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पंचायत चुनाव में ‘दो संतान’ और ‘शैक्षिक अनिवार्यता’ होगी लागू?

जयपुर. राजस्थान में होने वाले नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर उम्मीदवारों के बीच पात्रता नियमों को लेकर काफी असमंजस बना हुआ था। खास तौर से चर्चा थी कि राज्य सरकार दो से अधिक संतान वाले उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की अनुमति दे सकती है और शैक्षणिक योग्यता को भी अनिवार्य बना सकती है। हालांकि, राज्य सरकार ने अब आधिकारिक तौर पर साफ कर दिया है कि निकट भविष्य में पात्रता नियमों में किसी बड़े बदलाव की कोई योजना नहीं है। सरकार के पास फिलहाल नियमों में संशोधन का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है, जिसका मतलब साफ़ है कि अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे लोग भी पूर्व की भांति चुनाव लड़ सकेंगे। रतनगढ़ विधायक पूसाराम गोदारा के सवाल का लिखित जवाब देते हुए स्वायत्त शासन विभाग (DLB) ने स्पष्ट किया कि राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 21 के तहत पार्षदों या निकाय चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए किसी भी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता का प्रावधान नहीं है। दो संतान नीति : 'प्रक्रिया में है, पर लागू नहीं' दो संतान नीति को हटाने पर विचार-विमर्श लंबे समय से चल रहा है। यह मामला अभी प्रक्रिया (Under Process) में है। कैबिनेट ने अभी तक इस संबंध में कोई बिल पास नहीं किया है और न ही कोई नया नियम लागू हुआ है। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से चर्चा थी कि सरकार 27 नवंबर 1995 के बाद तीसरी संतान होने पर चुनाव लड़ने की पाबंदी को हटा सकती है।  पक्ष और विपक्ष में छिड़ी नई बहस सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। विरोध में स्वर: पूर्व पार्षद दशरथ सिंह शेखावत ने सरकार के इस रुख की आलोचना की है। उनका कहना है कि 21वीं सदी में सरकार को पीछे की ओर नहीं मुड़ना चाहिए। कम संतान वाले जनप्रतिनिधि समाज के लिए उदाहरण होते हैं। साथ ही, उन्होंने निकायों के संचालन के लिए शैक्षणिक योग्यता न होने को भी गलत बताया। समर्थन में तर्क: पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल ने इस रुख का स्वागत करते हुए कहा कि शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य न होने से अधिक लोगों को लोकतंत्र में भागीदारी मिलेगी। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ दो से अधिक बच्चे होना सामान्य बात थी, वहाँ नियमों में ढील मिलने से कई योग्य उम्मीदवार चुनाव लड़ पाएंगे। भविष्य की संभावनाएं और कानूनी पेच हालांकि सरकार ने अभी संशोधनों को लागू करने से इनकार किया है, लेकिन स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा के पूर्व के बयानों से संकेत मिलते हैं कि धारा 24 में संशोधन का प्रस्ताव विधि विभाग के पास भेजा गया है। यदि भविष्य में इसे कैबिनेट की मंजूरी मिलती है, तो इसे विधानसभा में विधेयक के रूप में लाया जा सकता है। लेकिन वर्तमान स्थिति यही है कि आगामी चुनावों में पुराने नियम ही प्रभावी रहेंगे। उम्मीदवारों के लिए क्या है संदेश? निकाय चुनावों की तैयारी कर रहे दावेदारों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है। फिलहाल वे लोग जिनके दो से अधिक बच्चे हैं, उन्हें राहत के लिए अभी और इंतजार करना होगा। वहीं, वे उम्मीदवार जो इस उम्मीद में थे कि शैक्षणिक योग्यता लागू होने से उनके प्रतिद्वंद्वी बाहर हो जाएंगे, उन्हें भी अब चुनावी मैदान में सीधी टक्कर के लिए तैयार रहना होगा। पिछले कुछ समय से 2 बच्चों की नीति को हटाने पर चर्चा चल रही है। फिलहाल यह अपेक्षित है और प्रक्रियाधीन है-रवि जैन, सचिव, डीएलबी

उज्जैन में 500 हैक्टेयर क्षेत्र में वन्य जीव केन्द्र सह रेस्क्यू सेंटर के निर्माण की तैयारी तेज

