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भिंड प्रशासन ने मनरेगा मजदूरों पर सख्ती, 70% मजदूरों को छोड़ा जाएगा, 84 हजार मजदूर प्रभावित

भिंड पंचायतों में फर्जी जॉब कार्ड बनवाकर मनरेगा की मजदूरी हड़पने वाले लोगों के खिलाफ प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। जिला पंचायत के माध्यम से सभी पंचायतों में सचिव और जीआरएस ने मजदूरों की ई-केवाइसी की जा रही है। जॉब कार्ड धारी मजदूर के आधार से उसका फेस मैच किए जा रहे हैं। दोनों का मिलान न होने पर संबंधित मजदूर को मनरेगा योजना की मजदूरी से बेदखल किया जा रहा है। 10 हजार मजदूर ही सही बता दें जिले में कुल डेढ़ लाख मजदूरों के मनरेगा के तहत पंचायतों में जॉब कार्ड बनाए गए है। इनमें से 84 हजार एक्टिव मजदूर है। एक माह में 38 हजार मजदूरों की केवाईसी हुई है, जिसमें से महज 10 हजार मजदूर ही सही पाए गए हैं। स्थिति यह है कि जिस पंचायत में 100 मजदूर दर्ज है, वहां केवाईसी के बाद 20 से 25 कामगार ही रह गए है।  30 जनवरी तक मनरेगा में कार्यरत सभी मजदूरों की केवाईसी का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। ऐसे में जानकारों का मानना है कि पंचायतों में सरपंच और सचिवों द्वारा बनाए फर्जी जॉबकार्ड धारी 70 प्रतिशत तक मजदूर इस योजना से बेदखल किए जा सकते हैं। इस तरह चल रही केवाईसी मनरेगा के तहत पंचायतों में किए जा रहे कार्य में जॉब कार्ड धारी मजदूर कार्य करने पहुंचते हैं तो सबसे पहले उनकी ई-केवाईसी की जा रही है। सार्वजनिक कार्यक्षेत्र पर पोर्टल से आधार लिंक कर मजदूर का फोटो खींचा जा रहा है, जो आधार में लगे फोटो से मैच किया जा रहा है। इतना ही नहीं कार्यक्षेत्र पर मजदूर की सुबह-शाम नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) एप से उपस्थिति दर्ज की जा रही है। जिससे मनरेगा में अब फर्जी मजदूर कार्य नहीं कर पाएंगे। पंचायतों में भी असल मजदूर ही रह गए हैं। अब मजदूर के खाते में जाएगी मजदूरी मनरेगा में प्रतिदिन की 261 रुपए मजदूरी दी जा रही है। ग्राम पंचायतों में चेक डेम, पीएम आवास योजना, पंचायत में पौधरोपण, पशु शेड निर्माण, शांतिधाम निर्माण, तालाब निर्माण, खेत तालाब, नाला निर्माण, सड़क निर्माण, स्कूल भवन का निर्माण, आंगनबाड़ी भवन का निर्माण, गोशाला, चारागाह विकास, बायोगैस निर्माण, सामुदायिक स्वच्छता, सीसी रोड निर्माण सहित आदि कार्य किए जा रहे हैं। इन कार्यों को मनरेगा के मजदूर करते हैं, लेकिन अभी तक पंचायत द्वारा मजदूर के दस्तावेज लगाकर सीधे खाते में पैमेंट डाल दिया जाता था। शासन की सख्ती के बाद अब मनरेगा में कार्य करने वाले मजदूर के आधार से लिंक खाते में ही मजदूरी भेजी जाएगी। मनरेगा मजदूरों की ई-केवाईसी की जा रही है। जो कार्य करने वाले मजदूर हैं, वही रह जाएंगे। केवाइसी पूरी होते ही मजदूरों की छटनी करेंगे। – सुनील दुबे, सीईओ, जिपं भिण्ड ये भी जानिए…. 1.5 लाख मजदूर मनरेगा में दर्ज। 84 हजार पंचायतों में हैं एक्टिव । 38 हजार की ई-केवाईसी पूरी। 28 हजार मजदूर नहीं आए। 30 जनवरी तक पूरी होगी जांच।

