज्ञ सर्जन, शिशु रोग विशेषज्ञ, मेडिसिन विशेषज्ञ और त्वचारोग विशेषज्ञ शामिल थे। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की पहलों ने उनकी जीवनशैली में स्वास्थ्य और शिक्षा जागरूकता का नया संचार किया है। नियद नेल्लानार योजना की यह सफलता राज्य सरकार की दूरदर्शी नीति का प्रमाण है, जो कि न केवल दूरस्थ इलाकों में मूलभूत सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करती है, बल्कि जनजातीय समुदायों के जीवन स्तर में स्थायी सुधार भी ला रही है।