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CM सैनी का उपहार: महिलाओं के लिए दूसरी किस्त जारी, फिर जमा हुए ₹2100 – जानें क्या है नया ऐलान

चंढीगढ़  हरियाणा के सीएम नायब सैनी आज लाडो लक्ष्मी योजना की दूसरी किस्त जारी कर दी है। नायब सैनी ने इस दौरान कहा कि इस योजना के तहत 7 लाख 1 हजार 965 लाभार्थी बहनों के खातों में 2100 रुपए की राशि डाली गई है। साथ ही उन्होंने बताया कि अब महिलाओं के खाते में हर महीने नहीं बल्कि हर 3 महीने के बाद योजना की राशि भेजी जाएगी। नवंबर में आई थी पहली किस्त योजना सितंबर 2025 में योजना लॉन्च हुई और 1 नवंबर को हरियाणा दिवस के मौके पर पहली किस्त जारी की गई। बता दें कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के 109वें जन्मदिवस के अवसर पर लाडो लक्ष्मी ऐप का शुभारंभ किया गया था। इस ऐप पर 30 नवंबर तक 9 लाख 552 महिलाओं ने आवेदन किया, जिनमें से 7 लाख 1 हजार 965 महिलाएं पात्र पाई गई। 5 लाख 58 हजार 346 महिलाओं ने अपना आधार KYC पूरा किया। 1 लाख 43 हजार 619 महिलाओं का अभी वेरिफिकेशन पेंडिंग है।

गोलीकांड के आरोपी के ठिकाने पर निगम की कार्रवाई, पुलिस सुरक्षा में बुलडोजर ने तोड़ा कब्जा

दुर्ग  भिलाई के गुरुघासीदास नगर में 14 नवंबर को इवेंट ऑर्गनाइजर विकास प्रजापति पर गोली चलवाने के मामले में आरोपी करण साव के अवैध कब्जे पर आज निगम ने बुलडोजर चला दिया। आरोपी पिछले 10 सालों से अवैध भूमि पर निर्माण कर टेंट हाउस का संचालन कर रहा था। आज सुबह-सुबह डीएसपी क्राइम और दो थाना प्रभारियों की मौजूदगी में भारी पुलिस बल के साथ निगम की तोडू दस्ते ने संतोषीपारा कैंप-2 पहुंचकर कार्रवाई की। इधर निगम आयुक्त राजीव पांडेय स्वयं मौके पर मौजूद रहे और अवैध कब्जा हटवाया। आयुक्त का कहना है कि समृद्धि बाजार के इस एरिया में प्रधानमंत्री आवास के लिए जमीन चिन्हांकित की गई है और यहां जमीन पर हुए अवैध कब्जाधारियों को कई बार नोटिस भी दिया गया। यह पूरी कार्रवाई अंतिम नोटिस के बाद की गई है। वहीं टेंट हाउस संचालक को पहले ही कार्रवाई का अंदाज़ा था, इसलिए सारा सामान पहले ही हटा लिया था। इधर आरोपी करण साव के भाई सूरज साव का कहना है कि निगम ने जानबूझकर केवल उनके मकान को ही टारगेट किया है। उनके मोहल्ले में और भी कई अवैध मकान हैं, जिन पर निगम का बुलडोजर नहीं चला। उसने कहा कि उनके परिवार के लोगों ने अपराध किया है तो वे सभी जेल में हैं और उन पर कार्रवाई भी की गई, लेकिन इस तरह परिवार की रोज़ीरोटी को खत्म करना सही नहीं है। आपको बता दें कि करण साव ने अपने भाई शिवम साव की हत्या में शामिल और जेल की सजा काटकर छूटे विकास प्रजापति पर झारखंड से 3 शूटर बुलाकर जान से मारने की कोशिश की थी, लेकिन निशाना चूक गया। जिसके बाद जामुल थाने में मामला दर्ज कर 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।

