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SDOP पर चाकू से हमला, पुलिस ने महिला समेत दो आरोपियों को किया काबू

दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में शुक्रवार को सुकमा में पदस्थ उप पुलिस अधीक्षक (SDOP) तोमेश वर्मा पर चाकू से घातक वार हुआ है. बताया जा रहा है कि पुराने मामले को लेकर विवाद के कारण आरोपियों ने वारदात को अंजाम दिया. यह घटना जिला न्यायलय, दंतेवाड़ा से कुछ दूर पर स्थित टीवीएस शो रूम के पास हुई है. मामले में पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है. जानकारी के मुताबिक, सुकमा पदस्थ एसडीओपी तोमेश वर्मा यूएपीए मामले (UAPA CASE) से जुड़ी सुनवाई के संबंध में शुक्रवार को दंतेवाड़ा पहुंचे थे. इस दौरान दुर्ग जिले में चल रहे मामले के आरोपी रविशंकर साहू और रंजिता वर्मा उनसे बात करने के लिए दुर्ग से दंतेवाड़ा आए थे. उन्होंने एसडीओपी को कोर्ट के पास टीवीएस शो रूम के सामने मिलने के लिए बुलाया. बातचीत के दौरान विवाद इतना बढ़ा कि मिलने पहुंचे शख्स ने अपने पास रखे चाकू से एसडीओपी पर घातक वार कर दिया. हमले में घायल एसडीओपी को तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है. मामले में पुलिस ने आरोपी युवक और युवती को गिरफ्तार कर लिया है, जिनसे पूछताछ जारी है.

स्मार्ट मीटर लगवाएं और पाएं 20% सस्ती बिजली, बैतूल में नई योजना

बैतूल मध्य प्रदेश के बैतूल शहर में बिजली व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और उपभोक्ता-हितैषी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। बिजली कंपनी ने स्मार्ट मीटर लगाने की शुरुआत कर दी है। शहरी क्षेत्र में अब तक करीब 4 हजार घरों में स्मार्ट मीटर इंस्टॉल हो चुके हैं, जबकि आगामी चरणों में पूरे शहर में 36 हजार स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य तय किया गया है। बिजली खपत पर 20% तक की छूट बिजली कंपनी का दावा है कि स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को सीधा फायदा देंगे। सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे के बीच की गई बिजली खपत पर 20 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। इससे दिन के समय बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं का बिल सीधे कम हो सकता है। प्रीपेड मीटर पर अतिरिक्त फायदा भविष्य में यदि उपभोक्ता प्रीपेड स्मार्ट मीटर का विकल्प चुनते हैं, तो उन्हें ऊर्जा प्रभार पर 25 पैसे प्रति यूनिट की अतिरिक्त छूट मिलेगी। खास बात यह है कि प्रीपेड मीटर लेने पर कोई सुरक्षा निधि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) नहीं ली जाएगी। हालांकि, यह सुविधा बैतूल में 2 से 3 साल बाद शुरू होने की संभावना है। कैसे काम करता है स्मार्ट मीटर? स्मार्ट मीटर तकनीकी रूप से पारंपरिक मीटर जैसा ही होता है, लेकिन इसमें एक कम्यूनिकेशन मॉड्यूल लगाया जाता है। यह मॉड्यूल बिजली खपत और रीडिंग की जानकारी सीधे डिजिटल सर्वर तक भेजता है। उपभोक्ता इस डेटा को मोबाइल ऐप पर रियल-टाइम देख सकेंगे। इससे अनुमान के आधार पर बिल बनने और गलत रीडिंग की शिकायतें लगभग खत्म होने का दावा किया जा रहा है। मीटर रीडर की जरूरत नहीं नई व्यवस्था के तहत अब मीटर वाचकों को घर-घर जाकर रीडिंग लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। रीडिंग सीधे कंपनी के सॉफ्टवेयर में दर्ज होगी। इसके चलते हर महीने 1 तारीख को बिल जारी किया जा सकेगा 10 तारीख तक भुगतान की अंतिम तिथि तय होगी बिल वितरण में देरी और गड़बड़ियों पर लगाम लगेगी कुल मिलाकर फायदा ही फायदा बिजली कंपनी का कहना है कि स्मार्ट मीटर से न सिर्फ सटीक बिलिंग सुनिश्चित होगी, बल्कि उपभोक्ताओं को छूट, पारदर्शिता और समय की बचत जैसे कई फायदे मिलेंगे। बैतूल में शुरू हुई यह पहल आने वाले समय में बिजली व्यवस्था की तस्वीर बदल सकती है।

