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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार अटल जयंती शताब्दी समापन समारोह के अवसर पर 25 दिसंबर को चलेगा अभियान

विशेष स्वच्छता अभियान की जिम्मेदारी स्थानीय नगर निकाय और पंचायती राज विभाग को सौंपी गई सार्वजनिक स्थलों, सड़कों, बाजारों, सरकारी भवनों, शिक्षण संस्थानों और ग्राम पंचायत परिसरों में चलाया जाएगा अभियान जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों, स्वयंसेवी संगठनों, युवाओं और आम नागरिकों की रहेगी सक्रिय सहभागिता लखनऊ, भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेई जी की जयंती के शताब्दी वर्ष के समापन अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें अनोखी और सार्थक श्रद्धांजलि देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार 25 दिसंबर को पूरे प्रदेश में विशेष और व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा, जिसके माध्यम से अटल जी के स्वच्छ, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने का संदेश दिया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई मंचों से कहा है कि अटल बिहारी वाजपेई जी केवल एक महान राजनेता ही नहीं, बल्कि सुशासन, राष्ट्रनिर्माण और सामाजिक चेतना के प्रतीक थे। ऐसे में यह स्वच्छता अभियान उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने, उनके विचारों और आदर्शों के प्रति सच्चा सम्मान होगा। नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में समन्वित अभियान इस प्रदेशव्यापी विशेष स्वच्छता अभियान की जिम्मेदारी स्थानीय नगर निकायों और पंचायती राज विभाग को सौंपी गई है। स्थानीय नगर निकाय प्रदेश के सभी नगरीय क्षेत्रों में अभियान को प्रभावी और सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करेंगे। वहीं, पंचायती राज विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान की कमान संभालेगा, जिससे गांव-गांव तक स्वच्छता का संदेश पहुंचे। इस अभियान के अंतर्गत सार्वजनिक स्थलों, सड़कों, बाजारों, सरकारी भवनों, शिक्षण संस्थानों और ग्राम पंचायत परिसरों में विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा। जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों, स्वयंसेवी संगठनों, युवाओं और आम नागरिकों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। युवाओं और नागरिकों को प्रेरित करने पर जोर पूरे कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अटल बिहारी वाजपेई जी की जयंती पर स्वच्छता के प्रति सामूहिक संकल्प को मजबूत करना है। साथ ही, नई पीढ़ी और नागरिकों को अटल जी के जीवन मूल्यों, राष्ट्रप्रेम, लोकतांत्रिक मर्यादाओं और सेवा भावना से प्रेरित करना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है। जनपद और राज्य स्तर पर होंगे विविध आयोजन अटल जयंती शताब्दी समापन कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य और जनपद स्तर पर कई आयोजन किए जाएंगे। जनपद स्तर पर 18 से 22 दिसंबर के मध्य विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा, जिनमें निबंध लेखन, भाषण, चित्रकला, कविता पाठ आदि शामिल हैं। राज्य स्तर पर 25 दिसंबर को लखनऊ स्थित लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजेगी अटल जयंती संस्कृति विभाग के तत्वावधान में 25 दिसंबर की शाम 6 बजे से 8 बजे तक उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर लखनऊ में आयोजित काव्य पाठ प्रतियोगिता के विजेता कवि अपनी प्रस्तुतियां देंगे, जिससे अटल जी के कवि व्यक्तित्व को भी श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।

झांसी का कृषि विज्ञान केंद्र गोद लिए गांव के किसानों को निःशुल्क दे रहा उन्नत गेहूं, गोभी और सरसों के बीज

गोद लिए दस गांव के चयनित किसानों को निःशुल्क बोरान उर्वरक भी कराया जा रहा उपलब्ध अधिक पैदावार वाले बीज और पौधे निःशुल्क देकर किसानों को कृषि उपज बढ़ाने में की जा रही मदद झांसी योगी सरकार कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों को उन्नत खेती और अधिक पैदावार के लिए प्रेरित कर रही है। झांसी के भरारी में स्थित कृषि विज्ञान केंद्र गोद लिए गए दस गांव के चयनित किसानों को उन्नत खेती के लिए न सिर्फ प्रेरित कर रहा है बल्कि उन्हें निशुल्क बीज और उर्वरक भी प्रदान कर रहा है। इन किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र में आमंत्रित कर कृषि वैज्ञानिक उन्नत और अधिक पैदावार के तौर तरीकों से भी परिचित करा रहे हैं। झांसी के कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से गोद लिए गए गांव के किसानों को गेहूं की नई प्रजाति करनवंदना का बीज प्रदान किया गया है, जिसकी पैदावार परंपरागत गेहूं की तुलना में काफी अधिक होती है। सरसों की राधिका नस्ल के बीज प्रदान किए गए हैं, जिसमें शाखाएं अधिक होती हैं। इससे पैदावार अधिक होती हैं। फूलगोभी के भी उन्नत किस्म के तैयार पौधे प्रदान किए हैं, जिन्हें कृषि विज्ञान केंद्र में तैयार किया गया है। इन किसानों को बोरान उर्वरक भी प्रदान किया गया है, जो खेतों की उर्वर क्षमता बढ़ाने में सहायक होता है। कृषि विज्ञान केंद्र झांसी के वैज्ञानिक डॉ आदित्य कुमार सिंह ने बताया कि किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र में आमंत्रित कर उन्हें बीज, पौधे और उर्वरक प्रदान किए गए हैं। इन किसानों को पैदावार बढ़ाने के तौर-तरीके प्रदान करने के साथ ही निरंतर मार्गदर्शन भी प्रदान किया जा रहा है। आधुनिक तरीकों को अपनाकर किसान खेती में पैदावार बढ़ा सकते हैं।