छत्तीसगढ़ सरकार की तैयारी: 2027 जनगणना पहली बार पूरी तरह डिजिटल तरीके से होगी

रायपुर   राज्य में जनगणना 2027 को लेकर तैयारियां तेज़ हो गई हैं। यह जनगणना देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। केंद्र सरकार ने गृह विभाग को बनाया नोडल राज्य स्तरीय जनगणना समन्वय समिति (SLCCC) की पहली बैठक मुख्य सचिव विकास शील की अध्यक्षता में 6 जनवरी आयोजित की गई, जिसमें जनगणना की रूपरेखा, कार्ययोजना और विभिन्न विभागों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि छत्तीसगढ़ में जनगणना के लिए गृह विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। गृह विभाग भारत सरकार, जनगणना निदेशालय और राज्य के सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करेगा। निदेशक जनगणना कार्तिकेय गोयल ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से जनगणना 2027 के डिजिटल रोडमैप, संगठनात्मक ढांचे और तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। डिजिटल गणना, मोबाइल ऐप से होगा डेटा संग्रह निदेशक ने बताया कि जनगणना 2027 पूरी तरह डिजिटल होगी। आंकड़ों का संग्रह मोबाइल ऐप के माध्यम से किया जाएगा, जबकि इसकी निगरानी और प्रबंधन के लिए वेब पोर्टल का उपयोग किया जाएगा। इस बार नागरिकों को सेल्फ एन्यूमरेशन यानी स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा भी दी जाएगी। केंद्र सरकार द्वारा राज्य को इसके लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि इस बड़े कार्य के लिए राज्य में लगभग 63 हजार प्रगणकों, पर्यवेक्षकों और अन्य प्रशासनिक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। जनगणना से पहले पूर्व-परीक्षण (प्री-टेस्टिंग) का कार्य नवंबर 2025 में कबीरधाम जिले के कुकदूर, महासमुंद जिले की महासमुंद तहसील के चयनित गांवों और रायपुर नगर निगम के एक वार्ड में सफलतापूर्वक किया जा चुका है। इन अनुभवों को मुख्य जनगणना प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। जनगणना 2027 दो चरणों में पूरी की जाएगी मुख्य सचिव ने बताया कि जनगणना 2027 दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बीच 30 दिनों की अवधि में मकान सूचीकरण और मकानों की गणना की जाएगी। इस अवधि का निर्धारण मानसून और स्कूल शिक्षा को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। दूसरे चरण में फरवरी 2027 में देशभर में एक साथ जनसंख्या गणना की जाएगी। इसे देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग को शैक्षणिक कैलेंडर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव विकास शील ने कहा कि जनगणना 2027 राज्य की भविष्य की नीतियों और विकास योजनाओं की मजबूत आधारशिला होगी। उन्होंने सभी विभागों से मिशन मोड में समन्वय के साथ कार्य करने और आम जनता से जनगणना प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग की अपील की। बैठक में अपर मुख्य सचिव गृह एवं राज्य नोडल अधिकारी (जनगणना) मनोज पिंगुआ, निदेशक जनगणना कार्य निदेशालय, एनआईसी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

नई रेललाइन तैयार, रामगंज मंडी-भोपाल ट्रैक पर ट्रायल रन की तारीख तय, जल्द शुरू होंगी ट्रेनें

भोपाल  मध्यप्रदेश की बहुप्रतीक्षित रामगंज मंडी- भोपाल रेल लाइन (bhopal ramganj mandi railway line) का काम अब अपने निर्णायक चरण में पहुंचता नजर आ रहा है। करीब 3035 करोड़ की लागत वाले प्रोजेक्ट में अब काम की रफ्तार काफी तेज है। रेलवे ने मार्च-2026 तक अलग-अलग सेक्शन में ट्रैक बिछाने और ट्रायल रन शुरू करने की डेडलाइन तय कर दी है। जिसके तहत जिले में खिलचीपुर से आगे राजगढ़ और ब्यावरा के साथ ही सोनकच्छ तक मार्च तक ट्रायल रन के लिए ट्रैक तैयार होगा। केवल सोनकच्छ से नरसिंहगढ़ और कुरावर वाला हिस्सा ही इसके बाद शेष रह जाएगा। जिसे भी सितंबर-अक्टूबर तक पूरा करने की योजना है। राजस्थान के हिस्से का काम पूरा बता दें कि राजस्थान में काफी पहले काम पूरा हो चुका है, लेकिन मप्र की सीमा में प्रशासकीय और रेलवे के ढीले रवैये के चलते काम पिछड़ा है। राजगढ़ जिले की बात करे यहां जमीन अधिग्रहण के कारण भी काम में देरी हुई है। यहीं कारण है कि वर्ष-2022 में पूरा होने वाला प्रोजेक्ट अभी तक अधूरा है। हालांकि अब काम निर्णायक मोड में पहुंचता नजर आ रहा है। अर्थवर्क नरसिंहगढ़ के एक सेक्शन को छोड़कर लगभग सभी जगह पूरा हो चुका है। अब केवल ट्रैक बिछाने के साथ ही विद्युतीकरण का काम शेष है। खिलचीपुर और ब्यावरा में बिछीं पटरियां कोटा मंडल में आने वाले रामगंज मंडी से ब्यावरा का काम मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य है। 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है। खिलचीपुर से करीब 12 किमी आगे तक पटरियां बिछाई जा चुकी है। इसके साथ ही ब्यावरा राजगढ़ सेक्शन में भी ट्रैक बिछाने का काम शुरू कर दिया गया है। वहीं भोपाल मंडल में ब्यावरा से आगे सोनकच्छ सेक्शन के लिए भी मार्च की डेडलाइन तय की है। जिसके तहत ब्यावरा से करीब चार किमी आगे तक पटरियां बिछाई जा चुकी है। उधर श्यामपुर से आगे अब कुरावर तक भी ट्रैक तैयार होने वाला है। ब्यावरा से सोनकच्छ तक ट्रैक तैयार होने के बाद करीब 80 फीसदी काम भोपाल मंडल का भी पूरा हो जाएगा। केवल नरसिंहगढ़ के बीच का करीब 22-25 किमी सेक्शन में ही काम अधिक बाकी है। राजगढ़ जिले में रहेंगे ये स्टेशन रेल लाइन पर जिले में ब्यावरा जंक्शन सहित छह स्टेशन रहेंगे। राजस्थान तरफ से खिलचीपुर के भोजपुर से एंट्री करने वाले ट्रैक पर पहला स्टेशन भोजपुर ही है। इसके बाद खिलचीपुर, राजगढ़, ब्यावरा जंक्शन, नरसिंहगढ़ और कुरावर शामिल है। इसके आगे श्यामपुर होते हुए हिरदाराम और भोपाल लाइन जुड़ेगी। ट्रैक की बात करे तो खिलचीपुर से राजगढ़ और एनएच-52 के सामानांतर और राजगढ़-ब्यावरा के बीच हाईवे को क्रॉस कर ब्यावरा पहुंचेगी। जहां से ब्यावरा से पांच किमी आगे मक्सी-रुठियाई ट्रैक के सामांतर और फिर ट्रैक पूर्व में अलग होकर करीब सात सौ मीटर आगे देवास हाईवे को क्रॉस करेगी, इसके बाद एनएच-46 के साइड में होते हुए कुरावर के पास फिर फोरलेन क्रॉस करेगी भोपाल रेल मंडल के डीआरएम पंकज त्यागी ने बताया कि मार्च तक ब्यावरा से सोनकच्छ तक ट्रायल ट्रैक तैयार कर लिया जाएगा। इस सेक्शन में अर्थवर्क लगभग पूरा हो चुका है। पटरियां बिछाने के साथ ही विद्युतीकरण किया जा रहा है। मार्च तक 80 प्रतिशत हमारा काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद केवल एक ही सेक्शन का काम रह जाएगा। जिसे भी अक्टूबर तक पूरा करा लिया जाएगा। कोटा मंडल के ट्रैक इंजीनियर गौरव मिश्रा का कहना है लगभग 90 फीसदी काम हमारा पूरा हो चुका है। अब केवल राजगढ़ ब्यावरा के बीच ट्रैक और कुछ हिस्सा खिलचीपुर से राजगढ़ के बीच बाकी है। जिसे भी मार्च तक पूरा कराने की डेडलाइन तय है।

