samacharsecretary.com

इंदौर में साफ-सफाई की मिसाल, लेकिन भागीरथपुरा में गंदा पानी पीकर बुजुर्ग की मौत, 150 लोग बीमार; सीएम ने लिया संज्ञान

इंदौर मध्य प्रदेश का इंदौर शहर लगातार 8 साल से देश का सबसे स्वच्छ शहर होने का खिताब अपने नाम करता आया है। अब इसी शहर में गंदा पानी पीने की वजह से 150  से ज्यादा लोग बीमार पड़ गए हैं। पानी पीने के बाद इन लोगों को उल्टी, दस्त और शरीर में पानी की कमी जैसी दिक्कतें हुईं और वे अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हुए हैं। लोगों का शिकायत है कि वे नगर निगम की ओर से सप्लाई किए जाने वाला पानी पीने के बाद बीमार पड़े हैं। मामला गंभीर होने के बाद पानी का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया है। इस मामले में इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्हव ने कहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। भागीरथपुरा में डायरिया से मौत के बाद मचा हड़कंप, CM ने लिया संज्ञान. गंदे पानी की समस्या को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संज्ञान लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएम डॉ. मोहन यादव ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को सभी मरीजों का सही इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। सीएम ने कहा कि इलाज में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जरूरी दवाएं, एक्सपर्ट और संसाधन तुरंत उपलब्ध कराए जाएं। वहीं इलाज के लिए भर्ती एक बुर्जुग व्यक्ति की मौत हो गई। उल्टी और दस्त के कारण उसे कमजोरी आ गई थी। सुबह कुछ मरीजों को परदेशीपुरा के अस्पताल से छुट्टी भी हो गई है। दूषित पेयजल की आशंका के चलते नगर निगम ने टैंकरों से मंगलवार को बस्ती में जलापूर्ति की। अफसरों ने भी बस्ती का दौरा किया है। बस्ती से पानी के जो नमूने लिए हैं, उनकी रिपोर्ट मंगलवार को आएगी। पांच दिन में डेढ़ सौ से ज्यादा लोग बीमार हुए हैं। फिलहाल 15 लोग अलग-अलग अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें उल्टी दस्त और कमजोरी की शिकायत है। इस घटना को लेकर स्वास्थ्य विभाग भी देरी से जागा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रशासन को जरूरी निर्देश दिए हैं। सोमवार रात मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के दौरे के बाद डाॅक्टर मरीजों की जानकारी जुटाने अस्पताल पहुंचे। इलाज के लिए वर्मा अस्पताल में भर्ती नंदलाल पाल की मौत हुई। उनकी उम्र 80 वर्ष थी। उनकी मौत की पुष्टि क्षेत्रीय पार्षद कमल वाघेला ने भी की है। बस्ती में भी स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात की गई है। जिन लोगों को दस्त और उल्टी की शिकायत हो रही है। उन्हें दवाएं दी जा रही हैं। मंगलवार सुबह मेयर पुष्य मित्र भार्गव, पार्षद कमल वाघेला के साथ बस्ती पहुंचे और जलापूर्ति की स्थिति देखी। नर्मदा विभाग के अफसरों का कहना है कि पानी की जांच की गई है। प्रारंभिक तौर पर पानी दूषित नहीं पाया गया। बस्ती में डायरिया किस वजह से फैला। इसकी जांच के लिए पानी के सैंपल लिए गए हैं। रहवासियों का कहना है कि बस्ती में दूषित पेयजल की सप्लाई हो रही है। नलों में पहले गंदा पानी आता है। फिर कुछ देर के लिए साफ पानी मिलता है। कई बार गंदे पानी की शिकायत अफसरों से की गई, लेकिन समस्या का हल नहीं हुआ। मरीजों का इलाज कर रहे डाक्टरों का कहना है कि पांच दिन से बस्ती के लोग आ रहे हैं। पतले दस्त और उल्टी ज्यादा होने से शरीर में कमजोरी आ गई है। रोज पांच-सात मरीज आ रहे हैं। सभी में डायरिया के लक्षण पाए गए हैं, हालांकि खतरे की बात नहीं है। देर रात नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, MLA रमेश मेंदोला और मेयर पुष्यमित्र भार्गव वर्मा ने अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने मरीजों से बात की और स्थिति का जायजा लिया। मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि सभी मरीजों का इलाज पूरी तरह से फ्री होगा और जिन लोगों ने इलाज के लिए पैसे जमा किए हैं, उन्हें वापस कर दिए जाएंगे। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि जब तक स्थिति सामान्य न हो जाए, वे उबला हुआ पानी पिएं। कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि शिकायत मिलते ही मेडिकल और प्रशासनिक टीमों को मौके पर भेज दिया गया था। पूरे इलाके पर लगातार नजर रखी जा रही है, और स्वास्थ्य विभाग को इलाज का रेगुलर रिव्यू करने के निर्देश दिए गए हैं। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर वार्ड ऑफिस पर विरोध प्रदर्शन किया। विधानसभा क्षेत्र 2 के जोन नंबर 8 के कार्यकर्ताओं ने शंख और घंटियां बजाकर और मटके फोड़कर नगर निगम प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि वार्ड 30, 37 और 28 में लंबे समय से गंदे पानी, जाम ड्रेनेज लाइनों, कूड़े के ढेर और सफाई की अनदेखी की समस्या है, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई। भागीरथपुरा की घटना ने एक बार फिर शहरी इलाकों में पीने के पानी की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं के रखरखाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासन के अगले कदम पर हैं।  

