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झारखंड में 245 ब्लॉक में 203 करोड़ लागत की बनेंगी ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट

रांची. झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने बड़ा ऐलान किया है। जल्द ही सरकार जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट (BPHU) स्थापित करेगी। अंसारी ने बताया कि बीपीएचयू को प्रधामंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन और 15वें वित्त आयोग से मिले ग्रांट के 203 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित किया जाएगा। इसका निर्माण कुल 245 ब्लॉक में किया जाएगा। इस मामले की जानकारी देते हुए इरफान अंसारी ने कहा कि बीपीएचयू की स्थापना झारखंड की हेल्थकेयर सिस्टम को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा। आदिवासी, दूरदराज और पिछड़े इलाकों के लोगों को इससे सीधा फायदा होगा। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने बड़ा ऐलान किया है। जल्द ही सरकार जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट (BPHU) स्थापित करेगी। अंसारी ने बताया कि बीपीएचयू को प्रधामंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन और 15वें वित्त आयोग से मिले ग्रांट के 203 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित किया जाएगा। इसका निर्माण कुल 245 ब्लॉक में किया जाएगा। इस मामले की जानकारी देते हुए अंसारी ने कहा कि बीपीएचयू ब्लॉक स्तर पर निगरानी, ​​योजना, इमरजेंसी की तैयारी और कोऑर्डिनेटेड पब्लिक हेल्थ रिस्पॉन्स के लिए मुख्य संस्थागत इकाई के रूप में काम करेंगे। उन्होंने कहा कि हमारा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि क्वालिटी हेल्थकेयर सेवाएं, समय पर टेस्टिंग, सटीक डेटा और तेजी से स्वास्थ्य प्रतिक्रिया हर ब्लॉक तक पहुंचे, ताकि किसी भी बीमारी या महामारी के फैलने से पहले ही उस पर प्रभावी ढंग से कंट्रोल किया जा सके। मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता राज्य की हेल्थकेयर सिस्टम को आधुनिक, संवेदनशील और लोगों पर केंद्रित बनाना है।

जम्मू-कश्मीर हादसे पर प्रधानमंत्री मोदी का शोक संदेश

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के डोडा में गुरुवार को एक सड़क हादसे में सेना के 10 जवान शहीद हो गए। इस हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत कई दिग्गज नेताओं ने दुख जताया है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि डोडा में हुई दुर्घटना से हम अत्यंत दुखी हैं, जिसमें हमने अपने बहादुर सैनिकों को खो दिया। राष्ट्र के प्रति उनकी सेवा को हम सदा याद रखेंगे। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं। प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है। वहीं, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक्स पर लिखा कि जम्मू-कश्मीर के डोडा में हुई दुखद घटना से मैं अत्यंत व्यथित हूं, जिसमें हमारे वीर सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में हुए सड़क हादसे में हमारे कई वीर जवानों के दिवंगत होने का समाचार अत्यंत दुःखद है। पूरा देश इस दुःख की घड़ी में अपने वीर सपूतों के परिवारों के साथ खड़ा है। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें। घायल जवानों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि डोडा में हुए दुखद सड़क हादसे में भारतीय सेना के हमारे बहादुर जवानों की जान जाने से मैं बेहद दुखी हूं। देश उनकी निस्वार्थ सेवा को सदा याद रखेगा। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। वहीं, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी घटना को लेकर दुख प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के डोडा में हुए सड़क हादसे में हमारे कई बहादुर जवानों की असामयिक मृत्यु का समाचार अत्यंत हृदयविदारक और असहनीय पीड़ा देने वाला है। राष्ट्र उनकी कर्तव्यनिष्ठा का सदैव ऋणी रहेगा। उन्होंने कहा कि इस दुःखद घड़ी में मैं शोकाकुल परिवारों के प्रति अपनी गहन संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हो। ॐ शांति। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के डोडा में हुई हृदयविदारक सड़क दुर्घटना में भारतीय सेना के 10 वीर जवानों के देहावसान से मन अत्यंत व्यथित और स्तब्ध है। शोकाकुल परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। दुर्घटना में घायल जवानों का उपचार जारी है, ईश्वर से प्रार्थना है कि वे शीघ्र स्वस्थ हों। उन्होंने कहा कि जो वीर जवान इस दुर्घटना में शहीद हुए हैं, भगवान उनकी पुण्य आत्माओं को शांति प्रदान करें। इस कठिन घड़ी में पूरा देश अपने सशस्त्र बलों और उनके परिवारों के साथ मजबूती से खड़ा है।

