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डोनाल्ड ट्रंप की नियुक्ति: भारतीय मूल के नेता को मिली बोर्ड ऑफ पीस में बड़ी भूमिका

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण और वहां शांति स्थापित करने के उद्देश्य से एक नए अंतरराष्ट्रीय निकाय का गठन किया है। इसे उन्होंने 'बोर्ड ऑफ पीस' नाम दिया गया है। इस बोर्ड के 'फाउंडिंग एग्जीक्यूटिव बोर्ड' में उन्होंने भारतीय मूल के एक शख्स को बड़ी जिम्मेदारी दी है। उस शख्स का नाम अजय बंगा है। अजय बंगा वर्तमान में वर्ल्ड बैंक के प्रेसिडेंट (अध्यक्ष) हैं। यह नियुक्ति कुछ दिन पहले ही हो गई थी। वाइट हाउस ने बताया कि ट्रंप खुद इस 'बोर्ड ऑफ पीस' के चेयरमैन हैं। यह कदम ट्रंप के 20-सूत्रीय गाजा पीस प्लान के फेज-2 का हिस्सा है।   'बोर्ड ऑफ पीस' क्या है और इसका काम क्या होगा? यह बोर्ड ट्रंप के उस 20-सूत्रीय शांति योजना का हिस्सा है, जिसका मकसद गाजा में चल रहे संघर्ष को समाप्त कर वहां विकास के नए रास्ते खोलना है। इसका मकसद गाजा में इंफ्रास्ट्रक्चर का पुनर्निर्माण करना, अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना और प्रशासनिक व्यवस्था को सुधारना है। अजय बंगा की भूमिका की बात करें तो वह एक वित्तीय विशेषज्ञ हैं। वर्ल्ड बैंक के प्रमुख के तौर पर बंगा की भूमिका बेहद अहम होगी। उन्हें गाजा के लिए निवेश आकर्षित करने, बड़ी फंडिंग जुटाने और आर्थिक रणनीतियां बनाने की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इस बोर्ड की अध्यक्षता खुद डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। उनके अलावा इसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर जैसे बड़े नाम शामिल हैं। यह नियुक्ति क्यों मायने रखती है? अजय बंगा को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने वर्ल्ड बैंक के लिए नॉमिनेट किया था, लेकिन अब रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी उन पर भरोसा जता रहे हैं। यह बंगा की वैश्विक स्वीकार्यता और उनकी आर्थिक कूटनीति की क्षमता को दर्शाता है। गाजा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर उन्हें शामिल करना यह बताता है कि अमेरिका वहां के पुनर्निर्माण को एक बड़े आर्थिक प्रोजेक्ट के तौर पर देख रहा है। कौन हैं अजय बंगा? अजय बंगा कॉर्पोरेट जगत और वैश्विक अर्थव्यस्था का एक जाना-माना नाम हैं। मास्टरकार्ड को नई ऊंचाइयों पर ले जाने से लेकर वर्ल्ड बैंक की कमान संभालने तक, उनका सफर प्रेरणादायक रहा है। उनका पूरा नाम अजयपाल सिंह बंगा है। वे 1959 में महाराष्ट्र के पुणे (खड़की छावनी) में एक सिख परिवार में पैदा हुआ। उनके पिता, हरभजन सिंह बंगा, भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल थे। इस कारण उनकी स्कूली शिक्षा भारत के अलग-अलग शहरों (सिकंदराबाद, शिमला, दिल्ली) में हुई। उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया और फिर IIM अहमदाबाद से मैनेजमेंट (MBA) की डिग्री हासिल की। करियर का सफर बंगा ने 1981 में नेस्ले इंडिया के साथ अपना करियर शुरू किया और वहां 13 साल तक काम किया। इसके बाद वे पेप्सिको से जुड़े, जहां उन्होंने भारत में 'पिज्जा हट' और 'केएफसी' जैसे ब्रांड्स को लॉन्च करने में अहम भूमिका निभाई। 1996 में वे सिटीग्रुप से जुड़े और धीरे-धीरे एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के CEO बने। 2010 में वे मास्टरकार्ड के CEO बने। उनके नेतृत्व में कंपनी ने न सिर्फ भारी मुनाफा कमाया, बल्कि टेक्नोलॉजी और डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में क्रांति ला दी। वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष मई 2023 में वे वर्ल्ड बैंक के 14वें अध्यक्ष चुने गए। वह इस पद पर पहुंचने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी हैं। वर्ल्ड बैंक में उनका फोकस जलवायु परिवर्तन, गरीबी उन्मूलन और विकासशील देशों को आर्थिक मदद देने पर रहा है। भारत सरकार ने उन्हें 2016 में 'पद्म श्री' से सम्मानित किया था। बराक ओबामा के कार्यकाल में वे साइबर सुरक्षा पर राष्ट्रपति के सलाहकार आयोग के सदस्य भी रह चुके हैं। कुल मिलाकर ट्रंप ने अजय बंगा को विशेष रूप से आर्थिक रणनीति, फंड मोबिलाइजेशन और रिकंस्ट्रक्शन पोर्टफोलियो में योगदान के लिए चुना गया है, क्योंकि विश्व बैंक के प्रमुख के तौर पर उनके पास वैश्विक विकास फंडिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर का गहरा अनुभव है।