10-15 करोड़ की आमदनी का रास्ता: जानें कैसे बनेगा झारखंड ‘सीड हब’

रांची झारखंड में वन विभाग ग्रामीणों को परिपक्व बीजों के चयन और सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित करेगा, जिससे करंज, साल, शीशम और बांस के बीजों से 10-15 करोड़ की आमदनी होगी। जनवरी से मार्च का महीना राज्य से जंगलों में इमारती लकड़ियों के बीज संग्रहण का होता है। वन क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीण अपने स्तर से बीज संग्रहित करते हैं और इसे वन विभाग की संबंधित संस्था को सौंप देते हैं। वन विभाग ने परिपक्व बीजों को चुनने और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए लोगों को प्रशिक्षण देगा। प्रशिक्षण पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से होगा, जिससे बीज संरक्षण में मदद मिलेगी और बर्बादी कम होगी। उनकी सहयोग समितियां भी बनाई गई हैं। बीज संवर्धन संस्थान के निदेशक रहे रामाश्रय प्रसाद ने बताया कि राज्य के वन क्षेत्र में रहने वाले लोगों को इससे पहले केंदू पत्ते के संग्रहण का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। जानकारी के अभाव में लोग साठ प्रतिशत बीजों को नष्ट कर देते हैं। पुष्ट बीजों से रहने से किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी। बांस के बीज, खासकर अफ्रीकी देशों में, निर्यात किए जाते हैं, जिससे राज्य ‘सीड हब’ बन सकता है। राज्य में मुख्य रूप से तीन प्रकार के बांस पाए जाते हैं,  डेंड्रोकैलामस स्ट्रिक्टस (लाठी बांस), बम्बूसा नूटन्स (सामान्य बांस), बम्बूसा तुलदा (पानी बांस)। साल, शीशम, बांस, करंज के बीजों को चुनने और उन्हें संरक्षित रखने के लिए लोगों को प्रशिक्षित किया जाएगा। राज्य के बांस बीजों की विदेशों खासकर अफ्रीकी देशों तक में बिक्री की जाती है। झारखंड के बांस के बीजों की मांग विशेष रूप से अफ्रीकी देशों में बहुत अधिक है। हां के बांस की आनुवंशिक विविधता और कठिन परिस्थितियों में पनपने की क्षमता।  यदि ग्रामीण सही तरीके से बीजों का संग्रहण करें, तो झारखंड ‘सीड हब’ बन सकता है। बीजों की बिक्री से 10-15 करोड़ रुपये की वार्षिक आय का अनुमान है। केवल बीज ही नहीं, बल्कि बांस से बने फर्नीचर, हस्तशिल्प, और बांस के ‘करील’ की खाद्य बाजार में भारी मांग है। वन क्षेत्र में पाए जाने वाले वृक्षों के बीज पर पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय ने शोध कार्य किया है। इसमें बीजों के चयन पद्धति, उनके संरक्षण के उपायों की जानकारी दी गई है। लोगों को प्रशिक्षित करने में यहां के विशेषज्ञों का सहयोग लिया जाएगा।

मार्च 2026 तक गोरखपुर में फोरलेन सड़कों से जुड़ी पांच महत्वपूर्ण परियोजनाएं हो जाएंगी पूर्ण

