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पंजाब को आर्थिक संजीवनी? AAP सांसद मलविंदर सिंह कंग ने केंद्र से मांगा ₹50 हजार करोड़ का पैकेज

चंडीगढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) ने पंजाब में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद केंद्र की BJP सरकार द्वारा की जा रही घोर उपेक्षा और भेदभाव को संसद में बेनकाब किया है। AAP सांसद मलविंदर सिंह कंग ने बुधवार को लोकसभा सत्र के दौरान पंजाब में हुए भारी नुकसान का मुद्दा उठाया और BJP के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए तत्काल ₹50,000 करोड़ का विशेष राहत पैकेज जारी करने की मांग की। आनंदपुर साहिब से सांसद कंग ने सीधे तौर पर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित छह जिलों के 2,500 गाँवों को दो महीने बीत जाने के बाद भी केंद्र से एक रुपया भी नहीं मिला है। सांसद कंग ने सदन को बताया कि कुछ महीने पहले पंजाब में आई भयंकर बाढ़ ने लगभग 2,500 गाँवों को पूरी तरह तबाह कर दिया है और 5 लाख एकड़ से अधिक फसलें बर्बाद हो गई हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सबसे गंभीर असर सीमावर्ती (बॉर्डर) जिलों में पड़ा, और याद दिलाया कि ये वही जिले हैं जिनके लोगों ने 'ऑपरेशन संदूर' के दौरान भारतीय सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश की लड़ाई लड़ी थी। कंग ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री और भारत सरकार के तमाम मंत्री बाढ़ के बाद पंजाब का दौरा करने आए, लेकिन दो महीने बाद भी इन छह जिलों के लोगों को दोबारा पैरों पर खड़ा करने के लिए कोई आर्थिक मदद नहीं दी गई। उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए केंद्र की दोहरी नीति पर सवाल उठाया: "जब बिहार में चुनाव होते हैं तो आप ₹50,000 करोड़, ₹70,000 करोड़ और यहाँ तक कि ₹90,000 करोड़ के पैकेज की बोलियाँ लगाते हैं।" उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि पंजाब, जिसने देश की आज़ादी की लड़ाई में और देश के अन्न भंडार को भरने में सबसे बड़ा योगदान दिया, उसे संकट के समय अकेला छोड़ दिया गया है। उन्होंने इसे "सबसे बड़ा भेदभाव" बताया और इसके लिए BJP सरकार को जिम्मेदार ठहराया। सांसद कंग ने हरियाणा और राजस्थान की सरकारों की भी आलोचना की, जो पंजाब के पानी का हिस्सा मांगती हैं, लेकिन आपदा के इस समय में पंजाब का साथ देने में विफल रहीं। AAP सांसद ने BJP सरकार से तत्काल ₹50,000 करोड़ का विशेष पैकेज जारी करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह राशि पंजाब के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए, जिनके घर, अस्पताल, सड़कें और पूरा बुनियादी ढांचा नष्ट हो गया है, और जिनकी 5 लाख एकड़ फसलें बर्बाद हो गईं हैं, बेहद ज़रूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फंड खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को फिर से अपने पैरों पर खड़ा होने और खुद का पुनर्वास करने में मदद करेगा, जो राष्ट्र के लिए लड़ते हैं। AAP सरकार इस अन्याय के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगी और केंद्र को पंजाब का हक़ देना ही होगा।

अधिकारियों की अनदेखी पर मेयर का फूटा गुस्सा, मंत्री पंवार के समक्ष रखी पीड़ा

हिसार  हिसार में बीते दिन शुक्रवार को ग्रीवांस कमेटी की बैठक हुई। बैठक में कैबिनेट मंत्री कृष्ण पंवार पहुंचे। जहां उन्होंने समस्याएं सुनी। शहर की महाबीर कॉलोनी में 2 साल से लीक सीवरेज समस्या का परिवाद सामने आया। परिवादी ने कहा कि यहां सीवरेज लाइन पुरानी है और लंबे समय से लीक है। कई बार मेयर प्रवीण पोपली को भी अवगत करवाया जा चुका है। बैठक में मौजूद मेयर प्रवीण पोपली ने कहा कि परिवादी बिल्कुल ठीक कह रहे हैं। यह समस्या यहां लंबे समय से है।  जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी गुमराह कर रहे हैं। अफसरों को 20 बार फोन करो तब भी नहीं सुनते हैं। जनता के सामने हमें सुनना पड़ता है। एसई जनस्वास्थ्य विभाग ने कहा कि महाबीर कॉलोनी सीवरेज लाइन की रिपेयर के लिए टेंडर कर दिया है, लेकिन इसके स्थाई समाधान के लिए लाइन को बड़ा करना होगा, इसे अमरुत प्रोजेक्ट के तहत रिप्लेस करने के लिए प्रपोजल हाई पावर परचेज कमेटी के पास भेजा हुआ है।

