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क्रांति गौड़ के पिता की नौकरी फिर से बहाल, मुख्यमंत्री ने किया वादा पूरा

महिला क्रिकेटर क्रांति गौड़ के पिता की नौकरी हुई बहाल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्रांति गौड़ से किया वादा निभाया भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बार फिर संवेदनशील, मानवीय और प्रतिबद्ध नेतृत्व का परिचय देते हुए अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेटर व मध्यप्रदेश की प्रतिभावान खिलाड़ी क्रांति गौड़ से किए वादे को निभाते हुए उनके पिता श्री मुन्ना सिंह की वर्षों से निलंबित नौकरी को सोमवार को पुनः बहाल करवा दिया है। यह निर्णय न केवल एक परिवार के लिए राहत लेकर आया है बल्कि सरकार की संवेदनशीलता, खिलाड़ियों के प्रति सम्मान और न्यायप्रिय दृष्टिकोण का स्पष्ट उदाहरण है। गौरतलब है कि विगत दिनों महिला वनडे वर्ल्ड कप में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक जीत के बाद आयोजित सम्मान समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रदेश की प्रतिभाशाली क्रिकेटर क्रांति गौड़ से उनके पिता की नौकरी बहाल करने का आश्वासन दिया था। जिसे उन्होंने नियमों के तहत निभाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार पुलिस मुख्यालय द्वारा श्री मुन्ना सिंह को पुनः सेवा में बहाल कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि श्री मुन्ना सिंह, जो मध्यप्रदेश पुलिस में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत थे, वर्ष 2012 में चुनावी ड्यूटी के दौरान कथित लापरवाही के कारण निलंबित कर दिए गए थे। बीते 13 वर्षों से लंबित यह मामला अब मुख्यमंत्री की पहल से सकारात्मक समाधान तक पहुँचा है। क्रांति गौड़ का सपना हुआ साकार इस निर्णय से गौड़ परिवार को न केवल आर्थिक और सामाजिक संबल मिला है बल्कि क्रांति गौड़ का वह सपना भी साकार हुआ है, जिसमें वे अपने पिता को सम्मानपूर्वक पुलिस वर्दी में सेवानिवृत्त होते देखना चाहती थीं।  

2026 में मध्य प्रदेश के लिए बड़ी सौगातें, नए साल में युवाओं और किसानों को मिलेगा विशेष लाभ

भोपाल  नव वर्ष का उत्साह हर तरफ चरम पर है। इस बार साल 2026 विशेष महत्व रखने वाला है। किसानों की आय में बढ़ोतरी के लिए सरकार नई पहल शुरू करेगी। किसान कल्याण को देखते हुए ये वर्ष कृषि वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। इसके अंतर्गत किसान कल्याण के कई कार्यक्रम आयोजित होंगे। खेत और गांव को आगे बढ़ने के नए मौके सृजित किए जाएंगे।  वहीं, युवाओं की बात करें तो 40 हजार पदों पर पुलिस की नई भर्तियां होने की संभावना है। इससे प्रदेश की कानून व्यवस्था और सुरक्षा प्रणाली मजबूत होगी। तो चलिए यहां आपको क्रमश: बता रहे हैं क्या-क्या नई सौगातें मिलेंगी।  कृषि वर्ष 2026 को ‘समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश’ टैगलाइन के साथ मनाया जाएगा कृषि वर्ष को लेकर सीएम डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में एक बैठक में महत्वपूर्ण घोषणा की है। इस बैठक में सीएम ने कहा था कि वर्ष 2026 को मध्य प्रदेश में कृषि वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। किसानों को लाभ पहुंचाना सरकार की प्रमुख प्राथमिकता होगी। कृषि से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को रोजगार और स्वावलंबन के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। प्रदेश में कृषि में नवाचार की व्यापक संभावनाएं हैं। धान की खेती को प्राथमिकता देते हुए, गेहूं, चना, दलहन, तिलहन और हॉर्टीकल्चर के क्षेत्रों में नवाचारों से किसानों को अवगत कराने के लिए उन्हें विभिन्न देशों का भ्रमण भी कराया जाएगा। कृषि वर्ष 2026 को ‘समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश’ टैगलाइन के साथ मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों की आय को दोगुने से अधिक बढ़ाना और कृषि को लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक-आधारित रोजगार मॉडल में बदलना है। आत्मनिर्भर किसान, उन्नत खेती, बाजार से बेहतर जुड़ाव और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य और वानिकी जैसे क्षेत्रों को एकीकृत करते हुए जिला-आधारित क्लस्टर विकास मॉडल लागू किया जाएगा। इसके तहत प्राकृतिक खेती, डिजिटल सेवाएं, प्रसंस्करण और निर्यात उन्मुख कृषि के माध्यम से किसानों की शुद्ध आय बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा। ग्रामीण युवाओं के लिए ड्रोन सेवा, एफपीओ प्रबंधन, खाद्य प्रसंस्करण और हाइड्रोपोनिक्स जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर तैयार किए जाएंगे। मध्य प्रदेश विधानसभा पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस हो जाएगी नए साल 2026 की शुरुआत में कई खुशखबरी सामने आ रही हैं। पहली, विधानसभा पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस हो जाएगी। बजट सत्र में विधायकों को सभी जरूरी दस्तावेज़, प्रश्न-उत्तर और नोट्स टैबलेट पर उपलब्ध कराए जाएंगे। उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा भी बजट प्रस्तुति टैबलेट के माध्यम से पेश करेंगे। सदन में हर विधायक की टेबल पर स्थायी टैबलेट लगाए जाएंगे, जिससे पूरी कार्यवाही बिना कागज के संचालित होगी। इसके साथ ही, मध्य प्रदेश की कैबिनेट भी ई-कैबिनेट होगी और बैठक का एजेंडा टैब पर भेजा जाएगा। नए साल में युवाओं को इन भर्तियां मिलेंगे नए अवसर एमपी में पुलिस में चालीस हजार भर्तियां की जाएंगी। एमपी पुलिस बोर्ड के द्वारा ये भर्तियां आयोजित होंगी। लेकिन इसका अभी तक कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन अभी तक जारी नहीं किया गया है। जबकि मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सहायक प्रोफेसर भर्ती 2026 की अधिसूचना जारी कर दी है। इस भर्ती के अंतर्गत आयोग द्वारा विभिन्न विषयों में कुल 949 पदों पर नियमित नियुक्तियां की जाएंगी। इस भर्ती के लिए इच्छुक और पात्र अभ्यर्थी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी की जाएगी, जिसे उम्मीदवार एमपीपीएससी के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से पूरा कर पाएंगे। वहीं, मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने पूरे साल का भर्ती परीक्षा कैलेंडर जारी किया है. साल की शुरुआत में ग्रुप-1, ग्रुप-2 और ग्रुप-5 के तहत स्टाफ नर्स की संयुक्त भर्ती परीक्षा के लिए नोटिफिकेशन जारी होने की संभावना है.युवाओं के लिए यह बेहतर मौका हो सकता है। अधिक जानकारी के लिए ऑफिशियल वेबसाइट esb.mp.gov.in पर विजिट करें। पुलिस के करीब 22 हजार 500 पदों पर भर्ती होनी है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस को जल्द से जल्द मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए घोषणा करते हुए कहा कि अब प्रदेश में मप्र पुलिस भर्ती बोर्ड का गठन किया जाएगा। इससे पुलिस भर्तियों में तेजी, पारदर्शिता और परफेक्शन आएगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 के लिए स्वीकृत पदों की भर्ती मप्र पुलिस भर्ती बोर्ड की ओर से कर्मचारी चयन मंडल, भोपाल द्वारा की जायेगी। आगामी वर्षों की भर्तियां 'पुलिस भर्ती बोर्ड' द्वारा की जायेंगी। पूर्व में  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा था कि पुलिस, जेल और नगर सेना एवं सुरक्षा तीनों विभागों के शहीदों की विधवाओं और बच्चों के लिए स्नातक स्तर के सभी कोर्सेस में विभिन्न प्राथमिकता श्रेणियों में एक अतिरिक्त सीट पर आरक्षण दिया जाएगा। पुलिस भर्ती पर विशेष जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष हमने 7,500 रिक्त पदों पर भर्ती की अनुमति दी है। पुलिस के करीब 22 हजार 500 पदों पर भर्ती होनी है। इसलिए अब हर साल 7,500-7,500 पदों पर भर्ती कर तीन साल में पुलिस विभाग के सभी रिक्त पद भर दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वीवीआईपी ड्यूटी में तैनात सुरक्षा कर्मचारियों सहित उप पुलिस अधीक्षक और इससे उच्च अधिकारियों को भी अब छठवें वेतनमान का पद पात्रतानुसार निर्धारित विशेष भत्ता एवं जोखिम भत्ता दिया जाएगा। गृह विभाग से जुड़ी सभी सेवाओं के आधुनिकीकरण एवं भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए बहुत जल्द गृह एवं वित्त विभाग की संयुक्त बैठक कर सभी लंबित मसलों का समुचित समाधान निकाला जाएगा। MP: सरकार के 15 लाख कर्मचारियों की बल्लेबले दूसरी बड़ी खुशखबरी कर्मचारियों के लिए है। मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत राज्य सरकार अपने 15 लाख से अधिक कर्मचारियों और उनके परिवारों को कैशलेस हेल्थ कवरेज प्रदान करेगी। इस योजना में सामान्य बीमारी पर 5 लाख रुपये और गंभीर बीमारी या बड़े ऑपरेशन पर 10 लाख रुपये तक इलाज की सुविधा शामिल होगी। योजना स्थायी, अस्थायी, संविदा कर्मचारी, शिक्षक वर्ग, सेवानिवृत्त कर्मचारी, नगर सैनिक, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता समेत कुल लगभग 15 लाख लोगों के लिए लागू होगी। कर्मचारी अपनी मासिक सैलरी या पेंशन से 250 से 1000 रुपये तक का अंशदान देंगे, जो सरकार के हिस्से के साथ मिलकर बीमा प्रीमियम में तब्दील होगा। वर्तमान व्यवस्था में कर्मचारियों को इलाज का पूरा खर्च अपने जेब से करना पड़ता है … Read more

