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स्मार्टफोन बंद, कीपैड फोन ही इस्तेमाल कर सकेंगी महिलाएं: जालोर पंचायत की नई नीति

 जालोर राजस्थान के जालोर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक ग्राम पंचायत ने महिलाओं और लड़कियों के लिए मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर कड़े नियम लागू कर दिए हैं। 26 जनवरी से प्रभावी होने वाले इस फैसले के तहत, 15 गांवों की बहुएं और लड़कियां अब कैमरा वाले यानी स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगी। सिर्फ कीपैड फोन चलाने की होगी इजाजत रविवार को जालोर के गाजीपुर गांव में चौधरी समुदाय की एक बड़ी बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता सुजनाराम चौधरी ने की। इस पंचायत में फैसला लिया गया कि गांव की बहुओं और लड़कियों को अब केवल साधारण कीपैड वाले फोन का ही उपयोग करने की अनुमति होगी। इतना ही नहीं, उन्हें किसी भी शादी-ब्याह, सामाजिक कार्यक्रम या पड़ोस के घर में भी मोबाइल ले जाने की मनाही होगी। पढ़ाई के लिए भी लागू रहेंगे सख्त नियम पंचायत ने स्कूली छात्राओं के लिए भी नियम तय किए हैं। जो लड़कियां पढ़ाई के लिए मोबाइल का इस्तेमाल करती हैं, उन्हें केवल घर पर ही फोन इस्तेमाल करने की छूट होगी। स्कूल जाने वाली लड़कियां किसी भी बाहरी कार्यक्रम या पड़ोसी के घर में मोबाइल फोन साथ नहीं ले जा पाएंगी। पंच हिम्मतराम ने इस फैसले की सार्वजनिक घोषणा की है। आंखों की रोशनी और बच्चों का दिया हवाला जब पंचायत के इस फैसले पर विरोध की बात उठी, तो सुजनाराम चौधरी ने अजीब तर्क दिया। उन्होंने कहा कि यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि बच्चे अक्सर घर की महिलाओं का फोन इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनकी आंखों की रोशनी पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने तर्क दिया कि महिलाएं काम के चक्कर में बच्चों का ध्यान भटकाने के लिए उन्हें मोबाइल दे देती हैं, जो गलत है। 15 गांवों पर लागू होगा यह फैसला यह पाबंदी किसी एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि 14 पट्टियों (उप-मंडलों) के अंतर्गत आने वाले 15 गांवों पर इसे लागू करने की तैयारी है। आगामी गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) से समुदाय की सभी महिलाओं और बेटियों को इन नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।

चौधरी चरण सिंह की 123वीं जयंती पर आयोजित ‘किसान सम्मान दिवस’ में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री योगी ने किसानों, एफपीओ, कृषि वैज्ञानिकों को किया सम्मानित  चौधरी चरण सिंह की 123वीं जयंती पर आयोजित ‘किसान सम्मान दिवस’ में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीएम ने पांच किसानों को दी ट्रैक्टर की चाबी, झंडी दिखाकर 25 ट्रैक्टरों को किया रवाना  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की 123वीं जयंती पर आयोजित ‘किसान सम्मान दिवस’ में शामिल हुए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पांच किसानों को ट्रैक्टर की चाबी भी दी। साथ ही 25 ट्रैक्टरों को झंडी दिखाकर रवाना किया।  सीएम योगी के हाथों इन किसानों को मिली ट्रैक्टर की चाबी  सीएम योगी आदित्यनाथ ने जालौन की प्रवेशिका, शाहजहांपुर से उधम सिंह, फतेहपुर से मुकेश, मुजफ्फरनगर से श्रीपाल, लखीमपुर खीरी से जमाइफ खान को ट्रैक्टर की चाबी प्रदान की।  सीएम ने इन्हें भी किया सम्मानित  👉 कमलनाथ- धान उत्पादन (एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र व अंगवस्त्र) 👉 बिजेंद्र कुमार सिंह- गेहूं उत्पादन (एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र व अंगवस्त्र) 👉 आशीष तिवारी- चना उत्पादन (एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र व अंगवस्त्र) 👉 रामकिशुन- मटर उत्पादन (एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र व अंगवस्त्र) 👉 हीरालाल- सरसो उत्पादन (एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र व अंगवस्त्र) 👉 रणधीर सिंह- अरहर उत्पादन (एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र व अंगवस्त्र) 👉 अमरेश कुमार- ज्वार उत्पादन (एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र व अंगवस्त्र) 👉विशिष्ट महिला किसान का पुरस्कार- संध्या सिंह (75 हजार रुपये, अंगवस्त्र व प्रशस्ति पत्र)  👉 एफपीओ- विकास कुमार सिंह- जया सीड्स कंपनी लिमिटेड वाराणसी (एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र व अंगवस्त्र)  👉 कुलदीप मिश्र (गोंडा)- बीज विकास निगम में सर्वाधिक बीज सप्लाई करने वाले एफपीओ  👉 औद्यानिक खेती- विकास कुमार सिंह (एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र व अंगवस्त्र)  👉 कृषि वैज्ञानिक- डॉ. धीरज कुमार तिवारी (कृषि विज्ञान केंद्र, उन्नाव)

