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महिला जजों की मौजूदगी में CJI गवई का खुला बयान— बताई वह कमी जो पूरी न हो सकी

नई दिल्ली  निवर्तमान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई अपने पद से रिटायर हो रहे हैं। इससे पहले उन्होंने अपने मन की बात करते हुए कहा कि उन्हें इस बात का मलाल रहेगा कि वह सुप्रीम कोर्ट में किसी महिला जज को नियुक्त नहीं कर सके। आपको बता दें कि गवई के कार्यकाल के दौरान सुप्रीम कोर्ट में पांच न्यायाधीशों को नियुक्त किया गया और वे सभी पुरुष थे।   सीजेआई गवई ने कहा, "मुझे इस बात का खेद है कि मैं सुप्रीम कोर्ट में किसी महिला जज को नहीं ला पाया, लेकिन हमने महिला जजों की सिफारिश की जिसमें सुप्रीम कोर्ट की वकील भी शामिल थीं।" उन्होंने जब इस बात का उल्लेख किया तो समारोह में न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना भी मौजूद थीं। वह भारत की पहली महिला चीफ जस्टिस बनेंगी। आपको बता दें कि यह विदाई समारोह 18 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट के लेडीज बार रूम में आयोजित किया गया था। समारोह में 17 न्यायाधीशों ने भाग लिया। वरिष्ठ अधिवक्ता महालक्ष्मी पावनी ने समारोह का आयोजन किया। उन्होंने सीजेआई गवई के नेतृत्व की विनम्रता, सुलभता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता के लिए सराहना की। अपने विदाई भाषण में सीजेआई गवई ने सभी को धन्यवाद दिया और कहा कि यह दिल्ली में उनका पहला विदाई समारोह था। उन्होंने अदालत में अनजाने में किसी को ठेस पहुंचाने के लिए माफी भी मांगी। इस अवसर पर उनकी विरासत संभालने वाले देश के अगले मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि सीजेआई गवई ने संस्था का नेतृत्व एक गतिशील तरीके से किया। सीजेआई बीआर गवई के कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किए गए पांच पुरुष न्यायाधीशों में न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया, न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई, न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर, न्यायमूर्ति आलोक अराधे और न्यायमूर्ति विपुल मनभाई पंचोली शामिल हैं।  

चौंकाने वाला खुलासा: सरकारी स्कूल के पास बरामद हुआ विस्फोटकों का बड़ा स्टॉक

अल्मोड़ा  उत्तराखंड के एक गांव में सरकारी स्कूल के पास भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद हुआ है। जिलेटिन नामक विस्फोटक पदार्थ की छड़ें मिलने से अल्मोड़ा जिले की पुलिस अलर्ट पर है। पुलिस ने बताया, उन्हें जिलेटिन की 161 छड़े मिली हैं, जिनका वजन 20 किलोग्राम से ज्यादा है। ये छड़े झाड़ियों में छिपी थीं, जो कि डबरा गांव में सरकारी हायर सेकेंड्री स्कूल के पास मिली हैं। ये सब उस समय हो रहा है, जब हरियाणा में कुछ दिनों पहले करीब 3000 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री मिली थी। जानकारी के मुताबिक, स्कूल के प्रिंसपल सुभाष सिंह की नजर झाड़ियों में रखी जिलेटिन की छड़ों पर पड़ी थीं। उन्होंने जैसे ही इतनी बड़ी मात्रा में रखीं छड़ों को देखा, तो शक हुआ और फिर पुलिस को सूचित किया। पुलिस तुरंत मौका स्थल पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। जल्द से जल्द ऊधम सिंह नगर और नैनीताल जिले से बॉम स्क्वॉड और डॉग स्क्वॉड की टीम को बुलाया गया और इलाके की छानबीन शुरू कर दी गई। बम निरोधक दल को मिला भारी मात्रा में विस्फोटक एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, खोजबीन शुरू हुई तो जिलेटिन की छड़ों वाले पैकेट मिलने शुरू हो गए। कई छड़ें उसी झाड़ियों में मिली, जबकि कुछ उस जगह से 20 फीट दूर मिलीं। इसके बाद बम निरोधक दस्ते ने उन छड़ों को जब्त कर लिया और सील करके सुरक्षित जगह पर ले गए। SSP देवेंद्र पिंचा ने बताया- "डाबरा गांव में सरकारी स्कूल के पास से जिलेटिन की 161 छड़े बरामद की गई हैं। मौके पर पहुंची पुलिस, बम निरोधक दस्ते ने इलाके की पूरी तरह छानबीन की है।" क्या होती हैं जिलेटिन की छड़ें, कितनी घातक? आपको बताते चलें कि जिलेटिन की छड़ें विस्फोटक होती हैं। इसका इस्तेमाल खनन के दौरान या कंस्ट्रक्शन के दौरान पहाड़ी चट्टानों को तोड़ने के लिए किया जाता है। अभी तक इस बात का पता नहीं चला है कि इन छड़ों को यहां क्यों लाया गया था। जांच दल इसके पीछे की वजह को जानने में लगी हुई है। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट 1908 की धारा 4(a) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 288 के तहत केस दर्ज किया है। दिल्ली कार धमाके के बाद से सख्ती बढ़ी दिल्ली में लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट और विस्फोटक मटीरियल की भारी ज़ब्ती के बाद पूरे देश में सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर अलर्ट पर है। सूत्रों का कहना है कि कुछ टेरर मॉड्यूल बड़े शहरों में सीरियल ब्लास्ट की प्लानिंग कर रहे थे। इस कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में भी तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं। छोटी सी भी संदिग्ध गतिविधि को पैनी नजरों से जांचा-परखा जा रहा है।  

