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दिल्ली में छत्तीसगढ़ निवेश सम्मेलन, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की व्यक्तिगत बैठकें शुरू

रायपुर : दिल्ली में ‘Chhattisgarh Investor Connect’ के तहत मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की वन-टू-वन मुलाक़ातें शुरू जेके लक्ष्मी सीमेंट ने छत्तीसगढ़ में विस्तार और नए निवेश अवसरों में दिखाई रुचि रायपुर 2 छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट के तहत मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की उद्योग जगत के निवेशकों के साथ वन-टू-वन मुलाक़ातें आज नई दिल्ली में प्रारम्भ हो गई हैं। कार्यक्रम के प्रथम चरण में जेके लक्ष्मी सीमेंट के शीर्ष अधिकारी मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे और छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विस्तार की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। मुलाक़ात के दौरान कंपनी के प्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ में अपने प्लांट का कार्य बढ़ाने तथा नए निवेश अवसरों की खोज में गहरी रुचि व्यक्त की। उन्होंने बताया कि प्रदेश में उपलब्ध आधारभूत सुविधाएँ, वित्तीय अनुकूल वातावरण और औद्योगिक विकास की गति उन्हें छत्तीसगढ़ को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करती हैं। मुख्यमंत्री  साय ने निवेशकों को राज्य की नई औद्योगिक नीति, स्थिर एवं सुरक्षित वातावरण तथा तेज़ी से विकसित हो रहे औद्योगिक ढांचे की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार उद्योगों के लिए विश्वसनीय, सरल और परिणामोन्मुखी परिवेश प्रदान कर रही है, जिससे निवेशकों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने जेके लक्ष्मी सीमेंट के अधिकारियों को आश्वस्त किया कि सरकार उद्योगों अनुकूल परिवेश प्रदान करने की भावना से कार्य कर रही है और राज्य में आने वाले हर निवेश का स्वागत है। उन्होंने कंपनी को प्रदेश में अपने विस्तार को आगे बढ़ाने तथा नई परियोजनाओं पर विचार करने के लिए आमंत्रित किया।उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्य में उद्योगों के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम, उपयुक्त भूमि उपलब्धता, लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी, और कौशल सम्पन्न मानव संसाधन जैसी सुविधाएँ निवेशकों के लिए एक बड़ा आकर्षण हैं।

राजधानी जयपुर में बदलाव की शुरुआत: नई ई-बसें, ट्रैफिक सुधार, ई-रिक्शा QR कोड और मेट्रो विस्तार