उदित राज का मोहन भागवत पर कटाक्ष: जुबान पर कुछ और, दिल में कुछ और

नई दिल्ली हिंदू राष्ट्र वाले बयान को लेकर कांग्रेस नेता उदित राज ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को चुनौती दी है। उन्होंने कहा है कि कोई हिंदू राष्ट्र नहीं है और भागवत में दम है, तो ऐसा करके दिखाएं। उन्होंने संघ प्रमुख के बयान को संविधान विरोधी बताया है। साथ ही पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले हुमायूं कबीर को भारतीय जनता पार्टी की बी टीम होने का दावा किया है। बातचीत में उन्होंने कहा, 'कोई हिंदू राष्ट्र नहीं है, गलत बात है। और मोहन भागवत की हिम्मत है तो कर दिखाएं। मालूम है कि इनके दिल में कुछ और है जुबान पर कुछ और है। अंत में जुबान पर बात ही गई। अभी तक अगल बगल से कहलवाते रहे…। अब खुद मोहन भागवत जी कह दिए हैं। यह बहुत आपत्तिजनक है, गलत बात है, संविधान विरोधी बात है, राष्ट्र विरोधी बात है।' हुमायूं कबीर पर भागवत की टिप्पणी को लेकर राज ने कहा, 'हुमायूं कबीर और बीजेपी मिली हुई है, मोहन भागवत जी मिले हुए हैं। इसलिए मिले हुए हैं क्योंकि दोनों की विन विन सिच्युएशन होगी। इनको पैसा मिल जाएगा, शोहरत मिल जाएगी और ये हिंदू मुसलमान कर चुनाव जीत जाएंगे। तमाम सारी बी टीम पैदा कर दी हैं। इनकी ही बी टीम है। क्या जरूरत है चर्चा करने की। हुमायूं कबीर क्या है पता ही नहीं लगेगा। हमारे देश की मीडिया क्यों इसे तरजीह दे रही है…।' भागवत का बयान रविवार को एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा था, 'सूर्य का पूर्व से उदय होता है। हम नहीं जानते कि ऐसा कब से हो रहा है। तो क्या हमें उसके लिए भी संविधान की मंजूरी लेनी पड़ेगी। हिंदुस्तान हिंदू राष्ट्र है। जो भी भारत को अपनी मां मानता है, वो भारतीय संस्कृति की तारीफ करता है, जब तक हिन्दुस्तान की धरती पर एक भी व्यक्ति जिंदा है जो पूर्वजों को गौरव को मानता है और उसका सम्मान करता है, तब तक भारत हिंदू राष्ट्र है। यह संघ की विचारधारा है।' उन्होंने कहा, 'अगर संसद कभी संविधान संशोधन का फैसला करती है और शब्द को जोड़ती है। अगर ऐसा होता है या नहीं होता है, तो भी ठीक है। हम शब्द की चिंता नहीं करते, क्योंकि हम हिंदू हैं और हमारा देश हिंदू राष्ट्र है। यह सच है जन्म पर आधारित जाति व्यवस्था हिंदुत्व की पहचान नहीं है।'

