samacharsecretary.com

बिना साइड इफेक्ट: आयुर्वेदिक उपाय जो बढ़ाएं आपकी खूबसूरती

सौंदर्य उत्पादनों से संबंधित विज्ञापनों को देख कर हम अपनी त्वचा पर उनका प्रयोग करने लगते हैं लेकिन जब मनचाहा नतीजा नहीं मिलता तो मन मसोस कर रह जाते हैं। इसकी वजह है बिना त्वचा का प्रकार और समस्या जाने हम कोई भी सौंदर्य-उत्पाद इस्तेमाल कर लेते हैं। कहा जाता है कि आयुर्वैदिक उत्पाद अधिक लाभ देते हैं लेकिन इनका उपयोग करना ही काफी नहीं है बल्कि अपनी त्वचा से संबंधित समस्याओं की जानकारी होना भी जरूरी है। त्वचा का खुश्क होना व असमय झुर्रियां:- कारण: धूप, प्रदूषण, मसालेदार भोजन, चाय-कॉफी अधिक पीना, ठंडी हवाएं और तले पदार्थ खाने के साथ पानी का कम सेवन करना। टिप्स: -कद्दूकस किए आलू में दही मिलाकर इस लेप को 20 मिनट तक चेहरे पर लगाएं। बाद में गुनगुने पानी से धो दें। -मक्की का आटा, शहद और दही मिलाकर लगाएं। 15 मिनट बाद चेहरा धोकर एस्ट्रींजेंट लगा लें। -अंडे की सफेदी में कुछ बूंदें नींबू के रस की फैंट कर चेहरे व गर्दन पर लगाएं। -बेसन, हल्दी व जैतून का तेल मिला कर लेप बनाएं व थोड़ी देर के लिए लगाएं। -संतरे व नींबू का रस लेकर दही में मिलाकर तैयार किए लेप को लगाने से भी लाभ मिलता है। -सोने से पहले चेहरे पर बादाम के तेल की मालिश अवश्य करें। -एलोवेरा जैल 10-15 मिनट के लिए चेहरे पर लगाएं, बाद में धो दें। डार्क सर्कल्स:- कारण: रात को नींद पूरी न लेना, खाने में पौष्टिक तत्वों की कमी। टिप्स: -खाने में हरी सब्जियां व फल लें तथा पानी खूब पिएं। -मलाई में पीसे बादाम का पेस्ट मिलाकर इसे आंखों के नीचे काले घेरों पर लगाएं। 10 मिनट बाद धो लें। -खीरे को कद्दूकस करके उसका रस निकालें व रूई के फाहों को इस रस में भिगोकर आंखों पर रखें। -ठंडे गुलाब जल में भीगी रूई आंखों पर रखने से भी आराम मिलता है। -बाहर निकलते समय अच्छी क्वालिटी वाले सनग्लासेज अवश्य लगाएं। मुंहासे:- कारण: अधिक तला खाना, मोटापा, तनाव, गर्मी, जंक-फूड, मिर्च मसाले वाला भोजन और गुस्सा। टिप्स: -दिन में एक बार चेहरे पर दही लगाएं और सूखने पर धो दें। -टमाटर और नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर गोलाई में मसाज करें। हर दूसरे दिन यह क्रिया करें। -सेब के गूदे को आधा घंटा मुंहासों वाले स्थान पर लगाएं, फिर चेहरा धो लें। -चंदन पाऊडर और गुलाब जल मिला कर उभरे पिंपल पर लगाया जाए तो वह जल्दी दब जाएगा। -पपीता, टमाटर और नींबू के रस से बना पैक भी मुहांसों के लिए फायदेमंद होता है। -कोई भी फल (अंगूर, स्ट्रॉबेरी, अनार या संतरा) कुचल कर लगाने से मुंहासे ठीक होते हैं। बालों में रूसी:- कारण: सिर की त्वचा का रूखा होना, बालों में तेल न लगाना, गलत शैंपू का चुनाव और खाने-पीने में लापरवाही। टिप्स: -लस्सी से सिर धोएं या बालों में दही की मसाज करें और बाद में सिर शैंपू से धो लें। -शिकाकाई, रीठा व आंवला को रात भर भिगो कर रखें, पानी को सुबह छान कर उससे अच्छी तरह मलते हुए  बाल धोएं। -एक अंडा व दही फैंट कर बालों में आधे घंटे के लिए लगाएं व बाद में धो लें। -नारियल या बादाम के तेल से बालों में हफ्ते में तीन बार मालिश अवश्य करें। -नारियल तेल या सरसों तेल में नींबू का रस मिलाकर मसाज करें व बाद में किसी आयुर्वैदिक शैंपू या रीठा-आंवला-शिकाकाई मिश्रण के पानी से बाल धो लें। बाल सफेद होने पर:- कारण: गुस्सा, चिंता, तनाव या कोई स्वास्थ्य समस्या अथवा दवाइयों का दुष्प्रभाव। टिप्स: -मेहंदी को कॉफी के साथ पानी में मिलाकर 5-6 महीनों तक बालों में लगाएं। -लोहे के बर्तन में मेहंदी, शिकाकाई, रीठा व आंवला के साथ दही मिलाकर रात भर भिगोएं। सुबह इस लेप को बालों में लगाएं व एक घंटे बाद बाल धो लें। -करीपत्ते व नारियल तेल बराबर मात्रा में लेकर गर्म करें। जब पत्ते काले हो जाएं तो तेल छान लें व इससे बालों में मसाज करें। -भोजन में आयरन की मात्रा बढ़ा दें। बालों का झड़ना:- कारण: हेयर-ड्रायर या हेयर उत्पादों (डाई, हेयर-कलर, हेयर-जैल) का अधिक प्रयोग, रासायनिक शैंपू का इस्तेमाल, दवाइयों के दुष्प्रभाव, सर्जरी या फिर किसी बीमारी के कारण। टिप्स: -गुनगुने तेल (नारियल, बादाम या जैतून) से बालों में अच्छी तरह मालिश करें व बाद में गर्म पानी में भिगोए टावल को सिर पर लपेट लें। इससे बालों की जड़ें मजबूत होंगी। -कोकोनट मिल्क को आधे घंटे के लिए बालों की जड़ों में लगाकर बाल धो दें। -आंवले के चूर्ण को नींबू के रस में मिलाकर बालों में मसाज करें व बाद में बाल धो दें। -बादाम का तेल सबसे अच्छा हेयरटॉनिक है। इससे बालों को मजबूती मिलती है। दोमुंहे बालों के लिए कारण: तेल न लगाना व बालों का खुश्क रहना। टिप्स: -बालों के सिरों की नियमित ट्रिमिंग करती रहें। -बालों के साथ-साथ इनके सिरों पर भी तेल से अच्छी तरह मसाज करें। -करीपत्ते का पेस्ट बालों के सिरों पर अप्लाई करें। -दही का लेप सिरों पर लगाने से सूखापन खत्म होता है व दोमुंहे बालों की समस्या दूर होती है।  

