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यूपी सरकार को अदालत से झटका: अखलाक लिंचिंग मामले में केस वापस लेने से इनकार

नई दिल्ली  ग्रेटर नोएडा के बिसाहाड़ा के चर्चित अखलाक मॉब लिंचिंग मामले में सूरजपुर कोर्ट ने सोमवार को आरोपियों के खिलाफ केस वापस लेने की राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी। इस अपील के जरिए उत्तर प्रदेश सरकार ने केस वापस लेने की इजाजत मांगी थी। सूरजपुर जिला अदालत के इस फैसले से उत्तर प्रदेश सरकार को बड़ा झटका लगा है।   सुनवाई के दौरान अदालत ने यूपी सरकार की दलीलों को अपर्याप्त और आधारहीन करार दिया। अदालत ने कहा कि केस वापस लेने का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है। फैसले से आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है। फैसले ने मामले को बंद करने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। बता दें कि 10 साल पहले दिल्ली से 50 किलोमीटर दूर दादरी के बिसाड़ा गांव में एक अफवाह के तहत भीड़ ने 50 साल के मोहम्मद अखलाक को कथित तौर पर पीट-पीटकर मार डाला था। भीड़ का आरोप था कि अखलाक के परिवार ने बछड़े का मांस खाया है। भीड़ का यह भी कहना था कि अखलाक ने घर में गोमांस रखा है। इसके बाद गांव के लोगों ने पीट-पीटकर अखलाक की हत्या कर दी थी। 28 सितंबर 2015 को हुई इस घटना की चर्चा देशभर में हुई थी। इस घटना की जमकर आलोचना हुई थी। पुलिस ने जांच के बाद कुल 19 लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया था। सभी पर हत्या, दंगा भड़काने और जान से मारने की धमकी देने जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया था। कानूनी लड़ाई के बीच अक्टूबर 2025 में उत्तर प्रदेश शासन ने अचानक एक बड़ा कदम उठाते हुए आरोपियों के खिलाफ चल रहे आरोपों को वापस लेने के लिए कोर्ट में आवेदन दिया था। उत्तर प्रदेश शासन की ओर से अदालत से केस चार्जशीट में नामजद सभी 19 लोगों के खिलाफ आरोप वापस लेने की इजाजत मांगे जाने के कारण यह केस एकबार फिर सुर्खियों में आ गया था। इस याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष की दलीलें थी कि केस वापस लिया जाना चाहिए। हालांकि अदालत दलीलों से सहमत नहीं हुई। अदालत ने कहा कि अपील का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है। कोर्ट ने अर्जी को महत्वहीन मानते हुए इसे खारिज कर दिया।  

