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रायपुर में रिकॉर्ड्स की बरसात: सूर्या की आंधी और ईशान किशन का बल्ले से कहर

रायपुर भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड के खिलाफ रायपुर टी20 मुकाबले में 7 विकेट से जीत हासिल की. 23 जनवरी (शुक्रवार) को हुए इस मुकाबले में भारत के सामने जीत के लिए 209 रनों का टारगेट सेट किया गया था, जिसे उसने 15.2 ओवरों में ही हासिल कर लिया. कप्तान सूर्यकुमार यादव और ईशान किशन भारतीय टीम की जीत के स्टार रहे. सूर्यकु्मार ने फॉर्म में वापसी करते हुए 37 गेंदों पर नाबाद 82 रन बनाए, जिसमें 9 चौके और चार छक्के शामिल रहे. वहीं ईशान ने 11 चौके और छक्के की मदद से 32 गेदों पर 76 रनों का योगदान दिया. भारत ने इस मुकाबले को जीत कर ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली. टीम इंडिया ने 2 विकेट पर 6 रनों की नाजुक स्थिति से उबरते हुए 209 रनों का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल किया. यह किसी फुल मेम्बर (FM) टीम की तरफ से 6 या उससे कम रनों पर 2 विकेट गिरने के बाद किया गया सबसे बड़ा सफल रनचेज रहा. इससे पहले यह रिकॉर्ड न्यूजीलैंड के नाम था, जिसने पाकिस्तान के खिलाफ साल 2023 में रावलपिंडी में 4 रन पर 2 विकेट गिरने के बावजूद 194 रनों का लक्ष्य हासिल किया था. टी20 इंटरनेशनल में भारतीय टीम का ये संयुक्त रूप से सबसे बड़ा सफल रनचेज रहा. इससे पहले भारत ने साल 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विशाखापत्तन में 209 रनों का टारगेट चेज कर लिया था. भारतीय टीम ने टी20 इंटनेशनल में छठी बार 200 या उससे ज्यादा के टारगेट का सफलतापूर्वक पीछा किया है. ईशान किशन ने तूफानी पारी खेलकर लगाई रिकॉर्ड्स की झड़ी भारत और न्यूजीलैंड के बीच टी20 सीरीज के दूसरे मुकाबले में ईशान किशन का जलवा देखने को मिला. रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल स्टेडियम में हुए इस मैच में ईशान ने ताबड़तोड़ पारी खेली. ईशान ने 11 चौके और चार छक्के की मदद से 32 गेंदों पर 76 रनों का योगदान दिया. ईशान के टी20 इंटरनेशनल करियर की यह सातवीं फिफ्टी रही. ईशान को ईश सोढ़ी ने मैट हेनरी के हाथों कैच आउट कराया. ईशान के अलावा कप्तान सूर्यकुमार यादव ने भी नाबाद 82 रन बनाए. ईशान-सूर्या की धांसू पारियों के दम पर भारत ने इस मैच में सात विकेट से जीत हासिल की. देखा जाए तो ईशान किशन ने पावरप्ले में ही 21 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा कर लिया. कुल मिलाकर ईशान ने पावरप्ले में 23 गेंदों का सामना करते हुए 58 रन बनाए. पावरप्ले में किसी भारतीय बल्लेबाज की ओर से बनाया गया दूसरा सबसे बड़ा स्कोर रहा. इस मामले में अभिषेक शर्मा पहले नंबर पर हैं. अभिषेक ने साल 2025 में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में इंग्लैंड के खिलाफ पावरप्ले में 21 बॉल पर 58 रन बनाए थे. देखा जाए तो ईशान किशन ऐसे पहले भारतीय बल्लेबाज हैं, जिन्होंने टी20 इंटरनेशनल तीसरे या उससे निचले क्रम पर बैटिंग करते हुए पावरप्ले में अर्धशतक लगाया. साथ ही ईशान किशन फुल मेम्बर टीम्स की ओर से पावरप्ले में अर्धशतक बनाने वाले तीसरे गैर ओपनर बैटर भी बन गए हैं. पावरप्ले में 50+ स्कोर बनाने वाले गैर ओपन बैटर (एफएम टीम्स): 60(27) डियोन मायर्स बनाम रवांडा नैरोबी 2024, 56(23) ईशान किशन बनाम न्यूजीलैंड रायपुर 2026 51(29) जोश इंग्लिस बनाम वेस्टइंडीज बासेटेरे 2025, भारतीय टीम ने इस मैच के दौरान पावरप्ले में 2 विकेट पर 75 रन बनाए. यह न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 इंटरनेशनल में भारत का दूसरा सबसे बड़ा पावरप्ले स्कोर. टी20 वर्ल्ड कप 2007 के दौरान भारतीय टीम ने जोहानिसबर्ग के मैदान पर इस टीम के खिलाफ पावरप्ले में 76/1 का स्कोर बनाया था. वो रिकॉर्ड अब भी बरकरार है. भारत के लिए सबसे सफल रनचेज (टी20I): 209 बनाम न्यूजीलैंड, रायपुर, 2026 209 बनाम ऑस्ट्रेलिया, विशाखापत्तनम, 2023 208 वेस्टइंडीज, हैदराबाद, 2019 207  बनाम श्रीलंका, मोहाली, 2009 204 बनाम न्यूजीलैंड, ऑकलैंड, 2020 202 बनाम ऑस्ट्रेलिया, राजकोट, 2013 200+ टारगेट का सर्वाधिक बार सफलतापूर्वक पीछा 7 (ऑस्ट्रेलिया) 6 (भारत) 5 (साउथ अफ्रीका) 4 (पाकिस्तान) 3 (इंग्लैंड) भारत ने इस मुकाबले में 28 गेंदें बाकी रहते टारगेट हासिल किया. यह फुल मेम्बर टीम की ओर से 200 या उससे अधिक रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए सबसे ज्यादा गेंदें बाकी रहते हुए हासिल की गई जीत रही. 200+ चेज में सबसे अधिक गेंदें बाकी रहते जीत (FM टीम्स): 28 गेंदें (भारत बनाम न्यूजीलैंड, रायपुर 2026) (लक्ष्य: 209) 24 गेंदें पाकिस्तान बनाम न्यूजीलैंड, ऑकलैंड 2025) (लक्ष्य: 205) 23 गेंदें ऑस्ट्रेलिया बनाम वेस्ट इंडीज, बासेटेरे 2025) (लक्ष्य: 215) 14 गेंदें (साउथ अफ्रीका बनाम वेस्ट इंडीज, जोहानिसबर्ग 2007) (लक्ष्य:206) इस मैच में न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज जकारी फाउकेस ने काफी महंगी गेंदबाजी की. फाउलकेस ने अपने 3 ओवरों में 67 रन खर्च कर दिए, जो कि T20 इंटरनेशनल में किसी भी न्यूजीलैंड गेंदबाज द्वारा दिए गए सबसे ज्यादा रन हैं. उन्होंने इस मामले में बेन व्हीलर का रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने 2018 में ऑकलैंड में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 3.1 ओवर में 64 रन लुटाए थे.

