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15 गेंदों में फिफ्टी! सरफराज खान ने अभिषेक शर्मा को जमकर कूटा, पंजाब पस्त

नई दिल्ली मुंबई के स्टार बल्लेबाज सरफराज खान विजय हजारे ट्रॉफी में अपनी रेड हॉट फॉर्म को बरकरार रखे हुए हैं। पंजाब के खिलाफ राउंड-7 के मुकाबले में उन्होंने 15 गेंदों में फिफ्टी ठोकी। इस दौरान उन्होंने पारी के 10वें ओवर में पंजाब के कप्तान अभिषेक शर्मा के ओवर में 3 छक्के और 3 चौके लगाकर कुल 30 रन बटौरे। बता दें, पंजाब ने पहले बैटिंग करते हुए मुंबई के सामने 217 रनों का टारगेट रखा है। इस स्कोर का पीछा करते हुए सरफराज खान ने मात्र 20 गेंदों पर 7 चौकों और 5 गगनचुंबी छक्कों की मदद से 62 रनों की तूफानी पारी खेली। उन्हें मयंक मार्कंडे ने LBW आउट किया।   मुंबई के कप्तान श्रेयस अय्यर ने इस मैच में टॉस जीतकर फील्डिंग चुनी। पंजाब की शुरुआत बेहद खराब रही। कप्तान अभिषेक शर्मा 8 तो प्रभसिमरन सिंह 11 रन बनाकर आउट हुए। यह दोनों इस सीजन पंजाब के लिए तगड़ी नींव रख रहे हैं। हालांकि पंजाब के खिलाफ दोनों फ्लॉप रहे। अनमोलप्रीत सिंह और रमनदीप सिंह के अर्धशतकों की मदद से पंजाब की टीम 216 के स्कोर तक पहुंचने में कामयाब रही। हालांकि पूरी टीम 50 ओवर नहीं टिक पाई। 217 के टारगेट का पीछा करते हुए मुंबई को अंगक्रिश रघुवंशी और मुशीर खान ने सधी हुई शुरुआत दी और पहले विकेट के लिए 50 रन जोड़े। इसके बाद नंबर-3 पर बैटिंग करने आए सरफराज खान ने तो समा ही बांध दिया। अभिषेक के 10वें ओवर में 6,4,6,4,6,4 के रूप में उन्होंने कुल 30 रन बटौरे। सरफराज की 62 रनों की तूफानी पारी के दौरान स्ट्राइक रेट 310 का था। उनकी इस पारी के दम पर मुंबई मैच में काफी आगे हैं। कप्तान श्रेयस अय्यर मैच खत्म कर लौटना चाहेंगे। वह खबर लिखे जाने तक 19 गेंदों पर 32 रन बनाकर खेल रहे हैं। मुंबई को जीत के लिए 49 रनों की दरकार है।

