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पुलिस विभाग में बड़ी कार्रवाई, लापरवाही के आरोप में तीन आरक्षक बर्खास्त

 कवर्धा ड्यूटी के दौरान शराब सेवन, अनुशासनहीनता और लापरवाही के मामलों में एसपी धर्मेन्द्र सिंह ने तीन आरक्षकों को विभाग से बर्खास्त कर दिया है। इस कार्रवाई से पुलिस विभाग में हड़कम मच गया है। एएसपी पंकज पटेल ने बताया, जांच में आरक्षक अनिल मिरज के खिलाफ 334 दिन की अनाधिकृत अनुपस्थिति, 22 पूर्व दंड और कर्तव्यच्युति प्रमाणित हुई। आरक्षक आदित्य तिवारी बंदी पेशी जैसी महत्वपूर्ण ड्यूटी के दौरान नशे में सोते मिले और 91 दिन गैरहाजिर रहे। वहीं चालक आरक्षक राजेश उपाध्याय पुलिस अधीक्षक कार्यालय में नशे की हालत में पकड़े गए। तीनों के निरंतर कदाचार व सुधार न दिखाने की वजह से तीनों आरक्षकों को तत्काल प्रभाव से सेवा से पृथक किया गया।

समुद्र में भयंकर रूप धर चुका ‘सेन्यार’ — तटीय इलाकों में बढ़ी सावधानी!

नई दिल्ली  मलक्का जलसंधि पर बना कम दबाव का क्षेत्र अब चक्रवाती तूफान में तब्दील हो गया है। यह बुधवार को ही दोपहर बाद इंडोनेशिया के तट से टकरा सकता है। इसी बीच बंगाल की खाड़ी पर भी कम दबाव का क्षेत्र ऐक्टिल हो गया है जो कि तूफान का रूप ले सकता है। दरअसल इस समय दो मौसमी सिस्टम ऐक्टिव हैं। मलक्का स्ट्रेट के अलावा दक्षिण श्रीलंका के पास बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र तूफान का रूप ले रहा है। इस वजह से ओडिशा, पश्चिम बंगाल और दक्षिण के राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी कर दिया गया है। मौसम विभाग ने बताया कि मलक्का स्ट्रेट पर बना कम दबाव का क्षेत्र अब चक्रवाती तूफान 'सेन्यार' में बदल गया है। यह भारतीय समय के अनुसार शाम को 5:30 बजे तक तट से टकराएगा। बता दें कि मलक्का स्ट्रेट अंडमान सागर से सटा हुआ है। दोनों सिस्टम की वजह से तमिलनाडु, पुदुच्चेरी, आंध्र प्रदेश और केरल में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने कहा है कि सेन्यार चक्रवात का असर अगले 24 घंटे तक देखा जाएगा। बुधवार को ही यह इंडोनेशिया के तट को क्रॉस कर जाएगा। इसके बाद तूफान दक्षिण पश्चिम की ओर मुड़ सकता है। इस दौरान तटीय इलाकों में 70 से 90 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग के मुताबिक 26 नवंबर को ही निकोबार द्वीपसमूह पर मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा 27 नवंबर को हल्की बारिश हो सकती है। 28 नवंबर से मौसम में सुधार शुरू हो जाएगा। बंगाल की खाड़ी में भी उठ रहा तूफान खाड़ी के ऊपर बने निम्न दबाव के क्षेत्र से कावेरी डेल्टा, तमिलनाडु के दक्षिणी और दक्षिणी तटीय जिलों में भारी बारिश हुई और अगले 24 घंटों में यह चक्रवाती तूफान में बदल जाएगा। आईएमडी ने कहा है कि गुरुवार को ही यह चक्रवाती तूफान में तब्दील होगा। इससे तमिलनाडु और केरल के तटीय इलाकों मे भारी बारिश की संभावना है। मंगलवार को तमिलनाडु के स्कूल और कॉलेजों को बंद रखने का आदेश दिया गया था।  

आय से अधिक संपत्ति मामले में लोकायुक्त ने धार में सोसायटी प्रबंधक के ठिकानों पर की छापेमारी

