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कब तक सहेंगे यह धुआँ?: दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता चौथे दिन खराब

नई दिल्ली राजधानी में स्थानीय कारकों के चलते प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में हवा की गति धीमी होने के चलते लगातार चौथे दिन भी हवा बेहद खराब श्रेणी में बरकरार है। सुबह की शुरुआत धुंध और कोहरे की मोटी परत से हुई। वहीं, पूरे दिन आसमान में स्मॉग की घनी चादर भी दिखाई दी। इसके चलते कई इलाकों में दृश्यता भी बेहद कम रही। साथ ही, लोगों को आंख में जलन व सांस के मरीजों को परेशानी हुई। ऐसे में शुक्रवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 374 दर्ज किया गया। यह हवा की बेहद खराब श्रेणी है। इसमें गुरुवार की तुलना में एक सूचकांक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। दूसरी ओर, दिल्ली एनसीआर में नोएडा की हवा सबसे अधिक प्रदूषित रही। यहां एक्यूआई 410 दर्ज किया गया, यह हवा की गंभीर श्रेणी है। वहीं, ग्रेटर नोएडा में 322, गाजियाबाद में 358 और गुरुग्राम में 322 एक्यूआई दर्ज किया गया। इसके अलावा, फरीदाबाद की हवा सबसे साफ रही। यहां सूचकांक 251 दर्ज किया गया। यह हवा की खराब श्रेणी है। दिल्ली में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए निर्णय सहायता प्रणाली के अनुसार, वाहन से होने वाला प्रदूषण 15.91 फीसदी रहा। इसके अलावा पेरिफेरल उद्योग से 7.95, आवासीय इलाकों से 3.86 और निर्माण गतिविधियों से 2.16 फीसदी की भागीदारी रही। सीपीसीबी के अनुसार, शुक्रवार को हवा पश्चिम-उत्तर पश्चिम दिशा से 10 किलोमीटर प्रतिघंटे के गति से चली। वहीं, अनुमानित अधिकतम मिश्रण गहराई 900 मीटर रही। इसके अलावा, वेंटिलेशन इंडेक्स 6000 मीटर प्रति वर्ग सेकंड रहा। दूसरी ओर, दोपहर तीन बजे हवा में पीएम10 की मात्रा 292.4 और पीएम2.5 की मात्रा 183.7 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई। वहीं, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का पूर्वानुमान है कि शनिवार तक हवा बेहद खराब श्रेणी में बरकरार रहेगी। हालांकि, रविवार से सोमवार के बीच हवा के गंभीर श्रेणी में पहुंचने की आशंका है। इसके चलते सांस के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। साथ ही, लोगों को आंखों में जलन, खांसी, खुजली, सिर दर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, शुक्रवार को कई इलाकों में गंभीर और बेहद खराब श्रेणी में हवा दर्ज की गई।