 जयपुर  राजधानी जयपुर शहर के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को सुधारने के लिए चार बड़े काम होने वाले हैं. इनका काम अब तेजी से आगे बढ़ने वाला है. इनमें सबसे पहला काम है जयपुर शहर के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को स्मूथ करने के लिए जल्द ही 500 से 750 ई-बसें मिलने वाली है. दूसरा जयपुर के ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए उत्तरी रिंग रोड़ के लिए भूमि अधिग्रहण का काम अब शुरू हो जाएगा. इसके लिए केन्द्र सरकार की मंजूरी मिल गई है. तीसरा जयपुर के ट्रैफिक के लिए आफत बन चुके ई-रिक्शा पर अब अंकुश लगाया जाएगा. इनकी संख्या सीमित कर इनके संचालन के लिए क्यूआर कोड सिस्टम लागू किया जाएगा. चौथा जयपुर मेट्रो ट्रेन को विस्तार दिया जाएगा. नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने बताया कि मार्च 2026 तक जयपुर की सड़कों पर 500 से 750 ई-बसें दौड़ने लगेंगी. इन ई-बसों की आपूर्ति भारत सरकार से होनी है. उन्होंने हाल ही में दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय सेमिनार के दौरान अपनी यह मांग केंद्रीय शहरी विकास एवं आवासन मंत्री के सामने रखी थी. मंत्री ने बताया कि बसों के लिए से कार्यादेश जारी हो चुका है. मार्च 2026 तक जयपुर को 500 से 750 ई-बसें मिल जाएंगी. ट्रैफिक का दबाव कम होगा और प्रदूषण में भी कमी आएगी ई-बस निर्माण यूनिट्स की क्षमता कम होने के कारण उत्पादन में देरी हो रही है. इसी वजह से अब उम्मीद है कि मार्च 2026 तक जयपुर को 500 से 750 ई-बसें मिल सकेंगी. इसके साथ ही शहर में जयपुर मेट्रो का तीन गुना विस्तार किया जाएगा. सरकार का दावा है कि मेट्रो विस्तार और नई ई-बसों के आने से जयपुर का सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क और बेहतर होगा. इससे शहर में ट्रैफिक दबाव कम होने के साथ-साथ प्रदूषण में भी कमी आएगी. उत्तरी रिंग रोड का प्रस्तावित रूट 99.35 किलोमीटर लंबा होगा वहीं राजधानी जयपुर में सड़क नेटवर्क को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है. जयपुर की उत्तरी रिंग रोड परियोजना के लिए केंद्र सरकार से भूमि अधिग्रहण की मंजूरी मिल गई है. इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इसकी औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी है. इससे इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को नई गति मिलने की उम्मीद है. उत्तरी रिंग रोड का प्रस्तावित रूट 99.35 किलोमीटर लंबा होगा. यह जयपुर जिले के उत्तरी हिस्से में व्यापक संपर्क मार्ग के रूप में विकसित किया जाएगा. भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होते ही चौमूं, आमेर, जमवारामगढ़ और बस्सी समेत कई ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वे और अधिग्रहण कार्य तेजी से आगे बढ़ेगा. अधिकारियों के अनुसार भूमि अधिग्रहण पूरा होते ही निर्माण कार्य भी जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा. उत्तरी रिंग रोड का प्रस्तावित रूट 99.35 किलोमीटर लंबा होगा. राजधानी में आने-जाने वाले भारी वाहनों का दबाव कम होगा इस परियोजना को जयपुर जिले की सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा योजनाओं में से एक माना जा रहा है. इसका निर्माण शहर की दीर्घकालिक यातायात समस्याओं को हल करने में अहम भूमिका निभाएगा. उत्तरी रिंग रोड तैयार होने के बाद राजधानी में आने-जाने वाले भारी वाहनों का दबाव शहर के बीचों-बीच न होकर बाहरी मार्ग से होगा. इससे शहर के ट्रैफिक भार में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है. इसके साथ ही क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में भी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा. उससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी. इससे पहले जयपुर का दक्षिण रिंग रोड संचालन में है. वह अजमेर रोड से टोंक रोड होते हुए आगरा रोड को जोड़ता है. उत्तरी रिंग रोड के बन जाने के बाद जयपुर के चारों ओर एक पूर्ण रिंग संरचना तैयार हो जाएगी जिससे शहर का आवागमन और भी सुगम तथा व्यवस्थित होगा. जब्त किए गए वाहनों के लिए अस्थायी पार्किंग विकसित की जाएगी इससे पहले बीते दिनों जयपुर विकास प्राधिकरण में ट्रैफिक कंट्रोल बोर्ड (टीसीबी) की बैठक आयोजित हुई थी. उसमें शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे. इसमें तय किया गया कि शहर में बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे ई-रिक्शा पर रोक लगाने और उनके सुचारू संचालन के लिए क्यूआर कोड प्रणाली लागू की जाएगी. बैठक में यातायात पुलिस की ओर से जब्त किए जाने वाले वाहनों के लिए 22 गोदाम पुलिया, बगराना, जलमहल-कनक घाटी और न्यू ट्रांसपोर्ट नगर के पास अस्थायी पार्किंग विकसित करने का निर्णय लिया गया. इसके अलावा जेसीटीएसएल बस चालकों को नियमित यातायात प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे निर्धारित बस स्टॉप पर ही बस रोकें और यातायात नियमों का पालन करें. जयपुर शहर में बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे ई-रिक्शा पर रोक लगाने और उनके सुचारू संचालन के लिए क्यूआर कोड सिस्टम लागू किया जाएगा. 150 नए बस शेल्टरों के लिए होगा सर्वे यातायात पुलिस और परिवहन विभाग की ओर से किए गए सर्वे के अनुसार शहर की 77 क्षतिग्रस्त सड़कों में से 52 का मरम्मतीकरण पूरा हो चुका है जबकि 14 पर कार्य जारी है. दुर्घटना संभावित स्थानों (ब्लैक स्पॉट) को दुरुस्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं. शहर में अवैध कटों को बंद करने, मुख्य मार्गों पर होटल-ढाबों के अतिक्रमण हटाने और नई पार्किंग विकसित करने सहित 150 नए बस शेल्टरों के लिए संयुक्त सर्वे कराने का निर्णय लिया गया. इसके साथ ही 45 ट्रैफिक पॉइंट पर 130 महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी. भारी वाहनों के प्रवेश पर नियंत्रण के लिए हाइट बार लगाने और स्मार्ट सिटी ऐप के जरिए पार्किंग की जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया. इस बैठक में जेडीए, यातायात पुलिस, परिवहन विभाग, जेसीटीएसएल, पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई, नगर निगम और अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे थे.

