samacharsecretary.com

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली दंगे के आरोपी की जमानत याचिका रद्द की

 प्रयागराज इलाहाबाद हाईकोर्ट में जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की सिंगल बेंच ने बरेली दंगे के आरोपी रेहान की जमानत अर्जी खारिज कर दी है. याचिकाकर्ता पर 'आई लव मोहम्मद' जुलूस के दौरान विवादित नारे लगाने का आरोप है. कोतवाली पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के बाद आरोपी ने राहत के लिए याचिका दायर की थी.  कोर्ट ने अपने 9 पेज के फैसले में नारे को भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए खतरा माना है. यह मामला लोगों को सशस्त्र विद्रोह के लिए उकसाने और कानून के शासन को चुनौती देने से जुड़ा है. हाईकोर्ट ने अपने फैसले के पैराग्राफ 12 में कहा, "'गुस्ताख ए नबी की एक सजा, सिर तन से जुदा' का नारा देश की अखंडता को चुनौती है." कोर्ट के मुताबिक यह नारा न केवल धारा 152 बीएनएस के तहत दंडनीय है, बल्कि यह लोगों को सशस्त्र विद्रोह के लिए उकसाता है. जस्टिस देशवाल ने मौलाना तौकीर रजा के सहयोगी रेहान पर लगे इस आरोप को इस्लाम के मूल सिद्धांतों के भी खिलाफ बताया है.  वकीलों की दलीलें और अंतिम फैसला… सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता अखिलेश कुमार द्विवेदी ने जमानत मंजूर करने की अपील की थी. वहीं, जमानत का विरोध करते हुए एडिशनल एडवोकेट जनरल अनूप त्रिवेदी और अपर शासकीय अधिवक्ता नितेश श्रीवास्तव ने कड़े तर्क रखे.  कोर्ट ने दोनों पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद पाया कि याचिकाकर्ता पर गंभीर आरोप हैं. इसके बाद, कोर्ट ने तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आरोपी रेहान की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया.

ईशान किशन की तूफानी पारी: 10 छक्के, 6 चौके और फाइनल में शतक; झारखंड ने हरियाणा को हराकर SMAT जीती

 पुणे सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025-26 का फाइनल गुरुवार (18 दिसंबर) को खेला गया. पुणे के महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में हुए इस मुकाबले में झारखंड ने हरियाणा को 69 रनों से पराजित किया. मुकाबले में झारखंड ने हरियाणा को जीत के लिए 263 रनों का टारगेट दिया था, लेकिन हरियाणवी टीम 18.3 ओवरों में 193 रनों पर सिमट गई. झारखंड ने पहली बार ये टूर्नामेंट जीता है. वहीं हरियाणा की टीम भी पहला फाइनल खेल रही थी, लेकिन चैम्पियन बनने का उसका सपना टूट गया. झारखंड की खिताबी जीत के हीरो कप्तान ईशान किशन रहे, जिन्होंने सैयद मुश्ताक अली के इस सीजन में सबसे ज्यादा 517 रन बनाए. ईशान ने फाइनल में भी शतक रहा. सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का ये 18वां संस्करण रहा. तमिलनाडु की टीम सबसे ज्यादा तीन बार सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जीतने में सफल रही है. इस टीम ने 2006-07 में आयोजित सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के पहले संस्करण का खिताब भी जीता था. कर्नाटक, गुजरात, वडोदरा और मुंबई ने दो-दो बार खिताब जीता है. वहीं उत्तर प्रदेश, ईस्ट जोन, महाराष्ट्र, बंगाल, दिल्ली, पंजाब और झारखंड की टीम्स ने एक-एक बार ट्रॉफी जीती. चेज में शुरू से ही हरियाणवी बैटर्स को तेजी से स्कोर करने थे. इसी प्रेशर में हरियाणा ने पावरप्ले में ही तीन विकेट खो दिए. उसके बाद हरियाणा की टीम चेज में कभी ट्रैक पर नहीं दिखी. यशवर्धन दलाल (53 रन), सामंत जाखर (38 रन) और निशांत सिंधु (31 रन) ही क्रीज पर टिक पाए. झारखंड की तरफ से तेज गेंदबाजों सुशांत मिश्रा और बाल कृष्ण ने तीन-तीन विकेट झटके. विकास सिंह और अनुकूल रॉय ने भी दो-दो सफलताएं अर्जित कीं. 10 छक्के, 6 चौके… ईशान किशन का तूफानी प्रदर्शन जारी  पुणे के महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) स्टेडियम में आयोजित इस मैच में ईशान ने सिर्फ 45 गेंदों पर शतक पूरा कर लिया. ईशान ने अंशुल कम्बोज की गेंद पर छक्का लगाकर अपना शतक पूरा किया. ईशान ने 49 गेंदों पर 101 रन बनाए, जिसमें 10 छक्के और 6 चौके शामिल रहे. ईशान किशन को हरियाणा के तेज गेंदबाज सुमित कुमार ने क्लीन बोल्ड किया. ईशान सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के खिताबी मुकाबले में शतक लगाने वाले सिर्फ दूसरे बल्लेबाज हैं. इससे पहले पंजाब के अनमोलप्रीत सिंह ही ऐसा कर पाए थे. अनमोलप्रीत ने नवंबर 2023 में वडोदरा के खिलाफ फाइनल में 113 रन बनाए थे. सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में ईशान किशन का ये पांचवां शतक रहा. ईशान अब सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के इतिहास में सबसे अधिक शतक जड़ने वाले बल्लेबाजों की सूची में पहले नंबर पर आ गए. अभिषेक शर्मा ने भी पंजाब के लिए सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में 5 शतक लगाए हैं. देखा जाए तो ईशान के टी20 करियर का ये छठा शतक रहा. कुमार कुशाग्र भी चमके 27 साल के ईशान किशन और कुमार कुशाग्रा ने हरियाणा के गेंदबाजों की जमकर धुनाई करते हुए प्रति ओवर 12 से अधिक रन बनाए. किशन और कुशाग्र के बीच दूसरे विकेट के लिए 177 रनों की साझेदारी हुई. कुशाग्र ने 8 चौके और पांच छक्के की मदद से 38 बॉल पर 85 रन बनाए. भारतीय टीम से बाहर चल रहे ईशान किशन सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025-26 में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं. ईशान ने औ 10 पारियों में 57.44 के एवरेज और 197.32 की स्ट्राइक रेट से 517 रन बनाए. इस दौरान उनके बल्ले से दो शतक और दो अर्धशतक निकले. ईशान ने ग्रुप स्टेज में त्रिपुरा के खिलाफ 113* रन बनाए थे. भारत की ओर से ईशान किशन का आखिरी इंटरनेशनल मुकाबला 28 नवंबर 2023 को था. तब वो गुवाहाटी में ऑस्ट्रेल‍िया के ख‍िलाफ मैदान पर टी20 इंटरनेशनल मैच उतरे थे. ईशान ने 11 अक्टूबर 2023 को दिल्ली में अपना आख‍िरी ओडीआई मैच खेला था. ईशान का आख‍िरी टेस्ट मैच जुलाई 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ था.

