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एक मॉडल सामुदायिक पर्यटन स्थल के रूप में ग्राम केरे को किया जाएगा विकसित

रायपुर, जशपुर जिले को एक प्रमुख इको-पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में आज मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय बगिया में आयोजित कार्यक्रम में भारत के अग्रणी होमस्टे प्लेटफॉर्म होमस्टेज़ ऑफ इंडिया, छत्तीसगढ़ शासन और जशपुर जिला प्रशासन के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया। इसके अंतर्गत ग्राम केरे को एक मॉडल सामुदायिक पर्यटन ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने ग्राम केरे में तैयार किए गए होमस्टे का शुभारंभ किया गया।   एमओयू के अंतर्गत जशपुर का पहला संगठित होमस्टे ग्राम बनाने की दिशा में कार्य होगा। एक सुव्यवस्थित एवं विस्तार योग्य होमस्टे-आधारित ग्रामीण पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र की स्थापना होगी। इस पहल के माध्यम से स्थानीय परिवारों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, सतत आजीविका को सुदृढ़ किया जाएगा तथा क्षमता निर्माण और कौशल विकास के जरिए युवाओं एवं महिलाओं में उद्यमिता को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इस परियोजना का मूल उद्देश्य स्थानीय संस्कृति, परंपराओं एवं प्राकृतिक विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन करना है, ताकि पर्यटन विकास समावेशी, समुदाय-स्वामित्व वाला और पर्यावरण की दृष्टि से सतत बना रहे तथा क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहे। मुख्यमंत्री श्री साय की उपस्थिति में हुए इस समझौता का ज्ञापन पर कलेक्टर जशपुर श्री रोहित व्यास तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विनोद वर्मा और होमस्टेज़ ऑफ इंडिया प्रा. लि. के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए।  अधिकारियों ने बताया कि यह पहल राज्य सरकार की इको-पर्यटन, समावेशी विकास एवं समुदाय-नेतृत्व वाले आर्थिक विकास की परिकल्पना के अनुरूप है। स्थानीय संस्कृति और प्रकृति पर आधारित प्रामाणिक पर्यटन अनुभवों के माध्यम से यह परियोजना जशपुर की पहचान को सशक्त करेगी और उसे राष्ट्रीय स्तर पर मुख्य पर्यटन मानचित्र में स्थापित करने में सहायक होगी।

बुन्देलखण्ड में दुग्ध क्रांति : डेयरी वैल्यू चेन बनाकर आत्मनिर्भर हो रहीं 86 हजार महिलाएं

चित्रकूट, झांसी, बांदा, हमीरपुर, जालौन, महोबा एवं ललितपुर में डेयरी इंडस्ट्री के जरिए ग्रामीण महिलाओं की बढ़ रही आय सीएम योगी के विजन के अनुसार 3600 स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को किया गया एकजुट 952 गांवों में महिलाओं की आय बढ़ाने का मजबूत जरिया बना दुग्ध व्यवसाय लखनऊ,   बुन्देलखण्ड की पहचान अब सिर्फ संघर्ष और पलायन तक सीमित नहीं रह गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी विजन से इस क्षेत्र में डेयरी वैल्यू चेन महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे भरोसेमंद माध्यम बनकर उभरी है। चित्रकूट, झांसी, बांदा, हमीरपुर, जालौन, महोबा और ललितपुर में दुग्ध व्यवसाय के जरिए 86 हजार से अधिक ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। बुन्देलखण्ड में दुग्ध व्यवसाय को संगठित, पारदर्शी और लाभकारी बनाने के लिए महिलाओं की प्रोड्यूसर कंपनी ‘बालिनी’ का गठन किया गया। यह संगठन महिला दुग्ध उत्पादकों द्वारा संचालित है, जिसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा ही बदल दी है। इस मॉडल से जुड़कर महिलाएं अब बिचौलियों पर निर्भर नहीं हैं। संगठन द्वारा बनाए गए उत्पाद को बाजार और उचित मूल्य मिल रहा है। दूध संग्रह, परीक्षण, डिजिटल भुगतान से गांवों में पैदा हुए रोजगार के नए अवसर डेयरी वैल्यू चेन परियोजना के तहत बुन्देलखण्ड के सातों जनपदों के 952 गांवों में 3,600 स्वयं सहायता समूहों की 86,000 से अधिक महिलाओं को संगठित किया गया है। दूध संग्रह, गुणवत्ता परीक्षण, डिजिटल भुगतान और बाजार से सीधे जुड़ाव की व्यवस्था ने महिलाओं की आय में वृद्धि की है। इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार मिली है। सामूहिक प्रयास से बड़े आर्थिक बदलाव की वाहक बन रहीं ग्रामीण महिलाएं योगी सरकार की मंशा है कि ग्रामीण विकास की धुरी ही महिलाओं की आर्थिक मजबूती बने। इसी सोच के तहत बुन्देलखण्ड में डेयरी परियोजनाओं को तेजी से विस्तार दिया जा रहा है। बालिनी मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनी अब न केवल दुग्ध व्यवसाय का मॉडल बन चुकी है, बल्कि यह संकेत भी दे रही है कि सामूहिक प्रयास और सही मार्गदर्शन से ग्रामीण महिलाएं बड़े आर्थिक बदलाव की वाहक बन सकती हैं। बुन्देलखण्ड में डेयरी वैल्यू चेन की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि सीएम योगी के नेतृत्व में चल रही योजनाएं जमीन पर असर दिखा रही हैं। गांव की महिलाएं अब क्षेत्र की तरक्की की मजबूत कड़ी बन चुकी हैं।

