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वॉटर प्यूरिफायर बोतल: गंदे पानी को 99.99% साफ करने वाली तकनीक, कीमत जानें

मुंबई  डिजिटल और स्मार्ट गैजेट्स के दौर में सबकुछ हाई-टेक होता जा रहा है. इसी क्रम में अब पानी की सफाई भी हाई-टेक हो चुकी है! मार्केट में एक ऐसी बोतल आ गई है जो बिना बिजली के ही पानी साफ करती है. इस बोतल को ZeroB ने मार्केट में उतारा है. ZeroB अपने नए H2OHH Water Purifier (H2OHH) बोतल को लेकर दावा की है कि यह बोतल बिना बिजली के कुछ ही पल में 99.99% शुद्ध करती है. खास बात यह है कि यह एक बोतल अपने लाइफटाइम में करीब 3,000 प्लास्टिक बोतलों को रिप्लेस कर सकती है. यानी सेहत के साथ-साथ पर्यावरण की भी बड़ी बचत! आउटडोर ट्रैवल, ऑफिस या जिम हर जगह के लिए यह बोतल बेस्ट साबित हो सकती है. आइए जानते हैं इसकी कीमत और फीचर्स. पहले जानिए कैसे काम करती है H2OHH? ZeroB कंपनी की यह स्मार्ट बोतल ExSil Nano सिल्वर टेक्नोलॉजी पर काम करती है जो पानी के संपर्क में आते ही 99.99% बैक्टीरिया और वायरस को खत्म कर देती है.  इसके लिए न तो बिजली की जरूरत होती है और न ही फिल्टर बदलने की कभी जरूरत होती है. सिल्वर आयन पानी को शुद्ध करते हुए उसके स्वाद में भी कोई बदलाव नहीं करता है.  डिजाइन और कैपेसिटी बात करें इस बोतल की डिजाइन की तो इसमें 600ml की कैपेसिटी मिलती है. साथ ही यह हल्की है जो किसी भी नार्मल कप होल्डर में फिट हो जाने वाली है. कंपनी का दावा है कि इसकी प्यूरीफिकेशन क्षमता हजारों बार इस्तेमाल के बाद भी बनी रहेगी. कितनी है कीमत? बात करें इसकी कीमत की तो  ZeroB ने इसे H2OHH को 2 मॉडल्स में उतारा है, पहला Tritan मॉडल जिसकी कीमत ₹1,499 रखी गई है वहीं दूसरा मॉडल है Stainless Steel SS304 मॉडल जिसकी कीमत ₹2,499 रखी गई है. ZeroB के मुताबिक एक H2OHH बोतल करीब 3,000 प्लास्टिक बोतलों को रिप्लेस कर सकती है. यह उन यूजर्स के लिए परफेक्ट है जो प्लास्टिक वेस्ट कम करना चाहते हैं और साथ ही सुरक्षित पानी भी पाना चाहते हैं. इन दोनों बोतलों में एक ही प्यूरीफिकेशन टेक्नोलॉजी दी गई है, फर्क सिर्फ मैटेरियल और लुक का है. किसके लिए है बेस्ट है यह बोतल? ट्रैवलर्स जिम या आउटडोर एक्टिविटी करने वाले लोग ऑफिस या फील्ड में रहने वाले प्रोफेशनल्स ऐसे यूजर्स जो बिजली या फिल्टर-चेंज की परेशानी से बचना चाहते हैं. इस बोतल को लेकर कंपनी के CTO डॉ. राजेश मिश्रा का कहना है कि H2OHH एक दो नहीं बल्कि 5 साल की रिसर्च का नतीजा है जिसका मकसद लैब-ग्रेड प्यूरीफिकेशन को एक पोर्टेबल रूप में देना था. यह बोतल ZeroB की ऑफिशियल वेबसाइट पर मिल रही है. आप zerobonline सर्च कर सकते हैं. 

इन्फेंट्री कमांडर्स’ कांफ्रेंस महू में शुरू, 9 से 11 दिसंबर तक आधुनिक हथियारों और प्रशिक्षण पर होगी चर्चा

महू  इन्फेंट्री स्कूल महू में 38वीं इन्फेंट्री कमांडर्स’ कांफ्रेंस का शुभारंभ किया गया। तीन दिवसीय यह सम्मेलन  11 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें इन्फेंट्री के परिचालन, प्रशिक्षण और प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा की जाएगी। सम्मेलन में सेना अध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, पीवीएसएम, एवीएसएम सहित देशभर से आए वरिष्ठ इन्फेंट्री अधिकारी भाग ले रहे हैं। इसमें फार्मेशन कमांडर, विभिन्न रेजीमेंटों के कर्नल, रेजीमेंटल सेंटर कमांडेंट और चयनित कमांडिंग आफिसर शामिल हैं। आयोजन महू में मुख्य रूप से हो रहा है, जबकि कई सैन्य केंद्र वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े हैं। हथियारों का शक्ति प्रदर्शन होगा     कांफ्रेंस के दौरान इन्फेंट्री में हाल ही में शामिल अत्याधुनिक हथियारों और उपकरणों की प्रदर्शनी भी लगाई गई है। नई हथियार प्रणालियों और शस्त्रास्त्रों का शक्ति प्रदर्शन कर उनकी क्षमता और उपयोगिता प्रस्तुत की जाएगी।     आधुनिकीकरण, पुनर्गठन, मानव संसाधन प्रबंधन और उभरते सुरक्षा खतरों से निपटने की रणनीतियों पर यह सम्मेलन विशेष रूप से केंद्रित है। चर्चा का उद्देश्य इन्फेंट्री को भविष्य की चुनौतियों के लिए और अधिक सशक्त बनाना तथा संचालन क्षमता को नई तकनीकों के अनुरूप उन्नत करना है।  