मिशन शक्ति 5.0 के तहत प्रदेश भर में 1600 मिशन शक्ति केंद्रों की स्थापना की गई थी

स्पेशल  योगी सरकार मिशन शक्ति केंद्रों को करेगी और सशक्त, महिला सुरक्षा को मिलेगा बल  मिशन शक्ति 5.0 के तहत प्रदेश भर में 1600 मिशन शक्ति केंद्रों की स्थापना की गई थी  अगले वर्ष मिशन शक्ति केंद्रों को मिलेगी दो पहिया वाहन और मोबाइल हैंडसेट की सौगात  6400 नई स्कूटी और 1600 मोबाइल हैंडसेट खरीदने पर किया जा रहा विचार   67 करोड़ रुपये से खरीदी जाएगी स्कूटी और मोबाइल हैंडसेट  लखनऊ  योगी सरकार आधी आबादी की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को नई दिशा देने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में मिशन शक्ति अभियान के तहत स्थापित मिशन शक्ति केंद्रों को और अधिक प्रभावी एवं सशक्त बनाने की तैयारी है। मिशन शक्ति 5.0 के तहत प्रदेश भर में स्थापित 1600 मिशन शक्ति केंद्रों को अगले वर्ष अत्याधुनिक संसाधनों से लैस किया जाएगा, जिससे महिला अपराधों की रोकथाम और पीड़ित महिलाओं को त्वरित सहायता सुनिश्चित की जा सके। योगी सरकार द्वारा सरकार की योजना के अनुसार वर्ष 2026 में मिशन शक्ति केंद्रों को दो पहिया वाहन और मोबाइल हैंडसेट उपलब्ध कराए जाएंगे।  हर मिशन शक्ति केंद्र को चार-चार स्कूटी और एक-एक मोबाइल हैंडसेट दिये जाएंगे महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन की नोडल अधिकारी एडीजी पद्मजा चौहान ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मिशन शक्ति 5.0 अभियान के तहत प्रदेश भर में 1600 मिशन शक्ति केंद्र/ थानों की स्थापना की गई थी। वहीं अब मिशन शक्ति केंद्र को और अधिक सशक्त करने के लिए विभिन्न कदम उठाये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रत्येक मिशन शक्ति केंद्र पर 4 स्कूटी और एक-एक मोबाइल हैंडसेट की आवश्यकता सामने आ रही है। ऐसे में मिशन शक्ति केंद्र के लिए कुल 6,400 नई स्कूटी और 1,600 मोबाइल हैंडसेट खरीदने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए जल्द ही सरकार काे प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा। इन संसाधनों में करीब 67 करोड़ रुपये खर्च आएगा। उन्होंने बताया कि सरकार से हरी झंडी मिलने और बजट आवंटित होने के बाद अगले वर्ष इन संसाधनों की खरीद की जाएगी। इन संसाधनों के माध्यम से मिशन शक्ति की टीमों की पहुंच गांव-गांव और मोहल्लों तक और मजबूत होगी, जिससे महिलाओं की शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई संभव हो सकेगी। हैंडसेट से रियल टाइम मॉनिटरिंग और शिकायत दर्ज करने में मिलेगी सहायता एडीजी पद्मजा चौहान ने बताया कि प्रदेश की आधी आबादी की सुरक्षा और उत्थान योगी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। महिला अपराधों पर सख्त कार्रवाई, त्वरित न्याय और पीड़िताओं को संवेदनशील सहयोग देने के उद्देश्य से मिशन शक्ति अभियान को लगातार विस्तार दिया जा रहा है। मिशन शक्ति केंद्र महिलाओं के लिए न केवल सहायता और परामर्श का केंद्र हैं, बल्कि ये उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से महिला हेल्पलाइन, काउंसलिंग, कानूनी सहायता, मेडिकल सपोर्ट और पुनर्वास जैसी सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जा रही हैं। वहीं दो पहिया वाहन मिलने से मिशन शक्ति की महिला कर्मी और पुलिस टीम किसी भी आपात स्थिति में तेजी से मौके पर पहुंच सकेंगी। वहीं, मोबाइल हैंडसेट से रियल टाइम मॉनिटरिंग, शिकायत दर्ज करना और उच्च अधिकारियों से समन्वय और बेहतर होगा। नए संसाधन से मिशन शक्ति केंद्र की बढ़ेगी कार्यक्षमता मिशन शक्ति केंद्रों को मिलने वाले नए संसाधन महिला अपराध की रोकथाम में मील का पत्थर साबित होंगे। इससे न सिर्फ पुलिस और प्रशासन की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि आम महिलाओं में सुरक्षा का भरोसा भी मजबूत होगा। योगी सरकार का लक्ष्य है कि उत्तर प्रदेश को महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित और अनुकूल प्रदेश बनाया जाए, जहां वे बिना भय के शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन में आगे बढ़ सकें। मालूम हो कि योगी सरकार द्वारा बीते वर्षों में महिला सुरक्षा को लेकर कई ऐतिहासिक पहल की हैं। एंटी रोमियो स्क्वॉड, महिला हेल्पलाइन 1090, 112 आपात सेवा, पिंक बूथ, महिला डेस्क और फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसे कदमों से महिला अपराधों में उल्लेखनीय कमी आई है।

