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बसंत पंचमी और पीले रंग का गहरा संबंध: क्या है इसके पीछे की मान्यता?

भारत त्योहारों का देश माना जाता है. यहां जो भी पर्व मनाए जाते हैं, उसके पीछे कोई न कोई रहस्य अवश्य छिपा होता है. माघ माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन हर साल बंसत पंचमी मनाई जाती है. ये पर्व विद्या और ज्ञान की देवी सरस्वती को समर्पित किया गया है. इस पर्व को ‘श्री पंचमी’ या ‘ज्ञान पंचमी’ के नाम से भी जाना जाता है. ये पर्व बंसत ऋतु के आने का प्रतीक माना जाता है. इस दिन विधि-विधान से माता सरस्वती का पूजन किया जाता है. छात्रों के लिए ये पर्व बहुत विशेष और महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन माता सरस्वती का पूजन करने से विद्या और ज्ञान का आशीर्वाद मिलता है. इस दिन चारों ओर एक ही रंग छाया रहता है और वो होता है पीला रंग. पीला रंग सकारत्मकता और शुभता का कारक माना जाता है. ये उत्सव की आत्मा माना जाता है. इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनें जाते हैं. आइए जानते हैं कि इसके पीछे रहस्य क्या है? बसंत पंचमी कब है? हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 22 जनवरी 2026 को शाम 06 बजकर 15 मिनट पर हो रही है. वहीं इस तिथि का समापन 23 जनवरी 2026 को रात 08 बजकर 30 मिनट पर हो जाएगा. चूंकि 23 जनवरी को सूर्योदय पर पंचमी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा का पर्व इस साल 23 जनवरी, शुक्रवार को मनाया जाएगा. बसंत ऋतु मौसमों का राजा बसंत ऋतु को ‘ऋतुराज’ यानी मौसमों का राजा माना जाता है. यह पीलापन नई फसल के आने और जीवन में खुशहाली का प्रतीक माना जाता है. लोग प्रकृति के इसी सुंदर रूप के साथ स्वयं को जोड़ने की कोशिश करते हैं, इसलिए पीले वस्त्र धारण करते हैं. धार्मिक दृष्टि से पीला रंग शुद्धता, सादगी और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है. मां सरस्वती को ये रंग बहुत प्रिय है. मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता बढ़ती है मान्यताओं के अनुसार, पीला रंग पहनने से मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता बढ़ती है. भक्त इस दिन पीले वस्त्र पहनकर और पीले फूल अर्पित करके मां सरस्वती का पूजन करते हैं. पीला रंग सकारात्मक ऊर्जा का कारक माना जाता है. ये रंग सूर्य के प्रकाश का प्रतिनिधित्व भी करता है. इस रंग से जीवन में शुभता आती है.

