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चीन के बयान पर कांग्रेस का हमला, भारत-पाक सीजफायर को लेकर केंद्र से जवाबदेही की मांग

नई दिल्ली  ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर को लेकर अभी तक सिर्फ अमेरिका दावा कर रहा था, लेकिन अब चीन ने भी अपना दावा ठोक दिया है। इस बीच कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता संबंधी चीन का दावा चिंताजनक है और ऐसे में सरकार के स्तर पर इसमें स्पष्टता आनी चाहिए। जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट किया, "राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने 10 मई, 2025 को ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के लिए व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप किया था। वह यह दावा कम से कम सात अलग-अलग देशों में, विभिन्न मंचों पर, 65 बार कर चुके हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने तथाकथित अच्छे मित्र द्वारा किए गए इन दावों पर आज तक अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी है। जयराम रमेश का कहना है, "अब चीन के विदेश मंत्री भी ऐसा ही दावा कर रहे हैं और कह रहे हैं कि चीन ने भी मध्यस्थता की थी। 4 जुलाई 2025 को सेना उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत असल में चीन का सामना कर रहा था और उससे लड़ रहा था।" कांग्रेस नेता के अनुसार, चीन निर्णायक रूप से पाकिस्तान के साथ खड़ा था, ऐसे में भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने के चीन के दावे चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि यह चिंताजनक सिर्फ इसलिए नहीं कि यह देश की जनता को अब तक बताई गई बातों के उलट हैं, बल्कि इसलिए भी कि यह हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा का मजाक बनाता प्रतीत होता है। कांग्रेस नेता ने कहा, "इस दावे को चीन के साथ हमारे संबंधों के संदर्भ में भी समझा जाना चाहिए। हमने चीन के साथ फिर से बातचीत शुरू की है, लेकिन दुर्भाग्यवश यह बातचीत चीन की शर्तों पर हो रही है। 19 जून 2020 को प्रधानमंत्री द्वारा चीन को दी गई क्लीन चिट ने भारत की बातचीत की स्थिति को काफ़ी कमज़ोर कर दिया है। हमारा व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर है और हमारे निर्यात का बड़ा हिस्सा चीन से होने वाले आयात पर निर्भर है। अरुणाचल प्रदेश के संबंध में चीन की उकसाने वाली हरकतें लगातार जारी हैं। " उन्होंने कहा कि ऐसे एकतरफा और शत्रुतापूर्ण संबंधों के बीच, भारत की जनता को यह स्पष्टता चाहिए कि ऑपरेशन सिंदूर को अचानक रोकने में चीन ने क्या भूमिका निभाई। आपको बता दें कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव उन प्रमुख मुद्दों में रहा जिन्हें चीन की मध्यस्थता से हल किया गया। भारत का कहना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच 7-10 मई के संघर्ष को दोनों देशों की सेनाओं के डीजीएमओ (सैन्य संचालन महानिदेशक) के बीच सीधी बातचीत के माध्यम से हल किया गया था। भारत यह भी लगातार कहता रहा है कि भारत और पाकिस्तान से संबंधित मामलों में किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के लिए कोई जगह नहीं है।  

विजय हजारे ट्रॉफी में स्टार्स की एंट्री! शुभमन गिल इस दिन खेलेंगे मैच, KL राहुल और जडेजा भी एक्शन में

नई दिल्ली  भारतीय वनडे और टेस्ट टीम के कप्तान शुभमन गिल को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। वे घरेलू टूर्नामेंट विजय हजारे ट्रॉफी में जल्द ही शिरकत करते नजर आएंगे। गिल के अलावा, लोकेश राहुल और रवींद्र जडेजा भी अपनी-अपनी टीमों के लिए विजय हजारे ट्रॉफी में खेलते हुए जल्द ही नजर आएंगे।   3 जनवरी को एक्शन में होंगें भारतीय कप्तान क्रिकबज की रिपोर्ट के अनुसार, शुभमन गिल 3 जनवरी से विजय हजारी ट्रॉफी के मैचों में खेलते हुए नजर आएंगे। 3 जनवरी को पंजाब बनाम सिक्किम और 6 जनवरी को गोवा बनाम पंजाब के मैचों में शुभमन गिल के खेलने की उम्मीद है। वे पंजाब की टीम का हिस्सा होंगे। गिल की टीम को ग्रुप C में मुंबई जैसी मजबूत टीमो के साथ रखा गया है। दो मुकाबले खेलने के बाद गिल अपनी राज्य टीम छोड़कर भारतीय टीम से जुड़ जाएंगे, जो पहले वनडे से पहले 7–8 जनवरी को बड़ौदा में इकट्ठा होगी। कर्नाटक की टीम को मजबूती देंगे राहुल 3 जनवरी से होने वाले आगामी विजय हजारे ट्रॉफी के मैचों के लिए लोकेश राहुल भी ऐक्शन में देखे जा सकते हैं। कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (KSCA) ने अभी तक केएल राहुल की भागीदारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन उनके 3 और 6 जनवरी को त्रिपुरा और राजस्थान के खिलाफ होने वाले मैचों में खेलने की उम्मीद है। लोकेश राहुल की टीम कर्नाटक को ग्रुप में रखा गया है और वह तीन मैचों में तीन जीत के साथ ग्रुप में दूसरे नंबर पर है। राहुल के शामिल होने से टीम की स्थिति और मजबूत होगी। जडेजा का है ये सीन हरफनमौला खिलाड़ी रवींद्र जडेजा भी विजय हजारे ट्रॉफी में खेलते हुए नजर आएंगे। स्टार ऑलराउंडर ने सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन (SCA) को सूचित कर दिया है कि वह 6 और 8 जनवरी को सर्विसेज और गुजरात के खिलाफ मुकाबले खेलेंगे। सौराष्ट्र ने अब तक अपने तीन में से एक मुकाबले में जीत हासिल की है और 8 टीमों के ग्रुप में 6वें स्थान पर है। ये स्टार पहले ही हो चुके हैं शामिल बता दें कि इस सीजन विजय हजारे ट्रॉफी में पहले ही कई स्टार खिलाड़ी शामिल हो चुके हैं। विराट कोहली और रोहित शर्मा अपने शुरुआती मैचों में एक्शन में दिखे थे। दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (DDCA) के अध्यक्ष रोहन जेटली ने सोमवार यानी 29 दिसंबर, 2025 को बताया कि विराट कोहली 6 जनवरी को रेलवे के खिलाफ मैदान पर उतरेंगे। ये मुकाबला भी बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (BCE) में ही खेला जाएगा। स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत भी दिल्ली के लिए मैदान पर दिख चुके हैं।  

