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पटना सिटी में ट्रैफिक की तैयारी, प्रकाश उत्सव के लिए विशेष रूट डायवर्जन

पटना आगामी 25 दिसंबर से 27 दिसंबर तक पटना सिटी में आयोजित होने वाले प्रकाश उत्सव पर्व को लेकर जिला और यातायात प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। इसी क्रम में यातायात प्रशासन ने विस्तृत रूट मैप जारी करते हुए वाहनों के आवागमन पर कई तरह की पाबंदियां लागू कर दी हैं। छोटी-बड़ी गाड़ियों से लेकर बाजार समिति में आने वाली फल मंडी की गाड़ियों तक पर यातायात प्रशासन का शिकंजा रहेगा। बिहार के अलावा अन्य राज्यों से आने वाले सिख श्रद्धालुओं सहित सभी श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पटना सिटी में तीन स्थानों पर पार्किंग स्थल भी चिन्हित किए गए हैं। पटना यातायात प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार 25 दिसंबर से 27 दिसंबर तक सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज का 359वां जन्मोत्सव प्रकाश उत्सव पर्व के रूप में श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर देश-विदेश से लाखों की संख्या में सिख श्रद्धालु तख्त श्री हरमंदिर साहिब, पटना साहिब पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण चार दिनों तक पूरे इलाके में यातायात व्यवस्था प्रभावित रहती है, जिसे सुचारु बनाए रखने के लिए प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। इसी को देखते हुए जिला प्रशासन ने पहले से ही वाहनों के संचालन के लिए विशेष रूट मैप तैयार किया है। यातायात प्रशासन के अनुसार 24 दिसंबर की मध्यरात्रि से 28 दिसंबर की रात 12 बजे तक भारी वाहनों, खासकर भवन निर्माण सामग्री जैसे सीमेंट, बालू और गिट्टी लदे वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। दीदारगंज की ओर से कोई भी वाहन अशोक राजपथ में पश्चिम दिशा की ओर नहीं जाएगा। ऐसे सभी वाहनों का परिचालन न्यू बाइपास के माध्यम से किया जाएगा। बाजार समिति में आवश्यक सामग्री लेकर आने वाले मालवाहक वाहनों को केवल रात्रि 2 बजे से 4 बजे तक ही माल की डिलीवरी की अनुमति होगी। इसके अलावा 25 दिसंबर की सुबह 4 बजे से 27 दिसंबर की सुबह 6 बजे तक अशोक राजपथ में गायघाट से पूर्व दरवाजा तक ऑटो और अन्य व्यावसायिक वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद रहेगा। इन वाहनों को गायघाट से डंका इमली, नवाब बहादुर रोड, सुदर्शन पथ, तुलसी मंडी, अगमकुआं आरओबी होते हुए पटना साहिब तक आवागमन करना होगा। मुख्य कार्यक्रम के दौरान 25 दिसंबर से 28 दिसंबर की सुबह 6 बजे तक पश्चिम दरवाजा से पूर्व दरवाजा तक सभी प्रकार के वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद रहेगा। वहीं, रूट मैप के अनुसार 26 दिसंबर की सुबह 4 बजे से मध्यरात्रि तक अशोक राजपथ में गायघाट से दीदारगंज तक सभी प्रकार के वाहनों के आवागमन पर रोक रहेगी। इमरजेंसी सेवाओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। पीएमसीएच जाने के लिए आकस्मिक स्थिति में कंगन घाट से दाहिने जेपी सेतु पथ होते हुए पहुंचा जा सकेगा, जबकि एनएमसीएच जाने के लिए गायघाट से बाएं डंका इमली मार्ग का उपयोग किया जाएगा। प्रकाश उत्सव पर्व के दौरान वाहनों की पार्किंग के लिए बाजार समिति, दीदारगंज, मंगल तालाब चौक थाना क्षेत्र और कंगन घाट चौक थाना के पास पार्किंग स्थल निर्धारित किए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे जारी रूट मैप का पालन करें और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसमें सहयोग करें।  