बच्चों की असामयिक मौतों ने मचाई चिंता, छतरपुर में NHM जांच में जुटा

 छतरपुर मध्यप्रदेश का स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर देशभर में सुर्खियां बटोर रहा है। इस बार चर्चा का मुख्य कारण बच्चों की मौत से जुड़ा है। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने आनन-फानन में राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अफसरों से रिपोर्ट तलब की है। दरअसल, मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के जिला अस्पताल से एक विचलित कर देने वाली घटना उजागर हुई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 8 महीनों में जिले में 409 बच्चों की मौत हो गई। इस भारी संख्या में हुई मौतों के बाद नेशनल हेल्थ मिशन  विभाग ने स्वास्थ्य प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।  छतरपुर जिले के जिला अस्पताल से एक विचलित कर देने वाली खबर सामने आई है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 8 महीनों में जिले में 409 बच्चों की मौत हो गई. इस भारी संख्या में हुई मौतों के बाद नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) विभाग ने स्वास्थ्य प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. आरपी गुप्ता ने इस गंभीर स्थिति की पुष्टि की और बताया, ''अप्रैल से अब तक अस्पताल में 409 बच्चों की मौत हो चुकी है और हमें सीनियर अधिकारियों से इन मौतों की जांच करने का नोटिस मिला है. मैंने इसके लिए एक टीम बनाई है. हमने जांच लगभग पूरी कर ली है.'' कर्मचारियों से हो रही पूछताछ सीएमएचओ ने कहा- एसएनसीयू और लेबर रूम के स्टाफ से पूछताछ की जा रही है। हाल ही में लापरवाही बरतने वाले कुछ कर्मचारियों को सिविल सर्जन ने हटा दिया है। हमारी टीम मृत बच्चों की वर्बल आटोप्सी कर रही है ताकि यह समझा जा सके कि मौतें किस स्तर पर हुईं। उन्होंने यह भी दावा है कि मॉनिटरिंग बढ़ाने के बाद डेथ परसेंटेज में कमी आई है और यह अब 6 फीसदी से नीचे आ गया है। जरूरतमंद को नहीं मिल रही एंबुलेंस इधर, प्रशासन ने बच्चों की मौतों के लिए कई तकनीकी और सामाजिक कारणों को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों से गर्भवती महिलाओं को अस्पताल लाने में देरी होना, पेरी-फेरी (बाहरी स्वास्थ्य केंद्रों) से समय पर रेफर न होना या एंबुलेंस की कमी, कुछ बच्चों में जन्म से ही शारीरिक समस्याएं भी मौतों का कारण बन जाती हैं। दावा- अब घट गया मौत का प्रतिशत वहीं, अस्पताल पहुंचने के बाद आपरेशन या सामान्य प्रसव की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का विलंब भी वजह है। सीएमएचओ ने कहा कि हम इन मौतों को न्यूनतम स्तर पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। अभी परिणाम हमारे यहां देखने में मिल भी रहे हैं कि पहले बच्चों की मौतों का प्रतिशत ज्यादा था, अब वो घटकर छह प्रतिशत से कम पर आ गया है। CMHO के अनुसार, "SNCU और लेबर रूम के स्टाफ से पूछताछ की जा रही है. हाल ही में लापरवाही बरतने वाले कुछ कर्मचारियों को सिविल सर्जन ने हटा दिया है. हमारी टीम मृत बच्चों की 'वर्बल ऑटोप्सी' कर रही है ताकि यह समझा जा सके कि मौतें किस स्तर पर हुईं.'' विभाग का दावा है कि मॉनिटरिंग बढ़ाने के बाद डेथ परसेंटेज में कमी आई है और यह अब 6% से नीचे आ गया है. प्रशासन ने बच्चों की मौतों के लिए कई तकनीकी और सामाजिक कारणों को जिम्मेदार ठहराया है. उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों से गर्भवती महिलाओं को अस्पताल लाने में देरी होना, पेरी-फेरी (बाहरी स्वास्थ्य केंद्रों) से समय पर रेफर न होना या एंबुलेंस की कमी, कुछ बच्चों में जन्म से ही शारीरिक समस्याएं भी मौतों का कारण बन जाती हैं. वहीं, अस्पताल पहुंचने के बाद ऑपरेशन या सामान्य प्रसव की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का विलंब भी वजह है. स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि हम इन मौतों को न्यूनतम स्तर पर लाने की कोशिश कर रहे हैं. और अभी परिणाम हमारे यहां देखने में मिल भी रहे हैं कि पहले बच्चों की मौतों का प्रतिशत ज्यादा था, अब वो घटकर छह प्रतिशत से कम पर आ गया है.

जीएमसीएच में हंगामा: रसोई में काम कर रहीं जीविका दीदियों से जूनियर डॉक्टरों की मारपीट, कई घायल

