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मंडप में हुआ बड़ा कांड! सिंदूर भूल आया दूल्हा, ब्लिंकिट की फटाफट डिलीवरी बनी लाइफसेवर, VIDEO वायरल

नई दिल्ली  दिल्ली में एक शादी के दौरान उस समय मजेदार स्थिति बन गई जब फेरों के बाद दूल्हा-दुल्हन को पता चला कि सिंदूर साथ लाना भूल गए हैं। रस्म रुक गई और परिवार वाले परेशान हो गए। लेकिन फिर दूल्हे ने ब्लिंकिट ऐप से सिंदूर ऑर्डर कर दिया। सिर्फ 16 मिनट में डिलीवरी पहुंच गई। दूल्हे ने सिंदूर दुल्हन की मांग में भरा और रस्म पूरी हो गई। यह पूरा वाकया वीडियो में रिकॉर्ड हुआ, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। तैयारियों में हुई छोटी-सी भूल शादी की भागदौड़ में दूल्हा हृषि और दुल्हन पूजा सिंदूर लाना भूल गए। फेरों के बाद जब सिंदूर की रस्म का समय आया तो सबको यह बात याद आई। दूल्हा ने कैमरे पर मुस्कुराते हुए कहा, "हम सिंदूर लाए ही नहीं।" परिवार वाले पहले तो हैरान हुए, लेकिन जल्द ही सबने हंसकर स्थिति संभाल ली। किसी ने दुकान जाने की बजाय ब्लिंकिट से ऑर्डर करने का फैसला किया। ब्लिंकिट की तेज डिलीवरी ने बचाई लाज ऑर्डर करते ही ऐप ने 16 मिनट का समय दिखाया। सभी मंडप में इंतजार करते रहे। दूल्हा-दुल्हन शांत बैठे मुस्कुराते रहे। ठीक समय पर डिलीवरी बॉय पहुंचा और सिंदूर का पैकेट सौंपा। इसके बाद दूल्हे ने दुल्हन की मांग भरी। मेहमानों ने तालियां बजाईं और माहौल खुशी से भर गया। यह घटना दिखाती है कि आजकल क्विक डिलीवरी ऐप्स शादियों में भी काम आ रहे हैं। वीडियो वायरल, लोग कर रहे मजेदार कमेंट्स इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया यह वीडियो लाखों लोगों ने देख लिया है। लोग कमेंट कर रहे हैं कि ब्लिंकिट ने असली में जोड़ी बचा ली। कुछ मजाक कर रहे हैं कि अब शादियों में ब्लिंकिट जरूरी हो गया। यह अनोखी घटना सबको याद रहेगी और दिखाती है कि छोटी भूलें कभी-कभी सबसे मजेदार यादें बन जाती हैं।

लापरवाही भारी पड़ी: फसल गिरदावरी में चूक पर पटवारी का निलंबन

 बलरामपुर छ्त्तीसगढ़ के बलरापुर जिले में पटवारी को फसल गिरदावरी कार्य में लापरवाही भारी पड़ गई. रामचंद्रपुर तहसील में पदस्थ पटवारी विवेक शुभम वैभव के खिलाफ निंलबन का एक्शन लिया गया है. इस संबंध में कलेक्टर राजेंद्र कटारा ने आदेश जारी किया है. दरअसल, रामचंद्रपुर तहसील में फसल गिरदावरी में लापरवाही की शिकायत सामने आने पर जांच कराई गई. जांच में पटवारी विवेक शुभम वैभव की लापरवाही और उदासीनता पाई गई, जिसे छ०ग० सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-3 (1) (2) (3) के विपरित माना गया. पटवारी को छ०ग० सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 9 के उपनियम (1) (क) के तहत् तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया. निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय कलेक्टर (भू-अभिलेख शाखा) जिला बलरामपुर-रामानुजगंज भेज दिया गया है. आदेश में उल्लेख किया गया है कि निलंबन अवधि में  पटवारी  विवेक शुभम वैभव को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी.

सुविधाओं के कारण महाकाल दर्शन की संख्या बढ़ी, पांच जनवरी तक दस लाख श्रद्धालुओं की उम्मीद

