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श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी! बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तारीख तय, राजदरबार में हुआ निर्णय

नई दिल्ली उत्तराखंड की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माने जाने वाले बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तारीख का ऐलान कर दिया गया है। बसंत पंचमी के पावन अवसर पर टिहरी जिले के नरेंद्र नगर स्थित राजदरबार में शास्त्रों और पंचांग गणना के बाद यह फैसला लिया गया कि बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खोले जाएंगे। जानकारी के मुताबिक, राजदरबार में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान महाराजा मनु जयेंद्र शाह ने स्वयं कपाट खुलने की तिथि की घोषणा की। इस मौके पर राजपुरोहित आचार्य कृष्ण प्रसाद उनियाल ने पंचांग, ग्रह-नक्षत्र और शुभ योगों का अध्ययन कर बताया कि 23 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 15 मिनट का समय कपाट खोलने के लिए शुभ है। वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक अनुष्ठानों के बाद विधिवत रूप से तिथि घोषित की गई।   कैसे खुलते हैं बदरीनाथ धाम के कपाट, क्या-क्या होती हैं खास परंपराएं बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया पूरी तरह शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार होती है। कपाट खुलने से पहले भगवान बदरीविशाल की पूजा-अर्चना विशेष विधि से की जाती है। सबसे पहले मंदिर परिसर को फूलों से सजाया जाता है और सिंहद्वार पर पारंपरिक ढंग से पूजा होती है। कपाट खुलने के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में गणेश पूजा के साथ कार्यक्रम की शुरुआत होती है। इसके बाद शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर के मुख्य द्वार के ताले खोले जाते हैं। जैसे ही कपाट खुलते हैं, मंदिर परिसर “जय बद्री विशाल” के जयकारों से गूंज उठता है। कपाट खुलने के बाद सबसे पहले भगवान बदरीनाथ के अखंड दीप के दर्शन कराए जाते हैं, जो शीतकाल में भी निरंतर जलता रहता है। इसके बाद भगवान की महाभिषेक पूजा होती है और विशेष श्रृंगार किया जाता है। कपाट खुलने के पहले दिन केवल सीमित समय के लिए ही श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति दी जाती है। परंपरा के अनुसार, कपाट खुलने के समय डिमरी समाज के प्रतिनिधि और मंदिर के मुख्य रावल विशेष भूमिका निभाते हैं। कपाट खुलने के बाद नियमित पूजा, दर्शन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो जाते हैं। क्यों खास है कपाट खुलने का दिन मान्यता है कि बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा की औपचारिक शुरुआत हो जाती है। इस दिन दर्शन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु इस शुभ पल के साक्षी बनने के लिए बदरीनाथ पहुंचते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में तीखी टिप्पणी: CJI बोले– अदालत को डराने की कोशिश मत करो

नई दिल्ली हाईकोर्ट में जज के साथ कहासुनी से जुड़े मामले में फंसे वकील को सुप्रीम कोर्ट से फटकार मिली है। वकील के खिलाफ आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी हुआ था, जिसके बाद उन्होंने शीर्ष न्यायालय का रुख किया था। मामले की सुनवाई कर रहे भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने अदालत में चेतावनी दी और कहा कि अगर वह आंख दिखाना चाहते हैं, तो हम भी देख लेंगे वह क्या कर लेंगे।   मामला बीते साल 16 अक्तूबर, झारखंड हाईकोर्ट का है। एक मामले में सुनवाई के दौरान एडवोकेट महेश तिवारी ने जस्टिस राजेश कुमार को सीमा पार नहीं करने के लिए कह दिया था। इसके बाद उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी हुआ। इस नोटिस के खिलाफ वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे, जहां उन्हें सीजेआई की नाराजगी का सामना भी करना पड़ा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CJI ने कहा, 'वह सुप्रीम कोर्ट से आदेश सिर्फ यह दिखाने के लिए चाहते हैं कि क्या बिगाड़ लिया मेरा।' उन्होंने एडवोकेट को नोटिस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आने पर भी फटकार लगाई। उन्होंने कहा, 'अगर वह माफी मांगना चाहते हैं, तो उन्हें माफी मांगनी चाहिए…। अगर वह जजों को आंख दिखाना चाहते हैं, तो दिखाएं। हम भी यहां बैठे हैं और फिर हम भी देख लेंगे।' हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से कहा है कि अगर वकील माफी मांग लेते हैं, तो उनके प्रति सहानुभूति रखी जाए। झारखंड हाईकोर्ट में क्या हुआ उस दौरान एडवोकेट तिवारी एक विधवा का केस लड़ रहे थे, जिनका 1 लाख 30 हजार से ज्यादा बकाया होने के कारण बिजली कनेक्शन काट दिया गया था। मामले की सुनवाई होने के बाद जस्टिस कुमार ने राज्य के बार काउंसिल अध्यक्ष से वकील के काम करने के तरीके पर संज्ञान लेने के लिए कहा। इसपर तिवारी उठे और और उंगली दिखाते हुए जज से कहा, 'मैं अपनी तरह से बहस कर सकता हूं, आप जो कह रहे हैं उस तरीके से नहीं। ध्यान रखें…। किसी भी वकील को अपमानित करने की कोशिश ना करें। मैं आपको बता रहा हूं।' इसपर जज ने कहा कि आप यह नहीं कह सकते कि कोर्ट ने अन्याय किया है। एडवोकेट ने जवाब दिया, 'क्या मैंने कहा ऐसा?' उन्होंने जज से लाइव वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच करने के लिए कहा। साथ ही बताया कि वह दूसरे वकील थे, जिन्होंने उस वाक्य का इस्तेमाल किया जिसपर जज को आपत्ति हुई। इसके बाद झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली बेंच ने वकील के खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी किया था।  