हार्ट हेल्थ का देसी फॉर्मूला: रोज़ पीने से कम हो सकता है हार्ट अटैक का रिस्क

गर्मियों में शरीर को हाइड्रेट रखना और अंदर से ठंडक पहुंचाना बेहद जरूरी हो जाता है। ऐसे में नारियल पानी एक नेचुरल और न्यूट्रीशन से भरपूर ऑप्शन है, जो न सिर्फ प्यास बुझाता है बल्कि शरीर को आवश्यक मिनरल्स और इलेक्ट्रोलाइट्स भी प्रदान करता है। ताजे हरे नारियल से प्राप्त यह ड्रिंक शरीर की कई जरूरतों को पूरा करते हैं। ऐसे में रोजाना इसका सेवन करने से सेहत को कई तरह के फायदे मिलते हैं। तो फिर देर किस बात कि आइए जानते हैं कि रोजाना नारियल पानी पीने से क्या-क्या लाभ होते हैं। शरीर को हाइड्रेट रखता है नारियल पानी में पोटैशियम, सोडियम, मैग्नीशियम जैसे नेचुरल इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं, जो शरीर में पानी की कमी को पूरा करते हैं। गर्मियों में या वर्कआउट के बाद यह नेचुरल एनर्जी ड्रिंक की तरह काम करता है। डाइजेस्टिव सिस्टम को बेहतर बनाए इसमें पाए जाने वाले बायोएक्टिव एंजाइम्स पेट की समस्याओं जैसे गैस, अपच और एसिडिटी से राहत दिलाते हैं। सुबह खाली पेट नारियल पानी पीने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है और पाचन सुधरता है। ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करे नारियल पानी में पोटैशियम अधिक मात्रा में होता है, जो ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है और हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करता है। वेट लॉस करने में सहायक कम कैलोरी और जीरो फैट होने के कारण यह वजन घटाने की प्रक्रिया में मदद करता है। यह पेट को भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती। स्किन और बालों को बनाए हेल्दी इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण स्किन को डीटॉक्स करते हैं और नेचुरल ग्लो लाते हैं। साथ ही बालों की ग्रोथ को बेहतर बनाते हैं और डैंड्रफ की समस्या में भी राहत देते हैं। किडनी और यूरिन को रखे स्वस्थ नारियल पानी एक नेचुरल डिटॉक्स ड्रिंक है, जो शरीर से टॉक्सिन को बाहर निकालता है। यह किडनी स्टोन बनने की संभावना को कम करता है और यूरीन संबंधी समस्याओं से राहत दिलाता है। डायबिटीज में सुरक्षित और फायदेमंद इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे यह ब्लड शुगर लेवल को तेजी से नहीं बढ़ाता। डायबिटीज पेशेंट्स भी सीमित मात्रा में इसका सेवन कर सकते हैं। नारियल पानी एक सरल लेकिन प्रभावशाली नेचुरल ड्रिंक है, जो शरीर, स्किन और ऑर्गन्स की सेहत को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसे रोजाना अपनी दिनचर्या में शामिल कर आप लंबे समय तक स्वस्थ और एनर्जेटिक रह सकते हैं।  

तेंदुए की मौत या शिकार? जंगल में बिना पंजों के शव मिलने पर जांच में जुटी सफारी टीम

धमतरी जिले के मगरलोड क्षेत्र के कोरगांव के जंगल में सोमवार को एक मृत तेंदुआ मिलने से हड़कंप मच गया है. तेंदुआ के चारों पैर के पंजे भी गायब हैं. घटना की सूचना मिलते ही जंगल सफारी रायपुर से डॉग स्क्वायड की टीम धमतरी पहुंची. उन्होंने रात भर क्षेत्र में निगरानी की. मामले को लेकर स्थानीय चरवाहों और ग्रामीणों से पूछताछ की जा रही है. जानकारी के मुताबिक, मगरलोड के उत्तर सिंगपुर कक्ष क्रमांक 23 में 22 दिसंबर को शाम करीब 4:45 बजे एक तेंदुआ मृत मिला. पोस्टमार्टम हो चुका है. रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट  हो पाएगा कि तेंदुआ का शिकार किया गया है या नहीं. राजनांदगांव में तेंदुआ की मिली थी सड़ी गली लाश बता दें कि  इससे पहले 17 दिसंबर को कवर्धा जिले के जानकारी के अनुसार, मोतीनपुर और बोटेसूर गांव के बीच जंगल में तेंदुए का शव मिला था. जो करीब एक सप्ताह पुराना था.

उत्तर प्रदेश में आईआईटी कानपुर और आईआईटी बीएचयू में स्थापित होंगे दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