बेतिया बेतिया स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल से बुधवार को एक बेहद चौंकाने वाली और शर्मनाक घटना सामने आई है। अस्पताल परिसर में संचालित दीदी की रसोई में कार्यरत जीविका दीदियों के साथ जूनियर डॉक्टरों और अस्पताल कर्मियों द्वारा जमकर मारपीट की गई। घटना के बाद अस्पताल में अफरातफरी मच गई और कामकाज पूरी तरह प्रभावित हो गया। मारपीट में करीब आधा दर्जन जीविका दीदियां घायल हो गईं, जिन्हें GMCH में ही भर्ती कराया गया है। वहीं दीदी की रसोई के अन्य स्टाफ भी चोटिल हुए हैं। घटना से आक्रोशित जीविका दीदियों ने रसोई को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया है। घायल जीविका दीदियों ने बताया कि कुछ जूनियर डॉक्टर दीदी की रसोई में खाना खाने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने दही और ऑमलेट का ऑर्डर दिया। जब ऑर्डर तैयार हो गया तो डॉक्टरों ने दही लेने से इनकार कर दिया, जिसको लेकर बहस शुरू हो गई। आरोप है कि इसी विवाद के बाद जूनियर डॉक्टरों ने बदतमीजी और गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध करने पर मामला इतना बढ़ गया कि देखते ही देखते करीब 50 से 60 की संख्या में जूनियर डॉक्टर और अस्पतालकर्मी दीदी की रसोई में घुस आए। जीविका दीदियों का आरोप है कि हमलावरों ने लाठियों और हाथों से बेरहमी से मारपीट की। इस दौरान कई महिलाओं के गहने और मंगलसूत्र तक तोड़ दिए गए। अचानक हुए हमले से रसोई में भगदड़ मच गई और महिलाएं जान बचाकर इधर-उधर भागने लगीं।घटना के बाद जीएमसीएच परिसर में काफी देर तक अफरातफरी का माहौल रहा। घायल जीविका दीदियों को आनन-फानन में इलाज के लिए भर्ती कराया गया। महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना से आहत और डरी जीविका दीदियों ने दीदी की रसोई को बंद कर दिया है, जिससे अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों को भोजन की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक नियंत्रण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर महिलाओं के साथ इस तरह की हिंसा ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। फिलहाल मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर मंथन जारी है, वहीं जीविका दीदियां दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रही हैं।

डीन बर्न के सोशल मीडिया पोस्ट ने मचाई हलचल, फैंस की प्रतिक्रिया में हुआ विवाद

लंदन   एडल्ट कंटेंट क्रिएटर डीन बर्न जो खुद को ओनलीफैंस का टॉप 0.02 प्रतिशत कमाने वाला बताते हैं, उस वक्त विवाद में आ गए जब उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने 18 साल के बेटे ब्रे के साथ कंटेंट फिल्माया है. सोशल मीडिया पर पिता और बेटे की तस्वीरें शेयर करते हुए डीन ने फैंस से पूछा कि वे किसे चुनेंगे, जिसके बाद मामला तेजी से तूल पकड़ गया. कंटेंट क्रिएटर ने क्यों हो गए ट्रोल? डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, डीन ने बताया कि ब्रे ने खुद उनसे ओनलीफैंस शुरू करने की इच्छा जताई थी. उनके मुताबिक, उन्होंने पहले बेटे को रोकने की कोशिश की क्योंकि यह दुनिया नुकसानदेह हो सकती है, लेकिन ब्रे अपने फैसले पर अड़ा रहा. डीन ने फॉलोअर्स से अपील की कि वे दयालु रहें और समर्थन दिखाएं, क्योंकि यह उनके बेटे का खुद का निर्णय है. इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर गुस्से की लहर दौड़ गई.  कई यूजर्स ने इसे पब्लिसिटी स्टंट बताया, तो कुछ ने कहा कि इससे डीन की साख को नुकसान पहुंचा है. कई लोगों ने इस कदम को अजीब, गलत और असहज कर देने वाला बताया, वहीं कुछ ने इसे सीधा तौर पर बीमार मानसिकता करार दिया. हालांकि आलोचना ज्यादा रही, लेकिन कुछ फैंस ने इस जोड़ी का समर्थन भी किया. कुछ यूजर्स ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि आकर्षण परिवार में चलता है, जबकि अन्य ने इसे जेनेटिक्स का कमाल बताया. डीन बर्न ने आरोपों का जवाब में क्या कहा? जब कुछ लोगों ने दावा किया कि ब्रे उनका बेटा नहीं है और यह सिर्फ मार्केटिंग रणनीति है, तो डीन ने पुराने फैमिली फोटो शेयर किए. उन्होंने कहा कि वे एक पिता हैं और उन्होंने जानबूझकर बेटे को इस दुनिया से दूर रखा था. लेकिन अब यह ब्रे का फैसला है और वे उसका पूरा समर्थन करते हैं. यह विवाद ओनलीफैंस जैसे प्लेटफॉर्म की सीमाओं पर भी चर्चा छेड़ता है. ओनलीफैंस पर 220 मिलियन से ज्यादा यूजर्स और 30 लाख से अधिक क्रिएटर्स हैं. यह प्लेटफॉर्म सिर्फ एडल्ट कंटेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि फिटनेस ट्रेनर, म्यूजिशियन और सेलिब्रिटी भी इसका इस्तेमाल करते हैं. 