धार   धार जिले में लोकायुक्त की टीम ने दबिश दी। आदिम जाति सहकारी सोसायटी प्रबंधक के घर और फार्म हाउस पर छापा मारा। बताया जा रहा है कि, आय से अधिक संपत्ति की शिकायत पर कार्रवाई की गई है। फिलहाल, दस्तावेजों की जांच पड़ताल की जा रही है। बताया जा रहा है कि, बुधवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे इंदौर लोकायुक्त की टीम धार जिले पहुंची। आदिम जाति सहकारी सोसायटी प्रबंधक गोवर्धनलाल मारू के घर, दफ्तर और फार्म हाउस पर एक साथ दबिश दी गई हैं। एक साथ 18 चार पहिया वाहनों में सवार होकर छागोवर्धनलाल मारू के अलग-अलग ठिकानों पर पहुंची। मौके पर 65 से अधिक कर्मचारियों के साथ भारी पुलिसबल तैनात किया गया है। आय से अधिक संपत्ति होने की शिकायत पर छापेमार कार्रवाई की गई है। अबतक हुई ये कार्रवाई इस कार्रवाई के दौरान इंदौर लोकायुक्त के डीएसपी सुनील तालान समेत अन्य अधिकारी भी मौके पर मौजूद है। लोकायुक्त की टीम दस्तावेजों की जांच पड़ताल में जुटी हुई है। अब तक की सर्चिंग में 2 लाख 11 हजार रूपए नकद, 15 लाख का सोना और 1 लाख की चांदी बरामद हुई है। अबतक हुई दस्तावेज़ों की जांच में 4 करोड़ से अधिक की चल-अचल संपत्ति का खुलासा हुआ है, जबकि अनुमानित वैध आय करीब 1 करोड़ 20 लाख के आसपास ही हुई है। फिलहाल, तलाशी अभियान जारी है।

केंद्रीय मंत्री का चुनावी वादा—BJP उम्मीदवार विजयी तो हर गांव को मिलेंगे 10 लाख रुपये

नई दिल्ली  केंद्रीय मंत्री एवं करीमनगर से सांसद बंदी संजय कुमार ने ग्राम पंचायत चुनावों में उनके संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांवों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) समर्थित उम्मीदवार के जीताने की अपील की है। साथ ही उन्होंने कहा है कि उन गांवों को 10 लाख रुपये की निधि आवंटित की जाएगी। दिसंबर में तेलंगाना में ग्राम पंचायत के चुनाव होने हैं।   मंत्री ने आरोप लगाया कि भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) और कांग्रेस की पूर्व सरकारों ने सर्वसम्मति से पदाधिकारियों को चुनने वाली पंचायतों को धन देने का वादा किया था, लेकिन कोई धन नहीं दिया। उन्होंने मंगलवार देर रात 'एक्स' पर एक पोस्ट में मतदाताओं से इस बार ऐसी चालों में न आने को कहा। अपने पोस्ट में उन्होंने कहा, ‘‘करीमनगर के गांव: भाजपा समर्थित उम्मीदवार को सर्वसम्मति से चुनें और विकास के लिए तुरंत 10 लाख रुपये पाएं। यदि करीमनगर लोकसभा क्षेत्र में आपका गांव भाजपा समर्थित सरपंच को सर्वसम्मति से चुनता है, तो मैं उस गांव के विकास के लिए सीधे 10 लाख रुपये दूंगा- बिना किसी देरी के, बिना किसी बहाने के।’’ केंद्रीय गृह राज्य मंत्री संजय कुमार ने कहा कि सांसद होने के नाते उनके पास सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड्स) के तहत निधि उपलब्ध है। संजय कुमार ने करीमनगर की जनता से बीआरएस और कांग्रेस के धोखे में न आने की अपील की और कहा कि केवल भाजपा ही निधि देगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 'गलती से' विपक्षी उम्मीदवार जीतते हैं, तो नयी निधि नहीं मिलेगी और केंद्रीय निधि भी बंट सकती है। तेलंगाना राज्य चुनाव आयोग ने राज्य में 11, 14 और 17 दिसंबर को तीन चरणों में ग्राम पंचायत चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया है।

