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मुख्यमंत्री डॉ. यादव 24 जनवरी को सर्व सुविधायुक्त सशुल्क वृद्धाश्रम ‘संध्या छाया’ का करेंगे लोकार्पण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 24 जनवरी को सर्व सुविधायुक्त, सशुल्क वृद्धाश्रम संध्या छाया का लोकार्पण करेंगे भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 24 जनवरी को प्रात: 11 बजे सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा नव निर्मित "सर्व सुविधायुक्त, सशुल्क वृद्धाश्रम (संध्या-छाया) का पत्रकार कॉलोनी लिंक रोड न. 3 भोपाल में लोकार्पण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव लोकार्पण कार्यक्रम में राज्य स्तरीय 'स्पर्श मेला-2026' के विजेताओं को पुरस्कार तथा सिंगल क्लिक के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा पेंशन हितग्राहियों 327 करोड़ की राशि अंतरित करेंगे। कार्यक्रम में सामाजिक न्याय दिव्यांगजन सशक्तिकरण, उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह, सांसद श्री आलोक शर्मा, महापौर श्रीमती मालती राय, विधायक (दक्षिण-पश्चिम) श्री भगवान दास सबनानी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।

उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने रामघाट में 11 करोड़ के नवीन फिल्टर प्लांट का किया भूमि-पूजन

मंदसौर के हर परिवार को मिलेगा शुद्ध पेयजल- उप मुख्यमंत्री देवड़ा  उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने रामघाट में 11 करोड़ के नवीन फिल्टर प्लांट का किया भूमि-पूजन मंदसौर के हर परिवार को मिलेगा शुद्ध पेयजल, उप मुख्यमंत्री देवड़ा का आश्वासन मंदसौर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि नवीन फिल्टर प्लांट के निर्माण से मंदसौर शहर के प्रत्येक परिवार को शुद्ध एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। उप मुख्यमंत्री देवड़ा गुरुवार को रामघाट, मंदसौर में अमृत 2.0 योजना में 11 करोड़ 11 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले नवीन फिल्टर प्लांट, वॉटर टैंक एवं डिस्ट्रीब्यूशन पाइप लाइन के भूमि-पूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि नगर की बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए नए और आधुनिक फिल्टर प्लांट का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। यह परियोजना मंदसौर की पेयजल व्यवस्था को दीर्घकालिक रूप से सुदृढ़ बनाएगी। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने बताया कि शहरी क्षेत्रों में अमृत 2.0 योजना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के माध्यम से सरकार द्वारा पीने के पानी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प है कि देश के हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचे और वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाया जाए। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि बिजली, स्वच्छता और जल जैसी मूलभूत सुविधाएं बनाए रखना केवल सरकार की ही नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। सभी नागरिकों को अपने शहर, गांव और घर को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित बनाए रखने में सक्रिय सहभागिता करनी चाहिए। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने फिल्टर प्लांट परिसर का अवलोकन भी किया। जागरूकता रथ को किया रवाना उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कार्यक्रम के बाद विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू समुदायों के परिवारों के शैक्षणिक, सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए संचालित जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर ने कहा कि 16 एमएलडी क्षमता के नवीन फिल्टर प्लांट के साथ तीन जल टंकियों का निर्माण एवं तेलिया तालाब का सौंदर्यीकरण एक साथ किया जाएगा। इससे मंदसौर शहर की जलापूर्ति व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में चंबल नदी से लगभग 60 प्रतिशत जलापूर्ति की जा रही है। इसके साथ ही लगभग 3300 करोड़ रुपये की लागत से मंदसौर बैराज परियोजना का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिससे भविष्य में शहर को और अधिक जल उपलब्ध हो सकेगा। सांसद गुर्जर ने यह भी बताया कि सिवरेज परियोजना का कार्य प्रारंभ हो चुका है, जिससे शहर की स्वच्छता व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार आएगा। कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती रमादेवी बंशीलाल गुर्जर, जिला योजना समिति सदस्य राजेश दीक्षित, नगर पालिका के पार्षदगण, जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।  

