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देश के छोटे शहरों में अपार प्रतिभा मौजूद : सिद्धांत चतुर्वेदी

मुंबई,  बॉलीवुड अभिनेता सिद्धांत चतुर्वेदी का कहना है कि देश के छोटे शहरों में अपार प्रतिभा मौजूद है, लेकिन इंडस्ट्री की व्यवस्था और काम करने के तरीकों की वजह से कई लेखक अपनी आवाज़ इंडस्ट्री तक पहुँचा नहीं पाते हैं।सिद्धांत चतुर्वेदी ने हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान बॉलीवुड के एक ऐसे मुद्दे पर खुलकर बात की, जिस पर अक्सर पर्दे के पीछे ही चर्चा होती है। सिद्धांत चतुर्वेदी ने छोटे शहरों से आने वाले लेखकों को इंडस्ट्री में मिलने वाली सीमित पहुँच और हिंदी सिनेमा में प्रामाणिक भारतीय कहानियों की कमी पर विशेष ज़ोर दिया। सिद्धांत ने कहा, "देश के छोटे शहरों में अपार प्रतिभा मौजूद है, लेकिन इंडस्ट्री की व्यवस्था और काम करने के तरीकों की वजह से कई लेखक अपनी आवाज़ इंडस्ट्री तक पहुँचा ही नहीं पाते। मैं समझता हूँ, यदि हिंदी सिनेमा को सच में आम भारतीय दर्शकों से जुड़ना है, तो उसे अपने पारंपरिक दायरों से बाहर निकलना होगा।" सिद्धांत चतुर्वेदी ने कहा कि लेखकों को अभी भी उतनी पहुँच नहीं मिल रही, जितनी उन्हें मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा, "हमें सिर्फ 'मासी' सिनेमा ही नहीं, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों से आई 'लापता लेडीज़' जैसी फिल्में भी चाहिए। हालांकि उन कहानियों को लिखने वाले लोगों को मौका नहीं मिलता, क्योंकि इंडस्ट्री अभी भी मुंबई के नाम पर जूहू, बांद्रा या ज्यादा से ज्यादा अंधेरी तक ही सिमटी हुई है।" पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान सिद्धांत ने यह भी कहा कि मेनस्ट्रीम हिंदी सिनेमा और दर्शकों के बीच धीरे-धीरे एक दूरी बनती जा रही है, जिसका बड़ा कारण भाषा और सांस्कृतिक जुड़ाव का अभाव है।उन्होंने कहा,"यदि भोपाल, ग्वालियर, बलिया या बनारस से कोई लेखक मुंबई आता है, तो मुझे नहीं लगता कि उसे आसानी से इंडस्ट्री में जगह मिलेगी और इसकी वजह है उसका अंग्रेज़ी न बोल पाना।" सिद्धांत ने भाषाई मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए ख़ास तौर से आज की युवा पीढ़ी, यानी कि जेन-ज़ी की काफी तारीफ़ की। सिद्धांत के अनुसार ये जेनेरेशन काफी समझदार है और तुरंत पहचान लेती है कि कौन सी कहानी दिल से लिखी गई है या सिर्फ फॉर्मूले के तहत बनाई गई है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के बलिया में जन्मे सिद्धांत चतुर्वेदी खुद एक आउटसाइडर रहे हैं और 'गली बॉय' से अपने करियर की शुरुआत करते हुए 'गहराइयाँ', 'खो गए हम कहां' और 'धड़क 2' जैसी फिल्मों में अलग-अलग और चुनौतीपूर्ण किरदार निभाकर अपनी अलग पहचान बनाई है। ऐसे में इंडस्ट्री में बिना किसी गॉडफादर के कदम रखने का संघर्ष वह भली-भांति समझते हैं, और यही वजह है कि वह अक्सर सच्चाई और गहराई से जुड़ी कहानियों का समर्थन करते नज़र आते हैं। सिद्धांत चतुर्वेदी आने वाले समय में भंसाली प्रोडक्शंस की 'दो दीवाने शहर में' और वी. शांताराम बायोपिक में नज़र आनेवाले हैं। हालांकि उनके प्रोजेक्ट्स के चुनाव से ये बात पूरी तरह साफ है कि वह सिर्फ ग्लैमर नहीं, बल्कि मायने रखने वाली कहानियों का हिस्सा बनना चाहते हैं, विशेष रूप से ऐसी कहानियाँ, जो भारत की असली आवाज़ को सामने लाएँ।  

पंजाब में कड़ाके की ठंड के बीच स्कूलों का बदलेगा समय?

