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बर्फीली हवाओं से बढ़ेगी ठिठुरन, मध्यप्रदेश में ठंड का प्रकोप जारी, पारा 2-3 डिग्री तक गिरेगा

भोपाल  मध्यप्रदेश में अब तेज ठिठुरन का दौर शुरू होने वाला है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में हो रही बर्फबारी और उसके बाद बर्फ के पिघलने से उठने वाली ठंडी हवाएं प्रदेश की ओर बढ़ रही हैं। इससे आने वाले 48 घंटों में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर सहित कई शहरों के न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट दर्ज हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, एक पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने के तुरंत बाद 5 दिसंबर से नया सिस्टम हिमालयी क्षेत्रों को प्रभावित करेगा, जिसका प्रभाव दो दिन बाद MP में साफ दिखाई देगा। पहले से जमा बर्फ के पिघलने पर वहीं से उठने वाली बर्फीली हवा सीधे मध्यप्रदेश पहुंचेगी, जिससे इंदौर, ग्वालियर, चंबल, उज्जैन और सागर संभाग में सबसे ज्यादा सर्दी महसूस की जाएगी।  मध्य प्रदेश में अब कड़ाके की सर्दी का दौर शुरू होगा। बर्फीली हवाओं से और भी ठिठुरन बढ़ेगी। दिसंबर महीने में 20-22 दिन शीतलहर चलने का अनुमान है। भोपाल और इंदौर समेत कई शहरों में तापमान 2 से 3 डिग्री और गिरेगा। इससे पहले बुधवार रात में भोपाल, इंदौर समेत प्रदेश के 10 शहरों में पारा 10 डिग्री से कम दर्ज किया। पचमढ़ी फिर सबसे ठंडा,पारा 6.7 डिग्री मंगलवार-बुधवार की रात प्रदेश के कई हिस्सों में पारा 10 डिग्री से नीचे फिसल गया।भोपाल: 9.2°,इंदौर: 8.4°,जबलपुर: 10.6°,उज्जैन: 12°,ग्वालियर: 14.6°पचमढ़ी इस बार भी सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान 6.7 डिग्री दर्ज किया गया। कल्याणपुर (शहडोल) में 7.1°, उमरिया में 8.2°, अमरकंटक और शाजापुर में 8.7°, जबकि रीवा-नौगांव में 9° दर्ज हुआ। दिन में भी कई शहरों में अधिकतम तापमान 25 डिग्री से नीचे रहा। नवंबर ने तोड़े रिकार्ड,भोपाल में 15 दिन चली शीतलहर इस साल नवंबर में सांईठुरन ने पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। भोपाल में लगातार 15 दिन शीतलहर चली 1931 के बाद यह सबसे लंबा दौर रहा। 17 नवंबर की रात पारा 5.2 डिग्री तक गिर गया, जो अब तक का सर्वकालिक नवंबर रिकॉर्ड है। इंदौर में भी तापमान 6.4° तक फिसल गया 25 वर्षों में सबसे कम। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि उत्तर भारत में इस बार नवंबर की शुरुआत में ही बर्फबारी शुरू हो गई थी, जिससे ठंडी हवाएं जल्दी मध्यप्रदेश पहुंच गईं। हालांकि, नवंबर के अंतिम सप्ताह में हवा की दिशा बदलने से ठंड थोड़ी कम हुई। पचमढ़ी सबसे ठंडा, पारा 6.7 डिग्री इससे पहले मंगलवार-बुधवार की रात में भोपाल, इंदौर समेत प्रदेश के 10 शहरों में पारा 10 डिग्री से कम रहा। भोपाल में 9.2 डिग्री, इंदौर में 8.4 डिग्री, जबलपुर में 10.6 डिग्री, उज्जैन में 12 डिग्री और ग्वालियर में 14.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। नवंबर में रिकॉर्ड तोड़ चुकी है सर्दी इस बार नवंबर में सर्दी रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली। रिकॉर्ड के अनुसार, साल 1931 के बाद शीतलहर के यह सबसे ज्यादा दिन है। दूसरी ओर, 17 नवंबर की रात में पारा 5.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो ओवरऑल रिकॉर्ड भी रहा। इससे पहले 30 नवंबर 1941 में तापमान 6.1 डिग्री रहा था। इंदौर में भी पारा 6.4 डिग्री ही रहा। यहां भी सीजन की सबसे सर्द रात रही। 25 साल में पहली बार पारा इतना लुढ़का। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन बताती हैं, इस बार उत्तरी राज्यों में नवंबर के पहले ही सप्ताह में बर्फबारी होने लगी। इस वजह से ठंडी हवाएं प्रदेश में पहुंची। आखिरी सप्ताह में हवा की दिशा बदल गई। जिससे ठंड का असर कम रहा है। ठंड के लिए दिसंबर-जनवरी खास मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त महत्वपूर्ण रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं। इसलिए टेम्प्रेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक्टिव होने से दिसंबर में मावठा भी गिरता है। इससे दिन में भी सर्दी का असर बढ़ जाता है। अब जानिए दिसंबर में कैसी रहेगी ठंड? मौसम का ट्रेंड देखें तो दिसंबर में स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टर्बेंस आते हैं। वहीं, उत्तरी हवाएं आने से दिन-रात के तापमान में गिरावट होती है। इस बार भी यही अनुमान है। इन जिलों में सबसे ज्यादा सर्दी रहेगी     ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग के सभी जिलों में कड़ाके की ठंड पड़ेगी। यहां बर्फीली हवाएं सीधे आएंगी।     भोपाल संभाग के सीहोर-विदिशा में ठंड का जोर रहेगा।     सागर संभाग के निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़-पन्ना, रीवा संभाग के मऊगंज, सीधी-सिंगरौली में तेज ठंड पड़ेगी।     जबलपुर संभाग के मंडला-डिंडोरी, इंदौर संभाग के इंदौर, धार और झाबुआ में कड़ाके की ठंड रहेगी। 20-22 दिन चल सकती है कोल्ड वेव मौसम एक्सपर्ट की माने तो दिसंबर में प्रदेश के कई शहरों में कोल्ड वेव यानी सर्द हवाएं चलेंगी। जनवरी में यह 20 से 22 दिन तक चल सकती है। इसलिए रहेगा कड़ाके की ठंड का दौर ला नीना ने दिया ठंड को लंबा धक्का     मौसम केंद्र भोपाल के रिटायर्ड डायरेक्टर डीपी दुबे के अनुसार, वैश्विक मौसम मॉडल (विश्व मौसम संगठन, भारत मौसम विज्ञान विभाग आदि) संकेत दे रहे थे कि इस बार ला नीना सक्रिय रहेगा। ला नीना का मतलब, प्रशांत महासागर का ठंडा होना। जैसे ही समुद्र ठंडा होता है, हवा और ज्यादा ठंडी होकर एशिया-भारत की ओर दबाव से धकेली जाती है। यह वही ठंड है जिसने नवंबर से ही मध्य भारत को जकड़ लिया। पहाड़ों पर जल्दी बर्फबारी, ठिठुरन बढ़ाई     इस बार उत्तर भारत में हिमाचल, उत्तराखंड और कश्मीर में बर्फबारी सामान्य से काफी पहले शुरू हो गई। ऊंचे पर्वतीय इलाकों की जल्दी बर्फबारी मध्य भारत की ठिठुरन को 20 से 30% तक बढ़ा देती है। ठंडी हवाएं 25% ज्यादा अंदर तक घुसी     ठंड का असर सिर्फ सतह तक नहीं रहा। इस साल ग्वालियर-चंबल, भोपाल-विदिशा, रतलाम-मंदसौर, सागर-दमोह इन चार बड़े मौसम जोन में ठंडी हवाएं 20 से 25% ज्यादा गहराई तक घुस आईं। पश्चिमी विक्षोभ का लगातार … Read more