अगले 7 दिन में सर्दी से संभलें! बिहार के इन जिलों में कोल्ड डे अलर्ट

पटना बिहार में सर्द पछुआ हवाओं ने ठंड को और तीखा कर दिया है और मौसम के इस बदले मिजाज के बीच इस मौसम में पहली बार शीत दिवस की स्थिति  बनी है, जिसे लेकर मौसम विज्ञान केंद्र ने यलो अलर्ट जारी किया है। राजधानी पटना समेत मुजफ्फरपुर, पूर्णिया और राज्य के कई जिलों में लगातार चौथे दिन रविवार को भी धूप नहीं निकल पाई है। विभाग का कहना है कि अगले सात दिनों तक प्रदेश में मौसम शुष्क बना रहेगा। इन जिलों में अलर्ट जारी मौसम विभाग (IMD)  के अनुसार, शीत दिवस के दौरान दिन और रात के तापमान में अंतर काफी कम हो जाता है। इस समय न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस या उससे नीचे चला गया है, जबकि अधिकतम तापमान सामान्य से करीब पांच डिग्री तक नीचे दर्ज किया जा रहा है। ठंडी हवाओं और धूप की कमी के कारण लोगों को दिन में भी कड़ाके की ठंड का एहसास हो रहा है। रविवार को गोपालगंज, सिवान, सारण, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, शेखपुरा, नालंदा, जहानाबाद, नवादा, औरंगाबाद, अरवल, रोहतास, भोजपुर, बक्सर, भभुआ, पटना और गया में शीत दिवस का येलो अलर्ट जारी किया गया है। इसके साथ ही मौसम विभाग ने घने कोहरे को लेकर भी चेतावनी दी है। पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, पटना, जहानाबाद, गया जी, नालंदा, नवादा और शेखपुरा में ऑरेंज अलर्ट (IMD Alert) जारी किया गया है। अगले 7 दिनों तक शुष्क बना रहेगा मौसम विभाग का कहना है कि घने कोहरे के कारण द्दश्यता में भारी कमी आ सकती है, जिससे सड़क और हवाई यातायात प्रभावित होने की आशंका है। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, 25 दिसंबर तक मौसम में खास बदलाव की संभावना नहीं है। पटना में दिन का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे रह सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 10 डिग्री तक गिरने के आसार हैं। अगले सात दिनों तक प्रदेश में मौसम शुष्क  बना रहेगा। आगे के पूर्वानुमान के अनुसार, 21 दिसंबर को पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी और मधुबनी में घने कोहरे की संभावना है। 22 दिसंबर को पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सिवान और सारण के एक- दो स्थानों पर घना कोहरा छाया रह सकता है। इसके बाद भी अगले चार से पांच दिनों तक राज्य के कई हिस्सों में मध्यम से घना कोहरा बने रहने की आशंका है। तापमान को लेकर राहत की फिलहाल कोई उम्मीद नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिनों में अधिकतम और अगले पांच दिनों में न्यूनतम तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है।

छुट्टियों का मौका: झारखंड के स्कूल 24, 25 और 26 दिसंबर को बंद

रांची  क्रिसमस 2025 इस बार गुरुवार को पड़ रहा है। इस दिन लगभग पूरे देश के सभी स्कूलों में छुट्टी रहती है। वहीं, बात करें झारखंड की तो हर साल की तरह इस बार भी यहां के सभी स्कूलों में 25 दिसंबर यानी क्रिसमस पर छुट्टी रहने वाली है। 24 या 26 दिसंबर को भी अवकाश सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक राज्य के स्कूलों में क्रिसमस की छुट्टी के बाद सर्दियों की छुट्टियां पड़ जाएगी जिससे बच्चों में खुशी की लहर है। कई स्कूलों में 24 या 26 दिसंबर को भी अवकाश दिया जा सकता है। क्रिसमस के मौके पर मिशनरी और CBSE/ICSE स्कूलों में छुट्टी का दायरा थोड़ा ज्यादा हो सकता है। दिसंबर के अंत में झारखंड में तापमान काफी गिर जाता है, इसलिए Winter Break दिया जाता है। बच्चों में खुशी की लहर कुछ जिलों में ठंड अधिक होने पर छुट्टियां जनवरी के पहले सप्ताह तक बढ़ सकती हैं। विंटर ब्रेक का फैसला जिला प्रशासन भी मौसम को देखते हुए करता है। इस दौरान बच्चों को कुछ दिन के लिए पढ़ाई से राहत मिल जाती है।  