उज्जैन  नए साल के प्रथम प्रभात में देवदर्शन की आस लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन, ओंकारेश्वर और नलखेड़ा पहुंच रहे हैं। दो ज्योतिर्लिंगों और मां बगलामुखी मंदिर में नव वर्ष के स्वागत की तैयारी नव्य-भव्य रूप में हो रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए महाकाल मंदिर प्रशासन ने प्रोटोकाल दर्शन व्यवस्था बंद कर रखी है। भीड़ बढ़ने पर नंदी हाल में भी प्रवेश बंद किया जा रहा है। जरूरत पड़ी तो नए साल के पहले दिन सामान्य श्रद्धालुओं के लिए शीघ्र दर्शन टिकट व्यवस्था को भी स्थगित किया जा सकता है। ओंकारेश्वर और मां बगलामुखी मंदिर में भी प्रोटोकाल दर्शन व्यवस्था बंद कर दी गई है। मालूम हो कि चार दिनों में साढ़े 8 लाख लोग भगवान महाकाल के दर्शन कर चुके हैं। 5 जनवरी तक 10 लाख दर्शनार्थियों के आने का अनुमान है। श्रद्धालु चारधाम मंदिर पार्किंग से शक्तिपथ के रास्ते त्रिवेणी संग्रहालय द्वार से भक्त प्रवेश करेंगे। वाहन पार्किंग के लिए चार जगह कर्कराज, भील समाज की धर्मशाला, कार्तिक मेला ग्राउंड, हरिफाटक ब्रिज के नीचे व्यस्था की गई है। भीड़ बढ़ने पर वाहन पहले भी रोके जा सकते हैं। प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि महाकाल मंदिर में साल 2025 में दर्शनार्थियों की संख्या का नया रिकॉर्ड बना है। साल के आखिरी पखवाड़े में अब तक 15 लाख से अधिक भक्तों ने दर्शन कर लिए हैं। भक्तों को कम समय में सुविधा से भगवान के दर्शन कराए जा रहे हैं। देशभर से आने वाले दर्शनार्थी उपलब्ध सुविधा का लाभ रहे रहे हैं। 4 दिन में 84 हजार भक्तों ने 250 रुपये के शीघ्र दर्शन टिकट खरीदकर भगवान महाकाल के दर्शन किए। इससे मंदिर समिति को 2 करोड़ 10 लाख रुपये की आय हुई है। इसके अलावा चार दिन में 2500 किलो लड्डू प्रसाद की बिक्री हुई है। इससे मंदिर समिति को 10 लाख रुपये से अधिक राशि मिली है। आधे घंटे में हुए दर्शन शनिवार, रविवार की तुलना में सोमवार को दर्शनार्थियों की संख्या कम रही। दर्शनार्थियों को 25 से 30 मिनट में भगवान महाकाल के दर्शन हुए। कम समय में सुविधा पूर्वक दर्शन से श्रद्धालु खुश नजर आए। मंदिर प्रशासन ने दर्शन की कतार में खड़े भक्तों के लिए पेजयल आदि के इंतजाम भी कर रखे हैं। बगलामुखी मंदिर प्रोटोकाल व्यवस्था एक सप्ताह के लिए बंद आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा में स्थित मां बगलामुखी मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। नववर्ष पर संख्या और बढ़ने की संभावना है। मंदिर प्रबंध समिति अध्यक्ष व तहसीलदार प्रियंक श्रीवास्तव ने बताया कि एक सप्ताह के लिए प्रोटोकाल व्यवस्था बंद की है। एक सप्ताह बाद दर्शनार्थियों की संख्या की समीक्षा के बाद इसे लेकर निर्णय लिया जाएगा। ओंकारेश्वर मंदिर प्रोटोकाल दर्शन प्रतिबंधित     खंडवा जिले में स्थित ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ रही है। प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट द्वारा भीड़ नियंत्रण से लेकर मंदिर में सुचारु दर्शन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। यहां भी प्रोटोकाल दर्शन व्यवस्था बंद कर दी गई है। नाव संचालन भी ठप रहेगा। दर्शन के लिए झूला पुल से प्रवेश बंद कर व्यवस्था को एकांगी कर दिया है। जेपी चौक पर बेरिकेडिंग कर दर्शनार्थियों की भीड़ को नियंत्रित किया जा रहा है। ये सभी बदलाव पांच जनवरी तक लागू रहेंगे। पुनासा एसडीएम पंकज वर्मा ने बताया कि पांच जनवरी तक ओंकारेश्वर में लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। प्रोटोकाल के तहत दर्शन व्यवस्था को फिलहाल बंद किया गया है। विशेष दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को पोर्टल पर ऑनलाइन निर्धारित शुल्क जमा करना होगा।  

रूस-यूक्रेन युद्ध: पुतिन पर हमले की साजिश फेल, डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी और जेलेंस्की के जवाबी हमले की संभावना