करियर ग्रोथ क्यों थम जाती है? जानें कौन से डेस्क प्लांट्स रोकते हैं तरक्की

हमारा कार्यस्थल वह स्थान है जहां हम अपने दिन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा बिताते हैं। इसलिए, यहां की ऊर्जा हमारे प्रदर्शन, मनोदशा और करियर की सफलता को सीधे प्रभावित करती है। प्राचीन भारतीय वास्तु शास्त्र और चीनी फेंग शुई दोनों ही इस बात पर जोर देते हैं कि आसपास रखी गई वस्तुएं विशेषकर जीवित पौधे, एक विशेष प्रकार की ऊर्जा उत्पन्न करते हैं। पौधों का चुनाव करते समय, हमें केवल उनके सौंदर्य को नहीं देखना चाहिए बल्कि उनके ऊर्जावान प्रतीकवाद को समझना चाहिए। गलत पौधे रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह रुक सकता है, जिससे तनाव, टकराव और व्यवसायिक बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। आइए जानते हैं, वे कौन से पौधे हैं जिनसे ऑफिस डेस्क पर बचना चाहिए और क्यों: कांटेदार या नुकीले पत्ते वाले पौधे वास्तु और फेंग शुई दोनों में माना जाता है कि नुकीले और कांटेदार पौधे तीक्ष्ण ऊर्जा पैदा करते हैं, जो रिश्तों में तनाव, टकराव और आक्रमण की भावना को बढ़ावा देती है। ये ऊर्जाएं अक्सर आपके आसपास के लोगों के साथ आपके संबंधों को बिगाड़ती हैं। ऑफिस डेस्क पर ये पौधे रखने से आपके सहकर्मियों और वरिष्ठों के साथ आपके संबंध खराब हो सकते हैं। काम का माहौल तनावपूर्ण हो जाता है, जिससे टीमवर्क और सकारात्मक समीक्षा की संभावनाएं कम हो जाती हैं। बोनसाई के पौधे बोनसाई एक छोटे से बर्तन में पौधे के प्राकृतिक विकास को जानबूझकर रोकता है। यह रुकावट और सीमित विकास की ऊर्जा का प्रतीक है। कार्यक्षेत्र में, यह प्रतीकवाद बताता है कि आपका करियर का विकास अवरुद्ध हो गया है या आपकी प्रगति धीमी हो गई है। यह अवचेतन रूप से आपकी महत्वाकांक्षाओं को दबाता है और आपकी करियर की वृद्धि को प्रभावित कर सकता है, जिससे प्रमोशन मिलने में अप्रत्याशित देरी हो सकती है। मुरझाए हुए या मृत पौधे  मृत या मुरझाए हुए पौधे उदासी, अस्वस्थता और निराशा की ऊर्जा का स्पष्ट प्रतीक हैं। ये यिन ऊर्जा को दर्शाते हैं, जो निष्क्रिय और नकारात्मक होती है। वास्तु में इन्हें दरिद्रता का प्रतीक माना जाता है। यदि आपकी डेस्क पर जीवनरहित पौधे हैं, तो यह आपके कार्य में गति की कमी को दर्शा सकता है। यह न केवल आपकी मानसिक ऊर्जा को कम करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि आप अपनी जिम्मेदारियों के प्रति लापरवाह हैं, जो प्रमोशन के लिए एक असुरक्षित संकेत है। गहरा रंग या अत्यधिक झाड़ीदार पौधे फेंगशुई में गहरे, घने पौधे बहुत अधिक यिन ऊर्जा पैदा करते हैं, जो कार्यक्षेत्र की तेज और सक्रिय यांग ऊर्जा के लिए उपयुक्त नहीं है। अत्यधिक घनापन ऊर्जा के प्रवाह को अवरुद्ध करता है और स्थान को अंधकारमय बनाता है। डेस्क पर ये पौधे रखने से काम में आलस्य, थकान और निर्णय लेने में अस्पष्टता आ सकती है। इससे आपकी कार्यक्षमता घटती है और आप अपने लक्ष्य से भटक सकते हैं, जिसका सीधा असर आपके प्रमोशन पर पड़ता है। लटकने या बेल वाले पौधे वास्तु के अनुसार, बेल या लटकने वाले पौधे यदि जमीन की ओर बढ़ते हैं या नीचे की ओर लटकते हैं, तो यह करियर में गिरावट या रुकावट को दर्शाता है। इन्हें ऊपर की ओर सहारा देकर रखना चाहिए। यदि ये अनियंत्रित रूप से लटक रहे हैं, तो यह नियंत्रण की कमी को दर्शा सकता है, जो प्रमोशन के समय आपकी लीडरशिप क्षमताओं पर सवाल खड़े कर सकता है।

