samacharsecretary.com

इश्क, कत्ल और राज़: कानपुर में प्रेमी ने 7 बच्चों की मां को मारकर गड्ढे में छुपाया शव, 8 महीने बाद सामने आई सच्चाई

कानपुर यूपी के कानपुर से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां एक महिला की फिल्म दृश्यम की तरह हत्या कर दी गई। दरअसल, महिला की हत्या कर उसका शव जमीन में दफना दिया गया। मामले का खुलासा होने पर पुलिस ने हत्यारोपी और उसके भाई को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित गोरेलाल ने बताया कि महिला के संबंध एक किसी और से हो गए थे। इसके अलावा वह उम्र में भी 12 साल बढ़ी थी। इसके अलावा उसके पहले से ही 7 बच्चे थे। इसी वजह से पीछा छुड़ाने के लिए उसकी हत्या कर तीन फीट के गड्ढे में शव दफना दिया।   ये मामला सतेजी थाना क्षेत्र के टिकवांपुर गांव का है। यहां रहने वाले रामबाबू शंखवार को कैंसर था, पांच साल पहले उसकी मौत हो गई थी। पति की मौत के बाद पत्नी रेशमा सात बच्चों को छोड़कर पड़ोसी गोरेलाल शंखवार के साथ रहने लगी थी। अप्रैल में वह गोरेलाल के साथ इटावा गेहूं कटाई करने गई थी, लेकिन वहां से लौटने के बाद किसी को नहीं मिली। इसके कुछ महीने बाद 29 नवंबर को एक शादी समारोह में महिला के बेटे बबलू ने प्रेमी से मां के बारे में पूछा तो उसने कहा कि अब वह कभी लौटकर नहीं आएगी। इस पर बब्लू ने पांच जनवरी को एसीपी के यहां शिकायत लेकर पहुंचा और सारी बात बताते हुए न्याय की गुहार लगाई। एसीपी के निर्देश पुलिस ने आरोपित को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पहले तो उसने इधर-उधर की बातें करके गुमराह करने की कोशिश की लेकिन शख्ती से पूछताछ करने पर पर टूट गया और रेशमा की हत्या कर शव दफनाने की बात कही। उसने बताया कि 7 बच्चों की मां रेशम उससे 12 साल बड़ी थी। इसके अलवा उसके संबंधं भी किसी और के साथ हो गए थे। इसी से पीछा छुड़ाने के लिए उसने ये कदम उठाया। आरोपित की बात सुनकर पुलिसकर्मियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। आरोपित की निशानदेही पर महिला का कंकाल बरामद कर लिया। उधर, इस मामले में एसीपी कृष्णकांत यादव ने बताया कि गोरेलाल को जेल भेज दिया गया है। वहीं, ग्रामीण की मानें तो बच्चों को छोड़कर प्रेमी संग रहने की जिद पर अड़ी रेशमा का घर में विवाद भी हुआ था।  

रूस की ओरेश्निक मिसाइल: यूक्रेन पर इस्तेमाल के बाद वैश्विक सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