‘मारता पीटता है पति’: सेलिना जेटली का खुलासा, शादी टूटने की कगार पर

मुंबई  एक्ट्रेस सेलिना जेटली ने शादीशुदा जिंदगी को लेकर शॉकिंग खुलासा किया है. उन्होंने अपने पति पीटर हाग के खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराया है. मदद के लिए उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया है. सेलिन ने पीटर पर घरेलू हिंसा, क्रूरता और छेड़छाड़ का आरोप लगाया है.  कोर्ट पहुंचीं सेलिना  सेलिना जेटली ने मुंबई की एक स्थानीय अदालत में अपने पति ऑस्ट्रियाई होटलायर और एंटरप्रेन्योर पति पीटर हाग के खिलाफ घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें अपने पति की वजह से गंभीर मानसिक, शारीरिक और यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है. मामला मंगलवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट एस. सी. ताडे के समक्ष सुनवाई के लिए आया, जहां अदालत ने पीटर हाग को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 12 दिसंबर तय की है. सेलिना ने करंजवाला एंड कंपनी लॉ फर्म के जरिए अपनी याचिका में पति पर घरेलू हिंसा, क्रूरता और मानसिक शोषण की बात कही है.      अत्याचार की वजह से लौटीं भारत सेलिना ने कहा कि पति के अत्याचारों के कारण उन्हें ऑस्ट्रिया छोड़कर भारत लौटना पड़ा. उन्होंने ये भी कहा कि शादी के बाद उनके पति ने उन्हें काम करने से रोक दिया था.  रिपोर्ट्स में ये भी कहा गया कि सेलिना ने मानसिक और शारीरिक उत्पीड़ने के लिए पति से 50 करोड़ की मांग की है. सेलिना जेटली और पीटर हाग ने 2011 में ऑस्ट्रिया में शादी की थी. मार्च 2012 में एक्ट्रेस ने जुड़वां बेटों का वेलकम किया. 2017 में वो फिर ट्विंस बेटों की मां बनीं, लेकिन हाइपोप्लास्टिक हार्ट कंडीशन की वजह से उनका एक बेटा नहीं रहा.  एक्ट्रेस सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. वो अपने पति और बच्चों के साथ तस्वीरें-वीडियोज भी शेयर करती रहती हैं. अब अचानक उन्होंने पति पर घरेलू हिंसा का आरोप लगाकर सबको शॉक्ड कर दिया है. अब तक पीटर की तरफ से इस पर कोई स्टेटमेंट नहीं आया है.  पूर्व मिस इंडिया और एक्ट्रेस सेलिना जेटली को 'नो एंट्री', 'गोलमाल रिटर्न्स', 'थैंक यू', 'अपना सपना मनी मनी' और 'मनी है तो हनी है' जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है. 

मोहन भागवत का भावुक संबोधन: राम राज्य स्थापित, याद किए विशेष नाम

नई दिल्ली  राम मंदिर पर धर्मध्वजा को फहराया गया है। 161 फीट की ऊंचाई पर इस केसरिया ध्वज को फहराए जाने के बाद मोहन भागवत ने संबोधित किया। संघ प्रमुख ने कहा कि इसके साथ ही राम मंदिर का निर्माण संपूर्ण हो गया है और इससे उन लोगों की आत्मा को तृप्ति मिली होगी, जिन्होंने इसके लिए संघर्ष किया और अपनी आंखों के सामने सपना साकार होते नहीं देख सके। मोहन भागवत ने कहा कि यह धर्म ध्वज वही है, जो रामराज्य के दौरान लहराया गया था। विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक रहे अशोक सिंहल, महंत रामचंद्र दास परमहंस और विष्णु हरि डालमिया जैसे लोगों का नाम लिया और कहा कि उनकी आत्मा को संतुष्टि मिली होगी। आरएसएस लीडर ने कहा कि अब हमारा यही संकल्प होना चाहिए कि यह धर्म ध्वजा और ऊंची प्रतिष्ठा हासिल करे। हम ऐसे समाज का निर्माण करें, जिसमें समरसता हो और देश समृद्धि के शिखर पर पहुंचे। हिंदू समाज ने लगातार 500 साल और फिर बाद के लंबे आंदोलन में हमने साबित किया कि निरंतरता रहे तो सब हासिल होता है। यही बात हमें भगवान कृष्ण और सूर्य समझाते हैं। सूर्य हर दिन सतत निकलता है और ढलता है। लेकिन उसकी प्रक्रिया कभी रुकती नहीं। ऐसे ही हिंदू समाज भी नहीं रुका और हम 500 साल बाद इस केसरिया ध्वज को अयोध्या के राम मंदिर में देख रहे हैं। मोहन भागवत ने कहा कि हमने जैसा सपना देखा था, उससे भी सुंदर यह मंदिर बन गया है। उन्होंने कहा कि दिवंगत पवित्र आत्माओं की कल्पा जैसी थी, उससे भी दिव्य यह मंदिर है। यह ध्वजा है। हम जो दृश्य देख रहे हैं, यह हमारे जन्म की सफलता है और सपनों के साकार होने जैसा है। मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू समाज ने सदियों तक संघर्ष किया और तब यह शुभ अवसर आया है। इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल समेत कई गणमान्य लोग मौजूद थे। धर्म ध्वजा को पीएम मोदी ने फहराया और उसके बाद कार्यक्रम को भी संबोधित किया।  