सनी लियोनी पर बैन क्यों नहीं?—खुशी मुखर्जी ने फफक-फफक कर साझा की अपनी कहानी

मुंबई     अतरंगी फैशन और रिवीलिंग कपड़ों को लेकर चर्चा में आईं एक्ट्रेस खुशी मुखर्जी बेहद परेशान हैं. उनका कहना है कि उनका इकलौता सोर्स ऑफ इनकम- उनका ऐप बंद करवा दिया गया है. क्योंकि उन पर आरोप था कि वो वहां वल्गर कंटेंट परोसती हैं. उन्होंने इस बात पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि मेरा कंटेंट वल्गर था तो सनी लियोनी को बैन क्यों नहीं किया जाता.  ट्रॉमा झेल रहीं खुशी  खुशी अपना दर्द जाहिर करते हुए इतनी इमोशनल हो गईं कि फूट-फूटकर रोने लगीं. उनकी सांस तक रुकने लगीं, उन्होंने पानी पिया और खुद को संभाला. खुशी बताती हैं कि उन्हें उनके ऐप और अपीयरेंस की वजह से एडल्ट स्टार माना जाने लगा है. उनपर भद्दे-भद्दे कमेंट्स पास किए जाते हैं और साथ ही अश्लील ऑफर्स तक मिलते हैं. गलट्टा इंडिया से बातचीत में खुशी ने अपनी पीड़ा जाहिर की. खुशी बोलीं- मेरे इनकम का एकलौता सोर्स मेरा ऐप ही था, लेकिन उसका इतना विरोध हुआ कि मैंने उसको भी बंद कर दिया. क्योंकि मुझे कहीं न कहीं लगा कि हां, वो वल्गर लग रहा है. वो ऐप की वजह से लोग मेरे पीछे पड़े हैं. मैंने उसको बैन कर दिया है तो सनी लियोनी को क्यों नहीं बैन किया जा रहा है हमारे देश में. ऐसे सारे विदेशियों को क्यों नहीं बैन किया जा रहा है. पाकिस्तानी एक्टर्स तो बैन हैं. वर्क परमिट लेकर जो भारत में आ रहे हैं- वो भी बैन होने चाहिए.  ''अभी लेटेस्ट टॉपिक जो निकल रहा है- ड्रग्स का, ये कैसे सेल होता है. वो भी तो कहीं ना कहीं से आता ही है ना. इसे भी बैन होना चाहिए. मैंने अगर ज्यादा बोल दिया तो मेरे ही घर में ड्रग्स प्लांट करके मुझे जेल भेज देंगे. ये चीजें तो हो चुकी हैं ना.'' खुशी को मिले अश्लील ऑफर्स खुशी ने आगे बताया कि उनके कपड़े और उनके ऐप कंटेंट को देखकर उन्हें गंदे ऑफर्स आए, जहां उन्हें लोगों के साथ रात गुजारने को कहा गया. वो बताती हैं कि- मैं भी एक सभ्य परिवार से आती हूं. मैंने इंडस्ट्री को 10-12 साल दिए हैं. मैंने बचपन से ही काम करना शुरू कर दिया था. मेरे भाई ने प्रियंका चोपड़ा, स्नूप डॉग तक के साथ काम किया है. मैं कुछ बता भी नहीं पाती हूं. और क्या बताऊं कि मुझे कैसे-कैसे ऑफर्स आते हैं. ये बोलते हुए खुशी फफक-फफक रो पड़ीं. उनके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे.  किसी तरह खुद को संभालते हुए खुशी बोलीं- मैं किसी के साथ सोना नहीं चाहती क्योंकि हां मुझे घमंड है अपनी एक्टिंग पर. मैं तीसरी कक्षा से मोनो एक्टिंग करती आ रही हूं. मैं थियेटर कर चुकी हूं. मेरी मां भी थियेटर आर्टिस्ट रही हैं. मैं क्यों हार मान जाऊं. अगर मेरे पास पैसे हैं, थोड़ी बहुत प्रॉपर्टी है. मैं सबकुछ तो इंडस्ट्री में नहीं लगा सकती ना.  खुशी मुखर्जी बता चुकी हैं कि अपने ऐप से उन्होंने एक बार में लगभग 10 करोड़ रुपये तक कमा लिए थे. वो हार्ट अटैक, अंजल थुरई समेत कई फिल्मों में नजर आ चुकी हैं.