राष्ट्रपति ने दी मंजूरी: विकसित भारत-जी राम कानून से 125 दिन काम की गारंटी

नई दिल्ली राष्ट्रपति ने विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम दी विधेयक, 2025 को अपनी मंजूरी दे दी है। इस स्वीकृति के साथ यह विधेयक अब कानून बन गया है। इस कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को मिलने वाली वैधानिक मजदूरी रोजगार की गारंटी को बढ़ाकर अब एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 125 दिन कर दिया गया है। सरकार इसे ग्रामीण जीवन को मजबूत आधार देने वाला ऐतिहासिक कदम बता रही है। सरकार का कहना है कि वीबी-जी राम जी कानून लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की कानूनी गारंटी पहले से ज्यादा मजबूत हो जाएगी। बता दें, इस बिल पर देत रात तक संसद में चर्चा चली थी। इस मामले में विपक्ष का कहना था कि सरकार जानबूझकर मनरेगा का नाम बदल रही है, मनरेगा में महात्मा गांधी का भी नाम आता था, इसीलिए भाजपा इस नाम को हटाने के लिए ये बिल लाई। वहीं, सरकार का कहना था कि पहले की योजना में लोगों को 100 दिन का काम दिया जाता था। लेकिन अब इस कानून के तहत अब कम से कम 125 दिन काम देना आनिवार्य है। इस बहस के दौरान ही कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने भाजपा पर जमकर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि जब भी कांग्रेस सत्ता में आएगी, तो वो इसका फिर नाम बदलेंगे। इन सब हंगामों के बीच इस बिल को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया था। हालांकि संसद में विपक्ष ने इस बिल का पुरजोर विरोध किया था। इतना ही नहीं, इसके बाद विपक्ष ने संविधान सदन के बाहर पूरी रात धरना भी दिया था। इस कानून के मुताबिक अब पात्र ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिन तक मजदूरी आधारित काम उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी होगी। इसका सीधा उद्देश्य गांवों में रहने वाले श्रमिकों, किसानों और भूमिहीन परिवारों की आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक सुरक्षा देना है। सरकार का कहना है कि इससे गांवों में गरीबी कम होगी और लोगों को अपने ही क्षेत्र में काम मिलेगा। सशक्तिकरण और समावेशी विकास पर जोर सरकार का कहना है कि नए कानून का मकसद केवल रोजगार देना नहीं है, बल्कि ग्रामीण समाज का समग्र सशक्तिकरण करना भी है। वीबी-जी राम जी के तहत समावेशी विकास को प्राथमिकता दी गई है, ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचे। सरकार का दावा है कि यह कानून महिलाओं, कमजोर वर्गों और जरूरतमंद परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती मिलेगी। सरकार चाहती है कि ग्रामीण इलाकों में चल रही योजनाएं एक-दूसरे से जुड़कर ज्यादा प्रभावी परिणाम दें। सड़कों, जल संरक्षण, सिंचाई, आवास और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कामों को रोजगार से जोड़कर गांवों की तस्वीर बदलने की योजना है। इससे विकास कार्यों में पारदर्शिता और गति दोनों बढ़ेंगी। वीबी-जी राम जी कानून में संतृप्ति आधारित डिलीवरी को खास महत्व दिया गया है। इसका मतलब यह है कि कोई भी पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित न रहे। सरकार का कहना है कि अंतिम व्यक्ति तक रोजगार और आजीविका का लाभ पहुंचाना इस कानून का मूल उद्देश्य है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में असमानता कम होगी और विकास का लाभ सभी तक पहुंचेगा। सरकार का मानना है कि यह कानून समृद्ध, मजबूत और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की नींव को और पुख्ता करेगा। रोजगार बढ़ने से गांवों में आय के साधन मजबूत होंगे और शहरों की ओर पलायन पर भी रोक लगेगी। वीबी-जी राम जी को ग्रामीण भारत के भविष्य के लिए निर्णायक कदम माना जा रहा है, जो लंबे समय तक देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा। मनरेगा से कितना अलग होगा वीबी-जी राम जी? केंद्र सरकार का कहना है कि नए नियमों से मनरेगा की ढाचांगत कमियों को दूर किया गया है। सबसे पहले तो योजना के तहत रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 दिन करने का दावा किया गया है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में किए जाने वाले सभी कार्यों को विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक में शामिल किया जाएगा। कानून में कहा गया है कि इससे ग्रामीण स्तर पर सार्वजनिक कार्यों के लिए एक मजबूत और एकीकृत राष्ट्रीय फ्रेमवर्क तैयार होगा। इसी के आधार पर गांवों में आगे के कामों को लेकर तैयारियां होंगी। कानून में दी गई जानकारी के मुताबिक, इस तरह गांवों के लिए एकीकृत ढांचा तैयार करने से देशभर में उत्पादक, टिकाऊ, सुदृढ़ और बदलाव में सक्षम ग्रामीण परिसंपत्तियों (एसेट्स) का निर्माण सुनिश्चित होगा। केंद्र और राज्य 2047 में विकसित भारत के लक्ष्य के तहत इन परिसंपत्तियों को आगे बढ़ाने की योजनाएं भी साझा तौर पर तैयार करेंगी। यानी एक राष्ट्रीय नीति के तहत काम के बिखराव को समेटा जाएगा और तय दिशा में इसे आगे बढ़ाया जाएगा। किसानों-मजदूरों के लिए कानून में क्या? चूंकि राज्य सरकारें तय कर सकती हैं कि किस अवधि में बुवाई और कटाई का ध्यान रखते हुए वीबी-जी राम जी के तहत 60 दिन के लिए काम रोकना है, ऐसे में किसानों को अपने खेतों पर काम करने के लिए मजदूरों की कमी नहीं पड़ेगी। खासकर पीक सीजन के दौरान। इससे मजदूरों को भी मनरेगा के काम से अतिरिक्त अपने लिए बाकी स्रोतों से वेतन जुटाने में मदद मिलेगी। इतना ही नहीं चूंकि किसानों के लिए मजदूर सही स्तर पर उपलब्ध रहेंगे, ऐसे में उन्हें अतिरिक्त वेतन पर मजदूरों को नहीं रखना होगा। कई बार किसानों पर पड़ने वाले इस अतिरिक्त बोझ का असर फसलों की कीमत पर पड़ता है, क्योंकि ज्यादा खर्च की वजह से उन्हें लाभ लेने के लिए उन्हें फसलों के दाम बढ़ाने पड़ते हैं। इसके अतिरिक्त मजदूरों के लिए काम के दिन बढ़ाकर 100 से 125 किए गए हैं। यानी उन्हें आर्थिक तौर पर भी ज्यादा रकम हासिल करने में मदद मिलेगी।