लुधियाना. पंजाब में कड़ाके की ठंड और घनी धुंध के प्रकोप ने जनजीवन के साथ शिक्षा विभाग की गतिविधियों की रफ्तार पर रोक लगानी शुरू कर दी है। मौसम के बिगड़ते मिजाज और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए जहां एक ओर राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं और अधिकारियों के महत्वपूर्ण ओरिएंटेशन प्रोग्राम को टाल दिया गया है, वहीं दूसरी ओर अध्यापक संगठनों ने सुबह की जानलेवा धुंध से बचाव के लिए स्कूलों के समय में तुरंत बदलाव की आवाज उठाई है। पंजाब के कई हिस्सों में विजीबिलिटी शून्य होने के कारण सड़कों पर बढ़ते खतरों ने अभिभावकों और अध्यापकों की चिंता को बढ़ा दिया है। प्रचंड ठंड का सीधा असर खेल के मैदानों पर भी दिखाई दिया है। डायरैक्टर स्कूल एजुकेशन पंजाब के स्पोर्ट्स विभाग ने लुधियाना जिले में आयोजित होने वाली 69वीं इंटर-डिस्ट्रिक्ट प्राइमरी स्कूल खेलों के कार्यक्रम में बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। विभाग द्वारा जारी ताजा निर्देशों के अनुसार 16 से 22 जनवरी तक होने वाली इन राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। विभाग के उच्च अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में जारी कड़ाके की ठंड और छोटे बच्चों की सेहत व सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन खेलों को हाल की घड़ी के लिए मुल्तवी करना ही उचित समझा गया है। डायरेक्टर ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर सभी जिलों को सूचित कर दिया है। स्कूलों का समय 10 से 3 बजे तक करने की मांग मास्टर कैडर यूनियन ने प्रदेश में बढ़ रही शीत लहर और शून्य दृश्यता को देखते हुए शिक्षा विभाग से स्कूलों का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक करने की पुरजोर मांग की है। यूनियन के प्रांतीय उपाध्यक्ष जगजीत सिंह साहनेवाल और जिला जनरल सचिव गुरप्रीत सिंह दोराहा ने कहा कि धुंध के कारण दूर-दराज से आने वाले विद्यार्थियों और अध्यापकों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति भी लगातार गिर रही है। वे बोर्ड परीक्षाओं के मद्देनजर छुट्टियों में वृद्धि न करने के सरकार के फैसले का स्वागत करते हैं लेकिन गिरते तापमान के बीच समय परिवर्तन में देरी करना किसी बड़े हादसे को न्यौता देने के समान है। छुट्टियों के बाद पहले दिन कम रही हाजिरी सर्दियों की छुट्टियों के बाद आज जब स्कूल खुले तो पहले ही दिन कड़ाके की ठंड का असर विद्यार्थियों की उपस्थिति पर साफ देखने को मिला। घनी धुंध और ठिठुरन के कारण अधिकांश स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति बहुत कम दर्ज की गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई निजी स्कूलों ने अपने स्तर पर ही स्कूल के समय में बदलाव कर दिया है ताकि बच्चों को सुबह की भीषण ठंड से बचाया जा सके। इस बीच, सोशल मीडिया पर भी अध्यापकों और अभिभावकों का गुस्सा देखने को मिल रहा है। वेदान्त प्रकाश मारवाह और हरविंदर लहरा जैसे लोगों ने सोशल मीडिया कमैंट्स के जरिए बताया कि आज इस सर्दी का सबसे ठंडा दिन था और भीषण ठंड के कारण बच्चों का बुरा हाल रहा। यहां तक कि ठंड की वजह से हाथ भी सही से काम नहीं कर रहे थे। कुलदीप सिंह अरोड़ा और लखविंदर लकी ने भी पुष्टि की कि स्कूलों में बच्चे बहुत कम आए। वहीं, किरन पुनिया बराड़ जैसे अभिभावकों ने पुरजोर मांग की है कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए स्कूल का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 2 या 3 बजे तक होना चाहिए। प्रशासनिक कारणों से 'मिशन समर्थ' की ओरिएंटेशन भी मुल्तवी स्टेट कौंसिल फॉर एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एस.सी.ई.आर.टी.), पंजाब ने भी अपने प्रशासनिक कार्यक्रमों पर रोक लगा दी है। 'मिशन समर्थ 4.0' के तहत 15 जनवरी को होने वाली एक दिवसीय ओरिएंटेशन को आगामी आदेशों तक स्थगित कर दिया गया है। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में पंजाब के समूह जिला शिक्षा अधिकारियों (सैकेंडरी और एलीमैंट्री), समूह प्रिंसीपल डाइट और समूह उप जिला शिक्षा अधिकारियों ने हिस्सा लेना था। डायरैक्टर एस.सी.ई.आर.टी. पंजाब के अनुसार, इस ओरिएंटेशन की नई तारीखों का एलान भविष्य में उचित समय पर किया जाएगा। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए शिक्षा विभाग का पूरा ध्यान फिलहाल मौसम के कारण उत्पन्न चुनौतियों से निपटने पर केंद्रित है।

सोनी सब के शो हुई ग़म यादें – एक डॉक्टर, दो ज़िंदगियाँ में सृष्टि सिंह निभाएँगी डॉ. वाणी का किरदार

मुंबई, अभिनेत्री सृष्टि सिंह सोनी सब के आगामी शो हुई ग़म यादें – एक डॉक्टर, दो ज़िंदगियाँ में डॉ. वाणी का किरदार निभाती नजर आयेंगी। सोनी सब नया शो हुई ग़म यादें – एक डॉक्टर, दो ज़िंदगियाँ प्रस्तुत करने जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित इतालवी सीरीज़(डीओसी) का भारतीय रूपांतरण है। यह शो कई देशों में सफलतापूर्वक रूपांतरित किया जा चुका है। शो की कहानी डॉ. देव (इक़बाल खान) पर केंद्रित है-एक प्रतिभाशाली डॉक्टर जो एक दुर्घटना के बाद अपनी आठ वर्षों की स्मृति खो देता है और अपने व्यक्तिगत तथा पेशेवर जीवन को नए सिरे से सँवारने की कोशिश करता है।इस प्रभावशाली कथा में शामिल हो रही हैं लोकप्रिय अभिनेत्री सृष्टि सिंह, जो डॉ. वाणी का किरदार निभा रही हैं। सृष्टि सिंह ने कहा,“हुई ग़म यादें में मुझे सबसे अधिक छू गया उसके रिश्तों की भावनात्मक सच्चाई। डॉ. देव की स्मृति खोने के बाद भी, वाणी अतीत को वापस पाने की कोशिश नहीं करती, बल्कि उनके रिश्ते को बिना किसी अपेक्षा के स्वाभाविक रूप से बढ़ने देती है। वाणी मानती है कि प्रेम को न तो जबरन लाया जा सकता है और न ही समझाया जा सकता है-या तो वह अपना रास्ता खोज लेता है या नहीं। मुझे उनकी ओर आकर्षित किया वह तरीका, जिसमें वह महत्वाकांक्षा और सहानुभूति, सिद्धांत और नाज़ुकता के बीच संतुलन साधती है। उस जटिलता को निभाना मेरे लिए चुनौती और सौभाग्य दोनों होगा। मैं इक़बाल खान के साथ काम करने के लिए भी उत्साहित हूँ, जिनके अनुशासन और कला की मैं हमेशा प्रशंसा करती रही हूँ।” ग़म यादें – एक डॉक्टर, दो ज़िंदगियाँ, जल्द ही केवल सोनी सब पर प्रसारित होगा।  