IAS नागार्जुन बी. गौड़ा के नेतृत्व में खंडवा में जल संरक्षण की मिसाल, साइकिल पर पानी ढोने वाले बच्चे की कहानी

खंडवा  राष्ट्रीय जल पुरस्कार मिलने से मध्यप्रदेश के खंडवा जिले का नाम रोशन हुआ है। यह सफलता सिर्फ एक सरकारी योजना का नतीजा नहीं, बल्कि जिला पंचायत सीईओ IAS डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा के व्यक्तिगत संघर्ष और बचपन के अनुभवों का परिणाम है। कर्नाटक के सूखाग्रस्त तिप्तूर से आए नागार्जुन गौड़ा ने पानी की किल्लत को करीब से देखा है, जिसने उन्हें जल संरक्षण को अपना मिशन बनाने के लिए प्रेरित किया। कौन हैं नागार्जुन गौड़ा IAS नागार्जुन गौड़ा का जन्म 5 मई 1992 को कर्नाटक के तुमकुरु जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। उनके माता-पिता शिक्षक हैं। उनके गांव में पानी की कमी एक बड़ी समस्या थी, जिसे उन्होंने बचपन में खुद झेला। यही अनुभव उन्हें जल संरक्षण के प्रति समर्पित करने का कारण बना। नतीजा यह निकला कि खंडवा को 'सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला जिला' घोषित किया गया और 2 करोड़ रुपये का राष्ट्रीय जल पुरस्कार मिला। यह पुरस्कार केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के वर्षा जल संचयन कार्यक्रम के तहत दिया गया। 18 नवंबर 2025 को दिल्ली में राष्ट्रपति से पुरस्कार लेते हुए IAS नागार्जुन गौड़ा ने कहा था, 'जब जल संचय, जन भागीदारी योजना शुरू हुई, तो यह मेरे लिए व्यक्तिगत हो गया।' पानी के लिए करना पड़ता था संघर्ष नागार्जुन गौड़ा बताते हैं कि उन्हें अपने बचपन में पानी के लिए बोरवेल से कुछ बाल्टी पानी लाने के लिए साइकिल से लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। वे कहते हैं, “कभी-कभी मैं उस बोरवेल के लीवर को 10 मिनट तक खींचता था, तब जाकर एक-दो बाल्टी पानी मिल पाता था।” उन्होंने चित्रदुर्ग जैसे सूखे इलाकों का भी जिक्र किया, जो दशकों से सूखे की मार झेल रहे हैं। पत्नी भी हैं आईएएस डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद नागार्जुन गौड़ा ने UPSC की परीक्षा दी और 2019 बैच के IAS अधिकारी बने। उनकी पत्नी सृष्टि जयंत देशमुख ने भी UPSC में अच्छी रैंक हासिल की थी। बाद में नागार्जुन गौड़ा का कैडर मध्य प्रदेश ट्रांसफर हो गया। खंडवा में जिला पंचायत सीईओ के पद पर रहते हुए, नागार्जुन गौड़ा ने 'जल संचय, जन भागीदारी' (JSJB) अभियान को एक बड़े आंदोलन का रूप दिया। इस अभियान में गांव के कर्मचारियों से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों तक, सभी ने मिलकर किसानों, स्कूलों और आम लोगों को वर्षा जल संचयन अपनाने के लिए प्रेरित किया। जिले में 1.25 लाख से अधिक काम इस अभियान के कारण खंडवा जिले में 1.25 लाख से अधिक जल संरक्षण के काम हुए, जिनमें रूफटॉप रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, रिचार्ज पिट और ट्रेंच जैसे 40 हजार से ज्यादा काम शामिल थे। इसी मेहनत के दम पर खंडवा को राष्ट्रीय जल पुरस्कार मिला। एआई तस्वीरों को लेकर विवाद हालांकि, हाल ही में यह पुरस्कार AI-जनरेटेड तस्वीरों को लेकर विवादों में आ गया है। सोशल मीडिया पर IAS नागार्जुन गौड़ा को ट्रोल भी किया जा रहा है। इस पर उन्होंने और खंडवा जिला प्रशासन ने सफाई दी है कि JSJB पोर्टल और ‘कैच द रेन' (CTR) पोर्टल अलग-अलग हैं। खंडवा जिला प्रशासन के अनुसार, JSJB अवार्ड के मूल्यांकन में केवल असली तस्वीरों का ही इस्तेमाल हुआ था, जबकि CTR पोर्टल पर कुछ AI तस्वीरें शैक्षणिक उद्देश्य से अपलोड की गई थीं, जिनका राष्ट्रीय जल अवार्ड से कोई लेना-देना नहीं है। एक मीडिया रिपोर्ट में गलत खबरें छापी गई थीं, जिसका खंडवा जिला प्रशासन ने खंडन किया है।  

पश्चिम बंगाल पर अमित शाह की नजर, असंतुष्ट दिलीप घोष से मुलाकात कर साधा सियासी संतुलन

