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नवाचार की नई मिसाल : जैविक खेती, फसल विविधता, पशुपालन और मत्स्य पालन का एकीकृत मॉडल

हरसिंह ओयामी का एकीकृत खेती मॉडल बना प्रेरणादायक रायपुर, वन एवं दंतेवाड़ा जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार जिले में खेती-किसानी में नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में विकासखंड गीदम के ग्राम बिंजाम के 57 वर्षीय प्रगतिशील किसान श्री हरसिंह ओयामी जिले में जैविक खेती के प्रमुख प्रेरणास्रोत के रूप में उभरकर सामने आए हैं। परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए उन्होंने अपनी कृषि व्यवस्था को पूरी तरह जैविक, टिकाऊ और लाभकारी मॉडल में बदल दिया है। परिवार का सहयोग, लगातार मेहनत और वैज्ञानिक सोच ने उन्हें जिले के अग्रणी जैविक किसानों की श्रेणी में शामिल कर दिया है। पशुपालन ने जैविक खेती को और मजबूत बनाया कृषि विभाग की सहायता से श्री ओयामी को पक्का पशु शेड, नाडेप टांका, वर्मी टांका सहित विभिन्न जैविक संरचनाओं का लाभ मिला। देशी गायों के सुव्यवस्थित पशुपालन ने उनकी जैविक खेती को और भी मजबूत बनाया। कृषक श्री ओयामी अब अपने खेत में वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र जैसे देशी जैविक उर्वरक और कीटनाशक स्वयं तैयार करते हैं। इससे खेती की लागत कम हुई है, मिट्टी की उर्वरता बढ़ी है और फसलों की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है। जैव विविधतापूर्ण फसल में रूचि श्री ओसमी की खेती की सबसे बड़ी विशेषता फसल विविधता है। वे श्री विधि, लाइन विधि और पारंपरिक विधि से देशी धान का उत्पादन करते हैं। इसके साथ ही बैंगन, टमाटर, गोभी, मटर, मूली, गाजर, लाल भाजी, मेथी, दलहन, तिलहन सहित अनेक सब्जियों एवं फसलों की वर्षभर खेती करते हैं। मिलेट्स के अंतर्गत रागी, कोदो-कुटकी तथा बागवानी फसलों में आम, अमरूद और वाटर एप्पल की खेती ने उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है। उनके जैविक उत्पादों की बढ़ती मांग ने उन्हें बाजार में अलग पहचान दिलाई है। एग्री-फिशरी मॉडल अपनाकर आय के नए स्रोत हुई विकसित श्री ओयामी ने कृषि के साथ-साथ  मत्स्य पालन में भी सफलता प्राप्त की है। उन्होंने एग्री-फिशरी मॉडल अपनाकर आय के नए स्रोत विकसित किए हैं। डबरी और ओरनामेंटल फिश पद्धति से वे लगभग 1,00,000 रुपये वार्षिक शुद्ध आय अर्जित कर रहे हैं। डबरी का पोषक जल उनकी जैविक खेती में अत्यंत उपयोगी साबित हुआ, जिससे फसल उत्पादन बढ़ा, कीटनाशकों की जरूरत कम हुई और मिट्टी की सेहत बेहतर बनी रही। किसान जैविक कृषि और मत्स्य पालन की नई तकनीकें सीखने आते हैं आज कृषक श्री हरसिंह ओयामी की जैविक खेती, फसल विविधता, पशुपालन और मत्स्य पालन का एकीकृत मॉडल उन्हें लगभग 7,00,000 रुपये की वार्षिक आय दे रहा है। उनका खेत अब केवल उत्पादन का केंद्र नहीं, बल्कि एक प्रेरणा मॉडल फार्म बन चुका है, जहाँ अन्य किसान जैविक कृषि और मत्स्य पालन की नई तकनीकें सीखने आते हैं। जैविक खेती समृद्ध कृषि का मजबूत आधार श्री ओयामी ने साबित किया है कि जैविक खेती न केवल परंपरा है, बल्कि भविष्य की सतत और समृद्ध कृषि का मजबूत आधार भी है। स्थानीय संसाधनों का समझदारीपूर्ण उपयोग, मेहनत और नवाचार उन्हें दंतेवाड़ा जिले के किसानों के लिए एक प्रेरक उदाहरण बनाते हैं।