मुख्य आकर्षण : लोकभवन की ऐतिहासिकता और प्राकृतिक सौंदर्य

नागरिकों के लिए 25 जनवरी को दोपहर 2 बजे से खुलेगा लोकभवन मुख्य आकर्षण : लोकभवन की ऐतिहासिकता और प्राकृतिक सौंदर्य विशेष आकर्षण : “राजभवन से लोकभवन” विषय पर आधारित प्रदर्शनी भोपाल   राज्यपाल मंगुभाई पटेल के निर्देशानुसार 25 जनवरी से 27 जनवरी 2026 तक लोकभवन आमजन के लिए खोला जा रहा है। इन तीनों दिन नागरिक लोकभवन की ऐतिहासिकता, प्राकृतिक सौंदर्य एवं विशेष सजावट को करीब से देख सकेंगे। केन्द्रीय संचार ब्यूरो और मध्यप्रदेश जनसंपर्क विभाग द्वारा “राजभवन से लोकभवन” विषय पर आधारित प्रदर्शनी विशेष आकर्षण रहेगी। राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने समस्त नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे लोकभवन का भ्रमण जरूर करे। लोकतांत्रिक मूल्यों को निकट से अनुभव कर संविधान के प्रति सम्मान एवं गौरव की भावना को और अधिक सुदृढ़ करे। यह आयोजन नागरिकों और शासन के बीच संवाद, सहभागिता और विश्वास को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रवेश गेट क्रमांक- 1 से और निकास गेट क्रमांक- 4 से राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. कोठारी ने बताया कि आमजन लोकभवन का भ्रमण 25 जनवरी से 27 जनवरी 2026 तक कर सकेंगे। दिनांक 25 और 27 जनवरी को दोपहर 2 बजे से शाम 8 बजे तक प्रवेश का समय निर्धारित है। गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2026 के दिन, लोकभवन भ्रमण का समय प्रातः 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक रहेगा। नागरिकों के लिए कुशाभाऊ ठाकरे सभागार परिसर में वाहन पार्किंग होगी। आमजन लोकभवन में गेट क्रमांक-1 से प्रवेश और गेट क्रमांक- 4 से निकास करेंगे। भ्रमण का इस प्रकार रहेगा रूट राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. कोठारी ने बताया कि लोकभवन भ्रमण के लिए आने वाले आमजन का रूट निर्धारित किया गया है। गेट क्रमांक-1 से प्रवेश के बाद नागरिक लोकभवन सचिवालय एवं व्ही.आई.पी. रोड होते हुए कांच गेट से लोकभवन परिसर में प्रवेश करेंगे। स्वर्ण जयंती सभागार (बैंक्वेट हॉल), ऐतिहासिक दरबार हॉल, तोप एवं ध्वज वंदन स्थल का अवलोकन करेंगे। इसके पश्चात सिविल डिस्पेंसरी के सामने आयोजित केन्द्र और राज्य सरकार की प्रदर्शनी, सांदीपनि सभागार के बाहर वॉटर फाउंटेन के समीप वीडियो वॉल के माध्यम से लघु फिल्मों को देख सकेंगे। नागरिक, मंदिर के सामने वाले द्वार से होते हुए, गेट क्रमांक-4 से परिसर से बाहर निकलेंगे। विशेष आकर्षण : केन्द्र एवं राज्य सरकार की प्रदर्शनियां लोकभवन की ऐतिहासिकता के अवलोकन के साथ आमजन, केन्द्र एवं राज्य सरकार के विकासपरक एवं ऐतिहासिक पलों को प्रदर्शनी के माध्यम से देख सकेंगे। भारत सरकार के केन्द्रीय संचार ब्यूरो द्वारा “वीबी-जी रामजी योजना” तथा “वंदे भारत” थीम पर आधारित आकर्षक एवं सूचनात्मक प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जो नागरिकों को राष्ट्र निर्माण की योजनाओं और विकास यात्रा से परिचित कराएगी। जनसंपर्क विभाग द्वारा “राजभवन से लोकभवन” विषय पर विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें मध्यप्रदेश की स्थापना से लेकर अब तक के सभी राज्यपालों की जानकारी सरल एवं रोचक रूप में प्रस्तुत की जाएंगी। लघु फिल्मों का प्रदर्शन भी किया जाएगा।  

यूरोप से FTA डील का असर: 200 अरब डॉलर का मार्केट, निवेश और रोजगार में जबरदस्त उछाल