इसी अवधि तक चार ओवरब्रिज-फ्लाईओवर भी बनकर हो जाएंगे तैयार गोरखपुर, नए साल में गोरखपुर में फोरलेन सड़कों और फ्लाईओवर का विशाल संजाल नजर आएगा। मार्च 2026 तक फोरलेन सड़कों से जुड़ी पांच महत्वपूर्ण परियोजनाएं पूर्ण हो जाएंगी। इसी अवधि तक चार ओवरब्रिज-फ्लाईओवर भी बनकर हो तैयार हो जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा की जा रही मॉनिटरिंग और समीक्षा से निर्माण कार्यों में तेजी आई है। अगले तीन-साढ़े तीन माह में पूरी होने वाली रोड कनेक्टिविटी से जुड़ी फोरलेन और ओवरब्रिज-फ्लाईओवर की परियोजनाओं से शहर के आंतरिक और वाह्य आवागमन को सुगम कर देंगी। देवरिया बाईपास इनमें सबसे पहले बनकर तैयार होने वाली फोरलेन सड़क होगी। देवरिया बाईपास रोड का फोरलेन में चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्य मार्च 2023 में शुरू हुआ था और जनवरी 2026 के अंत तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है। कुल 9.50 किमी लंबी सड़क को फोरलेन में परिवर्तित करने में 399.24 करोड़ रुपये की लागत आएगी। वर्तमान में निर्माण कार्य की भौतिक प्रगति 95 फीसद है। पैडलेगंज से फिराक गोरखपुरी चौक होते हुए बेतियाहाता चौराहे तक 1.80 किमी सड़क को भी फोरलेन बनाने का तेजी से हो रहा है। 277.78 करोड़ रुपये की लागत वाली इस फोरलेन सड़क परियोजना के मार्च 2026 तक पूरी तरह बन जाने की उम्मीद है। 11.60 किमी की लंबाई में भटहट से बांसस्थान मार्ग को 689.35 करोड़ रुपये की लागत से फोरलेन बनाया जा रहा है। इसका निर्माण मार्च 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके पूरी तरह बन जाने से आयुष विश्वविद्यालय आने-जाने वालों की यात्रा काफी आसान हो जाएगी। नौसढ़ से पैडलेगंज की सड़क शहर की ऐसी पहली सड़क होगी जिसे सिक्सलेन में तब्दील किया जा रहा है। 5.10 किमी लंबे इस मार्ग पर करीब 94 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया है। इसके निर्माण पर 297.29 करोड़ रुपये की लागत आएगी। कार्य मार्च 2026 तक पूरा किया जाना लक्षित है। जिला जेल बाईपास मार्ग को भी फोरलेन में चौड़ीकृत-सुदृढ़ीकृत करने का काम जारी है। 8.56 किमी लंबी इस सड़क को फोरलेन बनाने में 369.04 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। वर्तमान में निर्माण की भौतिक प्रगति 96 प्रतिशत है और मार्च 2026 तक इसे पूर्ण किया जाना है। इन सड़कों में से देवरिया बाईपास का निर्माण कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड द्वारा जबकि भटहट-बांसस्थान, नौसढ़-पैडलेगंज, जिला जेल बाईपास और पैडलेगंज-फिराक गोरखपुरी चौक मार्ग का लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड तीन द्वारा कराया जा रहा है। मार्च 2026 तक ये फ्लाईओवर व ओवरब्रिज बनकर हो जाएंगे तैयार -बरगदवा चौराहा से नकहा जंगल-मानीराम स्टेशनों के मध्य समपार संख्या 5ए पर ओवरब्रिज, लागत 152.19 करोड़ रुपये, पूर्ण करने का लक्ष्य जनवरी 2026, भौतिक प्रगति 97 प्रतिशत से अधिक। -चौरीचौरा-भोपा बाजार में समपार संख्या 147बी पर रेल ओवरब्रिज, लागत 49.22 करोड़ रुपये, पूर्ण करने का लक्ष्य फरवरी 2026, भौतिक प्रगति सेतु निगम भाग 98 प्रतिशत। -खजांची चौराहा पर फ्लाईओवर, लागत 96.50 करोड़ रुपये, पूर्ण करने का लक्ष्य जनवरी 2026, भौतिक प्रगति 98.84 प्रतिशत। -नौसढ़-पैडलेगंज मार्ग पर सिक्सलेन फ्लाईओवर तथा देवरिया बाईपास कनेक्टिंग फ्लाईओवर, लागत 429.49 करोड़ रुपये, पूर्ण करने का लक्ष्य जनवरी 2026, भौतिक प्रगति करीब 80 प्रतिशत।