अरुण चतुर्वेदी की कार का बड़ा एक्सीडेंट, वित्त आयोग अध्यक्ष बाल-बाल बचे

जयपुर राजस्थान वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी शनिवार शाम एक गंभीर सड़क दुर्घटना में घायल होने से बच गए। पाली से जयपुर लौटते समय ब्यावर के पास उनका सरकारी वाहन (RJ14 UE 5560) अनियंत्रित होकर जोरदार टक्कर का शिकार हुआ, जिसमें कार का आगे का हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। चतुर्वेदी पाली के रणकपुर में सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर की पोती के विवाह समारोह में शामिल होकर लौट रहे थे। हादसे के तुरंत बाद सुरक्षा कर्मियों और स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया। वाहन में मौजूद ड्राइवर और सुरक्षाकर्मी भी सुरक्षित रहे। चतुर्वेदी ने हादसे की जानकारी खुद ‘एक्स’ पर साझा करते हुए लिखा- “होइहि वही जो राम रचि राखा।” उन्होंने लिखा कि ईश्वर की कृपा से एक बड़ा हादसा टल गया। हादसे की सामने आई तस्वीरें वाहन के बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने की पुष्टि करती हैं।   उन्होंने एक्स पर घटना से जुड़ी तस्वीरें भी साझा की हैं, जिसमें गाड़ी का आगे का हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त दिखाई दे रहा है।

कैंपस में नमाज़ अदा करने पर हंगामा, हिंदू संगठनों का विरोध—छात्रों ने जताया खेद

मुंबई  महाराष्ट्र के कल्याण स्थित आइडियल कॉलेज में कुछ छात्रों ने खाली क्लासरूम में नमाज अदा की, जिसका वीडियो वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया। इस घटना से कॉलेज कैंपस में भारी तनाव की स्थिति बन गई। पुलिस के साथ-साथ दक्षिणपंथी संगठनों का ध्यान भी इस ओर गया। हालांकि, किसी तरह की हिंसा की खबर नहीं है और स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया है। वीडियो वायरल होने के बाद विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता कॉलेज पहुंचे। उन्होंने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हिल लाइन पुलिस तुरंत कैंपस पहुंची और प्रदर्शनकारियों को शांत कराया।   कॉलेज प्रशासन के अनुसार, फार्मेसी डिपार्टमेंट के कुछ छात्रों ने खाली पड़ी क्लासरूम में कुछ मिनट के लिए नमाज पढ़ी थी। एक शख्स ने बताया, 'छात्रों का इरादा कोई विवाद पैदा करना या किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।' प्रशासन ने छात्रों को बुलाकर चर्चा की, जिसमें उन्होंने नमाज पढ़ने की बात स्वीकार की। उन्होंने कॉलेज प्रशासन और कार्यकर्ताओं से माफी मांग ली, ताकि गलतफहमी दूर हो सके। कॉलेज की ओर से क्या कहा गया कॉलेज प्रशासन ने दोहराया कि संस्थान के नियमों और अनुशासन का पालन सबसे ऊपर है। कॉलेज कैंपस में किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि की इजाजत नहीं है। भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए उचित कदम उठाए जाएंगे। इन छात्रों के खिलाफ भी उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने स्थिति पूरी तरह नियंत्रित होने के बाद कुछ देर कैंपस की निगरानी की और फिर चली गई। मामला फिलहाल शांत बताया जा रहा है।  

पूरा परिवार खत्म: पति ने गला घोंटकर पत्नी-बच्चों की ली जान, फिर खुद भी फांसी लगाई

