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राज्य मंत्री पटेल ने किया सिविल अस्पताल मैहर का निरीक्षण, व्यवस्थाओं की परखी हकीकत

मैहर . लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने मैहर सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा सेवाओं, दवाओं की उपलब्धता, स्वच्छता व्यवस्था, आपातकालीन सेवाओं तथा मरीजों को दी जा रही सुविधाओं का जायज़ा लिया। निरीक्षण के दौरान श्री पटेल ने चिकित्सकीय स्टॉफ, उपचाररत मरीजों एवं उनके परिजनों से सीधे संवाद कर अस्पताल की कार्य प्रणाली, समस्याओं तथा आवश्यकताओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने मरीजों एवं उनके परिजनों द्वारा दिए गए सुझावों और समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़, प्रभावी एवं जनहितकारी बनाया जा सके। राज्य मंत्री श्री पटेल ने कहा कि आमजन को समय पर, गुणवत्तापूर्ण एवं संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए अस्पतालों में संसाधनों, स्टॉफ और व्यवस्थाओं को लगातार बेहतर किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अस्पताल में आने वाले प्रत्येक मरीज के साथ संवेदनाशीलता पूर्वक व्यवहार किया जाए। निरीक्षण के दौरान अस्पताल प्रशासन द्वारा की जा रही व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए आवश्यक सुधारों के लिए त्वरित कार्यवाही के निर्देश भी दिए। इस अवसर पर मैहर विधायक श्री श्रीकांत चतुर्वेदी एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

हेडमास्टर को बंधक बनाने वाले पांच युवक गिरफ्तार

घाटशिला/बहरागोड़ा. बहरागोड़ा थाना अंतर्गत सियालबिंधा गांव में स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय से एक बड़ी खबर सामने आई है। जिसमें प्रधानाध्यापक के साथ मारपीट, जाति सूचक शब्द के प्रयोग और पेड़ में बांधने के आरोप में बहरागोड़ा पुलिस ने पांच युवकों को प्रधानाचार्य की शिकायत के आधार पर गिरफ्तार कर न्यायालयभेज दिया है। उक्त मामले में बहरागोड़ा थाना में कांड संख्या 5/26 दिनांक 23/01/26 को धारा 115/2,352/351/2/3/5बी एनएस सेक्शन3/01/आर/एसटी एससी एक्ट 1989 के तहत माणिक बेरा, संजय बेरा, नंदलाल बेरा विनोद बैरा और नारायण बेरा के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गयी है। पुलिस द्वारा पांचों आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना के संबंध में बताया जाता है कि उक्त विद्यालय में सरस्वती पूजा का आयोजन किया गया था। आप परिहार का कारण से पूजा प्रारंभ करने में थोड़ी विलंब हुई थी। इससे नाराज पांच युवक प्रधानाचार्य से उलझ गए। पहले तो उन्हें जाति सूचक शब्द के साथ गाली गलौज किया, उनके साथ धक्का मुक्क़ी मारपीट किया और आकर्षित होकर परिसर के समीप नीम के पेड़ में बांध दिया। घटना की सूचना ग्रामीणों द्वारा बहरागोड़ा पुलिस को दी गयी। जिसमें बहरागोड़ा थाना प्राभारी शंकर प्रसाद कुशवाहा ने अपने दल बल के साथ जाकर उन्हें मुक्त कराया। प्रधानाचार्य के लिखित शिकायत के आधार पर पांच लोगों के विरुद्ध प्राथमिक की दर्ज की गई। जिससे उक्त घटना को लेकर विद्यार्थी और अभिभावक भी काफी दुखी है।

