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मंत्री लोधी: श्री रामराजा लोक और चित्रकूट परिक्रमा पथ को प्रमुख पर्यटन स्थल बनाने की योजना

श्री रामराजा लोक और चित्रकूट परिक्रमा पथ को उत्कृष्टतम पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करना हमारी प्राथमिकता : राज्य मंत्री  लोधी राज्य मंत्री  लोधी ने की पर्यटन निगम की समीक्षा भोपाल संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने पर्यटन भवन में मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों का कायाकल्प रहा, जिसमें राज्य मंत्री  लोधी ने स्पष्ट किया कि ओरछा स्थित 'श्री रामराजा लोक' और चित्रकूट के 'कामदगिरि पर्वत परिक्रमा पथ' को देश के उत्कृष्टतम पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। राज्य मंत्री  लोधी ने निर्देशित किया कि प्रदेश में निर्माणाधीन विभिन्न सांस्कृतिक लोकों के कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए और इन्हें निर्धारित समयावधि में पूर्ण किया जाए। उन्होंने आगामी सिंहस्थ 2028 के लिए निगम की कार्ययोजना का सूक्ष्म अवलोकन किया और उज्जैन सहित पूरे धार्मिक सर्किट में श्रद्धालुओं के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएँ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में क्षेत्रीय पर्यटन विकास पर विशेष ध्यान देते हुए राज्य मंत्री लोधी ने जागेश्वरधाम बांदकपुर के आगामी चरणों, नोहटा में बोट क्लब की स्थापना और भोपाल में वॉच टावर के निर्माण जैसी नवीन परियोजनाओं को गति देने की बात कही। इसके अतिरिक्त, कटावधाम और भारत माता मंदिर (हटा) के सौंदर्याकरण के साथ-साथ मगरोन (पथरिया) और खर्राघाट से संबंधित विकास कार्यों की प्रशासनिक एवं क्रियान्वयन संबंधी समीक्षा की गई। पर्यटन निगम की वित्तीय प्रगति पर चर्चा करते हुए राज्य मंत्री  लोधी ने आय के स्रोतों को बढ़ाने के लिए आधुनिक नवाचारों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तकनीक और बेहतर प्रबंधन का समन्वय आवश्यक है। साथ ही, संस्थान की मजबूती के लिए कार्य कर रहे कर्मचारियों के कल्याण का ध्यान रखते हुए उन्होंने उनकी वेतनवृद्धि के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए। राज्य मंत्री  लोधी ने विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रयासों से मध्यप्रदेश न केवल एक प्रमुख पर्यटन केंद्र बनेगा, बल्कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को यहाँ एक अद्वितीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक अनुभूति प्राप्त होगी। इस अवसर पर प्रबंध संचालक राज्य पर्यटन विकास निगम डॉ. इलैयाराजा टी सहित सम्बंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहें।  

रायपुर: कुपोषण मुक्ति में सफल रहा मिशन गोद अभियान, जनभागीदारी से 20% बच्चों को मिली राहत

रायपुर : कुपोषण मुक्ति की दिशा में सफल रहा मिशन गोद अभियान : जनभागीदारी से जिले में 20 प्रतिशत बच्चों को मिली कुपोषण से मुक्ति रायपुर बालोद जिला प्रशासन द्वारा गंभीर कुपोषित बच्चों को पौष्टिक भोजन समुचित उपलब्धता एवं उनके उचित देखभाल सुनिश्चित कर उन्हें सामान्य श्रेणी में लाने हेतु शुरू की गई मिशन गोद अभियान बालोद के परिणामों ने सभी को चौंका दिया। बालोद जिले के गंभीर कुपोषित बच्चों में से 20.80 प्रतिशत बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिला दी गई है। यह अभियान जिले को कुपोषण मुक्त बनाने की दिशा में अत्यंत महत्वाकांक्षी एवं कारगर अभियान सिद्ध हुआ है। जिला प्रशासन द्वारा इस अभियान के अंतर्गत जिले के अति गंभीर कुपोषित बच्चों को समुचित पौष्टिक आहार एवं देखरेख के लिए समुचित राशि एवं अन्य जरूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु जिले के जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, समाजसेवी संगठनों तथा समाज के सभी वर्गों के लोगों को जिम्मेदारी दी गई है। उल्लेखनीय है कि मिशन गोद के अंतर्गत क्षेत्रीय सांसद, जिले के तीनों विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित जिले के सभी गणमान्य जनप्रतिनिधियों, कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा जिला प्रशासन के सभी आला अधिकारियों के अलावा जिले के सभी अधिकारियों को इन बच्चों की देखरेख की जिम्मेदारी दी थी। अतिरिक्त आहार राशि के लिए 4.48 लाख रूपये से अधिक हुए जमा बालोद जिले में 10 सितंबर से 10 दिसंबर तक जारी इस अभियान के अंतर्गत गोद लेने वाले सभी जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी-कर्मचारी गंभीर कुपोषित बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन एवं अन्य जरूरी खाद्य सामग्रियों की उपलब्धता के लिए न्यूनतम 500 रूपये की राशि जमा की। जिसके फलस्वरूप कुपोषित बच्चों के लिए अतिरिक्त आहार राशि के लिए 04 लाख 48 हजार रूपये से अधिक की राशि प्राप्त हो चूका है।  जनप्रतिनिधियों ने 300 बच्चों को लिया गोद उल्लेखनीय है कि 10 सितंबर से 10 दिसंबर तक जिले में 03 माह की समयावधि के लिए लागू इस अभियान के अंतर्गत जनप्रतिनिधियों द्वारा कुल 300 गंभीर कुपोषित बच्चों को गोद लिया गया था। जिसमें से 53 बच्चे सामान्य श्रेणी में आ गए हैं। इसी तरह जिला प्रशासन के अधिकारियों के द्वारा कुल 184 बच्चों को गोद लिया गया है। इसमें से वर्तमान में 51 बच्चे सामान्य श्रेणी में आ गए हैं। इसके अलावा जन सामान्य के द्वारा 180 बच्चों को गोद लिया गया हैै। जिसमें 36 बच्चे सामान्य श्रेणी में आ गए हैं। जिले में इन बच्चों की समुचित देखभाल एवं इनके लिए समुचित पौष्टिक आहार की व्यवस्था के फलस्वरूप बालोद जिले में गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या में आशातीत कमी आई है।  कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने बालोद जिले में चलाए जा रहे इस अभियान के अंतर्गत मिले उल्लेखनीय सफलता की सराहना करते हुए इस अभियान को जिले के नवनिहालों को कुपोषण से मुक्ति प्रदान करने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण अभियान बताया है। इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जिले के जनप्रतिनिधियों, अधिकारी-कर्मचारियों सहित समाजसेवियों एवं समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की ओर सभी का आभार जताया।