कप्तान ऋषभ पंत की भावुक प्रतिक्रिया: होम ग्राउंड पर हर टीम होती है मजबूत

नई दिल्ली  भारत के कार्यवाहक कप्तान ऋषभ पंत का गुवाहाटी में साउथ अफ्रीका के खिलाफ दूसरे टेस्ट में ऐतिहासिक हार झेलने के बाद दर्द छलका है। उन्होंने कहा कि घर पर किसी भी विपक्षी टीम को हल्के में नहीं लिया जा सकता। साउथ अफ्रीका ने बुधवार को गुवाहाटी में खेले गए दूसरे मुकाबले में 408 रनों से विजयी परचम फहराया। यह भारतीय टीम की टेस्ट क्रिकेट में रनों के लिहाज से सबसे बड़ी हार है। साउथ अफ्रीका ने भारतीय सरजमीं पर 25 सालों के बाद टेस्ट सीरीज अपने नाम की है। नियमित कप्तान शुभमन गिल के चोटिल होने के कारण पंत ने पहले टेस्ट के बाद दूसरे मैच में भारत की कमान संभाली। गिल के पहले टेस्ट के दूसरे दिन गर्दन में जकड़न आ गई थी। वह गुवाहाटी टेस्ट से बाहर रहे। पंत ने दो मैचों की टेस्ट सीरीज में सूपड़ा होने के बाद कहा, ''यह निराशाजनक है। एक टीम के तौर पर हमें बेहतर होने की जरूरत है। हमें विपक्षी टीम को श्रेय देना होगा। उन्होंने अच्छा क्रिकेट खेला। हमें सीख लेकर एक टीम के तौर पर टिके रहने की जरूरत है। उन्होंने सीरीज में दबदबा बनाया लेकिन आप घर पर खेलते हुए विपक्षी टीम को हल्के में नहीं ले सकते। हमें अपना माइंडसेट क्लियर रखना था। भविष्य में हमें इससे सीखना होगा और बेहतर होना होगा। उन्होंने बेहतर क्रिकेट खेला। क्रिकेट में आपको एक टीम के तौर पर मौके भुनाने होते हैं। हमने ऐसा नहीं किया और इसकी वजह से हम पूरी सीरीज हार गए। सकारात्मक बात यह रहेगी कि हम अपने प्लान पर ध्यान दें और यही हम इस सीरीज से सीखेंगे।'' गुवाहाटी में भारत के सामने 549 रन का असंभव लक्ष्य था और उसकी पूरी टीम मैच के पांचवें और अंतिम दिन 140 रन पर आउट हो गई। साउथ अफ्रीका ने अपनी पहली पारी में 489 रन बनाए थे जिसके जवाब में भारतीय टीम 201 रन पर आउट हो गई थी। साउथ अफ्रीका ने अपनी दूसरी पारी पांच विकेट पर 260 रन बनाकर समाप्त घोषित की थी। बता दें कि यह तीसरा अवसर है जबकि किसी टीम ने भारत का उसकी धरती पर सूपड़ा साफ किया। इससे पहले साउथ अफ्रीका ने 2000 में 2-0 से जबकि पिछले साल न्यूजीलैंड ने 3-0 से सीरीज जीती थी। इस पराजय से भारत की वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने की उम्मीदों को भी करारा झटका लगा है।  

चंडीगढ़ में तनावपूर्ण हालात: PU में विरोध प्रदर्शन, किसान महापंचायत ने बढ़ाई सुरक्षा एजेंसियों की चिंता

