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बरसाना होली उत्सव का कार्यक्रम जारी, 24 फरवरी लड्डू और 25 को लठामार होली

मथुरा विश्व प्रसिद्ध बरसाना की होली का कार्यक्रम तय हो चुका है। 24 फरवरी से 26 फरवरी तक बरसाना और नंदगांव राधा-कृष्ण प्रेम की जीवंत लीला के साक्षी बनेंगे। श्रीजी मंदिर में लड्डू होली से उत्सव का शुभारंभ होगा। अगले दिन राधारानी के आंगन में लाठियों की गूंज उठेगी और तीसरे दिन नंदगांव में प्रेम रस की लीला होगी। देश-विदेश के श्रद्धालु इस दिव्य उत्सव में शामिल होंगे।   बरसाना की होली केवल तीन दिनों का पर्व नहीं, बल्कि चालीस दिवसीय परंपरा है। वसंत पंचमी पर श्रीजी मंदिर में होली का डांडा गढ़ते ही उत्सव शुरू हो जाता है। मंदिर में समाज गायन फाल्गुन पूर्णिमा तक चलता है और महाशिवरात्रि को लठामार होली की प्रथम चौपाई निकलते ही राधारानी के आंगन की लीला का विधिवत शुभारंभ हो जाता है। बरसाना-नंदगांव की लठामार होली कोई साधारण उत्सव नहीं, बल्कि विक्रम संवत 1569 से चली आ रही भक्ति और प्रेम की परंपरा है। रसिक संत नारायण भट्ट द्वारा शुरू की गई यह लीला आज भी उसी उल्लास और मर्यादा के साथ निभाई जाती है।   कार्यक्रम के अनुसार, 24 फरवरी को लड्डू होली के साथ फाल्गुन महोत्सव अपने मुख्य चरण में प्रवेश करेगा। प्रसाद हाथों में पड़ते ही फाग की तान गूंज उठेगी और पूरा धाम गुलाल में रंग जाएगा। 25 फरवरी को बरसाना की लठामार होली होगी। रंगीली गली में हुरियारिन घूंघट ओढ़े लाठियां थामेंगी। नंदगांव के हुरियारे ढाल सजाकर राधा के आंगन में पहुंचेंगे। पहली लाठी की थाप के साथ जय राधे का उद्घोष गूंजेगा। 26 फरवरी को यही लीला नंदगांव में सजेगी। बरसाने की गोपियां नंदगांव की गलियों में फाग गीतों, ढोल-नगाडों की धुन पर थिरकेंगी। उधर, श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को लेकर मंदिर सेवायत, आयोजन समितियां और प्रशासन तैयारियों में जुट गए हैं।   मंदिर सेवायत रास बिहारी गोस्वामी ने बताया कि वसंत पंचमी पर श्रीजी मंदिर में होली का डांडा गढ़ते ही चालीस दिवसीय होली उत्सव की शुरुआत होती है। इसी दिन से मंदिर में समाज गायन चलता है और महाशिवरात्रि को प्रथम चौपाई निकलते ही लठामार होली शुरू होती है। ब्रजाचार्य पीठ के प्रवक्ता घनश्याम भट्ट ने कहा कि लठामार होली राधा-कृष्ण प्रेम की परंपरा को दर्शाती है।

गलती से भी इन लोगों के घर न खाएं अन्न, वरना लग सकता है पाप

गरुड़ पुराण हिंदू धर्म के 18 महापुराणों में शामिल है. ये पुराण भगवान विष्णु और पक्षी राज गरुड़ के संवाद पर आधारित है. हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद घर में गरुड़ पुराण का पाठ अवश्य होता है. धार्मिक मान्यता है कि पाठ करने से व्यक्ति की आत्मा को सद्गति मिलती है और वो जन्म-मरण के इस चक्र से मुक्त हो जाती है. गरुड़ पुराण में जीवन, मृत्यु, पाप-पुण्य के बारे में विस्तार से बताया गया है. साथ ही इसमें नीति, नियम, धर्म और मानव के बारे में उपयोगी बातें भी बताई गई हैं. गरुड़ पुराण में बताया गया है कि कुछ लोगों के घर पर भूलकर भी खाना नहीं खाना चाहिए. अन्यथा धन, सेहत आदि कई तरह की परेशानियां होती हैं. साथ ही आपके पापों में वृद्धि होती है और कर्मों पर असर पड़ता है. ऐसे में आइए गरुड़ पुराण के अनुसार जानते हैं किन लोगों के घर पर भोजन नहीं करना चाहिए? चोर या अपराधी गरुड़ पुराण के अनुसार, चोर या किसी बड़े अपराध में लिप्त अपराधी के घर भोजन नहीं करना चाहिए. ऐसा करने से पापों में वृद्धि होती है और जीवन में कई तरह की परेशानियां आती हैं. भगवान की निंदा करने वाले जो लोग ईश्वर की निंदा करतें हो उनके घर में भोजन करना गरुड़ पुराण में वर्जित माना गया है. गरुड़ पुराण के अनुसार, जो लोग ईश्वर की निंदा करते हों या जिनका आचरण अधार्मिक हो उनके यहां भोजन करने से समाज में अपयश मिलता है. रोगी या ब्याज लेने वाले रोगी या दूसरों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए अनुचित ब्याज प्राप्त करने वालों के घर भी भोजन नहीं करना चाहिए. रोगी व्यक्ति के यहां भोजन करने से स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है. चुगलखोर दूसरों की चुगली करने वालों के यहां भोजन कभी नहीं करना चाहिए. चुगली करने वाले दूसरों को परेशानियों में डालते हैं और स्वयं आनंद उठाते हैं. शास्त्रों में इस काम को भी पाप की श्रेणी में रखा गया है. नशीली चीजें बेचने वाले नशीली चीजों का व्यापार करने वालों के यहां कभी भोजन नहीं करना चाहिए. नशे के कारण कई घर बर्बाद हो जाते हैं और इसका दोष केवल नशा बेचने वालों को लगता है. नशा बेचने वालों के घर खाना खाने पर जीवन में अच्छा प्रभाव नहीं पड़ता.