प्रभारी मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा—नीमच जिले में दो वर्षों में ऐतिहासिक विकास

नीमच जिले ने दो वर्षों में विकास के नए कीर्तिमान स्थापित किए : प्रभारी मंत्री सुश्री भूरिया स्वास्थ्य, उद्योग, सौर ऊर्जा, शिक्षा और अधोसंरचना में ऐतिहासिक उपलब्धियां भोपाल  महिला एवं बाल विकास तथा नीमच जिले की प्रभारी मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि विगत दो वर्षों में नीमच जिले ने विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, नगरीय एवं ग्रामीण विकास, कृषि, पर्यटन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में जिले ने उल्लेखनीय प्रगति की है। सुश्री भूरिया पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रही थी। कार्यक्रम के दौरान प्रभारी मंत्री एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा “विकास एवं सेवा के दो वर्ष” पर आधारित उपलब्धियों की पुस्तक का विमोचन भी किया गया।मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से नीमच जिला निरंतर प्रगति की राह पर आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में जिले को विकास के नए शिखर पर पहुँचाया जाएगा।प्रेस वार्ता में उन्होंने बताया कि नीमच जिला अब सौर ऊर्जा के हब के रूप में देश और प्रदेश में पहचान बना रहा है। सिंगोली तहसील के ग्राम बड़ी कवई में स्थापित 300 मेगावाट के सौर ऊर्जा संयंत्र से बिजली उत्पादन प्रारंभ हो चुका है। इसके साथ ही जिले को 350 करोड़ रुपये की लागत से बने मेडिकल कॉलेज भवन की सौगात मिली है, जहाँ एमबीबीएस की 100 सीटों पर अध्ययन प्रारंभ हो चुका है और वर्तमान में 200 विद्यार्थी मेडिकल शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। मंत्री सुश्री भूरिया ने बताया कि उद्योग क्षेत्र में भी जिले ने उल्लेखनीय प्रगति की है। नीमच में 150 नए एमएसएमई उद्योग स्थापित हुए हैं, जिनमें 118 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश हुआ है और 1096 लोगों को रोजगार मिला है। वहीं एमपीआईडीसी के माध्यम से 11 वृहद औद्योगिक इकाइयों की स्थापना प्रस्तावित है, जिनमें 5269 करोड़ रुपये का निवेश होगा और लगभग 4935 लोगों को रोजगार प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि नीमच जिले की यह प्रगति शासन, प्रशासन और जनसहयोग का परिणाम है, जो आने वाले वर्षों में जिले को और अधिक सशक्त बनाएगी। सड़क एवं अधोसंरचना के क्षेत्र में भी तेजी से कार्य जारी हैं। भाटखेड़ा–नीमच–डूंगलावदा तक 133 करोड़ रुपये की लागत से डिवाइडर युक्त फोरलेन सीसी सड़क का निर्माण प्रगति पर है। बघाना, हिंगोरिया ओवरब्रिज सहित अन्य सड़क परियोजनाओं पर भी कार्य तेज़ी से चल रहा है। जावद विधायक श्री ओमप्रकाश सखलेचा ने बताया कि जावद क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार हुआ है, जहाँ 1400 विद्यार्थी एआई की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। जावद का सीएम राइज स्कूल आईएसओ प्रमाण पत्र से सम्मानित हुआ है। मनासा विधायक श्री अनिरुद्ध मारू ने बताया कि मनासा में 100 बिस्तरीय सिविल अस्पताल प्रारंभ हो चुका है तथा गांधी सागर से मनासा, जावद और नीमच के लिए उद्वहन सिंचाई योजना का कार्य भी प्रारंभ हो गया है। नीमच विधायक श्री दिलीप सिंह परिहार ने बताया कि नीमच में नवीन मेडिकल कॉलेज, मंडी चंगेरा और पायलट सेंटर प्रारंभ हो चुके हैं तथा कई नई सड़कों के निर्माण कार्य शीघ्र शुरू होने वाले हैं। 

उद्यमियों ने मुख्यमंत्री को दिए मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी, बायो रिफाइनरी, फार्मा, फूड प्रोसेसिंग और सर्विस सेक्टर से जुड़े ₹6500 करोड़ के निवेश प्रस्ताव