मॉस्को  रूस-यूक्रेन जंग का शोला भड़क उठा है. रूस-यूक्रेन युद्ध में एक बड़ा ट्विस्ट आया है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर बड़ा ड्रोन अटैक हुआ है. व्लदामीर पुतिन को नींद में ही उड़ाने की साजिश थी. यही कारण है कि 28-29 दिसंबर 2025 की आधी रात पुतिन के नोवगोरोद स्थित आवास पर 91 ड्रोनों से हमला हुआ. मगर हमले की यह साजिश नाकाम हो गई. हमले की शक की सूई सीधे यूक्रेन पर गई है. जिस तरह से पुतिन पर 91 ड्रोन से अटैक हुआ, उससे साफ लग रहा है कि जंग को रुख बदलने की यूक्रेन ने पूरी कोशिश की थी. हालांकि, रूस ने यूक्रेन के प्लान को फेल कर दिया. इस अटैक से पुतिन गुस्से से लाल हैं. वह प्रतिशोध की आग में जल रहे हैं. अब सवाल यह है कि पुतिन क्या जवाबी हमला करेंगे? अगर हां, तो फिर रूस के जवाबी हमले में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की बच पाएंगे? इस अटैक से युद्ध के और तेज होने के आसार हैं. इससे पूरी दुनिया समेत डोनाल्ड ट्रंप भी चिंतित हैं. पुतिन के आवास पर ड्रोन अटैक पर रूस ने सीधे यूक्रेन को जिम्मेदार ठहराया है. रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि यूक्रेन ने उत्तरी रूस में स्थित राष्ट्रपति आवास पर लंबी दूरी के ड्रोन से हमला करने की कोशिश की. रात के समय लंबी दूरी वाले ड्रोन दागे गए, जिन्हें रूसी वायु रक्षा प्रणाली ने मार गिराया. सूत्रों की मानें तो यह सब कुछ रात के समय हुआ. पुतिन मॉस्को के अपने घर में सो रहे थे. तभी यूक्रेन ने ड्रोन से हमला करने की कोशिश की. ड्रोन में विस्फोटक लगा था. लेकिन रूसी एयर डिफेंस सिस्टम ने ड्रोन को गिरा दिया. बहरहाल, अभी पुतिन सुरक्षित हैं. पुतिन और ट्रंप के बीच बातचीत     पुतिन ने खुद इस अटैक की सूचना अमेरिका को भी दी है.     पुतिन ने कहा कि यह हमला कायराना हरकत है. रूस इसका जवाब जरूर देगा. उन्होंने यूक्रेन को चेतावनी दी कि अब और नुकसान होगा.     बहरहाल, यूक्रेन को जवाब देने के लिए रूसी सेना तैयार है. रूस अब इसका बदला लेने की कोशिश करेगा. रूसी सेना कीव पर हमला कर सककी है.     अब जेलेंस्की का बंकर भी निशाने पर होगा.     हालांकि, यूक्रेन इस अटैक से पल्ला झाड़ रहा है. जेलेंस्की ने इस अटैक को झूठा करार दिया है और कहा कि यह सब झूठ है. बदला लेगा रूस? विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि रविवार-सोमवार की दरमियानी रात को हुआ ड्रोन हमला कोई नुकसान नहीं पहुंचा सका क्योंकि ड्रोन को मार गिराया गया था. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि रूस सही समय पर जवाब देने का अधिकार रखता है. लावरोव ने यूक्रेनी हमलों को कीव और उसके सहयोगियों द्वारा शांति वार्ता को पटरी से उतारने की कोशिश बताया. उन्होंने आगे कहा कि मॉस्को यूक्रेन के साथ शांति वार्ता पर अपना रुख बदलेगा, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टीम के साथ शांति वार्ता जारी रहेगी. रूसी टीवी चैनलों के अनुसार, क्रेमलिन के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने कहा, ‘पुतिन ने सोमवार को दोनों नेताओं के बीच हुई फोन कॉल में राष्ट्रपति आवास पर हमले के बारे में ट्रंप को बताया. राष्ट्रपति ट्रंप हैरान थे.’ यूक्रेन का प्लान कैसे ध्वस्त सूत्रों का कहना है कि यूक्रेन इस जंग को जीतने के लिए सीधे शतरंज की खेल की तरह राजा को ही चेकमेट करना चाहता था. यूक्रेन सीधे पुतिन को खत्म करके युद्ध जीतना चाहता था. मगर यह साजिश फेल हो गई. अब पुतिन के बदले से जेलेंस्की को खौफ में होंगे. इस अटैक के बाद जेलेंस्की की सुरक्षा बढ़ा दी गई होगी. यूक्रेन की सेना अलर्ट पर होगी. रूस कभी भी बम-गोले बरसा सकता है. रूस-यूक्रेन युद्ध तीन साल से चल रहा है. ट्रंप इसे खत्म करने की कोशिशों में लगे हैं. मगर पुतिन पर हुए इस अटैक ने शांति की उम्मीदों को खत्म कर दिया है. रूस के बयान से साफ लग रहा है कि रूस इसका बदलेगा और ऐसा हुआ तो युद्ध की आग और भड़क सकती है. ट्रंप ने कैसे रिएक्ट किया? बहरहाल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस अटैक पर नाराजगी जताई है. उनकी व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बात हुई है. पुतिन ने उन्हें साजिश के बारे में बताया. ट्रंप ने बताया कि पुतिन गुस्से से लाल हैं. ट्रंप ने कहा कि यह गलत समय है. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि घर पर हमला करना गलत है. ट्रंप ने कहा कि उन्हें यह बिल्कुल पसंद नहीं आया और यह एक बहुत नाज़ुक समय है. उन्होंने हालात को देखते हुए टॉमहॉक मिसाइलों को रोक दिया, क्योंकि यह हमला करने का सही वक्त नहीं है. उन्होंने कहा कि एक बात आक्रामक रुख अपनाने की हो सकती है, लेकिन किसी के घर पर हमला करना बिल्कुल अलग बात है और फिलहाल ऐसा करना गलत है. ट्रंप ने यह भी कहा कि इस हमले को लेकर पुतिन काफी गुस्से में थे. यूक्रेन जंग थमने की आखिरी उम्मीद भी टूटी? रूस-यूक्रेन जंग की आग और भड़क सकती है. डोनाल्ड ट्रंप भी अब युद्ध की आग को नहीं बुझा पाएंगे. कारण कि रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन के घर पर बड़ा अटैक हुआ है. बीती आधी रात को पुतिन के नोवगोरोद स्थित आवास पर 91 ड्रोनों से हमला हुआ. इस अटैक के साथ ही यूक्रेन जंग थमने की आखिरी उम्मीद भी टूटती नजर आ रही है. इस अटैक से पुतिन गुस्से में हैं. वह अब बदले की आग में जल रहे हैं. ट्रंप भी काफी निराश हैं. यूक्रेन अब टारगेट पर है. इस तरह रूस-यूक्रेन युद्ध अब विनाशकारी मोड़ पर आ चुका है. खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि यह हमला सही नहीं था. ऐसा नहीं होना चाहिए था. सबसे पहले जानते हैं कि क्या हुआ. दरअसल, 28-29 दिसंबर 2025 की आधी रात पुतिन के नोवगोरोद स्थित आवास पर 91 ड्रोनों से हमला हुआ. हालांकि, रूस के एयर डिफेंस ने सभी ड्रोनों को नष्ट कर दिया. इस अटैक में पुतिन को कुछ नहीं हुआ. वह पूरी तरह सेफ हैं. इस हमले के पीछे यूक्रेन को ही बताया जा रहा है. यूक्रेन के इस अटैक से पुतिन गुस्से … Read more

