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लोहा व्यापारियों पर IT की बड़ी कार्रवाई: रायपुर और आसपास के जिलों में रेड, घर-दफ्तर-प्लांट सभी जांच में

रायपुर  रायपुर में आयकर विभाग ने बड़े पैमाने पर छापेमार कार्रवाई की है। आयकर विभाग के निशाने पर इस बार प्रदेश के लोहा कारोबारी हैं। टीम ने हिंदुस्तान क्लाइव के संचालकों के घर, दफ़्तर और प्लांट सहित 40 से 50 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी गई है। कार्रवाई गुरूवार अलसुबह शुरू हुई। इनके यहां छापा आयकर विभाग ने जिन जगहों पर कार्रवाई की है उनमें ओम स्पंज, देवी स्पंज और हिंदुस्तान क्वाइल शामिल हैं। आयकर की टीम संचालकों के घर-दफ्तर, प्लांट पर स्टॉक, सहित आय-व्यय की जांच कर रही हैं। इसके साथ ही इन उद्योगपतियों से जुड़े जमीन कारोबारियों के ठिकानों पर भी छापे की कार्रवाई की जा रही है। आयकर विभाग के अधिकारियों ने उनके घरों, कार्यालयों और प्लांटों में सर्च ऑपरेशन चलाया जहां से अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डेटा की जांच की जा रही है। इसके अलावा कुछ और कारोबारियों से जुड़े लोगों के ठिकानों पर भी छापेमारी की गई है जिससे यह मामला और भी बड़ा प्रतीत हो रहा है। जानकारी के अनुसार, आयकर विभाग की यह कार्रवाई बड़े वित्तीय लेन-देन और दस्तावेजों की जांच के उद्देश्य से की जा रही है। अधिकारियों ने संबंधित कंपनियों के दफ्तरों, फैक्ट्रियों और आवासीय परिसरों में जांच शुरू कर दी है। दो महीने पहले भी छत्तीसगढ़ में बड़ी रेड की गई थी, जब प्रवर्तन निदेशालय ने रायपुर, बिलासपुर और धमतरी में कई कारोबारियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। ईडी की उस कार्रवाई को कस्टम मिलिंग घोटाले से जुड़ा बताया गया था। आरोप था कि घोटाले की रकम से प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त की गई है। उस दौरान ईडी ने रायपुर में रहेजा ग्रुप और बिलासपुर में सुल्तानिया ग्रुप के मीनाक्षी सेल्स से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, मामला वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित था। आयकर विभाग की मौजूदा कार्रवाई को भी इसी श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जांच अभी जारी है और अधिकारियों द्वारा बरामद दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है।