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है‍ कि मध्यप्रदेश में पर्यटन विशेषकर वन्य पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार पुरजोर कोशिश कर रही है। प्रदेश में उज्जैन और जबलपुर में वन्य जीव केन्द्र सह रेस्क्यू सेंटर निर्मित किए जा रहे हैं। दोनों ही शहरों में इन सेंटर्स के निर्माण के लिए कंसल्टेंट भी नियुक्त कर दिए गए हैं। बहुत जल्द प्रदेश में 2 नए वन्य जीव केन्द्र बनेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में उज्जैन में वन्य जीव केन्द्र सह रेस्क्यू सेंटर के निर्माण के संबंध में नियुक्त कन्सल्टेंट फर्म के पदाधिकारियों के साथ बैठक को संबोधित कर रहे थे।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में वन्य जीव केन्द्र के लिए निुयक्त कंसल्टेंट फर्म से कहा कि वे उज्जैन में वनतारा की तर्ज पर इस तरह का जंगल चिड़ियाघर सफारी (वाईल्ड लाईफ सेंटर कम इंडियन जू कम रेस्क्यू सेंटर) तैयार करें, जो यहां आने वाले विजिटर्स को पूरी दुनिया के अलग-अलग जंगलों का एक ही जगह पर फुल एक्सपीरियंस दे। उन्होंने कहा कि इस वाईल्ड लाईफ सेंटर को करीब 500 हैक्टेयर क्षेत्र में तैयार किया जाए। उज्जैन में 50 हैक्टेयर रकबे में पहले से तैयार ईको टूरिज्म पार्क भी इसी वन्य जीव केन्द्र में शामिल कर लिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कंसल्टेंट से कहा कि यह एक अनोखा वन्य जीव केन्द्र होना चाहिए, जिसमें वन और वन्य प्राणियों की विविधता दूसरे वन्य जीव केन्द्रों से भिन्न हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2026 में इस वन्य जीव केन्द्र के फेज-1 का निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाए और जितनी जल्दी हो सके, वन्य जीव केन्द्र तैयार हो जाए, जिससे उज्जैन को एक बेहतरीन फॉरेस्ट टूरिज्म स्पॉट (सफारी एक्सपीरियंस के साथ) के रूप में ख्याति मिल सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन के वन्य जीव केन्द्र में देशी और विदेशी सभी प्रजाति के वन्य प्राणी हों। यह केन्द्र इस तरह तैयार किया जाए कि इसमें दिन और रात दोनों वक्त विजिटर्स इसका आनंद ले सकें। बैठक में उज्जैन में इस केन्द्र की स्थापना के लिए सैद्धांतिक सहमति व्यक्त कर निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं और सेंटर के डिजाइन पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन्य जीव केन्द्र को टूरिज्म डिपार्टमेंट के साथ मिलकर एक भव्य केन्द्र के रूप में तैयार किया जाए। बैठक में वन्य जीव केन्द्र निर्माण के लिए नियुक्त की गई कंसल्टेंट फर्म के पदाधिकारियों ने पॉवर पाईंट प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने बताया कि करीब 500 हैक्टेयर रकबे में विजिटर्स को देश-दुनिया के 11 जंगलों का अनुभव कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में सेंटर फॉरमेशन का पहला चरण प्रारंभ करेंगे। वर्ष 2027 के अंत तक पहला चरण पूरा हो जाएगा। उन्होंने बताया कि वन्य जीव केन्द्र का निर्माण कुल 6 चरणों में किया जाएगा। वन्य जीव केन्द्र में दिखाई नहीं देने वाली बाड़ का खुला जंगल होगा, जिसमें विजिटर्स पैदल, बग्घी, सफारी और सेवा वाहन का उपयोग कर सेंटर का विजिट कर सकेंगे। उन्होंने बताया‍ कि इस केन्द्र में 300 से अधिक देशी-विदेशी प्रजाति के जंगली जानवर होंगे। देशी और विदेशी जानवरों का अनुपात क्रमश: 75 एवं 25 प्रतिशत होगा। केन्द्र में एक रेस्क्यू सेंटर भी बनाया जाएगा। उन्होंने बताया‍ कि विश्व में पहली बार विजिटर्स को असली जंगल चिड़ियाघर सफारी का अनुभव उज्जैन के वन्य जीव केन्द्र में कराया जाएगा। बैठक में अपर मुख्य सचिव वन  अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय)  नीरज मंडलोई, पीसीसीएफ वाईल्ड लाईफ  शुभरंजन सेन, सीसीएफ  कृष्णमूर्ति सहित गुजरात के वनतारा जू से आए अधिकारी और कंसल्टेंट फर्म के पदाधिकारी भी उपस्थित थे। 

बिजली कंपनी के वॉट्सएप चैटबॉट से बिल डाउनलोड और बिल भुगतान की सुविधा

भोपाल.  उपभोक्ता सुविधा का लाभ उठाएं मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बताया कि वॉट्सएप चैटबॉट से बिल डाउनलोड एवं बिल भुगतान सहित अनेक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके लिए उपभोक्ता को कहीं भी जाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि वे अपने मोबाइल के माध्यम से बिजली बिल डाउनलोड एवं भुगतान सहित अन्य 10 सेवाओं का फायदा उठा सकते हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बताया कि चैटबॉट नंबर 0755 2551222 पर ‘Hi‘ (हाय) लिखते हैं तो तुरंत आपके सामने क्रमशः 10 अलग-अलग सुविधाओं की सूची आ जाएगी। यदि आपको अपने घर का बिजली बिल भरना है तो इसमें 2 नंबर पर ‘फॉर बिल’ का ऑप्शन दिखता है। मैसेज बॉक्स में जैसे ही आप 2 लिखते ही आपको 1 नंबर ‘फॉर व्यू एंड पे एलटी बिल’ का ऑप्शन सहित तीन अन्य ऑप्शन भी दिखेंगें। जब आप अपने बिल के लिए 1 नंबर लिखेंगे तो दो ऑप्शन आएंगे। इसमें 1 नंबर पर ‘टू यूज मोबाइल नंबर’ और 2 नंबर पर ‘फॉर इंटर कस्टूमर आईडी। इसमें आप अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के लिए जैसे ही ‘टू यूज मोबाइल नंबर’ के लिए 1 नंबर लिखेंगे तो आपके कनेक्शन नंबर दिखेंगे। इसमें जिस नंबर का बिल आपको चाहिए वह नंबर जैसे ही लिखेंगे तो तुरंत आपके मोबाइल पर बिल की राशि सहित पीडीएफ आ जाएगी। इसी में ‘व्यू एंड पे’ तथा ‘पे नाऊ’ का ऑप्शन दिखेगा। यदि आप पहले बिल देखना चाहते हैं तो ‘व्यू एंड पे’ को टच करेंगे। यदि आपको राशि देखकर उसे जमा करना है तो ‘पे नाऊ’ को टच करना होगा। जैसे ही आप ‘पे नाऊ’ को टच करेंगे तो आपसे भुगतान के विकल्प पूछे जाएंगे। इसमें आपको पे ऑन वाट्सएप, गूगल पे, फोन पे, पेटीएम सहित अन्य यूपीआई एप्स के ऑप्शन दिखेंगे। यहां पर जिस विकल्प से आपको पेमेंट करना है, उसे चयन कर ‘कांटीन्यू’ कर देंगे तो आपके वैलेट से पैमेंट की प्रक्रिया पूरी होगी और तत्पश्चात मोबाइल पर ही रसीद प्राप्त हो जाएगी। इस रसीद को आपके मोबाइल में सेव करने का ऑप्शन भी रहेगा। इसके अलावा आप चाहें तो उसका स्क्रीनशॉट भी ले सकते हैं। इस तरह से उपभोक्ता घर बैठे अपने मोबाइल से बिजली कंपनी की सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। वॉट्सएप व चैटबॉट पर जिन 10 सुविधाओं का ऑप्शन उपलब्ध है उसमें फॉर कंप्लेंट, फॉर बिल (एलटी/एचटी), फॉर व्यू अदर एप्लीकेशंस, फॉर लिंक युअर मोबाइल टू कनेक्शन नंबर, फॉर सैल्फ रीडिंग, टू एप्लाई फॉर न्यू सर्विस कनेक्शन/नेट मीटरिंग, टू एप्लाई फॉर चैंज इन एक्जिस्टिंग कनेक्शन, टू एप्लाई फॉर फिजिकल बिल, फॉर सोलर रूफटॉप (नेट मीटरिंग) और एड ऑर रिमूव मोबाइल नंबर शामिल हैं। 