मेले में चाकूबाजी, कांग्रेस पार्षद समेत दो घायल, पुलिस की त्वरित कार्रवाई, दो आरोपी गिरफ्तार

बालोद  जिले से चाकूबाजी की वारदात सामने आई है. दल्लीराजहरा से डौंडीलौहारा के मड़ई मेला देखने पहुंचे कांग्रेस पार्षद समेत 2 लोगों पर चाकू से हमला हो गया. घायलों को गले और सिर पर गंभीर चोट आई है, जिनका फिलहाल अस्पताल में इलाज जारी है. जानकारी के मुताबिक, दल्लीराजहरा से 6 युवक मड़ई मेला देखने के लिए सोमवार को डौंडीलोहारा गए हुए थे. इस दौरान युवकों की दूसरे गुट से किसी बात पर बहस हो गई. अचानक भरे मेले में आरोपियों ने युवकों पर चाकू से वार कर दिया. हमले में दल्लीराजहरा के वार्ड 16 पार्षद पावेंद्र कोडप्पा और एक अन्य घायल हो गया. उन्हें पेट, गले और सिर पर गंभीर चोट आई है. घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है. वहीं चाकूबाजी की शिकायत पर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.

आधुनिक, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य तंत्र का प्रदेशवासियों ने उठाया लाभ

ईयर इंडर-2025 प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को मिला नया आयाम, प्रदेशवासियों ने लिया भरपूर लाभ आधुनिक, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य तंत्र का प्रदेशवासियों ने उठाया लाभ कई नई स्वास्थ्य इकाइयों का हुआ लोकार्पण, अस्पतालों का शिलान्यास और आईसीयू का भी हुआ विस्तार मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य पर रहा फोकस, पीडियाट्रिक केयर यूनिट और न्यूबॉर्न स्टेबलाइजेशन यूनिट में हुई बढ़ोत्तरी  ई-संजीवनी, टेलीमेडिसिन, एंबुलेंस सेवाएं और टीबी उन्मूलन में हुई उल्लेखनीय उपलब्धि लखनऊ वर्ष 2025 अपनी खट्टी-मिठी यादों के साथ हम सबसे विदा लेने को बकरार है। कहने को तो ये एक साल है, जो नियती के अनुसार हर साल आता है और फिर समय के पहिये की गिनती पूरी होने के बाद विदा ले लेता है, लेकिन वर्ष 2025 प्रदेशवासियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के मजबूत ढ़ाचे के विस्तार देने में अपनी अहम भूमिका रखता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वर्ष 2025 स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ है। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने इस वर्ष आधारभूत ढांचे के विस्तार से लेकर अत्याधुनिक इलाज सुविधाओं तक अनेक बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। इन प्रयासों का सीधा लाभ प्रदेश की करोड़ों जनता को मिला है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सुलभ, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण बनीं। हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मिली रफ्तार, 83 नई स्वास्थ्य इकाइयों का हुआ लोकार्पण अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरुप वर्ष 2025 में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूती प्रदान की गयी है। इस क्रम में इमरजेंसी कोविड रिलीफ पैकेज (ECRP)के तहत प्रदेश में चिकित्सा ढांचे को अभूतपूर्व मजबूती दी गई। वर्ष 2025 में कुल 83 नई स्वास्थ्य इकाइयों का लोकार्पण किया गया तथा एक बड़े अस्पताल का शिलान्यास हुआ। इनमें 26 आईपीएचएल लैब, 38 पचास बेड के फील्ड अस्पताल, 13 जनपदीय ड्रग वेयरहाउस, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सीसीबी यूनिट और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। इसके साथ ही सीतापुर में 200 बेड के जिला चिकित्सालय का शिलान्यास भी किया गया। प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में 1800 और जिला अस्पतालों में 1029 आईसीयू बेड स्थापित किए गए। ऑक्सीजन आपूर्ति को सुदृढ़ करने के लिए मेडिकल गैस पाइपलाइन सिस्टम (MGPS)सहित 49 एलएमओ स्टोरेज टैंक स्थापित किए गए। इससे गंभीर मरीजों को समय पर जीवन रक्षक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।  मां और नवजात शिशु स्वास्थ्य पर विशेष फोकस एनएचएम की निदेशक डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि योगी सरकार ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इसके तहत 42 बेड वाले पीडियाट्रिक केयर यूनिट जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में स्थापित किए गए। वहीं 32 बेड वाले सभी 23 पीडियाट्रिक यूनिट पूरी से संचालित हुईं। इसके अलावा नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए प्रदेश में 412 न्यूबॉर्न स्टेबलाइजेशन यूनिट्स (NBSU)की स्थापना की गई। वर्ष 2024-25 में बाह्य रोगी सेवाओं में 27 प्रतिशत और अंतः रोगी सेवाओं में 32 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। संस्थागत प्रसव, सिजेरियन डिलीवरी, बड़े और छोटे ऑपरेशन, पैथोलॉजी जांच, एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड सेवाओं में भी उल्लेखनीय इजाफा हुआ। आधुनिक जांच और उपचार सुविधाएं घर के पास प्रदेश के 74 जनपदों में सीटी स्कैन और सभी 75 जनपदों में डायलिसिस सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। जनवरी से नवंबर-25 के बीच 9.42 लाख सीटी स्कैन और 6.50 लाख से अधिक डायलिसिस सत्र संचालित किए गए। आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एसेंशियल ड्रग लिस्ट का विस्तार किया गया, जिससे प्राथमिक से लेकर जिला अस्पताल स्तर तक दवाओं की संख्या बढ़ाई गई। साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 318 अस्पतालों को जोड़ा गया, जिनमें 248 कैंसर उपचार से संबंधित हैं। दिसंबर-25 तक लगभग 3,862 करोड़ रुपये का भुगतान अस्पतालों को किया गया। एंबुलेंस सेवाओं को मजबूत करते हुए 2,249 नई एंबुलेंस बेड़े में जोड़ी गईं, जिनसे लाखों मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया गया। टीबी उन्मूलन अभियान में प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर सराहनीय प्रदर्शन किया। जांच की संख्या में 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई और 7,191 पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 424 प्रतिशत अधिक है। ई-संजीवनी सेवाओं के माध्यम से प्रतिदिन औसतन 75 हजार से अधिक कॉल के साथ उत्तर प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर रहा। मानसिक स्वास्थ्य के लिए टेली-मानस सेवा सफलतापूर्वक लागू की गई, जिससे लाखों लोगों को परामर्श मिला। इसके साथ ही टेलीमेडिसिन और टेली-रेडियोलॉजी सेवाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है।

