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प्लेन क्रैश के कुछ मिनट पहले पायलट की चेतावनी उजागर, रनवे गायब होने की दहशत

बारामती महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और एनसीपी प्रमुख अजित पवार का बुधवार सुबह बारामती में हुए विमान हादसे में निधन हो गया। दिग्गज नेता लियरजेट 45 नामक प्रावइेट जेट से जा रहे थे, जोकि लैंडिंग से पहले क्रैश हो गया और हादसे में सवार सभी पांच लोगों की जान चली गई। हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नेता विपक्ष राहुल गांधी समेत देशभर के तमाम नेताओं ने दुख जताया है। प्लेन ने पहली बार लैंडिंग की कोशिश की थी, लेकिन उसे गो-अराउंड करके दोबारा आना पड़ा था। पहली बार में पायलट ने कहा था कि रनवे दिखाई नहीं दे रहा है, लेकिन बाद में गो-अराउंड के बाद रनवे दिख गया था।   विमान हादसा आज सुबह 8.46 बजे हुआ। सुबह 8.18 मिनट पर प्लेन ने बारामती एयरपोर्ट से संपर्क स्थापित किया था। यह दिल्ली स्थित वीएसआर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी का जेट प्लेन था, जिसे अजित पवार इस्तेमाल कर रहे थे। सुबह लगभग 8.10 मिनट पर मुंबई से प्लेन ने उड़ान भरी। मुंबई और बारामती के बीच की दूरी लगभग 256 किलोमीटर है और विमान को 45 मिनट का समय लगता है। बारामती एयरपोर्ट से विमान लगभग 56 किलोमीटर की दूरी पर था, जब उससे संपर्क किया गया। प्लेन को पुणे द्वारा कंट्रोल लोकल एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को दे दिया गया। इसके बाद विमान को उड़ा रहीं कैप्टन शंभवी पाठक को स्थानीय मौसम की जानकारी दी गई। पायलट ने हवाओं और विजिबिलिटी के बारे में पूछा और उन्हें बताया गया कि हवाएं शांत हैं और विजिबिलिटी तीन हजार मीटर है। इसके बाद विमान ने रनवे 11 के फाइनल अप्रोच पर रिपोर्ट किया और कहा कि उन्हें रनवे दिखाई नहीं दे रहा है। इसके बाद, उन्होंने गो-अराउंड किया। 'रनवे अभी दिखाई नहीं दे रहा' गो-अराउंड एक स्टैंडर्ड प्रोसीजर है, जिसके तहत पायलट जब सफल लैंड नहीं कर पाता है तो वह दोबारा हवा में उड़कर, वापस चक्कर लगाकर लैंडिंग की कोशिश करता है। एविएशन सेक्टर में यह कोई विफलता नहीं, बल्कि इसे सेफ्टी उपाय माना जाता है। गो-अराउंड के बाद, विमान से उसकी स्थिति के बारे में पूछा गया और पायलट ने रनवे 11 के फाइनल अप्रोच पर रिपोर्ट किया। उनसे रनवे दिखने पर रिपोर्ट करने के लिए कहा गया। उन्होंने जवाब दिया रनवे अभी दिखाई नहीं दे रहा है, जब रनवे दिखेगा तो कॉल करेंगे। कुछ सेकंड बाद उन्होंने बताया कि रनवे दिखाई दे रहा है। विमान को 08.43 बजे पर रनवे 11 पर उतरने की अनुमति दी गई, हालांकि, उन्होंने लैंडिंग क्लीयरेंस का रीडबैक नहीं दिया। सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ भयावह मंजर रिपोर्ट की मानें तो सुबह 8.43 मिनट पर प्लेन साइलेंट हो गया था, यानी कि उसने सिग्नल भेजना बंद कर दिया था। इस दौरान विमान की गति लगभग 237 किलोमीटर प्रति घंटे की थी। प्लेन भी जमीन से लगभग एक किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ रहा था। इसके बाद सुबह 8.46 बजे एयरपोर्ट से कुछ दूरी पर ही विमान क्रैश हो गया। घटनास्थल के पास लगे एक सीसीटीवी में हादसे के बाद धुएं का गुबार उठता हुआ दिखाई दे रहा है। बता दें कि कंपनी के पास इस फ्लीट में सात लियरजेट 45 एयरक्राफ्ट (एक दुर्घटनाग्रस्त), पांच Embraer 135BJ एयरक्राफ्ट, चार King Air B200 एयरक्राफ्ट और एक Pilatus PC-12 एयरक्राफ्ट शामिल हैं। पिछला रेगुलेटरी ऑडिट डीजीसीए द्वारा फरवरी 2025 के महीने में किया गया था और कोई लेवल-I फाइंडिंग जारी नहीं की गई थी।  

