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अंडरकवर मिशन का किस्सा: पाकिस्तानी की पहचान पर अजीत डोभाल को मिली प्लास्टिक सर्जरी की सलाह

नई दिल्ली आज भारत के जेम्स बॉन्ड अजीत डोभाल का जन्मदिवस है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल केवल रणनीति और खुफिया मामलों में माहिर नहीं हैं, उनके जीवन से जुड़े किस्से साहस, चतुराई और रोमांचक अनुभवों से भरी हुई हैं। ऐसे ही एक रोमांचक किस्सों में डोभाल ने एक बार कार्यक्रम में खुद खुलासा किया था कि पाकिस्तान में एक मजार के पास बैठे शख्स ने उनसे कहा था- मुझे पता है कि तुम हिंदू हो।   अजित डोभाल का जन्म 1945 में उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में एक गढ़वाली परिवार में हुआ था। उनके पिता भारतीय सेना के एक अधिकारी थे। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हेमवती नन्दन बहुगुणा उनकी मां के चचेरे भाई थे। 1968 में केरल कैडर से आईपीएस बने डोभाल 2005 तक इंटेलिजेंस ब्यूरो के मुख्य के पद पर रहे। वे सक्रिय रूप से मिजोरम, पंजाब और कश्मीर में उग्रवाद विरोधी अभियानों में शामिल रहे हैं। पाकिस्तान में सात साल बिताए डोभाल खुद बता चुके हैं कि उन्होंने सात साल पाकिस्तान में बिताए, हालांकि उनके एक जमाने के बॉस और आईबी एवं रॉ के पूर्व प्रमुख एएस.दुलत का कहना है कि कि वह वहां भारतीय उच्चायोग में नियुक्त थे, अंडर कवर एजेंट के तौर पर नहीं। फिर भी उनके अनुभव कुछ ऐसे थे, जो किसी जासूसी कहानी से कम नहीं। एक बार विदर्भ मैनेजमेंट एसोसिएशन के एक समारोह में डोभाल ने पाकिस्तान में उनके साथ हुई एक घटना का जिक्र किया था। डोभाल बताते हैं कि लाहौर में औलिया की एक मजार थी, जहां बहुत से लोग आते थे। मैं एक मुस्लिम शख्स के साथ रहता था। एक दिन मैं उस मजार से गुजर रहा था और मैं भी वहां चला गया। कोने में एक शख्स बैठा था जिसकी लंबी सफेद दाढ़ी थी। उसने मुझसे सवाल किया, 'क्या तुम हिंदू हो?' मैंने जवाब दिया, नहीं।" प्लास्टिक सर्जरी करवा लो, वरना… इसके बाद डोभाल ने बताया कि वह शख्स उन्हें पीछे एक छोटे कमरे में ले गया, दरवाज़ा बंद किया और कहा कि देखो, तुम हिंदू हो, मुझे पता है। डोभाल ने पूछा कि यह कैसे संभव है, तो शख़्स ने कहा कि तुम्हारे कान छिदे हुए हैं। डोभाल ने मुस्कुराते हुए कहा कि हां, बचपन में उनके कान छेद गए थे, लेकिन वह कन्वर्ट हो गए थे। जवाब में शख्स ने कहा कि मुझे पता है कि तुम कंवर्ट नहीं हुए हो, तुन्हें प्लास्टिक सर्जरी करवा लेनी चाहिए, नहीं तो बाहर लोग शक कर सकते हैं। फिर डोभाल ने बताया कि जिस शख्स ने उन्हें पहचाना, उसने कहा कि क्योंकि मैं भी हिंदू हूं, इसलिए मुझे पता है। फिर उस शख़्स ने एक अलमारी खोली, जिसमें शिव और दुर्गा की मूर्तियां रखी थीं और कहा कि मैं इनकी पूजा करता हूं, लेकिन बाहर लोग मुझे एक मुस्लिम धार्मिक व्यक्ति के रूप में जानते हैं।

डायरेक्टर एटली बनने जा रहे हैं दूसरी बार पिता, सोशल मीडिया पर पत्नी संग पोस्ट वायरल