पायलटों के लिए खुशखबरी: इंडिगो ने भत्ता 50% तक बढ़ाया, जानें कब लागू होगा

नई दिल्ली भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने अपने पायलटों के भत्ते बढ़ाने का फैसला किया है. इससे एयरलाइन के करीब 5,000 पायलटों को सीधा फायदा होगा. नए नियम 1 जनवरी से लागू होंगे. PTI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब कैप्टन को लेओवर के लिए ₹2,000 की जगह ₹3,000 मिलेंगे. वहीं फर्स्ट ऑफिसर के लिए यह भत्ता ₹1,000 से बढ़ाकर ₹1,500 कर दिया गया है. डेडहेडिंग ट्रिप्स के लिए भत्ते में 50% की बढ़ोतरी डेडहेडिंग ट्रिप्स के लिए कैप्टन का भत्ता ₹3,000 से बढ़ाकर ₹4,000 कर दिया गया है. वहीं फर्स्ट ऑफिसर का भत्ता ₹1,500 से बढ़ाकर ₹2,000 कर दिया गया है. डेडहेडिंग का मतलब है, जब क्रू मेंबर ड्यूटी के मकसद से पैसेंजर के तौर पर यात्रा करते हैं. यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब एयरलाइन को हाल ही में रोस्टर से जुड़ी समस्याओं के कारण 4,500 से ज्यादा उड़ानें रद्द करनी पड़ी थीं. पायलटों की शिकायतें दूर करने और उनका मनोबल बढ़ाने के लिए एयरलाइन मैनेजमेंट ने कई दौर की बैठकों के बाद यह कदम उठाया. विदेशी एयरलाइंस दे रही हैं ज्यादा सैलरी इंडिगो इस समय दोहरी चुनौती का सामना कर रही है. एक तरफ घरेलू ऑपरेशंस में दिक्कतें हैं, वहीं दूसरी तरफ विदेशी एयरलाइंस भारतीय पायलटों को बेहतर सैलरी और लाइफस्टाइल पैकेज ऑफर कर रही हैं. पायलटों को नौकरी छोड़ने से रोकने के लिए इंडिगो ने अपने बेनिफिट स्ट्रक्चर में सुधार किया है. वहीं भारत सरकार भी पायलटों की अंतरराष्ट्रीय भर्ती को लेकर कोड ऑफ कंडक्ट तैयार करने पर काम कर रही है. फ्लाइट ड्यूटी नियमों से बढ़ी मुश्किलें नवंबर और दिसंबर की शुरुआत में इंडिगो को कई ऑपरेशनल दिक्कतों का सामना करना पड़ा. इसकी वजह DGCA द्वारा लागू किए गए नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट (FDTL) नियम रहे. एयरलाइन अपने क्रू और रोस्टर को नए नियमों के मुताबिक सही तरीके से मैनेज नहीं कर पाई. इसका नतीजा यह रहा कि नवंबर के आखिर और दिसंबर के पहले हफ्ते में करीब 5,000 उड़ानें रद्द या देरी से चलीं. DGCA की कार्रवाई, विंटर शेड्यूल में 10% कटौती हजारों यात्रियों के फंसने के बाद DGCA ने सख्त कदम उठाया. रेगुलेटर ने इंडिगो को अपने विंटर शेड्यूल में 10% कटौती करने के निर्देश दिए. इसके साथ ही एक जांच कमेटी ने अपनी गोपनीय रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप दी है, जिसमें इंडिगो की प्लानिंग और मैनेजमेंट की कमियों का जिक्र हो सकता है. हवाई यात्रियों की संख्या में 7% की बढ़ोतरी चुनौतियों के बावजूद देश में हवाई यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. नवंबर में घरेलू उड़ानों से 15.3 मिलियन यात्रियों ने सफर किया, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 7% ज्यादा है. जनवरी से नवंबर 2023 के बीच कुल 152.6 मिलियन लोगों ने हवाई यात्रा की, जो सालाना आधार पर 4.26% की बढ़ोतरी दिखाता है. उड़ान और रिफंड से जुड़ी शिकायतें बढ़ीं नवंबर में एयरलाइंस के खिलाफ कुल 1,196 शिकायतें दर्ज की गईं. इनमें से 50% से ज्यादा शिकायतें उड़ान में देरी या रुकावट से जुड़ी थीं. वहीं 17.9% शिकायतें सामान से संबंधित रहीं और 12.5% शिकायतें रिफंड को लेकर दर्ज की गईं. इस दौरान दूसरी एयरलाइंस की तुलना में IndiGo का कैंसलेशन रेट ज्यादा रहा.

धीरेंद्र शास्त्री बोले – “अगर ‘आई लव मोहम्मद’ से कोई दिक्कत नहीं, तो ‘आई लव महादेव’ से क्यों होनी चाहिए?”

 मुरैना  बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के जौरा कस्बे में आयोजित आशीर्वचन कार्यक्रम में कहा कि "हमें ‘आई लव मोहम्मद’ से कोई तकलीफ़ नहीं है, लेकिन जब ‘आई लव महादेव’ गूंजे तो किसी को दिक्कत नहीं होनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि लोग हमें भड़काऊ कहते हैं, लेकिन हम किसी मुस्लिम या ईसाई के खिलाफ नहीं हैं। “हम कट्टर सनातनी हैं। दुख इस बात का है कि तमिलनाडु में भगवान राम का पोस्टर जलाया गया और देश में किसी ने आवाज़ तक नहीं उठाई। ऐसा करने वाले रावण के वंशज हैं और इन्हें फांसी होनी चाहिए।” "हमें सरकारी कागज़ों में नहीं, हर हिंदू के दिल में हिंदू राष्ट्र चाहिए" पंडित शास्त्री ने कहा कि हिंदू अब डरने वाला नहीं रहा। “हमें सरकार के कागजों में हिंदू राष्ट्र नहीं चाहिए, बल्कि हर सनातनी के दिल में हिंदू राष्ट्र की भावना चाहिए। उन्होंने जात-पात और क्षेत्रवाद पर भी चिंता जताई और कहा कि अगर हिंदू एकजुट नहीं हुए तो हालात कश्मीर जैसे हो जाएंगे। “अपने बच्चों को कार-व्यापार नहीं, संस्कार देकर जाओ। तभी धर्मविरोधी ताकतें हमारे बच्चों का मतांतरण नहीं करवा पाएंगी।” "33 करोड़ देवता हैं, नया भगवान बना लो लेकिन" उन्होंने कहा “हमारे पास 33 करोड़ देवता हैं। कम पड़ें तो नया भगवान बना लो, लेकिन किसी मजार पर चादर चढ़ाने मत जाओ।” सफाई कर्मियों से कराई आरती, 7 नवंबर से पदयात्रा प्रवचन से पहले उन्होंने जौरा नगर पालिका के 13 सफाई कर्मचारियों से हनुमानजी की आरती करवाई। उन्होंने बताया कि 7 नवंबर को दिल्ली के कात्यायिनी मंदिर से सनातन हिंदू एकता पदयात्रा निकाली जाएगी, जो 16 नवंबर को वृंदावन में पूर्ण होगी।  