रक्षा बजट में बड़ा बढ़ावा, ऑपरेशन सिंदूर के बाद नए ड्रोन, अटैक वेपन और एयर डिफेंस में निवेश

नई दिल्ली भारत की सुरक्षा चुनौतियां दिन-ब-दिन बढ़ रही हैं. खासकर पड़ोसी देशों से आने वाले खतरों को देखते हुए भारतीय सेना को और मजबूत बनाने की जरूरत है. हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर ने यह साफ कर दिया कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई करने में सक्षम है. इस ऑपरेशन के बाद रक्षा मंत्रालय अगले वित्तीय वर्ष (2026-27) के लिए रक्षा बजट में करीब 20% की बड़ी बढ़ोतरी मांगने की तैयारी कर रहा है. क्या है ऑपरेशन सिंदूर? अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक भयानक आतंकी हमला हुआ था. पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने 26 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी थी. यह हमला सिर्फ सीमा पार से नहीं, बल्कि भारत के अंदर धार्मिक आधार पर नफरत फैलाने की कोशिश था. जवाब में भारत ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया. इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर में 9 बड़े आतंकी ठिकानों को सटीक हमलों से तबाह कर दिया. ब्रह्मोस मिसाइलें, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और स्वदेशी ड्रोन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल हुआ. पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई में सैकड़ों ड्रोन और मिसाइलें भेजीं, लेकिन भारत की मल्टी-लेयर एयर डिफेंस ने उन्हें रोक दिया. यह ऑपरेशन सिर्फ 4-5 दिनों का था, लेकिन इसने भारत की सैन्य ताकत और स्वदेशी हथियारों की विश्वसनीयता दुनिया के सामने दिखा दी. ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया कि भारत अब स्ट्रैटेजिक रेस्ट्रेंट की पुरानी नीति से आगे बढ़ चुका है. अब आतंकवाद के खिलाफ सीधा और तेज जवाब दिया जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे नया नॉर्मल कहा है- आतंकियों और उनके समर्थकों में कोई फर्क नहीं किया जाएगा. रक्षा बजट में क्यों बढ़ोतरी की जरूरत? ऑपरेशन सिंदूर से कई सबक मिले…     ड्रोन हमलों का खतरा बढ़ गया है.     एयर डिफेंस सिस्टम को और मजबूत करना जरूरी है.     लंबी दूरी के हमलावर हथियार (स्टैंडऑफ वेपन्स) की कमी महसूस हुई.     तेजी से आधुनिकीकरण (मॉडर्नाइजेशन) और सैन्य तैयारी बढ़ाने की आवश्यकता है. रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने हाल ही में कहा कि भारत का टफ नेबरहुड और लंबी अवधि की सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए बजट में बड़ी बढ़ोतरी चाहिए. उन्होंने उम्मीद जताई कि वित्त मंत्रालय इसका समर्थन करेगा. वर्तमान रक्षा बजट कितना है? वित्तीय वर्ष 2025-26 में रक्षा मंत्रालय को रिकॉर्ड 6.81 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. यह पिछले साल से करीब 9.5% ज्यादा है. इसमें…     कैपिटल खर्च (नए हथियार और उपकरण खरीदने के लिए): 1.80 लाख करोड़ रुपये.     रेवेन्यू खर्च (वेतन, रखरखाव, ईंधन आदि): करीब 3.12 लाख करोड़ रुपये.     पेंशन: 1.61 लाख करोड़ रुपये.     रिसर्च एंड डेवलपमेंट (DRDO के लिए): 26,817 करोड़ रुपये. इस बजट का बड़ा हिस्सा आत्मनिर्भर भारत अभियान पर खर्च होता है. 75% कैपिटल खर्च स्वदेशी कंपनियों से खरीदारी के लिए रखा जाता है. अगले बजट में क्या हो सकता है? रक्षा मंत्रालय 2026-27 के लिए करीब 20% बढ़ोतरी मांगेगा. अगर यह मंजूर हुई तो बजट 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है. इस पैसे से मुख्य फोकस इन क्षेत्रों पर होगा…     नए ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम: हमलावर ड्रोन (कामिकाज़ ड्रोन) और सर्विलांस ड्रोन खरीदे जाएंगे. पाकिस्तानी ड्रोन हमलों से सबक लेते हुए एंटी-ड्रोन तकनीक (जैसे भार्गवास्त्र सिस्टम) को बढ़ावा.     एयर डिफेंस सिस्टम: आकाश, S-400 जैसी सिस्टम की और यूनिट्स. मल्टी-लेयर डिफेंस को पूरे देश में फैलाना, खासकर सीमावर्ती इलाकों में.     हमलावर हथियार (अटैक वेपन्स): लंबी दूरी की मिसाइलें (ब्रह्मोस की और रेंज वाली). स्टैंडऑफ वेपन्स – जो दूर से ही दुश्मन को निशाना बना सकें. नए फाइटर जेट, हेलिकॉप्टर और तोपें.     स्वदेशी उत्पादन और R&D: आत्मनिर्भर भारत को तेज करना. निजी कंपनियों और MSMEs को ज्यादा फंडिंग. DRDO और निजी सेक्टर के साथ मिलकर नई तकनीकें विकसित करना.     सीमाः सड़कें, पुल, एयरबेस और लॉजिस्टिक्स को मजबूत करना. क्यों जरूरी है यह बढ़ोतरी? भारत की 17% विश्व जनसंख्या की रक्षा के लिए सिर्फ 3% वैश्विक रक्षा खर्च करता है (चीन 12% करता है). ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि स्वदेशी हथियार कितने प्रभावी हैं, लेकिन और निवेश की जरूरत है ताकि सेना हमेशा तैयार रहे. यह बढ़ोतरी न सिर्फ सुरक्षा बढ़ाएगी, बल्कि रोजगार पैदा करेगी और भारतीय कंपनियों को मजबूत बनाएगी. ऑपरेशन सिंदूर भारत की नई रक्षा नीति का प्रतीक है – मजबूत, आत्मनिर्भर और त्वरित जवाब देने वाली. आने वाला रक्षा बजट इस दिशा में एक बड़ा कदम होगा. भारत अब सिर्फ जवाब नहीं देता, बल्कि खतरे को जड़ से खत्म करने की तैयारी करता है.