लोको पायलटों का संघर्ष: भूखे-प्यासे ट्रेन संचालन, 10 प्रमुख मांगों के लिए हड़ताल

भोपाल  रेलगाड़ी चलाने वाले ड्राइवर यानि लोको पायलट बिना कुछ खाए पिए ट्रेन चला रहे हैं। ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन के आह्वान पर यह हड़ताल 2 दिसंबर सुबह 10 बजे से शुरू हुई है, जो कि 4 दिसंबर सुबह 10 बजे तक चलेगी। इसके तहत देशभर में 1 लाख 20 हजार लोको रनिंग स्टाफ बिना भोजन के ड्यूटी पर है। इस हड़ताल में लोको पायलट और सहायक लोको पायलट शामिल हैं, जिनकी 10 सूत्रीय मांग है। मध्य प्रदेश में यह आंदोलन भोपाल, इटारसी, कटनी, जबलपुर, सतना, सागर, बीना, गुना, कोटा और गंगापुरसिटी की क्रू लॉबी में शुरू हो गया है। 12-16 घंटे करनी पड़ी रही ड्यूटी लोको पायलट की मांग है कि उन्हें वर्षों से केवल आश्वासन मिल रहा है। दबाव के साथ लंबी ड्यूटी और लगातार मानसिक दबाव में ट्रेनें चलानी पड़ रही हैं। वहीं, लोको पायलटों का कहना है कि नियम 9 घंटे ड्यूटी का है, इसके बावजूद 12 से 16 घंटे तक लगातार संचालन करवाया जा रहा है। कई बार 72 से 104 घंटे तक मुख्यालय से बाहर रहना पड़ता है। इंजनों में शौचालय-यूरिनल की सुविधा नहीं है। लोको पायलट की यह हैं मांगें लगातार दो रात से ज्यादा नाइट ड्यूटी न कराई जाए। 36 घंटे के भीतर मुख्यालय वापसी सुनिश्चित की जाए। किलोमीटर भत्ते का 70% आयकर मुक्त किया जाए। ट्रैवलिंग अलाउंस (टीए) में 25% बढ़ोतरी के अनुपात में माइलेज भत्ते में वृद्धि की जाए। आवधिक विश्राम 46 घंटे (16+30) सुनिश्चित किया जाए। मेल-एक्सप्रेस में अधिकतम 6 घंटे और मालगाड़ी में 8 घंटे ड्यूटी का नियम लागू हो। एनपीएस बंद कर पुरानी पेंशन योजना लागू की जाए। महिला रनिंग स्टाफ की सुरक्षा और समस्याओं पर विशेष उपाय। हालांकि इन वजहों से ट्रेनों की परिचालन पर कोई असर नहीं हुआ है। अगर रेलवे की तरफ से उनकी समस्याएं नहीं सुनी गई तो आंदोलन और तेज होगा।