माओवादी मुठभेड़ में बड़ा धक्का: बीजापुर के जंगल में 18 शव मिले, अभी पहचान शेष

बीजापुर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के जंगल में मारे गए नक्सलियों की संख्या 18 हो गई है. इन सभी के शवों को सुरक्षा बलों ने बरामद कर लिया है. आसपास के इलाके की सर्चिंग अभी जारी है. इन सभी नक्सलियों के शवों की पहचान भी पुलिस कर रही है. पहचान होने के बाद एसपी नामों का खुलासा करेंगे. इधर इस मुठभेड़ में शहीद हुए जवानों के पार्थिव शरीर को भी बीजापुर लाया गया. जहां उन्हें श्रद्धांजलि दी गई है.  दरअसल बुधवार को बीजापुर जिले के केशकुतुल के जंगल में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी. इसमें पहले तो मारे गए नक्सलियों की संख्या 12 बताई जा रही थी. लेकिन जब इलाके में सुरक्षा बलों ने सर्चिंग की तो 18 नक्सलियों के शव यहां से  बरामद हुए. इतनी बड़ी संख्या में एक साथ नक्सलियों का एनकाउंटर पुलिस की फिर से बड़ी उपलब्धि है. इन सभी शवों की पहचान की जा रही है.  छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बीजापुर मुठभेड़ में शहीद होने वाले तीन जवानों को श्रद्धांजलि दी है। गुरुवार को राजधानी रायपुर से बिलासपुर के लिए रवाना होने से पहले उन्होंने मीडिया से बात की। इस दौरान सीएम साय ने नक्सल मुठभेड़ में मिली सफलता और जवानों की शहादत पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि लगातार ऑपरेशन हो रहे हैं। हमारे जवान मजबूती के साथ नक्सलवाद के खिलाफ लड़ रहे हैं।  सीएम साय ने कहा, "कल ऑपरेशन में डीआरजी के तीन जवान शहीद हुए। हम उनको विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, उनके साहस को नमन करते हैं। भगवान उनके परिवार को इस शोक को सहने की  शक्ति प्रदान करें। ऐसी प्रार्थना करते हैं और बड़ी सफलता मिली है।" रात भर चली मुठभेड़, 6 और माओवादी मारे गए रात भर चली मुठभेड़ के बाद छह और माओवादी मारे गए हैं। मारे गए 18 माओवादियों के शव के पास से मिले एके–47, एसएलआर, इंसास, एलएमजी और .303 राइफल सहित भारी मात्रा में हथियार व गोला-बारूद मिले हैं। इन हथियारों को लेकर जवान मुख्यालय की ओर लौट रहे हैं। मारे गए माओवादियों के शवों की औपचारिक पहचान की प्रक्रिया जारी है। डीआरजी के तीन जवान बलिदान बता दें कि इस भीषण मुठभेड़ में डीआरजी के तीन जवान प्रधान आरक्षक मोनू बड़डी, आरक्षक दुकारू गोंडे और जवान रमेश सोड़ी बलिदान हुए हैं। दो घायल जवानों की स्थिति खतरे से बाहर बताई गई है। इधर, बीजापुर पुलिस लाइन में माहौल भावुक है। बलिदान जवानों को अंतिम सलामी देने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लाइन में पहुंच चुके हैं। सर्च ऑपरेशन अभी भी क्षेत्र में जारी है और अतिरिक्त बल तैनात कर पूरे इलाके सुरक्षित कर लिया गया है। इस इलाके को कहा जाता रहा है माओवादियों की राजधानी उत्तर बस्तर माड़ का इलाका माओवादियों का सबसे सुरक्षित किला रहा है। इसे उनकी राजधानी भी कहा जाता रहा है। इसके बाद पश्चिम बस्तर में इंद्रावती रिजर्व टाइगर एरिया तथा सीमावर्ती घने जंगल भी लंबे समय तक उनके लिए सुरक्षित ठिकाने रहे हैं। अब केंद्र सरकार के मार्च 2026 तक माओवादियों के समूल खात्मे के संकल्प के बीच सुरक्षा बलों के निर्णायक आक्रामक अभियान ने माओवादियों का आखरी किला भी ढहा दिया है। बस्तर में वर्ष 2025 में 255 माओवादी मारे गए बीजापुर से सुकमा-आंध्र व दंतेवाड़ा के सरहदी जंगलों में तगड़ी घेरेबंदी के चलते भूमिगत माओवादी जवानों का निशाना बन रहे हैं। बुधवार को दंतेवाड़ा सीमा पर केशकुतूल में हुई मुठभेड़ में बड़े काडर के माओवादी ढेर हुए हैं। माओवाद विरोधी अभियान के दौरान संगठन के शीर्ष नेताओं समेत दुर्दात कमांडर हिडमा के मारे जाने के बाद माओवादी संगठन रेत की तरह बिखरने लगा है। बस्तर में वर्ष 2025 में 255 माओवादी मारे गए, इनमें 236 माओवादियों के शव मिले। 2024 में 239 माओवादी मारे गए थे 2024 में 239 माओवादी मारे गए थे, जिनमें 217 के शव मिले थे। दो वर्ष में 494 माओवादी मारे गए। जिनमें 453 के शव मिले। अन्य माओवादियों के मारे जाने की पुष्टि माओवादियों ने अपने पत्र में की है। बड़ी संख्या में पीएलजीए समेत आनुसांगिक संगठनों से जुड़े माओवादी हथियार समेत पुनर्वास कर रहे हैं। वहीं शेष बचे जान बचाने माओवादी माड़ के गलियारे से आंध्र की ओर भागने की फिराक में हैं, लेकिन सुरक्षा बलों के तगड़ी घेराबंदी के चलते वे बस्तर से नहीं निकल पा रहे हैं। वर्ष 2025 में मिली बड़ी सफलताएं     31 माआवादी मारे गए कर्रेगुट्टा अभियान में।     31 माओवादी मारे गए 09 फरवरी को बीजापुर में     26 माओवादी मारे गए 20 मार्च को बीजापुर में।     17 माओवादी मारे गए 29 मार्च को सुकमा में।     18 माआवादी मारे गए 16 जनवरी को बीजापुर में। शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि  बीजापुर में माओवादी विरोधी अभियान के दौरान नक्सलियों से हुई मुठभेड़ में DRG के तीन जवान प्रधान आरक्षक मोनू मोहन बड़डी, शहीद आरक्षक दुकारू गोंडे और  जवान रमेश सोड़ी   बहादुरी से लड़ते हुए वीरगति प्राप्त हुए हैं. इन जवानों को अंतिम सलामी बीजापुर–गंगालूर मार्ग पर स्थित  पुलिस लाइन शहीद वाटिका परिसर में श्रद्धांजलि दी गई.  मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य गृहमंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का वादा किया है। इसी वजह से सुरक्षाबल लगातार नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन कर रहे हैं। राज्य और केंद्र सरकारों ने नक्सलियों के पुनर्वास के लिए कई योजनाएं भी बनाई हैं, जिसके कारण बड़े पैमाने पर नक्सली सरेंडर कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में साल 2025 में हुए मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों की संख्या करीब 275 पहुंच गई है। बीजापुर समेत सात जिलों वाले बस्तर क्षेत्र में 246 नक्सली मारे गए हैं। 27 नक्सली रायपुर क्षेत्र के गरियाबंद में और दुर्ग क्षेत्र के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में 2 नक्सली मारे गए हैं।