कीव/मॉस्को रूस ने गुरुवार देर रात यूक्रेन पर किए गए हवाई हमलों में अपनी अत्याधुनिक नई हाइपरसोनिक ‘ओरेश्निक’ मिसाइल का इस्तेमाल किया है। कड़ाके की ठंड के बीच हुए इस हमले को रूस की सैन्य कार्रवाई में एक बड़ा और चिंताजनक कदम माना जा रहा है। रूसी रक्षा मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है। मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा, “रूसी सशस्त्र बलों ने उच्च-सटीकता वाले लंबी दूरी के जमीनी और समुद्री हथियारों से व्यापक हमला किया, जिसमें ओरेश्निक मोबाइल मीडियम-रेंज मिसाइल सिस्टम भी शामिल था।” हालांकि रूस ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ओरेश्निक मिसाइल ने यूक्रेन में किस स्थान को निशाना बनाया। यह एक साल से अधिक समय बाद ऐसा पहली बार है जब मॉस्को ने ओरेश्निक मिसाइल का उपयोग किया है। यह मिसाइल एक साथ कई वॉरहेड ले जाने में सक्षम है और इसमें पारंपरिक या परमाणु हथियार लगाए जा सकते हैं। क्या है ओरेश्निक मिसाइल? ओरेश्निक (Oreshnik) रूस द्वारा विकसित एक नई मध्यम-दूरी की हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) है। रूसी भाषा में 'ओरेश्निक' का अर्थ 'हेज़ल ट्री' (Hazel Tree) होता है। इस मिसाइल की मुख्य विशेषता इसकी हाइपरसोनिक स्पीड है। यह मिसाइल ध्वनि की गति से 10 गुना (Mach 10) से भी अधिक तेज गति से चल सकती है, जो लगभग 12,000 से 13,000 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसकी मारक क्षमता लगभग 3,000 से 5,500 किलोमीटर तक मानी जाती है। यानी यह लगभग पूरे यूरोप तक पहुँच सकती है और उसे अपनी चपेट में ले सकती है। एक साथ कई ठिकाने ध्वस्त करने में सक्षम यह मिसाइल MIRV (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicles) तकनीक से लैस है, जिसका अर्थ है कि एक ही मिसाइल हवा में अलग होकर कई अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ हमला कर सकती है। इतना ही नहीं यह मिसाइल पारंपरिक विस्फोटक और परमाणु हथियार, दोनों ले जाने में सक्षम है। यानी यह परमाणु विस्फोट कराने में सक्षम है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के अनुसार, अपनी अत्यधिक गति के कारण इस मिसाइल को वर्तमान की किसी भी वायु रक्षा प्रणाली द्वारा रोकना लगभग असंभव है। यह मिसाइल संभवतः रूस की पुरानी RS-26 Rubezh मिसाइल प्रणाली का एक उन्नत संस्करण है। ल्वीव में धमाके, अहम ढांचे को नुकसान रूस ने पहली बार इसका इस्तेमाल 21 नवंबर, 2024 को यूक्रेन के निप्रो (Dnipro) शहर पर हमले के लिए किया था। अब रूस ने यूक्रेन के पश्चिमी शहर ल्वीव (Lviv) क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के लिए फिर से इस मिसाइल का इस्तेमाल किया है। यूक्रेनी वायुसेना के वेस्टर्न एयर कमांड ने कहा कि मिसाइल करीब 13,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बैलिस्टिक मार्ग पर आगे बढ़ रही थी। यह गति आवाज़ की रफ्तार से लगभग 10 गुना अधिक है। रूस के मिसाइल बलों के प्रमुख के अनुसार, ओरेश्निक की रेंज इतनी है कि वह पूरे यूरोप तक पहुंच सकती है। पिछले महीने रूस ने अपने करीबी सहयोगी बेलारूस में ओरेश्निक मिसाइल सिस्टम की तैनाती का वीडियो भी जारी किया था।   यूरोप के लिए गंभीर खतरा रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबीहा ने कहा, “EU और NATO की सीमा के इतने करीब इस तरह का हमला पूरे यूरोपीय महाद्वीप की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। यह ट्रांस-अटलांटिक समुदाय के लिए एक परीक्षा है।” उन्होंने रूस की “लापरवाह कार्रवाई” पर कड़े जवाब की मांग की। उधर, रूस ने कहा कि यह हमला यूक्रेन द्वारा पिछले महीने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आवास को निशाना बनाने की कोशिश के जवाब में किया गया है। हालांकि, CIA और अमेरिकी अधिकारियों का आकलन है कि यूक्रेन ने पुतिन के किसी निजी निवास को निशाना नहीं बनाया था। यह दावा ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके दूत यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए बातचीत में जुटे हैं।