Bajaj Chetak C25 इलेक्ट्रिक स्कूटर भारत में लॉन्च, कीमत और रेंज की पूरी जानकारी

नई दिल्ली स्वदेशी दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Bajaj Auto ने अपनी सबसे किफायती सीरीज़ – C25 के साथ अपनी Bajaj Chetak इलेक्ट्रिक स्कूटर फैमिली का विस्तार किया है. कंपनी ने इस इलेक्ट्रिक स्कूटर को 91,399 रुपये (एक्स-शोरूम, PM ई-ड्राइव सब्सिडी सहित) की कीमत पर उतारा है. नए Bajaj Chetak C2501 को इसके मौजूदा पोर्टफोलियो में 30 और 35 सीरीज़ से नीचे रखा गया है और यह हब-माउंटेड इलेक्ट्रिक मोटर वाला पहला चेतक मॉडल है. Bajaj Chetak C2501 की मोटर और रेंज इस स्कूटर में 2.2 kW का पावर देने वाली की पीक आउटपुट देती है, और लगातार इस्तेमाल में 1.8 kW की पावर देती है. यह इलेक्ट्रिक स्कूटर को 55 kmph की टॉप स्पीड देती है. यह मोटर 2.5 kWh की बैटरी के साथ जोड़ी गई है, जिससे स्कूटर को 113 km तक की रेंज मिलती है. स्कूटर की चार्जिंग की बात करें तो, इलेक्ट्रिक स्कूटर के साथ 750W का ऑफ-बोर्ड चार्जर मिलता है, जो इसकी बैटरी को 2 घंटे 25 मिनट में 0-80 प्रतिशत तक चार्ज कर सकता है, या लगभग 3 घंटे 45 मिनट में 100 प्रतिशत तक चार्ज कर सकता है. Bajaj Chetak C2501 का डिजाइन इसके डिज़ाइन की बात करें, तो Chetak C25 सीरीज़ में भी मेटल बॉडी शेल का इस्तेमाल किया गया है, जैसा कि इसके ज़्यादा महंगे मॉडल्स में किया जाता है, और इसका ओवरऑल डिज़ाइन अभी भी मौजूदा Bajaj Chetak जैसा ही लगता है. हालांकि, अगर आप ध्यान से देखेंगे, तो आपको कुछ डिज़ाइन में बदलाव नज़र आएंगे. फ्रंट प्रोफाइल की बात करें तो आगे के एप्रन का डिज़ाइन बदला गया है, जिसमें इंडिकेटर्स अब हेडलाइट्स के साथ काउलिंग पर लगे हैं. साइड पैनल का डिज़ाइन भी बदला गया है. पीछे की तरफ, 30 और 35 सीरीज़ के ट्विन लाइट क्लस्टर की जगह एक सिंगल एज-टू-एज यूनिट लगाई गई है. कंपनी ने इसके सस्पेंशन सेटअप में भी बदलाव किया है, Chetak C25 में आगे टेलीस्कोपिक फोर्क और पीछे ट्विन शॉक दिए गए हैं. वहीं, 30 और 35 सीरीज़ में आगे लीडिंग लिंक सेटअप और पीछे मोनोशॉक दिया गया है. अपने दूसरे मॉडल्स की तरह, Chetak C25 में भी आगे डिस्क ब्रेक दिया गया है. Bajaj Chetak C2501 के फीचर्स इस स्कूटर में मिलने वाले फीचर्स की बात करें तो Chetak C25 में कलर LCD इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, LED DRL, ब्लूटूथ कनेक्टिविटी, रिवर्स मोड और 25 लीटर का अंडरसीट स्टोरेज मिलता है. वहीं, ऑप्शनल TecPac में हिल होल्ड, दो राइड मोड, गाइड मी होम लाइट्स और म्यूजिक कंट्रोल्स जैसे फीचर्स मिलते हैं.