ICC ने बांग्लादेश को किया बाहर, T20 वर्ल्ड कप में इस टीम ने की जगह बनाई

नई दिल्ली     टी20 वर्ल्ड कप 2026 से बांग्लादेश की आधिकारिक तौर पर विदाई हो गई है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में शामिल करने की पुष्टि कर दी है. आईसीसी ने एक लेटर लिखकर बांग्लादेश को इसके बारे में जानकारी दे दी है.  बांग्लादेश के बाहर होने के बाद स्कॉटलैंड को आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप 2026 में जगह दी गई है. स्कॉटलैंड को ग्रुप C में शामिल किया गया है, जहां उसका सामना इंग्लैंड, वेस्टइंडीज, नेपाल और इटली जैसी टीमों से होगा.   आईसीसी की वोटिंग में बांग्लादेश को मिली थी हार बता दें कि बांग्लादेश और आईसीसी के बीच करीब तीन हफ्ते से खींचतान जारी है. बांग्लादेश इस मांग पर अड़ा था कि वह भारत में वर्ल्ड कप के मैच नहीं खेलेगा और उसके मैच श्रीलंका शिफ्ट किए जाएं. लेकिन आईसीसी ने स्पष्ट किया था कि उसे भारत में ही मैच खेलने होंगे. आखिरकार आईसीसी बोर्ड की वोटिंग में 14-2 के बहुमत से भारत में बांग्लादेश के मैच कराने को मंजूरी दी गई. एक स्वतंत्र सुरक्षा आकलन में खतरे का स्तर 'कम से मध्यम' बताया गया था.  इस पूरे विवाद की शुरुआत आईपीएल नीलामी के बाद हुई. जब कोलकाता नाइट राइडर्स ने अपनी टीम में बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को 9.20 करोड़ की मोटी रकम में शामिल किया. लेकिन भारत में इसका विरोध हुआ. क्योंकि बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार की खबरें आ रही थीं. इसके बाद बीसीसीआई ने रहमान को आईपीएल से रिलीज कर दिया. बोर्ड के सभी सदस्यों को भेजे गए पत्र में गुप्ता ने कथित तौर पर कहा है कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) आईसीसी बोर्ड के फैसले का पालन नहीं कर रहा है और इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए बांग्लादेश की जगह किसी अन्य देश, इस मामले में स्कॉटलैंड, को आमंत्रित करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है. स्वाभाविक रूप से, इस पत्र की एक प्रति आईसीसी बोर्ड के सदस्य बीसीबी अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम को भी भेजी गई है. स्कॉटलैंड को आईसीसी विश्व कप में उनके पिछले प्रदर्शनों और मौजूदा रैंकिंग (जो कि 14वीं है) के आधार पर जगह मिली है. 2024 में हुए पिछले विश्व कप में, वे ग्रुप बी में तीसरे स्थान पर रहे थे, इंग्लैंड के बराबर अंक थे, लेकिन नेट रन रेट (NRR) के कारण क्वालीफाई नहीं कर पाए थे. 2022 में, उन्होंने ग्रुप स्टेज में वेस्ट इंडीज को हराया था, लेकिन तीसरे स्थान पर रहे और सुपर 12 के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाए.  2021 में, उन्होंने ग्रुप स्टेज में बांग्लादेश को हराया था, संयोग से उसी टीम को जिसकी जगह वे अब ले रहे हैं, और अपने ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल किया था. हालांकि, वे सुपर 12 राउंड में एक भी मैच नहीं जीत पाए. स्कॉटलैंड ने टी20 वर्ल्ड कप में बांग्लादेश को रिप्लेस किया इस बदलाव के बाद स्कॉटलैंड को प्रतियोगिता के प्रारंभिक चरण में ग्रुप सी में रखा जाएगा और वे कोलकाता में वेस्ट इंडीज (7 फरवरी), इटली (9 फरवरी) और इंग्लैंड (14 फरवरी) के खिलाफ खेलेंगे, जिसके बाद वे पश्चिम की ओर मुंबई में नेपाल से भिड़ने के लिए जाएंगे. बीसीसीआई के इस फैसले से बांग्लादेश बोर्ड भड़क गया और उसने वर्ल्ड कप के बहिष्कार की बात कही. बीसीबी ने आईसीसी को एक लेटर लिखा और कहा की वह भारत में अपने मैच नहीं खेलेगा. उसने अपने मैच श्रीलंका या पाकिस्तान में शिफ्ट कराने की मांग रखी. बांग्लादेश ने तर्क दिया की भारत में उसके खिलाड़ियों की सुरक्षा में खतरा हो सकता है. लेकिन आईसीसी ने अपनी सुरक्षा रिपोर्ट में किसी संभावित खतरे से इनकार किया. आखिरकार आईसीसी ने साफ कर दिया की बांग्लादेश को भारत में मैच खेलने ही होंगे. अगर ऐसा नहीं हुआ तो उसे हटा दिया जाएगा. जब बांग्लादेश अपनी जिद से नहीं हटा तो आईसीसी ने वोटिंग कराई और उसमें भी बांग्लादेश को हार मिली. और अब बांग्लादेश को स्कॉटलैंड से रिप्लेस कर दिया गया है. 