गूगल – माइक्रोसॉफ्ट का पासवर्ड मुक्त लॉगिन सिस्टम, भारत में उत्पन्न हो सकती हैं समस्याएं

नई दिल्ली    पासवर्ड अब धीरे धीरे बीते दौर की चीज बनते जा रहे हैं. दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां यह मान चुकी हैं कि पासवर्ड न सिर्फ असुरक्षित हैं, बल्कि यूज़र एक्सपीरियंस के लिहाज से भी कमजोर पड़ चुके हैं. इसी वजह से Passkey और FIDEO बेस्ड पासवर्डलेस लॉगिन सिस्टम को तेजी से अपनाया जा रहा है. गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और कई बड़े प्लेटफॉर्म अब Passkey को सुरक्षित और फिशिंग प्रूफ विकल्प के तौर पर आगे बढ़ा रहे हैं. FIDEO अलायंस के मुताबिक पिछले दो सालों में पासकी सपोर्ट करने वाले अकाउंट्स की संख्या अरबों तक पहुंच चुकी है. गूगल ने साफ कहा है कि वह पासकी को भविष्य का डिफॉल्ट लॉगिन मानता है, जबकि माइक्रोसॉफ्ट नए यूज़र्स को पासवर्ड के बिना अकाउंट बनाने के लिए प्रेरित कर रहा है.  टेक इंडस्ट्री में यह एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि पहली बार पासवर्ड को हटाने की कोशिश स्केल पर हो रही है. Passkey के जरिए किसी भी अकाउंट को लॉगइन करना काफी आसान और सिक्योर है. पासकी सिस्टम का दावा है कि यह फिशिंग से लगभग पूरी तरह सुरक्षित है. इसमें पासवर्ड याद रखने या टाइप करने की जरूरत नहीं होती. लॉगिन आपके डिवाइस और बायोमेट्रिक पर आधारित होता है, जैसे फिंगरप्रिंट या फेस आईडी. यही वजह है कि सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स इसे अब तक का सबसे सुरक्षित ऑथेंटिकेशन तरीका मानते हैं. आसान शब्दों में समझें तो आपका फोन ही पासवर्ड की तरह काम करता है. भारत में अगल है स्थिति… लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब इस टेक्नोलॉजी को इंडिया जैसे देश में लागू करने की बात आती है. यहां टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सिर्फ पर्सनल फोन तक सीमित नहीं है. भारत में फोन शेयर करना आम है. एक ही डिवाइस घर के कई लोग इस्तेमाल करते हैं. सिम बदलना, फोन अपग्रेड करना या सेकेंड हैंड डिवाइस लेना भी सामान्य बात है. पासकी सिस्टम डिवाइस से डीपली इंटिग्रेटेड होता है. अगर फोन खो जाए, चोरी हो जाए या खराब हो जाए, तो यूज़र के सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है कि अकाउंट वापस कैसे मिलेगा. अभी तक पासकी रिकवरी का कोई एक जैसा और आसान तरीका सभी प्लेटफॉर्म पर मौजूद नहीं है. कई मामलों में रिकवरी प्रोसेस इतना मुश्किल होता है कि यूज़र खुद को लॉक आउट महसूस करने लगता है. यही वजह है कि यूएक्स रिसर्च और इंडस्ट्री रिपोर्ट्स में बार बार यह बात सामने आई है कि पासकी अपनाने में सबसे बड़ी रुकावट टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि अकाउंट रिकवरी है. जिन देशों में हर यूज़र के पास पर्सनल फोन, क्लाउड बैकअप और मल्टी डिवाइस सिंक मौजूद है, वहां यह सिस्टम आसानी से काम करता है. लेकिन भारत में यह मानकर चलना कि हर यूज़र के पास वही सुविधाएं हैं, एक बड़ी भूल हो सकती है. डिवाइस शेयरिंग भी बड़ा इश्यू है… एक और बड़ी चुनौती है डिवाइस शेयरिंग. अगर किसी परिवार में एक फोन पर कई लोगों के अकाउंट लॉगिन हैं, तो पासकी सिस्टम में प्राइवेसी और एक्सेस कंट्रोल को संभालना मुश्किल हो जाता है. इसी वजह से कई प्लेटफॉर्म मजबूरी में बैकअप के तौर पर पुराने और कम सुरक्षित लॉगिन तरीके भी छोड़ देते हैं, जिससे पासकी का असली सुरक्षा फायदा कमजोर पड़ जाता है. टेक कंपनियां यह मानती हैं कि पासकी भविष्य हैं, लेकिन इंडिया के लिए यह भविष्य बिना तैयारी के नहीं आ सकता. जब तक अकाउंट रिकवरी, ऑफलाइन बैकअप और डिवाइस लॉस जैसे हालात के लिए साफ और सरल समाधान नहीं दिए जाते, तब तक पासवर्डलेस सिस्टम कई यूज़र्स के लिए सुविधा की जगह परेशानी बन सकता है. आपको क्या करना चाहिए? अगर आप अपना फोन किसी के साथ शेयर नहीं करते हैं तो आप अपने फोन को Passkey के तौर पर यूज कर सकते हैं. Gmail अकाउंट से लेकर कई दूसरे अकाउंट में Passkey ऐड करने का ऑप्शन होता है. लेकिन अगर आपको पासवर्ड मैनेज ही करना है तो आप 1Pass जैसे ऐप्स यूज कर सकते हैं. हालांकि ये पेड ऐप है और इसके लिए आपको सब्सक्रिप्शन लेना होता है. 