सौर ऊर्जा क्रांति के दौर से गुजर रहा है उत्तर प्रदेश

रोशन हुआ उत्तर प्रदेश : सौर ऊर्जा में योगी सरकार की ऐतिहासिक छलांग सौर ऊर्जा क्रांति के दौर से गुजर रहा है उत्तर प्रदेश  ऊर्जा बचत और आर्थिक लाभ का नया अध्याय, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत… लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की सौर ऊर्जा नीति से उत्तर प्रदेश आज ऊर्जा क्रांति के दौर से गुजर रहा है। प्रदेश की कुल सौर ऊर्जा क्षमता अब 1003.64 मेगावाट तक पहुंच चुकी है, जिससे वार्षिक बिजली बिल में औसतन 40 से 60 प्रतिशत तक की बचत होने का अनुमान है। यह बचत बड़े उद्योगों से लेकर ग्रामीण उपभोक्ता तक पहुंच रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट सन्देश है कि विकसित यूपी 2047 विजन के अंतर्गत आने वाले 22 वर्षों में प्रदेश के सभी प्रमुख शहरों को सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जाये। सौर ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी बचत लंबी अवधि में प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगी। वहीं इससे बिजली खपत का भार भी काफी हद तक कम हो जाएगा। रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत… प्रदेश में सौर ऊर्जा के बढ़ते दायरे के साथ लगभग 50 हजार युवाओं को तकनीशियन, इंस्टॉलर और सर्विस स्टाफ के तौर पर प्रत्यक्ष रूप से रोजगार हासिल हुआ। रोजगार के अवसर गांव और कस्बों तक पहुंचे हैं। इसका सकारात्मक परिणाम यह हुआ है कि पलायन में कमी आई है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। इसी के साथ, ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में लोड शेडिंग में कमी दर्ज की जा रही है। पहले जहां बिजली कटौती के कारण छोटे व्यवसायों जैसे मिल, वेल्डिंग और प्रोसेसिंग यूनिट प्रभावित होते थे, वहीं अब इनकी आय में 10 से 15 प्रतिशत तक का सुधार हुआ है। सौर ऊर्जा गांव के प्रगति की एक प्रमुख धुरी बनती दिख रही है।  ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर प्रदेश उत्तर प्रदेश अब ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसमें सौर ऊर्जा की भूमिका को और सशक्त करने के प्रयास जारी हैं। जैसे-जैसे सौर ऊर्जा का दायरा बढ़ेगा वैसे-वैसे परंपरागत बिजली आपूर्ति पर निर्भरता कम होगी और इसका लाभ उद्योग और छोटे व्यवसायों को मिलेगा। योगी आदित्यनाथ सरकार का विश्वास है कि आने वाले वर्षों में सौर ऊर्जा प्रदेश की आर्थिक रीढ़ साबित होगी और उत्तर प्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनाएगी। सूर्य की रोशनी पर आधारित यह परिवर्तन अब कल्पना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर दिखाई देने वाली वास्तविकता है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने ऊर्जा नीति को लोककल्याण और आर्थिक उन्नति के साथ जोड़ा है।  सौर ऊर्जा से संबंधित आंकड़े… – प्रदेश के 2.90 लाख घरों में सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित – कुल 2,600 करोड़ रुपये का अनुदान – सोलर सेक्टर में अब तक 50,000 नए रोजगार सृजित

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्व दिव्यांग दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में भारत की ऋषि परंपरा का किया उल्लेख