शरीर दे रहा है चेतावनी! ब्रेन ट्यूमर के ये लक्षण समय रहते पहचानें

न्यूकैसल की एक 19 वर्षीय छात्रा के साथ हुई एक आपबीती ने पूरी दुनिया का ध्यान साइलेंट बीमारियों की ओर खींचा है। जिसे मामूली तनाव समझकर नजरअंदाज किया जा रहा था वह असल में एक जानलेवा ब्रेन ट्यूमर था। यह मामला इस बात की बड़ी चेतावनी है कि हम अपने शरीर से मिलने वाले संकेतों को हल्के में न लें। परीक्षा का तनाव या मौत का संकेत? न्यूकैसल की इस लड़की की जिंदगी आमतौर पर परीक्षाओं और करियर के इर्द-गिर्द घूम रही थी। जून 2022 में उसे कुछ ऐसे लक्षण महसूस हुए जो देखने में सामान्य लगते थे: विजुअल डिस्टर्बेंस: उसे पेपर पर अक्षर और रंग अजीब नजर आने लगे थे। शारीरिक असंतुलन: सीधा चलने में दिक्कत होना और एक तरफ झुक जाना। अजीब दर्द: लगातार पीठ दर्द और बार-बार चक्कर आना। छात्रा कई बार अपने जनरल फिजिशियन (GP) के पास गई लेकिन हर बार उसे यही कहा गया कि यह 'एग्जाम स्ट्रेस' (परीक्षा का तनाव) है। उसे विटामिन लेने और आराम करने की सलाह देकर घर भेज दिया जाता रहा। अचानक बेहोशी और 'हाइड्रोसेफेलस' का खुलासा लक्षण कम होने के बजाय बढ़ते गए। एक दिन रूटीन चेकअप के दौरान वह अस्पताल के टॉयलेट में अचानक बेहोश होकर गिर गई। आनन-फानन में जब जांच हुई तो डॉक्टर दंग रह गए: हाइड्रोसेफेलस: उसके दिमाग में फ्लूइड (तरल पदार्थ) का जमाव बहुत ज्यादा हो गया था जिससे मस्तिष्क पर दबाव बढ़ रहा था। ब्रेन ट्यूमर: एमआरआई (MRI) और सीटी स्कैन में पता चला कि एक ट्यूमर चुपचाप बढ़ रहा था। इस ट्यूमर ने दिमाग में फ्लूइड के बहने वाले रास्ते को ब्लॉक कर दिया था।   क्रॉनिक स्ट्रेस: शरीर का सबसे बड़ा दुश्मन डॉक्टर  के अनुसार यह मामला साबित करता है कि तनाव न केवल मानसिक स्थिति बिगाड़ता है बल्कि बीमारियों को और भी घातक बना देता है। जब इंसान लंबे समय तक तनाव  में रहता है तो शरीर में सूजन बढ़ने लगती है। तनाव कैसे शरीर को खोखला करता है? सेल्स पर असर: लंबे समय का तनाव शरीर की कोशिकाओं (Cells) को प्रभावित करता है। हार्मोनल असंतुलन: इससे ब्लड फ्लो, नर्व फंक्शन और हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ जाता है। बीमारियों की नींव: टॉक्सिन्स, खराब खान-पान और जेनेटिक्स के साथ जब तनाव मिलता है तो गंभीर बीमारियां जन्म लेती हैं। डॉक्टरों की सलाह: शरीर की भाषा को समझें बीमारियां कभी अकेले नहीं आतीं। अगर आपको लंबे समय तक ऐसे लक्षण दिखें जिन्हें आराम या दवाओं से ठीक नहीं किया जा पा रहा तो उन्हें सिर्फ 'तनाव' मानकर न छोड़ें। इलाज के साथ-साथ 'मन की शांति' और लक्षणों की गहराई से जांच (Deep Screening) बेहद जरूरी है।

झारखंड में क्रिसमस से न्यू ईयर तक कड़ाके की ठंड का अलर्ट, इतने डिग्री तक जाएगा पारा

रांची झारखंड में इस वक्त जबरदस्त ठंड देखने को मिल रही है। ठंड से लोगों का हाल बेहाल हो गया है। कहा जा रहा है कि अभी ठंड में और इजाफा होगा। मौसम विभाग के मुताबिक क्रिसमस से न्यू ईयर तक भीषण ठंड देखने को मिल सकती है। राज्य भर में क्रिसमस से न्यू ईयर तक प्रचंड ठंड मौसम विभाग के मुताबिक 19 से 25 दिसंबर के बीच न्यूनतम तापमान छह से 14 डिग्री तो 26 दिसंबर से एक जनवरी के दौरान सात से 14 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। ऐसे में राज्य भर में क्रिसमस से न्यू ईयर तक प्रचंड ठंड रह सकती है। क्रिसमस से न्यू ईयर तक ठंड में और इजाफा देखने को मिल सकता है। इसी बीच राहत की बात ये है कि इस दौरान स्कूली बच्चों की छुट्टियां पड़ जाएंगी जिससे उन्हें सुबह घने कोहरे में स्कूल जाना नहीं पड़ेगा। कहीं-कहीं शीतलहरी चलने की संभावना रांची मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक अभिषेक आनंद के मुताबिक, आज यानी शुक्रवार को राज्य के 10 जिलों गढ़वा, पलामू, हजारीबाग, चतरा, लातेहार, गिरिडीह, रांची, खूंटी और देवघर में घना कोहरा छाया रहेगा। इसके साथ ही कहीं-कहीं शीतलहरी चलने की संभावना है। इसके अलावा अन्य जिलों में भी सुबह के समय सामान्य कोहरा और कनकनी बढ़ने के साथ-साथ ठंडी हवा चलने की संभावना है। ठंड की वजह से घरों में दुबके लोग मौसम विभाग का कहना है अगले दो दिनों तक झारखंड में शीतलहर से लोगों को बचना है। राज्य की राजधानी रांची सहित अधिकांश जिलों का तापमान 10 डिग्री से नीचे चल रहा है। अधिकांश जिलों में कोहरे का व्यापक असर देखा जा रहा है तो वही शीतलहरी की दोहरी मार भी लोगों पर पड़ रह रही है। आलम यह है कि सुबह 7:00 बजे से पहले लोगों की सुबह की सैर पर निकलना भी मुश्किल हो गया है। वही शाम के बाद ग्रामीण इलाकों में पूरी तरीके से सड़क पर सन्नाटा देखा जा रहा है क्योंकि ठंड की वजह से लोग घर से निकलना नहीं चाह रहे है।  