CM यादव का ऐलान: एआई को कुशल शासन और पारदर्शिता के लिए अहम बनाती है राज्य सरकार

राज्य सरकार एआई को नागरिक केंद्रित, पारदर्शी और कुशल शासन की आधारशिला के रूप में कर रही है स्थापित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव एआई वर्तमान समय में शासन, उद्योग और समाज के लिए एक परिवर्तनकारी शक्ति एआई पर मिशन मोड पर होगा कार्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लांच की मध्यप्रदेश स्पेसटेक नीति-2026 प्रधानमंत्री मोदी के विजन को दृष्तिगत रखकर आगे बढ़ रहा है मध्यप्रदेश जन-कल्याणकारी योजनाओं में एआई का प्रभावी उपयोग करेगा मध्यप्रदेश प्रदेश में जल्द लाई जाएगी राज्य एआई नीति मुख्यमंत्री ने एआई लिटरेसी मिशन के तहत कौशल रथ को दिखाई हरी झंडी मुख्यमंत्री ने ‘मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस-2026’ का किया शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार एआई को नागरिक-केंद्रित, पारदर्शी और कुशल शासन की आधारशिला के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। एआई आधारित प्रशासनिक व्यवस्था और प्रबंधन, तकनीक-प्रौद्योगिकी और अकादमिक क्षेत्र में एआई आधारित नवाचार विकसित भारत@ 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में प्रभावी रूप से सहायक होंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हर क्षेत्र में भारत को आगे बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे हैं। मध्यप्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण का अध्ययन केंद्र और शंकराचार्य जी की साधना का केंद्र भी है। राज्य सरकार मानवीय संवेदनाओं के साथ आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार सभी विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए एआई का उपयोग कर रही है। एआई वर्तमान समय में शासन, उद्योग और समाज के लिए एक परिवर्तनकारी शक्ति है। हमारा राज्य जल्द ही एआई नीति भी लाएगा और एआई के लिए मिशन मोड पर व्यापक रूप से कार्य किया जाएगा। प्रदेश के माइनिंग और हेल्थ सेक्टर में एआई के उपयोग की बड़ी संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश अपार संभावनाओं वाला राज्य है, जिसमें आगे बढ़ने की पर्याप्त क्षमता है। विकसित भारत के लक्ष्य प्राप्ति में हमारी सरकार हर कदम पर प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को भोपाल के ताज लेक फ्रंट में ‘मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कांफ्रेंस-2026’ का शुभारंभ कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एआई लिटरेसी मिशन के तहत फ्यूचर स्किल्स फॉर एआई पावर्ड भारत के लिए कौशल रथ को झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश स्पेस टेक नीति-2026 लांच की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विभिन्न समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन सिंहस्थ-2028 के संचालन के लिए आयोजित उज्जैन महाकुंभ हैकाथॉन और मध्यप्रदेश इनोटेक प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया। अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संजय दुबे ने “एआई फॉर पीपल, प्लेनेट एंड प्रोग्रेस-मध्यप्रदेश रोडमैप टू इंपैक्ट” पर राज्य का प्रमुख एआई विजन प्रस्तुत किया। एआई को राष्ट्रीय आंदोलन बनाने के उद्देश्य से एआई लिटरेसी मिशन के अंतर्गत आरंभ युवा एआई फॉर ऑॅल पर लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। एम.पी. राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक आशीष वशिष्ठ ने कॉन्फ्रेंस के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एमपीएसईडीसी प्रदेश में एआई इंफ्रॉस्ट्रक्चर स्थापित करने के लिए नोडल एजेंसी है। स्पेस टेक नीति – अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों को बढ़ावा देने की पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीजनल एआई इंपैक्ट कॉन्फ्रेंस में प्रदेश की स्पेस टेक नीति लांच की। उन्होंने कहा कि नीति राज्य को भारत के उभरते अंतरिक्ष क्षेत्र में एक अग्रणी और भविष्य-उन्मुख केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। नीति के तहत स्पेस टेक स्टार्ट-अप्स, एमएसएमई और उद्योगों को वित्तीय, अवसंरचनात्मक और अनुसंधान सहयोग प्रदान कर कृषि, आपदा प्रबंधन, जल संसाधन एवं शहरी नियोजन जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष-आधारित अनुप्रयोगों को बढ़ावा दिया जाएगा। यह नीति निवेश, नवाचार और राष्ट्रीय अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में मध्यप्रदेश की भूमिका को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। नवाचार और कौशल विकास के लिए हुए 7 एमओयू पर हस्ताक्षर मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 6 समझौता ज्ञापन-यंगोवेटर (आंसर फाउंडेशन), सीईईडब्ल्यू (कॉउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर), गूगल, नैसकॉम, एआईएसईसीटी और भाषिणी के साथ किए गए। ये समझौते शैक्षणिक संस्थानों में नवाचार एवं रोबोटिक्स को बढ़ावा देने, जलवायु परिवर्तन व सतत विकास से जुड़े क्षेत्रों में एआई आधारित शोध एवं निर्णय सहयोग विकसित करने, शासकीय विभागों में एआई और क्लाउड तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहित करने, राज्य में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना एवं कौशल विकास को गति देने, राष्ट्रीय एआई मिशन से जुड़कर कंप्यूटर एवं डेटा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, ग्रामीण एवं वंचित क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और एआई जागरूकता बढ़ाने और एआई आधारित शासन को सक्षम करने के उद्देश्य से किए गए हैं। इसके अलावा इंडिया एआई और तकनीकी शिक्षा,कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के मध्य एक समझौता ज्ञापन हुआ। उच्च गुणवत्ता वाली एआई शिक्षा तक पहुंच को व्यापक बनाने के लिए इंडिया एआई मिशन देश के टियर-2 एवं टियर-3 शहरों में 570 डेटा एवं एआई लैब्स की स्थापना कर रहा है। तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग, मध्य प्रदेश सरकार के सहयोग से मध्यप्रदेश में 30 डेटा एवं एआई लैब्स स्थापित की जाएंगी।   आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल तकनीक नहीं, नीति, समाज और अर्थव्यवस्था से जुड़ा एक सशक्त माध्यम बना : मुख्य सचिव जैन मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा है कि एआई के उपयोग से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक तेज, सटीक व नागरिक-केंद्रित होगी। मुख्य सचिव जैन ने बताया कि यह कांफ्रेंस आगामी इंडिया एआई इंपैक्ट समिट-2026 से पूर्व देश में एआई इको सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा निर्धारित सतत आर्थिक विकास लक्ष्य को प्राप्त करने में गवर्नेंस में एआई की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने उद्योग और अकादमिक संस्थानों के सहयोग, स्किलिंग व री-स्किलिंग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य रिसर्च, इनोवेशन और नॉलेज आधारित होगा। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने यूपीआई को भारत की वैश्विक पहचान बताया। मध्यप्रदेश में समग्र आईडी जैसी पहलों के माध्यम से डेटा-आधारित और परिवार-केंद्रित शासन को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्य सचिव जैन  ने कहा कि ऐसे मंच नवाचार और सहयोग को नई दिशा देते हैं। मध्यप्रदेश इस राष्ट्रीय प्रयास में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। एआई के प्रभावी … Read more