Ira Khan का खुलासा: डिप्रेशन से निकलने के बाद मोटापे की परेशानी, पोस्ट में कहा- बॉडी इमेज को लेकर आज भी संघर्ष

मुंबई बॉलीवुड एक्टर आमिर खान की तरह की उनके बेटे जुनैद खान ने भी फिल्मों में एंक्टिंग को चुना है. लेकिन वहीं, उनकी बेटी इरा खान फिल्मों से दूर हैं. वो अक्सर अपने मोटापे को लेकर चर्चा में बनी रहती हैं. हाल ही में उन्होंने मेंटल हेल्थ इश्यू और बॉडी इमेज इश्यूज पर खुलकर बात किया हैं. बॉडी इमेज को लेकर इरा ने शेयर की फीलिंग्स बता दें कि इरा खान ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर किया है. जिसमें उन्होंने अपनी पर्सनल मुश्किलों और विचारों को खुलकर नोट लिखा है. इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर करते हुए इरा खान ने लिखा, ‘हां मैं मोटी हूं. 2020 से मैं मोटी/अनफिट होने, ओवरवेट होने और मोटापे के बीच झूल रही हूं. इसके बारे में बहुत कुछ कहा जा सकता है. निश्चित रूप से कुछ चीजें हैं जिन्हें मुझे अभी भी समझने की जरूरत है. लेकिन मुझे लगता है कि कम से कम थोड़ा बदलाव बेहतर के लिए हुआ है, इसलिए मैंने इसके बारे में बात करना/शेयर करना शुरू करने का फैसला किया है.’ इरा खान ने आगे लिखा- “शायद मैं उतनी स्पष्ट और आत्मविश्वास से भरी न हो पाऊँ जितनी डिप्रेशन के बारे में बात करते समय थी. उसके विपरीत, यह थोड़ा डरावना लग रहा है. लेकिन मुझे सच में लगता है कि इस बारे में बात करना ज़रूरी है. मुझे कोई ईटिंग डिसऑर्डर नहीं है और न ही मैं कोई विशेषज्ञ हूँ. बस अपने अनुभव साझा कर रही हूँ. टिप्पणी अनुभाग में जाने का जोखिम आप स्वयं उठाएँ. मैं खुद इससे दूर रहूँगी. देखते हैं यह कैसा रहता है.” शेयर किए गए वीडियो में इरा खान ने कहा, ‘चलिए सबसे बड़ी बात पर आते हैं. हां, मैं मोटी हूं और अपनी उम्र और हाइट के हिसाब से मैं सच में ओबीस हूं. मैं 2020 से बॉडी इमेज इश्यूज और खाने के साथ अपने रिश्ते को लेकर स्ट्रगल कर रही हूं. यह मेरे दोस्तों की जिंदगी में शामिल होने की मेरी क्षमता, पोपोय के साथ मेरे रिश्ते में मेरे व्यवहार, मेरे सेल्फ-वर्थ और फिर काम और हर चीज के बीच आ रहा है, इस तरह से कि मैं कहूंगी कि यह उतना ही इंटेंस है जितना मेरा डिप्रेशन मेरी जिंदगी में दखल देता था और कभी-कभी अभी भी देता है और इसलिए, मैं इस बारे में बात करना चाहती हूं. मैं यह समझने की कोशिश करना चाहती हूं कि मैं क्या सोचती हूं, किन चीजों से जूझ रही हूं, अभी भी जूझ रही हूं, बस यह सब. मुझे उम्मीद है कि इससे मुझे मदद मिलेगी. अगर इससे आपको मदद मिलती है, तो प्लस पॉइंट्स.’

रेलवे को 34 लाख रुपये का नुकसान, चादर और टॉवल ले जाने वाले यात्रियों की बढ़ती चोरी