बांग्लादेश ने बदला रुख! टी20 वर्ल्ड कप को लेकर ICC से आखिरी अपील, BCB ने रखी शर्त

नई दिल्ली बांग्लादेश को टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बहिष्कार का फैसला लेना भारी पड़ेगा, ये बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) भी जानता है और इसलिए तो उन्होंने टूर्नामेंट में खेलने की एक और कोशिश में आईसीसी को एक और पत्र लिखा है. बीसीबी ने अपने मैच श्रीलंका में शिफ्ट करने की आखिरी कोशिश में आईसीसी की इंडिपेंडेंट डिस्प्यूट रेजोल्यूशन कमेटी (DRC) से दखल देने की मांग की है. बीसीबी ने ये कदम तब उठाया जब बांग्लादेश ने टी20 वर्ल्ड कप भारत में खेलने से साफ मना कर दिया. इससे पहले बोर्ड ने आईसीसी से अपने मैच श्रीलंका में शिफ्ट करने की मांग की थी. आईसीसी ने सुरक्षा पुख्ता होने और टूर्नामेंट पर लॉजिस्टिकल के असर का हवाला देते हुए बीसीबी की मांग को खारिज कर दिया था. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पीछे हटने के बजाय, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने आईसीसी के कानूनी ढांचे के जरिए इस फैसले को चुनौती दी है. डिस्प्यूट रेजोल्यूशन कमेटी क्या है? आईसीसी की डिस्प्यूट रेजोल्यूशन कमेटी कानूनी विशेषज्ञों से बनी इंडिपेंडेंट आर्बिट्रेशन बॉडी है. ये आईसीसी के फैसलों, नियमों और कॉन्ट्रैक्ट की जिम्मेदारियों से जुड़े विवादों पर फैसला करती है. लंदन में स्थित यह कमेटी अपील कोर्ट की तरह काम नहीं करती है, बल्कि यह जांच करती है कि आईसीसी ने फैसले लेते समय अपने गवर्नेंस फ्रेमवर्क का पालन किया है या नहीं. इसके फैसले अंतिम और बाध्यकारी होते हैं, जिसमें अपील की गुंजाइश लगभग न के बराबर होती है. बांग्लादेश ये सवाल उठा रहा है कि आईसीसी ने अपना फैसला बिना गहराई से सोचे समझे लिया है. हालांकि बीसीबी पहले ही कह चुका है कि आईसीसी ने हमारे साथ न्याय नहीं किया है. बांग्लादेश को टी20 वर्ल्ड कप के बहिष्कार से करीब 240 करोड़ रुपये का नुकसान होगा, लेकिन फिर भी बीसीबी अपनी बात पर अड़ा हुआ है. इसमें उन्हें पाकिस्तान का समर्थन मिल रहा है, लेकिन पाकिस्तान साफ कर चुका है कि वो टूर्नामेंट में खेलेगा. बांग्लादेश क्रिकेट टीम को टी20 वर्ल्ड कप 2026 में अपने शुरूआती 3 मैच कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेलने हैं. ग्रुप स्टेज का आखिरी मैच बांग्लादेश मुंबई के वानखेड़े में खेलेगी. अगर डीआरसी बीसीबी के पक्ष में अपना फैसला नहीं सुनाती है और टीम टूर्नामेंट से हटती है तो स्कॉटलैंड को उनकी जगह टीम में शामिल किया जाएगा.