झीलों की नगरी भोपाल में शिकारा का आनंद, बड़े तालाब में मिलेगा कश्मीर वाला नज़ारा

भोपाल  बड़े तालाब में अब डल झील वाला आनंद मिलेगा। झीलों की नगरी भोपाल में अब आप शिकारा का लुत्फ उठा सकते हैं। इसकी शुरुआत आज से हो गई है। अभी बड़े तालाब में 20 शिकारा को उतारा गया है। इसे दुल्हन की तरह सजाया भी गया है। उद्घाटन के बाद सीएम मोहन यादव ने भी इसका आनंद उठाया है। शिकार में मौजूद रहेंगी सारी सुविधाएं कश्मीर की तरह बड़े तालाब में चलने वालीं शिकारा नाव में भी सारी सुविधाएं मौजूद होंगी। पर्यटकों को शिकारा में खाने पीने की चीजें भी मिलेंगी। सीएम ने मोहन यादव ने शिकारा-बोट रेस्टोरेंट से चाय, पोहा, समोसे और फलों का नाश्ता लेकर जायके का आनंद उठाया। साथ ही भ्रमण के दौरान उन्होंने बोट मार्केट से कपड़ों की खरीदी भी की है। सीएम मोहन यादव ने कहा कि इससे वाटर-टूरिज्म और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, इसके जल संपर्क से किसी भी प्रकार का प्रदूषण नहीं होगा। अत्याधुनिक तकनीक से बनी इन नौकाओं से जल-पर्यटन के लिए अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और आकर्षक बनाया गया है। सीएम मोहन यादव ने कहा कि भोपाल वाटर-टूरिज्म हब के रूप में विकसित होगा। शिकारा राइड के दौरान पर्यटकों के लिए बर्ड वॉचिंग की विशेष व्यवस्था भी की गई है। इसके लिए नावों में दूरबीन उपलब्ध रहेगी। साथ ही यात्रियों के लिए अन्य शिकारों से हस्तशिल्प उत्पाद, ऑर्गेनिक सब्जियां-फ्रूट्स तथा स्थानीय व्यंजन खरीदने और उनका स्वाद लेने की सुविधा भी रहेगी। इससे स्थानीय कलाकारों व उत्पादकों को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। इस शुभारंभ कार्यक्रम में मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। पर्यटन को मिलेगा नया आयाम सीएम मोहन यादव ने कहा कि भोपाल के सबसे सुंदर बड़े तालाब पर शिकारा नावों का शुभारंभ हुआ ,है जिससे यहां के पर्यटन को नया आयाम मिलेगा। डल झील की तर्ज पर शिकारे जब यहां चलेंगे, तो पर्यटकों को एक अलग ही अनुभव मिलेगा। उन्होंने कहा कि देश का केंद्र बिंदु होने की वजह से पर्यटकों का मध्यप्रदेश के प्रति आकर्षण रहता है। प्रदेश में वन्यजीवों की बड़ी संख्या है। पिछले साल देश में सबसे ज्यादा पर्यटन मध्यप्रदेश में हुआ। हमारा पर्यटन सभी क्षेत्रों में बढ़ रहा है। उज्जैन में पिछले साल 7 करोड़ से अधिक पर्यटक आए। उन्होंने कहा कि वन्य संपदा-धार्मिक व्यवस्था-देवस्थान के साथ-साथ अब वॉटर स्पोर्ट्स एक्टिविटी के माध्यम से वॉटर टूरिज्म भी बढ़ेगा। खाने-पीने से लेकर फैशन तक का सामान मिलेगा वहीं, शिकारा बोट पर आपको खाने-पीने से लेकर फैशन तक का सामान मिलेगा। यह भोपाल में पर्यटकों के लिए एक नया अनुभव होगा। प्रदूषण की वजह से झील में चलने वाले क्रूज को पहले रोक दिया गया था। अब शिकारा की शुरुआत हो गई है। 4 लोगों किराया लगेगा 400 रुपए हर शिकारे में चार लोग बैठ सकेंगे और आधे घंटे की सैर के लिए 400 रुपए शुल्क देना होगा। हर एक शिकारा करीब 2.40 लाख रुपए में तैयार हुआ है। शिकारे सुबह 9 बजे से सूर्यास्त तक अवेलेबल रहेंगे। सैर के दौरान नाविक पर्यटकों को बड़े तालाब और भोपाल की विरासत से जुड़ी जानकारी भी देंगे। प्रदूषण रहित तकनीक से निर्माण इन सभी 20 शिकारों का निर्माण आधुनिक और प्रदूषण रहित तकनीक से किया गया है। इनका निर्माण 'फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलीयूरिथेन' (FRP) और उच्च गुणवत्ता वाली नॉन-रिएक्टिव सामग्री से किया गया है, जो जल के साथ किसी भी प्रकार की रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं करती। इससे तालाब की पारिस्थितिकी और जल की शुद्धता पूरी तरह सुरक्षित रहेगी। ये शिकारे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्था द्वारा तैयार किए गए हैं, जिन्होंने केरल, बंगाल और असम में भी पर्यटकों के लिए शिकारे बनाए थे। कांग्रेस की तरफ से सिर्फ सिंघार आए सरकार की ओर से बीजेपी और कांग्रेस के सभी विधायकों को कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था। लेकिन नेता प्रतिपक्ष सिंघार के अलावा कोई अन्य कांग्रेसी विधायक कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। सिंघार ने कहा कि अच्छा काम होता है तो सरकार की सराहना करेंगे। मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि इन शिकारों को कश्मीर की डल झील की तर्ज पर तैयार किया गया है। इससे वॉटर टूरिज्म और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा। इन शिकारों का संचालन मध्यप्रदेश पर्यटन निगम करेगा। शिकारे से हैंडीक्राफ्ट, फल-सब्जियां खरीद सकेंगे पर्यटक इन शिकारों का आनंद लेने के साथ-साथ बर्ड वॉचिंग भी कर सकेंगे। शिकारे में हैंडीक्राफ्ट उत्पाद, स्थानीय व्यंजन, ऑर्गेनिक सब्जियां और फल खरीदने की भी व्यवस्था की गई है। राइड के दौरान पर्यटक दूरबीन से तालाब और उसके आसपास के पक्षियों को देख सकेंगे और स्थानीय व्यंजनों का स्वाद भी ले सकेंगे। मध्यप्रदेश पर्यटन निगम का उद्देश्य भोपाल में डल झील जैसी फिलिंग देता है, जिससे राजधानी भोपाल एक वाटर-टूरिज्म हब के रूप में विकसित होगी। बता दें कि इससे पहले नगर निगम ने 13 जून 2024 को प्रायोगिक रूप से एक शिकारा चलाया था। अब एकसाथ 20 शिकारे बड़े तालाब में उतारे गए हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने करीब 10 महीने पहले, 12 सितंबर को क्रूज और मोटर बोट पर रोक लगा दी थी, इसलिए अब केवल सामान्य शिकारे ही चलाए जा रहे हैं। क्या होता है शिकारा? शिकारा एक प्रकार की लकड़ी की नाव है, जो डल झील समेत अन्य झीलों में पाई जाती है। शिकारे अलग-अलग आकार के होते हैं और लोगों के परिवहन सहित कई उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाते हैं। एक सामान्य शिकारा आधा दर्जन लोगों को बैठाता है। जिसमें चालक पीछे की तरफ से ये शिकारा चलाता है। डल झील में पर्यटकों की पहली पसंद होता है। इन्हें आकर्षक तरीके से सजाया जाता है। देशभर से आते हैं पर्यटक श्रीनगर की डल झील में ऐसे ही शिकारे चलते हैं। चूंकि, भोपाल में मध्यप्रदेश-देश के कई हिस्सों से पर्यटक आते हैं। वहीं, स्थानीय स्तर पर भी हजारों लोग बोट क्लब में घूमने जाते हैं, इसलिए शिकारा चलाने की पहल की गई है। NGT ने यह दिए थे आदेश दो साल पहले भोज वेटलैंड (बड़ा तालाब), नर्मदा समेत प्रदेश के किसी भी वाटर बॉडीज में क्रूज और मोटर बोट के संचालन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने रोक लगा दी थी। एनजीटी ने इसे अवैध गतिविधि ठहराते हुए बड़ा तालाब … Read more