युवराज केस में उलझी कहानी: मौके पर मौजूद थे लोग, फिर मदद क्यों नहीं मिली? पुलिस के जवाब पर शक गहरा

नई नोएडा ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दुखद मौत ने पूरे इलाके को हिला दिया है। 27 साल के युवराज 16 जनवरी 2026 की रात अपनी कार से घर लौट रहे थे। घने कोहरे के कारण उनकी एसयूवी निर्माणाधीन साइट के पास एक गहरे पानी भरे गड्ढे में जा गिरी। युवराज कार की छत पर चढ़ गए और फोन की फ्लैशलाइट जलाकर मदद मांगते रहे। उन्होंने अपने पिता को फोन किया और 'पापा, मुझे बचा लो' कहकर गुहार लगाई। करीब दो घंटे तक वो जिंदगी की लड़ाई लड़ते रहे, लेकिन बचाव में देरी के कारण उनकी मौत हो गई। इस मामले में अब पुलिस का स्पष्टीकरण आया है। पुलिस ने बताया है कि रेस्क्यू के दौरान उनके पास क्या-क्या संसाधन थे। लेकिन अब सवाल यही उठ रहा है कि आखिर इतने संसाधनों के साथ भी क्यों हाथ बंधे रहे?   हादसे के बाद क्या हुआ? पुलिस, फायर ब्रिगेड, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं। नोएडा पुलिस ने बताया कि डायल 112 पर सूचना मिलते ही पीआरवी न्यूनतम समय में पहुंच गई। टीमों ने लाइफ बाय रिंग, रबर बोट, हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म, सर्च लाइट, लाइफ-सेविंग रोप और एक्सटेंशन लैडर जैसे उपकरणों से रेस्क्यू की कोशिश की। लेकिन घना कोहरा और कम विजिबिलिटी ने काम मुश्किल कर दिया। युवराज को निकालने में देर हुई और कार को बाहर निकालने में चार दिन लग गए। पुलिस के जवाब से सवाल और बढ़े पुलिस का दावा है कि संसाधन पूरे थे और प्रयास किए गए। नोएडा पुलिस ने एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि थाना नॉलेज पार्क क्षेत्र के अंतर्गत हुयी घटना के सम्बन्ध में सूचना, डायल 112 पर प्राप्त होते ही घना कोहरा और न्यूनतम विजिबिलिटी होने के बाद भी पीआरवी न्यूनतम प्रतिक्रिया समय में घटना स्थल पर पहुंची। साथ ही स्थानीय पुलिस, फायर सर्विस/रेस्क्यू टेंडर मौके पर पहुंचे। सभी प्रकार के उपकरण लाइफ बॉय रिंग, हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म, सर्च एंड रेस्क्यू लाइट, एयर-फिल्ड रबर बोट, हाइड्रा, लाइफ-सेविंग रोप, ड्रैगन टॉर्च, रेस्क्यू फायर टेंडर और एक्सटेंशन लैडर की मदद से रेस्क्यू के प्रयास किए गए थे।   अब और उठ रहे सवाल नोएडा पुलिस के इस दावे के बाद सवाल और भी ज्यादा हो गए हैं। आखिर इतने उपकरण और टीमें होने के बावजूद युवराज को क्यों नहीं बचाया जा सका? वायरल वीडियो में दिखता है कि रेस्क्यू टीम के जवान दिशा-निर्देश दे रहे थे, लेकिन कोई पानी में नहीं उतरा। एक फ्लिपकार्ट डिलीवरी एजेंट मोनिंदर सिंह ने पानी में उतरकर कोशिश की, लेकिन अकेले क्या कर पाता? अब कुछ रिपोर्ट्स में मोनिंदर पर पुलिस दबाव का आरोप लगा है कि उन्होंने बयान बदला। जांच और कार्रवाई तेज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उच्च स्तरीय एसआईटी गठित की गई। एसआईटी ने घटनास्थल पर सीन रीक्रिएट किया। पुलिस ने निर्माण साइट की लापरवाही के लिए लोटस ग्रीन के दो बिल्डरों रवि बंसल और सचिन कर्णवाल को गिरफ्तार किया। नोएडा अथॉरिटी से रिपोर्ट मांगी गई, जिसमें डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान शामिल है। रिपोर्ट 24 जनवरी को सरकार को सौंपी जाएगी। एनजीटी ने भी स्वतः संज्ञान लिया और कई अधिकारियों को नोटिस जारी किया। सोशल मीडिया पर गुस्सा यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का नतीजा माना जा रहा है। लोग कह रहे हैं कि निर्माण साइट पर बैरिकेडिंग नहीं थी, सुरक्षा मानक टूटे गए। नोएडा जैसे 'स्मार्ट सिटी' में खुले गड्ढे और नाले मौत का जाल बने हुए हैं। युवराज के पिता का कहना है कि अगर समय पर मदद मिलती, तो बेटा बच जाता।  