देखने में महिला जैसी, काम में चमत्कारी, चीन का नया फीमेल रोबोट

चीन की रोबोटिक्स कंपनी नोएटिक्स ने एक नया ह्यूमनॉइड रोबोट पेश किया है, जिसका नाम Hobbs W1 है। यह रोबोट खास तौर पर सर्विस के कामों के लिए बनाया गया है। इसका चेहरा असली इंसान जैसा दिखता है और यह महिला जैसी शक्ल वाला है। यही कारण है कि इसे फीमेल रोबोट कहा जा रहा है। कंपनी का कहना है कि यह रोबोट असली दुनिया में काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह लोगों से बात कर सकता है, इमोशन समझ सकता है और आसानी से घूम-फिर सकता है। Hobbs W1 को रिसेप्शनिस्ट के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, जहां यह मेहमानों का स्वागत करेगा और उन्हें रास्ता दिखाएगा। असली जैसी स्किन लगी है इंटरेस्टिंग इंजीनियरिंग की रिपोर्ट (Ref.) कहती है, Hobbs W1 के हाथों में छह डिग्री ऑफ फ्रीडम है, यानी यह हाथ बहुत फ्लेक्सिबल हैं और हर तरफ घूम सकते हैं। इसके बाजू में पांच डिग्री ऑफ फ्रीडम है। इससे यह रोबोट इशारे कर सकता है, चीजें पकड़कर दे सकता है और छोटे-मोटे काम कर सकता है। ज्यादातर सोशल रोबोट सिर्फ बात करते हैं, लेकिन यह रोबोट काम भी कर सकता है। इसका चेहरा बायोनिक तरीके से बनाया गया है, जिसमें असली जैसी स्किन लगाई गई है। एक बड़ा स्क्रीन भी है जो जो इसके इमोशन दिखाती है। यह रोबोट होटल, दुकान, स्कूल या ऑफिस में अच्छा काम कर सकता है। क्या-क्या कर लेगा यह रोबोट? यह रोबोट पूरी तरह खुद चल सकता है। यह कमरों का नक्शा बना सकता है और मुश्किल जगहों में आसानी से घूम सकता है। बिना किसी की मदद के यह रिसेप्शन का काम संभाल सकता है, लोगों को गाइड कर सकता है और रोज के कामों में मदद दे सकता है। यह लोगों के साथ चलते हुए बात कर सकता है। कंपनी का कहना है कि यह रोबोट इंसानों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनकी मदद करेगा। बार-बार आने वाले काम यह लगातार कर सकता है, जिससे इंसान बड़े कामों पर ध्यान दे सकें। यह रोबोट कई तरह की जगहों पर अच्छे से फिट हो जाता है। कंपनी का दूसरा रोबोट 'बूमी' नोएटिक्स कंपनी ने अक्टूबर में एक और रोबोट लॉन्च किया था, जिसका नाम बूमी है। यह बच्चे के आकार का है और इसकी कीमतकाफी कम बताई जा रही है।पहले ह्यूमनॉइड रोबोट लाखों रुपये के होते थे, लेकिन बूमी ने कीमत को बहुत कम कर दिया। कंपनी को हाल में करीब 41 मिलियन डॉलर की फंडिंग मिली थी, जिसकी मदद से यह संभव हुआ। कंपनी ने बूमी के कई पार्ट्स खुद ही बनाए, जैसे कंट्रोल बोर्ड और मोटर ड्राइवर। इससे बाहर से महंगे पार्ट्स खरीदने की जरूरत नहीं पड़ी। दूसरा, रोबोट को हल्का बनाया। इसका वजन सिर्फ 12 किलो है, क्योंकि इसमें कंपोजिट सामग्री का इस्तेमाल किया और सिर्फ जरूरी जगहों पर मेटल लगाई। तीसरा, सारे पार्ट्स चीन से ही लिए, जिससे खर्च कम हुआ। नोएटिक्स अब ह्यूमनॉइड रोबोट को हर घर में पहुंचाना चाहती है।