घर में पॉजिटिव एनर्जी और धन के लिए लगाएं ये फेंगशुई तस्वीरें

घर की दीवारें केवल छत को सहारा देने के लिए नहीं होतीं, बल्कि वे आपके भविष्य और भाग्य का दर्पण भी हो सकती हैं। फेंगशुई के प्राचीन ज्ञान के अनुसार, हमारे आस-पास मौजूद हर वस्तु और तस्वीर एक विशिष्ट ऊर्जा या ची पैदा करती है। अक्सर हम घर की खूबसूरती बढ़ाने के लिए कोई भी पेंटिंग लगा देते हैं, लेकिन अनजाने में वही तस्वीरें हमारे जीवन में सकारात्मकता को रोक सकती हैं या समृद्धि के मार्ग में बाधा बन सकती हैं। फेंगशुई शास्त्र यह मानता है कि सही तस्वीर को सही दिशा में लगाने से न केवल घर का वास्तु दोष दूर होता है, बल्कि यह धन, उत्तम स्वास्थ्य और आपसी प्रेम को चुंबकीय रूप से आकर्षित करने का काम करता है। चाहे वह सफलता की उड़ान भरते घोड़े हों या शांति का प्रतीक बहता झरना, हर चित्र का अपना एक गहरा मनोविज्ञान और आध्यात्मिक प्रभाव होता है। सात दौड़ते हुए घोड़ों की तस्वीर यह तस्वीर फेंगशुई और वास्तु दोनों में बहुत प्रभावशाली मानी जाती है। यह गति, साहस और सफलता का प्रतीक है। इसे घर या ऑफिस की दक्षिण दीवार पर लगाएं। यह दिशा प्रसिद्धि और सफलता से जुड़ी है। यदि दक्षिण में जगह न हो, तो इसे उत्तर या पूर्व में भी लगाया जा सकता है। इससे करियर में तरक्की मिलती है, आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यापार में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। घोड़ों का मुंह घर के अंदर की तरफ होना चाहिए। इसे कभी भी बेडरूम में न लगाएं। फीनिक्स पक्षी पौराणिक कथाओं के अनुसार, फीनिक्स वह पक्षी है जो अपनी ही राख से दोबारा जन्म लेता है। यह संघर्षों पर जीत और नई शुरुआत का प्रतीक है। इसे घर की दक्षिण दिशा में लगाना सबसे उत्तम होता है। यह जीवन में मान-सम्मान और नई संभावनाओं के द्वार खोलता है। यदि आप किसी बुरे दौर से गुजर रहे हैं, तो यह तस्वीर आपको नई ऊर्जा प्रदान करती है। बहते हुए झरने या पानी की तस्वीर फेंगशुई में बहते पानी को धन के प्रवाह से जोड़ा जाता है। इसे घर की उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना चाहिए। यह आर्थिक स्थिति को मजबूत करती है और घर में पैसे की बरकत लाती है। सुनिश्चित करें कि चित्र में पानी का बहाव घर के अंदर की तरफ हो, बाहर की ओर नहीं। ऊंचे पहाड़ों की तस्वीर पहाड़ स्थिरता और सुरक्षा का प्रतीक हैं। इसे अपने बैठने की जगह या ऑफिस की कुर्सी के ठीक पीछे वाली दीवार पर लगाना चाहिए। यह आपको 'बैक सपोर्ट' देता है, जिससे आपको कार्यक्षेत्र में उच्चाधिकारियों और परिवार का सहयोग मिलता है। यह आपके जीवन में स्थिरता लाता है। फैमिली फोटो परिवार के सदस्यों की हंसती हुई तस्वीरें घर में प्रेम बढ़ाती हैं। इन्हें घर की दक्षिण-पश्चिम दीवार पर लगाना चाहिए। यह रिश्तों में मजबूती लाता है और परिवार के सदस्यों के बीच कलह को खत्म कर आपसी तालमेल बढ़ाता है। इन तस्वीरों को लगाने से बचें डूबते हुए सूरज या जहाज की तस्वीर: यह निराशा और पतन का प्रतीक मानी जाती है। हिंसक जानवरों या युद्ध के दृश्य: ऐसी तस्वीरें घर में तनाव और झगड़े बढ़ाती हैं। सूखे हुए पेड़ या कांटों वाले पौधे: ये नकारात्मकता और विकास में रुकावट पैदा करते हैं।