साउथ कोरिया का नया मास्टरपिस—KF-21 ‘बोरामे’ फाइटर जेट: तेजस से बेहतर और F-35 से सस्ता, 2300 KM/घंटा की स्पीड

सियोल  साउथ कोरिया ने अपना पहला स्वदेशी फाइटर जेट KF-21 ‘बोरामे’ तैयार कर लिया है. इसकी पहली डिलीवरी कोरियन एयरफोर्स को इसी साल शुरू होने जा रही है. यह सिर्फ एक विमान नहीं है. यह साउथ कोरिया की आत्मनिर्भरता का प्रतीक है. अब उसे अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर नहीं रहना होगा. यह 4.5 जनरेशन का फाइटर जेट है. यह किसी भी दुश्मन को पल भर में राख कर सकता है. कोरिया एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने इसे बहुत आधुनिक बनाया है. इसमें रडार और मिसाइल सिस्टम बहुत एडवांस हैं. यह खबर सुनते ही चीन और नॉर्थ कोरिया में खलबली मच गई है. आइए समझते हैं कि यह विमान इतना खास क्यों है. यह भारत के तेजस से कितना अलग और ताकतवर है. क्या साउथ कोरिया का KF-21 आसमान में चीन और नॉर्थ कोरिया की दादागिरी खत्म कर देगा? साउथ कोरिया ने साल 2010 में एक सपना देखा था. वह अपना खुद का फाइटर जेट बनाना चाहता था. अब साल 2026 में यह सपना पूरा हो गया है. KF-21 बोरामे अब अपनी पहली उड़ान भरने को तैयार है. यह विमान पुराने F-4 और F-5 विमानों की जगह लेगा. यह दो इंजन वाला मल्टीरोल फाइटर जेट है. इसे बनाना साउथ कोरिया का सबसे कठिन प्रोजेक्ट था. इसमें सालों का निवेश और मेहनत लगी है. अब साउथ कोरिया को किसी दूसरे देश से विमान नहीं खरीदने होंगे. इससे उसकी सैन्य शक्ति कई गुना बढ़ जाएगी. चीन के बढ़ते खतरे को देखते हुए यह बहुत जरूरी था.     KF-21 की अधिकतम रफ्तार लगभग 2,300 किलोमीटर प्रति घंटा है. यह इसे दुनिया के सबसे तेज विमानों की लिस्ट में शामिल करती है. आखिर KF-21 बोरामे में ऐसी कौन सी गुप्त तकनीक है?     KF-21 को 4.5 जनरेशन का फाइटर माना जा रहा है. इसमें स्टील्थ यानी रडार से बचने की क्षमता है.     इसका डिजाइन बहुत ही आधुनिक और शार्प है. इसमें AESA रडार लगाया गया है. यह रडार बहुत दूर से दुश्मन को पकड़ लेता है.     इसमें फ्लाई-बाय-वायर कंट्रोल सिस्टम भी मौजूद है.     हालांकि इसमें अभी इंटरनल वेपन बे नहीं है. यानी मिसाइलें बाहर की ओर ही लगी होंगी. लेकिन भविष्य में इसे और अपडेट किया जाएगा.     यह विमान F-16 से ज्यादा ताकतवर है. वहीं यह F-35 से काफी सस्ता और किफायती है. 4.5 Gen का मतलब क्या है? 4.5 जनरेशन का मतलब है कि यह विमान चौथी पीढ़ी से बेहतर है. लेकिन यह पांचवीं पीढ़ी के पूरी तरह स्टील्थ विमानों से थोड़ा पीछे है. यह उन देशों के लिए बेस्ट है जो कम बजट में हाई टेक्नोलॉजी चाहते हैं. भारत का ‘तेजस’ और तुर्की का ‘कान’ इसके सामने टिक पाएंगे? दुनिया भर में कई देश अपने विमान बना रहे हैं. भारत का तेजस मार्क 1A अभी शुरुआती चरण में है. तेजस मार्क 2 और AMCA पर अभी काम चल रहा है. वहीं तुर्की का KAAN भी अभी टेस्टिंग मोड में है. लेकिन साउथ कोरिया इन सब से आगे निकल गया है. KF-21 ने 2000 घंटे से ज्यादा की उड़ान भर ली है. इसकी टेस्टिंग बहुत ही पारदर्शी और सफल रही है. चीन का J-20 भी एक बड़ा खिलाड़ी है मगर चीन अपनी तकनीक को हमेशा गुप्त रखता है. क्या KF-21 दुनिया के फाइटर जेट मार्केट में अमेरिका के दबदबे को सीधी चुनौती देने वाला है? अब कई देश KF-21 को खरीदना चाहते हैं. अमेरिका के F-35 को खरीदना बहुत महंगा पड़ता है. साथ ही उसकी मेंटेनेंस भी बहुत मुश्किल है. KF-21 एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है. इंडोनेशिया इस प्रोजेक्ट में साउथ कोरिया का पार्टनर है. फिलीपींस और मलेशिया भी इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं. मिडिल ईस्ट के कई देश भी इसे खरीदना चाहते हैं. साउथ कोरिया का डिफेंस मार्केट तेजी से बढ़ रहा है. उसके K2 टैंक और K9 तोपें पहले ही हिट हैं. अब KF-21 भी दुनिया भर में एक्सपोर्ट होने को तैयार है.