किताबों से बाहर सीख: छात्रों को सिखाई गई ठप्पा प्रिंटिंग और पारंपरिक धुलाई विधि

  भोपाल . आईआईटी रुड़की में विरासत 2026 सोसायटी फॉर द प्रमोशन ऑफ इंडियन क्लासिकल म्यूजिक एंड कल्चर अमंग्स्ट यूथ (स्पिक मैके) द्वारा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), रुड़की में आयोजित 'विरासत-2026' कार्य शाला में मध्यप्रदेश की प्रसिद्ध हस्तशिल्प कला 'बाग प्रिंट' की प्रभावी उपस्थिति रही। 22 से 25 जनवरी तक चलने वाले इस सांस्कृतिक समागम में मध्यप्रदेश के बाग के प्रतिष्ठित मास्टर क्रॉफ्ट्समैन और नेशनल व इंटरनेशनल अवार्डी मोहम्मद बिलाल खत्री ने युवाओं को इस पारम्परिक कला की बारीकियों से रूबरू कराया। ठप्पों से उकेरी कला और सीखी 'भट्टी' की प्रक्रिया कार्य शाला के शुरुआती दिनों (22-23 जनवरी) में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक लकड़ी के पारंपरिक ठप्पों (ब्लॉक्स) और प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर सुंदर डिजाइन तैयार किए।  बिलाल खत्री ने विद्यार्थियों को सिखाया कि कैसे प्राकृतिक संपदा का उपयोग कर कपड़े पर अमिट छाप छोड़ी जाती है। शनिवार 24 जनवरी को छात्र बाग प्रिंट की सबसे जटिल प्रक्रियाओं— 'विचलिये' और 'भट्टी' के व्यावहारिक प्रयोग से रू-ब-रू हुए।   विचलिये: कपड़े को बहते पानी में धोने की विशेष प्रक्रिया।     भट्टी: कपड़े को धावड़ी (पहाड़ी और मैदानी इलाकों में पाया जाने वाला झाड़ीनुमा लाल फूलों वाला वृक्ष) के फूल और अलीज़रीन (ऑल और मैहर की जड़ों) के साथ उबालकर रंगों को पक्का करने की पारंपरिक विधि। प्राचीन कला का संरक्षण है लक्ष्य मोहम्मद बिलाल खत्री ने बताया, "स्पिक मैके का मूल उद्देश्य देश की लुप्त होती प्राचीन कलाओं का संरक्षण और विस्तार करना है। आईआईटी रुड़की के छात्रों ने जिस दिलचस्पी के साथ इस पुश्तैनी हुनर को सीखा, वह सराहनीय है।" कार्य शाला के अंतिम दिन (25 जनवरी) को विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार के कपड़ों और उन पर बाग प्रिंट की विशेषताओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। रूड़की में न केवल हस्तशिल्प, बल्कि योग, संगीत और अन्य सांस्कृतिक विधाओं के माध्यम से भारतीय विरासत का प्रदर्शन किया गया। मोहम्मद बिलाल खत्री के मार्गदर्शन में तैयार की गई कलाकृतियाँ कार्य शाला में आकर्षण का केंद्र रही।