700 करोड़ क्लब में शामिल हुई धुरंधर, 13वें दिन कलेक्शन ने तोड़े रिकॉर्ड

मुंबई फिल्म ‘धुरंधर’ इस समय बॉक्स ऑफिस में धमाके पे धमाका कर रही है. कई बड़े-बड़े दिग्गज स्टार्स भी आदित्य धर द्वारा निर्देशित इस फिल्म की तारीफ कर रहे हैं. फिल्म ने दो हफ्तों में ही बॉक्स ऑफिस के कई बड़े रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया है और इसी के साथ ये फिल्म साल 2025 में सबसे कम समय में इतना कमाने वाली पहली फिल्म बन गई है. 13 दिनों में फिल्म की वर्ल्डवाइड कमाई का आकंड़ा 700 करोड़ के करीब जा पहुंचा है. बता दें कि ‘धुरंधर’ ने पहले वीकेंड की तुलना में दूसरे वीकेंड पर बंपर कमाई किया है. Sacnilk की रिपोर्ट के मुताबिक, 280 करोड़ के बजट में बनी ‘धुरंधर’ ने रिलीज के 13वें दिन 25.50 करोड़ रुपये की कमाई किया है. इसकी साथ भारत में इस फिल्म ने अब तक 437.25 करोड़ रुपये का कलेक्शन कर लिया है. विदेशों से किया इतने का कलेक्शन वहीं, इस फिल्म के वर्ल्डवाइड कमाई के आंकड़ों की बात करें, तो विदेशों में भी इस फिल्म ने शानदार प्रदर्शन किया है. ‘धुरंधर’ ने 12 दिनों में 634 करोड़ रुपये की कमाई किया और अब 13 दिनों में ये आकंड़ा 700 करोड़ के करीब जा पहुंचा है. फिल्म ने केवल ओवरसीज मार्केट से 150 करोड़ रुपये से ज्यादा का कलेक्शन कर लिया है. वहीं, अब इस फिल्म को इस वीकेंड फिल्म अवतार: फायर एंड एश से कड़ी टक्कर मिल सकती है. फिल्म की दमदार स्टारकास्ट फिल्म ‘धुरंधर’ के स्टारकास्ट की बात करें तो ये काफी दमदार है. फिल्म में रणवीर सिंह  के अलावा सारा अर्जुन, संजय दत्त , आर. माधवन , अक्षय खन्ना, राकेश बेदी  और अर्जुन रामपाल जैसे कलाकार ने भी काम किया है. हर स्टार ने फिल्म में एक अलग ही जान डाला है. वही, ये फिल्म अक्षय खन्ना के लिए भी काफी लकी साबित हुई है.

मंत्री राम विचार नेताम ने शहीद वीर नारायण सिंह की प्रतिमा स्थापना हेतु किया भूमिपूजन