योगी सरकार का बड़ा तोहफा, यूपी में संपत्ति का हस्तांतरण अब होगा आसान और सस्ता

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेशवासियों को नए साल का बड़ा तोहफा देते हुए पारिवारिक संपत्तियों के हस्तांतरण की प्रक्रिया को बेहद आसान और सस्ता बना दिया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियां भी दायरे में अब तक केवल आवासीय और कृषि संपत्तियों के पारिवारिक दान विलेख (गिफ्ट डीड) पर ही स्टांप ड्यूटी में छूट मिलती थी। नई व्यवस्था के तहत अब व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों को भी इस दायरे में शामिल कर लिया गया है। अब परिवार के सदस्यों के बीच किसी भी प्रकार की अचल संपत्ति दान करने पर भारी-भरकम स्टांप शुल्क के बजाय मात्र 5,000 रुपये की स्टांप ड्यूटी देनी होगी। इसके साथ ही संपत्ति के कुल मूल्य का 1 प्रतिशत निबंधन (Registration) शुल्क देय होगा। किसे मिलेगा इसका लाभ? इस छूट का लाभ परिवार के रक्त संबंधियों जैसे- माता, पिता, पति, पत्नी, पुत्र, पुत्री, पुत्रवधु, दामाद, भाई, बहन और पोते-पोतियों को मिलेगा। विशेष बात यह है कि सगे भाई की मृत्यु होने पर उनकी पत्नी (भाभी) को भी अब इस छूट का पात्र माना गया है। अनावश्यक विवादों और मुकदमों से मिलेगी मुक्ति स्टांप एवं पंजीयन मंत्री रवीन्द्र जायसवाल ने बताया कि पहले व्यावसायिक संपत्तियों पर सर्किल रेट का 5 से 7 प्रतिशत स्टांप शुल्क देना पड़ता था, जिससे लोग कानूनी हस्तांतरण से बचते थे। इस ऐतिहासिक निर्णय से वैधानिक हस्तांतरण बढ़ेगा, जिससे पारिवारिक विवादों और लंबी मुकदमेबाजी में कमी आएगी। साथ ही, विभाग की राजस्व व्यवस्था में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। मात्र ₹5,000 होगी स्टांप ड्यूटी अब अगर कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति परिवार के सदस्य को Gift Deed (दान विलेख) के जरिए देता है, तो उसे केवल ₹5,000 की स्टांप ड्यूटी देनी होगी। पहले यह छूट सिर्फ आवासीय और कृषि संपत्ति तक सीमित थी, लेकिन अब कमर्शियल प्रॉपर्टी और इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी पर भी यही नियम लागू होगा। इससे शहरों में दुकान, गोदाम, फैक्ट्री जैसी संपत्तियों के बंटवारे पर भारी टैक्स नहीं देना पड़ेगा। यह फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया।  सरकार ने स्टाम्प और पंजीकरण विभाग के उस प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसके तहत परिवार के सदस्यों के बीच अचल संपत्ति के दान पर भारी शुल्क खत्म कर दिया गया है। अब किसी भी प्रकार की संपत्ति के ट्रांसफर पर केवल नाममात्र की राशि में रजिस्ट्री हो सकेगी। नई व्यवस्था के अनुसार, परिवार के भीतर संपत्ति के दान पर ₹5,000 स्टांप ड्यूटी और संपत्ति मूल्य का केवल 1 प्रतिशत रजिस्ट्रेशन शुल्क देनी होगी। इससे पहले शहरी क्षेत्रों में व्यावसायिक संपत्ति पर 7 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 5 प्रतिशत तक शुल्क देना पड़ता था, जो आम लोगों के लिए काफी महंगा था। यही कारण था कि लोग कानूनी प्रक्रिया से बचते थे और बाद में विवाद खड़े हो जाते थे। पारिवारिक सदस्यों को मिलेगा लाभ, किराया रजिस्ट्रेशन भी हुआ सस्ता इस नई छूट का फायदा पुत्र, पुत्री, माता, पिता, पति, पत्नी, भाई, बहन, पुत्रवधु, दामाद, नाती-नातिन, भतीजा-भतीजी सहित कई रिश्तों को मिलेगा। खास बात यह है कि अब सगे भाई के निधन की स्थिति में उसकी पत्नी को भी इस छूट का लाभ मिलेगा। यानी अधिकतर नजदीकी रिश्तों में संपत्ति ट्रांसफर बेहद आसान हो जाएगा। योगी सरकार ने सिर्फ संपत्ति बंटवारे ही नहीं, बल्कि किराया समझौते के रजिस्ट्रेशन को भी बेहद सस्ता बना दिया है।  अब किराए के समझौते पर लगने वाली स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क में 90 प्रतिशत तक की कटौती की गई है। पहले अधिक शुल्क के कारण लोग रेंट एग्रीमेंट रजिस्टर्ड नहीं कराते थे, जिससे बाद में मकान मालिक और किरायेदार के बीच विवाद होते थे। नई व्यवस्था में किराया अवधि और वार्षिक किराए के आधार पर बहुत कम शुल्क तय किया गया है। इससे अब आम नागरिक बिना डर के अपना किराया समझौता कानूनी रूप से पंजीकृत करा सकेगा। इससे न केवल कानूनी सुरक्षा मिलेगी, बल्कि भविष्य के झगड़ों से भी बचाव होगा। पैतृक संपत्ति का बंटवारा अब सिर्फ 10 हजार में योगी सरकार के एक और फैसले के तहत अब पैतृक संपत्ति के बंटवारे की रजिस्ट्री मात्र ₹10,000 में कराई जा सकेगी। पहले इस प्रक्रिया में हजारों से लेकर लाखों रुपये तक खर्च हो जाते थे। अब कम खर्च में कानूनी बंटवारा संभव होगा, जिससे पारिवारिक विवादों में भारी कमी आएगी। इन सभी सुधारों से उत्तर प्रदेश में कानूनी पारदर्शिता और संपत्ति से जुड़े मामलों में भरोसा बढ़ेगा। लोग बिना डर और भारी खर्च के अपनी संपत्ति को सही तरीके से ट्रांसफर कर पाएंगे। सरकार का लक्ष्य कम खर्च, कम विवाद और ज्यादा पारदर्शिता है। योगी सरकार का यह फैसला न केवल आम नागरिकों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि उत्तर प्रदेश में संपत्ति व्यवस्था को आधुनिक और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम भी है। बता दें कि वर्ष 2022 तक पारिवारिक दान पर पूरी स्टांप ड्यूटी देनी होती थी। 2023 में पहली बार आवासीय और कृषि संपत्तियों पर राहत दी गई थी। अब सरकार ने यह छूट कमर्शियल और इंडस्ट्रीयल प्रॉपर्टी तक बढ़ा दी है। इससे उत्तर प्रदेश में संपत्ति के पंजीकरण को बढ़ावा मिलेगा और अवैध या कच्चे दस्तावेजों की संख्या कम होगी। सरकार का मानना है कि इस फैसले से संपत्ति से जुड़े विवाद, कोर्ट केस और पारिवारिक झगड़े काफी हद तक कम होंगे। जब संपत्ति का हस्तांतरण आसान और सस्ता होगा, तो लोग कानूनी रास्ता अपनाएंगे। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि राजस्व व्यवस्था में भी सुधार होगा। सरकार जल्द ही इस संबंध में अधिसूचना जारी करेगी, जिसके बाद यह सुविधा पूरे प्रदेश में लागू हो जाएगी।  