भोपाल  रेलवे में यात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं पर चोरी की मार लगातार बढ़ती जा रही है। बीते दो वर्षों में ट्रेनों से लिनन सामान की चोरी के कारण रेलवे को 34 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा चोरी सफेद बेडशीट की हुई है, जिससे अकेले इसी एक आइटम में 20 लाख रुपये से ज्यादा की क्षति दर्ज की गई है। दो साल में हजारों लिनन आइटम गायब वित्तीय वर्ष 2024-25 में सफेद बेडशीट, पिलो कवर, कंबल और तकिये समेत कुल 11,709 लिनन आइटम चोरी हुए, जिससे रेलवे को 23.01 लाख रुपये का नुकसान हुआ। इसमें सफेद बेडशीट की चोरी सबसे ज्यादा हुई। वहीं, अप्रैल 2025 से नवंबर 2025 के बीच भी 11,682 लिनन आइटम गायब पाए गए, जिनकी कीमत 11.74 लाख रुपये से अधिक आंकी गई। पीक सीजन में बढ़ती हैं चोरी की घटनाएं रेलवे सूत्रों के अनुसार पीक सीजन, यानी विंटर और समर सीजन में चोरी की घटनाएं ज्यादा होती हैं। खासतौर पर स्पेशल ट्रेनों में नियमित चेकिंग की कमी के कारण चोरों को मौका मिल जाता है। बिहार रूट की ट्रेनों में चोरी की शिकायतें अधिक बिहार रूट की ट्रेनों में चोरी की शिकायतें अधिक सामने आती हैं, जबकि अगरतला एक्सप्रेस और हमसफर ट्रेनों में भी ऐसे मामले दर्ज किए गए हैं। लंबे रूट की ट्रेनों में भीड़ और सफर की अवधि ज्यादा होने से चोरी की आशंका बढ़ जाती है। नियमित अभियान के बावजूद नुकसान चोरी रोकने के लिए रेलवे द्वारा नियमित अभियान चलाए जाते हैं। प्रत्येक कोच में अटेंडेंट की तैनाती की जाती है, जिससे काफी हद तक चोरी पर नियंत्रण रहता है। इसके बावजूद यदि चोरी होती है तो संबंधित अटेंडेंट से वसूली की जाती है। साथ ही स्टॉफ पूरी सतर्कता से काम करता है, लेकिन यात्रियों की भीड़ और पीक सीजन में चुनौती बढ़ जाती है।     रेलवे द्वारा कंबल धुलाई और यात्रियों में वितरण की जाने वाली लिनन व्यवस्था का ठेका निजी कंपनी को दिया गया है। रेलवे बोर्ड की ओर से लिनन सामान उपलब्ध कराए जाने के बाद यदि किसी प्रकार की चोरी होती है, तो उसकी कटौती संबंधित ठेकेदार के बिल से की जाती है। इसके साथ ही यात्रियों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे रेलवे की लिनन सामग्री उपयोग करने के बाद उसे ट्रेन में ही छोड़कर जाएं, ताकि अन्य यात्रियों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सके और सरकारी संपत्ति सुरक्षित रह सके।     – नवल अग्रवाल, पीआरओ, भोपाल मंडल  

नागदा में टीआई की बहादुरी, फंदे से लटके युवक को सीपीआर देकर बचाई जान, VIDEO; स्वस्थ होकर अस्पताल से निकला