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से 25 कंपनियों के 45 शीर्ष प्रोफेशनल्स की महत्वपूर्ण भेंट उद्यमियों ने मुख्यमंत्री को दिए मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी, बायो रिफाइनरी, फार्मा, फूड प्रोसेसिंग और सर्विस सेक्टर से जुड़े ₹6500 करोड़ के निवेश प्रस्ताव 2017 के पहले के दुःस्वप्न को भूल नए भारत के नए यूपी को का करें अनुभव: मुख्यमंत्री हर निवेशक की पाई-पाई सुरक्षित, विकास और ग्रोथ की गारंटी वाला नया उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री बोले उद्यमी, यूपी के साथ मिलकर काम करने की है इच्छा, अब सब खच है अनुकूल नए उत्तर प्रदेश को समझने और निवेश की संभावनाएं जानने का मुख्यमंत्री ने किया आह्वान विकसित भारत के संकल्प में सहभागी बनने के लिए निवेशकों को मुख्यमंत्री का आमंत्रण कानून व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार से उत्तर प्रदेश बना सुरक्षित निवेश गंतव्य इन्वेस्टर समिट से बदली प्रदेश की छवि, 40 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचे निवेश प्रस्ताव एमएसएमई, ओडीओपी और डिफेंस कॉरिडोर से औद्योगिक विकास को नई गति लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सेएक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक में देश और विदेश की 25 प्रतिष्ठित कंपनियों से जुड़े 45 प्रोफेशनल्स ने भेंट की। डब्ल्यूएमजी ग्रुप के तत्वावधान में आए इस प्रतिनिधिमंडल में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स, फाइनेंस, ऑटोमोबाइल, बैंकिंग, बेवरेज, फार्मा सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े सीईओ, सीएफओ, डायरेक्टर्स और शीर्ष प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। बैठक का उद्देश्य उत्तर प्रदेश में निवेश की संभावनाओं, औद्योगिक वातावरण और भविष्य की विकास योजनाओं पर विस्तृत संवाद करना था। मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व और उत्तर प्रदेश में स्थिर, सुरक्षित एवं उद्योग-अनुकूल वातावरण से प्रभावित होकर बैठक में उपस्थित उद्यमियों और निवेशकों ने प्रदेश में निवेश के प्रति गहरा विश्वास व्यक्त किया। विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े इन उद्यमियों ने उत्तर प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और विस्तार के लिए कुल लगभग 6,500 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किए। इन प्रस्तावों में मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी, बायो रिफाइनरी, फार्मा, फूड प्रोसेसिंग और सर्विस सेक्टर से संबंधित परियोजनाएं शामिल हैं, जिनसे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के साथ प्रदेश की आर्थिक गति को और मजबूती मिलने की संभावना है। निवेशकों ने भरोसा जताया कि उत्तर प्रदेश की मजबूत कानून व्यवस्था, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकार की प्रो-एक्टिव अप्रोच उनके दीर्घकालिक निवेश के लिए सबसे उपयुक्त आधार प्रदान करती है। इससे पहले, मुख्यमंत्री ने सभी उद्योग प्रतिनिधियों का उत्तर प्रदेश में स्वागत करते हुए कहा कि बीते कई दशकों तक राजनीतिक अस्थिरता और गलत धारणाओं के कारण प्रदेश की छवि पूरे देश में नकारात्मक बनी रही। उन्होंने कहा कि अब उन पुरानी धारणाओं को पीछे छोड़कर नए उत्तर प्रदेश को जानने और समझने की आवश्यकता है। अतीत पीड़ादायक और अव्यवस्थित रहा, किंतु वर्तमान सुरक्षित, स्थिर और अवसरों से भरा है तथा भविष्य उज्ज्वल है। मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य रखते हुए बताया कि स्वतंत्रता के समय देश की अर्थव्यवस्था में उत्तर प्रदेश का योगदान लगभग 14 से 15 प्रतिशत था, जो समय के साथ घटकर 7.5 से 8 प्रतिशत के आसपास रह गया और प्रदेश को बीमारू राज्य के रूप में देखा जाने लगा। बीते साढ़े आठ वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में किए गए व्यापक सुधारों और नीतिगत बदलावों का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश आत्मविश्वास के साथ अपने आर्थिक पुनरुत्थान की बात कर सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पूंजी तभी सुरक्षित रह सकती है जब समाज और राज्य सुरक्षित हों। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले की स्थिति यह थी कि हर तीसरे दिन दंगे होते थे, महीनों तक कर्फ्यू लगता था और लगभग 50 ऐसे जिले थे जहां सूर्यास्त के बाद बेटियों का सुरक्षित घर लौटना मुश्किल था। रंगदारी और गुंडा टैक्स जैसी अव्यवस्थाएं अघोषित प्रणाली का हिस्सा बन चुकी थीं। सरकार बनने के पहले दिन ही यह संकल्प लिया गया कि इस अराजकता को समाप्त करना है। परिणामस्वरूप आज लगभग नौ वर्षों में एक भी दंगा नहीं हुआ, एक दिन का भी कर्फ्यू नहीं लगा और प्रदेश माफिया मुक्त हुआ है। इंफ्रास्ट्रक्चर में आए व्यापक परिवर्तन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में केवल डेढ़ एक्सप्रेसवे थे, जबकि आज देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 55 प्रतिशत अकेले उत्तर प्रदेश के पास है। देश का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क, पांच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, इनलैंड वॉटरवे, रैपिड रेल परियोजनाएं और शहरी परिवहन में रोपवे जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं प्रदेश में विकसित की जा रही हैं। यह परिवर्तन योजनाबद्ध और दूरदर्शी निवेश का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने निवेश यात्रा का अनुभव साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2018 में जब पहली इन्वेस्टर समिट आयोजित की गई थी, तब अधिकारियों को भी केवल 20 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिलने की उम्मीद थी। सरकार ने देशभर में रोड शो किए, उद्योग जगत से सीधा संवाद किया और स्वयं मुख्यमंत्री ने प्रमुख औद्योगिक केंद्रों का दौरा कर उत्तर प्रदेश की नई पहचान प्रस्तुत की। इसका परिणाम यह रहा कि 2018 की समिट में 4.67 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। इसके बाद वर्ष 2023 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में 40 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले, जो उत्तर प्रदेश के परिवर्तन की सशक्त कहानी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योग अनुकूल वातावरण, भूमि और बिजली की उपलब्धता तथा कुशल मानव संसाधन के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश में आईआईएम, आईआईटी, एनआईटी, इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय और तकनीकी संस्थान मौजूद हैं। 96 लाख से अधिक इकाइयों के साथ यह देश का सबसे बड़ा एमएसएमई बेस है। ओडीओपी योजना को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर के छह नोड विकसित किए जा रहे हैं और लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण इसका सशक्त उदाहरण है। बुंदेलखंड क्षेत्र में झांसी में बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण को विकसित किया जा रहा है, जहां निवेश के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास दिलाया कि नए उत्तर प्रदेश में प्रत्येक निवेशक की पूंजी पूरी तरह सुरक्षित है और यहां विकास की स्पष्ट गारंटी है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करना है, जिसके लिए विकसित उत्तर प्रदेश आवश्यक है। इसी उद्देश्य से हर जिले, हर नगरीय निकाय, … Read more

