samacharsecretary.com

नर्मदा नदी के घाटों पर तैयार होंगे पानी पर तैरते हुए अस्पताल

भोपाल. मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के घाटों पर फ्लोटिंग अस्पताल शुरू कर नदी एम्बुलेंस का विस्तार किया जाएगा। इससे घाट पर आने वाले तीर्थयात्रियों, परिक्रमावासियों, आगंतुकों और स्थानीय निवासियों को स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त करने में सुगमता होगी। राज्य सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। फिलहाल आलीराजपुर, धार और बड़वानी जिलों में नदी किनारे बसे लोगों को चिकित्सीय सुविधाएं देने के लिए नदी एम्बुलेंस शुरू की गई हैं, जो आपात स्थिति में प्राथमिक उपचार व दवाएं उपलब्ध कराने में मददगार साबित होंगी। आदिवासी इलाकों के लिए महत्वपूर्ण कदम खासकर बाढ़ प्रभावित और दूरदराज के आदिवासी इलाकों के लिए यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके अलावा वेलनेस और योग टूरिज्म में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए घाटों पर योग, ध्यान केंद्र और पार्क निर्माण भी किए जाएंगे। नर्मदा के घाटों पर प्रतिदिन 2.5 लाख आते हैं श्रद्धालु नर्मदा नदी के 861 घाटों पर प्रतिदिन लगभग 2.5 लाख से अधिक पर्यटक, श्रद्धालु, तीर्थयात्री आते हैं। 396 सूक्ष्म आकार के घाटों पर एक लाख आठ हजार से अधिक, 338 मध्यम आकार के घाटों पर 95 हजार और 116 वृहद आकार के घाटों पर 65 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं।

बीच सड़क पर शराब पीने से रोका तो ट्रैफिक पुलिसकर्मी का फोड़ा सिर

इंदौर. कनाड़िया थाना क्षेत्र के बिचौली अंडरपास में ड्यूटी पर तैनात यातायात पुलिसकर्मी ने ड्राइवर और क्लीनर को शराब पीने से रोका तो उन्होंने पत्थर से सिर फोड़ दिया। वह लहूलुहान हालत में कनाड़िया थाने गया तो वहां भी उसकी मदद नहीं की गई। इसके बाद वह स्वयं इलाज करवाकर घर लौट गया। हालांकि बाद में पुलिस ने आरोपित ड्राइवर और मालिक के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा सहित अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज किया। यातायात पुलिसकर्मी अनुराग शर्मा ने बताया कि बिचौली अंडर ब्रिज पर स्कीम 140 पर भारी वाहन प्रवेश रोकने के लिए बल लगाया था, वहां मेरी ड्यूटी थी। एक चार पहिया वाहन में दो लोग बैठकर शराब पी रहे थे। इस पर उन्हें रोका और आरक्षक विष्णु भदौरिया को बुलाया। जिसके पास वायरलेस सेट था, उसे कहा कि आगे सूचना दी जाए। इस पर ड्राइवर ने हाथ जोड़कर कहा कि मालिक पीछे ही रहते हैं, उन्हें बुला लेता हूं। मालिक ने आते ही ड्राइवर-क्लीनर को भगाया पुलिसकर्मी ने बताया कि मालिक आया और ड्राइवर-क्लीनर को मौके से भगा दिया। इसके बाद वह अपशब्द कहने लगा। इस पर उसे पकड़ लिया था, इसके बाद छोड़ा तो पीछे से आकर सिर पर पत्थर मार दिया। इसके बाद कनाड़िया थाने गया और वहां पांच मिनट बैठा रहा। मुझे उम्मीद थी कि कोई मदद करेगा। थाने में खून टपक रहा था फर्श पर लेकिन इसके बावजूद कोई पुलिसकर्मी मदद के लिए नहीं आया। इसके बाद गुस्से में घर चले गया। मामले में यातायात डीसीपी आनंद कलादगी का कहना है कि आरोपित शराब पी रहे थे, इस पर ट्रैफिक कर्मचारी वहां पहुंचा। दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। कनाड़िया पुलिस ने पुलिसकर्मी की मदद की और उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर गए। आरोपितों को हिरासत में ले लिया गया।