राजभवन की नई पहचान: पंजाब में बदला नाम, अब ‘लोक भवन’ के नाम से जाना जाएगा

चंडीगढ़ पंजाब के राजभवन को अब से लोक भवन पंजाब के नाम से जाना जाएगा। मिनिस्ट्री आफ होम अफेयर्स की ओर से पंजाब राजभवन को नाम बदलने को लेकर 25 नवंबर को पत्र प्राप्त हुआ था। राज्यपाल  गुलाब चंद कटारिया ने “राज भवन” से “लोक भवन” में देशभर में हो रहे परिवर्तन का स्वागत किया. प्रिंसिपल सेक्रेटरी टू गवर्नर पंजाब विवेक प्रताप सिंह की ओर से इस संबंध में वीरवार को नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। पंजाब के राज्यपाल और यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने पंजाब राजभवन में आयोजित कई राज्यों के स्थापना दिवस समारोह में भी इस बदलाव को लेकर मेहमानों को जानकारी दी थी। केंद्र सरकार की ओर से हाल ही में दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास सहित कुछ अन्य आवास के नाम बदलने का फैसला लिया है। केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद ही पंजाब राजभवन को लोक भवन पंजाब नाम दिया गया है। लोक भवन पंजाब, चंडीगढ़ में वीरवार शाम “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” पहल के तहत उत्तराखंड, झारखंड, असम और नागालैंड का स्थापना दिवस मनाया गया। राज्यपाल  गुलाब चंद कटारिया ने “राज भवन” से “लोक भवन” में देशभर में हो रहे परिवर्तन का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि ऐसा नामकरण भारत की लोकतांत्रिक भावना और जनता की भागीदारी की आत्मा को दर्शाता है। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल की 562 रियासतों के एकीकरण और भारत को विभाजित करने की औपनिवेशिक साजिशों को विफल करने में उनकी ऐतिहासिक भूमिका को याद किया।    

युवाओं के लिए खुशखबरी! एमपी में 5 हजार होमगार्ड भर्ती का सीएम मोहन यादव ने किया ऐलान

भोपाल  मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा स्थापना दिवस के मौके पर होमगार्ड को अनेक सौगातें देते हुए कहा कि उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ के मद्देनजर पांच हजार जवानों की भर्ती की जाएगी। राजधानी के जहांगीराबाद स्थित होमगार्ड परेड मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री यादव ने परेड की सलामी ली, उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले अधिकारियों एवं जवानों को सम्मानित किया तथा प्रदेश में नागरिक सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने में होमगार्ड संगठन की भूमिका की सराहना की। इस मौके पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि होमगार्ड जवानों ने अपनी जिम्मेदारियों का बेहतर तरीके से निर्वाहन किया है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत प्रदेश सरकार ने 5,000 से अधिक होमगार्ड जवानों की भर्ती का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि होमगार्ड के जवान कानून व्यवस्था, आपात स्थितियों के अलावा हर चुनौती में समर्पण और साहस का अद्भुत परिचय देते है। होम और गार्ड है यानी कि घर का प्रहरी है। सभी काम के लिए कार्यरत जवानों का कोई समूह है तो वह होमगार्ड है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि ये सिर्फ अपने आउटफिट के आधार पर पहचान बनाने वाला बल नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रधर्म का भी प्रतीक है। आपदा और विपदा में अपनी भूमिका निभाने वाला समूह है। राज्य में जब भी किसी तरह की समस्या आई होमगार्ड के जवानों ने अपनी जिम्मेदारी को पूरी मुस्तैदी के साथ निभाया है। बाढ़ की समय हो या कोई और आपदा, होमगार्ड के जवान अपने अभियान में जुटे रहे। अनेक लोगों का जीवन बचाने में मदद की। वहीं सीएम मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा,'' प्रदेश में विशेष पिछड़ी जनजाति के युवाओं को होमगार्ड में भर्ती हेतु बैगा, भारिया और सहरिया बटालियन पर भी हम विचार कर रहे हैं। आज होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा स्थापना दिवस समारोह में परेड का निरीक्षण किया और जवानों को 'मुख्यमंत्री अदम्य साहसिक कार्य पुरस्कार' से सम्मानित किया।''