मेपकास्ट द्वारा प्रदेश के 170 से अधिक संस्थानों में मनाया जाएगा राष्ट्रीय गणित दिवस

प्रदेश की वैज्ञानिक पहचान होगी अधिक सशक्त भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि उज्जैन जिले का ऐतिहासिक डोंगला पुनः भारतीय ज्ञान परंपरा, खगोल विज्ञान एवं गणितीय अनुसंधान के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।डोंगला प्राचीन काल से ही समय-गणना, सूर्य गति, पंचांग निर्माण और गणना का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।यहाँ से काल-गणना, ऋतु परिवर्तन तथा खगोलीय घटनाओं का सटीक अध्ययन किया जाता रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार इस ऐतिहासिक एवं वैज्ञानिक विरासत को पुनर्जीवित करने की दिशा में सतत प्रयास कर रही है।डोंगला को गणना, खगोल और वैज्ञानिक चेतना के केंद्र के रूप में विकसित करने का यह प्रयास प्रदेश की वैज्ञानिक पहचान को और अधिक सशक्त बनाएगा। मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा राष्ट्रीय गणित दिवस के अवसर पर प्रदेशभर में गणित के महत्व को रेखांकित करने के लिए विविध जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।इसका मुख्य कार्यक्रम उज्जैन जिले के डोंगला में सोमवार 22 दिसम्बर को होगा। इसमें ‘’भारत की वैदिक गणित परंपरा” विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। कार्यशाला में प्रदेश एवं देश के प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञ, शोधार्थी, शिक्षाविद् एवं शिक्षक शामिल होंगे।इसमें वैदिक गणित की वैज्ञानिकता, आधुनिक गणित से उसका संबंध तथा शिक्षा में इसके अनुप्रयोग पर गहन विमर्श किया जाएगा।कार्यशाला के दौरान सहभागी सूर्य के उत्तरायण होने के खगोलीय क्षण के साक्षी भी बनेंगे, जो भारतीय ज्योतिष, गणित और खगोल विज्ञान की समृद्ध परंपरा से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ने का एक दुर्लभ एवं प्रेरक अनुभव प्रदान करेगा। मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा प्रदेश के लगभग 38 जिलों में 170 से अधिक विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, वैज्ञानिक संस्थाओं, स्वैच्छिक संगठनों एवं विद्यालयों में गणित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।इन कार्यक्रमों के अंतर्गत व्याख्यान, प्रतियोगिताएं, संवाद सत्र एवं प्रदर्शनियां आयोजित होंगी। विद्यार्थियों और आमजन तक गणित की उपयोगिता, तार्किक सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पहुंचाने में स्वैच्छिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय गणित दिवस 22 दिसम्बर को महान भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य युवाओं में गणित के प्रति रुचि बढ़ाना, तार्किक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना तथा यह संदेश देना है कि गणित देश के वैज्ञानिक, तकनीकी और आर्थिक विकास की सशक्त आधारशिला है।  