मुंबई फिल्म ‘जवान’ फेम डायरेक्टर एटली के बार फिर पिता बनने वाले हैं। डायरेक्टर ने यह जानकारी मंगलवार को एक इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए साझा की है। प्रिया और एटली ने पोस्ट में लिखा- हमारे घर में नया सदस्य आने वाला है अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में प्रिया और एटली लिखते हैं, ‘नए सदस्य के आने से हमारा घर और भी खुशियों से भरने वाला है। हां, हम माता-पिता बनने वाले हैं। आप सभी के आशीर्वाद, प्यार और प्रार्थनाओं की जरूरत है।’ एटली और प्रिया की इस प्रेग्नेंसी पोस्ट को साउथ के कई सेलेब्स ने भी लाइक किया, उन्हें फिर से माता-पिता बनने के लिए शुभकामनाएं दीं। सामंथा से लेकर जान्हवी कपूर ने दी बधाई डायरेक्टर एटली और उनकी पत्नी प्रिया को दूसरी बार माता-पिता बनने पर कई साउथ, बॉलीवुड सेलेब्स ने बधाई दी। साउथ एक्ट्रेस सामंथा ने लिखा, ‘बहुत ही सुंदर फोटो, बधाई दो प्रिया।’ जान्हवी कपूर ने हार्ट इमोजी शेयर करते हुए लिखा, ‘बेस्ट।’ इसी तरह साउथ एक्ट्रेस कीर्ति सुरेश और बॉलीवुड एक्टर वीर पहाड़िया ने एटली और प्रिया को पैरेंट्स बनने के लिए बधाई दी है। एटली कौन सी फिल्म निर्देशित कर रहे हैं? शाहरुख खान के साथ ‘जवान’ जैसी हिट फिल्म देने के बाद एटली ‘पुष्पा’ फेम एक्टर अल्लू अर्जुन के साथ ‘AA22XA6’ नाम की फिल्म कर रहे हैं। इस फिल्म में दीपिका पादुकोण अल्लू अर्जुन के अपोजिट नजर आएंगी।

गूगल करेगा म.प्र. में आईटी, आईटीईएस और डेटा सेंटर में निवेश

गूगल के एशिया पैसिफिक प्रेसिडेंट श्री गुप्ता ने दिखाई रूचि कृषि और शिक्षा में जेमिनी एआई के उपयोग पर हुआ संवाद भोपाल वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम-2026 गूगल के एशिया पैसिफिक क्षेत्र के प्रेसिडेंट श्री संजय गुप्ता के साथ दावोस में मंगलवार को मध्यप्रदेश के अधिकारियों ने बैठक कर राज्य में आईटी, आईटीईएस सेक्टर और मौजूदा प्रस्तावित डेटा सेंटर परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। श्री गुप्ता ने मध्यप्रदेश में आईटी, आईटीईएस और डेटा सेंटर में निवेश की रूचि दिखाई। बैठक में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला सहित अधिकारी उपस्थित रहे। गूगल की ओर से राज्य में जेमिनी एआई (Gemini AI) के माध्यम से कृषि एवं शिक्षा क्षेत्रों में नवाचार और डिजिटल समाधान लागू करने की संभावनाओं पर भी विचार साझा किए गए। बैठक में राज्य शासन द्वारा आईटी एवं डेटा सेंटर परियोजनाओं के लिए पर्याप्त एवं सतत विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु हरित ऊर्जा आधारित नीति तैयार करने की योजना से अवगत कराया गया। साथ ही, गूगल जैसी वैश्विक कंपनियों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने की मध्यप्रदेश की क्षमता, अनुकूल नीतिगत ढांचा और सहयोगी दृष्टिकोण को भी रेखांकित किया गया। गूगल के एशिया पैसिफिक क्षेत्र के प्रेसिडेंट श्री संजय गुप्ता ने आईटी अवसंरचना, डिजिटल नवाचार और कौशल विकास के माध्यम से मध्यप्रदेश को एक उभरते तकनीकी केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सहयोग दिए जाने पर सहमति व्यक्त की।  

एवरस्टोन समूह ने मध्यप्रदेश में विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा और खाद्य प्रसंस्करण में निवेश की दिखाई रूचि