ऊर्जा मंत्री तोमर का आह्वान: शहर को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने के लिए जन आंदोलन में भाग लें

शहर को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने के लिए जन आंदोलन में सहभागी बनें : ऊर्जा मंत्री तोमर स्वच्छता, प्रदूषण और नशा मुक्ति के लिए अखण्ड सीताराम धुन का समापन ग्वालियर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की पहल पर ग्वालियर शहर को स्वच्छ, प्रदूषण मुक्त और नशा मुक्त बनाने के संकल्प की पूर्ति के लिए बीते साल आरंभ हुई संगीतमय सीताराम धुन श्रृंखला का एक वर्ष पूर्ण होने पर सोमवार को समापन किया गया। जन कल्याण समिति ग्वालियर द्वारा रविवार से ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की पहल पर आरंभ हुए 24 घंटे के अखण्ड सीताराम धुन जाप का सोमवार को वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा अर्चना के साथ समापन हुआ। सीताराम धुन समापन आयोजन में हजारों की संख्या में धर्मालंबियों ने अपनी सहभागिता सुनिश्चित की। ऊर्जा मंत्री तोमर ने सभी शहरवासियों से आह्वान किया कि स्वच्छता के लिए जागरूक होना मतलब स्वच्छता ही सेवा अभियान का हिस्सा बनना है, जिससे सामाजिक वातावरण को बेहतर बनाया जा सके। इसके लिए व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ-साथ सार्वजनिक स्वच्छता (कचरा न फैलाना, कूड़ा सही जगह डालना, सार्वजनिक स्थानों की सफाई) दोनों शामिल हैं, जो स्वच्छ ग्वालियर अभियान के तहत शहर को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने के लिए एक जन आंदोलन है। इसमें हर नागरिक की भागीदारी ज़रूरी है, जिससे गंदगी को खत्म कर एक स्वस्थ और सुंदर ग्वालियर का निर्माण किया जा सके। ऊर्जा मंत्री तोमर ने सभी से अपील की कि अपने-अपने घर में तुलसी का एक पौधा अवश्य लगाएं। अखण्ड सीताराम धुन समापन उपरांत इस अवसर पर प्रसादी वितरण के रुप में भंडारे का आयोजन भी किया गया।  