वाड्रा परिवार में खुशखबरी: प्रियंका गांधी के बेटे रेहान की अवीवा बेग से सगाई, जानें उनका बैकग्राउंड

नई दिल्ली कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और उद्योगपति रॉबर्ट वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा की सगाई की खबर सामने आई है। रेहान वाड्रा ने गर्लफ्रेंड अवीवा बेग संग इंगेजमेंट की है। दोनों पिछले सात साल से डेट कर रहे थे। रेहान वाड्रा ने अवीवा बेग को हाल ही में प्रपोज किया था। इसके बाद अवीवा ने इस रिश्ते को मंजूरी दे दी थी। सूत्रों के अनुसार, अवीवा बेग और उनका परिवार दिल्ली का रहने वाला है। हालांकि रेहान और अवीवा की शादी की तारीख को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि शादी से जुड़ा फैसला दोनों परिवार आपसी सहमति और सुविधा के अनुसार करेंगे। जानें कौन हैं प्रियंका गांधी की होने वाली बहू अवीवा बेग भी एक फोटोग्राफर हैं। पिछले पांच वर्षों में अवीवा बेग ने कई प्रतिष्ठित कला प्रदर्शनियों में हिस्सा लिया है। वर्ष 2023 में उन्होंने मेथड गैलरी के साथ ‘यू कैनॉट मिस दिस’ प्रदर्शनी में अपने काम को पेश किया। इसी साल इंडिया आर्ट फेयर के यंग कलेक्टर प्रोग्राम के तहत भी ‘यू कैनॉट मिस दिस’ प्रदर्शनी में उनकी कला देखने को मिली। इससे पहले वर्ष 2019 में द क्वोरम क्लब में आयोजित ‘द इल्यूज़री वर्ल्ड’ और 2018 में इंडिया डिजाइन आईडी, के2 इंडिया में भी उन्होंने अपनी फोटोग्राफी प्रदर्शित की थी। अवीवा बेग फोटोग्राफिक स्टूडियो और प्रोडक्शन कंपनी एटेलियर 11 की सह-संस्थापक भी हैं। यह कंपनी देशभर की कई एजेंसियों, ब्रांड्स और क्लाइंट्स के साथ मिलकर काम कर रही है। रॉबर्ट वाड्रा की कुल संपत्ति 65.54 करोड़ रुपये प्रियंका गांधी द्वारा पेश हलफनामे के अनुसार, रॉबर्ट वाड्रा की कुल संपत्ति 65.54 करोड़ रुपये है. इसमें 37.9 करोड़ रुपये की चल संपत्तियां और 27.64 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां शामिल हैं। इसके अलावा उनके नाम पर 10 करोड़ रुपये की देनदारियां भी दर्ज हैं। हलफनामे के मुताबिक, रॉबर्ट वाड्रा के पास 2.18 लाख रुपये नकद हैं। वहीं, अलग-अलग बैंकों में उनके करीब 50 लाख रुपये जमा हैं. इसके साथ ही उन्होंने कई लोन भी ले रखे हैं, जिनकी कुल राशि करीब 34 करोड़ रुपये बताई गई है।

असद खान ने काशी में अपनाया सनातन धर्म, शुद्धिकरण के बाद बने अथर्व त्यागी, बोले- ‘बचपन से मंदिर जाता था’