प्रमुख सचिव निहारिका बारिक ने गरियाबंद में की समीक्षा बैठक

रायपुर.गरियाबंद  पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव  निहारिका बारिक ने शुक्रवार को गरियाबंद के जिला पंचायत सभाकक्ष में जिला स्तरीय अधिकारियों की विस्तृत समीक्षा बैठक ली। बैठक में जिले में संचालित प्रमुख शासकीय योजनाओं, विकास कार्यों, प्रशासनिक व्यवस्थाओं तथा सेवा प्रदाय तंत्र की समग्र प्रगति की गहन समीक्षा की गई। बैठक में मनरेगा आयुक्त तारन प्रकाश सिन्हा, एनआरएलएम के प्रबंध संचालक  अश्विनी देवांगन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के उप सचिव  सच्चिदानंद आलोक, जिला पंचायत सीईओ  प्रखर चंद्राकर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। समीक्षा के दौरान प्रमुख सचिव   बारिक ने ग्रामीण विकास से संबंधित प्रमुख योजनाओं—प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान), पंचायत एवं ग्रामीण अधोसंरचना विकास, जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, पंचायत एवं ग्रामीण यांत्रिकी सेवाओं तथा राज्यपाल द्वारा गोद लिए गए ग्राम बिजली की अद्यतन स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। प्रमुख सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि शासन की प्राथमिक योजनाओं का लाभ अंतिम पात्र हितग्राहियों तक पारदर्शी, समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पहुँचना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विभागों के मध्य बेहतर समन्वय, कार्यों की नियमित निगरानी तथा लंबित योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत स्वीकृति, निर्माण प्रगति एवं भुगतान की स्थिति की सतत निगरानी करने के निर्देश देते हुए उन्होंने लक्ष्य के अनुरूप समय पर आवास पूर्ण कराने पर बल दिया। मनरेगा अंतर्गत सृजित श्रम दिवसों, सामुदायिक एवं व्यक्तिगत लाभ के कार्यों, जल संरक्षण एवं संवर्धन गतिविधियों की समीक्षा करते हुए उन्होंने पूर्ण पारदर्शिता एवं सटीक अभिलेख संधारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत शौचालय निर्माण, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन तथा स्वच्छता व्यवहार परिवर्तन गतिविधियों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। जल जीवन मिशन के अंतर्गत घरेलू नल कनेक्शन की प्रगति, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्धता, मोटर-पंप एवं पाइपलाइन मरम्मत कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही ग्रामीण सड़क निर्माण, पुल-पुलियों के रखरखाव, यातायात सुविधा विस्तार एवं पंचायत एवं ग्रामीण यांत्रिकी विभाग द्वारा संचालित कार्यों की भी समीक्षा की गई। प्रमुख सचिव   बारिक ने कहा कि शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता सर्वोपरि है, तथा दिए गए निर्देशों के पालन की सतत समीक्षा की जाएगी।