भोपाल   वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम–2026 वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम–2026 दावोस के दूसरे दिन विभिन्न उद्योगपतियों से चर्चाओं का दौर जारी रहा। इस कड़ी में मंगलवार को मध्यप्रदेश स्टेट लाउंज में मध्यप्रदेश के अधिकारियों ने एवरस्टोन समूह के प्रेसिडेंट एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री जयंत सिन्हा के साथ बैठक कर राज्य में निवेश एवं औद्योगिक सहयोग की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। अधिकारियों ने मध्यप्रदेश ने ऑटोमोबाइल एवं इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) इकोसिस्टम में अपनी सशक्त उपस्थिति को रेखांकित किया। इंदौर, उज्जैन और भोपाल के आसपास विकसित हो रहे ईवी और ऑटोमोबाइल क्लस्टर्स के साथ वस्त्र एवं परिधान उद्योग में राज्य की स्थापित क्षमताओं तथा नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत आधार की जानकारी साझा की गई। चर्चा के दौरान नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला, अपर मुख्य सचिव श्री मनु श्रीवास्तव, श्री मनीष सिंह और प्रमुख सचिव श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह ने उद्योगपतियों के साथ सोलर पैनल, बैटरी, इंगट्स और वेफर्स सहित उपकरण एवं कंपोनेंट विनिर्माण में उपलब्ध निवेश अवसरों पर भी विचार किया गया। राज्य शासन ने निवेशकों के अनुकूल भूमि अधिग्रहण ढांचे की जानकारी देते हुए भोपाल और होशंगाबाद के समीप क्षेत्रों को विनिर्माण आधारित निवेश के लिए उपयुक्त बताया और राज्य में बढ़ती आंतरिक मांग को भी रेखांकित किया। प्रेसिडेंट एवरस्टोन समूह श्री जयंत सिन्हा ने समूह के पोर्टफोलियो और निवेश प्राथमिकताओं से अवगत कराते हुए स्केलेबल प्लेटफॉर्म, दीर्घकालिक इंफ्रास्ट्रक्चर और विनिर्माण क्षेत्रों में रुचि साझा की। बैठक में दोनों पक्षों ने खाद्य प्रसंस्करण, नवीकरणीय ऊर्जा एवं संबंधित क्षेत्रों में संभावित सहयोग और निवेश के लिए आगे भी विस्तृत चर्चा जारी रखने पर सहमति व्यक्त की। यह संवाद मध्यप्रदेश की विनिर्माण आधारित विकास रणनीति और सतत आर्थिक प्रगति की दिशा में वैश्विक निवेशकों के साथ मजबूत साझेदारी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।  