राष्ट्रीय मंच पर जबलपुर की उपलब्धि: EMRS PGT को मिला तृतीय पुरस्कार

भोपाल. नई दिल्ली में 28 जनवरी, 2026 को मॉडल यूथ ग्राम सभा (एमवाईजीएस) पुरस्कार समारोह आयोजित हुआ। इसमें देश के विजेता स्कूलों और छात्रों को सम्मानित किया गया। समारोह में केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल और केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार शामिल हुए। विद्यालय की प्राचार्य  अविनाश रानी, शिक्षकगण एवं विद्यार्थियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। विद्यालय परिवार ने इस सफलता को टीम वर्क, अनुशासन और नेतृत्व विकास का परिणाम बताया। समारोह में 28,000 से अधिक छात्रों ने सहभागिता की। सहभागिता करने वालो छात्रों ने ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की कार्यवाही में भाग लिया था। मॉडल यूथ ग्राम सभा पहल का उद्देश्य युवा नेतृत्व और सहभागी शासन व्यवस्था को सशक्त बनाना है। पंचायती राज मंत्रालय, जनजातीय मंत्रालय एवं शिक्षा मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित मॉडल यूथ ग्राम सभा कार्यक्रम में जिले के विद्यालय ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक विद्यालय में मॉडल यूथ ग्राम सभा का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में स्थानीय स्वशासन की समझ विकसित करना एवं नेतृत्व क्षमता को प्रोत्साहित करना था। विद्यालय के शिक्षक अभिषेक त्रिपाठी एवं राज रौशन (टीजीटी सामाजिक विज्ञान) ने विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। उनके मार्गदर्शन में विद्यालय के विद्यार्थियों ने मॉडल यूथ ग्राम सभा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिसके परिणामस्वरूप विद्यालय को जबलपुर जोन स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। इसके पश्चात राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भी विद्यालय ने प्रथम स्थान हासिल किया तथा राष्ट्रीय स्तर पर तृतीय स्थान प्राप्त कर क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया।  

शताब्दी समारोह में पीएम मोदी का संदेश: आर्य वैद्यशाला ने आयुर्वेद को दिया नया जीवन