चंडीगढ़  पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) के कुलपति कार्यालय के बाहर बुधवार को आयोजित विरोध प्रदर्शन में भीड़ कम रही। प्रदर्शनकारी विश्वविद्यालय की सीनेट चुनाव की अधिसूचना जारी करने की मांग को लेकर जुटे थे, लेकिन कैंपस में माहौल शांत रहा। प्रदर्शन में कम भीड़ की बड़ी वजह यह रही कि शहर का मुख्य फोकस सेक्टर-43 स्थित दशहरा ग्राउंड में किसानों के विशाल प्रदर्शन की ओर खिसक गया। पंजाब के किसान संगठनों की इस महापंचायत के चलते भारी पुलिस बल, रिज़र्व फोर्स और प्रशासनिक ध्यान वहीं केंद्रित रहा। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि किसान यूनियनों के प्रतिनिधि विश्वविद्यालय पहुंचेंगे और वहां उपस्थित छात्रों व कर्मचारियों को संबोधित करेंगे। इस घोषणा के बावजूद सुबह के समय कैंपस में भीड़ सीमित रही। वहीं, यूथ कांग्रेस भी छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन कर रही है।   सेक्टर-43 में मंच तैयार, किसान पहुंचने शुरू सेक्टर-43 स्थल पर किसान संगठनों के नेता और प्रतिनिधि पहुंचने शुरू हो गए हैं। वहां सभा के लिए मंच तैयार किया जा रहा है और सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। पीयू बचाओ मोर्चा द्वारा पूर्ण बंद का आह्वान पीयू बचाओ मोर्चा—जो 50 से अधिक छात्र संगठनों, किसान संगठनों, सामाजिक समूहों और कर्मचारी यूनियनों का संयुक्त मंच है—ने बुधवार को पूर्ण ‘कैंपस बंद’ का आह्वान किया था। 10 नवंबर को हुए उग्र विरोध की तर्ज पर आज भी विश्वविद्यालय परिसर बंद रहा। विश्वविद्यालय बंद, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी     विश्वविद्यालय प्रशासन पहले ही बुधवार को छुट्टी घोषित कर चुका था     सभी विभाग बंद रहे     प्रशासनिक ब्लॉक के बाहर भारी पुलिस तैनाती की गई     कैंपस के अंदर सभी दुकानें भी बंद रहीं   किसानों की महापंचायत किसानों के ऐतिहासिक आंदोलन के पांच साल पूरे होने के मौके पर आज चंडीगढ़ में संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) की महापंचायत करने जा रहा है। सेक्टर-43बी में आयोजित इस कार्यक्रम में पंजाब सहित देशभर से हजारों किसान पहुंच रहे हैं। सुबह से ही महापंचायत स्थल पर किसानों के जत्थे पहुंचने शुरू हो गए हैं। केंद्रीय बल तैनात, सुरक्षा के कड़े इंतजाम महापंचायत को देखते हुए चंडीगढ़ प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी है। चंडीगढ़ पुलिस के साथ-साथ बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के जवान भी सेक्टर-43 में तैनात कर दिए गए हैं। प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण और किसी संभावित स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की भी मदद ली है। मौके पर किसानों की ओर से लंगर की व्यापक तैयारियां की गई हैं। दूर-दराज से आए किसानों के लिए भोजन की भी व्यवस्था है। किसानों की मुख्य मांगें भाकियू (लक्खोवाल) ने बताया कि महापंचायत में केंद्र सरकार और पंजाब सरकार दोनों को मांगपत्र सौंपा जाएगा। किसान अपनी अधूरी मांगों पर अब भी अड़े हुए हैं। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—     एमएसपी की कानूनी गारंटी     पंजाब को चंडीगढ़ पर पूर्ण अधिकार     पंजाब यूनिवर्सिटी का पंजाब से जुड़ा दर्जा बहाल करना     राज्य के जल संसाधनों पर पंजाब का हक सुनिश्चित करना     इसके अलावा केंद्र के नए चार लेबर कोड, बिजली संशोधन विधेयक 2025, बाढ़ प्रभावित किसानों की मदद, गन्ना किसानों के बकाया भुगतान और सहूलियतों सहित कई अन्य मुद्दों को भी मांगपत्र में शामिल किया गया है। आंदोलन तेज करने की चेतावनी किसान नेताओं ने संकेत दिया है कि यदि सरकारें उनकी मंगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठातीं, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