भारत ने अमेरिकी टैरिफ पर भारी जीत हासिल की, सीफूड निर्यात में 21% की बढ़ोतरी

मुंबई   भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात ने 2024-25 में रिकॉर्ड उच्च मूल्य 62,408 करोड़ रुपये को छू लिया, जो 2023-24 के 60,523.89 करोड़ रुपये की तुलना में 3.11 प्रतिशत अधिक है. सरकार ने  यह जानकारी दी और बताया कि अमेरिकी शुल्क बढ़ाए जाने के बावजूद यह वृद्धि जारी है. मछली उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. 2013-14 में 95.79 लाख टन उत्पादन से बढ़कर 2024-25 में यह 197.75 लाख टन हो गया, जो 106 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है. अप्रैल 2025 से अमेरिका ने भारतीय समुद्री उत्पादों पर शुल्क बढ़ाकर कुल 58.26 प्रतिशत कर दिया, जिसमें झींगा (श्रीम्प) निर्यात प्रमुख है. भारत के लिए यह चुनौतीपूर्ण था क्योंकि अमेरिका को होने वाले झींगा निर्यात में लगभग 90 प्रतिशत हिस्सेदारी है. इसके बावजूद, भारत का समुद्री उत्पाद क्षेत्र लचीला और अनुकूल साबित हुआ. अप्रैल–अक्टूबर 2024 (पूर्व-शुल्क) और अप्रैल–अक्टूबर 2025 (पश्चात शुल्क) के आंकड़ों की तुलना में, निर्यात मूल्य में 21 प्रतिशत वृद्धि (35,107.6 करोड़ रुपये से 42,322.3 करोड़ रुपये) और मात्रा में 12 प्रतिशत वृद्धि (9.62 लाख टन से 10.73 लाख टन) हुई. वहीं, फ्रोज़न झींगा निर्यात में मूल्य में 17 प्रतिशत और मात्रा में 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. मछली पालन और संबंधित योजनाओं के माध्यम से 2014-15 से अब तक 74.66 लाख रोजगार अवसर (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष) उत्पन्न किए गए हैं. भारत वर्तमान में 350 से अधिक समुद्री उत्पादों को 130 देशों में निर्यात करता है. इसमें 62 प्रतिशत मूल्य मछली पालन से आता है. मूल्य वर्धित (वैल्यू एडेड) निर्यात ने पिछले पांच वर्षों में 56 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की, जो 4,863.40 करोड़ रुपये से बढ़कर 7,589.93 करोड़ रुपये हो गया. सरकार ने फिशरी सेक्टर में निवेश को बढ़ाया है. विभिन्न योजनाओं जैसे ब्लू रिवोल्यूशन, फिशरीज एंड एक्वाकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (FIDF), प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PMMKSSY) के तहत कुल 38,572 करोड़ रुपये के निवेश की मंजूरी दी गई या घोषणा की गई. मंत्रालय का कहना है कि इन उपायों और रणनीतियों की वजह से भारत वैश्विक स्तर पर उच्च मूल्य, प्रोसेस्ड समुद्री उत्पादों का हब बनता जा रहा है.

अशोकनगर की नेनशु का प्यार भरा फैसला, अनीता से शादी के लिए लड़का बनी, इंदौर में हुआ इश्क