80 साल की उम्र में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का निधन

ढाका  राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहे बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का निधन हो गया है. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की प्रमुख खालिदा जिया ने ढाका के एवर केयर हॉस्पिटल में उपचार के दौरान अंतिम सांस ली. वह 80 वर्ष की थीं. खालिदा जिया पिछले कुछ समय से बीमार चल रही थीं. खालिदा जिया की अगुवाई वाली पार्टी बीएनपी ने उनके निधन की पुष्टि की है. बीएनपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि डॉक्टर्स ने कुछ ही समय पहले उन्हें मृत घोषित किया है. खालिदा जिया ने सुबह 6 बजे आखिरी सांस ली. लंबे समय से बीमार चल रही थीं और ढाका के एवर केयर हॉस्पिटल में उनका उपचार चल रहा था. बीएनपी की सोशल मीडिया पोस्ट के मुताबिक 29-30 दिसंबर की रात पूर्व पीएम खालिदा की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई. खालिदा की हालत बिगड़ते देख उपचार के लिए विदेश ले जाने की भी तैयारी थी. कतर से एक विशेष विमान भी ढाका पहुंच गया था. इस विमान को ढाका एयरपोर्ट पर स्टैंडबाई में रखा गया था. मेडिकल बोर्ड ने खालिदा जिया को ढाका के केयर हॉस्पिटल से लंदन के लिए उड़ान भरने की इजाजत नहीं दी. बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया कई बीमारियों से जूझ रही थीं. वह मधुमेह, गठिया, लीवर सिरोसिस के साथ ही हृदय रोग से पीड़ित थीं. 80 साल की खालिदा जिया आईसीयू में थीं, जहां हालत बिगड़ने पर पिछले कुछ दिनों से उनको वेंटिलेटर पर रखा गया था. बीती रात उनकी तबीयत अधिक बिगड़ गई. एक दिन पहले ही किया था नामांकन बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद अंतरिम सरकार का गठन हुआ था और अब देश में नई सरकार चुनने के लिए चुनाव हो रहे हैं. इन चुनावों में खालिदा जिया भी उम्मीदवार थीं. खालिदा ने अपने निधन से कुछ ही घंटे पहले 29 दिसंबर को नामांकन दाखिल किया था. खालिदा जिया ने बोगरा-7 सीट के लिए नॉमिनेशन किया था. बांग्लादेश की पहली महिला पीएम थीं खालिदा खालिदा जिया के नाम बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री होने का रिकॉर्ड भी है. वह साल 1991 में पहली बार प्रधानमंत्री बनीं और उसके बाद भी दो बार उन्होंने बांग्लादेश सरकार का नेतृत्व किया. बेनजीर भुट्टो के बाद खालिदा जिया दुनिया में ऐसी दूसरी महिला नेता हैं, जिन्होंने किसी मुस्लिम देश की प्रधानमंत्री का पद संभाला. राष्ट्रपति की पत्नी से बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री तक  खालिदा जिया बांग्लादेश की राजनीति की एक बहुत ही मजबूत और चर्चित शख्सियत रही हैं. एक समय वह सिर्फ एक सैन्य अधिकारी की पत्नी थीं, लेकिन हालात ने उन्हें राजनीति में ला खड़ा किया और आगे चलकर वह बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं. खालिदा जिया का जन्म 1945 में हुआ था. उनकी पढ़ाई सामान्य रही और शुरू में राजनीति से उनका कोई सीधा नाता नहीं था. उनकी शादी बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति और सेना प्रमुख जियाउर रहमान से हुई. जियाउर रहमान की हत्या के बाद खालिदा जिया की जिंदगी पूरी तरह बदल गई. पति की मौत के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की कमान संभाली. 1991 में बनी पहली महिला प्रधानमंत्री धीरे-धीरे उन्होंने खुद को एक मजबूत नेता के रूप में साबित किया. 1991 में वह बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं. इसके बाद भी वह कई बार सत्ता में रहीं और लंबे समय तक देश की राजनीति को प्रभावित करती रहीं. उनके कार्यकाल में विकास के साथ-साथ कई विवाद भी सामने आए, लेकिन उनके समर्थक उन्हें एक साहसी और जुझारू नेता मानते हैं. खालिदा जिया का जीवन संघर्ष, सत्ता, आलोचना और नेतृत्व से भरा रहा है. उन्होंने यह दिखाया कि कठिन हालात में भी एक महिला देश की राजनीति में सबसे ऊंचे पद तक पहुंच सकती है. जानें शुरुआती जीवन और परिवार खालिदा जिया का जन्म 15 अगस्त 1945 को तत्कालीन ब्रिटिश भारत (अब बांग्लादेश) के दिनाजपुर जिले में हुआ था. उनका जन्म एक साधारण परिवार में हुआ. उनके पिता का नाम इस्कंदर मजीद था, जो एक व्यापारी थे. बचपन से ही खालिदा जिया शांत स्वभाव की थीं और राजनीति से उनका कोई सीधा जुड़ाव नहीं था. कहां से खालिदा जिया ने की  पढ़ाई  खालिदा जिया ने अपनी शुरुआती पढ़ाई दिनाजपुर मिशनरी स्कूल से की.इसके बाद उन्होंने सुरेंद्रनाथ कॉलेज (अब ईडन महिला कॉलेज), ढाका से आगे की पढ़ाई पूरी की. उनकी पढ़ाई सामान्य रही और उस समय तक उनके जीवन का लक्ष्य राजनीति नहीं, बल्कि पारिवारिक जीवन था. 1959 में जियाउर रहमान से शादी खालिदा जिया की शादी 1959 में जियाउर रहमान से हुई, जो उस समय पाकिस्तानी सेना में अधिकारी थे. 1971 में जब बांग्लादेश का मुक्ति संग्राम हुआ, तब जियाउर रहमान एक प्रमुख सैन्य कमांडर के रूप में उभरे. बाद में वे बांग्लादेश के राष्ट्रपति बने. यहीं से खालिदा जिया का जीवन पूरी तरह बदल गया. वे देश की प्रथम महिला (First Lady) बनीं, हालांकि उस समय भी वे राजनीति से दूर ही रहीं.  1981 में राजनीति में एंट्री 1981 में एक सैन्य विद्रोह के दौरान राष्ट्रपति जियाउर रहमान की हत्या कर दी गई. यह घटना खालिदा जिया के जीवन का सबसे बड़ा झटका थी. पति की मृत्यु के बाद, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेताओं ने खालिदा जिया से पार्टी का नेतृत्व संभालने का आग्रह किया. इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और BNP की अध्यक्ष बनीं. 1990 में गिरी इरशाद सरकार  खालिदा जिया ने उस समय के सैन्य शासक हुसैन मोहम्मद इरशाद के खिलाफ लोकतांत्रिक आंदोलन का नेतृत्व किया. उनकी अगुवाई में हुए आंदोलनों के चलते 1990 में इरशाद सरकार गिर गई. 1991 में बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री 1991 में हुए आम चुनावों में BNP ने जीत हासिल की और खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं. इसके बाद वे 1991–1996 और 2001–2006 तक दो बार प्रधानमंत्री रहीं. प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत हुई, अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ, शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर काम हुआ.