कोलकाता में ED की छापेमारी, ममता बनर्जी बोलीं – गृहमंत्री लोकतंत्र की रक्षा नहीं कर पा रहे

  कोलकाता  केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में IPAC प्रमुख प्रतीक जैन के आवास और कार्यालय पर छापेमारी के बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खुद प्रतीक जैन के घर पहुंचने से मामले की गंभीरता और बढ़ गई है. सूत्रों के अनुसार, ईडी यह छापेमारी कथित वित्तीय अनियमितताओं के एक मामले में कर रही है. जांच टीम एक साथ प्रतीक जैन के आवास और कार्यालय में दस्तावेजों की जांच और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं कर रही है. इस कार्रवाई के दौरान ममता बनर्जी का मौके पर आना राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. मालूम हो कि ममता बनर्जी सीधे उस स्थान पर पहुंचीं जहां ईडी टीम जांच चल रही. उनके आने से माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई के खिलाफ एक सियासी निशान के तौर पर देखा जा रहा है. इससे पहले भी पश्चिम बंगाल में ईडी और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाइयों को लेकर राज्य सरकार और केंद्र के बीच विवाद की स्थिति बनी रही है. ईडी छापे पर ममता बनर्जी का बड़ा आरोप, कहा- पार्टी दस्तावेज और रणनीति चुराने आए ईडी की रेड पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ममता ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि ईडी हमारी पार्टी के आईटी सेक्टर कार्यालय में इस प्रकार से दस्तावेज लेने आई. मुख्यमंत्री ममता ने इस कार्रवाई को राजनीतिक उत्पीड़न बताया और कहा कि यह सब गृहमंत्री की स्क्रिप्ट के तहत हो रहा है, जो स्वयं देश की सुरक्षा बनाए रखने में असमर्थ हैं. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि ईडी द्वारा उनके पार्टी दस्तावेजों को बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के जब्त किया गया और इस बीच, कुछ मामलों में लोगों के नामों को हटाया जा रहा है. उन्होंने खास तौर पर SIR केस का भी जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाए कि नाम गायब किए जा रहे हैं और दस्तावेजों का दुरुपयोग किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की जांच एजेंसियां और गृह मंत्रालय देश और लोकतंत्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे हैं. उन्होंने कहा कि देश में दो समानांतर प्रयास किए जा रहे हैं – एक तरफ मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाने की कोशिशें और दूसरी तरफ अवैध तरीके से संवेदनशील डेटा इकट्ठा करना. मुख्यमंत्री ने इसे लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा करार दिया. ममता बनर्जी ने यह भी बताया कि उन्हें इस तरह की कार्रवाई की पहले से सूचना थी. इसलिए पार्टी से जुड़े सभी हार्ड डिस्क और जरूरी डेटा पहले ही सुरक्षित कर लिया गया था ताकि किसी भी प्रकार की जब्ती से पार्टी के आंतरिक कार्यों और रणनीतियों को नुकसान न पहुंचे. उन्होंने कहा कि उनका आईटी ऑफिस पहले भी निशाने पर रहा है और वह खुद वहां जाकर पूरी स्थिति की समीक्षा करेंगी. मुख्यमंत्री ने साफ़ किया कि यह देखना उनकी जिम्मेदारी है कि यह कार्रवाई किस उद्देश्य से और किस स्तर पर की गई है. ममता बनर्जी ने केंद्र की एजेंसियों पर विपक्षी दलों को डराने और कमजोर करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस राजनीतिक साजिश के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर मजबूती से संघर्ष करती रहेगी.