विभाग ने बढ़ाया बच्चों के जेल में रहने का समय, 816 महिला कैदी और 47 बच्चे शामिल

चंडीगढ़  हरियाणा की जेलों में अब मां के साथ रह रहे बच्चों को बड़ी राहत मिली है। दरअसल जेल विभाग ने बच्चों के साथ मां के रहने की अवधि को 2 साल बढ़ा दिया है। इसके बाद अब बच्चे 6 की बजाय 8 साल तक जेल में अपनी मां के साथ रह सकेंगे। डी.जी. जेल आलोक राय ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि इस फैसले से जेल में रह रही महिला कैदियों के साथ उन बच्चों को भी राहत मिलेगी जिनका बाहर कोई नहीं है। जेल विभाग ऐसे बच्चों के लिए जेल परिसर में ही उनकी पढ़ाई और पौष्टिक खाने की पूरी व्यवस्था कर रहा है। प्रदेश की 17 जेलों में बच्चों के खेलने के लिए क्रैच बने हुए हैं। इन बच्चों के खेल, खान-पान एवं अच्छे स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाता है। केंद्रीय जेलों सहित हरियाणा की कुल 20 जेलों में से 17 में महिला वार्ड बने हुए हैं। अभी इन जेलों में कुल 816 महिला कैदी बंद हैं जिनमें से 162 महिलाएं सजा काट रही हैं और 654 महिलाओं के केस अंडर ट्रायल चल रहे हैं। इन महिला बंदियों के पास कुल 47 बच्चे बंद हैं, जिनकी उम्र 6 वर्ष तक की आयु के बीच है। जेल विभाग के इस फैसले से इन बच्चों को राहत पहुंची है। हफ्ते में एक दिन बाहर जाते हैं बच्चेः छोटे बच्चों को सप्ताह में एक बार जेल के मुख्य गेट से बाहर जेल परिसर में बने पार्को आदि में जेल के महिला मुलाजिम के निगरानी में घूमने के लिए भेजा जाता है। ओपन जेलों के तहत हरियाणा में करनाल और फरीदाबाद में 2 ओपन जेलें खोली गई हैं जहां करनाल में 30 फ्लैट । हैं वहीं फरीदाबाद में 36 जहां पर यह कैदी अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। जेल विभाग ऐसे बच्चों के लिए जेल परिसर में ही उनकी पढ़ाई और पौष्टिक खाने की पूरी व्यवस्था कर रहा है। प्रदेश की 17 जेलों में बच्चों के खेलने के लिए क्रैच बने हुए हैं। इन बच्चों के खेल को खान-पान एवं अच्छे स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाता है। 816 महिला कैदी जेलों में बंद हैं केंद्रीय जेलों सहित हरियाणा की कुल 20 जेलों में से 17 जेलों में जेल विभाग के द्वारा महिला वार्ड बने हुए हैं। अभी इन जिलों में कुल 816 महिला कैदी बंद हैं, जिनमें से 162 महिलाएं सजा काट रही है और 654 महिलाओं के केस अंडर ट्रायल चल रहे हैं। इन महिला बंदियों के पास कुल 47 बच्चे बंद है, जिनकी उम्र 6 वर्ष तक की आयु के बीच है। जेल विभाग के इस फैसले से इन बच्चों को राहत पहुंची है। हफ्ते में एक दिन बाहर जाते हैं बच्चे छोटे बच्चों को सप्ताह में एक बार जेल के मुख्य गेट से बाहर जेल परिसर में बने पार्कों आदि में जेल के महिला मुलाजिम के निगरानी में घूमने के लिए भेजा जाता है। डीजी जेल आलोक राय ने बताया कि सूबे की ओपन जेलों के तहत हरियाणा में करनाल और फरीदाबाद में 2 ओपन जेल खोली गई हैं, जहां करनाल में 30 फ्लैट हैं वहीं फरीदाबाद में 36 जहां पर यह कैदी अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। क्या बोले डीजी जेल हरियाणा के डीजी जेल आलोक राय ने बताया कि इस फैसले से बच्चों और मां दोनों को राहत मिलेगी। कई बार अलग-अलग रहने से बच्चे डिप्रेशन में चले जाते हैं, या उनकी मां के साथ ऐसा हो जाता है। अब दोनों साथ रहेंगे तो वह अवसाद से दूर रहेंगे। जेल विभाग ऐसे बच्चों को हर सुविधा दे रहा है। नए फैसले से मां और बच्चों दोनों को मिलेगी राहत : आलोक राय हरियाणा के डी.जी. जेल आलोक राय ने कहा कि इस फैसले से बच्चों और मां दोनों को राहत मिलेगी। कई बार अलग-अलग रहने से बच्चे डिप्रैशन में चले जाते हैं या उनकी मां के साथ ऐसा हो जाता है। अब दोनों साथ रहेंगे तो वह अवसाद से दूर रहेंगे। जेल विभाग ऐसे बच्चों को हर सुविधा दे रहा है।