एसआईआर के बाद भोपाल में मतदाता सूची में बदलाव, अभी भी है नाम जोड़ने का मौका

भोपाल   राजधानी भोपाल सहित मध्य प्रदेश में एसआईआर का पहला चरण पूरा हो गया है. 27 अक्टूबर की स्थिति में भोपाल में 21 लाख 25 हजार मतदात थे. लेकिन अब इनमें से 4 लाख 38 हजार मतदाओं के नाम नई मतदाता सूची से कट सकते हैं. भोपाल जिला उप निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने बताया "एसआईआर का फार्म जमा करने के आखिरी दिन तक 79 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पूरी कर ली गई है. जबकि 20.6 प्रतिशत यानि 4 लाख 38 हजार मतादाता अनकनेक्टेबल पाए गए हैं." 23 जनवरी को प्रकाशित होगा ड्राफ्ट भुवन गुप्ता ने बताया "मतदाता सूची का अंतिम ड्राफ्ट 23 जनवरी को प्रकाशित होगा. जो मतदाता इसमें शामिल नहीं होंगे, वो 23 जनवरी के बाद इसके लिए दावा-आपत्ति लगा सकते हैं. इसके साथ ही एक लाख 13 हजार मतदाता ऐसे चिह्नित किए गए हैं, जिनका 2003 की मतदाता सूची से लिंक नहीं मिला. ये मतदाता भी नौ मैपिंग की श्रेणी में हैं. इनकी व्यक्तिगत सुनवाई की जाएगी." इसके लिए अनमैपिंग वाले मतदाताओं को 19 दिसंबर से नोटिस जारी किए जाएंगे. बाद में इनके दस्तावेजों का सत्यापन होगा. इसके बाद इनके नाम मतदाता सूची में शामिल कर लिए जाएंगे. सभी 85 वार्डों में होगी दावा-आपत्ति की सुनवाई भुवन गप्ता ने बताया "जिन मतदाताओं की मैपिंग नहीं हुई है. उनके लिए अलग-अलग वार्डों में कैंप लगाया जाएगा. सभी 85 वार्डों में बीएलओ बैठेंगे, जो दावे-आपत्तियों का निराकरण करेंगे. इसके साथ ही 85 अतिरिक्त निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी बनाने का प्रस्ताव आयोग को भेजा है. ये सभी 85 वार्डों में नोटिस की सुनवाई करेंगे."  भुवन गुप्ता ने बताया "प्रत्येक वार्ड में एक दिन में 50 लोगों के दावे-आपत्तियों की सुनवाई होगी. 35 हजार मतदाता ऐसे भी मिले हैं, जिनकी मृत्यु हो गई है. इनके नाम भी मतदाता सूची से हटेंगे." इस तरह नए मतदाता जुड़वा सकते हैं नाम जिला निर्वाचन अधिकारी कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया "23 जनवरी को मतदाता सूची का अंतिम ड्राफ्ट जारी होगा, इसके साथ ही दावे-आपत्ति का दौर भी शुरू होगा. इस दौरान 1 जनवरी 2026 की स्थित में जो नए मतदाता हैं, वो अपने नाम जुड़ाने के लिए या संशोधन के लिए भी आवेदन कर सकते हैं. हमारे बीएलओ इस दौरान बूथों में बैठेंगे. फिलहाल जिले में 4 लाख 38 हजार मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं." नागरिकता प्रस्तुत करने के लिए 50 दिन का समय उप निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने बताया "अनकलेक्टेबल पत्रक वाली सूची में आने वाले लोगों को कोई नोटिस नहीं भेजा जाएगा. प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद यदि ऐसे मतदाताओं का नाम सूची में नहीं मिलता है, तो उन्हें फार्म 6 के जरिए नए मतदाता के तौर पर खुद को पंजीकृत करना होगा." "इसके लिए आवेदकों को आवेदन के साथ नाम, पते और जन्मतिथि के प्रमाण के साथ नागरिकता का प्रमाण भी प्रस्तुत करना होगा. ऐसे मतदाताओं को नागरिकता का दस्तावेज पेश करने के 50 दिन का समय दिया जाएगा." एसआईआर के लिए दस्तवेजों की 5 श्रेणियां 1. एक जुलाई 1987 को भारत में जन्मे व्यक्ति को जन्मतिथि और जन्म स्थान की पुष्टि के लिए प्रमाण पत्र देना होगा. 2. एक जुलाई 1987 से दो दिसंबर 2004 तक जन्मे व्यक्ति को स्वयं के जन्मतिथि और जन्म स्थान के प्रमाण के साथ पिता की जन्मतिथि-जन्म स्थान को प्रमाणित करने वाले दस्तावेज देने होंगे. 3. दो दिसंबर 2004 के बाद जन्मे व्यक्ति को पिता के जन्म स्थान-जन्म तिथि प्रमाण पत्र के साथ माता की जन्मतिथि और जन्म स्थान का प्रमाण भी देना होगा. वहीं यदि माता-पिता में से कोई भारतीय नहीं हैं, तो उनका वैध पासपोर्ट-वीजा की एक प्रति देनी होगी. 4. देश के बाहर जन्मे व्यक्ति को भारतीय मिशन से जारी जन्म पंजीकरण का प्रमाणपत्र देना होगा. 5. यदि किसी को भारतीय नागरिकता पंजीकरण से मिली है, तो उन्हें नागरिकता पंजीकरण का प्रमाणपत्र लगाना होगा.

रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए सिंगल विंडो सुविधा, मध्यप्रदेश में नए पेंशन नियम 2026 से लागू

भोपाल मध्य प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी और पेंशन अब नहीं अटकेगी. वित्त विभाग इसके लिए कई नए प्रयोग करने जा रहा है. रिटायर्ड होने वाले कर्मचारियों के लिए नेक्स्ट जेन परियोजना शुरू की जा री है, इसमें कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए अलग-अलग मॉड्यूल तैयार किए जा रहे हैं. इसमें रिटायर्ड होने के बाद कर्मचारियों को पेंशन जैसी अन्य सुविधाओं के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे. वहीं, राज्य सरकार अगले साल से एक पेंशन नियम भी लागू करने जा रही है. वेतन से जीपीएफ तक सब ऑनलाइन उपमुख्यमंत्री और वित्त विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे जगदीश देवड़ा पिछले 2 साल की उपलब्धियों और आगामी कार्ययोजना को लेकर पत्रकारों से रू-ब-रू हुए. वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बताया कि "प्रदेश के कर्मचारियों को ध्यान में रखकर कई नवाचार किए हैं, ताकि उन्हें वेतन, पेंशन आदि के लिए परेशान न होना पड़े. राज्य सरकार ने कर्मचारियों के जीपीएफ के सभी डाटा और प्रोसेस को ऑनलाइन कर दिया है, ताकि रिटायरमेंट के बाद समय सीमा में उन्हें भुगतान मिल सके. चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की सुविधा के लिए विभागीय भविष्य निधि को भी पूरी तरह से ऑनलाइन किया जा रहा है, ताकि उन्हें अपने स्वत्वों का भुगतान बिना किसी परेशानी के हो सके. इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में भोपाल जिले में लागू किया गया है और जल्द ही इसे प्रदेश स्तर पर लागू किया जाएगा." रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए सिंगल विंडो वित्त मंत्री बताया कि वेतन निर्धारण की प्रक्रिया को भी ऑनलाइन किया गया है. इसमें 100 फीसदी ई पे निर्धारित किया गया है. इसकी वजह से 90 फीसदी से ज्यादा कर्मचारियों को हर माह की 1 तारीख को वेतन मिल जाता है. इसके अलावा क्रेन्द्रीयकृत पे-बिल जनरेट किए जाने की व्यवस्था शुरू की गई है. इसके माध्यम से प्रदेश के सभी 6 हजार डीडीओ को सेंट्रलाइज सिस्टम से जोड़ा गया है, कोई भी डीडीओ सभी श्रेणी के कर्मचारियों के पे-बिल जनरेट कर सकेगा. रिटायर्ड कर्मचारियों को सिंगल विंडो सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नेक्स्ट जेन परियोजना के तहत नया सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है. 123 करोड़ की लागत से तैयार हो रही इस परियोजना में कर्मचारियों के लिए अलग-अलग मॉड्यूल बनाए जा रहे हैं. इसमें एआई की मदद भी ली जाएगी. क्यू आर कोड से मिलेगी जानकारी पेंशनर्स के दावों और भुगतान की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए पेंशन प्रकरणों का डिजीटलीकरण किया जा रहा है. अब पेंशन भुगतान आदेश डिजिटल सिग्नेचर से जारी होंगे और इससे पेंशन आदेश खोने, फटने की समस्या खत्म हो जाएगी. पेंशन आदेश और बाकी सभी दस्तावेजों पर क्यूआर कोड होगा. इसे मोबाइल से स्कैन कर इसकी डिटेल पेंशनर्स कभी भी देख सकेंगे. इसे डिजी लॉकर से भी जोड़ा जाएगा. वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक रस्तोगी ने बताया कि "सरकार अगले साल से नए पेंशन नियम लागू करने जा रही है. अभी सरकारी कर्मचारियों को अपनी मर्जी से फंड मैनेजर का चयन करने और साल में एक बार बदलने का अधिकार दिया गया है. इसके अलावा इक्विटी में निवेश बढ़ाने के अधिकार दिए गए हैं.