सरकार तुरंत कदम उठाए नहीं तो आंदोलन तय: पंजाब के व्यापारियों का बड़ा अल्टीमेटम

लुधियाना जी.एस.टी और वैट के लंबित रिफंड को लेकर पंजाब के व्यापारियों में नाराज़गी लगातार बढ़ रही है। विभिन्न व्यापारिक संगठनों का कहना है कि पिछले 7–8 महीनों से मुद्दे को सरकार के समक्ष कई बार उठाए जाने के बावजूद रिफंड जारी नहीं किए गए। सूचनाओं के अनुसार अगस्त माह में केवल 220 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ, जबकि लगभग 650 करोड़ रुपए अभी भी लंबित हैं। व्यापारियों ने बताया कि यह मामला कई बार लुधियाना डी.टी.सी. रणधीर कौर के समक्ष रखा गया, जिन्होंने वैबसाइट अपग्रेडेशन पूरा होते ही रिफंड जारी करने का आश्वासन दिया था। इसी तरह पंजाब ट्रेड कमीशन के अध्यक्ष अनिल ठाकुर के लुधियाना दौरे में भी व्यापारिक संगठनों ने समस्या से अवगत कराया, और तब भी सरकार की ओर से जल्द समाधान का भरोसा दिया गया था। व्यापारिक संगठनों का आरोप है कि सरकार व्यापार जगत की समस्याओं के प्रति उदासीन बनी हुई है। पहले से ही कमजोर पड़ चुके व्यापारिक माहौल में कानून-व्यवस्था की चुनौतियां और कारोबार विरोधी नीतियां निवेशकों को पंजाब से दूर कर रही हैं। पंजाब प्रदेश व्यापार मंडल के महासचिव सुनील मेहरा ने कहा है कि यदि जल्द ही लंबित रिफंड जारी नहीं किए गए, तो वे राज्यस्तरीय धरने के लिए बाध्य होंगे। इसके साथ ही जल्द ही राज्य भर के व्यापारियों की एक बड़ी बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें आगामी आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। लुधियाना के कारोबारी राजेश ढांडा ने कहा, 650 करोड़ रुपए का लंबित रिफंड छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ रहा है। सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए, वरना हालात और बिगड़ेंगे। कारोबारी विवेक वर्मा ने व्यापारिक माहौल को लेकर कहा,“पंजाब में पहले ही निवेशक भरोसा कमजोर है। रिफंड में देरी से हालात और खराब हो रहे हैं। सरकार को पारदर्शी और तेज़ व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। छोटे उद्यमियों की मुश्किलों पर विवेक जिंदल ने कहा, रिफंड का पैसा कारोबारियों का कैपिटल है, यदि कारोबारियों के पास पैसा ही नहीं होगा , तो व्यापार कैसे चलेगा। उद्योगों के भविष्य को लेकर कारोबारी एस.एस. खुराना ने बताया कि,“यदि सरकार ने समय पर रिफंड जारी नहीं किए तो उद्योगों का पलायन और बढ़ेगा। कई यूनिट पहले ही बंद हो चुकी हैं।

PM मोदी ने तुलसीदास की चौपाई से दिया सामाजिक समरसता का संदेश, कही कई महत्वपूर्ण बातें

