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ईंधन से पहले PUC जरूरी: ‘नो PUC, नो फ्यूल’ से एक ही दिन में 61,000 प्रमाणपत्र बने

नई दिल्ली दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली सरकार ने ‘नो PUC, नो फ्यूल’ अभियान को पूरी सख्ती के साथ लागू कर दिया है। इस अभियान का असर पहले ही दिन दिखाई दिया। पिछले 24 घंटों के भीतर राजधानी में 61,000 से अधिक वाहनों के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) जारी किए गए। सरकार का कहना है कि यह अभियान इसी तरह तेजी से और लगातार जारी रहेगा, ताकि वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण पर काबू पाया जा सके और राजधानी की हवा को स्वच्छ बनाया जा सके। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि ‘नो PUC, नो फ्यूल’ नियम से लोगों को असुविधा हो सकती है, लेकिन सभी वाहनों का प्रदूषण जांच कराना और उनका प्रमाणन सुनिश्चित करना हमारी सामूहिक नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि इस नियम के तहत जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) नहीं है, उन्हें पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं दिया जाएगा। एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि वैध प्रदूषण नियंत्रण (PUC) प्रमाणपत्र के बिना किसी भी वाहन को दिल्ली में ईंधन भरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि शहर की बिगड़ती हवा को सुधारने के लिए नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है। सीएम ने कहा, “लोगों को असुविधा हो रही है, लेकिन दिल्ली में चलने वाले हर वाहन को प्रदूषण फैलाए बिना चलाना चाहिए। यह हमारी सामूहिक नैतिक जिम्मेदारी है कि हम अपने वाहनों को PUC प्रमाणित कराएं।” मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, “कार-पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। परिवहन व्यवस्था में सुधार वायु गुणवत्ता में सुधार की कुंजी है।” उन्होंने समझाया कि कार-पूलिंग का मतलब है कि एक ही स्थान पर जाने वाले दो या दो से अधिक लोग एक ही वाहन में यात्रा करें। सीएम ने यह भी बताया कि सरकार राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण परीक्षण के बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पहले पीयूसी प्रमाणपत्र जारी करने वाले केंद्रों की संख्या बहुत कम थी, लेकिन अब नंद नगरी, बुराड़ी और तेहखंड में स्वचालित परीक्षण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। नहीं दिया जा रहा पेट्रोल-डीजल दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि सरकार प्रदूषण से लड़ने के लिए चार बड़े मोर्चों पर काम कर रही है: वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़कों और निर्माण स्थलों की धूल, उद्योगों से होने वाला प्रदूषण और कचरा प्रबंधन। सिरसा ने बताया कि ‘नो PUC, नो फ्यूल’ नियम के तहत बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) वाले वाहनों को पेट्रोल और डीजल नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा, बीएस-6 मानकों से नीचे के गैर-जरूरी बाहरी वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर भी सख्ती लागू की गई है। ‘चालान काटने के लिए नहीं है यह अभियान’- मनजिंदर सिरसा दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने गुरुवार को दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर और जनपथ सहित कई पेट्रोल पंपों का अचानक दौरा कर अभियान का जायजा लिया। उन्होंने पेट्रोल पंप कर्मियों को निर्देश दिए कि नियमों को कड़ाई से लागू किया जाए, लेकिन वाहन मालिकों से शालीनता और शांति के साथ पेश आएं। मंत्री ने कहा कि यह अभियान चालान काटने के लिए नहीं, बल्कि लोगों की सेहत बचाने के लिए है। आंकड़ों के मुताबिक, 17 दिसंबर को 29,938 और 18 दिसंबर की शाम तक 31,974 PUC सर्टिफिकेट जारी किए गए। यानी करीब एक दिन में 61,000 से अधिक वाहनों के लिए PUC बनवाया या नवीनीकरण कराया गया। इसी दौरान 3,746 वाहनों का चालान उन वाहनों के लिए काटा गया जिनके पास वैध PUC नहीं था। दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए किए गए ये काम सीमावर्ती इलाकों में दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग की संयुक्त टीमों ने करीब 5,000 वाहनों की जांच की। इनमें से 568 गैर-अनुपालक वाहनों को दिल्ली में प्रवेश नहीं दिया गया, जबकि 217 गैर-जरूरी ट्रकों को ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे की ओर मोड़ दिया गया। सड़कों की धूल कम करने के लिए राजधानी में 2,300 किलोमीटर से अधिक सड़कों की मशीन से सफाई की गई। इसके अलावा, मोबाइल एंटी-स्मॉग गन के जरिए 5,524 किलोमीटर क्षेत्र में पानी का छिड़काव किया गया। प्रदूषण नियंत्रण के अन्य उपायों में 132 अवैध कचरा डंपिंग स्थलों को बंद कराना और करीब 38,000 मीट्रिक टन पुराने कचरे का निपटान शामिल है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने लोगों से अपील की कि वे GRAP नियमों का पालन करें, समय पर PUC बनवाएं और जहां संभव हो, वर्क फ्रॉम होम अपनाएं। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के खिलाफ यह लड़ाई सरकार अकेले नहीं जीत सकती। मंत्री ने जोर देकर कहा कि आम जनता के सहयोग के बिना दिल्ली की हवा को स्वच्छ बनाना संभव नहीं है।