दुमका झारखंड के दुमका जिले में रविवार सुबह एक दंपति और उनके दो बच्चे घर में मृत पाए गए। सभी शवों के गले पर गहरा निशान मिला है, जो हत्या की ओर संकेत करता है। यह घटना हंसडीहा पुलिस थाना क्षेत्र के बरदाही गांव में हुई। बताया जा रहा है कि यहां एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और दो मासूम बच्चों की हत्या कर खुद भी फांसी लगाकर जान दे दी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और दहशत का माहौल है। हंसडीहा पुलिस थाने के प्रभारी ताराचंद ने कहा, “हमने घर से चार शव बरामद किये हैं। शुरुआती जांच से पता चलता है कि व्यक्ति ने अपनी पत्नी और दो बच्चों का कथित तौर पर गला घोंट दिया और फिर खुद फंदे से लटककर जान दे दी। जांच जारी है।” उन्होंने बताया कि मृतकों की पहचान वीरेंद्र मांझी (30), उनकी पत्नी आरती कुमारी (26), उनकी बेटी रूही कुमारी (4) और बेटे विराज कुमार (2) के रूप में हुई है। मृतक के पिता मनोज मांझी ने बताया कि सुबह जब घर का दरवाजा नहीं खुला तो संदेह हुआ। अंदर जाकर देखा तो बहू और दोनों बच्चे मृत पड़े थे। इसके बाद बेटे की तलाश की गई और वह घर से दूर एक पेड़ से लटका मिला। उन्होंने बताया कि जीवित होने की उम्मीद में उन्होंने बेटे का शव नीचे उतारा, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। मृतक के पिता ने बताया कि मृतक के बेटे विराज की तबीयत काफी समय से खराब थी और उसका इलाज चल रहा था। बेटे के इलाज और आर्थिक बोझ को लेकर दंपती के बीच अक्सर विवाद होता रहता था। शनिवार दोपहर ही वीरेंद्र अपनी पत्नी और बच्चों को मायके से वापस लेकर आया था। रात में किसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच बहस हुई और देर रात यह घटना घटित हो गई।  

सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान से राज्य में बदला सामाजिक परिदृश्य, मिशन शक्ति से गांव तक पहुंचा स्वावलंबन का संदेश

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नेतृत्व वाली सरकार के शासनकाल में महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर किए गए व्यापक प्रयास अब ठोस परिणामों के रूप में सामने आ रहे हैं। प्रदेश में महिला सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय स्वतंत्रता और रोजगार सृजन जैसे क्षेत्रों में तेजी से सुधार हुआ है। इसी परिवर्तन को आधार बनाकर उत्तर प्रदेश आज महिला सशक्तिकरण के जरिए सामाजिक और आर्थिक बदलाव की नई मिसाल पेश कर रहा है। प्रदेश सरकार ने सबसे पहले महिला सुरक्षा को प्राथमिकता दी। एंटी रोमियो स्क्वाड की सक्रियता, 1090 वुमेन पावर लाइन का विस्तार और पिंक पेट्रोलिंग जैसे कदमों ने महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया है। शहरों और गांवों दोनों में बदलते सामाजिक वातावरण का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। परिवारों में लड़कियों की शिक्षा को लेकर सकारात्मकता बढ़ी है और माता-पिता अब बिना किसी संकोच के बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में मिशन शक्ति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके माध्यम से महिला समूहों को नेतृत्व, आत्मनिर्भरता, सुरक्षा और जागरूकता से जोड़ा गया। बालिकाओं के लिए कायाकल्प, स्कूलों में जेंडर सेफ्टी प्रोग्राम और किशोरी स्वास्थ्य अभियान जैसे प्रयासों ने सामाजिक बदलाव की सुदृढ़ नींव रखी। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को जन्म से लेकर स्नातक तक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई, जिससे पढ़ाई में निरंतरता बनी। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की बात करें तो यूपी आज देश में सबसे बड़े महिला स्वयं सहायता समूह नेटवर्क के रूप में उभर रहा है। प्रदेश में लाखों महिलाएं आज स्वयं सहायता समूहों के जरिए उद्यमिता की ओर बढ़ रही हैं। बैंक सखी, बीसी सखी और कृषि सखी जैसे मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की वित्तीय स्वतंत्रता को गति दे रहे हैं। बैंकिंग सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ग्रामीण बैंकिंग को नए स्तर पर पहुंचा रही है। ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना) ने महिलाओं को स्थानीय उत्पादों पर आधारित रोजगार से जोड़ने का मजबूत अवसर दिया है। हथकरघा, हस्तशिल्प, फूड प्रोसेसिंग और स्थानीय उद्योगों में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। शासन की ओर से आसान ऋण, प्रशिक्षण, मार्केट लिंक और डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहयोग मिलने से महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।  स्टार्टअप नीति के अंतर्गत महिला उद्यमियों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। महिला आधारित स्टार्टअप को अनुदान और मार्गदर्शन मिलने से टेक्नोलॉजी आधारित उद्यमों में भी उनकी भागीदारी बढ़ी है। प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों के जरिए पोषण उपक्रम, यूनिफॉर्म निर्माण, समुदाय आधारित स्वच्छता सेवाएं और स्थानीय उत्पादन यूनिट्स चलाने वाली महिलाओं ने साबित किया है कि आर्थिक सशक्तिकरण ग्रामीण विकास को भी गति देता है। सरकारी योजनाओं के प्रभाव से आज गांवों से लेकर शहरों तक महिलाओं की भूमिका केवल पारिवारिक सीमाओं तक ही केंद्रित नहीं हैं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों में उनकी जिम्मेदारी, भूमिका और सक्रियता निरंतर बढ़ रही है। योगी आदित्यनाथ सरकार के प्रयासों ने महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और अवसर प्रदान कर समाज में उनकी स्थिति को पहले से अधिक सशक्त बनाया है। उत्तर प्रदेश का यह परिवर्तन प्रदेश सरकार नीतियों और प्रयासों का परिणाम है। जिसने महिलाओं को नई ऊर्जा और नई दिशा दी है। प्रदेश अब वास्तविक अर्थों में महिला सशक्तिकरण को सामाजिक और आर्थिक विकास की धुरी बनाने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण से संबंधित आंकड़े… – उत्तर प्रदेश में महिला स्वयं सहायता समूहों की संख्या 2025 तक लगभग 95 लाख सदस्यों तक पहुंच गई है । – सभी ग्राम पंचायतों में बीसी सखियों की तैनाती की गई है। वित्तीय समावेशन और महिला सशक्तिकरण को गति देने वाले इस प्रयास के अंतर्गत बीसी सखियों ने लगभग 32 हजार करोड़ रुपए से अधिक का वित्तीय लेनदेन किया है।  – ओडीओपी योजना में महिलाओं की भागीदारी 2018 की तुलना में 2024 तक लगभग 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। विशेष रूप से यह वृद्धि हस्तशिल्प, हथकरघा, फूड प्रोसेसिंग और वुडक्राफ्ट क्षेत्रों में दर्ज हुई है। – महिला उद्यमिता मिशन और स्टार्टअप नीति के अंतर्गत 2025 तक लगभग 3200 से अधिक महिला संचालित स्टार्टअप रजिस्टर्ड हुए हैं। – विगत साढ़े 08 वर्षों में श्रम शक्ति में महिलाओं की भागीदारी 14 प्रतिशत से बढ़कर 35 प्रतिशत हो गई है।