6720 ग्राम पंचायतों में किया जा चुका किसान पाठशाला का आयोजन

किसान पाठशाला 10 दिन में 4.37 लाख पुरुष व 2.61 लाख महिला किसान हुईं लाभान्वित  लखनऊ योगी सरकार के निर्देश पर किसानों को आधुनिक खेती व खेती में नवाचार के लिए नियमित रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है। कृषि विभाग के तत्वावधान में इस वर्ष रबी सीजन में भी किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 12 दिसंबर को बाराबंकी में पद्मश्री किसान रामसरन वर्मा के गांव दौलतपुर से किसान पाठशाला 8.0 रबीः 2025-26 का शुभारंभ किया था। 10 दिन में 6.98 लाख किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। यह पाठशाला 29 दिसंबर तक चलेगी। 10 दिन में 4.37 लाख पुरुष व 2.61 लाख महिला किसानों को दिया गया प्रशिक्षण  कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि इस कार्यक्रम का आयोजन प्रदेश के 21 हजार ग्राम पंचायतों में कराए जाने के लिए जनपदीय व मंडलीय कार्यालयों को निर्देश दिया गया था। इस क्रम में 12 दिसंबर से 21 दिसंबर (10 दिन) तक 6720 ग्राम पंचायत स्तरीय गोष्ठी/ किसान पाठशाला का आयोजन किया जा चुका है। 10 दिन में 6.98 लाख किसानों को कृषि व सहवर्ती विभागों की योजनाओं एवं कृषि विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों व कृषि विज्ञान केंद्रों में किए जा रहे नवाचारों से प्रशिक्षित किया गया। 6.98 लाख किसानों में 4.37 लाख पुरुष व 2.61 लाख महिला किसान शामिल हैं।  अब तक लगभग दो करोड़ किसानों को किया जा चुका प्रशिक्षित  कृषि विभाग के मुताबिक किसान पाठशाला के अंतर्गत 2017-18 से अब तक लगभग दो करोड़ से अधिक किसानों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। किसान पाठशाला का उद्देश्य किसानों को आधुनिक खेती के लिए शिक्षित करना और उनकी आय दोगुनी करना है। योगी सरकार की इस पहल का उद्देश्य किसानों को आधुनिक खेती की तकनीक, प्राकृतिक खेती, फसल प्रबंधन, सरकारी योजनाओं और आय बढ़ाने के तरीकों की व्यावहारिक ट्रेनिंग देना है, जिससे वे कम लागत में बेहतर पैदावार कर सकें और आत्मनिर्भर बनें। इसमें फसल सुरक्षा, मृदा स्वास्थ्य, बागवानी, नई तकनीक समेत विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी जाती है।

किराया बढ़ा, लेकिन राहत भी: 26 दिसंबर से इन रेल यात्रियों को मिलेगा पूरा फायदा

नई दिल्ली भारतीय रेलवे ने आगामी 26 दिसंबर से रेल टिकट के किराए को बढ़ाने की घोषणा की है, जिससे रेलवे को लगभग 600 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आमदनी होने की उम्मीद है। रेलवे के इस बड़े बदलाव से जहां कुछ यात्रियों को 26 दिसंबर के बाद ज्यादा किराया देना पड़ेगा, तो वहीं कुछ यात्रियों को कोई बढ़ा किराया नहीं देना पड़ेगा। रेलवे के इस नए नियम के तहत, साधारण श्रेणी में 215 किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा पर यात्रियों को 1 पैसा प्रति किलोमीटर ज्यादा देना होगा।  वहीं मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की नॉन-एसी और एसी श्रेणियों में 2 पैसे प्रति किलोमीटर ज्यादा किराया लगेगा। अगर कोई यात्री 500 किलोमीटर की नॉन-एसी यात्रा करता है, तो उसे 10 रुपए अतिरिक्त देने होंगे। लेकिन अगर कोई यात्री 215 किलोमीटर से कम दूरी की यात्रा करता है, तो उसे कोई बढ़ा किराया नहीं देना पड़ेगा, यानी 215 किलोमीटर से कम दूरी पर यह नियम लागू नहीं होगा। इसके साथ ही रेलवे ने यह भी साफ किया है कि लोकल (सब-अर्बन) ट्रेन और मासिक सीजन टिकट के किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। ऐसा इसलिए, ताकि कम और मध्यम आय वाले परिवारों पर बोझ न पड़े और यात्रा सस्ती बनी रहे। रेल मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि पिछले एक दशक यानी दस वर्षों में भारतीय रेलवे ने अपने नेटवर्क को काफी बढ़ाया है और अब देश के दूर-दराज इलाकों तक सेवाएं पहुंच रही हैं। यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने और बेहतर सेवाएं देने के लिए रेलवे ने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई है। इसके कारण कर्मचारियों पर खर्च बढ़कर 1.15 लाख करोड़ रुपए हो गया है और पेंशन पर खर्च 60,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। वर्ष 2024-25 में रेलवे का कुल खर्च 2.63 लाख करोड़ रुपए हो गया है। इन बढ़े हुए खर्चों को पूरा करने के लिए रेलवे माल ढुलाई (कार्गो) को बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। इसके साथ ही यात्रियों के किराए में थोड़ा-सा बदलाव किया गया है। रेलवे ने बताया कि इन सुधारों से सुरक्षा भी बेहतर हुई है और भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा माल ढुलाई करने वाला रेलवे बन गया है। रेलवे ने यह भी बताया कि माल ढुलाई के किराए 2018 के बाद से नहीं बढ़ाए गए हैं, जबकि खर्च बढ़ता रहा है। रेलवे अब ज्यादा माल ढोकर अपनी कमाई बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। रेल मंत्रालय ने कहा कि हाल ही में त्योहारों के दौरान 12,000 से ज्यादा ट्रेनें सफलतापूर्वक चलाई गईं, जो रेलवे की बेहतर योजना और काम करने की क्षमता को दिखाता है। इस बीच, मंत्रालय ने यह भी बताया कि महाराष्ट्र में हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके लिए 100 प्रतिशत जमीन अधिग्रहण पूरा हो चुका है।