कोलकाता  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अभी कुछ महीनों का वक्त बाकी है, लेकिन भाजपा अभी से ऐक्टिव हो गई है। यहां तक कि ज्यादातर बड़े राज्यों में चुनाव की कमान संभालने वाले होम मिनिस्टर अमित शाह ने खुद यहां संभाल लिया है। 2021 में 2 मई को बंगाल चुनाव के नतीजे आए थे और इस बार भी अप्रैल में ही मतदान कराए जा सकते हैं। इस बीच बुधवार को अमित शाह ने कोलकाता में तमाम भाजपा नेताओं के साथ बैठक की। यह मीटिंग कोलकाता के साल्ट लेक होटल में हुई। इसमें नेता विपक्ष शुभेंदु अधिकारी और प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य मौजूद थे। इसके अलावा तमाम दिग्गज नेताओं की मौजूदगी रही। इस मीटिंग में दिलीप घोष की मौजदूगी ने सभी को चौंकाया। उनसे खुद अमित शाह ने मुलाकात की और कई मुद्दों पर बात की है। उनकी मौजूदगी इसलिए चर्चाएं बटोर रही है क्योंकि कुछ समय पहले तक ऐसी चर्चाएं रही हैं कि वह भाजपा से नाराज चल रहे हैं। वह ममता बनर्जी के साथ एक कार्यक्रम में भी नजर आए थे, जब सीएम भगवान जन्नाथ के एक मंदिर का लोकार्पण करने पहुंची थीं। चर्चा यहां तक थी कि वह टीएमसी में जा सकते हैं। लेकिन अब चीजें बदल गई हैं। भाजपा की कोशिश है कि दिलीप घोष को साध लिया जाए। 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्हें अहम भूमिका देकर फ्रंट पर लाया जा सकता है। इस बैठक में बंगाल के सभी पार्टी सांसदों, विधायकों को बुलाया गया था। यही नहीं कई नगर निगमों के नेता भी मौके पर थे। संगठन के भी कुछ प्रभावशाली लोगों को इसका न्योता दिया गया था। सूत्रों का कहना है कि इस मीटिंग में ज्यादातर उन नेताओं को ही बुलाया गया, जिन्हें विधानसभा इलेक्शन का टिकट मिल सकता है। इसके अलावा कुछ ऐसे सीनियर नेता भी बुलाए गए, जिन्हें चुनाव में प्रचार की जिम्मेदारी मिल सकती है। दरअसल दिलीप घोष का यहां पहुंचना कई नेताओं को हैरान करने वाला रहा। उन्हें बंगाल भाजपा के सबसे कामयाब प्रदेश अध्यक्षों में शुमार किया जाता है। दिलीप घोष क्यों कहे जाते हैं बंगाल भाजपा के सबसे कामयाब अध्यक्ष उनके ही दौर में 2019 में भाजपा को 18 सांसद मिले थे, जबकि 2014 में यह संख्या सिर्फ 3 की ही थी। फिर 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की असेंबली सीटों की संख्या 70 तक पहुंच गई। ऐसे में उनकी मौजूदगी को एक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। अमित शाह ने साफ संकेत दिया कि वह भाजपा में एकजुटता चाहते हैं और ऐसे सभी नेताओं को एक मंच पर लाना चाहते हैं, जो पार्टी में एक बड़ा कद रखते हैं।  

नए साल पर युवाओं में धार्मिक पर्यटन का बढ़ा रुझान, काशी, मथुरा, अयोध्या में लाखों की संख्या में पहुंच रहे युवा

योगी सरकार के प्रयास से सनातन का लौटा वैभव, युवाओं में बढ़ा काशी, मथुरा और अयोध्या का क्रेज नए साल पर युवाओं में धार्मिक पर्यटन का बढ़ा रुझान, काशी, मथुरा, अयोध्या में लाखों की संख्या में पहुंच रहे युवा सोशल मीडिया पर छाया काशी, अयोध्या, मथुरा में नए साल का जश्न मनाने का ट्रेंड सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी से बढ़ी पर्यटकों की संख्या लखनऊ  नए साल का जश्न मनाने के लिए  जहां युवा पहले पाश्चात्य संस्कृति से प्रेरित होकर डिस्को, होटल, रेस्टोरेंट और हिल स्टेशनों का रुख करता था, इस साल इसमें एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन के पौने नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में जिस तरह से  धार्मिक और पर्यटन स्थलों का विकास हुआ है, उसका ही परिणाम है कि युवा लाखों की संख्या में काशी, मथुरा-वृंदावन और अयोध्या में नए साल की शुरूआत अपने इष्ट का दर्शन-पूजन से कर रहे हैं। यह उत्तर प्रदेश से उठी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की वो लहर है, जिसमें न केवल प्रदेश बल्कि देशभर के युवा, लड़के-लड़कियां नए जोश और उत्साह के साथ सम्मिलित हो रहे हैं।  