भारतीय न्यायपालिका को विदेशी उदाहरणों की ज़रूरत क्यों? CJI-डिज़िग्नेट सूर्यकांत ने उठाया अहम सवाल

नई दिल्ली  भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्वदेशी न्यायशास्त्र को अपनाने की दिशा में बल दिए जाने को एक स्वाभाविक कदम बताया। उन्होंने कहा कि 75 वर्षों में न्यायालय ने जो मजबूत और आधिकारिक न्याय-निर्णय का संग्रह बनाया है, उसके बाद अब समय आ गया है कि सर्वोच्च न्यायालय अपनी स्वयं की न्यायिक विचारधारा को गहरा करे।   न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि भारतीय न्यायपालिका के लिए अपने स्वयं के दर्शन पर निर्भर रहना क्यों आवश्यक है। उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट के हजारों ऐतिहासिक निर्णय देने के 75 वर्षों के बाद जब हमारे निर्णयों को अन्य विभिन्न क्षेत्राधिकारों द्वारा उद्धृत किया जा रहा है और जब हमने अपने दम पर न्यायिक ज्ञान का भंडार अर्जित कर लिया है। हमें अपने देश से संबंधित किसी भी मुद्दे पर राय बनाते समय दूसरे देशों के निर्णयों को क्यों देखना चाहिए?" उन्होंने जोर दिया कि भौगोलिक, स्थानीय, सामाजिक, और राजनीतिक परिदृश्य जैसे महत्वपूर्ण कारक अन्य देशों में भिन्न हो सकते हैं, इसलिए भारत को अपनी परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं का न्यायशास्त्र विकसित करने की आवश्यकता है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि CJI के रूप में उनकी तत्काल प्राथमिकताओं में लंबी अवधि से लंबित मामलों को निपटाना और संस्थागत सुधारों को आगे बढ़ाना शामिल है। उनकी प्राथमिकता विशेष रूप से सात और नौ न्यायाधीशों वाली संवैधानिक पीठों का गठन करना है, ताकि महत्वपूर्ण मामलों का शीघ्र निपटारा किया जा सके। उन्होंने लंबित मामलों की संख्या (90,000 तक) को स्वीकार किया लेकिन वह इसे लेकर आशावादी हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि हाल ही में न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता के साथ दिए गए उनके एक निर्णय में ऐसे निर्देश थे, जिससे अंततः 1,000 मामले निपटाए जा सकेंगे। उनका लक्ष्य लंबित मामलों को शून्य तक लाना नहीं है, लेकिन स्थिति को प्रबंधनीय बनाना है। उन्होंने कहा कि वह सर्वोच्च न्यायालय में सभी रिक्तियों को भरेंगे, हालांकि उन्होंने महिला प्रतिनिधित्व पर अभी विचार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार का कर मामलों के प्रति व्यावहारिक दृष्टिकोण है और 5 करोड़ के लिए मुकदमेबाजी नहीं लड़ी जानी चाहिए। उन्होंने अंतिम राय बनाने के लिए एक ऐसे तंत्र के विकास की आवश्यकता पर बल दिया जिससे समय बर्बाद न हो। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने CJI कार्यालय से जुड़े दबावों और सोशल मीडिया की आलोचना पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि CJI के पद के लिए व्यक्ति को सोशल मीडिया की टिप्पणियों से अलग रहने की आवश्यकता होती है। उन्होंने जोर देकर कहा, "न्यायाधीश या CJI दबाव में नहीं आ सकते और नहीं आना चाहिए। मैं कभी दबाव में नहीं रहा। एकमात्र तरीका है कि सोशल मीडिया की टिप्पणियों को अनदेखा करें।"  