स्टिंग ऑपरेशन पर बोले विधायक भाटी— निष्पक्ष जांच से ही सामने आएंगे तथ्य

बाड़मेर शिव विधायक रवींद्र सिंह भाटी ने तीन विधायकों के स्टिंग ऑपरेशन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह मामला गंभीर है और इसकी निष्पक्ष व गहन जांच आवश्यक है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।   सदाचार समिति और फॉरेंसिक जांच की मांग रवींद्र सिंह भाटी ने कहा कि इस प्रकरण की जांच सदाचार समिति की बैठक में होनी चाहिए। उन्होंने यह भी जोर दिया कि फॉरेंसिक जांच के माध्यम से तथ्यों की पुष्टि की जाए, जिससे किसी भी तरह की शंका की गुंजाइश न रहे।   विधायक निधि को बताया जनता का पैसा भाटी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विधायक निधि जनता का पैसा है, किसी व्यक्ति का निजी धन नहीं। जनता ने विधायकों को इस राशि की रखवाली के लिए चुना है और यह टैक्सपेयर्स की गाढ़ी कमाई है, जिसकी हर एक पाई जनता के हित में खर्च होनी चाहिए।   सिस्टम पर भरोसा, दोषियों को सजा की उम्मीद उन्होंने कहा कि उन्हें सिस्टम पर पूरा भरोसा है और जांच के बाद दोषियों को सजा मिलेगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने यह भी कहा कि यदि कभी सिस्टम ही सिस्टम की भेंट चढ़ जाए, तो मीडिया और उनके जैसे विधायक सच्चाई को सामने लाने का काम करेंगे।   विधायक निधि को लेकर स्पष्ट रुख अमर उजाला के एक अन्य सवाल पर रवींद्र सिंह भाटी ने कहा कि यदि विधायकों को पैसा कमाना है तो वे व्यापार करें, इसमें कोई रोक नहीं है, लेकिन विधायक निधि से छेड़छाड़ करना जनता के साथ सीधा धोखा है। उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति ईमानदार और मेहनती होता है, उसे चुनाव जीतने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती। राजनीति में साफ-सुथरी छवि और जनता का विश्वास ही सबसे बड़ी पूंजी है। किसानों के धरने पर क्या बोले भाटी? किसानों के मुद्दे पर भी रविंद्र सिंह भाटी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कोई यों ही धरने पर नहीं बैठ जाता है। यूरिया मांग रहे हैं, उनका हक है। बिजली मांग रहे हैं, उनका हक है। पानी मांग रहे हैं, उनका हक है। वहीं, राज्य सरकार के दो साल की उपलब्धियों पर रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि विकास कहां है? आपको दिख जाए तो हमें भी बताएं।

30 से अधिक विधायक एकत्र, कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी हलचल बढ़ी

बेंगलुरु कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद के लिए चल रही खींचतान और बदलाव की अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं। बेलगावी में वरिष्ठ लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली द्वारा बुधवार रात आयोजित एक रात्रिभोज में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का समर्थन करने वाले विधायक शामिल हुए। इसमें जमावड़े में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पुत्र और विधान परिषद सदस्य यतींद्र सिद्धारमैया तथा विधायक के एन राजन्ना सहित तीस से अधिक विधायक शामिल हुए। हालांकि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया स्वास्थ्य कारणों से इस कार्यक्रम में खुद उपस्थित नहीं हो सके। जारकीहोली ने इस बैठक को राज्य विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के दौरान एक सामान्य सामाजिक मेलजोल करार दिया है लेकिन इसमें शामिल कई विधायकों ने संकेत दिया कि वहां राजनीतिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले के एन राजन्ना ने पुष्टि की कि पार्टी की रणनीति और नेतृत्व से जुड़े मामले बातचीत का हिस्सा थे। डीके शिवकुमार ने भी दिया था डिनर उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की बैठकें केवल सामाजिक मेलजोल के अलावा कई अन्य उद्देश्यों को भी पूरा करती हैं। यह रात्रिभोज उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार के इसी तरह के एक कार्यक्रम की मेजबानी किए जाने के एक सप्ताह बाद हुआ है। इससे राज्य कांग्रेस के भीतर स्पष्ट गुटबाजी और अलग अलग ध्रुवों का पता चलता है। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के 20 नवंबर को अपना ढाई साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाओं ने जोर पकड़ लिया है। सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच साल 2023 के सत्ता साझाकरण समझौते की खबरें लगातार चर्चा में हैं हालांकि पार्टी आलाकमान के निर्देश पर दोनों नेताओं ने हाल ही में एक दूसरे के आवास पर मुलाकात की है। इससे फिलहाल श्री सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री पद पर बने रहने और नेतृत्व की खींचतान में अस्थायी विराम का संकेत मिलता है। विधायक राजन्ना ने संभावित कैबिनेट विस्तार में वाल्मीकि (अनुसूचित जनजाति ) समुदाय के पर्याप्त प्रतिनिधित्व की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला और कहा कि वह मंत्रिमंडल में अपनी संभावनाओं को लेकर चिंतित नहीं हैं। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के श्री सिद्धारमैया को विदा होने वाला मुख्यमंत्री कहे जाने पर यतींद्र सिद्धारमैया ने कहा कि ऐसी आलोचनाएं लंबे समय से चल रही हैं और इनका कोई विशेष महत्व नहीं है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि सत्र के दौरान ऐसी बैठकें सामान्य होती हैं लेकिन ये पार्टी विधायकों के भीतर आंतरिक समीकरणों और निष्ठाओं को जरूर प्रदर्शित करती हैं।