कर्नाटक की कमान किसके हाथ? शिवकुमार–सिद्धारमैया पर जल्द आएगा बड़ा फैसला

बेंगलुरु  कर्नाटक कांग्रेस में जारी कथित सत्ता संघर्ष पर जल्द ही विराम लग सकता है। खबर है कि जल्द ही कांग्रेस आलाकमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच जारी रस्साकशी को लेकर बैठक कर सकता है। संभावनाएं हैं कि दोनों नेताओं को दिल्ली भी तलब किया जा सकता है। खास बात है कि मई 2023 में दोनों नेताओं के बीच कथित तौर पर एक समझौता हुआ था, जिसमें दोनों को ढाई साल नेतृत्व की बात कही गई थी। हालांकि, सार्वजनिक रूप से इसके बारे में कभी बात नहीं हुई। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान 1 दिसंबर से पहले कर्नाटक पर बड़ा फैसला ले सकता है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मुलाकात आने वाले एक या दो दिनों में हो सकती है। हालांकि, इसे लेकर कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। रिपोर्ट के अनुसार, सिद्धारमैया और शिवकुमार को संभावित रूप से 28 या 29 नवंबर को दिल्ली बुलाया जा सकता है। खास बात है कि 1 दिसंबर से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है और पार्टी इससे पहले इस मुद्दे को सुलझाना चाहेगी। क्या उम्मीद रिपोर्ट के अनुसार, सिद्धारमैया के करीबी एक नेता ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि राहुल गांधी का समर्थन मिलेगा। साथ ही उन्होंने संकेत दिे हैं कि सिद्धारमैया के पास विधायकों का समर्थन है। इधर, शिवकुमार समर्थक विधायक इकबाल हुसैन ने ऐलान कर दिया है कि उनके नेता सीएम बनने वाले हैं। हालांकि, उन्होंने अंतिम फैसला आलाकमान की तरफ से लिए जाने की बात कही है। दिल्ली से लौटे विधायक खबर है कि दिल्ली पहुंचे शिवकुमार समर्थक कुछ विधायक बेंगलुरु लौट आए हैं। मंगलवार को कुछ नेताओं ने कहा कि नेतृत्व इस मामले पर फैसला लेगा। कुछ विधायकों ने कहा कि उन्होंने आलाकमान से मुख्यमंत्री के मुद्दे पर भ्रम जल्द से जल्द खत्म करने का अनुरोध किया है, जबकि अन्य ने कहा कि वे प्रस्तावित मंत्रिमंडल फेरबदल के दौरान युवाओं या नये चेहरों को मौका देने की मांग कर रहे हैं। सीक्रेट डील का जिक्र शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि वह मुख्यमंत्री बदलने के मुद्दे पर सार्वजनिक तौर पर बात नहीं करना चाहते, क्योंकि यह पार्टी में चार-पांच लोगों के बीच एक 'गुप्त समझौता' है, और उन्हें अपनी अंतरात्मा पर भरोसा है। हुसैन ने कहा कि सभी लोग आलाकमान के फैसले का पालन करेंगे, साथ ही उन्होंने शिवकुमार के प्रमोशन पर भरोसा जताया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने कहा, 'मैं हमेशा उस बयान के साथ हूं…। 200 फीसदी वह जल्द ही सीएम बनेंगे। हाईकमान फैसला लेगा। जैसा कि हमारे नेता (शिवकुमार) ने कहा है कि सत्ता हस्तांतरण की सीक्रेट डील 5-6 पार्टी नेताओं के बीच हुई थी और वही 5-6 लोग फैसला लेंगे।'  

प्रदेश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध: CM डॉ. यादव

प्रदेश में खेल संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव रोइंग चैंपियनशिप की मेजबानी करना राज्य सरकार के लिए गर्व का विषय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 8वीं इंटर स्टेट चैलेंजर्स और 45वीं जूनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप का किया शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार युवाओं के चहुँमुखी विकास के लिए प्रतिबद्ध है। खेल विभाग प्रदेश में खेल संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित कर रहा है। भारत की प्राचीन संस्कृति में खेल केवल मनोरंजन नहीं बल्कि अनुशासन, संतुलन और मानसिक दृढ़ता का माध्यम माने गए हैं। पुराने समय में नौकायन, तैराकी और जल प्रशिक्षण को सामरिक और शारीरिक दक्षता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता था। वही परंपरा आज वॉटर स्पोर्ट्स के रूप में हमारे सामने है। इसमें तकनीक, सहन शक्ति और फोकस का वास्तविक परीक्षण होता है। राज्य सरकार के लिए रोइंग चैंपियनशिप की मेजबानी करना गर्व और आनंद का विषय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को भोपाल के बड़े तालाब स्थित बोट क्लब पर 8वीं इंटर स्टेट चैलेंजर्स और 45वीं जूनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप के शुभारंभ अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चैंपियनशिप के शुभारंभ की घोषणा की। उन्होंने चैंपियनशिप में शामिल 23 राज्यों के लगभग 500 खिलाड़ियों द्वारा देशभक्ति गीतों की धुनों पर प्रस्तुत मार्च पास्ट का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के आयोजन स्थल पहुंचने पर उन्हें कैप लगाकर स्वागत किया गया। इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास सारंग, भोपाल महापौर मती मालती राय सहित अधिकारी एवं खेल प्रेमी विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों के लिए बेहतर माहौल बना है। भारत अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार उपलब्धियां हासिल कर रहा है। मध्यप्रदेश ने वॉटर स्पोर्ट्स में एशियन गेम्स जैसे प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है। इसी वर्ष हुए 38वें नेशनल गेम्स, खेलो इंडिया, वॉटर स्पोर्ट्स फेस्टीवल में भी प्रदेश के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल में आयोजित चेंपियनशिप में शामिल होने आए विभिन्न राज्यों के खिलाड़ियों को मध्यप्रदेश की कला-संस्कृति और स्वाद से रू-ब-रू होते हुए भोपाल के आसपास स्थित पर्यटन स्थलों के भ्रमण के लिए भी प्रेरित किया। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास सारंग ने कहा कि यह 4 दिवसीय रोइंग चैंपियनशिप, वॉटर स्पोर्ट्स के कुंभ के रूप में स्थापित होगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार खेल-खिलाड़ी और खेल मैदान को प्रोत्साहित करने के लिए संपूर्ण प्रदेश में प्रयास कर रही है। खेलों और खिलाड़ियों को आवश्यक प्रशिक्षण के संबंध में राष्ट्रीय के साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नॉलेज एक्सचेंज के लिए गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के कोच तथा खिलाड़ी उपस्थित थे।  