रायपुर साहित्य उत्सव: ओपन माइक ने प्रतिभाओं को बनाया केंद्र बिंदु

रायपुर. रायपुर साहित्य उत्सव के अंतर्गत प्रदेश के लब्ध प्रतिष्ठित कवि पद्म  स्वर्गीय सुरेन्द्र दुबे जी को समर्पित ओपन माइक मंच पर पहले दिन चार सत्रों का आयोजन किया गया, जिसमें 75 से अधिक प्रतिभागियों ने अपनी सृजनात्मक प्रस्तुतियाँ दीं। इस मंच पर कविता, कहानी, गायन, वादन, सामूहिक नृत्य एवं शास्त्रीय नृत्य जैसी विविध विधाओं में प्रतिभागियों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। ओपन माइक सत्र में छत्तीसगढ़ के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से आए प्रतिभागियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। यह विशेष मंच विभिन्न विधाओं के कलाकारों को अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से सुसज्जित किया गया था, जहाँ बाँसुरी, गिटार और वायलिन वादन की प्रस्तुतियों ने वातावरण को संगीतमय बना दिया। नन्ही नृत्यांगनाओं ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया, वहीं सरगुजा से लेकर बस्तर तक के युवा कवियों और ग़ज़लकारों ने अपनी सशक्त रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रतिभागियों को राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष   अमरजीत सिंह छाबड़ा, महंत कॉलेज के प्राचार्य   देवाशीष महंत तथा संयुक्त संचालक, जनसंपर्क  मती इस्मत जहाँ दानी द्वारा प्रमाण पत्र वितरित किए गए। ओपन माइक सत्र ने न केवल नवोदित प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया, बल्कि साहित्य, कला और संस्कृति के प्रति युवाओं के उत्साह और रचनात्मक ऊर्जा को भी प्रभावी रूप से उजागर किया।

SIR विवाद पर ममता बनर्जी का बड़ा बयान: तनाव ऐसा कि बंगाल में रोज 3-4 आत्महत्याएं

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर शुक्रवार को बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि राज्य में जारी एसआईआर अभ्यास के चलते फैली चिंता के कारण हर दिन तीन से चार लोग आत्महत्या कर रहे हैं। सुभाष चंद्र बोस की जयंती के उपलक्ष्य में कोलकाता में रेड रोड पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा, 'निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार को इन मौतों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। अब तक 110 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। प्रतिदिन तीन से चार लोग SIR की वजह से अत्यधिक चिंता के कारण आत्महत्या कर रहे हैं।’ आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में मतदाता सूचियों का एसआईआर अभ्यास जारी है। ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर पश्चिम बंगाल के खिलाफ साजिश रचने का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाषचंद्र बोस और बीआर आंबेडकर जैसे देश के महान व्यक्तित्वों का अपमान किया जा रहा है। इसस पहले, ममता बनर्जी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने केंद्र सरकार से इस महान स्वतंत्रता सेनानी से जुड़े सभी शेष दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की अपील की। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर श्रद्धांजलि ममता बनर्जी ने कहा कि दशकों बीत जाने के बावजूद नेताजी के लापता होने का रहस्य अब तक अनसुलझा है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'देशनायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर मैं उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि और नमन अर्पित करती हूं। यह हम सभी का दुर्भाग्य है कि नेताजी के लापता होने का रहस्य आज तक नहीं सुलझा है। 1945 के बाद उनके साथ क्या हुआ, यह हम नहीं जानते। यह सभी के लिए अत्यंत दुख की बात है।' बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस से संबंधित सभी राज्य स्तरीय फाइलें बहुत पहले ही सार्वजनिक कर दी थीं। उन्होंने कहा कि मैं भारत सरकार से एक बार फिर अपील करती हूं कि नेताजी से संबंधित सभी जानकारियों को सार्वजनिक किया जाए।  

अमेरिकी मीडिया ने खोली ट्रंप पहल की परतें, ‘पीस बोर्ड’ निकला सिर्फ दिखावा?