हनुमान से बजरंगबली तक: इस नाम के पीछे छिपी है अद्भुत और प्रेरक कहानी

हनुमान जी को भक्त 'बजरंगबली' कहकर पुकारते हैं। यह नाम उनकी अपार शक्ति और वज्र जैसी मजबूती का प्रतीक है। 'बजरंग' शब्द 'वज्रांग' से निकला है, जिसका अर्थ है अंग वज्र (इंद्र के अस्त्र) जैसे कठोर हों। हनुमान जी का शरीर इतना बलशाली था कि इंद्र के वज्र प्रहार से भी उन्हें कोई हानि नहीं हुई। इस नाम की कहानी बाल्यकाल की एक घटना से जुड़ी है, जो उनकी दिव्य शक्ति और अमरता को दर्शाती है। आइए जानते हैं इस नाम की पूरी कहानी और महत्व। बजरंगबली नाम का मूल अर्थ 'बजरंगबली' दो शब्दों से मिलकर बना है – 'बजरंग' और 'बली'। 'बली' का अर्थ है बलशाली या महाबली। 'बजरंग' शब्द संस्कृत के 'वज्रांग' से अपभ्रंशित रूप है। 'वज्र' इंद्र का दिव्य अस्त्र है, जो हीरे से भी कठोर होता है। 'वज्रांग' का अर्थ है – जिसके अंग वज्र जैसे मजबूत हों। हनुमान जी के शरीर की मजबूती इतनी थी कि वज्र प्रहार भी उन्हें चोट नहीं पहुंचा सका। इसी कारण उन्हें 'वज्रांग बली' कहा गया, जो लोक भाषा में 'बजरंगबली' बन गया। यह नाम उनकी अजेय शक्ति और अमरता का प्रतीक है। बाल्यकाल की घटना – सूर्य को फल समझकर निगलने की कथा हनुमान जी के बचपन में एक प्रसिद्ध घटना हुई, जिससे उनका नाम 'बजरंगबली' पड़ा। बाल हनुमान ने आकाश में लाल-नारंगी सूर्य को फल समझ लिया। वे उड़कर सूर्य को निगलने के लिए पहुंच गए। देवताओं में हड़कंप मच गया। इंद्र ने अपने वज्र से हनुमान जी पर प्रहार किया। वज्र प्रहार से हनुमान जी का ठुड्डी (हनु) टूट गया और वे बेहोश होकर गिर पड़े। इसी कारण उनका नाम 'हनुमान' पड़ा, जिसका अर्थ है – जिसका हनु (ठुड्डी) टूटा हो। लेकिन वज्र प्रहार से भी वे मरे नहीं, बल्कि और अधिक बलशाली बन गए। इस घटना ने सिद्ध कर दिया कि उनके अंग वज्र जैसे कठोर हैं। वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास जी का योगदान मूल वाल्मीकि रामायण में 'बजरंगबली' शब्द का प्रयोग नहीं है। वहां हनुमान जी को 'मारुति', 'कपिश्रेष्ठ', 'अंजनिपुत्र' या 'हनुमान' कहा गया है। 'वज्रांग' या 'बजरंग' का उल्लेख नहीं मिलता है। लेकिन गोस्वामी तुलसीदास जी ने जब अवधी भाषा में श्री रामचरितमानस लिखी, तब उन्होंने 'वज्रांग' को लोक भाषा में 'बजरंग' लिखा। तुलसीदास जी की रामचरितमानस में 'बजरंग बली' शब्द का प्रयोग हुआ, जिससे यह नाम जन-जन तक पहुंचा। तुलसीदास जी ने ही इस नाम को लोकप्रिय बनाया, जो आज भी हनुमान जी का सबसे प्रिय नाम है। बजरंगबली नाम का महत्व और प्रतीक 'बजरंगबली' नाम हनुमान जी की अजेय शक्ति, अमरता और वज्र जैसी मजबूती का प्रतीक है। यह नाम भक्तों को साहस, बल और सुरक्षा का संदेश देता है। जब भी कोई संकट आए, भक्त 'बजरंगबली' नाम जपते हैं और हनुमान जी की कृपा प्राप्त करते हैं। यह नाम बताता है कि सच्ची भक्ति और बल से कोई भी बाधा नहीं रोक सकती है। बजरंगबली नाम से हनुमान जी की पूजा करने से भय, रोग और शत्रु दूर होते हैं। यह नाम भक्तों के जीवन में साहस और आत्मविश्वास भरता है। हनुमान जी को 'बजरंगबली' इसलिए कहा जाता है, क्योंकि उनके अंग वज्र जैसे कठोर थे और इंद्र के वज्र प्रहार से भी वे अडिग रहे। यह नाम तुलसीदास जी की कृपा से लोकप्रिय हुआ। बजरंगबली नाम जपने से जीवन में बल, साहस और सुरक्षा मिलती है।