वर्ष 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखकर नगरीय विकास एवं आवास विभाग बना रहा है दीर्घकालिक योजना : मंत्री विजयवर्गीय

नगरीय विकास एवं आवास विभाग वर्ष 2047 को ध्यान में रखकर बना रहा है योजना मंत्री विजयवर्गीय ने पत्रकारों को दी जानकारी भोपाल नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2047 में मध्यप्रदेश की कुल आबादी का लगभग 50 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करेगी। इस बात को ध्यान रखते हुए शहरी क्षेत्रों में अधोसंरचना कार्यों की योजना तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने स्वच्छता के क्षेत्र में देश में विशिष्ठ स्थान बनाया है। हमारे विभाग की कोशिश होगी कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों का एयर क्वालिटी इंडेक्स अच्छा हो। इस वजह से शहरी क्षेत्रों में बगीचों के विकास के साथ-साथ नगरवन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। मंत्री विजयवर्गीय भोपाल में राज्य सरकार के विकास और सेवा के दो वर्ष पूरा होने पर आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। नर्मदा में नहीं मिलेगा प्रदूषित पानी मंत्री विजयवर्गीय ने बताया कि प्रदेश के जो शहर नर्मदा नदी के किनारे में आते है, वहां शहरों का दूषित पानी नदीं में न मिलें। इस पर विभाग लगातार काम कर रहा है। मेट्रोपॉलिटन सिटी की चर्चा करते हुए मंत्री विजयवर्गीय ने बताया कि विभाग ने इंदौर-उज्जैन और भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी के विकास का कार्य शुरू कर दिया है। भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी में भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ और नर्मदापुरम जिलों की प्रमुख तहसीलों को शामिल किया है। इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन सिटी में इंदौर, उज्जैन, देवास, शाजापुर, रतलाम और धार जिलों की प्रमुख तहसीलों को शामिल किया गया है। प्रदेश की 2 मेट्रोपॉलिटन सिटी इस तरह विकसित की जाएंगी। जहां शहरी आबादी को सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। मेट्रोपॉलिटन सिटी में निवेश और रोजगार पर भी ध्यान दिया जाएगा। ग्रीन सिटी मंत्री विजयवर्गीय ने बताया कि विभाग की कोशिश है कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की अधिक से अधिक सेवाओं का डिजिटलीकरण ऑनलाइन हों। इसको ध्यान में रखते हुए हमने ई-नगरपालिका विकसित की है। प्रदेश के शहरों को ग्रीन सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। नगरीय सेवाओं में सोलर एनर्जी का अधिक से अधिक उपयोग किया जाएं। इसको सुनिश्चित किया जा रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि नगरीय निकाय आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो। इसके लिये शहरी क्षेत्रों की सम्पत्तियों का जीआई मेपिंग किया जा रहा है। उल्लेखनीय बिन्दु     प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में एक लाख 60 हजार से अधिक आवासों का निर्माण पूरा। प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश को बेस्ट परफॉर्मिंग अवार्ड की श्रेणी में दूसरा स्थान।     अमृत 2.0 में 300 परियोजनाओं का कार्य पूर्ण।     जल गंगा संवर्द्धन अभियान में 3 हजार 323 जल संरचनाओं का, 74 जल संग्रहण संरचनाओं का लोकार्पण।     स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में 8 शहरों का राष्ट्रीय पुरस्कार। साथ ही इंदौर ने देश के नम्बर वन शहर का सम्मान लगातार 8 साल बनायें रखा।     कार्बन क्रेडिट से राशि अर्जित करने वाले इंदौर देश का प्रथम शहर     दीनदयाल रसोई योजना में संचालित 56 केन्द्रों को बढ़कर इन्हें 191 केन्द्र किया गया।     पीएम स्वनिधि योजना अंतर्गत 9 लाख से अधिक रहणी पटरी वालों को 14 लाख से अधिक ऋण प्रकरण मबजूत। मध्यप्रदेश को नवाचार और सर्वोत्तम अभ्यास की श्रेणी में पहला स्थान,     आजीविकास मिशन में 3 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिलाया गया। 1 लाख 70 हजार युवाओं को स्व-रोजगार से जोड़ा गया।     प्रदेश में 65 हजार स्व सहायता समूह का गठन। 6 लाख से अधिक परिवारों को स्व-सहायता समूह में जोड़ा गया।     इंदौर में मेट्रो परिचालन शुरू भोपाल में दिसम्बर 2025 में ही शुरू होगा मेट्रो।     हाउसिंग बोर्ड द्वारा एमपी ऑनलाईन के माध्यम से 532 करोड़ की सम्पत्तियों का विक्रय।     गीता भवन स्थापना योजना 5 महीनों के लिये स्वीकृत।     प्रदेश में इंटीग्रटेड टाउनशिप पॉलिसी-2025 मंजूर। प्रदेश में इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी को भी मंजूरी।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल सेवानिवृत्त डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के त्रिवार्षिक अधिवेशन में वर्चुअल रूप से शामिल