अर्जुन रामपाल की कैजुअल सेक्स पर टिप्पणी ने मचाई हलचल, बहस का नया दौर शुरू

मुंबई  एक वक्त था जब सेक्स का जिक्र भी समाज में फुसफुसाहट में किया जाता था, लेकिन आज बातचीत कहीं ज्यादा खुली और बेबाक हो चुकी है. कैजुअल सेक्स को मॉडर्न सोच, आत्मविश्वास और पर्सनल चॉइस का प्रतीक माना जाता है. किसी के साथ रहना या न रहना, हां कहना या मना करना. ये सभी फैसले व्यक्ति के निजी अधिकार हैं. लेकिन इस खुली सोच के बीच एक सवाल अक्सर अनसुना रह जाता है. उस एक पल के बाद क्या होता है, जब एक्साइटमेंट खत्म हो जाती है और इंसान अपने खाली कमरे में अकेला रह जाता है? रणवीर इलाहाबादिया के पॉडकास्ट में अर्जुन रामपाल की एक टिप्पणी ने इसी अनकहे पहलू की ओर ध्यान खींचा. उन्होंने कहा कि हम फिजिकल अट्रैक्शन को तो आसानी से समझ लेते हैं, लेकिन उस इमोशनल कीमत को नजरअंदाज कर देते हैं, जो हमारा मन चुपचाप चुकाता है. कैजुअल सेक्स सिर्फ एक रात का अनुभव नहीं होता, कई बार यह अपने पीछे मेंटल स्ट्रेस, उलझन और एक अजीब-सा खालीपन छोड़ जाता है, जिसके लिए हम तैयार नहीं होते. अर्जुन के मुताबिक, चाहे हम इसे कितना ही ‘कैजुअल’ क्यों न कह लें, जब दो लोग शारीरिक रूप से करीब आते हैं तो वहां एनर्जी और फीलिंग्स शेयर करते ही हैं. ‘नो स्ट्रिंग्स अटैच्ड’ सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन असल जिंदगी में दिमाग और दिल को इससे पूरी तरह अलग कर पाना आसान नहीं होता. रिश्ता अचानक खत्म होने पर कई लोग खुद को इमोशनली सुन्न या अकेला महसूस करने लगते हैं. इस मनोवैज्ञानिक उलझन को साइंस भी समझाता है. गेटवे ऑफ हीलिंग की फाउंडर और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत बताती हैं कि फिजिकल रिलेशन के दौरान दिमाग में ऑक्सिटोसिन और डोपामिन जैसे हार्मोन रिलीज होते हैं, जो जुड़ाव की फीलिंग को पैदा करते हैं. शरीर किसी से कनेक्ट करना चाहता है, जबकि दिमाग खुद को समझाता रहता है कि यह सिर्फ कैज़ुअल है. यही टकराव कई बार सुबह उठते ही अकेलेपन या अचानक उदासी का कारण बनता है. दिल्ली के सीके बिड़ला अस्पताल की गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. त्रिप्ती राहेजा बताती हैं कि उन्होंने कई ऐसे लोग देखे हैं जिन्हें अपने फैसले पर पछतावा नहीं होता, फिर भी बाद में खालीपन, बेचैनी या आत्मविश्वास में कमी महसूस होती है. वहीं फोर्टिस अस्पताल की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. दीक्षा अथवानी मानती हैं कि इसे मिस्टीरियस एनर्जी नहीं, बल्कि हार्मोनल और इमोशनल बॉन्डिंग के रूप में समझा जाना चाहिए.  सेक्शुअल लिबरेशन का मकसद डर और शर्म से आजादी था, लेकिन आज भावनाओं को कमजोरी समझा जाने लगा है. सोशल मीडिया पर थ्रिल, फ्लर्टिंग और एक्साइटमेंट तो दिखते हैं, लेकिन रात के 3 बजे का खालीपन कोई पोस्ट नहीं करता. मुद्दा यह नहीं कि कैज़ुअल सेक्स सही है या गलत. सच यह है कि यह हर किसी के लिए इमोशनली न्यूट्रल नहीं होता. अगर यह आपको सुकून देता है, तो ठीक है. अगर यह आपको उलझा और खाली छोड़ देता है, तो वह भी एक सच्चाई है. असली आजादी तब है, जब हम बिना शर्म और जजमेंट के अपनी फीलिंग्स को एक्सेप्ट करें और वही चुनें जो हमें लंबे समय में संभाल सके. न कि सिर्फ वही जो समाज या सोशल मीडिया में ट्रेंड कर रहा हो.