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को केरल स्थित आर्य वैद्यशाला चैरिटेबल अस्पताल के शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद को सहेजने, संरक्षित करने और आगे बढ़ाने में आर्य वैद्यशाला का महत्वपूर्ण योगदान है। आर्य वैद्यशाला के संस्थापक वैद्यरत्नम पी एस वरियर को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आयुर्वेद के प्रति उनका दृष्टिकोण और लोक कल्याण के लिए उनका समर्पण आज भी हमें प्रेरित करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "केरला की आर्य वैद्यशाला, भारत की उस उपचार परंपरा का जीवंत प्रतीक है, जिसने सदियों से मानवता की सेवा की है। भारत में आयुर्वेद किसी एक काल या एक क्षेत्र में सीमित नहीं रहा। हर दौर में इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति ने जीवन को समझने, संतुलन बनाने और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने का रास्ता दिखाया है। आज आर्य वैद्यशाला 600 से अधिक आयुर्वेदिक औषधियों का निर्माण करती है, देश के अलग-अलग क्षेत्रों में संस्था के अस्पताल आयुर्वेदिक तरीके से मरीजों का इलाज कर रहे हैं, जिनमें दुनिया के 60 से अधिक देशों के मरीज शामिल होते हैं।" उन्होंने कहा कि आर्य वैद्यशाला ने ये भरोसा अपने काम से बनाया है। जब लोग कष्ट में होते हैं, तो आप सभी उनके लिए बहुत बड़ी उम्मीद बनते हैं। पीएम मोदी ने कहा, "आर्य वैद्यशाला के लिए सेवा सिर्फ एक विचार नहीं है। ये भावना उनके कार्य, दृष्टिकोण और संस्था में भी दिखाई देती है। संस्था का चैरिटेबल हॉस्पिटल पिछले 100 वर्षों से निरंतर लोगों की सेवा में जुटा है। इसमें अस्पताल से जुड़े सभी लोगों का योगदान है।" इस कार्य के लिए पीएम मोदी ने अस्पताल के वैद्य, डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और अन्य सभी लोगों का अभिनंदन किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने सरकार की पहलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश में लंबे समय तक प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को साइलो में देखा जाता रहा। पिछले 10-11 सालों में इस अप्रोच में बड़ा बदलाव हुआ है। अब स्वास्थ्य सेवाओं को होलिस्टिक नजरिए से देखा जा रहा है। आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथिक, सिद्ध और योग, इन सबको हम एक छाता के नीचे लाए हैं, और इसके लिए विशेष तौर पर आयुष मंत्रालय बनाया गया है। नेशनल आयुष मिशन के तहत 12 हजार से अधिक आयुष वेलनेस सेंटर्स खोले गए। पीएम मोदी ने कहा कि सरकार की नीतियों का स्पष्ट प्रभाव आयुष सेक्टर पर दिखाई दिया है। आयुष विनिर्माण क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ा है और इसका विस्तार हुआ है। भारतीय पारंपरिक वेलनेस को दुनिया तक पहुंचाने के लिए सरकार ने आयुष निर्यात संवर्धन परिषद की स्थापना की है। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि आयुष प्रोडक्ट और सेना को वैश्विक बाजारों में बढ़ावा मिल सके। साल 2014 में भारत से लगभग 3 हजार करोड़ रुपए के आयुष और हर्बल प्रॉडक्ट्स एक्सपोर्ट होते थे। वहीं अब भारत से 6500 करोड़ रुपए के आयुष और हर्बल प्रॉडक्ट्स एक्सपोर्ट होने लगे हैं। इसका बहुत बड़ा फायदा देश के किसानों को भी हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आयुर्वेद के माध्यम से भारत में सदियों से इलाज का काम होता रहा है, लेकिन ये भी दुर्भाग्य रहा है कि हमें देश में और ज्यादातर विदेशों में लोगों को आयुर्वेद का महत्व समझाना पड़ता है। इसकी एक बड़ी वजह एविडेंस बेस्ड रिसर्च और रिसर्च पेपरों की कमी है। जब साइंस के सिद्धांतों पर आयुर्वेदिक पद्धति को परखा जाता है, तो लोगों का भरोसा और मजबूत होता है। उन्होंने आह्वान किया कि हमें बदलते समय के अनुसार, आयुर्वेद में आधुनिक टेक्नॉलजी और एआई का उपयोग भी बढ़ाना चाहिए। बीमारी की संभावनाओं का पता लगाने और अलग-अलग पद्धितियों से इलाज के लिए काफी कुछ इनोवेटिव किया जा सकता है।

