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धान की खरीद में पारदर्शिता और बढ़ी सुविधा : भागीरथी साहू

रायपुर, तकनीक.आधारित सुशासन का सीधा लाभ किसानों को मिल रहा है, जिससे धान जैसी फसलों की खरीद में पारदर्शिता और सुविधा बढ़ी है। श्तुंहर टोकन, ऐप जैसी पहलों से घर बैठे टोकन मिल रहा है, जिससे समितियों के चक्कर लगाने और समय बर्बाद होने की समस्या खत्म हो गई है। धमतरी जिले के भटगांव के किसान भागीरथी साहू इसका जीवंत उदाहरण हैं। पहले जहाँ धान विक्रय के दौरान घंटों लंबी कतारों में लगना पड़ता था, वहीं इस वर्ष राज्य सरकार द्वारा शुरू किए गए “टोकन तुहर हाथ” मोबाइल एप ने पूरी प्रक्रिया ही बदल दी है। खेती-किसानी को बेहतर बनाने में करेंगे प्राप्त धन राशि का उपयोग साहू ने अपने घर से ही कुछ ही मिनटों में ऑनलाइन टोकन प्राप्त किया। न भीड़ का तनाव, न इंतज़ार, सिर्फ मोबाइल पर कुछ क्लिक और टोकन तुरंत उपलब्ध। वे बताते हैं “व्यवस्था पूरी तरह सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक है। टोकन भी आसानी से कट गया और धान बेचने में बिल्कुल भी परेशानी नहीं हुई।”  इस वर्ष उन्होंने सहकारी समिति केंद्र सोरम में 20 क्विंटल 60 किलो धान विक्रय किया। वे बताते हैं कि पिछले वर्ष भी उन्होंने लगभग इतनी ही मात्रा में धान बेचा था। प्राप्त धनराशि का उपयोग वे परिवार की आवश्यकताओं और खेती-किसानी को बेहतर बनाने में करते हैं। किसान को सुविधा अनुसार तारीख और समय चुनने का अधिकार राज्य सरकार का उद्देश्य तकनीक की मदद से किसानों के समय, ऊर्जा और संसाधनों की बचत सुनिश्चित करना है। ऐप के माध्यम से टोकन लेने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है, किसान स्वयं अपनी सुविधा के अनुसार तारीख और समय चुन सकते हैं। इससे केन्द्रों में होने वाली अनावश्यक भीड़ पूरी तरह खत्म हो गई है। ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव साहू जैसे किसान न केवल इस व्यवस्था का लाभ उठा रहे हैं, बल्कि गाँव के अन्य किसानों को भी ऐप का उपयोग करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। आधुनिक तकनीक और पारदर्शी प्रशासन का यह समन्वय ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। सरकारी नवाचारों की ऐसी सफल पहल यह सिद्ध करती है कि सही दिशा में उठाया गया एक कदम, किसान की पूरी व्यवस्था को अधिक सरल, सुरक्षित और सुगम बना सकता है।

CM की स्पीड पर जीतू का वार—आधे घंटे में बजट समीक्षा! क्या वाकई सुपरकंप्यूटर जैसी क्षमता?

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव की विभागीय समीक्षाओं पर तीखा तंज कसा है। पटवारी ने कहा कि भगवान ने CM को सद्बुद्धि दी कि “समीक्षा भी कोई शब्द होता है” और अब उन्होंने इसे अपनी डिक्शनरी में शामिल किया है। लेकिन आधे घंटे में हजारों करोड़ के बजट की समीक्षा कर देना “जनता को गुमराह करने की प्रक्रिया” है। पटवारी ने आरोप लगाया कि तीन लाख करोड़ से ज्यादा के बजट की समीक्षा CM आधे-आधे घंटे में कर रहे है। ये तो सुपर कंप्यूटर से भी तेज दिमाग है। शिक्षा विभाग के 37 हजार करोड़, स्वास्थ्य विभाग के 62 हजार करोड़ की आधे घंटे में समीक्षा,ये कैसे संभव है? ये समीक्षा नहीं, महज इवेंट और लीपापोती है। उन्होंने प्रधानमंत्री से भी आग्रह किया कि पूरे देश के मुख्यमंत्रियों की ट्रेनिंग मोहन यादव से करवा दो, क्योंकि इतनी तेज समीक्षा कोई और नहीं कर सकता। कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि अगर कोई भी मंत्री अपने विभाग को ईमानदार बता दे, तो वे उसका पूरा हिसाब-किताब उठाकर सीधे मुख्यमंत्री के पास पहुंच जाएंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि CM ऑफिस में एक अलग विभाग बनाया जाए, जो हर मंत्रालय की गहराई से समीक्षा करे। क्या खोया-क्या पाया, कितना बजट खर्च हुआ, करप्शन क्यों बढ़ रहा है और इसे कैसे रोका जाए।   अंत में पटवारी ने कहा कि समीक्षा अच्छी बात है, लेकिन एक-एक विभाग पर कम से कम 2–5 घंटे का समय लगेगा। आधे घंटे में समीक्षा संभव नहीं। अगर हो रही है, तो सिर्फ दिखावा है। लीपा पोती है।  