खरमास में शुक्र का दो बार गोचर, इन 3 राशियों को मिलेगी आर्थिक और सामाजिक सफलता

इस साल का खरमास बेहद ही खास रहने वाला है। दैत्यों  के गुरु शुक्र (Shukra) दो बार गोचर करने वाले हैं। पहला गोचर 20 दिसंबर को धनु राशि में होगा। वहीं दूसरा गोचर 13 जनवरी 2026 को मकर राशि में होगा। इसका प्रभाव इसका प्रभाव सभी 12 राशियों के जीवन पर पड़ेगा। किसी को फायदा तो किसी को नुकसान होगा। जातकों के जीवन में कई बदलाव आ सकते हैं। सूर्य देव के प्रवेश धनु राशि में प्रवेश के साथ खरमास मास की शुरुआत होती है। हिंदू धर्म में इसका बेहद ही विशेष महत्व होता है। इस समय शुभ और मांगलिक कार्यक्रमों को करना अशुभ माना जाता है। गृह प्रवेश, मुंडन, विवाह जैसे कार्यक्रम की मनाही होती है। खरमास की शुरुआत 14 दिसंबर से होने वाली है। इसका समापन 14 जनवरी 2026 को होगा। कई राशियों के लिए यह समय किसी वरदान के से का कम नहीं होगा। असुराचार्य शुक्र (Shukra Gochar) की खास कृपा बरसेगी। आइए जानें किन लोगों को इस दौरान सबसे अधिक फायदा होने वाला है? मेष राशि (Mesh Rashi) मेष राशि के जातकों पर धन के दाता शुक्र की खास कृपा बरसेगी। लोगों के साथ आपके संपर्क बढ़ेंगे। नए दोस्त बन सकते हैं। यात्रा की योजना भी बनेगी। प्रोफेशनल लाइफ में सकरात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। कारोबार में मुनाफा होगा। वैवाहिक जीवन में भी खुशहाली आएगी। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। छात्रों को उच्च शिक्षा में सफलता मिलेगी।  प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अच्छा प्रदर्शन रहेगा। धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों में रुझान बढ़ेगा। आर्थिक तंगी भी दूर होगी। कन्या राशि (Kanya Rashi) कन्या राशि के जातकों के लिए खरमास अनुकूल रहेगा। शुक्र की खास कृपा बरसेगी। घर परिवार में खुशहाली आएगी। माता के साथ आपके संबंध मजबूत होंगे। धार्मिक और शुभ कार्यक्रमों का आयोजन भी हो सकता है। लग्जरी आइटम की खरीदारी होगी। भौतिक सुख सुविधाओं की प्राप्ति होगी। लव लाइफ भी अच्छी रहने वाली है। अटका हुआ पैसा वापस मिलेगा।  बिजनेस करने वाले लोगों को इस दौरान मुनाफा होगा। अपने लाइफ पार्टनर के साथ अच्छा समय व्यतीत करने का मौका मिलेगा। तुला राशि (Tula Rashi) तुला राशि के जातकों के लिए शुक्र का दोनों गोचर लाभकारी साबित होगा। राइटिंग और लिटरेचर से जुड़े लोगों को इस दौरान फायदा होगा। तरक्की के प्रबल योग बन रहे हैं।   कम्युनिकेशन स्किल में भी सुधार आएगा। रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों को सफलता मिलेगी। भाई बहनों के साथ यात्रा की योजना बन सकती है। करियर में भी कई मौके मिलेंगे। निवेश पर मुनाफा होगा। बिजनेस का विस्तार होगा। पर्सनल लाइफ भी अच्छी रहेगी। आपकी सेहत में सुधार आएगा। हालांकि परिवार के सदस्यों का ख्याल रखने की जरूरत है।

गी सरकार की कार्रवाई का असर: NRC नंबर न दिखाने पर 160 बांग्लादेशी कर्मचारियों ने काम छोड़ा