प्रदेश का नाम रोशन: पाँच जिलों से 23 मैत्री कार्यकर्ता हुए शामिल

भोपाल. नई दिल्ली में आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मध्यप्रदेश पशुपालन एवं डेयरी विभाग में कार्यरत ‘मैत्री’ कार्यकर्ताओं को धर्म-पत्नियों के साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में भारत सरकार द्वारा आमंत्रित किया गया था। इस अवसर पर विदिशा, देवास, रतलाम, नीमच, मंदसौर एवं बैतूल जिलों के कुल 23 मैत्री कार्यकर्ता विभागीय नोडल अधिकारियों के नेतृत्व में कार्यक्रम में शामिल होकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। कार्यक्रम के प्रथम दिवस भारत सरकार द्वारा केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी मंत्री   राजीव रंजन सिंह के साथ मैत्री कार्यकर्ताओं का संवाद सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान विदिशा जिले के   शैलेंद्र भार्गव एवं देवास जिले के   लोकेंद्र सिंह ठाकुर से मंत्री   सिंह ने प्रत्यक्ष संवाद किया। संवाद में मैत्री कार्यकर्ताओं द्वारा जमीनी स्तर पर किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी ली गई तथा योजना को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सुझाव भी आमंत्रित किए गए। सभी मैत्री कार्यकर्ता धर्म-पत्नियों के साथ कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में उपस्थित रहे और इस ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण क्षण के साक्षी बने। मैत्री कार्यकर्ताओं ने यह अवसर प्रदान करने के लिए भारत सरकार एवं मध्यप्रदेश पशुपालन एवं डेयरी विभाग का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर विभाग की ओर से नोडल अधिकारी के रूप में डॉ. श्रद्धा परिहार, डॉ. प्रीति मकवाना, डॉ. संदीप कुमरे तथा   रविंद्र सिंह गौर भी मैत्री कार्यकर्ताओं के साथ कार्यक्रम में उपस्थित रहे।  

900 किलोमीटर की पदयात्रा कर हेमंत सूर्यवंशी पहुंचे बृजभूषण शरण सिंह से मिलने, MLA ने किया स्वागत

मुंबई महाराष्ट्र के हेमंत सूर्यवंशी ने प्रेम, श्रद्धा और समर्पण की एक अनोखी मिसाल पेश की है। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के प्रति अपने स्नेह और सम्मान के चलते हेमंत सूर्यवंशी उज्जैन (मध्य प्रदेश) से उत्तर प्रदेश के विश्नोहरपुर तक करीब 900 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर पहुंचे। बृजभूषण के बड़े बेटे विधायक प्रतीक भूषण सिह ने हेमंत का जोरदार स्वागत किया। उनकी यह यात्रा क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।   हेमंत सूर्यवंशी मूल रूप से महाराष्ट्र के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने 8 जनवरी को पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के जन्मदिन के अवसर पर उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन किए और उनके दीर्घायु व स्वस्थ जीवन की कामना की। इसके बाद उन्होंने पैदल ही गोंडा के विश्नोहरपुर की ओर अपनी यात्रा शुरू की। यात्रा के दौरान हेमंत सूर्यवंशी लगातार पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की तस्वीर अपने साथ रखे रहे। उन्होंने बताया कि इसी तस्वीर के कारण उन्हें रास्ते भर लोगों का भरपूर सहयोग, सम्मान और आतिथ्य मिलता रहा। कई स्थानों पर लोगों ने उनके ठहरने, भोजन और आराम की व्यवस्था की, जिससे उनकी लंबी और कठिन यात्रा अपेक्षाकृत सहज हो सकी। करीब एक हजार किलोमीटर की यह पदयात्रा पूरी कर जब हेमंत सूर्यवंशी विश्नोहरपुर पहुंचे, तो उनका जोरदार स्वागत किया गया। बृजभूषण के बड़े बेटे विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने हेमंत सूर्यवंशी का स्वागत करते हुए उनके समर्पण और भावनात्मक लगाव की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के समय में इस तरह का समर्पण और श्रद्धा दुर्लभ है। हेमंत सूर्यवंशी की इस यात्रा को लोग प्रेम, विश्वास और आस्था का प्रतीक मान रहे हैं। उनकी पदयात्रा यह संदेश देती है कि सच्चा सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव किसी भी दूरी को छोटा बना सकता है। क्षेत्र में उनकी इस अनोखी पहल की हर ओर सराहना हो रही है।  

‘एक खराब दिन काफी है’ — राहुल द्रविड़ ने टीम इंडिया को दी बड़ी सीख, वर्ल्ड कप से पहले अलर्ट