यूपी दिवस विशेष: यूपी में अब पलायन नहीं, ‘परावर्तन’ का दौर

योगी सरकार के श्रम, रोजगार, निवेश और सामाजिक सुरक्षा मॉडल से बदली उत्तर प्रदेश की तस्वीर युवाओं व श्रमिकों को अब रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए प्रदेश छोड़ने की मजबूरी नहीं विकास, आत्मनिर्भरता और समावेशी समृद्धि की नई कहानी लिख रहा उत्तर प्रदेश लखनऊ,  उत्तर प्रदेश, जो कभी रोजगार के लिए पलायन करने वाले राज्यों में गिना जाता था, आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास और सामाजिक सुरक्षा का नया मॉडल प्रस्तुत कर रहा है। बीते पौने नौ वर्षों में योगी सरकार की नीतियों का असर अब जमीन पर साफ दिख रहा है। जहां पहले युवा और श्रमिक रोज़गार के लिए प्रदेश छोड़ने को मजबूर थे, अब उनके लिए घर के पास पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए प्रदेश छोड़ने की अब कोई मजबूरी नहीं। पूर्व में राज्य से बाहर जा चुके युवा व श्रमिक भी अब लौट रहे हैं। पलायन का स्थान 'परावर्तन' ने ले लिया है, जो प्रदेश में विकास, आत्मनिर्भरता और समावेशी समृद्धि की नई कहानी लिख रहा है। रोजगार सृजन से लगा पलायन पर ब्रेक योगी सरकार के कार्यकाल में औद्योगिक निवेश, एमएसएमई विस्तार, सेवायोजन मेलों और कौशल विकास योजनाओं के जरिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित हुए हैं। बेरोजगारी दर में ऐतिहासिक गिरावट आई है और लाखों युवाओं को सरकारी व निजी क्षेत्र में रोजगार मिला है। सेवायोजन विभाग द्वारा संचालित सेवामित्र पोर्टल पर 53 हजार से अधिक कुशल कामगार पंजीकृत हो चुके हैं, जिन्हें सीधे रोजगार से जोड़ा जा रहा है। औद्योगिक निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर बने विकास की रीढ़ इन्वेस्ट यूपी के माध्यम से सिंगल विंडो सिस्टम, पारदर्शी प्रक्रियाओं और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' सुधारों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। एक्सप्रेसवे नेटवर्क, एयरपोर्ट्स, औद्योगिक कॉरिडोर, डिफेंस कॉरिडोर, मेडिकल कॉलेज और लॉजिस्टिक्स हब जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने उद्योगों को जिलों तक पहुंचाया। उत्तर प्रदेश रोजगार और फैक्ट्री इकाइयों के मामले में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल है, जिससे स्थानीय स्तर पर स्थायी नौकरियां बनी हैं। वर्तमान में प्रदेश में 30 हजार से अधिक फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं, जिनकी संख्या 2017 तक इसकी आधी भी नहीं थी। बीते पौने नौ सालों में युवाओं, श्रमिकों और महिलाओं के लिए उनके गृह जनपदों में रोजगार के अवसरों की संख्या कई गुना बढ़ी है। श्रमिक कल्याण और सामाजिक सुरक्षा से मजबूत हुआ भरोसा योगी सरकार ने केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि श्रमिकों और उनके परिवारों की सुरक्षा, शिक्षा और भविष्य को भी प्राथमिकता दी है। पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों और कोविड काल में निराश्रित हुए बच्चों के लिए हर मंडल में अटल आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। प्रत्येक विद्यालय में 100 बालक-बालिकाओं को आवासीय शिक्षा दी जा रही है। दुर्घटना, मृत्यु और दिव्यांगता पर आर्थिक संबल सरकार ने श्रमिकों के लिए मजबूत सुरक्षा कवच तैयार किया है। कार्यस्थल पर मृत्यु होने पर ₹5 लाख, स्थायी दिव्यांगता पर ₹3 लाख, आंशिक दिव्यांगता पर ₹2 लाख, पंजीकृत श्रमिक की दुर्घटना से मृत्यु पर ₹5 लाख, सामान्य मृत्यु पर ₹2 लाख, ₹25,000 अंत्येष्टि सहायता तथा अपंजीकृत श्रमिक की दुर्घटना/मृत्यु पर ₹1.25 लाख की सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इन प्रावधानों ने श्रमिकों की असुरक्षा को काफी हद तक खत्म किया है। पेंशन, बैंकिंग और परिवार सुरक्षा योजनाएं प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना, अटल पेंशन योजना, मातृत्व, शिशु एवं बालिका मदद योजना और निर्माण कामगार मृत्यु व दिव्यांगता सहायता योजना में लाखों लाभार्थी शामिल हैं। कन्या विवाह सहायता योजना के तहत दो बालिकाओं के विवाह पर ₹55,000 से ₹61,000 तक की सहायता दी जा रही है। इस सुरक्षा के चलते युवाओं में घर के पास ही रोजगार की भावना को बल मिला है। प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत राज्य में 9.52 करोड़ से अधिक बैंक खाते भी खोले जा चुके हैं। निर्माण कामगार गंभीर बीमारी सहायता योजना के अंतर्गत सरकारी अस्पतालों में इलाज की सौ फीसदी व्यय प्रतिपूर्ति की जा रही है। इससे श्रमिक परिवारों पर आर्थिक बोझ कम हुआ है और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उत्तर प्रदेश में ही मिल रही हैं।

BCCI का सख्त फैसला! सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से फिसल सकते हैं विराट-रोहित, नए नियमों का दिखेगा असर