कैंट बोर्ड स्कूलों में नई व्यवस्था: पारंपरिक हाज़िरी की जगह आएगा आधुनिक सिस्टम

अंबाला  अंबाला कैंटोनमेंट बोर्ड के स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर लगातार कवायद की जा रही है। बच्चों को स्कूल में बेहतर शिक्षा के साथ-साथ बेहतर माहौल मिले, इसके प्रयास बोर्ड द्वारा किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में अब स्कूलों में फेस रिकग्निशन कैमरे के साथ बायोमीट्रिक हाजिरी लगेगी। इसके लिए मशीनों को कक्षाओं के बाहर लगाया गया है। कक्षा में प्रवेश से पहले ही छात्र अपनी हाजिरी लगा सकेंगे, इससे शिक्षकों के समय की बचत होगी और हर छात्र पर स्मार्ट तरीके से निगरानी रहेगी।  स्कूलों में होने वाले फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी यह सुविधा तोपखाना परेड के स्कूल में प्राथमिक चरण में शुरु की गई है, यहां पांच मशीनें लगा दी गई हैं, जल्द ही अन्य पांच मशीनों को भी कक्षाओं के बाहर स्थापित कर दिया जाएगा। विद्यालय से बाहर रहने पर एप से हाजिरी नहीं लगेगी, इससे स्कूलों में होने वाले फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी, बल्कि विद्यालय में छात्रों व शिक्षकों की उपस्थिति बढ़ने के साथ शैक्षणिक माहौल में भी सुधार होगा। ऐसी कुछ शिकायतें पूर्व में भी बोर्ड अधिकारियों के पास पहुंची थी कि शिक्षक एक दिन पहले ही रजिस्टर में सुबह व शाम की हाजिरी लगा लेते हैं। इससे स्कूल की शिक्षा के स्तर पर असर पड़ता है, अगर कोई दूसरा शिक्षक इस संबंध में शिकायत करता था तो उसके साथ मनमुटाव रखा जाता था। पायलट प्रोजेक्ट के तहत कैंटोनमेंट बोर्ड ने अभी अपने अधीनस्थ एक स्कूल में इस सुविधा को शुरु किया है। इसके बाद यह सुविधा बोर्ड के अधीन पांच स्कूलों में भी शुरु की जाएगी। मौजूदा समय में कैंटोनमेंट बोर्ड के अधीन छह स्कूलों मे 2598 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनमें तोपखाना परेड के आरएचए बाजार स्थित सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 1012 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इसी प्रकार आरएचए बाजार के प्राइमरी स्कूल में 267 बच्चे, बीसी बाजार के मिडिल स्कूल में 281 बच्चे, बीआई बाजार के हाई स्कूल में 396 बच्चे, रुट्स पब्लिक स्कूल में 514 बच्चे और वात्सल्य स्कूल में 128 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। अंबाला कैंटोनमेंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य अजय बवेजा ने कहा स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए यह एक अच्छा प्रयास है, इससे बच्चों की वास्तविक स्थिति का पता चलेगा और शिक्षक भी सौहार्दपूर्ण माहौल में बच्चों को शिक्षा प्रदान कर सकेंगे।