हनुमान मंदिर से लौटते समय उसी रास्ते से आना चाहिए या नहीं? जानें इसके जीवन पर प्रभाव

हनुमान जी को संकटमोचन और शक्ति के प्रतीक के रूप में जाना जाता है. उनके भक्त अक्सर उनके मंदिर जाते समय विशेष नियमों का पालन करते हैं. इनमें से एक नियम यह है कि जिस रास्ते से हनुमान मंदिर जाते हैं, उसी रास्ते से लौटकर नहीं आना चाहिए. यह नियम केवल परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जीवन और ऊर्जा से जुड़े गहरे अर्थ छिपे हैं. मंदिर जाने और लौटने की इस क्रिया के पीछे धार्मिक, ज्योतिषीय और मानसिक दृष्टिकोण से समझने योग्य कारण हैं. हनुमान जी की पूजा में मान्यता है कि वे अपने भक्तों को संकट, अशुभ प्रभाव और दुर्भाग्य से सुरक्षित रखते हैं. विशेष रूप से शनि के दोषों, साढ़े साती या ढैया से जुड़े प्रभावों को कम करने में हनुमान जी का स्थान महत्वपूर्ण माना जाता है. जब कोई व्यक्ति हनुमान मंदिर जाता है, तो यह माना जाता है कि वह अपने साथ दुख, चिंता, बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जा लेकर जाता है. मंदिर में दर्शन और पूजा करने से यह नकारात्मक ऊर्जा मंदिर में ही रह जाती है और भक्त उसे छोड़कर वापस लौटता है. यदि भक्त वही रास्ता वापसी के लिए अपनाता है, तो वह नकारात्मकता और बाधाओं को फिर से अपने साथ घर ले आता है. इसलिए, अलग रास्ता अपनाना केवल परंपरा नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव और पुराने दुःखों को पीछे छोड़ने का प्रतीक है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा. अलग रास्ता अपनाने का अर्थ है नई शुरुआत करना. यह दर्शाता है कि भक्त ने हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त कर लिया है और अब वह एक नए, सुरक्षित और शुभ मार्ग पर आगे बढ़ रहा है. पुराने संकट और दुर्भाग्य को वहीं छोड़कर घर लौटना जीवन में आगे बढ़ने और मानसिक शांति पाने का संकेत देता है. इस प्रकार, अलग रास्ता जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने का एक साधन बन जाता है. हनुमान जी को प्रसन्न करने से शनिदेव भी संतुष्ट होते हैं. शनि का प्रभाव जीवन में कई बार बाधा और असुविधा पैदा करता है. मंदिर से लौटते समय अलग मार्ग अपनाना इस अशुभ प्रभाव को कम करने का तरीका माना जाता है. यह क्रिया यह सुनिश्चित करती है कि भक्त अब शनि के दोषों से मुक्त होकर एक सुरक्षित और शुभ मार्ग पर चल रहा है. इसके अलावा, अलग रास्ता अपनाना मानसिक दृष्टि से भी लाभकारी है. जब व्यक्ति जानबूझकर किसी नए मार्ग से घर लौटता है, तो यह उसकी सोच में सकारात्मक बदलाव लाता है. यह चेतना का संकेत है कि अब पुराने संकट और नकारात्मक अनुभव जीवन पर हावी नहीं होंगे. धार्मिक मान्यता और मानसिक शांति का यह मेल भक्त को मानसिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाता है. हनुमान मंदिर जाने के इस नियम का पालन केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं है. यह जीवन और ऊर्जा के संतुलन को बनाए रखने का मार्ग भी है. भक्त का यह निर्णय कि वह अलग मार्ग से लौटेगा, उसे मानसिक और आध्यात्मिक सुरक्षा प्रदान करता है. यह परंपरा यह याद दिलाती है कि पूजा केवल धार्मिक क्रिया नहीं है, बल्कि एक ऐसा अनुभव है जो व्यक्ति को मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से बदलता है. इस नियम का पालन करने वाले भक्त अक्सर महसूस करते हैं कि जीवन में बाधाएं कम हो जाती हैं, मानसिक तनाव घटता है और एक नई ऊर्जा प्राप्त होती है. यही कारण है कि अधिकांश भक्त मंदिर जाने और लौटने के समय अलग रास्ता अपनाते हैं. इस प्रकार, यह न केवल धार्मिक मान्यता का पालन है, बल्कि जीवन में सकारात्मकता और सुरक्षा बनाए रखने का एक सरल और प्रभावशाली तरीका भी है.