नई दिल्ली भारतीय बल्लेबाज विराट कोहली और रोहित शर्मा को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई से एक झटका लग सकता है। विराट और रोहित दोनों का डिमोशन सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में होने की संभावना है। इसके पीछे की वजह ये है कि बीसीसीआई सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से ए प्लस कैटेगरी को खत्म कर सकती है और सिर्फ ए, बी और सी कैटेगरी को जारी रख सकती है। अगर ऐसा होता है तो फिर विराट कोहली और रोहित शर्मा के अलावा जसप्रीत बुमराह और रविंद्र जडेजा का भी डिमोशन होगा, जो पिछली बार ए प्लस कैटेगरी का हिस्सा थे। अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 तक के लिए रिटेनरशिप का ऐलान बीसीसीआई को करना है।   रिपोर्ट के मुताबिक, बीसीसीआई एक बदला हुआ सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम लाने वाला है, जिसके तहत ग्रेड A प्लस कैटेगरी बंद कर दी जाएगी। BCCI सूत्रों के मानें तो अगर बोर्ड ने नए मॉडल को मंजूरी दी तो फिर टीम इंडिया के दिग्गज खिलाड़ी विराट कोहली और रोहित शर्मा को ग्रेड B में रखे जाने की उम्मीद है। वे अभी तक ए प्लस कैटेगरी में थे। रविंद्र जडेजा का भी यही हाल होगा, लेकिन जसप्रीत बुमराह ए कैटेगरी में चले जाएंगे। अजीत अगरकर की अगुवाई वाली सिलेक्शन कमिटी ने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट स्ट्रक्चर में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। कमिटी ने A प्लस कैटेगरी (7 करोड़ रुपये) को खत्म करने और सिर्फ तीन कैटेगरी: A, B, और C रखने की सलाह दी है। सिर्फ 3 कैटेगरी रहने पर सैलरी स्ट्रक्चर में भी बदलाव होगा। ए प्लस कैटेगरी के लिए पहले 7 करोड़ मिलते थे, ए के लिए 5, बी के लिए 3 और सी के लिए 1 करोड़ रुपये सालाना मिलते थे। अगर ये मॉडल अप्रूव हुआ तो सिर्फ वनडे क्रिकेट खेल रहे रोहित और विराट को बी कैटेगरी में रखा जाएगा। अप्रैल 2025 में घोषित की गई 2024-25 के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट की लिस्ट में रोहित, विराट, जडेजा और बुमराह A प्लस कैटेगरी में थे, जबकि मोहम्मद सिराज, केएल राहुल, शुभमन गिल, हार्दिक पांड्या, मोहम्मद शमी और ऋषभ पंत ग्रेड A में शामिल थे। सूर्यकुमार यादव, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, यशस्वी जायसवाल और श्रेयस अय्यर ग्रेड B का हिस्सा थे और ग्रेड C में रिंकू सिंह, तिलक वर्मा, रुतुराज गायकवाड़, शिवम दुबे, रवि बिश्नोई, वाशिंगटन सुंदर, मुकेश कुमार, संजू सैमसन, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा, रजत पाटीदार, ध्रुव जुरेल, सरफराज खान, नीतीश कुमार रेड्डी, ईशान किशन, अभिषेक शर्मा, आकाश दीप, वरुण चक्रवर्ती और हर्षित राणा को जगह दी गई थी।  