उप मुख्यमंत्री शुक्ल सेवानिवृत्त डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के त्रिवार्षिक अधिवेशन में वर्चुअल शामिल स्मारिका का किया वर्चुअल विमोचन भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल सतना में आयोजित सेवा निवृत्त डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ, मध्यप्रदेश के त्रिवार्षिक अधिवेशन में भोपाल से वर्चुअल माध्यम से जुड़े। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए निरंतर योजनाएं संचालित कर रही है। उन्होंने संघ की मांगों को शासन स्तर पर गंभीरता से रखने और समाधान का भरसक प्रयास करने का आश्वासन दिया। साथ ही नए वर्ष की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए सभी सदस्यों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने संघ की स्मारिका “इंजीनियर्स जर्नल” का वर्चुअल विमोचन भी किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, सतना नगर निगम के महापौर योगेश ताम्रकार, राष्ट्रीय साहित्य परिषद के कोषाध्यक्ष इंजी. के.के. गर्ग सहित कार्यक्रम की अध्यक्षता संघ कर रहे प्रांतीय अध्यक्ष इंजी. उमेश दुबे, संघ के संरक्षक इंजी. पवन तिवारी, कोषाध्यक्ष आर.एम. सिन्हा, उप प्रांताध्यक्ष इंजी. आर.बी. नामदेव, इंजी. प्रदीप बक्शी सहित प्रदेश भर से आए संघ के प्रतिनिधि, पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त अभियंता उपस्थित रहे।  

समग्र विकास के लिए जनप्रतिनिधि और प्रशासन मिलकर कर रहे हैं प्रयास : प्रभारी मंत्री सुनिर्मला भूरिया

नीमच में कुपोषण मुक्ति की दिशा में प्रभावी पहल, प्रभारी मंत्री ने 50 बच्चों को वितरित किए न्यूट्री बास्केट समग्र विकास के लिए जनप्रतिनिधि और प्रशासन मिलकर कर रहे हैं प्रयास : प्रभारी मंत्री सुनिर्मला भूरिया नीमच में कुपोषण मुक्ति की ओर मजबूत कदम, प्रभारी मंत्री ने 50 बच्चों को न्यूट्री बास्केट वितरित किए भोपाल महिला एवं बाल विकास मंत्री तथा नीमच जिले की प्रभारी मंत्री सुनिर्मला भूरिया ने कहा है कि नीमच जिले के समग्र विकास के लिए सभी जनप्रतिनिधि और अधिकारी मिल-जुलकर निरंतर प्रयास कर रहे हैं। कुपोषण के निवारण के लिए व्यापक जनजागरूकता आवश्यक है और इसी दिशा में प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रभावी नवाचार किए जा रहे हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। शासन की मंशा है कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे और समाज में स्वास्थ्य एवं पोषण के प्रति जागरूकता बढ़े। प्रभारी मंत्री सुभूरिया गुरुवार को टाउनहॉल, नीमच में जिला प्रशासन द्वारा आयोजित जीएसटी बचत सम्मेलन एवं न्यूट्री बास्केट वितरण कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रही थीं। कार्यक्रम के दौरान प्रभारी मंत्री द्वारा 50 बच्चों एवं उनकी माताओं को पोषण युक्त न्यूट्री बास्केट वितरित की गई। इस अवसर पर जावद विधायक ओमप्रकाश सखलेचा, नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार, मनासा विधायक अनिरुद्ध मारू, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती स्वाति चौपड़ा, जनपद अध्यक्ष श्रीमती शारदाबाई धनगर, जिला अध्यक्ष श्रीमती वंदना खंडेलवाल, कलेक्टर हिमांशु चंद्रा, जिला पंचायत सीईओ अमन वैष्णव सहित जनप्रतिनिधिगण, अधिकारीगण, महिलाएं एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे। प्रभारी मंत्री सुभूरिया ने अपने उद्बोधन में कहा कि कुपोषण का अमीरी या गरीबी से कोई सीधा संबंध नहीं है। बच्चों को समय पर पौष्टिक आहार मिले, इसके लिए माताओं और बहनों को जागरूक होना होगा। उन्होंने नीमच जिले में सेम और मेम श्रेणी के बच्चों को न्यूट्री बास्केट उपलब्ध कराने के नवाचार की सराहना करते हुए इसे अन्य जिलों के लिए अनुकरणीय बताया। उन्होंने बाल विवाह रोकथाम में समाज के सभी वर्गों से सहभागी बनने का आह्वान किया तथा महिलाओं की बचत और आत्मनिर्भरता की भावना की प्रशंसा की। कार्यक्रम में विधायक ओमप्रकाश सखलेचा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी में दी गई राहत से आम परिवारों को आर्थिक लाभ मिला है और आयकर एवं जीएसटी में छूट से लोगों की बचत बढ़ी है। विधायक दिलीप सिंह परिहार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में प्रदेश की दिशा और दशा बदली है तथा स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा मिला है। विधायक अनिरुद्ध मारू ने बाल विवाह को सामाजिक अपराध बताते हुए इसके उन्मूलन में सभी से सहयोग की अपील की और महिलाओं से हस्तनिर्मित उत्पादों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया। कार्यक्रम में जीएसटी का सर्वाधिक लाभ प्रदान करने वाले नितेश जैन, सचिन जोशी एवं ललित पंवार को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। उत्कृष्ट कार्य करने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती हंसा माली, श्रीमती रेखा टेलर एवं श्रीमती पूजा माली को पुरस्कार प्रदान किए गए। इसके अलावा 6 पोषण मित्रों को भी सराहनीय सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। पंख अभियान के तहत चड़ोली निवासी अर्जुन रामसिंह को किराना व्यवसाय के लिए 1.80 लाख रुपये का ऋण स्वीकृति पत्र तथा जमुनिया कलां निवासी किशन पिता राजू भील को स्वरोजगार हेतु 14.42 लाख रुपये का चेक प्रदान किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर शुभारंभ किया गया। जीएसटी के सहायक आयुक्त राजीव परिहार ने स्वागत उद्बोधन दिया, कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजेश पाटीदार ने किया तथा अंत में जिला कार्यक्रम अधिकारी सुअंकिता पंड्या ने आभार व्यक्त किया।  

