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सोशल मीडिया पर मचा बवाल: क्या अरावली के खत्म होते ही भारत बढ़ेगा रेगिस्तान की ओर? तथ्य बनाम दावा

नई दिल्ली  अरावली को लेकर इस समय काफी बवाल मचा हुआ है, सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक लोग इसको बचाने की मुहीम चला रहे हैं। इसको लेकर मुहीम चलाने वाले लोगों का कहना है कि पर्वत बोल ही नहीं रहे, बल्कि रो रहे हैं और इंसान से गुहार लगा रहे हैं हमें बचा लो। खनन, अवैध निर्माण और अंधाधुंध विकास ने अरावली को गहरे जख्म दिए हैं। यही वजह है कि आज Save Aravalli, Save Future, अरावली नहीं तो पानी नहीं और रेगिस्तान रोको, अरावली बचाओ जैसे नारे सड़कों से सोशल मीडिया तक गूंज रहे हैं। ये सिर्फ स्लोगन नहीं, बल्कि उन करोड़ों लोगों और सैकड़ों जीव-जंतुओं की आवाज़ हैं, जिनका जीवन हवा, पानी और हरियाली के लिए अरावली पर निर्भर है।   अरावली पर्वतमाला चर्चा में क्यों है? ‘ग्रेट ग्रीन वॉल ऑफ अरावली’ के नाम से जानी जाने वाली यह पर्वतमाला दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में शामिल है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इसकी कानूनी व्याख्या को लेकर बहस छेड़ दी है। फैसले के अनुसार अब केवल 100 मीटर से अधिक ऊंची पहाड़ियों को ही अरावली के अंतर्गत माना जाएगा। इसका अर्थ यह है कि पहले जो छोटी पहाड़ियां और जंगल इस श्रेणी में आते थे, वे अब इससे बाहर हो सकते हैं। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जमीन का वर्गीकरण केवल ऊंचाई के आधार पर नहीं, बल्कि रिकॉर्ड, अधिसूचना और जमीनी स्थिति को देखकर तय किया जाएगा। अरावली को लेकर विवाद क्या है? विवाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर नहीं, बल्कि उसके संभावित उपयोग को लेकर है। अदालत का आदेश कानूनी स्पष्टता देता है, लेकिन इसके अमल की जिम्मेदारी अब राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन पर है। इस फैसले से जमीन की व्याख्या करने की ताकत राज्यों के हाथ में आ गई है। आशंका यह है कि जिन क्षेत्रों को पहले जंगल जैसा माना जाता था, उन्हें अब राजस्व भूमि या गैर-वन क्षेत्र घोषित किया जा सकता है। अब यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकारें रिकॉर्ड तय करने में कितनी पारदर्शिता और पर्यावरणीय सख्ती अपनाती हैं। अरावली कहां-कहां फैली है? अरावली पर्वतमाला पश्चिमी भारत की एक प्राचीन श्रृंखला है, जो गुजरात के कच्छ से शुरू होकर राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक फैली हुई है। दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व दिशा में इसकी लंबाई लगभग 800 किलोमीटर है। यह दो अरब वर्ष से भी अधिक पुरानी मानी जाती है और आज भी कई राज्यों के लिए जीवनरेखा बनी हुई है। क्या अरावली में वन्य जीव भी रहते हैं? अरावली जैव विविधता से भरपूर क्षेत्र है। यहां भेड़िया, बंगाल लोमड़ी, कैराकल, धारीदार लकड़बग्घा, सियार सहित कई दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियां पाई जाती हैं। ये पहाड़ियां न केवल इन जीवों का प्राकृतिक आवास हैं, बल्कि भूजल संरक्षण, वायु शुद्धिकरण और स्थानीय जलवायु संतुलन में भी अहम भूमिका निभाती हैं। दिल्ली-NCR के लिए अरावली क्यों जरूरी है? अरावली भूजल रिचार्ज की प्राकृतिक प्रणाली की तरह काम करती है। शोध के अनुसार, यह हर साल प्रति हेक्टेयर लगभग 20 लाख लीटर भूजल रिचार्ज करने में मदद करती है। इसके अलावा यह थार रेगिस्तान को दिल्ली की ओर बढ़ने से रोकने वाली प्राकृतिक दीवार है। यदि अरावली कमजोर होती है, तो दिल्ली-NCR में पानी की कमी बढ़ेगी, कुएं-तालाब सूखेंगे और वायु प्रदूषण व गर्मी का स्तर और बढ़ जाएगा। यह क्षेत्र का प्राकृतिक डस्ट बैरियर और कूलिंग सिस्टम भी है, जिसके बिना ‘अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट’ और गंभीर हो सकता है। विशेषज्ञों की राय Green Pencil Foundation के संस्थापक सैंडी खांडा के अनुसार, अगर अरावली को नुकसान पहुंचा तो दिल्ली-NCR का भूजल संकट बेहद गंभीर हो जाएगा। गुरुग्राम, फरीदाबाद और दक्षिण दिल्ली पहले से ही अत्यधिक दोहन झेल रहे हैं। अरावली के खत्म होने से यमुना और अन्य जल स्रोतों पर दबाव और बढ़ेगा। वहीं ‘सेव अरावली ट्रस्ट’ के पदाधिकारी जितेंद्र भड़ाना का कहना है कि नई परिभाषा से अरावली के बड़े हिस्से के नष्ट होने का खतरा बढ़ गया है। स्वच्छ हवा, जल संतुलन और पर्यावरण सुरक्षा के लिए इस फैसले पर पुनर्विचार जरूरी है। दिल्ली का कितना हिस्सा अरावली पर स्थित है? दिल्ली का लगभग 20 से 25 प्रतिशत क्षेत्र अरावली की चट्टानों पर बसा है। दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के महरौली, साकेत, वसंत कुंज और द्वारका के कुछ हिस्से इसी पर्वतमाला का हिस्सा हैं। NCR में गुरुग्राम, फरीदाबाद, मानेसर और दक्षिण सोनीपत के इलाके भी अरावली से जुड़े हैं। विरोध भी तेज नई परिभाषा को लेकर गुरुग्राम, राजस्थान और उदयपुर में विरोध देखने को मिला है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह बेहद प्राचीन पर्वत श्रृंखला है और इसमें किया गया कोई भी बदलाव भविष्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इसी को लेकर गुरुग्राम में मंत्री राव नरबीर सिंह के आवास पर भी प्रदर्शन हुआ।