बोकारो स्टील का सबसे मजबूत सुरक्षा सूट: 260°C तक की गर्मी को झेलने की क्षमता, कीमत क्या?

बोकारो अक्सर इंडस्ट्री में काम करने के दौरान कर्मचारियों को कई तरह के सुरक्षा उपकरणों के साथ ड्यूटी करनी पड़ती है. खासतौर पर स्टील इंडस्ट्री, फायर डिपार्टमेंट और बिजली विभाग में कार्यरत कर्मचारियों को आग, चिंगारी और अत्यधिक गर्मी का खतरा हेमशा बना रहता है और इन जोखिम भरे माहौल में फ्लेम रिटार्डेंट सूट कर्मचारियों के लिए विशेष सुरक्षा कवच का काम करता है और उन्हें दुर्घटना से बचाता है. ऐसे में बोकारो इस्पात संयंत्र के सुरक्षा विभाग में कार्यरत सतीश कुमार ने बताया कि बोकारो स्टील प्लांट में कार्यरत कर्मचारियों को आग से बचाने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए फ्लेम रिटार्डेंट सूट उपलब्ध कराए जाते हैं. यह सूट सामान्य कपड़ों की तरह तुरंत आग नहीं पकड़ता है. बल्कि आग के प्रभाव को सीमित कर देता है, जिससे कर्मचारी को सुरक्षित स्थान तक पहुंचने या रेस्क्यू का कीमती समय मिल जाता है और और बहुत अधिक डैमेज से लोगों का शरीर बच जाता है. 260°C की गर्मी ये सूट कर लेगा सहन इसके अलावा यह सूट खासतौर पर चिंगारी, फ्लैश फायर और अत्यधिक तापमान के खतरे को भी कम करता है. आग के संपर्क में आने से यह जल्दी पिघलता नहीं है और यह इससे जलने की गंभीरता काफी हद तक कम हो जाती है. वहीं, यह सूट विशेष फाइबर और केमिकल से तैयार होता है, जिससे सूट लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान करता है. यह गर्मी 150°C से 260°C सीमित समय तक  सुरक्षित रखने में सक्षम है और यह सूट बचाव के लिए बनाया गया है. जानें सूट की कीमत वहीं, फ्लेम रिटार्डेंट सूट की कीमत क्वालिटी के अनुसार ₹3000 रुपये से लेकर 1 लाख रूपये तक होती है. वहीं, इसकी गुणवत्ता को ध्यान रखते हुए हमेशा ISO Certified और फ्लेम रिटार्डेंट सूट का ही उपयोग किया जाता है. यह सर्टिफिकेशन सूट की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और आग से बचाव की क्षमता को प्रमाणित करता है.

बजट 2026 में स्वास्थ्य क्षेत्र को बड़ा फायदा? छोटे शहरों में बेहतर सेवाओं की संभावना