HTLS मंच से रेखा गुप्ता का संदेश: प्रदूषण पर तेजी से हो रहा काम, समाधान भी जल्द

नई दिल्ली  दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में पलूशन और स्मॉग है लेकिन यह आज ही है ऐसा नहीं है। यह एक वर्षों से चली आ रही समस्या है। इसमें कई सारे फैक्टर काम करते हैं। इसको बढ़ाने में परिवहन, ओपन बर्निंग, डस्ट तमाम फैक्टर काम करते हैं। ऐसा नहीं है कि कुछ जादू की छड़ी घूमने से झटके में पलूशन खत्म हो जाने वाला है। पलूशन खत्म करना एक रेगुलर प्रॉसेस है। सीएम रेखा गुप्ता समिट 2025 में बोल रही थीं। उनसे पूछा गया कि दिल्ली से पलूशन कब खत्म होगा। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में पलूशन एक लिगेसी प्रॉब्लम है। यह बरसों बरस से चली आ रही समस्या है। दिल्ली में पलूशन बढ़ने की कई वजहें हैं। सीएम ने आगे कहा कि दिल्ली एक बड़ा शहर है जिसकी आबादी लगातार बढ़ रही है। इसी तरह पहले जो ट्रैफिक हुआ करता था आज यह उसके कई गुना ज्यादा है। पहले जितनी गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन हुआ करता था आज उससे तीन गुना ज्यादा हुआ करता है। ये सारी स्थितियां लगातार चल रही हैं। पलूशन में कोई एक इनपुट काम नहीं करता है। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि इसमें ओपन बर्निंग भी काम करती है। इसमें डस्ट भी काम करती है। इसमें ट्रैफिक भी काम करता है। इस तरह मिलकर एक बड़ी समस्या के रूप में पलूशन बन जाता है। ऐसा भी नहीं कि आज कोई जादू की छड़ी घूम जाने से यह समस्या खत्म हो जाने वाली है। पलूशन को खत्म करने की एक सतत प्रक्रिया है। आप इस दिशा में आज कुछ करते हैं, कल उससे ज्यादा ताकत से इस पर काम करते हैं। इस तरह एक प्रक्रिया है। समिट में बोलते हुए दिल्ली की CM रेखा गुप्ता ने कहा कि इस तरह से बीते 10 महीनों में हमारी सरकार ने वो तमाम कदम उठाए जो जरूरी थे। हमने पलूशन खत्म करने की दिशा में वो तमाम काम किए जो पिछली सरकारों ने नहीं किए। शायद इसीलिए यह लिगेसी प्रॉब्लम के तौर पर यह समस्या आज भी हमारे सामने है। अन्यथा यह खत्म हो गई होती। दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि कांग्रेस सरकारों के जमाने में भी ऐसे ही पलूशन होता था।

शेख हसीना के भारत प्रवास पर सस्पेंस खत्म! जयशंकर का तंज और बांग्लादेश को कड़ा संदेश