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में संदिग्ध बांग्लादेशियों पर निगरानी तेज होने के साथ ही इसका बड़ा असर दिखना शुरू हो गया है। योगी सरकार की सख्ती के बाद सफाई कार्य से जुड़े संदिग्ध बांग्लादेशियों से एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर) नंबर मांगा गया तो वे नंबर दे नहीं पाए और नौकरी छोड़कर भाग खड़े हुए। एनआरसी ही हकीकत बताने का तरीका एनआरसी नंबर असम सरकार द्वारा दिया गया है, जिसमें पूर्वजों तक का जिक्र होता है, जो यह साबित करता है कि वे बांग्लादेशी घुसपैठ नहीं हैं। आधार कार्ड तो हर किसी के पास होता है, लेकिन एनआरसी उन्हीं के पास है जो लंबे समय से असम के निवासी थे। कूड़ा प्रबंधन का काम देख रही नगर निगम की तरफ से अधिकृत संस्था मेसर्स लखनऊ स्वच्छता अभियान प्रबंधन ने सफाई कर्मचारियों से जब एनआरसी नंबर मांगा, तो उनमें से 160 कर्मी नंबर दे नहीं पाए और दबाव पड़ने पर नौकरी छोड़कर चले गए। इससे स्पष्ट होता है कि उनकी असम की नागरिकता संदिग्ध है। पुलिस और खुफिया तंत्र के लिए अब यह जांच का विषय है कि आखिर ये 160 कर्मी कहाँ गए और क्या कर रहे हैं। नगर निगम में भगदड़ और जोनवार आंकड़े दरअसल, पिछले कुछ समय से सक्रिय हुई सरकार के कारण संदिग्ध बांग्लादेशियों में भगदड़ मच गई है। महापौर सुषमा खर्कवाल ने भी एक साल से संदिग्ध बांग्लादेशियों को शहर से बाहर करने का अभियान चला रखा है। पिछले साल उन्होंने इंदिरानगर में संदिग्ध बांग्लादेशियों की बस्ती को उजाड़ दिया था। पिछले दो माह से सख्ती बढ़ने के बाद पुलिस ने नगर निगम में ठेका पाई संस्थाओं से असम का निवासी बताने वाले कर्मचारियों का एनआरसी मांगा था। लखनऊ स्वच्छता अभियान में काम कर रहे ये कर्मचारी आधार कार्ड दिखाने के बावजूद एनआरसी नहीं दे पाए। कहां से कितने कर्मी काम छोड़कर भागे (नगर निगम के जोन)     जोन एक – 38     जोन चार – 70     जोन तीन – 12     जोन छह – 12     जोन सात – 36 कंपनी ने इसकी जानकारी महापौर को भी दी है। महापौर ने कंपनी से कहा है कि काम छोड़कर गए कर्मचारियों की गतिविधियां पता करने के लिए पुलिस को उनके मोबाइल नंबर और आधार कार्ड भी उपलब्ध कराए जाएं। फर्जीवाड़ा और एटीएस की कार्रवाई गौरतलब है कि हाल ही में आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) ने ठाकुरगंज के बरौरा हुसैनबाड़ी में हिंदू बनकर रह रही एक बांग्लादेशी महिला को गिरफ्तार किया था। नरगिस उर्फ जैसमीन उर्फ निर्मला नाम की यह महिला 2006 में बांग्लादेशी पति के साथ भारत में दाखिल हुई थी। वह फर्जी दस्तावेज बनवाकर निर्मला बनकर रहने और हिंदू त्योहार मनाने के साथ पूजा भी करती थी।

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी को मिला विकास का बड़ा तोहफ़ा, सीएम बोले—आदिवासी हित सर्वोपरि

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में केंद्र सरकार एवं छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासियों के हितों की रक्षा और उनके सर्वांगीण विकास के लिए कृतसंकल्पित है। मुख्यमंत्री आज मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के अंबागढ़ चौकी में आयोजित जनजाति गौरव दिवस एवं प्रतिभा सम्मान समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री साय ने इस मौके पर 475 करोड़ रुपए से अधिक विकास कार्यों का भूमि पूजन एवं लोकार्पण किया। उन्होंने अंबागढ़ चौकी को राजस्व अनुभाग बनाने तथा अंबागढ़ चौकी में सर्व सुविधायुक्त ऑडिटोरियम निर्माण की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने महतारी वंदन योजना की लाभार्थी महिलाओं के खाते में 22वीं किस्त की राशि का अंतरण भी किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने की। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण और जनजाति समाज के कल्याण में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र व राज्य सरकार के द्वारा जनजातीय और विशेष पिछड़ी जनजातियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य किये जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री जनमन एवं ग्राम उत्कर्ष योजना के अंतर्गत जनजातीय परिवारों को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए सभी प्रकार की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी 13 दिसंबर को छत्तीसगढ़ सरकार के दो वर्षों का कार्यकाल पूर्ण होने जा रहा है। हमारी सरकार ने दो वर्षों के कार्यकाल में मोदी की गारंटी के तहत किए गए सभी वायदों को पूरा किया है। महतारी वंदन योजना के तहत प्रतिमाह माता-बहनों के खातों में हर माह 1000 रुपए की राशि अंतरित की जा रही है। किसानों से 3100 रुपए की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी के साथ ही तेंदूपत्ता संग्रहण दर प्रति मानक बोरा 5500 रुपए का भुगतान किया जा रहा है। तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए चरण पादुका का वितरण फिर से शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के द्वारा देश एवं राज्य के विकास में सबसे बड़ी बाधा माओवाद को मार्च 2026 तक समाप्त करने का संकल्प लिया गया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा केंद्र सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर माओवाद आतंक से मुक्त करने की दिशा में अत्यंत ठोस एवं सार्थक कार्य किया जा रहा हैं। जल्द ही छत्तीसगढ़ राज्य माओवाद के आतंक से मुक्त हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने भगवान बिरसा मुंडा को आदिवासी समाज सहित संपूर्ण भारतवर्ष का गौरव बताते हुए, स्वाधीनता आंदोलन एवं राष्ट्र के नव निर्माण में जनजाति समाज के महापुरुषों एवं राष्ट्र भक्तों के योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरगुजा में आयोजित भगवान बिरसा मुंडा के जयंती के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आगमन हम सभी के लिए सौभाग्य एवं गर्व का विषय है। छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार के जनकल्याणकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के परिणाम स्वरूप छत्तीसगढ़ राज्य में भी व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में जनजाति समाज के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ में विकास नई इबारत लिखी जा रही है। जिसके फलस्वरूप आज बस्तर से लेकर सरगुजा तक राज्य के प्रत्येक क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहा है। इस मौके पर उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार की जनहितैषी कार्यों और नीतियों की विस्तार से जानकारी दी। समारोह को उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, सांसद संतोष पांडे, जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह और जनजाति समाज के प्रदेश अध्यक्ष एमडी ठाकुर ने भी सम्बोधित किया। समारोह में विभिन्न क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले जनजातीय समाज के प्रतिभाओं को सम्मानित करने के अलावा प्रधानमंत्री आवास के हितग्राहियों को आवास पूर्णता प्रमाण पत्र एवं विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफलता अर्जित करने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को भी प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विधायक भोलाराम साहू, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा सहित कई पूर्व विधायक, पंचायत एवं नगरीय संस्थाओं के जनप्रतिनिधि, सामाजिक बंधु और बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