जनसंख्या संकट: चीन में लगातार चौथे साल घट रही आबादी, शादी की दर भी गिरी

बीजिंग  चीन में जनसंख्या संकट लगातार गहराता जा रहा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में देश की आबादी करीब 40 लाख (33.9 लाख) घटकर 1.405 अरब रह गई. यह गिरावट 2024 की तुलना में ज्यादा तेज है और लगातार चौथा साल है जब चीन की जनसंख्या में कमी दर्ज की गई है. चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (NBS) ने सोमवार को यह आंकड़े जारी किए, जिससे स्पष्ट है कि चीन तेजी से बूढ़ा हो रहा है और लोग शादियां करने से भी डर रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में कुल जन्मों की संख्या घटकर 79.2 लाख रह गई, जो 2024 के 95.4 लाख जन्मों के मुकाबले करीब 17 प्रतिशत कम है. इसके साथ ही चीन की जन्म दर गिरकर 1,000 लोगों पर 5.63 रह गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है. विशेषज्ञों के मुताबिक, यह आंकड़ा चीन के इतिहास में बेहद चिंताजनक माना जा रहा है. विस्कॉन्सिन-मैडिसन विश्वविद्यालय के जनसांख्यिकी विशेषज्ञ ने कहा कि 2025 में दर्ज जन्मों की संख्या लगभग 1738 के स्तर के बराबर है, जब चीन की कुल आबादी सिर्फ 15 करोड़ के आसपास थी. वहीं, 2025 में मौतों की संख्या बढ़कर 1.13 करोड़ पहुंच गई, जो 2024 में 1.09 करोड़ थी. चीन की मृत्यु दर 1,000 लोगों पर 8.04 रही, जो 1968 के बाद सबसे अधिक है. चीन की आबादी 2022 से लगातार घट रही है और देश तेजी से बूढ़ी आबादी की ओर बढ़ रहा है. एनबीएस के अनुसार, अब चीन की कुल आबादी का करीब 23 प्रतिशत हिस्सा 60 साल से अधिक उम्र के लोगों का है. अनुमान है कि 2035 तक यह संख्या 40 करोड़ तक पहुंच जाएगी, जो अमेरिका और इटली की कुल आबादी के बराबर होगी. इस स्थिति का असर चीन की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है. कार्यबल से बड़ी संख्या में लोग बाहर हो रहे हैं, जबकि पेंशन और सामाजिक सुरक्षा बजट पर दबाव बढ़ता जा रहा है. इसी कारण चीन ने रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने का फैसला किया है. अब पुरुषों को 63 साल और महिलाओं को 58 साल तक काम करना होगा. विशेषज्ञों का कहना है कि एक बच्चे की नीति की लंबी छाया, घटती शादियां और जीवनशैली में बदलाव चीन की जनसंख्या गिरावट के बड़े कारण हैं. हालांकि सरकार को उम्मीद है कि शादी पंजीकरण नियमों में ढील से भविष्य में जन्म दर में थोड़ी राहत मिल सकती है. मसलन, चीन में लोग आर्थिक संकटों की वजह से शादियां भी नहीं कर रहे हैं और लिविंग कॉस्ट बढ़ने से शादी करने से डर रहे हैं.