हाईकोर्ट का निर्णय: विवाहेतर यौन संबंध के मामले में तस्वीरों के आधार पर तलाक का फैसला सही

जबलपुर  विवाहेतर यौन संबंध में 65 बी सर्टिफिकेट के बिना तस्वीरों के आधार पर दिया गया तलाक का फैसला सही है. हाईकोर्ट जस्टिस विशाल धगट और जस्टिस बी पी शर्मा की युगलपीठ ने अहम फैसले में कहा है कि शादी के मामले में इंडियन एविडेंस एक्ट पूरी तरह से लागू नहीं होता है. युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि 65-बी सर्टिफिकेट के बिना कुटुंब न्यायालय के द्वारा तस्वीर को देखते हुए विवाहेतर यौन संबंध के आधार पर तलाक की डिक्री जारी करने में कोई गलती नहीं की है. युगलपीठ ने इस आदेश के साथ दायर अपील को खारिज कर दिया. कुटुंब न्यायालय के फैसले को हाईकोर्ट में दी थी चुनौती बालाघाट निवासी महिला की तरफ से कुटुंब न्यायालय के द्वारा तलाक की डिक्री जारी किये जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी. अपील में कहा गया था कि उसका विवाह साल 2006 में अनावेदक के साथ हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार हुआ था. अनावेदक पति ने एक अन्य व्यक्ति के साथ उसकी आपत्तिजनक फोटो के साथ कुटुंब न्यायालय ने तलाक के लिए आवेदन किया था. फोटो के साथ इंडियन एविडेंस एक्ट के तहत प्रमाणिता के लिए 65-बी सार्टिफिकेट प्रस्तुत नहीं किया गया था. अपील में सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा पारित आदेश का हवाला देते हुए कहा गया था कि एविडेंस एक्ट, 1872 के सेक्शन 65-बी का पालन करना जरूरी है. अपीलकर्ता के मोबाइल में यह तस्वीर गलती से अनावेदक पति के मोबाइल पर ट्रांसफर हो गई थी. जिसके बाद पति ने उसका मोबाइल फोन तोड़ दिया. एविडेंस एक्ट की सेक्शन 65-बी के तहत बिना प्रमाणिता सार्टिफिकेट के कुटुंब न्यायालय द्वारा पारित आदेश निरस्त करने योग्य है. 'पति के पास पत्नी के मोबाइल फोन पर उसके एडल्टरी के थे सबूत' हाईकोर्ट जस्टिस विशाल धगट और जस्टिस बी पी शर्मा की युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि "अपीलकर्ता ने इस बात से इनकार नहीं किया है कि वह तस्वीरों में नहीं थी. सिर्फ यह कहा गया है कि तस्वीरें किसी ट्रिक का इस्तेमाल करके बनाई गई हैं. नकली तस्वीरें किसने और किस तरीके से क्यों बनाई हैं, इसका भी उल्लेख नहीं किया है. अपीलकर्ता ने अपने बयान में कहा था कि तस्वीरें उसके मोबाइल से पति के मोबाइल में ट्रांसफर की गईं, फिर पति ने उसका मोबाइल तोड़ दिया. पति के पास पत्नी के मोबाइल फोन पर उसके एडल्टरी के सबूत थे. कोई भी इंसान नहीं चाहेगा कि उसकी पत्नी एडल्टरी करती रहे. इसलिए पति ने गुस्से में पत्नी का मोबाइल फोन तोड़ दिया. जिससे उसकी अपने पार्टनर से बातचीत बंद हो जाए. जिस फोटोग्राफर ने फोटो खींची थी उससे भी कोर्ट में पूछताछ की गई थी." 'इंडियन एविडेंस एक्ट शादी के मामलों में पूरी तरह लागू नहीं होता' युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि "इंडियन एविडेंस एक्ट शादी के मामलों में पूरी तरह लागू नहीं होता है. फैमिली कोर्ट एक्ट के सेक्शन 14 के मुताबिक कुटुंब न्यायालय को सच्चाई का पता लगाने के लिए सबूत के तौर पर कोई भी रिपोर्ट, बयान, डॉक्यूमेंट्स लेने का अधिकार दिया गया है. कुटुंब न्यायालय ने इन तस्वीरों पर भरोसा करके विवाहेतर यौन संबंध के आधार पर तलाक की डिक्री जारी करके कोई गलती नहीं की. युगलपीठ ने इस आदेश के साथ महिला की अपील को खारिज कर दिया.

Vingroup ने साइन किया MoU, तेलंगाना में 3 बिलियन डॉलर का निवेश और मल्टी-सेक्टर इकोसिस्टम का निर्माण