शारीरिक बनावट नहीं करती है क्षमता का निर्धारण: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्व दिव्यांग दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में भारत की ऋषि परंपरा का किया उल्लेख भारतीय मनीषा का मानना है कि वास्तविक शक्ति मन, संकल्प और आत्मबल में है, हर व्यक्ति है ईश्वरीय कृति: मुख्यमंत्री लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में दिव्यांग प्रतिभाओं तथा दिव्यांगों के कल्याण हेतु कार्यरत कर्मचारियों व संस्थाओं को किया सम्मानित लखनऊ  उत्तर प्रदेश में विश्व दिव्यांग दिवस 2025 के अंतर्गत आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बात पर बल दिया कि शारीरिक बनावट क्षमता के निर्धारण और लक्ष्यों की प्राप्ति में बाधा नहीं बनती है। बुधवार को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में दिव्यांगजन सशक्तिकरण, छात्रवृत्ति वितरण, सहायक उपकरण प्रदान करने तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के सम्मान के लिए आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की ऋषि परंपरा ने हमेशा हमें इस बात के लिए प्रेरित किया है कि व्यक्ति की शारीरिक बनावट उसकी क्षमता का निर्धारण नहीं करती है। भारतीय मनीषा का मानना है कि वास्तविक शक्ति मन, संकल्प और आत्मबल में है। भारत ही नहीं, पूरी दुनिया ने उस संकल्प शक्ति को, आत्मबल को वास्तविक और व्यावहारिक जीवन में दिव्यांगजन के सामर्थ्य से उद्घाटित होते हुए देखा है। अष्टावक्र गीता का दिया उदाहरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्व दिव्यांग दिवस पर सभी की मंगलकामना करते हुए कहा कि आज देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की भी पावन जयंती है। उनकी स्मृतियों को नमन करते हुए मैं विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उन्होंने कहा कि हमारे यहां एक ग्रंथ है अष्टावक्र गीता जिसे ऋषि अष्टावक्र ने रचा था। उनके बारे में अनेक धारणाएं हैं, और कहते हैं कि विदेह जनक को भी आत्मज्ञान की प्रेरणा उन्होंने दी। मध्यकाल में संत सूरदास इसके उदाहरण हैं। दुनिया में भी अनेक ऐसे उदाहरण हैं जहां दिव्यांगजनों को थोड़ा भी संबल मिला तो उन्होंने अपने सामर्थ्य और अपनी शक्ति से समाज के लिए वह सब कुछ कर दिखाया जिस पर सामान्य जन को सहज विश्वास भी नहीं होता है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन के कल्याण के लिए केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा जो कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, वे एक प्लेटफॉर्म के रूप में आपके लिए अत्यंत उपयोगी हो सकते हैं। उपेक्षा से कुंठित होता है मन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अगर किसी के परिवार में जाने-अनजाने या किसी गलती के कारण कोई बच्चा दिव्यांगता का शिकार होता है तो स्वाभाविक रूप से परिवार और समाज उसे उपेक्षित कर देता है। परिणाम यह होता है कि बचपन में ध्यान न दिए जाने तथा संबल न मिलने के कारण उपेक्षा जीवन भर उसके मन को कुंठित करती है। वह स्वयं को लाचार स्थिति में देखता है, जबकि यदि हम थोड़ा सा संबल दें तो बहुत अच्छे परिणाम सामने आ सकते हैं। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव और चित्रकूट के मंडलायुक्त का दिया उदाहरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार में हमारे खेल और युवा कल्याण विभाग के सचिव स्वयं पैरालंपिक मेडलिस्ट हैं तथा उस टीम का हिस्सा रहे हैं जिसने पैरा ओलंपिक में सर्वाधिक मेडल जीते। चित्रकूट के मंडलायुक्त दृष्टिबाधित हैं, लेकिन मंडलायुक्त के रूप में वहां अपनी पूरी क्षमता से कार्य कर रहे हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि हमारी संकल्प शक्ति और आत्मबल ही हमारे सामर्थ्य का वास्तविक पैमाना है। इसी कारण भारत की मनीषा और ऋषि परंपरा ने कभी भी शारीरिक बनावट को व्यक्ति की क्षमता का आधार नहीं माना। हर व्यक्ति है ईश्वरीय कृति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हर व्यक्ति ईश्वरीय कृति है और मनुष्य ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचनाओं में से एक है। यदि हम हर मनुष्य के भीतर ईश्वर का वास मानकर उसके प्रति सद्भाव और सहानुभूति रखें तथा थोड़ा सा संबल दें तो उपेक्षा के भाव से उसे बाहर निकालकर समाज और राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है। दिव्यांगजन की सामर्थ्य और उनकी प्रतिभा से समाज को लाभान्वित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने दिव्यांगजनों के प्रति समाज की दृष्टि बदली है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि शारीरिक रूप से कोई अंग कमजोर हो, लेकिन मानसिक रूप से वह अत्यंत परिपक्व हो। यदि संबल दिया जाए तो वह अपनी क्षमता, शक्ति और आत्मबल के आधार पर समाज और राष्ट्र के लिए अत्यंत उपयोगी बन सकता है। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश सरकार ने पेंशन की राशि को 300 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये कर दिया है। लाभार्थियों की संख्या भी 8 लाख से बढ़ाकर 11 लाख से अधिक कर दी गई है और तकनीक के उपयोग से पारदर्शी व सरल प्रक्रिया के जरिए उन्हें लाभान्वित किया जा रहा है। दिव्यांगजन के लिए अच्छे संस्थान स्थापित किए गए हैं और सहायक उपकरण वितरण की प्रक्रिया को भी व्यापक रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकारी सेवाओं में 4 प्रतिशत तथा शिक्षण संस्थानों में 5 प्रतिशत आरक्षण लागू मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार उत्तर प्रदेश में दिव्यांगजन कल्याण को 2014 के बाद नई गति मिली है। पहले व्हीलचेयर, ट्राईसाइकिल, ब्लाइंड स्टिक और हियरिंग एड प्राप्त करना अत्यंत कठिन था, परंतु एलिम्को, कानपुर और डी.डी.आर.सी. को सक्रिय कर स्थिति में सुधार किया गया। प्रदेश के सभी डी.डी.आर.सी. को पुनर्जीवित किया जा रहा है तथा प्रत्येक कमिश्नरी मुख्यालय पर नए केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए शब्द दिव्यांग ने सम्मान की नई भाषा और नई सोच को देश में स्थापित किया है। सरकारी भवनों, परिवहन और सार्वजनिक स्थलों को बैरियर फ्री बनाया जा रहा है तथा विद्यालयों को सुलभ बनाने का अभियान जारी है। ब्रेल लिपि, साइन लैंग्वेज, रैम्प, छात्रवृत्ति, निःशुल्क प्रशिक्षण, कौशल विकास और रोजगार के साथ ही सरकारी सेवाओं में 4 प्रतिशत तथा शिक्षण संस्थानों में 5 प्रतिशत आरक्षण लागू है। आधुनिक सहायक सामग्रियों के लिए उपलब्ध कराया गया धन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि प्रदेश में यूडीआईडी कार्ड के 16,23,000 से अधिक कार्ड निर्गत किए गए हैं और 19,74,000 से अधिक पंजीकृत हैं। कुष्ठावस्था पेंशन को 2,500 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये किया गया है तथा कृत्रिम अंगों हेतु अनुदान 10,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये किया … Read more