MG कारें होंगी महंगी, JSW MG Motor India ने की सभी मॉडलों में मूल्य वृद्धि की घोषणा

मुंबई  साल 2025 खत्म होने की कगार पर है और वाहन निर्माता कंपनियां अपने उत्पादों की कीमतों में संशोधन करने वाली हैं. इसी क्रम में कार निर्माता कंपनी JSW MG Motor India ने अपने सभी मॉडलों की कीमतों में बढ़ोतरी करने की घोषणा की है. कंपनी ने बताया है कि वह जनवरी 2026 से अपनी कारों की कीमतों में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने जा रही है. MG Motor का कहना है कि यह कीमत बढ़ोतरी 1 जनवरी, 2026 से लागू होगी और यह बढ़ती इनपुट लागत और अन्य मैक्रोइकोनॉमिक कारणों से हुई है. उदाहरण के लिए, MG के सबसे ज़्यादा बिकने वाले मॉडल, MG Windsor EV की कीमत में लगभग 30,000-37,000 रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे इसकी एक्स-शोरूम कीमत 14.27 लाख रुपये से 18.76 लाख रुपये के बीच हो जाएगी. इसी तरह, MG Motor के सबसे किफायती ईवी मॉडल, MG Comet EV की कीमत में 10,000 रुपये से 20,000 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे इसकी एक्स-शोरूम कीमत 7.64 लाख रुपये से 10.19 लाख रुपये के बीच हो जाएगी. हाल ही में लॉन्च हुई MG Hector फेसलिफ्ट बता दें कि MG ने हाल ही में अपनी फेसलिफ़्टेड MG Hector को नए डिज़ाइन के साथ लॉन्च किया है, जिसमें नई फ्रंट ग्रिल, नए इंटीरियर कलर थीम, और नए अलॉय व्हील डिज़ाइन के साथ पेश किया है. इसके इंटीरियर की बात करें, तो इसमें 14-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम के साथ Apple CarPlay और Android Auto दिया गया है. इसके अलावा इसमें स्वाइप जेस्चर, 7-इंच डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले, पैनोरमिक सनरूफ, वायरलेस फोन चार्जर, ऑटो AC और वेंटिलेटेड और पावर्ड फ्रंट सीटें जैसे फीचर्स मिलते हैं. हेक्टर फेसलिफ्ट की कीमतें 11.99 लाख रुपये से शुरू होकर 18.99 लाख रुपये तक जाती हैं. हाल ही में अपडेटेड 7-सीटर MG Hector Plus की कीमत 17.29 लाख रुपये से 19.49 लाख रुपये के बीच आती है. हालांकि MG Hector के डीज़ल और 6-सीटर वेरिएंट की कीमतों की घोषणा साल 2026 में की जाएगी. MG की कीमतों में बढ़ोतरी लगातार चल रही मार्केट की स्थितियों को देखते हुए की गई है, जैसा कि दूसरे ब्रांड्स ने भी इसी तरह की घोषणाएं की हैं. इसी तरह, Mercedes-Benz और BYD जैसी कंपनियों ने भी करेंसी के दबाव और बढ़ते ऑपरेशनल खर्चों के कारण अपने-अपने पोर्टफोलियो में कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की है, जो जनवरी 2026 से लागू होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने दिया अहम निर्णय: शादी के आधार पर संपत्ति से बेदखल करने का पिता का कदम रद्द