PVNL CEO ने की CM हेमंत सोरेन से मुलाकात, राज्य के विकास मुद्दे रहे फोकस

रांची मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आज यानी रविवार को पतरातू विद्युत निगम लिमिटेड (PVNL) के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी (सीईओ) अशोक कुमार सहगल, ह्यूमन रिसोर्स प्रमुख जेड रहमान, वरीय प्रबंधक पंकज कुमार सिंह एवं डीजीएम जे. महापात्र ने शिष्टाचार मुलाकात की। इस अवसर पर सीईओ ने मुख्यमंत्री को बताया कि 5 नवंबर 2025 से पीवीएनएल के 800 मेगावाट की क्षमता वाली एक यूनिट से बिजली का व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है। उन्होंने इस यूनिट के चालू होने के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के द्वारा हर स्तर पर मिले सहयोग का परिणाम है कि इस यूनिट से बिजली का व्यवसायिक उत्पादन  तय समय पर शुरू हो सका है। इस यूनिट के चालू हो जाने से झारखंड अब बिजली के मामले में आत्मनिर्भर हो चुका है। ऊर्जा क्षेत्र सरकार की प्राथमिकता में है सीईओ ने मुख्यमंत्री को पतरातु विद्युत निगम लिमिटेड का भ्रमण करने के लिए भी आमंत्रित किया। वहीं, मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र सरकार की प्राथमिकता में है। इस दिशा में बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक और सुदृढ़ करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने पीवीवीएनएल से कहा कि वह युवाओं के कौशल विकास के लिए भी ठोस पहल करे।  