निहारिका बारीक: ग्रामीण सशक्तिकरण में जीरामजी योजना की भूमिका

रायपुर. विकसित भारत जी राम जी योजना ग्रामीणों के आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम – निहारिका बारीक पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव  ईटीवी भारत निहारिका बारीक ने गरियाबंद जिले में स्थित राज्यपाल  ईटीवी भारत रामेन डेका जी के गोद ग्राम बिजली (मड़वाडीह) का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने ग्राम में संचालित विभिन्न विकास योजनाओं, आजीविका गतिविधियों एवं मूलभूत सुविधाओं की प्रगति का गहन अवलोकन किया। इस अवसर पर कलेक्टर  ईटीवी भारत बी.एस. उईके, प्रधानमंत्री आवास मिशन के डायरेक्टर  ईटीवी भारत तारण प्रकाश सिन्हा, एसबीएम एवं एनआरएलएम डायरेक्टर  ईटीवी भारत अश्वनी देवांगन, संयुक्त सचिव  ईटीवी भारत एस. आलोक, जिला पंचायत सीईओ  ईटीवी भारत प्रखर चंद्राकर सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। प्रमुख सचिव  ईटीवी भारत बारीक ने ग्राम पंचायत बिजली (मड़वाडीह) में ग्रामीणों एवं महिला स्व-सहायता समूहों से संवाद करते हुए समूहों द्वारा संचालित आजीविका गतिविधियों की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने विकसित भारत जी राम जी योजना की जानकारी साझा करते हुए बताया कि पूर्व में यह योजना 100 दिनों की कार्य अवधि तक सीमित थी, जिसे बढ़ाकर अब 125 दिन कर दिया गया है। इससे ग्रामीणों की आजीविका को वैधानिक संरक्षण मिलने के साथ-साथ उनके जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन आएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मजदूरी भुगतान साप्ताहिक आधार पर अथवा किसी भी स्थिति में कार्य समाप्ति के 15 दिवस के भीतर किया जाना अनिवार्य है। स्व-सहायता समूह की महिलाओं से चर्चा के दौरान प्रमुख सचिव ने ग्राम मड़वाडीह की  ईटीवी भारतमती मिथलेश्वरी ध्रुव से संवाद किया। उन्होंने बताया कि डेढ़ लाख रुपये का ऋण लेकर 1200 फीट की सेंट्रिंग प्लेट खरीदी गई है, जिसके माध्यम से प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत एक साथ लगभग चार आवासों में निर्माण कार्य किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि मात्र चार माह में लगभग 30 लाख रुपये की आय अर्जित की गई है, जो कुल व्यय का लगभग एक-चौथाई है। प्रमुख सचिव ने जिले में लखपति दीदियों की संख्या में हो रही निरंतर वृद्धि को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण का सकारात्मक संकेत बताया। निरीक्षण के दौरान प्रमुख सचिव ने जल जीवन मिशन अंतर्गत घर-घर जल आपूर्ति की स्थिति की भी जानकारी ली। इसके साथ ही जय फणीश्वर एग्रो महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड द्वारा “त्रिवेणी” ब्रांड नाम से हल्दी एवं मिर्च की पैकिंग एवं विपणन गतिविधियों का अवलोकन किया। समूह द्वारा अब तक 50 किलोग्राम से अधिक उत्पाद का विक्रय कर आय अर्जित की जा चुकी है। उन्होंने सुझाव दिया कि धान के स्थान पर मिर्च एवं हल्दी जैसी नकदी फसलों की खेती कर कच्चे माल का स्वयं उत्पादन कर अधिक लाभ अर्जित किया जा सकता है। महिला समूहों द्वारा दोना-पत्तल निर्माण मशीन, मशरूम उत्पादन हेतु शेड निर्माण तथा मूंगफली दाना पृथक्करण मशीन की मांग रखी गई, जिस पर प्रमुख सचिव ने कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ को संबंधित योजनाओं के अंतर्गत आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रमुख सचिव  ईटीवी भारत बारीक ने आंगनबाड़ी केंद्र का भी निरीक्षण किया, जहां उन्होंने गर्म भोजन व्यवस्था, रसोई की स्वच्छता, बच्चों की उपस्थिति तथा कुपोषण की स्थिति की जानकारी ली। इसके साथ ही ग्राम में पूर्ण आवास निर्माण की प्रगति का अवलोकन करते हुए हितग्राही  ईटीवी भारत रामेश्वर पटेल के आवास का निरीक्षण किया। ग्राम में कचरा प्रबंधन व्यवस्था के अंतर्गत नियमित सफाई, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण एवं सफाई कर्मियों के मजदूरी भुगतान की स्थिति की भी समीक्षा की गई। साथ ही ग्राम पंचायत में संचालित डिजिटल सुविधा केंद्र के माध्यम से हो रहे दैनिक लेन-देन एवं ग्रामीण स्तर पर डिजिटल सेवाओं के विस्तार हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। इसके पश्चात प्रमुख सचिव ने ग्राम श्यामनगर में संचालित आजीविका केंद्र का निरीक्षण किया, जहां उगता सूरज, जय ठाकुर देव एवं जय महामाया स्व-सहायता समूह द्वारा सिलयारी पत्तों की सिलाई कर पारंपरिक दोना-पत्तल निर्माण कर आय अर्जित की जा रही है। इस कार्य की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि आज महिलाएं परिवार की आर्थिक रीढ़ बन चुकी हैं और किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। इस अवसर पर ग्राम पंचायत बिजली की सरपंच  ईटीवी भारतमती पद्मा निषाद, ग्राम श्यामनगर के सरपंच, स्थानीय जनप्रतिनिधि, ग्रामीणजन एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