भारतीय रक्षा शक्ति में बड़ा इजाफा: 1000 किलो बम का सफल निर्माण, दुश्मन देशों में हड़कंप

नई दिल्ली सैन्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भारत ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत ने 1000 किलो का बम बनाया है। भारत ने न सिर्फ ये बम बनाया है बल्कि इसका सफल परीक्षण भी कर लिया है। इस स्वदेशी बम को ‘गौरव’ नाम दिया गया है, जो लक्ष्य को दूर से ही सटीकता के साथ नष्ट करने में सक्षम है। DRDO ने Su-30MKI फाइटर जेट से ‘गौरव’ लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम का सफल परीक्षण किया है। 1000 किलो वजनी यह देसी बम दुश्मन की वायु सुरक्षा सीमा के बाहर से सटीक हमला करेगा। DRDO ने इस हथियार को दो स्वरूपों में तैयार किया है। पहला वर्जन Gaurav-PCB है, जिसे मजबूत संरचनाओं और जमीनी बंकरों को भेदने के लिए तैयार किया गया है। यह पहाड़ी इलाकों में ऑपरेशन की स्थिति में उपयोगी साबित हो सकता है। दूसरा संस्करण Gaurav-PF है, जिसका उपयोग खुले ठिकानों, सैन्य तैनाती या रणनीतिक लक्ष्य पर एक साथ कई हिस्सों में नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाएगा। ‘गौरव’ वह हथियार है, जो विमान को जोखिम में डाले बिना दुश्मन पर प्रहार कर सकता है। यह हवा से छोड़े जाने के बाद काफी दूरी तक ग्लाइड करता है और ठीक उसी स्थान पर जाकर वार करता है, जहां लक्ष्य मौजूद हो। ज्यादा दूरी से हमला करने की वजह से यह दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चुनौती देता है। इसका भारी वजन और उच्च विनाश क्षमता इसे बंकर, किलेबंद ठिकानों और पहाड़ी ठिकानों पर बेहद कारगर बनाती है। Su-30MKI के साथ ‘गौरव’ का जुड़ना भारतीय वायुसेना का Su-30MKI पहले से ही कई एडवांस हथियारों से लैस है। इसके साथ Rudram मिसाइल, SAAW हथियार प्रणाली और BrahMos-A पहले से जुड़े हैं और अब ‘गौरव’ के जुड़ जाने से यह विमान लंबी दूरी से जमीन पर हमला करने में और भी सक्षम हो गया है। यह संयोजन वायु सेना को आधुनिक युद्ध के लिए ऐसी क्षमता देता है, जिसे दुनिया की बड़ी सेनाएं भी महत्व देती हैं। भारत क्यों तेजी से बना रहा है अपने इंजन और डिफेंस सिस्टम फाइटर जेट इंजन के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भरता लंबे समय से भारत की बड़ी चुनौती रही है। यही कारण है कि तेजस Mk2 और AMCA जैसे स्वदेशी लड़ाकू विमानों के प्रोजेक्ट में देरी हुई। अब सरकार और DRDO दोनों मिलकर अपने इंजन और हथियार प्रणाली को देश में ही विकसित करने पर जोर दे रहे हैं। बम, मिसाइल, रडार, एयर डिफेंस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तकनीक। ऐसे सभी क्षेत्रों में तेज प्रगति हो रही है ताकि आने वाले वर्षों में भारत पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सके।