सरकार की योजना: अब कारों की माइलेज टेस्ट में AC चालू रहेगा, नए नियम जल्द लागू

नई दिल्ली भारत सरकार नई कारों के लिए कुछ नए सख्त नियम लाने की तैयारी कर रही है. जानकारी के अनुसार आगामी, 1 अक्टूबर, 2026 से, भारत में बिकने वाली पैसेंजर कारों को ज़्यादा सख्त फ्यूल-एफिशिएंसी टेस्टिंग नियमों को पूरा करना पड़ सकता है. इन नियमों के अनुसार, माइलेज को एयर-कंडीशनिंग चालू होने पर मापा जाएगा. बता दें कि यह प्रस्ताव केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने पेश किया है और इसका मकसद ऑफिशियल माइलेज के दावों और रोज़ाना ड्राइविंग के एक्सपीरिएंस के बीच के अंतर को कम करना है. क्या दिया जा रहा प्रस्ताव? सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स में एक ड्राफ्ट संशोधन के अनुसार, सभी M1 कैटेगरी की गाड़ियों, जिनमें स्थानीय रूप से बनी या इम्पोर्ट की गई कारें शामिल हैं, जिनका टेस्ट AIS-213 स्टैंडर्ड के तहत किया जाएगा. इस स्टैंडर्ड के तहत एक बड़ा बदलाव यह है कि फ्यूल की खपत को AC चालू होने पर मापा जाएगा. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मौजूदा समय में कारों का माइलेज AC बंद करके किए जाता है. जनता से मांगा गया फीडबैक केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने इस प्रस्ताव पर लोगों से फीडबैक मांगा है और नियमों को फाइनल करने से पहले आपत्तियों और सुझावों के लिए 30 दिन का समय दिया है. सरकार क्यों करना चाहती है बदलाव सरकार के इस फैसले के पीछे की वजह बताते हुए अधिकारियों ने कहा कि फ्यूल-एफिशिएंसी के आंकड़ों को आम ड्राइविंग स्थितियों को ज़्यादा सही तरीके से दिखाना चाहिए. क्योंकि ज़्यादातर कार मालिक रेगुलर एयर-कंडीशनिंग का इस्तेमाल करते हैं, खासकर भारतीय मौसम में, इसलिए सर्टिफिकेशन टेस्ट के दौरान माइलेज पर इसके असर को अब नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता. मौजूदा समय में कैसे मापी जाती है फ्यूल एफिशिएंसी मौजूदा समय की बात करें तो भारत में कार बनाने वाली कंपनियां बिना AC चलाए किए गए टेस्ट के आधार पर फ्यूल-एफिशिएंसी के आंकड़े ग्राहकों को बताती हैं. मैन्युफैक्चरर्स लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि यह तरीका यूरोपियन टेस्टिंग नॉर्म्स के हिसाब से है. हालांकि, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस तरीके से अक्सर ऐसे माइलेज के आंकड़े मिलते हैं, जो असल दुनिया में इस्तेमाल की तुलना में ज़्यादा अच्छे लगते हैं, जिसकी वजह से टेस्टिंग की ज़रूरतों में बदलाव करने पर ज़ोर दिया जा रहा है.