नसीमुद्दीन सिद्दीकी का बड़ा कदम: कांग्रेस छोड़, चंद्रशेखर से गठजोड़ की अटकलें

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. कांग्रेस से नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने इस्तीफा दे दिया है. नसीमुद्दीन पहले बहुजन समाजवादी (बीएसपी) पार्टी में थे. लेकिन, उन्होंने बीएसपी छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन किया था. अब उन्होंने कांग्रेस से भी अलविदा कह दिया है. उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का बेहद करीबी माना जाता है. अपने बयान में उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस में अपने सभी साथियों के साथ इसलिए शामिल हुए थे कि जातिवाद और संप्रदायवाद के साथ हो रहे अन्याय की लड़ाई लड़ी जा सके। लेकिन कांग्रेस में यह लड़ाई नहीं लड़ पा रहा हूं।  इसलिए इस्तीफा दे दिया है।  उन्होंने कहा कि जल्द ही नई शुरुआत की जाएगी। नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि कांग्रेस के किसी भी पदाधिकारी से कोई शिकायत नहीं है लेकिन जिस काम के लिए वह पार्टी में आए थे वह नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके साथ इस्तीफा देने वाले सभी लोगों से मशविरा किया जा रहा है। जिस तरफ सहमति बनेगी उसी दल के साथ मिलकर आगे जनता की लड़ाई लड़ी जाएगी। पूर्व मंत्री के साथ करीब 72 अन्य लोगों ने पार्टी छोड़ दी है। इसमें करीब दो दर्जन पूर्व विधायक भी शामिल हैं।   क्यों छोड़ा ‘हाथ’ का साथ? इस्तीफे के बाद जारी अपने बयान में नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा, ‘मैं कांग्रेस में अपने साथियों के साथ इसलिए शामिल हुआ था ताकि जातिवाद और संप्रदायवाद के खिलाफ हो रहे अन्याय की लड़ाई मजबूती से लड़ी जा सके. लेकिन कांग्रेस में रहते हुए मैं यह लड़ाई नहीं लड़ पा रहा हूं. मेरा मकसद जनता के लिए काम करना है, जो यहां पूरा नहीं हो पा रहा था.’ उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें कांग्रेस के किसी भी पदाधिकारी से व्यक्तिगत शिकायत नहीं है, बल्कि यह निर्णय सैद्धांतिक है. सिद्दीकी ने संकेत दिया कि वे जल्द ही अपने समर्थकों के साथ मशविरा कर नई राजनीतिक पारी की शुरुआत करेंगे. नसीमुद्दीन सिद्दीकी का राजनीतिक सफर नसीमुद्दीन सिद्दीकी मूल रूप से बांदा जिले के स्योंढ़ा गांव के रहने वाले हैं. उनका राजनीतिक सफर 1988 में बांदा नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव से शुरू हुआ. हालांकि इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उन्होंने बसपा ज्वाइन की. 1991 में बसपा के टिकट से नसीमुद्दीन ने बांदा सदर सीट से विधायक का चुनाव जीतकर इतिहास रचा. वे न केवल बांदा के पहले मुस्लिम विधायक बने, बल्कि धीरे-धीरे मायावती के खास और भरोसेमंद नेता भी बन गए. 2007 में जब बसपा की सरकार बनी, तब उनकी राजनीतिक मजबूती और प्रशासनिक क्षमता के कारण उन्हें ‘मिनी मुख्यमंत्री’ भी कहा गया. नसीमुद्दीन का खेलों से जुड़ाव राजनीति में आने से पहले नसीमुद्दीन का झुकाव खेलों की ओर था. वे राष्ट्रीय स्तर के वॉलीबाल खिलाड़ी रह चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने रेलवे में कॉन्ट्रैक्टर के रूप में भी काम किया. उनके खेल और व्यवसाय का अनुभव बाद में राजनीतिक नेतृत्व और निर्णय क्षमता में भी मददगार साबित हुआ. जिसने उन्हें पूरे राज्य में एक कद्दावर नेता के रूप एम पहचान दिलाई. कैबिनेट मंत्री बनने का सफर नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने बसपा सरकार में कई महत्वपूर्ण पद संभाले. जब मायावती 1995 में पहली बार मुख्यमंत्री बनीं, तब उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया. इसके बाद 21 मार्च 1997 से 21 सितंबर 1997 तक शॉर्ट टर्म गवर्नमेंट में मंत्री रहे. 3 मई 2002 से 29 अगस्त 2003 तक एक साल के लिए वे फिर कैबिनेट का हिस्सा रहे. इसके बाद 13 मई 2007 से 7 मार्च 2012 तक फुल टाइम गवर्नमेंट में मंत्री रहे. उनकी नीतियों और प्रभाव के कारण उन्हें पश्चिमी यूपी में एक मजबूत नेता माना जाता था. चुनावी रिकॉर्ड और परिवार का सियासी रसूख नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपने करियर में चुनावी राजनीति से ज्यादा संगठन और सदन के भीतर अपनी पकड़ मजबूत रखी. पिछले दो दशकों से वे विधान परिषद सदस्य (MLC) रहे हैं. उनकी पत्नी हुस्ना सिद्दीकी भी पांच साल तक एमएलसी रहीं. उनके बेटे अफजल सिद्दीकी ने 2014 में फतेहपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था. दिलचस्प बात यह है कि रसूख बढ़ने के साथ ही उनके परिवार में भी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं जागीं, जिसे लेकर बाद में कुछ विवाद भी हुए. सिद्दीकी ने बताया कि पार्टी ने उन्हें चुनाव लड़ने का ऑफर दिया था, लेकिन अब उनकी इच्छा चुनाव लड़ने की नहीं बल्कि प्रत्याशियों को जिताने के लिए प्रचार करने की है. कांग्रेस में एंट्री के बाद अब इस्तीफा नसीमुद्दीन ने फरवरी 2018 में बसपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा था. जहां उन्होंने पश्चिमी यूपी में प्रांतीय अध्यक्ष पद संभाला. हालांकि अब उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा देकर अपने राजनीतिक सफर में नई दिशा का संकेत दिया है. उनका यह कदम क्षेत्रीय सियासत और पार्टी की रणनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है. अब आगे क्या? बसपा से निष्कासन के बाद कांग्रेस में शामिल हुए सिद्दीकी का अब कांग्रेस छोड़ना यूपी की राजनीति में नए समीकरण बना सकता है. चर्चा है कि वे अपनी पुरानी पार्टी बसपा में वापसी कर सकते हैं या फिर समाजवादी पार्टी का दामन थाम सकते हैं. हालांकि, उन्होंने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं और कहा है कि “जहां समर्थकों की सहमति होगी, वहीं से जनता की लड़ाई लड़ेंगे.”  