रिपोर्ट: जीएसटी सुधारों के असर से भारत में कार और अन्य वाहन की बिक्री में 22% इजाफा

नई दिल्ली  भारत के यात्री वाहन (पैसेंजर व्हीकल) उद्योग में नवंबर 2025 में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली। त्योहारी सीजन के बाद भी लगातार मांग, जीएसटी दरों में कटौती और सर्दियों में शादी के सीजन के शुरू होने से गाड़ियों की मांग में वृद्धि देखी गई। इससे बिक्री और उत्पादन दोनों में सालाना आधार पर अच्छा इजाफा हुआ। आईसीआरए की रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर में गाड़ियों की रिटेल बिक्री पिछले साल के मुकाबले 22 प्रतिशत बढ़ी। हालांकि, अक्टूबर में त्योहारों के कारण हुई बिक्री के मुकाबले नवंबर में यह 29 प्रतिशत कम रही।  वहीं, होलसेल बिक्री (कंपनियों से डीलरों को गाड़ियां भेजना) 19 प्रतिशत बढ़कर 4.1 लाख गाड़ियों तक पहुंच गई, क्योंकि कंपनियों ने मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन जारी रखा। रेटिंग एजेंसी का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-26 में होलसेल बिक्री में 1 से 4 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसका कारण स्थिर मांग, जीएसटी में कटौती, नए मॉडल्स की लॉन्चिंग और बाजार में बनी सकारात्मक स्थिति है। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 के पहले 8 महीनों में होलसेल बिक्री 3.6 प्रतिशत बढ़ी, जबकि रिटेल बिक्री 6.1 प्रतिशत बढ़ी है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, गाड़ियों की बिक्री बढ़ने से डीलरों के पास रखा स्टॉक भी संतुलित हुआ है। सितंबर के अंत में जहां गाड़ियों का स्टॉक करीब 60 दिनों का था, नवंबर तक घटकर 44–46 दिन रह गया। नवंबर में यात्री वाहनों की कुल बिक्री में यूटिलिटी वाहनों की हिस्सेदारी 67 प्रतिशत रही, जो अक्टूबर में 69 प्रतिशत थी, जबकि जीएसटी में कटौती के बाद मिनी, कॉम्पैक्ट और सुपर-कॉम्पैक्ट सेगमेंट में बिक्री से सुधार देखा गया। रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर महीने के दौरान भारत में तीन पहिया वाहनों की बिक्री में 21.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 71,999 यूनिट तक पहुंच गई, जबकि दो पहिया वाहनों की बिक्री में 21.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो 19,44,475 यूनिट तक पहुंच गई है। यही नहीं, शहरी क्षेत्रों में ज्यादा मांग के चलते स्कूटरों की बिक्री में 29 प्रतिशत की शानदार वृद्धि हुई और इनकी बिक्री 7,35,753 यूनिट तक पहुंच गई। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थिर मांग के चलते मोटरसाइकिलों की बिक्री में 17.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 11,63,751 यूनिट तक पहुंच गई। यात्री वाहनों की बढ़ती मांग के कारण नवंबर में तीन पहिया वाहनों की बिक्री में 24.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 59,446 यूनिट तक पहुंच गई। तो वहीं मालवाहक वाहनों की बिक्री में 10.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 10,874 यूनिट तक पहुंच गई। रिपोर्ट में बताया गया कि भारत से यात्री वाहनों का निर्यात भी बढ़ा है। मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका जैसे देशों से मजबूत मांग के कारण भारतीय गाड़ियों की विदेशों में अच्छी बिक्री हो रही है। 