नई दिल्ली टी20 विश्व कप 2026 की शुरुआत 7 फरवरी से भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में हो रही है। भारतीय टीम डिफेंडिंग चैंपियन के रूप में टूर्नामेंट में उतरेगी। टीम इंडिया ने टी20 विश्व कप 2024 का खिताब फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को हराकर जीता था। पिछले 2 साल में भारतीय टीम काफी बदल चुकी है। हेड कोच रहे राहुल द्रविड़ और कप्तान रहे रोहित शर्मा, विराट कोहली, और रवींद्र जडेजा जैसे खिलाड़ी इस टीम का हिस्सा नहीं हैं। गौतम गंभीर की कोचिंग और सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारतीय टीम अपने खिताब की रक्षा करने विश्व कप में उतरेगी। पूर्व कोच राहुल द्रविड़ ने विश्व कप से पहले भारतीय टीम के लिए खास संदेश दिया है। एक निजी कार्यक्रम में राहुल द्रविड़ ने कहा कि विश्व कप में हम फेवरेट के तौर पर उतरेंगे और सेमीफाइनल तक जरूर पहुंचेंगे, लेकिन मेरा अपना अनुभव ये कहता है कि मैच में कौन सी टीम बेहतर खेलती है इसपर काफी कुछ निर्भर करेगा। कोई अच्छी पारी खेलकर आपको परेशान कर सकता है। टीम इंडिया कितनी भी मजबूत क्यों न हो, एक खराब दिन सबकुछ बिगाड़ सकता है। एक खराब दिन आपकी पूरी मेहनत पर पानी फेर सकता है। राहुल द्रविड़ के इस बयान का अर्थ भारतीय टीम का हर सदस्य और हर भारतीय क्रिकेट फैन अच्छी तरह समझता है। वनडे विश्व कप 2003 में पूरे टूर्नामेंट में अच्छा खेलने के बाद टीम इंडिया फाइनल में ऑस्ट्रेलिया से हार गई थी। राहुल द्रविड़ ने उस विश्व कप में विकेटकीपर बल्लेबाज की भूमिका निभाई थी। ठीक 20 साल बाद 2023 में भी ऐसा ही हुआ था। रोहित शर्मा की कप्तानी वाली टीम इंडिया पूरे विश्व कप में अजेय रही। माना जा रहा था कि भारतीय टीम ही चैंपियन बनेगी, लेकिन फाइनल में ऑस्ट्रेलिया से एक बार फिर हमें हार का सामना करना पड़ा। राहुल द्रविड़ इस टीम के हेड कोच थे। राहुल ने इन्हीं अनुभवों के आधार पर कहा है कि एक खराब दिन हमारी सारी उम्मीदों और सपनों को तोड़ सकता है। इसलिए हमें हमेशा सावधान रहना होगा। भारतीय टीम टी20 फॉर्मेट में प्रचंड फॉर्म में चल रही है। भारत और श्रीलंका में विश्व कप का आयोजन और मौजूदा फॉर्म को देखते हुए टीम इंडिया को फेवरेट माना जा रहा है। अगर भारतीय टीम टी20 विश्व कप जीतने में कामयाब रहती है, तो लगातार दो टी20 विश्व कप जीतने वाली पहली टीम बनेगी, साथ ही कुल 3 विश्व कप खिताब के साथ सर्वाधिक टी20 विश्व कप जीतने वाली टीम बन जाएगी। भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका में 2007 में खेला गया टी20 विश्व कप का पहला संस्करण जीता था।  