कैलिफोर्निया गवर्नर ने WEF में ट्रंप को घेरा, कहा- देश पर डॉन की तरह कब्जा, कांग्रेस बनी तमाशबीन

कैलिफोर्निया कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूज़म ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2026 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोला। सेमाफ़ोर के बेन स्मिथ के साथ इंटरव्यू में न्यूज़म ने कहा कि अमेरिका आज “रूल ऑफ डॉन” के तहत जी रहा है, जहाँ लोकतंत्र की बुनियादी संस्थाएँ कमजोर पड़ गई हैं। न्यूज़म ने कहा, “समानांतर सत्ता की शाखाएं, कानून का राज और जन-सत्ता क्या आज का अमेरिका वही है?” उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस निष्क्रिय बनी हुई है और कानून का शासन कमजोर हो रहा है। WEF के चौथे दिन हुई चर्चा में न्यूज़म ने अमेरिकी विश्वविद्यालयों, कानून फर्मों और कॉरपोरेट नेतृत्व पर भी निशाना साधा। उन्होंने प्रतीकात्मक तौर पर लाल नी-पैड्स दिखाते हुए कहा कि जैसे कुछ संस्थान प्रशासन के आगे झुक रहे हैं, वैसे ही ये पैड्स बिक रहे हैं हालाँकि उन्होंने किसी CEO का नाम नहीं लिया। दावोस के नियमित प्रतिभागी न्यूज़म को उनके तीखे और बहसात्मक भाषणों पर तालियाँ भी मिलीं। उन्होंने बताया कि दावोस आने का एक मकसद पूँजीवाद के भविष्य पर ट्रंप के दृष्टिकोण का विरोध करना है। इस बीच, ट्रंप ने अपने दावोस भाषण में न्यूज़म का ज़िक्र करते हुए उन्हें “गुड गाइ” कहा और पुराने अच्छे संबंधों की बात की।    हालांकि, न्यूज़म को एक तय फायरसाइड चैट के बावजूद US हाउस में प्रवेश नहीं मिला, जिस पर उन्होंने X पर तंज कसते हुए लिखा “एक बातचीत से इतना डर?” बाद में मिला VIP नाइटकैप का न्योता भी उन्होंने ठुकरा दिया। विवाद यहीं नहीं रुका। US ट्रेज़री सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने न्यूज़म पर व्यक्तिगत हमला करते हुए उन्हें “आत्ममुग्ध और आर्थिक रूप से अनभिज्ञ” कहा। हाल के वर्षों में न्यूज़म रिपब्लिकन नेताओं के मुखर आलोचक रहे हैं और फ्लोरिडा गवर्नर रॉन डीसैंटिस से भी उनकी टकराहट चर्चित रही है।