SIR सिस्टम ने कर दिखाया कमाल: 37 साल बाद मिला लापता बड़ा बेटा, पढ़िए पूरी कहानी

कोलकाता  पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में SIR के दौरान एक कमाल की घटना हुई। मतदाता सूची की संशोधन प्रक्रिया ने लगभग चार दशक से बिछड़े एक परिवार को फिर से मिला दिया। चक्रवर्ती परिवार ने 1988 में अपने बड़े बेटे विवेक चक्रवर्ती को खो दिया था। घर से निकलने के बाद विवेक का कोई अता-पता नहीं चला। बरसों तक खोजबीन की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। अब तक उन्हें उम्मीद ही नहीं थी कि कभी फिर मिलन होगा। मगर, एसआईआर अभियान ने वो दरवाजा खोल दिया जो वे बंद समझ चुके थे।   विवेक के छोटे भाई का नाम प्रदीप चक्रवर्ती है। वह उसी इलाके के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) हैं। एसआईआर के दौरान हर फॉर्म पर उनका नाम और मोबाइल नंबर छपा था। विवेक का बेटा कोलकाता में रहता है जो अपने चाचा के बारे में कुछ नहीं जानता था। उसने दस्तावेजों के लिए मदद मांगने की खातिर प्रदीप को फोन किया। पहले कागजात को लेकर बातें हुईं, लेकिन धीरे-धीरे परिवार की कड़ियां जुड़ने लगीं। प्रदीप ने बताया, 'मेरा बड़ा भाई आखिरी बार 1988 में घर आया था। उसके बाद से गायब है। हमने हर जगह ढूंढा। मगर, उसने सारे रिश्ते तोड़ दिए। जब इस लड़के के जवाब हमारे परिवार की उन बातों से मिलने लगे जो सिर्फ हम ही जानते हैं, तब मुझे एहसास हुआ कि मैं अपने भतीजे से बात कर रहा हूं।' आखिर कैसे खुला पूरा राज इस तरह 37 साल से लापता चक्रवर्ती परिवार का बड़ा बेटा मिल गया। दोनों तरफ खुशी की लहर थी। इसके बाद प्रदीप ने खुद विवेक से बात की। 37 साल की खामोशी के बाद दो भाइयों की आवाजें एक-दूसरे तक पहुंचीं। भावुक होकर विवेक ने कहा, 'इस भावना को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। 37 लंबे साल बाद मैं आखिरकार घर लौट रहा हूं। मैंने घर के सभी लोगों से बात कर ली है। खुशी से भरा हुआ हूं। मैं चुनाव आयोग को धन्यवाद देता हूं, क्योंकि एसआईआर प्रक्रिया न होती तो यह मिलन कभी संभव नहीं होता।' इस तरह मतदाता सूची संशोधन अभियान ने न सिर्फ वोटर लिस्ट को दुरुस्त किया, बल्कि एक टूटे परिवार को फिर से जोड़ दिया।  