नई दिल्ली डोनाल्ड ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस की पोल अमेरिकी मीडिया ने ही खोल दी है। अमेरिका के अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने उनके इस प्लान को वनमैन शो बताया है। अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए अखबार की यह टिप्पणी आईना दिखाने वाली है, जो अपने द्वारा तय एजेंडे को चलाने के लिए बोर्ड ऑफ पीस शुरू करना चाहते हैं। अखबार ने लिखा है कि डोनाल्ड ट्रंप की यह संस्था वन मैन पावर शो है। इसके तहत डोनाल्ड ट्रंप को ही अधिकार होगा कि वह किसी भी मसले पर वीटो कर सकते हैं। वह अनिश्चितकाल तक इस बोर्ड का चेयरमैन खुद को घोषित कर चुके हैं। इसके अलावा बोर्ड का एजेंडा भी वही तय करेंगे। उनके द्वारा ही तय किया जाएगा कि कौन इसमें रहेगा और नहीं।   इतना ही नहीं डोनाल्ड ट्रंप जब भी चाहें इस बोर्ड को भंग कर सकते हैं और अपना उत्तराधिकारी तय कर सकते हैं। इस बोर्ड ऑफ पीस के गठन का जो ड्राफ्ट है, उसके आर्टिकल 3.2 में ही लिखा गया है कि पहले चेयरमैन डोनाल्ड ट्रंप होंगे। अखबार लिखता है कि कई अधिकारी और एक्सपर्ट मानते हैं कि यह वनमैन शो है। अखबार ने लिखा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद बनी व्यवस्था को बदलकर डोनाल्ड ट्रंप नया सिस्टम लाना चाहते हैं और खुद को ही उसके केंद्र में रखने का विचार है। कैंब्रिज इंटरनेशनल लॉ प्रोफेसर मार्क वेलर ने कहा कि यह तो सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र पर हमला है और उसके वजूद पर खतरा पैदा करना है। सऊदी अरब, मिस्र, इजरायल, बेलारूस, पाकिस्तान समेत कई देश इससे जुड़े हैं। हंगरी भी इससे जुड़ा है और उसने तो डोनाल्ड ट्रंप की शान में कसीदे पढ़े हैं। हंगरी के पीएम विक्टर ऑर्बन ने फेसबुक पर लिखा, 'जहां ट्रंप, वहां शांति। मिस्टर ट्रंप ने मुझे बोर्ड का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है और मैंने निसंदेह इससे जुड़ूंगा। यह मेरे लिए गर्व की बात है।' मार्क वेलर कहते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की यह कोशिश है कि वह पूरी दुनिया को ही अपने इर्द-गिर्द घुमाएं। दरअसल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ही नवंबर में गाजा में शांति प्रस्ताव के लिए एक बोर्ड का गठन की बात रखी थी। इस प्रस्ताव के तहत यह कहा गया था कि 2027 तक यह बोर्ड काम करेगा। यह बोर्ड गाजा में हालात सामान्य करेगा। अब तक बोर्ड ऑफ पीस की शक्तियां निर्धारित नहीं की गई हैं, लेकिन जैसे हालात हैं उसके अनुसार ऐसा लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप वन मैन शो बनाने की कोशिश में हैं। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को एक स्पीच में कहा था कि संयुक्त राष्ट्र संघ उम्मीदें पूरी नहीं कर पाया है। उनका कहना था कि इस संस्था में बहुत क्षमता थी, लेकिन वह उम्मीदें पूरी नहीं कर सकी है। एक बयान से साफ हो गए ट्रंप के इरादे, तब से ही आशंकाएं उनका कहना था कि बोर्ड ऑफ पीस दुनिया के विवादों को खत्म करेगा। यही नहीं भविष्य में यूएन की ही जगह ले सकता है। इससे उनके इरादे स्पष्ट हो गए, लेकिन दुनिया भर के देशों में इसे लेकर चिंता भी बढ़ गई कि आखिर डोनाल्ड ट्रंप संयुक्त राष्ट्र को क्यों खत्म करना चाहते हैं। इसके अलावा अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में एकछत्र राज कायम करने की कोशिशों की भी आलोचना हो रही है।  