राहुल गांधी के वीडियो से उठा भागीरथपुरा की मौतों और प्रशासन के डेथ ऑडिट पर सवाल

इंदौर. कांग्रेस नेता राहुल गांधी के भागीरथपुरा दौरे के वीडियो से दूषित पानी पीने से हुई मौतों की संख्या पर फिर सवाल खड़ा हो गया है। सवाल राहुल गांधी ने खुद नहीं उठाया है। इंदौर में राहुल गांधी ने पत्रकारों से कहा था कि लोगों को डराया जा रहा है। अब वीडियो में राहुल गांधी से बात करते हुए भागीरथपुरा के रहवासी कहते सुनाई दे रहे हैं कि 29 जनवरी को जब क्षेत्र में फैली बीमारी मीडिया की सुर्खी बनी, उससे पहले ही लोग बीमार हो रहे थे और मौतें भी हुईं। खुद लोगों ने राहुल के सामने कह दिया कि बीमार हुए और मरने वालों का आंकड़ा छुपाया गया है। इस वीडियो के बाद प्रशासन ने जो डेथ ऑडिट किया, उस पर भी सवाल खड़े हुए हैं। रहवासी कह रहे हैं कि जब 200 से 250 मरीज अस्पताल पहुंचे, तब प्रशासन ने संज्ञान लिया। 21 मौतों का ही विश्लेषण किया गया कोर्ट के दबाव में प्रशासन ने जो डेथ ऑडिट किया, उसमें 12 जनवरी तक हुई 21 मौतों का ही विश्लेषण किया गया। इसमें अलग-अलग श्रेणी में मौतों को रखा गया। छह मौतों को सीएमएचओ ने महामारी से हुई मौत बताया। इन मृतकों के नाम उर्मिला, तारा, नंदलाल, हीरालाल, अरविंद और पांच माह का अव्यान है। इसके अलावा चार मौतों को महामारी से जुड़ी संभावित मौत माना गया। इनमें गीता, उमा कोरी, गोमती व श्रवण के नाम हैं। अस्पताल पहुंचने से पहले हुई चार मौत भी इसी से संभावित मानी गई। इनमें सीमा, जीवन, रामकली व हरकुबाई का नाम शामिल है। दो मौत महामारी से पहले हो चुकी थीं, यह भी डेथ ऑडिट में माना गया। इस श्रेणी के मृतकों में सुमित्रा व संतोष का नाम रखा गया। प्रशासन महामारी 24 दिसंबर से मानता है प्रशासन महामारी 24 दिसंबर से मानता है। कमला पत्नी तुलसीराम व सुनीता पत्नी सतीश इस तारीख से पहले मर चुकी थीं। इसलिए इन दो मौतों को भी भागीरथपुरा त्रासदी की सूची से बाहर रखा गया। इसके अलावा चार मौतों को तो महामारी से अलग कारणों से होना बताया गया। इनमें अशोक, शंकर लाल, कमला व सुनीता का नाम है। मंजुला नामक महिला की रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं है। जबकि क्षेत्रवासियों के अनुसार अन्य मृतक भी हैं, जिनमें सुमित्रा देवी, अशोकलाल पंवार, गोमती रावत, उर्मिला यादव, जीवनलाल बरेड़े, सीमा प्रजापत, संतोष बिगोलिया, अव्यान साहू, श्रवण खुपराव, रामकली, नंदलाल, उमा कोरी, मंजुला वाढ़े, ताराबाई, हीरालाल, अरविंद लिखर, गीताबाई, हरकुंवर बाई, शंकर भाया, ओमप्रकाश शर्मा, सुनीता वर्मा और भगवानदास का नाम शामिल है। एक अन्य सुभद्राबाई की मौत 15 जनवरी को हुई, जिसका प्रशासन ने खंडन किया और कहा कि डायरिया से इस मौत का कोई वास्ता नहीं है। इस तरह आम लोगों के आंकड़े में इन सभी मौतों को मिलाकर मरने वालों की संख्या 24 हो रही है।