सागर  गंगा के बीच में नाव पर 21 ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चारण के बीच मध्य प्रदेश से आए असद खान ने सनातन धर्म में घर वापसी की और शुद्धिकरण प्रक्रिया के बाद अथर्व बन गए। असद यानी अथर्व ने सोशल मीडिया के माध्यम से काशी के ब्राह्मणों से अपनी घर वापसी संस्कार के लिए संपर्क किया था। असद की घर वापसी का अनुष्ठान कराने वाले आलोक योगी ने बताया कि पहले असद का शुद्धिकरण किया गया। उसके बाद पूजन करा कर उनके घर वापसी की प्रक्रिया पूरी की गई और उनका नामकरण किया गया। उन्हें नया नाम अथर्व त्यागी प्रदान किया गया। अथर्व ने बताया कि वह इंजीनियर हैं और मध्य प्रदेश के सागर जिले के रहने वाले हैं। सागर में उसका पूरा परिवार रहता है जो अब भी इस्लाम का अनुयायी है। शुद्धिकरण के बाद असद का नामकरण कर उन्हें ‘अथर्व त्यागी’ नाम दिया गया। अथर्व ने कहा- मेरा मन उस समय सबसे ज्यादा आहत हो गया, जब मैं अपने दोस्तों के साथ महाकाल मंदिर जा रहा था। उस दौरान हमें वहां कुछ लोग पहचान गए और मंदिर में जाने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद मैंने काशी के ब्राह्मणों से मुलाकात की और आज हमने काशी की पवित्र धरती पर घर वापसी की। अब पढ़िए पूरा मामला मध्य प्रदेश के सागर के रहने वाले असद खान पेशे से इंजीनियर हैं। उन्होंने एमटेक की पढ़ाई की है। असद के घर में माता-पिता और एक भाई और एक बहन है। असद को शुरुआत से ही हिंदू धर्म पंसद था। उन्हें बचपन से ही मंदिर जाना और पूजा पाठ करना पंसद था। लेकिन मुस्लिम होने की वजह से कई बार मंदिर जाने में उनको परेशानी होती थी। असद के सारे दोस्त भी हिंदू हैं। असद बजरंग बली के भक्त हैं। सोमवार को असद खान वाराणसी पहुंचे। इसके बाद गंगा नदी में नाव पर 21 ब्राह्मणों की मौजूदगी में वैदिक विधि-विधान से शुद्धिकरण और पूजन किया गया। इस दौरान उनके बाल भी उतारे गए। तिलक लगाकर असद खान ने हिंदू धर्म अपनाया। उन्होंने अब अपना घर भी छोड़ दिया है। वह अब अकेले ही जीवन यापन करेंगे। असद खान अब अथर्व त्यागी बन गए है। असद ने 20 रुपए के स्टाम्प में अपना शपथनामा भी लिखा है। सागर ने बताया कि वह बचपन से ही मंदिरों में जाते थे और पूजा-पाठ करते थे लेकिन बड़े होने के बाद उनका नाम असद होने के कारण उसे मंदिरों में जाने में परेशानी होने लगी। असद बजरंग बली के भक्त हैं। बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ मारपीट से उनका मन काफी आहत हुआ और उसके बाद यह निर्णय लिया। अब पढ़िए अथर्व का शपथनामा     मैंने आज काशी में अस्सी घाट में आकर पंचगव्य स्नान ग्रहण कर मुस्लिम से सनातन हिन्दू धर्म ग्रहण किया।     मैं पूर्ण आस्था जताकर घर वापसी कर रहा हूं। काशी के विद्वान पंडा और पुरोहितों के पावन सानिध्य में पूरा कार्यक्रम आयोजित किया गया है।     मैं छोर कर्म कर पंचगव्य से गंगा स्नान करके 21 वैदिक ब्राह्मणों वैदिक मंत्रों से पवित्र किया गया हूं।     मैंने हवन पूजन कर बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन किए, फिर शिवलिंग पर अभिषेक करा कर शाम को गंगा आरती कराई जाएगी।     मुझे विधि विधान से अथर्व त्यागी हिन्दी नाम दिया गया। मैं अपना मजहब त्याग कर आया हूं। इसलिए आज से त्यागी हो गया। मेरा गौत्र कश्यप है।     मेरी निजी जानकारी में सब सच व सही है। कोई बात झूठ व छिपाई नही गई है। पूजन कराने वाले ब्राह्मण आलोक योगी ने बताया- घर वापसी से पूर्व शुद्धिकरण संस्कार किया गया। उसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन कर नामकरण हुआ। यह पूरी प्रक्रिया शास्त्रीय विधि के अनुसार संपन्न कराई गई। 'मंदिरों में कई बार असहजता का सामना करना पड़ा' अथर्व त्यागी ने बताया- मैं अपनी इच्छा से सनातन धर्म में घर वापसी कर रहा हूं। मैं पेशे से इंजीनियर हूं। सागर जिले में मेरा पूरा परिवार रहता है, जो अभी भी मुस्लिम धर्म का पालन करता है। बचपन से ही मुझे मंदिरों में जाना और पूजा-पाठ करना पसंद था। लेकिन बड़े होने के बाद नाम के कारण कई बार मंदिरों में प्रवेश और पूजन में असहजता का सामना करना पड़ा। अथर्व ने स्वयं को बजरंग बली का भक्त बताया। कहा कि अपनी आस्था के अनुरूप जीवन जीने के लिए मैंने यह निर्णय लिया।