आयोग का अहम फैसला: नगर निगम चुनाव में 25 वर्षों बाद लौटेगा बैलेट पेपर सिस्टम

कर्नाटक बेंगलुरु में 25 वर्षों के बाद नगर निकाय चुनावों में मतदान बैलट पेपर से होगा। कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के अंतर्गत आने वाले 5 नई नगर निगमों के चुनाव EMV के बजाय बैलट पेपर से कराए जाएंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी जी.एस. संगरेशी ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय कानूनी रूप से वैध है और सुप्रीम कोर्ट के किसी भी फैसले का उल्लंघन नहीं करता। यह फैसला बेंगलुरु के स्थानीय निकाय चुनावों में एक बड़ा बदलाव है, जहां पिछली बार 2000 के आसपास बैलट पेपर का इस्तेमाल हुआ था। अब तक ईवीएम का उपयोग होता आ रहा था, लेकिन अब पारंपरिक तरीके की वापसी हो रही है।   यह चुनाव 25 मई के बाद और 30 जून से पहले संपन्न कराए जाने हैं, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है। इसका कारण 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षाओं की बोर्ड परीक्षाओं के बाद का समय निर्धारित करना है, ताकि चुनाव प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके। इन चुनावों में लगभग 88.91 लाख मतदाता शामिल होंगे, जिनके नाम ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल्स में दर्ज हैं। राज्य चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि इस साल के अंत में होने वाले जिला और तालुक पंचायत चुनाव भी बैलट पेपर से ही होंगे। यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने और मतदाताओं के विश्वास को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया माना जा रहा है। क्या बैलेट पेपर से मतगणना में देरी होगी? राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि मतगणना में देरी नहीं होगी, क्योंकि पर्याप्त लॉजिस्टिक्स, सीसीटीवी निगरानी और पुलिस बल की व्यवस्था की जाएगी। चुनाव एक ही दिन में पूरा कर परिणाम घोषित करने की योजना है। जीबीए के तहत 5 नगर निगमों (सेंट्रल, नॉर्थ, साउथ, ईस्ट और वेस्ट बेंगलुरु) में कुल 369 वार्ड हैं और लगभग 89 लाख मतदाता हैं। ड्राफ्ट मतदाता सूची 19 जनवरी को जारी की गई है, जिसमें आपत्तियां 20 जनवरी से 3 फरवरी तक दर्ज की जा सकती हैं। अंतिम सूची 16 मार्च को प्रकाशित होगी। यह फैसला पिछले साल कर्नाटक कैबिनेट की सिफारिश के अनुरूप है। कांग्रेस सरकार के शासन में यह कदम उठाया गया है, जबकि पार्टी ने पहले ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे।

मेंस एचआईएल: रोमांचक शूटआउट में रांची रॉयल्स ने एचआईएल जीसी पर दर्ज की जीत

भुवनेश्वर मेंस हॉकी इंडिया लीग (एचआईएल) में सोमवार को बेहद रोमांचक मुकाबला खेला गया, जिसमें रांची रॉयल्स ने एचआईएल जीसी को शूटआउट में 4-1 से मात दी। कलिंगा हॉकी स्टेडियम में रांची रॉयल्स की ओर से अराइजीत सिंह हुंदल ने 19वें और 32वें मिनट में कुल दो गोल दागे। इसके बाद सैम लेन ने 42वें मिनट में, जबकि टॉम बून ने 57वें मिनट में गोल दागे। वहीं, एचआईएल जीसी की तरफ से ललित कुमार उपाध्याय ने 25वें और 53वें मिनट में गोल किए। इनके अलावा, केन रसेल ने 36वें मिनट में और सुदीप चिर्माको ने 39वें मिनट में एक-एक गोल किया। मैच का पहला पेनाल्टी कॉर्नर 18वें मिनट में एचआईएल जीसी को मिला, लेकिन केन रसेल के गोल पर किए गए प्रयास को रांची रॉयल्स के गोलकीपर सूरज करकेरा ने शानदार बचाव करके रोक दिया। कुछ ही देर बाद, रांची रॉयल्स को भी एक पेनाल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन टॉम बून भी इसे गोल में नहीं बदल पाए। जैसे ही खेल फिर से शुरू हुआ, मनदीप सिंह ने खतरनाक स्थिति में गेंद पर कब्जा करने के लिए शानदार सूझबूझ दिखाई, और हालांकि उनके शॉट को गोलकीपर ने रोक दिया, लेकिन गेंद रिबाउंड होकर अराइजीत सिंह हुंदल (19वें मिनट) के पास गई, जिन्होंने आसानी से खाली नेट में गोल कर दिया। 25वें मिनट में, एचआईएल जीसी को फिर से एक पेनाल्टी कॉर्नर मिला। केन रसेल के ड्रैगफ्लिक को शुरुआत में गोलकीपर ने रोक दिया था, लेकिन ललित कुमार उपाध्याय समय पर गेंद तक पहुंचे और उसे नेट में डालकर एचआईएल जीसी के लिए बराबरी का गोल किया। गेम शुरू हुआ और दोनों टीमों ने गोल पर कई कोशिशें कीं, लेकिन पहले हाफ के आखिर तक कोई नतीजा नहीं निकला। तीसरे क्वार्टर के दो मिनट बाद, रांची रॉयल्स ने उसी तरह से फिर से बढ़त बना ली। मनदीप सिंह ने सर्कल के बीच से गोल पर शॉट लगाया, और हालांकि उनके शॉट को एचआईएल जीसी के गोलकीपर जेम्स मजारेलो ने रोक दिया, लेकिन गेंद अरजीत सिंह हुंदल (32वें मिनट) के पास गई, जिन्होंने गेंद को गोल में डाल दिया। तीन मिनट बाद, एचआईएल जीसी ने फिर से गेम बराबर कर दिया। इस बार पेनाल्टी कॉर्नर से केन रसेल (36वें मिनट) ने सफलतापूर्वक गोल में बदल दिया। मुकाबले के 39वें मिनट में एचआईएल जीसी ने 39वें मिनट में सुदीप चिर्माको के शानदार फील्ड गोल की बदौलत मैच में बढ़त बनाई। हालांकि, यह बढ़त सिर्फ कुछ मिनट ही रही क्योंकि रांची रॉयल्स ने तुरंत बराबरी कर ली। जैक वालर ने सर्कल में गेंद को रोकने के लिए शानदार स्किल्स दिखाए और गेंद को गोल की तरफ उछाला, जिसे सैम लेन (42वें मिनट) ने गोलकीपर के ऊपर से नेट में डिफ्लेक्ट कर दिया। घड़ी में सात मिनट शेष थे, रांची रॉयल्स ने अपने ही गोल के सामने एक बड़ी गलती कर दी। यशदीप सिवाच ने गलत पास दिया, जिससे गेंद ललित कुमार उपाध्याय (53वें मिनट) के पास चली गई, जिन्होंने गेंद को नेट में डालकर फिर से बढ़त बना ली। 57वें मिनट में, रांची रॉयल्स को एक लेट पेनाल्टी कॉर्नर मिला। टॉम बून आगे बढ़े और गोल के ऊपरी दाएं कोने में शॉट मारकर फिर से बराबरी करते हुए मुकाबले को शूटआउट में पहुंचा दिया। रांची रॉयल्स ने शानदार शूटआउट करते हुए एचआईएल जीसी को 4-1 से हराया। विष्णुकांत सिंह, सैम लेन, मैक्सिम वैन ओस्ट और टॉम बून ने अपने-अपने अटेम्प्ट में गोल किए। शूटआउट के दौरान गोलकीपर सूरज करकेरा ने गोल में सबका ध्यान खींचा।  