अब UPI से मिलेगा PF का पैसा, सरकार का बड़ा ऐलान: जानिए कितनी राशि और कब तक

नई दिल्ली  कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने 8 करोड़ मेंबर्स के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी कर ली है। अप्रैल 2026 तक इसके सदस्य UPI के जरिए अपनी कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) से पात्र राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर कर सकेंगे। PF निलकने का बदल जाएगा नियम  रिपोर्ट्स के अनुसार, नई व्यवस्था में PF मेम्बेर्स अपने UPI पिन का उपयोग करके सुरक्षित लेनदेन पूरा कर सकेंगे। खाते में एक न्यूनतम हिस्सा (25 प्रतिशत) सुरक्षित रहेगा ताकि मेम्बेर्स को वर्तमान 8.25 प्रतिशत ब्याज दर और चक्रवृद्धि ब्याज का लाभ मिलता रहे। बचा हुआ पैसा तुरंत बैंक खाते में पहुंच जाएगा, जिसके बाद इसे डिजिटल पेमेंट, एटीएम से नकद निकासी या डेबिट कार्ड के जरिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। खामियां को दूर करने में जुटा EPFO EPFO वर्तमान में इस सिस्टम को सुचारू रूप से लागू करने के लिए तकनीकी चुनौतियों और सॉफ्टवेयर संबंधी खामियों को दूर करने का काम तेजी से कर रहा है। फिलहाल सदस्यों को निकासी के लिए क्लेम फाइल करना पड़ता है, जो समय लेने वाला प्रोसेस है। ऑटोमैटिक सेटलमेंट में भी तीन दिन लगते हैं। नई व्यवस्था से यह प्रक्रिया और तेज हो जाएगी। ऑटो-सेटलमेंट की शुरू हुई सेवा  ईपीएफओ ने कोविड-19 महामारी के दौरान वित्तीय संकट में फंसे लोगों को तुरंत मदद के लिए ऑनलाइन ऑटो-सेटलमेंट की शुरुआत की थी। बता दें हर साल 5 करोड़ से अधिक दावों का निपटारा होता है, जिनमें ज्यादातर निकासी से जुड़े होते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार ईपीएफओ अपने सदस्यों को सीधे ईपीएफ खातों से पैसे निकालने की अनुमति नहीं दे सकता क्योंकि उसके पास कोई बैंकिंग लाइसेंस नहीं है। हालांकि, सरकार ईपीएफओ की सेवाओं को बैंकों जैसा बेहतर और सुविधाजनक बनाने पर जोर दे रही है। अक्टूबर में सरल हुए नियम  अक्टूबर 2025 में ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी मंडल ने आंशिक निकासी के प्रावधानों को सरल बनाने को मंजूरी दी। पहले के 13 शर्तों को घटाकर तीन मुख्य श्रेणियों में समेट दिया गया है 1. आवश्यक जरूरतें (बीमारी, शिक्षा, शादी) 2. आवासीय जरूरतें। 3. विशेष परिस्थितियां। अब सदस्य पात्र राशि का 100 प्रतिशत तक निकाल सकेंगे, जबकि न्यूनतम हिस्सा सुरक्षित रहेगा। निकासी की सीमा भी बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है। क्या पूरा PF निकाला जा सकेगा? हां। नए प्रावधानों के तहत सदस्य अपने EPF खाते में उपलब्ध 100% योग्य राशि, जिसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का अंश निकाल सकेंगे। हालांकि, योजना में यह भी प्रावधान किया गया है कि खाते में कम से कम 25% योगदान हमेशा न्यूनतम बैलेंस के रूप में बना रहेगा, ताकि 8.25% सालाना ब्याज और कंपाउंडिंग का फायदा मिलता रहे और रिटायरमेंट कॉर्पस सुरक्षित रहे। इस बदलाव से सदस्यों को क्या फायदा होगा?     क्लेम फाइल करने की जरूरत लगभग खत्म     तेज, सुरक्षित और आसान निकासी     EPFO पर प्रशासनिक बोझ कम डिजिटल इंडिया के अनुरूप PF सेवाएं कुल मिलाकर, EPFO की UPI-आधारित निकासी सुविधा PF को एक “लॉक्ड रिटायरमेंट फंड” से बदलकर जरूरत के समय तुरंत उपलब्ध वित्तीय सहारा बना देगी वह भी बिना लंबी प्रक्रिया और कागजी झंझट के होगा।    

उत्तराखंड: दो दिन में बिगड़ सकता है मौसम, पर्वतीय क्षेत्रों में भारी वर्षा और हिमपात की संभावना

देहरादून उत्तराखंड में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून की ओर से जारी ताजा पूर्वानुमान के अनुसार प्रदेश में अगले दो दिनों तक मौसम शुष्क बना रहेगा, लेकिन इसके बाद मौसम के मिजाज में बदलाव देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के अनुसार, 19 और 20 जनवरी को पूरे प्रदेश में मौसम शुष्क रहेगा। इस दौरान पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में धूप खिली रह सकती है। हालांकि, सुबह और शाम के समय ठंड बनी रहेगी। पूर्वानुमान के अनुसार 21 जनवरी से 24 जनवरी तक प्रदेश के पर्वतीय जिलों में हल्की बारिश के साथ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है। उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों के कुछ हिस्सों में 21 जनवरी को हल्की बारिश हो सकती है, जिससे ठंड में इजाफा होने की संभावना है। वहीं, मैदानी इलाकों में कोहरे का असर बढ़ सकता है। घना कोहरा छाने से तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे सुबह और रात के समय ठंड और अधिक महसूस होगी। इससे पहले, 18 जनवरी को मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने बताया कि 21 जनवरी को राज्य के उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर एवं पिथौरागढ़ जनपदों में कहीं-कहीं बहुत हल्की से हल्की वर्षा/बर्फबारी (3400 मीटर व उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में) होने की संभावना है। राज्य के शेष जनपदों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। इसी तरह, 22 जनवरी को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर एवं पिथौरागढ़ जनपदों के कुछ स्थानों में बहुत हल्की से हल्की वर्षा/बर्फबारी (3200 मीटर व उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में) होने की संभावना है। राज्य के शेष जनपदों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। वहीं, 23 जनवरी को उत्तरकाशी, चमोली एवं पिथौरागढ़ जनपदों के अनेक स्थानों में हल्की से मध्यम वर्षा/बर्फबारी (3000 मीटर व उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में) होने की संभावना है। राज्य के शेष पर्वतीय जनपदों के कुछ स्थानों तथा मैदानी जनपदों में कहीं-कहीं बहुत हल्की से हल्की वर्षा/बर्फबारी (3000 मीटर व उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में) होने की संभावना है। इसके अलावा, 24 जनवरी को उत्तरकाशी, चमोली एवं पिथौरागढ़ जनपदों के अनेक स्थानों में हल्की से मध्यम वर्षा बर्फबारी (3000 मीटर व उससे अधिक ऊँचाई वाले क्षेत्रो में) होने की संभावना है। राज्य के शेष पर्वतीय जनपदों के कुछ स्थानों तथा मैदानी जनपदों में कहीं-कहीं बहुत हल्की से हल्की वर्षा बर्फबारी (3000 मीटर व उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रो में) होने की संभावना है।