सलमान खान की ‘बैटल ऑफ गलवान’ से चीन परेशान, चीनी मीडिया बोला– कहानियों से जमीन नहीं मिलती

मुंबई बॉलीवुड एक्टर सलमान खान  की फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ के टीजर से चीन  बौखला गया है। फिल्म गलवान क्षेत्र में 2020 में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़पों पर आधारित है। फिल्म के टीजर पर चीन सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि कहानी से जमीन पर कब्जा नहीं होता और इसमें फैक्ट्स नहीं है। साथ ही चीन अब गलवान घाटी को लेकर अपनी गढ़ी हुई कहानी पेश कर रहा है। वहीं चीनी विशेषज्ञों ने फिल्म को लेकर कहा, हमारी पवित्र भूमि पर फिल्म का कोई असर नहीं पड़ता। सलमान खान की फिल्म को लेकर चीनी मीडिया ने कहा कि सलमान खान को चीन में ज्यादातर लोग फिल्म बजरंगी भाईजान के लिए जानते हैं। फिल्म बैटल ऑफ गलवान में सलमान खान कर्नल बिक्कुमल्ला संतोष बाबू का किरदार निभा रहे हैं। भारतीय मीडिया का दावा है कि यह किरदार 2020 के गलवान घाटी संघर्ष में अहम भूमिका दिखाता है। फिल्म का टीजर रिलीज होने के बाद ही चीन की तरफ से रिएक्शन सामने आने लगे हैं। एक चीनी विशेषज्ञ ने कहा कि बॉलीवुड फिल्में ज्यादातर भावनाओं और मनोरंजन पर आधारित होती हैं, लेकिन कितनी भी बढ़ा-चढ़ाकर बनाई गई फिल्म इतिहास नहीं बदल सकती और न ही चीन की सेना (PLA) के अपने इलाके की रक्षा करने के इरादे को कमजोर कर सकती है। फिल्म को लेकर चीन में चर्चा तेजी से हो रही है। इस बीच सोशल मीडिया पर चीनी यूजर्स कमेंट कर रहे हैं। चीनी साइट वीबो पर एक यूजर ने लिखा कि यह ओवरड्रामैटिक भारतीय फिल्म तथ्यों से बिल्कुल उलट है। चीन के अनुसार, गलवान घाटी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के चीनी हिस्से में आती है और वहां चीनी सैनिक लंबे समय से गश्त करते रहे हैं। मंत्रालय का दावा है कि भारत ने सड़कें और ढांचे बनाकर पहले स्थिति बदली और LAC पार की, जिसके बाद तनाव बढ़ा। सरकार के साथ ही चीनी लोगों को चुभी एक अन्य विशेषज्ञ ने कहा कि ऐसे समय में जब भारत-चीन संबंधों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं, इस हातरह की एकतरफा कनी दिखाने वाली फिल्म माहौल को और खराब कर सकती है। विशेषज्ञों ने कहा कि कोई भी फिल्म कितनी भी बढ़ा-चढ़ाकर क्यों न बनाई जाए, वह किसी देश की पवित्र जमीन की सच्चाई नहीं बदल सकती। इससे हमारी जमीन पर कोई असर नहीं होगा। अस्ट्रेलियाई अखबार ने 38 चीनी सैनिकों की मौत का दावा किया था चीन का कहना है कि 15 जून 2020 को भारतीय सैनिकों ने समझौते का उल्लंघन करते हुए फिर से LAC पार की और बातचीत के लिए आए चीनी सैनिकों पर हमला किया, जिससे हिंसक झड़प हुई और दोनों तरफ हताहत हुए। वहीं अस्ट्रेलियाई अखबार द क्लैक्शन के मुताबिक गलवान में चीन के 38 जवान मारे गए थे। जबकि चीन के अनुसार, इस झड़प में उसके चार सैनिक मारे गए और 20 भारतीय सैनिकों की मौत हुई थी। गलवान वैली में क्या हुआ था 15 और 16 जून की रात को गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस हिंसक झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। ऑस्ट्रेलियाई अखबार द क्लैक्शन के मुताबिक गलवान में चीन के 38 जवान मारे गए थे। हालांकि, चीन ने आधिकारिक तौर पर इसे कभी स्वीकार नहीं किया। इस झड़प के बाद दोनों देश के रिश्ते में दरार पड़ गई थी। भारत ने गलवान घाटी में झड़प के बाद कई चीनी कंपनियों पर बैन लगा दिया था। चीन से उड़ान सेवा को प्रतिबंध कर दिया था।

आज तक कोई महिला क्रिकेटर नहीं कर पाई जो दीप्ति शर्मा करने जा रही हैं, ऐतिहासिक पल करीब