रुपाली गांगुली को 5 साल बाद बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड, मेहनत को मिली सराहना

मुंबई  पिछले 5 साल से 'अनुपमा' टीवी का सबसे मशहूर शो बना हुआ है। समय के साथ शो में बहुत कुछ बदला, लेकिन दर्शकों का प्यार अनुपमा के लिए हर दिन के साथ बढ़ता जा रहा है। 'अनुपमा' की बदौलत अब रुपाली गांगुली को अपनी मेहनत का फल मिला है और उन्हें भारतीय टेलीविजन अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। अवॉर्ड मिलने के बाद अभिनेत्री बहुत खुश है और उन्होंने दिवंगत सतीश शाह को याद किया है। अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर रुपाली गांगुली ने अवॉर्ड के साथ कुछ फोटोज पोस्ट की हैं, जिसमें वे हाथ में ट्रॉफी लिए चेहरे पर चमकती खुशी के साथ पोज कर रही हैं। अनुपमा के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का आईटीए अवॉर्ड मिलने की खुशी अभिनेत्री ने अपने कोस्टार, प्रोड्यूसर राजन शाही और अपने चाहने वालों के साथ शेयर की है। रुपाली ने कैप्शन, "आभार, आभार और ढेर सारा आभार। यह लेजेंड, मेरे रॉकस्टार- मेरे सतीश काका के लिए है। 25 साल की लगन, कड़ी मेहनत, सपने, उम्मीद, संघर्ष, असुरक्षा, निराशा, खुशी के बीच कुछ चीजें हमेशा पहली जैसे बनी रही, वो थे अश्विन। जब मैं हार मानना ​​चाहती थी, तब उनके विश्वास ने ही आगे बढ़ने की ताकत दी। बता दें कि अश्विन अभिनेत्री के पति हैं, जिन्होंने हमेशा एक्टिंग के करियर में आगे बढ़ने में उनकी मदद की है। टीवी की अनुपमा ने आगे लिखा, "25 साल पहले टेलीविजन की खूबसूरत दुनिया में कदम रखा, तब के डेब्यू डायरेक्टर राजन शाही के साथ और शानदार मेकर ने इस घर पर रहने वाली मां पर भरोसा किया और मुझे अपनी आइकॉनिक 'अनुपमा' बना दिया। इतने प्यार और सपोर्ट के लिए सबका धन्यवाद।" बता दें कि रुपाली गांगुली और दिवंगत सतीश शाह का रिश्ता बहुत खास रहा है। रुपाली ने सतीश शाह को हमेशा अपने पिता का दर्जा दिया है और उनके आखिरी समय में मिलने भी पहुंची थीं। दोनों ने साथ में सिटकॉम शो 'साराभाई वर्सेज साराभाई' में एक साथ काम किया था। रुपाली ने शो में सतीश की बहू मोनिषा का रोल प्ले किया था। दोनों की कॉमेडी टाइमिंग सभी को खूब पसंद आई थी। सिटकॉम शो का सीक्वल भी आया था, लेकिन सतीश शाह के जाने के बाद साराभाई का परिवार अधूरा हो गया है।