फिल्मी ‘धुरंधर’ से पहले असली खौफ: उजैर बलोच का वीडियो वायरल, कबूल किए कई खून

मुंबई  धुरंधर फिल्म भारत ही नहीं पाकिस्तान में भी इस वक्त हॉट टॉपिक है। मूवी में ल्यारी गैंगवॉर की कहानी दिखाई गई है जो कि कुछ रियल लाइफ कैरेक्टर्स पर बेस्ड है। धुरंधर में उजैर बलोच को रहमान डकैत का दायां हाथ दिखाया गया है। असल जिंदगी में भी रहमान डकैत और उसका भाई उजैर एक ही गैंग में थे। रहमान की मौत के बाद उजैर बलोच उस गैंग का लीडर बन गया था। धुरंधर के ब्लॉकबस्टर हिट होने के बाद अब असली उजैर बलोच का एक इंटरव्यू वायरल है जिसमें वह अपने हर काले कारनामे पर पर्दा डालकर खुद को जनता का सेवक बता रहा है। हॉटसीट प्रोग्राम में होस्ट रहमान बलोच से बात करता है तो बोलता है, अपनी हिफाजत को यकीनी बनाते हुए जितनी बात की जा सकती है करें। आप ल्यारी के डॉन हैं? इस पर उजैर ने जवाब दिया, नहीं, मैं पीपल्स पार्टी का कारकुन (कार्यकर्ता) और ल्यारी के नौजवान और बुजुर्ग अपनी मांओं बहनों का खिदमत करने वाला हूं। और लिरी के डॉन भी है नहीं लिरी का डोन नहीं हूं ना मैं एक स्टूडेंट था डन बाद में बने थे डोन नहीं मैं एक स्टूडेंट था अब ल्यारी के खिदमत करने का नतीजा मुझे यह मिला है लोग कुछ भी कह सकते हैं। जिनको हम पसंद नहीं होते हैं तो हमारे खिलाफ तो कुछ भी कह सकते हैं। उजैर ने खुद को बताया मासूम होस्ट ने उजैर से पूछा 13 अगस्त 2009 को एक खबर छपी कि उजैर बलोच क्राउन्ड ऐज न्यू डॉन ऑफ ल्यारी (उजैर बलोच के सिर ल्यारी के नए डॉन का ताज)। उस अखबार के खिलाफ मुकदमा भी नहीं हुआ? उजैर ने मासूम बनते हुए कहा, हम किसके पास मुकदमा ले जाएं, हमें तो पहले से नजरअंदाज किया जा रहा है। पैदायशी जमीदार हूं… उजैर से पूछा गया कि उनकी इनकम का सोर्स क्या है। इस पर जवाब मिला, 'देखो मैं एक ट्रांसपोर्टर हूं और मेरी जरी जमीनें भी है और मैं दुबई में भी कारोबार है मेरा और अल्लाह का शुक्र है मैं पैदायशी लैंडलॉर्ड हूं।' उजैर से कहा गया कि वह बादशाह बने बैठे हैं जबकि उनके घर के बाहर लोग भूखे-नंगे हैं। इस पर उजैर बोला, 'आप चलें मेरे साथ मैं आपको दिखा देता हूं कि आवाम को मुझसे कितनी मोहब्बत है और मैंने कितना उनको किया है मैं एक मस्जिद में ऐलान करूं आप देखें कि लोग सारे निकल आएंगे मैंने उनके साथ हर दुख दर्द में शरीक हुआ हूं। आज तक कितने कत्ल किए उजैर से पूछा गया कि इस डॉन उजेर बलोच ने आज तक खुद कितने कत्ल किए? इस पर उजैर हंसते हुए बोला, मैंने एक चींटी भी नहीं मारी। मैंने आवाम के रोजगार के मसले में आवाज उठाई है, मैंने आवाम क लिए हॉस्पिटल सही करवाए, अगर ये कत्ल है तो मैं इस कत्ल में शरीकदार हूं। अगर गरीब की मदद करने वाले को कातिल कहा जाता है, डॉन कहा जाता है तो आप लोगों की मर्जी। उजैर पर 200 हत्याओं का आरोप फिल्म धुरंधर में उजैर बलोच का रोल दानिश पंडोर ने निभाया है। उनका किरदार फीमेल फैन्स के बीच काफी पॉप्युलर है। हालांकि असल जिंदगी में उजैर बलोच काफी खूंखार अपराधी है। बीबीसी की रिपोर्ट्स एक के मुताबिक, उजैर 2008 से 2013 के बीच 198 लोगों का कत्ल कर चुका था। उसने पैरा मिलिट्री के करीब 150 लोगों की हत्याएं की थीं। बताया जात है कि उजैर बलोच ने अपने पिता के हत्यारे अरशद पप्पू की हत्या करके उसके सिर से फुटबॉल खेली, गधे पर उसकी डेड बॉडी का जुलूस निकाला फिर जलाकर इसे सीवर में बहा दिया था।

सर्दियों की छुट्टियों का शेड्यूल जारी, राज्यों के स्कूलों में छुट्टियों की लिस्ट देखें