नागदा  मध्य प्रदेश (MP) के उज्जैन (Ujjain) जिले के नागदा (Nagda) से इंसानियत और पुलिस (Police) की मुस्तैदी की एक दिल जीत लेने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ नागदा थाना प्रभारी अमृतलाल गवरी ने एक युवक के लिए ‘देवदूत’ बनकर उसकी जान बचाई, जिसे उसके परिवार ने मृत मान लिया था। गश्त के दौरान मिली सूचना घटना रविवार-सोमवार की दरमियानी रात करीब 2 बजे की है। थाना प्रभारी अमृतलाल गवरी अपनी टीम के साथ मिर्ची बाजार क्षेत्र में नियमित गश्त पर थे। इसी दौरान एक बुजुर्ग व्यक्ति बदहवास हालत में दौड़ते हुए उनके पास पहुंचा और रोते हुए बताया कि उसके बेटे ने घर के अंदर फांसी लगा ली है। बंद दरवाजा तोड़कर युवक को फंदे से उतारा सूचना मिलते ही टीआई गवरी बिना एक पल गंवाए घटनास्थल पर पहुंचे। घर का दरवाजा अंदर से बंद था, जिसे पुलिस ने तुरंत तोड़ दिया। अंदर जाकर देखा तो युवक धैर्य यादव फांसी के फंदे पर लटका हुआ था। परिवार के सदस्य उसे देखते ही यह मान चुके थे कि धैर्य की मौत हो चुकी है और घर में कोहराम मच गया था। ट्रेनिंग आई काम: CPR से वापस लौटीं सांसें जहाँ परिवार हिम्मत हार चुका था, वहीं थाना प्रभारी ने अपना धैर्य नहीं खोया। उन्होंने तुरंत युवक को फंदे से नीचे उतारा और उसकी नब्ज जांची। युवक की हालत गंभीर थी, जिसे देखते हुए टीआई गवरी ने अपनी पुलिस ट्रेनिंग के दौरान सीखी गई CPR (Cardiopulmonary Resuscitation) तकनीक का इस्तेमाल किया। लगातार कुछ मिनटों तक सीने को पंप करने और जीवन रक्षक प्रयास करने के बाद, युवक के शरीर में हलचल हुई और उसकी सांसें वापस लौट आईं। यह देख परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। डॉक्टर बोले- सीपीआर से बची युवक की जान घटना नागदा में जनमेजय मार्ग स्थित पानी की टंकी के पास सोमवार रात करीब डेढ़ बजे की है। थाना प्रभारी अमृतलाल गवरी क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। तभी युवक के पिता उनके पास पहुंचे थे। टीआई बिना देरी किए युवक के घर पहुंच गए। उन्होंने अपनी पुलिस ट्रेनिंग के दौरान सिखाई गई सीपीआर तकनीक का उपयोग किया। युवक की सांसें लौटी तो अपने वाहन से उसे एमपी-13 अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने तत्काल जांच कर उपचार शुरू किया और बताया कि समय पर सीपीआर मिलने के कारण युवक की जान बच गई। युवक की जान बचाने में नगर सुरक्षा समिति के राजेश मोरवाल ने भी पुलिस का सहयोग किया। अस्पताल में भर्ती, परिजनों ने जताया आभार सांसें लौटने के बाद पुलिस ने बिना देरी किए युवक को तुरंत रतलाम के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ उसका उपचार जारी है। टीआई अमृतलाल गवरी की इस तत्परता और सूझबूझ की पूरे इलाके में चर्चा हो रही है। परिजनों ने पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अगर आज साहब नहीं होते, तो हमने अपना बेटा खो दिया होता। क्या होता है CPR और क्यों है यह जरूरी? CPR एक आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रिया है जिसका उपयोग तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति की सांस या दिल की धड़कन रुक जाती है। यह मस्तिष्क और अन्य महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजन युक्त रक्त का प्रवाह बनाए रखने में मदद करता है।