जनवरी 2026 अपडेट: महिंद्रा की तीन SUVs थार, थार रॉक्स और XUV 3XO हुई महंगी

मुंबई  जनवरी 2026 की शुरुआत महिंद्रा SUV खरीदने वालों के लिए झटका लेकर आई है। देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल निर्माता महिंद्रा एंड महिंद्रा ने एक साथ अपनी तीन पॉपुलर SUVs—महिंद्रा थार, थार रॉक्स और XUV 3XO—की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी की ओर से नई एक्स-शोरूम कीमतें 17 जनवरी 2026 से लागू कर दी गई हैं। इस बढ़ोतरी का असर एंट्री लेवल से लेकर टॉप वैरिएंट तक साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। महिंद्रा थार हुई महंगी ऑफ-रोडिंग के शौकीनों की पसंद महिंद्रा थार अब पहले के मुकाबले ज्यादा कीमत पर मिलेगी। कंपनी ने इसके बेस वैरिएंट को छोड़कर बाकी सभी 2026 वैरिएंट्स की कीमतों में करीब 20 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी की है। हालांकि, थार की शुरुआती कीमत अभी भी 9.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) पर बरकरार रखी गई है, लेकिन टॉप वैरिएंट की कीमत अब बढ़कर 17.19 लाख रुपये तक पहुंच गई है। अलग-अलग इंजन और ट्रांसमिशन विकल्पों में यह बढ़ोतरी करीब 1 से 1.6 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई है, जिससे यह साफ है कि महिंद्रा ने पूरे लाइनअप में एक समान असर डाला है। थार रॉक्स की कीमतों में भी इजाफा महिंद्रा थार रॉक्स, जिसे कंपनी ने ज्यादा प्रीमियम और पावरफुल विकल्प के तौर पर पेश किया है, वह भी इस बार महंगाई से नहीं बच पाई। जनवरी 2026 में थार रॉक्स की कीमतों में करीब 21 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। सबसे ज्यादा इजाफा 2.2 लीटर टर्बो डीजल ऑटोमैटिक 4WD वैरिएंट में देखा गया है। नई कीमतों के बाद थार रॉक्स की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत करीब 12.39 लाख रुपये हो गई है, जबकि इसका टॉप वैरिएंट अब 22.25 लाख रुपये तक पहुंच गया है। प्रतिशत के लिहाज से यह बढ़ोतरी लगभग 1 प्रतिशत के आसपास है, लेकिन कीमत के स्तर पर इसका असर खरीदारों की जेब पर साफ पड़ेगा। XUV 3XO भी हुई महंगी महिंद्रा की कॉम्पैक्ट SUV XUV 3XO की कीमतों में भी जनवरी 2026 में संशोधन किया गया है। कंपनी ने इसके अलग-अलग वैरिएंट्स पर करीब 17 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी की है। सबसे ज्यादा इजाफा डीजल इंजन वाले टॉप वैरिएंट्स में देखने को मिला है। नई कीमतों के बाद XUV 3XO की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 7.37 लाख रुपये से शुरू होती है, जबकि इसका टॉप वैरिएंट अब 14.55 लाख रुपये तक पहुंच गया है। पेट्रोल और डीजल दोनों इंजन विकल्पों में यह बढ़ोतरी लगभग 1 से 1.3 प्रतिशत के बीच रही है। एक साथ बढ़ी कीमतों का क्या मतलब? महिंद्रा की इन तीनों SUVs की कीमतों में एक साथ हुई बढ़ोतरी से साफ संकेत मिलता है कि कंपनी बढ़ती लागत और बाजार स्थितियों को संतुलित करने की कोशिश कर रही है। चाहे दमदार ऑफ-रोड SUV थार हो, ज्यादा प्रीमियम थार रॉक्स या फिर फैमिली-फ्रेंडली XUV 3XO—तीनों ही मॉडल अब पहले के मुकाबले ज्यादा कीमत पर मिलेंगे। ऐसे में जो ग्राहक इन SUVs को खरीदने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए नई कीमतें जानना और बजट दोबारा तय करना जरूरी हो गया है।

भोपाल में अवैध कब्जों पर कार्रवाई: 31 गांवों में 113 कब्जों को हटाएगा बुलडोजर

भोपाल  मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई का सिलसिला  शुरु होने जा रहा है। हुजूर तहसील ने इसके लिए तहसीलदार आलोक पारे के नेतृत्व में टीम गठित की है। आज टीएल बैठक के बाद कार्रवाई शुरू होगी। ईंटखेड़ी और कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनियों के निर्माण को हटाया जाएगा। जानकारी के लिए बता दें कि इस दौरान संबंधित पर एफआइआर भी कराएंगे। ज्ञात हो कि प्रशासन पहले ही अवैध कॉलोनियां विकसित करने वाले 12 कॉलोनाइजर्स पर केस दर्ज कर चुका है। प्रशासन ने 31 गांवों में 113 अवैध कॉलोनियों चिह्नित की है। नामजद सूची तैयार की गई। अवैध कॉलोनियों की भरमार भोपाल में बीते कई दिनों से हुजूर और बैरसिया तहसील में एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई तेज है, लेकिन कोलार, गोविंदपुरा, एमपी नगर और बैरागढ़ सर्किल के एसडीएम अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई करने के मामले में गंभीर नजर नहीं आ रहे। जबकि, कलेक्टर इस मुद्दे पर पहले ही नाराजगी जता चुके हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि अफसर अब किस आदेश का इंतजार कर रहे हैं। लोगों से अपील- ‘इन्वेस्टमेंट नहीं करें’ जिला प्रशासन एवं जिला पंचायत की संयुक्त सर्वे रिपोर्ट पर हुजूर क्षेत्र की सवा सौ ऐसी कॉलोनियों को चिह्नित किया गया है, जिनमें बगैर किसी अनुमति के ही निर्माण कर लिया है। अवैध कब्जों को देखते हुए लोगों से अपील की है कि इन कॉलोनी में इन्वेस्टमेंट नहीं करें। जिन लोगों ने इन्वेस्टमेंट कर लिया है, उन्हें सुनवाई का मौका दिया जाएगा। जिला प्रशासन अवैध तरीके से की गई प्लॉटिंग और कंस्ट्रक्शन पर मप्र सरकार के निर्देशानुसार बुलडोजर चलाएगा। 90% कॉलोनियां किसानों की भूमि पर बीते दिनों जांच करने पर ये जानकारी मिली है कि 90 प्रतिशत अवैध कॉलोनियां किसानों की जमीन पर हैं। हुजूर, कोलार, बैरसिया और गोविंदपुरा तहसील क्षेत्रों में बीते एक साल के भीतर भूमाफिया ने बड़े पैमाने पर अवैध कॉलोनियां विकसित की हैं। ये कॉलोनियां कृषि भूमि पर काटी गई हैं, जिनके लिए न तो ले-आउट स्वीकृत है और न ही किसी तरह की वैधानिक अनुमति ली गई।