योगी सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना को दी मंजूरी उत्तर प्रदेश में आईआईटी कानपुर और आईआईटी बीएचयू में स्थापित होंगे दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन अनुसंधान, तकनीकी विकास, मानव संसाधन सशक्तिकरण एवं औद्योगिक उपयोग को मिलेगा प्रोत्साहन लखनऊ  हरित परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य में ग्रीन हाइड्रोजन अनुसंधान, तकनीकी विकास, मानव संसाधन सशक्तिकरण एवं औद्योगिक उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE)  स्थापित करने को मंजूरी दी गई है। पहला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस आईआईटी कानपुर द्वारा हरकोर्ट बटलर तकनीकी विश्वविद्यालय (HBTU), कानपुर के सहयोग से स्थापित किया जाएगा। वहीं दूसरा सेंटर आईआईटी-बीएचयू द्वारा मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT), गोरखपुर के साथ संयुक्त रूप से स्थापित किया जाएगा। दोनों सेंटर साझेदार संस्थानों के परिसरों से संचालित होंगे। हब-एंड-स्पोक मॉडल पर कार्य करेगा सेंटर   यूपी नेडा के एमडी एंड डायरेक्टर इंद्रजीत सिंह ने बताया कि इन सेंटरों में चलने वाली परियोजनाओं में दोनों संस्थान बारी-बारी से नेतृत्व करेंगे। यह सेंटर हब-एंड-स्पोक मॉडल पर कार्य करेगा, जिसके तहत प्रदेश के अन्य इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थानों को इससे जोड़ा जाएगा। सेंटर में बायोमास आधारित एवं इलेक्ट्रोलाइज़र आधारित ग्रीन हाइड्रोजन पर अनुसंधान और तकनीकी विकास किया जाएगा। इन्क्यूबेशन सेंटर भी होगा स्थापित ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2024 के तहत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में एक इन्क्यूबेशन सेंटर भी स्थापित किया जाएगा। इसके माध्यम से हर वर्ष 10 स्टार्टअप्स को और 5 वर्षों में कम से कम 50 स्टार्टअप्स को सहयोग और मार्गदर्शन दिया जाएगा। इसके लिए ₹25 लाख प्रतिवर्ष (5 वर्षों तक) की सहायता का प्रावधान किया गया है। सेंटर प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलीटेक्निक संस्थानों के लिए पाठ्यक्रम निर्माण, मेंटरिंग, तकनीकी प्रदर्शनियों और कॉन्फ्रेंसों के आयोजन में भी सहयोग करेगा। साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और उपयोग से जुड़े विषयों पर राज्य सरकार को नीतिगत सुझाव भी देगा। ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन तथा बसें चलाने के भी होंगे प्रयास सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में कम से कम 50 प्रतिशत औद्योगिक भागीदारी उत्तर प्रदेश से होगी, जिससे राज्य को ग्रीन हाइड्रोजन के औद्योगिक और व्यावसायिक उपयोग में अधिक लाभ मिल सके। हरित परिवहन को बढ़ावा देने के लिए रेल मंत्रालय के सहयोग से ग्रीन हाइड्रोजन आधारित ट्रेनों तथा उत्तर प्रदेश स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (UPSRTC) के माध्यम से कानपुर–लखनऊ, वाराणसी और गोरखपुर रूट पर ग्रीन हाइड्रोजन बसें चलाने के प्रयास भी किए जाएंगे। ग्रीन हाइड्रोजन के लिए इस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना उत्तर प्रदेश को इस क्षेत्र में एक प्रमुख नवाचार और औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अनुसंधान, स्टार्टअप्स और उद्योगों के सहयोग से यह पहल स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने, कार्बन उत्सर्जन कम करने, निवेश आकर्षित करने और राज्य में रोजगार के नए अवसर सृजित करने में सहायक होगी।

बांग्लादेश में पुलिस की चुप्पी पर सवाल, अधिकारी बोले- हस्तक्षेप से हो सकती थी गोलीबारी