झारखंड के 34 फार्मेसी कॉलेजों की जमीन और भवन न होने से मान्यता होगी रद्द

रांची. विभागीय प्रावधानों का खुलेआम उल्लंघन कर डिप्लोमा इन फार्मेसी पाठ्यक्रम का संचालन कर रहे झारखंड के 34 फार्मेसी कॉलेजों की मान्यता रद्द होगी। इन संस्थानों के द्वारा सरकार से न तो एनओसी लिया गया था और न ही एनओसी के लिए आवेदन किया गया था। इतना नहीं, इन संस्थानों के पास न तो अपनी जमीन और न अपना भवन ही है। साथ ही टीचिंग और नन टीचिंग स्टाफ भी नहीं हैं। ऐसे 34 फार्मेसी संस्थानों को सरकार की ओर से दिया गया लेटर ऑफ कंसेंट निरस्त होगा। डिप्लोमा इन फार्मेसी कोर्स संचालित कर रहे 36 संस्थान ऐसे भी मिले हैं, जहां टीचिंग और नन टीचिंग स्टाफ की आंशिक कमी है, लेकिन इनका अपना भवन व अपनी जमीन है। ये संस्थान संचालन के लिए प्रयासरत तो हैं, लेकिन इन संस्थानों ने भी डिप्लोमा इन फार्मेसी के लिए न तो एनओसी लिया है और न ही इसके लिए आवेदन ही किया है। इन सभी 36 फार्मेसी संस्थानों से स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्टीकरण पूछा है। स्पष्टीकरण मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह भी सवाल उठा है कि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) द्वारा तय प्रावधान के अनुसार फार्मेसी संस्थानों में शिक्षकों, भवन और अन्य संसाधनों की जांच परीक्षा समिति द्वारा क्यों नहीं की गई। इस मामले में डिप्लोमा इन फार्मेसी एग्जामिनेशन कमेटी के अध्यक्ष/सदस्य सचिव से भी स्पष्टीकरण पूछा जाएगा। विभागीय कमेटी की जांच में हुआ खुलासा : अनियमितताओं की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने फार्मेसी संस्थानों की जांच के लिए बीते साल अगस्त में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी। विभागीय उप सचिव रंजीत लोहरा की अध्यक्षता में गठित कमेटी में अवर सचिव धीरंजन प्रसाद शर्मा व प्रशांत पांडेय शामिल थे। जांच समिति ने राज्य के कुल 71 फार्मेसी संस्थानों की जांच की तो व्यापक अनियमितता सामने आई। समिति ने जांच प्रतिवेदन विभाग को सौंप दिया है। रिपोर्ट के अनुसार कई संस्थान न तो सरकारी प्रावधानों का पालन कर रहे हैं और न ही पीसीआई के मानकों पर खरे उतरते हैं।

बिहार की विकास दर बढ़कर हुई 13 फीसदी के पार

पटना. बिहार की विकास दर 13.09 फीसदी हो गई है। वर्तमान मूल्य पर वर्ष 2024-25 का जीएसडीपी में वार्षिक वृद्धि दर 13.09 फीसदी है, जबकि स्थिर मूल्य पर वार्षिक वृद्धि दर 8.64 फीसदी है। वहीं बिहार में सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) बढ़कर 76490 रुपए हो गया है। यह वर्तमान मूल्य पर वर्ष 2024-25 का प्रति व्यक्ति सकल राज्य घरेलू उत्पाद है। जबकि, स्थिर मूल्य पर यह 40973 रुपए है। यह जानकारी योजना एवं विकास मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने दी। बताया कि राज्य की 357 विकास योजनाओं को हरी झंडी मिली है। इन पर 16 हजार 887 करोड़ रुपए खर्च होंगे। मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर तक इन योजनाओं को स्वीकृत प्रदान की गयी है। वे बुधवार को सूचना भवन में पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने विभाग की योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी साझा की। मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता योजना के तहत 8.76 लाख युवाओं को सहायता दी गयी है। इन्हें 1267 करोड़ का भुगतान किया गया है। इसी तरह मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना अंतर्गत 72206 योजनाओं को पूरा किया गया है। जबकि, 17621 योजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। पूर्ण की गयी योजनाओं पर 3634 करोड़ रुपए खर्च किये गये हैं। इसके अलावा सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना में 18 वीं लोकसभा सांसदों की अनुशंसा वाली 1108 योजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं। इन पर 117.65 करोड़ खर्च हुए हैं। जबकि, राज्यसभा सांसदों की अनुशंसा पर 261.95 करोड़ की 2914 योजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। श्री यादव ने कहा कि षष्ठम राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा पर दो हजार पंचायत सरकार भवनों के निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गयी है। इसके पूर्व राज्य योजना अंतर्गत 1162 पंचायत सरकार भवनों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा पंचायत सुदृढ़ीकरण योजना के तहत 293 भवनों का निर्माण पूर्ण किया गया है। इस अवसर पर विभाग के प्रधान सचिव मयंक बरबड़े, निदेशक रंजीत कुमार मौजूद थे।