गोमांस को भैंस का सर्टिफाइड कर डॉ. बीपी गौर की मिलीभगत से खाड़ी देशों में हो रहा सप्लाई

भोपाल. शहर के जिंसी स्थित स्लाटर हाउस से पकड़े गए 26 टन गोमांस के मामले में अब जांच ने चौंकाने वाले अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। यह कोई स्थानीय अवैध कारोबार नहीं, बल्कि एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय निर्यात गिरोह का हिस्सा बताया जा रहा है। जांच में सामने आया है कि असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा, नगर निगम के कथित संरक्षण की आड़ में प्रतिबंधित गोमांस को बैंकाक, दुबई और अन्य खाड़ी देशों तक पहुंचा रहा था। इस नेटवर्क में फर्जी दस्तावेज, अत्याधुनिक पैकिंग तकनीक और समुद्री बंदरगाहों का इस्तेमाल कर सुरक्षित कॉरिडोर तैयार किया गया था। कैसे चलता था पूरा नेटवर्क जांच एजेंसियों के अनुसार, जिंसी स्लाटर हाउस में गोवंश के कटान के बाद मांस को वैज्ञानिक तरीके से पैक किया जाता था। इसके बाद फर्जी या साठगांठ वाले पशु चिकित्सक प्रमाण-पत्रों के आधार पर गोमांस को कागजों में भैंस का मांस घोषित कर दिया जाता था। आरोप है कि निगम के सरकारी पशु चिकित्सक डॉ. बीपी गौर इन प्रमाण-पत्रों में गोमांस को भैंस का मांस दिखाते थे, जिससे कस्टम और निर्यात एजेंसियों की जांच से बचा जा सके। अंतरराष्ट्रीय मानकों जैसी पैकेजिंग सूत्रों के मुताबिक, जब्त किए गए मांस की पैकेजिंग अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पाई गई है। प्रत्येक पैकेट पर क्यूआर कोड और टैग लगे थे, ताकि विदेशी खरीदार आसानी से माल की पहचान कर सकें। मांस को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए अत्याधुनिक वैक्यूम सीलिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया था, जिससे उसकी गंध बाहर न आए और वह महीनों तक खराब न हो। बंदरगाहों तक भेजा जाता था माल तस्करी का माल सीधे मुंबई और चेन्नई के बंदरगाहों तक भेजा जाता था। कई बार रेलवे पार्सल सेवा का भी दुरुपयोग किया गया। सूत्रों का कहना है कि गिरोह ने पूरे कारोबार को कार्पोरेट मॉडल की तरह संचालित किया था, जिसमें लॉजिस्टिक्स, डॉक्यूमेंटेशन और सप्लाई चैन को व्यवस्थित ढंग से संभाला जाता था। राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने आरोप लगाया कि इस मामले में बड़े लोग शामिल हैं और असलम के दुबई में भी संपर्क हैं। उन्होंने कहा कि असलम हर सप्ताह दुबई जुआ खेलने जाता था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अब तक न तो मुख्यमंत्री ने इस पर बयान दिया है और न ही पुलिस ने असलम को रिमांड पर लिया है। प्रशासन और पुलिस का पक्ष निगमायुक्त संस्कृति जैन ने कहा कि मामला फिलहाल पुलिस जांच में है और अभी किसी पर एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। जांच पूरी होने के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी। वहीं, एडिशनल डीसीपी जोन-एक रश्मि अग्रवाल दुबे ने बताया कि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि गोमांस कहां भेजा जा रहा था। आरोपितों को जेल भेजा गया है और दोबारा रिमांड पर लेकर विस्तृत पूछताछ की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की जांच एसआईटी को सौंप दी गई है।

टिकट रद्द करने से पहले जरूरी जानकारी: वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में रिफंड के नियम