उमा बोलीं, नमाज पढ़ना नहीं बनाता मुस्लिम, राहुल गांधी पर भी निशाना साधा

भोपाल मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हिंदू एकता, हिंदू राष्ट्र, आरक्षण, शासन–प्रशासन, धर्मांतरण और भ्रष्टाचार जैसे कई मुद्दों पर बेबाक बयान दिए। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदू राष्ट्र की बात खुलकर कही है और बुंदेलखंड से हमेशा ऐसी विभूतियाँ सामने आती रही हैं। भारत हिंदू राष्ट्र है- उमा भारती उमा भारती ने कहा ‘भारत हिंदू राष्ट्र है, इसे सभी को स्वीकार करना चाहिए। हिंदू राष्ट्र इसलिए सेक्युलर है क्योंकि हिंदू ने हर मज़हब को स्थान दिया है। जब इस्लाम, जैन, बौद्ध और ईसाई धर्म नहीं थे, तब भी सनातन था। हिंदू विविधता में एकता का प्रतीक है।’ उन्होंने जाति-भेद और सामाजिक विभाजन को हिंदू एकता का सबसे बड़ा बाधक बताया और कहा कि हिंदू समाज की मजबूती का आधार आर्थिक समानता है। धर्म परिवर्तन और लव जिहाद पर कड़ा रुख उन्होंने धर्म परिवर्तन को गंभीर अपराध बताते हुए कहा कि ‘धर्म परिवर्तन और लव जिहाद राष्ट्रद्रोह है। भारत में हर धर्म का सम्मान है, लेकिन धोखे से धर्मांतरण अपराध है। घुसपैठियों को एक मिनट भी देश में रहने का अधिकार नहीं।’ उमा भारती ने कहा कि हिंदू, मुस्लिम, ईसाई सभी को भारत की सांस्कृतिक आत्मा को समझना होगा। ‘सियाराम में सब जग जानी यही भारत की पहचान है। Jihad और Kafir जैसे शब्दों की इस देश में कोई जगह नहीं है।’ उन्होंने अंत में कहा कि वे न तो हाशिए पर हैं और न ही किसी पद की इच्छुक, लेकिन गंगा और गौ माता से जुड़ी किसी भी जिम्मेदारी के लिए हमेशा तैयार हैं। मैं नमाज पढ़ूं, तो मुस्लिम नहीं बन जाऊंगी उमा ने कहा कि धर्म परिवर्तन और लव जिहाद देशद्रोह है। यदि मैं कुरान पढ़ लूं दरगाह में चली जाऊं या अल्लाह बोल दूं इसे मेरा धर्म परिवर्तन नहीं होगा। भारत में बहुसंख्यक सभी धर्म का सम्मान करते हैं और यदि ऐसे मामले सामने आते हैं तो यह जगन्य अपराध राष्ट्र और देशद्रोह है। राहुल गांधी पर निशाना राहुल गांधी पर तीखी टिप्पणी करते हुए उमा ने कहा कि ‘राहुल जनेऊ पहनने का नाटक करते हैं। कल गाय का मुद्दा बढ़ गया तो गोबर का टीका लगा लेंगे और जेब में गौमूत्र रखकर घूमेंगे। नाटक करने में नंबर वन हैं।’

जब जज ही सुरक्षित नहीं… MP HC के CJI की चिंता बढ़ी, मोहन सरकार को नोटिस

जबलपुर  मध्य प्रदेश में प्रदेश की निचली अदालतों में पदस्थ जजों पर हो रही घटनाओं पर चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सख्त रुख अपनाया। इस पर हाई कोर्ट ने जजों पर हो रहे हमलों को लेकर राज्य सरकार से जबाब मांगा है। अभी तक मिले जबाब से कोर्ट ने असंतोष जताया है और नई स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि जब जज ही सुरक्षित नहीं तो न्याय व्यवस्था कैसे सुरक्षित मानी जाएगी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 2016 से लेकर 2025 तक 5 जजो पर धमकी और हमले के 5 मामले हुए हैं जिसमें एक में थाना प्रभारी को निलंबित किया गया और 4 आरोपी जेल पहुंचाए गए हैं। इन 9 सालों में प्रदेश के मंदसोर, ग्वालियर, रीवा, अनूपपुर,और इंदौर में जजों को धमकी मिल चुकी है। कोर्ट ने 4 दिसम्बर को अगली सुनवाई तय की है और राज्य सरकार से जबाब मंगा है।   जबलपुर हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश में जजों पर हो रहे हमलों और अपराधों पर कड़ी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने सरकार से इन घटनाओं पर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट प्रदेश के सभी जिला सत्र न्यायालयों और वहां पदस्थ जजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है,और जिला स्तरीय निगरानी समिति की रिपोर्टों के आधार पर सरकार को आवश्यक निर्देश दिए जा रहे हैं, ताकि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा को मजबूत किया जा सके। हालिया मामलों को देखते हुए कोर्ट ने सुझाव दिए और अगली सुनवाई की तारीख 4 दिसंबर रखी है। कोर्ट ने कहा कि जजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। जब वे खुद सुरक्षा की मांग करने को मजबूर हैं, तो प्रदेश में आम जनता की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है। बता दें मंदसौर में 23 जुलाई 2016 को एक जज पर हमला हुआ था, जिस पर तत्कालीन एक्टिंग चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन ने स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज की थी। इसके बाद बालाघाट के जज पर हमला, और भोपाल गैस प्राधिकरण के पीठासीन अधिकारी पर एसिड अटैक जैसी घटनाएं सामने आईं। जजों पर हो रहे ये लगातार हमले न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान कहा कि हाल ही में दो जजों के घर चोरी की घटनाएं हुईं, दो मामलों में घर में घुसने का प्रयास किया गया और एक जिला जज पर हमला भी हुआ। उन्होंने कहा, इन घटनाओं को देखकर बिल्कुल नहीं लगता कि सब ठीक है। यहां लॉ एंड ऑर्डर का कम्पलीट ब्रेकडाउन दिख रहा है। सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने कोर्ट को बताया कि प्रदेश के सभी 52 जिला सत्र न्यायालयों में बाउंड्रीवाल बनाकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर निगरानी समितियों की रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है।  