एसबीआई सर्कल वेलफेयर कमिटी का अंतर-सर्कल बैडमिंटन टूर्नामेंट भव्यता के साथ संपन्न, देशभर के खिलाड़ियों ने दिखाई खेल भावना

भोपाल भारतीय स्टेट बैंक सर्कल वेलफेयर कमिटी द्वारा आयोजित चार दिवसीय अंतर-सर्कल बैडमिंटन टूर्नामेंट का भव्य, अनुशासित एवं प्रेरणादायी समापन समारोह अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस प्रतिष्ठित खेल आयोजन में देशभर के विभिन्न सर्कलों से आए पुरुष एवं महिला खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट खेल कौशल, अनुशासन और खेल भावना का परिचय देते हुए प्रतियोगिता को यादगार बना दिया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि पोनमबलम मुरुगन, मुख्य महाप्रबंधक (मानव संसाधन), भारतीय स्टेट बैंक, मुंबई रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि खेल गतिविधियाँ केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि वे अनुशासन, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता और सकारात्मक प्रतिस्पर्धा को भी विकसित करती हैं, जो बैंकिंग जैसे सेवा क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने खिलाड़ियों के जोश, समर्पण और अनुशासन की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन संगठन में ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करते हैं। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रभाष कुमार सुबुद्धि, मुख्य महाप्रबंधक, भोपाल सर्कल (मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़) की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने सर्कल वेलफेयर कमिटी की सराहना करते हुए कहा कि खेल आयोजन अधिकारियों एवं कर्मचारियों के मानसिक-शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के साथ-साथ आपसी समन्वय और संगठनात्मक एकता को भी मजबूत बनाते हैं। समारोह में बैंक के वरिष्ठ प्रबंधन की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिनमें कुंदन ज्योति (महाप्रबंधक-1), ओंकारनाथ चौधरी (महाप्रबंधक-2), शुभकांता कानूनगो (महाप्रबंधक-सीएओ), सर्कल विकास अधिकारी मनीष मठपाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सर्कल वेलफेयर कमिटी के सचिव अमित शर्मा ने आयोजन की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करते हुए बताया कि चार दिनों तक चले इस टूर्नामेंट में उच्च स्तरीय प्रतिस्पर्धा देखने को मिली तथा सभी मुकाबले अत्यंत अनुशासित और खेल भावना से परिपूर्ण रहे। इस अवसर पर लेडीज़ क्लब की अध्यक्षा एवं उनकी टीम, अधिकारी संघ, यूनियन, सेवा संगठन तथा ओबीसी एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी की सक्रिय सहभागिता ने कार्यक्रम की गरिमा को और अधिक बढ़ाया। दर्शकों ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए पूरे आयोजन को उत्सव का स्वरूप प्रदान किया। फाइनल मुकाबलों के परिणाम महिला युगल फाइनल मुंबई मेट्रो बनाम चेन्नई विजेता: मुंबई मेट्रो रीना सिंह, सिमरन सिंघी महिला एकल फाइनल दिल्ली बनाम पटना विजेता: पटना सर्कल मनीषा रानी तिर्की पुरुष युगल फाइनल मुंबई मेट्रो बनाम चेन्नई विजेता: मुंबई मेट्रो दीप रंभिया, विराज कुवाले पुरुष एकल फाइनल बैंगलोर बनाम दिल्ली विजेता: बैंगलोर  निथिन एच. वी. समापन समारोह के दौरान विजेता, उपविजेता एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों और टीमों को अतिथियों द्वारा ट्रॉफी, पदक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों, खिलाड़ियों, निर्णायकों एवं सहयोगी संगठनों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। यह चार दिवसीय अंतर-सर्कल बैडमिंटन टूर्नामेंट भारतीय स्टेट बैंक परिवार की एकता, स्वास्थ्य, अनुशासन और सकारात्मक कार्य-संस्कृति का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा, जो आने वाले समय में ऐसे और आयोजनों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