4 साल में ही खस्ताहाल स्कूल भवन पर बवाल, स्वाति मालीवाल बोलीं– बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़, सिसोदिया जिम्मेदार

नई दिल्ली दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। साल 2020 में करोड़ों रुपए की लागत से बनी एक सरकारी स्कूल की चार मंजिला इमारत अब इतनी खराब हालत में पहुंच चुकी है कि उसे 'डेंजरस' घोषित कर बंद करना पड़ा है। इस मामले को लेकर राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने आम आदमी पार्टी और तत्कालीन शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। 4–5 साल में खंडहर बनी 2020 की स्कूल बिल्डिंग, सुरक्षा के चलते स्कूल बंद सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, स्वाति मालीवाल का कहना है कि जिस स्कूल को 2020 में बनाया गया था, वह महज 4–5 साल में ही खंडहर जैसी हालत में पहुंच गया। उन्होंने स्कूल भवन की तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि इमारत में जगह-जगह दरारें, भारी सीलन, कमजोर दीवारें और कुछ हिस्सों में लेंटर तक नहीं है। ऐसे हालात में बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल को बंद करना पड़ा। दरारें, सीलन और कमजोर ढांचा, स्वाति मालीवाल ने तस्वीरें-वीडियो जारी कर उठाए सवाल स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया कि यह मामला सिर्फ लापरवाही का नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। उनका कहना है कि अगर निर्माण कार्य सही तरीके से और मानकों के अनुसार हुआ होता, तो इतनी नई बिल्डिंग को खतरनाक घोषित नहीं करना पड़ता। उन्होंने सवाल उठाया कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी क्यों नहीं हुई। भ्रष्टाचार का आरोप, करोड़ों खर्च के बावजूद निर्माण गुणवत्ता पर सवाल वहीं आम आदमी पार्टी और मनीष सिसोदिया समर्थकों की ओर से इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि दिल्ली में हजारों सरकारी स्कूलों का निर्माण और नवीनीकरण किया गया है और किसी एक इमारत की खराब हालत के आधार पर पूरे शिक्षा मॉडल पर सवाल उठाना गलत है। साथ ही यह भी कहा गया है कि अगर किसी स्कूल में निर्माण से जुड़ी खामी पाई गई है, तो उसकी तकनीकी जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार ठेकेदार या एजेंसी पर कार्रवाई की जानी चाहिए।   AAP का पलटवार, आरोपों को बताया राजनीति से प्रेरित, तकनीकी जांच की मांग इस पूरे मामले ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या स्कूल निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ? क्या गुणवत्ता जांच में लापरवाही बरती गई? और सबसे बड़ा सवाल, बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? घटिया निर्माण या निगरानी में चूक? दिल्ली के स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा सवाल फिलहाल मामला आरोप-प्रत्यारोप के बीच है, लेकिन 2020 में बनी एक स्कूल इमारत का इतनी जल्दी जर्जर हो जाना दिल्ली के सरकारी निर्माण कार्यों और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल जरूर खड़े करता है।  