नई दिल्ली:  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार एक फरवरी को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करने वाली हैं. इस बार स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के विशेषज्ञों को उम्मीद है कि सरकार दूरदराज के इलाकों और गांवों में बेहतर इलाज की सुविधाओं पर खास ध्यान देगी. विशेषज्ञों का मानना है कि बजट में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और नई तकनीक को बढ़ावा देने वाले फैसलों से आम आदमी के लिए अच्छा इलाज पाना और भी आसान हो जाएगा. नोएडा स्थित प्रकाश अस्पताल के कार्यकारी निदेशक आयुष चौहान ने शुक्रवार को से कहा, "अस्पतालों की कमी, डॉक्टरों और स्टाफ की किल्लत और बीमारियों की सही जांच न हो पाने की वजह से आज भी बहुत से लोगों को अच्छा इलाज नहीं मिल पाता. अगर हम अपने जिला अस्पतालों और गांव-कस्बों के छोटे स्वास्थ्य केंद्रों को बेहतर बनाएं, मोबाइल वैन और फोन पर डॉक्टरी सलाह (टेलीमेडिसिन) की सुविधा बढ़ाएं, तो बड़े शहरों के बड़े अस्पतालों में लगने वाली भीड़ कम होगी और आम लोगों को आसानी से इलाज मिल सकेगा." स्वास्थ्य सेवा केवल सामाजिक कर्तव्य नहीं भारत की स्वास्थ्य प्राथमिकताओं में क्षमता निर्माण से लेकर दीर्घकालिक प्रणाली मजबूती की ओर बदलाव की उम्मीद करते हुए, चौहान ने कहा, "इस समय, जोर धीरे-धीरे होने वाले खर्च के बजाय परिणामों पर आधारित निवेश पर होना चाहिए, जो सेवा वितरण में सुधार कर सके, बुनियादी ढांचे को मजबूत कर सके और बड़े या छोटे स्तर पर तकनीक को जोड़ सके. आज के दौर में, स्वास्थ्य सेवा केवल एक सामाजिक कर्तव्य नहीं है, बल्कि एक रणनीतिक आर्थिक आवश्यकता भी है जो रोजगार, उत्पादकता और राष्ट्रीय विकास से बहुत गहराई से जुड़ी हुई है." उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त बजट आवंटित किया जाना चाहिए. क्योंकि स्वास्थ्य क्षेत्र को दी जाने वाली कुल राशि को बढ़ाना भी महत्वपूर्ण है. खासकर इसलिए क्योंकि भारत अभी भी अन्य देशों की तुलना में अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का बहुत छोटा हिस्सा स्वास्थ्य सेवा पर खर्च करता है. स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी 'राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा' (NHA) के अनुमान के अनुसार, हाल के वर्षों में भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च इसके जीडीपी के लगभग 1.8 से 2.0 प्रतिशत के आसपास ही बना हुआ है. चौहान ने कहा- "सरकारी अस्पतालों को आधुनिक बनाया जाना चाहिए, बीमा (इंश्योरेंस) के दायरे को बढ़ाया जाना चाहिए. टियर II और टियर III शहरों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और घरेलू स्तर पर चिकित्सा उपकरणों के निर्माण को भी समर्थन दिया जाना चाहिए." उन्होंने कहा कि इलाज की बढ़ती लागत, गुणवत्ता के अलग-अलग मानक, योग्य कर्मियों की कमी और बिखरा हुआ बुनियादी ढांचा जैसी कई चुनौतियां, मुख्य समस्याएं हैं. उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए नीतिगत स्थिरता, नियामक स्पष्टता, कौशल विकास और सार्वजनिक-निजी सहयोग में वृद्धि आवश्यक होगी. एक भविष्योन्मुखी बजट देश की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को अधिक सुलभ, निष्पक्ष और भविष्य के लिए तैयार बनाने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है. 2025-26 के स्वास्थ्य बजट में वृद्धि साल 2025-26 के लिए, स्वास्थ्य मंत्रालय को 99,859 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. यह 2024-25 के संशोधित अनुमानों से 11 प्रतिशत अधिक है. 2025-26 में, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग को मंत्रालय के कुल बजट का 96 प्रतिशत हिस्सा दिया गया है. विभाग का यह आवंटन 2024-25 के अनुमानित खर्च से 11 प्रतिशत ज्यादा है. स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग को 3,901 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो 2024-25 के इसके अनुमानित खर्च से 15 प्रतिशत अधिक है. एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (AiMed) के निदेशक राजीव नाथ के अनुसार, चिकित्सा उपकरण (मेडिकल डिवाइस) क्षेत्र आगामी केंद्रीय बजट को नीतिगत इरादों को ज़मीनी प्रभाव में बदलने के एक निर्णायक अवसर के रूप में देखता है. नाथ ने कहा, "जबकि 2025 में चिकित्सा उपकरण नीति 2023 के इर्द-गिर्द रचनात्मक जुड़ाव देखा गया, अब ध्यान निरंतर निष्पादन पर होना चाहिए. मुख्य अपेक्षाओं में अंशांकित टैरिफ सुधार और लंबे समय से चली आ रही आयात विषमताओं को दूर करने तथा घरेलू विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) का समर्थन करने के लिए मौजूदा 7.5 प्रतिशत से सीमा शुल्क को बढ़ाकर 10-15 प्रतिशत करना शामिल है." नाथ के अनुसार, बजट को गुणवत्ता और मूल्य-आधारित सार्वजनिक खरीद को भी मजबूत करना चाहिए, जिसमें 'आईसीएमईडी' (ICMED) प्रमाणित उपकरणों को प्राथमिकता दी जाए और घरेलू मूल्यवर्धन (डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन) को बढ़ावा दिया जाए. उन्होंने कहा, "ऐसे उपाय जो नियामक पूर्वानुमान (रेगुलेटरी प्रेडिक्टेबिलिटी) को मजबूत करें, एमएसएमई (MSME) की भागीदारी को प्रोत्साहित करें और नवाचार (इनोवेशन) का समर्थन करें, एक लचीला मेडटेक (MedTech) इकोसिस्टम बनाने के लिए महत्वपूर्ण होंगे. यह एक ऐसा तंत्र होगा जो सामर्थ्य, विश्वास और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता प्रदान करेगा." स्वास्थ्य सेवा के लिए चिकित्सा उपकरण अनिवार्य नाथ ने कहा कि चिकित्सा उपकरण स्वास्थ्य सेवा वितरण के लिए अनिवार्य हैं, विशेष रूप से प्राथमिक और माध्यमिक देखभाल स्तरों पर, जहां जांच (डायग्नोस्टिक्स), निगरानी और आवश्यक उपकरण परिणामों में काफी सुधार कर सकते हैं. उन्होंने कहा-"पहुंच बढ़ाने के लिए न केवल बुनियादी ढांचे में निवेश की आवश्यकता है, बल्कि ऐसे नीतिगत ढांचे की भी जरूरत है जो सभी भौगोलिक क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण उपकरणों की किफायती उपलब्धता सुनिश्चित करें." उन्होंने कहा कि सार्वजनिक खरीद के माध्यम से घरेलू स्तर पर निर्मित और आईसीएमईडी (ICMED) प्रमाणित, किफायती चिकित्सा उपकरणों को बढ़ावा देने से आयात पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ क्षेत्रीय अंतर को पाटने में मदद मिल सकती है. नाथ ने कहा, "इसके अतिरिक्त, पारदर्शी लेबलिंग नियम जो घरेलू सामग्री का खुलासा करते हैं और स्थानीय मूल्यवर्धन (लोकल वैल्यू एडिशन) को प्रोत्साहित करते हैं, वे भरोसे और स्वीकार्यता को बढ़ा सकते हैं. देश भर में स्वास्थ्य सेवा को सुलभ, निष्पक्ष और टिकाऊ बनाने के लिए एक मजबूत घरेलू मेडटेक (MedTech) आधार होना अनिवार्य है." कई चुनौतियों का सामना कर रहा स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र के बजट आवंटन में अगले 5 वर्षों तक हर साल कम से कम 30 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वृद्धि (compounded increase) करना आवश्यक और सामयिक दोनों है. नाथ ने कहा, "जैसे-जैसे स्वास्थ्य सेवा की मांग बढ़ रही है और प्रणाली विकसित हो रही है, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, तकनीक को अपनाने और सेवा वितरण में सुधार के लिए निरंतर सार्वजनिक निवेश आवश्यक है. बजट का बढ़ा हुआ आवंटन रणनीतिक रूप से स्वास्थ्य सुविधाओं … Read more