ढाका  बांग्लादेश में भीड़तंत्र काम कर रहा है जहां पुलिस स्थिति को संभालने में नाकाम दिख रही है. इंकलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में भड़की हिंसा से भारी नुकसान हुआ है. बीते गुरुवार को दंगाइयों ने बांग्लादेश के दो प्रमुख अखबारों के ऑफिस को आग के हवाले कर दिया. पुलिस वहां खड़ी देखती रही लेकिन दंगाइयों को रोकने की कोशिश नहीं की. अब ढाका महानगर पुलिस (DMP) के एडिशनल पुलिस कमिश्नर (क्राइम एंड ऑपरेशन्स) एसएन एमडी नजरुल इस्लाम ने कहा है कि भीड़ हिंसा के खिलाफ पुलिस ने सख्ती से कार्रवाई इसलिए नहीं की, क्योंकि पुलिसकर्मियों के निशाना बनने का डर था. उन्होंने बताया कि करवान बाजार में 'प्रथम आलो' और 'द डेली स्टार' के दफ्तरों पर हुए हमलों, तोड़फोड़ और आगजनी के दौरान अगर पुलिस हस्तक्षेप करती तो गोलीबारी हो सकती थी, जिससे दो से चार लोगों की मौत भी हो सकती थी. एडिशनल पुलिस कमिश्नर ने क्या कहा? जब उनसे पूछा गया कि क्या DMP प्रथम आलो, द डेली स्टार और उदिची पर हुए हमलों को रोकने में सक्षम थी, तो नजरुल इस्लाम ने कहा, 'हम सक्षम हैं. यह नहीं कि हम हर घटना को रोक सकते हैं. पिछले अनुभवों के आधार पर, जब जनभावना भड़क जाती है तो राज्य अधिकतम संसाधनों का इस्तेमाल करता है. करवान बाजार की घटना वाले दिन अगर हम हस्तक्षेप करते, तो गोलीबारी हो सकती थी और संभवतः दो से चार लोगों की जान जा सकती थी, इसके बाद पुलिस पर भी हमले होते.' उन्होंने आगे कहा, 'उस दिन दो-चार पुलिसवाले मारे जाते… आप जानते हैं कि पुलिस बल एक साल पहले ही एक बड़े आघात से गुजरा है और हम फिर से खड़ा होने की कोशिश कर रहे हैं. चुनाव आने वाले हैं. अगर पुलिस बल में फिर कोई हताहत होता, तो मैं इस बल के साथ आगे नहीं बढ़ पाता. इसी कारण हम वहां कार्रवाई में नहीं जा सके. किसी भी मानव जीवन की हानि नहीं हुई. इतनी बड़ी घटना में भी जान-माल का नुकसान न होना, मैं इसे हमारी उपलब्धि मानता हूं.'   

सोना और चांदी के प्राइस रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं, जानें अमेरिका से जुड़ी तीन वजहें

नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतों (Gold-Silver Rates) ने इस साल की शुरुआत से ही हैरान किया है और हर रोज अपने रिकॉर्ड तोड़ते नजर आए. हालांकि, बीते कुछ समय में सोना तेजी से फिसला भी, लेकिन अब साल 2025 खत्म होने से पहले ये फिर से गदर मचा रहा है. सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर Gold Rate खुलते ही करीब 1500 रुपये चढ़कर 1.38 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार निकल गया. अचानक सोने के भाव में फिर से लौटी इस तेजी के पीछे की वजह के बारे में बात करें, तो इसके 3 बड़े कारण सामने आ रहे हैं और इन तीनों का ही कनेक्शन अमेरिका (US Connection Of Gold Price Hike) से है. मंगलवार को सोना रॉकेट की तरह भागा सबसे पहले बात करते हैं मंगलवार को Gold Rate Update के बारे में, तो एमसीएक्स पर लगातार दूसरे कारोबारी दिन सोने के भाव में तूफानी तेजी आई है. कारोबार के दौरान 5 फरवरी की एक्सपायरी वाले 24 Karat Gold का रेट 1519 रुपये या 1.11% की उछाल के साथ 1.38 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार चल रहा था. वहीं घरेलू बाजार में सोने की कीमत को देखें, तो इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com के मुताबिक, बीते कारोबारी दिन सोमवार को 24 कैरेट सोना 1,33,970 रुपये पर क्लोज हुआ था और मंगलवार को खुलने के साथ ही ये 2163 रुपये रुपये महंगा होकर 1,36,133 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया.  एशियाई बाजारों में हाजिर सोने का भाव 4,445.69 डॉलर प्रति औंस के लाइफ टाइम हाई लेवल पर पहुंच गया. चांदी तो MCX पर खुलते ही 3000 रुपये से ज्यादा की उछाल के साथ 2,16,596 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई. वहीं अंतरराष्ट्री बाजार में Silver Price भी इसी रफ्तार से भागा. इसकी हाजिर कीमत 0.19% की उछाल के साथ 69.15 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई अचानक क्यों लौटी सोने में तेजी?  दिसंबर महीने की शुरुआत में Gold Price में गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन महीने के आखिरी दिनों में ये फिर से रॉकेट बना नजर आने लगा है. 2025 में अब तक इसमें 70% की जोरदार वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि इस महीने टूटने के बाद फिर खड़ा हुआ सोना लगभग 10% उछल चुका है. बात करें, अचानक गोल्ड रेट में लौटी इस तेजी के पीछे के कारणों के बारे में तो निवेशकों का फिर से सुरक्षित निवेश ठिकानों की ओर रुख करना है और इसका सीधा कनेक्शन अमेरिका से है.  पहला कारण:  भू-राजनीतिक टेंशन Gold Rate के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के पीछे पहला बड़ा कारण फिर से बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है. यह तेजी तब आई है, जब अमेरिका ने वेनेजुएला (US Vs Venezuela) के तेल ले जा रहे टैंकरों को जब्त करने के प्रयास तेज कर दिए. अमेरिका के इस एक्शन के चलते एनर्जी सप्लाई में रुकावट और भू-राजनीतिक हालातों को लेकर चिंता बढ़ गई है. इसके साथ ही निवेशक फिर से सुरक्षित ठिकाना माने जाने वाले Gold की तरफ भागे हैं.  दूसरा कारण: US को सेंट्रल बैंकों का झटका सोने की बढ़ती कीमतों के पीछे दूसरा बड़ा कारण दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों द्वारा की जा रही Gold Buying को भी माना जा रहा है. इससे जहां Gold Rate Rise हो रहा है, तो अमेरिका को बड़ा झटका लगा है. बीते दिनों आई एक रिपोर्ट की मानें, तो 1996 के बाद करीब तीन दशक में पहली बार वैश्विक केंद्रीय बैंक रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी अमेरिकी ट्रेजरी से ज्यादा हुई है. इसमें बताया गया था कि साल 2022 से ही केंद्रीय बैंकों ने हर साल करीब 1000 टन सोने की खरीद की है. ग्लोबल इकोनॉमिक स्थितियां बदली हैं और Trump Tariff नीतियों ने सोने में जोरदार तेजी ला दी है.  तीसरा कारण: FED Rate Cut के संकेत Gold Price Rise के पीछे तीसरा बड़ा कारण भी अमेरिका से ही जुड़ा हुआ है. दरअसल, हाल ही में US FED ने पॉलिसी रेट में कटौती की थी. वहीं बाजार अब अगले साल 2026 में भी अमेरिकी ब्याज दरों में गिरावट की उम्मीद कर रहे हैं. व्यापारी अगले वर्ष अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दो Rate Cut की संभावना जता रहे हैं. इसके अलावा फेड गवर्नर क्रिस्टोफर वालर ने भी ऐसे संकेत दिए हैं जिसने सोना जैसी गैर-लाभकारी संपत्तियों को समर्थन दिया है.

न्यूजीलैंड से कीवी की सस्ती आपूर्ति, भारत में 50 रुपये में मिलेगा अब स्वादिष्ट फल