योगी सरकार का मेगा पुश: यमुना एक्सप्रेसवे पर 65 से अधिक इकाइयों को भूमि आवंटन

मुख्यमंत्री ने बीते रविवार को प्रदान किए विभिन्न औद्योगिक इकाइयों तथा मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए भूमि आवंटन पत्र सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिनिक्स से लेकर हेल्थ सेक्टर तक में निवेश होगा यमुना एक्सप्रेसवे बन रहा औद्योगिक विकास का नया पावरहाउस, योगी सरकार ने यमुना प्राधिकरण में औद्योगिकीकरण को दी रफ्तार प्राधिकरण ने 65 से अधिक औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए आवंटित किए भूखंड लखनऊ,  यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और हेल्थ सेक्टर के लिए एक उभरता हुआ राष्ट्रीय केंद्र बन रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार की उद्योग-हितैषी नीतियों और तेज निर्णय प्रक्रिया का परिणाम है कि हजारों करोड़ के निवेश के साथ लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। यीडा ने वर्ष 2025-26 में औद्योगिकीकरण को गति देने के लिए कई सकारात्मक और ठोस पहल की हैं। प्राधिकरण ने 65 से अधिक औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए भूखंड आवंटित किए हैं। बीते रविवार को ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यीडा क्षेत्र में विभिन्न कंपनियों को उद्योगों और मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए भूमि आवंटन पत्र प्रदान किए थे। व्यापक निवेश के साथ उपलब्ध हो रहे रोजगार यीडा की औद्योगिक योजना के अंतर्गत 28 औद्योगिक इकाइयों को 2.32 लाख वर्गमीटर भूमि आवंटित की गई, जिसमें लगभग 1332 करोड़ रुपये का निवेश होगा और 8783 लोगों को रोजगार मिलेगा। वहीं, ई-ऑक्शन योजना के माध्यम से 37 औद्योगिक इकाइयों को एक लाख वर्गमीटर भूमि आवंटित की गई है, जिसमें 500 करोड़ रुपये का निवेश और 4800 रोजगार सृजित होंगे। इसके अतिरिक्त, इनवेस्ट यूपी और शासन के विभागों द्वारा जारी एलओसी के माध्यम से 09 औद्योगिक इकाइयों को 18.77 लाख वर्गमीटर भूमि आवंटित की गई है। इन इकाइयों से लगभग 21,128 करोड़ रुपये का निवेश और 18044 युवाओं के लिए रोजगार सृजित होने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने सौंपे आवंटन पत्र मुख्यमंत्री ने बीते रविवार को चार प्रमुख कंपनियों को भूमि आवंटन पत्र प्रदान किए। इनमें इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड को 48 एकड़ भूमि, एसेंट सर्किट प्राइवेट लि. को सेक्टर-10 स्थित इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर में 16 एकड़ भूमि और अंबर इंटरप्राइजेज इंडिया लि. को सेक्टर-08 में 100 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। इन तीनों परियोजनाओं में 10,500 करोड़ से ज्यादा का निवेश प्रस्तावित है, जबकि हजारों रोजगार के साधन सृजित होंगे। इनके माध्यम से सेमीकंडक्टर से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की इकाइयां स्थापित हो रही हैं। औद्योगिक विकास के साथ स्वास्थ्य ढांचे को भी मजबूती यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में औद्योगिक विकास के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया गया है। बोधिसत्व चैरिटेबल ट्रस्ट को सेक्टर-17ए में 20.50 एकड़ भूमि मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए आवंटित की गई है। इस परियोजना में 532.18 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जिससे क्षेत्र में उच्च स्तरीय चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आवंटित परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से धरातल पर उतारा जाए, ताकि निवेश के साथ-साथ स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें।

रायपुर साहित्य उत्सव में समाज और सिनेमा विषय पर केंद्रित रोचक परिचर्चा में उमड़ी श्रोताओं की भीड़