अयोध्या  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या के भव्य राम मंदिर पर धर्मध्वजा फहराई। इस मौके पर आरएसएस चीफ मोहन भागवत और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ भी उनके साथ थे। इसके बाद उन्होंने मौके पर मौजूद लोगों को संबोधित भी किया और भगवान राम के मूल्यों और रामराज्य को वेलफेयर से जोड़ा। इस तरह उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर से देश को वेलफेयर का संदेश दिया। पीएम मोदी ने रामचरित मानस की पंक्ति दोहराते हुए कहा- नहीं दरिद्र, कोउ दुखी ना दीना। यह संदेश बताता है कि विकसित भारत की संकल्पना में कोई भी दुखी और दरिद्र नहीं रहना चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे राम भेद से नहीं भाव से जुड़ते हैं। उन्हें वंश नहीं मूल्य प्रिय हैं। उन्हें शक्ति नहीं संयोग मान लगता है। पिछले 11 वर्षों में महिला, दलित, पिछड़े, अति पिछड़े, आदिवासी, वंचित, युवा और किसान समेत सभी वर्गों को विकास के केंद्र में रखा गया है। जब देश का हर व्यक्ति और हर क्षेत्र सशक्त होगा तो देश राम राज्य की ओर बढ़ेगा। हमें आने वाले 1000 वर्षों के लिए भारत की नींव मजबूत करनी है। जो सिर्फ वर्तमान का सोचते हैं, वे आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय करते हैं। इसलिए क्योंकि जब हम नहीं थे, यह देश तब भी था। हम जब नहीं रहेंगे, यह देश तब भी रहेगा। हम एक जीवंत समाज हैं और हमें दूरदर्शिता के साथ काम करना होगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए भी हमें प्रभु राम से सीखना होगा। हमें उनके व्यक्तित्व को समझना होगा और उनके व्यवहार को आत्मसात करना होगा। हमें याद रखना होगा कि राम यानी आदर्श, मर्यादा, धर्म पथ पर चलने वाला व्यक्तित्व। राम यानी जनता के हित को सुरक्षित रखना। राम यानी ज्ञान और विवेक की पराकाष्ठा। राम यानी कोमलता में दृढ़ता। पीएम मोदी ने कहा कि यह धर्मध्वज दूर से ही रामलला की जन्मभूमि के दर्शन कराएगा। युगों-युगों तक प्रभु राम के आदर्शों और प्रेरणाओं को मानव मात्र तक पहुंचाएगा। मैं इस अद्वितीय अवसर की सभी को शुभकामनाएं देता हूं। मैं उन भक्तों को भी प्रणाम करता हूं, जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए सहयोग दिया। इसके अलावा सभी श्रम वीरों, योजनाकारों और अन्य लोगों का भी अभिनंदन करता हूं, जिन्होंने मंदिर निर्माण में योगदान किया। सदियों की वेदना पर विराम लगा, अब 2047 का टारगेट पीएम मोदी ने कहा कि राम ध्वजा लहराने के साथ ही सदियों की वेदना विराम पा रही है। भगवान राम अयोध्या से युवराज के रूप में निकले थे और लौटे तो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम बनकर। उनके साथ गुरु वशिष्ठ की शिक्षा थी तो माता शबरी का ममत्व भी था। निषादराज का साथ भी था, जो हमें स्मरण कराता है कि साधन से अहम साध्य होता है। अब एक बार फिर से समाज में उसी समरसता के भाव से सभी के विकास के लिए काम होगा। हम विकसित भारत का ऐसा ही सपना देखते हैं। गुलामी की मानसिकता ने राम को भी नकारा, मैकाले का असर व्यापक लॉर्ड मैकाले ने गुलामी की मानसिकता की नींव रखी थी। 2035 में उस घटना के 200 साल पूरे हो रहे हैं। हमें लक्ष्य लेकर चलना है कि भारत को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करके रहेंगे। दुर्भाग्य है कि मैकाने जो सोचा था, उसका प्रभाव कहीं व्यापक हुआ है। हमें आजादी तो मिली, लेकिन हीन भावना से मुक्ति नहीं मिली। एक विकार आ गया कि विदेशों की हर चीज अच्छी है और हमारे यहां की हर चीज में खोट ही खोट है। इस मानसिकता से हमें मुक्ति पानी है। कहा गया कि हमारा संविधान भी विदेश से प्रेरित है, लेकिन सच यह है कि भारत तो लोकतंत्र की जननी है। पीएम मोदी ने कहा कि यह भी तो गुलामी की ही मानसिकता है कि एक वर्ग ने राम को नकारा है। त्रेता युग अयोध्या ने दुनिया को नीति दी और 21वीं सदी की अयोध्या दुनिया को विकास का मॉडल देगी।

वैदिक पंचांग अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल अष्टमी: 28 नवंबर से 29 नवंबर तक मां दुर्गा की पूजा और व्रत विवरण