राज्य युवा महोत्सव को लेकर उत्साह, डिप्टी सीएम अरुण साव ने पोस्टर किया लॉन्च

14 विधाओं में दिखाएंगे अपनी प्रतिभा, विजेता प्रतिभागियों को राष्ट्रीय युवा महोत्सव में भाग लेने का मिलेगा मौका प्रेस-कॉन्फ्रेंस में महोत्सव के दौरान होने वाले प्रतियोगिताओं और कार्यक्रमों की दी जानकारी रायपुर, न्यायधानी बिलासपुर में आगामी 23 दिसम्बर से 25 दिसम्बर तक आयोजित राज्य युवा महोत्सव-2025 में 3100 युवा भागीदारी करेंगे। खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा राज्य खेल प्रशिक्षण केंद्र बहतराई में इसका आयोजन किया जा रहा है। इसमें जिला स्तरीय युवा उत्सव के विजेता प्रतिभागी 14 विधाओं में अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। राज्य युवा महोत्सव के विजेता प्रतिभागी अगले वर्ष होने वाले राष्ट्रीय युवा महोत्सव में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेंगे। 23 दिसम्बर को महोत्सव के उद्घाटन समारोह में छत्तीसगढ़ की मेजबानी में होने वाले प्रथम खेलो इण्डिया ट्रायबल गेम्स की लॉन्चिंग सेरेमनी भी होगी। तीन दिवसीय इस आयोजन के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक एवं मंचीय कार्यक्रम भी होंगे। उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने आज प्रेस-कॉन्फ्रेंस में राज्य युवा महोत्सव के दौरान होने वाले प्रतियोगिताओं और कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने अपने नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में आयोजित प्रेस-कॉन्फ्रेंस में महोत्सव के पोस्टर का विमोचन किया। राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार और संचालक तनूजा सलाम भी प्रेस-कॉन्फ्रेंस में मौजूद थीं। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में बताया कि छत्तीसगढ़ के युवाओं को सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने, उनकी प्रतिभा को निखारने तथा राष्ट्रीय स्तर पर उनके प्रतिभा के प्रदर्शन के लिए मंच प्रदान करने राष्ट्रीय युवा महोत्सव-2026 के तारतम्य में खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा जिला एवं राज्य स्तर पर युवा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। राज्य के सभी जिलों में युवा महोत्सव का जिला स्तरीय आयोजन 24 नवम्बर से 15 दिसम्बर तक किया गया था। जिला स्तर पर 14 विभिन्न विधाओं के विजेता प्रतिभागी राज्य स्तरीय युवा महोत्सव में हिस्सेदारी करेंगे। राज्य युवा महोत्सव में 14 विधाओं में प्रतियोगिताएं होंगी, जिनमें 8 दलीय विधाएं और 6 एकल विधाएं शामिल हैं। दलीय विधाओं में लोकनृत्य, पंथी नृत्य, राउत नाचा, सुआ नृत्य, करमा नृत्य, लोकगीत, रॉक बैंड और एकांकी की प्रतियोगिताएं होंगी। वहीं एकल विधाओं में वाद-विवाद, कहानी लेखन, चित्रकला, कविता लेखन, नवाचार (साइंस मेला) और पारंपरिक वेशभूषा शामिल हैं। राज्य युवा महोत्सव में दलीय विधाओं में प्रथम स्थान हासिल करने वाले प्रतिभागियों को 20 हजार रुपए, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वालों को 15 हजार रुपए एवं तृतीय स्थान पर रहने वाले प्रतिभागियों को 10 हजार रुपए की पुरस्कार राशि दी जाएगी। एकल विधाओं में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को क्रमशः 5 हजार रुपए, 3 हजार रुपए एवं 2 हजार रुपए प्रदान किए जाएंगे। महोत्सव में भाग लेने वाले हर प्रतिभागी को एक-एक हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। राज्य युवा महोत्सव में सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं की 5 विधाओं लोकनृत्य, लोकगीत, वाद-विवाद, चित्रकला और कविता लेखन के विजेता प्रतिभागी नई दिल्ली में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय युवा उत्सव-2026 में भागीदरी करेंगे।   राज्य युवा महोत्सव के दौरान प्रसिद्ध कलाकारों के गायन, बैण्ड परफॉर्मेंस, कवि सम्मेलन जैसे विविध आयोजन भी होंगे। 23 दिसम्बर को उद्घाटन समारोह के दिन राज्य खेल प्रशिक्षण केन्द्र बहतराई में शाम 5 बजे से रात्रि 8 बजे तक आरूग बैण्ड (श्री अनुज शर्मा) की प्रस्तुति तथा नारायणपुर के प्रसिद्ध मल्लखंब का प्रदर्शन किया जाएगा। 23 दिसम्बर को ही बिलासपुर पुलिस ग्राउंण्ड में रात साढ़े 8 बजे से कवि सम्मेलन होगा, जिसमें प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास एवं अन्य कवि कविता पाठ करेंगे। राज्य युवा महोत्सव के दूसरे दिन 24 दिसम्बर को राज्य खेल प्रशिक्षण केन्द्र बहतराई में शाम 6 बजे से काफिला बैण्ड एवं स्वप्निल लाइव बैण्ड की प्रस्तुति होगी। अंतिम दिन 25 दिसम्बर को शाम 6 बजे से सुश्री आरू साहू तथा दायरा (बस्तर) बैण्ड की प्रस्तुति होगी। समापन समारोह में विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरित किए जाएंगे। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की उप संचालक श्रीमती रश्मि ठाकुर और कई विभागीय अधिकारी भी प्रेस-कॉन्फ्रेंस में उपस्थित थे।

कफ सिरप केस पर बहस खत्म, हाईकोर्ट ने निर्णय सुरक्षित रखा, आरोपियों की याचिका—मामला हो रद्द

प्रयागराज प्रदेश के चर्चित कफ सिरप मामले में दर्ज एफआईआर को खारिज करने की मांग वाली अर्जी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित किया है। शुक्रवार को हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने दोनों तरफ के वकीलों की दलील सुनने के बाद फैसला रिजर्व कर लिया है। वाराणसी के शुभम जायसवाल सहित 40 आरोपियों ने अपने खिलाफ प्रदेश के विभिन्न जिलों में दर्ज केस को रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए याचिका दायर की है। हाईकोर्ट ने फिलहाल आरोपियों की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा रखी है। कोडीनयुक्त कफ सिरप कांड की जांच में यूपी एसटीएफ ने लखनऊ आलम बाग के पास से सहारनपुर से दो अभियुक्त अभिषेक शर्मा और शुभम शर्मा को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में 25 हजार रुपये के इनामी शुभम जायसवाल का पूरा नेटवर्क सामने आया है। दोनों ने एसटीएफ को बताया कि दोनों विशाल और विभोर राणा के लिए काम करते थे। विशाल और विभोर का शुभम जायसवाल के साथ व्यापारिक संबंध था। तीनों मिलकर कोडीनयुक्त कफ सिरप की तस्करी करते थे। माल वाराणसी, लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर और आगरा समेत अन्य जगहों से फर्जी ई वे बिल बनाकर बंगाल के अलावा अन्य जगहों पर भेजा जाता था। विशाल और विभोर के नेटवर्क के जरिये सिरप देश के कई राज्यों में पहुंचाया जाता था। इसी बीच शुभम ने अपने पिता भोला जायसवाल के नाम पर रांची में एबॉट कंपनी की सुपर स्टॉकिस्ट हासिल कर ली और इन दोनों से किनारा कर लिया। इसके बाद लाइसेंस और दस्तावेज की आड़ में वह बड़े पैमाने पर कफ सिरप की सप्लाई को कानूनी शिपमेंट की तरह दिखाता था। सुपर सुपर स्टॉकिस्ट के बाद शुभम की सप्लाई चेन पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई थी। सहारनपुर में पकड़े गए दोनों अभियुक्तों ने पूछताछ में बताया कि सिरप की कई खेप रांची से सीधे यूपी और हरियाणा रूट पर भेजी भेजी गई। गाजियाबाद में कोडीन सिरप का बनाया था गोदाम ड्रग विभाग की जांच में सामने आया है कि शुभम ने अपनी फर्म शैली ट्रेडर्स के नाम पर हिमाचल की फर्म से सिरप मंगाने के बाद उसे गाजियाबाद के गोदाम में रखता था। फर्जी फर्मों के कागज तैयार कर उसे आगरा, लखनऊ और वाराणसी तक सप्लाई करता था। वाराणसी से कोडीन सिरप की बड़ी खेप सोनभद्र के रास्ते झारखंड और पश्चिम बंगाल जाती थी। इसके बाद बांग्लादेश और नेपाल तक जाती थी।