खिताबी मुकाबले में आमने-सामने होंगी एसजी पाइपर्स बनाम श्राची बंगाल टाइगर्स

रांची एसजी पाइपर्स और श्राची बंगाल टाइगर्स दो हफ्तों तक चले 12 मुकाबलों के बाद शनिवार को यहां होने वाले महिला हॉकी इंडिया लीग (एचआईएल) के फाइनल में आमने सामने होंगी। लीग जीतने वाली टीम को 1.50 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि मिलेगी जबकि उप विजेता को एक करोड़ रुपये दिए जाएंगे। तीसरे स्थान पर रहने वाली रांची रॉयल्स को 50 लाख रुपये मिलेंगे। फाइनल में पहुंची इन दोनों टीमों ने इस सत्र में अपना दबदबा बनाए रखा और दोनों का खेलने का तरीका काफी हद तक एक जैसा ही रहा है। एसजी पाइपर्स ने तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया जबकि श्राची बंगाल टाइगर्स ने दूसरा स्थान पक्का किया। दोनों टीमें लीग चरण में दो बार आमने-सामने हुईं और दोनों ही मौकों पर श्राची बंगाल टाइगर्स ने पेनल्टी शूटआउट में जीत हासिल की। पहले मैच में 3-3 की बराबरी के बाद श्राची बंगाल टाइगर्स ने शूटआउट में 4-3 से जीत हासिल की। दूसरे मैच में गोल रहित बराबरी के बाद उन्होंने शूटआउट में 7-6 से जीत हासिल की। हालांकि लीग के पूरे चरण के आंकड़े एसजी पाइपर्स के पक्ष में हैं। वह टूर्नामेंट में दूसरी सबसे ज्यादा गोल करने वाली टीम हैं जिसने 11 गोल किए हैं। उनसे बेहतर सिर्फ रांची रॉयल्स ने 13 गोल किए। और उनकी कप्तान नवनीत कौर ने अब तक टूर्नामेंट में चार गोल दाग दिए हैं। लोला रिएरा (तीन गोल) और सुनेलिता टोप्पो (दो गोल) ने भी योगदान दिया है, जबकि ज्योति सिंह और मारिया टेरेसा वियानाचे ने भी गोल किए हैं। पाइपर्स का लीग में डिफेंस में दूसरा सबसे अच्छा रिकॉर्ड भी है और उन्होंने ग्रुप चरण में सिर्फ नौ गोल खाए हैं। नवनीत कौर ने कहा, ‘‘यह हमारे लिए शानदार अभियान रहा है और फाइनल में पहुंचना हर खिलाड़ी की कड़ी मेहनत का नतीजा है। पिछले सत्र में तालिका में सबसे नीचे रहने से लेकर इस साल तालिका में शीर्ष तक पहुंचने तक, यह वापसी बहुत खास रही है। हमने इस दौरान साहसिक हॉकी खेली है और अब लक्ष्य यही है कि शानदार तरीके से टूर्नामेंट खत्म किया जाए।’’ श्राची बंगाल टाइगर्स ने अब तक टूर्नामेंट में सिर्फ सात गोल किए हैं जिनमें से पांच पेनल्टी कॉर्नर विशेषज्ञ ऑगस्टिना गोरजेलानी ने किए हैं। वंदना कटारिया टीम की कप्तान हैं और टीम में इस बड़े मुकाबले के लिए काफी अनुभवी खिलाड़ी मौजूद हैं।  

महिला की हत्या से मेरठ में बवाल: छावनी में तब्दील इलाका, अतुल प्रधान पर प्रशासन ने लगाई रोक

मेरठ यूपी के मेरठ के सरधना क्षेत्र के कपसाढ़ गांव में तनाव चरम पर है। रूबी की मां की हत्या के बाद परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार करने से साफ मना कर दिया है। गांव में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और पूरा इलाका छावनी में तब्दील हो गया है। ​परिजनों का आक्रोश प्रशासन के आश्वासनों पर भारी पड़ रहा है। पीड़ित परिवार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक तीन शर्तें पूरी नहीं होतीं, वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। उधर, पीड़िता के घर जा रहे सपा विधायक अतुल प्रधान को पुलिस ने रोक दिया।   परिजन और ग्रामीणों की मांग है कि पुलिस मुख्य आरोपियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजे।लापता लड़की को सकुशल वापस लाया जाए। साथ ही आरोपियों के अवैध निर्माण पर प्रशासन का बुलडोजर चलना चाहिए। ​घटनास्थल पर जिलाधिकारी डॉ वीके सिंह, डीआईजी डॉ विपिन टाडा समेत जिले के तमाम आला अधिकारी मौजूद हैं। पिछले कई घंटों से अधिकारियों और परिजनों के बीच बातचीत का दौर चल रहा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। अधिकारी परिवार को समझाने और कानून का पालन करने की अपील कर रहे हैं, जबकि ग्रामीण और परिजन 'न्याय नहीं तो अंतिम संस्कार नहीं' के नारे पर अड़े हैं। ​ गांव में भारी सुरक्षा बल तैनात ​किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए कपसाढ़ गांव में कई थानों की फोर्स और पीएसी तैनात कर दी गई है। गांव की गलियों में सन्नाटा है और पुलिस लगातार गश्त कर रही है। इलाके में व्याप्त तनाव को देखते हुए खुफिया विभाग भी सक्रिय है। ​प्रशासन कोशिश कर रहा है कि परिजनों को मनाकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराई जा सके, ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे। विधायक अतुल प्रधान को कपसाड जाने से रोका, पुलिस से धक्कामुक्की विधायक अतुल प्रधान को पुलिस फोर्स ने कपसाड गांव जाने से रोक दिया। सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान अपने समर्थकों के साथ कपसाड में दलित महिला की हत्या और बेटी के अपहरण के मामले में अंतिम संस्कार में शामिल होने गांव जा रहे थे।गंगनर पटरी के विधायक अतुल प्रधान और समर्थकों को पुलिस ने बैरिकेड लगाकर ब्लॉक कर दिया। इस दौरान पुलिस के साथ विधायक और उनके समर्थकों के धक्कामुक्की हुई। हालांकि फोर्स ने विधायक को आगे नहीं बढ़ने दिया। काफी विवाद और कहासुनी के बाद विधायक मौके पर ही धरने पर बैठ गए। इस दौरान काफी हंगामा हुआ। मां की फरसे से हत्या कर बेटी का कर लिया था अपहरण दरअसल, गुरुवार सुबह आठ बजे सुनीता, अपनी 21 साल की बेटी रूबी के साथ गन्ना छीलने खेत पर जा रही थीं। गांव के बाहर रजवाहा पुल पर गांव का रहने वाला पारस सोम ने अपने साथी सुनील और दो अन्य के साथ मिलकर मां-बेटी पर हमला कर रूबी का अपहरण कर लिया। रूबी की मां आरोपियों से भिड़ गई तो उनके सिर पर फरसा से वार कर दिया और आरोपी फरार हो गए। घायल महिला को लोगों ने निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां दोपहर में उनकी मौत हो गई। उधर, वारदात के बाद गांव में तनाव फैल गया। मृतका के बेटे नरसी की ओर से पारस सोम और सुनील को नामजद करते हुए कुछ अज्ञात पर मां की हत्या और बहन के अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया गया है।  