तेल की गुणवत्ता पर कड़ी नजर, खराब खाद्य सामग्री का निस्तारण

अंबिकापुर कलेक्टर  अजीत वसंत के आदेश एवं अपर कलेक्टर  सुनील नायक के निर्देशानुसार खाद्य प्रतिष्ठानों में उपयोग हो रहे खाद्य तेल की गुणवत्ता एवं स्वच्छता की जांच हेतु खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा शहर में सघन निरीक्षण अभियान चलाया गया। जांच के दौरान भारत माता चौक स्थित एक प्रतिष्ठित होटल में तेल रिफ्रेक्टोमीटर के माध्यम से खाद्य तेल के घनत्व की जांच की गई, जिसमें तेल का घनत्व 35 मानक पाया गया, जो मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। टीम द्वारा मौके पर ही लगभग 22 लीटर हानिकारक तेल को नष्ट कराया गया। साथ ही उसी तेल से बनाए गए लगभग 250 नग समोसे भी तत्काल नष्ट कराए गए। इसके अतिरिक्त होटल परिसर में काकरोच पाए जाने पर होटल संचालक को नोटिस जारी किया गया। इसके पश्चात् खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम अभिहित अधिकारी के नेतृत्व में टीम द्वारा रिंग रोड स्थित होटल आरजू का निरीक्षण किया गया, जहां शाकाहारी एवं मांसाहारी खाद्य पदार्थों का पृथक भंडारण नहीं पाया गया। निरीक्षण में काबुली चना, पनीर एवं हरी चटनी को एक ही डीप फ्रीजर में चिकन एवं मटन के साथ भंडारित किया जाना पाया गया। साथ ही होटल की रसोई में बड़ी संख्या में काकरोच पाए गए, जो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है। उक्त गंभीर लापरवाही को देखते हुए दोनों होटल संचालकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। अग्रिम कार्रवाई के तहत संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं होने की स्थिति में संबंधित फर्मों के लाइसेंस निलंबन की कार्यवाही की जाएगी।खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने सभी खाद्य प्रतिष्ठान संचालकों को खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, स्वच्छता एवं नियमों के पालन के निर्देश दिए हैं।  

जंगल में घातक ऑपरेशन: झारखंड में सुरक्षाबलों की कार्रवाई, 21 नक्सली मारे गए

चाईबासा झारखंड के सारंडा जंगल में छिपे नक्सलियों पर मौत बरस पड़ी है। 36 घंटे से जारी मुठभेड़ में अब तक 21 नक्सली मौत के घाट उतारे जा चुके हैं। गुरुवार को 15 की मौत की पुष्टि के बाद शुक्रवार को 6 और शव बरामद किए गए हैं। सिर पर 2 करोड़ से ज्यादा इनाम वाला खूंखार नक्सली अनल यहां 25 लड़ाकों संग घिर गया था। अनल समेत 21 मारे जा चुके हैं।   झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में सारंडा के घने जंगलों में दो दर्जन नक्सलियों के साथ पतिराम मांझी उर्फ​अनल दा को घेर लिया गया था। सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस ने जॉइंट ऑपरेशन में इन्हें घेर लिया। नक्सलियों की ओर से फायरिंग के बाद सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई से खलबली मचा दी। 2.35 करोड़ रुपये के इनाम वाला अनल दा भी मारा गया। उस पर झारखंड सरकार ने एक करोड़ रुपये, ओडिशा सरकार ने 1.2 करोड़ रुपये और नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) ने 15 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। अनल दा का मारा जाना क्यों इतनी बड़ी चोट अनल दा माओवादियों के मिलिट्री कमीशन का प्रमुख भी था। हाल के सालों में कोल्हान के सारंडा जंगली क्षेत्र में माओवादियों की ओर से सुरक्षाबलों पर किए गए बड़े हमलों में अनल की भूमिका अहम थी। मारे गए नक्सलियों में 25 लाख का इनामी सैक कमांडर अनमोल उर्फ सुशांत भी है। अनमोल पर ओडिशा में भी 65 लाख का इनाम था। अब तक ढेर किए गए नक्सलियों में एक दर्जन से ज्यादा की पहचान कर ली गई है। मारे गए नक्सलियों में कई महिलाएं भी हैं। भारी मात्रा में विस्फोटक भी बरामद आईजी अभियान माइकल राज एस ने बताया कि चाईबासा के किरीबुरु के बीहड़ कुमड़ी और होंजोदिरी गांव के बीच गुरुवार सुबह करीब छह बजे शुरू हुई मुठभेड़ के बाद सर्च अभियान के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक भी बरामद किए हैं। हेलीकॉप्टर और ड्रोन की मदद से नक्सलियों की तलाश की जा रही है। आईजी अभियान ने यह भी कहा कि इस ऑपरेशन से माओवादी संगठन की कमर टूट गई है।  