सनातन धर्म में हर पर्व हर त्योहार का अपना अलग ही महत्व होता है. साल के प्रत्येक महीने में मां आदि शक्ति दुर्गा की उपासना का भी विधान है. हिंदू पंचांग के अनुसार शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गा अष्टमी तिथि के नाम से जाना जाता है. इस दिन माता दुर्गा की विधि-विधान से पूजा आराधना की जाती है. इस दौरान माता दुर्गा पृथ्वी पर निवास करती हैं. अपने भक्तों की सभी मनोकामना पूरी करती हैं. आइए जानते है उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज से अगहन माह यानी मार्गशीर्ष माह की दुर्गा अष्टमी की तिथि क्या है, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि. मासिक दुर्गा अष्टमी शुभ मुहूर्त  वैदिक पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष शुक्ल अष्टमी तिथि 28 नवंबर को देर रात 12:29 बजे शुरू होगी और तिथि का समापन 29 नवंबर को देर रात 12:15 बजे होगा. मां दुर्गा की पूजा निशिता काल में की जाती है. इस तहर 28 नवंबर को अगहन माह की दुर्गा अष्टमी पूजा की जाएगी. शुभ योग्य मे की जाएगी आरधना  इस बार मार्गशीर्ष शुक्ल अष्टमी तिथि पर कई शुभ योग का निर्माण हो रहा है. हर्षण योग 11:06 मिनट से बन जाएगा. इस दिन शतभिषा नक्षत्र होगा और बव करण होगा. इन संयोगों में देवी दुर्गा की पूजा अर्चना करना सभी मनोकामनाओं की पूर्ति का कारक बन सकता है. मां दुर्गा की कृपा से साधक के सभी बिगड़े काम पड़ सकते हैं. जानिए मासिक दुर्गा अष्टमी व्रत का महत्व मासिक दुर्गाष्टमी के दिन व्रत रखने का विशेष महत्व होता है. इस दिन भक्त एक समय भोजन करते हैं या फिर फलाहार करते हैं. व्रत रखने से मन एकाग्र होता है और देवी दुर्गा की भक्ति में मन लगता है. पूरे विधि विधान से व्रत पूरा करने पर लोगों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में आने वाली समस्याओं का समाधान होता है. इसके अलावा घर में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है.इसलिए यह व्रत रखा जाता है. ऐसे करें मां दुर्गा कि पूजा मासिक दुर्गा अष्टमी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए. इसके बाद गंगाजल डालकर माता दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए. माता दुर्गा का गंगाजल से अभिषेक करना चाहिए. इसके साथ ही माता दुर्गा के सामने दीप प्रज्वलित करना चाहिए. उसके बाद अक्षत सिंदूर और लाल पुष्प अर्पित करना चाहिए. भोग के रूप में मिठाई चढ़ाना चाहिए. धूप,दीप, अगरबत्ती जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए. ऐसा करने से माता दुर्गा जल्द प्रसन्न होती है और अपने भक्तों की सभी मनोकामना पूरी करती है.

अयोध्या में ध्वजारोहण, राजनीति में हलचल: अखिलेश यादव ने दिया बड़ा संदेश

अयोध्या  अयोध्या के राम मंदिर के मुख्य शिखर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को धर्मध्वजा फहरा दी। इस बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट किया जिसकी सियासी गलियारों में चर्चा होने लगी। अखिलेश यादव ने इस पोस्ट में इटावा में बन रहे श्री केदारेश्वर महादेव मंदिर का उल्लेख किया। इसके साथ ही उन्होंने इशारों ही इशारों में अन्य मंदिरों के दर्शन और संकल्प पूर्ण करने की भी बात कही।   सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस पोस्ट में लिखा-‘पूर्णता ही पूर्णता की ओर ले जाती है। ईश्वरीय प्रेरणा से इटावा में निर्माणाधीन ‘श्री केदारेश्वर महादेव मंदिर’ के पूर्ण होने पर अन्य मंदिरों के दर्शन का संकल्प भी पूर्ण करेंगे। आस्था जीवन को सकारात्मकता और सद्भाव से भरने वाली ऊर्जा का ही नाम है। दर्शन के लिए ईश्वरीय इच्छा ही मार्ग बनाती है, वही बुलाती है। सच तो ये है कि हम सब तो ईश्वर के बनाएं मार्ग पर बस चलकर जाते हैं। आस्थावान रहें, सकारात्मक रहें।’ बता दें कि अयोध्या में पिछले साल हुई राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा और अब ध्वजारोहण समारोह के दौरान समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच सियासत भी होती रही। राम मंदिर में दर्शन के लिए अब तक न जाने को लेकर भाजपा नेता सपा प्रमुख पर सवाल उठाते रहते हैं। इस बीच दो दिन पहले अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने ध्वजारोहण कार्यक्रम में न्योता न मिलने का आरोप लगाते हुए यह कहकर सबका ध्यान खींचा था कि उन्हें यदि न्योता मिला तो सारा काम धाम छोड़कर नंगे पांव मंदिर में दर्शन करने जाएंगे। राम मंदिर में दर्शन के लिए जाने को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पिछले दिनों एक साक्षात्कार में अपना रुख स्पष्ट किया था। उन्होंने कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण पूरा होने के बाद ही वह दर्शन करने जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि इटावा में श्री केदारेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण पूरा होने वाला है। जैसे ही मंदिर का निर्माण पूरा हो जाएगा वहां के दर्शन करके परिवार के साथ दर्शन करने जाएंगे। इटावा में केदारेश्वर महादेव मंदिर इटावा सफारी पार्क के सामने बन रहा है।  