नई दिल्ली कड़कती ठंड की शुरुआत के साथ ही बच्चों को स्कूल भेजना किसी बड़े टास्क से कम नहीं होता है. उत्तर भारत में तो सर्दी ने अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू भी कर दिया है. तापमान में लगातार गिरावट देखी जा रही है. दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है. बढ़ते AQI से खतरा मंडरा रहा है और सर्द हवाएं भी घर से निकलना मुश्किल कर रही हैं. ऐसे में बच्चों समेत अभिभावक और शिक्षकों को स्कूल की छुट्टी का इंतजार है जो बस अब खत्म होने जा रहा है. देश के अलग-अलग राज्यों में स्कूल की छुट्टी का ऐलान कर दिया गया है. आइए लिस्ट के जरिए जानते हैं कि किस राज्य में कब से सर्दियों की छुट्टियां होंगी? सर्दियों की छुट्टी से सिर्फ छात्रों की मौज नहीं सर्दियों की छुट्टी का मतलब ये नहीं है कि सिर्फ स्कूल के बच्चों के लिए है बल्कि अभिभावक और शिक्षकों के लिए भी एक ब्रेक टाइम होता है. बच्चों के साथ समय बिताने के लिए माता-पिता को भी टाइम मिलता है और हॉलिडे ट्रिप प्लान कर सकते हैं. जबकि, शिक्षकों के लिए भी एक रेस्ट टाइम होता है जो सर्दियों की छुट्टी में अपना समय आराम के साथ गुजार सकते हैं. भारत में कब से है स्कूलों में सर्दियों की छुट्टी? आमतौर पर हर साल दिसंबर के आखिरी सप्ताह से लेकर जनवरी के पहले या दूसरे सप्ताह तक सर्दियों की छुट्टी रहती है. लगभग 10 से 15 दिनों के लिए स्कूलों को बंद किया जाता है. सर्दियों से बच्चों की सुरक्षा के लिए उत्तरी भारत में स्कूलों की छुट्टी का लगभग सभी राज्यों द्वारा ऐलान कर दिया गया है. राज्यवार सर्दियों की छुट्टियों की तारीखों की लिस्ट उत्तर प्रदेश:– 20 दिसंबर से 31 दिसंबर 2025 तक पंजाब:- 22 दिसंबर 2025 से 10 जनवरी 2026 तक मध्य प्रदेश:- 23 दिसंबर 2025 से छुट्टियों की आखिरी तारीख हर जिले में तारीख अलग-अलग हो सकती है. ओडिशा:- 23 दिसंबर 2025 से 1 जनवरी 2026 तक हिमाचल प्रदेश:- 31 दिसंबर 2025 से छुट्टियों की आखिरी तारीख सभी जिलों में अलग-अलग हो सकती है. दिल्ली:– 1 जनवरी से 15 जनवरी 2026 तक हरियाणा:- 1 जनवरी से 15 जनवरी 2026 तक जम्मू-कश्मीर:- 22 दिसंबर 2025 से 10 जनवरी 2026 तक देश के सभी केंद्रीय विद्यालयों में सर्दियों की छुट्टियां 23 दिसंबर 2025 से 1 जनवरी 2026 तक रहेगी। स्कूलों में सर्दियों की लास्ट डेट के कंफर्मेशन के लिए स्कूल प्रशासन से भी संपर्क कर सकते हैं. 

7-सीटर किआ कैरेंस की GST कटौती से कीमतों में राहत, बेस मॉडल अब 14.32 लाख रुपए में