सिनेमाजगत के प्रसिद्ध निर्देशक अनुराग बसु और चाणक्य सीरियल के निर्माता चंद्रप्रकाश द्विवेदी हुए शामिल लोग रिस्क लेकर सामाजिक सरोकार से जुड़ा सिनेमा बनाते हैं : निर्देशक अनुराग बसु सिनेमा को देखने का मापदंड बदल गया है : निर्माता चंद्रप्रकाश द्विवेदी रायपुर,  रायपुर साहित्य उत्सव के अंतर्गत समाज और सिनेमा विषय पर केंद्रित परिचर्चा को सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रोता अनिरुद्ध नीरव मंडप में पहुंचे, जिसमें हिंदी सिनेमाजगत के प्रसिद्ध लेखक-निर्देशक अनुराग बसु, इतिहासकार-पटकथा लेखक एवं निर्माता डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी और सिनेमा लेखक अनंत विजय ने हिस्सा लिया। परिचर्चा के सूत्रधार छत्तीसगढ़ के जाने-माने लेखक-निर्देशक मनोज वर्मा रहे। हिंदी सिनेमाजगत के निर्देशक अनुराग बसु ने परिचर्चा में भाग लेते हुए सिनेमा को एक ऐसा औजार बताया, जो बिगड़े हुए समाज को शेप दे सकता है। उन्होंने कहा कि लोग रिस्क लेकर ऐसे सिनेमा बनाते हैं। अगर हम सिनेमा से सामाजिक सरोकार की अपेक्षा करते हैं, तो बहुत से लेखक-निर्देशक आज भी इस दायित्व को निभाते आ रहे हैं। श्री बसु ने कहा कि 90 के दशक में जितने सिनेमा बनते थे, आज भी उतने ही बनते हैं, बल्कि फिल्मों की संख्या और अधिक है। आज सिनेमा के पास ज्यादा टेक्नोलॉजी है, लेकिन कहानियां भी वही हैं। अब नई कहानियां सामने आ रही हैं, नए विषयों पर फिल्में बन रही हैं। हम यदि किसी लेखक-निर्देशक की बनाई किसी फ़िल्म को अच्छा या बुरा कहते हैं, तो यह हमारा व्यक्तिगत विचार है, क्योंकि उसने पूरी ईमानदारी से फ़िल्म बनाई है और उसके हिसाब से वह फ़िल्म अच्छी बनी है। बसु ने आगे कहा कि हम जब भी फ़िल्मों की बात करते हैं, तो पसंद-नापसंद की बात अपने आप ही सामने आ जाती है। उन्होंने फ़िल्मों को समाज का जरूरी हिस्सा बताया। परिचर्चा में अपने संबोधन के दौरान डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने कहा कि आज फ़िल्म के हिट और फ्लॉप होने की बात अधिक होती है। सिनेमा को देखने का मापदंड बदल गया है। सिनेमा का सामाजिक सरोकार नहीं रहा। सिनेमा आपके प्रश्नों को तभी उठाएगा, जब उससे सिनेमा को बड़ा लाभ होगा। सिनेमा का दौर बदल रहा है। श्री द्विवेदी ने कहा कि आज के समय में आप चाणक्य नहीं बना सकते। हिंदी सिनेमा में हिंदी का स्तर कहां तक पहुंचा है, यह एक बड़ी चुनौती है। सभी सिनेमा को सरल करने की बात करते हैं, हिंदी में अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग होता है। उन्होंने अपने अनुभव से जोड़ते हुए बताया कि बायोग्राफी भी उन्हीं पर बन रही हैं, जिनसे बड़े फायदे हों। उन्होंने उपनिषद गंगा सीरियल का उल्लेख करते हुए बताया कि उपनिषद गंगा में बहुत गंभीर काम है, जबकि चाणक्य में उस समय की सच्चाई दिखाई देती है। इस सत्र पर सिनेमा लेखक अनंत विजय ने कहा कि सिनेमा कोई एलाइट माध्यम नहीं है। जब तक हम फ़िल्म नहीं देखते, तब तक चर्चा नहीं होती। आजकल लोग फ़िल्म देखते नहीं, सिर्फ चर्चा करते हैं। प्रेम में वैज्ञानिकता नहीं ढूंढी जाती। फ़िल्मों की कहानी और पात्रों से लोग भावनात्मक जुड़ाव रखते हैं। यही जुड़ाव फ़िल्मों की कॉमर्शियल और सोशल वैल्यू तय करता है।  

राष्ट्रपति भवन के अमृत उद्यान का उद्घाटन: प्रवेश, टिकट रियायत और समय से जुड़ी सब बातें