नॉरोवायरस का खतरा बढ़ा: 12 से 48 घंटे में दिखते हैं लक्षण, जानिए पूरी जानकारी

अगर बिना किसी चेतावनी के उल्टी और दस्त शुरू हो जाएं, तो इसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। यह लक्षण नॉरोवायरस संक्रमण के हो सकते हैं—एक ऐसा वायरस जो पेट और आंतों पर हमला करता है और बहुत तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है। अक्सर लोग इसे Stomach flu  समझ लेते हैं, लेकिन इसका फ्लू या इन्फ्लुएंजा वायरस से कोई संबंध नहीं है। क्या है नॉरोवायरस? नॉरोवायरस दुनिया में पेट से जुड़ी बीमारियों और फूड पॉइजनिंग का एक बड़ा कारण माना जाता है। इसका पहला बड़ा मामला साल 1968 में अमेरिका के ओहायो राज्य के नॉरवॉक शहर में सामने आया था, इसी वजह से इसे पहले नॉरवॉक वायरस कहा जाता था। कितना आम है यह संक्रमण? नॉरोवायरस बेहद आम है और हर साल दुनियाभर में इसके करीब 68.5 करोड़ मामले सामने आते हैं। इनमें 20 करोड़ से ज्यादा बच्चे शामिल होते हैं। यह वायरस खासतौर पर ठंड के मौसम में ज्यादा फैलता है और नवंबर से अप्रैल के बीच इसके मामले तेजी से बढ़ते हैं। नॉरोवायरस के लक्षण क्या होते हैं? इस संक्रमण के लक्षण अचानक शुरू होते हैं और तेजी से बिगड़ सकते हैं। मुख्य लक्षण हैं:-     मतली और बार-बार उल्टी     पानी जैसे दस्त     पेट में दर्द और ऐंठन इसके अलावा कुछ लोगों में बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और अत्यधिक कमजोरी भी देखी जाती है। वायरस के संपर्क में आने के 12 से 48 घंटे के भीतर लक्षण दिखने लगते हैं और आमतौर पर 1 से 3 दिन तक रहते हैं। नॉरोवायरस कैसे फैलता है? यह वायरस बहुत ज्यादा संक्रामक होता है और कई तरीकों से फैल सकता है:     संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क से     दूषित सतह छूने के बाद मुंह या नाक छूने से     गंदा या अधपका खाना खाने से     दूषित पानी पीने से अक्सर यह तब फैलता है जब संक्रमित व्यक्ति खाना बनाता या परोसता है। कुछ समुद्री भोजन, जैसे ऑयस्टर, प्राकृतिक रूप से भी इससे संक्रमित हो सकते हैं। क्यों हो सकता है यह खतरनाक? हालांकि ज्यादातर मामलों में बीमारी कुछ दिनों में ठीक हो जाती है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी परेशानी है डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी। डिहाइड्रेशन के संकेत हो सकते हैं:     पेशाब कम होना     मुंह सूखना     चक्कर आना     अत्यधिक कमजोरी     बच्चों में सुस्ती, ज्यादा नींद या बिना आंसू के रोना इलाज क्या है? नॉरोवायरस के लिए कोई खास दवा या वैक्सीन नहीं है। इलाज का मतलब है लक्षणों को संभालना:     ज्यादा से ज्यादा पानी और ORS लेना     पूरा आराम करना     हल्का, सादा और सुपाच्य भोजन करना बचाव कैसे करें? इस वायरस से बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है:     साबुन और पानी से बार-बार हाथ धोएं     खाना अच्छी तरह पकाकर खाएं     गंदी सतहों को साफ रखें     बीमार व्यक्ति से दूरी बनाए रखें ध्यान रखें, हैंड सैनिटाइजर नॉरोवायरस पर ज्यादा असरदार नहीं होता, इसलिए हाथ धोना सबसे जरूरी है। क्या नॉरोवायरस दोबारा हो सकता है? हां। नॉरोवायरस के कई प्रकार होते हैं, इसलिए एक बार संक्रमण हो जाने के बाद भी व्यक्ति दोबारा इसकी चपेट में आ सकता है।