काशी, मथुरा, अयोध्या में लाखों की संख्या में पहुंच रहे युवा पर्यटन विभाग के अनुसार, इस वर्ष नए साल से कई दिन पहले से ही प्रदेश के प्रमुख तीर्थ स्थलों काशी, अयोध्या, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज में लाखों की संख्या में युवा पर्यटक पहुंच रहे हैं। इस क्रम में 29-30 दिसंबर को ही अयोध्या में भगवान श्रीराम का दर्शन करने 5 लाख से अधिक पर्यटक पहुंच चुके हैं, जबकि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में पिछले तीन दिनों में 10 लाख और मथुरा में 3 लाख से अधिक पर्यटकों ने दर्शन पूजन किया। इनमें युवा पर्यटकों की संख्या सर्वाधिक है। 31 दिसंबर और 01 जनवरी को और अधिक संख्या में श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया जा रहा है जिसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने विशेष सुरक्षा प्रबंध किए हैं, साथ ही सुविधा के लिए गाइडलाइन भी जारी की है।  सोशल मीडिया पर भी छाया हैशटैग न्यू ईयर 2026 इन अयोध्या नए साल का जश्न धर्म स्थलों में मनाने का युवाओं का यह रुझान सोशल मीडिया पर भी दिखाई दे रहा है। जहां न्यू ईयर 2026 इन अयोध्या, न्यू ईयर 2026 इन काशी या स्पिरिचुअल न्यू ईयर जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। युवा नए साल के जश्न में इन धर्म स्थलों पर दर्शन पूजन कर, दोस्तों और परिवारजनों के साथ सेल्फी अपलोड कर रहे हैं। यही रुझान पिछले वर्ष प्रयागराज में आयोजित हुए दिव्य-भव्य महाकुंभ में भी देखने को मिला था, जिसमें न केवल देश बल्कि विश्व के कोने-कोने से श्रद्धालु और पर्यटकों ने आकर विश्व रिकॉर्ड कायम किया था। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जिस तरह से प्रदेश में धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार और सांस्कृतिक पुनरुत्थान हुआ है, उसने युवाओं के मन में आध्यात्मिक उत्साह और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की अलख जगाई है। इस संबंध में काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी, विश्व भूषण मिश्र का कहना है- सनातन संस्कृति उत्सव, उत्साह एवं उल्लास की आश्रयस्थली है। विश्व के समस्त उत्सव सनातन मान्यता में उत्कर्ष प्राप्त करते हैं। लोक उत्सव प्रायः तात्कालिक सत्ता के आचरण को प्रतिबिंबित करता है। अतः स्वाभाविक ही है कि वर्तमान काल में प्रत्येक पर्व पर चाहे वह भारतीय हो अथवा पश्चिम का पर्व, सनातन आस्था के केंद्रों पर श्रद्धालुओं का प्रवाह अभूतपूर्व है। मंदिरों और तीर्थस्थलों के पुनरुद्धार से बढ़ा पर्यटन  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से जिस तरह से अयोध्या में भव्य राम मंदिर का उद्घाटन हुआ, वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण और मथुरा-वृंदावन, तीर्थराज प्रयागराज, विंध्याचल, नैमिषारण्य, संभल, मुजफ्फरनगर में शुक्रतीर्थ (शुक्रताल) के साथ प्रदेश के पुरातन मंदिरों का जीर्णोद्धार हुआ है, इससे विशेष तौर पर युवाओं में सनातन संस्कृति और अपनी परंपराओं के प्रति नई को ऊर्जा का संचार हुआ। यह स्थान पहले की सरकारों में उपेक्षा का शिकार थे। प्रमुख तीर्थों और धार्मिक स्थलों तक सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी के साथ वहां रुकने ठहरने, होटल और रेस्टोरेंट गतिविधियों का विकास हुआ है। यही नहीं जिस तरह से समय-समय पर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की ओर से दिव्य-भव्य उत्सवों का आयोजन किया जाता है, उसने प्रदेश के युवाओं में सनातन संस्कृति के तीर्थों और धर्म स्थलों के प्रति आकर्षण बढ़ाया है। सीएम योगी आदित्यनाथ के इन प्रयासों ने न केवल प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा दिया है, बल्कि युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर भी मिला है।