 नई दिल्‍ली, भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का ऐलान 27 जनवरी को होने जा रही है. FTA डील के तहत दोनों अपने देश के मार्केट में पहुंच आसान बनाएंगे. यूरोपीय संघ की वस्‍तुओं की भारत में कम टैरिफ या बिना टैरिफ एंर्टी मिल सकेगी, तो वहीं भारत भी यूरोपीय संघ के देशों में अपनी वस्‍तुओं को कम टैरिफ या बिना टैरिफ बेच सकेगा.  यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने स्विट्ज़रलैंड के दावोस में कहा कि यूरोपीय यूनियन भारत के साथ एक ऐसी डील करने जा रहा है, जो आजतक किसी भी देश ने नहीं किया है. उन्होंने कहा कि इससे 27 देशों के इस समूह को 'फर्स्ट मूवर एडवांटेज' मिलेगा. वहीं दूसरी ओर, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी आगामी भारत–ईयू व्यापार समझौते को 'मदर ऑफ़ ऑल डील्स' कहा था. आइए जानते हैं इस डील से भारत को क्‍या-क्‍या फायदे होंगे.  भारत के लिए एक बड़ा मार्केट भारत और EU के बीच साल 2024–25 में करीब ₹11.8 लाख करोड़ ($136.5 अरब) का व्यापार हुआ था, जिसमें  एक्‍सपोर्ट $75.8 डॉलर था और इम्‍पोर्ट $60.7 डॉलर रहा.  लेकिन अब एफटीए डील के बाद भारत का एक्‍सपोर्ट तेजी से बढ़ जाएगा. सर्विस सेक्‍टर से लेकर मैन्‍युफैक्‍चरिंग में भी भारत की वस्‍तुओं की संख्‍या यूरोप में बढ़ेगी. आगे बताए जा रहे आंकड़े से भी समझ सकते हैं कि भारत को कितना बड़ा फायदा हो सकता है. दरअसल, यूरोप में 450 मिलियन से ज्‍यादा लोग रहते हैं और यह दुनिया का  20 ट्रिलियन  डॉलर से बड़ा अर्थव्‍यवस्‍था वाला मार्केट है. एफटीए के बाद भारत को इस बड़े मार्केट में कम या बिना टैक्‍स के एंट्री मिलेगी. यूरोपीय संघ दुनिया के सबसे बड़े ट्रेड ब्लॉक्स में से एक माना जाता है, ऐसे में इसका हिस्‍सा बनकर भारत को लंबे समय तक एक्‍सपोर्ट, इन्‍वेस्‍टमेंट और बिजनेस में बड़ा लाभ मिलने वाला है. अनुमान है कि इस डील के बाद भारत का ईयू में कारोबार 136 अरब डॉलर से बढ़कर 200 से 250 अरब डॉलर हो सकता है.  भारत को क्‍या-क्‍या होंगे फायदे 1. एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ेगी यूरोपीय संघ दुनिया का सबसे बड़ा ट्रेड ब्‍लॉक है. इस डील के बाद भारतीय प्रोडक्‍ट्स पर इम्‍पोर्ट ड्यूट कम या फिर खत्‍म हो जाएगी. एक रिपोर्ट्स के मुताबिक यूरोप अमेरिका पर निर्भरता खत्‍म करने के लिए भारत के ऑर्म्‍स की ओर देख रहा है, ऐसे में हथियारों की सप्‍लाई भारत से बढ़ सकती है. इसके साथ ही टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट, फार्मा प्रोडक्‍ट्स, चमड़ा, जूते, जेम्स एंड ज्वेलरी, आईटी और सर्विस सेक्टर चीजों का एक्‍सपोर्ट तेजी से बढ़ेगा.  2. Make in India को बूस्‍ट मिलेगा  एफटीए डील के बाद भारत और यूरोपीय यूनियन को वो चीजें भी भेजी जाएंगी, जो भारत में बनती हैं. इसमें डिफेंस इक्‍यूपमेंट से लेकर अन्‍य मैन्‍युफैक्‍चरिंग प्रोडक्‍ट्स शामिल हैं. साथ ही कम लागत में रॉ मैटेरियल भी यूरोप से आ सकेंगे, जिससे कम लागत में चीजों का भारत में निर्माण होगा.  बड़े स्‍तर पर निवेश भारत में आएगा, नई फैक्‍ट‍ियां खुलेंगी और टेक्‍नोलॉजी ट्रांसफर भी आसान होगा.  3. नई नाौकरियों के मौके इस डील के बाद उम्‍मीद की जा रही है कि मैन्युफैक्चरिंग, आईटी और डिजिटल सर्विस, लॉजिस्टिक्स और MSME सेक्टर में लाखों डायरेक्‍ट एंड इनडायरेक्‍ट रोजगार के अवसर बनेंगे.  4. भारतीय कंपनियों की यूरोप में एंट्री एफटीए डील के बाद नॉन टैरिफ बैरियर कम होगा,  जिससे ज्‍यादा से ज्‍यादा कंपनियां यूरोप में अपने कारोबार का विस्‍तार करेंगी. साथ ही भारतीय प्रोफेशनल्स को यूरोप में काम करने के ज्‍यादा मौके भी मिलेंगे.  5. चीन पर निर्भरता कम होगी भारत लंबे समय से चीन का विकल्‍प तलाश रहा है. यूरोप से डील के बाद यह ख्‍वाहिश पूरी हो सकती है. भारत के लिए यूरोप एक भरोसेमंद सप्‍लाई चेन पार्टनर बन सकता है. फिर बहुत सी चीजों पर चीन से निर्भरता कम होगी. साथ ही इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन के लिए नई फंडिंग मिल सकती है.  6. यूरोपीय निवेश से भारतीय कंपनियों फायदा यूरोप बड़े स्‍तर पर अमेरिका को फंड देता है, लेकिन अब अमेरिका उतनी तेज से ग्रो करने वाली इकोनॉमी नहीं है और बार-बार अमेरिकी दबाव के कारण यूरोप को कई समस्‍याओं का भी सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में भारत यूरोप के लिए बड़ा मार्केट बन सकता है, जिसमें वे दाव लगा सकते हैं, क्‍योंकि भारत के इकोनॉमी अभी दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली इकोनॉमी है. यूरोपीय निवेश से स्‍टॉर्टअप्‍स को भी बेनिफिट्स होगा. 