सुबह स्कूल के रास्ते में शिक्षिका की हत्या, अज्ञात बदमाशों ने मारी गोली

अररिया अररिया जिले के नरपतगंज प्रखंड अंतर्गत खाबदा कन्हैली मध्य विद्यालय में पदस्थापित शिक्षिका शिवानी कुमारी (28 वर्ष) की बुधवार सुबह अज्ञात अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। मूल रूप से उत्तर प्रदेश की रहने वाली शिवानी रोज की तरह अपनी स्कूटी से स्कूल जा रही थीं। इसी दौरान सुबह करीब 8:30 बजे, दो बाइक सवार नकाबपोश बदमाशों ने पीछे से उन्हें घेर लिया और कनपटी पर नजदीक से गोली मार दी। गोली लगते ही वे सड़क पर गिर पड़ीं। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और गंभीर रूप से घायल शिक्षिका को तुरंत सदर अस्पताल, अररिया ले जایا गया, लेकिन डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रत्यक्षदर्शी सुधीर यादव ने बताया कि मैं खेत में काम कर रहा था तभी कुछ लोग दौड़ते दिखे। मौके पर पहुंचा तो देखा कि मैडम खून से लथपथ पड़ी थीं। उन्हें अस्पताल ले गए, लेकिन बचाया नहीं जा सका। ग्रामीणों के अनुसार हमलावर दो नकाबपोश युवक थे, जो घटना के बाद तुरंत बाइक से फरार हो गए। मृतका कुछ महीने पहले ही इस स्कूल में नियोजित शिक्षिका के रूप में पदस्थापित हुई थीं। वे उत्तर प्रदेश के एक जिले की निवासी थीं और नरपतगंज में किराए के मकान में रहकर नौकरी कर रही थीं।