मुख्यमंत्री ने छोटे बच्चों को किडनी की बीमारी से बचाने के लिए व्यापक रणनीति बनाने की सलाह

क्रोनिक किडनी डिजीज का मुकाबला संतुलित और संयमित जीवन से संभव- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री ने छोटे बच्चों को किडनी की बीमारी से बचाने के लिए व्यापक रणनीति बनाने की सलाह उत्तर प्रदेश में इंसेफ्लाइटिस की बीमारी को हमने खत्म करके एक उदाहरण प्रस्तुत किया- मुख्यमंत्री  एसजीपीजीआई में इंडियन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी के 54वें वार्षिक अधिवेशन में शामिल हुए मुख्यमंत्री      लखनऊ:  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसजीपीजीआई में इंडियन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी के 54वें वार्षिक अधिवेशन में बोलते हुए कहा कि क्रोनिक किडनी डिजीज का मुकाबला संतुलित और संयमित जीवन से कर सकते हैं। छोटे बच्चे भी क्रोनिक किडनी डिजीज की चपेट में हैं, जिनको बचाने के लिए व्यापक रणनीति बनाने की सलाह मुख्यमंत्री ने दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने दो साल में उत्तर प्रदेश में इंसेफ्लाइटिस बीमारी के खत्म करके एक उत्तम उदाहरण प्रस्तुत किया है।  प्रदेश के अस्पतालों में धन की कमी नहीं, विश्वस्तरीय सुविधाएं मुख्यमंत्री ने कहा कि एसजीपीजीआई अपनी स्थापना के समय से ही मानवता की सेवा कर रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पूर्ववर्ती सरकारों में प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र उपेक्षित था। अस्पतालों को धन की कमी से जूझना पड़ता था। हॉस्पिटल गंदगी और अव्यवस्था का पर्याय बन गए थे। 2017 के बाद हमने एसजीपीजीआई समेत प्रदेश के किसी भी सरकारी अस्पताल को धन की कमी नहीं होने दी है। उत्तर प्रदेश में 1947 से लेकर 2017 तक केवल 17 मेडिकल कॉलेज थे लेकिन अब प्रदेश में 80 मेडिकल 25 करोड़ नागरिकों की सेवा कर रहे हैं।  कोरोना काल अस्पतालों ने करोड़ों मरीजों को बचाया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना काल में एसजीपीजीआई समेत सरकारी अस्पतालों की उत्कृष्ट सेवा को याद करते हुए कहा कि हमने संकट की घड़ी में कुशलता से काम किया था। उस समय तकनीक को चिकित्सा सेवा से जोड़ते हुए टेलीमेडिसिन का सहारा लेकर कोराना मरीजों को इलाज उपलब्ध कराया गया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने अकेले एक वर्ष में प्रदेश के नागरिकों के इलाज के लिए 1300 करोड़ रुपये उपलब्ध कराया। आज आयुष्मान भारत के अंतर्गत साढ़े 5 करोड़ गोल्डेन कार्ड बन चुके हैं। आयुष्मान कार्ड के तहत किडनी की बीमारी से ग्रस्त मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध करवाया जा रहा है।  नागरिकों की सेहत के लिए सरकार गंभीर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब बीमारू राज्य नहीं है। हमारे पास अस्पतालों को वित्तीय सहायता करने के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध है। पहले वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया था अब वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज है। हमने हर जिले के सरकारी अस्पताल में डायलिसिस की व्यवस्था की है। हम नागरिकों की सेहत से समझौता नहीं करने वाले हैं। हमारी सरकार मिलावटखोरों के खिलाफ समय समय पर अभियान चलाती रहती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार 34 जनपदों में नेचुरल फॉर्मिंग को बढ़ावा दे रही है। हम खेती में उर्वरक के प्रयोग को कम करने की दिशा में काम कर रह हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्वांचल में 2017 से पहले इंसेप्लाइटिस से हजारों बच्चों की मौत हो जाती थी लेकिन हमने 2017 में सरकार बनने के बाद 2 साल में इस बीमारी को खत्म कर दिया।  चार दिवसीय कार्यशाला में किडनी रोग के इलाज पर चर्चा संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में इंडियन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी के 54वें वार्षिक अधिवेशन का गुरुवार को भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान 18 से 21 दिसंबर तक चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला ISNCON-2025 में किडनी रोगों के आधुनिक उपचार, अनुसंधान और तकनीकी नवाचारों पर व्यापक विमर्श किया जा रहा है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, स्वास्थ्य राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह तथा एसजीपीजीआई के निदेशक प्रोफेसर राधाकृष्ण धीमन भी मंच पर उपस्थित रहे। कार्यशाला के आयोजक सचिव प्रोफेसर नारायण प्रसाद ने बताया कि इस कार्यशाला में यूरोप, अमेरिका, नेपाल, बांग्लादेश, से भी विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धान खरीद की रफ्तार और तेज करने के दिए निर्देश