रेगिस्तान में छलका जाम? सऊदी अरब में शराब बिक्री पर सख्ती ढीली, दुकानों पर उमड़ी भीड़

सऊदी अरब  सऊदी अरब ने चुपचाप एक ऐसा फैसला लिया है, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। दरअसल, दशकों से लागू सख्त शराब प्रतिबंध के बीच बड़ा बदलाव किया गया है। सऊदी सरकार ने अपने एकमात्र शराब बेचने वाले स्टोर तक अमीरों की पहुंच बढ़ा दी है। इस बदलाव के बाद गैर-मुस्लिम विदेशी नागरिक, जिनके पास प्रीमियम रेजिडेंसी परमिट है, अब इस स्टोर से शराब खरीद सकते हैं। इस फैसले की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन खबर फैल चुकी है और सऊदी राजधानी रियाद के डिप्लोमैटिक क्वार्टर में स्थित बिना किसी पहचान वाले स्टोर के बाहर कारों और लोगों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं।   रिपोर्टों के अनुसार, यह शराब की दुकान रियाद के डिप्लोमैटिक क्वार्टर में स्थित है। यह दुकान बाहर से पूरी तरह सामान्य दिखती है और इस पर कोई नाम या पहचान नहीं है। बताया जाता है कि यह स्टोर जनवरी 2024 में खोला गया था, जहां पहले केवल गैर-मुस्लिम राजनयिकों को ही शराब खरीदने की अनुमति थी। लेकिन अब प्रीमियम रेजिडेंसी वाले गैर-मुस्लिम विदेशी नागरिक भी यहां से शराब खरीद सकते हैं। प्रीमियम रेजिडेंसी परमिट क्या है? प्रीमियम रेजिडेंसी परमिट सऊदी अरब की एक खास नीति का हिस्सा है, जिसके जरिए वह निवेशकों, उद्यमियों और विशेष कौशल वाले लोगों को आकर्षित करना चाहता है। इस परमिट के लिए मुख्य शर्त उच्च आय और बड़ा निवेश है। इसके तहत विदेशी लोग बिना किसी सऊदी स्पॉन्सर के संपत्ति खरीद सकते हैं, बिजनेस शुरू कर सकते हैं और अपना परिवार भी साथ रख सकते हैं। शराब की कीमतें कितनी हैं? एसोसिएटेड प्रेस और अन्य रिपोर्टों के अनुसार, स्टोर से बाहर निकलने वाले ग्राहकों ने बताया कि कीमतें काफी ज्यादा हैं। राजनयिकों को उनकी खरीदारी पर टैक्स में छूट मिलती है, लेकिन प्रीमियम रेजिडेंसी धारकों को नहीं। ग्राहकों ने स्टोर को अच्छी तरह से स्टॉक किया हुआ बताया, हालांकि कुछ ने कहा कि बीयर और वाइन का चयन अभी सीमित है। पहले लोग शराब कहां से पीते थे? सऊदी अरब में शराब पर सख्त प्रतिबंध होने के कारण यहां रहने वाले लोग अक्सर पड़ोसी देश बहरीन जाते थे, जहां मुसलमानों और गैर-मुसलमानों दोनों के लिए शराब कानूनी है। सप्ताह के अंत और छुट्टियों में सऊदी अरब और खाड़ी देशों से बड़ी संख्या में लोग बहरीन जाते हैं, जिससे यह एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन गया है। इसके अलावा, कुछ लोग तस्करी वाली शराब का भी सहारा लेते हैं, जो बेहद महंगी होती है। सऊदी अरब ऐसा क्यों कर रहा है? यह बदलाव सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और किंग सलमान के नेतृत्व में पिछले कुछ सालों से हो रहे बड़े सामाजिक और आर्थिक सुधारों का हिस्सा है। यहां सिनेमा हॉल खोले गए हैं, महिलाओं को ड्राइविंग की अनुमति दी गई है और बड़े म्यूजिक फेस्टिवल आयोजित किए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि ये फैसले पर्यटन बढ़ाने, विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने और तेल पर निर्भरता कम करने के लिए किए जा रहे हैं। यह बदलाव विजन 2030 के तहत देश को ज्यादा आधुनिक और वैश्विक बनाने की दिशा में एक कदम है।

कंट्रोवर्सी का साल—दीपिका, सैफ समेत 6 बड़े बॉलीवुड विवाद जिन्होंने सुर्खियां बटोरीं