रील बनाने वालों के लिए बड़ा अपडेट: Instagram हैशटैग्स को लेकर क्यों है सतर्क

नई दिल्ली  इंस्टाग्राम  पर रील बनाने वाले सावधान हो जाएं। दरअसल, हम लोग इंस्टाग्राम पर रील या फोटो शेयर करते वक्त काफी सारे हैशटैग्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अब हम ज्यादा हैशटैग्स का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। यह अभी सिर्फ टेस्टिंग फेज में है बता दें कि एक पोस्ट में 30 हैशटैग लगाने की छूट थी, लेकिन DroidApp की एक रिपोर्ट के मुताबिक अब आप अपनी पोस्ट में तीन से ज़्यादा हैशटैग लगाने की कोशिश करेंगे तो इंस्टाग्राम उन्हें रोक देगा और तय सीमा से ज़्यादा टैग न डालने का मैसेज स्क्रीन पर दिखाई देगा है। फिलहाल यह बदलाव हर किसी के लिए लागू नहीं हुआ है। यह अभी सिर्फ टेस्टिंग फेज में है। इसका मतलब है कि इंस्टाग्राम अभी चुपचाप कुछ चुनिंदा यूज़र्स के साथ यह प्रयोग कर रहा है। अगर यह फीचर सफल होता है तो… बता दें कि सोशल मीडिया कंपनियां अक्सर कोई बड़ा बदलाव करने से पहले इसी तरह टेस्टिंग करती हैं ताकि यूज़र्स का रिएक्शन समझा जा सके। अगर यह फीचर सफल होता है तो इसे सभी के लिए लॉन्च किया जा सकता है।  

काम की जानकारी न देने वाले इंजीनियर्स अब SIR के काम में मदद करेंगे, कमिश्नर ने शुरू की नई पहल

भोपाल  2015 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा की अफसर ने नई संस्कृति की शुरुआत कर दी है। इस अधिकारी का नाम संस्कृति जैन है और वह नगर निगम भोपाल की आयुक्त हैं। हाल ही में उन्होंने निगम के लापरवाह अधिकारियों पर सख्ती बरतनी शुरू की है। ताजा मामले में उन्होंने भोपाल नगर निगम के कुल 75 असिस्टेंट और सब इंजीनियर को विशेष 'सजा' सुनाते हुए उन्हें बूथ लेवल ऑफिसर बीएलओ का सहायक बना दिया है। काम की जानकारी नहीं दे पाए थे इंजीनियर बता दें कि पिछले दिनों नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने इनसे कार्यों के बारे में पूछा था, तब यह काम के बारे में जानकारी नहीं दे सके थे। इस बात से नाराज होकर कमिश्नर ने इन्हें बीएलओ का सहायक बनाते हुए एसआईआर डिजिटाइजेशन का काम सौंप दिया है। आईएएस की इस कार्रवाई की चहुं ओर चर्चा हो रही है। आपको बता दें कि इंजीनियरों को यह अनूठी सजा 4 दिसंबर तक के लिए दी गई है। इस समय कमिश्नर संस्कृति जैन दक्षिण कोरिया प्रवास पर हैं। पहले सिवनी में थी कलेक्टर इस मामले में उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने बताया कि सहायक यंत्री और उप यंत्रियों की विधानसभा वार तैनाती की गई है। वे एसआईआर के काम में जुटे हैं। आपको बता दें कि पिछले दिनों से कलेक्टर के रूप में सिवनी जिले से भोपाल नगर निगम कमिश्नर बनकर आईं हैं। ज्वाइन करने के बाद निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने असिस्टेंट इंजीनियर और सब इंजीनियर से उनके सिविल के काम के बारे में पूछा था। जिसके बारे में 15 दिन में भी जवाब नहीं मिला। इस बात से कमिश्नर नाराज हो गई और इनकी ड्यूटी विधानसभा के हिसाब से बीएलओ के सहायक के रूप में लगा दी। फिसड्डी बूथों पर लगाई ड्यूटी बता दें कि सभी इंजीनियर को ऐसे बूथ पर तैनात किया गया है, जो परफार्मेंस परफॉरमेंस में फिसड्‌डी के मामले में टॉप-20 है। जो इंजीनियर अपने सिविल के काम सही ढंग से नहीं कर सके हैं, उन्हें बूथ पर एसआईआर का जिम्मा सौंपा गया है।