टीबी मुक्त भारत अभियान में जन भागीदारी बढ़ाने के करें प्रयास: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

मैनपावर भर्ती की प्रक्रिया समय से करें पूर्ण: उप मुख्यमंत्री शुक्ल टीबी मुक्त भारत अभियान में जन भागीदारी बढ़ाने के करें प्रयास औषधि निर्माण इकाइयों की सतत जांच ज़ारी रखें लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की विस्तृत समीक्षा की भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय, भोपाल में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की विस्तृत एवं वृहद समीक्षा की। उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, गुणवत्ता, मानव संसाधन प्रबंधन, अधोसंरचना विकास, चिकित्सा शिक्षा, जांच एवं उपचार सुविधाओं सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) एवं कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) के माध्यम से संचालित भर्ती प्रक्रियाओं की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने मेडिकल ऑफिसर, चिकित्सा विशेषज्ञ, फिजियोथेरेपिस्ट, लैब टेक्नीशियन, नर्सिंग ऑफिसर, एएनएम एवं अन्य चिकित्सकीय एवं सहायक पदों की भर्ती में प्रगति की जानकारी ली तथा लंबित प्रक्रियाओं को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में मानव संसाधन की कमी से सेवाएं प्रभावित नहीं होनी चाहिए और सभी रिक्त पदों की समयबद्ध पूर्ति सुनिश्चित की जाए। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अधोसंरचना विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। उप मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन अस्पताल भवनों, मेडिकल कॉलेजों, सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की प्रगति की जानकारी लेते हुए गुणवत्ता एवं समय-सीमा के कड़ाई से पालन के निर्देश दिए। साथ ही, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की खरीदी, उनकी स्थापना एवं उपयोगिता की समीक्षा करते हुए उपकरणों के समुचित रख-रखाव पर भी विशेष ध्यान देने को कहा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा करते हुए जनभागीदारी बढ़ाने तथा जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन एक सामूहिक प्रयास है, जिसमें जन जागरूकता और सहभागिता की महत्वपूर्ण भूमिका है।बैठक में पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा के संचालन की स्थिति की भी समीक्षा की गई। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सेवा के विधिवत, पारदर्शी एवं प्रभावी संचालन के निर्देश देते हुए कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को त्वरित एवं सुरक्षित परिवहन सुविधा मिलना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने औषधि निर्माण इकाइयों (ड्रग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स) की नियमित एवं सघन जांच करने तथा गुणवत्ता मानकों के कड़ाई से अनुपालन के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रदेश में जांच सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के प्राथमिकता से उन्नयन के निर्देश दिए। इसके साथ ही, सभी ब्लड बैंकों के विधिवत संचालन, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता, रक्त की गुणवत्ता एवं संबंधित नियमों के पूर्ण अनुपालन को सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने टेलीमेडिसिन सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराने में टेलीमेडिसिन की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके लिए तकनीकी संसाधनों, प्रशिक्षण एवं नेटवर्क विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाए।ृ उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रत्येक नागरिक को सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों एवं एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना होगा। बैठक में प्रमुख सचिव संदीप यादव, आयुक्त स्वास्थ्य तरुण राठी, संचालक स्वास्थ्य दिनेश श्रीवास्तव, एमडी एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी और निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।  

बिहार का एंटी-टेरर मास्टरप्लान: ATS कमांड ऑफिस किन जिलों में बनेंगे, क्या होगी जिम्मेदारी