कामयाबी की राह: भगवद् गीता के 5 श्लोक जो हर किसी को याद रखने चाहिए

कुछ लोगों के लिए सक्सेज पाना सपने के जैसा होता है। क्योंकि वो लाइफ में ज्यादातर कामों में फेलियर का सामना करते हैं और निराश रहते हैं। ऐसे निराश और हताश लोगों को अपनी आदतों में सुधार के साथ ही भगवद्गीता के इन श्लोकों को पढ़ने की जरूरत है। क्योंकि यहीं वो श्लोक हैं जो लाइफ में सक्सेज पाने और उसे बरकरार रखने में मदद करते हैं। कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन कर्म करो फल की चिंता ना करो। ये श्लोक उन लोगों के लिए बेहद जरूरी है जो हर वक्त रिजल्ट की चिंता करते हैं। जिसकी वजह से ठीक तरीके से परफार्मेंस पर फोकस नहीं कर पाते। भगवान श्री कृष्ण ने कहा था कि हमेशा अपनी परफार्मेंस को अच्छा करने की चिंता करनी चाहिए। फल की चिंता में परफार्मेंस को बिल्कुल नहीं खराब होने देना चाहिए। बदलाव प्रकृति का नियम है गीता में कहा गया है कि इस दुनिया में कुछ भी परमानेंट नही है। जो आज है वो कल नहीं होगा। आप हमेशा सफल बने रहो ऐसा जरूरी नहीं। कई बार सफल होने के बाद आपको फेलियर का भी सामना करना पड़ सकता है। इसलिए मन में किसी तरह के तनाव को लेना नहीं चाहिए बल्कि अपने काम पर फोकस करना चाहिए। डर का त्याग जरूरी है गीता में कहा गया है कि हमेशा निडर होकर अपने काम को करना चाहिए। किसी सपने को पूरा करने के लिए आगे बढ़कर कोशिश करनी चाहिए। फेलियर के डर से पीछे नहीं हटना चाहिए। किसी काम को शुरू करने के लिए पहली जरूर हिम्मत की भी होती है। फिर चाहे वो करियर में हो या फिर लाइफ में। फेल होने, नयी चीजों को सीखने और फिर आगे बढ़ने के लिए साहस जरूरी है। जिस दिन फेलियर का डर छोड़कर आगे बढ़ेंगे उसी दिन सक्सेज मिलेगी। सक्सेज केवल पर्सनल नहीं होती कई बार खुद के बारे में सोचने से ऊपर उठकर सोसायटी और फैमिली के बारे में सोचने की जरूरत होती है। जब आप दूसरों के लिए कुछ करते हैं तो मन में गर्व के साथ संतुष्टि की फीलिंग आती है और ये भी एक सक्सेज ही है। जो आपको पावरफुल बनाती है। मन को जीतने वाले के लिए मन ही मित्र है जिस इंसान में मन को कंट्रोल नहीं किया उसके लिए मन किसी दुश्मन की तरह है। वहीं जो मन को अपने वश में कर लेता है, मन उसका फ्रेंड बन जाता है। जिसकी मदद से वो हर सफलता पा सकता है। खुद पर शंका करना, डरना और आलस जैसी बाधाओं को दूर भगा लेता है वहीं सक्सेज पाता है।  

रेलवे का मास्टरस्ट्रोक! एक ऐप में समाएंगी यात्रा से जुड़ी सभी सुविधाएं

भोपाल रेल यात्रियों की दैनिक जरूरतों को देखते हुए भारतीय रेलवे ने एकीकृत मोबाइल एप के माध्यम से यात्रा से जुड़ी अनेक सुविधाएं एक ही डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्ध करा दी हैं। इस पहल का उद्देश्य यात्रियों को टिकट बुकिंग से लेकर यात्रा के दौरान जरूरी जानकारियों तक, हर सुविधा एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है, जिससे उन्हें अलग-अलग एप्स और रेलवे काउंटरों के चक्कर न लगाने पड़ें। इस एकीकृत एप के जरिए यात्री आरक्षित टिकट, अनारक्षित टिकट और प्लेटफार्म टिकट की बुकिंग कर सकते हैं। लाइव स्टेटस से लेकर भोजन बुकिंग तक की सुविधा इसके अलावा पीएनआर स्टेटस, लाइव ट्रेन रनिंग स्टेटस, ट्रेन सर्च, कोच और सीट लोकेशन की जानकारी भी आसानी से प्राप्त की जा सकती है। यात्रा के दौरान ट्रेन में भोजन बुकिंग की सुविधा भी इसी प्लेटफार्म पर उपलब्ध है, जिससे यात्रियों को सुविधाजनक और समयबद्ध सेवाएं मिल रही हैं। एक ही एप पर इतनी सुविधाएं मिलने से यात्रा से पहले और यात्रा के दौरान जानकारी जुटाना सरल हो गया है।   डिजिटल पेमेंट पर मिलेगी 3% की छूट तो वहीं डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रेलवे द्वारा अनारक्षित टिकटों की बुकिंग पर तीन प्रतिशत की छूट दी जा रही है। यह छूट 14 जनवरी से 14 जुलाई तक प्रभावी रहेगी और यूपीआई, मोबाइल वालेट, नेट बैंकिंग, डेबिट और क्रेडिट कार्ड सहित सभी स्वीकृत डिजिटल भुगतान माध्यमों पर लागू होगी। इससे रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है।