श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

अयोध्या के शौर्य, वैभव व पराक्रम के आगे नहीं टिक पाया कोई दुश्मनः योगी  श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  कुछ लोगों ने स्वार्थ, मजहबी जुनून व सत्ता के तुष्टिकरण की निकृष्टता में पड़कर अयोध्या को भी बना दिया था उपद्रव और संघर्ष का अड्डा श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में राजनाथ सिंह जी की रही प्रत्यक्ष भूमिकाः सीएम  पांच साल में 45 करोड़ श्रद्धालु आए अयोध्याः मुख्यमंत्री   पहले मिलती थीं लाठी और गोली, अब देश में हर जगह बोल सकते जयश्रीराम और राम-रामः गोरक्षपीठाधीश्वर सीएम योगी ने अंग्रेजी नववर्ष 2026 की दी शुभकामना, सभी के लिए मंगलकारी हो यह वर्ष अयोध्या श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ बुधवार को श्रद्धापूर्वक मनाई गई। समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल हुए। सीएम योगी ने अंग्रेजी नववर्ष 2026 की शुभकामना देते हुए प्रार्थना की कि यह वर्ष सभी के लिए मंगलकारी हो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या ने स्वतंत्र भारत में रामजन्मभूमि आंदोलन के अनेक पड़ाव देखे हैं। अयोध्या के नाम से ही अहसास होता है कि यहां कभी युद्ध नहीं हुआ। कोई भी दुश्मन यहां के शौर्य, वैभव व पराक्रम के आगे टिक नहीं पाया, लेकिन कुछ लोगों ने अपने स्वार्थ, मजहबी जुनून व सत्ता के तुष्टिकरण की निकृष्टता में पड़कर अयोध्या को भी उपद्रव और संघर्ष का अड्डा बना दिया था।  पिछली सरकारों के शासन में होते थे आतंकी हमले सीएम योगी ने पिछली सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि जिस अयोध्या में कभी संघर्ष नहीं होता था, उस अयोध्या में पिछली सरकारों के शासन में आतंकी हमले होते थे। अयोध्या को लहुलूहान करने का प्रयास हुआ था, लेकिन जहां प्रभु की कृपा बरसती हो और जहां हनुमानगढ़ी में स्वयं हनुमान जी महाराज विराजमान हैं, वहां कोई आतंकी कैसे घुस जाता। 2005 में जैसे ही आतंकियों ने दुस्साहस किया, तैसे ही पीएसी के जवानों ने ठक-ठक करके उन्हें मार गिराया। कभी विस्मृत नहीं हो सकती तीन तिथियां  सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 11 वर्ष के अंदर तीन महत्वपूर्ण घटनाओं को अयोध्या कभी विस्मृत नहीं कर सकती। स्वतंत्र भारत में पहली बार 5 अगस्त 2020 को किसी प्रधानमंत्री का अयोध्या में आगमन हुआ। उन्होंने उस दिन यहां श्रीराम मंदिर का भूमि पूजन किया। 22 जनवरी 2024 (पौष शुक्ल द्वादशी) को फिर अयोध्या धाम आकर प्रधानमंत्री ने रामलला की भव्य मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम को संपन्न किया। 25 नवंबर 2025 को विवाह पंचमी पर प्रधानमंत्री जी ने अयोध्या में राम मंदिर के मुख्य शिखर पर सनातन धर्म की भगवा ध्वजा को प्रतिष्ठित किया और संदेश दिया कि सनातन से ऊपर कोई नहीं। सनातन का पताका हमेशा ऐसी ही दिखाई देगी।    श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में राजनाथ सिंह जी की रही प्रत्यक्ष भूमिका  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करते हुए और संगठन के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए राजनाथ सिंह जी की श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में प्रत्यक्ष भूमिका रही है। 500 वर्ष के बाद श्रीराम जन्मभूमि पर प्रभु रामलला के विराजमान होने और मंदिर के इस भव्य स्वरूप को देखकर वे आनंद-गौरव की अनुभूति कर रहे हैं। आंदोलन में सक्रिय भूमिका का निर्वहन करने वाले रक्षा मंत्री जी प्रतिष्ठा द्वादशी पर जब मां अन्नपूर्णा के मंदिर पर सनातन धर्म की ध्वजा का आरोहण कर रहे थे तो मैंने उन्हें भावुक होते देखा है।  पांच साल में 45 करोड़ श्रद्धालु आए अयोध्या   सीएम योगी ने कहा कि 2017 के पहले बिजली, पानी, स्वच्छता, सड़क, कनेक्टिविटी, सुरक्षा भी नहीं थी। जयश्रीराम बोलने पर लाठी और गिरफ्तारी होती थी, लेकिन अयोध्या के संदेश को आगे बढ़ाने के लिए देश-दुनिया का हर सनातन धर्मावलंबी अब यहां दर्शन करके अभिभूत होता है। पहले कुछ लाख लोग यहां आते थे, लेकिन पिछले पांच साल में 45 करोड़ से अधिक श्रदधालु अयोध्या आए। सूर्य वंश की राजधानी अयोध्या देश की पहली सोलर सिटी के रूप में हो गई है। अयोध्या धाम में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है, अयोध्या रेलवे की डबल लाइन के साथ जुड़ गया है। हर ओर से यहां कनेक्टिविटी बेहतर हुई। जिस अयोध्या में सिंगल लेन की सड़कें थीं, आज फोरलेन की सड़कें हैं।  देश में अब हर जगह बोल सकते जयश्रीराम और राम-राम गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश में अब हर जगह जयश्रीराम और राम-राम बोल सकते हैं। अब भारत सरकार की योजना भी ‘जी राम जी’ के नाम पर आ गई है। यह रोजगार की सबसे बड़ी स्कीम बनने जा रही है। कोई भी बेरोजगार कहेगा कि मुझे अपनी ग्राम पंचायत में रोजगार चाहिए तो उसे साल में 125 दिन रोजगार की गारंटी गांव में ही मिल जाएगी।  रामभक्तों ने नहीं की लाठी और गोली की परवाह सीएम योगी ने कहा कि हमारी पीढ़ी सौभाग्यशाली है। पांच सौ वर्ष के इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 1528 से लेकर 1992 और इसके उपरांत भी अयोध्या में हर 20-25 वर्ष में राम मंदिर को वापस लेने के लिए राम भक्त लगातार संघर्ष करता रहा। वह रूका, झुका और बैठा नहीं। उसने सत्ता, दमन, लाठी व गोली की परवाह नहीं की बल्कि वह लड़ता रहा। यह आंदोलन सफलता की नई ऊंचाइयों तक तब पहुंचा, जब आरएसएस ने नेतृत्व दिया। पूज्यों संतों को एक मंच पर लाने में अशोक सिंहल ने सफलता हासिल की। गुलामी का कलंक मिटा और भव्य राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त हुआ।  यह यात्रा का विराम नहीं, बल्कि नई यात्रा की शुरुआत है सीएम योगी ने कहा कि आज प्राण-प्रतिष्ठा के दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में समारोह आयोजित हुआ। अयोध्या की भव्यता, दिव्यता को अनंत काल तक बनाए रखने के लिए हर सनातन धर्मावलंबी को आगे बढ़ना होगा। यह यात्रा का विराम नहीं, बल्कि नई यात्रा की शुरुआत है। विरासत पर गौरव की अनुभूति करते हुए विकास के नित नए प्रतिमान को स्थापित करना है। पीएम मोदी ने हर भारतवासी को विकसित भारत की संकल्पना दी है। देश जब आजादी के 100 वर्ष पूरा करेगा तो हर भारतवासी का संकल्प होना चाहिए कि विरासत का संरक्षण करते हुए अपने क्षेत्र में उत्कृष्टतम कार्य करके दिखाना है। देश … Read more

अमेरिका और जर्मनी के बाद भारत में रोल्स-रॉयस का तीसरा घर, लग्ज़री ब्रांड करेगा मेगा इन्वेस्टमेंट