विधान परिषद में हंगामा: सपा ने किया वॉकआउट, संस्कृत शिक्षकों के जीपीएफ भुगतान का आश्वासन

लखनऊ यूपी विधानमंडल का शीतकालीन सत्र आज से प्रारंभ हो गया है। सदन की कार्यवाही के पहले दिन सपा के दिवंगत विधायक सुधाकर सिंह को श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय सहित सभी दलों के नेताओं ने राजनीति और समाज के लिए किए गए उनके योगदान को याद किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। वहीं, विधान परिषद की कार्यवाही चलती रही। जहां पर सपा ने प्रदेश में स्कूल बंद किए जाने का आरोप लगाते हुए सदन से वॉक आउट किया। वहीं, सरकार ने बताया कि संस्कृत विद्यालयों के सेवानिवृत्त शिक्षकों को जीपीएफ का भुगतान जल्द होगा। सत्र के पहले दिन मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज से सदन की कार्यवाही शुरू हो रही है। 24 जनवरी को हमारे राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम पर चर्चा का आयोजन किया जाएगा। 24 जनवरी को यूपी का स्थापना दिवस भी है। हमने सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों से चर्चा के लिए अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए और हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है। सदन की कार्यवाही के पहले दिन नेता सदन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय सहित सभी दलों के नेताओं ने स्वर्गीय सपा विधायक सुधाकर सिंह के निधन पर समाज में दिये गए उनके योगदान को याद किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी। कफ सिरप कांड और एसआईआर पर हंगामे के आसार सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दल कोडीन कफ सिरप की तस्करी और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) को लेकर हंगामा कर सकता है। साथ ही, सदन में वंदे मातरम पर होने वाली चर्चा का विरोध भी किया जा सकता है। आज सत्र शुरू होने के दिन सपा के विधान परिषद सदस्य आशुतोष सिन्हा ने कफ सिरप कांड को लेकर योगी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे लोगों पर बुलडोजर क्यों नहीं चला रही है। हजारों करोड़ रुपये का गबन हुआ है और जहरीली कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत हुई है। क्या बुलडोजर का ड्राईवर भी कफ सिरप पीकर सो गया है। ऐसे लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। सत्र के पहले दिन सीएम योगी ने मीडिया को किया संबोधित सत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए बृहस्पतिवार को विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की अध्यक्षता में सर्वदलीय और कार्यमंत्रणा समिति की बैठक आयोजित की गई। सर्वदलीय बैठक में सभी दलीय नेताओं ने सदन की कार्यवाही को शालीनता एवं संसदीय मर्यादा के अनुरूप संचालित करने हेतु पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। विधान सभा अध्यक्ष ने भी दलीय नेतओं से अपील किया कि सदन में सकारात्मक संवाद, शालीनता एवं संसदीय परंपराओं के अनुरूप अपनी बात रखें, सभी को बात रखने का मौका दिया जाएगा। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सत्र के दौरान प्रस्तुत होने वाले विधेयकों पर चर्चा कराई जाएगी। 

विपक्ष को बड़ी जीत: महुआ मोइत्रा पर CBI केस धराशायी, नेशनल हेराल्ड के बाद दूसरी सफलता