होली पर ट्रेनों में सीटें फुल, दिल्ली, मुंबई और गुजरात से यूपी-बिहार जाने वाली ट्रेनों में कंफर्म टिकट मिलना मुश्किल

लखनऊ  भारतीय रेलवे त्योहारी सीजन में लगातार स्पेशल ट्रेनों का परिचालन करता है. अपने घरों से दूर रहकर रोजी-रोटी कमाने वाले लोग होली, दिवाली, दशहरा और छठ पूजा जैसे त्योहारों पर अपने घर तक पहुंच सकें, इसके लिए खास इंतजाम किए जाते हैं. लेकिन तमाम स्पेशल ट्रेनों के परिचालन के बावजूद रेगुलर ट्रेनों में इन सभी त्योहारों के दौरान जबरदस्त भीड़ दिखाई देती है और कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल होता है. इस बार होली में भी यही हालत नजर आ रहे हैं. रंगों का त्योहार होली इस साल 4 मार्च को मनाया जाएगा लेकिन 2 महीने पहले ही दिल्ली, मुंबई और गुजरात की तरफ से चलकर यूपी-बिहार आने वाली ट्रेनों में सीटें अभी से फुल हो चुकी हैं. कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल लग रहा है. गौरतलब है कि छठ महापर्व की तरह होली भी एक ऐसा त्योहार है, जब दिल्ली, मुंबई और गुजरात जैसे शहरों में रहकर नौकरी व्यवसाय करने वाले यूपी, बिहार, झारखंड और बंगाल के तमाम लोग अपने घरों को लौटते हैं. लंबी दूरी के लिए अपने घर तक पहुंचाने का सबसे सुविधाजनक साधन ट्रेन ही होता है लेकिन इस बार होली के दौरान ट्रेनों में कंफर्म टिकट की जबरदस्त मारामारी दिखाई दे रही है. दिल्ली-यूपी होते हुए बिहार पहुंचने वाली ट्रेनों का हाल अगर हम दिल्ली से यूपी होते हुए बिहार पहुंचने वाली ट्रेनों की बात करें तो फरक्का एक्सप्रेस, पुरुषोत्तम एक्सप्रेस, मगध एक्सप्रेस, पूर्वा एक्सप्रेस, संपर्क क्रांति एक्सप्रेस, श्रमजीवी एक्सप्रेस, नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस, ब्रह्मपुत्र मेल, दुरंतो एक्सप्रेस, सीमांचल एक्सप्रेस सहित तमाम ट्रेनों में स्लीपर क्लास के सभी टिकट बुक हो चुके हैं. इन सभी ट्रेनों में लंबी वेटिंग दिखाई दे रही है. यही हाल थर्ड और सेकंड एसी का भी है. कई ट्रेनों में वेटिंग टिकट भी उपलब्ध नहीं अगर हम मुंबई से यूपी, बिहार की तरफ जाने वाली ट्रेनों की बात करें तो इन ट्रेनों में भी होली के दौरान कंफर्म टिकट मिलना मुश्किल दिखाई दे रहा है. लोकमान्य तिलक पाटलिपुत्र एक्सप्रेस, एलटीटी गोड्डा एक्सप्रेस, एलटीटी गुवाहाटी एक्सप्रेस, एलटीटी डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस भागलपुर एक्सप्रेस, एलटीटी राजगीर एक्सप्रेस, बांद्रा टर्मिनस पटना एक्सप्रेस, वास्कोडिगामा पटना एक्सप्रेस और एलटीटी अगरतला एक्सप्रेस सहित तमाम ट्रेनों में सभी सीटें फुल दिखाई दे रही हैं. यही नहीं कई ट्रेनों में तो वेटिंग टिकट भी उपलब्ध नहीं है, यानी नो रूम दिखाई दे रहा है. फरवरी के आखिरी हफ्ते से होली तक बुकिंग फुल इसी तरह अगर हम गुजरात से यूपी बिहार पहुंचने वाली ट्रेनों की बात करें, तो अहमदाबाद सिलचर एक्सप्रेस, अजीमाबाद एक्सप्रेस, अहमदाबाद आसनसोल एक्सप्रेस, अहमदाबाद पटना एक्सप्रेस, उधना दानापुर एक्सप्रेस और सूरत भागलपुर एक्सप्रेस देसी ट्रेनों में सभी फरवरी के आखिरी सप्ताह से 4 मार्च होली तक सभी सीटें फुल हैं. इस रूट की भी कई ट्रेनों में वेटिंग टिकट तक उपलब्ध नहीं है. यही हाल दिल्ली से मुंबई, लखनऊ और वाराणसी की तरफ जाने वाली ट्रेनों का भी है. इन रेल रूट पर चलने वाली तमाम ट्रेनों में स्लीपर और एसी क्लास की सभी टिकट अभी से बुक हो चुके हैं. हालांकि, इन रूट की ट्रेनों में राहत की बात यह है कि वेटिंग बहुत लंबी दिखाई नहीं दे रही है. फिलहाल होली के दौरान यूपी, बिहार की तरफ जाने वाली ट्रेनों में लंबी वेटिंग दिखाई दे रही है. ऐसे में अब लोगों की नजरें रेलवे की तरफ टिक गई हैं कि भारतीय रेलवे कब इन रेल रूट्स पर होली स्पेशल ट्रेनें चलाने की घोषणा करता है.