होली पर कोटा और भोपाल सहित अन्य शहरों से बिहार के लिए चलेंगी 285 स्पेशल ट्रेनें

पटना. होली के मौके पर दूसरे राज्यों से बिहार आने वाले लोगों के लिए खुशखबरी है. होली को लेकर अलग-अलग शहरों के लिए स्पेशल ट्रेनें चलेंगी. रेलवे बोर्ड के दिशा-निर्देश पर एक से 22 मार्च तक टोटल 1410 होली स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया गया है. इनमें पूर्व मध्य रेलवे की तरफ से 285 होली स्पेशल ट्रेनें चलाई जायेंगी. पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्र ने इसकी जानकारी दी. ये रही कुछ ट्रेनें – (गाड़ी नंबर- 09821/09822) सोगरिया-दानापुर-सोगरिया स्पेशल: 28 फरवरी और 7 मार्च को सोगरिया (कोटा) से 23:10 बजे खुल कर अगले दिन 23:45 बजे दानापुर पहुंचेगी. वापसी में 2 और 9 मार्च सोमवार को दानापुर से 1:15 बजे खुल कर अगले दिन 01:10 बजे सोगरिया पहुंचेगी. (गाड़ी नंबर- 01667/01668) रानी कमलापति-दानापुर-रानी कमलापति स्पेशल: 27 फरवरी और 2 मार्च को रानी कमलापति से 14:25 बजे खुल कर अगले दिन 08:45 बजे दानापुर पहुंचेगी. वापसी में 28 फरवरी और 3 मार्च को दानापुर से 11:15 बजे खुल कर अगले दिन 08:55 बजे रानी कमलापति पहुंचेगी. (गाड़ी नंबर- 01665/01666) रानी कमलापति-अगरतला-रानी कमलापति स्पेशल: 5 मार्च से हर गुरुवार को रानी कमलापति से 15:20 बजे खुल कर दूसरे दिन 10:10 बजे पाटलिपुत्र रुकते हुए तीसरे दिन 18:55 बजे अगरतला पहुंचेगी. वापसी में 8 मार्च से हर रविवार को अगरतला से 17:20 बजे खुल कर दूसरे दिन 22:25 बजे पाटलिपुत्र रुकते हुए तीसरे दिन 16:35 बजे रानी कमलापति पहुंचेगी. (गाड़ी नंबर-09525/09526) हापा-नाहरलगुन-हापा स्पेशल: 4 मार्च से हर बुधवार को हापा से रात 12:40 बजे खुल कर दूसरे दिन 17:00 बजे हाजीपुर रुकते हुए तीसरे दिन 16:00 बजे नाहरलगुन पहुंचेगी. वापसी में 7 मार्च से हर शनिवार को नाहरलगुन से 9:40 बजे खुल कर दूसरे दिन 7:15 बजे हाजीपुर रुकते हुए चौथे दिन 00:30 बजे हापा पहुंचेगी. स्पेशल बसों के लिए ऑनलाइन बुकिंग शुरू बिहार राज्य पथ परिवहन निगम करीब 200 इंटर स्टेट बस 23 फरवरी से 23 मार्च तक संचालित करेगी. इन बसों के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग गुरुवार से शुरू हो गई है. अब होली और ईद में घर लौटने वाले बिहारियों को राहत मिलेगी. पैसेंजर निगम की आधिकारिक वेबसाइट https://bsrtc. bihar.gov.in/ पर जाकर आसानी से टिकट बुक कर सकते हैं और अपनी पसंद की सीट भी चुन सकते हैं.

दिल्ली में 37 साल बाद फिर से शुरू होंगी डबल डेकर बसें, जानें यात्रा के रूट और किराया