लंबे इंतज़ार के बाद बिल पास—राष्ट्रपति की हरी झंडी से पंजाब सरकार को सशक्तीकरण

चंडीगढ़  पंजाब विधानसभा से पास हुए पंजाब पशु चारा, कंसंट्रेटस और मिनरल मिक्सचर बिल-2018 को सात साल बाद राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी है। जिसके बाद अब पंजाब सरकार राज्य में जानवरों को दिए जाने वाले चारे की क्वालिटी पर नजर रखेगी ताकि जानवरों को संतुलित चारा दिया जा सके। इस बिल के कानूनी होने से राज्य सरकार अब जानवरों को दिए जाने वाले चारे की क्वालिटी पर नजर रख सकेगी और खराब क्वालिटी का चारा बनाने वालों के खिलाफ जरूरी कार्रवाई भी कर सकेगी। जानकारी के मुताबिक, 2018 में पंजाब में उस समय की कांग्रेस सरकार ने जानवरों की सेहत और प्रोडक्शन को बेहतर बनाने और चारे की क्वालिटी बढ़ाने के लिए विधानसभा में पंजाब पशु चारा, कंसंट्रेट और मिनरल मिक्सचर बिल-2018 पास किया था। विधानसभा से बिल पास होने के बाद, उस समय के कानूनी सलाहकारों ने मंज़ूरी देने से मना कर दिया था और इसे सलाह के लिए राष्ट्रपति के पास भेजने का दावा किया था, जिसके बाद साल 2019 में यह बिल राष्ट्रपति के पास भेजा गया था, जिसे सात साल के लंबे गैप के बाद मंजूरी मिली है। दूसरी ओर, पंजाब के पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव राहुल भंडारी ने कहा कि वह जानवरों के चारे की क्वालिटी सुधारने के लिए बिल का मुद्दा लंबे समय से केंद्र के सामने उठा रहे थे। काफी सोच-विचार के बाद बिल को मंजूरी दी गई है। पंजाब पशु चारा, कंसन्ट्रेट और मिनरल मिक्सचर बिल-2018 के कानूनी तौर पर लागू होने से राज्य में डेयरी फार्मिंग सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा। इस बिल से जानवरों के चारे की क्वालिटी सुधरेगी और दूध का प्रोडक्शन बढ़ेगा। खेती के अलावा दूसरे बिजनेस से भी गांव वालों की इनकम बढ़ेगी। सूत्रों के मुताबिक, इस बिल से राज्य में 25 लाख मवेशियों और 40 लाख भैंसों को दिए जाने वाले चारे की क्वालिटी सुधरेगी। इससे राज्य के लगभग दो हजार पशु चारा उत्पादकों द्वारा बनाए गए चारे की क्वालिटी की निगरानी के लिए नियम और कानून बनाने में मदद मिलेगी।

न्यूज़ीलैंड की जोरदार बढ़त: जैकब डफी का ‘पंजा’, विंडीज़ पहली पारी में ढही

नई दिल्ली  क्राइस्टचर्च के हेग्ले ओवल में न्यूजीलैंड और वेस्टइंडीज के बीच जारी 3 मैचों की टेस्ट सीरीज के पहले मुकाबले के दो दिन का खेल समाप्त हो चुका है। दो दिन के खेल के बाद मेजबान न्यूजीलैंड की टीम ड्राइविंग सीट पर है। वेस्टइंडीज के खिलाफ कीवी टीम 231 रन पर ढेर जरूर हो गई थी, लेकिन कैरेबियाई टीम को अच्छी शुरुआत के बावजूद न्यूजीलैंड की टीम ने 167 रनों पर रोक दिया। इस तरह न्यूजीलैंड ने इस मैच में 64 रनों की बेसकीमती बढ़त हासिल कर ली थी। वेस्टइंडीज के खिलाफ पेसर जैकब डफी का कहर देखने को मिला, जिन्होंने 5 विकेट अपने नाम किए।   इस मुकाबले में वेस्टइंडीज की टीम के कप्तान रोस्टन चेज ने टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनी थी। कप्तान का ये फैसला काफी हद तक सही साबित भी हुआ था, क्योंकि मेजबान टीम पहली पारी में 231 रनों पर ढेर हो गई थी। कीवी टीम के लिए केन विलियमसन ने 52 रनों की पारी खेली थी, जबकि 47 रन माइकल ब्रेसवेल ने बनाए थे। 29 रन टॉम ब्लंडेल के बल्ले से निकले थे। वेस्टइंडीज की तरफ से केमार रोच, जेडेन सील्स, ओजाय शील्ड्स और जस्टिन ग्रीव्स ने दो-दो विकेट निकाले थे। एक-एक सफलता रोस्टन चेज और जोहनन लहाने को मिली। वहीं, जब कैरेबियाई टीम बल्लेबाजी करने उतरी तो 10 रन पर 2 विकेट गिर गए थे। हालांकि, तीसरे विकेट के लिए 90 रनों की साझेदारी हुई, लेकिन इसके बाद विकेटों का पतझड़ शुरू हो गया और 67 रनों के भीतर 8 विकेट वेस्टइंडीज ने खो दिए। शाई होप ने 56 और तेजनारायण चंद्रपॉल ने 52 रनों की पारी खेली। दो और बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा छूने में सफल हुए, लेकिन बाकी के बल्लेबाजों ने निराश किया। वेस्टइंडीज के लिए 5 विकेट जैकब डफी, 3 विकेट मैट हेनरी और 2 विकेट जैकरी फॉल्क्स ने चटकाए। न्यूजीलैंड की दूसरी पारी शुरू हो गई है और 32 रन बिना कोई विकेट खोए बना लिए हैं। बढ़त 96 रनों की हो चुकी है। कप्तान टॉम लैथम 14 और डेवन कॉनवे 15 रन बनाकर नाबाद हैं। अगर वेस्टइंडीज की टीम ने कीवी टीम को जल्दी नहीं रोका तो फिर मैच कैरेबियाई टीम के हाथ से निकल जाएगा।  