नई दिल्ली  इंडिया वर्सेस श्रीलंका 5 मैच की टी20 सीरीज का पांचवां और आखिरी मुकाबला आज तिरुवनंतपुरम में खेला जाना है। इस मैच में टीम इंडिया की हरफनमौला दीप्ति शर्मा के पास इतिहास रचने का मौका है। दीप्ति ने इसी सीरीज के दौरान वुमेंस T20I क्रिकेट में 150 रन का आंकड़ा छुआ था, अब उनके नाम इस फॉर्मेट में 151 विकेट है। अगर आज श्रीलंका के खिलाफ दीप्ति एक विकेट लेती हैं, तो वह इस फॉर्मेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली बॉलर बन जाएगी। फिलहाल वह ऑस्ट्रेलिया की मेगन शट्ट के साथ संयुक्त रूप से पहले पायदान पर हैं। दीप्ति शर्मा ने अभी तक खेले 132 मैचों की 129 पारियों में 18.94 की औसत और 6.11 की इकॉनमी के साथ 151 विकेट चटकाए हैं। वहीं इतने ही विकेट मेगन शट्ट ने 17.70 की औसत और 6.40 की इकॉनमी के साथ लिए हैं। दीप्ति एक विकेट लेते ही वुमेंस टी20 क्रिकेट के इतिहास में 152 विकेट लेने वाली पहली गेंदबाज बन जाएगी। दीप्ति शर्मा के अलावा इस फॉर्मेट में भारत की तरफ से 100 से अधिक विकेट लेने वाली एकमात्र गेंदबाज राधा यादव हैं, हालांकि वह फिलहाल टी20 टीम से बाहर हैं। बता दें, श्रीलंका के खिलाफ 5 मैच की इस सीरीज के पहले 4 मैच जीतकर टीम इंडिया ने सीरीज में अजेय बढ़त बना ली है। हरमनप्रीत कौर एंड कंपनी की नजरें आज पांचवां मैच भी जीत सीरीज में श्रीलंका का सूपड़ा साफ करने पर होगी। तिरुवनंतपुरम के न्यूग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम में यह सीरीज का तीसरा मैच है। पहले दोनों मुकाबलों में भारत ने डोमिनेट करते हुए जीत दर्ज की थी। पिछले मुकाबले में तो टीम इंडिया ने अपने टी20 क्रिकेट के इतिहास का सबसे बड़ा स्कोर भी बनाया था। आज के मुकाबले में भी फैंस एक हाईस्कोरिंग गेम की उम्मीद करेंगे।  

मेडिकल चमत्कार: अंबेडकर अस्पताल में छाती के रेयर कैंसर का सफल इलाज

रायपुर पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के कैंसर सर्जरी विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। कैंसर सर्जरी विभाग की टीम ने छाती के एक दुर्लभ एवं जटिल कैंसर  मेडियास्टाइनल जर्म सेल ट्यूमर का सफल ऑपरेशन कर एक बार फ़िर एक 29 वर्षीय पुरुष मरीज की जान बचाई। मरीज छाती में गांठ, सांस लेने में तकलीफ और लगातार दर्द की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंचा था। कैंसर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष गुप्ता ने केस की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि – पूर्व में मरीज का उपचार एम्स रायपुर के कैंसर विभाग में चल रहा था, जहां बायोप्सी जांच में मेडियास्टाइनल जर्म सेल ट्यूमर की पुष्टि हुई। प्रारंभिक जांच में छाती के बीच स्थित गांठ का आकार लगभग 13x18x16 सेंटीमीटर पाया गया, जो हृदय के समीप बड़ी रक्त नलियों से चिपकी हुई थी। उच्च जोखिम को देखते हुए एम्स रायपुर के चिकित्सकों ने पहले कीमोथेरेपी देने का निर्णय लिया। जनवरी 2025 से जून 2025 तक मरीज को छह चक्र (cycle) कीमोथेरेपी दी गई, जिससे गांठ का आकार घटकर 4x3x4 सेंटीमीटर रह गया। इसके बाद मरीज को एम्स रायपुर से रेफर कर डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के कैंसर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष गुप्ता के पास भेजा गया। डॉ. गुप्ता ने सभी जांच रिपोर्टों का गहन परीक्षण करने के बाद सर्जरी का निर्णय लिया। गांठ की संवेदनशील स्थिति को देखते हुए हृदय सर्जरी विभागाध्यक्ष से परामर्श लिया गया तथा निश्चेतना विभाग से सर्जरी की फिटनेस प्राप्त की गई। लगभग 3 से 4 घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी में गांठ को बाएं फेफड़े के एक हिस्से सहित अत्यंत निपुणता से निकाला गया। सर्जरी पूरी तरह सफल रही और मरीज को कुछ दिनों के उपचार के बाद स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। उपचार के बाद मरीज समय- समय पर फॉलोअप के लिए चिकित्सालय आ रहा है। इस जटिल ऑपरेशन में डॉ. आशुतोष गुप्ता, डॉ. के. के. साहू, डॉ. किशन सोनी, डॉ. गुंजन अग्रवाल, डॉ. सुश्रुत अग्रवाल, डॉ. समृद्ध, डॉ. लावण्या, डॉ. सोनम एवं डॉ. अनिल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।  मेडियास्टाइनल जर्म सेल ट्यूमर छाती के मध्य भाग में जर्म कोशिकाओं से उत्पन्न होने वाला दुर्लभ कैंसर है, जो सामान्यतः 20 से 40 वर्ष आयु वर्ग के पुरुषों में पाया जाता है। इसके प्रमुख लक्षणों में खांसी, सांस लेने में तकलीफ और छाती में दर्द शामिल हैं। इस कैंसर का उपचार कीमोथेरेपी एवं सर्जरी के माध्यम से किया जाता है, जिसमें सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट और रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट मिलकर कार्य करते हैं।  यदि इस कैंसर का समय रहते पता चल जाए और उचित उपचार किया जाए तो पांच वर्षीय सर्वाइवल रेट 90 प्रतिशत से अधिक होता है।     पंडित नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं इससे संबद्ध अस्पताल में कैंसर उपचार हेतु सभी उच्च स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हैं। मरीज का उपचार कैंसर सर्जरी, हार्ट सर्जरी, निश्चेतना (Anesthesia)विभाग एवं अन्य सहयोगी विभागों के सामूहिक प्रयास से सफल हुआ जो सराहनीय है। डॉ. विवेक चौधरी, डीन, पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय     ऑपरेशन के दौरान गाँठ बाएँ फेफड़े, एओर्टिक आर्च और पल्मोनरी ट्रंक से चिपकी हुई थी जिसे हमारे सर्जन्स ने निपुणता के साथ निकाला। मरीज का सफल उपचार मरीज के परिजनों के साथ-साथ हम सबके लिए गर्व का विषय है। डॉ. संतोष सोनकर, अधीक्षक, अम्बेडकर अस्पताल  