जनजातीय समाज के विकास के लिए सरकार तत्पर किसानों को एकीकृत खेती के लिए प्रोत्साहित करें रायपुर, जनजातीय गौरव दिवस के उपलक्ष्य पर आज 18 दिसम्बर को तहसील कार्यालय के समीप महासमुंद में शहीद वीर नारायण सिंह की प्रतिमा स्थापित किए जाने हेतु भूमिपूजन कार्यक्रम गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। आदिवासी समाज के परंपरागत पूजा पाठ से भूमिपूजन सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम आदिम जाति विकास एवं कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ।कार्यक्रम की अध्यक्षता महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने की। कार्यक्रम का आयोजन छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ जिला महासमुंद, 52 गढ़ गोंड समाज महासमुंद एवं आदिवासी समाज महासमुंद के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में चंद्रहास चंद्राकर, राज्य बीज विकास निगम के अध्यक्ष,रूप सिंह मंडावी, अनुसूचित जनजाति आयोग उपस्थित रहे। विशेष अतिथि के रूप में भीखम सिंह ठाकुर उपाध्यक्ष जिला पंचायत, दिशा रामस्वरूप दीवान अध्यक्ष जनपद पंचायत, आर.एन. ध्रुव प्रांताध्यक्ष छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ, कमलेश ध्रुव अध्यक्ष केन्द्रीय गोंड महासभा धमधागढ़, आर एन ध्रुव, ऐतराम साहू , देवीचंद राठी उपाध्यक्ष , थानसिंह दीवान, एस पी ध्रुव, श्रीमती राधेश्याम त्रिलोकी, इश्वरी भोई उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि आज गुरु घासी दास जयंती आज पूरे देश में मनाया जा रहा है और ऐसे विशेष अवसर में जनजातीय गौरव दिवस मना रहे हैं। यह गौरव का क्षण है। उन्होंने कहा कि ये देश के लिए अमृत काल का समय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंशानुरूप यहां जनजातीय गौरव के लिए अनेक कार्य किया जा रहा है। नया रायपुर में 50 करोड़ रुपए की लागत से आदिवासी समाज के योगदान को अमिट बनाने भव्य म्यूजियम बनाया गया है। जिसे देश भर के लोग देखने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में 80 हजार करोड़ की लागत से जनजातीय उत्थान और विकास के लिए बजट दिया गया है। राज्य में धरती आबा और पी एम जनमन योजना संचालित किया जा रहा है।जिसमें आदिवासी गांवो में सड़क, बिजली, पानी और नौकरी की समुचित व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि समाज को आगे बढ़ाने में कृषि विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। किसानों को एकीकृत कृषि आधारित खेती करने प्रोत्साहित करें। गाय पालन भी करें। युवाओं को दिल्ली में निःशुल्क कोचिंग की व्यवस्था की गई है। प्रयास स्कूल के माध्यम से बच्चों को पढ़ाई की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ लेने कहा। उन्होंने शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह केवल आदिवासी समाज ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध सबसे पहले संगठित संघर्ष कर देशभक्ति, साहस और त्याग का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उनकी प्रतिमा की स्थापना आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास, संस्कृति और स्वाभिमान से जोड़ने का कार्य करेगी। राज्य शासन जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। अध्यक्षीय उद्बोधन में महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने कहा कि महासमुंद की पावन धरती पर शहीद वीर नारायण सिंह की प्रतिमा स्थापित होना गर्व का विषय है। यह प्रतिमा जनजातीय समाज के संघर्ष, बलिदान और आत्मसम्मान की प्रतीक बनेगी। उन्होंने कहा कि समाज के महापुरुषों को सम्मान देना ही सच्ची श्रद्धांजलि है और ऐसे आयोजनों से समाज में एकता और जागरूकता बढ़ती है। उन्होंने अंचल में विकास को रेखांकित करते हुए कहा कि सरकार किसानों की आय दुगुना करने संकल्पित है। इसी कड़ी में सिंचाई क्षमता को बढ़ाने जिले में 3200 करोड़ की लागत से सिकासेर बांध गरियाबंद से शहीद वीर नारायण सिंह जलाशय कोडार में पानी लाने की व्यवस्था कर रहे है। श्री सिन्हा ने बताया कि 650 करोड़ की लागत से सिरपुर बैराज भी बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहां के लोग स्वाभिमानी है और अन्याय के खिलाफ नहीं झुकते।आदिवासी समाज किसी से पीछे नहीं है।आज हमारे मुख्यमंत्री भी आदिवासी समाज से है। विकसित भारत के निर्माण में महासमुंद की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। समारोह को संबोधित करते हुए अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री रूप सिंह मंडावी ने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस हमारे नायकों को स्मरण करने और उनके आदर्शों को आत्मसात करने का दिन है। छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज एक अलग ही पहचान रखता है। उन्होंने समाज के क्रमिक विकास और विस्तार के संदर्भ में जानकारी दी। समाज के पदाधिकारी एवं जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री भीखम सिंह ठाकुर ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह ने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाकर समाज को दिशा दी। उनकी शहादत हमें सिखाती है कि अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होकर संघर्ष करना आवश्यक है। समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी श्री कमलेश ध्रुव एवं आर एन ध्रुव ने भी संबोधित किया। उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा और शहीद वीर नारायण सिंह के शहादत पर अपने प्रेरक विचार रखे। इन्होंने कहा कि दोनों वीर अंग्रेजी हुकूमत और प्रतिकूल परिस्थिति के खिलाफ उठ खड़े हुए।कार्यक्रम के दौरान विधिवत पूजा-अर्चना के साथ भूमिपूजन सम्पन्न किया गया। इस अवसर पर समाज के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, परिक्षेत्र एवं बड़ी संख्या में समाज जन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रभक्ति और सामाजिक एकता के संदेश के साथ हुआ।

राजधानी रांची में बढ़ता वायु प्रदूषण, साफ हवा में बेंगलुरु-चेन्नई आगे

 रांची झारखंड की राजधानी रांची , जो कभी अपनी घने जंगलों, हरियाली और स्वच्छ हवा के लिए मशहूर थी, आज एयर Pollution की गंभीर समस्या से जूझ रही है। शहर के कई हिस्सों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) अनहेल्दी श्रेणी में पहुंच गया है, जिससे आम नागरिकों से लेकर बच्चों और बुजुर्गों तक के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। रांची में वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर है. शहर के कई हिस्सों में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। PM2.5 और PM10 जैसे प्रदूषक मुख्य कारण हैं। विशेषज्ञों और नागरिकों ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है, और सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की है। इन दिनों में AQI का स्तर 150 से ऊपर बना हुआ है, और कुछ इलाकों में यह 180 के करीब दर्ज किया गया है। झारखंड स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (JSPCB) ने क्लीन एयर प्लान को सख्ती से लागू करने का ऐलान किया है। रांची को इस संकट से निकालने के लिए सरकार, प्रशासन और नागरिकों का सहयोग जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तुरंत कदम उठाए गए तो 2026 तक सुधार संभव है। आंकड़ों के अनुसार रांची का औसत AQI अनहेल्दी (151-200) की श्रेणी में है। मुख्य प्रदूषक PM2.5 और PM10 हैं, जो सर्दियों में मौसमी स्थितियों के कारण और बढ़ जाते हैं। देश के कई बड़े शहरों, जैसे कि Bengaluru or Chennai की हवा अपेक्षाकृत साफ है। कांके रोड में रहने वाली सोशल एक्टिविस्ट रंजना कुमारी का कहना है, हरित क्षेत्र की कमी सबसे बड़ा कारण है। हमें तुरंत बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करना होगा। अभी तक आपने सुन होगा कि राजधानी दिल्ली pollution का मार झेल रहा है। लेकिन अब रांची का शहर और इसका कस्बा भी प्रदूषण से अछूता नहीं रहा। प्रमुख पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. श्वेता कुमारी कहती हैं, रांची में बढ़ता PM2.5 स्तर फेफड़ों को स्थायी नुकसान पहुंचा रहा है। बच्चों और अस्थमा रोगियों को बाहर निकलते समय N95 मास्क पहनना चाहिए। प्रशासन को ट्रैफिक और निर्माण धूल पर सख्ती बरतनी होगी। नागरिक अनावश्यक बाहर निकलने से बचें, मास्क पहनें और जागरूकता फैलाएं।