नई दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी Vingroup ने तेलंगाना सरकार के साथ एक मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoU) साइन किया है, जो राज्य के सबसे बड़े प्रपोज़्ड विदेशी इन्वेस्टमेंट में से एक है, जिसका मकसद एक बड़ा मल्टी-सेक्टर इकोसिस्टम बनाना है. हैदराबाद में तेलंगाना राइजिंग ग्लोबल समिट में अनाउंस किया गया, 3 बिलियन डॉलर का यह प्रपोज़ल फेज़ में लागू किया जाएगा. इसमें स्मार्ट अर्बन डेवलपमेंट, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, 2,500 हेक्टेयर में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, टूरिज्म, रिन्यूएबल एनर्जी और बड़े पैमाने पर कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट शामिल होंगे. यह एग्रीमेंट Vingroup की इंडिया स्ट्रैटेजी में भी एक बड़ा कदम है, जो वियतनाम के सबसे बड़े प्राइवेट ग्रुप के ग्लोबल एम्बिशन को दिखाता है. VinFast और GSM के साथ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा MoU की खास बातों में से एक यह है कि तेलंगाना में भारत की पहली बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक टैक्सी फ्लीट लाने का VinGroup का प्रपोज़्ड इंट्रोडक्शन. कंपनी अपनी मोबिलिटी ब्रांच, GSM, और VinFast गाड़ियों का इस्तेमाल करके राज्य में एक फुल मोबिलिटी-एज़-ए-सर्विस प्लेटफॉर्म बनाने का प्लान बना रही है. VinHomes द्वारा संचालित स्मार्ट शहरी विकास MoU में आगे VinHomes Smart City प्रोजेक्ट का प्रस्ताव भी दिया गया है, जिसे 1,080 हेक्टेयर में प्लान किया गया है और इसे लगभग 2 लाख लोगों के रहने के लिए डिज़ाइन किया गया है. इस बड़े डेवलपमेंट प्रोजेक्ट से लगभग 10,000 नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है और इसमें कम ऊंचाई वाली और ऊंची इमारतों वाले क्लस्टर, मॉडर्न सुविधाएं, सीमित जगह और सस्टेनेबल प्लानिंग के सिद्धांत शामिल होंगे. शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर MoU के ज़रिए, Vingroup का मकसद 70 हेक्टेयर प्लान्ड ज़मीन पर ज़रूरी सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना है, जिसमें उसका VinSchool K-12 एजुकेशन नेटवर्क, VinMec मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल और V-Green EV चार्जिंग इकोसिस्टम शामिल हैं. इन कोशिशों का मकसद बड़े पैमाने पर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट को सपोर्ट करना और तेलंगाना की हेल्थकेयर और एजुकेशन कैपेसिटी में योगदान देना है. पर्यटन, मनोरंजन और रीन्यूवेबल एनर्जी विस्तार MoU में VinWonders के तहत 350 हेक्टेयर के टूरिज्म और एंटरटेनमेंट हब के प्लान की भी जानकारी दी गई है, जिसमें एक थीम पार्क, ज़ू और सफारी शामिल हैं. रिन्यूएबल एनर्जी के मामले में, VinGroup के VinEnergo डिवीज़न ने भविष्य के शहरी इलाकों और बड़े मोबिलिटी इकोसिस्टम को साफ बिजली से पावर देने के लिए 500 हेक्टेयर में 500 MW का सोलर फार्म बनाने का भी प्रस्ताव दिया है. ज़मीन, प्लानिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर की प्लानिंग MoU के हिस्से के तौर पर, तेलंगाना सरकार ने ज़मीन की पहचान और बंटवारे में मदद करने, मास्टर प्लानिंग में तालमेल बिठाने, एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसेस में मदद करने और ज़रूरी कनेक्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का वादा किया है. प्रोजेक्ट की टाइमलाइन में तेज़ी लाने के लिए मौजूदा राज्य पॉलिसी के तहत इंसेंटिव पर भी विचार किया जाएगा. एग्रीमेंट पर बात करते हुए, तेलंगाना सरकार के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने कहा कि, "Vingroup का USD 3 बिलियन का इन्वेस्टमेंट 'तेलंगाना राइजिंग' विज़न में एक बहुत बड़ा भरोसा है, खासकर सस्टेनेबल शहरी विकास और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमारा फोकस. यह कैपिटल से कहीं ज़्यादा है." उन्होंने आगे कहा कि, "यह एक फ्यूचरिस्टिक, नेट-ज़ीरो शहर बनाने और भारत का पहला बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक टैक्सी फ्लीट लाने के लिए एक पार्टनरशिप है, जो सीधे हमारे नागरिकों के जीवन की क्वालिटी में सुधार करेगी. हमारी सरकार इस ग्लोबल विज़न को लोकल हकीकत बनाने के लिए तेज़ी से काम करने की गारंटी देती है." Vingroup Asia और VinFast Asia के CEO फाम सान्ह चाउ ने कहा कि, "Vingroup तेलंगाना में बहुत ज़्यादा पोटेंशियल देखता है और हम राज्य सरकार के साथ लंबे समय की पार्टनरशिप बनाना चाहते हैं. मेगा अर्बन डेवलपमेंट, बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर और एक कॉम्प्रिहेंसिव इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम देने में हमारे प्रूवन ट्रैक रिकॉर्ड के साथ, हमें विश्वास है कि तेलंगाना के साथ हमारा कोलेबोरेशन टैंजिबल वैल्यू जेनरेट करेगा, सस्टेनेबल डेवलपमेंट को बढ़ावा देगा और स्थानीय निवासियों के लिए जीवन की क्वालिटी को बेहतर करेगा."

खजुराहो में हुई निवेश पर बैठक, 5 औद्योगिक इकाइयों को मिली मंजूरी, मध्यप्रदेश की आर्थिक दिशा मजबूत