डिफेंडिंग चैंपियन कीज का जलवा बरकरार, पहले मुकाबले में ओलिन्यकोवा पर जीत

मेलबर्न मंगलवार को ऑस्ट्रेलियन ओपन के पहले दौर में अमेरिकी टेनिस खिलाड़ी मैडिसन कीज़ को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। मेलबर्न के रॉड लेवर एरिना में उनका मुकाबला यूक्रेन की युवा खिलाड़ी ओलेक्ज़ान्द्रा ओलिन्यकोवा से था। मुकाबले की शुरुआत में कीज थोड़ी दबाव में दिखीं, लेकिन अनुभव के दम पर उन्होंने मैच अपने नाम कर लिया। पहले सेट में कीज 0-4 से पीछे चल रही थीं। इतना ही नहीं, टाईब्रेक में भी वह पिछड़ गईं। इसके बावजूद उन्होंने दो सेट प्वाइंट बचाए और पहला सेट 7-6 से जीत लिया। इसके बाद दूसरे सेट में उन्होंने शानदार खेल दिखाया और 6-1 से जीत हासिल कर मैच समाप्त किया। कीज वर्ल्ड नंबर 9 खिलाड़ी हैं। यह मुकाबला ओलिन्यकोवा का पहला ग्रैंड स्लैम मैच था और यह उनका पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय स्तर का मुकाबला भी था। पिछले कुछ समय से उन्होंने ज्यादा मैच नहीं खेले थे और यह उनका किसी शीर्ष 50 खिलाड़ी के खिलाफ पहला मैच था। बावजूद इसके, उन्होंने शुरुआत में आत्मविश्वास से भरा खेल दिखाया और कीज़ को परेशान कर दिया। मैच के बाद कीज ने कहा कि उनकी प्रतिद्वंद्वी ने बेहद अच्छा खेल दिखाया। उन्होंने ओलिनिकोवा के बारे में कहा, “आज मेरी प्रतिद्वंद्वी शानदार थी। उसने बहुत अच्छी शुरुआत की, और वह एक बेहतरीन प्रतिस्पर्धी है और उसने निश्चित रूप से मेरे लिए इसे मुश्किल बना दिया। यह निश्चित रूप से वह सामान्य स्टाइल नहीं है जो आप हर दिन देखते हैं। उनका खेलने का अंदाज अलग था, जिसमें गेंद की गति बदलना, ऊंची गेंदें और स्लाइस शॉट शामिल थे। इससे मुकाबला और कठिन हो गया।” उन्होंने आगे कहा, “मेरी प्रतिद्वंदी ने आज मुझे नेट के दूसरी तरफ काफी मेहनत करवाई। लेकिन आखिर में मैं सच में खुद पर भरोसा कर पाई और एक कदम पीछे हटी, लेकिन फिर अपने शॉट्स खेले।” पहला सेट लगभग 72 मिनट चला, जिसमें काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इसके बाद दूसरे सेट में कीज पूरी तरह हावी रहीं। उन्होंने अपनी पहली सर्विस पर ज्यादातर अंक जीते और मैच पर पूरा नियंत्रण बना लिया। डिफेंडिंग चैंपियन ने दूसरे सेट में सिर्फ एक गेम गंवाया और सेट में अपनी पहली सर्व पर 90 प्रतिशत पॉइंट जीते। जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ा, कीज़ का आखिरी सेट में मैच पर पूरा कंट्रोल था।  