नई दिल्ली हाल ही में पीएम मोदी ने देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाई है. पश्चिम बंगाल के हावड़ा से असम के गुवाहाटी के बीच चलने वाली यह ट्रेन 14 घंटे में सफर तय करेगी. वहीं वंदे भारत ट्रेन के टिकट और रियायतों से जुड़े नियम दूसरी ट्रेनों से अलग है. दरअसल भारतीय रेलवे ने नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के लिए टिकट कैंसिलेशन और रिफंड से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है. इन प्रीमियम ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को अब टिकट कैंसिल करने पर पहले की तुलना में ज्यादा चार्ज देना होगा. रेलवे के नए नियमों के अनुसार तय समय सीमा के अंदर टिकट कैंसिल नहीं करने पर यात्रियों को पूरा रिफंड नहीं मिलेगा और कुछ मामलों में तो रिफंड बिल्कुल भी नहीं होगा.  अब टिकट कैंसिल करने पर कितना कटेगा पैसा? रेलवे की ओर से जारी नई गाइडलाइन के अनुसार वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की कंफर्म टिकट कैंसिल करने पर अलग अलग समय सीमा में अलग चार्ज तय किया गया है. दरअसल अब अगर कोई यात्री टिकट खरीदने के बाद उसे कभी भी कैंसिल करता है तो कम से कम 25 प्रतिशत  राशि काटी जाएगी. वहीं अगर टिकट ट्रेन के निर्धारित डिपार्चर टाइम से 72 घंटे से लेकर 8 घंटे पहले तक कैंसिल किया जाता है तो किराए का 50 प्रतिशत हिस्सा काट लिया जाएगा. वहीं सबसे सख्त नियम यह है कि अगर टिकट ट्रेन के रवाना होने से 8 घंटे से कम समय पहले कैंसिल किया गया तो यात्रियों को किसी तरह का कोई रिफंड नहीं मिलेगा.  क्यों बदले गए नियम? रेलवे अधिकारियों के अनुसार ये नए नियम इसलिए लागू किए गए हैं क्योंकि अब वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के लिए रिजर्वेशन चार्ट ट्रेन के चलने से 8 घंटे पहले तैयार किया जाएगा. पहले यह प्रक्रिया 4 घंटे पहले होती थी. इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए कैंसिलेशन पॉलिसी  को भी सख्त किया गया है.  बाकी ट्रेनों से कैसे अलग है यह नियम? वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के कैंसिलेशन नियम अन्य ट्रेनों और मौजूदा वंदे भारत चेयर कार ट्रेनों से काफी अलग है. आम ट्रेनों में तय समय से पहले टिकट कैंसिल करने पर एक फ्लैट चार्ज लिया जाता है. जैसे फर्स्ट एसी में 240 रुपये, सेकंड एसी में 200, थर्ड एसी में 180, स्लीपर में 120 रुपये और सेकंड क्लास में 60 रुपये लिए जाते हैं.  लेकिन वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में फ्लैट चार्ज की जगह प्रतिशत के हिसाब से कटौती की जाएगी, जिससे यात्रियों पर ज्यादा आर्थिक बोझ पड़ सकता है.  नहीं मिलेगी RAC की सुविधा  रेलवे बोर्ड ने यह भी साफ किया है कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में केवल कन्फर्म टिकट ही जारी किए जाएंगे. यानी इन ट्रेनों में RAC रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन की कोई व्यवस्था नहीं होगी. यही वजह है कि टिकट कैंसिलेशन के नियमों को और सख्त बनाया गया है. इसके अलावा नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में सिर्फ कुछ चुनिंदा कोटे ही लागू होंगे. इनमें महिलाओं का कोटा, दिव्यांग यात्रियों का कोटा, वरिष्ठ नागरिकों का कोटा और ड्यूटी पास पर यात्रा करने वालों का कोटा शामिल है. इसके अलावा किसी और तरह का आरक्षण लागू नहीं होगा. साथ ही इन ट्रेनों के लिए न्यूनतम चार्जेबल दूरी 400 किलोमीटर तय की गई है. About the author कविता गाडरी कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है.  पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए.  इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

नई रिपोर्ट में खुलासा: मिलान-कोर्टिना 2026 ओलंपिक्स की स्पॉन्सरशिप बढ़ा रही पर्यावरणीय खतरा