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में खजुराहो में हुई निवेश संवर्धन पर मंत्रि-परिषद समिति की बैठक 5 औद्योगिक इकाइयों को मिली मंजूरी आर्थिक संपन्नता की ओर मध्यप्रदेश, होगा निवेश-बढ़ेंगे रोजगार भोपाल  राज्य में निवेश संवर्धन और रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खजुराहो में 9 दिसंबर को निवेश संवर्धन पर मंत्रि-परिषद समिति (CCIP) की अहम बैठक ली। बैठक में 5 औद्योगिक इकाइयों के निवेश प्रकरणों को मंजूरी दी गई। साथ ही प्रदेश के जिलों में प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं को दी जाने वाली वित्तीय सुविधाओं के संबंध में अहम निर्णय लिए गए। बैठक में उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा, एमएसएमई मंत्री  चैतन्य काश्यप, कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  गौतम टेटवाल, संस्कृति-पर्यटन-धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  धर्मेंद्र सिंह लोधी, मुख्य सचिव  अनुराग जैन सहित प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे। जे.के. सीमेंट के साथ 1850 करोड़ का विस्तार, 800 लोगों को रोजगार मंत्रि-परिषद समिति की बैठक में जे.के. सीमेंट कंपनी के निवेश प्रकरण पर चर्चा हुई। कंपनी वर्तमान में पन्ना जिले में 2600 करोड़ रुपये के इंटीग्रेटेड क्लिंकर और सीमेंट प्रोडक्शन प्रोजेक्ट पर काम कर रही है और 6 हजार से अधिक लोगों को रोजगार भी दे रही है। जे.के. सीमेंट भविष्य में 1850 करोड़ रूपये से अधिक के अतिरिक्त निवेश से यूनिट का विस्तार कर रही है, जिससे 800 लोगों को रोजगार मिलेगा। अल्केम लैबोरेट्रीज का उज्जैन में 500 करोड़ का निवेश बैठक में अल्केम लैबोरेट्रीज कंपनी का निवेश प्रकरण भी रखा गया। यह कंपनी फार्मा क्षेत्र में फार्मूलेशन-एपीआई और बल्क ड्रग प्रोडक्शन कर रही है। इस कंपनी ने मुंबई में हुए रोड-शो के दौरान 500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की इच्छा जताई थी। कंपनी ने उज्जैन के विक्रम उद्योगपुरी में टैबलेट, कैप्सूल, ड्राई सिरप और ड्राई पाऊडर इंजेक्शन के निर्माण के लिए यूनिट की स्थापना का प्रस्ताव दिया है। इससे 500 लोगों को रोजगार मिलेगा। नई अर्थव्यव्स्था को मजबूत करने डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर में बड़ा निवेश राज्य में डिजिटल अवसंरचना, क्लाउड सेवाओं तथा डेटा-आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में मेसर्स कंट्रोल एस डेटा सेंटर लिमिटेड द्वारा बड़वई आईटी पार्क, भोपाल में लगभग 500.20 करोड़ रूपये के निवेश से डेटा सेंटर सुविधा विकसित की जा रही है। परियोजना से प्रदेश में लगभग 870 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार अवसरों का सृजन होगा। यह निवेश प्रदेश में डिजिटल अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह परियोजना डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, राष्ट्रीय डेटा नीति, एवं मध्यप्रदेश आईटी और ईएसडीएम निवेश संवर्धन नीति-2023 के लक्ष्यों को आगे बढ़ाएगा। ग्वालियर में 327.10 करोड़ सीसीएल मेन्युफेक्चरिंग यूनिट राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, ई.एस.डी.एम. (Electronic System Design and Manufacturing) सेक्टर को प्रोत्साहन प्रदान करने एवं स्थानीय उत्पादन क्षमताओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से केदारा इलेक्ट्रॉनिक्स द्वारा ग्वालियर, मध्यप्रदेश में लगभग 327.10 करोड़ रूपये के निवेश सेकॉपर क्लैड लैमिनेट (CCL) निर्माण इकाई स्थापित किए जाने का प्रस्ताव रखा गया। परियोजना से राज्य में लगभग 220 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर उपलब्ध होंगे। फूड प्रोसेसिंग में उज्जैन को मिलेगी नई पहचान विश्व की सबसे बड़ी पोटेटो फ्लेक्स निर्माताओं में शामिल अहमदाबाद की इस्कॉन बालाजी फूड्स ने उज्जैन की विक्रम उद्योगपुरी में 110 करोड़ रूपये के निवेश से यूनिट स्थापित कर उत्पादन शुरू कर दिया है। इससे 350 लोगों को रोजगार मिला है। औद्योगिक नीति के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक अनुमोदन बैठक में मंत्री मंडलीय समिति ने सभी प्रस्तावित एवं संचालित परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक अनुमोदन दिया। इसके तहत प्रचलित उद्योग संवर्धन समितियों में उपलब्ध प्रावधानों के साथ ही अतिरिक्त सुविधाएं प्रदान करने पर सहमति बनी। इस निर्णय से न केवल प्रदेश में औद्योगिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त होगा बल्कि युवाओं के लिये बड़े पैमाने पर रोजगार अवसर भी उपलब्ध होंगे।  

ओमान ने PAK के टुकड़े करने में भारत का साथ दिया था, अब पीएम मोदी का वहां दौरा, क्या होगा अगला कदम?