पौष अमावस्या पर करें ये चमत्कारी उपाय, दूर होंगे कष्ट और बदलेगा भाग्य

हिंदू पंचांग के अनुसार पौष अमावस्या साल 2025 में 19 दिसंबर (शुक्रवार) को मनाई जाएगी। यह वर्ष की अंतिम अमावस्या है, जिसका विशेष महत्व पितृ तर्पण, स्नान-दान और आध्यात्मिक उपायों के लिए बताया गया है। कई लोगों में 18 या 19 दिसंबर को लेकर भ्रम रहता है, लेकिन पंचांग अनुसार पौष कृष्ण पक्ष की अमावस्या 19 दिसंबर को ही मानी जाएगी। पौष अमावस्या का धार्मिक महत्व शास्त्रों के अनुसार पौष अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि इस दिन किए गए दान और पूजा से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि और शांति आती है। पौष अमावस्या पर पितरों के लिए विशेष कर्म इस दिन सुबह स्नान के बाद दूध और चावल की खीर बनाकर पितरों को भोग लगाएं। गोबर के उपले या कंडे की कोर जलाकर भोग अर्पित करें। एक लोटे में जल, गंगाजल, दूध, तिल और चावल डालकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण करें। यदि खीर बनाना संभव न हो, तो घर में बना शुद्ध और ताजा भोजन भी भोग में अर्पित किया जा सकता है। पौष अमावस्या के चमत्कारी उपाय तरक्की और सफलता के लिए तुलसी की जड़ की थोड़ी मिट्टी में जल मिलाकर लेप बनाएं, शरीर पर लगाकर स्नान करें। इसके बाद भगवान विष्णु को प्रणाम करें। यह उपाय उन्नति के मार्ग खोलता है। शत्रु भय से मुक्ति हेतु भगवान विष्णु के 12 नामों (केशव, नारायण, माधव, गोविन्द, विष्णु, मधुसूदन, त्रिविक्रम, वामन, श्रीधर, हृषीकेश, पद्मनाभ और दामोदर) का स्मरण करते हुए 12 पीले फूल अर्पित करें। शाम को फूलों को पीपल के नीचे रखें या बहते जल में प्रवाहित करें। मान-सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा के लिए किसी कन्या या जरूरतमंद विवाहित महिला को पीले वस्त्र दान करें और आशीर्वाद लें। संकटों से रक्षा के लिए मंदिर में लाल वस्त्र पर श्रीमद्भागवत गीता स्थापित कर 11 बार “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः” मंत्र का जाप करें। गीता को नेत्रों से लगाएं। धन-वृद्धि के लिए मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करें। 11 अक्षत अर्पित करते हुए “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद। श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मी नमः॥” मंत्र का जाप करें। अक्षत को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें। पौष अमावस्या 2025 पितृ कृपा, धन-समृद्धि और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का श्रेष्ठ अवसर है। श्रद्धा और नियम से किए गए उपाय किस्मत के द्वार खोल सकते हैं।