अशोकनगर  प्रेम गली अति सांकरी, जा में दो न समाय… संत कबीरदास की इन पंक्तियों का अर्थ बड़ा ही गहरा है। इन पंक्तियों में संत कबीरदास कहते हैं कि प्रेम का मार्ग इतना संकरा यानी कि तंग होता है कि उसमें दो व्यक्ति 'मैं' और 'तुम' एक साथ नहीं रह सकते। यहां 'मैं' से उनका अर्थ अहंकार से है। सच है कि प्रेम के लिए आपको व्यक्तिगत पहचान से निकलकर एक होना पड़ता है। अशोकनगर में प्रेम की इसी पराकाष्ठा को पार करते हुए 25 साल की नेनशु ने अपनी पहचान ही बदल दी। नेनशु अब 'नेनशु' न होकर नमन बन गई हैं। कहानी बड़ी दिलचस्प है, आइए जानते हैं। 6 लाख खर्च, तीन ऑपरेशन हुए मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले की 25 वर्षीय नेनशु ने अपने प्यार को पाने के लिए लिंग परिवर्तन करवाया और अनीता से शादी कर ली है। उन्होंने छह लाख रुपये खर्च कर यह सर्जरी करवाई, जिसमें तीन जटिल ऑपरेशन शामिल थे। यह कहानी प्यार की ताकत और सामाजिक बेड़ियों को तोड़ने का एक उदाहरण है। नेनशु (नमन) अशोकनगर की पिपरई तहसील के बरखेड़ा गांव की रहने वाली हैं। नेनशु ने अपने प्यार को मुकम्मल करने के लिए समाज की रूढ़ियों से लड़ाई लड़ी और अपना जेंडर भी बदलवाया। अब नेनशु ‘नमन’ बनकर अपनी जीवनसंगिनी अनीता के साथ नई जिंदगी शुरू कर चुके हैं। इंदौर में हुई थी दोनों की मुलाकात उन्होंने बताया कि वह जन्म से लड़की थीं, लेकिन उनकी भावनाएं हमेशा लड़कों जैसी रहीं। यह उनके लिए एक आंतरिक संघर्ष था जिसे उन्होंने अपने प्यार के लिए दूर किया। करीब तीन साल पहले पढ़ाई के लिए इंदौर गई थीं, जहां सोशल मीडिया के जरिये असम की अनीता राजवर से उनकी पहचान हुई। यह मुलाकात उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। उनकी दोस्ती जल्द ही प्यार में बदल गई। दोनों एक-दूसरे के प्रति गहरा लगाव महसूस करने लगे। नौकरी करते हुए बचाए सर्जरी के लिए पैसे दोनों साथ रहना चाहते थे, लेकिन समाज में पति-पत्नी के रूप में पहचान पाने के लिए जेंडर चेंज सर्जरी ही एकमात्र रास्ता था। यह एक बड़ी चुनौती थी जिसे उन्होंने स्वीकार किया। दिल्ली के डाक्टरों ने सर्जरी पर करीब छह लाख रुपये खर्च बताया। यह राशि उनके लिए बहुत बड़ी थी। मध्यमवर्गीय परिवार के लिए यह बड़ी रकम थी, लेकिन नमन और अनीता ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने लक्ष्य को प्राप्त करने का दृढ़ निश्चय किया। दोनों ने इंदौर में छोटी-छोटी नौकरियां कीं, खर्च कम किए और तीन साल में पैसे जुटाये। यह उनकी लगन और समर्पण का प्रमाण है। पैसे पूरे होते ही दिल्ली में कराई सर्जरी पैसे पूरे होने पर नेनशु यानी नमन दिल्ली गई। यह उनके जीवन का एक निर्णायक कदम था। पांच महीनों में तीन जटिल सर्जरियां हुईं। यह प्रक्रिया शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत कठिन थी। दर्द और तनाव के बीच अनीता हर कदम पर साथ रहीं। उनका साथ नमन के लिए बहुत महत्वपूर्ण था। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद नेनशु आधिकारिक रूप से ‘नमन’ बन गई है। यह उनके नए जीवन की शुरुआत है।

EPFO का बड़ा फैसला, अब UPI के जरिए आसानी से निकाल सकेंगे PF का पैसा

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने लाखों कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव किया है. अब PF खाते से पैसा निकालने के लिए लंबे फॉर्म और बैंक वेरिफिकेशन की झंझट नहीं रहेगी. नया नियम UPI आधारित निकासी को संभव बनाता है, जिससे सेकंडों में पैसा सीधे खाते में ट्रांसफर होगा. यह सुधार खासकर सैलरीड क्लास और मध्यम वर्ग के लिए राहत है, जो इमरजेंसी में PF पर निर्भर रहते हैं. NPCI के साथ साझेदारी से शुरू हुई यह सुविधा डिजिटल इंडिया की दिशा में एक अहम कदम है. अब तक PF निकालने की प्रक्रिया बेहद लंबी और पेपरवर्क से भरी होती थी. कर्मचारी को अलग-अलग फॉर्म भरने पड़ते थे, बैंक वेरिफिकेशन और कई स्तर की जांच से गुजरना पड़ता था. इस कारण निकासी में कई बार हफ्तों का इंतजार करना पड़ताथा. यही वजह थी कि EPFO ने तकनीकी बदलाव की ओर कदम बढ़ाया और UPI को PF निकासी से जोड़ने का फैसला किया. नए नियम से कर्मचारियों को सबसे बड़ा फायदा समय की बचत का होगा. अब मेडिकल खर्च, बच्चों की पढ़ाई या शादी जैसे अचानक आने वाले खर्चों में PF तुरंत मददगार बनेगा.पेपरवर्क खत्म होने से क्लेम रिजेक्शन की संभावना भी घटेगी. पारदर्शिता बढ़ेगी क्योंकि पैसा सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में जाएगा. यह सुविधा PF को बैंक खाते जितना लिक्विड बना देगी. UPI आधारित निकासी NPCI के सहयोग से शुरू की गई है. शुरुआत BHIMUPI से होगी और धीरे-धीरे Paytm, PhonePe, GPay जैसे लोकप्रिय ऐप्स भी जुड़ेंगे. RBI की गाइडलाइन के अनुसार, सामान्य ट्रांजैक्शन की लिमिट ₹1 लाख प्रतिदिन होगी, जबकि मेडिकल, एजुकेशन और IPO से जुड़े मामलों में यह सीमा ₹5 लाख तक बढ़ाई जाएगी. इससे सुरक्षा और दुरुपयोग रोकने की गारंटी मिलेगी. लेबर मिनिस्टर मनसुख मंडाविया ने कहा कि यह बदलाव कर्मचारियों को पेपरवर्क से मुक्त करेगा और क्लेम रिजेक्शन कम करेगा. उद्योग जगत के विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम डिजिटल इंडिया की रणनीति को मजबूत करेगा और कर्मचारियों को वित्तीय आत्मनिर्भरता देगा. फिनटेक सेक्टर के लिए भी यह एक बड़ा अवसर है क्योंकि UPI प्लैटफॉर्म पर PF निकासी जुड़ने से डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम और व्यापक होगा. EPFO ने संकेत दिया है कि शुरुआत छोटे अमाउंट से होगी और धीरे-धीरे बड़े अमाउंट पर भी यह सुविधा लागू होगी. कर्मचारियों को EPFOऐप पर अपनी UPI ID लिंक करनी होगी और KYC अपडेट रखना होगा. आने वाले समय में यह सुधार PF को रिटायरमेंट प्लानिंग का और भी मजबूत स्तंभ बना देगा.