कोटा में PM मोदी, पूर्व CM गहलोत, अमिताभ बच्चन समेत 50 मूर्तियों वाला अनूठा मंदिर

कोटा. देशभर में देवी-देवताओं के मंदिर बहुत हैं, लेकिन शिक्षा नगरी कोटा में नयापुरा स्थित कर्मयोगी भारत माता भवन में एक ही स्थान पर न सिर्फ देवी-देवताओं और आराध्यों के दर्शन होंगे, बल्कि संतों, महापुरुषों, नेताओं, अभिनेताओं और खेल व कला जगत से जुड़ी हस्तियों के भी दर्शन किए जा सकेंगे। सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने वाले कर्मयोगी सेवा संस्थान ने देश के महापुरुषों का विशेष ‘मंदिर’ तैयार किया है। इसमें देवी-देवताओं समेत करीब 50 मूर्तियों की स्थापना की गई है। इनमें भारत रत्न सम्मानित विभूतियां, विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियों के माध्यम से विश्वभर में देश का मान बढ़ाने वाले महापुरुष, देश की आजादी में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले क्रांतिकारी, शिक्षा नगरी के विकास में योगदान देने वाले जनप्रतिनिधि, क्रिकेट के भगवान, स्वर कोकिला, आजादी के नायक और सदी के महानायक तक शामिल हैं। चार मंजिला कर्मयोगी भवन में वर्ष 2023 में तीन प्रतिमाओं की स्थापना से इसकी शुरुआत की गई थी। संस्थान के संस्थापक राजाराम जैन ‘कर्मयोगी’ का मानना है कि संभवतः ऐसा कोई अन्य भवन नहीं है, जहां एक ही स्थान पर इतनी विविध हस्तियों की मूर्तियों की स्थापना की गई हो। भारत के ये नौ रत्न भवन के अलग-अलग भागों में देश की पहली महिला प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न इंदिरा गांधी, पं. जवाहरलाल नेहरू, लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल, पूर्व राष्ट्रपति व वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, डॉ. भीमराव आंबेडकर, राजीव गांधी, स्वर कोकिला लता मंगेशकर, सचिन तेंदुलकर और मदर टैरेसा की मूर्तियां स्थापित की गई है। इनके अलावा श्रद्धा व आस्था के प्रतीक भगवान राम, महादेव, हनुमान, देवी दुर्गा, देवी सरस्वती, राधा-कृष्ण, भगवान परशुराम, भगवान देवनारायण, महाराजा अग्रसेन, बाबा रामदेव, तेजाजी महाराज, भगवान झूलेलाल, मीनेश भगवान, महर्षि वाल्मीकि, भगवान महावीर की मूर्तियों की स्थापना की गई है। देशभक्ति भावना के प्रतीक भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, स्वामी विवेकानंद, चंद्रशेखर आजाद, लाला लाजपत राय, सुभाषचंद्र बोस, महात्मा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज और झांसी की रानी, शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह और खेतसिंह खंगार की मूर्तियां भी स्थापित की गई हैं। गायिका लता मंगेशकर, सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, साहित्यकार हरिवंश राय बच्चन, मुंशी प्रेमचंद, हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद और क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर की प्रतिमाएं भी मंदिर में स्थापित हैं। शहर व देश के ये गौरव देशभर में कोटा का नाम रोशन करने वाले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, विकास की दृष्टि से कोटा को विशेष पहचान दिलाने वाले पूर्व मंत्री शांति धारीवाल, ‘जादूगर’ के नाम से प्रख्यात पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तथा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। कर्मयोगी का कहना है कि मोदी के कार्यकाल में कई ऐतिहासिक कार्य हुए हैं, इसी कारण उनकी प्रतिमा यहां स्थापित की गई है। भारत बनेगा कोहिनूर – महात्मा गांधी और सुभाषचंद्र बोस के मध्य 7 फीट ऊंची व 5 फीट चौड़ी भारत माता की आकृति दीवार में उकेरी गई है। प्रतिमा के दोनों ओर शेरमुख बनाए गए हैं। एक हाथ में कोहिनूर दर्शाया गया है, जो यह संदेश देता है कि अब तक ‘सोने की चिड़िया’ कहलाने वाला भारत, आगे चलकर ‘कोहिनूर’ बनेगा। करीब 56 फीट की ऊंचाई पर तीन मूर्तियां स्थापित की गई हैं, जबकि शेष प्रतिमाएं लगभग 50 फीट की ऊंचाई तक स्थापित की गई हैं। इनमें 12 प्रतिमाएं 3-3 फीट ऊंची हैं और शेष 15-15 इंच की हैं। सभी प्रतिमाएं सफेद संगमरमर से तैयार की गई हैं। बड़ी प्रतिमाओं का वजन लगभग 250 किलो और छोटी प्रतिमाओं का वजन 50-50 किलो है। कला, संस्कृति, सद्भाव और देशभक्ति का संदेश संस्थान के कर्मयोगी और अल्का दुलारी का मानना है कि यह मंदिर महापुरुषों द्वारा बताए गए आदर्शों पर चलने के लिए प्रेरित करेगा। साथ ही यह सद्भाव, कला, संस्कृति, अध्ययन और पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। कर्मयोगी बताते हैं कि उनके परिसर में 15 अगस्त और 26 जनवरी का विशेष महत्व है। मंदिर निर्माण के प्रेरक उनके पिता मेवालाल जैन का जन्म, मृत्यु और विवाह 26 जनवरी को हुआ, जबकि दादा श्रीबख्श जैन का जन्म और विवाह 15 अगस्त को हुआ था। इसी कारण 26 जनवरी को मंदिर का उद्घाटन किया जाएगा। उद्घाटन मां कांता जैन करेंगी।