 नई दिल्ली भारत अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है. अब भारत 2030 तक जर्मनी को भी पछाड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने की राह पर है. इंडिया अब केवल एक उभरता हुआ बाजार नहीं, बल्कि ग्लेाबल डिफेंस और एडवांस इंजीनियरिंग का अगला बड़ा हब भी बनता जा रहा है. इसी बदलते भारत को देखते हुए ब्रिटेन की दिग्गज एयरो-इंजन निर्माता कंपनी रोल्स-रॉयस (Rolls Royce) ने एक बड़ा संकेत दिया है. कंपनी भारत को ब्रिटेन के बाहर अपना तीसरा “होम मार्केट” बनाने की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रही है, जो देश की तकनीकी और सामरिक ताकत के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकता है. अब तक अपने लग्ज़री कारों से भारतीयों का दिल जीतने वाली रोल्स रॉयस अब डिफेंस और एयरोस्पेस में भी बड़ी योजनाओं के साथ उतर रही है.  रोल्स-रॉयस का तीसरा घर रोल्स-रॉयस ने हाल ही में कहा कि, वह भारत को ब्रिटेन के बाहर अपना तीसरा “होम मार्केट” बनाने की संभावनाओं पर काम कर रही है. कंपनी का मानना है कि भारत में जेट इंजन, नेवल प्रोपल्शन, लैंड सिस्टम्स और एडवांस इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं मौजूद हैं, जिन्हें पूरी तरह खोलने का समय अब आ गया है. पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में रोल्स-रॉयस इंडिया के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट शशि मुकुंदन ने कहा कि, "कंपनी भारत में बड़े निवेश की योजना बना रही है. उन्होंने साफ किया कि एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी एएमसीए प्रोग्राम के तहत बनने वाले लड़ाकू विमानों के लिए नेक्स्ट जेनरेशन एयरो इंजन का डेवलपमेंट भारत में करना कंपनी की प्राथमिकता है." अमेरिका और जर्मनी के बाद भारत पर फोकस फिलहाल रोल्स-रॉयस ब्रिटेन के अलावा अमेरिका और जर्मनी को अपना “होम मार्केट” मानती है, जहां कंपनी की मजबूत मौजूदगी और मैन्युफैक्चरिंग फेसिलिटी है. अब भारत को भी उसी स्तर पर लाने की तैयारी इस बात का संकेत है कि कंपनी भारत में लांग टर्म प्लांस के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में है.  शशि मुकुंदन ने यह भी बताया कि, "रोल्स-रॉयस भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमताओं को मजबूत करने के लिए इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी में अहम भूमिका निभा सकती है. यह तकनीक भविष्य की नौसैनिक जरूरतों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है." एयरो इंजन से नेवल इंजन तक का रास्ता उन्होंने बताया कि, "अगर एएमसीए के लिए जेट इंजन का डेवलपमेंट रोल्स-रॉयस के साथ होता है, तो इससे भारत को नेवल प्रोपल्शन इंजन बनाने में भी मदद मिल सकती है." बताते चलें कि, रोल्स-रॉयस दुनिया की उन गिनी-चुनी कंपनियों में शामिल है, जिनके पास एयरो इंजन को “मैरिनाइज” करने की क्षमता है. भारत में बड़े निवेश की तैयारी मुकुंदन ने निवेश के आंकड़े साझा किए बिना कहा कि कंपनी भारत में अपने एक्सपेंशन के लिए बड़ा निवेश करने पर विचार कर रही है. भारत में स्केल, नीतिगत स्पष्टता और रक्षा व इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम को लेकर मजबूत पॉलिटिकल विलपॉवर है, जो तेजी से परिपक्व हो रही है." हालांकि उन्होंने इस बात की जानकारी नहीं दी है कि, रोल्स रॉयस अपने इस प्रोजेक्ट को लेकर कितना निवेश करने पर सोच रही है. उन्होंने कहा कि, "अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो यह निवेश इतना बड़ा होगा कि लोग इसे जरूर महसूस करेंगे. असली मायने निवेश की राशि से ज्यादा उसके प्रभाव के हैं, जो उन सभी क्षेत्रों में वैल्यू चेन और इकोसिस्टम के डेवलपमेंट को गति देगा, जहां रोल्स-रॉयस काम करती है." रोल्स-रॉयस भारत में दो डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग के साथ MoU को अंतिम रूप देने जा रही है. इनमें से एक समझौता अर्जुन टैंक के लिए इंजन निर्माण से जुड़ा होगा, जबकि दूसरा भविष्य के रेडी कॉम्बैट व्हीकल्स के इंजनों से संबंधित होगा. गौरतलब है कि अक्टूबर में रोल्स-रॉयस के सीईओ तुफ़ान एर्गिनबिलगिक ने एक बिजनेस राउंडटेबल के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा था कि आने वाले समय में भारत रोल्स-रॉयस के लिए बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है. यह बयान अब कंपनी की रणनीति में साफ झलकता नजर आ रहा है. हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग हब और रोजगार की संभावनाएं Rolls-Royce अब भारत को केवल एक बाजार नहीं, बल्कि डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग, रिसर्च और सप्लाई चेन का अहम केंद्र बनाने जा रहा है. इससे न सिर्फ एयरोस्पेस, डिफेंस और पावर सिस्टम्स सेक्टर में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को भी नई गति मिलेगी. साथ ही, मॉडर्न जेट इंजन और एडवांस टेक्नोलॉजी का भारत में विकास देश को ग्लोबल एविएशन और डिफेंस इकोसिस्टम में और मजबूत स्थिति दिलाएगा, जिससे भारत भविष्य की हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभरता नजर आएगा. रोल्स-रॉयस का इतिहास रोल्स-रॉयस का इतिहास इंजीनियरिंग, इनोवशन और विश्वसनीयता का प्रतीक रहा है. इसकी स्थापना 1906 में चार्ल्स रोल्स और हेनरी रॉयस ने की थी. इन्हीं दोनों के सरनेम से कंपनी का नाम 'रोल्स-रॉयस' पड़ा है. चार्ल्स और हेनरी ने पहले लग्ज़री कारों के जरिए कंपनी को पहचान दिलाई, लेकिन जल्द ही रोल्स-रॉयस ने एयरोस्पेस क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई.  प्रथम विश्व युद्ध के दौरान विमान इंजनों के निर्माण से शुरुआत करते हुए कंपनी ने जेट इंजन टेक्नोलॉजी में क्रांति ला दी. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद रोल्स-रॉयस ने जेट इंजन डेवलप किए, जिनका इस्तेमाल सैन्य और कमर्शियल विमानों में हुआ और जिसने आधुनिक एविएशन की दिशा बदल दी. आज रोल्स-रॉयस दुनिया की लीडिंग एयरो-इंजन निर्माता कंपनियों में शामिल है और इसके जेट इंजन हाई परफॉर्मेंस, एडवांस टेक्नोलॉजी के लिए जाने जाते हैं.