  नई दिल्ली राजधानी दिल्ली की सड़कों पर एक बार फिर इतिहास अंगड़ाई लेने जा रहा है. करीब तीन दशक पहले दिल्ली की पहचान रही दो-मंजिला यानी डबल डेकर बसें एक बार फिर अपनी रफ्तार भरने के लिए तैयार हैं. 1989 के बाद ओझल हुई ये बसें अब बिल्कुल नए रंग-रूप और आधुनिक सुविधाओं के साथ वापसी कर रही हैं. दिल्ली सरकार ने पर्यटन को नई ऊंचाई देने के लिए इस प्रतिष्ठित बस सेवा को फिर से जीवित करने का फैसला किया है.  37 साल बाद पुरानी यादों के साथ नई शुरुआत दिल्ली के परिवहन इतिहास में डबल डेकर बसों का एक सुनहरा दौर रहा है. 1989 से पहले ये बसें दिल्ली परिवहन निगम (DTC) के बेड़े का अहम हिस्सा हुआ करती थीं, लेकिन तकनीकी कारणों और पुराने बेड़े की वजह से इनका संचालन बंद कर दिया गया था. अब लगभग 37 साल बाद, ये प्रतिष्ठित बसें एक बार फिर दिल्ली की शान बढ़ाने आ रही हैं. इस नई शुरुआत के साथ पुरानी यादें तो ताजा होंगी ही, साथ ही दिल्ली दर्शन का अनुभव भी और रोमांचक हो जाएगा. फरवरी से शुरू होगी खास पर्यटन बस सेवा सैलानियों के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई यह बस सेवा फरवरी के तीसरे हफ्ते यानी करीब 20 फरवरी से सड़कों पर उतरने के लिए तैयार है. यह बस सेवा न केवल पुराने ऐतिहासिक स्मारकों को कवर करेगी, बल्कि भारत मंडपम, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और प्रधानमंत्री संग्रहालय जैसे नए टूरिस्ट स्पॉट्स को भी जोड़ेगी. इतना ही नहीं, जो लोग दिन की भीड़भाड़ से बचना चाहते हैं, उनके लिए शाम के समय भी स्पेशल टूर चलाने की योजना है ताकि लोग ढलती शाम में दिल्ली की खूबसूरती निहार सकें. इन बसों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये पूरी तरह से इलेक्ट्रिक हैं. इससे न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि यात्रियों को शोर-शराबे से मुक्त एक आरामदायक सफर भी मिलेगा. यही नहीं, बस के भीतर एक गाइड भी मौजूद रहेगा जो यात्रियों को लाल किला, कुतुब मीनार और जामा मस्जिद जैसी जगहों के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी देगा. बस में एक साथ 63 यात्री बैठकर सफर का आनंद ले सकेंगे. बच्चों के लिए किराए में विशेष छूट सफर के किराये को बेहद संतुलित रखा गया है ताकि हर कोई इस शाही सवारी का लुत्फ उठा सके. बड़ों के लिए इसका टिकट 500 रुपये तय किया गया है, इसके अलावा 6 से 12 साल तक के बच्चों के लिए 300 रुपये का किराया निर्धारित है. डबल डेकर बसों को प्रमुख पर्यटन स्थलों की आकर्षक तस्वीरों से सजाया गया है, जो इन्हें देखने में और भी भव्य बनाता है. यह सेवा उन पर्यटकों के लिए वरदान साबित होगी जो कम समय में दिल्ली के प्रमुख केंद्रों को सुविधा के साथ घूमना चाहते हैं.  

इतिहास रचा टीम इंडिया ने: छठी बार अंडर-19 विश्वकप पर कब्जा, फाइनल में पहुंचने का रिकॉर्ड कायम

हरारे . भारतीय अंडर-19 टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ फाइनल में शानदार प्रदर्शन किया और छठी बार विश्व कप का खिताब जीत लिया। भारत पूरे टूर्नामेंट के दौरान अजेय रहा और ग्रुप चरण से लेकर फाइनल मुकाबले तक कोई टीम आयुष म्हात्रे की अगुआई वाली टीम को हरा नहीं सकी। भारत के लिए वैभव सूर्यवंशी, आयुष म्हात्रे और अभिज्ञान कुंडू ने पूरे टूर्नामेंट के दौरान शानदार प्रदर्शन किया। इंग्लैंड को 100 रन से रौंदा भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ फाइनल में 100 रनों से हराया। भारत ने इंग्लैंड के सामने 412 रन का लक्ष्य रखा था। जवाब में इंग्लिश टीम 40.2 ओवर में 311 रन रन पर सिमट गई। टीम इंडिया के लिए वैभव सूर्यवंशी फाइनल के सुपरस्टार रहे। उन्होंने 80 गेंद में 175 रन की ताबड़तोड़ पारी खेली। वहीं, इंग्लैंड की ओर से कैलब फाल्कनर ने शतक जड़ा, लेकिन टीम को नहीं जिता पाए। फाल्कनर ने 67 गेंद पर 115 रन की पारी खेली।  टूर्नामेंट में अजेय रही भारतीय टीम भारतीय टीम पूरे टूर्नामेंट के दौरान अजेय रही। भारत ने पहले मैच में अमेरिका को छह विकेट से हराया। इसके बाद बांग्लादेश को 18 रन से मात देकर सुपर सिक्स चरण में प्रवेश किया। ग्रुप चरण के आखिरी मैच में भारत ने न्यूजीलैंड को डीएलएस प्रणाली से सात विकेट से हराया। ग्रुप चरण में दमदार प्रदर्शन के बाद भारत ने सुपर सिक्स चरण में जिम्बाब्वे को 204 रनों के बड़े अंतर से हराया। फिर चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 58 रन से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया और पाकिस्तान को बाहर का रास्ता दिखाया। भारत ने सेमीफाइनल में अफगानिस्तान को सात विकेट से हराकर फाइनल में जगह बनाई। अब इंग्लैंड को हराकर खिताब अपने नाम किया। सर्वाधिक बार खिताबी मुकाबले खेलने का है रिकॉर्ड  इसमें कोई शक नहीं है कि भारत का अंडर-19 विश्व कप में हमेशा ही दबदबा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि भारत अंडर-19 विश्व कप के 16 सत्र में से 10 बार खिताबी मुकाबले में पहुंच चुका है जो सर्वाधिक है। भारत ने लगातार छठी बार खिताबी मुकाबले में प्रवेश किया था। टीम ने 2016, 2018, 2020, 2022, 2024 और 2026 में खिताबी मुकाबले में प्रवेश किया। यह आंकड़ा ये बताने के लिए अपने आप में काफी है कि भारतीय टीम का अंडर-19 में कोई सानी नहीं है। यहां तक कि ऑस्ट्रेलिया टीम भी भारत से काफी पीछे है। ऑस्ट्रेलिया ने छह बार अंडर-19 टीम के फाइनल में जगह बनाई है और चार बार खिताब जीता है। अंडर-19 विश्व कप का किया था सबसे बड़ा रन चेज भारत के नाम अंडर-19 विश्व कप में सबसे बड़ा रन चेज का रिकॉर्ड भी है। टीम ने यह उपलब्धि अफगानिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल मैच में हासिल की थी। अफगानिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में चार विकेट पर 310 रन बनाए। जवाब में भारत के लिए आरोन जॉर्ज ने शतक लगाया, जबकि वैभव सूर्यवंशी और कप्तान आयुष म्हात्रे ने अर्धशतक लगाए जिससे टीम ने 41.1 ओवर में तीन विकेट पर 311 रन बनाकर मैच अपने नाम किया था। भारत ने इस तरह अंडर-19 विश्व कप का सबसे बड़ा रन चेज बनाया था। इससे पहले ये रिकॉर्ड न्यूजीलैंड के नाम था जिन्होंने 2006 में आयरलैंड के खिलाफ 305 रनों का लक्ष्य हासिल किया था। भारत ने इस तरह 20 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा था।    