उम्र बढ़ी, प्रदर्शन और निखरा—35+ खिलाड़ियों में ODI का बादशाह विराट कोहली

नई दिल्ली  विराट कोहली के लिए सच में उम्र महज एक नंबर है। 35 वर्ष की उम्र के बाद बल्लेबाज आम तौर पर स्लो पड़ जाते हैं। उनके खेल पर बढ़ती उम्र का असर साफ दिखने लगता है लेकिन विराट कोहली लगता है अपवाद हैं। उम्र के साथ उनका खेल जैसे और ज्यादा निखरता जा रहा है। जिस उम्र में बल्लेबाजों के रिफ्लेक्सेज कमजोर हो जाते हैं। खेल पर उम्र हावी होने लगती है। उस उम्र में कोहली अपनी चुस्ती-फुर्ती से युवाओं का कान काट रहे। यकीन न हो तो आंकड़ों को देख लीजिए। वह 35 साल की उम्र के बाद वनडे में सबसे ज्यादा औसत से रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मौजूदा वनडे सीरीज में वह बैक टु बैक शतक जड़ चुके हैं।   35 साल की उम्र के बाद ओडीआई में सबसे ज्यादा औसत से रन बनाने के मामले में विराट कोहली शीर्ष पर हैं। उन्होंने 35 वर्ष पूरे करने के बाद अब तक 19 ओडीआई मैच खेले हैं जिनमें 60.43 के औसत से रन बनाए हैं। इस दौरान उन्होंने 5 शतक जड़े हैं। कोहली के पूरे ओडीआई करियर की बात करें तो उनका औसत 58.20 का है। कुमार संगकारा 35 वर्ष की उम्र के बाद खेले वनडे मैचों में सबसे ज्यादा औसत वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में श्रीलंका के कुमार संगकारा दूसरे नंबर पर हैं। उन्होंने इस दौरान 71 वनडे मैच खेले और उनका औसत 57.49 का रहा। इस दौरान उन्होंने वनडे में 11 शतक भी जड़े। डेविड मलान लिस्ट में तीसरे नंबर पर इंग्लैंड के डेविड मलान हैं। उन्होंने 35 वर्ष की उम्र पूरी करने के बाद 21 ओडीआई खेले। इनमें उनका औसत 56.55 का रहा। इस दौरान उन्होंने 5 शतक भी जड़े। मैथ्यू हेडन ऑस्ट्रेलिया के मैथ्यू हेडन लिस्ट में चौथे नंबर पर हैं। उन्होंने 35 साल की उम्र के बाद 40 ओडीआई खेले। इस दौरान उन्होंने 54.25 के औसत से रन बनाए और 5 शतक भी जड़े। जहीर अब्बास पाकिस्तान के जहीर अब्बास इस लिस्ट में पांचवें नंबर पर हैं। उन्होंने 35 साल की उम्र पूरी करने के बाद 33 ओडीआई खेले। इनमें उन्होंने 52.07 के औसत से रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 5 शतक जड़े। सचिन तेंदुलकर महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर इस लिस्ट में छठे नंबर पर हैं। उन्होंने 35 साल की उम्र पूरी करने के बाद 46 ओडीआई खेले। इस दौरान उन्होंने 49.19 के औसत से रन बनाए और 7 शतक जड़े।  

रायपुर में डीजीपी-आईजी कांफ्रेंस: AI का इस्तेमाल कर पुलिसिंग को बनाया जाएगा भविष्य तैयार