सेप्सिस से जूझ रहे अभिनेता सुधीर दलवी के इलाज का भार उठाएगा शिरडी संस्थान

मुंबई  मशूहर एक्टर सुधीर दलवी बुरे दौर से गुजर रहे हैं. वो सेप्सिस इंफेक्शन से जूझ रहे हैं. एक्टर के इलाज के लिए उनके परिवार ने आर्थिक मदद की मांग की थी. अब राहत की बात ये है कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने शिरडी साई बाबा संस्थान को एक्टर सुधीर दलवी को आर्थिक मदद देने की अनुमति दे दी है. बीमारी से जूझ रहे सुधीर  बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने सुधीर दलवी को 11 लाख की आर्थिक सहायता देने की मंजूरी दी है. क्योंकि सुधीर इस वक्त मेडिकल कंडीशन से जूझ रहे हैं. उन्हें इलाज के लिए पैसे की जरूरत है. सुधीर ने लेजेंडरी एक्टर मनोज कुमार की फिल्म 'शिरडी के साई बाबा' में साई बाबा का किरदार निभाया था. इस रोल ने उन्हें इंडस्ट्री में पहचान दिलाई. उनका काम लोगों ने इतना पसंद किया कि वो उन्हें साई बाबा का रूप समझकर पूजने लगे. सुधीर को मिली 11 लाख की मदद सुधीर को 11 लाख की फाइनेंशियल मदद देने की परमिशन के लिए संस्थान की ओर से कोर्ट में एप्लीकेशन फाइल की गई थी. क्योंकि हाई कोर्ट की तरफ से दिए आदेश के तहत, संस्थान को खर्चों के लिए हाईकोर्ट से इजाजत लेनी होगी. कोर्ट में सुनवाई के दौरान संस्थान के वकील अनिल एस. बजाज ने बताया कि कोर्ट द्वारा गठित एड-हॉक कमेटी ने 86 साल के सुधीर को आर्थिक मदद देने का फैसला किया है. बजाज ने बताया कि सुधीर को साई बाबा के रोल के लिए पूरे इंडिया में जाना जाता है. वो मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती थे. संस्थान को 30 अक्टूबर 2025 को एक लेटर मिला था जिसमें सुधीर के लिए 15 लाख की मदद मांगी गई थी. जस्टिस विभा कंकनवाड़ी और हितेन वेनेगांवकर की बेंच ने संस्थान से कहा कि वो डॉक्यूमेंट्स के साथ नया एफिडेविट फाइल करें. जिसमें ये मेंशन हो कि क्या सुधीर हॉस्पिटल के बिल चुकाने में असमर्थ हैं और उनकी फाइनेंशियल कंडीशन क्या है. कुछ ऐसे डॉक्यूमेंट्स भी पेश करने को कहा गया जिनसे पता चले कि सुधीर का क्या इलाज किया गया था. संस्थान ने सुधीर की पत्नी की तरफ से उनकी बीमारी को लेकर एक एक्सप्लेनेशन सौंपा. जिसमें बताया गया है कि सुधीर बिस्तर पर हैं. घर पर दो केयरटेकर और एक फिजियोथेरेपिस्ट की मदद से उनकी देखभाल की जा रही है. सुधीर की हालत में सुधार 1 से डेढ़ साल साल में होगा. बेंच ने इन दस्तावेजों को देखकर माना कि सुधीर को फाइनेंशियल हेल्प की जरूरत है. इसके बाद कोर्ट ने संस्थान को एक्टर की मदद करने की अनुमति दी. सुधीर के जल्द ठीक होने के लिए फैंस दुआ मांग रहे हैं.  एक्टर ने फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में काफी योगदान दिया है. उन्होंने फिल्म शिरडी के साई बाबा के अलावा सीरियल रामायण में भी काम किया है. वो ऋषि वशिष्ठ के रोल में दिखे. सुधीर शो विष्णु पुराण, बुनियाद, जुनून, क्योंकि सास भी कभी बहू थी भी कर चुके हैं.