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, ED अफसरों पर दर्ज FIR पर ममता सरकार को झटका

नई दिल्ली  बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में सियासी पारा हाई है. पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक पर छापेमारी के बाद ये केस सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है, जिसपर आज शीर्ष न्यायालय में सुनवाई हुई. इस सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने ईडी के अधिकारी पर दर्ज की गई एफआईआर पर रोक लगाने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारी नजर में यह गम्भीर मामला है. कोर्ट ने कहा कि ये केंद्रीय जांच एजेंसी के काम मे स्टेट एजेंसी के काम मे दखल का गम्भीर मामला है. लोकतंत्र में व्यवस्था जा हर अंग अपना काम कर सके, हमारे लिए इस मसले पर सुनवाई ज़रूरी है ताकि क़ानून का उल्लंघन करने वाले न बचे. SC ने ममता बनर्जी और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया.  सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, ये केस कैसे सुनवाई योग्य हैं ? इस पर ED की तरफ से SG मेहता ने कहा, यह केस बहुत ही चौंकाने वाली स्थिति दिखाता है.⁠CM ममता बनर्जी उस जगह पर घुस गईं, जहां PMLA केस में रेड हो रही थी. CM ने ‘कानून हाथ में लेने का एक पैटर्न बना लिया है'. बंगाल पुलिस का गलत इस्तेमाल किया है. ED को जानकारी मिली थी कि एक ऑफिस में आपत्तिजनक सामान पड़ा है. CM बिना इजाज़त के घुसीं और फाइलें, डिजिटल डिवाइस, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड ले गईं. इसमें ED अधिकारी का फोन भी शामिल था. डायरेक्टर, पुलिस कमिश्नर उनके साथ थे. अधिकारी राजनीतिक नेताओं के साथ धरने पर बैठे थे.⁠CBI के जॉइंट डायरेक्टर के घर का घेराव किया गया और पत्थर फेंके गए. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में नई अर्जी दाखिल कर पश्चिम बंगाल पुलिस के डीजीपी को हटाए जाने की मांग की है.प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सुप्रीम कोर्ट में एक नई अर्जी दाखिल कर पश्चिम बंगाल पुलिस के शीर्ष अधिकारियों, जिनमें डीजीपी राजीव कुमार भी शामिल हैं, को निलंबित किए जाने की मांग की है. अर्जी में आरोप लगाया गया है कि इन अधिकारियों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मिलकर जांच में बाधा डाली और सबूतों की कथित तौर पर चोरी में मदद की. SG तुषार मेहता की बड़ी दलीलें…     ED के अधिकारियों ने पुलिस को बताया था कि PMLA की धारा 17 के तहत IPAC की जांच करनी है     पुलिस अधिकारियों और CM ममता बनर्जी ने जबरन सारी फाइलें ले लीं.     ⁠यह चोरी है, ⁠उन्होंने एक ED अधिकारी का फोन भी ले लिया.⁠इससे सेंट्रल फोर्स का मनोबल गिरेगा     ⁠दूसरे राज्यों को लगेगा कि वे भी ऐसा कर  सकते हैं और फिर धरने पर बैठ सकते हैं.     ⁠जो अधिकारी वहां मौजूद थे, उन्हें सस्पेंड किया जाना चाहिए बंगाल के डीजीपी को हटाने की मांग ईडी ने अपनी नई अर्जी में केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT), भारत सरकार को निर्देश देने की मांग की है कि संबंधित अधिकारियों को निलंबित किया जाए. अर्जी में यह भी उल्लेख किया गया है कि डीजीपी राजीव कुमार पूर्व में कोलकाता पुलिस कमिश्नर के पद पर रहते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ धरने पर बैठे थे. डीजीपी राजीव कुमार और पुलिस कमिश्नर पर आरोप प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में बंगाल की सीएम ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के साथ डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार को पक्षकार बनाया है. उन पर FIR दर्ज करने की मांग की है. प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि Indian Political Action Committee के खिलाफ कोलकाता में छापेमारी के दौरान बंगाल की पुलिस प्रशासन की मशीनरी पर जांच में रुकावट का आरोप लगाया है. साथ ही साक्ष्यों से छेड़छाड़ और उन्हें खत्म करने का आरोप लगाया है. ED अफसरों को डराने धमकाने और उनके पास अहम फाइलों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड छीने गए. सुप्रीम कोर्ट में दलीलें सुप्रीम कोर्ट में ईडी ने कहा है कि निष्पक्ष जांच के एजेंसी के अधिकार में बाधा डालने का काम किया गया. इस घटना की CBI जांच कराने की मांग रखी गई है. कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान 'CM और उनके समर्थकों के प्रभाव' का इस्तेमाल कर कोर्ट में हंगामा किया गया.इससे जज को सुनवाई तक टालनी पड़ी. जांच एजेंसी ने कहा कि CM, DGP और कोलकाता पुलिस कमिश्नर पर बीएनसी की 17 गंभीर  धाराओं के तहत आरोप लगाए जा सकते हैं. IPAC के पास पार्टी का बहुत सारा डेटा था- कपिल सिब्बल वहीं, ममता सरकार की ओर से कोर्ट में पेश हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि IPAC के पास पार्टी का बहुत सारा डेटा था। जब ED वहां गई, तो उसे पता था कि संवेदनशील पार्टी की जानकारी वहां मौजूद होगी। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट को पहले इस मामले की सुनवाई करनी चाहिए और अपना फैसला देना चाहिए, जिसके बाद पार्टियां अपीलीय फोरम में जा सकती हैं। उन्होंने दलील दी कि अब समानांतर कार्यवाही शुरू कर दी गई है, जबकि हाई कोर्ट के पास आर्टिकल 226 के तहत अधिकार क्षेत्र है, और यही सही क्रम है जिसका पालन किया जाना चाहिए। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में राज्य और DGP की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट अभिषेक सिंघवी ने याचिका की स्वीकार्यता पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अगर नोटिस जारी किया जाता है, तो यह साफ किया जाना चाहिए कि यह स्वीकार्यता पर उनकी आपत्ति के अधीन होगा। सिंघवी ने तर्क दिया कि ED की ओर से सीधे सुप्रीम कोर्ट में जाना केवल असाधारण स्थितियों में ही स्वीकार्य है, जहां कोई प्रभावी उपाय उपलब्ध न हो। 'चुनावी काम में ईडी को दखल देने का अधिकार नहीं…' सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के वकीलों की बात सुनने के बाद कहा कि यह याचिका ED और दूसरी केंद्रीय एजेंसियों की जांच और राज्य अधिकारियों द्वारा कथित दखल के बारे में एक गंभीर मुद्दा उठाती है. कोर्ट ने ज़ोर दिया कि कानून का राज बनाए रखने और हर एजेंसी को आज़ादी से काम करने देने के लिए, इस मामले की जांच होनी चाहिए, जिससे यह पक्का हो सके कि किसी भी राज्य की सुरक्षा की आड़ में अपराधियों को बचाया न जाए. बेंच ने कहा कि इसमें … Read more