लंबे समय से अधूरे सिंचाई परियोजनाओं को पूर्ण करने को लेकर मुख्यमंत्री साय सख्त

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में विभागीय कार्यों, संचालित परियोजनाओं तथा प्रस्तावित सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हित में लगातार बड़े निर्णय ले रही है और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की दिशा में हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिए कि लंबे समय से लंबित परियोजनाओं को अटल सिंचाई योजना में शामिल किया गया है, इन्हें समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने आगामी तीन वर्षों में पूर्ण की जाने वाली परियोजनाओं की जानकारी लेते हुए कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में किसानों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। खेती के बढ़ते रकबे और किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सिंचाई परियोजनाओं का सुदृढ़ होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए बजट की कोई कमी नहीं है और इसके लिए पृथक बजटीय प्रावधान किया गया है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से प्रदेश में सिंचित रकबा बढ़ेगा और किसानों की उपज में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री साय ने जशपुर जिले के किसानों के मध्यप्रदेश अध्ययन भ्रमण का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां आधुनिक तकनीक के माध्यम से सिंचाई को प्रभावी ढंग से संचालित होते देखकर किसान काफी उत्साहित हुए हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन राज्यों में सिंचाई क्षेत्र में बेहतर नवाचार किए जा रहे हैं, वहां छत्तीसगढ़ के किसानों का भी अध्ययन भ्रमण कराया जाए, ताकि वे नई तकनीकों और कार्यप्रणालियों से अवगत हो सकें। बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि आगामी तीन वर्षों में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से 14 सिंचाई परियोजनाओं को चरणबद्ध रूप से पूर्ण करने की योजना है, जिससे लगभग 70 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इनमें 4,800 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली चार प्रमुख परियोजनाओं का मार्च और मई माह में भूमिपूजन प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं में बस्तर जिले की देउरगांव बैराज सह उद्वहन सिंचाई परियोजना, मटनार बैराज सह उद्वहन सिंचाई परियोजना, रायपुर जिले के आरंग विकासखंड में महानदी पर मोहमेला–सिरपुर बैराज योजना तथा गरियाबंद जिले की सिकासार जलाशय से कोडार जलाशय लिंक परियोजना शामिल हैं। इसी प्रकार अटल सिंचाई योजना के अंतर्गत 115 लंबित परियोजनाओं के लिए 346 करोड़ रुपये का बजट आबंटित किया गया है, जिनके माध्यम से लगभग 11 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता का विकास किया जाएगा। बैठक में अंतराज्यीय जल विवादों के समाधान पर भी चर्चा की गई। आगामी तीन वर्षों में महानदी जल विवाद, पोलावरम बांध के डुबान क्षेत्र तथा समक्का बैराज से संबंधित मामलों के निपटारे के लिए ठोस प्रयास किए जाने पर सहमति बनी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव  मुकेश बंसल, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

नक्सलमुक्त भारत की ओर बड़ा कदम: झारखंड में माओवादियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई—अमित शाह

नई दिल्ली झारखंड में माओवादियों के ढेर होने से नक्सलमुक्त अभियान को मिली बड़ी सफलता: अमित शाह नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम में 1 करोड़ के कुख्यात इनामी नक्सली सेंट्रल कमेटी मेंबर 'अनल उर्फ पतिराम मांझी' और 15 अन्य नक्सलियों के मारे जाने पर कहा कि इससे नक्सलमुक्त अभियान को बड़ी सफलता मिली है। इसके साथ ही उन्होंने नक्सलियों से अपील करते हुए कहा कि हिंसा, आतंक और हथियारों से जोड़ने वाली विचारधारा को छोड़ विकास और विश्वास की मुख्यधारा से जुड़ें। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा, ''आज पश्चिमी सिंहभूम में सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस द्वारा चलाए जा रहे एक जॉइंट ऑपरेशन में 1 करोड़ का कुख्यात इनामी नक्सली सेंट्रल कमेटी मेंबर 'अनल उर्फ पतिराम मांझी' और 15 अन्य नक्सलियों के अब तक एनकाउंटर से नक्सलमुक्त अभियान को बड़ी सफलता मिली। दशकों से भय और आतंक के पर्याय रहे नक्सलवाद को हम 31 मार्च 2026 से पहले समाप्त करने के लिए संकल्पित हैं। मेरी पुनः शेष बचे नक्सलियों से अपील है कि हिंसा, आतंक और हथियारों से जोड़ने वाली विचारधारा को छोड़ विकास और विश्वास की मुख्यधारा से जुड़ें।" झारखंड के नक्सल प्रभावित पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में गुरुवार को सुरक्षाबलों को अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी मिली है। सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में एक करोड़ के इनामी माओवादी पतिराम मांझी उर्फ अनल दा और 15 नक्सली ढेर कर दिए गए। मारे गए नक्सलियों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं। सीआरपीएफ के आईजी साकेत कुमार सिंह ने बताया कि मारे गए अन्य नक्सलियों में अनमोल उर्फ सुशांत (बीजेएसएसी), अमित मुंडा (आरसीएम), पिंटू लोहरा, लालजीत उर्फ लालु, राजेश मुंडा, बुलबुल अलदा, बबिता, पूर्णिमा, सूरजमुनी और जोंगा शामिल हैं। इनमें से कई पर झारखंड, ओडिशा और एनआईए ने लाखों रुपए के इनाम घोषित किए थे, और इन सभी के खिलाफ गंभीर नक्सली मामलों के दर्जनों केस दर्ज थे। ये सभी नक्सली केंद्रीय कमेटी सदस्य (सीसीएम) अनल उर्फ पतिराम मांझी के दस्ते के साथ झारखंड के कोल्हान इलाके में लंबे समय से सक्रिय थे। अनल दा पर झारखंड में एक करोड़ और ओडिशा में एक करोड़ 20 लाख का इनाम घोषित था।