Live-in रिलेशनशिप पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी, कहा- ‘रिश्ते टूटने पर पुरुष दुष्कर्म के आरोपों में फंस रहे’

इलाहाबाद  इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) और दुष्कर्म कानूनों को लेकर गंभीर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि पश्चिमी विचारधारा के प्रभाव में युवाओं के बीच बिना विवाह किए साथ रहने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। जब ऐसे संबंध समाप्त होते हैं, तो कई मामलों में दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज करा दी जाती है। पुराने कानूनों में फंस रहे पुरुष: कोर्ट न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा (प्रथम) की बेंच ने कहा कि चूंकि कानून महिलाओं के पक्ष में बनाए गए हैं, इसलिए पुरुषों को उन प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया जा रहा है, जो उस समय बने थे जब लिव-इन रिलेशनशिप की अवधारणा अस्तित्व में ही नहीं थी। आजीवन कारावास की सजा रद्द कोर्ट ने विशेष न्यायाधीश (POSCO Act), महाराजगंज की ओर से मार्च 2024 में अपीलकर्ता चंद्रेश को दी गई आजीवन कारावास की सजा और दोषसिद्धि आदेश को रद्द कर दिया। अपीलकर्ता को IPC की विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया गया था। पीड़िता बालिग पाई गई अभियोजन पक्ष का आरोप था कि आरोपी ने शिकायतकर्ता की नाबालिग बेटी को शादी का झांसा देकर बहला-फुसलाकर बेंगलुरु ले जाकर शारीरिक संबंध बनाए। हालांकि, हाई कोर्ट ने पाया कि पीड़िता बालिग थी। अस्थि परीक्षण रिपोर्ट में उसकी उम्र लगभग 20 वर्ष पाई गई, जिस पर ट्रायल कोर्ट ने उचित विचार नहीं किया था। सबूतों में पाई गईं गंभीर खामियां कोर्ट ने यह भी कहा कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत विद्यालय रिकॉर्ड किशोर न्याय नियमों के अनुसार वैध दस्तावेज नहीं थे। पीड़िता की मां (गवाह-1) की ओर से बताई गई उम्र में भी विरोधाभास पाया गया। एफआईआर में उम्र 18½ वर्ष बताई गई थी। पीड़िता ने अपने बयान में स्वीकार किया कि वह स्वेच्छा से घर छोड़कर पहले गोरखपुर और फिर बेंगलुरु गई थी।