SC के हस्तक्षेप का असर: बांग्लादेश से भारत लाई जाएगी सोनाली खातून, केंद्र ने दी मंजूरी

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के सामने कहा कि वह गर्भवती सोनाली खातून और उसके 8 वर्षीय बेटे सबीर को मानवीय आधार पर बांग्लादेश से भारत वापस ले आएगी। यह घोषणा सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) सुर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने की। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सोनाली खातून और उसके आठ साल के बच्चे को मानवीय आधार पर भारत में प्रवेश की अनुमति दे दी। साथ ही शीर्ष अदालत ने बीरभूम के सीएमओ को महिला को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने और पश्चिम बंगाल सरकार को बच्चे की देखभाल करने का निर्देश दिया है।   मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा- मानवीय आधार पर सोनाली खातून और उनके पुत्र सबीर को प्रक्रिया का पालन करते हुए भारत लाया जाएगा। यह कदम बिना मेरिट पर हमारे किसी भी तर्क को प्रभावित किए और उन्हें निगरानी में रखने के हमारे अधिकारों को सुरक्षित रखते हुए उठाया जाएगा। यानी केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि इस मामले से अन्य मामले प्रभावित नहीं होंगे और यह महज एक मानवीय आधार पर उठाया गया कदम है। कोर्ट की पूछताछ पर केंद्र का रुख बदला बीते सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा था कि क्या सोनाली और उनके बेटे को मानवीय आधार पर वापस लाया जा सकता है। आज, सरकार से निर्देश लेने के बाद एसजी ने इसकी सहमति दे दी। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि चूंकि सोनाली को दिल्ली से हिरासत में लिया गया था, इसलिए उन्हें पहले दिल्ली ही लाया जाएगा। हालांकि, प्रतिवादियों की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता ने सुझाव दिया कि सोनाली को बीरभूम (पश्चिम बंगाल) स्थित उनके पिता के घर वाले क्षेत्र में भेजना ज्यादा उचित होगा। चिकित्सा सुविधाएं और देखभाल की जिम्मेदारी गर्भावस्था को ध्यान में रखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि वह सोनाली को पूरी तरह मुफ्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराए। साथ ही, राज्य सरकार को उनके बेटे सबीर की देखभाल का भी निर्देश दिया गया। मामला क्या है? यह मामला केंद्र की ओर से दायर उस विशेष अनुमति याचिका (SLP) से जुड़ा है, जिसमें 27 सितंबर को दिए गए कलकत्ता हाई कोर्ट के उस निर्णय को चुनौती दी गई है जिसमें कुछ लोगों को वापस भारत लाने का आदेश दिया गया था। यह निर्णय भोदू शेख द्वारा दायर हैबियस कॉर्पस याचिका पर दिया गया था, जिसमें उन्होंने अपनी बेटी, दामाद और पोते को कोर्ट में पेश करने की मांग की थी। इन लोगों को दिल्ली से उठाकर बांग्लादेश भेज दिया गया था। अन्य चार लोगों की वापसी पर विवाद सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने केंद्र से अन्य चार लोगों को भी वापस लाने पर विचार करने का अनुरोध किया। इसके जवाब में एसजी मेहता ने कहा कि वे बांग्लादेशी हैं और केंद्र का इस पर गंभीर मतभेद है। उन्होंने यह भी आश्चर्य जताया कि राज्य सरकार इस मामले में केवियट डालकर क्यों पेश हो रही है और इन व्यक्तियों की ओर से संरक्षण क्यों मांग रही है। नागरिकता संबंधी टिप्पणी जस्टिस बागची ने कहा कि यदि सोनाली खातून, भोदू शेख (एक भारतीय नागरिक) से जैविक संबंध सिद्ध कर देती हैं, तो वह अपनी भारतीय नागरिकता भी सिद्ध कर सकती हैं। एसजी ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट को संतुष्ट कर देंगे कि ये लोग विदेशी नागरिक हैं। उन्होंने यह अनुरोध भी किया कि हाई कोर्ट में दायर अवमानना याचिका की कार्यवाही पर रोक लगाई जाए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में कोई आदेश नहीं दिया। कोर्ट ने केवल इतना कहा कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट के पास लंबित है, तो हाई कोर्ट आगे नहीं बढ़ेगा। मामले की अगली सुनवाई 12 दिसंबर को निर्धारित है।