गंगा किनारे विदेशी आस्था की मिसाल: रूसी जोड़े ने अपनाया सनातन मार्ग, वैदिक रीति से हुआ विवाह

रूस   रूस आज केवल वैश्विक राजनीति और युद्ध की खबरों तक सीमित नहीं है। मॉस्को, सेंट पीटर्सबर्ग और साइबेरिया जैसे इलाकों में अब योग कक्षाएं, ध्यान शिविर और भगवद्गीता चर्चा समूह दिखाई देने लगे हैं। यह बदलाव बताता है कि रूसी समाज भीतर से किसी गहरे सुकून की तलाश में है और सनातन धर्म की ओर बढ़ रहा है। इसी की एक अन्य मिसाल  उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक राजधानी काशी में देखने को मिली जहां बुधवार को सनातन संस्कृति की दिव्यता का एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला। रूस से आए एक दंपत्ति ने हिंदू धर्म और सनातन परंपराओं से प्रभावित होकर गंगा तट पर वैदिक विधि से विवाह रचाया। बाबा श्री काशी विश्वनाथ को साक्षी मानकर दंपत्ति ने सात फेरे लिए और सात जन्मों तक साथ निभाने का संकल्प लिया।   दशाश्वमेध घाट स्थित मंदिर परिसर में काशी के विद्वान ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह संपन्न कराया गया। हवन कुंड के चारों ओर फेरे लेते समय दूल्हा-कन्या भावुक नजर आए। घाट पर मौजूद महिलाओं ने मंगल गीत गाकर विवाह को और भी पावन बना दिया।हिंदू विवाह की सबसे महत्वपूर्ण रस्म सिंदूर दान के दौरान दुल्हन मरीन की आंखें नम हो गईं। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद श्रद्धालु और पर्यटक भी भाव-विभोर हो उठे। रूस से आए कॉन्स्टेंट और मरीन ने बताया कि वे पेशे से व्यापारी हैं और 11 वर्ष पहले रशियन परंपरा के अनुसार विवाह कर चुके हैं। भारत भ्रमण के दौरान काशी पहुंचने पर उन्हें सनातन धर्म, भगवान महादेव और यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा ने गहराई से प्रभावित किया।   दंपत्ति ने बताया कि काशी में रहते हुए उन्होंने सनातन धर्म की मान्यताओं, संस्कारों और जीवन दर्शन को करीब से जाना, जिसके बाद उन्होंने हिंदू रीति-रिवाज से दोबारा विवाह करने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने काशी के ब्राह्मण शिवाकांत पांडे से संपर्क कर वैदिक विधि से विवाह कराया। दुल्हन मरीन ने बताया कि रूस में मौजूद उनके परिजन इस विवाह को लेकर बेहद उत्साहित थे। विवाह की सभी रस्में ऑनलाइन माध्यम से उन्हें दिखाई गईं। परिजनों ने इस निर्णय पर सहमति जताई और आशीर्वाद दिया।मरीन ने कहा कि हिंदू रीति-रिवाज से विवाह करना उनके जीवन का सबसे आध्यात्मिक और अविस्मरणीय अनुभव है। रूस और सनातन: शांति की ओर बढ़ता समाज लगातार संघर्ष, प्रतिबंध और अनिश्चित भविष्य ने रूसी समाज को मानसिक रूप से थका दिया है। ऐसे में सनातन धर्म का कर्म सिद्धांत, आत्मा की अमरता और मोह से मुक्ति का संदेश उन्हें गहराई से छू रहा है।रूस के बड़े शहरों में योग केंद्र तेजी से बढ़े हैं। भारतीय गुरुओं द्वारा सिखाया गया प्राणायाम और ध्यान रूसी युवाओं के लिए मानसिक शांति का साधन बन गया है।      गीता का गहरा संदेश और योग रूसी भाषा में भगवद्गीता के अनुवाद तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। “अपने कर्तव्य का पालन करो, परिणाम ईश्वर पर छोड़ दो”—यह विचार युद्ध और असमंजस से घिरे समाज को स्थिरता देता है।रूस में योग अब केवल व्यायाम नहीं रहा। यह तनाव, अवसाद और अकेलेपन से लड़ने का साधन बन गया है। युवा हों या बुज़ुर्ग, बड़ी संख्या में लोग ध्यान और प्राणायाम को अपना रहे हैं। इस्कॉन की भूमिका इस्कॉन जैसे संगठनों ने रूस में सनातन को जीवन पद्धति के रूप में प्रस्तुत किया। कीर्तन, प्रसाद और भारतीय पर्व अब कई रूसी परिवारों के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। रूसी नागरिक साफ कहते हैं कि वे किसी धर्म को नहीं, बल्कि शांति और संतुलन को अपनाना चाहते हैं। सनातन उन्हें संघर्ष के बीच भी स्थिर रहने की शक्ति देता है।