मेट्रो प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार, ट्रांसको ने चालू किया 200 एमवीए पावर ट्रांसफार्मर

भोपाल . ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि भोपाल मेट्रो के लिए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) द्वारा 220 केवी सबस्टेशन गोविंदपुरा, भोपाल में 200 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित कर सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत किया गया है। इस ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से भोपाल मेट्रो के सुभाषनगर सबस्टेशन के लिए पर्याप्त और भरोसेमंद विद्युत आपूर्ति उपलब्ध हो सकेगी। सीमित जगह में स्थापित किया ट्रांसफार्मर ऊर्जा मंत्री ने बताया कि मेट्रो परियोजना के लिए यह स्थापना एमपी ट्रांसको के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण रही। शहर के मध्य स्थित गोविंदपुरा सब स्टेशन में सीमित उपलब्ध स्थान के कारण बड़े क्षमता वाले पावर ट्रांसफार्मर की स्थापना एक जटिल कार्य था। एमपी ट्रांसको मुख्यालय, जबलपुर स्थित प्लानिंग एवं डिजाइन विभाग के इंजीनियरों ने अपने कौशल, नवाचार और तकनीकी दक्षता से सब स्टेशन परिसर में आवश्यक स्थान चिन्हित कर यह कार्य संभव बनाया। इस चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने लिए ऊर्जा मंत्री  तोमर ने ट्रांसमिशन कंपनी के कार्मिकों को बधाई दी है। सब स्टेशन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि एमपी ट्रांसको भोपाल के अतिरिक्त मुख्य अभियंता  राजेश शांडिल्य ने जानकारी दी कि भोपाल मेट्रो के डिपॉजिट वर्क के तहत इस ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से 220 केवी सबस्टेशन, गोविंदपुरा (भोपाल) की ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता में वृद्धि हुई है। यह इस सब स्टेशन का पाचंवा 220 केवी वोल्टेज लेवल का ट्रांसफार्मर है। अब सब स्टेशन की कुल क्षमता बढ़कर 820 एमवीए हो गई है, जिससे भोपाल शहर और मेट्रो परियोजना की भविष्य की विद्युत आवश्यकताओं को सुदृढ़ता मिले

रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिले सुप्रसिद्ध अभिनेता नीतिश भारद्वाज

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में सुप्रसिद्ध फिल्म एवं टीवी अभिनेता नीतिश भारद्वाज ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने  नीतीश भारद्वाज का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें बस्तर आर्ट से निर्मित महुआ वृक्ष की कलाकृति तथा बस्तर दशहरा पर आधारित कॉफी टेबल बुक भेंट की।मुख्यमंत्री  साय ने छत्तीसगढ़ की विशिष्ट जनजातीय कला, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डालते हुए इनके संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों की जानकारी भी साझा की।  इस अवसर पर विधायक  अनुज शर्मा,मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार  पंकज झा, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी  आलोक सिंह सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सशुल्क वरिष्ठजन निवास संध्या छाया का किया लोकार्पण

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देश-प्रदेश में विकास का अर्थ केवल अधोसंरचना निर्माण नहीं है, विकसित राष्ट्र के लिए, समाज के सभी वर्गों को बेहतर और सुरक्षित जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराना भी विकास है और यह राज्य सरकार का सर्वोच्च दायित्व भी है। राज्य सरकार दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और वृद्धजनों की सेवा के लिए संकल्पित है। राजधानी में वरिष्ठजनों को परिवार जैसा वातावरण देने के लिए सेवा भारती के माध्यम से इस सर्व-सुविधायुक्त सशुल्क वरिष्ठजन निवास की शुरुआत की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण के लिए हर कदम पर उनके साथ है। राज्य सरकार ने वृद्धजनों की सेवा और 'ओल्ड एज होम' की स्थापना के लिए समाज को साथ जोड़ा है। राज्य सरकार दिव्यांगजन को भी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से प्रोत्साहित कर उनमें क्षमताएं विकसित करने का प्रयास कर रही है। दिव्यांगजनों के पास अद्भुत बौद्धिक क्षमता होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव नव निर्मित सशुल्क वृद्धाश्रम "संध्या छाया" के लोकार्पण अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा पत्रकार कॉलोनी लिंक रोड नं. 3 पर निर्मित सर्व सुविधायुक्त वृद्धाश्रम में आयोजित कार्यक्रम का मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पीपीपी मोड पर बने "संध्या छाया" ओल्ड एज होम का शुभारंभ कर अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यहां रह रहे एक दम्पत्ति का अभिवादन कर स्वागत भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्यस्तरीय दिव्यांगजन स्पर्श मेला-2026 में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए कलाकारों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने कलाकारों से संवाद कर उन्हें प्रोत्साहित भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना में 54.52 लाख से अधिक पेंशन हितग्राहियों को 327.15 करोड़ रूपये से अधिक राशि का सिंगल क्लिक से अंतरण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्यस्तरीय दिव्यांगजन स्पर्श मेला-2026 में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कारों का वितरण भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने भारत को सभी क्षेत्रों में विश्व का सर्वश्रेष्ठ देश बनाने का बीड़ा उठाया है। हमारा देश गौरवशाली और समृद्ध विरासत का सभी प्रकार से संरक्षण करते हुए निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। प्रदेश सरकार भी विकसित भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मध्यप्रदेश भारत के सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाले 3 राज्यों में शामिल हुआ है। मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में देश में अग्रणी भूमिका में है। हमारी सरकार ग्रीन एनर्जी को आगे बढ़ाते हुए दुनिया में सबसे सस्ती बिजली उपलब्ध करा रही है। प्रदेश में सोलर एनर्जी, विंड एनर्जी और पम्प स्टोरेज से ऊर्जा क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने की अपार संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी की प्रेरणा से इस बार दावोस के वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भारत का सबसे बड़ा दल शामिल हुआ। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री  नारायण सिंह कुशवाहा ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। यह ओल्ड एज होम ''संध्या छाया'' वृद्धजनों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है। विभाग की प्रमुख सचिव मती सोनाली वायंगण्कर ने कहा कि सर्वसुविधायुक्त सशुल्क वरिष्ठजन निवास ''संध्या छाया'' लगभग 24 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया है। वृद्धाश्रम में 34 कमरे हैं, जिसमें 56 वृद्धजनों के रहने की व्यवस्था है। इसमें उच्च गुणवत्ता का भोजन, पार्क जैसी सभी सुविधाएं मिलेंगी। यहां पर दिव्यांगजन स्पर्श मेला भी आयोजित किया गया, जिसमें 450 से अधिक बच्चों ने विभिन्न खेल गतिविधियों एवं प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिकों, समाज सेवियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।