ट्रंप के बदले-बदले सुर: मोदी को लेकर 72 घंटे में क्यों बदला अमेरिका का रुख?

नई दिल्ली भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर हाल ही में अमेरिका की विदेश नीति पर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बारे में कहा था दुनिया यहां तक की अपने देश के साथ डील करने का उनका तरीका काफी अलग है। जयशंकर ने यह भी कहा था कि विदेश नीति इस तरह खुलेआम नहीं होती है, जिस तरीके से प्रेसिडेंट ट्रंप करते हैं। ट्रंप की विदेश नीति पर जयशंकर का यह बयान काफी सटीक बैठता है। ऐसा इसलिए क्योंकि वह विदेश नीति की हर बात खुलेआम बोलते हैं। कई मौकों पर तो देखा गया है कि किसी मुद्दे पर उनकी और उनकी सरकार के स्टैंड में विरोधाभासी होता है।   बीते तीन दिनों में भारत को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के तेवर तल्खी भरे देखे गए हैं। लेकिन उनकी ही सरकार के अधिकारी के बयान ट्रंप के दावों से मेल नहीं खाते हैं। आपको बता दें कि 6 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर अपने पुराने अंदाज में प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने संबंधों का जिक्र किया। ट्रंप ने दावा किया कि भारत पर लगाए गए कड़े टैरिफ (शुल्कों) के बाद पीएम मोदी ने उन्हें फोन किया और बेहद सम्मानजनक लहजे में बातचीत की। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि मोदी ने उनसे पूछा, "सर, क्या मैं आ सकता हूं?" ट्रंप यह दिखाना चाहते थे कि उनकी टैरिफ नीति काम कर रही है और दुनिया के बड़े नेता उनके सामने झुककर समझौता करने को तैयार हैं। हालांकि तीन दिन भी नहीं बीते और उनके दावों की पोल उनकी सरकार से जुड़े लोगों ने खोल दिया। आपको बता दें कि ट्रंप का यह बयान तब आया जब भारत पहले से ही अमेरिकी सामानों पर 50% टैरिफ का सामना कर रहा है। मोदी ने कॉल नहीं किया- सचिव का दावा इसके ठीक तीन दिन बाद, 9 जनवरी को अमेरिका के वाणिज्य सचिव हावर्ड लुटनिक ने एक पॉडकास्ट में पूरी कहानी ही पलट दी। लुटनिक ने खुलासा किया कि भारत और अमेरिका के बीच एक बड़ा व्यापारिक समझौता होने वाला था, लेकिन वह केवल इसलिए टूट गया क्योंकि पीएम मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को फोन नहीं किया। लुटनिक ने कहा, "सब कुछ तैयार था, लेकिन मैंने कहा कि सौदे को फाइनल करने के लिए मोदी को राष्ट्रपति को फोन करना होगा। भारतीय पक्ष इसके लिए असहज था, इसलिए मोदी ने कॉल नहीं किया।" लुटनिक के अनुसार, भारत ने वह ट्रेन मिस कर दी और अब अमेरिका ने इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देशों के साथ डील कर ली है। आखिर इतनी कंफ्यूज क्यों है US की विदेश नीति? इस विरोधाभास के पीछे कई कारण नजर आते हैं। डोनाल्ड ट्रंप विदेशी नेताओं के साथ अपने निजी संबंधों को हमेशा बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं ताकि वह अपने घरेलू वोटरों को यह दिखा सकें कि वह एक 'स्ट्रॉन्ग मैन' हैं। वहीं, हावर्ड लुटनिक जैसे उनके अधिकारी शुद्ध रूप से 'लेन-देन' की भाषा बोलते हैं। लुटनिक का बयान बताता है कि ट्रंप प्रशासन भारत को 'पहले आओ, पहले पाओ' की नीति पर डील कर रहा है। यानी जो पहले आएगा, उसे अच्छी डील मिलेगी और जो देरी करेगा, उस पर टैक्स बढ़ता जाएगा। अमेरिका चाहता है कि पीएम मोदी खुद फोन करके झुकें और समझौता करें, जिसे लुटनिक ने क्लोजर कॉल कहा। लेकिन भारत अपनी शर्तों पर झुकने को तैयार नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, भारत ने साफ कर दिया है कि वह किसी दबाव में डील साइन नहीं करेगा, खासकर तब जब अमेरिका उसे रूस के साथ संबंधों को लेकर धमका रहा हो। भारत का रुख क्या होगा? वाशिंगटन के इन विरोधाभासी बयानों ने भारत को सतर्क कर दिया है। जहां एक तरफ ट्रंप पीएम मोदी को ग्रेट फ्रेंड बताते हैं, वहीं उनकी नीतियां भारत के निर्यात को नुकसान पहुंचा रही हैं। भारत अभी भी रूस से सस्ते तेल की खरीद पर अड़ा है। अमेरिका के इस सख्त रुख के बीच, भारत अब चीन के साथ अपने सीमा विवाद को सुलझाने और व्यापारिक रिश्तों को फिर से संतुलित करने की कोशिश कर सकता है, जैसा कि हालिया कूटनीतिक हलचलों से संकेत मिले हैं।  