नई दिल्ली इतिहास के पन्ने पलटें तो साल था 1971. भारत और पाकिस्तान के बीच जंग छिड़ी थी. पाकिस्तान के दो टुकड़े होने वाले थे और एक नया देश बांग्लादेश नक्शे पर उभर रहा था. उस वक्त दुनिया का कूटनीतिक माहौल भारत के खिलाफ था. अमेरिका अपना सातवां बेड़ा भेज रहा था और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के लगभग सभी ताकतवर देश सऊदी अरब, ईरान, जॉर्डन मजहब के नाम पर पाकिस्तान के साथ खड़े थे. लेकिन उस घने अंधेरे में एक चिराग था जो भारत के लिए जल रहा था. वह देश था ओमान. ओमान वह मुस्लिम देश था, जिसने अरब और इस्लामिक जगत के भारी दबाव को दरकिनार करते हुए, यूएन से लेकर हर वैश्विक मंच पर भारत का खुलकर समर्थन किया था. जब सब पाकिस्तान को बचाने में लगे थे, ओमान भारत की सच्चाई के साथ खड़ा था. अगले हफ्ते, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसी ओमान की धरती पर कदम रखने जा रहे हैं. 17-18 दिसंबर का यह दौरा सिर्फ फाइलों पर दस्तखत करने का नहीं, बल्कि 54 साल पुरानी उस वफादारी को नमन करने का है. 1971 की वो कहानी, जो अक्सर नहीं सुनाई जाती 1971 की जंग के दौरान पाकिस्तान ने खुद को ‘इस्लाम के किले’ के रूप में पेश किया था. अरब देशों पर भारी दबाव था कि वे भारत का बायकॉट करें. उस वक्त ओमान के सुल्तान कबूस बिन सईद ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया. उन्होंने साफ कर दिया कि ओमान, भारत के रणनीतिक हितों के खिलाफ नहीं जाएगा. सऊदी अरब और जॉर्डन जैसे देश सुल्तान कबूस से बेहद खफा हो गए थे. लेकिन सुल्तान अड़े रहे. उन्होंने न सिर्फ भारत का कूटनीतिक समर्थन किया, बल्कि अपनी बंदरगाहों और सुविधाओं के दरवाजे भी भारत के लिए खुले रखे. अब जब पीएम मोदी ओमान जा रहे हैं, तो वह एक तरह से उस दोस्ती का कर्ज चुकाने जा रहे हैं. ओमान भारत के लिए सिर्फ एक ‘ट्रेडिंग पार्टनर’ नहीं, बल्कि ‘ऑल वेदर फ्रेंड’ यानी हर मौसम का साथी है. ‘दिल’ के बाद अब ‘डील’ की बारी 1971 में ओमान ने दिल से साथ दिया था, 2025 में वह भारत की इकॉनमी को रफ्तार देने जा रहा है. पीएम मोदी के इस दौरे पर भारत-ओमान फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर होना लगभग तय है. इस समझौते के बाद भारतीय सामान जैसे कपड़ा, जेम्स, ज्वेलरी, मशीनरी बिना किसी टैक्स के ओमान के बाजारों में बिक सकेगा. इससे चीन को झटका लगना तय है. ओमान रणनीतिक रूप से बहुत अहम जगह यानी अरब सागर और फारस की खाड़ी के मुहाने पर है. भारत वहां दुकम (Duqm) पोर्ट पर पहले से ही मौजूदगी दर्ज करा चुका है. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के जरिए भारत वहां चीन के प्रभाव को कम करेगा और अपनी जड़ें जमाएगा. ‘पुणे’ वाला कनेक्शन और सुल्तान से याराना     कूटनीति में निजी रिश्तों का बहुत मोल होता है. ओमान के मौजूदा सुल्तान हैथम बिन तारिक के रगों में भारत से जुड़ी यादें हैं. सुल्तान हैथम के पिता ने भारत के पुणे शहर में पढ़ाई की थी. ओमान का शाही परिवार भारत को अपना दूसरा घर मानता है.     पीएम मोदी और सुल्तान हैथम के बीच गजब का तालमेल है. पिछले साल जब सुल्तान भारत आए थे, तो यह उनकी पहली राजकीय यात्रा थी. अब पीएम मोदी का वहां जाना उस दोस्ती को और गहरा करेगा.     ओमान में करीब 8 लाख भारतीय रहते हैं. पीएम मोदी जब उनसे मिलेंगे, तो यह संदेश जाएगा कि भारत अपने नागरिकों और अपने पुराने दोस्तों, दोनों का ख्याल रखता है. जॉर्डन और इथियोपिया भी जाएंगे पीएम मोदी की यह यात्रा सिर्फ ओमान तक सीमित नहीं है. वे जॉर्डन और इथियोपिया भी जा रहे हैं. यह तीनों देश मुस्लिम आबादी के लिहाज से भारत के लिए बहुत मायने रखते हैं. जॉर्डन (97% मुस्लिम): तब और अब: 1971 में जॉर्डन पाकिस्तान के साथ था, लेकिन आज 2025 में जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला पीएम मोदी के करीबी दोस्त हैं. किंग अब्दुल्ला, जो पैगंबर साहब के वंशज माने जाते हैं, उनका पीएम मोदी का स्वागत करना इस्लामिक दुनिया में भारत की बदलती छवि का सबूत है. यह दौरा फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत के संतुलन को दिखाएगा. इथियोपिया (34% मुस्लिम): पहला दौरा: यह किसी भारतीय पीएम का पहला इथियोपिया दौरा होगा. वहां 4 करोड़ से ज्यादा मुस्लिम आबादी है. भारत वहां अफ्रीका में अपनी पैठ बढ़ाने जा रहा है. 1971 की नींव पर 2025 का महल पीएम मोदी का यह दौरा बताता है कि विदेश नीति में ‘मेमोरी’ कितनी अहम होती है. भारत ने नहीं भुलाया कि जब दुनिया खिलाफ थी, तब ओमान साथ था. ज जब ओमान के साथ ऐतिहासिक FTA होने जा रहा है, तो यह 1971 के उस बीज का फल है जिसे सुल्तान कबूस ने बोया था. ओमान में ‘इकॉनमी’ की बात होगी (FTA के जरिए), लेकिन उसकी बुनियाद में ‘दिल’ की वो बात होगी जो 1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़े होते वक्त ओमान ने भारत के कान में कही थी- हम तुम्हारे साथ हैं. यह दौरा उसी भरोसे को रीन्यू करने का है.