मुंबई मेयर चुनाव में फडणवीस सरकार का बड़ा कदम, बदला चुनावी परिदृश्य

मुंबई  मुंबई मेयर पद के चुनाव को लेकर सियासी घमासान के बीच एक बड़ा मोड़ सामने आया है. बीएमसी चुनाव में मामूली बहुमत वाली महायुति सरकार ने ऐसा कदम उठाया है, जिसे ठाकरे गुट की रणनीति पर सीधा वार माना जा रहा है. दरअसल शिवसेना (यूबीटी) गुट के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पिछले दिनों कहा कहा था कि ‘अगर भगवान की इच्छा होगी तो महापौर भी अपना होगा.’ हालांकि, उनके इस बयान के बाद बीजेपी और शिंदे गुट अलर्ट मोड में आ गया और इस ताजा कदम को उसी से जोड़कर देखा जा रहा है. मुंबई महानगरपालिका की सत्ता की लड़ाई में राज्य सरकार ने एक अहम राजनीतिक चाल चली है. आगामी मेयर चुनाव की प्रक्रिया में ‘पीठासीन अधिकारी’ (Presiding Officer) की नियुक्ति से जुड़े पुराने नियम में बदलाव कर दिया गया है. नई अधिसूचना के मुताबिक अब महापौर चुनाव से जुड़ी पूरी प्रक्रिया का संचालन नगर आयुक्त या सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे. सरकार के इस फैसले के बाद सत्ताधारी और विपक्ष के बीच पहले ही दिन टकराव के संकेत मिल रहे हैं. अब तक की परंपरा के अनुसार, नई नगर परिषद की पहली बैठक में मेयर के चयन तक कार्यवाही देखने के लिए पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति होती थी. यह जिम्मेदारी या तो निवर्तमान महापौर को या फिर सदन के सबसे वरिष्ठ नगरसेवक को सौंपी जाती थी. मुंबई महापालिका का कार्यकाल समाप्त हुए करीब तीन साल हो चुके हैं, ऐसे में निवर्तमान महापौर का विकल्प पहले ही खत्म हो गया था. पुराने नियमों के तहत, उद्धव ठाकरे गुट की वरिष्ठ नगरसेविका श्रद्धा जाधव को पीठासीन अधिकारी बनने का मौका मिल सकता था. राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अगर पीठासीन अधिकारी विपक्ष का होता, तो सत्ताधारियों को तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता था. इसी संभावित स्थिति से बचने के लिए सरकार ने नियमों में बदलाव किया है. राज्य सरकार की तरफ से जारी नई नियमावली के अनुसार, अब महापौर या उपमहापौर के चुनाव के लिए बुलाई जाने वाली विशेष बैठक की अध्यक्षता राज्य सरकार के सचिव स्तर या उससे ऊचे अधिकारी करेंगे. वर्तमान नगर आयुक्त भूषण गगराणी प्रधान सचिव स्तर के अधिकारी हैं, ऐसे में वही इस प्रक्रिया के पीठासीन अधिकारी होंगे. इसके साथ ही महापौर के अधिकार भी सीमित कर दिए गए हैं. नए चुने गए महापौर भी उपमहापौर के चुनाव के दौरान पीठासीन अधिकारी के रूप में कार्य नहीं कर सकेंगे. गौरतलब है कि वर्ष 1997 से मुंबई महापालिका में शिवसेना-भाजपा की सत्ता रही है और इस दौरान पीठासीन अधिकारी को लेकर कभी विवाद नहीं हुआ. लेकिन मौजूदा बदले हुए राजनीतिक समीकरणों में यह मुद्दा विवाद की जड़ बनता नजर आ रहा है. ठाकरे गुट की ओर से पीठासीन अधिकारी अपने पक्ष का हो, इसके लिए रणनीति बनाई जा रही थी, लेकिन सरकार की अधिसूचना ने इस योजना को झटका दे दिया है. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि महापौर चुनाव के पहले ही दिन नए नियमों को लेकर सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिल सकता है.

श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी! बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तारीख तय, 23 अप्रैल से खुलेंगे

नई दिल्ली उत्तराखंड की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माने जाने वाले बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तारीख का ऐलान कर दिया गया है। बसंत पंचमी के पावन अवसर पर टिहरी जिले के नरेंद्र नगर स्थित राजदरबार में शास्त्रों और पंचांग गणना के बाद यह फैसला लिया गया कि बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खोले जाएंगे। जानकारी के मुताबिक, राजदरबार में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान महाराजा मनु जयेंद्र शाह ने स्वयं कपाट खुलने की तिथि की घोषणा की। इस मौके पर राजपुरोहित आचार्य कृष्ण प्रसाद उनियाल ने पंचांग, ग्रह-नक्षत्र और शुभ योगों का अध्ययन कर बताया कि 23 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 15 मिनट का समय कपाट खोलने के लिए शुभ है। वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक अनुष्ठानों के बाद विधिवत रूप से तिथि घोषित की गई।   कैसे खुलते हैं बदरीनाथ धाम के कपाट, क्या-क्या होती हैं खास परंपराएं बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया पूरी तरह शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार होती है। कपाट खुलने से पहले भगवान बदरीविशाल की पूजा-अर्चना विशेष विधि से की जाती है। सबसे पहले मंदिर परिसर को फूलों से सजाया जाता है और सिंहद्वार पर पारंपरिक ढंग से पूजा होती है। कपाट खुलने के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में गणेश पूजा के साथ कार्यक्रम की शुरुआत होती है। इसके बाद शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर के मुख्य द्वार के ताले खोले जाते हैं। जैसे ही कपाट खुलते हैं, मंदिर परिसर “जय बद्री विशाल” के जयकारों से गूंज उठता है। कपाट खुलने के बाद सबसे पहले भगवान बदरीनाथ के अखंड दीप के दर्शन कराए जाते हैं, जो शीतकाल में भी निरंतर जलता रहता है। इसके बाद भगवान की महाभिषेक पूजा होती है और विशेष श्रृंगार किया जाता है। कपाट खुलने के पहले दिन केवल सीमित समय के लिए ही श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति दी जाती है। परंपरा के अनुसार, कपाट खुलने के समय डिमरी समाज के प्रतिनिधि और मंदिर के मुख्य रावल विशेष भूमिका निभाते हैं। कपाट खुलने के बाद नियमित पूजा, दर्शन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो जाते हैं। क्यों खास है कपाट खुलने का दिन मान्यता है कि बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा की औपचारिक शुरुआत हो जाती है। इस दिन दर्शन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु इस शुभ पल के साक्षी बनने के लिए बदरीनाथ पहुंचते हैं।

होली से पहले खुशखबरी: दिल्ली में किन उपभोक्ताओं को मिलेगा सिलेंडर का पैसा, जानिए पूरी जानकारी