नई दिल्ली  भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को पूर्व बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत में ठहरने को उनकी निजी पसंद बताया। उन्होंने कहा कि इसका निर्णय उन परिस्थितियों से प्रभावित है जिनके चलते वे भारत आईं। 78 वर्षीय शेख हसीना पिछले साल अगस्त में भारत आई थीं, जब बांग्लादेश में उनकी 15 साल की सत्ता का अंत हिंसा के बीच हुआ था। इस हिंसा में सैकड़ों लोगों की मौत हुई और हजारों घायल हुए थे। पिछले महीने ढाका की एक विशेष अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। शनिवार को समिट 2025 के आखिरी दिन चर्चा के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शेख हसीना के भारत में लंबे समय तक रहने और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर विस्तार से बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि शेख हसीना का भारत में रहना मूलतः उनका व्यक्तिगत फैसला है, लेकिन जिन परिस्थितियों में वे सत्ता छोड़कर भारत आईं वे इस फैसले के पीछे महत्वपूर्ण कारक हैं। जयशंकर ने कहा- वह एक खास परिस्थिति में यहां आई थीं और मुझे लगता है कि वह परिस्थिति स्पष्ट रूप से इस बात में भूमिका निभाती है कि उनके साथ आगे क्या होगा। लेकिन फिर भी, अंतिम फैसला उन्हें ही करना है। “जितनी देर चाहें, भारत में रह सकती हैं हसीना” विदेश मंत्री ने यह भी दोहराया कि भारत ने शेख हसीना को आश्वासन दिया है कि वह जब तक चाहें, भारत में रह सकती हैं। भारत सरकार ने पहले भी कई बार कहा है कि मानवीय आधार पर हसीना को शरण दी गई है और उनकी सुरक्षा तथा सुविधा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। बांग्लादेश में विश्वसनीय लोकतांत्रिक प्रक्रिया की जरूरत पर जोर भारत-बांग्लादेश संबंधों के संदर्भ में जयशंकर ने पड़ोसी देश में लोकतंत्र की मजबूती पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान अंतरिम सरकार के नेताओं ने खुद माना था कि उनका मुख्य विरोध पिछले चुनावों (जनवरी 2024) के तरीके से था। जयशंकर ने तंज कसते हुए कहा- हमने सुना था कि बांग्लादेश के लोगों, खासकर जो अब सत्ता में हैं, उनको पहले हुए चुनाव कराने के तरीके से समस्या थी। अगर समस्या चुनाव था, तो सबसे पहला काम तो एक निष्पक्ष और विश्वसनीय चुनाव कराना होना चाहिए। संबंधों के भविष्य को लेकर आशावादी विदेश मंत्री ने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर आशा जताई है। उन्होंने कहा- भारत की शुभकामना है कि बांग्लादेश तरक्की करे। एक लोकतांत्रिक देश के रूप में हम चाहते हैं कि पड़ोसी देश में भी जनता की इच्छा का सम्मान लोकतांत्रिक प्रक्रिया से हो। उन्होंने आगे कहा- मुझे पूरा विश्वास है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जो भी परिणाम आएगा, उसमें भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर संतुलित और परिपक्व दृष्टिकोण होगा और उम्मीद है कि रिश्ते और बेहतर होंगे। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने कई बार शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की है, लेकिन भारत ने अब तक इस पर कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत हसीना को प्रत्यर्पित करने के बजाय बांग्लादेश में स्थिर और भारत-अनुकूल सरकार की वापसी की प्रतीक्षा कर रहा है। फिलहाल, शेख हसीना का भारत में रहना और दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध अगले कुछ महीनों में होने वाले संभावित चुनावों पर काफी हद तक निर्भर करेंगे।