फटने वाला है कर्नाटक कांग्रेस का ज्वालामुखी, राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल

बेंगलुरु  कर्नाटक में कांग्रेस का ज्‍वालामुखी फटने के कगार पर है. सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच का संघर्ष अब सिर्फ राख ही नहीं, लावा भी उगल रहा है. इस सूबे के कांग्रेसी इंतेजार में हैं कि पार्टी 'हाईकमान' समय रहते फायरब्रिगेड की भूमिका निभाएगा, लेकिन सबसे बड़े फायर फाइटर राहुल गांधी ही सीन से गायब हैं. दिलचस्‍प, सिर्फ हाईकमान की भूमिका ही नहीं, इस फसाद की जड़ भी है. जिसका कांग्रेस के भीतर एक लंबा अतीत है. किस तरह दो नेता आपस में टकराते हैं, और पार्टी दो धड़े में बंट जाती है और बिखर जाती है. कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बने ढाई साल से ज्‍यादा हो चुका है, लेकिन माहौल स्थिर होने के उलट अब बेहद बेचैनी भरा है. राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्‍यादा चर्चा इसी बात की है कि आखिर मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर कांग्रेस के भीतर खींचतान कब खत्म होगी. सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच चली आ रही यह अंदरूनी टकराहट अब सिर्फ बैकग्राउंड की कहानी नहीं रह गई है. इस पूरे मामले में कांग्रेस हाईकमान की भूमिका बेहद अहम होने के बावजूद हाईकमान ही सबसे ज्‍यादा चुप है. और यही चुप्पी आज पूरे संकट का सबसे बड़ा कारण बन गई है. कर्नाटक से आने वाली हर खबर में एक बात बार-बार दोहराई जाती है कि चुनाव के समय किसी तरह का सत्ता-साझेदारी का फॉर्मूला बना था. जिसके मुताबिक सिद्धारमैया आधा कार्यकाल पूरा करेंगे और उसके बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी शिवकुमार को मिल सकती है. हालांकि यह फॉर्मूला न तो कभी कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया, और न ही किसी दस्तावेज़ में इसका जिक्र है. लेकिन राजनीति में कई बातें कागज पर नहीं लिखी जातीं. बातें कमरे में होती हैं और भरोसे पर टिकी रहती हैं. यही भरोसा आज डगमगाया हुआ दिखता है. ऐसी ही हलचल कभी राजस्‍थान तो कभी छत्‍तीसगढ़ में देखी गई. राजस्‍थान में अशोक गेहलोत और सचिन पायलट के बीच खींचतान इस तरह बढ़ी थी कि लग रहा था कि सचिन भी ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया की तरह पार्टी छोड़ देंगे. ऐसा तो नहीं हुआ, लेकिन राज्‍य में कांग्रेस परोक्ष रूप से दो धड़ों में बंट गई. छत्‍तीसगढ़ में भी भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव के बीच 'पावर-शेयरिंग' फॉर्मूला अमल में नहीं लाया जा सका. कुलमिलाकर, जो एक बार सीएम की कुर्सी पर बैठा, वो फिर उठा नहीं. और कांग्रेस नेतृत्‍व की उस पर एक न चली. सिद्धारमैया और शिवकुमार में से किसका पलड़ा भारी  राजस्‍थान में जैसे अशोक गेहलोत थे, वैसे ही कुछ कर्नाटक में सिद्धारमैया अपने पक्ष में समीकरण साधकर बैठे हैं. वे इस राज्य में लंबे समय से एक लोकप्रिय नेता रहे हैं. कई समुदायों में उनकी पकड़ मजबूत है, उनकी छवि प्रशासनिक अनुभव वाले नेता की है. दूसरी ओर, शिवकुमार कांग्रेस के संगठन, संसाधन और राजनीतिक नेटवर्क के मामले में बेहद ताकतवर नेता माने जाते हैं. वोक्कालिगा समुदाय में उनकी पकड़ किसी से छिपी नहीं है और पार्टी को वापस सत्ता