खड़गवाँ से बेलबहरा मार्ग को मिलेगा नया रूप, रायपुर में आवागमन होगा आसान

रायपुर : खड़गवाँ जनपद के ग्राम पंचायत बेलबहरा से ग्राम लालपुर मार्ग होगा सुगम, आवागमन को मिलेगा बड़ा लाभ सुखाड़ नाला पर पुल निर्माण को पाँच करोड़ बारह लाख रुपये की मिली प्रशासकीय मंजूरी रायपुर मनेंद्रगढ़ विधानसभा के खड़गवाँ जनपद के ग्राम पंचायत बेलबहरा से ग्राम लालपुर मार्ग पर सुखाड़ नाला पर पुल निर्माण के लिए पाँच करोड़ बारह लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। यह स्वीकृति लोक निर्माण विभाग द्वारा मनेंद्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत दी गई है। इस परियोजना से क्षेत्रवासियों को मनेंद्रगढ़ मुख्यालय की स्वास्थ्य, शिक्षा सहित अन्य सुविधाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा साथ ही खडगंवा और बैंकुंठपुर की दूरी भी घटेगी। पुल निर्माण से क्षेत्र की कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार होगा। इसके पूरा होते ही पेंड्रा गौरेला मरवाही जिला नजदीक हो जाएगा, जिससे आवागमन सुगम बनेगा। वर्तमान में इस मार्ग पर नियमित परिवहन सुविधा नहीं होने के कारण लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, लेकिन पुल बनने के बाद बस सेवा शुरू होने की संभावना बढ़ेगी। स्थानीय विधायक और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री  अरुण साव को मनेंद्रगढ़ की समस्त जनता की तरफ से धन्यवाद ज्ञापित कर उनका आभार प्रकट किया है । स्थानीय नागरिकों ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि पुल निर्माण से विकास को नई गति मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों का शहरों से सीधा संपर्क स्थापित होगा।

‘स्मृति शेष स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल : साहित्य की खिड़कियां’ विषय पर हुई परिचर्चा