DAVV में डेटा गड़बड़ी, उच्च शिक्षा विभाग को रिपोर्ट भेजने की तैयारी

इंदौर  उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर के सभी सरकारी कालेज से प्राध्यापकों के अवकाश को लेकर ब्यौरा मांगा है। यह जानकारी केंद्र सरकार के समर्थ पोर्टल पर अपलोड की जानी है। इसे लेकर अब देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कारण यह है कि विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट (यूटीडी) में वर्ष 2012 से अब तक प्राध्यापकों की छुट्टियों का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इसके चलते समर्थ पोर्टल पर जानकारी अपलोड करने को लेकर कोई डेटा नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक अब प्रोफेसरों को आगे से अवकाश के लिए पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन मुताबिक बीते कई वर्षों से प्राध्यापकों की छुट्टियों से संबंधित आवेदन न तो संकलित किए गए और न ही उन्हें डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा गया। अब जब उच्च शिक्षा विभाग ने अचानक यह जानकारी मांगी है तो विश्वविद्यालय के पास प्रस्तुत करने के लिए कोई ठोस डेटा नहीं है। इस स्थिति का पता चलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि विभाग ने दो दिनों के भीतर समर्थ पोर्टल पर छुट्टियों की जानकारी अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन रिकॉर्ड के अभाव में यह कार्य लगभग असंभव नजर आ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बिना किसी दस्तावेज या आवेदन के सही जानकारी देना मुश्किल है। इससे विश्वविद्यालय की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। इस संकट से निपटने के लिए डीएवीवी प्रशासन ने उच्च शिक्षा विभाग को पत्र भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। पत्र के माध्यम से विभाग को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जाएगा और समयसीमा में छूट या वैकल्पिक समाधान की मांग की जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति न बने। इसके लिए छुट्टियों से जुड़े रिकार्ड को व्यवस्थित और डिजिटल रूप में संधारित करने पर भी विचार किया जा रहा है। कुलसचिव प्रज्वल खरे का कहना है कि प्रोफेसरों के अवकाश से जुड़ा रिकॉर्ड अव्यवस्थित है। इस बारे में संबंधित विभाग के अधिकारियों से जानकारी जुटाई जा रही है। वैसे उच्च शिक्षा विभाग को एक रिपोर्ट भी भेजेंगे।

प्रमोशन को लेकर बड़ा सवाल: क्या यह मौलिक अधिकार है? हाईकोर्ट का अहम जवाब

चंडीगढ़  पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने प्रमोशन को लेकर बड़ा फैसला दिया है। अदालत का कहना है कि एक कर्मचारी का प्रमोशन उसका मौलिक अधिकार नहीं है। पटियाला की एक महिला ने प्रमोशन के लिए उसके नाम पर विचार नहीं किए जाने को लेकर याचिका दाखिल की थी। इसपर अदालत ने उन्हें पदोन्नत नहीं करने के विभागीय फैसले को बरकरार रखा है।   क्या था मामला पंजाब में साल 1990 से टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट से शुरुआत करने वाली महिला ने याचिका दाखिल की थी। उन्होंने इस अंतराल में प्रमोशन हासिल करते हुए साल 2023 तक डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लानर के पद पर सेवाएं दीं। इसके साथ ही वह सीनियर पोस्ट के लिए पात्र हो गईं थीं। अब प्रमोशन के लिए उनके नाम पर आगे विचार नहीं किया गया। विभाग के निदेशक का कहना है कि सेवा में रहते हुए याचिकाकर्ता महिला ने विकलांगता का सर्टिफिकेट जमा किया था। इसमें उनके अस्थायी सुनने की विकलांगता 41 फीसदी होने की बात कही गई थी। यह प्रमाण पत्र उन्होंने दिव्यांग कर्मचारियों को मिलने वाले लाभों के लिए किया था, जिसमें रिटायरमेंट की उम्र 58 के बजाए 60 भी शामिल है। इसके बाद याचिकाकर्ता ने एक और सर्टिफिकेट जमा कराया, जिसमें सुनने की अक्षमता 53 फीसदी और स्थायी दिव्यांग बताई गई। विभाग के पास दो सर्टिफिकेट पहुंचने के कारण संदेह पैदा हुआ। इधर, मेडिकल बोर्ड ने उनके दिव्यांग होने को अस्थायी करार दिया और उनके दिव्यांग के तौर पर पहचाने जाने वाले दावे को भी अधिकारियों ने खारिज कर दिया। इसके बाद उन्हें 58 साल की उम्र में रिटायर करने का फैसला लिया गया। कोर्ट ने क्या कहा जस्टिस नमित कुमार याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने कहा, 'कानून के मुताबिक, प्रमोशन ना ही निहित अधिकार है और ना ही मौलिक अधिकार है। प्रमोशन के लिए नाम पर विचार किया जाना मौलिक अधिकार है। प्रतिवादियों की तरफ से याचिकाकर्ता को सीनियर टाउन प्लानर पद पर प्रमोट नहीं किए जाने में कुछ गलत नहीं है।' खास बात है कि सेवा में रहने के दौरान महिला को सीनियर टाउन प्लानर कार्यभार सौंपा गया था। अब कोर्ट ने उनकी याचिका इस कार्यभार को संभालने के लिए उनकी भत्ते और भुगतान की मांग वाली याचिका को स्वीकार कर लिया है।

रीवा बना पर्यटकों की पसंद, 80% बुकिंग के साथ होम स्टे और बैलगाड़ी में मजेदार अनुभव