कांग्रेस का बड़ा कदम: बंगाल में ममता के खिलाफ अकेले चुनाव लड़ेगी पार्टी, एजेंडा क्या होगा?

कलकत्ता  पश्चिम बंगाल में विधानसभा के चुनाव अप्रैल-मई में होने वाले हैं. लेकिन, अभी से ही संकेत मिलने लगे हैं कि बंगाल की लड़ाई भी लगभग दिल्ली और बिहार जैसी ही हो सकती है – बंगाल में भी कांग्रेस करीब करीब उसी भूमिका में नजर आ सकती है, जैसा कांग्रेस का रवैया दिल्ली और बिहार में देखा जा चुका है. पश्चिम बंगाल में चल रहे SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ अपनी मुहिम को धार देने के लिए ममता बनर्जी दिल्ली में हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिल चुकी हैं, और सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की बेंच के सामने अपने केस की पैरवी भी कर चुकी हैं. साथ ही, ममता बनर्जी चाहती हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कांग्रेस संसद में महाभियोग का प्रस्ताव लाए, और तृणमूल कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल उसको सपोर्ट करें – लेकिन, सपोर्ट के बदले में वो कुछ भी शेयर नहीं करना चाहती हैं.  मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो पहले से ही तृणमूल कांग्रेस के पश्चिम बंगाल चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान कर रखा है. अब तो कांग्रेस ने भी पश्चिम बंगाल की सभी 294 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है – ऐसी सूरत में बंगाल के चुनाव नतीजे दिल्ली और बिहार से कितने अलग होंगे, देखना महत्वपूर्ण होगा. पश्चिम बंगाल की संभावित चुनावी जंग ये तो अब पूरी तरह साफ हो गया है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को चुनावी लड़ाई सिर्फ बीजेपी के खिलाफ नहीं लड़ना है. 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी बहुत ज्यादा सीटें तो नहीं जीत पाई थी, लेकिन मुख्य विपक्षी दल तो बन ही गई. कांग्रेस का तो खाता भी नहीं खुल पाया था.  मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग के मुद्दे पर विपक्ष का साथ चाह रहीं ममता बनर्जी से दिल्ली में जब कांग्रेस के बारे पूछा गया तो उनका जवाब था कि उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी. कांग्रेस के साथ किसी भी तरह के चुनावी गठबंधन की संभावना को नकारते हुए ममता बनर्जी पहले भी कह चुकी हैं, तृणमूल कांग्रेस की रणनीति साफ है, जबकि बाकी पार्टियां टीएमसी के खिलाफ लड़ने की रणनीति बनाती हैं. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर अब कांग्रेस का रुख भी सामने आ गया है. कांग्रेस का कहना है, प्रदेश संगठन और कार्यकर्ताओं की लंबे समय से मांग रही है कि पार्टी राज्य में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान के साथ चुनावी मैदान में उतरे. पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने आलाकमान के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा है कि केंद्रीय नेतृत्व ने बंगाल कांग्रेस की भावनाओं का सम्मान किया और अकेले चुनाव लड़ने के फैसले को मंजूरी दी. बंगाल कांग्रेस की तरफ से एक बयान में कहा गया है, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल प्रभारी गुलाम अहमद मीर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी, सांसद ईशा खान चौधरी सहित सूबे के सीनियर नेताओं की मौजूदगी में व्यापक विमर्श हुआ – और तय हुआ कि पार्टी 2026 का विधानसभा चुनाव अकेले दम पर लड़ेगी. बीजेपी के खिलाफ ममता बनर्जी की लड़ाई में कांग्रेस की ही तरह एक और मोर्चा खड़ा हो रहा है. सीपीएम की पश्चिम बंगाल इकाई के सचिव मोहम्मद सलीम ने हाल ही में टीएमसी से सस्पेंड विधायक हुमायूं कबीर से मुलाकात की थी. मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनवाने की घोषणा करके चर्चा में आए हुमायूं कबीर ने जनता उन्नयन पार्टी बनाई है, और ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल करने का दावा कर रहे हैं.  बंगाल चुनाव में कांग्रेस की भूमिका 2025 के शुरू में दिल्ली विधानसभा चुनाव और आखिर में बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही. पश्चिम बंगाल के 2021 के चुनाव में तो राहुल गांधी की भूमिका रस्मअदायगी जैसी थी. राहुल गांधी एक दिन के लिए पश्चिम बंगाल में कैंपेन करने गए थे, और कोविड के कारण आगे के कार्यक्रम रद्द कर दिए गए थे.  2025 के पश्चिम बंगाल चुनाव में कांग्रेस की भूमिका का अंदाजा कैसे लगाया जाए? क्या राहुल गांधी दिल्ली और बिहार की तरह बंगाल में भी कांग्रेस को चुनाव लड़ाने वाले हैं या 2021 की ही तरह रस्मअदायगी निभाने की तैयारी है?  दिल्ली में हुई कांग्रेस की मीटिंग में ममता बनर्जी के सबसे बड़े विरोधी अधीर रंजन चौधरी भी शामिल थे, जो 2024 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद से हाशिये पर भेजे जा चुके हैं. और, ये भी ममता बनर्जी के फेवर में ही जाता है. 2024 के चुनाव से पहले ही ममता बनर्जी ने घोषणा कर डाली थी कि वो अकेले चुनाव लड़ेंगी. पहले तो सुनने में आया था कि वो कांग्रेस को दो सीटें गठबंधन के तहत देने के तैयार भी थीं, लेकिन बाद में मना कर दिया. और, भारत जोड़ो न्याय यात्रा के साथ राहुल गांधी के पश्चिम बंगाल में प्रवेश की पूर्व संध्या पर ही 'एकला चलो रे' घोषणा कर दी थी. फिर कांग्रेस नेतृत्व की तरफ से ममता बनर्जी के प्रति बयानों में सम्मान के भाव ही प्रकट किए जा रहे थे.  दिल्ली और बिहार चुनावों में राहुल गांधी के तेवर को देखें तो अंदाज बिल्कुल अलग था. दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल के खिलाफ राहुल गांधी उतने ही आक्रामक नजर आते थे, जितना बीजेपी के नेता. शीशमहल से लेकर दिल्ली शराब घोटाले तक, राहुल गांधी ने एक एक मामला गिनाकर अरविंद केजरीवाल को कठघरे में खड़ा कर दिया था.  ये भी था कि अरविंद केजरीवाल का भी कांग्रेस के प्रति ममता बनर्जी जैसा ही रवैया था. ममता बनर्जी ने तो विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक में रहते हुए भी अरविंद केजरीवाल का समर्थन किया था. मतलब, कांग्रेस के खिलाफ. जैसे समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव ने चुनाव कैंपेन भी किया था.  बिहार चुनाव राहुल गांधी दिल्ली की तरह तो नहीं लड़ रहे थे, लेकिन कोई कमी भी नहीं छोड़ी थी. आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के साथ वोटर अधिकार यात्रा करते हुए उनको मुख्यमंत्री पद का चेहरा नहीं बताया. तेजस्वी यादव के बड़े भाई और प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बता देने के बाद भी. बाद में जो हुआ, न होता तो भी नतीजे शायद ही अलग होते.  तृणमूल कांग्रेस के लिए बंगाल … Read more