T20I से बाहर हुए तो क्या? शुभमन गिल की जबरदस्त वापसी को लेकर हरभजन सिंह का बड़ा बयान

नई दिल्ली  विश्व कप की टीम में शामिल नहीं हो पाने की टीस क्या होती है कोई रोहित शर्मा से पूछे। 2007 में टी20 वर्ल्ड कप चैंपियन टीम का हिस्सा रहे हिटमैन 2011 की ओडीआई वर्ल्ड कप टीम का हिस्सा नहीं बन पाए। भारत ने इतिहास रचते हुए दूसरी बार ओडीआई वर्ल्ड कप अपने नाम किया। उसके बाद हुए हर वर्ल्ड कप में रोहित शर्मा रहे। अपनी कप्तानी में 2023 में टीम को वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में भी पहुंचाया लेकिन पूरे टूर्नामेंट में टीम सिर्फ एक मैच हारी। वो फाइनल था। खैर, विश्व कप टीम में जगह नहीं बना पाना कितना बड़ा झटका होता है, अब इसे शुभमन गिल से समझा जा सकता है। 2024 के टी20 वर्ल्ड कप के बाद अब वह 2026 के वर्ल्ड कप में भी नहीं दिखेंगे। वह भी तब जब कुछ ही हफ्ते पहले वह टी20 टीम के उपकप्तान थे। अब दिग्गज स्पिनर रहे हरभजन सिंह ने शुभमन गिल का समर्थन किया है। कड़ी प्रतिस्पर्धा की वजह से गिल ने खोई जगह भज्जी ने गिल का हौसला बढ़ाते हुए कहा है कि वर्ल्ड कप की टीम में नहीं चुने जाने को उनके डिमोशन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। हरभजन सिंह ने कहा, ‘नहीं, ये गिल के लिए सिग्नल नहीं है। आपको पता है कि वह अपनी जगह को यूं ही हल्के में नहीं ले रहा था। प्रतिस्पर्धा ही इतनी है कि आप जानते हैं कि बहुत सारे खिलाड़ी हैं जो स्लॉट भरने के लिए तैयार हैं और टीम के लिए अच्छा कर सकते हैं।’ 'गिल एक महान खिलाड़ी, शानदार वापसी करेगा' पूर्व ऑफ स्पिनर ने कहा कि गिल का टी20 इंटरनेशनल में रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, ‘और यह गिल के लिए रास्ता का बंद होना नहीं है। वह महान खिलाड़ी है, खूबसूरत तकनीक का महान खिलाड़ी। मुझे लगता है कि वह शानदार वापसी करेगा। और यह मत भूलिए कि वह अब भी भारत का टेस्ट कैप्टन है।’ विश्व कप से पहले गिल को उपकप्तान बनाया गया था लेकिन 26 वर्ष के शुभमन गिल ने एशिया कप के जरिए लंबे समय बाद टी20 इंटरनेशनल में वापसी की थी। अक्षर पटेल को हटाकर उनकी जगह उन्हें टीम का उपकप्तान बनाया गया था। उनकी वजह से अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन की सुपरहिट ओपनिंग जोड़ी को तोड़ना पड़ा। गिल के ओपनिंग में उतरने की वजह से सैमसन को या तो काफी नीचे बल्लेबाजी करनी पड़ी या फिर प्लेइंग इलेवन में जगह से ही हाथ धोना पड़ा था। हालांकि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी20 सीरीज के बाद 20 दिसंबर को जब बीसीसीआई के चयनकर्ताओं ने न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज और फरवरी में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप के लिए इंडियन स्क्वाड का ऐलान किया तब उसमें गिल का नाम नहीं था। अक्षर पटेल को उपकप्तान बनाया गया। AI से बना इन्फोग्राफ शुभमन गिल ने अपने पिछले 15 टी20 मैचों में 24.50 कीऔसत से 291 रन ही बना पाए हैं।