सोनिया रमन ने WNBA में पहली भारतीय हेड कोच के रूप में इतिहास रचा, सिएटल स्टॉर्म की कमान संभाली

न्यूयॉर्क  भारतीय मूल की सोनिया रमन ने सिएटल स्टॉर्म का मुख्य कोच बनकर डब्ल्यूएनबीए (महिला नेशनल बास्केटबॉल लीग) में नया इतिहास रच दिया है. वह इस प्रतियोगिता में किसी टीम की मुख्य कोच बनने वाली भारतीय मूल की पहली व्यक्ति हैं. इस घटनाक्रम से अवगत एक व्यक्ति ने गोपनीयता की शर्त पर एसोसिएटेड प्रेस को यह जानकारी दी। इसकी अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. रमन पिछले सत्र में न्यूयॉर्क लिबर्टी में सहायक कोच बनने से पहले चार साल तक एनबीए के मेम्फिस ग्रिजलीज में सहायक कोच थीं। वह डब्ल्यूएनबीए में मुख्य कोच बनने वाली भारतीय मूल की पहली कोच होगी. सिएटल ने पिछले महीने कोच नोएल क्विन को बर्खास्त कर दिया था. ईएसपीएन ने सबसे पहले इस नियुक्ति की सूचना दी. इस नियुक्ति के साथ न्यूयॉर्क एकमात्र ऐसी टीम है जिसके पास अभी भी कोई मुख्य कोच नहीं है. रमन का कोचिंग करियर एमआईटी से शुरू हुआ, जहां वह 2008 से 2020 तक मुख्य कोच रहीं. उन्होंने इस स्कूल को दो बार डिवीजन तीन एनसीएए टूर्नामेंट में पहुंचाया और प्रतियोगिता के इतिहास में सबसे सफल कोच बनी. सोनिया रमन ने पिछले साल न्यूयॉर्क लिबर्टी में असिस्टेंट कोच के रूप में जॉइन किया था। इससे पहले वह एनबीए की मेम्फिस ग्रिजलीज में चार वर्षों तक असिस्टेंट कोच रहीं। 2020 में जब उन्होंने यह भूमिका संभाली थी तब वे NBA में भारतीय मूल की पहली कोच बनीं थीं। मेम्फिस से पहले सोनिया ने एमआईटी में महिला बास्केटबॉल टीम की हेड कोच के रूप में 2008 से 2020 तक काम किया था। वहां उन्होंने एक दशक से भी अधिक समय तक अपने नेतृत्व से कई रिकॉर्ड कायम किए। रमन की नियुक्ति 2017 के बाद सीएटल स्टॉर्म की पहली फुल कोचिंग सर्च का नतीजा है। उस समय टीम ने डैन ह्यूजेस को नियुक्त किया था और आने वाले वर्षों में 2018 और 2020 में दो WNBA खिताब जीते थे। सोनिया का कॉन्ट्रैक्ट क्लच स्पोर्ट्स के एजेंट एंडी लैटैक और स्टीव नेफ ने नेगोशिएट किया। टीम ने अब तक यह नहीं बताया है कि रमन को औपचारिक रूप से कब पेश किया जाएगा। सोनिया की यह नियुक्ति न केवल भारतीय समुदाय के लिए गर्व का क्षण है बल्कि अमेरिकी बास्केटबॉल में विविधता और प्रतिनिधित्व की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम भी है।  

बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में 3 स्थानीय छुट्टियां, सरकारी दफ्तर इन दिन होंगे बंद

बलौदाबाजार-भाटापारा जिलेवासियों और सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत और खुशखबरी सामने आई है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा वर्ष 2026 की अवकाश सूची जारी किए जाने के बाद जिला प्रशासन को स्थानीय जरूरतों के अनुसार छुट्टियां घोषित करने का अधिकार दिया गया था। इसी क्रम में बलौदाबाजार-भाटापारा जिला प्रशासन ने 3 स्थानीय अवकाशों की घोषणा कर दी है, जिसका आधिकारिक आदेश भी जारी हो चुका है। इन तारीखों को रहेगा स्थानीय अवकाश जारी आदेश के मुताबिक – 29 सितंबर 2026 (शुक्रवार) – अनंत चतुर्दशी 19 अक्टूबर 2026 (सोमवार) – दशहरा (महाअष्टमी)   10 दिसंबर 2026 (गुरुवार) – वीर नारायण सिंह शहादत दिवस इन तीनों दिनों में जिले के सभी शासकीय कार्यालय और संस्थान बंद रहेंगे। किन्हें मिलेगा अवकाश का लाभ? घोषित अवकाशों का लाभ जिले में स्थित राज्य शासन के कार्यालयों, शासकीय संस्थानों और कर्मचारियों को मिलेगा। हालांकि, आपातकालीन और आवश्यक सेवाएं पूर्ववत चालू रहेंगी। 2026 में छुट्टियों की भरमार छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2026 के लिए अवकाशों की गजट सूची जारी कर दी है। सरकारी आदेश के अनुसार— कुल 107 छुट्टियां 18 पब्लिक हॉलिडे 28 जनरल हॉलिडे 61 ऐच्छिक (ऑप्शनल) अवकाश इन त्योहारों पर नहीं मिलेगी अलग छुट्टी कुछ प्रमुख त्योहार इस बार रविवार के दिन पड़ रहे हैं, इसलिए उन पर अतिरिक्त अवकाश नहीं मिलेगा। महाशिवरात्रि और दिवाली रविवार को होने के कारण अलग से छुट्टी घोषित नहीं की गई है। जनवरी से दिसंबर तक सरकारी कर्मचारियों को लगभग हर महीने त्योहारों और विश्राम का अवसर मिलेगा, जिसमें गणतंत्र दिवस, होली, ईद, रक्षाबंधन, स्वतंत्रता दिवस, दशहरा और क्रिसमस जैसे बड़े पर्व शामिल हैं।  