नीमच की कंचन बाई: 20 बच्चों को बचाने के लिए झेले मधुमक्खियों के डंक, सरकार करेगी बच्चों की पढ़ाई का खर्च

 नीमच मध्य प्रदेश सरकार ने  नीमच जिले में मधुमक्खियों के हमले में 20 बच्चों को बचाते हुए जान गंवाने वाली 45 साल की महिला के परिवार को 4 लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है.  मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, "नीमच जिले के रानपुर गांव में मधुमक्खियों के डंक से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कंचन बाई मेघवाल की असमय मौत बहुत दुखद और दिल दहला देने वाली है. राज्य सरकार दुख की इस घड़ी में उनके परिवार के साथ है. मानवीय आधार पर, मैंने उनके परिवार को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का निर्देश दिया है. राज्य सरकार उनके बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी उठाएगी." महिला के बेटे रवि मेघवाल ने एक न्यूज एजेंसी को बताया कि कंचन बाई एक सेल्फ-हेल्प ग्रुप की अध्यक्ष थीं, जो जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर रानपुर गांव में एक ही बिल्डिंग में स्थित आंगनवाड़ी और प्राइमरी स्कूल के बच्चों को खाना खिलाती थीं. घटना की जानकारी देते हुए मेघवाल ने कहा, "2 फरवरी को मधुमक्खियों के झुंड ने कुछ बच्चों पर हमला कर दिया, जब वे बिल्डिंग के बाहर हैंडपंप पर पानी पी रहे थे. बच्चे बिल्डिंग के अंदर भाग गए, लेकिन मधुमक्खियों का हमला जारी रहा. मेरी मां अंदर भागीं और एक टीचर की मदद से बच्चों को बचाया." मेघवाल ने आगे बताया कि हमले के समय बिल्डिंग के अंदर करीब 20 बच्चे थे. उन्होंने कहा, "उन्हें बचाते समय मेरी मां को कई मधुमक्खियों ने काट लिया, जिसके बाद वह बेहोश हो गईं और उनके मुंह से झाग निकलने लगा. उन्हें पास के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया." मुख्यमंत्री की ओर से दिए जा रहे 4 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा के बारे में बात करते हुए मेघवाल ने कहा कि वह चाहते हैं कि उनकी मां को उनकी बहादुरी के लिए पूरा सम्मान और श्रेय मिले. एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि मधुमक्खियों के हमले से जुड़े हालात की जांच की जा रही है और जांच के बाद उचित कदम उठाए जाएंगे.