साइना नेहवाल की उपलब्धियों पर विराट कोहली का खास संदेश, बोले– देश को आप पर नाज़ है

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान विराट कोहली और दो बार बैडमिंटन में ओलंपिक पदक जीतने वाली स्टार शटलर पीवी सिंधु ने दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल को बैडमिंटन से संन्यास लेने पर उनके बेहतरीन करियर के लिए बधाई दी। विराट कोहली ने एक्स पर लिखा, "साइना नेहवाल, आपके शानदार करियर के लिए बधाई। आपने भारतीय बैडमिंटन को दुनिया भर में पहचान दिलाई। आपको एक खुशहाल, संतोषजनक और अच्छे संन्यास की शुभकामनाएं। भारत को आप पर गर्व है।" पीवी सिंधु ने एक्स पर लिखा, "सायना, आपको संन्यास की शुभकामनाएं। इंडियन बैडमिंटन में आपने जो कुछ भी दिया है, उसके लिए धन्यवाद। जिंदगी के इस अगले पड़ाव के लिए आपको शांति, खुशी और ढेर सारी शुभकामनाएं।" पूर्व दिग्गज ऑलराउंडर युवराज सिंह ने भी साइना नेहवाल को उनके संन्यास पर बधाई देते हुए लिखा था, "बहुत बढ़िया खेला, साइना। शानदार करियर के लिए बधाई। आपने भारतीय बैडमिंटन को आगे बढ़ाया और एक पीढ़ी को प्रेरित किया। आगे जो भी हो, उसके लिए आपको शुभकामनाएं।" इंजरी की वजह से लंबे समय तक बैडमिंटन से दूर रहने के बाद साइना ने बैडमिंटन को अलविदा कह दिया है। संन्यास की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा, "आप दुनिया में बेस्ट बनने के लिए आठ से नौ घंटे ट्रेनिंग करते हैं। अब, मेरे घुटने एक या दो घंटे में ही जवाब दे जाते थे। सूजन आ गई थी, और उसके बाद जोर लगाना बहुत मुश्किल हो गया था। इसलिए मुझे लगा कि बस बहुत हो गया। मैं अब और जोर नहीं लगा सकती। मेरा कार्टिलेज पूरी तरह से खराब हो गया है। आर्थराइटिस है, और वापसी बेहद मुश्किल है। इसलिए अपने परिवार और कोच से बात करने के बाद मुझे यह मुश्किल फैसला लेना पड़ा।" साइना ओलंपिक में बैडमिंटन में भारत को पदक दिलाने वाली पहली खिलाड़ी हैं। 2012 में उन्होंने लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था। हिसार की इस बैडमिंटन खिलाड़ी ने 2008 में जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतकर और बीजिंग 2008 ओलंपिक्स में एकल क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनकर इतिहास रचा था और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई थी। 2009 में, उन्होंने इंडोनेशिया ओपन जीतकर बीडब्ल्यूएफ सुपर सीरीज टूर्नामेंट जीतने वाली पहली भारतीय बनकर इतिहास रच दिया। एक साल बाद, उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन का दर्जा हासिल किया। 2015 में, उन्होंने एकल बैडमिंटन रैंकिंग में दुनिया की नंबर 1 बनकर एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया, जिससे वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं और प्रकाश पादुकोण के बाद शीर्ष पर पहुंचने वाली दूसरी भारतीय शटलर बनीं। उस साल, वह बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में भी पहुंचीं, ऐसा करने वाली वह भारत की पहली खिलाड़ी थीं। भारतीय बैडमिंटन को मजबूती से अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने में अहम भूमिका निभाने वाली साइना को पद्मश्री, पद्मभूषण, खेल रत्न और अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