महिला पत्रकारों ने अध्ययन भ्रमण में जताया मुख्यमंत्री का आभार

रायपुर. पहली बार छत्तीसगढ़ की महिला पत्रकारों के दल ने किया अध्ययन भ्रमण, खुशियों भरी मुस्कान के साथ जताया मुख्यमंत्री का आभार मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में गुजरात के अध्ययन भ्रमण से लौटे महिला पत्रकारों के दल ने मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महिला पत्रकार अपने साहस से लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत कर रही हैं। मैं उन सभी महिलाओं के साहस को नमन करता हूं जो पत्रकारिता जैसे चुनौतीपूर्ण पेशे में रह कर समाज में सकारात्मक योगदान दे रही हैं।  मुख्यमंत्री को महिला पत्रकारों के दल ने गुजराती अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ भेंट कर पहली बार छत्तीसगढ़ से महिला पत्रकारों के दल को अन्य राज्य के अध्ययन भ्रमण पर भेजने के लिए उनका आभार जताया। महिला पत्रकारों ने मुख्यमंत्री को विशेष रूप से धन्यवाद देते हुए कहा कि विगत वर्ष महिला दिवस पर उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष महिला पत्रकारों को भी अध्ययन भ्रमण पर भेजे जाने की इच्छा व्यक्त की थी। उन्हें बहुत खुशी है कि मुख्यमंत्री ने उन सभी की इस इच्छा को पूरा किया।  मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने महिलाओं से चर्चा के दौरान कहा कि इस अध्ययन भ्रमण के दौरान आप सभी ने गुजरात विधानसभा, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, राजकोट, पोरबंदर सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को समझा है। आने वाले समय में ये अनुभव आपकी कलम को और भी समृद्ध करेगा, जिसका लाभ पत्रकारिता जगत के साथ ही आपके पाठकों भी मिलेगा।  मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार का यह तीसरा वर्ष है। इस वर्ष को हम महतारी गौरव वर्ष के रूप में मना रहे हैं। मुख्यमंत्री ने महिला पत्रकारों से उनके अध्ययन भ्रमण के अनुभवों को किताब के रूप संजोने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यह ना सिर्फ आपके लिए इस भ्रमण को हमेशा के लिए यादगार बनाएगा बल्कि अन्य लोग भी आपकी किताब को पढ़कर गुजरात के बारे में अपनी जानकारी बढ़ा सकेंगे।  मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात एक समृद्ध और मॉडल राज्य है। गुजरात की एक खासियत यह भी है कि वहां सहकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुआ है। अमूल सहकारिता का एक जीवंत उदाहरण है, जिसमें मुख्यतः महिलाएं शामिल है। छत्तीसगढ़ में भी हम सहकारिता को बढ़ावा दे रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी देश के सहकारिता मंत्री भी हैं। उनके मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में भी सहकारिता के लिए बहुत कार्य हो रहा है। सहकारिता इस बात का प्रतीक है कि मिलकर करने से बड़ा काम भी आसान होता है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हम सभी प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण कर रहे हैं। मंत्रालय में अब ई-फाइल प्रणाली लागू है। मुख्यमंत्री श्री साय ने महिला पत्रकारों से अपनी गुजरात यात्रा के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि गुजरात का सीएम डैशबोर्ड देश का सबसे एडवांस्ड मॉनिटरिंग सिस्टम है जिसके माध्यम से एक जगह बैठकर ही पूरे प्रदेश पर नजर रखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के विकास की नींव रखी थी, हम गुजरात जैसी व्यवस्थाओं को यहां भी लागू कर रहे हैं।  मुख्यमंत्री से महिला पत्रकारों ने गुजरात अध्ययन भ्रमण के अनुभवों को साझा किया। सुश्री निशा द्विवेदी ने कहा कि इस टूर के माध्यम से उन्हें गुजरात के समृद्ध इतिहास और संस्कृति से रुबरू होने का अवसर मिला। सुश्री दामिनी बंजारे ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनके 8 वर्षों के पत्रकारिता के करियर में पहली बार है जब महिलाओं का दल अध्ययन भ्रमण पर गया है। कोरिया की सुश्री नूरजहां ने बताया कि यह पहली बार है जब महिलाओं को इस रूप में प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी महिला पत्रकारों को ये मौका मिलता रहेगा।  मुख्यमंत्री को महासमुंद की पत्रकार सुश्री उत्तरा विदानी ने बताया कि गुजरात विधानसभा के भ्रमण में बहुत अच्छा लगा। वहां की खास बात यह देखने को मिली कि बच्चों सहित आमजन को विधानसभा की कार्यवाही को सुगमता से देखने का अवसर दिया जाता है। दुर्ग की पत्रकार सुश्री कोमल धनेसर ने कहा कि छत्तीसगढ़ के रजत जयंती वर्ष में 25 वर्षों में यह पहला अवसर है जब महिला पत्रकारों को ऐसा मौका मिला है। उन्होंने कहा कि जब हम भ्रमण पर निकले थे तो बहुत सारे अनजाने चेहरे थे और लौटे हैं तो नए दोस्त और नई बॉन्डिंग के साथ।  रायपुर की पत्रकार सुश्री नेहा श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री को बताया कि हम सभी पत्रकार अलग- अलग संस्थानों में काम करते हैं। व्यस्तता की वजह से हमारी बात नहीं हो पाती। ये टूर रूटीन से अलग एक अनुभव रहा जिसमें नये दोस्त बने। सुश्री रचना नितेश ने मुख्यमंत्री को बताया कि ये अनुभव ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध करने वाला था। उन्होंने कहा कि एक खास बात ये रही कि हमारे दल में महिला पत्रकारों की 3 पीढ़ियां शामिल थीं। हमें बहुत कुछ सीखने को मिला।  बस्तर की पत्रकार सुश्री प्रियंका जायसवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ की पहचान बस्तर से है। टूर पर जाते समय नए माहौल की वजह से मन में कई आशंकाएं थीं। मगर बाद में यह अनुभव बहुत सुखद रहा। कोरबा की सुश्री राजश्री गुप्ते ने बताया कि 8 दिनों के इस टूर में ऐसा लगा कि हमने अपने बचपन को फिर से जी लिया है।  मुख्यमंत्री श्री साय को महिला पत्रकारों ने बताया कि कई लोगों की यह पहली हवाई यात्रा भी थी। जिस पर मुख्यमंत्री ने बड़ी आत्मीयता से पत्रकारों से कहा कि जो पहली बार हवाई यात्रा करते हैं उन्हें पार्टी देनी पड़ती है। मुख्यमंत्री की बात सुनकर पूरे सभागार में हंसी गूंज उठी।  महिला पत्रकारों ने मुख्यमंत्री श्री साय से एक रोचक वाकया भी साझा किया। उन्होंने बताया कि गुजरात भ्रमण के दौरान उनका इंटरेक्शन कुछ फ्रेंच पर्यटकों से हुआ। यह जानने पर की महिला पत्रकार छत्तीसगढ़ से हैं, फ्रेंच पर्यटक ने कहा- ओह सीएम विष्णुदेव छत्तीसगढ़ ! ये सुनकर उन्हें बहुत गर्व हुआ कि छत्तीसगढ़ राज्य को विदेशी नागरिक भी मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नाम से पहचान रहे हैं।  महिला पत्रकारों ने जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों का भी आभार जताया जिन्होंने आठ दिवसीय इस अध्ययन भ्रमण में उनका पूरा ख्याल रखा। इस अवसर पर  आयुक्त जनसंपर्क डॉ रवि … Read more