ना फूल–ना बेलपत्र, यहां बैगन से होती है पूजा—बिहार के अनूठे शिवधाम की खास परंपरा

वैशाली वैशाली जिले के जंदाहा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत वसंतपुर धधुआ स्थित बाबा बटेश्वरनाथ धाम देश का एकमात्र ऐसा मंदिर माना जाता है, जहां वटवृक्ष के कंदरा से प्रकट काले रंग का शिवलिंग विराजमान है। यह प्राचीन और आस्था का केंद्र मंदिर दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के लिए जाना जाता है, जहां बड़ी संख्या में भक्त पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। बैगन चढ़ाने की अनोखी परंपरा बाबा बटेश्वरनाथ धाम के गर्भगृह में स्थापित भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर श्रद्धालु प्रसाद के रूप में बैगन (सब्जी) अर्पित करते हैं। क्षेत्र के किसान अपने खेतों में सब्जी की खेती करने के बाद पहली उपज के रूप में बैगन भगवान भोलेनाथ को चढ़ाते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें यहां अवश्य पूरी होती हैं और मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु बैगन चढ़ाने जरूर आते हैं। मंदिर के उपाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने बताया कि यह एक अत्यंत प्राचीन मंदिर है, जिसकी स्थापना का कोई लिखित इतिहास उपलब्ध नहीं है। मान्यता है कि शिवलिंग स्वयं वटवृक्ष के कंदरा से प्रकट हुआ है। मंदिर परिसर में भगवान नंदी महाराज की प्रतिमा भी स्थापित है और यहां शिवलिंग के साथ-साथ नंदी महाराज की भी विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। राजा जनक से जुड़ी ऐतिहासिक मान्यता अनिल कुमार सिंह ने बताया कि एक मान्यता के अनुसार, राजा जनक जब जनकपुर से चंपा घाट स्नान के लिए आते थे, तो उनका हाथी, जिस पर पुष्पक विमान सजा होता था, बाबा बटेश्वरनाथ धाम में रुकता था। राजा जनक यहां भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करने के बाद ही जनकपुर की ओर प्रस्थान करते थे। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र कृषि प्रधान है। जब किसानों की सब्जी की फसल तैयार होती है, तो वे सब्जियों में से बैगन को प्रसाद और चढ़ावे के रूप में बाबा बटेश्वरनाथ को अर्पित करते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए बिहार के वैशाली, छपरा, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, पटना समेत कई जिलों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके अलावा असम के सिलचर, साथ ही नेपाल और रूस जैसे देशों से भी भक्त यहां आकर आशीर्वाद प्राप्त कर चुके हैं। अनिल कुमार सिंह ने बताया कि रूस से आए एक शिवभक्त ने रूस की मुद्रा चढ़ावे के रूप में अर्पित की थी, जिसे मंदिर संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है। मंदिर प्रशासन का दावा है कि पूरे विश्व में इस आकार और स्वरूप का काले रंग का शिवलिंग कहीं और नहीं है, जो वटवृक्ष के कंदरा से प्राकृतिक रूप से प्रकट हुआ हो। यही कारण है कि बाबा बटेश्वरनाथ धाम की पहचान देश-विदेश तक फैली हुई है। महाशिवरात्रि और बसंत पंचमी पर भव्य मेला उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि और बसंत पंचमी के अवसर पर मंदिर परिसर में भव्य मेला लगता है। महाशिवरात्रि पर एक माह तक मेला आयोजित होता है, जिसमें सैकड़ों क्विंटल बैगन भगवान को चढ़ाया जाता है। वहीं, बसंत पंचमी पर एक दिन का मेला लगता है, जिसमें भी बैगन चढ़ाया जाता है, हालांकि मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है। मेले में तेजपत्ता और लकड़ी से बने सामानों की खूब बिक्री होती है। इसके अलावा सावन माह में भी पूजा-अर्चना और जलाभिषेक को लेकर शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। पूरा मंदिर परिसर और आसपास का वातावरण भक्ति और श्रद्धा से सराबोर नजर आता है।