में लाने में उनके योगदान को कांग्रेस का कोई भी नेता नजरअंदाज़ नहीं कर सकता. शिवकुमार सिर्फ कर्नाटक तक ही नहीं, उन्‍हें महाराष्‍ट्र, हिमाचल के राजनीतिक संकट में भी ट्रबलशूटर की भूमिका में देखा गया. लेकिन, कर्नाटक की सियासत में दोनों नेताओं वजन बराबर हो जाता है. और यही बराबरी हाईकमान के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गई है. अब सवाल यह है कि हाईकमान क्या कर रहा है? इस सवाल के जवाब से पहले कांग्रेस अध्‍यक्ष मल्लिकार्जुन के बयान का जिक्र करना जरूरी हो जाता है. कर्नाटक के दौरे पर गए खरगे से वहां की कांग्रेस के सभी धड़ों ने मुलाकात की, जिस पर उनका जवाब था कि 'सब पार्टी हाईकमान तय करेगा'. भाजपा इस पर मजे ले रही है कि कांग्रेस अध्‍यक्ष होते भी खरगे पार्टी के हाईकमान नहीं बन पा रहे हैं. और भाजपा की इस दलील को महज राजनीति नहीं कहा जा सकता. खबर यह भी आई कि खरगे ने ढाई साल वाला फार्मूला आगे बढ़ाया था, लेकिन जब बात नहीं बनी तो पीछे हट गए. इधर, दिल्‍ली में डेरा डाले शिवकुमार समर्थक विधायक पार्टी महासचिव और राहुल गांधी के करीब केसी वेणुगोपाल से मुलाकात को तरसते रहे. लेकिन वेणुगोपाल केरल से लौटे ही नहीं. कांग्रेस हाईकमान की कार्यशैली अक्सर 'इंतजार' की होती है. वह दोनों पक्षों की नाराजगी और ताकत को तौलता है, फिर किसी मोड़ पर हस्तक्षेप करता है. लेकिन कर्नाटक के मामले में हाईकमान की चुप्पी काफी लंबी हो गई है. और यही दोनों धड़ों को उम्मीद भी देता है और बेचैनी भी. क्‍या हैं कर्नाटक में कांग्रेस के रिस्‍क फैक्‍टर्स अगर हाईकमान यह कह दे कि सिद्धारमैया पूरे पांच साल मुख्यमंत्री रहेंगे, तो शिवकुमार का धड़ा इसे धोखा मान सकता है और यह नाराजगी पार्टी में खलबली मचा सकती है. जैसा राजस्‍थान और छत्‍तीसगढ़ में हुआ. वहीं अगर हाईकमान यह संकेत दे कि सत्ता परिवर्तन होगा, तो सिद्धारमैया समर्थक खेमे में बेचैनी बढ़ सकती है. यानी एक नेता को खुश करने के चक्कर में दूसरे को नाराज करने का जोखिम बड़ा है, और हाईकमान फिलहाल ऐसा कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिखता. दूसरी वजह चुनावी राजनीति है. कर्नाटक दक्षिण भारत में कांग्रेस का सबसे मजबूत राज्य है. केरल में कांग्रेस है, लेकिन वहां स्थिति हर चुनाव में पलटती रहती है. तमिलनाडु में कांग्रेस जूनियर पार्टनर है. तेलंगाना में लंबे अरसे बाद सत्‍ता पास आई है. ऐसे में कर्नाटक कांग्रेस के लिए सिर्फ एक राज्य नहीं बल्कि दक्षिण भारत में उसका ग्रोथ इंजन है और ईंधन भी. तीसरी बात यह है कि कर्नाटक में दोनों नेता अपनी-अपनी जगह बेहद महत्वाकांक्षी हैं. लेकिन हाईकमान को यह समझ में आता है कि यदि किसी एक की उम्मीदों को पूरी तरह दबाया गया, तो पार्टी को लंबे समय तक इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है. इसलिए हाईकमान इस फैसला लेने में आनाकानी कर रहा है. यह संकट सुलझने वाला है या नहीं? फिलहाल राजनीतिक माहौल से ऐसा नहीं लगता कि हाल-फिलहाल कोई बड़ा फैसला होने वाला है. कांग्रेस उच्च नेतृत्व को शायद लग रहा है कि समय के साथ स्थिति खुद शांत हो जाएगी, या फिर कोई ऐसा मौका आएगा जब नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में कदम उठाना आसान होगा, जैसे किसी बड़े चुनाव या कैबिनेट फेरबदल के … Read more