नई दिल्ली राष्ट्रपति भवन का प्रसिद्ध अमृत उद्यान इस बार 3 फरवरी से आम जनता के लिए खुलने जा रहा है, जो 31 मार्च 2026 तक खुला रहेगा। अमृत उद्यान को पहले मुगल गार्डन के नाम से जाना जाता था, जो राष्ट्रपति भवन परिसर में 15 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। मूल रूप से इसमें ईस्ट लॉन, सेंट्रल लॉन, लॉन्ग गार्डन और सर्कुलर गार्डन शामिल थे।   क्या टाइमिंग, किस दिन बंद पिकनिक और सैर-सपाटे के शौकीन लोग हफ्ते में 6 दिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक अमृत उद्यान घूमने जा सकते हैं। विजिटर्स के लिए यहां लास्ट एंट्री 5.15 बजे तक ही होगी। उद्यान सोमवार को बंद रहेगा, जो रखरखाव का दिन है और 4 मार्च को होली के दिन भी यह बंद रहेगा। यहां कर सकेंगे बुकिंग राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सभी विजिटर्स के लिए गार्डन में एंट्री और इसकी बुकिंग पूरी तरह से फ्री है। बुकिंग राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक वेबसाइट https://visit.rashtrapatibhavan.gov.in/ पर की जा सकती है। वहीं, बिना प्री-बुकिंग के आने वाले वॉक-इन विजिटर्स के लिए एंट्री पॉइंट के पास सेल्फ-सर्विस विजिटर्स रजिस्ट्रेशन कियोस्क उपलब्ध होंगे। कौन सा होगा नजदीकी मेट्रो स्टेशन सभी विजिटर्स के लिए एंट्री और एग्जिट राष्ट्रपति एस्टेट के गेट नंबर 35 से होगा, जो नॉर्थ एवेन्यू और राष्ट्रपति भवन के पास है। विजिटर्स की सुविधा के लिए, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशन से गेट नंबर 35 तक हर 30 मिनट में सुबह 9.30 बजे से शाम 6.00 बजे तक शटल बस सेवा उपलब्ध होगी। शटल बसों को 'अमृत उद्यान के लिए शटल सेवा' बैनर से पहचाना जा सकता है। विजिटर्स के लिए कई तरह की सेवाएं उपलब्ध यहां विजिटर्स के लिए कई तरह की सर्विसेज उपबब्ध हैं, जिनमें यादगार चीजों की दुकानें, एक फूड कोर्ट, सुविधा के लिए व्हीलचेयर, पार्किंग और भी बहुत कुछ शामिल है, जिससे की यात्रा को और भी रोमांचक और यादगार बनाया जा सके। इस बार अमृत उद्यान में आने वाले लोग बैबलिंग ब्रूक देख सकेंगे, जिसमें एक घुमावदार धारा, मूर्तियों वाले फव्वारे, पत्थर के रास्ते और एक रिफ्लेक्टिंग पूल शामिल है। विजिटर यहां कई आकर्षणों में समय बिता सकते हैं, जैसे बच्चों के लिए खास तौर पर बनाया गया बाल वाटिका गार्डन जिसमें 225 साल पुराने शीशम के पेड़ की कहानी है, एक ट्रीहाउस, नेचर क्लासरूम वगैरह शामिल हैं। इसके साथ ही बोनसाई, सर्कुलर गार्डन हैं जिनमें तरह-तरह के पेड़-पौधे और जीव-जंतु हैं।  

पहली बार उप्र के दौरे पर आए हैं राष्ट्रीय भाजपा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री के साथ पहुंचे मंदिर

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बांके बिहारी के दर्शन कर मांगा 'विकसित भारत' का आशीर्वाद विधायक के घर पहुंच मुख्यमंत्री व भाजपा अध्यक्ष ने जताया शोक मथुरा,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने रविवार को बांके बिहारी की चौखट पर हाजिरी लगाई। दोनों नेताओं ने आराध्य के चरणों में शीश झुकाकर विधि-विधान से वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और नितिन नबीन ने ठाकुर जी के समक्ष दीपक प्रज्ज्वलित किया और पुष्प अर्पित किए। इस दौरान सीएम योगी ने ठाकुर जी से प्रदेश की सुख-समृद्धि और 'विकसित भारत' के संकल्प की सिद्धि के लिए प्रार्थना की। दर्शन के बाद मंदिर सेवायतों द्वारा उन्हें प्रसाद भेंट किया गया। भाजपा अध्यक्ष पद पर निर्वाचित होने के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश की धरा 'ब्रज भूमि' पर पहुंचे नितिन नबीन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संग आध्यात्मिक व राजनीतिक कार्यक्रम में शिरकत की। इस अवसर पर केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम भी साथ रहे। सीएम योगी के साथ कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, महापौर विनोद अग्रवाल, राज्यसभा सांसद तेजवीर सिंह, विधायक श्रीकांत शर्मा, मेघश्याम सिंह, राजेश चौधरी, पूरन प्रकाश, विधान परिषद सदस्य अशोक कटारिया, ओमप्रकाश सिंह, क्षेत्रीय अध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य, जिलाध्यक्ष निर्मल पांडेय आदि ने भी बांके बिहारी के दर्शन कर पूजा अर्चना की। इनसेट विधायक के घर पहुंच मुख्यमंत्री व भाजपा अध्यक्ष ने जताया शोक बांके बिहारी मंदिर में दर्शन के उपरांत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन मांट विधायक राजेश चौधरी के आवास पहुंचे। विधायक की मां का हाल में ही निधन हो गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने विधायक की मां के चित्र पर पुष्प अर्पित कर शोक व्यक्त किया और शोकाकुल परिवार को सांत्वना दी।