MBBS एडमिशन विवाद: वैष्णो देवी कॉलेज में 50 में से 41 मुस्लिम छात्रों को सीट, विरोध शुरू

नई दिल्ली  भाजपा विधायकों के प्रतिनिधिमंडल ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात की। उन्होंने रियासी जिला स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस की ओर से जारी पहली एडमिशन लिस्ट रद्द करने की मांग की। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल ने चयन सूची पर सवाल उठाए। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि जिन छात्रों को दाखिला मिला है उनमें से अधिकांश छात्र एक समुदाय से हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि माता में आस्था रखने वाले छात्रों को दाखिले के लिए विचार किया जाए।   राजभवन की ओर से जारी बयान के अनुसार, बैठक के दौरान शर्मा के साथ विधायक शाम लाल शर्मा, सुरजीत सिंह सलाथिया, देवेंद्र कुमार मन्याल और रणबीर सिंह पठानिया मौजूद थे। बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए शर्मा ने कहा, 'हमने एसएमवीडीआईएमई में दाखिलों के पहले बैच को लेकर एक असाधारण और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया, जिसमें अधिकांश सीट एक विशेष समुदाय के छात्रों को मिली हैं।' भाजपा नेताओं की क्या है मांग सुनील शर्मा ने कहा, 'हमारा विरोध इस दलील पर आधारित है कि यह संस्थान श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था से जुड़ा है। श्राइन बोर्ड को मिलने वाला दान धार्मिक और सांस्कृतिक कामों के लिए था।' एसएमवीडीआईएमई को इस साल 50 एमबीबीएस सीट की मंजूरी मिली है। कॉलेज के पहले बैच (2025-26) में एक विशेष समुदाय के 41 छात्रों के प्रवेश को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कुछ दक्षिणपंथी समूह प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि इस कॉलेज को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा दिया जाए।  