ममता ने माना वक्फ कानून, अपने ही मंत्री नाराज़; मुस्लिम समाज बोला—अब चुप नहीं बैठेंगे

कोलकाता  राज्य सरकार द्वारा केंद्र के नए वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 को लागू करने की स्वीकृति देने के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मंगलवार को टीएमसी सरकार में मंत्री और जामिया उलेमा-ए-हिंद (पश्चिम बंगाल शाखा) के अध्यक्ष सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि वक्फ की संपत्तियां छीनी गईं, तो मुसलमान चुप नहीं बैठेंगे। सिद्दीकुल्लाह पश्चिम बंगाल के जन शिक्षा विस्तार और पुस्तकालय सेवा मंत्री हैं।   कोलकाता में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में चौधरी ने केंद्र पर तीखा हमला बोलते हुए कहा- एसी कमरे में बैठकर बहुत बातें की जा सकती हैं। लेकिन क्या कोई गांव में जाकर लोगों से कह सकता है कि वक्फ संपत्ति अब उनकी नहीं रही? यह फैसला मुसलमानों पर जबरदस्ती थोपा गया है। हम इसे नेक नीयत से उठाया गया कदम नहीं मानते। मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने महीनों तक इस कानून को लागू करने से इनकार किया था, लेकिन पिछले सप्ताह पश्चिम बंगाल सरकार ने केंद्र के निर्देश मानते हुए राज्य की 82,000 वक्फ संपत्तियों का विवरण 5 दिसंबर तक केंद्र के पोर्टल पर अपलोड करने का आदेश जारी कर दिया।  चौधरी ने कहा- राज्य सरकार पहले कुछ और सोच रही थी। अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कुछ और सोच रही होंगी। वक्फ संपत्तियां बेहद महत्वपूर्ण हैं। आगे क्या होगा, हम नहीं जानते, लेकिन लड़ाई लंबी और कठिन होगी। हमायूं कबीर के बाबरी मस्जिद निर्माण वाले बयान से टीएमसी ने बनाई दूरी इसी बीच टीएमसी ने अपने बागी विधायक हमायूं कबीर से खुद को अलग कर लिया है। कबीर ने 6 दिसंबर- यानी 1992 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने की बरसी पर मुर्शिदाबाद में मस्जिद की आधारशिला रखने की घोषणा की थी। चौधरी ने कहा कि यह कदम बेहद संवेदनशील है और इससे अवांछित तनाव पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा- एक राजनीतिक नेता ने ऐसी बातें कही हैं, जिससे लोगों के मन में कई सवाल उठे हैं। हम कोई भी काम बिना सोचे-समझे नहीं करते। मस्जिद एक पवित्र स्थान है, राजनीति का माध्यम नहीं। उन्होंने इस घोषणा के पीछे षड्यंत्र की आशंका भी जताई- सोशल मीडिया पर जिस तरह इसे प्रस्तुत किया जा रहा है, उससे लगता है कि 6 दिसंबर को बंगाल में कोई बड़ा विस्फोटक माहौल तैयार करने की कोशिश हो रही है। यह मुस्लिम समुदाय के हित में नहीं है। मस्जिद राजनीति के लिए नहीं होती। राजनीतिक तापमान बढ़ा वक्फ संशोधन अधिनियम को लेकर राज्य सरकार और केंद्र के बीच महीनों चली खींचतान के बाद टीएमसी के भीतर भी असहमति और सियासी तनाव बढ़ता दिख रहा है। 6 दिसंबर के संवेदनशील दिन के मद्देनज़र सुरक्षा एजेंसियां भी हालात पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।