 नई दिल्‍ली अमेर‍िका ने जबसे टैरिफ को लेकर भारत से ट्रेड डील पर पेंच फंसाया, तबसे भारत की रणनीति बदली हुई नजर आ रही है. भारत एक के बाद एक देशों के साथ लगातार डील कर रहा है, वह भी फ्री ट्रेड डील (FTA). ताकि भारतीय प्रोडक्‍ट्स की डिमांड अमेरिका के अलावा अन्‍य देशों में भी बढ़े और अमेरिका के टैरिफ का भी खास असर न हो.  FTA  डील को लेकर सरकार का मकसद भारतीय एक्‍सपोर्ट को नई ऊंचाई पर ले जाना है. हाल ही में भारत ने यूके, ओमान और अब न्‍यूजीलैंड के साथ फ्री ट्रेड डील की है. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत आने वाले विदेशों से समान सस्‍ते होंगे और यहां से जाने वाले प्रोडक्ट के रेट कम होंगे, जिससे दोनों देशों को संतुलित व्‍यापार अवसर मिलेगा.  भारत और न्‍यूजीलैंड के बीच डील से कीवी फल को लेकर खूब चर्चा हो रही है कि इसका आयात भारत में बढ़ सकता है, क्‍योंकि एफटीए डील के बाद इसके रेट कम हो सकते हैं. अभी भारत में एक कीवी का एवरेज प्राइस 50 रुपये या उससे ज्‍यादा है. इसके दाम पर कितना असर पड़ेगा? ये जानने से पहले कीवी के भारत में इम्‍पोर्ट और उसपर ड्यूटी के गणित को समझना जरूरी है.  न्‍यूजीलैंड से कितना कीवी भारत आता है?  न्यूजीलैंड कीवी का बड़ा उत्पादक देश है, लेकिन भारत सिर्फ 5 फीसदी ही कीवी न्‍यूजलैंड से आयात करता है. 2023 में भारत ने कुल लगभग 55,000 टन कीवी आयात किया था. इसमें न्‍यूजीलैंड से करीब 2,700 टन कीवी न्यूजीलैंड से आया था. हालांकि अब न्‍यूजीलैंड से एफटीए होने के कारण इसपर लगने वाला टैक्‍स कम हो जाएगा. भारत भी बड़े मात्रा में न्‍यूजीलैंड से कीवी आयात कर सकता है, क्‍योंकि इम्‍पोर्ट टैक्‍स हटने से न्‍यूजीलैंड से कीवी अन्‍य देशों की तुलना में सस्‍ते दरों पर मिलेंगे.  न्‍यूजीलैंड की कीवी पर कितना टैक्‍स?  भारत न्‍यूजीलैंड से बहुत सी चीजें आयात करता है, जिसमें फल (कीवी), ऊन, लकड़ी, ड्राई फ्रूट और अन्य कृषि प्रोडक्‍ट्स शामिल हैं. अब एफटीए डील के बाद इन चीजों में से ज्‍यादातर प्रोडक्‍ट्स पर टैक्‍स घटकर 0 कर दिया जाएगा. कीवी पर अभी 33 फीसदी इम्‍पोर्ट टैक्‍स लगता है, लेकिन एफटीए डील के बाद यह 0% हो जाएगा.   कितने कम हो जाएंगे न्‍यूजीलैंड वाले कीवी?  FTA के तहत पहले 6,250 टन कीवी पर ड्यूटी फ्री रखा गया है. अगले कुछ सालों में यह कोटा बढ़ाकर 15,000 टन तक करना है, लेकिन अगर कोटा से भी बाहर आयात हुआ तो थोड़ा टैक्‍स ही लगेगा यानी पहले से कम टैक्‍स लगेगा.  इसका मतलब है कि इम्‍पोर्ट टैक्‍स कम होने कीवी की थोक कीमत घट जाएगी. जिस कारण रिटेल प्राइस में भी कमी आएगी.  कीमत में ठीक भाव लगाना मुश्किल है, लेकिन कीमत में कितनी कमी आएगी यह कई चीजों पर निर्भर करेगा. इसमें पहला तो यह देखना होगा कि न्‍यूजीलैंड से कितना कीवी आता है, फिर लॉजिस्टिक कॉस्‍ट और फ्रेट कॉस्‍ट कितनी पड़ती है. इसके बाद स्‍थानीय मंडी भाव और इम्‍पोर्ट डिमांड जैसी चीजें इसके दाम को तय करेंगे. लेकिन कुछ इकोनॉमिस्‍ट के हिसाब से टैक्‍स के बराबर कटौती आ सकती है यानी न्‍यूजीलैंड वाले कीवी पर रेट 20 से 30 फीसदी तक कम हो सकती है. 