एक ‘गलती’ और दो जानें गईं: शक्ति सिंह गोहिल के रिश्तेदारों की मौत का पूरा घटनाक्रम

अहमदाबाद गुजरात के अहमदाबाद में बुधवार रात कांग्रेस के बड़े नेता और सांसद शक्तिसिंह गोहिल के भतीजे और बहू की गोली लगने से मौत की खबर ने सबको चौंका दिया। दो महीने पहले ही शादी करने वाले एक बड़े अफसर ने क्यों अपनी पत्नी को गोली मारकर खुदकुशी कर ली? इसको लेकर अटकलों का दौर तेज है। पत्नी की मौत के बाद अपनी कनपटी में गोली मारने वाले यशराज की मां ने दावा किया है कि गलती से गोली चली थी जिसमें बहू की मौत हो गई और दुख में बेटे ने भी अपनी जान दे दी। उन्होंने दोनों के बीच झगड़े या तनाव की बात से इनकार किया है। हालांकि, पुलिस अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है।   घटना अहमदाबाद के जज बंगला रोड पर एनआरआई टावर में पांचवें मंजिल पर हुई। गुजरात मैरीटाइम बोर्ड में क्लास-वन ऑफिसर यशराज सिंह गोहिल की इसी साल 30 नवंबर को राजेश्वरी के साथ शादी हुई थी। बताया जा रहा है कि बुधवार रात दोनों रिश्तेदार के घर खाना खाकर लौटे थे। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यशराज की मां ने बताया है कि लाइसेंसी रिवॉल्वर से गलती से फायर हो गया जो राजेश्वरी को लगी। इसके कुछ देर बाद 35 साल के यशराज ने भी अपनी कनपटी में गोली मार ली और मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना उस रात साढ़े 10 से 12 बजे के बीच हुई। यशराज की मां ने पुलिस को क्या बताया यशराज सिंह की मां देव्यानीबा ने कहा, 'दोनों एक रिश्तेदार के घर डिनर के बाद साढ़े 10 बजे घर लौटे थे। दोनों बेडरूम में थे। इस दौरान यशराज के लाइसेंसी रिवॉल्वर से गलती से एक गोली फायर हो गई जो राजेश्वरी के सिर में लग गई। बेटे ने तुरंत मेरे कमरे में आकर बताया कि क्या हो गया है। उसने कहा कि तुरंत एंबुलेंस को बुलाना होगा। मैं कमरे में गई तो राजेश्वरी बिस्तर पर अचेत पड़ी थी और खून बह रहा था।' पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक यशराज सिंह ने 11.42 पर 108 इमरजेंसी नंबर पर कॉल करके एंबुलेंस बुलाई। कुछ ही देर में पहुंची टीम ने राजेश्वरी को मृत घोषित किया। देव्यानीबा के मुताबिक, राजेश्वरी की मौत से यशराज को गहरा आघात लगा। पत्नी की मौत की बात सुनकर वह एक दूसरे कमरे में चला गया और अपने सिर में गोली मारकर खुदकुशी कर ली। पोस्टमॉर्टम के बाद अंतिम संस्कार देव्यानीबा और एंबुलेंस स्टाफ दूसरे कमरे में पहुंचे तो वहां यशराजसिंह खून से सना था। उसे भी मौके पर मृत घोषित किया गया। दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए सिविल अस्पताल में ले जाया गया। मौके पर जाकर फॉरेंसिक टीम ने भी जांच। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और हर एंगल से मामले की तहकीकात की जा रही है। पोस्टमॉर्टम के बाद दोनों का अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस और भी एंगल से कर रही जांच मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एसीपी ब्रह्मभट ने कहा, 'हमने मृतक की मां का बयान दर्ज किया है। प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि गलती से फायरिंग के बाद खुदकुशी का मामला है। चूंकि घटना घर की चार दीवारी के भीतर हुई, सभी एंगल से जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि गोली गलती से चली थी या जानबूझकर चलाई गई थी।' किसी विवाद की बात से इनकार करते हुए कांग्रेस के मीडिया संयोजक मनीष दोशी ने कहा कि कपल विदेश घूमने जाने की तैयारी में था और गुरुवार को उनका पासपोर्ट ऑफिस में अपॉइंटमेंट था।