केशव मौर्य की शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से अपील: स्नान कर विवाद समाप्त करें

प्रयागराज  माघ मेला-2026 में मौनी अमावस्या के दिन पालकी पर सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक तरफ प्रशासन ने नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब तलब किया है तो वहीं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के एक बयान ने इस पूरे प्रकरण को अलग ही मोड़ दे दिया है। प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच चल रही खींचतान के बारे में पूछे जाने पर डिप्टी सीएम ने कहा कि पूज्य शंकराचार्य जी के चरणों में प्रणाम है। वह बढ़िया स्नान करें। उनसे प्रार्थना है और इस विषय का समापन करें, ऐसा आग्रह है। बता दें कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मेला एवं पुलिस प्रशासन ने मौनी अमावस्या पर पहिया लगी पालकी से संगम स्नान के लिए जाने से रोका था। शंकराचार्य ने स्नान नहीं किया था, उन्होंने कहा था कि वह अपने शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे, उसी स्थान पर तब तक बैठे रहेंगे जब तक अफसर उनसे मांफी मांग ससम्मान संगम स्नान के लिए नहीं ले जाते हैं। शंकराचार्य के इस ऐलान के बीच प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने उन्हें नोटिस दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए उसने 24 घंटे में स्पष्ट करने को कहा गया था कि वह खुद को शंकराचार्य कैसे लिख रहे हैं और अपने शिविर पर लगे बोर्ड पर शंकराचार्य कैसे लिखा है। इसके बाद मामला और अधिक बढ़ गया। मंगलवार को शंकराचार्य ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि वो अपना जवाब दाखिल करेंगे। बुधवार को जवाब दे दिया। इस जवाब में उन्होंने प्राधिकरण के अफसरों से 24 घंटे के भीतर नोटिस वापस लेने को कहा। ऐसा न करने पर उन्होंने कोर्ट जाने की चेतावनी भी दी। शंकराचार्य के अधिवक्ता अंजनी कुमार मिश्र की ओर से दिए गए जवाब में मेला प्रशासन को बताया गया है कि उनका पट्टाभिषेक पहले ही हो चुका था, कोर्ट का आदेश बाद का है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि प्रशासन अपना नोटिस 24 घंटे के भीतर वापस ले। ऐसा न करने पर प्रशासन के खिलाफ कोर्ट के आदेश को गलत तरीके से प्रस्तुत करने कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर अन्य आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी। आठ पेज के जवाब में प्रशासन की ओर से उठाए गए बिंदु पर स्थिति स्पष्ट की गई। हालांकि इसके बार प्रशासन की ओर से उन्हें एक और नोटिस देकर 24 घंटे में यह स्पष्ट करने को कहा कि उनकी संस्था को माघ मेला में दी गई जमीन और सुविधाओं को निरस्त करके हमेशा के लिए मेले में उनके प्रवेश को क्यों न प्रतिबंधित कर दिया जाए। इस दूसरी नोटिस के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने पलटवार करते हुए पूछा है कि क्या समझकर उन्हें सुविधाएं दी गई थीं और क्या समझकर वापस ली जा रही हैं।  