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में सुरक्षाबलों और नक्सलियों आमने-सामने, इलाके में मुठभेड़ जारी

बीजापुर नक्सलवाद पर प्रहार जारी है. लगातार दूसरे दिन डीआरजी जवानों ने कार्रवाई की है. सुकमा के बाद बीजापुर के भैरामगढ़-इंद्रावती के जंगलों में नक्सलियों को जवानों ने घेर लिया है. शुक्रवार की सुबह से नक्सलियों और जवानों के बीच रुक-रुककर फायरिंग हो रही है. जानकारी के अनुसार, भैरमगढ़ – इन्द्रावती क्षेत्र के जंगल पहाड़ों में माओवादियों की मौजूदगी की जानकारी मिली थी. इस इनपुट पर बीजापुर से DRG जवानों की टीम ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया. अभियान के दौरान जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हो गई. शुक्रवार की सुबह से दोनों ओर से रुक-रुककर गोलीबारी हो रही है. बता दें कि गोलापल्ली के जंगलों में गुरुवार को डीआरडी जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी. जिसमें जवानों ने 3 नक्सलियों को ढेर किया था. एनकाउंटर में माड़वी जोगा उर्फ मुन्ना उर्फ जगत, एरिया कमेटी मेंबर (एसीएम), किस्टाराम एरिया कमेटी, सोधी बंदी, एसीएम, किस्टाराम एरिया कमेटी और नुप्पो बाजनी, एसीएम (महिला), किस्टाराम एरिया कमेटी मार गिराए गए थे.

कोहरे का कहर: बिहार के 33 जिलों में Yellow और Orange Alert जारी, सतर्क रहने की अपील

पटना मौसम विभाग (IMD) ने बिहार में ठंड और कोहरे को लेकर चेतावनी जारी की है। राज्य के कई जिलों में घना से बहुत घना कोहरा छाया रहेगा, जिससे दृश्यता कम होगी और रेल, सड़क और हवाई यातायात प्रभावित हो सकता है। यलो और ऑरेंज अलर्ट जारी मौसम विभाग के अनुसार अगले कई दिनों तक कोहरा और ठंड बनी रहेगी। राज्य के 17 जिलों में यलो अलर्ट तो 16 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। घना कोहरा वाले जिले: समस्तीपुर, पटना, जहानाबाद, नालंदा, नवादा, शेखपुरा, लखीसराय, बेगूसराय, खगड़िया, सहरसा, मधेपुरा, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, अररिया, पूर्णिया, किशनगंज घने से बहुत घने कोहरे की चेतावनी वाले जिले: पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, वैशाली, भोजपुर, बक्सर, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, अरवल, गया तापमान की स्थिति     पटना: अधिकतम 16.5°C, न्यूनतम 13°C     औरंगाबाद व गया: अधिकतम तापमान में लगभग 7°C की गिरावट     नालंदा: 6°C की गिरावट     वैशाली: 6.2°C की गिरावट मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 4-5 दिन न्यूनतम तापमान 10°C से नीचे जा सकता है। इसके चलते जनजीवन और यातायात पर प्रभावित होगा। सुबह और रात के समय दृश्यता बेहद कम होगी। रेल, सड़क और हवाई यातायात प्रभावित हो सकता है। वाहन चालकों और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। मौसम विभाग और स्वास्थ्य विभाग की सलाह     कोहरे और ठंड में यात्रा करते समय विशेष सावधानी बरतें     स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी का पालन करें     गर्म कपड़े पहनें और बच्चों व बुजुर्गों का ध्यान रखें  