विकलांग नहीं, दिव्यांगजन कहकर करें संबोधन : मंत्री राजवाड़े

रायपुर, महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा है कि दिव्यांगजन समाज की मुख्यधारा का अभिन्न अंग हैं और उनके प्रति संवेदनशील सोच व सम्मानजनक भाषा का उपयोग अत्यंत आवश्यक है। वे अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद (छत्तीसगढ़ प्रांत) के तत्वावधान में आशीर्वाद भवन, बैरन बाजार, रायपुर में आयोजित 16वें राज्य स्तरीय विवाह योग्य युवक–युवती परिचय सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। मंत्री राजवाड़े ने अपने संबोधन में कहा कि यह सम्मेलन केवल परिचय का मंच नहीं, बल्कि दिव्यांग युवक–युवतियों को गरिमापूर्ण वैवाहिक जीवन की ओर अग्रसर करने का सार्थक प्रयास है। उन्होंने जानकारी दी कि सम्मेलन में सहमति बनने वाले जोड़ों का सामूहिक विवाह 28 फरवरी 2026 एवं 01 मार्च 2026 को आयोजित किया जाएगा।     उन्होंने बताया कि सम्मेलन की एक विशेष उपलब्धि यह रही कि इसमें सामान्य युवक–युवतियाँ भी शामिल हुए, जो दिव्यांगजनों से विवाह के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे आए। यह सामाजिक समावेशन और समानता की दिशा में प्रेरक पहल है।     मंत्री राजवाड़े ने कार्यक्रम के दौरान एक महत्वपूर्ण सामाजिक अपील करते हुए कहा कि “विकलांग” के स्थान पर “दिव्यांगजन” शब्द का प्रयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मान और आत्मबल को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से “दिव्यांगजन” शब्द के प्रयोग का आग्रह किया है। शब्द हमारी सोच और संवेदना को दर्शाते हैं, इसलिए समाज को सम्मानजनक भाषा अपनानी चाहिए।     कार्यक्रम में विधायक माननीय पुरंदर मिश्रा, कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. विनय पाठक, चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. विनोद पाण्डेय, अग्रवाल समाज अध्यक्ष विजय अग्रवाल, कार्यक्रम संयोजक विरेंद्र पाण्डेय, राजेश अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य नागरिक, बड़ी संख्या में दिव्यांगजन एवं उनके परिजन उपस्थित रहे।     मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार दिव्यांगजनों के अधिकार, सम्मान और सामाजिक समावेशन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत नींव रखते हैं।

कृषि मंत्री कंषाना ने कहा- प्रदेश में दिया जा रहा है प्राकृतिक खेती को बढ़ावा

भोपाल प्रदेश में रासायनिक मुक्त एवं विष-रहित खाद उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक अभिनव पहल के अंतर्गत सागर स्थित पी.टी.सी. ग्राउंड में जैविक/प्राकृतिक हाट बाजार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना शामिल हुए। कृषि मंत्री श्री कंषाना ने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्राकृतिक एवं जैविक खेती किसानों के साथ-साथ आमजन के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसान भाइयों से अपील की कि वे रासायनिक खादों के स्थान पर प्राकृतिक खेती को अधिक से अधिक अपनाएं, जिससे भूमि की उर्वरता बनी रहे और सुरक्षित, पौष्टिक खाद्यान्न का उत्पादन हो सके। कृषि मंत्री श्री कंषाना ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हित में जैविक एवं प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने हेतु निरंतर प्रयासरत है और भविष्य में इस दिशा में और भी योजनाएं लागू की जाएंगी। जैविक/प्राकृतिक हाट बाजार के माध्यम से किसानों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध होगा और उपभोक्ताओं को शुद्ध एवं विष-रहित खाद्य सामग्री मिलेगी। कार्यक्रम में स्थानीय किसानों द्वारा उत्पादित जैविक अनाज, फल-सब्जियां एवं अन्य उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय किया गया। बड़ी संख्या में किसानों एवं नागरिकों की उपस्थिति रही।  