MP बजट 2026: ग्वालियर के लिए नई उड़ान और चंबल क्षेत्र के विकास को मिलेगी गति

 ग्वालियर मध्य प्रदेश के आगामी बजट 2026-27 को लेकर ग्वालियर-चंबल संभाग की उम्मीदें सातवें आसमान पर हैं। बजट से अंचल के सभी छह जिलों ग्वालियर, मुरैना, भिंड, शिवपुरी और श्योपुर के विकास को नए पंख लगने की आस है। वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किए जाने के बाद से कृषि प्रधान इस अंचल की आशाएं बलवती हो गई हैं। ग्वालियर-चंबल संभाग के लिए आगामी बजट केवल वित्तीय आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि विकास की एक ऐसी पटरी साबित होगी जिस पर अंचल की रफ्तार तय होगी। किसान कल्याण वर्ष और ग्वालियर का स्मार्ट सिटी विजन मिलकर अंचल को प्रदेश का नया ग्रोथ इंजन बना सकते हैं। ग्वालियर : 2322 करोड़ रुपये का मास्टर प्लान और म्यूजिक सिटी का कायाकल्प ग्वालियर के लिए यह बजट ऐतिहासिक हो सकता है। ग्वालियर नगर निगम ने 2322 करोड़ रुपये का एक महत्वाकांक्षी बजट प्रस्ताव तैयार किया है। इसे राज्य के बजट से संजीवनी मिलने की उम्मीद है। शहर के भीतर ई-व्हीकल चार्जिंग स्टेशन, पिंक टायलेट्स और स्मार्ट शौचालयों का जाल बिछाने की योजना है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के कन्वेंशन सेंटर के लिए भी काफी उम्मीदें हैं। 1000 बिस्तर वाले अस्पताल को पूर्णतः क्रियाशील बनाने और सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं के विस्तार के लिए विशेष पैकेज की उम्मीद है। साथ ही, यूनेस्को म्यूजिक सिटी होने के नाते संगीत और कला के क्षेत्र में नई परियोजनाओं को धनराशि मिलने की आस है। मुरैना और भिंड : अटल प्रगति पथ से औद्योगिक क्रांति चंबल क्षेत्र के दो प्रमुख जिले मुरैना और भिंड के लिए सबसे बड़ी बात अटल प्रगति पथ (चंबल एक्सप्रेस-वे) की इन-प्रिंसिपल मंजूरी है। 420 किमी लंबा यह कारिडोर भिंड और मुरैना को सीधे उत्तर प्रदेश और राजस्थान से जोड़ेगा। बजट 2026 में इसके भूमि अधिग्रहण के लिए बड़े आवंटन की उम्मीद है। मुरैना में 600 मेगावाट के सोलर-प्लस-स्टोरेज प्रोजेक्ट और भिंड के मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र में डिफेंस सहायक इकाइयों के विकास के लिए राशि प्रविधान होने की उम्मीद है। श्योपुर : चीता स्टेट की वैश्विक ब्रांडिंग श्योपुर जिला अब प्रोजेक्ट चीता की सफलता के बाद वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर अपनी जगह बना चुका है। कूनो नेशनल पार्क के आसपास इको-टूरिज्म और चीता सफारी के विस्तार के लिए 50 करोड़ रुपये से अधिक के फंड की अपेक्षा है। ग्वालियर-श्योपुर रेल लाइन के अंतिम चरण के लिए फंड की घोषणा श्योपुर के आर्थिक परिदृश्य को बदल देगी। शिवपुरी और दतिया : पर्यटन और आस्था का संगम शिवपुरी को नए एयरपोर्ट विकास (प्रस्तावित लागत 45 करोड़) और टाइगर सफारी के लिए बड़ी राशि की उम्मीद है। साथ ही पार्वती-काली सिंध-चंबल लिंक परियोजना से सिंचाई के लिए जल अभाव की समस्या दूर होने की आस है। स्किल डेवलपमेंट को लेकर पिछले बजट में जो प्रविधान किए गए थे, उनका धरातल पर क्रियान्वयन हो, ताकि युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकें। शिवपुरी में औद्योगिक क्षेत्र तो विकसित कर दिए गए हैं, परंतु उनमें उद्योग अब तक नहीं आ पाए हैं। इस दिशा में काम होने की उम्मीद है। यह कहते हैं क्षेत्र के लोग     बजट 2026 से मुख्य अपेक्षा है कि इसमें स्मार्ट मोबिलिटी और ग्रीन एनर्जी के लिए ठोस आवंटन हो। विशेषकर, शहर के बढ़ते दायरे को देखते हुए और कन्वेंशन सेंटर जैसे प्रोजेक्ट्स ग्वालियर को टीयर-1 शहरों की श्रेणी में खड़ा करेंगे। सरकार स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत न केवल ऐतिहासिक स्मारकों के जीर्णोद्धार के लिए फंड देगी। ग्वालियर को अब लांग टर्म बिजनेस हब के रूप में पहचान दिलाने वाले वित्तीय प्रविधानों की जरूरत है। – डॉ. प्रवीण अग्रवाल, अध्यक्ष, चैंबर ऑफ कामर्स, ग्वालियर  