नववर्ष पर भक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी, तिरुपति बालाजी मंदिर में वैकुंठ द्वार दर्शन की व्यवस्था

आंध्र प्रदेश के तिरुमला की पहाड़ियों पर स्थित तिरुपति बालाजी का मंदिर यानी भगवान विष्णु के अवतार श्री वेंकटेश्वर स्वामी के वैकुंठ द्वार दर्शन को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. दरअसल, वैकुंठ द्वार के दर्शन 30 दिसंबर से 8 जनवरी तक किए जाएंगे, यानी श्रद्धालु ये दर्शन 10 दिनों तक कर सकेंगे. इसके लिए बड़े स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं और दिन में तीन स्लॉट में दर्शन होंगे, जिनकी एंट्री हर बार अलग रास्ते से की जाएगी. इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. इसी को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा, भीड़भाड़ या अव्यवस्था का सामना न करना पड़े. इसी के तहत तिरुमला तिरुपति देवस्थानम(टीटीडी) ने वैकुंठ द्वार दर्शन के पहले तीन दिनों में तीन क्षेत्रों से निर्धारित समय के लिए श्रद्धालुओं को प्रवेश देने का निर्णय लिया है. इसके लिए, ई-डीआईपी सिस्टम के माध्यम से 30 दिसंबर (एकादशी), 31 दिसंबर (द्वादशी) और 1 जनवरी के लिए कुल 1.76 लाख श्रद्धालुओं को अग्रिम रूप से निर्धारित सर्व दर्शन टिकट आवंटित किए गए हैं. श्री वेंकटेश्वर स्वामीः 5 घंटे होंगे VIP दर्शन बताया गया है कि जिन श्रद्धालुओं के पास निर्धारित दर्शन टोकन हैं, उन्हें वैकुंठ द्वार के पहले दिन के 5 घंटे के वीआईपी दर्शन को छोड़कर पूरे समय दर्शन करने की अनुमति होगी. इस संदर्भ में, यह बताया गया है कि प्रतिदिन 60,000 से अधिक श्रद्धालुओं को कुल 14 स्लॉट में टोकन जारी किए गए हैं और उनके लिए तीन क्षेत्रों में प्रवेश मार्ग स्थापित किए गए हैं. टीटीडी ने कहा कि सुबह के स्लॉट में श्रद्धालुओं को कृष्णा तेजा सर्कल से, दोपहर के स्लॉट में श्रद्धालुओं को एटीजीएच से और रात के स्लॉट में श्रद्धालुओं को सिलातोरणम सर्कल से दर्शन करने की अनुमति होगी. टीटीडी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वैकुंठ द्वार दर्शन के संदर्भ में तीन दिनों तक बिना टोकन वाले श्रद्धालुओं को दर्शन करने की अनुमति नहीं होगी. पुलिस ने जारी की श्रद्धालुओं के लिए गाइडलाइंस     श्रद्धालु टीटीडी की ओर से निर्धारित समय सीमा के दौरान ही प्रवेश द्वारों पर पहुंचें.     टोकन, आधार कार्ड-पहचान दस्तावेज साथ ले जाना अनिवार्य है.     बताए गए प्रवेश मार्गों का ही पालन करें और रूट में कोई परिवर्तन नहीं करें.     पुलिस और टीटीडी कर्मियों द्वारा दिए गए आदेशों और निर्देशों का पालन करें.     श्रद्धालु ग्रुप में इकट्ठा न होकर शांति और सुरक्षा बनाए रखने में सहयोग करें.     यदि श्रद्धालुओं को कोई संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति दिखाई दे तो तुरंत निकटतम पुलिस को सूचित करें.  

राजनीति का ‘बैंक बैलेंस’ खेल: बीजेपी सबसे अमीर, कांग्रेस बेहद पीछे, आंकड़े कर देंगे हैरान