मिलान        इटली में 6 से 22 फरवरी 2026 तक होने वाले मिलान-कोर्टिना विंटर ओलंपिक गेम्स से पहले एक नई रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है. रिपोर्ट का नाम Olympics Torched है, जिसे Scientists for Global Responsibility (SGR) और New Weather Institute ने जारी किया है. यह रिपोर्ट विश्व स्नो डे (18 जनवरी 2026) पर जारी हुई. रिपोर्ट कहती है कि ओलंपिक्स की स्पॉन्सर कंपनियां, जो बहुत प्रदूषण फैलाती हैं, स्नो और बर्फ को तेजी से पिघला रही हैं. विंटर स्पोर्ट्स तभी हो पाएंगे जब बर्फ रहेगी, लेकिन इनकी वजह से स्नो तेजी से पिघल रही है.  ओलंपिक्स से कितना कार्बन उत्सर्जन?     सिर्फ गेम्स आयोजित करने से लगभग 9.3 लाख टन CO₂ उत्सर्जन होगा.     2.3 वर्ग किमी स्नो कवर (बर्फ की परत) खो सकती है – जो लगभग 1300 हॉकी रिंक जितना क्षेत्र है.     साथ ही 1.4 करोड़ टन से ज्यादा ग्लेशियर बर्फ पिघल सकती है. स्पॉन्सरशिप का बड़ा रोल गेम्स के तीन मुख्य स्पॉन्सर – तेल और गैस कंपनी Eni, कार मैन्युफैक्चरर Stellantis और इटली की एयरलाइन ITA Airways – बहुत ज्यादा कार्बन उत्सर्जन वाली कंपनियां हैं. रिपोर्ट कहती है… इन तीन स्पॉन्सरशिप डील्स से अतिरिक्त 13 लाख टन CO₂ उत्सर्जन हो सकता है. कुल उत्सर्जन 40% से ज्यादा बढ़ जाएगा (करीब 2.3 मिलियन टन तक). इससे 5.5 वर्ग किलोमीटर स्नो कवर खो सकता है (3,000+ हॉकी रिंक जितना) और 3.4 करोड़ टन ग्लेशियर बर्फ पिघल सकती है. Eni अकेले इन अतिरिक्त उत्सर्जन का आधे से ज्यादा हिस्सा देगी. ये स्पॉन्सरशिप गेम्स को प्रमोट करती हैं, जिससे इन कंपनियों की ब्रांडिंग बढ़ती है. उनके प्रोडक्ट्स (तेल, गैस, कार, फ्लाइट्स) ज्यादा बिकते हैं – जो और प्रदूषण फैलाते हैं. एथलीट्स और वैज्ञानिकों की चेतावनी स्वीडिश क्रॉस-कंट्री स्कीयर Björn Sandström कहते हैं कि ओलंपिक्स हमेशा उत्सर्जन पैदा करेंगे, लेकिन उन्हें कम करना जरूरी है. सबसे बड़ा प्रभाव दुनिया को दिया जाने वाला संदेश है. जब फॉसिल फ्यूल स्पॉन्सरशिप से संदेश जाता है, तो यह जलवायु विज्ञान के खिलाफ है. विंटर स्पोर्ट्स के भविष्य को खतरे में डालता है. ग्रीनलैंड की बायएथलीट Ukaleq Slettemark (वर्ल्ड जूनियर चैंपियन) कहती हैं कि यह उचित नहीं कि विंटर स्पोर्ट्स ऑयल कंपनियों को अच्छा दिखने का प्लेटफॉर्म दें, जबकि वे जलवायु परिवर्तन के सबसे बड़े कारण हैं. यह पूरी तरह विरोधाभासी है – फॉसिल फ्यूल उद्योग सर्दियों को गायब कर रहा है. विंटर स्पोर्ट्स को खत्म कर रहा है. वैज्ञानिक Stuart Parkinson (SGR डायरेक्टर) कहते हैं कि विंटर स्पोर्ट्स जलवायु परिवर्तन के शिकार और कारण दोनों हैं. पिछले 5 सालों में इटली में 265 स्की रिसॉर्ट्स बंद हो चुके हैं. फ्रांस और स्विट्जरलैंड में भी कई सुविधाएं बंद हुई हैं. भारत के हिमालय में भी असर भारत के हिमालय में पहले से ही बर्फबारी कम हो रही है. तापमान बढ़ रहा है और कार्बन उत्सर्जन से ग्लेशियर पिघल रहे हैं. यह वैश्विक समस्या है. ओलंपिक्स जैसे बड़े इवेंट्स अगर प्रदूषण बढ़ाते हैं, तो हिमालय जैसी जगहों पर और असर पड़ेगा – जहां लाखों लोग पानी और पर्यटन पर निर्भर हैं. क्या समाधान हैं?     नए वेन्यू और इंफ्रास्ट्रक्चर न बनाएं.     हवाई यात्रा से आने वाले दर्शकों की संख्या कम करें.     फॉसिल फ्यूल और हाई-पॉल्यूशन कंपनियों से स्पॉन्सरशिप खत्म करें.     ओलंपिक्स को क्लीन एनर्जी और क्लाइमेट सॉल्यूशंस का प्लेटफॉर्म बनाएं. कैंपेनर्स और एथलीट्स इंटरनेशनल ओलंपिक कमिटी (IOC) और विंटर स्पोर्ट्स बॉडीज से मांग कर रहे हैं कि फॉसिल फ्यूल स्पॉन्सरशिप पर बैन लगे. रिपोर्ट कहती है कि अगर बदलाव नहीं हुआ तो भविष्य में विंटर ओलंपिक्स के लिए बर्फ ही नहीं बचेगी. यह रिपोर्ट बताती है कि ओलंपिक्स जैसे उत्सव अब विरोधाभास बन गए हैं – जहां उत्सव मनाने के लिए ही वह चीज (स्नो और बर्फ) खत्म हो रही है जिस पर खेल निर्भर हैं. 2026 गेम्स से पहले दुनिया को सोचना होगा – क्या हम विंटर स्पोर्ट्स बचाना चाहते हैं या प्रदूषण फैलाने वालों को प्रमोट करना? 

₹35,000 करोड़ का निवेश, 12 हजार नई नौकरियां, 10 लाख कारों का प्रोडक्शन – Maruti की बड़ी योजना