मुंबई  साल 2025 अब कुछ ही दिनों में खत्म होने वाला है। इस पूरे साल कई एक्टर्स अलग वजहों के चलते खबरों में बने रहे। कुछ के बेबाक बयानों ने खबरों की हैडलाइन बनाई तो कुछ अपने अलग अंदाज के लिए छाए रहे। लेकिन इंडस्ट्री के ये 6 ऐसे मामले हैं जो हफ्तों, महीने छाए रहे। ये ऐसे विवाद थे जिनके चर्चे साल के आखिर तक हो हो रहे हैं। इन 6 विवादों के बिना साल 2025 का बॉलीवुड अधूरा लगेगा।   साल 2025 की शुरुआत ही एक हैरान करने वाली घटना के साथ हुआ था। बॉलीवुड एक्टर सैफ अली खान और करीना कपूर के घर पर एक अनजान शख्स ने घुसकर उनपर हमला कर दिया था। ये हमला इतना भयानक था कि सैफ के गर्दन और पीठ पर चाकू के वार थे। सैफ के मुताबिक अगर ये हमला गर्दन की नस पर थोड़ा और जोर से होता तो उनकी जान को खतरा था। इस हमले के बाद सैफ और करीना ने अपने घर की सुरक्षा बढ़ा दी थी।    भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते थोड़े सुधर ही रहे थे कि अचनाक 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों ने टूरिस्ट पर हमला कर दिया। इस हमले के बाद देश में पाकिस्तान के लिए इतनी नाराजगी थी कि उन्होंने एक्टर्स का विरोध करना शुरू किया। दिलजीत दोसांझ की फिल्म में सरदार जी 3 में हानिया आमिर नजर आने वाली थी। लेकिन विरोध के बाद फिल्म भारत में रिलीज नहीं की गई। फिल्म के मेकर्स ने बताया कि उन्होंने हानिया की कास्टिंग और शूटिंग पहलगाम हमले से पहले कर ली थी। हालांकि, इस पूरे मामले में दिलजीत का भी विरोध किया गया। परेश रावल हेरा फेरी 3 से बाहर हेरा फेरी 3 को लेकर फैंस एक्साइटेड थे। फिल्म को लेकर अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी और परेश रावल ने प्रमोशनल शूटिंग भी कर ली थी। फिर अचानक परेश रावण ने बताया कि वो हेरा फेरी 3 का हिस्सा नहीं हैं। एक्टर के इस बयान ने अक्षय कुमार के लिए मुसीबतें खड़ी कर दी थीं, क्योंकि वही इसे प्रोड्यूस कर रहे हैं। बाद में कानूनी तरीके से इस मामले को सुलझाया गया और खुद अक्षय कुमार ने परेश रावल की वापसी कन्फर्म की थी।   दीपिका पादुकोण की 8 घंटे शिफ्ट की मांग रणबीर कपूर के साथ एनिमल बनाने वाले डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा दीपिका पादुकोण को लार फिल्म स्पिरिट बनाना चाहते थे। दोनों के बीच फिल्म को लेकर मुलाकात भी हुई। लेकिन बात नहीं बनी। बाद में खबर सामने आई थी कि दीपिका ने संदीप से 8 घंटे की शिफ्ट के साथ कई अन्य मांगे की थीं। बाद में संदीप रेड्डी ने दीपिका की जगह तृप्ति डिमरी को प्रभास के अपोजिट कास्ट कर लिया।ये विवाद इस साल खबरों में बना रहा।   करिश्मा कपूर के बच्चों की प्रॉपर्टी विवाद करिश्मा कपूर के पूर्व पति संजय कपूर के निधन के बाद उनके दोनों बच्चे समायरा और कियान कोर्ट में अपनी सौतेली मां प्रिया सचदेव के साथ पिता की प्रॉपर्टी को लेकर कानूनी जंग लड़ रहे हैं। ये मामला संजय की डेथ के बाद से खबरों में बना हुआ है। बॉलीवुड एक्ट्रेस जया बच्चन और पैपराजी का रिश्ता सालों से खराब है। एक्ट्रेस को कई बार पैपराजी के साथ तीखे शब्दों में बात करते हुए देखा गया है। हाल में जया ने पैपराजी के पहनावे पर कमेंट किया था जो खूब वायरल हुआ। ये मामला खबरों में बना रहा।