कांग्रेस संगठन विस्तार: 45 जिलाध्यक्षों की सूची जारी, 5 पद खाली

जयपुर कांग्रेस ने संगठनात्मक पुनर्गठन के तहत 50 में से 45 जिलाध्यक्षों की नई नियुक्ति कर दी है, जबकि 5 जिलों में नाम का ऐलान अभी बाकी है। नई सूची में 12 मौजूदा विधायकों को जिलाध्यक्ष बनाकर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के गृह जिले सीकर सहित 8 जिलों में पुराने जिलाध्यक्षों को दोबारा मौका दिया गया है। वहीं, 37 जिलों में नए जिलाध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। ये नियुक्तियां राहुल गांधी के दिशा-निर्देशों के तहत की गई रायशुमारी प्रक्रिया के आधार पर अंतिम रूप से तय की गई हैं, जिसे संगठनात्मक पारदर्शिता और स्थानीय समीकरणों को साधने की रणनीति माना जा रहा है। कांग्रेस ने 12 जिलों में अपने मौजूदा विधायकों को संगठन की कमान सौंपते हुए जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है। इनमें अजमेर ग्रामीण से विधायक विकास चौधरी, बांसवाड़ा से अर्जुन सिंह बामणिया, डीडवाना-कुचामन से जाकिर हुसैन गैसावत, धौलपुर से संजय जाटव, जयपुर ग्रामीण वेस्ट से विद्याधर सिंह चौधरी, डूंगरपुर से गणेश घोघरा, झुंझुनूं से रीटा चौधरी, जोधपुर ग्रामीण से गीता बरवड़, करौली से घनश्याम मेहर, सवाई माधोपुर से इंदिरा मीणा, श्रीगंगानगर से रूपिंदर सिंह कुन्नर और चूरू से मनोज मेघवाल शामिल हैं।                                                                                                                            पूरी लिस्ट — कौन नया, कौन रिपीट अजमेर ग्रामीण – विकास चौधरी (नए) अजमेर शहरी – राजकुमार जयपाल (नए) अलवर – प्रकाश गंगावत (नए) बालोतरा – प्रियंका मेघवाल (नए) बांसवाड़ा – अर्जुन बामनिया (नए) बाड़मेर – लक्ष्मणसिंह गोदारा (नए) ब्यावर – किशोर चौधरी (नए) भरतपुर – दिनेशसिंह सूपा (रिपीट) भीलवाड़ा ग्रामीण – रामलाल जाट (नए) भीलवाड़ा शहरी – शिवराम खटीक (नए) बीकानेर ग्रामीण – बिशनाराम सियाग (रिपीट) बीकानेर शहरी – मदनगोपाल मेघवाल (नए) बूंदी – महावीर मीणा (नए) चित्तौड़गढ़ – प्रमोदसिंह सिसोदिया (नए) चूरू – मनोज मेघवाल (नए) दौसा – रामजीलाल ओड (रिपीट) डीडवाना-कुचामन – जाकिर हुसैन गैसावत (रिपीट) डीग – राजीव सिंह (नए) धौलपुर – संजय कुमार जाटव (नए) डूंगरपुर – गणेश घोघरा (नए) हनुमानगढ़ – मनीष मकासर (नए) जयपुर ग्रामीण ईस्ट – गोपाल मीणा (रिपीट) जयपुर ग्रामीण वेस्ट – विद्याधर चौधरी (नए) जैसलमेर – अमरदीन फकीर (नए) जालौर – रमीला मेघवाल (नए) झुंझुनूं – रीटा चौधरी (नए) जोधपुर ग्रामीण – गीता बरवड़ (नए) जोधपुर शहरी – ओमकार वर्मा (नए) करौली – घनश्याम मेहर (नए) खैरथल-तिजारा – बलराम यादव (नए) कोटा ग्रामीण – भानुप्रताप सिंह (रिपीट) कोटा शहरी – राखी गौतम (नए) कोटपूतली-बहरोड़ – इंद्रराज गुर्जर (नए) नागौर – हनुमानराम बांगड़ा (कार्यकारी को प्रमोशन) पाली – शिशुपाल सिंह (नए) फलौदी – मोहम्मद सलीम नागौरी (नए) सलूंबर – परमानंद मेहता (नए) सवाई माधोपुर – इंदिरा मीणा (नए) सीकर – सुनीता गठाला (रिपीट) सिरोही – लीलाराम गरासिया (नए) श्रीगंगानगर – रुपिंदर सिंह कुन्नर (नए) टोंक – सैयद सउद सैदी (नए) उदयपुर ग्रामीण – रघुवीर मीणा (नए) उदयपुर शहर फतेह सिंह राठौड़ 5 जिलों में पूर्व विधायकों को जिम्मेदारी कांग्रेस ने 5 जिलों में पूर्व विधायकों को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है। भीलवाड़ा ग्रामीण में पूर्व मंत्री रामलाल जाट, जयपुर ग्रामीण पूर्व में गोपाल मीणा, कोटपूतली–बहरोड़ में इंद्राज गुर्जर, उदयपुर ग्रामीण में रघुवीर मीणा और अजमेर शहर में राजकुमार जयपाल को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।