अजय बरलोटा ने सौ बार रक्तदान एवं प्लाज़्मा डोनेशन कर रचा सेवा का कीर्तिमान

रायपुर मानव सेवा की मिशाल पेश करते हुए रायपुर के युवा व्यवसायी अजय बारलोटा द्वारा 100 बार रक्तदान एवं प्लाज़्मा डोनेशन कर एक अनुकरणीय कीर्तिमान स्थापित किया। इस उपलब्धि ने न केवल जरूरतमंद मरीजों को जीवनदान दिया, बल्कि समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई है। अजय ने रायपुर में  समय समय पर आयोजित रक्तदान शिविरों एवं आपातकालीन परिस्थितियों में स्वेच्छा से रक्त एवं प्लाज़्मा दान किया। विशेषकर कोरोना काल में भी प्लाज़्मा डोनेशन के माध्यम से कई गंभीर मरीजों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज 100 रक्तदान के अवसर पर चिकित्सकों एवं सामाजिक संगठनों ने रक्तदाता अजय बरलोटा के जज्बे की सराहना करते हुए कहा कि रक्तदान महादान है, और एक यूनिट रक्त किसी के लिए जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर बन सकती है। अजय ने युवाओं से आगे आकर नियमित रक्तदान करने की अपील की। रक्तदाता अजय ने कहा कि जब तक शरीर स्वस्थ है, तब तक वह इस सेवा कार्य को निरंतर जारी रखेंगे और अधिक से अधिक लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करेंगे। आज 100 बार रक्तदान एवं प्लाज़्मा दान कर अजय से रायपुर शहरवासियों के साथ साथ जैन समाज  को भी गौरवानवित महसूस किए। एवं अजय बारलोटा के उज्ज्वल भविष्य की कमान की।

नगर निगम चुनाव का बदला गणित: अम्बाला सीट बीसी-बी महिला के लिए आरक्षित, पंचकूला और सोनीपत अनारक्षित

चंडीगढ़ हरियाणा के 3 नगर निगमों पंचकूला, अम्बाला और सोनीपत में मेयर पद चुनाव के लिए वीरवार को शहरी स्थानीय निकाय विभाग की ओर से ड्रॉ निकाला गया। इसमें अम्बाला को महिला बी.सी. बी के लिए रिजर्व किया गया जबकि पंचकूला और सोनीपत की सीट अनारक्षित रहेगी। इन तीनों नगर निगमों के मेयर और पार्षदों का कार्यकाल इसी महीने में समाप्त हो चुका है। इसके लिए आज तीसरी बार ड्रॉ रखा गया था। इससे पहले 1 और 15 दिसम्बर को डॉ की तारीख तय की गई थी लेकिन दोनों बार इसे टालना पड़ा था। खास बात यह है कि अम्बाला में बी.सी. बी की महिला के लिए पहली बार मेयर पद आरक्षित हुआ है। बी.सी. बी. कैटेगरी में 5 प्रमुख जातियां अहीर, गुज्जर, लोध, सैनी और मेव आती हैं, जहां अम्बाला में मेयर पद के लिए बेहतर महिला प्रत्याशी खोजना भाजपा और कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा। आरक्षण का ड्रॉ होने के बाद अब अम्बाला, सोनीपत और पंचकूला नगर निगम में मेयर पद को लेकर भाजपा और कांग्रेस के नेताओं में टिकट को लेकर घमासान शुरू हो गया है। बताया गया मार्च से अप्रैल तक चुनाव प्रक्रिया पूरी हो सकती है। प्रदेश में चुनाव के लिए प्रस्तावित तीनों निगमों का कार्यकाल पूरा हो चुका है। उक्त निगमों निगम कमिश्नर को बतौर प्रशासक नियुक्त किया गया है। चर्चा है कि मार्च में चुनावी प्रक्रिया शुरू की जाएगी जहां अप्रैल में चुनाव हो सकता है। इस संबंध में राज्य चुनाव आयुक्त कार्यालय की ओर से तैयारी शुरू कर दी गई है। आई.ए.एस. की निगरानी में हुए ड्रॉ की हुई वीडियोग्राफी पंचकूला स्थित शहरी स्थानीय निदेशालय में आयोजित ड्रॉ प्रक्रिया दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। ड्रॉ के लिए आई.ए.एस. वीरेंद्र सिंह दहिया की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी ने पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करवाई। वीरेंद्र दहिया ने कहा कि ड्रा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही।   अन्य 8 नगर निगमों में आरक्षण की यह है स्थिति प्रदेश में कुल 11 नगर निगम हैं। इनमें से 8 के चुनाव पहले ही हो चुके हैं। 3 नगर निगमों का कार्यकाल इसी माह पूरा हुआ है। फरीदाबाद नगर निगम महिला और गुरुग्राम नगर निगम बी. सी.-ए कैटेगरी की महिला के लिए आरक्षित है। यमुनानगर में मेयर का पद एस.सी. कैटेगरी महिला और रोहतक में नगर निगम मेयर का पद एस.सी. कैटेगरी के पुरुष के लिए रिजर्व है। बाकी के 5 निगम हिसार, करनाल, मानेसर और पानीपत सामान्य वर्ग के लिए हैं। नगर परिषद और पालिकाओं में भी पूरी हुई आरक्षण प्रक्रिया नगर परिषद रेवाड़ी और नगर पालिका सांपला, उकलाना व धारूहेड़ा में प्रधान के पदों को आरक्षित करने के लिए नियमों में वर्णित गठित समिति की बैठक में फैसला लिया गया। इसमें रोटेशन और अनुसूचित जाति की जनसंख्या की अधिकतम प्रतिशतता के आधार पर नगर परिषद रेवाड़ी में प्रधान का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया। नगर पालिकाओं सांपला, उकलाना और धारूहेड़ा में ड्रॉ ऑफ लॉट से आरक्षण घोषित किया गया। इनमें नगर पालिका उकलाना में प्रधान का पद महिला के लिए आरक्षित घोषित किया गया है। इसके अलावा 6 निकायों में उप-चुनाव भी होंगे जिनमें टोहाना, झज्जर, राजौंद, कनीना, तरावड़ी, साढौरा और करनाल शामिल हैं। इन निकायों में एक-एक वार्ड पार्षद के चुनाव होंगे।