  नई दिल्ली    Maruti New Plant in Gujarat: भारत की सड़कों पर दौड़ती हर दूसरी कार में मारुति की झलक मिल जाती है. मारुति तकरीबन आधे कार बाजार पर काबिज है और अब यही मारुति सुजुकी इतिहास का एक और बड़ा अध्याय लिखने जा रही है. गुजरात की धरती पर 35,000 करोड़ रुपये का निवेश, एक ऐसे प्लांट की शुरुआत जो हर साल 10 लाख नई गाड़ियाँ बनाएगा, और हजारों लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएगा. तो आइये जानें क्या है मारुति सुजुकी का मेगा प्रोडक्शन प्लान. मारुति सुजुकी गुजरात में एक नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाएगी, जिस पर करीब 350 अरब रुपये यानी 35,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इस प्लांट से हर साल करीब 10 लाख गाड़ियों का उत्पादन किया जाएगा. इसका मकसद सिर्फ भारत में बढ़ती मांग को पूरा करना नहीं है, बल्कि एक्सपोर्ट मार्केट में भी कंपनी की पकड़ मजबूत करना है. इस नई फैक्ट्री में उत्पादन साल 2029 से शुरू होने की उम्मीद है. इसके बाद मारुति की कुल सालाना उत्पादन क्षमता 24 लाख से बढ़कर करीब 34 लाख गाड़ियों तक पहुंच जाएगा. जापान की सुजुकी मोटर की हिस्सेदारी वाली मारुति सुजुकी पहले से ही भारत की नंबर वन कार कंपनी है और यह निवेश उसकी बादशाहत को और मजबूत करेगा. मारुति के एंट्री लेवल मॉडल्स की मांग आसमान छू रही है. कंपनी के मुताबिक इन गाड़ियों पर करीब डेढ़ महीने का ऑर्डर बैकलॉग चल रहा है. यानी लोग खरीदना चाहते हैं, लेकिन गाड़ी मिलने में इंतजार करना पड़ रहा है. यही वजह है कि कंपनी उत्पादन बढ़ाने के लिए इतने बड़े कदम उठा रही है. इस नए प्लांट में प्रोडक्शन शुरू होने के बाद कारों की वेटिंग से भी निजात मिलने की उम्मीद है. जमीन खरीदने के लिए पहली किस्त मंजूर मारुति के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने इस हफ्ते 4,960 करोड़ रुपये की शुरुआती रकम मंजूर की है, ताकि गुजरात में इस नए प्लांट के लिए जमीन खरीदी जा सके. इससे पहले कंपनी ने साफ किया था कि, वह साणंद में नया ऑटोमोबाइल प्लांट लगाने के लिए गुजरात सरकार से जमीन लेने की प्रक्रिया में है. अब मारुति सुजुकी ने 35 हजार करोड़ के निवेश के लिए निवेश पत्र गुजरात सरकार को सौंपा है. मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड खोरज में 1750 एकड़ भूमि पर 35 हजार करोड़ रुपये के निवेश से एक नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाएगी. 12 हजार नौकरियां उम्मीद की जा रही है कि, मारुति सुजुकी के इस नए प्लांट से संभावित रूप से 12 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा. इतना ही नहीं, इस नए प्लांट के चलते आसपास के इलाकों में कुछ अन्य छोटे और मिडियम साइज इंडस्ट्री यूनिट्स भी शुरू होने की संभावना है. जिससे लगभग 75 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा. इस प्रोजेक्ट के तहत, सालाना 25 लाख कारों की उत्पादन क्षमता वाले 4 प्लांट डेवलप किए जाएंगे, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता प्रति वर्ष 10 लाख कारों की होगी. कंपनी 2029 से पहले इस प्लांट में प्रोडक्शन शुरू करने का लक्ष्य लेकर चल रही है. बताते चलें कि, इस नए प्लांट के निर्माण के लिए गुजरात सरकार और मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के बीच 2024 वाइब्रेंट समिट में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया था.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2012 में सुजुकी मोटर्स को पहली बार गुजरात में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया था. जिसके बाद गुजरात में मारुति का पहला प्लांट हंसलपुर में शुरू किया गया था. इस समय यह प्लांट सालाना 7.50 लाख कारों का उत्पादन करता है, जिसे आने वाले समय में बढ़ाकर 10 लाख यूनिट प्रति वर्ष करने की योजना है. भारत में मारुति के कितने प्लांट मौजूदा समय में मारुति सुजुकी के कुल 3 प्लांट हैं. जिनमें सालाना तकरीबन 23.5 लाख कारों का प्रोडक्शन होता है. इनमें से दो हरियाणा (गुरुग्राम और मानेसर) में और एक गुजरात में हैं. हाल ही में, मारुति सुजुकी ने हरियाणा के खरखौदा में अपने नए ग्रीनफील्ड प्लांट में भी उत्पादन शुरू किया है, जिसकी सालाना क्षमता 2.50 लाख यूनिट है. इसके अलावा गुजरात में एक और ग्रीनफील्ड प्लांट स्थापित करने की योजना है.