जब बीच मैच में कुलदीप यादव पर भड़के ऋषभ पंत, मजाक बना रखा है टेस्ट क्रिकेट को…

नई दिल्ली इंडिया वर्सेस ऑस्ट्रेलिया 2 मैच की टेस्ट सीरीज का दूसरा और आखिरी मुकाबला गुवाहटी के बरसापारा क्रिकेट स्टेडियम में खेला जा रहा है। शुभमन गिल के चोटिल होने की वजह से इस मैच में ऋषभ पंत कप्तानी करते हुए नजर आ रहे हैं। गुवाहटी टेस्ट के दूसरे दिन भारतीय कप्तान ऋषभ पंत स्पिनर कुलदीप यादव पर भड़कते हुए नजर आए। दरअसल, ऋषभ पंत के गुस्से की वजह से अंपायर द्वारा मिली 2 वॉर्निंग थी। पहली पारी के दौरान ऋषभ पंत दो बार स्लो ओवर रेट के चलते अंपायर की डांट खा चुके थे, अगर तीसरी बार वह गलती करते है तो भारतीय टीम पर 5 मैच का जुर्माना लगेगा। इस जुर्माने से बचने के लिए ही पंत ने कुलदीप यादव को डांट लगाई। बता दें, टेस्ट क्रिकेट में एक ओवर के खत्म होने के बाद फील्डिंग टीम को दूसरा ओवर शुरू करने के लिए 30 सेकंट का टाइम मिलता है। अगर तय समय में ओवर शुरू नहीं होता अंपायर कप्तान को वॉर्निंग देते हैं। दो बार वॉर्निंग मिलने के बाद भी अगर फील्डिंग टीम नहीं सुधरती तो उन पर 5 रन की पेनेल्टी लगती है। ऋषभ पंत को पहले ही दो वॉर्निंग मिल चुकी है, जब कुलदीप यादव फिर से ओवर शुरू करने में देरी करने लगे तो पंत भड़क गए। उन्होंने कहा, “यार 30 सेकंड का टाइमर है, घर पर खेल रहे हो क्या? एक बॉल डाल जल्दी…यार कुलदीप, दोनों बार वॉर्निंग ले ली है। पूरा एक ओवर थोड़ी ना चाहिए…मजाक बना रखा है टेस्ट क्रिकेट को।” साउथ अफ्रीका ने दूसरे दिन भारत पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। दूसरे दिन के पहले सेशन में मेहमान टीम ने कोई विकेट नहीं खर्च किया, अब साउथ अफ्रीका का स्कोर 400 के पार पहुंच गया है। सेनुरन मुथुसामी अपने पहले शतक की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं मार्को जेनसन की तूफानी बल्लेबाजी जारी है।  

अयोध्या राम मंदिर में विशेष मुहूर्त में ध्वजारोहण, पीएम मोदी के संग काशी के विद्वानों की रहेंगे उपस्थिति

अयोध्या  श्रीराम मंदिर का कार्य अब लगभग पूरा हो चुका है. 25 नवंबर को शिखर पर ध्वजारोहण के साथ इसकी विधिवत घोषणा भी हो जाएगी. कार्य पूरा होने का संदेश देने के लिए ही पीएम मोदी मंदिर में ध्वजारोहण करेंगे. इसके लिए पंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने मुहूर्त निकाला है. ध्वजारोहण के लिए 30 मिनट का मुहूर्त निकाला गया है. ये वही गणेश्वर शास्त्री हैं, जिन्होंने राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का मुहूर्त निकाला था. पीएम मोदी 11:45 से लेकर 12:29 के बीच ध्वजारोहण करेंगे. मुहूर्त के मुताबिक इसी दौरान सारे अनुष्ठान पूरे किए जाएंगे. जिसके लिए काशी से 19 नवंबर को ही विद्वानों का दल पहुंच चुका है. 20 नवंबर को शेष विद्वान वाराणसी और दक्षिण भारत से अयोध्या पहुंचे हैं. मंदिर में मुख्य शिखर के साथ-साथ ही 7 पताकाएं फहराई जाएंगी. एक पताका शेषावतार मंदिर में लगाया जा रहा है और 6 पताकाएं परकोटा के पंचायतन के 6 मंदिरों में लगाए जाएंगे. ये सभी 6 एक विशेष व्यवस्था के अंतर्गत हैं, इस तरह कुल सात पताकाएं लगाए जाएंगे. इसी प्रकार का कार्यक्रम बनाया गया है. दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या अब सिर्फ एक तीर्थ नहीं बल्कि विकास की प्रयोगशाला बन चुका है. अयोध्या के ऐतिहासिक विकास ने युवाओं की ज़िंदगी में नई रोशनी, स्थानीय उद्योगों में नई सांसें और परंपरागत कला में एक नई दिशा दी है.