वेनेजुएला से क्रूड ऑयल पर बैन हटने से तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा? कंपनियों को मिलेगा सस्ता तेल

नई दिल्‍ली. अमेरिकी द्वारा वेनेजुएला के राष्‍ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने दुनियाभर में हलचल मचा दी है. अमेरिका की इस कार्यवाही से दुनिया के ज्‍यादातर देश खुश नहीं है, लेकिन खुलकर बस कुछ ही देश इसके खिलाफ बोल रहे हैं. वेनेजुएला पर अमेरिका के इस ‘अघोषित नियंत्रण’ के बाद वेनेजुएला के तेल निर्यात पर लगे कड़े प्रतिबंध (Embargo) हटने की उम्‍मीद जगी है. यदि ऐसा होता है तो क्‍या भारतीय कंपनियों को सस्‍ता तेल मिलेगा? ये वो सवाल है जो हर किसी के जेहन में उभर रहा है. कच्‍चे तेल के व्‍यापार पर नजर रखने वालों का कहना है कि वेनेजुएला के तेल से प्रतिबंध हटते हैं तो यह भारतीय कंपनियों, रिलायंस इंडस्ट्रीज और ओएनजीसी (ONGC) सहित वैश्विक रिफाइनिंग दिग्गजों के लिए ‘लॉटरी’ लगने जैसा होगा. एक सवाल यह भी है कि आखिर यह तेल कंपनियों को कितना सस्ता मिलेगा और वैश्विक बाजार पर इसका क्या असर होगा? वेनेजुएला वर्तमान में दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार (लगभग 300 बिलियन बैरल) पर बैठा है, जो वैश्विक आपूर्ति का लगभग 17-20% हिस्सा है. विडंबना यह है कि कुप्रबंधन और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण नवंबर 2025 तक इसका उत्पादन गिरकर मात्र 9.21 लाख बैरल प्रति दिन (bpd) रह गया है. यह उस देश के लिए चिंताजनक है जिसने 1970 के दशक में 3.5 मिलियन bpd का उत्पादन किया था. अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि अक्टूबर 2025 में उत्पादन 1.01 मिलियन bpd था, जो नवंबर में घटकर 8.60 लाख bpd रह गया. करना होगा बड़ा निवेश ट्रंप प्रशासन का मानना है कि यदि प्रतिबंध हटाए जाते हैं तो अमेरिकी तेल कंपनियां वहां के क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को ठीक करने के लिए अरबों डॉलर का निवेश करेंगी. ब्‍लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वेनेजुएला के तेल उद्योग की सबसे बड़ी चुनौती इसका जर्जर हो चुका बुनियादी ढांचा है. राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के 12 साल के शासनकाल और उससे पहले ह्यूगो चावेज़ के दौर में भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और निवेश की भारी कमी ने इस ‘सोने की खान’ को कबाड़ में बदल दिया है. इस बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा करने के लिए अगले एक दशक तक हर साल कम से कम 10 अरब डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी. अगर अमेरिकी कंपनियां इतना बड़ा निवेश करती है और बुनियादी ढांचा खड़ा करती है तो इससे न केवल वेनेजुएला में कच्‍चे तेल का उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि बाजार में आपूर्ति बढेगी, जिससे कीमतें स्वाभाविक रूप से नीचे आएंगी. कांटों भरा है रास्‍ता भले ही वेनेजुएला में तेल का खजाना बड़ा है, लेकिन उसे निकालने का रास्ता कांटों भरा है. वुड मैकेंजी (Wood Mackenzie) के अनुमान के अनुसार, वेनेजुएला के ओरिनोको बेल्ट में उत्पादन को 2 मिलियन bpd तक ले जाने के लिए कम से कम 1-2 साल और बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता होगी. पूर्ण बहाली के लिए बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण पर $58 बिलियन की लागत आने का अनुमान है. इसमें शेवरॉन, एक्सॉन मोबिल और कोनोकोफिलिप्स जैसी कंपनियों की भूमिका अहम होगी. कोनोकोफिलिप्स जैसी कंपनियों का वहां $10 बिलियन से अधिक का पुराना बकाया है, जिसे वे उत्पादन शुरू होने पर वसूलना चाहेंगी. इसके अलावा एसएलबी (SLB) और हैलीबर्टन जैसी ऑयल सर्विस कंपनियां भी वहां सक्रिय होंगी, जिससे तकनीकी सुधार तेज होगा. भारतीय कंपनियों के लिए ‘डिस्काउंट’ का गणित वेनेजुएला का कच्चा तेल अपनी विशिष्टता के लिए जाना जाता है. यह मुख्य रूप से ‘हैवी’ और ‘हाई-सल्फर’ क्रूड है. इसी विशिष्टता के कारण यह अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की तुलना में हमेशा सस्ते दाम पर मिलता है. जेफरीज (Jefferies) के विश्लेषण के अनुसार, यदि प्रतिबंध हटते हैं और व्यापार सामान्य होता है तो रिलायंस जैसी कंपनियों को वेनेजुएला का क्रूड ब्रेंट की तुलना में $5 से $8 प्रति बैरल के भारी डिस्काउंट पर मिल सकता है. रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी दुनिया की सबसे जटिल रिफाइनरियों में से एक है, जो इस तरह के भारी कच्चे तेल को संसाधित कर उच्च गुणवत्ता वाला डीजल और पेट्रोल बनाने में सक्षम है. यह डिस्काउंट रिलायंस के ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) को काफी बढ़ावा देगा. ओएनजीसी (ONGC) की चांदी भारत की सरकारी कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL) का वेनेजुएला के सैन क्रिस्टोबल फील्ड में हिस्सा है. प्रतिबंधों के कारण कंपनी का लगभग $500 मिलियन (करीब 4200 करोड़ रुपये) का लाभांश (Dividend) फंसा हुआ है. प्रतिबंध हटने पर न केवल यह बकाया राशि मिलेगी, बल्कि कंपनी को अपने निवेश पर वास्तविक रिटर्न मिलना भी शुरू हो जाएगा. अमेरिका को सबसे ज्‍यादा लाभ वेनेजुएला से बैन हटने का सबसे बड़ा लाभार्थी अमेरिकी गल्फ कोस्ट की रिफाइनरियां होंगी. भौगोलिक रूप से वेनेजुएला अमेरिका के बेहद करीब है, जिससे मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) की तुलना में परिवहन लागत (Freight Cost) बहुत कम आती है. अमेरिकी रिफाइनरीज को वेनेजुएला के हैवी क्रूड से उच्च लाभ मिलता है क्योंकि इसकी लागत कम होती है और यह डीजल, एस्फाल्ट (डामर) जैसे भारी मांग वाले उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त फीडस्टॉक है. वर्तमान में वेनेजुएला का अधिकांश तेल ‘गुप्त शिपिंग समझौतों’ के जरिए चीन को भारी डिस्काउंट पर बेचा जा रहा है. प्रतिबंध हटने पर यह तेल पारदर्शी तरीके से वैश्विक बाजार में आएगा, जिससे चीन का एकाधिकार खत्म होगा और प्रतिस्पर्धा के कारण कीमतें और भी प्रतिस्पर्धी होंगी. क्या ब्रेंट $60 से नीचे आएगा? शॉर्ट-टर्म में, वेनेजुएला में राजनीतिक उथल-पुथल और अमेरिकी नाकेबंदी के कारण आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे कीमतों में हल्का उछाल आ सकता है. दिसंबर 2025 में अमेरिकी प्रतिबंधों के सख्त प्रवर्तन से निर्यात प्रभावित हुआ, लेकिन वैश्विक बाजार पर इसका असर सीमित रहा क्योंकि फिलहाल दुनिया में तेल की पर्याप्त आपूर्ति है. लॉन्ग-टर्म एंगल काफी अलग है. यदि ट्रंप के नेतृत्व में वेनेजुएला का उत्पादन 2 मिलियन bpd के पार जाता है, तो बाजार में मौजूद मौजूदा ‘सरप्लस’ (अतिरिक्त आपूर्ति) और बढ़ जाएगी. विश्लेषकों का मानना है कि इस अतिरिक्त आपूर्ति के कारण ब्रेंट क्रूड 2026 में $60 प्रति बैरल से नीचे गिर सकता है. यह भारत सहित उन देशों के लिए राहत की खबर होगी जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं.  