सही दिशा में आईना रखने से बदल सकती है आपकी किस्मत, वास्तु के अनुसार बढ़ेगा घर का सौभाग्य

Vastu Tips for Mirror: आजकल हर कोई चाहता है कि उसके घर में पॉजिटिव एनर्जी बनी रहे, पैसा रुके नहीं और लाइफ में लगातार ग्रोथ होती रहे. लोग मेहनत तो खूब करते हैं, लेकिन कई बार घर की नेगेटिव एनर्जी या गलत प्लेसमेंट की वजह से प्रोग्रेस स्लो हो जाती है. खासकर वास्‍तु शास्त्र में आईने को बहुत महत्व दिया गया है. कहते हैं कि घर में रखा हुआ आईना सिर्फ आपका चेहरा नहीं दिखाता, बल्कि आपके घर की एनर्जी को भी रिफ्लेक्ट करता है. अगर आईना सही दिशा में लगाया जाए तो यह घर में धन, सुख और प्रगति लाता है, लेकिन गलत दिशा में रखा जाए तो यह परेशानी, कंगाली और लगातार चल रही दिक्कतों को और बढ़ा देता है. इसलिए आजकल हर कोई यह समझना चाहता है कि आखिर आईने को किस दिशा में लगाना चाहिए ताकि घर का लक चेंज हो, पैसों की आवक बढ़े और फैमिली लाइफ भी स्मूद चले. इसी वजह से आज हम आपको बता रहे हैं कि आईना किस दिशा में रखने से किस्मत चमकती है और किन गलतियों से हमेशा बचना चाहिए. इस बारे में बता रहे हैं ज्योतिषाचार्य अंशुल त्रिपाठी. आईना किस दिशा में रखना शुभ माना गया है वास्‍तु के एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आईना हमेशा ऐसी दिशा में होना चाहिए जहां से पॉजिटिव एनर्जी बढ़े. सबसे अच्छा ऑप्शन माना गया है उत्तर (North) या पूर्व (East) दिशा. यह दोनों दिशाएं घर में प्रोग्रेस और पॉजिटिविटी को अट्रैक्ट करती हैं. कहा जाता है कि अगर आप आईना इन दिशाओं में लगाते हैं तो घर के अंदर एनेर्जी का फ्लो अच्छा रहता है और धन-भाग्य भी बढ़ता है. 1. उत्तर दिशा उत्तर दिशा को कुबेर की दिशा माना जाता है. कुबेर को धन का देवता कहा गया है. इसलिए इस दिशा में आईना लगाने से पैसों की रुकावट कम होती है और फाइनेंस से जुड़ी परेशानियां धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं. घर में पैसा टिकने लगता है और खर्चे भी कंट्रोल में आते हैं. 2. पूर्व दिशा पूर्व दिशा सूरज की दिशा है. यह दिशा नई शुरुआत, पॉजिटिविटी और ग्रोथ को दर्शाती है. इस दिशा में लगाया गया आईना घर में ताजी और साफ एनर्जी लाता है. इससे घर के मेंबर्स का मूड हल्का रहता है, तनाव कम होता है और लाइफ में क्लैरिटी बढ़ती है. आईना लगाने से पहले ध्यान रखने वाली जरूरी बातें आईना घर की एनर्जी को दोगुना कर देता है. इसलिए इसे गलत जगह लगाने से नेगेटिविटी भी डबल हो जाती है. यहां कुछ बातें हैं जिन्हें हमेशा याद रखें. 1. टूटा या धुंधला आईना घर में न रखें अगर आपका आईना टूटा हुआ है, किनारों से खराब है या धुंधला हो गया है तो उसे तुरंत हटा दें. ऐसा आईना घर में नेगेटिव एनर्जी बढ़ाता है और कन्फ्यूजन, टेंशन और फाइनेंशियल लॉस लाता है. 2. आईने के सामने बेड या दरवाजा न दिखे आईना अगर बेड या बेडरूम दरवाजे को रिफ्लेक्ट कर रहा है तो यह रिश्तों में टेंशन, नींद में रुकावट और मन में बेचैनी ला सकता है. कोशिश करें कि बेड आईने में दिखाई न दे. 3. किचन के सामने आईना लगाने से बचें कई लोग किचन में डेकोरेशन के लिए आईना लगा देते हैं, जबकि वास्‍तु के हिसाब से यह ठीक नहीं माना जाता. इससे घर में अनावश्यक खर्च बढ़ता है और घर की एनर्जी डिस्टर्ब होती है. 4. मंदिर या पूजा घर के सामने आईना न लगाएं आईना अगर मंदिर के सामने होगा तो यह पॉजिटिव एनर्जी को काट देता है. इससे घर में शांति कम होती है और मन बेचैन रहता है. जिस चीज को आईना रिफ्लेक्ट करे, वह हमेशा पॉजिटिव होनी चाहिए यह वास्‍तु का सबसे इंपोर्टेंट रूल है. आईना जिस चीज को रिफ्लेक्ट करेगा, उसकी एनर्जी डबल हो जाएगी. इसलिए कोशिश करें कि आईना हमेशा साफ-सुथरे कॉर्नर, ताजे फूलों, लाइट, और पॉजिटिव चीजों को ही दिखाए.     आईना इन चीजों को दिखाए तो धन-भाग्य बढ़ता है:     लाइट्स या उजाला     साफ-सुथरा लिविंग रूम     पौधे     कोई सुंदर डेकोर     खिड़की से आती सनलाइट ये चीजें घर में पॉजिटिव एनर्जी का फ्लो बढ़ाती हैं और घर में खुशहाली बनाए रखती हैं.     आईने के लिए बेस्ट लोकेशन क्या है     लिविंग रूम की उत्तर या पूर्व दीवार     डाइनिंग टेबल के पास लेकिन ऐसी पोजीशन में कि खाना रिफ्लेक्ट हो     घर के एंट्रेंस से थोड़ा हटकर, लेकिन सीधे दरवाजे का रिफ्लेक्शन न दिखे     एंट्रेंस के पास लगाया गया आईना नेगेटिव एनर्जी अंदर नहीं आने देता और घर की एनेर्जी को फ्रेश बनाए रखता है. आईना लगाने से कंगाली कैसे दूर होती है वास्‍तु शास्त्र के मुताबिक घर में फैली नेगेटिव एनर्जी ही कंगाली, पैसे की रुकावट और लगातार तनाव की वजह होती है. जब आईना सही दिशा में लगाया जाता है तो यह पॉजिटिव एनर्जी को बढ़ाता है, जिससे:     पैसों की आवक बढ़ती है     खर्चे कंट्रोल में आते हैं     घर में शांति बढ़ती है     रिश्ते मजबूत होते हैं     कामों में तेजी आती है लोग बताते हैं कि आईना सही दिशा में लगाने के बाद उनकी लाइफ में पॉजिटिव बदलाव आया, बिजनेस में ग्रोथ हुई और घर में पैसे का फ्लो बेहतर हुआ.