DRDO ने KK रेंज में किया MPATGM मिसाइल का सफल परीक्षण, मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल पर काम

नई दिल्ली भारत की रक्षा तकनीक में एक और बड़ी उपलब्धि. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 11 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र के अहिल्या नगर के KK रेंज में मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) का सफल फ्लाइट टेस्ट किया. यह मिसाइल टॉप अटैक मोड में चलते हुए टारगेट (मूविंग टैंक) को मारने में पूरी तरह सफल रही. यह भारत की सेना के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह आधुनिक मुख्य युद्ध टैंकों (Main Battle Tanks) को आसानी से नष्ट कर सकती है. MPATGM मिसाइल क्या है और इसमें क्या खास है? MPATGM एक तीसरी पीढ़ी की फायर एंड फॉरगेट (Fire & Forget) मिसाइल है. इसका मतलब है कि सैनिक मिसाइल छोड़ने के बाद उसे गाइड नहीं करना पड़ता—मिसाइल खुद ही लक्ष्य को ढूंढकर मारती है. यह मिसाइल बहुत हल्की है, जिसे एक सैनिक आसानी से कंधे पर उठाकर ले जा सकता है. मुख्य विशेषताएं     टॉप अटैक मोड: मिसाइल टैंक के ऊपर से (टॉप) हमला करती है, जहां टैंक की सबसे कमजोर जगह होती है (टैंक का ऊपरी हिस्सा पतला होता है).     इमेजिंग इन्फ्रारेड (IIR) होमिंग सीकर: दिन और रात दोनों में काम करती है. यह थर्मल इमेजिंग से टारगेट को देखती है.     टैंडम वॉरहेड: दो विस्फोटक हेड्स—पहला टैंक के रिएक्टिव आर्मर को तोड़ता है, दूसरा मुख्य बॉडी को नष्ट करता है. आधुनिक टैंकों को भी हरा सकती है.     ऑल इलेक्ट्रिक कंट्रोल सिस्टम: बहुत तेज और सटीक.     उच्च प्रदर्शन साइटिंग सिस्टम: सैनिक को टारगेट साफ दिखाई देता है.     प्रोपल्शन सिस्टम: तेज और दूर तक मार करने में सक्षम.     लॉन्च तरीका: ट्राइपॉड (तीन पैरों वाला स्टैंड) या सैन्य वाहन से लॉन्च की जा सकती है. इस टेस्ट में क्या हुआ? DRDO की हैदराबाद स्थित डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL) ने इस टेस्ट को अंजाम दिया. टारगेट के रूप में एक थर्मल टारगेट सिस्टम इस्तेमाल किया गया, जिसे जोधपुर की डिफेंस लेबोरेटरी ने बनाया था. यह सिस्टम एक चलते हुए टैंक की तरह दिखता और महसूस होता है. मिसाइल ने टॉप अटैक मोड में चलते टारगेट को सटीक निशाना लगाकर सफलतापूर्वक नष्ट किया. इस मिसाइल को किस-किसने बनाया? यह पूरी तरह स्वदेशी है. DRDO की कई लैबोरेटरीज ने मिलकर इसे विकसित किया…     रिसर्च सेंटर इमरत (RCI), हैदराबाद – सीकर और गाइडेंस     टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL), चंडीगढ़ – वॉरहेड टेस्टिंग     हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (HEMRL), पुणे – विस्फोटक सामग्री     इंस्ट्रूमेंट्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (IRDE), देहरादून – साइटिंग सिस्टम उत्पादन पार्टनर: भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL). रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, इंडस्ट्री और पार्टनर्स को बधाई दी. उन्होंने कहा कि यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. DRDO चेयरमैन डॉ. समीर वी. कमत ने कहा कि यह सफल परीक्षण हथियार प्रणाली को भारतीय सेना में शामिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. क्यों महत्वपूर्ण है यह टेस्ट? भारतीय सेना को आधुनिक एंटी-टैंक हथियार मिलेगा, जो दुश्मन के टैंकों (जैसे चीन या पाकिस्तान के) को आसानी से रोक सके. टॉप अटैक क्षमता से टैंक के सबसे मजबूत रिएक्टिव आर्मर को भी पार कर सकती है. फायर एंड फॉरगेट से सैनिक सुरक्षित रहते हुए हमला कर सकता है.  यह आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा है—अब भारत विदेशी मिसाइलों पर निर्भर नहीं रहेगा. यह सफलता DRDO की लगातार बढ़ती क्षमता को दिखाती है. जल्द ही MPATGM भारतीय सेना में शामिल होकर देश की रक्षा को और मजबूत बनाएगी. 