भोपाल गैस त्रासदी की 41वीं बरसी पर हुई सर्वधर्म प्रार्थना सभा, मंत्री डॉ. शाह ने दिवंगतों को दी श्रद्धांजलि

भोपाल भोपाल गैस त्रासदी की 41वीं बरसी पर भोपाल में बुधवार को गैस राहत मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह की उपस्थिति में आयोजित सर्वधर्म प्रार्थना सभा में दिवंगत गैस पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी गई। विभिन्न धर्मगुरूओं ने धर्मग्रन्थों का पाठ किया और गैस त्रासदी को मानवता के लिए अपूरणीय क्षति बताया। मंत्री डॉ. शाह ने गैस त्रासदी में दिवंगत निर्दोष लोगों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि ऐसी त्रासदी भविष्य में कभी नहीं हो। श्रद्धांजलि सभा में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मती कृष्णा गौर, विधायक  भगवान दास सबनानी, महापौर भोपाल मती मालती राय, अपर मुख्य सचिव  अनुपम राजन, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  संदीप यादव, कलेक्टर भोपाल  कौशलेंद्र सिंह, गणमान्य नागरिक और गैस पीड़ितों के लिए काम करने वाले संगठनो के प्रतिनिधि उपस्थित थे। धर्मगुरुओं में  रमेश त्रिपाठी, भोपाल शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी,  गुरवेज सिंह, फादर अल्फ्रेड डी'सूजा,  अजय जैन, शाक्य पुत्र सागर भंते ने अपने धर्म ग्रंथों का पाठ किया और दिवंगतों को श्रद्धांजलि दी।  

साय सरकार की सौगात: घरेलू उपभोक्ताओं को दोगुना बिजली रियायत का लाभ

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में राज्य के घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को बिजली बिल में रियायत देने के साथ ही अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए – मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान (M-URJA) – राज्य के घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत देने के लिए मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान राज्य में 01 दिसम्बर 2025 से लागू है, जिसके तहत घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को 100 यूनिट से बढ़ाकर अब 200 यूनिट प्रति माह तक बिजली बिल में 50 प्रतिशत छूट का लाभ मिलेगा। यह लाभ 400 यूनिट तक खपत वाले उपभोक्ताओं को भी मिलेगा। राज्य में 200 से 400 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को अगले एक वर्ष तक 200 यूनिट तक, बिजली बिल में 50 प्रतिशत छूट का लाभ मिलेगा, इससे 6 लाख उपभोक्ता लाभान्वित होंगे, ताकि इस अवधि में वे अपने घरों में पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर प्लांट स्थापित करा सके। इस तरह मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान से प्रदेश के 42 लाख उपभोक्ता लाभान्वित होंगे, वहीं प्रधानमंत्री सूर्य घर मुक्त बिजली योजना का लाभ प्रदेश के सभी उपभोक्ताओं को मिलेगा। गौरतलब है कि पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत राज्य शासन की ओर से सब्सिडी दी जा रही है, जिसके तहत 1 किलोवॉट क्षमता के सोलर प्लांट पर 15,000 रुपये तथा 2 किलोवॉट या उससे अधिक क्षमता के प्लांट पर 30,000 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी दी जा रही है। यह व्यवस्था राज्य में सौर ऊर्जा अपनाने को प्रोत्साहित करेगी और आने वाले समय में उपभोक्ताओं को हाफ बिजली से फ्री बिजली की ओर ले जाएगी। छत्तीसगढ़ भण्डार क्रय नियम, 2002 में स्थानीय लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों से क्रय को प्रोत्साहन देने तथा जेम पोर्टल में क्रय की स्पष्टता के लिए संशोधन किए जाने का निर्णय लिया गया। इन संशोधन से क्रय प्रक्रिया का सरलीकरण होगा, पारदर्शिता में वृद्धि होगी, प्रतिस्पर्धा को बढा़वा मिलेगा तथा समय और संसाधनों की बचत होगी। मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) (संशोधन) विधेयक, 2025 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना (नियोजन एवं सेवा की शर्तों का विनियमन) अधिनियम, 2017 (क्र. 21 सन् 2018) में संशोधन हेतु छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना संशोधन विधेयक, 2025 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। जिससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के रिफॉर्म्स और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