बंगाल में SIR को लेकर हंगामा: BJP कार्यकर्ताओं और BLOs में तीखी झड़प, माहौल गर्म

कोलकाता  कोलकाता में भाजपा कार्यकर्ताओं का पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के सामने BLO के एक फोरम के प्रदर्शनकारियों से आमना-सामना हो गया। इस दौरान पुलिस ने बीच-बचाव किया। सीनियर अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। बीएलओ अधिकार रक्षा समिति के कई सदस्य सीईओ कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे थे। उनका आरोप था कि मतदाता सूची के एसआईआर के दौरान उन पर काम का अत्यधिक बोझ है। मामला तब बिगड़ गया जब कोलकाता नगर निगम पार्षद सजल घोष के नेतृत्व में लगभग 50 भाजपा कार्यकर्ता रात 11 बजे मौके पर पहुंचे। सीईओ कार्यालय में बंद चुनाव आयोग के अधिकारियों को डराकर SIR को रोकने के तृणमूल कांग्रेस के कथित प्रयास के खिलाफ नारे लगाने लगे।   रिपोर्ट के मुताबिक, स्थिति तब बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारी बीएलओ ने जवाबी नारे लगाए। भाजपा पर पश्चिम बंगाल में वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने के लिए निर्वाचन आयोग के साथ मिलीभगत से काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ता शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे BLO को आतंकित करने और भड़काने की कोशिश कर रहे थे, जो केवल सीईओ से मिलना चाहते थे। घोष ने दावा किया, ‘प्रदर्शनकारी बीएलओ नहीं हैं। वे तृणमूल समर्थित संगठनों के नेता हैं।’ एक-दूसरे पर जमकर किए कटाक्ष बीएलओ फोरम के सदस्यों ने आरोपों को खारिज कर दिया। जब दोनों समूह मीडियाकर्मियों के सामने एक-दूसरे पर कटाक्ष कर रहे थे, तभी उपायुक्त इंदिरा मुखर्जी के नेतृत्व में पुलिस बल उनके बीच खड़ा हो गया ताकि वे टकराव होने से रोक सकें। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल सोमवार रात करीब 11.40 बजे अपने कार्यालय से बाहर निकले। वे बीएलओ के धरने के कारण कार्यालय में ही थे। उन्होंने देर रात के घटनाक्रम पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। तनाव उस समय कम हुआ, जब उन्हें और निर्वाचन आयोग के अन्य अधिकारियों को पुलिस ने उनके आवासों तक पहुंचाया।