जब पाकिस्तान बना गणतंत्र दिवस परेड का मुख्य अतिथि: दो बार की अनोखी घटना

नई दिल्ली भारत के गणतंत्र दिवस परेड में पाकिस्तान के मुख्य अतिथि बनने की घटना इतिहास में 2 बार दर्ज है, जो दोनों देशों के बीच उस समय के कूटनीतिक प्रयासों को दर्शाती है। पहली बार जनवरी 1955 में पाकिस्तान के गवर्नर जनरल सर मलिक गुलाम मुहम्मद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। यह वह साल था जब परेड राजपथ (अब कर्तव्य पथ) पर आयोजित की गई थी। जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें आमंत्रित किया था, ताकि 1947 के विभाजन और कश्मीर युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच तनाव कम हो सके और सुलह की कोशिश की जा सके।   गुलाम मुहम्मद पूर्व भारतीय सिविल सेवा अधिकारी थे, जिन्हें ब्रिटिश सरकार ने 1946 में नाइट की उपाधि दी थी। पाकिस्तान में उन्होंने प्रधानमंत्री ख्वाजा नाजिमुद्दीन की सरकार बर्खास्त की और संविधान सभा को भंग कर दिया था, जिससे वहां संवैधानिक व्यवस्था कमजोर हुई। फिर भी भारत ने इस निमंत्रण को प्रतीकात्मक कदम माना। इसके 10 साल बाद, जनवरी 1965 में पाकिस्तान के खाद्य एवं कृषि मंत्री राणा अब्दुल हमीद मुख्य अतिथि बने। यह निमंत्रण लाल बहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्री काल में दिया गया था। राना अब्दुल हमीद सिंध के प्रभावशाली राणा परिवार से थे, जिनकी जड़ें हिंदू सोडा राजपूतों से जुड़ी थीं। उस समय दोनों देश सैन्य क्षमता का आकलन कर रहे थे और संबंध सुधारने की कोशिशें हो रही थीं। निमंत्रण के बावजूद कराई घुसपैठ, छिड़ी बहस भारत ने इसे विश्वास बहाली का माध्यम माना, लेकिन कुछ महीनों बाद अप्रैल 1965 में पाकिस्तान ने रण ऑफ कच्छ में ऑपरेशन डेजर्ट हॉक शुरू कर सीमा पर घुसपैठ की। ब्रिटेन की मध्यस्थता से जून में युद्धविराम हुआ, लेकिन अगस्त में ऑपरेशन जिब्राल्टर के तहत पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में घुसपैठिए भेजे, जिससे सितंबर 1965 में युद्ध छिड़ गया। ऐसे में इन निमंत्रणों पर भारत में बहस हुई। कांग्रेस नेता बी.जी. खेर ने इसे बातचीत का सॉफ्ट ब्रिज बताया, जबकि सी. राजगोपालाचारी जैसे लोगों ने सावधानी बरतने की सलाह दी। कुछ का मानना था कि इससे भारत की संप्रभुता पर असर पड़ सकता है। समाचार पत्रों ने इसे शिष्टाचार का कदम माना, लेकिन जनता में सीमा विवादों को लेकर चिंता थी। ये घटनाएं उस दौर की हैं जब दोनों देशों के बीच प्रतीकात्मक कदम संघर्ष रोकने की कोशिश थे।