नई दिल्ली दिल्ली सरकार ने एक और चुनावी वादे को पूरा करने का फैसला ले लिया है। राजधानी में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के रसोई गैस उपभोक्ताओं को अब साल में दो मुफ्त सिलेंडर की सौगात मिलेगी। होली और दिवाली के समय सरकार एलपीजी सिलेंडर का पैसा बैंक खाते में भेजेगी। दिल्ली सरकार ने मंगलवार को कैबिनेट बैठक के दौरान इस प्रस्ताव को पास किया। योजना को लागू करने के लिए 300 करोड़ रुपये का बजट आवंटन किया गया है।   पिछले साल दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने संकल्प पत्र में एलपीजी सिलेंडर को लेकर दो वादे किए थे। होली और दिवाली में दो मुफ्त सिलेंडर देने के अलावा गरीबों को 500 रुपये में सिलेंडर उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। सरकार ने अभी साल में दो मुफ्त सिलेंडर देने से जुड़ा प्रस्ताव ही पास किया है। 500 रुपये में सिलेंडर देने का फैसला बाद में अलग से लिया जाएगा। इस होली से हो जाएगी शुरुआत एक साल का शासन पूरा होने से पहले रेखा गुप्ता सरकार ने साल में दो मुफ्त सिलेंडर देने की शुरुआत का फैसला किया है। लाभार्थियों को पहले सिलेंडर का पैसा मार्च में होली से पहले भेजने की तैयारी है। किन्हें मिलेगा यह पैसा दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एचटी को बताया कि इस योजना का लाभ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के राशनकार्डधारकों को मिलेगा। सरकार ने मौजूदा राशन कार्ड डेटाबेस के जरिए योग्य लाभार्थियों की पहचान की है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली ढांचे के तहत 'गरीब' के रूप में वर्गीकृत परिवारों को इसका लाभ मिलेगा। इन परिवारों को होली से पहले सिलेंडर रिफील की कीमत भेजी जाएगी। अभी दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 850 रुपये है। आधार से जुड़े बैंक अकाउंट में आएगा पैसा अधिकारी ने बताया कि योजना के तहत सिलेंडर का बंटवारा नहीं होगा, बल्कि इसे खरीदने लायक पैसे ही अकाउंट में भेजे जाएंगे। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सिलेंडर का पैसा आधार से लिंक बैंक खातों में भेजा जाएगा। लाभार्थी इन पैसों का इस्तेमाल एलपीजी सिलेंडर खरीदने के लिए कर पाएंगे। अधिकारियों ने बताया कि वितरण में पारदर्शिता के लिए डीबीटी के इस्तेमाल का फैसला लिया गया है। लाभार्थियों की सूची और टाइमलाइन बनाने का आदेश संबंधित विभागों को ऑपरेशनल गाइडलाइंस, लाभार्थियों की सूची और फंड ट्रांसफर के लिए टाइमलाइन तैयार करने को कहा गया है। अधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम के सुचारू रूप से लागू करने के लिए एलपीजी वितरकों और बैंकिंग पार्टनर्स के साथ समन्वय किया जा रहा है। विभागों को लाभार्थियों का सत्यापन और डीबीटी (डेटाबेस सत्यापन) प्रक्रिया पूरी करने का काम सौंपा गया है, जिसके बाद ही धनराशि जारी की जाएगी।  

महाकाल लोक की सुरक्षा के लिए 488 होमगार्ड जवानों की तैनाती, ESB करेगा भर्ती, ट्रांसफर नहीं होंगे