जशपुर के लिए मुख्यमंत्री का तोहफा: 4 प्रमुख सड़कों के लिए 12.69 करोड़ की मंजूरी

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर जिले के सर्वांगीण विकास को नई गति देने के लिए जिले की चार प्रमुख सड़कों के निर्माण के लिए कुल 12 करोड़ 69 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इस निर्णय से ग्रामीण-शहरी संपर्क मजबूत होगा, आवागमन आसान बनेगा और क्षेत्र की आर्थिक प्रगति को बल मिलेगा। जशपुरवासियों ने मुख्यमंत्री के इस जनहितकारी फैसले पर उत्साह व्यक्त करते हुए श्री साय के प्रति गहरा आभार जताया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा स्वीकृत सड़क परियोजनाओं में 3 किमी लंबी कंडोरा से आराकोना पहुंच मार्ग के लिए 3 करोड़ 86 लाख रुपये, 3 किमी लंबी माडो से ढेंगनी पहुंच मार्ग के लिए 3 करोड़ 77 लाख रुपये, 1.9 किमी लंबी चराईडांड के मलेरिया बस्ती से एनएच-43 तक पहुंच मार्ग के लिए 2 करोड़ 20 लाख रुपये तथा 2.86 किमी लंबी बेहराखार अटल चौक से कुरूमढ़ोड़ा तक पहुंच मार्ग के लिए 3 करोड़ 76 लाख रुपये शामिल हैं। इन सड़कों के निर्माण से दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में यातायात सुगम होगा, जिससे व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान हो जाएगी। दो वर्षों में 1000 करोड़ से अधिक की सड़क सौगात, ग्रामीण तस्वीर बदली उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने दो वर्ष के कार्यकाल में जशपुर जिले को सड़क निर्माण के लिए लगभग 1000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आवंटित की है। इससे न केवल बुनियादी ढांचा मजबूत हुआ है, बल्कि ग्रामीण अंचलों की समग्र विकास की गति तेज हो गई है। राज्य शासन की इस विकासोन्मुखी नीति से जशपुर जैसे आदिवासी बहुल जिलों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है, जो छत्तीसगढ़ सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस सौगात पर जशपुर के ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को धन्यवाद ज्ञापित किया है। लोगों का मानना है कि इन सड़कों से न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि क्षेत्र की पर्यटन क्षमता भी मजबूत होगी। छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल राज्य के हर कोने तक विकास पहुंचाने के संकल्प को साकार कर रही है। विष्णुदेव साय सरकार के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ बुनियादी विकास के नए मानक गढ़ रहा है, जिससे लाखों नागरिक लाभान्वित हो रहे हैं।

जल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम, 10 स्थानों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट बनाएगा निगम