MP में गणतंत्र दिवस कार्यक्रम विवाद, विजय शाह को मुख्य अतिथि बनाने पर उठे सवाल

रतलाम मध्यप्रदेश सरकार द्वारा रतलाम में गणतंत्र दिवस के ध्वजारोहण कार्यक्रम के लिए मंत्री विजय शाह को मुख्य अतिथि बनाए जाने के फैसले ने नया सियासी विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस ने इस निर्णय का तीखा विरोध करते हुए इसे सेना और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा मामला बताया है। कांग्रेस का कहना है कि जिस मंत्री पर देश की बेटी और भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप है, उसे गणतंत्र दिवस जैसे गरिमामय राष्ट्रीय पर्व पर मंच देना गलत संदेश देता है। कांग्रेस का तीखा हमला कांग्रेस प्रदेश विवेक त्रिपाठी ने कहा कि देश की बेटी और भारतीय सेना की बहादुर अधिकारी के खिलाफ अपमानजनक शब्द बोलने वाले मंत्री को रतलाम में तिरंगा फहराने की जिम्मेदारी देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह न सिर्फ सेना का अपमान है, बल्कि संविधान और राष्ट्रीय मूल्यों के भी खिलाफ है। क्या था पूरा मामला दरअसल, मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर एक सार्वजनिक बयान दिया था, जिसे विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों ने अमर्यादित और अपमानजनक करार दिया। कर्नल सोफिया कुरैशी भारतीय सेना की वरिष्ठ अधिकारी हैं और ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े प्रेस ब्रीफिंग में अहम भूमिका निभा चुकी हैं। बयान सामने आने के बाद देशभर में नाराजगी देखने को मिली थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर संज्ञान लिया और मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति को लेकर मध्यप्रदेश सरकार से जवाब तलब किया। कोर्ट ने सरकार को तय समय-सीमा में स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। भाजपा ने किया बचाव वहीं, भाजपा ने सरकार के फैसले का बचाव किया है। प्रदेश प्रवक्ता यशपाल सिंह सिसोदिया ने कहा कि सरकार ने मंत्री के बयान को गंभीरता से लिया है और मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। उन्होंने बताया कि एसआईटी दो सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। 

ग्वालियर की पीएचडी स्कॉलर डॉ. ललिता ने बनाई नेचुरल क्रीम, डायबिटीज मरीजों के घाव होंगे जल्दी भरने लगे