पटना आतंकवाद से लड़ने के लिए बिहार पुलिस महकमा में गठित विशेष इकाई एटीएस (आतंकवाद निरोध दस्ता) के चार नए क्षेत्रीय कार्यालय बनेंगे। पटना में मौजूद एटीएस के मुख्यालय के अलावा गया, मोतिहारी, दरभंगा और पूर्णिया में भी एक-एक क्षेत्रीय कार्यालय बनाए जाएंगे। इससे संबंधित प्रस्ताव तैयार करके पुलिस महकमा ने गृह विभाग को भेज दिया है। अनुमति मिलने के साथ ही इनके गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। यह जानकारी एडीजी (विधि-व्यवस्था) पंकज कुमार दराद ने दी। वह सोमवार को पुलिस मुख्यालय सरदार पटेल भवन के सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ये क्षेत्रीय कार्यालय जहां मौजूद रहेंगे, वहां के आसपास के जिलों को इससे जोड़ा जाएगा। एडीजी दराद ने कहा कि इन क्षेत्रीय कार्यालय का गठन होने से एटीएस की कार्य क्षमता का विकास होगा। इनकी जवाबदेही आतंकवाद से जुड़ी गतिविधि पर नजर रखने के साथ ही धार्मिक, राष्ट्रविरोधी और आपराधिक गतिविधि पर भी नजर रखने की होगी। यह सभी जिलों में मौजूद स्पेशल ब्रांच के समानांतर काम करेगा। प्रत्येक क्षेत्रीय कार्यालय की कमान डीएसपी रैंक के अधिकारी के पास होगी। उन्होंने कहा कि एटीएस सीमावर्ती इलाकों में आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों पर भी निरंतर नजर बनाए रखता है। राष्ट्र विरोधी गतिविधियों से संबंधित धाराओं में जेल में बंद जो लोग छूटकर बाहर आते हैं, उन पर भी निरंतर नजर बनाए रखने और इनसे संबंधित सूचना एकत्र करने का काम भी एटीएस के स्तर से की जाती है। उन्होंने कहा कि एटीएस की सोशल मीडिया इकाई के माध्यम से 176 व्यक्ति को चरमपंथी विचारधारा के कारण चिन्हित किया गया है। इसमें 12 लोगों को अतिचरमपंथी उन्माद की प्रवृति को लेकर मानसिक रूप से प्रेरित करके समझाने का काम किया गया है। एडीजी ने कहा कि सभी जिलों में मौजूद तमाम थानों में एक अधिकारी और एक सिपाही को खासतौर से आसूचना एकत्र करने के लिए रखा गया है। इनकी जवाबदेही मादक पदार्थों की तस्करी, शराब के अवैध व्यापार, आतंकवाद, अपराध समेत अन्य सभी जरूरी मुद्दों पर आसूचना एकत्र कर इसे जिला से लेकर मुख्यालय तक पहुंचाने की होगी। जिलों में मौजूद सीएटी की टीम के साथ समन्वय स्थापित कर ये कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि एसटीएस के अंतर्गत गठित विशेष स्वाट (एसडब्ल्यूएटी यानी स्पेशल वेपन एंड टैक्टिस टीम) टीम की जिम्मेदारी राज्य में मौजूद 257 संवेदनशील संस्थानों के निगरानी की है। इसमें पिछले वर्ष 194 और इस वर्ष 41 में मॉक ड्रील एवं रेकी की गई है। उन्होंने कहा कि एटीएस के अब तक 176 कमांडों को विशेष रूप से ट्रेनिंग दी जा चुकी है। इन्हें एसजी के मनेसर और कोलकाता स्थित केंद्रों पर खासतौर से प्रशिक्षण दिया गया है।  

सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर बनाएंगे सिंहस्थ को भव्य, दिव्य और ऐतिहासिक आयोजन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