लेमनग्रास: छोटे किसानों के लिए आमदनी का नया जरिया

रायपुर. लेमनग्रास की खेती से बदल रही छोटे किसानों की किस्मत लेमनग्रास की खेती छोटे किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है, क्योंकि इसमें लागत कम, मुनाफा ज़्यादा है और यह बंजर ज़मीन पर भी होती है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो रही है और वे आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं। यह फसल कीटों और जंगली जानवरों से सुरक्षित रहती है, एक बार लगाने पर कई सालों तक पैदावार देती है l इससे निकलने वाले तेल की बाज़ार में अच्छी कीमत मिलती है, जिसका उपयोग साबुन, परफ्यूम, और हर्बल उत्पादों में होता है, जिससे किसानों की किस्मत बदल रही है।        छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड गौरेला- पेण्ड्रा-मरवाही जिला अधिकतर वनों से घिरा हुआ क्षेत्र है, जहाँ अधिकांश किसानों के पास कम खेती योग्य भूमि है। कई किसानों के पास तो एक एकड़ जमीन भी नहीं है। ऐसे किसान परिवार अपनी आजीविका के लिए दूसरों के खेतों में मजदूरी या बड़े शहरों में पलायन करने को मजबूर थे।      उल्लेखनीय है कि किसानों की इस स्थिति को देखते हुए वन मंत्री  ईटीवी भारत केदार कश्यप के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष  ईटीवी भारत विकास मरकाम के मार्गदर्शन में बोर्ड के द्वारा औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी के अंतर्गत लेमनग्रास की खेती को जिले में किसानों की आय बढ़ाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से शुरू किया गया है। किसान लगभग 230 एकड़ में कर रहे हैं लेमनग्रास की खेती            बोर्ड द्वारा क्लस्टर मॉडल के माध्यम से किसानों को समूह में जोड़ा गया। लेमनग्रास की बुवाई से पहले ही किसानों का तेल क्रय करने वाले उद्योगों के साथ अनुबंध कराया गया। इन उद्योगों द्वारा बोरवेल, खेत की जुताई, पौधारोपण, फेंसिंग तथा अन्य आवश्यक कार्यों के लिए अग्रिम वित्तीय सहायता दी गई। किसान फसल बेचने के बाद इस राशि को चरणबद्ध तरीके से वापस करते हैं साथ ही, बोर्ड द्वारा लेमनग्रास की स्लिप्स निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं और तेल निकालने के लिए आसवन संयंत्र (डिस्टिलेशन यूनिट) भी स्थापित किए गए। भविष्य में हर 50 किसानों पर एक संयंत्र स्थापित करने की योजना है। आज गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के 4 क्लस्टरों खरड़ी, पंडरी, अमारू और हरड़ी के 123 किसान लगभग 230 एकड़ में लेमनग्रास की खेती कर रहे हैं। एक बार लगाए गए पौधों से कई वर्षों तक मिलती है फसल         गांव बहरी–जोरकी के किसान अगहन सिंह के पास केवल 35 डिसमिल (लगभग 1/3 एकड़) भूमि थी। कम जमीन होने के कारण उनकी आय सीमित थी। बोर्ड से प्रेरणा लेकर उन्होंने लेमनग्रास की खेती शुरू करने का फैसला किया। बोर्ड द्वारा उन्हें लेमनग्रास की स्लिप्स निःशुल्क प्रदान की गईं। लेमनग्रास की फसल केवल 4 महीने में तैयार हो जाती है। पहली कटाई में 4 लीटर तेल प्राप्त होता है जिसका बाजार मूल्य  1000 रुपए प्रति लीटर है जिससे कुल आय  4,000 रुपए होगी। इसी तरह दूसरी कटाई (अगले 4 महीने बाद) से 8 लीटर तेल प्राप्त होगा जिससे कुल आय 8,000 रुपये होगी। इस तरह किसान को एक वर्ष में कुल आय 12,000 रुपये और यह आय आने वाले 5 वर्षों तक लगातार मिलती रहेगी, क्योंकि एक बार लगाए गए पौधों से कई वर्षों तक फसल मिलती है। किसान लेमनग्रास की खेती से बन रहे हैं आत्मनिर्भर           अगहन सिंह जैसे कई किसान आज लेमनग्रास की खेती से आत्मनिर्भर बन रहे हैं। इस मॉडल की खासियत यह है कि किसान शून्य बजट में खेती शुरू कर सकते हैं और उन्हें तत्काल आय मिलनी शुरू हो जाती है। लेमनग्रास की खेती छोटे किसानों के लिए एक वरदान         लेमनग्रास की खेती से किसानों की आय में वृद्धि, रोजगार के स्थानीय अवसर, पलायन में कमी और छोटे किसानों की आर्थिक मजबूती जैसे सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। गौरेला-पेण्ड्रा- मरवाही में यह कहना बिल्कुल उचित है कि लेमनग्रास की खेती छोटे किसानों के लिए एक वरदान बनकर उभर रही है।