नायरा बनर्जी ने शेयर की कहानी, कैसे एक वीडियो कॉल ने बदल दी उनकी पूरी फिल्मी यात्रा

मुंबई  अभिनेत्री नायरा बनर्जी अपनी आने वाली फिल्म 'वन टू चा चा चा' को लेकर काफी चर्चाओं में है। यह फिल्म कॉमेडी, अफरातफरी और किरदारों से भरपूर मनोरंजन का जबरदस्त पैकेज है। इस फिल्म में अभिनेता आशुतोष राणा लीड रोल में हैं। आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में नायरा बनर्जी ने अपनी फिल्म, अनुभव और अभिनय सफर के बारे में खुलकर बात की। आईएएनएस से बात करते हुए नायरा बनर्जी ने कहा, "फिल्म की कहानी सुनते ही मैंने तुरंत इसका हिस्सा बनने की ठान ली थी। निर्देशक और लेखक अभिषेक ने मुझे वीडियो कॉल के जरिए पूरी कहानी सुनाई। उस समय मैं दुबई में थी, उन्होंने करीब दो घंटे तक कहानी इतनी ऊर्जा, भाव और उत्साह के साथ सुनाई कि मेरे होश उड़ गए।  मुझे कहानी की हर बारीकी और भावना को समझाया। उसी वक्त मैंने तय कर लिया कि मुझे यह फिल्म करनी है।" फिल्म के कास्ट के बारे में नायरा बनर्जी ने कहा, ''जब मैंने जानना चाहा कि कौन-कौन इसमें काम कर रहा है, तो मेरे लिए सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम आशुतोष राणा था, जो 'चाचा' के रोल में थे। मैंने उन्हें हमेशा गंभीर और सशक्त किरदारों में देखा है; ऐसे में इस नई भूमिका में उन्हें देखना बिल्कुल नया और ताजगी भरा अनुभव लगा।'' उन्होंने कहा, ''मुकेश तिवारी, अभिमन्यु सिंह, आनंद जोशी, ललित प्रभाकर और हर्ष मायर जैसे अनुभवी कलाकारों के साथ काम करना चुनौतीपूर्ण लेकिन सीखने वाला रहा। मेरे ज्यादातर सीन अभिमन्यु सिंह और आशुतोष राणा के साथ थे, जिनके सामने अपनी एक्टिंग बनाए रखना आसान नहीं था।'' नायरा बनर्जी ने अपने किरदार की खासियत के बारे में बताते हुए कहा, ''शूटिंग के पहले दिन से ही मुझे डांस करने का मौका मिला। मेरा डांस शेड्यूल कई दिनों तक चला। फिल्म का यह गाना 'इश्क ढिशूम' अब ट्रेंड कर रहा है और लोगों को बहुत पसंद आ रहा है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि इसका ऐसा जबरदस्त रिस्पॉन्स मिलेगा।'' नायरा बनर्जी ने आशुतोष राणा के साथ काम करने के अनुभव को साझा करते हुए कहा, "मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती बिहारी एक्सेंट था। मैंने पहले ऐसा रोल कभी नहीं किया था। लेकिन आशुतोष के साथ रोमांटिक सीन करते समय उस एक्सेंट में काम करना मेरे लिए बेहद मजेदार और प्यारा अनुभव साबित हुआ। सेट पर हर वक्त मजेदार माहौल रहता था। कोई ना कोई हमेशा मजाक करता रहता था और सभी एक-दूसरे की एक्टिंग देखकर हंसते रहते थे। कभी-कभी मुझे मुंह पर हाथ रखना पड़ता था ताकि शूटिंग के दौरान हंसी ना फूटे।"