दुनिया में शांति की नई पहल! ट्रंप ने बनाया ‘बोर्ड ऑफ पीस’, PAK शामिल—उठे कई सवाल

दावोस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को बोर्ड ऑफ पीस के पहले चार्टर का औपचारिक ऐलान कर दिया। यूनाइटेड नेशन के तर्ज पर बनाए गए बोर्ड ऑफ पीस का शुरुआती फोकस गाजा पर होगा, लेकिन इसका विस्तार दुनियाभर के विवादों को सुलझाने के लिए हो सकता है। इसमें पाकिस्तान समेत कई देशों ने सदस्य बनने के लिए सहमति दी है। बोर्ड ऑफ पीस के लॉन्च पर ट्रंप ने कहा कि गाजा सीजफायर डील के तहत हमास को हथियार छोड़ने होंगे, नहीं तो यह फिलिस्तीनी आंदोलन का अंत होगा।   ट्रंप ने कहा, "उन्हें अपने हथियार छोड़ने होंगे, और अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो यह उनका अंत होगा।'' उन्होंने आगे कहा कि इस्लामी समूह हाथों में राइफल लेकर पैदा हुए थे। स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में बोर्ड ऑफ पीस के ऐलान के समय एक दर्जन से ज्यादा देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और टॉप डिप्लोमैट मौजूद रहे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, पैराग्वे के कंजर्वेटिव राष्ट्रपति सैंटियागो पेना, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव आदि की मौजूदगी रही। 'हम लोग कुछ भी कर सकते हैं जो करना चाहते हैं' ट्रंप ने आगे कहा, "एक बार जब यह बोर्ड पूरी तरह से बन जाएगा, तो हम लगभग कुछ भी कर सकते हैं, जो हम करना चाहते हैं। और हम इसे यूनाइटेड नेशंस के साथ मिलकर करेंगे।'' उन्होंने आगे कहा कि यू.एन. में बहुत ज्यादा पोटेंशियल है जिसका पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं किया गया है। ट्रंप, जो इस बोर्ड की अध्यक्षता करेंगे, ने दर्जनों दूसरे वर्ल्ड लीडर्स को इसमें शामिल होने के लिए इनवाइट किया और कहा कि वह चाहते हैं कि यह गाजा में लड़खड़ाते सीजफायर से परे की चुनौतियों का सामना करे, जिससे यह आशंका पैदा हो रही है कि यह ग्लोबल डिप्लोमेसी और कॉन्फ्लिक्ट रिजॉल्यूशन के मुख्य प्लेटफॉर्म के तौर पर यूएन की भूमिका को कमजोर कर सकता है। सदस्यों को देना होगा एक बिलियन डॉलर का फंड दूसरी बड़ी ग्लोबल पावर और अमेरिका के पारंपरिक पश्चिमी सहयोगी भी इस बोर्ड में शामिल होने से हिचकिचा रहे हैं, जिसके बारे में ट्रंप कहते हैं कि स्थायी सदस्यों को हर एक को $1 बिलियन का पेमेंट करके फंड देना होगा। अमेरिका के अलावा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का कोई भी दूसरा स्थायी सदस्य – दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होने के बाद से अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीति पर सबसे ज्यादा दखल रखने वाले पांच देश – अभी तक इसमें शामिल होने के लिए तैयार नहीं हुआ है। देशों के प्रमुखों ने दस्तावेजों पर किया साइन बोर्ड ऑफ पीस में बतौर सदस्य शामिल होने के लिए मंच पर उपस्थित कई देशों के प्रमुखों ने दस्तावेजों पर साइन किया। इसके बाद व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लेविट ने कहा कि इस तरह बोर्ड का चार्टर पूरी तरह से लागू हो गया है और यह एक अंतरराष्ट्रीय संगठन बन गया है। हस्ताक्षर समारोह स्विट्जरलैंड के दावोस में हुआ, जहां सालाना वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम हो रहा है, जिसमें ग्लोबल राजनीतिक और बिजनेस लीडर्स एक साथ आते हैं।