मुठ्ठी भर चावल से दूर होगी पैसों से जुड़ी दिक्कत

कई बार ऐसा होता है ना कि अच्छी-खासी कमाई होने के बावजूद भी पैसा हाथ में टिक नहीं पाता है। इसके पीछे कई तरह की वजहें जैसे फालतू के खर्चे, गलत आर्थिक फैसले या घर की नकारात्मक ऊर्जा। अगर आपके साथ भी ऐसा ही हो रहा है तो फेंगशुई का एक बहुत ही आसान सा उपाय इस समस्या को दूर करने में आपकी मदद कर सकता है। फेंगशुई के अनुसार घर में रखी हुई छोटी से छोटी हर एक चीज हमें प्रभावित करती है। सही जगह पर रखी गई चीजें पॉजिटिविटी लेकर आती हैं। तो वहीं चीजों का गलत प्लेसमेंट धन हानि और पैसों की तमाम दिक्कत लेकर आती है। अगर आप बार-बार पैसों की तंगी या धन हानि जैसी समस्या से जूझते आ रहे हैं तो अब फेंगशुई की मदद से जिंदगी में पॉजिटिव बदलाव ला सकता है। फेंगशुई का आसान उपाय फेंगशुई के इस उपाय से आप आसानी से पैसे की बर्बादी या फिर फालतू के खर्चे पर लगाम लगा सकते है। नियम के अनुसार मुठ्ठी भर चावल को एक लाल रंग के कपड़े में बांध लें। इस बात का ध्यान रखें की ये कपड़ा साफ हो और नया हो। चावल को बांधने के बाद इसे अपने घर के मेनगेट के आगे कहीं पर टांग दें। फेंगशुई के नियम के हिसाब से इसे आप बाईं ओर ही टांगें। मान्यता है कि इस दिशा में धन को रोकने या बांधने की शक्ति होती है। घर का ये हिस्सा धन स्थान का रिप्रेजेंट करता है। चावल की मदद से घर में मौजूद किसी भी तरह की नेगेटिविटी दूर हो जाएगी। साथ ही ये धन संबंधी हर तरह की दिक्कत को जिंदगी से निकाल फेंकेगा। चावल वाली पोटली को एक हफ्ते तक वहां रहने दें। इसके बाद इसे घर के बाहर किसी पेड़ के पास रख दें। मेनगेट पर लगा सकते हैं ये चीजें इसके अलावा आप मेनगेट पर कुछ और चीजें लगातार अपने घर की नेगेटिविटी को दूर कर सकते हैं। विंड चाइम की मदद से भी आप घर में मौजूद बुरी नजर और नेगेटिविटी को आसानी से बाहर कर सकते हैं। साथ ही यहां पर मनी प्लांट या बैंबू प्लांट लगाना भी सही होता है। इसके अलावा आप मेनगेट के ऊपर एक छोटा सा शीशा रख सकते हैं। इससे घर के बाहर मौजूद नेगेटिविटी कभी भी अंदर नहीं आ पाएगी। डिस्क्लेमर- इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं।

चार लेन का मेगा पुल बनेगा गेमचेंजर, एमपी के दो नेशनल हाईवे होंगे सीधे कनेक्ट

बेतुल एमपी के दो नेशनल हाईवे जल्द ही सीधे कनेक्ट हो जाएंगे। बैतूल-खेड़ी मार्ग पर 18 मीटर चौड़ा नया पुल बनाया जा रहा है जिससे दो राज्य भी जुड़ेंगे। मुख्य रूप से बैतूल शहर के लिए यह चार लेन पुल बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। करबला घाट पर माचना नदी पर बननेवाले इस नए पुल के लिए बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष और स्थानीय विधायक हेमंत खंडेलवाल ने भूमिपूजन किया। इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके, जिले के अन्य विधायक महेंद्र सिंह चौहान, चंद्रशेखर देशमुख, गंगाबाई उईके व डॉ. योगेश पंडाग्रे भी उपस्थित थे। नया पु​ल, पुराने जर्जर पुल के स्थान पर बनाया जा रहा है जो बैतूल को नेशनल हाईवे से जोड़ेगा। इससे यातायात सुगम होने के साथ ही सुरक्षित भी होगा। इस पुल के बन जाने से बैतूल की हरदा-इंदौर हाईवे और भोपाल-नागपुर हाईवे से सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। इतना ही नहीं, बारिश में माचना नदी में पानी भरने से उत्पन्न यातायात की समस्या भी खत्म हो जाएगी। चार-लेन पुल को 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य करबला घाट पर पुराना पुल करीब 80 साल पहले का है और यह खतरनाक हो चुका है। बैतूल-खेड़ी मार्ग पर नया पुल 100 मीटर लंबा और 18.50 मीटर चौड़ा होगा। इस चार-लेन पुल को 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। बैतूल क्षेत्र के लिए यह एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट है जिससे यात्रा और आसान व सुरक्षित होगी। माचना के नए पुल के निर्माण से बैतूल शहर को हरदा-इंदौर नेशनल हाईवे और भोपाल-नागपुर हाईवे से सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। इसी के साथ एमपी की राजधानी भोपाल का महाराष्ट्र से सड़क संपर्क और सुगम हो जाएगा। पुल की प्रशासकीय लागत 18.43 करोड़ रुपए अधिकारियों ने बताया कि पुल की प्रशासकीय लागत 18.43 करोड़ रुपए और तकनीकी लागत 10.80 करोड़ रुपए निर्धारित की गई है। यह पुल चार लेन का होगी।

भारत में इंसानों की लंबाई क्यों घट रही है? डॉक्टर्स ने खुलासा किया, छोटे होते भारतीय बच्चे