ऑस्ट्रेलियन ओपन: निक किर्गियोस ने एकल से वापस लिया नाम, सिर्फ डबल्स खेलेंगे

नई दिल्ली ऑस्ट्रेलिया के निक किर्गियोस ने ऑस्ट्रेलियन ओपन एकल वर्ग से अपना नाम वापस ले लिया है। वह सिर्फ डबल्स मुकाबलों में हिस्सा लेंगे। डबल्स में किर्गियोस थानासी कोकिनाकिस के साथ जोड़ी बना सकते हैं। किर्गियोस ने शुक्रवार को अपने इंस्टाग्राम में लिखा, “मैंने इस साल सिर्फ ऑस्ट्रेलियन ओपन डबल्स पर ध्यान देने का फैसला किया है। मैं फिट हूं और कोर्ट पर वापस आ गया हूं, लेकिन 5-सेटर एक अलग चीज है और मैं अभी तक पूरी तरह से तैयार नहीं हूं। यह टूर्नामेंट मेरे लिए सब कुछ है, लेकिन मैं अपनी जगह किसी ऐसे व्यक्ति को देना चाहूंगा जो अपने पल को यादगार बनाने के लिए तैयार हो। मैं अगले साल वापस आऊंगा और मुकाबला करने के लिए उत्साहित रहूंगा। वहीं मिलते हैं।” निक ने 2025 में सिर्फ पांच मैच खेले थे। पिछले तीन सालों में सिर्फ छह प्रोफेशनल एकल मैच खेले हैं। पिछले महीने न्यूयॉर्क और दुबई में एग्जिबिशन मैचों की एक सीरीज के साथ उन्होंने आसानी से प्रतियोगिता में वापसी की, फिर उन्हें ब्रिस्बेन इंटरनेशनल के लिए वाइल्डकार्ड मिला, जहां मंगलवार को पहले राउंड में वह एलेक्जेंडर कोवासेविक से 6-3, 6-4 से हार गए। इसके अलावा, किर्गियोस और उनके डबल्स पार्टनर, थानासी कोकिनाकिस, बुधवार को ब्रिस्बेन में दूसरे राउंड में फ्रेंच जोड़ी सादियो डौम्बिया और फैबियन रेबोल से हार गए। किर्गियोस को पिछले कुछ समय में कई गंभीर चोटों का सामना करना पड़ा है। इससे उनका करियर प्रभावित हुआ है। उनकी रैंकिंग 673 पर आ गई है। पूर्व विंबलडन फाइनलिस्ट ने 2022 के बाद से सिर्फ एक ग्रैंड स्लैम मैच खेला है। उन्होंने ऑस्ट्रेलियन ओपन 2022 में मैथ्यू एबडेन और मैक्स परसेल को सीधे सेटों में हराकर थानासी कोकिनाकिस के साथ पुरुषों का डबल्स खिताब जीता था। 2022 विंबलडन फाइनल में नोवाक जोकोविच से हारने के बाद 30 साल के किर्गियोस की कलाई और घुटने की दो सर्जरी हुई है। ऑस्ट्रेलिया ओपन डबल्स से उन्हें धमाकेदार वापसी की उम्मीद है।  