BPL कार्डधारकों के लिए अलर्ट: 40% परिवारों का नाम कटने की आशंका

भिंड  केंद्र सरकार के सख्त आदेश के बाद भिंड जिले में करीब 3 लाख 69 हजार परिवारों का राशन कार्ड खतरे में है। यह कार्रवाई उन परिवारों के लिए है जिनके पास 1 हेक्टेयर से अधिक जमीन है और जो पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ ले रहे हैं। खाद्य आपूर्ति विभाग के पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार जिले के 9.22 लाख परिवारों में से लगभग 40% परिवार अब अपात्र स्थिति में हैं। फरवरी तक इन परिवारों की सूची तैयार कर नोटिस जारी किए जाएंगे। नए फिल्टर से बाहर होंगे लाभार्थी: एनआईसी द्वारा किए गए मिलान में यह सामने आया कि कई परिवारों ने राशन और पीएम किसान के लिए अलग- अलग आईडी बनाई है, लेकिन जमीन का बंटवारा करवा कर नामांतरण नहीं करवाया। ऐसे में परिवारों के नाम पर दर्ज भूमि 1 हेक्टेयर से अधिक होने पर उन्हें BPL कार्ड और सरकारी राशन से बाहर किया जाएगा। फैक्ट फाइल राशन ले रहे परिवार: 2.13 लाख अपात्र होने वाले परिवार: 3.69 लाख हर महीने राशन वितरण: 15 मीट्रिक टन 1 हेक्टेयर से अधिक भूमि वाले परिवार होंगे बाहर करीब 40% परिवार होंगे वंचित खाद्य आपूर्ति विभाग का कहना है कि सभी परिवारों को सुनवाई का मौका मिलेगा, लेकिन नियमों के अनुसार राशन की 15 मीट्रिक टन आपूर्ति 6 मीट्रिक टन तक घट सकती है।

मध्य प्रदेश के 5 जिलों में संकरी गलियों का चौड़ीकरण, जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू

भोपाल   मेट्रोपॉलिटन रीजन की संकरी सड़कें भी अब चार लेन की होंगी। पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के लिए पॉलिसी में इसे शामिल किया गया है। सड़कों की चौड़ाई न्यूनतम 12 मीटर रखी गई है। निर्माण एजेंसियों को बीडीए और टीएंडसीपी के माध्यम से इसके लिए सूचित कर दिया गया है। अब इसी आधार पर प्लानिंग तय होगी। भोपाल समेत राजगढ़, सीहोर, विदिशा, रायसेन को शामिल कर करीब 12 हजार 99 वर्ग किमी क्षेत्र का बीएमआर तय किया जा रहा है। टीएंडसीपी से नई कॉलोनियों को मंजूरी में 12 मीटर रोड चौड़ाई का विशेष ध्यान रखा जाएगा। इसमें सबसे बड़ी चुनौती पुरानी बसाहटें रहेगी। यहां तीन मीटर से भी कम की गलियां हैं। मुख्यमार्ग भी सात से दस मीटर तक है। ऐसे में यहां 12 मीटर की न्यूनतम चौड़ाई लाना बड़ी चुनौती है। इस दायरे में आने वाले मकान और दुकानों को तोड़कर सड़कों का चौड़ीकरण किया जाएगा। इसलिए जरूरी चौड़ी सड़कें रीजन में 2,524 गांव शामिल किए जा रहे हैं। भोपाल से ट्रैफिक और आबादी का भार घटाते हु़ए पास के जिलों का भोपाल की तरह विकास करना इसका मुख्य उद्देश्य है। इसके लिए भोपाल से संबंधित जिलों की आपसी कनेक्टिविटी तो जरूरी है, बीएमआर में शामिल क्षेत्रों में भविष्य की बसाहट, ट्रैफिक को देखते हुए चौड़ी सड़कें जरूरी हैं। बीएमआर में सुनियोजित विकास के तहत पॉलिसी बीएमआर में सुनियोजित विकास के तहत पॉलिसी तय हो रही है। हमारी टीम इसके लिए काम कर रही है। समग्र विकास की अवधारणा को लेकर चल रहे हैं। 

नौ महीने में 30 करोड़ की वसूली, भोपाल रेल मंडल में बेटिकट यात्रियों से बढ़ा राजस्व

भोपाल  अगर आप ट्रेन में बिना टिकट या अनियमित टिकट पर सफर करने की सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। पश्चिम मध्य रेल के भोपाल मंडल ने टिकट चेकिंग अभियान के जरिए बिना टिकट सफर करने वाले मुसाफिरों की जेब पर बड़ी स्ट्राइक की है। चालू वित्तीय वर्ष के पिछले 9 महीनों (अप्रैल से दिसंबर 2025) में मंडल ने जुर्माने के रूप में 30.48 करोड़ रुपए का भारी-भरकम राजस्व वसूल किया है। 4.75 लाख यात्री धरे गए भोपाल मंडल के टिकट निरीक्षकों ने स्टेशनों और चलती ट्रेनों में सघन जांच अभियान चलाकर कुल 4 लाख 75 हजार ऐसे मामले पकड़े, जो बिना टिकट, अनियमित टिकट या अनबुक्ड लगेज के साथ यात्रा कर रहे थे। खास बात यह है कि इस बार रेलवे ने पिछले साल की तुलना में 4.45 प्रतिशत अधिक राजस्व अर्जित कर अपनी मुस्तैदी का परिचय दिया है। कुल आंकड़ा 100 करोड़ पार महाप्रबंधक के मार्गदर्शन में भोपाल सहित जबलपुर और कोटा मंडल में भी यह अभियान जोरों पर रहा। पूरे पश्चिम मध्य रेल की बात करें तो 9 महीनों में कुल 14.65 लाख मामले पकड़े गए, जिनसे 101 करोड़ 16 लाख रुपये का राजस्व मिला। यह पिछले साल की तुलना में करीब 15.80 प्रतिशत की बड़ी छलांग है। रेलवे की सख्त चेतावनी रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे हमेशा उचित टिकट लेकर ही यात्रा करें। वाणिज्य विभाग और आरपीएफ के समन्वय से यह चेकिंग अभियान आने वाले दिनों में और भी तेज किया जाएगा। गौरतलब है कि बेटिकट यात्रियों को पकड़ने के लिए समय-समय पर रेलवे की तरफ से किलाबंदी चेकिंग अभियान चलाया जाता है। इस दौरान ही बड़ी संख्या में यात्री पकड़े जाते हैं। यह रेलवे के लिए बड़ी सफलता है।  