ग्वालियर:  आमतौर पर शरीर में घाव होने पर उसे भरने में कई दिन लगते हैं और मरीज को डायबिटीज हो तो घाव भरने की गारंटी तक नहीं होती, लेकिन ग्वालियर की डॉ ललिता ने ऐसी नेचुरल क्रीम तैयार की है. जिसे लगाने पर डायबिटिक मरीजों के घाव एक से तीन महीने में भर जाते हैं. नीम, एलोवेरा जैसे औषधीय गुणों वाले प्लांट्स से तैयार इस नेचुरल क्रीम का उन्होंने 200 वालंटियर मरीजों पर सफल ट्रायल किया. अब सस्ते दाम में बिना साइड इफेक्ट वाला अपना हर्बल ऑइंटमेंट वे मार्केट में उतारने की तैयारी में हैं, जिससे जरूरतमंद मरीजों को उनकी रिसर्च का फायदा मिल सके. 7 साल की मेहनत और तैयार हुआ पूरी तरह नेचुरल ऑइंटमेंट ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय के बायोकेमिस्ट्री विभाग में गेस्ट फैकल्टी रही पीएचडी स्कॉलर डॉ ललिता कुशवाह ने 7 वर्षों की मेहनत और रिसर्च से एक नेचुरल और हर्बल क्रीम तैयार की है. ये मरहम मुख्यरूप से ऐसे मरीजों के लिए बनाया है, जो डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी में उनके घाव ठीक कर सकता है. डॉ ललिता ने इसे एलोवेरा, नीम, गेंदे के फूल, करक्यूमिन और घमरा जैसे औषधीय पौधों से तैयार किया है. 'फाइटोकेमिकल' बेस्ड है ऑइंटमेंट, कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं  डॉ ललिता कुशवाह ने बताया कि, "उन्होंने इस प्राकृतिक मरहम को मुख्य रूप से डायबिटिक मरीजों के लिए बनाया है. वे कहती हैं कि, उनका ऑइंटमेंट फाइटोकेमिकल (पौधों में पाए जाने वाले प्राकृतिक रसायन) आधारित है. इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं है. इससे मरीजों पर इस्तेमाल में किसी तरह की एलर्जी या रिएक्शन का खतरा नहीं होता. आम घाव और डाइबिटिक मरीजों के घाव में क्या फर्क? आमतौर पर जब किसी चोट की वजह से कोई घाव बनता है, तो वह तेजी से हील (ठीक) होता है, लेकिन डायबिटीज के बीमारी होने पर ब्लड शुगर लेवल ज्यादा होने पर जब किसी को कोई घाव या छाले होते हैं, तो वह बहुत धीमी गति से ठीक होते हैं. कई बार कई केसेस में यह ठीक भी नहीं होते और घाव गैंगरीन में तब्दील हो जाता है. जिसका इलाज आसानी से नहीं हो पाता. जिसका नतीजा यह होता है कि, एक छोटा सा घाव डायबिटीज की वजह से इस कदर खराब हो जाता है कि शरीर के उस हिस्से को ही अलग करना पड़ जाता है. एनिमल ट्रायल में 12 दिन में ठीक हुआ डायबिटिक वाउंड ललिता कुशवाह बताती हैं कि, इस ऑइंटमेंट को तैयार करने के बाद इसका ट्रायल भी किया गया था. सबसे पहले इसे सामान्य जानवरों पर टेस्ट किया गया था. इसका रिजल्ट बहुत अच्छा मिला, इसके बाद कुछ टेस्ट में एनिमल्स का ब्लड शुगर बढ़ाया गया और उनके घाव पर जब इसे टेस्ट किया गया तो 400 एमएम स्क्वायर का घाव महज 12 दिनों में हील हो गया. इसके साथ ही अन्य पैरामीटर में भी अच्छे रिजल्ट मिले, इसमें इंफ्लेमेशन रिड्यूस हुआ, स्किन एंड सेल रीजेनरेशन तेज हुआ. कॉलेजिन फास्ट हुआ, ऐसे में कहा जाए तो एनिमल ट्रायल का रिजल्ट बहुत अच्छा मिला. इसी आधार पर फिर ह्यूमन ट्रायल किए गए. 200 मरीजों पर सफल ह्यूमन ट्रायल ह्यूमन ट्रायल के लिए भी हर्बल ऑइंटमेंट अप्लाई कर नॉन डायबिटिक मरीजों के घाव की हीलिंग को डायबिटिक वाउंड्स की हीलिंग से तुलना की गई तो दोनों में ही काफी अच्छे नतीजे मिले. इसके लिए जीआरएमसी कॉलेज की डॉ मनीषा जादौन मेडम ने मरीज उपलब्ध कराए. जीआरएमसी के 200 से ज़्यादा वॉलेंटियर डायबटिक मरीजों पर मेडिकल कॉलेज में जाकर ऑइंटमेंट अप्लाई कर ट्रायल पूरा किया था. 30 से 90 दिनों में ठीक हुआ छोटे से बड़ा घाव टेस्ट रिजल्ट के लिए डायबिटिक मरीजों के घाव तीन कैटेगरी में बांटे गए, क्योंकि घाव कितना बड़ा और गहरा है हीलिंग उस पर निर्भर करती है. छोटे घाव कम समय में जबकी बड़े घाव ठीक होने में ज्यादा समय लगता है. इसलिए इन्हें तीन कैटेगरी में बांटा गया था. स्मॉल वाउंड्स, मीडियम वाउंड्स और मॉडरेट वाउंड्स. जिसमें ऑइंटमेंट लगाने पर स्मॉल वाउंड लगभग 30 दिनों में जबकि उनके आकार के हिसाब से मीडियम और मॉडरेट वाउंड 80 से 90 दिनों के अंदर पूरी तरह ठीक हो गए. जल्द मार्केट में दिखेगा हर्बल ऑइंटमेंट, पेटेंट के लिए भी अप्लाई आगे की प्लानिंग बताते हुए डॉ ललिता कुशवाह ने बताया कि, उनकी कोशिश है की वे अपने इस हर्बल प्रोडक्ट को जल्द से जल्द मार्केट में लेकर आएं, जिससे इसका फायदा समाज और जरूरतमंद मरीजों को मिल सके. उन्होंने अपना हर्बल मरहम तैयार करने के बाद उसके पेटेंट के लिए अप्लाई कर दिया है. जिस पर प्रोसेस चल रही है, पेटेंट मिलने के बाद वे इसे बाजार में भी लॉन्च करेंगी. 'कम से कम दाम में मरीजों को उपलब्ध करा सके दवा डॉ ललिता कहती है कि, जब वे ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज में जाती थी, तो वहां वे ऐसे कई मरीजों को देखती थीं. जिनके पास इलाज तक के लिए रुपये नहीं होते थे. इनमें कई मरीज डायबिटीज की वजह से होने वाले शारीरिक समस्याओं से ग्रसित मिलते थे. इसलिए उन्होंने ये फैसला लिया कि, वे ऐसे मरीजों के लिए कम से कम दाम में दवा उपलब्ध कराएंगी. जिससे मरीजों को उसका फायदा मिले, तभी उनकी पीएचडी, रिसर्च और मेहनत सफल हो पाएगी."

घर पर मिलेगा डाकिया, लाइफ सर्टिफिकेट की प्रक्रिया में हुआ बदलाव

भोपाल  कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने ईपीएस पेंशनधारकों को बड़ी राहत देते हुए डोरस्टेप डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (DLC) की सुविधा शुरू कर दी है। अब पेंशनधारकों को सालाना जीवन प्रमाण पत्र जमा करने के लिए बैंक, डाकघर या EPFO कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने होंगे। यह सुविधा भारत पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के सहयोग से शुरू की गई है और पूरी तरह निःशुल्क है। इससे पेंशन भुगतान में किसी भी तरह की रुकावट नहीं आएगी। घर आएगा डाकिया, वहीं बनेगा डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट इस योजना के तहत डाक सेवक या पोस्टमैन पेंशनर के घर पहुंचकर आधार-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी (FAT) या बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के जरिए डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट तुरंत तैयार करेगा। यह सुविधा खास तौर पर बुजुर्ग, बीमार, दिव्यांग और असहाय पेंशनधारकों के लिए वरदान साबित होगी। एक कॉल पर पहुंचेगा डाक सेवक पेंशनधारक या उनके परिजन IPPB कस्टमर केयर नंबर 033-22029000 पर कॉल करके इस डोरस्टेप सेवा का लाभ ले सकते हैं। कॉल के बाद संबंधित क्षेत्र का डाक सेवक पेंशनर के घर पहुंचकर पहचान सत्यापित करेगा और तुरंत डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जनरेट कर देगा। साथ ही भविष्य में फेस ऑथेंटिकेशन के इस्तेमाल का मार्गदर्शन भी दिया जाएगा। जरूरी सावधानियां इस सेवा के लिए कोई शुल्क नहीं देना है, यह पूरी तरह मुफ्त है किसी को भी पैसे न दें किसी भी अनियमितता या शिकायत की स्थिति में EPFO या IPPB की शिकायत निवारण प्रणाली में शिकायत दर्ज करें…