पाकिस्तान के आर्थिक संकट में एयरलाइंस की बिक्री, मुनीर के ‘फौजी’ बने संभावित खरीदार

इस्लामाबाद  पाकिस्तान की राष्ट्रीय एयरलाइन पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) की बिक्री जल्द ही होने वाली है. यह कदम अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा पाकिस्तान को दिए गए 7 अरब डॉलर के आर्थिक पैकेज की शर्तों के तहत उठाया जा रहा है. पाकिस्तान फाइनेंशियल क्राइसिस में फंसा हुआ है और कई बार कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज ले लिया है. इस कारण से पाकिस्तान को अपने राष्ट्रीय एयरलाइन को बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. फौजी कंपनी 'फर्टिलाइजर' भी है शामिल PIA की बिक्री के लिए चार कंपनियों को सबसे ऊपर रखा गया है. इनमें फौजी फर्टिलाइजर कंपनी लिमिटेड भी शामिल है, जो पाकिस्तान की सैन्य कंट्रोल फौजी फाउंडेशन का हिस्सा है. बाकी तीन कंपनियों में लकी सीमेंट कंसोर्टियम, आरिफ हबीब कॉर्पोरेशन कंसोर्टियम और एयर ब्लू लिमिटेड का नाम सामने आ रहा है. बिक्री की बोली 23 दिसंबर, 2025 को होगी और इसे सभी मीडिया पर लाइव दिखाया जाएगा. 2 दशकों में सबसे बड़ी निजीकरण योजना PIA की बात करें तो ये पिछले 2 दशकों में पाकिस्तान की सबसे बड़ी निजीकरण योजना है. सरकार ने बताया कि इस साल कुल 86 अरब रुपये की बिक्री का प्लान है. PIA की पिछली बोली में केवल 15% राशि सरकार के पास गई थी, जबकि बाकी का पैसा एयरलाइन में ही निवेश कर दिया गया था. नकली लाइसेंस के साथ पायलट भर रहे हैं उड़ान PIA पिछले कई सालों से गंभीर संकट में है. 2020 में यह सामने आया कि एयरलाइन के 30% पायलट नकली या संदिग्ध लाइसेंस के साथ उड़ान भर रहे थे. इस कारण 262 पायलटों को निलंबित किया गया और ऑपरेशन में बड़ी बाधाएं आईं थी. यूरोपीय संघ, अमेरिका और ब्रिटेन ने सुरक्षा कारणों से PIA की उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया था. इन प्रतिबंधों के कारण एयरलाइन को करोड़ों डॉलर का नुकसान हो रहा था. 200 अरब से अधिक है कर्ज इतना ही नहीं पाकिस्तान सरकार में अंदरूनी समस्याएं भी गंभीर हैं, जैसे अधिक कर्मचारियों, राजनीतिक नियुक्तियों और nepotism ने एयरलाइन के खर्च और अच्छे काम करने वाले लोगों को प्रभावित करने का काम किया है. साथ ही 2020 में PIA Flight 8303 के क्रैश ने पाकिस्तान ने सुरक्षा जांच और फ्लीट मेंटेनेंस की जरूरत बढ़ा दी है. इन सभी कारणों से एयरलाइन पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है और नुकसान पाकिस्तानी रुपयों में 200 अरब से अधिक हो गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि PIA की परेशानियां केवल एक घटना के कारण नहीं हैं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियां भी इसका परिणाम हो सकती हैं. अब सरकार और IMF की शर्तों के तहत एयरलाइन को बेचकर उसकी फाइनेंशियल स्थिति को सुधारने का काम करेगी. 