मां और बेटी दोनों की सेहत पर चुपचाप वार कर रहा एनीमिया

आरा. एनीमिया एक ऐसी बीमारी है, जो धीरे-धीरे शरीर को कमजोर करती है, लेकिन इसके दुष्परिणाम गंभीर होते हैं। खासकर किशोरियों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह बीमारी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है। समय रहते जांच और संतुलित आहार न मिलने पर एनीमिया मां और गर्भस्थ शिशु- दोनों की सेहत पर गहरा असर डालता है। किशोरावस्था में माहवारी के दौरान नियमित रक्तस्राव होता है। यदि इस दौरान शरीर को पर्याप्त आयरन और पोषक तत्व नहीं मिलते, तो हीमोग्लोबिन का स्तर गिरने लगता है और एनीमिया की समस्या पैदा हो जाती है। वहीं, गर्भावस्था के दौरान शिशु के विकास के लिए मां के शरीर में अतिरिक्त रक्त की जरूरत होती है। ऐसे में खून की कमी होने पर गर्भवती महिलाओं के एनीमिक होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। एनीमिया से बचाव के लिए सरकार की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों और सरकारी विद्यालयों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत हर बुधवार 5 से 9 वर्ष की किशोरियों को गुलाबी गोली, जबकि 10 से 19 वर्ष की किशोरियों को नीली गोली दी जा रही है। आयरन और फोलिक एसिड से भरपूर ये गोलियां शरीर में खून की कमी को दूर करने में कारगर साबित हो रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एनीमिया से बचाव के लिए आयरनयुक्त आहार बेहद जरूरी है। भोजन में पालक, सोयाबीन, चुकंदर, अनार और हरी सब्जियों को शामिल करना चाहिए। आज सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत विशेष शिविर मातृ मृत्यु दर को कम करने और गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव की सुविधा देने के उद्देश्य से बुधवार, 21 जनवरी को जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। शिविरों में गर्भवती एवं धातृ महिलाओं की संपूर्ण स्वास्थ्य जांच के साथ आवश्यक दवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। नियमित एएनसी जांच जरूरी अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. एसके सिन्हा ने बताया कि किशोरियों और गर्भवती महिलाओं में एनीमिया का खतरा अधिक रहता है। किसी भी प्रकार के लक्षण महसूस होने पर तुरंत जांच करानी चाहिए। विशेषकर गर्भवती महिलाओं के लिए नियमित एएनसी जांच अनिवार्य है। शरीर में पर्याप्त रक्त न होने पर मां और बच्चे दोनों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। सही खान-पान, नियमित जांच और गुलाबी-नीली गोलियों के सेवन से एनीमिया को काफी हद तक रोका जा सकता है।