इंटरनेट की इस दुनिया में प्रिंट और साहित्य का महत्व हमेशा रहेगा : राज्यपाल डेका

रायपुर साहित्य उत्सव के समापन समारोह में शामिल हुए राज्यपाल रायपुर, राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि  इंटरनेट से भरी इस दुनिया और न्यू जनरेशन वाले इस दौर में भी प्रिंट और साहित्य का महत्व हमेशा बना रहेगा। राज्यपाल डेका ने आज नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर में तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव ‘आदि से अनादि‘ के समापन समारोह के अवसर पर उक्त विचार व्यक्त किए। राज्यपाल ने कहा कि साहित्य और कविता में हमेशा एक संदेश होना चाहिए। जिस तरह संगीत के सात स्वर हमें जोड़े रखते है उसी तरह साहित्य का आदान-प्रदान नई बातों का सीखने का अवसर  प्रदान करता है।  समापन समारोह में मुख्य अतिथि की आसंदी से राज्यपाल ने कहा कि पिछले तीन दिनों में इस मंच पर बहुत अच्छी और सार्थक चर्चाएं हुईं। विचारों का खुलकर आदान-प्रदान हुआ। सबने मिलकर साहित्य, समाज और जीवन से जुड़े कई विषयों पर बात की। यह उत्सव सभी साहित्य प्रेमियों के लिए एक यादगार और सीखने वाला अनुभव रहा है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी हुआ। देश भर से आए नामी प्रकाशकों ने यहां किताबों का बहुत सुंदर संग्रह प्रस्तुत किया। पाठकों को नई-नई किताबें देखने और पढ़ने का अच्छा मौका मिला। यह देखकर अच्छा लगता है कि आज भी लोगों में किताबों के प्रति गहरी रुचि है। श्री डेका ने कहा साहित्य और संगीत का आदान प्रदान जरूरी है और ऐसे साहित्य का उत्सव हमेशा होना चाहिए। उन्होंने तीन दिवसीय सफल आयोजन के लिए सभी को बधाई देते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन राज्य के अन्य शहरों एवं गांवांे के स्तर तक भी किया जाना चाहिए और यह आयोजन सरकारी न होकर समुदाय की भागीदारी वाले होने चाहिए। श्री डेका ने कहा कि आज की पीढ़ी छत्तीसगढ़ के रामायण कालीन संस्कृति एवं साहित्य को भूल गयी है। हमारा राज्य बहुत सुंदर है और यहां की संस्कृति भी बहुत समृद्ध है। इसका प्रचार प्रसार होना चाहिए ताकि राज्य के बाहर के लोग यहां के बारे में जान सकें। डेका ने कहा कि शब्दों में बहुत शक्ति होती है। शब्द का रूप ब्रह्म है। उन्हांेने बंकिमचंद्र चटर्जी के वंदे मातरम गीत का उल्लेख किया और कहा कि सारे देश को इन दो शब्दों ने जागृत कर दिया था। उन्होंने कहा कि साहित्य हमें जोड़ता है, हमें सोचने की नई दिशा देता है और हमें बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है।  हम सभी साहित्य को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं, संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाएं और विचारों की यह रोशनी लगातार जलाए रखें। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में कम से कम एक ऐसा कार्य अवश्य करें, जो बिना किसी लेन-देन या व्यक्तिगत स्वार्थ के हो। ऐसे कार्य देश और समाज के समग्र विकास को मजबूती प्रदान करते हैं। समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में साहित्य की अविरल धारा बहती रही है। कालीदास, रविन्द्रनाथ टैगोर जैसे कवि एवं साहित्यकारों का इतिहास भी छत्तीसगढ़ से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी इस तरह के आयोजन अनवरत किए जाते रहेंगे।   समापन समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात रंगकर्मी, नाट्य लेखक डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने की। इस अवसर पर फिल्म अभिनेता एवं निर्देशक डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी, फिल्म निर्माता-निर्देशक अनुराग बसु विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार आर कृष्णा दास, मीडिया सलाहकार पंकज झा , राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, राज्यपाल के विधिक सलाहकार भीष्म प्रसाद पाण्डेय, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।  