2026 की शुरुआत में कारों का धमाका, जनवरी में लॉन्च होंगी 6 नई कारें—यहां देखें लिस्ट

नई दिल्ली साल 2026 के शुरू होते ही वाहन निर्माता कंपनियों ने अपने नए उत्पादों को बाजार में उतारने की तैयारी शुरू कर दी है. कार बनाने वाली कंपनियां जनवरी 2026 में अपने कुछ उत्पाद बाजार में उतारने वाली हैं. इसमें सबसे आगे घरेलू कार निर्माता Mahindra & Mahindra और Tata Motors हैं, जिनमें से Tata Motors चार मॉडल (एक EV सहित) लॉन्च करने वाली है. इसके अलावा घरेलू कार निर्माता कंपनी Maruti Suzuki की पहली EV भी लॉन्च की जा सकती है. इस लिस्ट में Kia India भी शामिल होती, लेकिन आज ही कंपनी ने नई-जनरेशन Kia Seltos को लॉन्च कर दिया है. इसके अलावा, Nissan और Renault जनवरी 2026 में एक-एक नया मॉडल पेश करने वाली हैं. Renault लगभग चार साल बाद अपने एक पॉपुलर नेमप्लेट को फिर से जीवित कर रही है. 1. Mahindra XUV 7XO (लॉन्च: 5 जनवरी, 2026) Mahindra XUV700 के नाम से जानी जाने वाली बेहतरीन एसयूवी को Mahindra XUV 7XO के नाम से जनवरी में लॉन्च किया जा सकता है. इसकी अनुमानित कीमत 14.00 लाख रुपये से 25.00 लाख रुपये के बीच होने वाली है. इसमें महिंद्रा का आजमाया हुआ, 2.0-लीटर, टर्बो-पेट्रोल और 2.2-लीटर टर्बो-डीजल इंजन इस्तेमाल किया जाएगा, जो अपनी मौजूदा ट्यूनिंग में क्रमशः 200hp और 185hp तक की पावर प्रदान करता है. Mahindra XUV 7XO डीजल में ऑल-व्हील ड्राइव का सेटअप दिया जाएगा, जबकि ट्रांसमिशन ऑप्शन में मैनुअल और टॉर्क-कन्वर्टर ऑटोमैटिक ऑप्शन मिलते हैं. Mahindra XUV 7XO के खास फीचर्स में ट्रिपल-स्क्रीन सेटअप मिलता है, जैसा कि Mahindra XEV 9e और 9S में मिलता है. आगे के पैसेंजर सीट के लिए पावर्ड 'बॉस' मोड, दो-स्पोक स्टीयरिंग व्हील और हरमन कार्डन ऑडियो शामिल हैं. एक्सटीरियर और इंटीरियर डिज़ाइन में किए गए बदलाव 7XO को XUV700 से अलग पहचानने में मदद करेंगे. 2. Tata Harrier और Safari पेट्रोल वर्जन (लॉन्च: जनवरी के पहले सप्ताह में) नई Tata Sierra में पेश किया गया, Tata Motors का नया 1.5-लीटर 'हाइपरियन' टर्बो-पेट्रोल इंजन अब Tata Harrier और Safari में भी देखने को मिलता है. इन दोनों गाड़ियों में, इस चार-सिलेंडर पेट्रोल इंजन का आउटपुट बढ़ाकर 170hp की पावर और 280Nm का टॉर्क कर दिया गया है. इसे 6-स्पीड मैनुअल या 6-स्पीड टॉर्क-कन्वर्टर ऑटोमैटिक के साथ जोड़ा जा सकता है. संभावना जताई जा रही है कि नई Tata Harrier पेट्रोल की कीमत लगभग 13.00 लाख रुपये से 24.50 लाख रुपये के बीच हो सकती है, जबकि Tata Safari पेट्रोल वेरिएंट की कीमत 14.00 लाख रुपये से 25.50 लाख रुपये के बीच हो सकती है. इन SUVs के टॉप-स्पेक पेट्रोल वेरिएंट में 14.5-इंच का QLED टचस्क्रीन, आगे और पीछे के कैमरों के लिए 'वॉशर' फंक्शन, एक डिजिटल IRVM, और 10-स्पीकर वाला JBL ऑडियो सिस्टम मिलता है. 3. Tata Punch फेसलिफ्ट (लॉन्च: जनवरी के मध्य में) Tata Motors जनवरी 2026 के बीच में Tata Punch फेसलिफ्ट को लॉन्च कर सकती है, जिसकी कीमत 6.00 लाख रुपये से 9.50 लाख रुपये के बीच हो सकती है. अपडेटेड Tata Punch को ज़्यादा मॉडर्न लुक देने के लिए Punch EV से कुछ डिज़ाइन एलिमेंट्स लिए जा सकते हैं, जबकि नए कन्वीनियंस और टेक फीचर्स से ओवरऑल एक्सपीरिएंस बेहतर होगा. 2026 Tata Punch मौजूदा 1.2-लीटर तीन-सिलेंडर इंजन के साथ आएगी, जो लगभग 88hp की पावर और 115Nm का टॉर्क प्रदान करता है, जिसे 5-स्पीड मैनुअल या 5-स्पीड AMT गियरबॉक्स के साथ जोड़ा जाएगा. 4. Nissan Gravite (लॉन्च: जनवरी के मध्य में) जापानी कार निर्माता Nissan भी अपनी पहली एमपीवी भारत में लॉन्च करने वाली है. नई Nissan Gravite को CMF-A+ प्लेटफॉर्म पर बनाया जाएगा, जिसका इस्तेमाल Renault Triber के लिए किया जाता है. इस कार की अनुमानित कीमत 6.00 लाख रुपये से 9.00 लाख रुपये के बीच होने वाली है. Nissan Gravite के इंजन की बात करें तो इसमें वही 1.0-लीटर, तीन-सिलेंडर पेट्रोल इंजन इस्तेमाल किया जाएगा, जो Renault Triber में इस्तेमाल किया जाता है. यह इंजन 72hp की पावर और 96Nm का टॉर्क उत्पन्न करता है. इसी तरह, संभावना जताई जा रही है कि गियरबॉक्स विकल्पों में 5-स्पीड मैनुअल और 5-स्पीड AMT शामिल होंगे. 5. नई-जनरेशन Renault Duster (लॉन्च: 26 जनवरी) लगभग चार साल पहले Renault ने अपनी Renault Duster की बिक्री और उत्पादन भारत में बंद कर दिया था. अब कंपनी एक बार फिर से इस नेमप्लेट को जीवित करने वाली है. नई-जनरेशन Renault Duster को रिपब्लिक डे 2026 पर नए अवतार में पेश किया जा सकता है. नई Renault Duster के हायर वेरिएंट में 156hp का पावर देने वाला 1.3-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन इस्तेमाल किया जा सकता है, जो ग्लोबल-स्पेक मॉडल में उपलब्ध है. वहीं लोअर वेरिएंट में 1.0-लीटर तीन-सिलेंडर टर्बो-पेट्रोल इंजन मिल सकता है, जो Renault Kiger में इस्तेमाल होता है, यहां यह इंजन 100hp की पावर और 160Nm तक का टॉर्क देता है. हालांकि संभावना यह है कि Renault इस इंजन में कुछ बदलाव कर सकती है ताकि इससे ज़्यादा पावर मिल सके, जिससे इस मिडसाइज़ SUV के बढ़े हुए वज़न की भरपाई हो सके. नई Renault Duster की कीमत 10.00 लाख रुपये से 20.00 लाख रुपये के बीच हो सकती है, और संभावना है कि इंडिया-स्पेक मॉडल अपने ग्लोबल मॉडल से अलग दिखेगा. 6. Maruti Suzuki e-Vitara (लॉन्च: जनवरी के अंत में) लिस्ट में Maruti Suzuki का नाम भी शामिल है, और अगर कोई समस्या नहीं होती है, तो कंपनी भारत में अपनी पहली EV, Maruti Suzuki e-Vitara को जनवरी 2026 में लॉन्च हो सकती है. कीमत की बात करें तो इस कार को लगभग 18.00 लाख रुपये से 25.00 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) के बीच उतारा जा सकता है. Maruti e-Vitara के एंट्री-लेवल वेरिएंट में 49kWh बैटरी पैक के साथ 144hp की फ्रंट-माउंटेड इलेक्ट्रिक मोटर हो सकती है. वहीं, इस मारुति EV के टॉप-स्पेक वेरिएंट में 61kWh बैटरी पैक मिलने वाला है, जो 174hp की इलेक्ट्रिक मोटर को पावर देता है, जो फ्रंट व्हील्स को भी चलाती है. बड़े बैटरी पैक वाली ई विटारा की ARAI-क्लेम्ड रेंज 543km है.