लखपति दीदी राशोबाई बनीं मेहनत और समूह सहयोग से आत्मनिर्भरता की मिसाल

रायपुर. जहां चाह वहां राह इस उक्ति को चरितार्थ कर दिखाया है कोंडागांव जिले के विकासखंड फरसगांव अंतर्गत ग्राम पंचायत बानगांव की रहने वाली राशोबाई मरकाम ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत स्व सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपने जीवन को नई दिशा दी, बल्कि आत्मनिर्भरता की मिसाल भी कायम की है। राशोबाई आज विभिन्न आजीविका गतिविधियां शुरूकर 01 लाख रूपए से अधिक की आमदनी प्राप्त कर रही हैं। जय माता दी स्व सहायता समूह की सदस्य राशोबाई स्व सहायता समूह से जुड़ने से पहले कृषि मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं और घर के कार्यों तक ही सीमित थी। आय के सीमित साधन होने के कारण परिवार की वार्षिक आय केवल 48 हजार रुपये थी, जिससे दैनिक जरूरतों को पूरा करना काफी मुश्किल होता था और परिवार का पालन पोषण बेहतर ढंग से नहीं हो पाता था। स्व सहायता समूह से जुड़ने के पश्चात उन्हें समूह के माध्यम से आरएफ अनुदान राशि 15 हजार रुपये और सीआईएफ ऋण राशि 60 हजार रुपये प्राप्त हुई। इस सहयोग से उन्होंने कृषि कार्य के साथ-साथ किराना दुकान संचालन एवं मछली पालन जैसी विभिन्न आजीविका गतिविधियां शुरू कीं। जिला प्रशासन की एनआरएलएम टीम के मार्गदर्शन से उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उक्त आजीविका गतिविधियों के सफल संचालन से आज श्रीमती राशोबाई मरकाम की वार्षिक आय बढ़कर लगभग 1 लाख 67 हजार रुपये हो गई है। वर्तमान में वे पूर्व की तुलना में दोगुना आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है तथा जीवन स्तर में सुखद बदलाव आया है। आज श्रीमती राशोबाई मरकाम ने अपनी मेहनत, लगन और समूह के सहयोग से न केवल आत्मनिर्भर हुई हैं, बल्कि अपने परिवार के लिए एक मजबूत आर्थिक सहारा भी बनी है। उन्होंने शासन की योजनाओं से मिली सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि एनआरएलएम ‘बिहान’ योजना के अंतर्गत स्व सहायता समूहों एवं टीम के सतत प्रयासों से ग्रामीण महिलाओं को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं “लखपति दीदी” बनकर आत्मसम्मान के साथ जीवन यापन कर रही है.

हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने केरल विधानसभा का अवलोकन किया