ट्रंप से ताकतवर निकले मोदी और जिनपिंग, अमेरिकी एक्सपर्ट ने दी राय

नईदिल्ली  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुकाबले जानकार चीनी समकक्ष शी जिनपिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्यादा ताकतवर मान रहे हैं। उनका कहना है कि कई मायने में ये दोनों नेता ट्रंप से ज्यादा बेहतर स्थिति में हैं। यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब ट्रंप लगातार टैरिफ के जरिए अमेरिकी के मोटे मुनाफे, युद्ध रुकवाने और नोबेल के हकदार होने जैसे दावे कर रहे हैं।  राजनीतिक जानकार इयन ब्रेमर ने कहा कि अमेरिका सबसे शक्तिशाली देश है, लेकिन ऐसा ट्रंप की स्थिति में नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप सबसे ताकतवर नेता नहीं हैं। शी जिनपिंग हैं। ऐसा क्यों। क्योंकि जिनपिंग के पास मिडटर्म इलेक्शन नहीं है। उनके पास स्वतंत्र न्यायपालिका नहीं है। ट्रंप तीन सालों में पद पर नहीं रहेंगे, लेकिन जिनपिंग रहेंगे।' उन्होंने कहा, 'जब ट्रंप मीडिया और सुर्खियां बटोर रहे हैं, शी जिनपिंग उनसे ज्यादा बेहतर स्थिति में हैं। मोदी बेहतर स्थिति में हैं।' ब्रेमर ने कहा कि पीएम मोदी का लंबा कार्यकाल उन्हें बदलाव और लंबी अवधि के फायदे देखने की अनुमति देता है। जबकि, ट्रंप या कई यूरोपीय नेताओं के मामले में ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा, 'एक नेता के तौर पर, मोदी का लंबे समय तक सत्ता में बने रहना और उनकी नीतियों में निरंतरता उन्हें कई यूरोपीय नेताओं के मुकाबले ज्यादा प्रभावी ढंग से अपनी बात रखने या दबाव का सामना करने की ताकत देती है। और हमने पिछले कुछ समय में ऐसा होते देखा भी है।' ट्रंप के बोर्ड से कई बड़े नेता दूर ट्रंप ने हमास और इजराइल के बीच हुए युद्धविराम को बनाए रखने के प्रयासों का नेतृत्व करने के लिए गुरुवार को अपने ‘शांति बोर्ड’ का औपचारिक रूप से अनावरण किया। हालांकि अमेरिका के कई शीर्ष सहयोगी इसमें हिस्सा नहीं लेने का विकल्प चुना। रूस फिलहाल विचार कर रहा है, ब्रिटेन ने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। फ्रांस के इनकार के बाद नॉर्वे और स्वीडन ने संकेत दिया है कि वे इसमें शामिल नहीं होंगे। फ्रांसीसी अधिकारियों ने रेखांकित किया कि उनका देश गाजा शांति योजना का समर्थन करता है, लेकिन उसे इस बात की चिंता है कि यह बोर्ड संघर्षों के समाधान के मुख्य मंच के रूप में संयुक्त राष्ट्र की जगह लेने की कोशिश कर सकता है।

लालू और केजरीवाल के बाद अगला नंबर कौन? ममता पर रडार, 3 सीएम जेल जा चुके हैं

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी करीब 35 साल पुराने वामपंथी किले को ध्वस्त करने में 2011 में सफल हो गईं तो उसके बाद से उनका रथ कभी नहीं रुका. भाजपा की लाख कोशिशों के बावजूद ममता ने तीसरी बार 2021 में बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सरकार बना ली. इस साल 2026 में करीब 2 महीने बाद होने वाले बंगाल विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले 6 महीने के अंदर कई दौरे हो चुके हैं. चुनाव ज्यों-ज्यों करीब आता जाएगा, उनके दौरों का सिलसिला भी तेज होगा. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते जेपी नड्डा ने बंगाल का हाल ही में दौरा किया था. नए राष्ट्रीय अध्यक्ष बने नितिन नवीन ने भी इस साल होने वाले सभी 5 राज्यों के चुनावों में भाजपा का परचम लहराने का संकल्प लिया है. नतीजे क्या होंगे, यह तो जनता तय करेगी, लेकिन ममता बनर्जी केंद्रीय एजेंसियों से पंगा लेकर मुश्किल में पड़ती नजर आ रही हैं. अगर सुप्रीम कोर्ट प्रवर्तन निदेशालय (ED) के आरोपों पर उनके प्रतिकूल कोई फैसला देता है तो ममता की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. सीबीआई और ED से मुख्मंत्रियों के टकराव का हश्र लोग देख चुके हैं. CBI से उलझे, पर जेल जाने से नहीं बचे लालू बिहार का सीएम रहते लालू प्रसाद यादव पर जब पशुपालन घोटाले के आरोप लगे और सीबीआई ने जांच शुरू की तो राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के समर्थकों ने खूब हुड़दंग मचाया. इसे ऐसे समझा जा सकता है. मामले की जांच कर रहे सीबीआई के तत्कालीन संयुक्त निदेशक यूएन बिश्वास जांच के क्रम में जब-जब कोलकाता से पटना जाते तो अपनी पत्नी को यह कहना नहीं भूलते कि कुछ भी हो सकता है. हालत यह थी कि लालू यादव को गिरफ्तार करने के लिए बात सेना बुलाने तक पहुंच गई. कोई पैंतरा काम नहीं आया और अंततः 30 जुलाई 1997 को लालू यादव को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया. बाद में मुकदमा चला और उन्हें सजा भी हुई. सीबीआई से उलझने के बावजूद लालू बच नहीं पाए. आजादी के बाद सेंट्रल एजेंसी द्वारा मुख्यमंत्री पद पर रहे किसी व्यक्ति के गिरफ्तार होने की यह पहली घटना थी. उन्होंने समझदारी नहीं दिखाई होती तो सीएम रहते ही वे गिरफ्तार हो जाते. जब उन्हें गिरफ्तारी की आशंका प्रबल होती दिखी तो अरेस्ट होने से 2 दिन पहले ही 28 जुलाई 1997 को ही उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया और अपनी पत्नी राबड़ी देवी को सीएम बना दिया. ED के नोटिस की अवहेलना अरविंद पर भारी दिल्ली का सीएम रहते अरविंद केजरीवाल ने भी केंद्रीय एजेंसी ED से पंगा लिया. दिल्ली शराब नीति में घपले के आरोप में ईडी की ओर से पछताछ के लिए उन्हें लगातार 9 नोटिस भेजे गए. उन्होंने उसका न कोई जवाब दिया और न पूछताछ के लिए ईडी के समक्ष हाजिर ही हुए. आखिरकार ईडी ने उनके आवास पर छापा मारा और 21 मार्च 2024 को मनी लांड्रिंग मामले में पहली बार उन्हें गिरफ्तार किया. मुख्यमंत्री पद पर रहते केजरीवाल की यह पहली गिरफ्तारी थी. हालांकि इस मामले में उन्हें जमानत जल्द ही मिल गई, लेकिन उन्हें जेल से बाहर निकलने का मौका नहीं मिला. दूसरी बार उन्हें 26 जून 2024 को सीबीआई ने तिहाड़ जेल से ही गिरफ्तार कर लिया. अगर वे लालू यादव की तरह समझदारी दिखाते तो सीएम के रूप में उनके गिरफ्तार होने का रिकार्ड नहीं बनता. वे भी अपनी पत्नी को सीएम की कुर्सी पर बिठा सकते थे. उनकी पत्नी बाद में जिस तरह राजनीति में रुचि दिखाने लगी थीं, उससे लगता है कि उन्हें या किसी अन्य को भी सीएम न बनाना केजरीवाल की बड़ी चूक थी. केजरीवाल ने दूसरा रिकार्ड यह बनाया कि वे करीब 6 महीने तक जेल से ही सरकार चलाते रहे. बाद में इस पर कोर्ट से लेकर मीडिया तक हंगामा मचा तो उन्होंने आतिशी को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी. यानी ईडी से पंगा लेना अरविंद केजरीवाल को महंगा पड़ा. हेमंत सोरेन ने ED को छकाया, पर बचे नहीं झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन पर जमीन घोटाले का आरोप लगा. मामला मनी लांड्रिंग का बना तो ईडी ने जांच के लिए उन्हें कई बार नोटिस भेजा. इस मामले को हेमंत सोरेन ने हल्के में लिया. वे ईडी से राहत की उम्मीद में हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट का चक्कर लगाते रहे. 