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने संपत्ति के अधिकार को लेकर एक अहम फैसला दिया है. उसने टेस्टेटर (वसीयत करने वाले) की इच्छा को सर्वोपरि मानते हुए एक पिता की वसीयत को वैध ठहराया है, जिसमें उन्होंने अपनी बेटी शैला जोसेफ को समुदाय से बाहर के लड़के से शादी करने के कारण संपत्ति से वंचित कर दिया था. यह मामला लैंगिक समानता के कई ऐतिहासिक फैसलों के बावजूद वसीयत की स्वतंत्रता को अहमियत देता है. जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने केरल हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट के फैसलों को पलट दिया, जिन्होंने वसीयत को दरकिनार करते हुए एनएस श्रीधरन की संपत्ति को नौ बच्चों में बराबर बांटने का आदेश दिया था. रिपोर्ट के मुताबिक श्रीधरन के नौ बच्चे थे, लेकिन 1988 में बनाई गई उनकी रजिस्टर्ड वसीयत में शैला को छोड़कर बाकी आठ बच्चों को संपत्ति सौंप दी गई थी. वजह थी शैला का समुदाय से बाहर शादी करना. जजमेंट लिखते हुए जस्टिस चंद्रन ने कहा कि वसीयत स्पष्ट रूप से साबित हो चुकी है, इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता. हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट के फैसले रद्द किए जाते हैं. शैला जोसेफ का अपने पिता की संपत्ति पर कोई दावा नहीं है, क्योंकि वसीयत से यह संपत्ति अन्य भाई-बहनों को सौंप दी गई है. कोर्ट में शैला की ओर से सीनियर एडवोकेट पीबी कृष्णन ने तर्क दिया कि उनकी क्लाइंट को कम से कम 1/9 हिस्सा मिलना चाहिए, जो संपत्ति का नगण्य हिस्सा है. लेकिन बेंच ने स्पष्ट किया कि संपत्ति के बंटवारे में व्यक्ति की इच्छा के मामले में समानता का सवाल उठता ही नहीं. हम इक्विटी (न्यायसंगत बंटवारे) पर नहीं हैं. टेस्टेटर की इच्छा सर्वोपरि है. उसकी अंतिम वसीयत से विचलन या उसे निरस्त नहीं किया जा सकता. वसीयत लिखने वाली की इच्छा सर्वोपरि कोर्ट ने यह भी कहा कि वसीयत के कंटेंट पर सावधानी का नियम लागू नहीं होता, क्योंकि यह व्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता है कि वह अपनी संपत्ति कैसे बांटे. अगर वसीयत से सभी वारिसों को वंचित किया जाता, तभी कोर्ट सावधानी बरत सकता था. लेकिन यहां केवल एक बेटी को बाहर किया गया है और इसके लिए स्पष्ट वजह बताई गई है. बेंच ने टिप्पणी की कि वंचित करने की वजह बताई गई है, लेकिन उसकी स्वीकार्यता हमारे लिए सावधानी का नियम नहीं तय करती. हम टेस्टेटर की जगह खुद को नहीं रख सकते. हम अपनी राय थोप नहीं सकते; उनकी इच्छा उनकी अपनी वजहों से प्रेरित है. फैसले में सिविल अपीलों को मंजूर करते हुए शैला की पार्टिशन सूट को खारिज कर दिया गया. मामला केरल का है, जहां श्रीधरन की मौत के बाद 1990 में भाई-बहनों ने इंजेक्शन सूट दाखिल किया था और वसीयत की कॉपी पेश की थी. शैला ने उसमें हिस्सा नहीं लिया, जिसे कोर्ट ने बाद में उनके खिलाफ माना.