नई दिल्ली  दुनिया जहां लंबी और बेहतर कद-काठी की ओर बढ़ रही है, वहीं भारत अपने 'रिवर्स गियर' में नजर आ रहा है. आमतौर पर जैसे-जैसे किसी देश की अर्थव्यवस्था बढ़ती है और हेल्थ सुविधाएं बेहतर होती हैं, वहां के लोगों की औसत लंबाई बढ़नी चाहिए जैसा कि चीन, जापान और दक्षिण कोरिया में हुआ है. लैंसेट और NCD रिस्क फैक्टर कोलैबोरेशन के डेटा के मुताबिक, पिछले 100 सालों में दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले भारतीयों की हाइट में वो उछाल नहीं दिखा जो चीन या जापान में दिखा है. भारत के मामले में उल्टा हो रहा है और उनकी औसत हाइट में गिरावट देखी गई है. विश्लेषण से संकेत मिलता है कि भारत में औसत हाइट में अपेक्षित बढ़त नहीं हो पाई है और कुछ उम्र व सामाजिक समूहों में लंबाई में मामूली गिरावट भी दर्ज की गई है, जिसका सबसे बड़ा कारण बचपन का कुपोषण है. 20–30 साल पहले (2005–2006) भारतीय पुरुष आज की तुलना में औसतन 1 से 1.1 सेमी लंबे थे यानी पिछले कुछ दशकों में उनकी हाइट में गिरावट आई है. अब भारतीयों की लंबाई कम होने के क्या कारण हैं, कौन-कौन से फैक्टर्स इसके लिए जिम्मेदार हैं. घटती लंबाई पर क्या कहती हैं रिसर्च? ग्लोबल हाइट स्टडी (1985-2019) के अनुसार भारतीयों की लंबाई में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई जिसकी उम्मीद थी. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-3 से NFHS-4, 2005-16) डेटा के विश्लेषण से पता चलता है कि 15-25 साल के पुरुषों की औसत लंबाई 1.10 सेमी और 26-50 साल उम्र वालों की लंबाई 0.86 सेमी कम हो गई है. वहीं यदि 15-25 साल की महिलाओं की बात करें तो उनकी लंबाई में 0.12 सेमी की गिरावट आई है. ट्राइबल महिलाओं में यह आंकड़ा 0.42 सेमी और गरीब तबके वाली महिलाओं की लंबाई 0.57 सेमी तक गिर गई है. PLoS One में पब्लिश भारतीयों की लंबाई घटने पर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) द्वारा की गई रिसर्च (2021) से पता चलता है कि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-3 (2005-06) से नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 (2015-16) के बीच पुरुषों की लंबाई 1 से 1.1 सेमी और चुनिंदा महिला ग्रुप्स (एसटी, गरीब) में 0.4 से 0.6 सेमी तक घट गई है. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5, 2019-21) के मुताबिक, बचपन और किशोरावस्था में कुपोषण ही लंबाई घटने की सबसे बड़ी वजह बना हुआ है. 5 साल से कम उम्र के 35 प्रतिशत बच्चे नाटे (स्टंटिंग) हैं. दरअसल, हर बच्चे के जेनेटिक्स में एक निश्चित लंबाई तक पहुंचने  की अधिकतम संभावना होती है लेकिन स्टंटिंग इस क्षमता को सीमित कर देता है और उनकी लंबाई पूरी नहीं बढ़ पाती.  रिपोर्ट के मुताबिक, टीम ने 1985 और 2019 के बीच की गई 2000 से अधिक स्टडीज में 5 से 19 वर्ष की उम्र के 6.5 करोड़ से अधिक बच्चों और वयस्कों के डेटा का एनालेसिस किया. सामने आया कि पिछले 35 सालों में बच्चों की औसत ऊंचाई में सबसे अधिक सुधार चीन और दक्षिण कोरिया में देखा गया है. चीन में 19 साल के लड़कों की औसत लंबाई 1985 से 2019 के बीच 8 सेमी बढ़ी पाई गई थी. 2019 में पब्लिश हुई द लैंसेट स्टडी में बताया गया है कि 19 साल की उम्र में सबसे लंबे लड़के नीदरलैंड के थे जिनकी औसत हाइट 183.8 सेमी या 6 फीट थी और वहीं 19 साल की उम्र में सबसे कम लंबाई वाले लड़के तिमोर लेस्ते (दक्षिण पूर्व एशिया का देश) में रहते थे जिनकी औसत हाइट 160.1 सेमी या 5 फीट 3 इंच थी. पेट की बीमारी, मॉडर्न लाइफस्टाइल बच्चे की हाइट के दुश्मन बेंगलुरु के स्पर्श हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. विक्रम बेल्लिअप्पा (MBBS, MS, DNB) ने Aajtak/.in को बताया, 'बार-बार होने वाले संक्रमण और पेट से जुड़ी बीमारियां बच्चों की ग्रोथ को प्रभावित कर सकती हैं. पेट के इंफेक्शन, दस्त या उल्टी की वजह से बॉडी जरूरी न्यूट्रिएंट्स को एब्जॉर्ब नहीं कर पाती. इसका सीधा असर बच्चे के वजन और लंबाई पर पड़ता है. लगातार पेट की खराबी न सिर्फ इम्यूनिटी कमजोर करती है, बल्कि ग्रोथ की रफ्तार को भी सुस्त कर देती है.' मॉडर्न लाइफस्टाइल के कारण बच्चों में अर्ली प्यूबर्टी (Early Puberty) देखने मिल रही है जिसका संबंध हाइट कम रह जाने से हो सकता है. दरअसल, आजकल के बच्चे जंक फूड का सेवन अधिक कर रहे हैं जिसके कारण उनमें मोटापा बढ़ रहा है जिस कारण उनमें समय से पहले हार्मोनल बदलाव (प्यूबर्टी) शुरू हो रहे हैं. डॉ. विक्रम बताते हैं, 'शुरू में तो बच्चा तेजी से लंबा होता दिखता है लेकिन हकीकत में उसकी 'ग्रोथ प्लेट्स' समय से पहले बंद हो जाती हैं. नतीजा यह कि उम्र बढ़ने पर उसकी फाइनल हाइट उम्मीद से काफी कम रह जाती है.' क्या हमारी खराब जीवनशैली और प्रदूषित वातावरण हमारे DNA में ऐसे बदलाव कर रहे हैं जो आने वाली पीढ़ियों की हाइट को परमानेंट तौर पर छोटा कर रहे हैं? बैलेंस डाइट की कमी  जयपुर के कोकून हॉस्पिटल के पीडियाट्रिशियन डॉ. जितेन्द्र जैन (MBBS, DCH, DNB) से Aajtak.in ने पूछा, क्या कारण है कि भारतीयों की नई पीढ़ी की औसत ऊंचाई पिछली पीढ़ी से कम हो रही है? उन्होंने बताया, 'लंबाई में जेनेटिक्स का अहम रोल है लेकिन केवल जेनेटिक्स ही पूरी कहानी नहीं बताते. भारतीयों की नई पीढ़ी की औसत ऊंचाई पिछली पीढ़ी से कम होने के पीछे लाइफस्टाइल, पोषण और पर्यावरण भी जिम्मेदार हैं. 'जंक फूड, कम प्रोटीन और विटामिन्स, बढ़ता मोटापा, अधिक स्क्रीन टाइम और फिजिकल एक्टिविटी में कमी बच्चों की ग्रोथ को धीमा कर रही है. 'गर्भावस्था में माताओं का खराब पोषण, बचपन में बार-बार होने वाले इंफेक्शन, पेट और आंत की बीमारियां और प्रदूषण भी हार्मोनल संतुलन और हड्डियों की ग्रोथ को प्रभावित कर रहे हैं. इसलिए केवल जेनेटिक्स पर निर्भर रहने की बजाय बैलेंस डाइट, साफ पानी, पर्याप्त नींद और एक्टिव लाइफस्टाइल बेहद जरूरी है ताकि बच्चों की लंबाई सही रहे और ओवरऑल ग्रोथ सही तरह से हो.' खराब लाइफस्टाइल और पॉल्यूशन डॉ. विक्रम ने कहा, 'खराब लाइफस्टाइल और प्रदूषण सीधे तौर पर DNA को बदलकर हाइट को स्थायी रूप से प्रभावित नहीं करते लेकिन ये एपिजेनेटिक बदलाव जरूर पैदा कर सकते हैं. लगातार जंक फूड, न्यूट्रिशन की कमी, स्ट्रेस, प्रदूषण और हार्मोन-डिसरप्टिंग केमिकल्स का असर … Read more