 उज्जैन  उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा के दर्शन के लिए उमड़ने वाली लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी अब होमगार्ड के जवानों को सौंपी जाएगी. मंदिर परिसर में 488 होमगार्ड जवानों की तैनाती की जाएगी. इन जवानों की भर्ती कर्मचारी चयन मंडल (ESB)  के माध्यम से की जाएगी. मुख्यमंत्री मोहम यादव की घोषणा के बाद महाकाल मंदिर के लिए होमगार्ड की 4 विशेष कंपनियों के गठन को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है. होमगार्ड मुख्यालय भोपाल ने इनकी भर्ती के लिए आधिकारिक प्रस्ताव गृह विभाग को भेज दिया है. इन पदों पर भर्ती राज्य स्तर पर कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम के की जाएगी. गृह विभाग जल्द ही ESB को आधिकारिक विज्ञापन जारी करने के निर्देश देगा, जिसके बाद भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी. महाकाल मंदिर के लिए बनेगी होमगार्ड की चार विशेष कंपनियां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा के बाद राज्य सरकार ने श्री महाकालेश्वर मंदिर के लिए होमगार्ड की चार विशेष कंपनियों के गठन को मंजूरी दे दी है। यह पहली बार होगा जब किसी धार्मिक स्थल के लिए अलग से विशेष होमगार्ड कैडर बनाया जा रहा है। होमगार्ड मुख्यालय भोपाल ने इस संबंध में गृह विभाग को आधिकारिक प्रस्ताव भेज दिया है, जिसे जल्द ही अंतिम मंजूरी मिलने की संभावना है। 488 होमगार्ड जवान होंगे तैनात बता दें कि महाकाल लोक कॉरिडोर बनने के बाद मंदिर आने वाले भक्तों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है. औसतन हर दिन एक लाख से ज्यादा भक्त मंदिर आते हैं. इसे देखते हुए मंदिर परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करने और मंदिर आने वाले भक्तों की मदद के लिए 488 होमगार्ड जवान तैनात रहेंगे. इन जवानों को तैनाती से पहले बेसिक ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसमें भीड़ को मैनेज करने की तकनीक भी शामिल होगी, ताकि भक्तों को आसानी से और आराम से दर्शन हो सकें. फिलहाल महाकाल मंदिर की सुरक्षा प्राइवेट एजेंसियों के हाथ में है.  कर्मचारी चयन मंडल के जरिए होगी भर्ती प्रक्रिया इन 488 होमगार्ड जवानों की भर्ती राज्य स्तर पर कर्मचारी चयन मंडल (ESB) के माध्यम से की जाएगी। गृह विभाग जल्द ही ESB को भर्ती का आधिकारिक विज्ञापन जारी करने के निर्देश देगा। इसके बाद ऑनलाइन आवेदन, परीक्षा और चयन प्रक्रिया शुरू होगी। इस कैडर में चयनित होमगार्ड जवानों का ट्रांसफर कहीं और नहीं किया जाएगा। ये जवान अपनी पूरी सेवा अवधि में केवल महाकाल मंदिर, महाकाल लोक और उससे जुड़े क्षेत्रों में ही तैनात रहेंगे। जवानों का कहीं और नहीं होगा ट्रांसफर होमगार्ड के इस स्पेशल कैडर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इन जवानों का ट्रांसफर कहीं और नहीं होगा। ये जवान कॉल ऑफ और कॉल ऑन से मुक्त रहेंगे। होमगार्ड में भर्ती होने वाले ऐसे जवान अपने पूरे सेवाकाल के दौरान केवल महाकाल मंदिर में ही सेवाएं देंगे। इससे उन्हें मंदिर की भौगोलिक स्थिति और सुरक्षा बारीकियों का विशेषज्ञ बनने में मदद मिलेगी। मामले में होमगार्ड के अफसरों का कहना है कि महाकाल मंदिर के लिए होमगार्ड की चार कंपनियों की भर्ती के लिए मंजूरी मिली हैं। 488 पदों पर ESB के जरिए भर्ती होगी। गृह विभाग को विज्ञापन जारी करने के लिए पत्र लिखा है। हर रोज लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं उज्जैन महाकाल लोक बनने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। यहां हर रोज औसतन एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं का आना जाना होता है। इसे देखते हुए यह नई होमगार्ड फोर्स मंदिर परिसर की सुरक्षा के साथ यात्रियों की सहायता के लिए भी मुस्तैद रहेगी। इन जवानों को होमगार्ड को नियुक्ति से पहले बेसिक ट्रेनिंग के साथ ही भीड़ प्रबंधन के गुर भी सिखाए जाएंगे, ताकि श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन हो सकें। अभी महाकाल मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी निजी एजेंसियों के हवाले है। सुरक्षा में लगने वाले होमगार्ड     कुल पद 488 होंगे।     कुल कंपनियां 4 रहेगी।     हर कंपनी में 122 जवान होंगे।     केवल महाकाल मंदिर, मुख्य परिसर और महाकाल लोक में सेवा देंगे।     जवानों का वेतन महाकाल मंदिर ट्रस्ट देगा     3 शिफ्टों में ड्यूटी लगाई जाएगी।     निजी सुरक्षा व्यवस्था बंद होगी। प्राइवेट एजेंसियों की जगह अब सरकारी सुरक्षा बल फिलहाल महाकाल मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था प्राइवेट एजेंसियों के माध्यम से संचालित की जा रही है। हालांकि बढ़ती भीड़ और सुरक्षा की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने यह जिम्मेदारी अब सरकारी बल को सौंपने का निर्णय लिया है। होमगार्ड जवानों की तैनाती से सुरक्षा व्यवस्था अधिक भरोसेमंद और जवाबदेह होगी। साथ ही, सरकारी निगरानी में काम होने से पारदर्शिता भी बनी रहेगी। यह फैसला न केवल श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है, बल्कि मंदिर प्रशासन की व्यवस्थाओं को भी मजबूत करेगा।