उज्जैन आने वाले श्रद्धालु सिर्फ मेहमान नहीं, महाकाल के अतिथि हैं, उनके सत्कार में संवेदना भी हो : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर बनाएंगे सिंहस्थ को भव्य, दिव्य और ऐतिहासिक आयोजन पुराने हॉकी स्टेडियम में आधुनिक एस्ट्रोटर्फ लगाया जाएगा चिंतामण गणेश बनेगा मुख्य स्टेशन, मोहनपुरा में भी होगा रेलवे स्टेशन, उज्जैन में बन रहा एयरपोर्ट मुख्यमंत्री ने उज्जैन में किया करीब 129 करोड़ रुपए के 12 कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आने वाले सभी श्रद्धालुओं का स्वागत है, अभिनंदन है। बीते तीन-चार दिनों के अंदर ही 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए। उज्जैन आने वाले सभी श्रद्धालु सिर्फ हमारे मेहमान नहीं, स्वयं बाबा महाकाल द्वारा आमंत्रित अतिथि हैं। महाकाल ने उन्हें दर्शन देने के लिए बुलाया है। इसलिए सभी श्रद्धालुओं के सत्कार से जुड़ी हर व्यवस्था में संवेदना और आत्मीयता भी होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा महाकाल की कृपा से ही उज्जैन नगरी सिर्फ भारत नहीं, सम्पूर्ण विश्व की आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बनी हुई है। उज्जैन के नागरिकों का सहयोग ही बाबा महाकाल की सच्ची सेवा है। सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर सिंहस्थ-2028 को सबसे भव्य, दिव्य और अनुशासित के साथ एक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और ऐतिहासिक आयोजन बनाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को उज्जैन के नानाखेड़ा स्टेडियम में विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने यहां लगभग 129 करोड़ रुपए की लागत के 12 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री ने उज्जैन में युवाओं को केंद्र में रखकर तैयार की गई तीन महत्वपूर्ण पहलों का एक साथ लोकार्पण एवं शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रोजेक्ट स्वाध्याय (Coding for All) का शुभारंभ किया। इस प्रोजेक्ट के जरिए विद्यार्थियों को कम उम्र से ही कोडिंग और डिजिटल सोच से जोडा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने UtkarshUjjain.com वेब पोर्टल का भी शुभारंभ किया। यह पोर्टल युवाओं के लिए सीखने, मार्गदर्शन और अवसरों का एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म बनेगा। साथ ही कौशल सेतु इंडस्ट्री-लीड स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम का भी आगाज किया। कौशल सेतु शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी को पाटते हुए युवाओं को वास्तविक इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुरूप तैयार करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह तीनों पहले उज्जैन के युवाओं को केवल डिग्री तक ही सीमित नहीं रखेंगी, बल्कि उन्हें जॉब-रेडी, स्टार्टअप-रेडी और फ्यूचर-रेडी बनाने का आधार तैयार करेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन शहरी क्षेत्र में 124 करोड़ रुपए लागत से बनने वाले 11 विकास कार्यों का भूमिपूजन भी किया। इसमें करीब 102 करोड़ रुपए लागत से विभिन्न सड़कों का चौड़ीकरण कार्य, 9.50 करोड़ रुपए लागत से कपिला गौशाला (3000 गौ-वंश क्षमता वाली) का संवर्धन एवं विकास कार्य, 8.75 करोड़ रुपए लागत से पंवासा क्षेत्र में ईडब्ल्यूएस कॉलोनी में विकास कार्य, 3.47 करोड़ रुपए लागत से कानीपुरा में स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स का निर्माण तथा लगभग 5 करोड़ रुपए लागत से नवीन जनपद पंचायत भवन निर्माण कार्य का भूमिपूजन भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इन सभी कार्यों के अलावा 45 करोड़ लागत के अन्य काम भी प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि उज्जैन के इस पुराने हॉकी स्टेडियम में आधुनिक एस्ट्रोटर्फ लगाया जाएगा, जिससे यहां इंटरनेशनल हॉकी मैच हो सकें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में भारतीय खिलाड़ी लगभग सभी खेलों में पदक विजेता बन रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम मध्यप्रदेश के युवाओं को नौकरी लेने वाला नहीं, नौकरी देने वाला बनाने का प्रयास कर रहे हैं। आज की गई पहलें कल इसी दिशा में हमारी मदद करेंगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार सीखो-कमाओ योजना, स्किल इंडिया मिशन और प्रधानमंत्री इंटर्नशिप स्कीम जैसी पहलें युवाओं को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक अनुभव देकर उन्हें बाजार और उद्योगों के लिए तैयार कर रही हैं। यही सही अवसर है कि उज्जैन के युवा स्वयं को आने वाले बेहतर कल के लिए अभी से तैयार करें। अद्भुत होगा सिंहस्थ – 2028 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है। यह भारतीय धर्म, संस्कृति, आध्यात्म और पर्यटन का अद्भुत समागम है। सिंहस्थ को देखते हुए सरकार ने भी सभी तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। हमारी कोशिश है कि 30 किलोमीटर लम्बे घाटों में 24 घंटे में 5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु शिप्रा के शुद्ध जल में स्नान/आचमन कर लें। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ को बेहतर बनाने के लिए हमने उज्जैन में 2675 करोड़ रुपए की लागत से 33 प्रमुख कार्यों को मंजूरी दे दी है। इन कामों पर क्रियान्वयन भी शुरू हो चुका है। सिंहस्थ के दौरान क्राउड मैनेजमेंट पर हमारा विशेष ध्यान रहेगा। इसीलिए संपूर्ण मेला क्षेत्र को फोर लेन और सिक्स लेन मार्गों से जोड़कर निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा रही है। श्रद्धालुओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए उज्जैन को मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसी दिशा में उज्जैन में आधुनिक मेडिसिटी का निर्माण प्रगति पर है। यहां एक नया इंडस्ट्रियल पार्क भी बनाया जा रहा है। इंजीनियरिंग कॉलेज के पुराने कैम्पस में नया आईटी पार्क और साइंस सिटी बनाई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज प्रोजेक्ट स्वाध्याय के लिए 3 हजार युवाओं के लिए निनौरा और मक्सी के पास 2 हजार युवाओं के लिए कौशल विकास केंद्र शुरू किए हैं। इंदौर-उज्जैन के बीच भविष्य में मेट्रो भी दौड़ेगी, लेकिन उससे पहले वंदे भारत मेट्रो ट्रेन की सौगात मिलेगी। शहर के चिंतामण गणेश स्टेशन को भी मुख्य स्टेशन के तौर पर विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मोहनपुरा में भी एक नया रेलवे स्टेशन बनेगा। उज्जैन के समीप ही एक बड़ा एयरपोर्ट भी बनाया जा रहा है, जिससे श्रद्धालु सीधे उज्जैन में ही उतर सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में शनि लोक का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए 140 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। यह शनि लोक आस्था और पर्यटन के क्षेत्र में उज्जैन की एक और नई पहचान स्थापित करेगा। उज्जैन को दूसरे शहरों से जोड़ने के लिए यहां चारों दिशाओं में फोरलेन बन रहे हैं। यहां करीब 12-13 नए पुल भी निर्माणाधीन हैं। इससे आवागमन बेहतर होगा। … Read more

राजनांदगांव को विकास की नई सौगात, मुख्यमंत्री समग्र विकास योजना में ₹87.58 लाख के 17 कार्य स्वीकृत