क्या हर हाल में दाह संस्कार जरूरी? गरुड़ पुराण बताता है 5 निषिद्ध परिस्थितियां

सनातन धर्म में 16 संस्कारों का वर्णन है. इन्हीं संस्कारों में से एक है दाह संस्कार. गुरुड़ पुराण में बताया गया है कि विधि और नियम से दाह संस्कार करने पर ही मृतक की आत्मा को शांति प्राप्त होती है. हालांकि शास्त्रों के अनुसार, सभी का दाह संस्कार जरूरी नहीं माना गया है. गरुड़ पुराण में खास श्रेणियों के लोगों के लिए दाह संस्कार के बजाय थल या जल समाधि का विधान भी है. साथ ही गरुड़ पुराण में इन पांच प्रकार के लोगों का दाह संस्कार करने से मना किया गया है. आइए जानते हैं. गर्भवती महिला गरुड़ पुराण में कहा गया है कि गर्भवती महिलाओं की मृत्यु होने जाने पर उनका दाह संस्कार नहीं करना चाहिए. इसके पीछे की वजह व्यवहारिक और संवेदनशील है. दाह संस्कार के समय शरीर फटने की संभावना होती है. इससे गर्भ में पल रहा शिशु बाहर आ सकता है, इसलिए गर्भवती महिलाओं की मृत्यु पर उन्हें थल या जल समाधि दी जाती है. सांप के काटने मृत्यु होने पर गरुड़ पुराण में उल्लेख है कि अगर कोई व्यक्ति सांप के काटने या किसी जहर की वजह से मरता है, तो उसका दाह संस्कार नहीं करना चाहिए. माना जाता है कि विषैले प्रभाव की वजह से शरीर में सुक्ष्म प्राण करीब 21 दिनों तक उपस्थित रहते हैं. ऐसे व्यक्ति को पूरी तरह से मृत्यु को प्राप्त नहीं माना जाता. इसलिए ऐसे शव को जल समाधि देना सही रहता है. 11 साल से कम बच्चे गरुड़ पुराण के अनुसार, अगर किसी बालक की मृत्यु 11 साल से कम उम्र में या गर्भ में हो जाती है, तो उसका दाह संस्कार नहीं किया जाता है. माना जाता है कि छोटी आयु में आत्मा शरीर से मोहित कम होती है. बालक के जनेऊ संस्कार न होने और बालिका का मासिक धर्म शुरू न होने की स्थिति में मृत्यु होने पर उन्हें जल समाधि दी जाती है या उसमें बहाया जाता है. संक्रामक बीमारी से मृत्यु पर अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु का कारण कोई गंभीर संक्रामक बीमारी होती है, तो उनके शव का दाह संस्कार करना वर्जित माना गया है. इस नियम के पीछे वैज्ञानिक दृष्टिकोण है. अगर ऐसे किसी व्यक्ति का दाह संस्कार किया जाता है, तो हवा में संक्रामक फैल सकते हैं, जिससे अन्य लोगों को बीमारी हो सकती है, इसलिए ऐसे शव के लिए थल समाधि उचित मानी गई है. साधु संत गृहस्थ जीवन का त्याग और सन्यास ले चुके लोगों का भी दाह संस्कार वर्जित होता है. ऐसे इसलिए क्योंकि साधु संतों की इंद्रियां उनके वश में होती हैं. उनको शरीर से कोई मोह नहीं रह जाता. यही कारण है कि दिव्य पुरुषों को थल या जल समाधि दी जाती है.

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: विदेश में हुए अपराध पर भी भारत में दर्ज होगी FIR

जबलपुर   विदेश में अपराध होने के बाद भारत में दर्ज की गई एफआईआर को निरस्त करने की मांग मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने खारिज कर दी. हाई कोर्ट जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए अपने आदेश में कहा "पुलिस एफआईआर दर्ज कर प्रारंभिक जांच कर रही है. प्रकरण में चार्जशीट दायर नहीं की गयी है. ट्रायल कोर्ट ने उस पर कोई संज्ञान नहीं लिया है तो ऐसी स्थिति में एफआईआर को निरस्त नहीं किया जा सकता." महिला के पति व सास-ससुर की याचिका खारिज जापान निवासी वैभव जैन तथा राजस्थान निवासी उनके पिता पुनीत व माता निकिता जैन की तरफ याचिका दायर की गयी थी. याचिका में कहा गया "वैभव का विवाह भोपाल निवासी महिला से जनवरी 2023 में जयपुर राजस्थान में हुआ था. वैभव तथा उसकी पत्नी जापान में नौकरी करते थे. विवाह के बाद वैभव अपने माता-पिता को जापान ले गया." आरोप है कि जापान में पत्नी अपने पति के माता-पिता के साथ विवाद करती थी. वह जापान छोड़कर भोपाल स्थित अपने मायके आकर रहने लगी. जापान से लौटकर महिला ने रिपोर्ट दर्ज कराई पत्नी ने पति व उसके माता-पिता के खिलाफ दहेज के लिए प्रताड़ित करने, मारपीट करने सहित अन्य आरोप लगाते हुए महिला थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई. याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया "अपराध विदेश में घटित हुआ है. इसलिए धारा 188 के तहत केन्द्र सरकार की अनुमति के बिना कोई जांच नहीं की जा सकती." महिला की तरफ से तर्क दिया गया "शुरुआती जांच में केन्द्र सरकार की मंजूरी आवश्यक नहीं है." केस प्रारंभिक स्टेज पर होने का तथ्य एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा "रिकॉर्ड के अनुसार पीड़ित का आरोप है कि अपराध जापान के साथ भारत में भी किया गया है. आरोपों के अनुसार भारत लौटने के बाद भी पति द्वारा उसे प्रताड़ित किया गया. पीड़िता की शिकायत पर अपराध सिर्फ दर्ज किया गया है. धारा 188 की मंजूरी संज्ञेय अपराध तथा ट्रायर स्टेज में लागू होती है. पुलिस जांच कर रही है और चार्जशीट दायर नहीं की गयी है." हाई कोर्ट ने इस आदेश के साथ याचिका खारिज कर दी. 

एमपी में पीएम स्वनिधि 2.0: स्ट्रीट वेंडर्स को मिलेगा ब्याज मुक्त लोन, बैंक लौटाएंगे काटी गई राशि

भोपाल   मध्यप्रदेश के लाखों स्ट्रीट वेंडर्स (रेहड़ी-पटरी वालों) के लिए बड़ी खबर है। मुख्यमंत्री की पहल पर राज्य में 'पीएम स्वनिधि 2.0' के तहत लोन नियमों में बड़ा सुधार किया गया है। अब बैंकों की मनमानी पर लगाम लगेगी और हितग्राहियों को बिना किसी कटौती के पूरा लोन उपलब्ध कराया जाएगा। राज्य सरकार ने 14 फीसदी की ब्याज दर पर सहमति देते हुए करोड़ों रुपये के रिफंड का रास्ता भी साफ कर दिया है। साथ ही समय पर लोन चुकाने वाले वेंडर्स को 50 हजार रुपए तक की अगली लोन लिमिट का लाभ मिलेगा। अब स्ट्रीट वेंडर्स को मिलेगी पूरी लोन राशि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी 'पीएम स्वनिधि योजना' को लेकर मध्यप्रदेश सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश के छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वालों को बैंकों द्वारा ब्याज की रकम काटकर लोन देने की समस्या से मुक्ति मिलेगी। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अनुसार, बैंकों ने पूर्व में हितग्राहियों के लोन से जो ब्याज की राशि काटी थी, उसे अब वापस लौटाया जाएगा। यह कुल राशि लगभग 120 करोड़ रुपए है। दरअसल, पीएम स्वनिधि योजना ऐसे छोटे स्ट्रीट वेंडर्स के लिए हैं, जिन्हें अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए छोटे लोन की जरूरत पड़ती है। योजना के तहत केंद्र 7 फीसदी ब्याज सब्सिडी देता है और बैंक का बाकी बचा ब्याज अनुदान मप्र सरकार देती है। हितग्राहियों को शून्य ब्याज पर पूरी रकम देने का प्रावधान है, लेकिन कुछ बैंक हितग्राहियों को ब्याज की रकम काटकर ये राशि दे रहे थे। सूत्र बताते हैं कि इसकी वजह से हितग्राहियों का योजना से मोहभंग हो रहा था। इसे देखते हुए राज्य सरकार की तरफ से वित्त मंत्रालय को पत्र लिखा गया। मंत्रालय ने राज्य सरकार से अपर कैप लगाने की सहमति दे दी है यानी अब हितग्राहियों को 14 फीसदी ब्याज दर पर ही लोन मिलेगा और बैंक बिना ब्याज काटे ये राशि हितग्राहियों को देंगे।  14% ब्याज दर पर मिलेगा लोन दरअसल, केंद्र सरकार इस योजना में 7 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी देती है, जबकि शेष ब्याज का भुगतान मध्यप्रदेश सरकार करती है। प्रावधान के अनुसार, हितग्राहियों को यह लोन 'शून्य ब्याज' पर मिलना चाहिए। लेकिन बैंक अपनी सुरक्षा के लिए पहले ही ब्याज की रकम काटकर लोन दे रहे थे, जिससे छोटे व्यापारियों का नुकसान हो रहा था। अब राज्य सरकार ने वित्त मंत्रालय की सहमति से 14% ब्याज की 'अपर कैप' लगा दी है। इसका मतलब है कि अब बैंक बिना किसी कटौती के पूरी राशि वेंडर को देंगे और ब्याज का भुगतान सरकार करेगी। पीएम स्वनिधि योजना में एमपी नंबर-1 दरअसल, पूरे देश में प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश ने प्रथम स्थान हासिल किया है। सितंबर 2025 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश ने अब तक 13 लाख 46 हजार से अधिक रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे व्यापारियों को इस योजना से जोड़कर रिकॉर्ड बनाया है। राज्य सरकार ने इन हितग्राहियों को 2 हजार 78 करोड़ रुपए का लोन वितरित किया है, साथ ही छोटे कारोबारियों को ब्याज के बोझ से मुक्त रखने के लिए अब तक 30 करोड़ रुपए की ब्याज सब्सिडी भी जारी की जा चुकी है, जो मध्यप्रदेश को इस कल्याणकारी योजना में देश का सिरमौर राज्य बनाती है। जानें क्यों बदला गया सिस्टम पीएम स्वनिधि योजना को रेहड़ी-पटरी वालों के लिए 'संजीवनी' माना जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर बैंकों द्वारा ब्याज की अग्रिम कटौती (Upfront Deduction) से वेंडर्स को पूरा पैसा नहीं मिल पा रहा था। जिसके बाद हितग्राही इस योजना से दूर हो रहे थे। इसी तकनीकी बाधा को दूर करने और योजना को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए 'स्वनिधि 2.0' वाले बदलाव किए गए हैं। योजना की 4 बड़ी ताकत 1. बिना गारंटी 'वर्किंग कैपिटल' का सहारा: कोविड-19 की मार झेलने वाले छोटे व्यापारियों के लिए यह योजना बिना किसी गारंटी के 'वर्किंग कैपिटल' (कार्यशील पूंजी) उपलब्ध कराती है। इसमें आपको किसी को जमानत देने या कागज गिरवी रखने की जरूरत नहीं होती। 2. तीन किस्तों में मिलता है लाभ: योजना का ढांचा इस तरह तैयार किया गया है कि जैसे-जैसे आपका कारोबार बढ़े, लोन की राशि भी बढ़ती जाए:     पहली किस्त: ₹10,000 (कारोबार शुरू करने के लिए)     दूसरी किस्त: ₹20,000 (पुराना लोन चुकाने पर पात्र)     तीसरी किस्त: ₹50,000 (समय पर भुगतान करने पर बड़ी मदद) 3. प्रभावी रूप से 'जीरो परसेंट' ब्याज: यह योजना छोटे व्यापारियों पर कर्ज का बोझ नहीं डालती। केंद्र सरकार लोन पर 7% की ब्याज सब्सिडी देती है। मध्यप्रदेश में इससे ऊपर का जितना भी ब्याज बैंक लगाता है, उसका पूरा भुगतान राज्य सरकार करती है। यानी हितग्राही के लिए यह कर्ज पूरी तरह ब्याज मुक्त है। 4. डिजिटल ट्रांजैक्शन पर 'कैशबैक' ईनाम: योजना सिर्फ कर्ज नहीं देती, बल्कि आधुनिक व्यापार से भी जोड़ती है। जो वेंडर्स डिजिटल पेमेंट (UPI/QR Code) का उपयोग करते हैं, उन्हें सरकार की ओर से ₹1200 सालाना तक का कैशबैक सीधे बैंक खाते में दिया जाता है। समय पर भुगतान और बड़े लाभ योजना की सबसे अच्छी शर्त यह है कि यदि कोई हितग्राही महज 3 महीने की समय सीमा में लोन की मूल राशि चुका देता है, तो वह तुरंत अगले बड़े लोन (20 हजार और फिर 50 हजार) के लिए पात्र हो जाता है। इससे न केवल उनकी क्रेडिट हिस्ट्री सुधरती है, बल्कि कारोबार के विस्तार के लिए बड़ी पूंजी भी सुनिश्चित होती है।    योजना में अब तक क्या हो रहा था योजना के तहत मध्य प्रदेश में 32 सरकारी और निजी बैंक लोन बांट रहे थे। नियम के अनुसार, बैंकों को हर तीन महीने में सरकार से ब्याज सब्सिडी की राशि का दावा (क्लेम) करना होता है, जिसे सरकार सीधे हितग्राही के लोन खाते में डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर करती है। लेकिन, ज्यादातर बैंक इस प्रक्रिया का पालन करने के बजाय एक आसान रास्ता अपना रहे थे:     ब्याज की एडवांस कटौती: बैंक हितग्राही को लोन देते समय ही ब्याज की अनुमानित राशि काटकर शेष रकम देते थे।     सब्सिडी क्लेम में देरी: वे सरकार से सब्सिडी का क्लेम 6 महीने या उससे भी अधिक समय के बाद करते थे। इस देरी के कारण कई बार हितग्राहियों के लोन … Read more