घर की सीढ़ियों का रंग तय करेगा भाग्य! वास्तु के अनुसार जानें शुभ 6 रंग

वास्तु शास्त्र में घर की हर दिशा और कोने का अपना महत्व होता है, लेकिन सीढ़ियों को ऊर्जा का मुख्य वाहक माना जाता है। गलत रंग का चुनाव न केवल घर की सुंदरता बिगाड़ता है, बल्कि मानसिक तनाव और आर्थिक तंगी का कारण भी बन सकता है। अक्सर लोग घर की सजावट में सीढ़ियों के रंगों पर ध्यान नहीं देते, जबकि वास्तु के अनुसार सीढ़ियां प्रगति का प्रतीक होती हैं। यदि सीढ़ियों पर गलत रंग कर दिया जाए, तो यह घर की सकारात्मक ऊर्जा की गति को बाधित कर सकता है। तो आइए जानते हैं कि घर की सीढ़ियों पर कौन सा रंग करवाना चाहिए। गहरे रंगों से क्यों बचें ? वास्तु शास्त्र के अनुसार, सीढ़ियों पर काला, गहरा नीला, गहरा लाल या भूरा रंग कभी नहीं करना चाहिए। गहरा रंग भारीपन और अंधकार का प्रतीक होता है, जो घर में नकारात्मकता और भारीपन की भावना पैदा कर सकता है। इससे परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य और उन्नति पर बुरा प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। सीढ़ियों के लिए 6 शुभ और सकारात्मक शेड्स क्रीम या ऑफ-व्हाइट यह सादगी और पवित्रता का प्रतीक है। यह संकीर्ण सीढ़ियों को भी बड़ा और हवादार दिखाता है। हल्का पीला पीला रंग गुरु का प्रतीक है और ज्ञान व समृद्धि लाता है। यह घर में उत्साह और खुशहाली का संचार करता है। हल्का हरा हरा रंग विकास और प्रकृति का प्रतीक है। यदि सीढ़ियां घर के पूर्व या दक्षिण-पूर्व में हैं, तो यह रंग बहुत शुभ फल देता है। हल्का नीला यह शांति और स्थिरता का प्रतिनिधित्व करता है। यह तनाव कम करने और घर के माहौल को ठंडा रखने में मदद करता है। हल्का गुलाबी यह प्रेम और सद्भाव का रंग है। यह घर के सदस्यों के बीच मधुर संबंध बनाए रखने में सहायक होता है। बेज या सैंडी टोन यह पृथ्वी तत्व को संतुलित करता है और सीढ़ियों को एक आधुनिक व शांत लुक देता है।

पहला स्वदेशी ऑटोनॉमस रोबोट ‘डैगर’ जयपुर में बना, दिल्ली में परेड में दिखेंगे मेड इन इंडिया के 3 रोबोट