डॉ. रमन सिंह के प्रयासों से राजनांदगांव को ₹10,500 करोड़ की औद्योगिक सौगात, गेल लगाएगा यूरिया प्लांट राजनांदगांव को विकास की नई सौगात, मुख्यमंत्री समग्र विकास योजना में ₹87.58 लाख के 17 कार्य स्वीकृत विस अध्यक्ष एवं क्षेत्र विधायक डॉ. रमन सिंह ने इस स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त किया राजनांदगांव  छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष एवं राजनांदगांव विधायक डॉ. रमन सिंह के निरंतर प्रयासों, दूरदर्शी नेतृत्व एवं औद्योगिक विकास को प्राथमिकता देने वाली नीति के परिणामस्वरूप राजनांदगांव जिले को एक ऐतिहासिक औद्योगिक उपलब्धि प्राप्त हुई है। देश की प्रतिष्ठित सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) द्वारा राजनांदगांव में ₹10,500 करोड़ के निवेश से यूरिया निर्माण इकाई स्थापित किए जाने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है। यह निवेश प्रस्ताव राज्य सरकार द्वारा आयोजित छत्तीसगढ़ स्किल टेक कार्यक्रम के दौरान सामने आया, जिसका आयोजन राज्य कौशल विकास विभाग एवं वाणिज्य एवं उद्योग विभाग द्वारा किया गया था। इस कार्यक्रम में उर्वरक, टेक्सटाइल, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सोलर क्षेत्र की विभिन्न कंपनियों ने राज्य में कुल ₹13,690 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत किए। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में प्रस्तुत इन प्रस्तावों में सबसे बड़ा निवेश प्रस्ताव ₹10,500 करोड़ का गेल द्वारा दिया गया, जिसके अंतर्गत राजनांदगांव में गैस पाइपलाइन आधारित उर्वरक (यूरिया) संयंत्र की स्थापना की जाएगी। इस परियोजना से न केवल क्षेत्र में औद्योगिक आधार मजबूत होगा, बल्कि राज्य के लगभग 3,500 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे। प्रस्तावित यूरिया प्लांट से प्रतिवर्ष लगभग 1.27 मिलियन टन यूरिया उत्पादन किया जाएगा, जिससे कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलने के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की औद्योगिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाई प्राप्त होगी। इसी क्रम में, राजनांदगांव क्षेत्र के समग्र एवं संतुलित विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में मुख्यमंत्री समग्र विकास योजना वर्ष 2025–26 के अंतर्गत 87 लाख 58 हजार की लागत से 17 विकास कार्यों के लिए स्वीकृति प्रदान की गई है। इन स्वीकृत विकास कार्यों में सामुदायिक भवन, व्यावसायिक परिसर, रंगमंच निर्माण, सीसी रोड, मुक्तिधाम शेड, प्रतीक्षालय निर्माण सहित अन्य जनोपयोगी अधोसंरचना से जुड़े कार्य शामिल हैं, जिनसे स्थानीय नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा विधानसभा अध्यक्ष एवं राजनांदगांव विधायक डॉ. रमन सिंह ने इस ऐतिहासिक औद्योगिक निवेश तथा क्षेत्रीय विकास कार्यों की स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय राजनांदगांव के आर्थिक, औद्योगिक एवं सामाजिक विकास को नई दिशा देगा तथा जिले को विकास के नए केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।