चंडीगढ़ हरियाणा विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने केरल भ्रमण के दौरान बुधवार को वहां की विधान सभा का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने केरल विधान सभा अध्यक्ष ए.एन. शमसीर से संसदीय विषयों पर गहन चर्चा भी की। चर्चा में सामने आया कि केरल विधान सभा में विभिन्न संसदीय सुधारों पर काम किया जा रहा है। इस दौरान हरियाणा विधान सभा की संसदीय प्रक्रिया और नियमों को लेकर भी जानकारी साझा की गई। विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि केरल विधान सभा में संसदीय प्रक्रिया के मानक स्थापित किए हैं। यहां 37 कमेटियां हैं, जिनमें से 4 वित्तीय समितियां तथा 14 विषय संबंधी समितियां शामिल हैं। विषय समितियों का महत्व इस तथ्य से आंका जा सकता है कि किसी भी विधेयक का प्रारूप सदन में प्रस्तुत करने के बाद इन समितियों को भेजा जाता है। समिति इस प्रारूप का गहन अध्ययन कर उस पर सिफारिशें देती हैं। उसके बाद इन विधेयक प्रारूपों पर सदन में चर्चा होती है। केरल की समितियों की विशेष बात यह भी देखने में आई कि यहां समितियों का गठन 30 माह के लिए होता है। केरल की विषय संबंधी कमेटियों में खास अंतर यह भी देखा गया कि इनके चेयरपर्सन संबंधित विभाग के मंत्री होते हैं। विधान सभा अध्यक्ष को बताया गया कि केरल विधान सभा में केरल लेजिस्लेटिव एसेंबली मीडिया एंड पार्लियामेंटरी स्टडीज का विंग है, जो समय-समय पर सम्मेलन एवं सेमिनार का आयोजन करवाता है। विधान सभा का अपना टी.वी. चैनल भी है जो सदन की कार्यवाही का प्रसारण करता है। अन्य दिनों में इस चैनल पर विधान सभा से संबंधित विषयों पर वीडियो क्लिप प्रसारित किए जाते हैं। केरल विधान सभा में पार्लियामेंट इंटर्नशिप विंग है, जो कानून के विद्यार्थियों को 7 से 14 दिन की इंटर्नशिप करवाता है। भारत व दूसरे देशों के कानून की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों का साल भर का कार्यक्रम रहता है। ये विद्यार्थी विधान सभा से सम्बन्धित दूसरे विषयों पर भी जानकारी हासिल करते हैं। विधान सभा में राष्ट्रीय तथा राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित किये जाते हैं। इनमें पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित सदस्यों तथा सम्बन्धित अधिकारियों के कार्यक्रम शामिल रहते हैं। देश की विधान सभाओं में एससी एसटी वर्ग के विधायकों का सम्मेलन भी आयोजित किया जाता है। देश की विभिन्न विधान सभाओं से महिला सदस्यों तथा युवा सम्मेलन आयोजित हुए। इनमें एक हजार विद्यार्थियों ने भागीदारी की। विस अध्यक्ष को बताया गया कि विधान सभा के 1200 कर्मचारियों को समय-समय पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा यह भी जानकारी मिली कि विधान सभा सत्र के दौरान एक बैठक में 30 तारांकित प्रश्न शामिल किए जाते हैं।

पंजाबी सिंगर मनकीरत औलख ने बाढ़ प्रभावित लड़के-लड़कियों को गिफ्ट की कारें

चंडीगढ़. पंजाब में अगस्त 2025 में जब बाढ़ आई थी, तो उस समय लोगों के घरों, खेतों और वाहनों का काफी नुकसान हुआ था। उस समय पंजाबी सिंगर मनकीरत औलख और उनके दोस्तों ने लोगों को फ्री में ट्रैक्टर और घर बनाने के लिए करोड़ों रुपए बांटे थे। इस दौरान उन्होंने एक परिवार की बेटियों को घर बनाने में मदद करने के साथ ही उनकी शादी पर कार देने का वादा किया था, जिसे नए साल के शुरू में मनकीरत औलख ने पूरा किया है। उन्होंने कबड्डी खिलाड़ी राजनदीप शर्मा और जस शर्मा को स्विफ्ट कार दी है। जबकि कबड्डी खिलाड़ी जुझार सिंह को आई-20 कार सौंपी है। मनकीरत औलख अपनी टीम के साथ मोहाली के गुरुद्वारा सिंह शहीदां में पहुंचे और गाड़ियों की चाबी सौंपी। वीडियो के जरिए मांगी थी मदद अगस्त महीने में जब पंजाब में बाढ़ आई थी, उस समय मनकीरत औलख खुद बाढ़ प्रभावित जिलों में पहुंच गए थे। साथ ही लोगों को घर बनाने के लिए लाखों रुपए बांटे थे। इस दौरान मानसा की लड़कियां, जो कबड्डी खिलाड़ी थीं, उन्होंने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया के जरिए मदद की गुहार लगाई थी। क्योंकि उन्हें पता चला था मनकीरत औलख लोगों की मदद कर रहे हैं। उन्होंने अपने घर का वीडियो बनाया था, जो कि पूरी तरह से टूटा हुआ था। इसके बाद मनकीरत औलख उनके इलाके में पहुंचकर उन्हें करीब 5 लाख रुपए घर बनाने के लिए मदद की थी। साथ ही उनकी शादी पर गाड़ी देने का वादा किया था, जिसे अब उन्होंने पूरा किया है। पहले कबड्‌डी कप पर देनी थी कार मनकीरत औलख की तरफ से पहले ये कार लड़कियों को सोहाना में कबड्डी कप वाले दिन 15 दिसंबर को देनी थीं। लेकिन इस दौरान कबड्डी प्रमोटर राना बलाचौरिया का मर्डर हो गया था। इस वजह से यह प्रोग्राम टल गया था। इसके बाद अब यह प्रोग्राम किया गया। मनकीरत औलख और रूपा सोहाना की तरफ से उक्त लड़कियों और कबड्डी खिलाड़ी को कार देकर सम्मानित किया गया। भाई का कर्ज नहीं चुका पाऊंगी इस मौके कबड्डी खिलाड़ी लड़की ने बताया कि भाई ने वादा किया था कि कबड्डी कप पर कार देंगे। लेकिन उस दिन बड़ी घटना हो गई। भाई बलाचौरिया का मर्डर हो गया। उससे काफी दुख लगा है। आज एक खुशी भी है और गम भी है। पहले यही कार लोगों के बीच मिलनी थी। भाई ने घर बनाने में भी मदद की। अब गाड़ी से मदद की है। सारी जिंदगी यह कर्ज नहीं चुका पाऊंगी। 700 ट्रैक्टर देने के लिए प्रधानमंत्री बनना पड़ेगा इस मौके मनकीरत औलख ने कहा कि हम पंजाब के युवा के साथ खड़े हैं। अपनी नेक कमाई से जो दश-बंद निकालते हैं, वही करते हैं। वहीं मनकीरत ने साफ किया कि उन्होंने बाढ़ प्रभावित किसानों को सौ ट्रैक्टर देने का वादा किया था। 51 ट्रैक्टर अब तक दे दिए गए हैं, लेकिन जो 700 ट्रैक्टर देने के बारे में कह रहा है, उसके लिए मुझे प्रधानमंत्री बनना पड़ेगा। वह आपने बनाना नहीं है। जितनी जो सेवा करता है, उसे स्वीकार करना चाहिए।