शादी के नियम बदले गए, गहोई विवाह में 7 नहीं 8 फेरे और वचन होंगे

छतरपुर  हिन्दू रीति रिवाज की शादियों में प्राचीन समय से ही सात वचनों की परंपरा चली आई है. लेकिन छतरपुर में गहोई समाज के द्वारा अब शादियों में एक नई परंपरा शुरू कर दी है. जिसमें 7 नहीं आठ वचन वर वधू को लेने होंगे. आठवां वचन ''बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' होगा, जिससे आने वाली पीढ़ियों में लड़कियों की सख्या बढ़ सके. गहोई समाज में लगातार लड़कियों की सख्या में गिरावट आ रही है. छतरपुर में मना गहोई दिवस शहर का गहोई समाज गरीब निर्धन और जरूरतमंद बेटियों की शादी कराने के लिए एक सामाजिक कार्य हर साल अयोजित करता है. जिसे 'गहोई दिवस' के रूप में मनाया जाता है. इस अवसर पर समाज के द्वारा महीनों से तैयारी शुरू कर दी जाती है और समाज के लोगों को जिम्मेदारी सौंपी जाती है. इस वर्ष गहोई समाज के द्वारा सामूहिक कन्याय विवाह में एक नहीं परम्परा शुरू की गई. जो भी वर वधु शादी करेंगे वह 7 नहीं 8 वचन लेंगे और आठ वचन के साथ शादी सम्पन्न होगी. बेटियों को बचाने आठवां वचन आठवां वचन बेटियों को पढ़ाने और बचाने के लिए रखा गया है. जिसकी अब शहर में चर्चाओं के साथ समाज की सराहना भी हो रही है. छतरपुर में गहोई समाज के द्वारा गहोई दिवस मनाया जाता है. इस आयोजन में समाज के लोग एकत्रित होते हैं और भव्य आयोजन करते हैं. इस दिन भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है. जिसमें बैंडबाजों के साथ डीजे की धुन पर समाज की महिलाएं, पुरुष, बच्चे सभी डांस करते हुए निकलते हैं. सामूहिक विवाह में दिलवाए 8 वचन इस बार शोभायात्रा का शुभारंभ बुंदेलखंड गैरेज से शुरु हुआ. यात्रा फब्बारा चौराहा, हटवारा, गांधी चौक, गल्ला मंडी होते हुए गहोई धाम पहुंची थी. शोभायात्रा में महिलाओं में जमकर उत्साह भी देखा गया. रास्ते में जगह-जगह गहोई बंधुओं, गहोई यूथ क्लब, अग्रवाल समाज ने यात्रा का भव्य स्वागत किया तो वही कई रंगारंग कार्यक्रम अयोजित हुए. रात में एक सामूहिक कन्या विवाह का आयोजन किया गया. जिसमें 4 विवाह सम्पन्न हुए. लेकिन इस आयोजन में खास बात ये रही कि सभी वरवधू को 7 नहीं 8 वचन दिलवाए गए. क्यों लिए शादी में 8 वचन हिन्दू रीति रिवाज से होने वाली शादियों में 7 वचन वर वधू लेते हैं, लेकिन छतरपुर के गहोई समाज के द्वारा हुए सामूहिक कन्या विवाह में 8 वचन दिलवाए गए. गहोई समाज के राजेश रूसिया बताते हैं, ''समाज में लगातार लड़कियों की सख्या घट रही है, जिसको लेकर एक वचन शादी में दिलवाता गया है 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' जिससे आने वाली पीढ़ियों में लड़कियों की सख्या बढ़ेगी.'' वहीं, गहोई समाज द्वारा सामूहिक विवाह सम्मेलन में शादियों को करवाने वाले ब्राह्मण पंडित सौरभ तिवारी बताते हैं. ''हिन्दू रीति रिवाज में शादी समारोह में 7 वचन होते हैं लेकिन गहोई समाज की परंपरा के अनुसार 8 वचन दिलवाए गए हैं. महिलाओं और बेटियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए 'बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ' का वचन दिलवाया गया है.'' लड़कियों की घटती संख्या को लेकर लिया फैसला गहोई समाज के सचिव राजेश रूसिया बताते हैं, ''समाज में लगातार लड़कियों की संख्या घट रही है, जिसको लेकर समाज ने निर्णय लिया और एक और वचन शादी में जोड़ा गया.'' जब वर-वधु से बात की तो दुल्हन डोली ने बताया, ''8 वां वचन भी लिया गया है 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' का.'' दूल्हा सत्यम ने कहा, ''नई परंपरा से समाज में महिलाओं के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, भ्रुण हत्या नहीं होगी. हम ने भी शादी में आठवां वचन लिया है."