मध्य प्रदेश में आदिवासी छात्रों के लिए UPPSC और PSC तैयारी, 2 नए छात्रावास बनाने की योजना

जबलपुर  अपने अटपटे बयानों के लिए पहचाने जाने वाले मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री आजकल बहुत नापतौल कर बयान दे रहे हैं. जनजातीय मंत्री विजय शाह ने जबलपुर में अपने विभाग के अलावा किसी दूसरे सवाल का कोई जवाब नहीं दिया. उन्होंने बताया कि आदिवासी छात्र-छात्राओं को यूपीएससी और पीएसी की तैयारी के लिए जबलपुर में एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया जाएगा. जिसमें छात्र-छात्राओं को सरकारी खर्च पर विशेष कोचिंग करवाई जाएगी. जबलपुर में बनेंगे 2 नए छात्रावास मध्य प्रदेश सरकार के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह जबलपुर पहुंचे. जहां उन्होंने दो नए छात्रावासों के निर्माण की घोषणा की है. जिन्हें 8 करोड़ 18 लख रुपए की लागत से बनाया जाएगा. एक छात्रावास जबलपुर के महाकाल में और दूसरा कुडम में बनेगा. मंत्री कुंवर विजय शाह का कहना है कि "आदिवासी जनजाति के छात्रों को लेकर जबलपुर में एक नया प्रयोग किया जा रहा है, जो अगले शिक्षा सत्र से शुरू होगा. आदिवासी छात्रों को सरकार कराएगी कोचिंग इसके तहत 100 लड़के और 100 लड़कियों को यूपीएससी और पीएससी की परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग करवाई जाएगी. इस प्रोजेक्ट के लिए विभाग की ओर से 18 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है. उन्होंने बताया इसी तरह अनुसूचित जाति जनजाति के छात्र-छात्राओं के लिए नीट, आईआईटी, जेईई और करंट अफेयर्स की तैयारी के लिए भी जबलपुर में व्यवस्था की जा रही है. इन छात्रों के लिए हॉस्टल बनाया जा रहा है. यह हॉस्टल सुरक्षा के नजरिए से अत्यधिक व्यवस्थाओं से लैस होगा. राज्यसभा सीट और इंदौर मामले पर जवाब देने से बचे विजय शाह मंत्री विजय शाह का कहना है कि मध्य प्रदेश में 5000 अनुसूचित जाति जनजाति छात्रावास हैं. इनमें स्थाइ वार्डन नहीं है और वार्डन का चार्ज किसी शिक्षक को दिया गया है. ऐसी स्थिति में शिक्षक छात्रावास को 100% समय नहीं दे पाता. इसलिए इन सभी छात्रावास में स्थाइ वार्डन की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई है." इसके बाद कांग्रेस दिग्विजय सिंह के स्थान पर राज्यसभा में आदिवासी नेता को राज्यसभा सदस्य बनना चाहती है. इस सवाल पर मंत्री ने कहा कि वे इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोलेंगे. इंदौर में गंदे पानी के मुद्दे पर भी कुंवर विजय शाह ने कुछ नहीं कहा.