दिल्ली की ‘छोटी सरकार’ में बड़ा उलटफेर: बीजेपी की बढ़त से AAP की मुश्किलें बढ़ीं

नई दिल्ली  राजधानी दिल्ली में सर्दी के मौसम में सियासी पारा अचानक चढ़ गया है। एमसीडी उपचुनाव के नतीजे सामने आ गए हैं। इन नतीजों ने दिल्ली की 'छोटी सरकार' यानी एमसीडी का गणित पूरी तरह बदल दिया है। 12 वार्डों पर हुए इस 'मिनी संग्राम' में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए यह साबित कर दिया है कि दिल्ली के स्थानीय मुद्दों पर उनकी पकड़ फिर मजबूत हो रही है। ये जीत बीजेपी के लिए काफी अहम मानी जा रही है। उपचुनाव के नतीजे आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए अच्छे साबित नहीं हुए। 12 सीटों में से बीजेपी ने 7 पर कब्जा जमाया है, जबकि आम आदमी पार्टी केवल 3 सीटों पर सिमट गई । यह नतीजे इसलिए भी चौंकाने वाले हैं क्योंकि 2022 के एमसीडी चुनाव में AAP की लहर थी, लेकिन 2025 के खत्म होते-होते वह लहर अब कमजोर पड़ती दिख रही है।​ सदन का नया 'गणित' इन नतीजों का सबसे बड़ा असर एमसीडी सदन के नंबर गेम पर पड़ा है। आपको याद होगा कि 2022 में बीजेपी 104 सीटों पर रुक गई थी। MCD में कुल 250 सीटें हैं। हालिया विधानसभा चुनावों के बाद कुछ काउंसलरों के विधायक बनने से 12 सीटें खाली हो गई थीं। भले ही एमसीडी में बीजेपी का मेयर है, लेकिन पार्टी अभी भी बहुमत से काफी दूर थी। उपचुनाव होने से पहले तक बीजेपी के कुल 115 और आम आदमी के 99 पार्षद थे। लेकिन अब उपचुनाव की 7 सीटें जीतने और पिछले कुछ समय में हुए सियासी बदलावों के बाद, बीजेपी के पास सदन में 122 पार्षद हो गए हैं ।​ वहीं, 134 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई AAP का आंकड़ा अब घटकर 102 के करीब रह गया है। यानी सदन के भीतर अब बीजेपी 'सबसे बड़ी पार्टी' बनकर उभरी है। कांग्रेस का कैसा रहा प्रदर्शन? इन नतीजों में दो और कहानियां छिपी हैं। कांग्रेस ने संगम विहार जैसी सीट जीतकर अपनी वापसी के संकेत दिए हैं और अपना कुल आंकड़ा 9 पर पहुंचा दिया है।​ लेकिन सबसे बड़ा 'शॉक' दिया है वामपंथी दल ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (AIFB) ने। दिल्ली की राजनीति में जहां लेफ्ट का कोई नामलेवा नहीं बचा था, वहां एक सीट जीतकर उन्होंने सियासी पंडितों को हैरान कर दिया है ।​ मेयर चुनाव पर सस्पेंस भले ही मेयर का चुनाव अभी दूर हो, लेकिन इन आंकड़ों ने भविष्य की पटकथा लिख दी है। 250 सदस्यों वाले सदन में बहुमत का जादुई आंकड़ा 126 है। बीजेपी अब 122 पर खड़ी है, जो बहुमत से सिर्फ 4 कदम दूर है। ऐसे में आने वाले दिनों में एमसीडी की बैठकों में हंगामा और शक्ति प्रदर्शन देखने को मिल सकता है।  