रायपुर राजधानी में लगातार गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए नगर निगम ने जल संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाया है. शहर में भू-जल स्तर बढ़ाने के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा 10 स्थानों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट बनाए जाने की योजना तैयार की गई है. इस योजना के लिए लगभग 50 लाख रुपये का प्रस्ताव केंद्रीय जल आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजा गया है. नगर निगम के जल विभाग के अनुसार, प्रत्येक रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट पर करीब 5 लाख रुपये की लागत आएगी. इन पिटों के जरिए वर्षा जल को संग्रहित कर सीधे जमीन में पहुंचाया जाएगा, जिससे भू-जल का पुनर्भरण हो सके. फिलहाल शहर में उपयुक्त स्थानों का चिन्हांकन किया जा रहा है. कई इलाकों में काफी नीचे चला गया है जल स्तर नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक रायपुर में भू-जल स्तर तेजी से गिर रहा है. कचना, सड्डू और सेजबहार जैसे क्षेत्रों में जल स्तर 800 से 1000 फीट तक पहुंच गया है. इससे बोरवेल की गहराई बढ़ रही है और जल आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव भी लगातार बढ़ रहा है. 62 एकड़ क्षेत्र में पहले से विकसित है रेन वाटर हार्वेस्टिंग इससे पहले भी नगर निगम द्वारा दलदल सिवनी क्षेत्र में लगभग 62 एकड़ में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली विकसित की जा चुकी है. इंदिरा स्मृति वन के पास बनाए गए परकोलेशन टैंकों में मानसून के दौरान वर्षा जल को एकत्र कर जमीन में समाहित किया जाएगा. विशेषज्ञों के अनुसार इस व्यवस्था से करीब 21 करोड़ लीटर पानी का भंडारण संभव है. नगर निगम का मानना है कि वर्षा जल संरक्षण से भविष्य में जल संकट को काफी हद तक रोका जा सकता है. निगम आयुक्त विश्वदीप ने बताया कि प्रस्ताव को स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू किया जाएगा. साथ ही आने वाले समय में सरकारी भवनों और सार्वजनिक स्थलों पर भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं विकसित करने की योजना है.