भारत में बिटक्वाइन निवेश पर सरकार की सख्ती, 5 नए नियमों की घोषणा

दिल्ली भारत में बिटकॉइन और क्रिप्टो ट्रेडिंग करने वालों के लिए सरकार ने 5 सख्त नियम लागू कर दिए हैं. FIU-IND के निर्देशों के तहत अब लोकेशन ट्रैकिंग, लाइव सेल्फी KYC, VPN पर रोक, फंड्स के स्रोत की जानकारी और बेनेफिशियरी डिटेल अनिवार्य होगी. नियमों के उल्लंघन पर अकाउंट फ्रीज हो सकता है. भारत में बिटक्वाइन या क्रिप्टो ट्रेडिंग करने वालों की अब खैर नहीं है. भारत में बिटकॉइन (Bitcoin), एथेरियम (ETH) या अन्य किसी भी क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने वालों के लिए सरकार और वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-IND) ने 5 सख्त नियमों को लागू कर दिया है. ये नियम इसलिए लागू किए गए हैं, ताकि देश में मनी लॉन्ड्रिंग और ऑनलाइन फ्रॉड को रोकने के लिए क्रिप्टो एक्सचेंजों (Crypto Exchanges) पर नकेल कसी जा सके. अब किसी भी भारतीय एक्सचेंज (जैसे WazirX, CoinDCX, CoinSwitch) या भारत में रजिस्टर्ड विदेशी एक्सचेंज पर ट्रेडिंग करना पहले जैसा आसान नहीं रहा. लोकेशन ट्रैकिंग सबसे बड़ा बदलाव ‘लोकेशन’ को लेकर है. अब जब भी आप किसी क्रिप्टो ऐप में लॉगिन करेंगे, तो ऐप आपसे आपकी Live Location का एक्सेस मांगेगा. यदि आप लोकेशन एक्सेस नहीं देते हैं या आप भारत की सीमा से बाहर (IP Address) पाए जाते हैं, तो आपका अकाउंट फ्रीज हो सकता है. सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना कि यूजर भारत के नियमों के दायरे में है. लाइव सेल्फी अब सिर्फ आधार कार्ड या पैन कार्ड अपलोड करना अब काफी नहीं है. केवाईसी (KYC) को और सख्त बनाते हुए अब ‘Liveness Check’ अनिवार्य कर दिया गया है. अब आपको ऐप पर अपनी लाइव सेल्फी खींचनी होगी और कई बार वीडियो वेरिफिकेशन भी देना पड़ सकता है. यह कदम फर्जी अकाउंट्स को बंद करने के लिए उठाया गया है. VPN का इस्तेमाल प्रतिबंधित अक्सर ट्रेडर अपनी पहचान छिपाने के लिए VPN (Virtual Private Network) का इस्तेमाल करते है. नए नियमों के मुताबिक, अगर सिस्टम ने डिटेक्ट किया कि आप VPN का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो एक्सचेंज को आपका ट्रांजैक्शन तुरंत ब्लॉक करने का आदेश है. फंड्स का स्रोत अगर आप एक निश्चित सीमा (जैसे 50,000 रुपये या उससे अधिक) से ज्यादा का निवेश करते हैं, तो आपको यह बताना होगा कि यह पैसा कहां से आया है. एक्सचेंज आपसे बैंक स्टेटमेंट या सैलरी स्लिप मांग सकता है. बेनेफिशियरी की जानकारी क्रिप्टो ट्रांसफर के नियमों (Travel Rule) को कड़ाई से लागू किया जा रहा है. अगर आप अपने वॉलेट से किसी और के वॉलेट में क्रिप्टो भेज रहे हैं, तो आपको सामने वाले (रिसीवर) का नाम, पता और वॉलेट डीटेल्स एक्सचेंज को देनी होंगी. बिना पूरी जानकारी के ट्रांजैक्शन फेल हो जाएगा.

ICMR का बड़ा खुलासा, 700 सडन डेथ मामलों पर रिसर्च ने कोविड वैक्सीन को लेकर भ्रांतियों को नकारा