रायपुर. रायपुर साहित्य उत्सव में  शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित रायपुर साहित्य उत्सव के पहले दिन  देश के शीर्षस्थ साहित्यकार स्वर्गीय  विनोद कुमार शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण किया गया। ‘स्मृति शेष स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल : साहित्य की खिड़कियां’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में साहित्य, प्रशासन, पत्रकारिता और फिल्म से जुड़े वक्ताओं ने  उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर भावपूर्ण संवाद किया। वक्ताओं ने  शुक्ल और उनकी रचनाओं से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए उनके साहित्य को मानवीय संवेदना और मौलिक अभिव्यक्ति का अद्वितीय उदाहरण बताया। रायपुर साहित्य उत्सव में  शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण परिचर्चा के प्रथम वक्ता भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी एवं साहित्यकार डॉ. सुशील कुमार त्रिवेदी ने कहा कि वे वर्ष 1973 से लगातार विनोद कुमार शुक्ल से जुड़े रहे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने पिछले 200 वर्षों में हिंदी साहित्य को बार-बार दिशा दी है। ठाकुर जगमोहन सिंह, माधवराव सप्रे, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, मुकुटधर पांडेय से लेकर विनोद कुमार शुक्ल तक की परंपरा ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है। डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि  शुक्ल ने किसी विचारधारा या कवि का अनुगमन नहीं किया, उनका संपूर्ण लेखन मौलिक है। उनकी रचनाओं में साधारण मनुष्य अपनी पूरी गरिमा और संवेदना के साथ उपस्थित होता है। शोषितों का जीवन, खुद के गढ़े हुए मुहावरे, सरल भाषा और गहरी अनुभूति उनके साहित्य की पहचान है। उनके उपन्यासों में ‘घर’ सबसे खूबसूरत और मानवीय प्रतीक के रूप में उभरता है। नई दिल्ली की युवा कथाकार एवं पत्रकार सु आकांक्षा पारे ने कहा कि कई लोग विनोद कुमार शुक्ल की रचनाओं को दुरूह कहकर खारिज कर देते हैं, लेकिन बहुत से पाठकों को इन्हीं रचनाओं से गहरा और आत्मीय लगाव है। उन्होंने कहा कि  शुक्ल मनुष्यता के पुजारी थे, उनकी रचनाएं मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती हैं। जनसंपर्क विभाग के उप संचालक एवं युवा साहित्यकार  सौरभ शर्मा ने कहा कि स्वर्गीय  विनोद कुमार शुक्ल का साहित्य यह सिखाता है कि सामान्य जीवन जीते हुए भी मनुष्य कैसे खुश रह सकता है। वे बड़े कवि और लेखक तो थे ही, उससे भी बड़े इंसान थे। उन्होंने  शुक्ल के साथ बिताए समय को याद करते हुए कहा कि उनके साथ बैठना सुकून से भर देता था, समय का पता ही नहीं चलता था। उन्होंने बताया कि ‘स्मृति’ का प्रयोग  शुक्ल के साहित्य में विपुलता से हुआ है। उनकी रचनाएं पाठकों में कौतुक और उत्सुकता जगाती हैं। राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी एवं लेखक  अनुभव शर्मा ने कहा कि  विनोद कुमार शुक्ल को पढ़ने के बाद उन्होंने उनके साहित्य को जिया है। उनकी रचनाओं में आए प्रतीक और बिंब हमें अपने आसपास के जीवन में दिखाई देते हैं। उन्होंने बताया कि  शुक्ल ने उन्हें भी लिखने के लिए प्रेरित किया। ‘पेड़ों का हरहराना, चिड़ियों का चहचहाना’ जैसे छोटे-छोटे प्रतीक उनकी रचनाओं में हर जगह मिलते हैं। उनकी कथाएं हमारी मिट्टी से उपजे शब्दों में अपनी बात कहती हैं और प्याज की तरह परत-दर-परत खुलती जाती हैं। अभिनेत्री सु टी.जे. भानु ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि साहित्य उन्हें बचपन से संबल देता रहा है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पहली बार  विनोद कुमार शुक्ल की कविता पढ़ी, तो लगा कि यही वे बातें हैं, जिन्हें वे स्वयं कहना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि वे हर वर्ष 1 जनवरी को  शुक्ल के जन्मदिन पर रायपुर आती थीं और उनसे मिलती थीं। उनकी किताबों में जनमानस की सच्ची और आत्मीय बातें हैं। परिचर्चा की सूत्रधार डॉ. नीलम वर्मा ने समापन करते हुए कहा कि स्वर्गीय  विनोद कुमार शुक्ल के साहित्य की एक नहीं, अनेक खिड़कियां हैं। उनके लेखन में गहरी मानवीय करुणा और संवेदना समाई हुई है। वे किसी एक राज्य या देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनकी रचनाएं पूरी दुनिया को जोड़ती हैं।