नाम पढ़ते ही चौंक गए अधिकारी: वोटर लिस्ट में टीवी, ऐंटीना, काजू-बादाम जैसे अनोखे नाम

अगर मालवा  काजू सिंह, बादाम, पिस्ता, शेरनी बाई, टीवी, ऐंटेना, धर्मेंद्र, राजेश खन्ना, दिलीप कुमार, हेमामालिनी… चौंकिए मत। ये मतदाताओं के नाम हैं। मामला मध्य प्रदेश के अगर मालवा जिले का है। SIR के तहत अपडेट हो रहे मतदाता सूची में इस तरह के अनोखे नाम पढ़कर हर कोई हैरान है। अधिकारियों ने बताया जिले के दो मतदान केंद्रों- 93 और 94 में मतदाताओं के नाम फिल्मी पोस्टर, हीरो-हीरोइन, ड्राई-फ्रूट या टूरिज्म के ब्रोशर जैसे हैं। मगर इस तरह के अनोखे नाम रखने की वजह क्या है, जानिए पूरी बात। यह अनोखी वोटर लिस्ट दरअसल पढ़ी समुदाय (Pardhi Community) की जीवनशैली से जुड़ी है, जो पीढ़ियों से घुमंतू जीवन जी रहे हैं। ये समुदाय चलते-फिरते जीवन में अपने बच्चों के नाम उसी चीज़ पर रख देते थे, जो जन्म के समय आसपास दिखाई देता था। कभी तंबू सिनेमा में चल रही फिल्म, कभी गुजरते शहर का नाम, तो कभी वह स्नैक जो परिवार खा रहा होता था या ऐसे ही कुछ और। हंसते हुए BLO ने क्या बताया? एनडीटीवी रिपोर्ट के मुताबिक, 2006 से BLO के रूप में तैनात संतोष जैसवाल बताते हैं- “माधुरी दीक्षित, जीतेंद्र दीक्षित, प्याज बाई, सरांगपुर बाई, हेमामालिनी… शुरुआत में ये नाम अजीब लगे, लेकिन अब तो याद हो गए। उन्होंने मुस्कुराते हुए मजाकिया अंदाज में कहा- इतने फॉर्म भरे हैं कि बॉलीवुड मुझे कास्टिंग डायरेक्टर रख ले!” उनके अन्य साथी BLO हंसते हुए कहते हैं- “काजू सिंह, सनी देओल, शेरनी बाई, शेर खान… शुरुआत में लगा कि कोई मजाक कर रहा है। मगर आज ये नाम रोज़मर्रा जैसे लगते हैं।” मतदाता ने गर्व से सुनाई अपने नाम की कहानी जिन नामों को आमजन अनोखा समझ रहे हैं, वो नाम इन लोगों के लिए रोजमर्रा का हिस्सा बन गए हैं। देश प्रेमी नाम वाले मतदाता ने अपने नाम पर गर्व करते हुए इसके रखने की कहानी साझा की। देश प्रेमी ने बताया- “मेरे जन्म के दिन पिताजी फिल्म देखने गए थे। हीरो का नाम अच्छा लगा, कहानी पसंद आई, तो बस मेरा नाम देश प्रेमी रख दिया। हमारे यहां सोल्जर, परदेसी, राजकुमार जैसे नाम बहुत आम हैं।”