साल के अंत में मारुति वैगनआर पर भारी ऑफर, देश की नंबर-1 हैचबैक बनी और भी किफायती

मुंबई  साल के अंतिम महीने में मारुति सुजुकी ने ग्राहकों के लिए आकर्षक ऑफरों की घोषणा की है, जो खासकर उन खरीदारों के लिए बेहद लाभकारी है जो कम बजट में भरोसेमंद फैमिली कार खरीदना चाहते हैं। कंपनी ने अपनी लोकप्रिय हैचबैक वैगनआर पर इस दिसंबर भारी बचत का मौका दिया है, जिसके तहत ग्राहक कार खरीदते समय कुल ₹58,100 तक की राहत पा सकते हैं। साल के अंत की यह स्कीम सीमित समय के लिए है और कंपनी के एरिना नेटवर्क पर लागू की गई है। वैगनआर पर मिल रहा अब तक का सबसे बड़ा लाभ मारुति सुजुकी की वैगनआर लंबे समय से देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली फैमिली हैचबैक में शामिल है। इस कार की लोकप्रियता कम मेंटेनेंस खर्च, बेहतर माइलेज और विशाल केबिन स्पेस के कारण लगातार बनी हुई है। कंपनी ने बताया कि इस महीने वैगनआर के सभी वैरिएंट्स पर भारी राहत लागू की गई है। ग्राहक कैश डिस्काउंट, एक्सचेंज ऑफर और अतिरिक्त लाभ के माध्यम से कुल मिलाकर ₹58,100 तक की बचत कर सकते हैं। यह ऑफर उन खरीदारों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा जो लंबे समय से इस मॉडल को खरीदने का प्लान बना रहे थे। कीमत और खरीदारी का आकर्षक मौका मारुति वैगनआर की कीमतें बाजार में पहले से ही किफायती मानी जाती हैं। इसका बेस मॉडल करीब ₹4.99 लाख से शुरू होता है, जबकि टॉप वैरिएंट की कीमत लगभग ₹6.95 लाख तक जाती है। ऐसे में जब इस पर ₹58,100 तक का लाभ मिल रहा हो, तो यह डील स्वभाविक रूप से और भी आकर्षक बन जाती है। कम कीमत और बेहतर फीचर्स के चलते वैगनआर शहरी तथा उपनगरीय दोनों प्रकार के ग्राहकों की पसंद में लंबे समय से बनी हुई है। माइलेज, स्पेस और फीचर्स बनाते हैं इसे खास वैगनआर अपनी मजबूत माइलेज परफॉर्मेंस के लिए जानी जाती है। कंपनी ने इसे एक ऐसी फैमिली कार के रूप में विकसित किया है जो शहर और हाईवे दोनों जगह संतुलित ड्राइविंग अनुभव देती है। इसके बड़े केबिन और पर्याप्त हेडरूम की वजह से यह छोटे परिवारों के लिए आदर्श विकल्प मानी जाती है। साथ ही, मारुति का विस्तृत सर्विस नेटवर्क इसे रखरखाव के मामले में और भी सुविधाजनक बनाता है। सुरक्षा के लिहाज से इसमें 6 एयरबैग शामिल किए गए हैं, जो इस सेगमेंट में बड़ी बात मानी जाती है। ऑफर की उपलब्धता और जरूरी सावधानियां कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि ये ऑफर हर शहर में एक समान नहीं हो सकते। डिस्काउंट की वास्तविक राशि डीलरशिप, शहर और स्टॉक की उपलब्धता के आधार पर बदल सकती है। इसलिए खरीदारों को सलाह दी जाती है कि वे कार की बुकिंग से पहले अपने नजदीकी मारुति एरिना डीलर से ऑफर की सही स्थिति की पुष्टि अवश्य करें। स्टॉक सीमित होने की वजह से इन ऑफरों का लाभ पहले आओ–पहले पाओ के आधार पर मिलेगा। फैमिली कार खरीदने का बेहतरीन समय अगर आप इस महीने किसी भरोसेमंद, किफायती और वैल्यू-फॉर-मनी फैमिली कार की तलाश में हैं, तो वैगनआर इस समय सबसे आकर्षक विकल्प बनकर सामने आई है। 34 किलोमीटर प्रति लीटर तक का माइलेज, 6 एयरबैग जैसे सुरक्षा फीचर्स और ₹58,100 तक की बचत इसे साल की सबसे शानदार डील बना देते हैं। दिसंबर 2025 कार खरीददारों के लिए निश्चित रूप से एक फायदे का समय साबित हो रहा है।

शादी में रसगुल्ले के विवाद ने बिगाड़ा माहौल, दूल्हा-दुल्हन पक्ष में भिड़ंत

गयाजी  बिहार के बोधगया जिले के एक निजी होटल में शादी समारोह का आयोजन किया गया था. यहां उस समय निजी होटल अखाड़ा बन गया, जब रसगुल्ला की कमी को लेकर दूल्हा-दुल्हन पक्ष में विवाद हो गया. यह घटना पिछले 29 नवंबर की बताई जा रही है, जिसकी CCTV फुटेज अब सामने आई है. हालांकि दोनों पक्षों की शिकायत के बाद पुलिस मुकदमा दर्ज कर जांच में जुटी है. मिठाई के लिए बाराती और घराती में मारपीट इस शादी समारोह में बारातियों को खाना परोसा जा रहा था. इसी दौरान खाना खाने के दौरान मिठाई कम पड़ने को लेकर दोनों पक्षों के बीच तकरार शुरू हो गई, जो कुछ ही मिनटों में मारपीट में बदल गई. आरोप है कि लात-घूंसे, कुर्सियों से मारपीट हुई. इस मारपीट में जिसके हाथ में जो आया, वही फेंककर एक दूसरे को लोग मार रहे थे. देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच भंयकर मारपीट होने लगी. इस मारपीट में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. बता दें कि इस शादी समारोह में जयमाला से लेकर अधिकतर रस्में पूरी हो चुकी थीं और मंडप में बैठकर विवाह होना ही बाकी था, लेकिन रसगुल्ले पर शुरू हुआ हंगामा इतना बढ़ गया कि शादी ही रद्द करनी पड़ी. इस पूरे मामले में पुलिस दोनों पक्षों की ओर से मुकदमा दर्ज कर जांच कर रही है. दूल्हा और दुल्हन पक्ष का आरोप वहीं, दूल्हा के पिता महेंद्र प्रसाद का कहना है कि विवाद सिर्फ रसगुल्ले को लेकर हुआ था, लेकिन दुल्हन पक्ष ने उन लोगों पर दहेज मांगने का झूठा आरोप लगाकर बोधगया थाने में मुकदमा दर्ज करवाया है. उनका कहना है कि मुकदमे के बाद भी वे शादी कराने के लिए तैयार थे, लेकिन दुल्हन पक्ष किसी भी हालत में तैयार नहीं हुआ. वहीं, दूल्हा की मां मुन्नी देवी का आरोप है कि जब दोनों पक्ष समझौते के करीब थे, तभी दुल्हन पक्ष के लोग शादी में लाए गए जेवर-गहने को उठा ले गए और दुल्हन को साथ लेकर होटल से निकल गए. हालांकि बीते 1 दिसंबर को लड़की पक्ष के द्वारा भी बोधगया थाना मे दूल्हे के पिता पर दहेज का आरोप लगाया गया था. लड़की पक्ष के पिता ने आरोप लगाया है कि शादी में 10 लाख रुपए पहले ही दिए गए थे, लेकिन जयमाला के दौरान 2 लाख और अतिरिक्त की मांग की गई थी, जिसके बाद यह मामला बढ़ गया था. इस मामले में बोधगया थाने में लड़की पक्ष के द्वारा मामला दर्ज कराया गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने तय की सीमा: बिना पूछे महिला की तस्वीर लेना कब होगा गैरकानूनी