चंडीगढ़ प्रशासन पर प्रस्तावित विधेयक टला, सरकार ने सत्र से किया बाहर

नई दिल्ली  केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की वैधानिक स्थिति बदलने के बारे में आ रही रिपोर्टों के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बयान जारी किया है। इसमें कहा गया कि अभी चंडीगढ़ के लिए केंद्र की ओर से कानून बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास विचाराधीन है। इस संबंध में संसद के शीतकालीन सत्र में विधेयक लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इन रिपोर्टों के कारण सियासी हलकों में गरगर्मी बढ़ी हुई थी। इसे देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि चंडीगढ़ के साथ पंजाब या हरियाणा के परंपरागत संबंधों को बदलने के बारे में कोई बातचीत नहीं चल रही है।   पोस्ट में कहा गया, 'चंडीगढ़ के लिए सिर्फ केंद्र सरकार की ओर से कानून बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव अभी केंद्र सरकार के स्तर पर विचाराधीन है। इस प्रस्ताव पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। इस प्रस्ताव में किसी भी तरह से चंडीगढ़ की शासन-प्रशासन की व्यवस्था या चंडीगढ़ के साथ पंजाब या हरियाणा के परंपरागत संबंधों को बदलने की कोई बात नहीं है। चंडीगढ़ के हितों को ध्यान में रखते हुए सभी हितधारकों से पर्याप्त विचार विमर्श के बाद ही उचित निर्णय लिया जाएगा। इस विषय पर चिंता की आवश्यकता नहीं है। आने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में इस आशय का कोई विधेयक प्रस्तुत करने की केंद्र सरकार की कोई मंशा नहीं है।' पंजाब के सीएम मान की तीखी प्रतिक्रिया इससे पहले, मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि सरकार केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की वैधानिक स्थिति बदलने की दिशा में काम कर रही है। इससे चंडीगढ़ के प्रशासक के रूप में पंजाब के राज्यपाल के अधिकार कम हो जाएंगे। यह कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार चंडीगढ़ में दिल्ली की तरह उपराज्यपाल का पद सृजित कर सकती है। इस पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि यह एक बड़ा अन्याय है। भाजपा सरकार पंजाब की राजधानी छीनने की साजिश कर रही है। उन्होंने कहा, ‘चंडीगढ़ पहले भी पंजाब का अभिन्न हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। कोई भी व्यक्ति या संस्था इससे इनकार नहीं कर सकता कि मातृ राज्य होने के नाते पंजाब का अपनी राजधानी चंडीगढ़ पर पूरा अधिकार है।’  

क्यों छीना जा सकता है अल फलाह यूनिवर्सिटी का माइनॉरिटी दर्जा? जानिए किसने थमाया नोटिस