छत्तीसगढ़ सरकार पर्यटन के समग्र विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से राजस्थान के अंतर्राज्यीय अध्ययन भ्रमण से लौटने के उपरांत छत्तीसगढ़ के पत्रकारों के दल ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में  सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर पत्रकारों ने 15 से 20 दिसम्बर तक राजस्थान भ्रमण के दौरान वहां की विधायिका, प्रशासनिक कार्यप्रणाली तथा पर्यटन के क्षेत्र में किए गए नवाचारों के अनुभवों को साझा किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पत्रकारों के लिए अंतर्राज्यीय अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है, ताकि अन्य राज्यों के शासन-प्रशासन, पर्यटन एवं सांस्कृतिक विकास से जुड़े नवाचारी प्रयासों को पत्रकारों के दृष्टिकोण से समझा जा सके। उन्होंने कहा कि ऐसे अध्ययन भ्रमणों से प्राप्त अनुभवों के आधार पर छत्तीसगढ़ में भी नई और प्रभावी पहल शुरू की जा सकती हैं। मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से आग्रह किया कि वे इस यात्रा के अनुभवों को यात्रा-वृत्तांत के रूप में लिपिबद्ध करें, जिससे यह आम पर्यटकों के लिए एक उपयोगी मार्गदर्शिका का कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की लेखनी केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि पर्यटन को प्रोत्साहन देने का एक सशक्त साधन भी है। प्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार पर्यटन के समग्र विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य की दृष्टि से बस्तर धरती पर स्वर्ग के समान है, किंतु नक्सलवाद लंबे समय तक इसके विकास में एक बड़ी बाधा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प के अनुरूप मार्च 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करने की दिशा में राज्य सरकार पूरी दृढ़ता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पर्यटन को राज्य की नई उद्योग नीति में शामिल किया गया है। इसके तहत सुदूर वनांचलों में होम-स्टे को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि पर्यटक ग्रामीण परिवारों के साथ रहकर उनकी संस्कृति, खान-पान और जीवनशैली को नजदीक से अनुभव कर सकें। इससे पर्यटन को प्रोत्साहन मिलने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि  विश्व के 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों में छत्तीसगढ़ के धुड़मारास को शामिल किया जाना प्रदेश के लिए गौरव की बात है। मुख्यमंत्री ने पत्रकारों द्वारा दिए गए सुझावों का स्वागत करते हुए कहा कि इन पर गंभीरता से विचार कर उन्हें अमल में लाया जाएगा। इस अवसर पर जशपुर से विजय त्रिपाठी ने बताया कि राजस्थान भ्रमण के दौरान वहां की विधानसभा देखने का अवसर मिला, जहां आमजन को विधि निर्माण की प्रक्रिया और विधानसभा की कार्यप्रणाली से अवगत कराने के लिए एक भव्य संग्रहालय का निर्माण किया गया है। इस संग्रहालय के माध्यम से राज्य निर्माण से लेकर वर्तमान तक की विधायी यात्रा और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के योगदान को समझने का अवसर मिलता है। कोरबा से विजय खेत्रपाल ने कहा कि इस अध्ययन भ्रमण के माध्यम से यह समझने का अवसर मिला कि राजस्थान में सैकड़ों वर्ष पुराने किलों और महलों को आधुनिक जनसुविधाओं से जोड़कर पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित किया गया है। इसके साथ ही रेगिस्तानी क्षेत्रों में जीप सफारी, ऊंट सवारी, पैरा-सेलिंग, डेजर्ट कैंप जैसी गतिविधियों के माध्यम से पर्यटन को आकर्षक रूप दिया गया है, जो छत्तीसगढ़ के लिए एक प्रभावी केस स्टडी हो सकती है। जगदलपुर के अर्जुन झा ने जयपुर स्थित चोकरधानी के अनुभव साझा करते हुए कहा कि वहां ग्रामीण जीवन, लोकसंस्कृति और खान-पान को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि इसी प्रकार बस्तर पंडुम के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को पर्यटकों के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है। टिंकेश्वर तिवारी ने भी राजस्थानी खान-पान की तर्ज पर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजनों को पर्यटन स्थलों पर प्रमुखता से बढ़ावा देने पर जोर दिया। स्टेट न्यूज़ सर्विस के युवा पत्रकार रजत अवस्थी ने राजस्थानी टोपी साफा से मुख्यमंत्री साय का सम्मान करते हुए पत्रकार भ्रमण योजना को प्रारम्भ करने के लिए धन्यवाद दिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी आलोक सिंह, जनसंपर्क विभाग के अपर संचालक संजीव तिवारी, संयुक्त संचालक जितेंद्र नागेश सहित पत्रकारगण एवं अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।  