अब जब मैं बाहर हूं, समझ आया दिग्विजय सिंह क्या चाहते थे” – सिंधिया का खुलासा

ग्वालियर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया इन दिनों ग्वालियर दौरे पर हैं। जहां उन्होंने मध्य प्रदेश की राजनीति पर अपनी राय रखी। सिंधिया ने दिग्विजय सिंह के राज्यसभा न जाने की वजह पूछे जाने पर एक सवाल का जवाब देते हुए तीखा तंज कसा। इतना ही नहीं उन्होंने राहुल गांधी के इंदौर दौरे को लेकर भी बयान दिया। सिंधिया ने दिग्विजय सिंह के राज्यसभा न जाने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कांग्रेस पार्टी और उनका अंदरूनी निर्णय है। जब मैं कांग्रेस में था, तब नहीं जानता था कि दिग्विजय सिंह क्या चाहते हैं, अब तो मैं बाहर हूं तो भला कैसे जान पाऊंगा कि वे क्या चाहते हैं। उनके फैसलों पर टिप्पणी करना और भी मुश्किल है। दरअसल, दिग्विजय सिंह द्वारा राज्यसभा में न जाने के फैसले को लेकर सिंधिया से सवाल किया गया था। इस पर सिंधिया ने किसी भी तरह की सीधी टिप्पणी करने से परहेज किया और बात को वहीं विराम दे दिया। वहीं दिग्विजय सिंह की आरएसएस की तारीफ करने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा- देर आए दुरुस्त आए। वहीं, जब सिंधिया से 17 तारीख को राहुल गांधी के इंदौर आगमन को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि देश में प्रजातंत्र है और कोई भी नेता कहीं भी आ-जा सकता है। गौरतलब है कि साल 2020 में मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार गिरने के पीछे राज्यसभा चुनाव एक बड़ी वजह थी। उस समय लोकसभा चुनाव हारने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया के राज्यसभा जाने की चर्चा थी, लेकिन दिग्विजय सिंह के राज्यसभा जाने पर 'राजा दिग्गी' और 'महाराजा सिंधिया' के बीच तल्खियां बढ़ गई थीं। दिग्विजय सिंह द्वारा वर्तमान कार्यकाल पूरा होने पर राज्यसभा न जाने की इच्छा जाहिर किए जाने के सवाल पर सिंधिया ने कहा कि यह उनकी और कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी बात है। उन्होंने कहा, "मैं इस पर क्या टिप्पणी करूं? मैं क्या जानूं वह क्या चाहते हैं? जब मैं कांग्रेस में था तब भी मैं नहीं जानता था कि दिग्विजय सिंह क्या चाहते थे और अब मैं बाहर हूं तो मैं कैसे जानूंगा कि वह क्या चाहते हैं?" वहीं, बीते दिनों दिग्विजय सिंह द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा की तारीफ किए जाने पर सिंधिया ने टिप्पणी की, "देर आए पर दुरुस्त आए, यह अच्छी बात है।" राहुल गांधी के 17 तारीख को इंदौर दौरे के सवाल पर सिंधिया ने कहा कि वह जरूर जाएं, इसमें कोई कठिनाई नहीं है, यह प्रजातंत्र है। आपको बता दे सिंधिया कटारे फार्म के पास स्मार्ट सिटी द्वारा निर्मित थीम पार्क का जायजा लेने पहुंचे थे।उन्होंने कहा कि आज शौर्य स्मारक का भी निरीक्षण किया है,एक बहुत अच्छा भविष्य की पीढ़ी के लिए एक नया स्थल बन रहा है और भविष्य की पीढ़ी भी अपने पूर्वजों के बलिदान याद रखें इसलिए यह स्मारक भी बनाया जा रहा है,बहुत सुंदर डिजाइन ग्वालियर के पत्थर से हम लोग बनाने की कोशिश कर रहे हैं,इसकी आकृति में भी ग्वालियर की संस्कृति और परंपरा रहे सारे शहीदों जिन्होंने पिछले हजार वर्षों से अपने जीवन का बलिदान दिया है उनके लिए यह स्मारक यहां बनेगी, ग्वालियर चंबल की धरती ने भी बहुत सारे वीर सूरमाओं को जन्म दिया है जिन्होंने सरहद पर देश की एकता और अखंडता के लिए बलिदान दिया है,उनको भी याद किया जाएगा और भविष्य यहां प्रवेश करेगा तो वह भविष्य अपने पूर्वजों को सामने माथा टेक कर फिर अपने भविष्य का भी निर्माण करेगा।