 जयपुर  भारतीय सेना ने आधुनिक युद्ध कौशल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के अखनूर में आतंकियों के खिलाफ हुए सफल ऑपरेशन में मानवरहित रोबोट ‘जीना’ ने मुख्य भूमिका निभाई। करीब 30 डिग्री की ढलान और घने जंगलों के बीच छिपे भारी हथियारों से लैस तीन आतंकियों का पता लगाने और उन्हें ढेर करने में इस एआई-लेस रोबोट का इस्तेमाल किया गया। इस तकनीक की मदद से बिना किसी मानवीय क्षति के ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। स्वदेशी ‘डैगर’ भारतीय सेना की 50 पैरा (स्पेशल फोर्सेज) में शामिल किया गया ‘डैगर’ देश का पहला पूरी तरह से स्वदेशी और नेक्स्ट-जेन ऑटोनॉमस रोबोट है। यह रोबोट न केवल युद्ध क्षेत्र में रीयल-टाइम निगरानी करता है, बल्कि भीषण गोलीबारी के बीच घायलों को सुरक्षित स्थान तक निकालने में भी सक्षम है। ‘डैगर’ को राइफल, लाइट मशीन गन (LMG) और ऑटोमैटिक ग्रेनेड लॉन्चर जैसे हथियारों से लैस किया जा सकता है। यह 450 किलो तक वजन उठाकर उबड़-खाबड़ रास्तों पर 10 घंटे तक लगातार काम कर सकता है। ‘मेक इन इंडिया’ का गौरव इन अत्याधुनिक रोबोट्स को जयपुर की कंपनी क्लब फर्स्ट रोबोटिक्स द्वारा ‘सीतापुरा’ क्षेत्र में डिजाइन और तैयार किया गया है। कंपनी के प्रबंध निदेशक भुवनेश मिश्रा और डायरेक्टर डॉ. नीलिमा मिश्रा के अनुसार, डैगर को पूरी तरह से भारत में विकसित करना ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक मील का पत्थर है। रक्षा रोबोटिक्स के अलावा, कंपनी ने ‘कृष्णा’ नामक रोबोट भी बनाया है जो खतरनाक आग बुझाने और केमिकल प्लांट्स जैसी जोखिम भरी जगहों पर काम करने में सक्षम है। राजपथ पर दिखेगा पराक्रम आगामी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड के दौरान देश की राजधानी दिल्ली में इन स्वदेशी रोबोट्स का वैभव पूरी दुनिया देखेगी। सेना की तकनीकी निगरानी, पैरामीटर सुरक्षा और कॉम्बैट सपोर्ट के लिए डिजाइन किए गए ये रोबोट अब ऊंचे पहाड़ी इलाकों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सैनिकों के लिए ‘कवच’ का काम करेंगे। इनकी मदद से सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए मिलिट्री ऑपरेशन करना संभव होगा, जिससे सैनिकों की जान का जोखिम न्यूनतम हो जाएगा। इन खूबियों से लैस हैं ये व्हीकल यूजीवी डैगर : नाइट विजन के साथ अत्याधुनिक फीचर इसे जमीन पर सहायता के लिए ह्यूमन कंट्रोल से लैस किया गया है। मल्टी यूजीवी कॉर्डिनेट मूवमेंट के लिए कॉन्वॉय फॉलोइंग मोड का विकल्प भी है। मजबूत मिलिट्री-ग्रेड ऑल-टेरेन मोबिलिटी यूजीवी डैगर दूसरे रोबोट्स की तुलना में अधिक मजबूत है। इसमें नाइट विजन के साथ रीयल टाइम आईएसआर जैसे अत्याधुनिक फीचर भी हैं। डैगर युद्ध क्षेत्र में घायलों को निकालकर सुरक्षित स्थान तक लाने की खूबी रखता है। यह आईएसआर मिशन के लिए टेथर्ड ड्रोन को सपोर्ट करता है। इस अत्याधुनिक रोबोट को आरसीडब्ल्यूएस के अनुकूल किया गया है। इससे यह राइफल, लाइट मशीन गन (एलएमजी), मीडियम मशीन गन (एमएमजी) और ऑटोमैटिक ग्रेनेड लॉन्चर (एजीएल) के साथ काम करने में भी सक्षम है। इसकी खासियत से सैनिकों को उबड़-खाबड़ रास्तों व खतरे वाले स्थानों पर जाने की जरूरत नहीं होगी और जान का खतरा नहीं होगा। जीना : ऊंचाई और मुश्किल इलाकों के लिए बनाया यह एक मिनी वेपनाइज्ड मानवरहित ग्राउंड व्हीकल (यूजीवी) है। इसे विशेष तौर पर ऊंचाई और मुश्किल इलाकों में टेक्निकल निगरानी, पैरामीटर सुरक्षा और कॉम्बैट सपोर्ट के लिए डिजाइन किया है। यह दिन के साथ रात में भी कैमरा पेलोड और रिमोट वेपन स्टेशन इंटीग्रेशन को सपोर्ट करता है। इससे सुरक्षित दूरी से बिना किसी खतरे के मिलिट्री ऑपरेशन किए जा सकते हैं। इसका कॉम्पैक्ट डिजाइन रक्षा मिशन के लिए तेज डिप्लॉयमेंट, उच्च स्थिरता और मजबूत मोबिलिटी सुनिश्चित करता है। अखनूर में आतंकवादियों के खिलाफ इस्तेमाल हुआ जीना रोबोट अक्टूबर 2024 में जम्मू-कश्मीर के अखनूर में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में सेना की ओर से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस मानव रहित रोबोट 'जीना' का इस्तेमाल किया गया था। वहां करीब 30 डिग्री की ढलान और घने जंगल में आतंकवादियों का पता लगाने और उन तक पहुंचने के लिए इनका इस्तेमाल किया था। इस आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन में भारी हथियारों से लैस तीनों आतंकवादी मारे गए थे। कृष्णा : आग लगने की जगह पानी-फोम फेंककर बुझाने में सक्षम यह एडवांस्ड एआई लैस फायर फाइटिंग यूजीवी है। इसे औद्योगिक और तेल व गैस, केमिकल प्लांट, आयुध और विस्फोटक क्षेत्रों जैसे उच्च जोखिम वाले आग वाले वातावरण के लिए बनाया गया है। यह ऑनबोर्ड कैमरों और सेंसर से रियल-टाइम निगरानी के साथ रिमोट फायर सप्रेशन को सक्षम बनाता है। आपातकालीन टीमों के लिए डिजाइन किया गया कृष्णा रोबोट खतरनाक स्थितियों में इंसान की जान के जोखिम को कम करते हुए अत्यधिक प्रेशर से पानी/फोम फेंकने में सक्षम है। अत्यधिक गर्मी या धुएं वाला वातावरण भी इसको नुकसान नहीं पहुंचा सकते। यूजीवी डैगर 450 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम क्लब फर्स्ट रोबोटिक्स की डायरेक्टर डॉ. नीलिमा मिश्रा ने बताया- यूजीवी डैगर 450 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम है। इसे 30 किलोमीटर की रेंज में ऑटोनॉमस नेविगेशन से ऑपरेट किया जा सकता है। गोला-बारूद और अन्य लॉजिस्टिक्स को युद्ध क्षेत्र में ले जाने के लिए यह लगातार 10 घंटे तक ऑपरेशन करने की काबिलियत रखता है। भारत में डिजाइन, डेवलप हैं ये रोबोट क्लब फर्स्ट रोबोटिक्स के प्रबंध निदेशक भुवनेश मिश्रा ने कहा- हमें गर्व है कि हमने यूजीवी डैगर को पूरी तरह से भारत में डिजाइन, डवलप और निर्मित किया है। इससे यह सही मायने में पूरी तरह से स्वदेशी रोबोट है। टीम ने 'मेक इन इंडिया' अभियान में योगदान देने की कोशिश की है। यह कदम भारतीय सेना के रक्षा रोबोटिक्स में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में माइलस्टोन है। उल्लेखनीय है कि क्लब फर्स्ट रोबोटिक्स भारत की रक्षा और अग्निशमन रोबोटिक्स इनोवेटर कंपनी है। इसके द्वारा राइजिंग राजस्थान में किए एमओयू के तहत देश की एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट जयपुर में स्थापित की जा रही है।  