नेहरू स्टेडियम में करणी सेना का महा आंदोलन, 4 हजार वालंटियर रहेंगे मोर्चे पर

हरदा  मध्य प्रदेश के हरदा जिले के करणी सेना द्वारा आंदोलन की पूर्ण तैयारी हो चुकी है। आंदोलन के लिए जिला प्रशासन ने एक दिन की परमिशन नेहरू स्टेडियम ग्राउंड की दी है। करणी सेना द्वारा राजपूत छात्रावास में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आंदोलन की रूपरेखा एवं व्यवस्था के बारे में बताया है। करनी सेना ने कहा है कि  करणी सैनिक और  4000 वालिंटियर तैयार है। जो बाहर से आंदोलन में शमिल होने आएंगे, उनके रुकने , भोजन और ठहरने  सहित पार्किंग की व्यवस्था जगह-जगह की गई है। प्रशासन को हमारी मांगें माननी चाहिए- करणी सेना करणी सेना का कहना है कि 21 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन के माध्यम से पहले ही दिया चुका है। राज्य स्तर की जो मांगें है उन्हें कार्यक्रम स्थल पर संभागीय अधिकारी के माध्यम पूरा करना होगा। इसके साथ ही करणी सेना का कहना है कि  प्रशासन अगर कुछ और करने के लिए सोच रहा है तो हम उसके लिए तैयार है।  हम इस आंदोलन के माध्यम से प्रशासन को बताना चाहते हैं कि जो एक बार घटना हुई है वह कभी किसी के साथ दोहारी ना जाए। मांगों के  पूर्ण होते ही आंदोलन भी समाप्त हो जाएगा। आंदोलन को सर्व समाज का पूरा सहयोग मिल रहा-करणी सेना करणी सेना का कहना है कि उनक आंदोलन को सर्व समाज का पूरा सहयोग मिल रहा है। अभी एक दिन की अनुमति है और आगे भी प्रशासन से बात की जाएगी। सेना का कहना है कि वो जुलाई महीने से ही इस आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। इसलिए प्रशासन से हमारी मांगे मांग लेनी चाहिए। लिहाजा परमिशन मिलने के बाद करणी सेना ने नेहरू स्टेडियम में महा आंदोलन की तैयारी शुरु कर दी हैं और बकायदा कार्यक्रम स्थल का भूमि पूजन करके आंदोलन को सफल बनाने की शुरुआत कर दी है।  

20 दिसम्बर को भोपाल में आयोजित होगी शहरी विकास मंत्रियों की क्षेत्रीय बैठक

शहरी विकास मंत्रियों की क्षेत्रीय बैठक भोपाल में 20 दिसम्बर को 20 दिसम्बर को भोपाल में आयोजित होगी शहरी विकास मंत्रियों की क्षेत्रीय बैठक भोपाल में 20 दिसम्बर को शहरी विकास मंत्रियों की अहम क्षेत्रीय बैठक भोपाल शहरी विकास मंत्रियों उत्तरी एवं मध्य राज्यों की क्षेत्रीय बैठक केन्द्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MOHUA) के तत्वाधान में शनिवार  20 दिसंबर 2025 को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होने जा रही है। बैठक का मुख्य उ‌द्देश्य प्रमुख शहरी विकास परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच सहयोग को मजबूत करना है। यह मंच राज्यों को परियोजनावार प्रगति प्रस्तुत करने, कार्यान्वयन से जुड़ी चुनौतियों को साझा करने, सर्वोत्तम परंपराओं के आदान-प्रदान तथा मंत्रालय से नीतिगत एवं रणनीतिक मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर प्रदान करेगा। इस क्षेत्रीय बैठक में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केन्द्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। बैठक में नगरीय विकास एवं आवास मंत्रीश्री कैलाश विजयवर्गीय एवं अन्य चार राज्यों के छतीसगढ़, दिल्ली, राजस्थान एवं उत्तरप्रदेश के शहरी विकास मंत्री एवं राज्यमंत्री, केन्द्र सरकार एवं राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में शामिल होंगे। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण स्वच्छ सर्वेक्षण वर्ष 2025-26 के लिए टूलकिट का विमोचन होगा, जो स्वच्छता, स्थिरता तथा नागरिक केंद्रित शहरी शासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ करेगा। बैठक से राज्यवार एवं मिशनवार कार्यान्वयन चुनौतियों की पहचान कार्यक्रमों को मजबूत बनाने के लिये व्यावहारिक अनुशंसाएँ केंद्र एवं राज्यों के बीच बेहतर समन्वय तथा शहरी शासन एवं सेवा वितरण में सुधार के लिए ठोस रणनीतिक सुझाव भी प्राप्त होंगे।