नई दिल्ली  दिल्ली में इस साल हुए विधानसभा चुनावों के बाद चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों द्वारा सौंपे गए वित्तीय खुलासों में देश की प्रमुख पार्टियों की आर्थिक स्थिति का बड़ा अंतर सामने आया है। इन खुलासों के मुताबिक, केंद्र और अब दिल्ली की सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पास 6,900 करोड़ रुपये से अधिक की बैंक जमा राशि है। वहीं उसकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी और देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के पास पार्टी मुख्यालय से लेकर राज्य और जिला इकाइयों को मिलाकर मात्र 53 करोड़ रुपये की राशि है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दिलचस्प तथ्य यह है कि सीमित चुनावी उपस्थिति के बावजूद बहुजन समाज पार्टी (BSP) के खातों में 580 करोड़ रुपये से अधिक की जमा राशि दर्ज की गई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि चुनावी प्रदर्शन और पार्टी की वित्तीय स्थिति के बीच सीधा संबंध हमेशा नहीं होता। अन्य दलों की स्थिति चुनाव आयोग को सौंपे गए विवरण के अनुसार,     आम आदमी पार्टी (AAP) की केंद्रीय इकाई के पास 9.9 करोड़ रुपये     भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPM) के पास 4 करोड़ रुपये     भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के पास मात्र 41 लाख रुपये     जबकि BSP के खाते में 580 करोड़ रुपये की राशि दर्ज की गई है। ये आंकड़े भारत निर्वाचन आयोग को दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद विभिन्न दलों द्वारा दिए गए बैंक बैलेंस विवरण पर आधारित हैं। कांग्रेस को 2024-25 में 517 करोड़ रुपये का चंदा इस बीच, 24 अक्टूबर को चुनाव आयोग में दाखिल योगदान विवरण (कंट्रीब्यूशन स्टेटमेंट) में कांग्रेस ने बताया कि उसे वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 517 करोड़ रुपये का चंदा प्राप्त हुआ है। यह वह राशि है जो 20,000 रुपये से अधिक के व्यक्तिगत दान के रूप में मिली और जिसे कानून के तहत सार्वजनिक रूप से घोषित करना अनिवार्य है। नियमों के अनुसार, राजनीतिक दल 20,000 रुपये से कम के दान देने वालों का विवरण सार्वजनिक नहीं करते, जबकि कुल संग्रह का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं छोटे-छोटे दानों से आता है। राजनीतिक दलों के फंड संग्रह के प्रमुख स्रोतों में व्यक्तिगत दानदाता, कॉरपोरेट संस्थान और विभिन्न ट्रस्ट शामिल होते हैं। बिहार चुनावों के बाद अब तक कोई रिपोर्ट नहीं उधर, बिहार में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद अब तक किसी भी राजनीतिक दल ने चुनाव आयोग को योगदान या बैंक बैलेंस से जुड़ी कोई रिपोर्ट जमा नहीं कराई है। इससे वहां दलों की मौजूदा वित्तीय स्थिति को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं हो पाई है।

अरावली संकट पर सियासी घमासान: हरियाणा कांग्रेस ने विधानसभा में सरकार को घेरा

चंडीगढ़ हरियाणा विधानसभा विंटर सेशन के बाद नेता प्रतिपक्ष पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा आज पत्रकारों से रूबरू होंगे। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि पहाड़ काटे गए तो रेगिस्तान दिल्ली, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक बढ़ सकता है। अरावली बारिश के पानी को रोककर ग्राउंड वाटर रिचार्ज करता है, जो बंद हो जाएगा। दिल्ली–एनसीआर में पानी की समस्या अधिक गंभीर होगी।पहाड़ टूटने से बाढ़ की समस्या बढ़ेगी। वन्यजीवों का नुकसान होगा। तामपाल में बढ़ोतरी होगी। अवैध खनन और माफिया राज बढ़ेगा। अरावली को काटने का मतलब है, पानी, हवा, जंगल और जीवन को काटना।    हरियाणा विधानसभा में अरावली क्षेत्र में 100 मीटर तक खुदाई करने की अनुमति संबंधी केंद्र के फैसले पर विपक्षी दल कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है। विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि अरावली क्षेत्र में 100 मीटर तक खुदाई से पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा। केंद्र सरकार द्वारा जो फैसला लिया गया है, हरियाणा सरकार को उस पर अपना स्टैंड स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान सरकार द्वारा उन विषयों पर चर्चा की, जो विषयहीन थे, लेकिन अरावली लाखों-करोड़ों लोगों के जीवन की रेखा है, जिसे बचाने की जरूरत है। अरावली पर्वत श्रृंखला दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है। यह केवल पहाड़ नहीं, बल्कि उत्तर भारत का प्राकृतिक सुरक्षा कवच है। इसे काटने या खनन करने से गंभीर पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं।