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दिल्ली कोर्ट में शरजील इमाम ने किया दावा, बोले– उमर खालिद से कोई गुरू-शिष्य संबंध नहीं

नई दिल्ली दिल्ली दंगों के आरोपी और एक्टिविस्ट शरजील इमाम ने गुरुवार को एक अदालत में बताया कि पुलिस का यह यह आरोप सरासर गलत है कि उमर खालिद उसका मेंटर या गुरु था। शरजील इमाम ने यह भी दावा किया कि जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान दोनों के बीच बातचीत नहीं होती थी। बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक कड़कड़डूमा कोर्ट के अडिशनल सेशंस जज (ASJ) समीर बाजपेयी के सामने इमाम की तरफ से पेश हुए वकील तैयब मुस्तफा ने कहा कि उनके मुवक्किल और खालिद के बीच कोई कनेक्शन नहीं है। खालिद की ओर से कहा गया, ‘जेएनयू में मेरे पांच साल के दौरान मैंने कभी उमर खालिद से बात नहीं की। मुझे नहीं पता कि वे (पुलिस) किस समन्वय की बात कर रहे हैं। साजिश को साबित करने के लिए हमारे बीच समझौता दिखाना आवश्यक है। लेकिन वे कोई अग्रीमेंट दिखाने में असफल रहे हैं।’ शरजील इमाम का दावा- मीटिंग में हिंसा पर बात नहीं वकील ने जोर देकर कहा कि खालिद ने इमाम को निर्देश दिए थे, इस तरह के आरोप गलत हैं। उन्होंने कहा, 'केवल एक मुलाकात है जिसमें उमर और मैं साथ दिख रहे हैं। लेकिन उस मीटिंग के गवाह से पता चलता है कि हिंसा पर कोई चर्चा नहीं हुई थी।' मुस्तफा दिल्ली दंगों के साजिश केस में पक्ष रख रहे थे। इस समय अदालत आरोप तय किए जाने पर दलीलों को सुन रही है। साजिश की बात से इनकार दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया है कि इमाम, खालिद और अन्य कई लोग 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान हिंसा की साजिश रचने में शामिल थे। अभियोजन पक्ष ने इस मामले में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के प्रावधानों का हवाला दिया है। मुस्तफा ने कहा कि संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ 2020 में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे थे और चूंकि कई आरोपी इस कानून के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे इसका मतलब यह नहीं कि कोई साजिश थी। उन्होंने आगे तर्क दिया कि इमाम ने कभी भी हिंसक विरोध प्रदर्शनों का समर्थन नहीं किया। मैंने तो अहिंसा पर बात की: इमाम वकील ने कहा, 'मेरे चैट्स, मेरे पंपलेट और मेरे भाषण… उनका कहना है कि मैं हिंसा चाहता था, कि मैं चाहता था कि दंगे हो और लोग मारे जाए. लेकिन मेरी किसी बैठक में हिंसा पर चर्चा नहीं हुई थी। बल्कि मैंने तो अहिंसा पर बात की थी।' इमाम के वकील ने अपनी दलीलें पूरी कीं। अगले सप्ताह दूसरे आरोपियों के वकील अपना पक्ष रख सकते हैं।  

राजनांदगांव जिले में 23294 आवास पूर्ण एवं 14099 आवास निर्माणाधीन

रायपुर. प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत आवास विहिन एवं कच्चे मकानों में रह रहे परिवारों को बुनियादी सुविधायुक्त पक्का आवास बनाने के लिए पात्र हितग्राहियों को 1 लाख 20 हजार रूपए एवं मनरेगा योजना से 90 मानव दिवस मजदूरी की सहायता दी जाती है। शासन द्वारा जिले में विगत दो वर्ष में 40454 आवास निर्माण की स्वीकृति मिली। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 30766 आवास स्वीकृत किए गए है। जिनमें से 23294 (75.71 प्रतिशत) आवास पूर्ण कर लिया गया है तथा 7472 आवास प्रगतिरत है। इसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2025-26 में 9688 आवास स्वीकृत किये गये है। जिसमें से 7026 हितग्राहियों को प्रथम किश्त प्रदाय किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में स्वीकृत हितग्राहियों के आवासों का समय-समय पर भूमि पूजन तथा पूर्ण हुए आवासों का हितग्राहियों के उपस्थिति में गृह प्रवेश कार्यक्रमों का आयोजन कर गृह प्रवेश कराया जा रहा है। जिले में नवाचार द्वारा एक दिवसीय अभियान का आयोजन करते हुए स्वीकृत हितग्राहियों को अप्रारंभ आवासों को प्रारंभ कराने, निर्माणाधीन आवास को समय-सीमा में पूर्ण करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। हितग्राहियों के स्वीकृत आवासों में रेन हार्वेस्टिंग के तहत सोख्ता गड्ढा का निर्माण तथा उत्कृष्ट आवास के हितग्राही एवं कम समय में आवास पूर्ण करने वाले हितग्राहियों को जिला एवं विकासखंड स्तर पर सम्मानित किया जा रहा है। हितग्राहियों के जीवन स्तर में वृद्धि हेतु कुशल श्रमिक के रूप में दक्ष करने हेतु ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण केन्द्र बरगा द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा।

एमएसएमई और बड़े उद्योगों में शिक्षुता को बढ़ावा, योगी सरकार दे रही है प्रतिपूर्ति का लाभ

लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में युवाओं के कौशल विकास और रोजगारपरक प्रशिक्षण को नई रफ्तार देने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने अप्रेंटिसशिप के क्षेत्र में मजबूत पहल की है। राज्य में संचालित अप्रेंटिसशिप योजनाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं को उद्योगों व एमएसएमई इकाइयों से जोड़ा जा रहा है, ताकि उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ रोजगार के अवसर भी मिल सकें। वर्ष 2025-26 में अप्रेंटिसशिप योजना के तहत 83,277 युवाओं को उद्योगों और एमएसएमई इकाइयों में शिक्षुता प्रशिक्षण हेतु योजित किया गया है। इससे युवाओं को उत्पादन इकाइयों, सेवा क्षेत्र और लघु–मध्यम उद्योगों में काम सीखने का प्रत्यक्ष अवसर मिला है। सरकार का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक युवा “सीखते हुए कमाएं” और उद्योगों के अनुरूप कौशल प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनें। सिर्फ प्रमाण पत्र नहीं, व्यावहारिक अनुभव भी मिल रहा प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता  राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिलदेव अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को कुशल मानव संसाधन का हब बनाने का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। अप्रेंटिसशिप योजना के माध्यम से युवाओं को सिर्फ प्रमाण पत्र नहीं, बल्कि काम का व्यावहारिक अनुभव मिल रहा है। हमारे लिए लक्ष्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि प्रशिक्षित युवाओं को उद्योगों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। नेशनल और मुख्यमंत्री अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजनाओं के तहत दी जा रही प्रतिपूर्ति से अधिष्ठानों की रुचि बढ़ी है और इससे रोजगारपरक अवसरों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। राज्य सरकार हर युवा को उसकी क्षमता के अनुरूप कौशल और अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उपलब्ध कराई जा रही प्रतिपूर्ति की सुविधा उत्तर प्रदेश में नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना तथा मुख्यमंत्री अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत संबंधित अधिष्ठानों और अभ्यर्थियों को प्रतिपूर्ति की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे शिक्षुओं को प्रशिक्षण अवधि के दौरान आर्थिक सहयोग मिलता है, वहीं अधिष्ठानों को भी प्रशिक्षुओं को रखने के लिए प्रोत्साहन प्राप्त होता है। योगी सरकार का मानना है कि यह मॉडल युवाओं और उद्योग दोनों के लिए लाभकारी है। नियुक्ति की संभावनाएं कई गुना बढ़ीं अप्रेंटिसशिप के दायरे को बढ़ाने के लिए सशक्त संस्थागत ढांचा तैयार किया गया है। इसी के परिणामस्वरूप पिछले चार वर्षों में 795 नवीन अधिष्ठानों को पोर्टल पर पंजीकृत कराया गया है। नए पंजीकरण से विभिन्न जिलों में प्रशिक्षण के अवसरों का दायरा बढ़ा है और स्थानीय स्तर पर युवाओं को उद्योगों तक पहुंच आसान हुई है। इसके साथ ही सीएमएपीएस योजनान्तर्गत 6,164 नए अभ्यर्थियों को लाभान्वित किया गया है। विभाग के अनुसार, इन योजनाओं के जरिए युवाओं को केवल प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि रोजगारपरक कौशल और औद्योगिक अनुभव भी मिल रहा है, जिससे नियुक्ति की संभावनाएं बढ़ रही हैं। विभागीय स्तर पर प्रक्रियाओं को बनाया गया सरल राज्य में कौशल विकास की इस सतत प्रक्रिया का बड़ा परिणाम यह रहा कि बीते लगभग नौ वर्षों में 4 लाख से अधिक प्रशिक्षु युवाओं को विभिन्न औद्योगिक संस्थानों में सेवायोजित कराया गया है। यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश को कुशल मानव संसाधन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम मानी जा रही है। योगी सरकार का लक्ष्य है कि अप्रेंटिसशिप को बड़े पैमाने पर बढ़ाते हुए युवाओं को उद्योगों, स्टार्टअप्स और MSME सेक्टर से जोड़ा जाए। इसके लिए विभागीय स्तर पर प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है, ऑनलाइन पोर्टल को सुदृढ़ किया गया है और उद्योगों के साथ समन्वय भी बढ़ाया गया है। सरकार का मानना है कि कौशलयुक्त युवा न केवल अपने लिए अवसर पैदा करेंगे, बल्कि प्रदेश के औद्योगिक विकास और निवेश माहौल को भी मजबूती देंगे।

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट की सफाई: हटाने का निर्देश देने की खबरें गलत

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सफाई में कहा कि उसने सड़कों से सभी कुत्तों को हटाने का ऑर्डर नहीं दिया है और निर्देश यह था कि इन आवारा कुत्तों का इलाज एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों के अनुसार किया जाए। आवारा कुत्तों के मामले में दलीलें सुनते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुत्ता उन लोगों को सूंघ सकता है जो या तो उनसे डरते हैं या जिन्हें कुत्ते ने काटा है और वे ऐसे लोगों पर हमला करते हैं।   जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन वी अंजारिया की तीन-जजों की स्पेशल बेंच उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें कुत्ते प्रेमियों द्वारा दायर याचिकाएं भी शामिल थीं, जो अपने पहले के आदेशों में बदलाव और निर्देशों का सख्ती से पालन करने की मांग कर रहे थे। जस्टिस मेहता ने कहा, "हमने सड़कों से सभी कुत्तों को हटाने का निर्देश नहीं दिया है। निर्देश यह है कि उनके साथ नियमों के अनुसार व्यवहार किया जाए।" बेंच ने सीनियर एडवोकेट सी यू सिंह, कृष्णन वेणुगोपाल, ध्रुव मेहता, गोपाल शंकरनारायणन, श्याम दीवान, सिद्धार्थ लूथरा और करुणा नंदी सहित कई वकीलों की दलीलें सुनीं। शुरुआत में, सीनियर एडवोकेट गौरव अग्रवाल, जो इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की मदद कर रहे हैं, ने बेंच को बताया कि चार राज्यों ने बुधवार को इस मामले में अपने अनुपालन हलफनामे दायर किए थे। 'चूहों की आबादी बढ़ जाएगी' अपनी दलीलों के दौरान, सिंह ने कहा कि दिल्ली जैसी जगहों पर चूहों का खतरा है और देश की राजधानी में बंदरों की भी एक अनोखी समस्या है। उन्होंने कहा कि कुत्तों को अचानक हटाने से चूहों की आबादी बढ़ जाएगी, जिसके गंभीर नतीजे होंगे। उन्होंने कहा, "जब चूहों की आबादी बढ़ती है, तो हमने बहुत विनाशकारी नतीजे देखे हैं।" जस्टिस मेहता ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, "कुत्ते और बिल्लियां दुश्मन होते हैं। बिल्लियां चूहों को मारती हैं। इसलिए हमें ज्यादा बिल्लियों को बढ़ावा देना चाहिए।" मरीजों के बेड के पास कितने कुत्ते घूमने चाहिए? सिंह ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों पर सवाल नहीं उठा रहे हैं और बेंच से सिर्फ़ इसे दोबारा देखने और इसमें बदलाव करने का अनुरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "इन कुत्तों को भी उसी तरीके से रेगुलेट किया जाए जो एकमात्र असरदार तरीका साबित हुआ है, जो है नसबंदी, वैक्सीनेशन और उसी इलाके में दोबारा छोड़ना।" बेंच ने कहा, "हमें बताएं कि हर अस्पताल के कॉरिडोर, वार्ड और मरीजों के बेड के पास कितने कुत्ते घूमने चाहिए?" 'कोर्ट की मंशा पर नहीं उठा रहे सवाल' सिंह ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की मंशा पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता और कोर्ट ने यह नोट किया था कि एबीसी नियमों और अदालतों द्वारा पारित आदेशों को लागू नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "जिस बात ने आपके लॉर्डशिप को चिंतित किया और सही भी है, वह यह है कि एनिमल बर्थ कंट्रोल नियमों के लागू होने के बावजूद, इसे लागू करने के लिए कोर्ट के आदेशों के बावजूद, आपके लॉर्डशिप ने पाया कि बड़ी संख्या में राज्यों और कई शहरों में इन्हें लागू नहीं किया जा रहा है।"  

भारतीय AI स्टार्टअप्स से पीएम मोदी का संवाद, कहा– तकनीक से आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी नई ताकत

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को अपने आधिकारिक आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर सुबह भारतीय एआई स्टार्टअप के साथ बैठक की। यह बैठक इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले हुई है, जो कि अगले महीने भारत में होने वाला है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में वह 12 एआई स्टार्टअप शामिल हुए हैं, जिन्होंने एआई फॉर ऑल: ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज के लिए क्वालिफाइड किया है और इसमें उन्होंने अपने विचार और कार्य के बारे में बताया। पीएम कार्यालय की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया कि यह स्टार्टअप हेल्थकेयर, बहुभाषी लार्ज लैग्वेज मॉडल, मटेरियल रिसर्च, डेटा एनालिटिक्स, इंजीनियरिंग सिमुलेशन और अन्य क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने समाज में परिवर्तन लाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत अगले महीने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट की मेजबानी करेगा, जिसके माध्यम से देश टेक्नोलॉजी क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही कहा कि भारत एआई का उपयोग करते हुए परिवर्तन लाने का प्रयास कर रहा है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि स्टार्टअप और एआई उद्यमी भारत के भविष्य के सह-निर्माता हैं और कहा कि देश में इनोवेशन और बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन दोनों की अपार क्षमता है। उन्होंने आगे कहा कि भारत को दुनिया के सामने एक ऐसा अनूठा एआई मॉडल प्रस्तुत करना चाहिए जो "मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड" की भावना को दर्शाता हो। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत पर दुनिया का भरोसा ही देश की सबसे बड़ी ताकत है। इस कारण भारतीय एआई मॉडल नैतिक, निष्पक्ष, पारदर्शी और डेटा गोपनीयता सिद्धांतों पर आधारित होने चाहिए। साथ ही कहा कि भारत किफायती एआई, समावेशी एआई और किफायती इनोवेशन को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दे सकता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भारतीय एआई मॉडल विशिष्ट होने चाहिए और स्थानीय एवं स्वदेशी सामग्री तथा क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने वाले हो। इस बैठक में अवतार, भारतजेन, फ्रैक्टल, गैन, जेनलोप, ज्ञानी, इंटेलीहेल्थ, सर्वम, शोध एआई, सॉकेट एआई, टेक महिंद्रा और जेंटिक सहित भारतीय एआई स्टार्टअप्स के सीईओ, प्रमुख और प्रतिनिधि शामिल हुए। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव और राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी बैठक में उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश ग्लोबल आईटी हब बनने की ओर अग्रसर

निर्यात आधारित आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग से युवाओं के लिए लगातार बढ़ रहे हैं रोजगार के अवसर बेहतर होते इन्फ्रास्ट्रक्चर और निवेश अनुकूल वातावरण से उत्तर प्रदेश आधुनिक प्रौद्योगिकी विकास की ओर लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ग्लोबल आईटी हब बनने की ओर अग्रसर है। लगातार बेहतर होते इन्फ्रास्ट्रक्चर और निवेश अनुकूल वातावरण से प्रदेश आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात के क्षेत्र में भी तेजी से उभरते हुए, देश के अग्रणी राज्यों में सम्मिलित हो चुका है। वर्ष 2017 के बाद से प्रदेश ने आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। यह क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है। लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक देश के कुल आईटी निर्यात में प्रदेश की मौजूदा हिस्सेदारी को 05 से बढ़ाकर 10 प्रतिशत तक के स्तर पर ले जाया जाए। आईटी सेवाओं और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग के संयुक्त विकास ने उत्तर प्रदेश के निर्यात आधार को व्यापक बनाया है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र और लखनऊ जैसे शहर अब आईटी सेवाओं, मोबाइल निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और डेटा आधारित उद्योगों के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं। प्रदेश में स्थापित हो रही असेम्बली यूनिट्स, कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग प्लांट और आईटी सर्विस कंपनियों ने निर्यात क्षमता को नई मजबूती दी है। वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश से इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का निर्यात लगभग 3,862 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 44,744 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी प्रकार से आईटी आधारित सेवाओं का निर्यात भी 55,711 करोड़ रुपये से बढ़कर 82,055 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। यह वृद्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है बल्कि यह प्रदेश में विकसित हो रहे प्रौद्योगिकी आधारित औद्योगिक ढांचे और वैश्विक कंपनियों के बढ़ते भरोसे को भी दर्शाती है। इस विकास का सबसे बड़ा लाभ प्रदेश के युवाओं को मिल रहा है। आईटी और इलेक्ट्रॉनिक निर्यात आधारित उद्योगों से बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं। तकनीकी प्रशिक्षण कौशल, विकास कार्यक्रम और स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार से युवा अब केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं बल्कि नवाचार और उद्यमिता के वाहक बन रहे हैं। योगी सरकार द्वारा किए गए नीतिगत सुधारों ने निवेश प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया है। सिंगल विंडो सिस्टम, बेहतर कानून व्यवस्था, मजबूत लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक इन्फ्रास्ट्रक्चर ने उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बना दिया है।

महाभियोग विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी, जस्टिस वर्मा की याचिका पर फैसला सुरक्षित

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा की उस याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव पर लोकसभा अध्यक्ष द्वारा जांच कमेटी बनाने की मंजूरी देने में प्रक्रियागत खामियों का आरोप लगाया है। दो दिनों की सुनवाई के बाद जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने गुरुवार (8 जनवरी) को इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया। हालांकि, बेंच ने जस्टिस वर्मा को पार्लियामेंट्री कमेटी के सामने अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय बढ़ाने से मना कर दिया है। उन्हें 12 जनवरी को संसदीय समिति के सामने जवाब देना है।   इस याचिका में जस्टिस वर्मा ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला द्वारा उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए बनाई गई पार्लियामेंट्री कमेटी की वैधता को चुनौती दी है। उनका कहना है कि उन्हें हटाने का प्रस्ताव राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन ने खारिज कर दिया था। जस्टिस वर्मा ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि जब संसद के दोनों सदनों में एक ही दिन (महाभियोग का) प्रस्ताव दिया जाता है, तो प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए एक जॉइंट-कमेटी बनाने के लिए यह जरूरी है कि वह प्रस्ताव दोनों सदनों में स्वीकार किया जाए। अपने मामले में जस्टिस वर्मा ने तर्क दिया है कि राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन ने चूंकि उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था, इस वजह से जजेज इन्क्वायरी एक्ट के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गठित जांच कमेटी अस्थिर हो गई है। एक दिन पहले SC ने उठाए थे सवाल एक दिन पहले यानी बुधवार को शीर्ष अदालत ने इस धारणा पर सवाल उठाए थे कि अगर संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव खारिज हो जाए, और उसी दिन लोकसभा में वही प्रस्ताव स्वीकार किया गया हो तो क्या उसे कैसे विफल मान लिया जाए? शीर्ष अदालत ने इस विचार पर संदेह जताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के महाभियोग के लिए लोकसभा द्वारा स्वीकार किए गए प्रस्ताव को विफल माना जाना चाहिए। क्या है मामला? बता दें कि पिछले साल 14 मार्च 2025 को दिल्ली में जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास पर आग लगी थी। आग बुझाने के दौरान दमकल विभाग को वहां से बड़ी मात्रा में अधजले नोट (कैश) बरामद हुए थे। इस घटना के बाद उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने लगे। इसे देखते हुए उनका तबादला दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एक आंतरिक समिति बनाई, जिसने जांच में पाया कि जस्टिस वर्मा का उस नकदी पर 'नियंत्रण' था और उन्हें कदाचार (misconduct) का दोषी पाया गया। CJI ने की थी महाभियोग शुरू करने की सिफारिश इसके बाद, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को उन्हें पद से हटाने के लिए महाभियोग शुरू करने की सिफारिश की थी। इस बीच, जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया जुलाई 2025 में शुरू हुई, जब लोकसभा के 140 से अधिक सांसदों ने उन्हें हटाने के लिए प्रस्ताव दिया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 12 अगस्त 2025 को एक जांच समिति का गठन किया। 50 सांसदों ने राज्यसभा में भी ऐसा ही प्रस्ताव दिया था।  

बांग्लादेश का एक और बड़ा फैसला: भारतीय नागरिकों के लिए महानगरों में वीजा पाबंदियां बढ़ीं

कोलकाता भारत और बांग्लादेश के बीच वीजा को लेकर तनाव और बढ़ गया है। बांग्लादेश ने भारतीय नागरिकों के लिए वीजा प्रतिबंधों को और सख्त करते हुए गुरुवार से कोलकाता, मुंबई और चेन्नई स्थित अपने डिप्टी हाई कमीशनों में भी वीजा सेवाएं सीमित कर दी हैं। यह जानकारी बांग्लादेश के प्रमुख अखबार ढाका ट्रिब्यून ने दी है।   सुरक्षा कारणों का हवाला रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने बुधवार रात यह निर्णय संबंधित मिशनों को सूचित किया। मंत्रालय ने वीजा सेवाओं में कटौती के पीछे सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है। हाल के दिनों में भारत-बांग्लादेश संबंधों में तल्खी देखने को मिली है, खासकर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद भारत में शरण लेने से हालात और जटिल हुए हैं। केवल बिजनेस और रोजगार वीजा जारी नई व्यवस्था के तहत बिजनेस और रोजगार (एम्प्लॉयमेंट) वीजा को छोड़कर सभी श्रेणियों के वीजा निलंबित कर दिए गए हैं। ढाका ट्रिब्यून के मुताबिक, कोलकाता स्थित बांग्लादेश डिप्टी हाई कमीशन में कांसुलर और वीजा सेवाएं पूरी तरह से रोक दी गई हैं। वहीं मुंबई और चेन्नई में पर्यटक समेत अन्य वीज़ा सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं। कोलकाता मिशन के एक अधिकारी ने अखबार से कहा कि यह फैसला उच्च अधिकारियों के निर्देश पर लिया गया है और फिलहाल केवल बिजनेस व रोजगार वीजा ही प्रोसेस किए जा रहे हैं। पहले भी लग चुकी हैं पाबंदियां ताजा कदम 22 दिसंबर को लगाए गए पहले दौर के प्रतिबंधों के बाद उठाया गया है। उस समय बांग्लादेश ने नई दिल्ली स्थित अपने हाई कमीशन, अगरतला (त्रिपुरा) के असिस्टेंट हाई कमीशन और सिलीगुड़ी के वीजा सेंटर में वीजा व कांसुलर सेवाएं निलंबित कर दी थीं। इसके अलावा गुवाहाटी (असम) स्थित बांग्लादेश मिशन में भी कांसुलर सेवाएं रोक दी गई थीं। नई पाबंदियों के साथ भारतीय नागरिकों के लिए बांग्लादेशी वीजा अब बेहद सीमित श्रेणियों और चुनिंदा स्थानों तक सिमट गया है। भारत की प्रतिक्रिया इससे पहले भारत ने बांग्लादेश में मौजूदा सुरक्षा हालात और भारत-विरोधी प्रदर्शनों के मद्देनजर खुलना और राजशाही में अपने दो वीजा आवेदन केंद्र बंद कर दिए थे। इसके एक दिन बाद नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश हाई कमीशन ने भी वीज़ा और कांसुलर सेवाएं निलंबित कर दी थीं। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वीजा सेवाओं की यह समीक्षा दोनों देशों के बीच जारी तनाव और सुरक्षा आकलन का हिस्सा है। हालांकि, सामान्य सेवाओं की बहाली को लेकर कोई समय-सीमा फिलहाल घोषित नहीं की गई है।

दुनिया को लोकतंत्र के सबक: चुनाव आयोग भारत मंडपम में सिखाएगा इलेक्शन मैनेजमेंट

नई दिल्ली भारत निर्वाचन आयोग (ECI) दुनिया के विभिन्न देशों के चुनाव प्रबंधन संस्थानों को अपने अनुभव साझा करने जा रहा है। आयोग 21 से 23 जनवरी तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में पहला इंडिया इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (IICDEM-2026) आयोजित करने जा रहा है। यह भारत द्वारा लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में आयोजित अब तक का सबसे बड़ा वैश्विक सम्मेलन होगा।   इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से पहले, चुनाव आयोग ने गुरुवार को दिल्ली में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस बैठक में वैश्विक सम्मेलन में उनके नेतृत्व में संचालित होने वाले 36 थीमैटिक ग्रुप्स पर विस्तार से चर्चा की गई। आधिकारियों के अनुसार, ये थीम चुनाव प्रबंधन के सभी पहलुओं को कवर करती हैं और चुनाव प्रबंधन निकायों के समृद्ध एवं विविध अनुभवों पर आधारित ज्ञान के भंडार का विकास करने का उद्देश्य रखती हैं। ये 36 थीमैटिक ग्रुप्स राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के नेतृत्व में संचालित होंगे, जिनमें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक विशेषज्ञ भी योगदान देंगे। यह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भारत इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (IIIDEM) द्वारा निर्वाचन आयोग के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक चुनावी चुनौतियों पर साझा समझ विकसित करना, सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं और नवाचारों का आदान-प्रदान करना तथा समाधानों का सह-निर्माण करना है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में यह सम्मेलन भारत के अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल IDEA के 2026 के लिए काउंसिल ऑफ मेंबर स्टेट्स की अध्यक्षता ग्रहण करने के बाद आयोजित हो रहा है। सम्मेलन की थीम है- समावेशी, शांतिपूर्ण, लचीली और सतत दुनिया के लिए लोकतंत्र। सम्मेलन में विश्व भर के चुनाव प्रबंधन निकायों (ईएमबी) का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 100 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि भाग लेंगे, साथ ही वैश्विक संगठनों, भारत में विदेशी मिशनों तथा चुनावी प्रक्रियाओं के शैक्षणिक एवं व्यावहारिक विशेषज्ञ भी उपस्थित रहेंगे। सम्मेलन के कार्यक्रम में सामान्य एवं प्लेनरी सत्र शामिल होंगे, जैसे उद्घाटन सत्र, ईएमबी लीडर्स प्लेनरी, ईएमबी वर्किंग ग्रुप मीटिंग्स तथा ईसीआईनेट (निर्वाचन सहयोग के लिए एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म) का शुभारंभ। इसके अलावा थीमैटिक सत्र वैश्विक चुनावी थीम्स, मॉडल अंतरराष्ट्रीय चुनावी मानकों तथा चुनावी प्रक्रियाओं में सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं एवं नवाचारों पर केंद्रित होंगे। सम्मेलन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधु एवं डॉ. विवेक जोशी भाग लेने वाले ईएमबी प्रमुखों एवं अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के साथ 40 से अधिक द्विपक्षीय बैठकें आयोजित करेंगे। इसके अतिरिक्त, सम्मेलन में चार आईआईटी, छह आईआईएम, 12 राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों तथा भारतीय जन संचार संस्थान जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी होगी। प्रतिभागियों को भारत की चुनावी व्यवस्था, प्रक्रियाओं एवं तकनीकी नवाचारों से परिचित कराया जाएगा, जो भारतीय चुनावों को विश्व की लोकतंत्रों में एक आदर्श बनाते हैं। बता दें कि यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब भारत में वर्तमान समय में विपक्षी दल, विशेष रूप से कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं कि वह सत्तारूढ़ भाजपा के इशारे पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के माध्यम से लाखों-करोड़ों वैध मतदाताओं के नाम काटकर वोट चोरी कर रहा है, जिससे अल्पसंख्यक, गरीब और विपक्षी समर्थक क्षेत्रों के लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश में ड्राफ्ट सूची से 2.89 करोड़ नाम हटाए जाने, पश्चिम बंगाल में प्रतिष्ठित हस्तियों जैसे अमर्त्य सेन और मोहम्मद शमी को नोटिस भेजे जाने, तथा असम, तमिलनाडु जैसे राज्यों में इसी तरह की शिकायतों के बाद विपक्ष इसे 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले लोकतंत्र पर हमला बता रहा है, जबकि चुनाव आयोग और भाजपा इन आरोपों को निराधार बताते हुए प्रक्रिया को मतदाता सूची की शुद्धता के लिए आवश्यक बता रहे हैं।  

वेनेजुएला पर US अटैक का ग्लोबल असर: चीन को मिला रणनीतिक फायदा, ताइवान की बढ़ी चिंता

नई दिल्ली अमेरिकी फोर्सेज ने वेनेजुएला की राजधानी में घुसकर जब राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अगवा किया तो उससे कुछ घंटे पहले ही चीन के विशेष दूत से उनकी मुलाकात हुई थी। चीन के रणनीतिक और आर्थिक संबंध वेनेजुएला से काफी गहरे रहे हैं। अमेरिका के बाद चीन वेनेजुएला का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। ऐसे में निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और वेनेजुएला के तेल और बाजार पर अमेरिकी नियंत्रण से चीन को झटका लगा है। खासतौर पर इस बात से चीन को बड़ा नुकसान पहुंचेगा, जिसके तहत अमेरिका ने शर्त रख दी है कि वेनेजुएला के बाजार में अमेरिकी माल की ही सप्लाई होगी। ऐसे में चीन के हाथ से एक बड़ा बाजार निकल गया है।   फिर भी चीन के लिए इस मुश्किल में भी एक बड़ी उम्मीद है। दरअसल एक्सपर्ट्स का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने जिस मुनरो डॉक्ट्रिन का हवाला देते हुए यह कह रहे हैं कि लैटिन अमेरिका के एक हिस्से पर उनके देश का हक है। उसी दलील को आगे बढ़ाते हुए चीन की ओर से ताइवान पर दावेदारी मजबूत की जा सकती है। 19वीं सदी में मुनरो डॉक्ट्रिन चर्चा में थी। बीते साल ट्रंप प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का जो प्रकाशन किया था, उसमें इसका लंबे समय बाद जिक्र किया गया था। इस नीति के तहत अमेरिका उन लैटिन अमेरिकी देशों पर अपनी दावेदारी जताने की कोशिश में हैं, जिनके पास संसाधन बड़ी संख्या में हैं। ऐसी स्थिति चीन को भी उकसाने और बल प्रदान करने वाली है कि यदि अमेरिका वेनेजुएला पर नियंत्रण स्थापित कर सकता है तो फिर ताइवान में चीन ऐसा क्यों नहीं कर सकता। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से वेनेजुएला को लगातार यह धमकी दी जा रही थी कि वहचीन, ईरान, रूस और क्यूबा से अपने संबंध खत्म करे। तभी उसे तेल उत्पादन की मंजूरी दी जा सकती है। ट्रंप ने जताई थी आपत्ति- वेनेजुएला में इतना निवेश क्यों कर रहा है चीन ट्रंप की ओर से लगातार इस बात पर आपत्ति जताई जा रही थी कि आखिर चीन का इतने बड़े पैमाने पर वेनेजुएला में निवेश क्यों हो रहा है। यही नहीं डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने तो अब ग्रीनलैंड तक पर दावेदारी जता दी है और इससे यूरोप में भी तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। अब इससे चीन को भी ताइवान को लेकर बल मिला है। वह भी अपनी सुरक्षा और एकीकृत चीन के नाम पर ताइवान पर हमला कर सकता है।