दमघोंटू दिल्ली: AQI 400+ पहुंचा, दो दिन भारी प्रदूषण का अलर्ट, नजरें बारिश पर

 नई दिल्ली ठंड और कोहरे के साथ मिलकर प्रदूषण और घातक हो गया है। सोमवार को दिल्ली की वायु गुणवत्ता गंभीर स्तर पर पहुंच गई। दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 से ऊपर है और दिल्ली की हवा में सवा तीन गुने से ज्यादा प्रदूषक कण मौजूद है। वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली का अनुमान है कि अगले दो दिनों के बीच भी वायु गुणवत्ता का स्तर बहुत खराब स्तर पर ही रहेगा। इसके बाद बारिश के आसार बन रहे हैं। सवाल यह कि क्या बारिश देगी राहत? हवा धीमी, पलूशन को मिला कोहरे के साथ विशेषज्ञों की मानें तो हवा की गति इतनी धीमी है कि प्रदूषक कणों का बिखराव बेहद धीमा हो रहा है। पलूशन कोहरे के साथ मिलकर हवा को ज्यादा प्रदूषित कर रहा है। इससे दिल्ली की हवा में स्मॉग देखा जा रहा है। खासतौर पर सुबह और शाम के वक्त इसे साफ देखा जा सकता है। इससे लोगों को सांस लेने में परेशानी, गले और नाक में खराश, आंख से पानी आना जैसी तमाम किस्म की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 401 पर एक्यूआई केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, सोमवार शाम को चार बजे दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 401 अंक रिकॉर्ड किया गया। इस स्तर की हवा को गंभीर श्रेणी में रखा जाता है। एक दिन पहले रविवार को दिल्ली में एक्यूआई 390 अंक पर था। यानी बीते 24 घंटे में दिल्ली के एक्यूआई में 10 अंकों की बढ़ोतरी हुई है। इन इलाकों में अति गंभीर श्रेणी में पलूशन दिल्ली के चार इलाकों का सूचकांक सोमवार को अति गंभीर श्रेणी में पहुंच गया। इनमें वजीरपुर, रोहिणी, आनंद विहार और जहांगीरपुरी जैसे इलाके शामिल हैं। वजीरपुर में एक्यूआई 462, रोहिणी में 455, जहांगीरपुरी में 459, आनंद विहार में 455 अंक रिकॉर्ड किया गया। वायु गुणवत्ता के मानकों के मुताबिक, एक्यूआई के 450 से ऊपर होने पर हवा को अति गंभीर श्रेणी माना जाता है। यानी इन इलाकों में हालत ज्यादा खराब हैं। सवा तीन गुना ज्यादा पलूशन सीपीसीबी के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली-एनसीआर की हवा में सोमवार की शाम चार बजे पीएम 10 कणों का स्तर 330.5 और पीएम 2.5 कणों का स्तर 220.5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पर रहा। बता दें कि हवा में पीएम 10 का स्तर 100 और पीएम 2.5 कणों का स्तर 60 से कम होने पर ही उसे स्वास्थ्यकारी माना जाता है। इसके अनुसार, दिल्ली-एनसीआर की हवा में अभी मानकों से सवा तीन गुना ज्यादा प्रदूषक कण मौजूद हैं। दो दिन नहीं मिलेगी राहत वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली का अनुमान है कि मंगलवार और बुधवार को हवा की रफ्तार ज्यादातर समय में दस किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास रहेगी। इतना ही नहीं अधिकतम और न्यूनतम तापमान की स्थिति कमोबेश ऐसी ही रहेगी। मौसम विभाग ने भी मंगलवार और बुधवार को दिल्ली में मध्यम से घने कोहरे का येलो अलर्ट जारी किया है। इन मौसमी परिस्थितियों के कारण प्रदूषक कणों का विसर्जन बेहद धीमा रहेगा। इससे पलूशन से राहत नहीं मिलेगी। बारिश और हवा में तेजी देगी राहत मौसम विभाग की मानें तो पहली जनवरी को दिल्ली के साथ ही एनसीआर के अलग-अलग हिस्सों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी देखी जा सकती है। लेकिन यह काफी नहीं होगी। मौसम विज्ञानियों की मानें तो यदि दिल्ली-एनसीआर में बारिश के बाद हवा तेज होती है तो इससे पलूशन से काफी राहत मिलेगी। 2, 3 और 4 जनवरी को दिल्ली में हवा की स्पीड 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे तक जा सकती है। ये संकेत अच्छे हैं। इससे पलूशन से राहत मिलने की संभावना है।

Magh Mela 2026: कब से शुरू होगा माघ मेला, मौनी अमावस्या और पहले स्नान की पूरी डिटेल

प्रयागराज संगम नगरी प्रयागराज में आस्था का सबसे बड़ा संगम माघ मेला अपनी भव्यता के लिए जाना जाता है. साल 2026 में भी लाखों श्रद्धालु त्रिवेणी संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाने के लिए एकत्रित होंगे. माघ मेले का पहला पवित्र स्नान पौष पूर्णिमा के दिन होता है. यदि आप भी इस पावन अवसर पर पुण्य की डुबकी लगाना चाहते हैं, तो यह खबर आपके लिए है. इस लेख में जानें कि साल 2026 में माघ मेले का पहला स्नान कब है, मौनी अमावस्या की सही तिथि क्या है और इन स्नान पर्वों का धार्मिक महत्व क्या है. कब शुरू हो रहा है माघ मेला 2026? साल 2026 में माघ मेले की शुरुआत 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा के पहले स्नान के साथ होगी. इसी दिन से श्रद्धालु और कल्पवासी संगम तट पर अपने एक महीने के कठिन व्रत और साधना (कल्पवास) का आरंभ करते हैं. माघ मेला 2026: प्रमुख स्नान तिथियां     3 जनवरी 2026 पौष पूर्णिमा     15 जनवरी 2026 मकर संक्रांति     18 जनवरी 2026 मौनी अमावस्या     23 जनवरी 2026 बसंत पंचमी     1 फरवरी 2026 माघी पूर्णिमा     15 फरवरी 2026 महाशिवरात्रि मौनी अमावस्या 2026: क्यों है यह सबसे खास? माघ मेले में मौनी अमावस्या का विशेष महत्व है. इसे अमावस्याओं की अमावस्या कहा जाता है. मान्यताओं के अनुसार, इस दिन संगम का जल अमृत के समान हो जाता है. श्रद्धालु इस दिन मौन व्रत रखकर स्नान करते हैं, जिससे आत्मिक शांति और पापों से मुक्ति मिलती है. माना जाता है मौनी अमावस्या के दिन दान-पुण्य करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है. माघ स्नान का धार्मिक महत्व हिंदू धर्म में माघ के महीने को बेहद पवित्र माना गया है. शास्त्रों के अनुसार, माघ मेले के दौरान प्रयागराज के संगम तट पर सभी देवी-देवताओं का वास होता है. संगम में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है. माघ मेले में एक महीने तक संयमित जीवन जीना (कल्पवास) मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खुलता है. मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या पर स्नान करने से कुंडली के कई दोष समाप्त हो जाते हैं.