हरिद्वार को सनातन नगरी घोषित करने के बाद, गैर हिंदुओं के प्रवेश पर क्या हो सकता है प्रतिबंध?

हरिद्वार अगले साल जनवरी में हरिद्वार में प्रस्तावित कुंभ मेला 2027 से पहले उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार हरिद्वार-ऋषिकेश नगर निगम क्षेत्र को सनातन पवित्र नगरी घोषित करने पर गंभीरता से विचार कर रही है. सरकार के इस संभावित कदम ने धार्मिक, सियासी और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है. सवाल उठ रहा है कि क्या गैर हिंदुओं का हरिद्वार आना पूरी तरह बैन हो जाएगा या फिर यह सिर्फ कुंभ और चुनिंदा धार्मिक क्षेत्रों तक सीमित रहेगा? आइये इसे थोड़ा विस्‍तार से समझते हैं.. आखिर ये प्रस्ताव क्या है और क्यों आया? सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा बॉयलॉज में हर की पैड़ी और कुछ चुनिंदा घाटों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर जो प्रतिबंध है, उसे बढ़ाकर हरिद्वार के सभी 105 गंगा घाटों और पूरे कुंभ क्षेत्र तक किया जा सकता है. इस दायरे में हरिद्वार के साथ-साथ ऋषिकेश को भी शामिल किए जाने पर विचार चल रहा है. सरकार का तर्क है कि कुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के दौरान क्षेत्र की पवित्रता, धार्मिक मर्यादा और सुरक्षा बनाए रखना प्राथमिकता है. साधु-संत और अखाड़ा परिषद लंबे समय से यह मांग करते रहे हैं कि हरिद्वार को विधिवत पवित्र धर्म नगरी का दर्जा मिले. सूत्र बताते हैं कि यह प्रस्ताव अभी विचाराधीन है और इस पर संतों, अखाड़ा परिषद तथा हरिद्वार में धार्मिक अनुष्ठानों का संचालन करने वाली प्रमुख संस्था श्री गंगा सभा से चर्चा की जा रही है. संतों की मांग सिर्फ घाटों तक सीमित नहीं है, बल्कि गैर हिंदुओं के रात में ठहरने पर भी प्रतिबंध की बात उठाई जा रही है, ताकि धार्मिक आयोजनों के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था या कथित धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कवायद के पीछे की मंशा साफ करते हुए कहा कि हरिद्वार मां गंगा, ऋषि-मुनियों और संत परंपरा की पवित्र भूमि है. वहां से लगातार मांग उठ रही है कि उसकी पवित्रता और धार्मिक पहचान बनी रहे. सरकार सभी पहलुओं, पुराने कानूनों, धार्मिक मान्यताओं और व्यावहारिक चुनौतियों का अध्ययन कर रही है और उसी के आधार पर आगे कदम उठाएगी. क्या गैर हिंदुओं पर हमेशा के लिए रोक लगेगी? इसके बाद अब जो सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है, वह है कि क्‍या गैर हिंदुओं पर हमेशा के लिए यहां रोक लग जाएगी? अभी तक जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक पूरे शहर में स्थायी और पूर्ण प्रतिबंध का कोई आखिरी फैसला नहीं हुआ है. चर्चा मुख्य रूप से कुंभ क्षेत्र और गंगा घाटों तक प्रतिबंध बढ़ाने को लेकर है. चूंकि प्रस्ताव विचाराधीन है, यानी इसमें बदलाव, सीमाएं और शर्तें तय हो सकती हैं. अगर दूसरे शब्दों में बात की जाए तो यह जरूरी नहीं कि गैर हिंदुओं का हरिद्वार आना पूरी तरह बैन हो जाए, बल्कि धार्मिक आयोजनों और पवित्र स्थलों की सीमा में नियम सख्त किए जा सकते हैं. हालांकि अभी कुछ भी साफ नहीं है. विपक्ष का विरोध और गंगा-जमुनी तहजीब की दलील कांग्रेस ने इस प्रस्ताव का तीखा विरोध किया है. कांग्रेस की नेशनल मीडिया पैनलिस्ट सुजाता पॉल का कहना है कि यह कदम गंगा-जमुनी तहजीब को नुकसान पहुंचाने वाला और चुनावी ध्रुवीकरण की राजनीति का हिस्सा है. उनके मुताबिक, कुंभ मेले में वैसे भी हिंदू श्रद्धालुओं की भीड़ होती है, लेकिन भारतीय परंपरा में विभिन्न समुदायों का सहयोग और सहभागिता हमेशा रही है जैसा कि अयोध्या जैसे धार्मिक स्थलों पर भी देखा जाता है. वहीं, महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी और हिंदूवादी नेता नितिन गौतम जैसे नेताओं का कहना है कि कुंभ क्षेत्र को गैर हिंदू प्रतिबंधित घोषित करना सुरक्षा और धार्मिक गरिमा के लिहाज से जरूरी है. उनका तर्क है कि कुंभ जैसे महाआयोजन में किसी भी प्रकार की साजिश या अव्यवस्था की आशंका को खत्म करने के लिए यह कदम उठाया जाना चाहिए.