‘कानून से ऊपर कोई नहीं’— सीएम योगी की दो टूक, माफियाओं को फिर दी कड़ी चेतावनी

नई दिल्ली  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुलडोजर ऐक्शन को लेकर अपनी नीति पर खुलकर बात रखी। समिट 2025 के आखिरी दिन हुई चर्चा में योगी ने स्पष्ट कहा कि अवैध निर्माणों और माफिया कारोबार के खिलाफ बुलडोजर की कार्रवाई यूपी में तब तक जारी रहेगी, जब तक कानून-व्यवस्था मजबूत न हो जाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत का सबसे बड़ा राज्य अब 'एक जिला, एक माफिया' वाला राज्य नहीं रहा, बल्कि यह एक जिला, एक उत्पाद और एक जिला, एक मेडिकल कॉलेज वाला राज्य बन गया है। जब योगी से पूछा गया कि 'आप बुलडोजर को वास्तु पुरुष यानी यमराज मानते हैं तो क्या इनका संरक्षण जारी रहेगा उत्तर प्रदेश में?' इस सवाल का जवाब देते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'यह उत्तर प्रदेश की आवश्यकता है। उत्तर प्रदेश के नौजवानों के लिए, उत्तर प्रदेश की बेटियों की सुरक्षा के लिए, उनके स्वावलंबन के लिए, उत्तर प्रदेश के अन्नदाता किसानों की खुशहाली के लिए और उत्तर प्रदेश के नागरिकों की पहचान को बनाए रखने के लिए जो भी आवश्यक कदम होंगे, जो भी महत्वपूर्ण सुधार होंगे और जो भी सख्त कदम होंगे… उनको उठाने में कोई संकोच नहीं होगा।' उन्होंने कहा कि सरकार अपनी जीरो-टॉलरेंस की नीति के तहत आगे बढ़ती रहेगी। योगी आदित्यनाथ ने कहा- हम हर जगह पहुंचेंगे इससे पहले योगी आदित्यनाथ ने काशी और मथुरा जैसे विवादित धार्मिक स्थलों पर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उनसे जब यह पूछा गया कि क्या सरकार अयोध्या के बाद अब काशी और मथुरा को लेकर भी कदम बढ़ा रही है, तो उन्होंने कहा- सब जगह पहुंचेंगे, और पहुंच चुके हैं। यह टिप्पणी उस लोकप्रिय नारे के संदर्भ में आई, जिसमें कहा जाता है- अयोध्या तो बस झांकी है, काशी-मथुरा अभी बाकी है। यह नारा ज्ञानवापी मस्जिद (वाराणसी) और शाही ईदगाह मस्जिद (मथुरा) से जुड़े विवादों की ओर संकेत करता है, जहां हिंदू पक्ष लंबे समय से दावा करता रहा है कि प्राचीन मंदिरों को तोड़कर ये मस्जिदें बनाई गई थीं। 8 साल के कार्यकाल पर बोले योगी आदित्यनाथ कार्यक्रम के दौरान योगी आदित्यनाथ ने अपने आठ साल लंबे कार्यकाल को लेकर कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और इतने वर्षों में प्रदेश ने कई बड़े बदलाव देखे हैं। उन्होंने कहा- आठ साल में उत्तर प्रदेश में बहुत परिवर्तन आया है और मैं उस परिवर्तन का हिस्सा बनकर खुश हूं। ‘मास्टरस्ट्रोक’ पर सवाल- राम मंदिर को बताया सबसे ऐतिहासिक उपलब्धि जब उनसे पूछा गया कि इतने लंबे कार्यकाल में ऐसा क्या एक काम है जिसे ‘मास्टरस्ट्रोक’ कहा जा सकता है, तो मुख्यमंत्री ने कहा कि उपलब्धियों की सूची बहुत लंबी है, इसलिए एक को चुनना मुश्किल है। लेकिन उन्होंने अयोध्या में 500 साल बाद राम मंदिर निर्माण को अपने जीवन का सबसे ऐतिहासिक क्षण बताया। योगी ने कहा- जब कार्यकाल लंबा होता है तो उपलब्धियों की सूची भी लंबी होती है। एक चीज़ चुनना चुनौती है, लेकिन 500 वर्षों के बाद श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण मेरे करियर का एक प्रतिष्ठित क्षण था।

मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन, चुनौतियों एवं संभावनाओं पर एक दिवसीय कार्यशाला 7 दिसम्बर को

  राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह होंगे शामिल भोपाल मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन, उससे जुड़ी चुनौतियों और संभावनाओं पर विचार-विमर्श के लिये दिनांक 7 दिसंबर, 2025 को कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर भोपाल में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। मुख्य अतिथि राज्यपाल मंगुभाई पटेल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अध्यक्षता करेंगे। विशिष्ट अतिथि के रूप में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार तथा स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह उपस्थित रहेंगे। कार्यशाला का आयोजन उच्च शिक्षा विभाग द्वारा किया जा रहा है। आयुक्त, उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा ने बताया कि राज्य सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, संरचनात्मक सुधार, अकादमिक उन्नयन और संस्थागत तत्परता को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर कार्यरत है। कार्यशाला का उद्देश्य नीति की गहन समझ विकसित करना, क्रियान्वयन की प्रगति का मूल्यांकन करना, संस्थागत चुनौतियों की पहचान करना तथा पाठ्यक्रम सरलीकरण, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, शोध एवं नवाचार, और उद्योग-अकादमिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करना है। कार्यशाला में होंगे 5 सत्र कार्यशाला में कुल पांच सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें निम्न विषयों पर शिक्षाविदों और विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत विचार-विमर्श होगा। 1. एनईपी 2020 के माध्यम से उच्च शिक्षा का रूपांतरण, संरचनात्मक सुधार एवं संस्थागत तत्परता 2. पाठ्यक्रम एवं शिक्षण विधि में सुधार, लचीलापन, कौशल एकीकरण एवं परिणाम-आधारित शिक्षा 3. मध्यप्रदेश में विदेशी विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना, नीतिगत प्रावधान, संभावनाएं एवं गुणवत्ता संवर्धन 4. विद्यालयीन शिक्षा में एनईपी 2020 के तहत परिवर्तन 5. विद्यालयों में एआई और कौशल निर्माण की भूमिका इन सत्रों के माध्यम से प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एक व्यावहारिक एवं क्रियाशील रोडमैप तैयार किया जाएगा, जिससे वे अपनी शैक्षणिक, प्रशासनिक और डिजिटल संरचनाओं को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप सुदृढ़ कर सकें। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 देश की उच्च शिक्षा प्रणाली में व्यापक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करती है, जिसमें बहुविषयी शिक्षण, लचीलापन, कौशल-आधारित शिक्षा, डिजिटल लर्निंग, शोध संवर्धन और वैश्वीकरण को विशेष महत्व दिया गया है। आयुक्त स्कूल शिक्षा श्रीमती शिल्पा गुप्ता ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का सफल क्रियान्वयन मध्यप्रदेश में किया जा रहा है। सांदीपनि विद्यालय की स्थापना एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारतीय ज्ञान परंपरा मूल्य आधारित शिक्षा और तकनीक सक्षम अधिगम के समन्वय का एक उत्कृष्ट मॉडल प्रस्तुत करेगा। स्कूल शिक्षा विभाग NEP-2020 के लक्ष्यों को संयुक्त रूप से प्राप्त करने की दिशा में शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, मूल्यांकन सुधार और नवाचार-आधारित अधिगम को बढ़ावा दे रहे हैं।  