ओल्ड टैक्स रिजीम पर बजट 2026 में बड़ा फैसला? सैलरी वालों की बढ़ सकती है खुशी

 नई दिल्ली एक फरवरी को आम बजट पेश किया जाएगा. इस बजट से पहले टैक्सपेयर्स के मन में ये सवाल उठ रहा है कि ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) का भविष्य क्या होगा. क्योंकि करीब 95 फीसदी लोग न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) में शिफ्ट हो चुके हैं. दरअसल, सरकार पहले ही न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) को डिफॉल्ट विकल्प बना चुकी है, और सरकार का फोकस भी न्यू टैक्स रिजीम पर ही है. इस बीच लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि क्या बजट में सरकार ओल्ड टैक्स रिजीम को पूरी तरह से खत्म करने की घोषणा कर सकती है? ओल्ड टैक्स रिजीम का क्या होगा? हालांकि जानकार मान रहे हैं कि इस बजट में ओल्ड टैक्स रिजीम को पूरी तरह खत्म करने की संभावना कम है, लेकिन इसे धीरे-धीरे अप्रासंगिक बनाने की रणनीति जरूर अपनाई जा सकती है, क्योंकि जिस तरह से न्यू टैक्स रिजीम में लगातार पिछले कुछ वर्षों से बदलाव हो रहे हैं. उससे सरकार का रुख साफ है कि वह एक सरल, कम छूट वाला और कम विवाद वाला टैक्स सिस्टम चाहती है.  न्यू टैक्स रिजीम इसी सोच पर आधारित है, जिसमें कम टैक्स स्लैब (Tax Slab) हैं और ज्यादातर छूट और कटौतियां हटा दी गई हैं. लेकिन अभी भी ओल्ड टैक्स रिजीम उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जिनके पास होम लोन, HRA, LIC, PPF, ELSS और NPS जैसे निवेश के विकल्प हैं, यानी उन्होंने इन विकल्पों में निवेश कर रहे हैं. जानकार ये बता रहे हैं कि इस बजट में सरकार न्यू टैक्स रिजीम को और लोकप्रिय बनाने के लिए कदम उठा सकती है, ताकि बाकी टैक्सपेयर्स भी ओल्ड टैक्स रिजीम को छोड़कर न्यू में शिफ्ट हो जाएं.  न्यूज टैक्स रिजीम को लोकप्रिय बनाने की कवायद इनमें सबसे बड़ा कदम स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाना हो सकता है. अभी न्यू टैक्स रिजीम में 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है. सरकार इसे बढ़ाकर 1 लाख रुपये तक कर सकती है. इसका सीधा फायदा सैलरीड क्लास को मिल सकता है. फिलहाल स्टैंडर्ड डिडक्शन को मिलाकर 12.75 लाख रुपये तक की सैलरी पर कोई आयकर नहीं लगता है.  दूसरा बड़ा और अहम बदलाव NPS को न्यू टैक्स रिजीम में शामिल करना हो सकता है. फिलहाल ओल्ड टैक्स रिजीम में NPS पर अतिरिक्त 50,000 रुपये की छूट मिलती है, जबकि न्यू टैक्स रिजीम में यह सुविधा नहीं है. अगर सरकार न्यू टैक्स रिजीम में भी NPS (खासतौर पर एम्प्लॉयर कंट्रीब्यूशन) को टैक्स फ्री या डिडक्शन के दायरे में लाती है, तो रिटायरमेंट सेविंग को बढ़ावा मिलेगा और कॉर्पोरेट कर्मचारियों के लिए न्यू रिजीम ज्यादा आकर्षक बन जाएगी.  अगर ओल्ड टैक्स रिजीम की बात करें तो इसमें सैलरीड क्लास को 50,000 रुपये तक का स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ मिलता है. इसके अलावा 80C के तहत PF, LIC, ELSS में निवेश पर 1.5 लाख रुपये तक की छूट, 80D में हेल्थ इंश्योरेंस, HRA, और होम लोन के ब्याज पर टैक्स बचाया जा सकता है. इस रिजीम में टैक्स स्लैब 0 से 2.5 लाख तक शून्य, 5 लाख तक 5%, 10 लाख तक 20% और उससे ऊपर 30% है.