इल्तिजा मुफ्ती ने नीतीश कुमार के खिलाफ उठाया कड़ा कदम, बढ़ सकती हैं बिहार CM की परेशानियां

श्रीनगर महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा ने बिहार के CM नीतीश कुमार के खिलाफ श्रीनगर में केस (FIR) फाइल किया है। PDP नेता और JK असेंबली के सदस्य वहीद पारा, आगा सैयद मुंतज़िर मेहदी और मोहित भान उनके साथ थे। इल्तिजा ने नीतीश की “औरतों से नफरत करने वाली सोच” की आलोचना की और चुप्पी के बाद उमर अब्दुल्ला द्वारा उनका “बचाव” करने पर सवाल उठाया। इल्तिजा मुफ्ती ने मुख्यमंत्री नितीश कुमार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि "बेहद शर्मनाक है कि जब एक मुस्लिम महिला का नकाब सरेआम खींचा गया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ मुस्लिम महिलाओं के लिए नहीं बल्कि उस हर महिला की है जो सार्वजनिक स्थानों पर खुद को असुरक्षित महसूस करती है।

कॉमेडियन भारती सिंह के घर खुशियों का आगमन, गोला के बाद दूसरे बेटे का जन्म

मुंबई  कॉमेडियन भारती सिंह एक बार फिर मां बन गई हैं. भारती और उनके पति हर्ष लिंबाचिया ने अपने दूसरे बेटे का स्वागत किया है. खास बात ये है कि भारती ने अपने पहले बेटे गोला के जन्म के करीब तीन साल बाद दूसरे बच्चे को जन्म दिया है. जैसे ही ये खबर सामने आई, लोगों के मन में एक सवाल फिर से उठने लगा कि क्या तीन साल का गैप सही माना जाता है? अक्सर कपल्स पहले बच्चे के बाद दूसरा बच्चा प्लान करने को लेकर कन्फ्यूजन में रहते हैं. बढ़ता खर्च, मां की सेहत, करियर या फिर अपनी निजी पसंद इन सब वजहों से कई लोग एक ही बच्चे तक सीमित रहना चाहते हैं. लेकिन जब परिवार की तरफ से दबाव बढ़ता है या बच्चे को भाई-बहन देने की बात आती है, तो दूसरा बच्चा प्लान करने का फैसला बदल भी जाता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि दो बच्चों के बीच कितना गैप मां और बच्चे दोनों की सेहत के लिए सही होता है? क्या दो साल काफी हैं या फिर पांच साल का इंतजार बेहतर माना जाता है? आखिर दूसरे बच्चे के जन्म का सही या आइडियल गैप कितना होना चाहिए? पहले और दूसरे बच्चे में भारती ने कितना रखा गैप? भारती लाफ्टर शेफ्स सीजन 3 के सेट पर शूटिंग के लिए जाने वाली थीं, लेकिन घर पर ही अचानक लेबर पेन शुरू हो गया. वॉटर ब्रेक होते ही उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने बेटे को जन्म दिया. भारती सिंह के पहले बेटे गोला का जन्म 3 अप्रैल 2022 में हुआ था. ऐसे में गोला और दूसरे बेटे के जन्म के बीच लगभग 3 साल का अंतर है. आज के दौर में कई कपल्स इसी गैप को प्रेफर करते हैं, क्योंकि इससे मां की सेहत और बच्चों की देखभाल दोनों बेहतर तरीके से हो पाती है. आखिर बच्चों के बीच कितना होना चाहिए सही गैप? दूसरा बच्चा कब प्लान करना है, ये यूं तो पूरी तरह माता-पिता का निजी फैसला होता है. लेकिन इस फैसले में सबसे अहम भूमिका मां की सेहत की होती है. पहली प्रेग्नेंसी के बाद मां के शरीर को पूरी तरह ठीक होने के लिए समय चाहिए. ऐसे में दूसरा बच्चा तभी प्लान करना चाहिए, जब शरीर पहले गर्भ और डिलीवरी के असर से उबर चुका हो. बच्चों के बीच बहुत कम या बहुत ज्यादा गैप रखने के अपने-अपने फायदे और नुकसान होते हैं, जिन्हें समझना जरूरी है. 