ग्रामीण महिलाओं को मिले रोजगार के अवसर तो नाविक के चेहरे खिले

गंगा नदी के तटीय गांवों में सज रही है उपलों और मिट्टी के चूल्हों की मंडी माघ मेले में साधु संतों और कल्पवासियों के अस्थाई शिविरों में रहती है उपलों और मिट्टी के चूल्हों की मांग मेला प्रशासन द्वारा मेला में हीटर और छोटे एलपीजी सिलेंडर पर लगी पाबंदी से बढ़ी उपलों और मिट्टी के चूल्हों की मांग   प्रयागराज प्रयागराज में त्रिवेणी के तट पर  03 जनवरी 2026 से आयोजित होने जा रहे  माघ मेला 2026 की शुरूआत के लिए अब दो हफ्ते का समय है । आस्था और अध्यात्म के यह महा समागम लाखों लोगों की जीविका का जरिया भी बन रहा है। महाकुंभ नगर के अंतर्गत आने वाले गांवों में की ग्रामीण महिलाओं की जीविका के महाकुंभ ने नए अवसर दे दिए हैं।   15 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों के लिए जीविका का जरिया संगम किनारे 3 जनवरी 2026 से आयोजित होने जा रहा माघ मेला होटल, ट्रैवल और टेंटेज , फूड जैसे औद्योगिक सेक्टर के साथ छोटे मोटे काम करने वाले लोगों के लिए भी जीविका के अवसर प्रदान कर रहा है। गंगा किनारे आकार ले रही तंबुओं के इस नगर के अंतर्गत आने वाले 27 गांवों में पशुपालन से जुड़े कार्य में लगे परिवारों की 15 हजार से अधिक आबादी के लिए इस आयोजन ने जीविका का जरिया दे दिया है। नदी किनारे बसे कई गाँवों में इन दिनों ईंधन के परम्परागत रूप उपलों का नया बाजार विकसित होने लगा है। इन गाँवों में नदी किनारे बड़ी तादाद में उपलों की मंडी बन गई है । गाँवों में इन दिनों गोबर से बने उपलों को बनाने में स्थानीय महिलाएं पूरे दिन लगी रहती हैं । मेला क्षेत्र के गंगा किनारे बसे बदरा सोनौटी गांव की विमला यादव का कहना है कि घर में चार भैंस और गाय हैं जिनसे साल भर हम उपले बनाते हैं और इन्हें इकट्ठा करते रहते हैं। माघ के महीने में कल्पवास करने आने वाले कल्पवासियों के यहां इनको भेजते हैं। मलावा खुर्द गांव की आरती सुबह से ही अपने घर की आम तौर पर खाली रहने वाली महिलाओं के साथ मिट्टी के चूल्हे तैयार करने में जुट जाती हैं। आरती बताती हैं कि माघ मेले में कल्पवास करने आने वाले श्रद्धालुओं का खाना इन्ही चूल्हों पर तैयार होता है । इसके लिए अभी तक उनके पास सात हजार मिट्टी के चूल्हे तैयार करने के ऑर्डर मिल चुके हैं। साधु संतो के शिविरों में भी इनके उपले और चूल्हों की मांग अच्छी मांग है ।  नाविकों की संख्या में इजाफा, महाकुंभ की आमदनी का असर  प्रयागराज सर्वाधिक कमाई करने वाले नाविक समाज में इस बार माघ मेले को लेकर सबसे अधिक उम्मीदें हैं। लगभग कर निषाद परिवार इस समय नई नाव संगम में उतारने की तैयारी में लगा है जिसके पीछे महाकुम्भ 2025 का उसका सुखद अनुभव है। दारागंज के दशाश्वमेध घाट की निषाद बस्ती में रहने वाले बबलू निषाद बताते हैं कि उन्होंने अपने रिश्तेदारों तक को माघ मेले के एक महीने के लिए बुला लिया है। माघ मेले में सरकार की तरफ से जिस तरह 12 से 15 करोड़ लोगों के आने का अनुमान है उसमें अगर 5 करोड़ भी नावों से त्रिवेणी आए तो एक बार नाविक समाज की तकदीर बन जाएगी।  शिविरों में बिजली के हीटर और छोटे एलपीजी सिलेंडर के इस्तेमाल में लगी रोक बनी सहायक महाकुंभ के आयोजन के बाद कल्पवास करने की शुरुआत करने वालों की संख्या में हर बार इजाफा होता है। एडीएम मेला दयानंद प्रसाद के मुताबिक इस बार माघ मेले में 6 हजार से अधिक संस्थाएं बसाई जा रही हैं । इसमें 4 लाख से अधिक कल्पवासियों को भी जगह मिलेगी । मेला क्षेत्र में बड़ी संस्थाएं वैसे तो कुकिंग के गैस के बड़े सिलेंडर का इस्तेमाल करती हैं क्योंकि इन्हें प्रतिदिन लाखों लोगों को भोजन कराना होता है। लेकिन धर्माचार्यों, साधु संतों और कल्पवासी अभी भी अपनी पुरानी व्यवस्था के अंदर ही खाना बनाते हैं। कुछ स्थानों पर आग लगने की घटनाओं में हीटर और छोटे गैस सिलेंडर का इस्तेमाल बड़ी वजह पाई जाने के मेला प्रशासन ने शिविरों में हीटर और छोटे गैस सिलेंडर के इस्तेमाल पर रोक लगा दी । इस नई व्यवस्था की वजह से भी अब गांव की इन महिलाओं के हाथ से बने उपलों और मिट्टी के चूल्हों की मांग बढ़ गई है। तीर्थ पुरोहित प्रदीप तिवारी बताते हैं कि तीर्थ पुरोहितों के यहां ही सबसे अधिक कल्पवासी रुकते हैं। उनकी पहली प्राथमिकता पवित्रता और परम्परा होती है इसके लिए वह मिट्टी के चूल्हों पर उपलों से बना भोजन ही बनाना पसंद करते हैं।