डिजिटल माध्यम से योगी सरकार की रोजगारपरक योजनाओं को आम जन तक पहुंचा रहा यूपीकॉन

यूपीकॉन का डिजिटल अवेयरनेस कैंपेन बना योगी सरकार की रोजगारपरक योजनाओं के प्रचार का सशक्त माध्यम सोशल मीडिया आधारित जागरूकता अभियान से विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, ओडीओपी और सीएम युवा योजना को मिल रही व्यापक पहचान पहल के माध्यम से अब तक 15 जनपदों में 11 लाख से अधिक लोगों तक बनाई पहुंच, शेष जनपदों में भी चलेगा अभियान डिजिटल अवेयरनेस के जरिए युवाओं, कारीगरों और उद्यमियों को जोड़ा जा रहा प्रदेश सरकार की योजनाओं से लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित रोजगारपरक एवं जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से यूपी इंडस्ट्रियल कंसल्टेंट्स लिमिटेड (यूपीकॉन) द्वारा एक अभिनव डिजिटल अवेयरनेस कैंपेन शुरू किया गया है। इस जागरूकता अभियान के माध्यम से विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, एक जनपद-एक उत्पाद (ओडीओपी) प्रशिक्षण कार्यक्रम सहित मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम युवा) योजना और ओडीओपी मार्जिन मनी योजना जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि यूपीकॉन उत्तर प्रदेश में उद्यमिता और स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली एक सरकारी संस्था है, जो युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए मंच और सहायता प्रदान करती है। सीधे लाभार्थियों से हो रहा जुड़ाव यूपीकॉन के एमडी प्रवीण सिंह ने बताया कि डिजिटल युग में सूचना के तेजी से प्रसार को ध्यान में रखते हुए हमने इस डिजिटल अवेयरनेस कैंपेन को सोशल मीडिया आधारित बनाया है, ताकि सरकार की योजनाओं की जानकारी सीधे युवाओं, कारीगरों और संभावित उद्यमियों तक पहुंच सके। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य न केवल योजनाओं का प्रचार करना है, बल्कि पात्र लाभार्थियों को उनके अधिकारों, अवसरों और प्रशिक्षण की प्रक्रिया के प्रति जागरूक करना भी है। सोशल मीडिया बना जागरूकता का प्रभावी मंच यूपीकॉन द्वारा संचालित इस डिजिटल अवेयरनेस कैंपेन के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जनपदों में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के साथ सहयोग किया जा रहा है। अब तक 15 जनपदों में इन्फ्लुएंसर्स के माध्यम से जागरूकता अभियान सफलतापूर्वक चलाया जा चुका है। इनके द्वारा विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना एवं ओडीओपी प्रशिक्षण कार्यक्रमों के वीडियोज, जिनमें प्रशिक्षण की प्रक्रिया, लाभार्थियों के अनुभव और योजनाओं के व्यावहारिक लाभों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है, को इंस्टाग्राम रील्स के रूप में साझा करने के साथ-साथ फेसबुक और यूट्यूब जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी प्रसारित किया गया, जिससे अभियान की पहुंच और प्रभावशीलता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 11 लाख से अधिक लोगों तक सीधी पहुंच यूपीकॉन के इस डिजिटल अवेयरनेस कैंपेन के तहत अब तक इंस्टाग्राम पोस्ट्स और अन्य सोशल मीडिया माध्यमों से 11 लाख से अधिक फॉलोअर्स तक पहुंच बनाई जा चुकी है। अभियान के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार के अवसरों, कारीगरों को आधुनिक प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता की जानकारी तथा उद्यमियों को सरकारी सहयोग और सब्सिडी से अवगत कराया जा रहा है। इससे न केवल योजनाओं की जानकारी बढ़ी है, बल्कि आवेदन और सहभागिता में भी सकारात्मक वृद्धि देखने को मिल रही है। योगी सरकार की सोच को मिल रहा डिजिटल विस्तार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विजन है कि प्रदेश का हर युवा आत्मनिर्भर बने और पारंपरिक कारीगरी व स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिले। यूपीकॉन का यह डिजिटल अवेयरनेस कैंपेन सरकार की इसी सोच को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके जरिए सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित हो रहा है, जिससे योजनाओं को लेकर फैली भ्रांतियां दूर हो रही हैं और अधिक से अधिक पात्र लाभार्थी आगे आकर इनका लाभ उठा रहे हैं। शेष जनपदों में भी अवेयरनेस कैंपेन जारी यूपीकॉन को आवंटित शेष जनपदों में भी डिजिटल अवेयरनेस कैंपेन को आगे बढ़ाया जा रहा है। यह कार्य लगातार प्रगति पर है और इसे शीघ्र पूर्ण करने के लिए यूपीकॉन द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। यह कैंपेन योगी सरकार की रोजगारपरक योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए जागरूकता बढ़ाकर यह पहल उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर, कौशलयुक्त और रोजगारसमृद्ध बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा रही है।