रिवायत : ग़ज़लों की खुशनुमा महफ़िल 25 जनवरी को सजेगी

 रिवायती ग़ज़लें सिर्फ़ शब्द नहीं, बल्कि रूह की आवाज़ होती हैं: सुश्री श्रुति प्रभला बिलासपुर रिवायत का अर्थ है परंपरा और रीति-रिवाज़। शताब्दियों पूर्व लिखी गई रिवायती ग़ज़लें आज भी ऐसी प्रतीत होती हैं, मानो वे हमारे ही जीवन की आपबीती हों। इन ग़ज़लों को सुनते हुए ऐसा महसूस होता है कि हर शेर श्रोता के दिल के बेहद करीब है। साहित्यिक दृष्टि से कठिन होने के बावजूद रिवायती ग़ज़लें भावपूर्ण और अर्थवान होती हैं। उर्दू भाषा से सामान्य परिचय रखने वाला श्रोता भी इनमें निहित जज़्बातों को गहराई से समझ सकता है। ऐसी ही रिवायती ग़ज़लों की एक विशेष संध्या “रिवायत” 25 जनवरी 2026, रविवार को शाम 6.30 बजे लखीराम ऑडिटोरियम, बिलासपुर में आयोजित की जा रही है। कार्यक्रम में बिलासपुर की प्रसिद्ध शास्त्रीय, भजन एवं ग़ज़ल गायिका श्रुति प्रभला अपनी सुमधुर गायकी प्रस्तुत करेंगी। शुक्रवार को प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार-वार्ता में श्रुति प्रभला ने कहा कि रिवायती ग़ज़लें केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मा की अभिव्यक्ति होती हैं। उन्होंने बताया कि आम तौर पर प्रचलित ग़ज़लें गीतनुमा होती हैं, जो सरल भाषा में लिखी जाती हैं, जबकि रिवायती ग़ज़लें गहरे भाव और गंभीर अनुभूति से उपजी होती हैं। इन ग़ज़लों के जज़्बात केवल सुनने से नहीं, बल्कि दिल से महसूस करने पर समझ में आते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने एक शेर पढ़ा “अगर तू इत्तिफ़ाक़न मिल भी जाए, तिरी फ़ुर्क़त के सदमे कम न होंगे” श्रुति ने कहा कि उर्दू ज़ुबान में रची गई ग़ज़ल का हर शेर श्रोता की आत्मकथा बनकर उभरता है। उन्होंने आगे कहा “मसर्रतों की तलाश में है मगर यह दिल जानता नहीं, अगर ग़म-ए-ज़िंदगी न हो तो ज़िंदगी में मज़ा नहीं। मूलतः शास्त्रीय गायिका श्रुति प्रभला भजन गायन में भी समान रूप से दक्ष हैं, फिर भी ग़ज़लों के प्रति उनका विशेष झुकाव है। इस पर उन्होंने कहा, भजन मैं गाती हूँ, लेकिन ग़ज़ल मेरे गले से बे-साख़्ता निकलती है। मैं स्वयं को ग़ज़लों के बेहद करीब पाती हूँ। श्रुति प्रभला, संगीत रिसर्च अकादमी, कोलकाता के गुरु एवं आगरा संगीत घराने के उस्ताद वसीम अहमद खान की शिष्या हैं। उन्होंने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से मास्टर ऑफ़ परफ़ॉर्मिंग आर्ट्स की उपाधि प्राप्त की है। अपने संगीत-प्रशिक्षण काल में श्रुति देश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी गायकी की छाप छोड़ चुकी हैं। वे अंतरराष्ट्रीय गायन प्रतियोगिता “द वॉयस ऑफ़ वर्ल्ड” की विजेता रह चुकी हैं। इसके अतिरिक्त इस्कॉन नेल्लोर द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय भजन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान व गोल्ड मेडल, पेंड्रा में स्व. माधवराव सप्रे स्मृति महोत्सव में कबीर गायन के लिए मुख्यमंत्री सम्मान एवं नव्या सम्मान से भी उन्हें नवाज़ा गया है। उन्होंने डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय के युवा बसंत महोत्सव, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ राज्योत्सव सहित अनेक मंचों पर शास्त्रीय, ग़ज़ल एवं कबीर गायन की ओजस्वी प्रस्तुतियाँ दी हैं। श्रुति ने एनटीपीसी, सीपत का आधिकारिक गीत भी गाया है तथा ऑल इंडिया रेडियो के लिए विशेष ग़ज़ल कार्यक्रम प्रस्तुत किया है। कार्यक्रम “रिवायत” में अहमद फ़राज़, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, बहज़ाद लखनवी, मिर्ज़ा ग़ालिब और अल्लामा इक़बाल जैसे महान शायरों की रचनाएँ प्रस्तुत की जाएँगी। साथ ही वर्तमान दौर की प्रसिद्ध ग़ज़ल गायिका डॉ. राधिका चोपड़ा की गाई हुई कुछ ग़ज़लें भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगी। श्रुति ने बताया कि डॉ. राधिका चोपड़ा ग़ज़ल गायन के क्षेत्र में उनकी गुरु समान हैं। ग़ज़लें केवल प्रेम और विरह तक सीमित नहीं होतीं—इस प्रश्न पर श्रुति ने दार्शनिक अंदाज़ में कहा कि मनुष्य का सम्पूर्ण जीवन प्रेम से ही जुड़ा है। प्रेम केवल प्रेमी-प्रेमिका तक सीमित नहीं, बल्कि माता-पिता, परिवार, समाज और ईश्वर से जुड़ा भाव भी है। रिवायती ग़ज़लें जीवन की पूरी यात्रा प्यार, पीड़ा, सम्मान और स्मृतियों को उजागर करती हैं। ये ग़ज़लें दिल की डायरी की तरह होती हैं, जहाँ हर शेर एक एहसास और एक अनकहा सच समेटे रहता है। इसी कड़ी में श्रुति प्रभला ने ग़ज़लों के शौकीन सभी श्रोताओं से 25 जनवरी 2026, रविवार शाम 6.30 बजे लखीराम ऑडिटोरियम में आयोजित “रिवायत” कार्यक्रम में उपस्थित होने की अपील की।