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप और विधायक किरण सिंह देव ने किया लोकार्पण

रायपुर. उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा, वन मंत्री  केदार कश्यप और विधायक  किरण सिंह देव ने किया लोकार्पण शहर की आपाधापी, धूल और शोर-शराबे से दूर, बस्तरवासियों को प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताने के लिए शुक्रवार को एक भव्य और अनमोल ठिकाना मिल गया। बस्तर की समृद्ध जनजातीय विरासत, परंपरा और नैसर्गिक सौंदर्य को एक सूत्र में पिरोने के उद्देश्य से कुम्हड़ाकोट में निर्मित 'जनजातीय गौरव वाटिका' का लोकार्पण छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा, वन मंत्री  केदार कश्यप और विधायक  किरण सिंह देव ने किया। लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई यह वाटिका अब जनता के लिए समर्पित कर दी गई है, जो न केवल पर्यटन का नया केंद्र बनकर उभरी है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक अनूठी मिसाल पेश कर रही है। शुक्रवार शाम आयोजित समारोह में उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप, विधायक  किरण देव के साथ जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप और छत्तीसगढ़ बेवरेजेस कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष  निवास मद्दी, सीसीएफ  आलोक तिवारी, स्टायलो मंडावी, संचालक कांगेर वैली सहित अन्य प्रमुख स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। लोकार्पण के पश्चात उपमुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों ने वाटिका का अवलोकन किया। वन मंडलाधिकारी  उत्तम कुमार गुप्ता ने निरीक्षण के दौरान अतिथियों को अवगत कराया कि करीब 25 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैले इस प्रोजेक्ट को शुरुआत में एक हेल्थ पार्क के रूप में परिकल्पित किया गया था, जिसे बाद में एक भव्य वाटिका का रूप दिया गया। उपमुख्यमंत्री ने यहाँ स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नागरिकों के लिए बनाए गए 1700 मीटर लंबे वॉकिंग ट्रेल, योगा शेड, योगा ज़ोन और ओपन जिम जैसी आधुनिक सुविधाओं की सराहना की। उन्होंने वॉकिंग ट्रेल के बीच-बीच में बनाए गए 'गपशप ज़ोन' और पारिवारिक आयोजनों के लिए निर्मित पाँच सुंदर पगोड़ा को भी देखा, जो अब पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं। वाटिका भ्रमण के दौरान उपमुख्यमंत्री ने यहाँ की 'इको-फ्रेंडली' नीति और 'प्लास्टिक फ्री ज़ोन' के नियम को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। वाटिका के बीच में निर्मित तालाब और आइलैंड ने सभी का मन मोह लिया। आगंतुकों की सुविधाओं के लिए प्रवेश द्वार पर भव्य पार्किंग और प्रसाधन की व्यवस्था भी सुचारू रूप से शुरू हो गई है। वन विभाग द्वारा भविष्य में यहाँ ट्री-हाउस बनाने और एडवेंचर स्पोर्ट्स शुरू करने की योजना की जानकारी भी दी गई। उपमुख्यमंत्री  शर्मा द्वारा किए गए इस लोकार्पण के साथ ही अब 'जनजातीय गौरव वाटिका' बस्तर के पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख स्थल के रूप में अंकित हो गई है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा तथा वन मंत्री  केदार कश्यप द्वारा विभिन्न स्व-सहायता समूहों और हितग्राहियों को कुल 1 करोड़ 22 लाख रुपये से अधिक की राशि के चेक वितरित किए। इस पहल के माध्यम से शासन ने वनांचल में स्वरोजगार को बढ़ावा देने और वन आश्रित परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने 'वृत्त स्तरीय चक्रीय निधि' के तहत महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 1 करोड़ 20 लाख 13 हजार रुपये का ऋण वितरित किया। इसमें सबसे बड़ी राशि बकावण्ड के 'मां धारणी करणी स्व-सहायता समूह' को प्रदान की गई, जिन्हें काजू प्रसंस्करण और विपणन जैसे बड़े कार्यों के लिए 50 लाख रुपये का चेक सौंपा गया। इसी कड़ी में, आसना के 'गोधन स्व-सहायता समूह' को गाय पालन के लिए 34 लाख रुपये की राशि दी गई। इसके अतिरिक्त,  शर्मा ने घोटिया और भानपुरी के समूहों को इमली संग्रहण व प्रसंस्करण के लिए क्रमशः 13.13 लाख और 13 लाख रुपये तथा कोलेंग की समिति को दोना-पत्तल निर्माण हेतु 10 लाख रुपये की राशि वितरित कर स्थानीय उद्यमों को प्रोत्साहित किया।   कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए दुख की घड़ी में पीड़ित परिवार को संबल भी प्रदान किया। उन्होंने 'राजमोहनी देवी तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा बीमा योजना' के तहत कुरंदी निवासी कमलोचन नाग को 2 लाख रुपये की बीमा राशि का चेक सौंपा। यह सहायता राशि उनकी पत्नी स्वर्गीय भारती नाग के आकस्मिक निधन के पश्चात स्वीकृत की गई थी। उप मुख्यमंत्री द्वारा किया गया यह वितरण न केवल लाभार्थियों के लिए आर्थिक मदद है, बल्कि बस्तर के सुदूर वनांचलों में रोजगार और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस कदम भी है। इस दौरान उपस्थित महिला समूहों के सदस्यों से इमली, काजू के प्रोसेसिंग की गतिविधियों का संज्ञान लेकर बाजार की उपलब्धता एवं मार्केटिंग की व्यवस्था के संबंध चर्चा किए ।

रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में “शोध शिखर 2026” का भव्य शुभारंभ