मुंबई  किआ की पॉपुलर 7-सीटर कैरेंस की कीमतों में भी नए GST से कटौती हुई है। इसके एंट्री से लेकर टॉप वैरिएंट तक सभी को खरीदना सस्ता हुआ है। यही वजह है कि एक्स-शोरूम कीमतें कम होने का असर आर्मी कैंटीन पर मिलने वाली कारों पर भी पड़ा है। कैंटीन स्टोर्स डिपार्टमेंट यानी CSD पर जवानों से 18% की जगह सिर्फ 14% GST ही लिया जाता है। Cars24 के मुताबिक, किआ कैरेंस की CSD पर शुरुआती कीमत सिर्फ 14.32 लाख रुपए है, जिसकी एक्स-शोरूम कीमत 12.77 लाख रुपए है। वैरिएंट के आधार पर कैरेंस पर करीब 2 लाख रुपए का टैक्स बच रहा है। भारत में इसका सीधा मुकाबला मारुति अर्टिगा, टोयोटा इनोवा जैसे मॉडल से होता है। कैंटीन स्टोर्स डिपार्टमेंट (CSD) पर स्विफ्ट की कीमतों के बारे में जानने से पहले CSD के बारे में समझते हैं। दरअसल, CSD रक्षा मंत्रालय के तहत भारत सरकार का एकमात्र स्वामित्व वाला उद्यम है। भारत में अहमदाबाद, बागडोगरा, दिल्ली, जयपुर, कोलकाता और मुंबई जैसे शहरों में 34 CSD डिपो हैं। यह भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा संचालित है। भारतीय आबादी के एक चुनिंदा हिस्से को भोजन, चिकित्सा वस्तुओं, घरेलू आवश्यकताओं और यहां तक ​​कि कारों को अफॉर्डेबल कीमतों के साथ बेचते हैं। CSD से कार खरीदने के लिए एलिजेबल ग्राहकों में सर्विंग और रिटायर्ड सशस्त्र बल कर्मी, सैन्य कर्मियों की विधवाएं और भूतपूर्व सैनिक और डिफेंस सिविलियन शामिल हैं। किआ कैरेंस की CSD और एक्स-शोरूम कीमतें वैरिएंट                                                                          CSD प्राइस कैरेंस डी1.5 सीआरडीआई वीजीटी प्रीमियम विकल्प एमटी    ₹10.94 लाख कैरेंस डी1.5 सीआरडीआई वीजीटी प्रेस्टीज आईएमटी            ₹13.11 लाख कैरेंस डी1.5 प्रेस्टीज एमटी 7 सीटर                                    ₹14.32 लाख किआ कैरेंस क्लाविस के फीचर्स, स्पेसिफिकेशंस और सेफ्टी इसमें 1.5-लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन के साथ जोड़े गए 6MT ट्रांसमिशन अलग से मिलेगा। अन्य 6iMT और 7DCT के ट्रांसमिशन ऑप्शन कैरेंस के समान ही हैं। 1.5-लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन 160 PS और 253 Nm जनरेट करता है। अन्य इंजन विकल्प, 115 PS, 1.5-लीटर NA पेट्रोल (6MT) और 116 PS, 1.5-लीटर डीजल (6MT / 6AT) कैरेंस के समान ही हैं। बात करें इसके वैरिएंट की तो इसमें 7 ऑप्शन मिलेंगे, जिसमें HTE, HTE(O), HTK, HTK+, HTK+(O), HTX और HTX(O) शामिल हैं। इसमें 6-सीट और 7-सीट लेआउट में खरीद पाएंगे। 7-सीट केवल टॉप-स्पेक HTX(O) वैरिएंट में उपलब्ध होगा। कैरेंस क्लाविस के डीजल वैरिएंट की सबसे अच्छी फ्यूल एफिशिएंसी होगी, जिसमें 6-स्पीड मैनुअल वर्जन 19.54kpl पर रेंज का सबसे अधिक माइलेज देता है। उसके बाद, 6-स्पीड ऑटोमैटिक 17.50kpl पर दूसरे स्थान पर है। कैरेंस क्लाविस की फ्यूल एफिशिएंसी स्पोर्टियर 1.5-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन का है, जो अपने 7-स्पीड डुअल-क्लच ऑटोमैटिक के लिए 16.66kpl का माइलेज देता है। जबकि, इसके 6-स्पीड मैनुअल और iMT ट्रांसमिशन दोनों 15.95kpl पर बराबर हैं। एंट्री-लेवल नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन अपने एकमात्र 6-स्पीड मैनुअल कॉन्फ़िगरेशन के लिए 15.34kpl माइलेज के साथ तीसरे स्थान पर है। हालांकि, इसका माइलेज मारुति अर्टिगा और मारुति XL6 से कम हैं। इसके फ्रंट फेसिया को स्लीक स्टार मैप LED DRLs के साथ इंटीग्रेटेड टर्न सिग्नल के साथ अपडेट किया गया है। साथ ही, आइस-क्यूब MFR LED हेडलैंप दिए हैं। कैरेंस क्लाविस में सैटिन क्रोम फिनिश में मजबूत फ्रंट और रियर स्किड प्लेट भी हैं। R17 क्रिस्टल कट डुअल-टोन एलॉय व्हील्स के साथ रोड प्रेजेंस को और भी बेहतर बनाया गया है। इसकी तुलना में कैरेंस MPV में R16 एलॉय व्हील्स का इस्तेमाल किया गया है। पीछे की तरफ, किआ क्लाविस में स्टार मैप LED कनेक्टेड टेल लैंप्स मिलते हैं। इंटीरियर की बात करें तो किआ क्लाविस में इंफोटेनमेंट और इंस्ट्रूमेंट कंसोल के लिए 26.62-इंच का डुअल पैनोरमिक डिस्प्ले पैनल मिलता है। इसकी तुलना में किआ कैरेंस 10.25-इंच टचस्क्रीन और उसी आकार के फुली डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर से लैस है। क्लाविस में एक और एक्स्ट्रा 4-वे पावर्ड ड्राइवर सीट है। किआ कनेक्ट सूट को रिमोट विंडो कंट्रोल, सराउंड व्यू मॉनिटर और मल्टीलिंगुअल VR कमांड के साथ फाइंड माई कार के साथ अपडेट किया गया है। किआ क्लाविस को 7DCT वैरिएंट के साथ 20 ऑटोनॉमस फीचर्स के साथ ADAS लेवल 2 मिलता है। इसमें ब्लाइंड स्पॉट कोलिजन वार्निंग, ब्लाइंड स्पॉट कोलिजन अवॉइडेंस असिस्ट, क्लस्टर में ब्लाइंड व्यू मॉनिटर, 360 डिग्री कैमरा, स्टॉप एंड गो के साथ स्मार्ट क्रूज कंट्रोल और ड्राइवर अटेंशन वॉर्निंग शामिल हैं। इसके अलावा, फ्रंट कोलिजन वार्निंग, फ्रंट कोलिजन अवॉइडेंस असिस्ट, लेन कीपिंग असिस्ट, लेन डिपार्चर वार्निंग, लेन फॉलोइंग असिस्ट, हाई बीम असिस्ट, रियर क्रॉस ट्रैफिक कोलिजन वार्निंग और अवॉइडेंस असिस्ट और सेफ एग्जिट वार्निंग भी शामिल हैं। इसमें 6-एयरबैग, ESC, VSM, BAS, HAC, DBC और ABS, फ्रंट और रियर पार्किंग सेंसर, ऑल व्हील डिस्क ब्रेक और टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम शामिल हैं।