खेलों के जरिए अनुशासन और सीख का विकास: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल. उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि खिलाड़ी को खेल में जीतने के साथ सीखना भी चाहिए। हार-जीत से परे रहकर अपनी टीम के लिये अपना सर्वोत्तम देना ही खिलाड़ी का दायित्व है। उप मुख्यमंत्री   शुक्ल ने स्पोर्टस कॉम्पलेक्स रीवा में खेलो एमपी यूथ गेम्स में फुटबॉल प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि खेल भावना से खेलना चाहिए। हार-जीत से कोई फर्क नहीं पड़ता। जीतने पर घमण्ड न हो तथा हारने पर निराशा न हो। समभाव से अपना योगदान देकर सीखने की ललक के साथ प्रतियोगिता में भाग लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी को अच्छे मैदान व खेल के आयोजन आवश्यक हैं। रीवा में खेल के मैदानों की कमी नहीं है और खेल प्रतियोगिताएँ भी आयोजित हो रही हैं जिनके माध्यम से खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर यह आयोजन हो रहा है। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएँ दी। उप मुख्यमंत्री   शुक्ल ने कहा कि स्पोर्टस कॉम्पलेक्स में अप्रैल माह तक साढ़े दस करोड़ रूपये लागत के सिंथेटिक ट्रैक का निर्माण हो जायेगा। उप मुख्यमंत्री   शुक्ल ने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया। रीवा के स्पोर्टस कॉम्पलेक्स, टीआरएस मैदान और सैनिक स्कूल ग्राउण्ड में प्रदेश के संभाग के खिलाड़ी फुटबॉल मैच खेल रहे हैं। रीवा से भी 400 से अधिक खिलाड़ी विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने राज्य स्तर पर गये हैं। इस अवसर पर विधायक मनगवां इंजी. नरेन्द्र प्रजापति, पुलिस अधीक्षक   शैलेन्द्र सिंह चौहान, संभागीय खेल अधिकारी   एम.के. धोलपुरी सहित खेल प्रेमी तथा संभागों के खिलाड़ी व कोच उपस्थित रहे।  

कौन बनेगा वारिस, क्या टूटेगी या जुड़ेगी NCP? अजित पवार के निधन के बाद सियासी घमासान

नई दिल्ली महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के मुखिया अजित पवार की आज (बुधवार, 28 जनवरी) सुबह एक विमान दुर्घटना में दु:खद मौत हो गई। उनके साथ विमान में कुल पांच लोग सवार थे और सभी की उस हादसे में मौत हो गई। 66 वर्षीय अजित पवार जमीन से जुड़े एक नेता थे, जिनका दुखद अंत उनके गृह नगर बारामती में ही हुआ। उनके असामयिक निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में कई सवाल कौंधने लगे हैं। मीडिया से लेकर सियासी गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा यही है कि उनका राजनीतिक वारिस कौन होगा? राजनीतिक विरासत का वारिस कौन? राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के संस्थापक शरद पवार की छत्रछाया से बाहर निकलकर जुलाई 2023 में अजित पवार ने अपने चाचा खिलाफ बगावत कर दी थी और पार्टी के नाम और चिह्न के साथ-साथ पार्टी के अधिकतर विधायकों को अपने पाले में कर लिया था। अब उनके आकस्मिक निधन के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि उनकरी इस राजनीतिक विरासत का वारिस कौन होगा? क्या राज्यसभा सांसद और उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार अजित दादा की असली राजनीतिक वारिस होंगी या फिर उनके बेटे पार्थ पवार के कंधों पर ये जिम्मेदारी आएगी क्योंकि वह राजनीति में सक्रिय रहे हैं। पार्थ 2019 का लोकसभा चुनाव मावल संसदीय सीट से लड़ चुके हैं लेकिन उन्हें तब हार का सामना करना पड़ा था। उनके दूसरे बेटे जय पवार फैमिली बिजनेस संभालते हैं। इसके अलावा चर्चा ये भी है कि क्या उनकी राजनीतिक विरासत का वारिस परिवार से बाहर का भी हो सकता है? अगला डिप्टी सीएम कौन होगा? अजित पवार महाराष्ट्र की महायुति सरकार में उप मुख्यमंत्री थे। उनके निधन से राज्य की राजनीति में एक शून्य पैदा हो गया है। ऐसे में उनके निधन के बाद ये भी चर्चा जोर मारने लगी है कि अब राज्य का अगला उप मुख्यमंत्री कौन होगा? क्या उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार इस जिम्मेदारी को संभालेंगी या उनके बेटे पार्थ को ये जिम्मेदारी मिलेगी। चर्चा ये भी है कि चूंकि पार्थ पवार का राजनीतिक अनुभव कम है, इसलिए पार्टी में दूसरे लाइन के नेता इस पद की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। NCP का अगला चीफ कौन? अजित दादा की आकस्मिक मौत ने एक नहीं अनेक सवाल खड़े कर दिए हैं। उनमें एक सवाल ये भी है कि उनके जाने के बाद NCP की कमान अब कौन संभालेगा? क्या पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल को ये जिम्मेदारी मिल सकती है या परिवार से ही कोई सदस्य पार्टी की अगुवाई करेगा? क्या महायुति से अलग होगी NCP? चर्चा ये भी है कि क्या अजित दादा गुट वाली NCP अब महायुति से अलग हो जाएगी क्योंकि ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि पिछले कुछ दिनों से महायुति में अजित पवार मुखर थे और भाजपा से कुछ मुद्दों पर उकी तल्खी चल रही थी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पार्टी भाजपा की अगुवाई वाले गठबंधन से अलग हो जाएगी या जिनसे तल्खी थी, वो तो रहे नहीं तो पार्टी पहले की ही तरह महायुति में बनी रहेगी क्योंकि सत्ता से हटने के बाद पार्टी में बिखराव का खतरा बढ़ सकता है। क्या दोनों NCP का विलय होगा और कौन लेगा ये फैसला? एक चर्चा ये भी है कि अजित दादा की मौत के बाद NCP के दोनों धड़े एक हो सकते हैं, जिसकी चर्चा पिछले कुछ समय से हो रही है। हालिया पुणे और पिपंरी-चिंचीवाड़ महा नगरपालिका चुनावों में दोनों धड़ों ने एक होकर चुनाव लड़ा था और इसकी संभावनाओं को बल भी दिया था लेकिन इन सबके बावजूद सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि NCP में इन मुद्दों पर फैसला लेगा कौन? अजित पवार की मौत ने पार्टी और परिवार को बड़े असमंजस में डाल दिया है। बता दें कि पिछले साल के लोकसभा चुनाव में अजित पवार की पार्टी को सिर्फ एक सीट मिली थी। आम चुनाव में मिली करारी हार को लेकर आलोचकों के निशाने पर आए अजित पवार ने हालांकि पांच महीने बाद विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन में 41 सीट जीतकर सबको गलत साबित कर दिया था। वहीं शरद पवार की अगुवाई वाली NCP को सिर्फ 10 सीट मिलीं थी। वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से अजित पवार ने राज्य की राजनीति में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली थी लेकिन उनके निधन ने राज्य से लेकर केंद्र तक की राजनीति में कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं।  