भोपाल  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जमाने में पुलिस भी बदलेगी। एआई की मदद से पुलिस यह पूर्वानुमान लगा सकेगी कि किस जगह, किस समय, किस तरह का अपराध घटित हो सकता है। पहले के आंकड़ों के आधार पर एआई यह अनुमान लगा सकेगा। ऐसे ही किसी समय के ट्रैफिक का वाल्यूम यानी वाहनों की संख्या के आधार पर यह अनुमान लगाया जा सकेगा कि सड़क दुर्घटना आशंका कहां-कहां है। इससे पुलिस घटनाएं रोकने पर ध्यान केंद्रित कर सकेगी। दरअसल, देशभर की पुलिसिंग में 'प्रेडेक्टिव पुलिसिंग' माडल अपनाने पर विचार चल रहा है। पिछले सप्ताह रायपुर में हुई डीजीपी-आईजी कान्फ्रेंस में मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने 'फ्यूचर रेडी पुलिसिंग 2047' को लेकर विजन प्रस्तुत किया। क्राइम प्रिवेंशन एवं डिटेक्शन पर दिया प्रजेंटेंशन उन्होंने बताया कि एआई का उपयोग कर पुलिस अपराध की आशंका आदि बता सकती है। इसे लेकर उन्होंने 'क्राइम प्रिवेंशन एवं डिटेक्शन' विषय पर प्रजेंटेशन दिया। इसी में एआई मॉडल पर चर्चा हुई। कहा गया कि राज्य इस मॉडल का परीक्षण कर अपने-अपने स्तर पर लागू कर सकेंगे। कान्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल थे। डीजीपी मकवाणा ने 'फ्यूचर रेडी पुलिसिंग 2047' के अंतर्गत 'कम्युनिटी पुलिसिंग और पब्लिक ट्रस्ट' विषय पर बताया कि पुलिस आमजन से बेहतर संवाद रखकर कैसे उनका भरोसा जीत सकती है। संवाद को लेकर नवाचार किए बता दें कि डीजीपी बनने के बाद से ही उनका इस पर विशेष ध्यान रहा है। कई जिलों में पुलिस अधीक्षकों ने आमजन से संवाद को लेकर नवाचार भी किए हैं। कांफ्रेस में भी उन्होंने 'नशे से दूरी' अभियान सहित अन्य नवाचारों के बारे में बताया। कांफ्रेंस में उभरते साइबर अपराध, भीड़ प्रबंधन, वैज्ञानिक अन्वेषण, टेक्नोलाजी-इंटीग्रेशन, साइबर सुरक्षा, नागरिक-सहभागिता जैसे विषयों पर चर्चा हुई। मकवाणा ने डेटा-संचालित निर्णय प्रक्रिया, आपदा प्रबंधन प्रणालियां और युवाओं की सकारात्मक भागीदारी जैसे बिंदुओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक पुलिसिंग तभी प्रभावी हो सकती है जब उसमें तकनीक और मानवीय संवेदना दोनों का संतुलित समावेश हो।

कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या बढ़ेगी, CM मोहन यादव तीन चीते करेंगे रिलीज

 श्योपुर  इंटरनेशनल चीता-डे के अवसर पर आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कूनो नेशनल पार्क में तीन चीतों को खुले जंगल में छोड़ेंगे। कार्यक्रम की तैयारियों का निरीक्षण श्योपुर और शिवपुरी जिलों के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने किया। कलेक्टर अर्पित वर्मा और एसपी सुधीर अग्रवाल ने कूनो पार्क के अहेरा गेट, हेलीपैड और चीता रिलीज प्वाइंट पर व्यवस्थाओं को परखा। अधिकारियों ने शिवपुरी जिले के अहेरा गांव के पास बने अस्थायी हेलीपैड का भी निरीक्षण किया। शिवपुरी कलेक्टर रविन्द्र चौधरी और एसपी अमन सिंह राठौर भी इस दौरान मौजूद रहे। टीम ने आगमन मार्ग से लेकर रिलीज स्थल तक सुरक्षा, यातायात नियंत्रण और वन विभाग की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। जानकारी के अनुसार सीएम मोहन यादव आज गुरुवार दोपहर को लगभग 2:30 बजे श्योपुर पहुंचेंगे। अधिकारियों ने निर्देश दिए कि कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल और पर्यावरण नियमों का सख्ती से पालन किया जाए। श्योपुर के कलेक्टर, एसपी और वन विभाग की संयुक्त टीम ने चीता रिलीज प्वाइंट पर सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया। डीएफओ आर. थिरुकुराल, एएसपी प्रवीण भूरिया और अन्य अधिकारियों ने भी निरीक्षण में भाग लिया। वन विभाग ने बताया कि उन्नत ट्रैकिंग सिस्टम, निगरानी टीम और सुरक्षा उपकरणों की तैनाती कर दी गई है, ताकि चीतों की मूवमेंट पर लगातार नजर रखी जा सके। कूनो नेशनल पार्क में इस समय कुल 29 चीते हैं, जिनमें से 16 पहले से खुले जंगल में घूम रहे हैं। एनक्लोजर में रखे चीतों में से तीन मादा चीता वीरा और उसके दो 10 महीने के शावकों को खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। रिलीज का उद्देश्य चीतों को प्राकृतिक वातावरण में ढालना, उन्हें जंगली व्यवहार के अनुकूल बनाना और प्राकृतिक शिकार पर निर्भरता बढ़ाना है। मुख्यमंत्री यादव इस अवसर पर कूनो नेशनल पार्क का 2026 कैलेंडर जारी करेंगे। इसके साथ ही “फ्री-रेंजिंग चीतों के क्लिनिकल मैनेजमेंट के लिए फील्ड मैनुअल” भी लॉन्च किया जाएगा।पार्क में बनी नई सुविनियर शॉप का उद्घाटन भी इसी मौके पर किया जाएगा, जिससे पर्यटकों के अनुभव को और समृद्ध करने के साथ ही संरक्षण जागरूकता को बढ़ावा मिलेगा।