10 नोटिस के बावजूद जब हेमंत सोरेन ने ईडी को कोई जवाब नहीं भेजा तो आखिरकार ईडी ने उन्हें 31 जनवरी 2024 को उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार कर लिया. हेमंत ने भी लालू जैसी ही चालाकी की. फर्क यही रहा कि उन्होंने अपनी पत्नी के बजाय पिता शिबू सोरेन के सहयोगी रहे और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के अति विश्वसनीय सहयोगी चंपाई सोरेन को गिरफ्तारी से कुछ देर पहले ही नेता घोषित कर दिया. खुद सीएम पद से इस्तीफा दे दिया. अब चंपाई के सीएम बनने की सिर्फ औपचारिकता बच गई. चंपाई के चयन के पहले ही हेमंत सोरेन ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया, इसलिए गिरफ्तारी की तारीख तो एक ही रही, सिर्फ समय बदल गया. हालांकि चंपाई सोरेन को सीएम बनाना बाद में उनकी बड़ी भूल साबित हुई. जमीन घोटाले का मामला अभी अदालत में है, लेकिन जमानत मिलने के बाद हेमंत सोरेन ने एक ही टर्म में दूसरी बार सीएम पद की शपथ लेने का रिकार्ड बना दिया. बहरहाल, हेमंत सोरेन भी ईडी से पंगा लेकर बच नहीं पाए. आईपैक पर ई़डी रेड को लेकर ममता बनर्जी भी टकरा रही हैं. ममता का ED से पंगा, परिणाम की प्रतीक्षा ममता बनर्जी ने न सिर्फ ईडी के खिलाफ मोर्चा खोला है, बल्कि वे पहले सीबीआई से भी टकरा चुकी हैं. केंद्रीय एजेंसियों से उनका टकराव कई बार अदालतों तक भी पहुंचा है. ममता का आरोप है कि विपक्ष को परेशान करने के लिए बेवजह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ईडी, सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करती है. हालांकि बंगाल में कई मंत्री और नेताओं को सेंट्रल एजेंसियों ने भ्रष्टाचार के आरोपों में न सिर्फ गिरफ्तार किया, बल्कि छापों के दौरान उनके और करीबियों के घरों से भारी नकदी और अकूत संपत्ति के दस्तावेज भी बरामद-जब्त … Read more

WHO सबसे ताजा… एक साल में 70 अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से ट्रंप का नाता टूटा, US ने किया औपचारिक अलगाव

वाशिंगटन अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से औपचारिक रूप से अलग होने की प्रक्रिया पूरी कर ली है. संघीय अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले दिन इस 78 साल पुरानी सदस्यता को खत्म करने का ऐलान किया था, और अब यह फैसला पूरी तरह लागू हो गया है. हालांकि, यह अलगाव पूरी तरह साफ नहीं माना जा रहा है. इसी के साथ अपने दूसरे कार्यकाल के पहले साल में ट्रंप लगभग 70 ग्लोबल संस्थाओं या अंतरराष्ट्रीय समझौतों से नाता तोड़ चुके हैं. बीमारियों से निपटने की क्षमता पर पड़ेगा असर WHO के मुताबिक अमेरिका पर अभी भी संगठन के 130 मिलियन डॉलर से ज्यादा बकाया हैं. ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने भी माना है कि कई अहम मुद्दे अभी सुलझे नहीं हैं, जैसे अन्य देशों से मिलने वाला हेल्थ डेटा, जिससे अमेरिका को किसी नई महामारी की शुरुआती चेतावनी मिल सकती थी.  