दो करोड़ से ज्यादा दोपहिया बिकने के बावजूद नहीं टूटा 7 साल का रिकॉर्ड, वजह जानें

नई दिल्ली भारत का दोपहिया वाहन बाजार एक बार फिर मजबूती के साथ आगे बढ़ता दिख रहा है. साल 2025 में टू-व्हीलर बिक्री ने दो करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया, जो ऑटो इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है. बीते कुछ वर्षों की सुस्ती के बाद बाजार में लौटी यह तेजी कंपनियों और ग्राहकों दोनों के लिए राहत लेकर आई है. हालांकि, बिक्री अब भी 2018 में बनाए गए सेल्स रिकॉर्ड से थोड़ा नीचे है, लेकिन रुझान साफ तौर पर सकारात्मक नजर आ रहा है. सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स यानी SIAM के आंकड़ों के मुताबिक, बीते साल 2025 में भारत में कुल दो करोड़ से ज्यादा टू-व्हीलर बिके. यह 2024 में बेचे गए 1.9 करोड़ स्कूटर-बाइक्स की तुलना में करीब पांच प्रतिशत ज्यादा है. इसके बावजूद, 2018 में दर्ज 2.1 करोड़ यूनिट्स की ऐतिहासिक बिक्री का रिकॉर्ड अब तक नहीं टूट पाया है. हीरो और होंडा की बादशाहत  बिक्री के मामले में हीरो मोटोकॉर्प ने एक बार फिर बाजी मारी. कंपनी ने 2025 में 57.5 लाख यूनिट्स बेचकर नंबर एक की पोजिशन पर कब्जा बनाए रखा और सालाना आधार पर 2% की बढ़त दर्ज की. वहीं होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया दूसरे स्थान पर रही, जिसने 54 लाख यूनिट्स की बिक्री की. यह 2024 के मुकाबले करीब 1.9 प्रतिशत ज्यादा है. टीवीएस की तेज छलांग, बजाज को झटका टीवीएस मोटर कंपनी ने इस साल सबसे तेज बढ़त दर्ज की. कंपनी की बिक्री में 15.7 प्रतिशत का उछाल आया और कुल 39.8 लाख यूनिट्स दोपहिया वाहनों की बिक्री की. दूसरी ओर, बजाज ऑटो के लिए साल कुछ चुनौतीपूर्ण रहा. कंपनी की बिक्री में 5.1 प्रतिशत की गिरावट आई और 2025 में 22.2 लाख यूनिट्स ही बिक पाए. सुजुकी मोटरसाइकिल इंडिया ने हालांकि अच्छा प्रदर्शन किया और 10.8 प्रतिशत की बढ़त के साथ 11.3 लाख यूनिट्स की बिक्री दर्ज की. घरेलू बाजार में मांग बढ़ने के पीछे कई कारण रहे. शुरुआत में टियर-1 शहरों में स्कूटर की मांग तेजी से बढ़ी, जबकि मोटरसाइकिल की बिक्री बाद में रफ्तार पकड़ती दिखी. SIAM के अनुसार, इनकम टैक्स में राहत, जीएसटी 2.0 में बदलाव और रेपो रेट में कटौती ने ग्राहकों की जेब पर दबाव कम किया. इससे दोपहिया वाहनों की खरीद आसान हुई. इस साल का फेस्टिव सीजन भी बीते कई वर्षों में सबसे मजबूत रहा. एक्सपोर्ट बाजार में भी बढ़ी डिमांड सिर्फ घरेलू बाजार ही नहीं, बल्कि निर्यात के मोर्चे पर भी टू-व्हीलर सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया. 2025 में रिकॉर्ड 49.4 लाख यूनिट्स वाहन विदेश भेजे गए, जो सालाना आधार पर 24.2 प्रतिशत की बढ़त है. दक्षिण एशिया में जबरदस्त डिमांड देखने को मिली साथ अफ्रीकी बाजारों में सुधार से एक्सपोर्ट बढ़ा है. SIAM का कहना है कि 2025 भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए एक अहम साल साबित हुआ. सरकार की नीतिगत सुधारों ख़ासतौर पर जीएसटी रिफॉर्म ने वाहनों की बिक्री को जबरदस्त ग्रोथ दी है. इंडस्ट्री को उम्मीद है कि, जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही में भी सभी सेगमेंट में बढ़त देखने को मिलेगी. GST की छूट… फिर भी नहीं टूटा रिकॉर्ड बीते साल 22 सितंबर से देश भर में नए जीएसटी स्ट्रक्चर को लागू किया गया. जिसके अनुसार 350 सीसी से कम इंजन क्षमता वाले दोपहिया वाहनों पर जीएसटी टैक्स घटा दिया गया. इसका सीधा असर दोपहिया वाहनों की कीमतों पर देखने को मिला. लेकिन दूसरी ओर कारों पर जीएसटी में छूट का तगड़ा असर देखा गया. मारुति सुजुकी ने अपने एक बयान में कहा भी था कि, लोग अब दोपहिया से चारपहिया में अपग्रेड कर रहे हैं. यानी ऐसे लोग जो हाई-एंड बाइक्स की प्लानिंग कर रहे थें उन्होंने ने भी कारों की तरफ रूख किया. क्योंकि कारों की कीमत में तगड़ी कटौती देखने को मिली थी.  दूसरी ओर साल के आखिरी महीनों में फेस्टिवल ऑफर्स, फाइनेंस सुविधाएं, न्यूतम डाउन पेमेंट और ईजी ईएमआई जैसे स्कीम्स ने कारों की तरफ लोगों का रूझान बढ़ा दिया. हालांकि साल 2024 में बेचे गए (2.1 करोड़) और बीते साल के (2.0 करोड़) यूनिट के बीच बहुत ज्यादा अंतर नहीं है, लेकिन कारों में अपग्रेड करने ग्राहकों की चाहत को भी एक कारण माना जा रहा है.