Holi 2026: कब है होलिका दहन और धुलेंडी? शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व की पूरी जानकारी

हिंदू धर्म में होली का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत, प्रेम और आपसी भाईचारे का प्रतीक माना जाता है. यह त्योहार दो दिन मनाया जाता है. पहले दिन होलिका दहन किया जाता है और दूसरे दिन धुलेंडी, जिसे रंगों वाली होली भी कहा जाता है. हर साल की तरह इस साल भी होली की तारीख को लेकर लोगों के मन में कंफ्यूजन रहता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि 2026 में होलिका दहन और रंगों वाली होली कब मनाई जाएगी, साथ ही जानेंगे इसका शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व. होलिका दहन और धुलेंडी की तारीख साल 2026 में पूर्णिमा तिथि और प्रदोष काल के संयोग के कारण होली की तिथियां इस प्रकार होंगी.     होलिका दहन: 3 मार्च 2026 (मंगलवार)     धुलेंडी (रंगों वाली होली): 4 मार्च 2026 (बुधवार) शुभ मुहूर्त और समय ज्योतिषीय गणना के अनुसार,     पूर्णिमा तिथि शुरू: 2 मार्च 2026, शाम 05:55 बजे से.     पूर्णिमा तिथि का समापन 3 मार्च 2026, शाम 05:07 बजे तक. शास्त्र सम्मत नियम है कि होलिका दहन हमेशा प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में किया जाता है. चूंकि 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि का प्रभाव रहेगा, इसलिए होलिका दहन 3 मार्च को ही मनाया जाएगा. इसके अगले सूर्योदय पर यानी 4 मार्च को रंगों वाली होली खेली जाएगी. होलिका दहन की पूजा विधि     तैयारी: दहन वाली जगह पर सूखी लकड़ी, घास और गोबर के उपले इकट्ठा करें.     पूजा सामग्री: रोली, अक्षत, फूल, कच्चा सूत, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे और एक कलश जल साथ रखें.     विधि: होलिका के चारों ओर सात बार कच्चा सूत लपेटें और जल अर्पित करें. भगवान नरसिंह और भक्त प्रहलाद का ध्यान करते हुए फल, फूल और मिठाइयां चढ़ाएं.     अग्नि प्रज्वलन: शुभ मुहूर्त में होलिका में अग्नि लगाएं और नई फसल (जैसे गेहूं की बालियां) को उसकी लौ में सेकें. होली का महत्व होली केवल रंगों का खेल नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे धार्मिक और सामाजिक कारण छिपे हैं. यह पर्व भगवान विष्णु के अनन्य भक्त प्रहलाद की रक्षा और अहंकारी हिरण्यकश्यप की बहन होलिका के अंत की याद दिलाता है. यह दिन ऊंच-नीच और पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाने का है. होली का त्योहार वसंत ऋतु के आगमन और सर्दियों की विदाई का भी संदेश देता है.