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला का वीडियो रिकॉर्ड करने के मामले में आरोपी को राहत दी है। कोर्ट का कहना है कि अगर किसी महिला का फोटो या वीडियो ऐसे समय में लिया जाता है, जहां वह निजी गतिविधि में नहीं है तो उसे IPC की धारा 354सी के तहत वॉयरिज्म का दोषी नहीं माना जा सकता। साथ ही अदालत ने कहा है कि चार्जशीट दाखिल करते समय पुलिस और आरोप तय करते समय ट्रायल कोर्ट को सावधान रहना चाहिए था। वॉयरिज्म का मतलब है किसी महिला को तब चुपके से देखना या ताक झांक करना, जब वह निजी गतिविधियों में शामिल हो। यह अपराध है। मामले पर सुनवाई कर रहे जस्टिस एनके सिंह और जस्टिस मनमोहन ने आरोपी के खिलाफ केस बंद कर दिया। उसके खिलाफ वॉयरिज्म के आरोप लगे थे। आरोप थे कि उसने महिला का वीडियो तब रिकॉर्ड किया था, जब वह विवादित संपत्ति में प्रवेश कर रही थी। कोर्ट ने जांच की थी कि एफआईआर और चार्जशीट में वॉयरिज्म का कोई अपराध बताया गया है या नहीं। कोर्ट ने समझाया कि वॉयरिज्म तब लागू होता है, जब निजी गतिविधि में महिला को चुपके से देखा जा रहा हो या रिकॉर्ड किया जा रहा हो। कोर्ट ने पाया कि इस मामले में ऐसा कोई प्राइवेक्ट एक्ट नहीं है। कोर्ट ने पाया कि हाईकोर्ट ने भी माना है कि एफआईआर से वॉयरिज्म का पता नहीं चला है। हालांकि, उच्च न्यायालय ने फिर भी आरोपी अपीलकर्ता को डिस्चार्ज करने से इनकार कर दिया था, जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति ली। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान गलत तरीके से रोके जाने के आरोपों की भी जांच की गई। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता को किराएदार नहीं दिखाया गया था। साथ ही कोर्ट ने कहा कि पेश जानकारी से पता चलता है कि वह होने वाले किराएदार के तौर पर प्रॉपर्टी देखने आई थी। कोर्ट ने पाया कि एफाईआर पूरी तरह से संपत्ति को लेकर परिवार के विवाद से जुड़ी है। अदालत ने कहा कि अगर मुद्दों को क्रिमिनल केस के बजाए सिविल उपायों से सुलझाया जाना चाहिए था। बेंच ने उन मामलों में चार्जशीट दाखिल करने पर नाराजगी जाहिर की, जिनमें पक्का शक नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इसके कारण पूरे आपराधिक न्याय व्यवस्था पर दबाव पड़ता है। क्या था मामला यह मामला कोलकाता के सॉल्ट लेक की एक रिहायशी संपत्ति का है, जिसे लेकर दो भाइयों में लंबे समय से विवाद चल रहा है। इस मामले में आरोपी तुहिन कुमार बिस्वास सह मालिक का बेटा और संपत्ति को लेकर हुए झगड़े के चलते ही यह एफआईआर दाखिल की गई थी। साल 2018 में आरोपी के पिता ने अपने भाई के खिलाफ सिविल सूट दाखिल किया था। 29 नवंबर 2018 को सिविल कोर्ट ने दोनों पक्षों को साझा अधिकार रखने और कोई थर्ड पार्टी राइट्स नहीं बनाने के निर्देश दिए थे। यह आदेश उस समय भी लागू था, जब शिकायतकर्ता ममता अग्रवाल मार्च 2020 में संपत्ति पर पहुंची थीं। इसके बाद अग्रवाल ने आरोपी के रिश्तेदार के कहने पर एफआईआर दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाए थे कि आरोपी ने उन्हें जबरन रोका, धमकाया और बगैर उनकी सहमति के फोटो वीडियो बनाए। 16 अगस्त 2020 को पुलिस ने 354सी समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया। ट्रायल कोर्ट और कलकत्ता हाईकोर्ट की तरफ से डिस्चार्ज करने से इनकार किए जाने के बाद आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