सेल्फी फिल्टर जैसा परफेक्ट लुक पाने करें ब्लरिंग मेकअप

पहले के समय में अच्छा मेकअप करने के लिए लोग पार्लर पर ही निर्भर रहते थे लेकिन आजकल ऐसा नहीं है। अच्छा मेकअप करने के लिए आपको अच्छे ब्रांड्स वाले प्रोडक्ट्स और बेसिक चीजें आनी चाहिए। मेकअप की दुनिया में भी नए-नए ट्रेंड्स आ रहे हैं, तो आपको परफेक्ट लुक देते हैं। इन ट्रेंड्स में से एक चला है ब्लरिंग मेकअप। ब्लरिंग मेकअप करने के बाद आपको सेल्फी फिल्टर जैसा लुक मिल जाएगा। इस मेकअप को करने के बाद चेहरे से हर छोटे-महीन दाग-धब्बे छिप जाएंगे और आपको बिल्कुल फिनिश लुक मिलेगा। चलिए आपको बताते हैं ब्लरिंग मेकअप करने के आसान स्टेप्स क्या हैं। क्या है ब्लरिंग मेकअप? सेल्फी खींचने से पहले हम लोग फोन में अच्छा फिल्टर सेलेक्ट कर लेते हैं, ताकि चेहरे के दाग-धब्बे, झुर्रियां सब छिप जाए। वैसे ही इस मेकअप को करने के बाद चेहरे के सभी धब्बे, फाइन लाइन्स, एक्ने, पिंपल्स का नामोनिशान मिट जाएगा। इस मेकअप में स्किन पर सॉफ्ट-फोकस इफेक्ट देने वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल होता है। इससे आपकी स्किन को चिकनापन मिलेगा, जिससे फेस नेचुरल तरीके से शाइन करता दिखेगा। 5 आसान स्टेप्स ब्लरिंग मेकअप करने के लिए आपको सिर्फ 5 आसान स्टेप्स को फॉलो करना है। बस ये मेकअप हो जाएगा और आपको फिनिश लुक मिलेगा। चलिए स्टेप बाय स्टेप में पूरा तरीका बताते हैं- स्टेप 1- सबसे पहले चेहरे को अपने फेस वॉश से क्लीन करें और अच्छे से पोछ लें। फिर मॉइश्चराजर लगाकर 10 मिनट का गैप दें। जिससे मॉइश्चराजर की नमी स्किन पोर्स में घुस जाएं। इसके बाद आपको प्राइमर लगाना है लेकिन मैट या सिलिकॉन-बेस्ड प्राइमर ही यूज करना है। ब्लरिंग मेकअप करने के लिए यही प्राइमर यूज करें, ये स्किन पोर्स को छोटा कर देता है। अगर आपकी स्किन ड्राई है, तो हाइड्रेटिंग प्राइमर लें, ऑयली वाले मैट प्राइमर लगाएं। स्टेप 2- अब फाउंडेशन की बारी आएगी। फाउंडेशन आप अपने स्किन टोन के हिसाब से चुनें। मैट फिनिश फाउंडेशन भी ले सकते हैं, जो आपकी स्किन को चिकनापन देगा। इसे स्पंज या ब्रश की मदद से लगाकर अच्छे से ब्लेंड करें। चेहरे पर दाग-धब्बे ज्यादा हो, तो कंसीलर हल्का लगाएं। ज्यादा कंसीलर न लगाएं, वरना नेचुरल लुक नहीं मिलेगा। स्टेप 3- ब्लरिंग मेकअप का खास स्टेप है ट्रांसलूसेंट पाउडर। इससे आपका पूरा मेकअप सेट होगा और परफेक्ट दिखेगा। इसे लगाने के लिए बड़े ब्रश का इस्तेमाल करें या फिर हाथों से इसे अप्लाई करें। इस पाउडर को आप फेस के फीचर को शार्प करते हुए भी लगा सकती हैं। इसके बाद ब्लश और हाईलाइटर से मेकअप को फाइनल टच दें। स्टेप 4- इसके बाद आपको आई मेकअप करना होगा। आई मेकअप के लिए आपको आईशैडो मैट फिनिश वाला लगाना होगा और आईलाइनर, मसकारा, काजल, आइब्रो सेट करते हुए लुक को कंप्लीट करना होगा। स्टेप 5- अब होठों को सजाने की बारी आएगी। न्यूड शेड वाली लिपस्टिक आपको चुननी होगी। ब्लरिंग मेकअप में बोल्ड कलर्स वाली लिपस्टिक नहीं अच्छी लगेगी। हल्के रंग में लिपस्टिक लगाकर लुक को पूरा करें। मेकअप टिप्स- ब्लरिंग मेकअप हर स्किन टोन के हिसाब से हो सकता है। बस आपको अपने स्किन टोन के हिसाब से प्रोडक्ट्स लेने होंगे।