बिजली कर्मचारियों से मारपीट के आरोप में तीन के खिलाफ एफआईआर दर्ज

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा भोपाल शहर वृत्त के पूर्व शहर संभाग अंतर्गत बाग फरहत अफजा ऐशबाग में बिजली कर्मचारियों के साथ मारपीट करने वाले तीन आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। कंपनी के इंडस्ट्रियल गेट कार्यालय प्रबंधक संजय बारमासे ने बताया कि बाग फरहत अफजा निवासी श्रीमती शहजादी बी द्वारा विद्युत देयक बकाया 1 लाख 41 हजार 669 रुपए जमा नहीं किया जा रहा था। उन्होंने उक्त मकान सीमा बेगम को विक्रय कर दिया। सीमा बेगम को बताया गया कि आपके द्वारा क्रय किये गये मकान का विद्युत देयक बकाया है। यदि बकाया देयक जमा नहीं किया तो विद्युत विच्छेदन की कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद उन्होंने शासकीय कार्य में बाधा डालते हुए कर्मचारियों को अभद्रता की और मारपीट करते हुए जान से मारने की धमकी दी। इस पर मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा आरोपितों सीमा बेगम, आशु एवं समीर के खिलाफ ऐशबाग थाने में भारतीय न्‍याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 296(बी), 132, 351(3) , 3(5) में एफआईआर दर्ज कराई गई है। थाना एशबाग ने भी प्रकरण पर संज्ञान लेकर विवेचना शुरू कर दी है। बिजली कंपनी के मैदानी कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ ड्यूटी के दौरान असामाजिक तत्वों द्वारा मारपीट / दुर्व्यवहार की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने तुरन्त एफ.आई. आर. कराने के निर्देश दिए हैं। कंपनी ने कहा है कि प्रायः देखने में आ रहा है कि बिजली कर्मियों पर ड्यूटी के दौरान असामाजिक तत्वों द्वारा मारपीट / दुर्व्यवहार किया जा रहा है। चूंकि ऐसी घटनाएं विद्युत अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल गिराती हैं, इसलिए कंपनी के कार्यक्षेत्र में कार्यरत सभी नियंत्रणकर्ता अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि मैदानी अधिकारी-कर्मचारियों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार या मारपीट की घटनाओं को पूरी गंभीरता से लिया जाए।  

योगी सरकार का 100 दिवसीय विशेष सघन टीबी रोगी खोज अभियान, फरवरी से होगा शुरू

योगी सरकार का 100 दिवसीय विशेष सघन टीबी रोगी खोज अभियान फरवरी से जनभागीदारी के लिए सांसद से लेकर पार्षद तक को शामिल करने के दिये निर्देश   बुजर्गों, गंभीर रोगियों व मलिन बस्तियों में टीबी स्क्रीनिंग पर जोर प्राइमरी स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालय तक चलेगा जागरूकता अभियान  लखनऊ योगी सरकार एक बार फिर तपेदिक (टीबी) उन्मूलन के लिए प्रदेश में 100 दिवसीय विशेष सघन रोगी खोज अभियान शुरू करने जा रही है। फरवरी में शुरू हो रहे अभियान में जनप्रतिनिधियों व विभिन्न विभागों के सहयोग से अधिकतम मरीजों को खोजकर उनका इलाज शुरू करने की रणनीति है। स्वास्थ्य महानिदेशक ने सभी अपर निदेशकों व मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने टीबी रोगियों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार हेतु प्रशिक्षित करने के लिए कौशल विकास विभाग को लिखा है।  सघन खोज अभियान से टीबी से होने वाली मौतों में 17 फीसदी की कमी स्वास्थ्य सचिव डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि सघन टीबी खोज अभियान 7 दिसंबर 2024 से चलाया जा रहा है। इसी का नतीजा है कि वर्ष 2015 के सापेक्ष प्रति एक लाख व्यक्तियों में मरीजों की संख्या में 17 प्रतिशत और टीबी के कारण होने वाली मृत्यु में भी 17 फीसदी की कमी आई है। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर विभाग ने एक बार फिर से फरवरी में सघन टीबी रोगी खोज अभियान चलाने का निर्णय लिया है। स्वास्थ्य महानिदेशक (डीजी) डॉ. आरपी सिंह सुमन ने जनभागीदारी के महत्व को ध्यान में रखते हुए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस अभियान में जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए। निबंध और पोस्टर प्रतियोगिता से बच्चों काे किया जाएगा जागरूक सभी सीएमओ को निर्देश दिया गया है कि दो माह में सांसदों के साथ जनपद स्तरीय समीक्षा करवाएं और उन्हें निःक्षय शिविर व अन्य जनभागीदारी गतिविधियों में शामिल करें। ये समीक्षा बैठकें आगे भी जारी रहेंगी। इसके अलावा विधायकों, विधान परिषद सदस्यों, प्रधानों व पार्षदों को भी अभियान से जोड़ें। अभियान में सामाजिक जन जागरूकता बढ़ाने के लिए 'माई भारत' वालंटियर्स व अन्य पंजीकृत निःक्षय मित्रों का भी उपयोग करें। डीजी ने सभी कारागारों व मलिन बस्तियों में टीबी स्क्रीनिंग कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्राथमिक स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालयों तक में निबंध, पोस्टर प्रतियोगिता समेत विभिन्न माध्यमों से छात्र-छात्राओं में जागरूकता फैलाने के लिए कहा है। इसके अलावा समस्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को जागरूक करने के भी निर्देश दिए हैं, ताकि वे टीबी के लक्षण वाले लोगों को स्क्रीनिंग के लिए भेज सकें। परिवहन विभाग से जुड़े समस्त चालकों व कंडक्टरों की स्क्रीनिंग कराने व कारखानों में काम करने वालों की भी शिविर लगाकर जांच करने को कहा गया है।  यह है अभियान की रणनीति  सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों व उससे नीचे की स्वास्थ्य इकाइयों से पांच प्रतिशत और जिला अस्पताल, मेडिकल काॅलेजों से 10 प्रतिशत लोगों को सामान्य ओपीडी से टीबी जांच के लिए रेफर करना।    आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से टीबी जांच के लिए सैम्पल ट्रांसपोर्टरों की व्यवस्था कराना।  बुजुर्गों व गंभीर मरीजों की यथासंभव जांच कराना।  स्थानीय गैर सरकारी संगठनों, कॉरपोरेट, विभागों, संस्थानों को निःक्षय मित्र के रूप में प्रेरित करना।