स्वास्थ्य को लेकर उठे सवाल, हाथ के निशान पर ट्रंप की सफाई—क्या है पूरा मामला?

नई दिल्ली दुनिया भर के दिग्गज नेताओं के बीच दावोस में 'बोर्ड ऑफ पीस' के गठन में जुटे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपनी सेहत को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। समारोह के दौरान उनके बाएं हाथ पर गहरे नीले रंग के निशान देखे गए, जिससे सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उनकी सेहत को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद इन चर्चाओं पर विराम लगाते हुए इसे एक मामूली घटना बताया है। हाथ पर मौजूद निशानों को लेकर उठ रहे सवालों पर जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा कि यह चोट केवल एक दुर्घटना का परिणाम है। उन्होंने पत्रकारों से कहा, "मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं। मेरा हाथ टेबल के कोने से टकरा गया था। मैंने इस पर थोड़ा सा मरहम लगाया है। डॉक्टर कहते हैं कि मुझे कुछ भी लेने की जरूरत नहीं है, लेकिन मैं कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।" ट्रंप ने इन निशानों का संबंध अपनी नियमित दवाओं से भी जोड़ा। उन्होंने बताया कि वह अपने दिल की सेहत के लिए रोजाना 325 मिलीग्राम की बड़ी एस्पिरिन लेते हैं। ट्रंप के अनुसार, इस दवा की वजह से त्वचा संवेदनशील हो जाती है और हल्का सा टकराने पर भी नीला निशान पड़ जाता है। उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज में कहा, "मैं चाहता हूं कि मेरे दिल में खून का बहाव अच्छा और पतला रहे। अगर आप अपना दिल अच्छा रखना चाहते हैं तो एस्पिरिन लें, लेकिन इसके साथ थोड़े नीले निशान सहने के लिए भी तैयार रहें।" वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने भी राष्ट्रपति के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि 'बोर्ड ऑफ पीस' कार्यक्रम के दौरान ट्रंप का हाथ मेज के कोने से टकरा गया था। अधिकारियों ने राष्ट्रपति की पहले और बाद की तस्वीरें साझा करते हुए यह साबित करने की कोशिश की कि यह निशान अचानक लगी चोट का ही हिस्सा है। ट्रंप के निजी चिकित्सक डॉ. सीन बारबाबेला ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति प्रतिदिन 325 मिलीग्राम एस्पिरिन लेते हैं। मेयो क्लिनिक जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के अनुसार, दिल की सुरक्षा के लिए आमतौर पर 75 से 100 मिलीग्राम की खुराक पर्याप्त मानी जाती है। अधिक खुराक से रक्त अधिक पतला हो जाता है, जिससे चोट लगने पर निशान पड़ने का खतरा बढ़ जाता है।