भोपाल।  नवाचार, अनुसंधान और समाजोन्मुख विकास पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय संवाद रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “शोध शिखर 2026” का शुभारंभ अत्यंत गरिमामय वातावरण में हुआ। यह सम्मेलन नवाचार, हरित प्रौद्योगिकी, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) और समाजोन्मुख अनुसंधान की दिशा में वैश्विक दृष्टिकोण प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा। कार्यक्रम में देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों और शोधार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही। बतौर मुख्य अतिथि डॉ. अपर्णा एन., ग्रुप डायरेक्टर, एनआरएससी, इसरो, हैदराबाद ने रिमोट सेंसिंग की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक शोध में भू-स्थानिक तकनीक अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। कृषि, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और संसाधन प्रबंधन में रिमोट सेंसिंग का योगदान समाज के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहा है। उन्होंने शोधार्थियों और पेपर प्रेजेंटर्स को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शोध का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं का समाधान होना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए  संतोष चौबे, कुलाधिपति, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आईसेक्ट समूह की प्रेरणादायी यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस संस्था की शुरुआत एक पुस्तक “कंप्यूटर एक परिचय” से हुई थी, जिसकी अब तक लगभग दो मिलियन प्रतियां प्रकाशित और वितरित हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक आंदोलन था। हाल ही में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर प्रकाशित पुस्तक भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है, जो भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं को रेखांकित करती है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार आज जिन पहलों—डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया—को आगे बढ़ा रही है, उन दिशाओं में आईसेक्ट समूह लंबे समय से कार्य कर रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालयों की भूमिका को नवाचार और सामाजिक परिवर्तन का प्रमुख माध्यम बताते हुए शोध को व्यवहारिक और समाजोपयोगी बनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट वक्ताओं में  माइकल श्क्लोव्स्की, वेंचर फाउंडर, बेयर क्रॉप साइंस ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे पिछले तीन वर्षों से भारत में रह रहे हैं और यहां की संस्कृति, अनुशासन और कार्यशैली से अत्यंत प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि वे किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और किसानों के बीच तकनीकी हस्तांतरण पर कार्य कर रहे हैं। उनका मानना है कि जब तक शोध और तकनीक का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंचेगा, तब तक उसका वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं होगा। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि हमें व्यवहारिक और प्रैक्टिकल सोच विकसित करनी होगी, तभी हम लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला सकेंगे। डॉ. विनोद शिवरैन, सिन्जेंटा इंडिया ने कहा कि कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी का उद्देश्य किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। उन्होंने ‘विजन 2047’ का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर नवाचारों को अपनाना होगा। केवल कृषि ही नहीं, बल्कि सभी क्षेत्रों में विश्व की चुनौतियों का समाधान खोजने की दिशा में कार्य करना होगा। विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देना भी उतना ही आवश्यक है। डॉ रजत संधीर, प्रोफेसर पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़, ने अपने संबोधन में कहा कि रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय किसानों, सरकार और उद्योग के साथ मिलकर कार्य कर रहा है, जो अनुसंधान को जमीन से जोड़ने का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भारत में स्टार्टअप संस्कृति तेजी से विकसित हो रही है और लाखों युवाओं ने नवाचार के माध्यम से नए आयाम स्थापित किए हैं। विचारों को वास्तविकता में बदलने की क्षमता ही आज के भारत की सबसे बड़ी ताकत है। कार्यक्रम के प्रारंभ में रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो रवि प्रकाश दुबे ने स्वागत वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि “शोध शिखर” जैसे कार्यक्रमों से ऐसे विचार सामने आते हैं जो समाज और राष्ट्र के विकास में उपयोगी सिद्ध होते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि यहां 10 संकायों में विविध पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं तथा 18 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से शोध और नवाचार को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। डॉ अरुण जोशी, कुलगुरु, डॉ सी वी रामन यूनिवर्सिटी खण्डवा ने कहा कि यदि कोई अच्छा और नवाचारी शोधकर्ता बनना चाहता है, तो उसे ‘रिफ्लेक्शन’ शब्द को समझना और अपनाना होगा। जब तक आत्म-मंथन और चिंतन नहीं होगा, तब तक सच्चा शोध संभव नहीं है। उन्होंने शोध आधारित प्रशिक्षण और इनसाइटफुल एनालिसिस पर बल देते हुए कहा कि यही प्रक्रिया हमें क्रिटिकल थिंकिंग की ओर ले जाती है। डॉ. विजय सिंह, कुलगुरु, स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी ने कहा कि आज कौशल आधारित शिक्षा और शोध की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि उद्योगों के साथ मिलकर विश्वविद्यालय स्किल और रिसर्च दोनों क्षेत्रों में कार्य कर रहा है। रक्षा, कृषि और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले शोध पत्र प्रस्तुत होने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर विशेष कार्य हो रहा है, जो भविष्य की शिक्षा और उद्योग दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। कार्यक्रम की प्रस्तावना और भूमिका रखते हुए सम्मेलन की संयोजक डॉ. रचना चतुर्वेदी ने “शोध शिखर” की अवधारणा, उद्देश्य और इसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह मंच केवल शोध प्रस्तुत करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह नवाचारों को समाज के वास्तविक मुद्दों से जोड़ने का प्रयास है, जिससे अकादमिक ज्ञान और सामाजिक आवश्यकताओं के बीच सेतु स्थापित किया जा सके। उद्घाटन समारोह के पश्चात पैनल डिस्कशन में डॉ. अपर्णा एन. ने सेटेलाइटों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इसरो 32 मंत्रालयों के साथ काम कर रहा है, उन्होंने आगे कहा कि एनआरएससी और आरएनटीयू विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ रिमोट सेंसिंग, डाटा एनालिसिस, जियो स्पेशियल जैसे विषयों पर ट्रेनिंग दे सकता है। वहीं डॉ मनीष मोहन गोरे, सीनियर साइंटिस्ट एंड एडिटर विज्ञान प्रगति एनआईएसपीआर नई दिल्ली ने एनआईएसपीआर की यात्रा को बताते हुए कहा कि एनआईएसपीआर और आरएनटीयू साथ मिलकर विज्ञान संचार के लिए काम कर सकते हैं जिसमें संयुक्त पब्लिकेशन और भारतीय भाषाओं के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर सकते हैं। डॉ रजत संधीर, प्रोफेसर पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ ने विद्यार्थियों को माइंडसेट चेंज करने की बात कही। उन्होंने बताया कि आरएनटीयू कृषि में एआई के उपयोग पर साथ में कार्य कर सकता है। डॉ. विनोद शिवरैन, सिन्जेंटा इंडिया और  माइकल श्क्लोव्स्की, वेंचर … Read more