‘दिग्विजय सिंह BJP में शामिल होने की कोशिश में’, MLA पन्नालाल शाक्य का बड़ा बयान

 गुना दिल्ली में होने वाली कांग्रेस की CWC बैठक से पहले दिग्विजय सिंह के बयान ने सियासत गर्मा दी है. दिग्विजय सिंह ने RSS और BJP में अनुशासन की तारीफ करते हुए तस्वीर शेयर की थी. कांग्रेस नेता की बयानबाजी को लेकर भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने खुलासा किया है. विधायक पन्नालाल शाक्य ने कहा, ''दिग्विजय सिंह BJP में आने का रास्ता ढूंढ रहे हैं, इसलिए RSS और BJP की विचारधारा से प्रभावित हो रहे हैं.'' गुना विधायक ने दिग्विजय सिंह को लेकर खुलासा करते हुए कहा, ''वे किसके संपर्क में हैं ये ऊपरवाले (हाईकमान) ही जानते हैं. दिग्विजय सिंह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री भी हैं, इसलिए उनके विषय में ज्यादा क्या कहा जाए.'' चरनोई' और 'मंदिर माफी' की जमीन पर घेरा BJP विधायक ने दिग्विजय सिंह के मंदिर माफी की जमीन पर रोक लगाने वाले बयान पर भी प्रतिक्रिया दी. कहा कि सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय के शासनकाल में जमीनों की बंदरबांट हुई थी. मंदिर माफी की कितनी जमीन बची है, पहले उसकी तलाश कर ली जाए. मंदिर माफी की जमीन बचाने के लिए दिग्विजय सिंह राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं. वे केवल वोटबैंक को देखते हुए बयानबाजी करते हैं. यदि उन्हें मंदिर माफी की जमीन की इतनी ज्यादा चिंता है तो फिर चरनोई (गौ चर भूमि) की जमीन के बारे में क्यों नहीं बोलते? गुना विधायक पन्नालाल शाक्य ने कहा, ''गायों के लिए आरक्षित चरनोई जमीन पर माफियाओं ने कब्जा जमा लिया. मंदिरों के रखरखाव के लिए अंग्रेजी शासन में जमीनें दी गई थीं और मुगल शासन में मवेशियों के लिए चरनोई भूमि आरक्षित की गई थी. लेकिन दिग्विजय सिंह के शासन में तो सभी सरकारी जमीनें ही बंट गई. अब गाय कहां खड़ी होंगी? गाय अगर वोट दे रही होतीं तो जमीनें बच जातीं? लेकिन गाय तो मूक है यानी बोल नहीं सकती.''   BJP विधायक पन्नालाल शाक्य पन्नालाल शाक्य के बयान अक्सर चर्चाओं में रहते हैं. हाल ही में उन्होंने मंच से गुना कलेक्टर को लेकर भी नसीहत दी थी. पन्नालाल ने कलेक्टर पर आरोप लगाते हुए कहा था कि वे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को बदनाम करना चाहते हैं. वहीं, एक अन्य बयान में पन्नालाल शाक्य ने लोकसभा सीट पर बैठने की भी इच्छा जाहिर की थी.