ठंड–कोहरे का कहर, झारखंड के इस जिले में बच्चों की मौज, बढ़ी छुट्टियों की संख्या

रांची  झारखंड में ठंड का सितम जारी है। भीषण ठंड से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। वहीं इसके चलते जमशेदपुर में नर्सरी से 12वीं कक्षा तक के सभी सरकारी, निजी एवं अल्पसंख्यक विद्यालय 9 और 10 जनवरी तक बंद रहेंगे। यह अवकाश केवल छात्र-छात्राओं के लिए लागू होगा प्रशासन का कहना है कि शीतलहर और घने कोहरे के दौरान छोटे बच्चों और किशोरों के बीमार पड़ने का खतरा अधिक रहता है, इसलिए एहतियातन विद्यालयों को अस्थायी रूप से बंद किया गया है। प्रशासन के मुताबिक यह अवकाश केवल छात्र-छात्राओं के लिए लागू होगा। इस अवधि में शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों को नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित रहना अनिवार्य होगा। सभी कर्मचारियों को ई-विद्यावाहिनी पोर्टल पर अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी और विभागीय एवं गैर-शैक्षणिक कार्यों का निष्पादन करना होगा। प्रशासन के मुताबिक यदि किसी विद्यालय में पहले से प्री-बोर्ड परीक्षाएं निर्धारित हैं, तो स्कूल प्रबंधन अपने विवेक से परीक्षा आयोजित कर सकता है। ऐसे मामलों में परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी संबंधित विद्यालय प्रशासन की होगी।  

वेनेजुएला से ईरान तक ‘डीप स्टेट’ की गूंज, आखिर किसे कहते हैं डीप स्टेट

नई दिल्ली वेनेजुएला में फिलहाल अमेरिकी नियंत्रण है। वहां से उत्पादन होने वाले तेल पर भी अमेरिका का ही कब्जा है और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो अगवा करके रखे गए हैं। उनके खिलाफ अमेरिकी अदालत में मुकदमा चल रहा है। इसी बीच ईरान में अयातुल्लाह खामेनेई के शासन के खिलाफ आंदोलन चल रहे हैं। सीरिया में सरकार बदल गई है और अब अमेरिका से उसके रिश्ते बेहतर हैं। बांग्लादेश में फिलहाल शेख हसीना निर्वासित हैं और वहां अंतरिम शासक के तौर पर मोहम्मद युनूस ने कमान संभाल रखी है। वहीं वेनेजुएला में चर्चा है कि अमेरिका अपने ही किसी करीबी को सत्ता पर बिठाएगा। इन देशों में जिस तरह से नाटकीय घटनाक्रम के तहत सत्ताओं का परिवर्तन हुआ है। उससे एक बार फिर से डीप स्टेट की चर्चा तेज है। आखिर क्या है यह डीप स्टेट…   डीप स्टेट का आशय उस स्थिति से होता है, जब किसी देश की शासन व्यवस्था में बाहरी तत्वों या उनसे प्रेरित लोगों की घुसपैठ हो जाए। इसके अलावा डीप स्टेट उस स्थिति को भी कहा जाता है, जब किसी अन्य ताकतवर देश से प्रेरित लोग स्थानीय जनता को सरकार के खिलाफ उकसा दें और सत्ता परिवर्तन की स्थिति पैदा करें। डीप स्टेट नाम से ही आशय है कि जिसकी जड़ें गहरी हों। आमतौर पर डीप स्टेट को अमेरिका से जोड़कर देखा जाता है, जो अकसर दुनिया के तमाम देशों में इसलिए भी सरकारें बदलवाना चाहता है कि वे उसके हित में काम करें। ईरान में फिलहाल रजा पहलवी का नाम चर्चा में है, जो निर्वासित क्राउन प्रिंस के तौर पर देश से बाहर हैं। अभी जो आंदोलन ईरान की सत्ता के खिलाफ चल रहे हैं, उनमें रजा पहलवी का नाम भी उछल रहा है। पहलवी के अमेरिका से करीबी संबंध रहे हैं। इसलिए ईरान को लेकर भी डीप स्टेट की चर्चा हो रही है। डीप स्टेट का आशय किसी देश की सत्ता, खुफिया एजेंसियों और सैन्य बलों को प्रभावित करने से है। अकसर ऐसा उदारवादी मूल्यों को बढ़ावा देने के नाम पर किया जाता है। यह प्रचार किया जाता है कि कैसे सरकार अभिव्यक्ति की आजादी को समाप्त कर रही है और कट्टरता बढ़ रही है। इसके अतिरिक्त भ्रष्टाचार जैसे मसले भी मुद्दा बना दिए जाते हैं। कैसे डीप स्टेट बदलता है नैरेटिव इस संबंध में स्टीफन किन्ज़र की पुस्तक Overthrow: America's Century of Regime Change from Hawaii to Iraq विस्तार से प्रकाश डालती है। डीप स्टेट के कारनामों में थिंक टैंक, एनजीओ और पक्षपाती मीडिया का भी इस प्रकार प्रयोग किया जाता है कि देश में नैरेटिव बदले। आम लोगों में सरकार के प्रति धारणा बदले और वह आंदोलन की शक्ल ले ले। अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है, जब पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन के पश्चात इमरान खान ने ऐसे ही आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि अमेरिका के इशारे पर मेरी सरकार के खिलाफ पूरा विपक्ष और सेना एकजुट हुए हैं। फिर जिस तरह से आसिम मुनीर की अमेरिका से करीबी दिखी है, उसने भी ऐसे संदेहों को बल दिया है।  