इवेंट्स की पूरी जानकारी चाहिए? अब यहीं मिल जाएगी हर अपडेट

कुछ साल पहले तक अपने ही शहर में होने वाले नाटक, संगीत कार्यक्रम, साहित्यिक गोष्ठी, प्रदर्शनी या सेमिनार की जानकारी समय पर मिल पाना मुश्किल होता था। अख़बारों में सीमित कवरेज और पोस्टरों पर निर्भरता के कारण लोग चाहकर भी कई अच्छे कार्यक्रमों से वंचित रह जाते थे। लेकिन डिजिटल दौर ने तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। आज इवेंट्स से जुड़ी जानकारी, टिकट बुकिंग, रिमाइंडर और यहां तक कि ऑनलाइन इवेंट्स तक-सब कुछ एक क्लिक पर उपलब्ध है। आज देशभर में कई ऐसी वेबसाइटें और ऐप्स मौजूद हैं, जो न सिर्फ इवेंट्स की विस्तृत जानकारी देती हैं बल्कि टिकट खरीदने, ऑफर पाने और पसंद के अनुसार इवेंट चुनने की सुविधा भी देती हैं। आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ प्रमुख और अपडेटेड इवेंट वेबसाइट्स के बारे में- बुकमायशो बुकमायशो आज भारत की सबसे लोकप्रिय इवेंट और टिकटिंग वेबसाइट बन चुकी है। यह प्लेटफॉर्म फिल्मों के साथ-साथ लाइव कॉन्सर्ट, थिएटर, स्टैंड-अप कॉमेडी, स्पोर्ट्स, फेस्टिवल और वर्कशॉप्स को कवर करता है। -300+ शहरों में इवेंट्स -आसान टिकट बुकिंग और डिजिटल टिकट -कई कार्यक्रमों पर छूट और कैशबैक -तारीख, शहर और कैटेगरी के हिसाब से सर्च की सुविधा पे-टाइम इनसाइडर पे-टाइम इनसाइडर युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह म्यूजिक फेस्टिवल, पार्टी, स्टार्टअप मीटअप, फिटनेस इवेंट्स और एक्सपीरियंस-बेस्ड इवेंट्स पर खास फोकस करता है। -क्यूरेटेड और ट्रेंडी इवेंट्स -ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प -टिकट के साथ एक्सपीरियंस बुकिंग -आसान मोबाइल ऐप टाउनस्क्रिप्ट टाउनस्क्रिप्ट खासतौर पर सेमिनार, वर्कशॉप, टेक इवेंट्स और एजुकेशनल प्रोग्राम्स के लिए जाना जाता है। -स्टूडेंट्स और प्रोफेशनल्स के लिए उपयोगी -फ्री और पेड इवेंट्स की अलग पहचान -आयोजकों और दर्शकों दोनों के लिए सुविधाजनक इवेंट्सहाई इवेंट्सहाई देश के कई बड़े शहरों में होने वाले सांस्कृतिक, पारिवारिक और प्रोफेशनल इवेंट्स की जानकारी देता है। -शहरवार इवेंट लिस्टिंग -बच्चों और परिवार के लिए खास कैटेगरी -कई इवेंट्स पर टिकट बुकिंग सुविधा दिल्ली इवेंट्स दिल्ली-एनसीआर में रहने वालों के लिए यह वेबसाइट बेहद उपयोगी है। -दिन, महीने और वेन्यू के अनुसार इवेंट्स -उम्र और रुचि के हिसाब से वर्गीकरण -ईमेल अलर्ट और नियमित अपडेट मीटअप अगर आप नेटवर्किंग, स्टार्टअप, टेक, फिटनेस या हॉबी ग्रुप्स में रुचि रखते हैं, तो मीटअप आपके लिए सही प्लेटफॉर्म है। -लोकल कम्युनिटी इवेंट्स -ज़्यादातर फ्री या कम शुल्क वाले कार्यक्रम -नए लोगों से मिलने और सीखने का अवसर निष्कर्ष आज इवेंट्स की जानकारी के लिए सिर्फ अख़बारों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने शहरों की सांस्कृतिक, सामाजिक और प्रोफेशनल गतिविधियों को हर व्यक्ति तक पहुंचा दिया है। चाहे आप संगीत प्रेमी हों, थिएटर के शौकीन, स्टूडेंट, प्रोफेशनल या परिवार के साथ वीकेंड प्लान करने वाले-इन वेबसाइट्स पर आपको हर पसंद का इवेंट मिल जाएगा।