WhatsApp ला रहा नया सेफ्टी फीचर, बच्चे चुनिंदा लोगों से ही कर पाएंगे बातचीत

नई दिल्ली यह कुछ और नहीं बल्कि लोकप्रिय इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप में आने वाला नया फीचर है। इस फीचर की मदद से माता-पिता सेकेंडरी अकाउंट के जरिए अपने बच्चों के व्हाट्सऐप अकाउंट की एक्टिविटी पर नजर रख पाएंगे। इसमें मेन अकाउंट से सेकेंडरी अकाउंट के तौर पर बच्चों का अकाउंट लिंक हो जाएगा। इससे माता-पिता बच्चों की प्राइवेसी सेटिंग्स को आसानी से देख और अपने अनुसार मैनेज कर सकेंगे। यह फीचर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को बढ़ाने के लिए लाया जा रहा है। लिंक के जरिए जुड़ेगा अकाउंट व्हाट्सऐप के अपकमिंग फीचर पर नजर रखने वाली वेबसाइट WABetaInfo की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों के लिए कुछ प्रतिबंधों और सीमित क्षमताओं के साथ व्हाट्सऐप में नया फीचर Primary Controls आने वाला है। यह पैरंट्स को बच्चों के अकाउंट पर अधिक कंट्रोल देगा। व्हाट्सऐप पर बच्चों के लिए बनाया गया सेकेंडरी अकाउंट मेन अकाउंट के साथ एक डिजिटल लिंक के जरिए जोड़ा जाएगा। इससे माता-पिता उन प्राइवेसी सेटिंग्स को रिव्यू कर पाएंगे, जिन्हें बच्चे अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। इन सेकेंडरी अकाउंट्स में मैसेज और कॉल केवल कॉन्टैक्ट्स तक ही सीमित रहेंगे।फिलहाल, WhatsApp पर ऐसा कोई ऑप्शन नहीं है, जिससे यूजर यह चुन सकें कि उन्हें सिर्फ अपने कॉन्टैक्ट के मैसेज ही चाहिए। यह सुविधा बच्चों के लिए जरूरी है और सेकेंडरी अकाउंट इसी कमी को पूरा करने के लिए बनाए जा रहे हैं। क्या माता-पिता बच्चों की चैट देख पाएंगे? माता-पिता बच्चों की चैट और कॉल को एक्सेस नहीं कर पाएंगे। हालांकि, उन्हें अकाउंट के इस्तेमाल और पैटर्न से जुड़ी रिपोर्ट मिलेंगी। एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन बच्चों की बातचीत को सुरक्षित रखेगा, जिससे निजी मैसेज को कोई और नहीं पढ़ पाएगा। इस तरह, माता-पिता बच्चों पर नजर रख सकेंगे, लेकिन उनकी निजी बातचीत में दखल नहीं दे पाएंगे। अभी चल रही टेस्टिंग यह फीचर अभी डेवलपमेंट में है। व्हाट्सऐप टेस्टिंग कर रहा है कि नए पैरंटल कंट्रोल मौजूदा अकाउंट सेटिंग्स के साथ कैसे काम करेंगे, ताकि यह एक्सपीरियंस आसान और सेफ हो। इंटरफेस को इस तरह से बेहतर बनाया जा रहा है कि माता-पिता आसानी से सेकेंडरी अकाउंट को कॉन्फिगर कर सकें। जब यह फीचर जारी होगा, तो माता-पिता यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि उनके बच्चे के अकाउंट में उम्र के हिसाब से सही सेटिंग्स हों, जिससे उनकी ऑनलाइन सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।