नई दिल्ली कैश फॉर क्वेरी मामले में महुआ मोइत्रा को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने लोकपाल के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें सीबीआई को तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ कथित तौर पर पैसे लेकर प्रश्न पूछने के मामले में आरोपपत्र दाखिल करने की अनुमति दी गई थी। कैश-फॉर-क्वेरी स्कैम में यह आरोप है कि मोइत्रा ने एक बिजनेसमैन से कैश और गिफ्ट के बदले सदन में सवाल पूछे थे। कोर्ट ने क्या कहा जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच ने मोइत्रा की याचिका पर आदेश सुनाते हुए कहा, "आदेश रद्द किया जाता है। हमने लोकपाल से अनुरोध किया है कि वे एक महीने के भीतर संबंधित प्रावधानों के अनुसार लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम की धारा 20 के तहत मंजूरी देने पर विचार करें।" मोइत्रा का पक्ष मोइत्रा के वकील ने दलील दी थी कि लोकपाल द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया में साफ तौर पर कमी थी। उन्होंने लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम की धारा 20(7) का हवाला देते हुए कहा था कि यह ज़रूरी है कि मंजूरी देने से पहले सरकारी कर्मचारियों की राय ली जाए। इस याचिका का CBI ने विरोध किया था, जिसने तर्क दिया था कि मोइत्रा को लोकपाल की कार्यवाही में दस्तावेज़ पेश करने का कोई अधिकार नहीं है और वह केवल टिप्पणी देने की हकदार हैं, मौखिक सुनवाई की भी नहीं। मोइत्रा ने CBI को मंजूरी आदेश के संबंध में कोई भी कदम उठाने से रोकने की भी मांग की है, जिसमें मौजूदा कार्यवाही के दौरान कोई भी चार्जशीट दायर करना शामिल है, लेकिन यह सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। महुआ मोइत्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता निधेश गुप्ता पेश हुए. सुनवाई खत्म होने पर निधेश गुप्ता ने कोर्ट से सीबीआई की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी. दिल्ली हाईकोर्ट ने तब अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था. महुआ मोइत्रा के वकील ने कोर्ट में दलील दी थी कि लोकपाल ने उनकी बातों पर ठीक से गौर किए बिना सीबीआई को चार्जशीट दायर करने की मंजूरी दे दी. टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में कहा गया कि सीबीआई को चार्जशीट दायर करने की अनुमति देने का लोकपाल का फैसला गलत है. महुआ मोइत्रा के वकील ने लोकपाल के फैसले को लोकपाल अधिनियम के विपरीत बताया और कहा कि यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का घोर उल्लंघन है. हाईकोर्ट ने अब लोकपाल को महुआ  मोइत्रा की दलीलों पर ठीक से विचार कर एक महीने में फैसला लेने के लिए कहा है. क्या था पूरा मामला? यह मामला अक्टूबर 2023 में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की शिकायत से शुरू हुआ था, जिसमें मोइत्रा पर व्यापारी दर्शन हीरानंदानी से नकद और महंगे उपहार लेकर संसद में अडाणी समूह से जुड़े सवाल पूछने का आरोप लगा था. मोइत्रा ने अपना लॉगिन पासवर्ड हीरानंदानी को देने की बात स्वीकार की थी, लेकिन रिश्वत लेने से इनकार किया था. लोकपाल ने शिकायत पर सीबीआई से प्रारंभिक जांच कराई, फिर मार्च 2024 में औपचारिक जांच का आदेश दिया. जून 2025 में सीबीआई ने रिपोर्ट लोकपाल को सौंपी, जिसके बाद मोइत्रा से टिप्पणियां मांगी गईं. अक्टूबर में सुनवाई के बाद लोकपाल की फुल बेंच ने 12 नवंबर 2025 को धारा 20(7)(ए) और 23(1) के तहत चार हफ्ते में चार्जशीट दाखिल करने का आदेश दिया. मोइत्रा ने इसे चुनौती दी और हाईकोर्ट ने 21 नवंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोकपाल की भूमिका जांच रिपोर्ट को सिर्फ मंजूरी देने की नहीं है, बल्कि स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करने की है. इस फैसले से सीबीआई की चार्जशीट प्रक्रिया पर रोक लग गई है और लोकपाल को अब कानून के मुताबिक नए सिरे से विचार करना होगा. मोइत्रा पहले दिसंबर 2023 में लोकसभा से निष्कासित हो चुकी हैं, जब एथिक्स कमिटी ने उन्हें अनैतिक आचरण का दोषी पाया था. हालांकि, उन्होंने सभी आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया था.

जहाँ बंदूकें खामोश हुईं, वहाँ भविष्य की नींव रखी जा रही है, पुनर्वास केंद्र में 35 आत्मसमर्पित नक्सली बने राजमिस्त्री