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, केंद्रीय कर्मचारियों पर एसीबी की जांच होगी संभव

नई दिल्ली/ जयपुर  सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) को केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार के मामलों में अहम फैसला सुनाया. कोर्ट ने केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ एसीबी को जांच करने का अधिकार देते हुए 2 विशेष अनुमति याचिकाएं खारिज कर दीं. साथ ही स्पष्ट किया कि इसके लिए सीबीआई की पूर्व अनुमति जरूरी नहीं है. 'अनिल दायमा एवं अन्य बनाम राज्य राजस्थान एवं अन्य' मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जेबी पारडीवाला और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने की. याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक गौड़ उपस्थित हुए. जबकि राज्य राजस्थान की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने पैरवी की.  एसीबी के अधिकार क्षेत्र को दी गई थी चुनौती दरअसल, राजस्थान एसीबी ने केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए थे. कर्मचारियों ने एसीबी के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी थी. याचिका दायर करते हुए दलील दी गई कि एसीबी केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और जांच करने के लिए सक्षम नहीं है. याचिकाकर्ताओं का तर्क है, "एसीबी द्वारा सीबीआई की पूर्व अनुमति या सहमति के बिना दायर किए गए आरोप-पत्र (चार्जशीट) विधिक रूप से अमान्य हैं. राज्य एजेंसी द्वारा संघ सरकार के अधीन कार्यरत अधिकारियों के विरुद्ध की गई जांच अवैध है. केवल सीबीआई को ही केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों की जांच करने का अधिकार है, एसीबी बिना सीबीआई की अनुमति के कोई कार्रवाई नहीं कर सकती और इस कारण पूरी जांच एवं आरोप-पत्र कानूनन शून्य हैं." हाईकोर्ट ने भी खारिज की थी याचिका इन सभी दलीलों को राजस्थान हाईकोर्ट (जयपुर पीठ) ने 3 अक्टूबर 2025 को ही खारिज कर दिया था और एसीबी की शक्तियों को वैध ठहराया था. इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिकाएं दायर कीं. केस की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट के सामने 2 मुख्य विधिक प्रश्न उठे.      क्या किसी राज्य की एंटी-करप्शन ब्यूरो को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केंद्रीय कर्मचारियों की जांच का अधिकार है? वो भी तब, जब अपराध राज्य की क्षेत्रीय सीमा के भीतर हुआ हो.      क्या सीबीआई की स्वीकृति के बिना एसीबी द्वारा दायर आरोप-पत्र वैध हैं और क्या उनके आधार पर आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने एसीबी के अधिकार क्षेत्र पर कही ये बात इस संबंध में राजस्थान हाईकोर्ट के दृष्टिकोण की पुष्टि करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एसीबी को आपराधिक मामले दर्ज करने, जांच करने और आरोप-पत्र दाखिल करने का पूर्ण अधिकार है, भले ही अभियुक्त केंद्रीय सरकार का कर्मचारी ही क्यों न हो. न्यायालय ने इस तर्क को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया कि ऐसे मामलों में केवल सीबीआई ही जांच कर सकती है. अदालत ने यह भी कहा कि यह दावा करना गलत है कि अभियोजन केवल सीबीआई द्वारा ही प्रारंभ किया जा सकता है या यह कि एसीबी सीबीआई की अनुमति के बिना कार्यवाही नहीं कर सकती. सुप्रीम कोर्ट ने माना कि उच्च न्यायालय ने एसीबी के अधिकार क्षेत्र को मान्यता देते हुए सही कानूनी दृष्टिकोण अपनाया था. याचिका अस्वीकार करने में संकोच नहीं- सुप्रीम कोर्ट अदालत ने टिप्पणी की, “धारा 17-A की किसी भी प्रकार से कल्पना नहीं की जा सकती कि वह अवैध रिश्वत की मांग के मामलों पर लागू हो. हमें इस प्रकार की दलीलों को प्रारंभिक स्तर पर ही अस्वीकार करने में कोई संकोच नहीं है.” यह निर्णय इस मामने में अहम हैं कि राज्य एंटी-करप्शन ब्यूरो (जैसे राजस्थान एसीबी) केंद्रीय सरकार के अधिकारियों के विरुद्ध भी भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कर सकती है. इसके लिए सीबीआई की स्वीकृति अनिवार्य नहीं है और एसीबी स्वतंत्र रूप से एफआईआर दर्ज कर सकती है. एजेंसी जांच कर सकती है और आरोप-पत्र दाखिल कर सकती है.