सीजी पीएससी 2024 के टॉप 10 अभ्यर्थियों ने रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से की मुलाकात

रायपुर : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग 2024 के टॉप 10 अभ्यर्थियों ने की सौजन्य भेंट मुख्यमंत्री ने दी शुभकामनाएं, लोकहित में कार्य करने की दी सीख रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से विगत दिवस राजधानी रायपुर स्थित उनके निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग 2024 के टॉप 10 अभ्यर्थियों ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री  साय ने सभी चयनित अभ्यर्थियों और उनके परिजनों को सफलता के लिए शुभकामनाएं और बधाई दी। इस अवसर पर विधायक  ललित चंद्राकर और राजभाषा अधिकारी  छगन लाल नागवंशी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री  साय ने विद्यार्थियों से उनकी तैयारी के अनुभव, परीक्षा के दौरान आने वाली चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच के कारण विद्यार्थियों ने यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग 2024 में प्रदेश के युवाओं का उत्कृष्ट प्रदर्शन हम सबके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आपको हमेशा यह भी याद रखना होगा कि आगे आपकी भूमिका लोकसेवक की होगी। आपको अपने दायित्वों के निर्वहन में धैर्य, विनम्रता और लोक सेवक की सीमाओं का हमेशा ध्यान रखना होगा। आम जनमानस में प्रशासन का विश्वास कायम रखने की दिशा में आप सभी को संवेदनशीलता से प्रयास करना है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि  हमारी सरकार ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित परीक्षा को पूरी पारदर्शिता के साथ आयोजित करने का निर्णय लिया है और वह परीक्षा परिणामों में  साफ नजर आ रहा है।  टॉपर विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए जिम्मेदारी का नया अध्याय है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ जनता की सेवा करेंगे और प्रदेश के विकास में योगदान देंगे। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग 2024 के टॉप 10 चयनित अभ्यर्थी  देवेश प्रसाद साहू,  स्वप्निल वर्मा,  यशवंत कुमार देवांगन,  पोलेश्वर साहू,  पारस शर्मा, सु शताक्षी पाण्डेय,  अंकुश बैनर्जी, सु सृष्टि गुप्ता,  प्रशांत वर्मा और  सागर वर्मा सपरिवार उपस्थित थे।

फ्लाइट कैंसिलेशन पर यात्रियों में नाराज़गी, पायलटों की शिकायतें सामने आने पर DGCA सक्रिय

 नई दिल्ली देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो की उड़ानों के बड़े पैमाने पर रद्द होने और देरी के बाद नागर विमानन महानिदेशालय DGCA ने सख्त रुख अपनाया है. नागर विमानन मंत्रालय MoCA के तहत आने वाले DGCA ने इंडिगो के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब कर बैठक बुलाई है. यह कदम उस वक्त उठाया गया है, जब देशभर के हवाई अड्डों पर उड़ानें रद्द होने से अफरातफरी का माहौल बना हुआ है. इस बीच पायलट एसोसिएशन ALPA इंडिया ने भी DGCA से अपील की है कि स्लॉट देने और उड़ान शेड्यूल मंजूर करते समय एयरलाइन के पास उपलब्ध पायलटों की संख्या और उनकी पर्याप्तता को भी गंभीरता से देखा जाए, खासकर हाल ही में लागू हुए फैटीग रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम (FRMS) को ध्यान में रखते हुए. 100 से ज्यादा उड़ानें रद्द बुधवार को इंडिगो की 100 से ज्यादा उड़ानें रद्द हो गईं, जबकि कई सेवाएं घंटों देरी से चलीं. सूत्रों के मुताबिक, बेंगलुरु एयरपोर्ट से 42, दिल्ली से 38, मुंबई से 33 और हैदराबाद से 19 उड़ानें रद्द हुईं. एयरलाइन रोजाना करीब 2,300 घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन करती है. DGCA ने एयरलाइन से मांगी रिपोर्ट DGCA ने कहा है कि वह इंडिगो की उड़ान बाधाओं की जांच कर रहा है और एयरलाइन से मौजूदा हालात के कारणों के साथ उड़ान रद्द होने और देरी को कम करने की विस्तृत योजना मांगी गई है. इंडिगो ने बयान जारी कर कहा कि पिछले दो दिनों से 'कई तरह की अचानक आई परिचालन दिक्कतों' के कारण नेटवर्क पर गंभीर असर पड़ा है. इसमें तकनीकी खामियां, सर्दियों के शेड्यूल में बदलाव, खराब मौसम, एयर ट्रैफिक में बढ़ी भीड़ और नई फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) व्यवस्था को जिम्मेदार बताया गया है. पायलट एसोसिएशन की अपील वहीं पायलट संघ ALPA India ने DGCA से अपील की है कि स्लॉट देने और उड़ान शेड्यूल मंजूर करते समय एयरलाइंस के पास उपलब्ध पायलटों की वास्तविक संख्या को गंभीरता से देखा जाए. ALPA ने कहा कि नई FDTL व्यवस्था को जनवरी 2024 में जारी किया गया था और इसके बावजूद कई एयरलाइंस ने समय रहते तैयारी नहीं की. कुछ विमानन विशेषज्ञों का यह भी आरोप है कि लगातार रद्द हो रहीं उड़ानों और देरी को नियमों में ढील दिलाने के दबाव हथकंडे के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है.