धान खरीद में नया रिकॉर्ड: 4 लाख से अधिक किसानों से खरीदा गया 25 लाख मीट्रिक टन धान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धान खरीद की रफ्तार और तेज करने के दिए निर्देश 4743 क्रय केंद्रों के माध्यम से खरीद, डीबीटी से सीधे किसानों के खातों में भुगतान लखनऊ योगी सरकार ने वर्ष 2025-26 में धान खरीद के मोर्चे पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में गुरुवार तक चार लाख से अधिक किसानों से लगभग 25 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद पूरी कर ली गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि धान खरीद की प्रक्रिया को और तेज किया जाए, ताकि एक भी पात्र किसान लाभ से वंचित न रहे। प्रदेश में धान खरीद के लिए अब तक 8,67,232 किसानों ने पंजीकरण करा लिया है। इनमें से 18 दिसंबर तक 4,08,740 किसानों से धान की खरीद पूरी हो चुकी है और उनके खातों में डीबीटी के माध्यम से भुगतान की प्रक्रिया भी तेजी से की जा रही है। 4743 धान क्रय केंद्र पर पारदर्शी खरीद योगी सरकार ने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रदेशभर में 4743 धान क्रय केंद्र स्थापित किए हैं। इन केंद्रों पर तौल, भुगतान और अन्य व्यवस्थाएं पूरी पारदर्शिता के साथ सुनिश्चित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसानों को क्रय केंद्रों पर किसी भी प्रकार की असुविधा न होने पाए। तौल और भुगतान में कोई देरी न की जाए और सभी केंद्र तय मानकों के अनुसार संचालित हों। योगी सरकार का किसानों की ‘आर्थिक समृद्धि’ पर विशेष जोर धान खरीद अभियान के जरिए योगी सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है अन्नदाता किसानों की आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित करना। एक ओर सरकार धान की निर्बाध खरीद कर रही है, तो दूसरी ओर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से किसानों को सीधे उनके बैंक खातों में भुगतान किया जा रहा है। इस व्यवस्था से बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई है और किसानों को समय पर पैसा मिल रहा है।