साइंटिफिक रिपोर्ट ने खोला राज! सबरीमाला में चोरी नहीं बदले पैनल, रासायनिक तरीके से गायब हुआ सोना

तिरुवनंतपुरम सबरीमाला सोना चोरी मामले में नई वैज्ञानिक जांच ने कई अहम सवालों पर विराम लगा दिया है। इसरो के वैज्ञानिक परीक्षणों में पुष्टि हुई है कि गर्भगृह (संनिधानम) के दरवाजे के पैनल बदले नहीं गए थे, बल्कि तांबे की चादरों पर चढ़ी सोने की परत को रासायनिक प्रक्रिया के जरिए उतारा गया था। ये निष्कर्ष विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपे गए हैं और बुधवार को केरल हाईकोर्ट के समक्ष भी रखे गए। इससे गर्भगृह के ढांचे को पूरी तरह बदलने या अंतरराष्ट्रीय गिरोहों को सौंपे जाने जैसी अटकलों को खारिज कर दिया गया है। इसरो के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के वैज्ञानिकों ने विस्तृत सामग्री विश्लेषण के बाद अदालत को बताया कि सबरीमाला में लगे दरवाजों के पैनल मूल तांबे की चादरें ही हैं। जांच में यह भी साफ हुआ कि चोरी किया गया हिस्सा ठोस सोना नहीं था, बल्कि तांबे के ऊपर चढ़ी सोने की परत थी, जिसे पहले ठोस सोने के पैनल समझा जा रहा था। वैज्ञानिकों के अनुसार, गर्भगृह के दरवाजे का लकड़ी का ढांचा, जिसे स्थानीय भाषा में ‘कट्टिल’ कहा जाता है, वह भी पूरी तरह मूल पाया गया है। हालांकि, जिन चादरों को हटाकर बाद में दोबारा लगाया गया था, उनके नमूनों में सोने की मात्रा में स्पष्ट कमी पाई गई है। इससे यह साबित होता है कि तांबे को नुकसान पहुंचाए बिना सोने को अलग किया गया। पैनलों पर दिखाई देने वाले बदलावों को लेकर उठी शंकाओं पर वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि ये परिवर्तन रासायनिक प्रतिक्रियाओं के कारण हुए हैं, न कि पैनल बदलने की वजह से। सोना निकालने में इस्तेमाल होने वाला पारा (मरकरी) और अन्य रासायनिक घोल चादरों की सतह की रासायनिक संरचना को प्रभावित करते हैं, जिससे रंग और बनावट में फर्क नजर आता है। वैज्ञानिकों ने यह भी कहा कि इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि मूल चादरों को हटाकर नई चादरें लगाई गई हों। एसआईटी ने हाईकोर्ट को बताया है कि जांच अभी जारी है और पुराने गर्भगृह दरवाजे से लिए गए नमूनों का तुलनात्मक विश्लेषण किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इन सभी परीक्षणों को शामिल करते हुए अंतिम संयुक्त रिपोर्ट जल्द ही सौंप दी जाएगी। माना जा रहा है कि यह वैज्ञानिक गवाही जांच की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी और अब जांच का फोकस सोना निकालने की प्रक्रिया और इसके पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान पर केंद्रित होगा।