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से सुकमा में पुनर्वास नीति बनी मिसाल रायपुर, कभी जिन हाथों में बंदूकें थीं, आज उन्हीं हाथों में औज़ार हैं। कभी जिन रास्तों पर हिंसा और डर का साया था, आज वहीं विकास और भरोसे की नींव रखी जा रही है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशील सोच और स्पष्ट मंशा के अनुरूप सुकमा जिले में आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास की एक नई और सकारात्मक तस्वीर उभरकर सामने आई है। वहाँ पुनर्वास केंद्र में रह रहे 35 आत्मसमर्पित नक्सलियों को राजमिस्त्री (मेसन) का व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस पहल की गई है। यह प्रशिक्षण जिला प्रशासन और एसबीआई आरसेटी के संयुक्त सहयोग से संचालित किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में 15 महिलाएं और 20 पुरुष शामिल हैं। इन्हें भवन निर्माण से जुड़े सभी आवश्यक तकनीकी और व्यावहारिक कौशल—जैसे नींव निर्माण, ईंट चिनाई, प्लास्टर कार्य, छत ढलाई, गुणवत्ता मानक का व्यवस्थित और चरणबद्ध प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि ये किसी भी निर्माण कार्य में दक्षता के साथ काम कर सकें। यह पहल केवल रोजगार प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसमर्पित युवाओं के जीवन को नई दिशा देने का सशक्त माध्यम बन रही है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ये युवा प्रधानमंत्री आवास योजना(ग्रामीण )के तहत जिले में अधूरे और नए आवासों के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। इससे एक ओर उन्हें स्थायी और सम्मानजनक रोजगार मिलेगा, वहीं दूसरी ओर नक्सल प्रभावित और दुर्गम क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही कुशल राजमिस्त्रियों की कमी भी दूर होगी। कलेक्टर श्री देवेश ध्रुव ने इस पहल को सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि आत्मसमर्पण का वास्तविक अर्थ केवल हथियार छोड़ना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर समाज की मुख्यधारा में सम्मान के साथ लौटना है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि पुनर्वास केंद्र में रह रहे युवाओं को कौशल, रोजगार और सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे सम्मान के साथ जीवन जी सकें। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकुन्द ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण सहित विभिन्न शासकीय निर्माण कार्यों के सफल क्रियान्वयन के लिए कुशल मानव संसाधन अत्यंत आवश्यक है। यह प्रशिक्षण  आत्मसमर्पित युवाओं को रोजगार  और सामाजिक सरोकार से जोड़ेगा। पोलमपल्ली निवासी पुनर्वासित पोड़ियम भीमा बताते हैं कि वे लगभग 30 वर्षों तक संगठन से जुड़े रहे, लेकिन आत्मसमर्पण के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया है। “यहाँ रहने और खाने की अच्छी व्यवस्था है। हमें राजमिस्त्री का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पहले इलेक्ट्रीशियन मैकेनिक का प्रशिक्षण भी मिला। अब मैं सम्मान के साथ काम कर सकूंगा। पुवर्ती निवासी मुचाकी रनवती बताती हैं कि वे 24 वर्षों तक संगठन से जुड़ी रहीं। पुनर्वास के बाद मुझे सिलाई का प्रशिक्षण मिला। अब राजमिस्त्री का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हम अपने परिवार से मिल पाए, बस्तर ओलंपिक में भाग लिया और प्रथम पुरस्कार भी जीता। शासन की योजनाओं का पूरा लाभ मिल रहा है। डब्बमरका निवासी गंगा वेट्टी ने कहा कि पुनर्वास के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया है। जिला प्रशासन ने मोबाइल और राजमिस्त्री किट दी है। शिविर लगाकर आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड और जॉब कार्ड बनाए गए हैं। कोई समस्या होती है तो कलेक्टर और एसपी तुरंत सुनवाई करते हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस पहल को लेकर कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार संवाद, संवेदना और विकास के माध्यम से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। आत्मसमर्पित युवाओं को हुनर, रोजगार और सम्मान देकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना राज्य की पुनर्वास नीति का मूल उद्देश्य है। सुकमा जिले में चल रहा आत्मसमर्पित युवाओं को रोजगार मूलक कार्यों से जोड़ने का यह प्रयास इस बात का प्रमाण है कि  संवेदनशील प्रशासन, भरोसे और विकासपरक योजनाओं के जरिए हिंसा के रास्ते पर भटके युवाओं को  नई पहचान और बेहतर भविष्य दिया जा सकता है। यही पुनर्वास की असली सफलता है और यही स्थायी शांति की मजबूत नींव।

प्रधानमंत्री मोदी और CM डॉ. यादव के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में प्रदेश कर रहा लगातार प्रगति: मंत्री कंषाना