स्कूल शिक्षा में डिजिटल इन्फ्रॉस्ट्रक्चर बढ़ाने पर ध्यान, शिक्षकों को मिले टैबलेट

स्कूल शिक्षा में डिजिटल इन्फ्रॉस्ट्रक्चर बढ़ाने पर दिया गया विशेष ध्यान शिक्षकों की डिजिटल क्षमता के लिये प्रदान किये गये टैबलेट भोपाल प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये शिक्षकों को डिजिटल उपकरण प्रदान कर सक्षम बनाया है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में डिजिटल टेक्नोलॉजी के विकास और स्कूल के सभी स्तरों पर प्रौद्योगिकी के उभरते हुए भविष्य को देखते हुए डिजिटल इन्फ्रॉस्ट्रक्चर, ऑनलाइन शिक्षण मंच और उपकरणों की उपलब्धता की सिफारिश की गयी है। प्रदेश में प्राथमिक एवं माध्यमिक शासकीय विद्यालयों के 2 लाख 43 हजार शिक्षकों को टैबलेट प्रदान किये गये हैं। विभाग ने सरकारी हाई स्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूलों के 44 हजार शिक्षकों को भी टैबलेट उपलब्ध कराये हैं। शिक्षक इन टैबलेट का उपयोग बच्चों की शिक्षण व्यवस्था में कर रहे हैं। रोबोटिक्स लैब विभाग ने प्रदेश के 52 सांदीपनि विद्यालयों में रोबोटिक्स लैब स्थापित किये हैं। इस वर्ष विभाग ने 458 पीएम स्कूलों में अटल टिकरिंग लैब विकसित की हैं। राज्य के 100 प्रतिशत जनशिक्षा केन्द्र, जिनकी संख्या 3063 है, उन केन्द्रों में हाई परफार्मेंस पीसी प्रिंटर और यूपीएस की उपलब्धता सुनिश्चित की है। शासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए छात्रों को विज्ञान एवं गणित विषय के डिजिटल ई-कंटेंट उपलब्ध कराये गये हैं। व्यावसायिक शिक्षा नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा दिये जाने की सिफारिश की गयी है। प्रदेश के 3367 सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षा दिये जाने की व्यवस्था की गयी है। प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम में 17 ट्रेड मंजूर किये गये हैं। पिछले वर्ष 4 लाख से अधिक छात्रों का नामांकन कक्षा-9 से 12 तक किया गया था। इस वर्ष नामांकित छात्रों की संख्या करीब 6 लाख है। पिछले 2 वर्षों में 690 शासकीय विद्यालयों में एग्रीकल्चर ट्रेड प्रारंभ किया गया है। प्रदेश में कॅरियर सप्ताह का आयोजन सरकारी स्कूलों के बच्चों को पढ़ाई के दौरान कॅरियर संबंधी सलाह के लिये इस वर्ष कॅरियर सप्ताह का आयोजन किया जा चुका है। सप्ताह के दौरान 4311 शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के 2 लाख विद्यार्थियों को कॅरियर चयन संबंधी सलाह दी गयी है।  

8वें वेतन आयोग पर सरकार का महत्वपूर्ण बयान, पेंशनर्स और कर्मचारियों को कब से मिलेगा लाभ

नई दिल्‍ली.  8वें वेतन आयोग की सिफारिशें आने में अब सिर्फ 17 महीने का समय बचा है. इससे पहले केंद्र सरकार ने सोमवार को एक बार फिर आयोग की शर्तों को लेकर जारी कयासों पर विराम लगाते हुए स्‍पष्‍ट जानकारी दी है. वित्‍त राज्‍यमंत्री पंकज चौधरी ने संसद में 8वें वेतन आयोग को लेकर स्‍पष्‍ट जानकारी दी है. उन्‍होंने आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए फंड के इंतजाम को लेकर भी जवाब दिए. संसद में चर्चा के दौरान वित्‍त राज्‍यमंत्री ने बताया कि अभी केंद्रीय कर्मचारियों की संख्‍या करीब 50.14 लाख है, जबकि 69 लाख के आसपास पेंशनर्स भी हैं. 8वां वेतन आयोग लागू होने के बाद इन सभी को फायदा दिया जाएगा. केंद्रीय मंत्री ने लिखित जवाब में 8वें वेतन आयोग के टर्म ऑफ रेफरेंस और इसके लागू होने की तारीख जैसे सवालों के भी जवाब दिए हैं. उनसे पूछा गया कि 8वें वेतन आयोग के लिए वित्‍तवर्ष 2026-27 के बजट में फंड आवंटन को लेकर क्‍या योजना है. क्‍या सरकार पेंशनधारकों और कर्मचारियों की शिकायतों का निवारण करेगी. कबसे लागू होगा 8वां वेतन आयोग जबसे 8वें वेतन आयोग की घोषणा हुई है, सभी कर्मचारियों और पेंशनधारकों का सबसे बड़ा सवाल यही था कि इसे लागू कब से किया जाएगा. संसद में केंद्रीय मंत्री ने इस सवाल का जवाब दिया है. उन्‍होंने कहा कि आयोग की सिफारिशों को लागू करने की तिथि के बारे में घोषणा बाद में की जाएगी. फिलहाल आयोग को अपने गठन के 18 महीनों के भीतर अपनी सिफारिशों हर हाल में पेश करनी होगी. 7वां वेतन आयोग 31 दिसंबर, 2025 को समात्‍प हो जाएगा, लेकिन अभी तक 8वें के लागू करने की तिथि का खुलासा नहीं हुआ है. आयोग बनने के बाद अब तक क्‍या हुआ केंद्रीय मंत्री ने बताया कि आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए जरूरी फंड पर समय के साथ फैसला किया जाएगा. इसके लिए पहले से तय प्रक्रिया का भी पालन किया जाएगा. 41 दिन पहले 8वें वेतन आयोग को बनाने के बाद से अब तक कई कदम उठाए जा चुके हैं. केंद्र सरकार ने इसके टर्म ऑफ रेफरेंस को मंजूरी दे दी है, जिसका गजट नोटिफिकेशन भी 3 नवंबर, 2025 को जारी किया जा चुका है. किस आधार पर सैलरी तय करेगा आयोग पे कमीशन मूल वेतन के स्‍ट्रक्‍चर, पेंशन, अलाउंस और अन्‍य सुविधाओं को ध्‍यान में रखते हुए अपनी सिफारिशें तैयार करेगा. उसका मकसद कर्मचारियों और पेंशनर्स को उचित भुगतान दिलाना है. आयोग के सामने फिटमेंट फैक्‍टर में बदलाव करने की भी चुनौती है, जिसके आधार पर कर्मचारियों के वेतन में भी बदलाव आएगा. सरकार ने आयोग के गठन के बाद से अब तक कई कदम उठाए हैं, जो कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन पर सीधे तौर पर असर डालने वाला है.  