PF पर संकट? बड़े खर्चों में अब किस पर भरोसा करेंगे लोग

 नई दिल्ली हमारे देश में अधिकतर लोग रिटायरमेंट फंड को लेकर गंभीर नहीं हैं. पेंशन की व्यवस्था पर ज्यादातर नौकरी-पेशा लोग तो चर्चा ही नहीं करते, क्योंकि वो इसके प्रत‍ि न तो जागरुक है और न ही उन्हें इसकी पूरी जानकारी है. इसे आप पढ़े-लिखे लोगों की समस्या कहें या मजबूरी, लेकिन सच यही है. रिटायरमेंट फंड और पेंशन को लेकर सबसे ज्यादा उदासीनता तो प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों में है. दरअसल, प्राइवेट नौकरी वालों के लिए PF का अमाउंट एक बड़ा सहारा होता है. छोटी-छोटी राशि हर महीने जुड़कर एक बड़ा फंड बन जाता है. प्राइवेट जॉब करने वालों के ल‍िए तो उनके लिए PF का पैसा मुसीबत का साथी होता है. नौकरी छूट गई तो PF के पैसे से आर्थिक चुनौतियां थोड़ी कम हो जाती हैं. परिवार में कोई बीमार है, कर्ज लेने से अच्छा है कि PF का पैसा निकालकर इलाज करवा लेते हैं. बच्चों की पढ़ाई या शादी में पैसे कम पड़ रहे हैं, तो PF अकाउंट से निकाल लेते हैं. घर खरीदना है, पीएफ खाते में वर्षों से पड़ी जमापूंजी को निकाल लेते हैं. देश में अधिकतर मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए PF के पैसे मौजूदा दौर में सबसे ज्यादा इन्हीं कामों में इस्तेमाल हो रहे हैं. यहां गौरतलब है क‍ि देश में जब सबसे अधिक लोग प्राइवेट जॉब करते हैं. PF में बड़े बदलाव की तैयारी आज PF राशि पर चर्चा का मूल कारण सरकार का नया कदम है. सरकार कह रही है कि चंद महीने के बाद से आप चुटकी में पीएफ फंड को निकाल सकते हैं, प्रक्रिया आसान हो जाएगी. EPFO खातों को UPI और ATM से लिंक कर दिया जाएगा. ये सबकुछ मार्च-2026 तक पूरा होने का दावा किया जा रहा है. PF निकासी प्रक्रिया को आसान बनाना अच्छी बात है. क्योंकि लोगों को अभी भी PF अमाउंट निकालने में परेशानी होती है. सरकार का कहना है कि जिस तरह से लोग अपने बैंक खाते से पैसे निकाले हैं, ठीक उसी तरह की व्यवस्था PF फंड को निकालने के लिए कर दी जाएगी, इसपर काम तेजी से चल रहा है.  यानी डिजिटल युग में PF खाते से पैसे निकालना तो बेहद आसान हो जाएगा, लेकिन इसका एक बड़ा साइड इफेक्ट भी द‍िखना तय है. लोगों की बचत पर ग्रहण लगने वाला है. जब मन करे PF अकाउंट से फंड निकालने की सुविधा मिल जाएगी तो जरा सोचिए- फिर कितने और कौन लोग होंगे, जो PF खातों में वर्षों तक राशि बचाकर रखेंगे. छोटी-छोटी जरूरतों पर लोग ATM पहुंच जाएंगे. ऐसे में PF अमाउंट कितने दिन तक अकाउंट में टिका रहेगा, ये बड़ा सवाल है? घर खरीदना, बीमारी, पढ़ाई या शादी जैसे मौकों पर जो PF फंड आज सहारा बन जाता है, भविष्य में ये व‍िकल्प आपके पास नहीं रहेगा.  फिर सेविंग को लेकर क्या विकल्प? तुरंत PF निकासी की सुविधा लागू होते ही कोई भी अपने आपको PF अमाउंट निकालने में सहज पाएगा. चाहे, जिनके पीएफ अकाउंट में 10 लाख रुपये जमा हो या फिर 10 हजार. मोबाइल खरीदना और शॉपिंग जैसे काम के लिए भी लोग बेधड़क PF से पैसे निकालने लग जाएंगे. आदत इतनी बिगड़ सकती है कि सैलरी की तरह ही जैसे ही हर महीने PF अकाउंट में अमाउंट डिपॉजिट होगी, चंद दिन के बाद खुद जाकर निकाल लिया करेंगे.  वैसे ही देश में रिटायरमेंट फंड को लेकर लोग जागरूक नहीं हैं. भले ही आज निकासी प्रोसेस में समस्या की वजह से लोग PF फंड नहीं निकाल पा रहे हैं, लेकिन इसी आड़ में मोटा अमाउंट जमा हो जा रहा है. तुरंत PF फंड निकासी की सुविधा से भले ही कोई 20 साल तक नौकरी कर लेगा, परंतु अधिकतर लोगों के EPFO खाते में जमापूंजी के नाम पर चंद रुपये बचेंगे, क्योंकि वो तो समय-समय पर UPI और ATM का लाभ लेकर PF के पैसे को निकाले जा चुके होंगे. अब कुछ आंकड़ों को देखते हैं, जिससे आपको पता चल जाएगा कि कैसे बचत पर ग्रहण लगने वाला है. नियम के मुताबिक, कर्मचारी और नियोक्ता, दोनों ही कर्मचारी के मूल वेतन का 12% पीएफ में योगदान करते हैं. जिसमें कुछ कुछ हिस्सा पेंशन फंड (EPS) में जाता है. वित्त वर्ष 2023-24 में EPFO के सदस्य 7.37 करोड़ थे, यानी मौजूदा समय में 8 करोड़ के आसपास लोग EPFO से जुड़े हैं. EPFO का कुल PF कॉर्पस (FY25) में करीब 25 लाख करोड़ रुपये है, जो कि भारत की सबसे बड़ी रिटायरमेंट सेविंग फंड में से एक है. यह राशि साल-दर-साल बढ़ रही है. लेकिन नई व्यवस्था लागू होते ही ये राशि घटने लगेगी, फिर ये पैसा कहां जाएगा?  PF की आड़ में जोखिम लेने से नहीं हिचकेंगे लोग ये भी हो सकता है कि लोग PF का पैसा शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में लगाना शुरू कर दे, क्योंकि PF पर फिलहाल 8.25 फीसदी ब्याज दर निर्धारित है. जबकि म्यूचुअल फंड में इससे ज्यादा की संभावना रहती है. शेयर बाजार से तो लोग PF के मुकाबले दोगुने-तिगुने ब्याज की कल्पना कर लेते हैं. ऐसे में एक सुरक्षित निवेश से पैसे निकालकर लोग जोखिम लेने से नहीं हिचकेंगे. अब PF की तुलना में म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार से कितना फायदा होगा, वो तो समय ही बताएगा. सच्चाई ये भी है कि भारत में कुल सकल बचत दर करीब 31 फीसदी है. वहीं सेबी के हालिया सर्वे के मुताबिक केवल 10% भारतीय परिवार ही म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और बॉन्ड जैसे वित्तीय उत्पादों में निवेश करते हैं. शहरी इलाकों में यह आंकड़ा 15% का है, जबकि ग्रामीण इलाकों में महज 6% है. हालांकि युवा पीढ़ी में अब बचत का रुझान बढ़ा है. लेकिन वो तेजी से जोखिम भरे शेयर बाजार की ओर आकर्षित हो रहे हैं.  सरकारी आंकड़े बताते हैं कि अब भी करीब 69% भारतीय हाउसहोल्ड बैंक में डिपॉजिट या FD में पैसा रखना पसंद करते हैं. वहीं एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 40% शहरी लोगों ने रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए अब तक कोई निवेश नहीं किया है. ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी खराब है. यानी देश में आधी से ज्यादा आबादी के पास रिटायरमेंट फंड को लेकर कोई प्लान नहीं है. पेंशन की बात करें तो देश की आबादी 140 करोड़ से ज्यादा है, लेकिन अधिकतम … Read more