प्रधानमंत्री मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में कृषि के क्षेत्र में प्रदेश लगातार कर रहा प्रगति – कृषि मंत्री कंषाना मध्यप्रदेश देश के अग्रणी कृषि राज्यों में शामिल भोपाल  किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल कंषाना सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र दी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्‍व में कृषि के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है। हमारी सरकार विकास और सेवा के दो वर्ष पूर्ण कर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का समृद्ध मध्‍यप्रदेश का सपना पूर्ण कर रही है। यह बात मंत्री कंषाना ने जनसंपर्क संचालनालय के सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता में कही। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश आज देश के अग्रणी कृषि राज्यों में शामिल है। सोयाबीन एवं मक्‍का के उत्‍पादन में प्रदेश का देश में प्रथम स्‍थान है तथा गेहूं, उड़द, मसूर, चना, सरसों, कुल तिलहन, कुल दलहन, कुल अनाज और मोटा अनाज में मध्‍य प्रदेश का देश में द्वितीय स्‍थान है। यह हमारे किसानों की मेहनत और सरकार की किसान-हितैषी नीतियों का प्रतिफल है। प्रदेश के अन्‍नदाताओं की कड़ी मेहनत से ही यह उपलब्धियां हासिल करने में हम सफल हुये है। कृषि मंत्री कंषाना ने कहा कि वर्ष 2002-2003 में सिंचाई का क्षेत्रफल लगभग साढ़े सात लाख हेक्‍टेयर था जो कि 2024-25 में 55 लाख हेक्‍टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई की जा रही है। आगामी 3 वर्षों में सिंचाई का रकबा बढ़ाकर65 लाख हेक्‍टेयर करने का लक्ष्‍य है। जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।  जनजातीय अंचलों में श्रीअन्न को बढ़ावा देने के लिए रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना प्रारंभ की गई है, जिससे कोदो-कुटकी जैसी पारंपरिक फसलों का उत्पादन, विपणन की व्‍यवस्‍था की जा रही है, ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो सके। किसानों की सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत करोड़ों रुपये की सहायता राशि सीधे किसानों तक पहुँची है। प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को राहत राशि का त्वरित वितरण किया गया है।  कृषि मंत्री कंषाना ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत मध्‍य प्रदेश के 8 जिले अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, सीधी, अलीराजपुर, निमाड़ी, टीकमगढ़ एवं डिण्‍डोरी को शामिल किया गया है। इन आकांक्षी जिलों में कृषि उत्पादन, ग्रामीण समृद्धि और योजनाओं के समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में सोयाबीन, चना, मसूर, धान एवं गेहूं की खरीदी के माध्यम से किसानों को हजारों करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। प्रदेश में प्राकृतिक खेती, तिलहन-दलहन आत्मनिर्भरता मिशन, राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, ई-नाम, कृषि अद्योसंरचना निधि और कृषि निर्यात जैसे क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। हमारा संकल्‍प है कि किसान की आय बढ़े, खेती टिकाऊ बने और मध्‍य प्रदेश कृषि में देश का नेतृत्‍व करें। कृषि परिदृश्‍य  देश में मध्‍य प्रदेश मक्‍का एवं सोयाबीन के उत्‍पादन में प्रथम स्‍थान तथा गेहॅू, उड़द, मसूर, चना, सरसों, कुल तिलहन, कुल दलहन, कुल खाद्यान्‍न, कुल मोटा अनाज में द्वितीय स्‍थान पर है। न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य पर उपार्जन मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्‍व में प्रदेश सरकार द्वारा गत 2 वर्षों में 48 लाख 51 हजार किसानों से 02 करोड़ 41 लाख 31 हजार मीट्रिक टन अनाज खरीदा गया है। जिसके विरूद्ध 81 हजार सात सौ अड़सठ करोड़ रूपये का भुगतान किसानों के खाते में किया गया है। सोयाबीन भावांतर भुगतान योजना प्रदेश सरकार द्वारा किसान भाईयों की मेहनत को प्रतिफल प्रदाय करने के लिये सोयाबीन की फसल के लिये भावांतर भुगतान योजना लागू की गई है। जिसके अंतर्गत 09 लाख 36 हजार कृषकों का पंजीयन हुआ है। अभी तक लगभग छ: लाख कृषकों के द्वारा तेरह लाख नवासी हजार मेट्रिक टन सोयाबीन का विक्रय मंडियों में किया गया है, जिससे दो चरणों में मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव द्वारा दो लाख सरसठ हजार किसानों के खाते में चार सौ बियासी करोड़ रूपये अंतरित किये गये है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना प्राकृतिक आपदाओं से फसल क्षति होने पर किसानों को सहायता के लिये गत 2 वर्षों में राज्य सरकार द्वारा सत्‍तर लाख कृषक आवेदनों पर बारह सौ सेंतीस करोड़ चौवन हजार राशि रूपये का दावा भुगतान किया गया है। प्रधानमंत्री एवं मुख्‍यमंत्री  किसान सम्‍मान निधि योजना  प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा किसान सम्‍मान निधि के रूप में किसानों को छ: हजार रूपये दिये जा रहे थे, मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव द्वारा भी किसानों को छ: हजार रूपये की राशि दी जा रही है, इस प्रकार प्रधानमंत्री एवं मुख्‍यमंत्री किसान सम्‍मान निधि योजना अंतर्गत माह अप्रैल, 2025 से अभी तक एक करोड़ अडसठ लाख किसानों को छ: हजार सात सौ छप्‍पन करोड़ की राशि का भुगतान किया जा चुका है। ‘रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना’’     रानी दुर्गावती अन्‍न प्रोत्‍साहन योजना अंतर्गत प्रदेश में प्रथम बार 16 जिलों – जबलपुर, कटनी, मण्डला, डिंडोरी, छिंदवाड़ा, शहडोल, अनुपपुर, उमरिया, रीवा, मऊगंज, सतना, मैहर,  बालाघाट, सिवनी, सीधी एवं सिंगरौली में उपार्जन किया जा रहा है।     कोदो कुटकी उपार्जन के लिये कुल बाईस हजार चार सौ उनचास कृषकों का पंजीयन किया गया, जिसका रकबा इक्‍कीस हजार एक सौ बहत्‍तर हैक्‍टेयर है।     खरीफ 2025 में लगभग पन्‍द्रह हजार मेट्रिक टन कोदों एवं कुटकी का उपार्जन का लक्ष्‍य निर्धारित किया।     राज्य सरकार द्वारा राशि रुपए एक हजार प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि डीबीटी के माध्यम से प्रदाय की जाएगी। खाद वितरण     भारत सरकार द्वारा प्रत्‍येक वर्ष खाद के ऊपर दो लाख करोड़ की सब्सिडी प्रदाय की जाती है।     मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्‍व में सरकार द्वारा गत दो वर्षों में अभी तक बहत्‍तर लाख मेट्रिक टन यूरिया एवं बयालीस लाख मेट्रिक टन डीएपी + एनपीके वितरण किया गया है।     विगत वर्ष इसी अवधि में विक्रय मात्रा से यूरिया तीन लाख दस हजार मेट्रिक टन अधिक विक्रय किया जा चुका है एवं वर्तमान में ढाई लाख मेट्रिक टन यूरिया स्‍टॉक में है।     विगत वर्ष इसी अवधि में विक्रय मात्रा से डीएपी + एनपीके लगभग सत्‍तर हजार मेट्रिक टन अधिक किसानों को विक्रय किया जा चुका है एवं वर्तमान में लगभग चार लाख मेट्रिक टन स्‍टॉक में है। ई-विकास (वितरण एवं कृषि उर्वरक … Read more