SIR रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: मध्यप्रदेश में 8.13 लाख मृत मतदाता वोटर लिस्ट में शामिल, 99% फॉर्म डिजिटलाइज

भोपाल   मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का काम लगातार जारी है। जिसके तहत एन्युमरेशन फॉर्मों को डिजिटलाइज करने का काम जारी है। निर्वाचन सदन के मुताबिक 99 प्रतिशत से ज्यादा फॉर्म डिजिटलाइज किए जा चुके है। जिसके तहत मध्यप्रदेशमें अब तक 8.13 लाख मृत मतदाताओं की पहचान की जा चुकी है। 2,43 लाख ऐसे मतदाता मिले हैं। जिनके दो जगह नाम मिले है। 10 दिसंबर तक बैठकें आयोजित निर्वाचन सदन द्वारा फॉर्म प्रकाशन और प्राप्ति के दौरान अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं की पहचान और सत्यापन के लिए बैठकें होंगी। सभी मतदान केंद्रों पर 6 दिसंबर से 10 दिसंबर तक बीएलओ बीएलए और अन्य सहयोगियों की बैठकें आयोजित की जाएगी। चुनाव आयोग के निर्देश पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय सभी जिलों में एसआईआर प्रक्रिया तेजी से करवा रहा है और दिन में तीन बार कलेक्टरों से रिपोर्ट ले रहा है। 27 अक्टूबर को वोटर लिस्ट फ्रीज होने के बाद 4 नवंबर से एसआईआर का कार्य शुरू हुआ था, जिसका प्रारूप परिणाम 16 दिसंबर को प्रकाशित होगा। अभी शिफ्टेड मतदाताओं की सूची प्राप्त नहीं हुई है, जो प्रकाशन से पहले स्पष्ट की जाएगी। फार्म नहीं भरा तो कट सकता है वोट मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं को एसआईआर फार्म मिला है, उन्हें 2003 की एसआईआर के आधार पर परिजनों/खुद की जानकारी देना अनिवार्य है। यदि कोई मतदाता बीएलओ के लगातार प्रयासों के बाद भी फार्म जमा नहीं करता, तो उसका नाम भी 16 दिसंबर की सूची से हटाया जा सकता है। संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आरपीएस जादौन ने अपील की है कि सभी मतदाता समय रहते फार्म जमा करें, ताकि नाम कटने की स्थिति से बचा जा सके। किन जिलों में सबसे अधिक मृत वोटर्स? सूत्रों के अनुसार जबलपुर और सागर में मृत मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा, जबकि सीहोर और पन्ना में सबसे कम पाई गई है। हालांकि आयोग ने इन आंकड़ों को अभी आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया है। 10 दिसंबर तक होगा सत्यापन एसआईआर कार्यवाही के तहत अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डबल-एंट्री वाले मतदाताओं की पहचान के लिए 10 दिसंबर तक हर मतदान केंद्र पर BLO–BLA की बैठकें आयोजित की जा रही हैं। प्रदर्शित सूचियों का राजनीतिक दलों से अवलोकन कराने और 11 दिसंबर तक आपत्तियां दर्ज कराने की समय-सीमा तय की गई है, ताकि BLO ऐप के माध्यम से समय पर संशोधन किया जा सके। जबलपुर और साग्र में सबसे ज्यादा मामले एसआइआर से मिले अब तक के आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा मृत मतदाता प्रदेश के जबलपुर और सागर जिले में चिह्नित हुए हैं। और सबसे कम सीहोर और पन्ना में मिले है। हालांकि एसआइआर प्रक्रिया अभी जारी होने से आंकड़ों में बढ़ोत्तरी संभव है। इन नामों को सूची से बाहर किया जाएगा। वहीं गणना पत्रक प्राप्त होने पर अनुपस्थित स्थानांतरित, मृत एवं वोहरी प्रविष्टि को छोड़कर अन्य के नाम प्रारूप सूची में शामिल होंगे।