सोशल मीडिया की सनक: असलहों के साथ हर्ष फायरिंग, युवक-युवती की रीलबाजी पर चलेगा पुलिस का डंडा

चंदौली पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के अलीनगर थाना क्षेत्र से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में एक युवक और युवती घर के आंगन में असलहों का प्रदर्शन करते हुए बेखौफ हर्ष फायरिंग करते दिख रहे हैं. इसे भी पढ़ें- सहारनपुर में एक लाख का इनामी बदमाश सिराज ढेर, खुद को घिरता देख पुलिस पर की थी फायरिंग, जवाबी कार्रवाई में लगी गोली बताया जा रहा है कि वीडियो में दिख रहा युवक एक स्थानीय जनप्रतिनिधि का साथी है, जबकि युवती एक सिंगर है. यह घटना घर के आंगन में हुई, जहां दोनों ने खुलेआम असलहों का प्रदर्शन किया. इस दौरान युवक और युवती फायरिंग करते नजर आए. जिसका वीडियो वहां मौजूद किसी अन्य महिला ने रिकार्ड कर लिया. वहीं इस मामले में सीओ ने बताया कि वायरल वीडियो की जांच की जा रही है. जांच पूरी होने के बाद उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी. वीडियो सामने आने के बाद सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या कानून का डर खत्म हो गया है, जो बेखौफ होकर हर्ष फायरिंग की जा रही है.

इंडिया टूर के लिए लियोनल मेसी ने मांगे थे चौंकाने वाले करोड़ों, अमाउंट का हुआ खुलासा