बीजापुर में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा बोले- नई ऊर्जा और रणनीति से विकास में जुटें अधिकारी

रायपुर. छत्तीसगढ़ शासन के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री श्री विजय शर्मा बीजापुर के अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान बुधवार को जिला कार्यालय सभाकक्ष में जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ नियद नेल्ला नार योजनान्तर्गत संचालित विकास कार्यों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में उन्होंने विभागवार योजनाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की जानकारी लेते हुए कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र माओवाद का पूरी तरह उन्मूलन सुनिश्चित किया जाएगा। इसके बाद बस्तर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास का नया अध्याय शुरू होगा। उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि माओवाद के समूल उन्मूलन के बाद लोगों में विश्वास जगाना और विकास कार्यों में तीव्रता लाना आवश्यक होगा। अब समय बहुत कम है, इसलिए शासन की सभी महत्वाकांक्षी योजनाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन नई ऊर्जा, नई रणनीति और जनकल्याण की भावना के साथ सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को अपनी नैतिक जिम्मेदारियों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बीजापुर के सुदूर अंचलों में सड़क, बिजली, पानी, स्कूल, अस्पताल, आंगनबाड़ी सहित केंद्र एवं राज्य सरकार की सभी हितग्राही मूलक योजनाओं से प्रत्येक व्यक्ति को जोड़ा जाएगा। जिले के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाएं सुगमता से पहुंचेंगी, जिसमें जिला, विकासखण्ड और मैदानी अमले के अधिकारी-कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि माओवाद मुक्त ग्राम पंचायतों को विशेष परियोजना के तहत ‘इलवद पंचायत’ के रूप में एक करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात दी जाएगी। इसके साथ ही शासन की महत्वाकांक्षी ‘नियद नेल्ला नार' योजना के अंतर्गत जिले के 201 गांवों को शामिल किया गया है, जहां शासकीय योजनाओं की शत-प्रतिशत संतृप्तता और प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया जा रहा है। बैठक में एडीजी नक्सल ऑपरेशन विवेकानंद सिन्हा ने कहा कि बीजापुर में अब शांति और सुरक्षा की स्थिति सुदृढ़ हो रही है, जिससे शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में पहले की तुलना में अधिक सुगमता आई है। उन्होंने कहा कि पहले और आज के बीजापुर में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। पंचायत विभाग के सचिव भीम सिंह ने बताया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं का निराकरण लगातार किया जा रहा है और बस्तर संभाग का विकास शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। कलेक्टर संबित मिश्रा ने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए बीजापुर के समग्र विकास के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का आश्वासन दिया। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष जानकी कोरसा, बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी सुंदरराज पी, संचालक अश्विनी देवांगन, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव, डीएफओ रंगानाथन रामाकृष्णन, जिला पंचायत सीईओ नम्रता चौबे सहित जिला स्तरीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।