शिक्षा और आवास में मुफ्त सुविधा: बिहार ने अल्पसंख्यक छात्रों के लिए उठाया कदम

पटना  बिहार सरकार ने अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किशनगंज और दरभंगा में बिहार राज्य अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया है। इन विद्यालयों में पढ़ाई के साथ-साथ छात्रावास की सुविधा भी पूरी तरह निःशुल्क होगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य अल्पसंख्यक वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों को सुरक्षित, अनुशासित और उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है, ताकि वे बेहतर भविष्य की ओर आगे बढ़ सकें। नामांकन प्रक्रिया इसी दिसंबर से शुरू सरकार सत्र 2025–26 के लिए इन विद्यालयों में नामांकन प्रक्रिया इसी दिसंबर से शुरू कर रही है। इच्छुक अभ्यर्थी 30 दिसंबर तक आवेदन कर सकते हैं। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा आवेदन के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे अधिक से अधिक छात्र इस योजना का लाभ उठा सकें। छात्रों के सर्वांगीण विकास पर फोकस इन आवासीय विद्यालयों में मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी समुदाय के छात्रों को निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाएगी। साथ ही सुरक्षित आवास, पौष्टिक भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं और अनुशासित शैक्षणिक माहौल भी सुनिश्चित किया जाएगा। सरकार का फोकस केवल शिक्षा तक सीमित न होकर छात्रों के सर्वांगीण विकास पर भी रहेगा। 75 प्रतिशत सीटें ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए आरक्षित सत्र 2025–26 के लिए कला और विज्ञान संकाय में नामांकन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके तहत कक्षा 9 और कक्षा 11 में प्रवेश के लिए आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार कक्षा 9 के लिए अधिकतम आयु 16 वर्ष और कक्षा 11 के लिए 18 वर्ष निर्धारित की गई है। वर्तमान में नवमी और ग्यारहवीं कक्षा में अध्ययनरत, विशेषकर विज्ञान और कला संकाय के छात्र-छात्राओं को प्रवेश में प्राथमिकता दी जाएगी। सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कुल सीटों में से 75 प्रतिशत सीटें ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए आरक्षित करने का निर्णय लिया है, जिनमें से 50 प्रतिशत सीटें बालिकाओं के लिए होंगी। आरक्षण प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा इसके अलावा राज्य सरकार के अधीन संचालित शिक्षण संस्थानों में लागू आरक्षण प्रावधानों को भी यहां प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा, ताकि सभी पात्र वर्गों को समान अवसर मिल सके। गौरतलब है कि वर्ष 2005 से पहले राज्य की शिक्षा व्यवस्था कई चुनौतियों से जूझ रही थी। बीते वर्षों में बिहार सरकार ने स्कूलों, कॉलेजों और आवासीय विद्यालयों के माध्यम से शिक्षा के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ किया है। अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय इसी क्रम में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होंगे। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। सरकार का विश्वास है कि यह योजना अल्पसंख्यक छात्रों को मुख्यधारा से जोड़ने, ड्रॉपआउट दर कम करने और उन्हें आत्मनिर्भर व सशक्त बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।