न्याय पहुंचेगा अब और करीब: 5 जिलों में लेबर कोर्ट स्थापना को सरकार की मंजूरी

चंडीगढ़ श्रम संबंधी विवादों के जल्द निपटारे के लिए सोनीपत, पलवल, रेवाड़ी, झज्जर व बावल में श्रम न्यायालय स्थापित किए जाएंगे। इससे श्रमिकों को समयबद्ध न्याय मिल सकेगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस संबंध में अधिकारियों दिशा-निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इन न्यायालयों के गठन में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह निर्देश वित्त वर्ष 2025-26 की बजट घोषणाओं की प्रगति की समीक्षा बैठक के दौरान दिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सोनीपत और करनाल में प्रस्तावित ईएसआई अस्पतालों के निर्माण को भी प्राथमिकता के साथ पूरा करवाया जाए। इन दोनों अस्पतालों के निर्माण से प्रदेश के श्रमिकों, औद्योगिक क्षेत्रों और आसपास के नागरिकों को बेहतर एवं आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। में अधिकारियों ने जानकारी दी कि बावल में बन रहे ईएसआई अस्पताल का निर्माण कार्य 86 प्रतिशत, पंचकूला में 97 प्रतिशत और बहादुरगढ़ में 96 प्रतिशत पूरा हो चुका है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि प्रदेश में अंत्योदय आहार योजना के तहत वर्ष 2027 तक 250 कैंटीनों को खोला जाएगा जहां पर श्रमिकों को किफायती दरों पर शुद्ध पौष्टिक भोजन उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि श्रमिक समाज प्रदेश की आर्थिक प्रगति की रीढ़ है और उनकी सुरक्षा, सुविधा एवं अधिकारों की रक्षा करना सरकार का दायित्व है।  

विद्युत नियामक आयोग ने किया 132 केवी जीआईएस सबस्टेशन फूलबाग ग्वालियर का निरीक्षण

एमपी ट्रांसको द्वारा उपयोग की जा रही एडवांस टेक्नोलॉजी को सराहा भोपाल मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग की टीम ने गत दिवस मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के 132 केवी जीआईएस सबस्टेशन, फूलबाग ग्वालियर का निरीक्षण किया। टीम मे चेयरमेन श्री गोपाल श्रीवास्तव, सचिव डॉ. उमाकांत पांडेय तथा सदस्य श्री गजेंद्र तिवारी शामिल थे। निरीक्षण के दौरान नियामक आयोग ने सबस्टेशन की तकनीकी कार्यप्रणाली, लोड प्रबंधन, सुरक्षा मानकों और जीआईएस तकनीक के माध्यम से होने वाले संचालन की विस्तार से समीक्षा की। टीम ने उपस्थित इंजीनियरों से नेटवर्क को अधिक विश्वसनीय और उपभोक्ता केंद्रित बनाने के लिए किए जा रहे उपायों की जानकारी भी ली। टेक्नोलॉजी की सराहना नियामक आयोग टीम ने सबस्टेशन में अपनाई जा रही एडवांस टेक्नोलॉजी की सराहना करते हुए कहा कि जीआईएस तकनीक शहरी क्षेत्रों में कम स्थान में अधिक क्षमता उपलब्ध कराने के साथ ही फॉल्ट कम करने और बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एम पी ट्रांसको के ये अधिकारी रहे उपस्थित विद्युक नियामक आयोग टीम के सबस्टेशन निरीक्षण के समय मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी के अधीक्षण अभियंता अरविंद कुमार शर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।