नई दिल्ली  दिल्ली ब्लास्ट के बाद से जांच में केंद्र में रही अल फलाह यूनिवर्सिटी के माइनॉरिटी स्टेटस पर भी अब खतरे के बादल उमड़ आए हैं। हमारे सहयोगी हिंदुस्तान टाइम्स को मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) ने अल-फलाह मेडिकल कॉलेज के 'अल्पसंख्यक दर्जे' को लेकर एक कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इससे पहले, 12 नवंबर को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने भी मान्यता से जुड़े दावों को लेकर कॉलेज को नोटिस जारी किया था।   नोटिस का कारण NCMEI ने यूनिवर्सिटी से पूछा है कि उनका अल्पसंख्यक दर्जा क्यों न रद्द कर दिया जाए। यह कदम तब उठाया गया है जब जांचकर्ताओं ने 10 नवंबर को लाल किले में हुए धमाके में शामिल दो व्यक्तियों का संबंध इस संस्थान से पाया है। आयोग ने यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार और हरियाणा शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को 4 दिसंबर को होने वाली सुनवाई के लिए बुलाया है। नोटिस में अल-फलाह से उनकी मैनेजिंग बॉडी, ट्रस्ट के ढांचे, फंडिंग (पैसे) के स्रोतों, नियुक्ति की प्रक्रियाओं और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग अधिनियम, 2004 के नियमों के पालन से जुड़े दस्तावेज मांगे गए हैं। आयोग ने ट्रस्ट डीड, मैनेजमेंट की संरचना, एडमिशन के आंकड़े, शिक्षकों की नियुक्तियां, गवर्निंग बॉडी की बैठकों के विवरण और पिछले तीन सालों के वित्तीय विवरण के मूल रिकॉर्ड भी मांगे हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा, "पेश न होने या दस्तावेज उपलब्ध न कराने पर संस्थान के खिलाफ एकतरफा कार्यवाही की जा सकती है।" इस बीच हरियाणा शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह एक सत्यापन रिपोर्ट (verification report) दाखिल करे। इस रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी को अल्पसंख्यक संस्थान की मान्यता मिलने के बाद से किए गए निरीक्षणों (inspections), निगरानी कार्यों और विभाग व यूनिवर्सिटी के बीच हुए पत्राचार (बातचीत) का पूरा विवरण होना चाहिए। मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के अनुसार, NCMEI अब निम्नलिखित बातों की जांच करेगा। क्या यूनिवर्सिटी का संचालन अभी भी उसी अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा किया जा रहा है जिसका ट्रस्ट में प्रतिनिधित्व है? क्या यूनिवर्सिटी के स्वामित्व या नियंत्रण में कोई बदलाव आया है? क्या अल्पसंख्यक दर्जे के लिए जरूरी शर्तें अभी भी बरकरार हैं? 10 नवंबर को हुए धमाके के बाद से इस संस्थान पर जांच और सख्त हो गई है। उस धमाके में कम से कम 12 लोगों की जान गई थी। जांच में पाया गया है कि विस्फोटकों से भरी गाड़ी चलाने वाले डॉ. उमर उन-नबी और इस मामले में आरोपी डॉ. मुजम्मिल शकील गनी, दोनों ही इस यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए थे।राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने मामले से जुड़े चार डॉक्टरों का नाम अपने मेडिकल रजिस्टर से हटा दिया है। इन डॉक्टरों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया है। डॉक्टरों के नाम: मुजफ्फर अहमद राथर अदील अहमद राथर मुजम्मिल शकील गनी शाहीन शाहिद 18 नवंबर को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी मनी लॉन्ड्रिंग (काले धन को सफेद करने) की जांच के तहत हुई है, जो मान्यता (accreditation) के फर्जी दावों और पैसों की गड़बड़ी से जुड़ी है। एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) ने इस यूनिवर्सिटी की सदस्यता रद्द कर दी है। इससे पहले राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर किए गए मान्यता से जुड़े दावों पर सफाई मांगी थी। NAAC के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि यूनिवर्सिटी ने अपना जवाब भेज दिया है। उन्होंने परिषद को बताया है कि वेबसाइट से वे दावे हटा दिए गए हैं। कई बार संपर्क करने की कोशिश के बावजूद, अल-फलाह मेडिकल कॉलेज के प्रशासन और कुलपति (Vice-Chancellor) ने इस मामले पर हिंदुस्तान टाइम्स (HT) के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। NCMEI की 4 दिसंबर को होने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि आयोग और दस्तावेज मांगेगा, नई जांच शुरू करेगा, या फिर संस्थान के अल्पसंख्यक दर्जे (minority status) की समीक्षा करके उसे वापस लेगा। फिलहाल कई एजेंसियां अल-फलाह ग्रुप के रोजगार रिकॉर्ड, वित्तीय डेटा और संस्थान द्वारा किए गए अन्य दावों की जांच कर रही हैं।

पर्थ टेस्ट में इंग्लैंड की शर्मनाक हार… दिग्गज कप्तान का खून खौला!