कोलकाता  पिछले दिनों फुटबॉल स्टार लियोनल मेसी भारत के दौरे पर थे, जहां उन्होंने कोलकाता, हैदराबाद समेत कई शहरों में इवेंट्स में हिस्सा लिया। इस दौरान, कोलकाता में हालात खराब हो गए और स्टेडियम में फैंस का काफी गुस्सा देखने को मिला। पूरे इंडिया टूर के लिए मेसी को बड़ी रकम दी गई थी। इवेंट के ऑर्गनाइजर और पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए सताद्रू दत्ता ने बताया है कि मेसी पर कितना खर्च किया गया और वो पैसे कहां-कहां से आए।   मीडिया अनुसार, दत्ता ने एसआईटी को बताया, "लियोनेल मेसी को टूर के लिए 89 करोड़ रुपये दिए गए, जबकि 11 करोड़ रुपये टैक्स के तौर पर भारत सरकार को दिए गए, जिससे कुल खर्च 100 करोड़ रुपये हो गया।'' सूत्रों ने बताया कि इस रकम का 30 परसेंट स्पॉन्सर से मिला, जबकि बाकी 30 परसेंट टिकटों की बिक्री से आया। एसआईटी के अधिकारियों को दत्ता के फ्रीज किए गए बैंक खातों में 20 करोड़ रुपये से ज़्यादा की रकम मिली। एसआईटी के अधिकारी ने कहा कि शुक्रवार को दत्ता के घर पर छापे के बाद कई डॉक्यूमेंट्स जब्त किए। अधिकारी ने कहा, "दत्ता ने दावा किया कि उनके बैंक अकाउंट में जो रकम है, वह कोलकाता और हैदराबाद में मेसी इवेंट के टिकट बेचने और स्पॉन्सर से मिली है। हम उनके दावों की जांच कर रहे हैं।" कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में इवेंट देखने के लिए हजारों दर्शकों ने महंगी टिकटें खरीदी थीं, लेकिन कार्यक्रम में तब अफरा-तफरी मच गई जब बड़ी संख्या में लोग मैदान पर मेसी के चारों ओर जमा हो गए, जिससे वह गैलरी से मुश्किल से दिखाई दे रहे थे और फैंस में गुस्सा भड़क गया, जिनमें से कुछ ने बाद में स्टेडियम के कुछ हिस्सों में तोड़फोड़ की। पश्चिम बंगाल सरकार ने सॉल्ट लेक स्टेडियम में अर्जेंटीना के फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी के इवेंट में हुई तोड़फोड़ की जांच के लिए सीनियर आईपीएस अधिकारियों पीयूष पांडे, जावेद शमीम, सुप्रतिम सरकार और मुरलीधर की एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई थी। अधिकारी ने बताया कि एसआईटी इस घटना में सुरक्षा में चूक, एक्सेस नियमों के उल्लंघन और आयोजकों और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। 13 दिसंबर को लियोनेल मेसी इवेंट के गिरफ्तार मुख्य आयोजक सताद्रू दत्ता ने जांचकर्ताओं को बताया है कि सॉल्ट लेक स्टेडियम में अपनी मौजूदगी के दौरान फुटबॉल आइकन को "छुआ या गले लगाया जाना पसंद नहीं आया" और वह तय समय से पहले ही वहां से चले गए, SIT के एक सूत्र ने शनिवार को यह जानकारी दी। स्पेशियल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) के अधिकारियों द्वारा लंबी पूछताछ के दौरान, दत्ता ने कहा कि मेसी को पीठ पर छुआ जाना या गले लगाया जाना पसंद नहीं आया और इस चिंता के बारे में फुटबॉलर की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार विदेशी सुरक्षा अधिकारियों ने पहले ही बता दिया था। सूत्र ने बताया कि दत्ता ने शुक्रवार को पूछताछ के दौरान जांचकर्ताओं से कहा, "भीड़ को रोकने के लिए बार-बार पब्लिक अनाउंसमेंट करने के बावजूद कोई असर नहीं हुआ। जिस तरह से मेसी को घेरा गया और गले लगाया गया, वह वर्ल्ड कप जीतने वाले फुटबॉलर के लिए बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं था।"  