भोपाल   देश में कोविड वैक्सीन के बाद अचानक मौतों (सडन डेथ) को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं. सवाल ये कि क्या केविड-19 वैक्सीन और सडन डेथ के बीच कोई कनेक्शन है? इन सवालों पर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के महानिदेशक और केंद्रीय अनुसंधान विभाग के सचिव डॉ. राजीव बहल ने रिसर्च आधारित आंकड़ों के साथ स्थिति स्पष्ट की है. उन्होंने साफ कहा, '' कोविड वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और इससे मृत्यु का खतरा नहीं, बल्कि गंभीर कोविड में मौत की संभावना 90 प्रतिशत तक कम हुई है.'' 700 अचानक मौत के मामलों पर रिसर्च ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल के अनुसार, '' आईसीएमआर द्वारा की गई केस-कंट्रोल स्टडी में सामने आया कि जिन लोगों ने वैक्सीन ली थी, उनमें अचानक मृत्यु का जोखिम उन लोगों की तुलना में 50 प्रतिशत कम था, जिन्होंने वैक्सीन नहीं ली थी. यह अध्ययन 700 सडन डेथ मामलों पर आधारित था, जिसने वैक्सीन को लेकर फैल रही भ्रांतियों को काफी हद तक खारिज किया है. कोई भी वैक्सीन काफी रिसर्च के बाद बनाई जाती है जिसमें साइड इफेक्ट व एफेकेसी पर खासा ध्यान दिया जाता है, ऐसा हर देश में होता है. आप अगर देखें तो देश में कोविडशील्ड और कोवैक्सीन ने कई लाख लोगों की जान बचाई है'' साइड इफेक्ट्स को लेकर फिर हुईं कई रिसर्च आईसीएमआर महानिदेशक ने कहा, '' वैक्सीन को लेकर शुरुआत में कुछ रेयर साइड इफेक्ट थे पर अब तो कोविड भी खत्म हो चुका है. लेकिन लोगों ने कई तरह से चीजों को वैक्सीन के साथ जोड़ लिया और कहने लगे कि ये वैक्सीन की वजह से है. इसके बाद हमने कोविड वैक्सीन को लेकर फिर कई तरह की रिसर्च की, जिसमें 700 से ज्यादा अचानक मौत के मामलों पर भी रिसर्च की गई. सडन डेथ और वैक्सीन के बीच कोई वैज्ञानिक संबंध नहीें था.'' एम्स ने भी की थी सडन डेथ पर रिसर्च इससे पहले ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने भी युवाओं में बढ़ते सडन डेथ व हार्ट अटैक के मामलों पर रिसर्च की थी. इसमें भी कोविड वैक्सीन और सडन डेथ पर फोकस किया गया. हालांकि, यहां भी रिसर्च में साफ कहा गया कि वैक्सीन और सडन डेथ के मामलों में कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं था. रिसर्च में बताया गया कि युवाओं में अचानक मौत का सबसे बड़ा कारण कोरोनरी आर्टरी डिसीज यानी ह्रदय रोग हैं. सडन डेथ के मामलों में बढ़ोत्तरी को लेकर कहा गया कि ये युवाओं की खराब होती लाइफ स्टाइल का नतीजा है. पब्लिक हेल्थ को लेकर चल रही खास रिसर्च आईसीएमआर देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के लिए दो बड़े प्रोजेक्ट एलाइड और टैरिफ पर काम कर रहा है. एलाइड स्कीम 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए है, जबकि टैरिफ प्रोजेक्ट शून्य से 18 वर्ष तक के बच्चों और किशोरों पर केंद्रित है. इन प्रोजेक्ट्स के तहत स्वस्थ लोगों के हीमोग्लोबिन, बायोकेमेस्ट्री और अन्य हेल्थ पैरामीटर्स का व्यापक डेटा एकत्र किया जा रहा है, जिससे भारत की विविध जनसंख्या के अनुरूप नई स्वास्थ्य नीतियां बनाई जा सकें. डॉ. बहल के अनुसार, '' इन अध्ययनों के लिए देश के हर क्षेत्र जैसे उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और मध्य भारत से एक-एक साइट चुनी गई है, जिससे खान-पान और जीवनशैली की विविधता को सही तरीके से दर्शाया जा सके. एम्स भोपाल का पीडियाट्रिक्स विभाग भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा है और अगले दो वर्षों में इसके नतीजे सामने आएंगे.'' बेअसर साबित हो रहीं एंटीबायोटिक दवाएं इस रिसर्च के साथ ही आईसीएमआर डीजी ने एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस (एएमआर) को देश के लिए गंभीर खतरा बताया. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा, '' इसे लेकर कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने भी लोगों से अपील की है. एंटीबायोटिक का ओवरयूज और मिसयूज यानी जरूरत न होने पर और गलत तरीके से इस्तेमाल बैक्टीरिया को मजबूत बना रहा है. आज आम सर्दी-खांसी में भी लोग बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक ले लेते हैं, जिससे बैक्टीरिया रेजिस्टेंस विकसित कर लेते हैं. इसका नतीजा यह है कि यूटीआई, निमोनिया जैसी सामान्य बीमारियों में भी दवाएं बेअसर होने लगी हैं. उन्होंने साफ संदेश दिया कि एंटीबायोटिक केवल डॉक्टर की सलाह पर, सही खुराक और तय अवधि तक ही ली जानी चाहिए. डाक्टरों की रिसर्च में कम रुचि, चिंता का विषय डॉ. बहल ने मेडिकल क्षेत्र में रिसर्च को मजबूत करने के लिए डॉक्टरों को पीएचडी के लिए प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया. उन्होंने बताया कि अमेरिका में हर 100 में से तीन डॉक्टर पीएचडी करते हैं, जबकि भारत में यह संख्या बहुत कम है. यह चिंता का विषय है. इसे बढ़ाने के लिए आईसीएमआर ने एम्स, पीजीआई जैसे संस्थानों के युवा फैकल्टी को पीएचडी के लिए ग्रांट और रजिस्ट्रेशन की सुविधा दी है. उनका मानना है कि यदि 10-20 प्रतिशत मेडिकल फैकल्टी भी पीएचडी करती है, तो देश में मेडिकल रिसर्च को नई दिशा मिलेगी. कैंसर के अर्ली डिटेक्शन और इम्यून थेरेपी पर फोकस डॉ. बहल ने बताया कि कैंसर को लेकर आईसीएमआर की प्राथमिकता अर्ली डिटेक्शन है. डॉ. बहल ने कहा, '' यदि कैंसर शुरुआती चरण में पकड़ में आ जाए, तो इसके पूरी तरह ठीक होने की संभावना बहुत अधिक होती है. देर से पता चलने पर मृत्यु दर बढ़ जाती है.इलाज के क्षेत्र में इम्यून थेरेपी पिछले एक दशक की बड़ी उपलब्धि है. इसमें मोनोक्लोनल एंटीबॉडी और कार-टी सेल जैसी तकनीकें शरीर के इम्यून सिस्टम को कैंसर सेल पहचानने और नष्ट करने के लिए प्रशिक्षित करती हैं. इसके साथ ही कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए नई जांच विधियों पर भी काम चल रहा है.''