12 से 18 महीने का गैप  अगर दो बच्चों के बीच 12 से 18 महीने का गैप हो, तो दोनों के बीच बॉन्डिंग काफी अच्छी बनती है. पहला बच्चा इतना छोटा होता है कि उसे जलन या इनसिक्यॉरिटी का एहसास नहीं होता और दोनों बच्चे एक-दूसरे के अच्छे प्लेमेट बन जाते हैं. हालांकि, इस तरह का कम गैप मां की सेहत पर भारी पड़ सकता है. लगातार नींद पूरी ना होना, दो बच्चों की देखभाल, ब्रेस्टफीडिंग और ट्रेनिंग जैसी जिम्मेदारियां एक साथ निभाना आसान नहीं होता. रिसर्च बताती है कि 18 महीने से कम गैप होने पर प्रीमैच्योर डिलीवरी, बच्चे का वजन कम होना और गर्भ में बच्चे की ग्रोथ धीमी रहने जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. दो साल का गैप  कई डॉक्टरों का मानना है कि दो साल का गैप मां और बच्चे दोनों की सेहत के लिए बेहतर माना जाता है. इस समय तक मां का शरीर काफी हद तक रिकवर कर चुका होता है और पहला बच्चा भी इतना समझदार हो जाता है कि अपनी बातें इशारों या शब्दों में बता सके. इससे मां को दूसरे बच्चे की देखभाल में थोड़ी आसानी होती है और घर का माहौल भी ज्यादा बैलेंस्ड रहता है. तीन साल या उससे ज्यादा का गैप  अगर बच्चों के बीच तीन साल या उससे ज्यादा का गैप रखा जाए, तो पहला बच्चा काफी हद तक अपने काम खुद से करने लगता है और खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करता है. इस दौरान मां का शरीर भी पहली प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग से पूरी तरह उबर चुका होता है. माता-पिता दोनों बच्चों को अलग-अलग ध्यान दे पाते हैं क्योंकि दोनों की जरूरतें और रुचियां अलग होती हैं. हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबे गैप के बाद दोबारा प्रेग्नेंट होना शरीर के लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है. कुछ मामलों में प्रेग्नेंसी और डिलीवरी से जुड़े रिस्क बढ़ सकते हैं. अगर गैप पांच साल तक चला जाए, तो हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और किडनी से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है. क्या सलाह देते हैं डॉक्टर? विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के मुताबिक, पहले और दूसरे बच्चे के बीच कम से कम 24 महीने का गैप होना चाहिए. इस दौरान मां का शरीर पहली प्रेग्नेंसी में खोए हुए पोषक तत्वों को दोबारा हासिल कर लेता है और अगली प्रेग्नेंसी के लिए बेहतर तरीके से तैयार होता है. अगर 24 महीने का गैप संभव न हो, तो भी कम से कम 18 महीने का अंतर जरूर रखा जाना चाहिए, ताकि मां और बच्चे दोनों की सेहत सुरक्षित रह सके.