रीवा  नए साल 2026 के आगमन का उत्साह चरम पर है और इसका सीधा असर रीवा के पर्यटन पर भी साफ दिखाई दे रहा है. 31 दिसंबर और 1 जनवरी को लेकर जिले के प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पर्यटन स्थल और आस्था के केंद्र सैलानियों से गुलजार हो चुके हैं. यहां ठंडी फिजा और विंध्य की मनमोहक वादियां पर्यटकों को बड़ी संख्या में रीवा की तरफ खींच कर ला रही है. हालात यह हैं कि शहर के लगभग सभी होटलों की बुकिंग धड़ाधड़ शुरू है. जबकि सेमरिया क्षेत्र के पुरवा में बने होम-स्टे भी ऑनलाइन और ऑफलाइन बुकिंग के जरिए तेजी से फुल होते जा रहे हैं, क्योंकि रीवा के 4 सबसे खूबसूरत वाटर फॉल में से एक पूर्वा वाटर फॉल इसी क्षेत्र में है. नए वर्ष पर रीवा में बढ़ी पर्यटकों की संख्या रीवा में बीते कुछ वर्षों की तुलना में इस बार पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. करीब 80 प्रतिशत बुकिंग पहले ही पूरी हो चुकी है, जो इस बात का संकेत है कि इस बार न्यू ईयर पर रीवा में पर्यटन को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है. खास बात यह है कि रीवा का पर्यटन अब केवल शहरी होटल और स्थलों तक सीमित नहीं रहा. पर्यटक अब ग्रामीण जीवन, प्राकृतिक सौंदर्य और शांत माहौल की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं. गांवों में बने होम-स्टे, प्राकृतिक पिकनिक स्पॉट और आसपास के हरियाली से भरपूर इलाके सैलानियों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं. पर्यटक क्यों कर रहें रीवा का रुख रीवा में कई ऐसे प्राकृतिक और सांस्कृतिक क्षेत्र हैं, जिनके बारे में जानकर पर्यटक नए वर्ष को यादगार बनाने के लिए बड़ी संख्या में यहां का रुख कर रहे हैं और रीवा को अपना बेहतरीन डेस्टिनेशन मान रहे हैं. यहां कल-कल बहती सुंदर नदियां, मनमोहक झरने, घने जंगल और आस्था से जुड़े धार्मिक स्थल पर्यटकों को खासा आकर्षित कर रहे हैं. इसके साथ ही ग्रामीण संस्कृति को नजदीक से देखने और सादगी भरे जीवन का अनुभव करने का अवसर भी सैलानियों को रीवा की ओर खींच रहा है. न्यू ईयर के अवसर पर परिवारों और युवाओं की बढ़ती मौजूदगी यह साफ दर्शाती है कि रीवा अब नेचर और बेस्ट एक्सपीरियंस टूरिज्म के रूप में अपनी एक नई और मजबूत पहचान बना चुका है. रीवा में टेंपल टूरिज्म का नया दौर रीवा अब सिर्फ हरियाली, झरनों और जंगलों तक सीमित पहचान नहीं रखता, बल्कि यहां का टेंपल टूरिज्म भी तेजी से नई ऊंचाइयों को छू रहा है. श्रद्धा आस्था और सुकून की तलाश में रीवा का रुख करने वाले पर्यटक अब एक ही यात्रा में मंदिरों के दर्शन, प्राकृतिक स्थलों की खूबसूरती और ऐतिहासिक धरोहरों का अनुभव कर रहे हैं. यही अनोखा संगम रीवा को खास बनाता है, जहां आस्था, प्रकृति और इतिहास एक साथ सांस लेते नजर आते हैं. बढ़ती पर्यटक आमद और विविध अनुभवों की उपलब्धता ने रीवा को विंध्य क्षेत्र का उभरता हुआ पर्यटन केंद्र बना दिया है, जो हर वर्ग के सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. ग्रामीण इलाकों के होम स्टे में छाई न्यू ईयर की रौनक न्यू ईयर के आगमन के साथ ही रीवा की होटल इंडस्ट्री और गांवों में बने होम स्टे पूरी तरह गुलजार नजर आ रहें है. शहर के ज्यादातर छोटे-बड़े होटलों से लेकर प्रीमियम होटल और रिसॉर्ट्स तक में एक सप्ताह पहले से ही लगभग फुल होने की कगार पर हैं. होटल संचालकों के मुताबिक 31 दिसंबर और 1 जनवरी को सेलिब्रेट करने के लिए पहले ही बुकिंग हो चुकी हैं. यहां विंध्य के सतना, सीधी, शहडोल, सिंगरौली के साथ ही उत्तर प्रदेश, बिहार समेत छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से पर्यटक बड़ी संख्या में रीवा पहुंच रहे हैं. नए साल में युवा ग्रुप की पसंदीदा जगह बन रहा रीवा परिवारों के साथ-साथ युवाओं के ग्रुप भी नए साल का जश्न मनाने के लिए रीवा को अपनी पसंद बना रहे हैं. कुछ सैलानी विंध्य क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहरों और प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए आ रहे हैं, तो वहीं कई पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य, शांति और ग्रामीण जीवन के अनूठे अनुभव की तलाश में रीवा का रुख कर रहे हैं. रीवा में है प्रसिद्ध मंदिर, ऐतिहासिक धरोहर और कई पर्यटन स्थल नववर्ष के अवसर पर रीवा शहर और आसपास के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों पर सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ने की प्रबल संभावना है. ठंडक भरे सुहावने मौसम और नव वर्ष के माहौल के चलते पर्यटकों की आवाजाही में इस बार उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिलेगी. विशेष रूप से प्रसिद्ध मंदिरों, प्राकृतिक पर्यटन स्थलों, झरनों, पिकनिक स्पॉट और ऐतिहासिक धरोहरों पर पर्यटकों की संख्या अधिक रहने की उम्मीद है. होम स्टे बने आकर्षण का केंद्र न्यू ईयर के मौके पर इस बार रीवा के ग्रामीण क्षेत्रों में बने होम-स्टे पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. सेमरिया क्षेत्र के पुरवा गांव में विकसित किए गए 10 होम-स्टे खासतौर पर सैलानियों की पहली पसंद बनकर उभरे हैं. होम-स्टे संचालक पुरवा गांव के निवासी अभय मिश्रा के अनुसार "यहां करीब 80 प्रतिशत बुकिंग पहले ही पूरी हो चुकी है, जो की ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से की गई है." यहां पर्यटकों को कराई जाती है बैल गाड़ी से गांव की सैर इन होम-स्टे की पहचान केवल ठहरने की सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यटकों को ग्रामीण जीवन की आत्मा से रू-बरू कराने वाला अनुभव भी प्रदान करते हैं. संचालकों के अनुसार सैलानियों को बैलगाड़ी के माध्यम से पुरवा गांव, पुरवा वाटरफॉल, बसामन मामा और गौवंश अभ्यारण्य का भ्रमण कराया जाता है. इस दौरान पर्यटक गांव की गलियों से गुजरते हुए खेत-खलिहान, तालाब, पारंपरिक दिनचर्या और ग्रामीण परिवेश को नजदीक से देखते हैं, जिससे वे गांव की परंपराओं और ग्रामीणों की जीवनशैली को प्रत्यक्ष रूप से समझ पाते हैं. प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर है रीवा यही कारण है कि न्यू ईयर के मौके पर प्रकृतिक की गोद और सादगी भरे माहौल की तलाश में पहुंचे पर्यटक इन ग्रामीण होम-स्टे को विशेष प्राथमिकता दे रहे हैं. यहां सैलानियों को शुद्ध देसी बघेली भोजन परोसा जा रहा है, जिसमें स्थानीय व्यंजनों का पारंपरिक स्वाद झलकता है. वहीं शाम ढलते ही बघेली लोकगीतों और … Read more