विशेषज्ञों का कहना है कि WHO से बाहर निकलने का असर वैश्विक स्तर पर नई बीमारियों से निपटने की क्षमता पर पड़ेगा और इससे अमेरिकी वैज्ञानिकों व दवा कंपनियों के लिए नए टीके और दवाएं विकसित करना भी मुश्किल हो जाएगा. जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के पब्लिक हेल्थ लॉ एक्सपर्ट लॉरेंस गोस्टिन ने इसे 'अपने जीवनकाल का सबसे विनाशकारी राष्ट्रपति फैसला' बताया है. अमेरिका से WHO को मिलती है बड़ी फंडिंग WHO संयुक्त राष्ट्र की विशेष स्वास्थ्य एजेंसी है, जो एमपॉक्स, इबोला और पोलियो जैसी बीमारियों से निपटने के वैश्विक प्रयासों का कोऑर्डिनेशन करती है. यह गरीब देशों को तकनीकी सहायता देती है, वैक्सीन और दवाओं के वितरण में मदद करती है और मानसिक स्वास्थ्य व कैंसर समेत सैकड़ों बीमारियों के लिए दिशानिर्देश तय करती है.  दुनिया के लगभग सभी देश इसके सदस्य हैं. अमेरिका WHO की स्थापना में अग्रणी रहा है और लंबे समय तक इसका सबसे बड़ा दानदाता भी रहा है. अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, अमेरिका हर साल औसतन 111 मिलियन डॉलर सदस्य शुल्क और करीब 570 मिलियन डॉलर स्वैच्छिक योगदान देता रहा है. कई यूएन और नॉन-यूएन संस्थाओं से रिश्ता खत्म WHO से अलगाव के साथ ही ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका को 66 से अधिक अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकालने का फैसला किया है. इनमें 31 संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी संस्थाएं और 35 गैर-यूएन संगठन शामिल हैं. व्हाइट हाउस का कहना है कि इनमें से कई संस्थाएं जलवायु, लेबर, प्रवासन और विविधता से जुड़े ऐसे मुद्दों पर काम कर रही थीं, जिन्हें प्रशासन ने ‘वोक एजेंडा’ करार देते हुए अमेरिका के हितों के खिलाफ बताया है. संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी जिन 31 संस्थाओं से अमेरिका बाहर निकल रहा है, उनमें आर्थिक और सामाजिक मामलों का विभाग, अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और पश्चिम एशिया के लिए आर्थिक आयोग, अंतरराष्ट्रीय कानून आयोग, अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र, पीसबिल्डिंग कमीशन और फंड, UN Women, UNFCCC यानी जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन, UN Population Fund, UN Water, UN University समेत कई अहम इकाइयां शामिल हैं. इसके अलावा 35 गैर-यूएन संगठनों से भी अमेरिका अलग हो रहा है. इनमें इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC), इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी, इंटरनेशनल सोलर अलायंस, इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर, ग्लोबल फोरम ऑन माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस और कई क्षेत्रीय व पर्यावरण से जुड़े संगठन शामिल हैं. पेरिस जलवायु समझौते से बनाई दूरी जनवरी 2025 में सत्ता में लौटने के तुरंत बाद ट्रंप ने पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका को दूसरी बार बाहर निकालने का भी ऐलान किया था. यह फैसला 27 जनवरी 2026 से लागू होगा, जिसके बाद अमेरिका कार्बन कटौती से जुड़े किसी भी कानूनी दायित्व से मुक्त हो जाएगा. इतना ही नहीं, प्रशासन ने पेरिस समझौते की बुनियाद माने जाने वाले UNFCCC से भी बाहर निकलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. चूंकि यह एक सीनेट-स्वीकृत संधि है, इसलिए इस फैसले को कानूनी चुनौती मिलने की संभावना भी जताई जा रही है. हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने साफ किया है कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और शरणार्थी एजेंसी UNHCR का सदस्य बना रहेगा, क्योंकि इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय हितों के लिए जरूरी माना गया है.