ग्रामीण महिलाओं के हाथ में विकास की कमान

पात्र गृहस्थी राशन कार्डधारक एवं अंत्योदय कार्डधारक दो लाख लाभार्थी परिवारों को समूहों से जोड़ा जाएगा ग्रामीण महिलाओं को आवश्यकता अनुसार ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जा रही, जिसे सरल किस्तों में चुकाने की मिलेगी छूट स्टार्ट-अप फंड, रिवॉल्विंग फंड और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड बनेंगे विकसित यूपी का ग्रोथ इंजन लखनऊ, उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को विकास की धुरी बनाया जा रहा है। स्टार्ट-अप फंड, रिवॉल्विंग फंड और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड के जरिए महिलाओं को आर्थिक संबल देकर प्रदेश को नए ग्रोथ इंजन की दिशा में आगे बढ़ाने की तैयारी है। इसी क्रम में पात्र गृहस्थी राशन कार्डधारक एवं अंत्योदय कार्डधारकों के करीब दो लाख लाभार्थी परिवारों को समूहों से जोड़ा जाएगा। इस तरह मिलेगी जिम्मेदारी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को समूह सखी, बैंक सखी, ड्रोन सखी और आजीविका सखी जैसी जिम्मेदार भूमिकाएं दी जाएंगी। इससे जहां महिलाओं की आय बढ़ेगी, वहीं सरकारी योजनाओं का लाभ भी गांव-गांव तक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा। जीरो पावर्टी अभियान के तहत चिन्हित 6.67 लाख परिवारों की महिलाओं को समूह से जोड़ने का अभियान तेज योगी सरकार पात्र गृहस्थी और अंत्योदय राशन कार्डधारकों के करीब दो लाख लाभार्थी परिवारों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने जा रही है। इसके साथ ही वीबी जीरामजी कार्डधारकों और जीरो पावर्टी अभियान के तहत चिन्हित 6.67 लाख परिवारों की महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने का अभियान तेज किया गया है। ग्रामीण महिलाओं को आवश्यकता अनुसार ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिसे सरल किस्तों में चुकाने की छूट होगी, ताकि वे बिना आर्थिक दबाव के स्वरोजगार शुरू कर सकें। वहीं, प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में महिलाओं को समूह से जोड़ने के लिए मेगा कैंपेन चलाया जाएगा। सशक्त गांव और सशक्त उत्तर प्रदेश की आधारशिला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विजन है कि ग्रामीण परिवारों को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सीधे बाजार से जोड़ा जाए, ताकि स्थानीय उत्पादों को उचित मूल्य मिल सके। योगी सरकार का मानना है कि सशक्त महिला ही सशक्त परिवार, सशक्त गांव और सशक्त उत्तर प्रदेश की आधारशिला है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ विकसित यूपी के लक्ष्य को नई गति देगी।