नई दिल्ली  इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने अपनी टीम को जमकर कोसा है, जिसे ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एशेज सीरीज के पहले मैच में हार मिली थी। अपनी टीम की हार पर माइकल वॉन ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि इस नतीजे का असर लंबे समय तक चलने वाला है। माइकल वॉन का मानना ​​है कि पर्थ में इंग्लैंड की शर्मनाक हार उन्हें "नुकसान" पहुंचाएगी। माइकल ने अपनी टीम को बिना दिमाग वाली टीम भी करार दिया और कहा कि ऐसी टीम मुकाबला नहीं कर सकती। इंग्लैंड ने दोनों पारियों में खराब बल्लेबाजी की और फिर तेज सेंचुरी ट्रैविस हेड ने जड़कर मैच खत्म कर दिया। माइकल वॉन ने कायो स्पोर्ट्स से कहा, “मुझे लगता है कि इस हार से इंग्लैंड को भारी नुकसान होगा। उन्हें यह डैमेज करेगा। बेन स्टोक्स को सच में समझ नहीं आएगा कि क्या हुआ है। हम साढ़े चार घंटे के क्रिकेट की बात कर रहे हैं, जहां उनकी टीम पहले से दबदबे वाली स्थिति में नहीं थी, लेकिन आप गेम पर कंट्रोल रख सकते थे। उनके पास (शनिवार को ऑस्ट्रेलिया को हराने का) मौका था और वे इनिंग्स के आखिर में 12 रनों के भीतर 5 विकेट खो दिए।” पूर्व दिग्गज ने आगे कहा, "उनके पास सच में कॉम्पिटिटिव होने के लिए टूल्स हैं, लेकिन आप बिना दिमाग के कॉम्पिटिटिव नहीं हो सकते। आप सिर्फ एक ही तरह से नहीं खेल सकते, जो उन्होंने किया है, उससे वह जल्दी हार गए।" स्टोक्स ने अपनी टीम के अग्रेसिव अप्रोच का बचाव किया। उनका मानना ​​था कि मुश्किल हालात से निपटने का यह सबसे अच्छा तरीका साबित हुआ है। स्टोक्स ने कहा, "जिन खिलाड़ियों को बीच में सफलता मिली, वे वही थे जो बॉलर्स का सामना करने और उन्हें उनकी लेंथ से बाहर करने के लिए काफी बहादुर थे।" इंग्लैंड की टीम बैजबॉल क्रिकेट खेलकर सामने वाली टीमों को पस्त करने के लिए फेमस है, लेकिन इस मैच में उन्हें इसी तरह की क्रिकेट से ऑस्ट्रेलिया के ट्रैविस हेड ने हराया। ट्रैविस हेड के लिए कोई भी दूसरा प्लान कप्तान बेन स्टोक्स और टीम मैनेजमेंट के पास नहीं था। जब तक इंग्लैंड प्लान बनाता, तब तक उन्होंने मैच खत्म कर दिया था।  

भीषण सड़क हादसा: थार ने श्रद्धालुओं की कार को मारी टक्कर , दो की मौत, 8 घायल

भरतपुर मथुरा बाईपास स्थित गोलपुरा मोड़ के पास देर रात एक भीषण सड़क हादसा हुआ। हादसे में श्रद्धालुओं से भरी ईको कार को सामने से डिवाइडर तोड़कर आई तेज रफ्तार थार ने जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि आठ लोग घायल हो गए। घायलों में तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिनमें से एक को डॉक्टरों ने जयपुर रेफर कर दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, थार गाड़ी अखड्ड की ओर से तेज रफ्तार में डिवाइडर तोड़कर सीधे इको कार से जा भिड़ी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि इको कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार श्रद्धालु अंदर फंस गए। मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों का आक्रोश स्थानीय लोगों का कहना था कि थार गाड़ी का चालक नशे हालत में था और ओवरस्पीड में वाहन चला रहा था। गुस्साए ग्रामीणों ने चालक की पिटाई भी कर दी। लोगों ने ही घायल कार में फंसे लोगों को बाहर निकालने में मदद की। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और थार में सवार चारों युवकों को डिटेन कर लिया। पुलिस सभी से पूछताछ कर रही है। घायलों को आरबीएम अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने इको कार चालक 25 वर्षीय नरेंद्र और महिला श्रद्धालु नीतू को मृत घोषित कर दिया। गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति को जयपुर रेफर किया गया है। सेवर थानाधिकारी सतीशचंद शर्मा के अनुसार, सभी घायलों का उपचार आरबीएम में जारी है और थार चालक सहित अन्य सवारों से पूछताछ की जा रही है।