योगी आदित्यनाथ सरकार की औद्योगिक नीति को मिला उद्योग जगत का भरोसा

लखनऊ में हिंदुजा ग्रुप की कंपनी अशोक लेलैंड का इलेक्ट्रिक वाहन संयंत्र शुरू योगी आदित्यनाथ सरकार की औद्योगिक नीति को मिला उद्योग जगत का भरोसा योगी सरकार के सहयोग से रिकॉर्ड समय में इस संयंत्र को तैयार किया जाना संभव हुआ : धीरज हिंदुजा  उत्तर प्रदेश बना हरित परिवहन और निवेश का नया केंद्र लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को वाहन निर्माता कंपनी अशोक लेलैंड के नवीन विनिर्माण संयंत्र के उद्घाटन के साथ ही वाहन निर्माण और औद्योगिक विकास की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई। यह संयंत्र विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन पर केंद्रित है, जिससे लखनऊ को हरित औद्योगिक मानचित्र पर एक नई पहचान मिलने जा रही है। अशोक लेलैंड के चेयरमैन धीरज हिंदुजा ने कहा कि योगी सरकार के सहयोग और प्रशासनिक तत्परता के कारण रिकॉर्ड समय  में इस संयंत्र को तैयार किया जाना संभव हो सका। योगी सरकार के ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ से निवेश को प्रोत्साहन उद्घाटन के अवसर पर अशोक लेलैंड के चेयरमैन धीरज हिंदुजा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में यह कंपनी का पहला विनिर्माण संयंत्र है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा कि औद्योगिक विकास और निवेश के लिए प्रदेश में एक सुदृढ़ और भरोसेमंद तंत्र तैयार किया गया है। आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, मजबूत कनेक्टिविटी, प्रभावी कानून व्यवस्था और जवाबदेह प्रशासन आज उत्तर प्रदेश की पहचान है जो उद्योगपतियों और निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। प्रदेश में निवेश के साथ ही इससे बड़ी संख्या में रोजगार का भी सृजन होगा। उन्होंने इस परियोजना को धरातल पर उतारने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्पष्ट नीति और मजबूत नेतृत्व के साथ कोई भी लक्ष्य दूर नहीं होता। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आज उत्तर प्रदेश ‘फियरलेस बिजनेस’, ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ट्र्स्ट ऑफ डूइंग बिजनेस’ के लिए जाना जाता है। उल्लेखनीय है कि अशोक लेलैंड की स्थापना वर्ष 1948 में हुई थी और आज कंपनी 15 देशों में भारतीय विनिर्माण क्षमता और तकनीकी सामर्थ्य का वैश्विक स्तर पर प्रतिनिधित्व कर रही है। निवेश के लिए स्थायित्व और भरोसे का माहौल धीरज हिंदुजा ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि रक्षा तंत्र की मजबूती और स्थायित्व से देश में निवेश का भरोसेमंद वातावरण बना है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच डी कुमारस्वामी के नेतृत्व में उद्योगों के लिए विकसित सकारात्मक माहौल की सराहना करते हुए कहा कि स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस और प्रभावी पहल की जा रही है। इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में देश लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। भविष्य की जरूरतों के अनुसार डिजाइन किया गया संयंत्र अशोक लेलैंड कंपनी के अनुसार लखनऊ का यह संयंत्र भविष्य को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। आधुनिक विनिर्माण तकनीक और डिजिटल प्रक्रियाओं के माध्यम से यहां तीव्र गति से इलेक्ट्रिक वाहनों का उत्पादन किया जा सकेगा।  स्थानीय समुदाय के लिए लाभ और सामाजिक पहल अशोक लेलैंड के चेयरमैन धीरज हिंदुजा ने कहा कि जहां भी अशोक लेलैंड का संयंत्र स्थापित होता है, वहां स्थानीय समुदाय को प्रत्यक्ष लाभ मिलता है। उत्तर प्रदेश में भी इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। उन्होंने कंपनी की रोड टू स्कूल पहल का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रदेश में सरकारी स्कूलों के 25 हजार से अधिक छात्रों को पोषण और शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।