चेयरमैन बनने के लिए 13 सदस्य चाहिए, AAP की जीत पर भगवंत मान की जमकर सराहना

लुधियाना पंजाब के लुधियाना में जिला परिषद चुनाव में आम आदमी पार्टी ने अन्य पार्टियों से बेहतर प्रदर्शन तो किया लेकिन जिला परिषद का चेयरमैन बनाने के लिए जरूरी संख्या को वो भी हासिल नहीं कर सके। आम आदमी पार्टी ने जिला परिषद की 11 सीटें जीती हैं।  चेयरमैन बनाना आम आदमी पार्टी के लिए भी आसान नहीं होगा। आम आदमी पार्टी को अपना चेयरमैन बनाने का सारा दारोमदार अब विधायक मनप्रीत सिंह अयाली के हाथ में है। आम आदमी पार्टी को चेयरमैन बनाने के लिए दो सदस्यों की जरूरत है और मनप्रीत अयाली के पास तीन सदस्य हैं। कांग्रेस के पास 8 और शिअद के पास 3 सीटें कांग्रेस के पास 8 और शिअद के पास 3 सीटें हैं। कांग्रेस और शिअद आम आदमी पार्टी को समर्थन नहीं देंगे। अगर मनप्रीत अयाली ने आप को समर्थन नहीं दिया तो लुधियाना में जिला परिषद का चेयरमैन बनाने के लिए कांग्रेस में सेंधमारी करनी होगी। हालांकि इस समय कांग्रेस के सदस्य भी पार्टी नहीं छोड़ेंगे क्योंकि एक साल बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। अयाली ने समर्थन दिया तो विधानसभा चुनाव में होगी मुश्किल हलका दाखा में मनप्रीत सिंह अयाली का वर्चस्व लंबे समय से है। उनकी मेहनत से ही उनके समर्थकों ने शानदार जीत हासिल की। अयाली अगर चेयरमैन बनाने के लिए आप को समर्थन देते हैं तो आने वाले विधानसभा चुनाव में उनके लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं क्योंकि 2027 में उन्हें फिर से विधानसभा चुनाव में उतरना है और सामने उनका मुकाबला आप के उम्मीदवार से होगा। मेरे समर्थक दो चेयरमैन के लिए समर्थन मनप्रीत अयाली को पता है कि उनके समर्थन के बिना जिला परिषद का चेयरमैन नहीं बन सकता। ऐसे में अयाली ने अब नया दाव चल दिया है। अयाली ने कहा कि उनके तीन समर्थक चुनाव जीते हैं उनमें से एक को चेयरमैन बनाने के लिए जो समर्थन देना चाहते हैं वो साथ आएं। हम पूरे जिले में विकास करके दिखाएंगे। हमारे पास विकास करवाने का पूरा अनुभव है। लुधियाना जिला परिषद के जीते उम्मीदवार ललहेड़ी से जतिंदर सिंह औजला (अकाली दल), बीजा से अवतार सिंह (आम आदमी पार्टी), मटण से जगरूप सिंह (AAP), नीलों कलां से हरजोत सिंह मंगत (अकाली दल), खिरनियां से बरिंदरदीप कौर (AAP), मत्तेवाड़ा से ज्ञानप्रीत कौर ग्रेवाल (AAP), चक सरवां नथ से हरजीत कौर (अकाली दल), कद्दों से गुरविंदर सिंह गिल (कांग्रेस), रामगढ़ सरदारां से अवतार सिंह (कांग्रेस) जीते हैं। किला रायपुर से सिकंदर सिंह (AAP)। नारंगवाल से जसवीर कौर (AAP), पक्खोवाल से राजविंदर कौर बराड़ (कांग्रेस), सुधार से सतवंत सिंह (कांग्रेस), हंसकलां से अमनदीप कौर रूमी (निर्दलीय), बिंजल से सुखभिंदर सिंह (कांग्रेस), मानूके से शहरीन कौर (AAP), सिधवां कलां से गुरप्रीत कौर (AAP), गालिब कलां से हरिंदरजीत सिंह चाहल (कांग्रेस), पुड़ैन से गुरमीत सिंह (निर्दलीय) जीत दर्ज की है। इसके साथ ही हंबड़ा से अजीतपाल कौर (AAP), मोही से प्रो. प्रदीप कौर लटाला (निर्दलीय), गिल से बलराज सिंह (AAP), धांधरा से लखवीर कौर (AAP), आलमगीर से हरजीवन कौर (कांग्रेस), मांगट से तजपरविंदर सिंह (कांग्रेस) ने जीत हासिल की। ब्लॉक समिति के नतीजों का गणित ब्लॉक समिति की कुल 2838 सीटों में से 352 पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे और 2486 जोन के लिए मतदान हुआ. अब तक कुल 2097 सीटों के नतीजे आधिकारिक तौर पर घोषित किए गए हैं. इनमें AAP ने 892 सीटों पर जीत और 339 निर्विरोध सीटों के साथ कुल 1231 सीटों पर कब्जा किया है. कांग्रेस को 419 जीत और 3 निर्विरोध सीटों के साथ 422 सीटें मिली हैं. अकाली दल को 253, बीजेपी को 49 और बसपा को 26 सीटें हासिल हुई हैं. निर्दलीय उम्मीदवारों ने कुल 116 सीटें जीती हैं. अंतिम आंकड़ों का इंतजार चुनाव परिणामों की अंतिम तालिका का अभी भी इंतजार किया जा रहा है. मतगणना जारी रहने के कारण बाकी सीटों के नतीजे धीरे-धीरे स्पष्ट हो रहे हैं. अब तक के रुझानों और नतीजों ने पंजाब की राजनीति में AAP के बढ़ते प्रभाव को साफ कर दिया है. बीजेपी और अन्य छोटी पार्टियों के लिए ये नतीजे चुनौतीपूर्ण रहे हैं. 6 निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी जिला परिषद में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है. अंतिम आंकड़े घोषित होने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी. जिला परिषद लुधियाना: पार्टी-वाइज कुल सीटें आम आदमी पार्टी: 11 कांग्रेस : 8 शिअद: 3 आजाद(मनप्रीत अयाली गुट): 3 कुल सीटें 25 2018 में कांग्रेस ने जीती थी 25 की 25 सीटें 2018 में हुए जिला परिषद चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने जिले की सभी 25 सीटों पर जीत हासिल करके अपना चेयरमैन बनाया था। तब पंजाब में कांग्रेस पार्टी की सरकार थी और कैप्टन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री थे। जिला परिषद का कार्यकाल 2023 में समाप्त हो गया था और तब से चुनाव नहीं करवाए गए। उससे पहले लुधियाना में अकाली दल का चेयरमैन रहा है। केजरीवाल ने की भगवंत मान की तारीफ आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब जिला पंचायत चुनाव पर में पार्टी की जीत के लिए मान सरकार की तारीफ की है। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पंजाब में निष्पक्ष चुनाव हुए। इससे ज्यादा निष्पक्ष चुनाव नहीं हो सकता है। निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी ने बढ़िया प्रदर्शन किया। पंजाब की भगवंत मान सरकार से जनता खुश है। जनता ने आप सरकार के काम पर मुहर लगाई है। कल देर रात तक डेटा के अनुसार, पंजाब में ज़िला परिषद चुनावों के नतीजे इस प्रकार हैं: आप: 145 कांग्रेस: 30 अकाली दल: 26 बीजेपी: 6 बीएसपी: 3 अन्य: 7  बठिंडा जिला परिषद पर अकाली दल का कब्जा बठिंडा में 137 ब्लॉक समिति सीटों में से SAD ने 79 सीटें जीतीं, उसके बाद AAP (35) रही। जिला परिषद चुनावों में, SAD ने इस जिले में 17 में से 13 सीटें जीतीं। इस तरह, इस जिले में अपने जिला परिषद चेयरमैन को चुनने पर नियंत्रण हासिल कर लिया, जो पारंपरिक रूप से अकाली दल का गढ़ रहा है। : अबोहर जिला परिषद पर बीजेपी का दबदबा राज्य बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ के निर्वाचन क्षेत्र अबोहर में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत मिला। उन्होंने इस विधानसभा क्षेत्र की दोनों जिला परिषद सीटों पर जीत हासिल की। ​​16 ब्लॉक समितियों में से बीजेपी ने 8 सीटें जीतीं, उसके बाद AAP और … Read more