थियेटर में ‘धुरंधर’ देखने की उम्मीद? ये कारण रोक सकते हैं आपकी एंट्री

मुंबई अगर आप फिल्म  ‘धुरंधर’  के इंतजार में है तो ये खास आपके लिए ही है। दरअसल, फिल्म देखने के लिए अब कईयों को एंट्री नहीं मिलेगी। आदित्य धर द्वारा निर्देशित और रणवीर सिंह अभिनीत बहुप्रतीक्षित फिल्म  ‘धुरंधर’ को सेंटरल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने ‘A’ सर्टिफिकेट जारी कर दिया है। बोर्ड की मंजूरी के बाद यह फिल्म अपनी निर्धारित तारीख 5 दिसंबर को ही सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। CBFC ने अपने सर्टिफिकेट में स्पष्ट किया कि फिल्म का विषय काफी डार्क, तीव्र और परिपक्व (मैच्योर) है। साथ ही इसमें दिखाए गए कई हिंसक दृश्यों के कारण इसे केवल 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के दर्शकों के लिए उपयुक्त माना गया है। बोर्ड की वेबसाइट पर फिल्म का रनटाइम, सिनॉप्सिस और अन्य विवरण भी जारी कर दिए गए हैं, जिनमें कुछ आवश्यक कट और बदलाव भी शामिल हैं। 17 साल का रिकॉर्ड टूटा फिल्म को 2 दिसंबर को प्रमाणित किया गया। इसका कुल रनटाइम 214.1 मिनट (3 घंटे 34 मिनट 1 सेकंड) है। इस अवधि के साथ ‘धुरंधर’ पिछले 17 वर्षों में सबसे लंबी बॉलीवुड फिल्म बन गई है। इससे पहले यह रिकॉर्ड अशुतोष गोवारिकर की 2008 में रिलीज हुई फिल्म ‘जोधा अकबर’ (3 घंटे 33 मिनट) के नाम था। फिल्म को प्रमाणन देने से पहले CBFC ने किए कई बदलाव हिन्दी डिस्क्लेमर की आवाज जोड़ना नशा व सिगरेट सेवन के खिलाफ चेतावनियां शामिल करना कुछ दृश्यों में हिंसा की तीव्रता कम करना गालियों को म्यूट करना एक मंत्री के किरदार का नाम बदलना शुरुआती हिंसक दृश्य हटाकर अन्य विजुअल जोड़ना एंड क्रेडिट्स में अतिरिक्त दृश्य और संगीत शामिल करना

यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा भस्म किया गया, पीथमपुर में राख सुरक्षित रूप से दफन

इंदौर  पांच हजार से ज्यादा लोगों को मौत की नींद सुलाने वाले भोपाल की यूनियन कार्बाइड फैक्टरी का 337 टन कचरा तो पीथमपुर के भस्मक में जला दिया गया, लेकिन उसकी राख हमेशा के लिए पीथमपुर में दफन होगी। इसका भविष्य में आसपास के इलाके में क्या असर होगा, यह तो भविष्य में पता चलेगा, लेकिन पंद्रह साल पहले भी 30 टन से ज्यादा राख पीथमपुर में लैंडफिल की गई थी। उस कारण भस्मक के समीप से निकलने वाली नदी का पानी काला हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि उस पानी का उपयोग खेतों में नहीं करते। इससे फसल खराब हो जाती है। कचरा तो भस्म हो गया, लेकिन 900 टन राख उस त्रास्दी की याद दिलाती है। उसका निपटान भी नहीं हो पाया है। 900 टन राख बची कचरा जलाने के बाद पीथमपुर में रामकी कंपनी ने अपने प्लांट में 337 टन जहरीला कचरा छह माह में जलाया। उसके बाद बची राख को बीते पांच माह से कंपनी के परिसर में एक प्लेटफार्म पर रखा गया है। उस राख की भी विशेषज्ञों ने जांच की। राख को दफनाने के लिए एक तालाबनुमा गड्ढा खोदा गया है। बची हुई राख में मर्करी, निकल, जिंक, कोबाल्ट, मैग्जीन सहित अन्य तत्व है, जहां इस कचरे को दफन किया जाना है। उसके आधा किलोमीटर दायरे में आबादी क्षेत्र है। वहां के रहवासी बोरिंगों के पानी का उपयोग नहीं करते है, क्योकि बोरिंग भी दूषित हो चुके है। 900 टन राख के लिए काले रंग की एचडीपीई लाइनर बिछाई जा रही है,ताकि राख मिट्टी के संपर्क में न आए और राख का रिसाव जमीन में न हो। राख दफनाए जाने का मामला कोर्ट में भी है।