रेलवे में फिर हुआ कछुआ तस्करी का मामला, आरोपी अब भी फरार

गयाजी पूर्व मध्य रेल के डी.डी.यू. मंडल अंतर्गत रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ) पोस्ट गया ने ऑपरेशन विलेप के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 48 अदद जीवित कछुओं को बरामद किया है। यह कार्रवाई गाड़ी संख्या 13010 डाउन (दून एक्सप्रेस) के स्लीपर कोच एस-7 की चेकिंग के दौरान की गई। बरामद सभी कछुओं को बाद में वन विभाग को सुपुर्द कर दिया गया है। आरपीएफ पोस्ट प्रभारी निरीक्षक बनारसी यादव ने बताया कि चेकिंग के दौरान स्लीपर कोच से जीवित कछुए बरामद किए गए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 24 लाख रुपये आंकी गई है। उन्होंने बताया कि इस मामले में फिलहाल किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। बार-बार केवल कछुओं की बरामदगी होना और तस्करों का हाथ न लगना कई सवाल खड़े करता है। आखिर तस्कर क्यों नहीं पकड़े जा रहे हैं, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। जबकि कछुए स्लीपर कोच से ही बरामद किए गए हैं। इससे पहले भी स्लीपर कोच से करीब 51 लाख रुपये मूल्य के कछुए बरामद किए गए थे, लेकिन उस मामले में भी तस्करों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई थी। इससे पूर्व नेताजी एक्सप्रेस से भी कछुओं की बरामदगी हुई थी, लेकिन उस मामले में भी किसी को गिरफ्तार नहीं किया जा सका। लगातार स्लीपर कोच से कछुओं की तस्करी के मामलों को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि यह किसी शातिर और आदतन गिरोह का काम हो सकता है। जिस तरह से स्लीपर कोच से बार-बार कछुए पकड़े जा रहे हैं, उससे यह स्वाभाविक रूप से कहा जा सकता है कि तस्कर स्वयं कछुओं की निगरानी करते हुए ट्रेन से सफर कर रहा होगा। चूंकि स्लीपर कोच में बिना टिकट यात्रा संभव नहीं है, ऐसे में यह भी माना जा रहा है कि तस्कर ट्रेन के कोच में ही मौजूद रहते होंगे। इस पूरी कार्रवाई में आरपीएफ, आंतरिक आसूचना शाखा और रेलवे पुलिस के कई अधिकारी और जवान शामिल रहे। इनमें बनारसी यादव, निरीक्षक, आरपीएफ गया; चंदन कुमार, निरीक्षक, आंतरिक आसूचना शाखा, गया; पवन कुमार, सहायक उप निरीक्षक, आरपीएफ गया; राकेश कुमार सिंह, आरक्षी, आरपीएफ गया; अमित कुमार, आरक्षी, आरपीएफ गया; अनील प्रसाद, आरक्षी, आरपीएफ गया; विपिन कुमार, आरक्षी, आंतरिक आसूचना शाखा, गया; महेश ठाकुर, प्रधान आरक्षी, आंतरिक आसूचना शाखा, गया; मुकेश कुमार, उप निरीक्षक, आंतरिक आसूचना शाखा, गया; राजनीतिक प्रसाद, उप निरीक्षक, रेलवे पुलिस, गया तथा मनोज कुमार, प्रधान सहायक निरीक्षक, रेलवे पुलिस, गया शामिल थे। आरपीएफ के अनुसार बरामद 48 जीवित कछुओं की कुल अनुमानित कीमत 24 लाख रुपये (₹24,00,000) है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और तस्करों की पहचान व गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।  

कांग्रेस का धरना: मनरेगा नियमों में संशोधन को लेकर केंद्र पर निशाना

महासमुंद मनरेगा से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाने और नियमों में संशोधन किए जाने के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा नेहरू चौक पर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कांग्रेसियों का आरोप है कि मनरेगा के तहत छत्तीसगढ़ में एक हजार करोड़ रुपये के कार्य होते थे, जिससे सैकड़ों मजदूरों को रोजगार मिलता था। लेकिन केंद्र सरकार ने नियमों में संशोधन करते हुए राज्य सरकार पर 40 प्रतिशत अंशदान देने का नियम बनाया है। जबकि कोई भी राज्य सरकार 40 प्रतिशत अंशदान देने की स्थिति में नहीं है। इससे मजदूरों को रोजगार मिलना बंद हो जाएगा। कांग्रेस जिलाध्यक्ष का कहना है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाकर नियमों में बदलाव कर दिया गया है। केंद्र की मोदी सरकार उद्योगपतियों के लिए काम कर रही है।